नौकरी बचाने के चक्कर में मैडम के साथ पहली बार चुदाई

मेरा नाम अहमद है। मैं लाहौर से सटे एक छोटे शहर में एक FMCG कंपनी में सेल्स एक्जीक्यूटिव था। कंपनी का नाम ‘फ्रेशलाइफ प्रोडक्ट्स’ था – डिटर्जेंट, शैंपू, साबुन जैसी चीजें सप्लाई करती थी। हमारा काम था छोटे-छोटे दुकानदारों को डीलर बनाना। हर नए डीलर से 1000 रुपये सिक्योरिटी ली जाती थी – रिफंडेबल, लेकिन कंपनी के अकाउंट में जमा करवानी पड़ती थी। रसीद मैं खुद बनाता था, और पैसे कैश में लेता था। ज्यादातर दुकानदार 500-1000 के नोट देते थे। कभी-कभी 2000 का नोट भी आ जाता, लेकिन ज्यादातर छोटे नोट।

मैं तीन साल से वहाँ था। सैलरी 25,000 रुपये। घर में माँ-बाप, छोटा भाई। पापा रिटायर्ड टीचर थे, माँ घर संभालती थीं। जिंदगी चल रही थी, लेकिन हमेशा पैसों की किल्लत। एक दिन शाम को, करीब 6 बजे, मैंने एक पुराने दुकानदार चाचा गुलाम हुसैन से डील फाइनल की। उन्होंने 1000 रुपये का नया नोट दिया। मैंने रसीद काटी, उन्हें स्टॉक का ऑर्डर दिया। घर लौटते वक्त मन में सोचा – कल सुबह बैंक जाकर जमा करवा दूँगा।

लेकिन उसी रात 11 बजे माँ की तबीयत बिगड़ गई। सीने में तेज दर्द, साँस फूल रही थी। पापा घबरा गए। मैंने तुरंत नजदीकी क्लिनिक पर फोन किया। डॉक्टर ने कहा – एंजाइना का अटैक हो सकता है, इंजेक्शन लगाना पड़ेगा। दवाई की दुकान पर गया। कुल 950 रुपये लगे – इंजेक्शन, टैबलेट्स, कुछ और। मेरे पास सिर्फ 400-500 रुपये थे। बाकी वही 1000 का नोट निकाला और खर्च कर दिया। मन में आया – कल किसी से उधार लेकर जमा करवा लूँगा। लेकिन अगले दिन सुबह माँ की हालत ठीक हुई, लेकिन मैं ऑफिस जाने के चक्कर में भूल गया।

तीन दिन बीत गए। ऑफिस में सब नॉर्मल था। लेकिन चौथे दिन दोपहर करीब 3 बजे पीओन अब्दुल्लाह आया। उसका चेहरा पीला पड़ गया था।
“अहमद भाई, मैडम आपको बुला रही हैं। अभी। केबिन में। बहुत गुस्से में लग रही हैं।”

रुबिना मैडम। ब्रांच हेड। उम्र 39, लेकिन दिखती 30-32 की। लंबी, गोरी, फिगर परफेक्ट। हमेशा सूट या साड़ी में, मेकअप क्रिस्प, बात में अथॉरिटी। ऑफिस में सब उन्हें ‘मैडम’ कहते थे। सलीम साहब उनके पति थे – कंपनी के डायरेक्टर, ज्यादातर लाहौर ऑफिस में रहते थे। रुबिना मैडम यहाँ की बॉस थीं।

मैं केबिन में घुसा। वो खिड़की के पास खड़ी थीं। बाहर हल्की बारिश हो रही थी। शीशे पर बूँदें सरक रही थीं। उनकी सफेद सिल्क ब्लाउज थोड़ी भीगी लग रही थी – शायद कार से उतरते वक्त बारिश लगी हो। वो मुड़ीं नहीं। बस बोलीं –
“रशीद को पता चल गया है। वो कह रहा है तुमने 1000 रुपये लिए, लेकिन जमा नहीं करवाए। वो तुम्हें आज ही निकालना चाहता है। मैंने रोका है। कहा है सलीम साहब कल शाम लाहौर से आ रहे हैं, तब फैसला होगा।”

मेरा दिल धड़क गया। पैर काँपने लगे। रशीद अकाउंट्स वाला था – सख्त, झगड़ालू। वो मुझे पहले से पसंद नहीं करता था।
मैं कुछ बोल नहीं पाया। बस सिर झुकाए खड़ा रहा।
फिर वो पलटीं। उनकी आँखें गहरी, लेकिन उसमें गुस्सा नहीं – एक अजीब सी चमक। जैसे कोई प्लान हो।
“आज शाम 8 बजे हमारे डिफेंस वाले बंगले पर आ जाना। एड्रेस मैसेज कर दूँगी। अकेले। कोई बहाना मत बनाना।”

मैंने बस ‘जी मैडम’ कहा और बाहर निकल आया। पूरा दिन टेंशन में रहा। घर जाकर माँ से बात की, लेकिन कुछ बताया नहीं। रात 7:30 बजे मैडम का मैसेज आया – “डिफेंस फेज 5, प्लॉट 112। गेट पर नाम बोल देना।”

शाम 8 बजे मैं वहाँ पहुँचा। बारिश थम चुकी थी। हवा में ठंडक और मिट्टी की खुशबू। गेट ऑटोमैटिक खुला। लॉन में सोलर लाइट्स जल रही थीं। मुख्य दरवाजा खुला था। रुबिना मैडम खड़ी थीं।

टाइट मिडनाइट ब्लू जीन्स, जो उनकी पतली कमर और गोल कूल्हों को बिल्कुल हाईलाइट कर रही थीं। ऊपर ऑफ-शोल्डर ब्लैक क्रॉप टॉप, गहरा V-नेक, जिसमें उनकी गोरी गर्दन, कॉलरबोन और थोड़ा-सा क्लीवेज चमक रहा था। बाल खुले, हल्की कर्ली लहरों में। होंठों पर डार्क बेरी लिपस्टिक। हाथ में क्रिस्टल ग्लास में व्हिस्की। वो हल्के से झूम रही थीं। आँखें थोड़ी लाल, नशा साफ झलक रहा था।

“आ गए आखिरकार, अहमद…” मुस्कान के साथ बोलीं। आवाज मीठी, लेकिन गहरी। “अंदर आओ। डरो मत।”

मैं अंदर गया। लिविंग रूम लग्जरी था – मार्बल फ्लोर, बड़े सोफे, दीवार पर एब्सट्रैक्ट पेंटिंग्स। लेकिन वो सीधे बेडरूम की तरफ ले गईं। कमरा बड़ा, डिम येलो लाइट्स। हवा में वेनिला कैंडल्स की खुशबू और उनकी परफ्यूम – क्रिएड अवेंटस जैसी महक। किंग साइज बेड पर डार्क ग्रे सिल्क शीट्स। साइड टेबल पर जॉनी वॉकर ब्लू लेबल की बॉटल, आइस बकेट, दो ग्लास – एक में आधा भरा।

वो बेड के किनारे बैठ गईं। ग्लास उठाया, एक लंबा सिप लिया। फिर मेरी तरफ देखा।
“बैठो ना। इतना तनाव क्यों?”

मैं पास बैठा। उनकी उँगलियाँ मेरे हाथ पर रखीं – गर्म, नरम। नाखून लंबे, रेड पॉलिश।
“ये क्या किया तुमने? 1000 रुपये क्यों नहीं जमा करवाए?” आवाज में डाँट थी, लेकिन उसमें एक कोमलता भी।

मैंने सब बता दिया – माँ की इमरजेंसी, दवाई, इरादा लौटाने का। आँखें नम हो गईं।
वो चुप रहीं। फिर उठीं, बेडसाइड अलमारी से पर्स निकाला। दो 1000 के नोट।
“ये लो। एक जमा करवा दो। दूसरा रख लो। इमरजेंसी के लिए। और आगे कभी पैसों की जरूरत हो… मुझसे कह देना। मैं तुम्हें बहुत पसंद करती हूँ, अहमद। जो मुझे अच्छा लगता है, उसे मैं जाने नहीं देती।”

मैं हैरान। “मैडम… ये… मैं…”

उन्होंने मेरे गले में बाहें डाल दीं। उनका बदन मेरे बदन से सटा। साँसें गर्म, व्हिस्की की महक।
“मैडम छोड़ो। आज से रुबिना। या रूबी। हम अब दोस्त हैं ना?”

और फिर उनके होंठ मेरे होंठों पर। हल्का किस। मैं फ्रीज हो गया। लेकिन उनका स्पर्श जादुई था। मैंने भी उन्हें कस लिया। किस गहरी हुई। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। नशे ने उन्हें और बोल्ड बना दिया।

उन्होंने मुझे बेड पर धकेला। ऊपर झुककर मेरी गर्दन, कान चूमने लगीं। मैंने उनकी कमर पकड़ी।
“रूबी… कोई देख लेगा तो?”

“कोई नहीं है। सलीम लाहौर में मीटिंग में। बेटा लंदन में यूनिवर्सिटी। बेटी की शादी हो चुकी, वो दुबई में सेटल। आज सिर्फ तुम और मैं।” वो हँसीं। फिर मेरी शर्ट के बटन खोलने लगीं।

उनकी टॉप उतरी। काली लेस ब्रा में भरे हुए गोरे स्तन। ब्रा उतारी। मेरे हाथ पकड़कर अपने स्तनों पर रखे।
“छुओ… आज ये सिर्फ तुम्हारे। दबाओ…”

मैंने धीरे दबाया। मुलायम, गर्म। निप्पल्स सख्त। मैंने एक को मुँह में लिया। चूसा। वो सिसकारी – “आह्ह्ह… हाँ… ऐसे ही… ज़ोर से… उफ्फ़… मज़ा आ रहा है हनी…”

उन्होंने मेरी पैंट उतारी। मेरा लिंग हाथ में लिया। धीरे मसलने लगीं। “वाह… कितना सख्त… गरम… आज़मा लो रूबी को… चीख मत पड़ जाना।”

उनकी जीन्स उतरी। ब्लैक लेस पैंटी गीली। पैंटी उतारी। उनका बदन – चिकना, परफेक्ट कर्व्स। वो लेट गईं, टांगें फैलाईं।
“आओ… दिखाओ कितना दम है।”

मैं उनके बीच। उनका गीला स्पर्श। वो फुसफुसाईं – “अगर मुझे हरा दिया तो एक्स्ट्रा 2000 इनाम। तैयार?”

एक गहरा धक्का। वो “आह्ह्ह…” बोलीं। मैंने रिदम बनाया। स्पीड बढ़ाई। उनकी सिसकारियाँ – “हाँ… तेज़… गहरा… चोदो मुझे… ज़ोर से…”

टांगें मेरी कमर पर लिपटीं। पसीना, कराहें। करीब 50-55 मिनट तक। वो कई बार चरम पर। आखिर वो चीखीं – “बस… हार गई… ड्रॉ कर लो…”

मैंने तेज किया। वो काँप उठीं। मैं झड़ गया। हम थककर लेटे।

बाद में वो मुस्कुराईं। 2000 दिए। “इनाम। और कभी याद आए… मैसेज कर देना।”

मैंने कहा, “रूबी जानी… हमेशा हाजिर।”

उसके बाद हमारा रिश्ता चलता रहा। कभी ऑफिस के बाद, कभी वीकेंड पर। वो मुझे कभी-कभी एक्स्ट्रा काम देतीं, बोनस भी। लेकिन सबसे बड़ा बोनस – वो राज़दार रातें। आज भी, जब वो ऑफिस में मुझे देखकर मुस्कुराती हैं, मैं समझ जाता हूँ – आज शाम बंगला बुला रहा है।

बीवी डिलीवरी में, रवी घर पर साली को चोदता रहा

रवी और रीमा की शादी को दो साल हो चुके थे। रवी का गारमेंट फैक्ट्री चलता था, जहाँ वो बहुत ही सेक्सी लेडीज नाइटियाँ बनाता था। फैक्ट्री की ये नाइटियाँ शहर भर में मशहूर थीं। कभी-कभी वो अपनी बनाई हुई खास नाइटियाँ घर ले आता और रीमा को पहनाकर देखता। रीमा का गोरा, मखमली बदन उन नाइटियों में और भी ज्यादा आकर्षक लगता। नाइटियाँ इतनी पतली और ट्रांसपेरेंट होतीं कि उसकी गोरी चींटी जैसी छातियाँ, पतली कमर और गोल-गोल नितंब सब झलकते रहते। रवी को ये बहुत पसंद था कि जब रीमा रात को बेडरूम में आती तो उसका बदन देखने के लिए उसे ज्यादा इंतजार न करना पड़े।

अभी रीमा प्रेग्नेंट थी और डिलीवरी का समय आ गया था। उसने अपने पीहर फोन करके अपनी चचेरी बहन रोमा को बुला लिया। रोमा अपनी दूसरी बहन लीना के साथ रीमा के घर आ गई। लीना को पेंटिंग करना बहुत शौक था, वो अपनी पेंटिंग की एग्जिबिशन लगाना चाहती थी, इसलिए रोमा के साथ चली आई। लीना एक बेहतरीन डांसर भी थी। कॉलेज के फंक्शन में जब वो डांस करती तो लड़कों की साँसें थम जातीं।

पिछली बार जब रोमा एक साल पहले आई थी तब रीमा, रवी और रोमा तीनों मिलकर बहुत मस्ती करते थे। रोमा अपने जीजा रवी के बहुत करीब हो गई थी। हालांकि उनके बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं बना था, लेकिन रीमा के सामने वो रवी से लिपट-लिपट कर बातें करती, गले लगाती और चुम्मा ले लेती। रीमा को ये बिल्कुल बुरा नहीं लगता। वो कहती, “जीजा और साली के बीच ये सब तो चलता है ना।” तीनों चचेरी बहनें थीं – रीमा, रोमा और लीना। उम्र में ज्यादा फर्क नहीं था। तीनों ही गोरी, सेक्सी और खूबसूरत थीं। कौन सबसे ज्यादा सुंदर है, ये कहना मुश्किल था।

शाम को जब रवी घर आया तो बेडरूम से हँसी-मज़ाक की आवाज़ें आने लगीं। उसका मन मचलने लगा। अंदर घुसते ही देखा – दोनों सालियाँ रीमा के साथ बेड पर बैठी उसकी नाइटियाँ देख रही थीं। रवी सीधा रोमा के पीछे गया, अपनी हथेलियों से उसकी आँखें बंद कर दीं और खुद से चिपक गया। रोमा हँसते हुए बोली, “अरे जीजा, इतनी देर कर दी! हम तो आज सुबह ही आने वाले थे।”

रवी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “सॉरी डार्लिंग, ऑफिस में काम आ गया था। अब माफ कर दो ना।” रोमा ने उसके हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा, “माफ तो कर दिया… लेकिन जीजी का ख्याल रखना। इस हाल में उन्हें अकेला मत छोड़ना।” लीना ने तुरंत जोड़ा, “हम भी तो हैं ना इस महफिल में!” रवी ने लीना को आँख मारते हुए कहा, “अब तुम दोनों को भी अकेला नहीं छोड़ूँगा।”

फिर तीनों ने नाइटियाँ देखनी शुरू कीं। रोमा ने एक नाइटियाँ उठाकर बीच से झाँकते हुए कहा, “देखो जीजा, ये पहनने के बाद नाइटियाँ दिखती हैं या हमारा बदन?” लीना ने शरारत से कहा, “जीजा, आपकी नाइटियाँ तो पूरा बदन उघाड़ देती हैं!” रवी हँसकर बोला, “तो पहनकर दिखाओ ना। हम भी देखें कि हमारी नाइटियाँ ज्यादा सेक्सी हैं या तुम्हारा बदन।”

इसी मजाक के बीच रीमा को इतनी हँसी आई कि अचानक दर्द शुरू हो गया। तुरंत तीनों उसे लेकर हॉस्पिटल चले गए। आधे घंटे बाद नर्स ने खुशखबरी दी – एक प्यारा सा लड़का पैदा हुआ है। रवी, रोमा और लीना तीनों बहुत खुश हुए। डॉक्टर की इजाजत लेकर रीमा से मिले। रात रुकने की बात पर डॉक्टर ने पहले मना किया, लेकिन ज़ोर देने पर बोला, “ठीक है, आज रात सिर्फ एक व्यक्ति रुक सकता है। कल कोई नहीं। नर्सें हैं देखभाल के लिए।”

रोमा ने तुरंत कहा, “मैं रुक जाती हूँ।” रवी थोड़ा उदास हो गया क्योंकि वो आज रात रोमा के साथ कुछ खास मनाने का प्लान बना रहा था। लेकिन कुछ न कहकर लीना को लेकर घर लौट आया। घर के नीचे लीना को छोड़कर बोला, “मैं आधे घंटे में आता हूँ।”

आधे घंटे बाद रवी व्हिस्की और शैंपेन की बोतल लेकर घर पहुँचा। डुप्लीकेट चाबी से दरवाजा खोला और लीना को आवाज दी। लीना बाथरूम में नहा रही थी। उसने कहा, “जीजा, मैं नहा रही हूँ। पंद्रह-बीस मिनट में आती हूँ।” रवी हॉल में सोफे पर बैठ गया, व्हिस्की का ग्लास बनाया और स्मार्ट टीवी पर एक सेक्सी डांस वीडियो चला दिया। स्क्रीन पर खूबसूरत लड़कियाँ हॉट म्यूजिक पर आधी नंगी नाच रही थीं।

जब लीना बाहर आई तो उसने रीमा की एक बहुत सेक्सी नाइटियाँ पहन ली थी। नाइटियाँ इतनी पतली थी कि उसका पूरा गोरा बदन साफ दिख रहा था। ऊपर उसने एक हल्का सा गाउन डाल रखा था। टीवी पर देखकर उसकी साँसें तेज हो गईं। वो पीछे से आकर रवी के गाल से अपना चेहरा सटाकर बोली, “क्या देख रहे हो जीजा?” रवी मुस्कुराया, “कुछ नहीं… आओ बैठो।” लीना खड़े-खड़े बोली, “अकेले ही पियोगे या हमें भी चखाओगे?”

रवी ने ग्लास उसके होठों के पास ले जाकर लगा दिया। लीना ने एक साँस में आधा ग्लास पी लिया और खाँसने लगी। रवी हँसते हुए उसके होठों पर पड़ी व्हिस्की की बूँदें चाट लीं और बोला, “हमे तो कड़वी नहीं लगती।” लीना शरमा गई, “पहली बार पी रही हूँ… पहले सिर्फ बीयर ट्राई की थी।” रवी ने उसे पास बिठाया और दो घूँट और पिलाए।

नशा चढ़ने लगा तो लीना बोली, “ये डांस तो कुछ खास नहीं… मैं इससे बेहतर नाच सकती हूँ।” रवी ने टीवी बंद कर दिया और कहा, “तो दिखाओ मेरी जान।” लीना ने रिमिक्स गाना लगा दिया – पहला सॉन्ग “कांटा लग्गा” था। वो नाचने लगी। बीच में अपना गाउन उतारकर रवी की तरफ उछाल दिया। अब सिर्फ वो पतली नाइटियाँ उसके बदन पर थी। उसका बदन आग की तरह जल रहा था।

वो नाचते-नाचते कभी पास आती, कभी दूर जाती, अपने भारी स्तनों को हिलाती, जाँघें फैलाती, नितंब मटकाती। रवी की साँसें भारी हो गईं। उसका लंड पैंट में तन गया। लीना ने सोफे पर आकर अपने नितंब रवी की जाँघों पर रख दिए और धीरे-धीरे रगड़ने लगी। रवी ने उसे अपनी बाहों में खींच लिया। दोनों के होठ मिल गए। गहरी, गीली किस। जीभें एक-दूसरे से खेलने लगीं।

रवी ने धीरे से उसकी नाइटियाँ के स्ट्रैप्स खोले। नाइटियाँ सरक गई। लीना की भरी-भरी, गोरी छातियाँ बाहर आ गईं। गुलाबी निप्पल्स कड़े हो चुके थे। रवी ने दोनों को हाथों में लेकर दबाया, सहलाया। लीना सिसक उठी, “उफ्फ… जीजा… और प्यार से… बहुत अच्छा लग रहा है।” रवी ने एक निप्पल मुँह में ले लिया और चूसने लगा। लीना की साँसें तेज हो गईं। वो खुद अपने नितंब रगड़ रही थी।

“मुझे भी देखना है…” लीना ने रवी की पैंट की चेन खोली। उसका मोटा, लंबा लंड बाहर निकल आया। लीना ने उसे हाथ में लिया और बोली, “कितना सुंदर और तगड़ा है…” उसने जीभ निकालकर सुपाड़े को चाटा। फिर धीरे-धीरे पूरा मुँह में ले लिया। रवी आहें भरने लगा।

थोड़ी देर बाद रवी ने उसे उठाकर बेडरूम ले गया। बेड पर लिटाकर उसकी जाँघों को चूमने लगा। लीना की जाँघें मखमल जैसी नरम थीं। फिर उसने अपनी जीभ लीना की चूत पर रख दी। लीना ने उसके बाल पकड़कर कहा, “हाँ जीजा… चूसो… और गहरी… मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।” लीना का पानी निकलने लगा। वो चीखी, “आह्ह्ह… मैं आ गई…!”

फिर लीना ऊपर चढ़ गई। रवी के लंड को अपनी चूत के मुहाने पर रखा और धीरे से बैठ गई। पूरा लंड अंदर चला गया। दोनों ने एक साथ आह भरी। लीना ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे। रवी उन्हें दबा रहा था। स्पीड बढ़ती गई। लीना चिल्लाई, “हाँ… और जोर से… तुम्हारा लंड मेरी चूत को स्वर्ग बना रहा है…!” दोनों एक साथ झड़ गए।

रात भर वो तीन बार और प्यार किया – कभी डॉगी स्टाइल में, कभी साइड में, कभी लीना नीचे और रवी ऊपर। हर बार लीना खुद कहती, “जीजा, मुझे और चाहिए… मुझे तुम्हारे साथ बहुत मज़ा आ रहा है… जितना मन करे कर लो।” सुबह फिर से एक राउंड हुआ। लीना बोली, “सच में तुम्हारा लंड लंबा और मोटा है… जो भी लड़की तुमसे प्यार करेगी, वो बहुत खुश होगी।”

फिर रवी हॉस्पिटल गया। रोमा को छुट्टी दी और लीना को घर भेजने को कहा। जब रोमा घर पहुँची तो लीना कपड़े बदल रही थी। लीना के चेहरे पर वो खास चमक देखकर रोमा समझ गई कि रात क्या-क्या हुआ होगा। वो मुस्कुराई और कुछ नहीं बोली।

बॉयफ्रेंड ने झाड़ियों में ले जाकर चोदा

कहानी के पहले मैं अपने बारे में बता दूं. मेरा नाम शैली है और मैं २४ साल की हूं, मेरा फिगर ३२-३२-४० है और हाइट ५ फुट ८ इंच है, यह तब की बात है जब मैं १२ वीं क्लास में थी, तब मेरा फिगर ३२-३०-३६ हुआ करता था.

तब मेरा एक बॉयफ्रेंड था जिस से मेरा ब्रेकअप हो गया था, उसके साथ मैंने बस किस किया था. ब्रेकअप के बाद में भी अब बहुत ज्यादा उदास रहा करती थी. मेरी बेस्ट फ्रेंड के बॉयफ्रेंड ने मुझे अपने भाई से मिलवाया.

वह मुझसे उम्र में थोड़ा बड़ा था और दिखने में एवरेज था, उसका नाम अक्षत था. अक्षत और मैं रोज फोन पर बातें करने लगे. फिर एक दिन मेरी बेस्ट फ्रेंड उसका बॉयफ्रेंड अक्षत और मैंने मिलने का प्लान बनाया.

हम थोड़ी देर घुमे फिरे थे. उसके बाद अक्षत मुझे अपनी बाइक पर बिठा कर एक बहुत सुंदर जगह ले गया, वह हिल पॉइंट था और वहां से उतर कर झाड़ियां थी. वह मुझे झाड़ियों के अंदर लेकर चला गया. मैंने उस दिन एक फ्रॉक टाइप टॉप पहना था. जो मेरे बुब पर टाइट था और नीचे से ढीला, घुटने तक और उस के नीचे लेगी पहना था. झाड़ियों में जाने के बाद वहां पर एक गुफा जैसे बडी चट्टान थी.

हम वहां एक चट्टान के सहारे खड़े हो गए, मुझे चट्टान से टिका के वह मुझे किस करने लगा. मैं भी उसे किस कर रही थी. फिर उसने अपना हाथ मेरे बूब्स पर रख दिया और दबाया, क्योंकि यह मैंने पहले नहीं किया था, तो मैं घबरा कर पीछे हो गई. तो उसने कहा क्या हुआ? तो मैंने उसे कहा कि मैंने यह सब नहीं किया है.

तब उसने कहा बहुत मजा आएगा, तुम एक बार मुझे करने दो. पहले तो मैं मना कर रही थी पर फिर मैं मान गई. अक्षत मुझे फिर किस करने लगा और बूब्स दबाने लगा. क्या बताऊं बहुत अच्छा लग रहा था? लेकिन मैं डर गई थी, इसलिए रिस्पांस नहीं दे रही थी.

तब अक्षत ने मुझे कहा लेट गो एवरीथिंग और इस मोमेंट को इंजॉय करो बस, कुछ मत सोचो. उसके बाद जब उसने मेरे बूब्स दबाते हुए किस किया तो मैं मोन करने लगी थी और अहः अय्य्य औऊ ईई अह्ह्ह ओऊ हह हां अम्म्म अह्ह्ह अम्म्म ईई औउ ओह्ह हहह की आवाज निकाल रही थी.

फिर उसने धीरे से मेरे टॉप में हाथ डालना शुरु किया और मेरे बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाना शुरु कर दिया. मैं भी उसका साथ दे रही थी और मौन कर रही थी, और उसका सर पकड़कर किस कर रही थी और मौन कर रही थी.

फिर वो धीरे धीरे नीचे जाने लगा, और मेरे गले पर बहुत सारे किस करने लगा. और बहुत सारे किस करने लगा और अपने हाथों से मेरे बूब को टॉप के अंदर दबा रहा था, और मेरी पीठ और पेट पर हाथ फेर रहा था. फिर उसने मेरा टॉप उठाया और ब्रा के ऊपर से बूब्स को चूसने लगा. क्या बताऊं कितना अच्छा लग रहा था.

मैं भी अपनी छाती उछाल कर बाहर निकाल निकाल के उसके सर को अपने बुब्स पर दबा रही थी उसके हाथ मेरी पीठ पर थे और धीरे से उसने मेरी ब्रा खोल दी. अब टॉप और ब्रा उठाकर वह मेरे नंगी बुब से खेल रहा था दबा रहा था और मैं पागलों की तरह मोअन कर रही थी.

फिर उसने मेरे राइट बूब्स के निप्पल को अपने मुंह में भरा और चूसने लगा. क्या बताऊं पूरे शरीर में बिजली दौड़ गई थी और मैं नीचे से गीली भी होने लगी थी.

वह एकदम भूखे शेर की तरफ मेरे बूब्स पर टूट पड़ा और बहुत तेज तेज चूस रहा था और लेफ्ट बूब को अपने हाथों से दबा रहा था. मैं भी उसका सर पकड़कर अपने बूब्स में दबा रही थी. क्या मजा आ रहा था यारो!!!

फिर वह मेरे लेफ्ट की बुब को चूसने लगा १०-१५ मिनट तक उसने राइट बूब्स को चूसा और १०-१५ मिनट उसने लेफ्ट बूब्स को निचोड़ा. आह्ह औउ अह्ह्ह मम्मम इतना मजा तो मुझे जिंदगी में कभी नहीं आया था. अब वो धीरे धीरे नीचे जाने लगा और मेरे पूरे शरीर पर किस करने लगा. और उसका हाथ मेरे चूत पर जा रहा था.

वह मेरी लेगी के ऊपर से मेरी चूत सहला रहा था अहह औउ उई  ईतना मजा आ रहा था आह औऊ ओह्ह हहह अम्म्म मैं उसका नाम लेकर मोअन कर रही थी अहह औउ इई अक्षत मैं इतनी गीली हो गई थी कि मेरे पानी से पैंटी और लेगी दोनों गीले हो गए थे. उसे जैसे ही मेरा लेगी गिला लगा, उसने कहा देखो कितना मजा दिया कि ईतनी गीली हो गई.

फिर उसने मेरी पैंटी में हाथ डाल दिया और मेरी चूत को सहलाने लगा. मैं सीहर गई ऐसा लग रहा था कि सातवें आसमान पर हूं. फिर उसे सहलाने में अनकंफर्टेबल हो रहा था तो उसने मेरी पैंटी और लेगी नीचे कर दी.

अब मेरी चूत उसके सामने थी और वह मुझे फिंगरिंग कर रहा था, क्या मजा आ रहा था फिर उसने मेरा टॉप उठाया और बूब्स को बारी बारी से फिर से चूसने लगा. और साथ में चूत से भी खेल रहा था. फिर वह मुझे किस करने लगा.

फिर उसने मुझसे कहा शैली मैं कुछ करना चाहता हूं, कर लू, मैंने उसे पूछा क्या? तो उसने कहा मजे करने दो, ना मजा आए तो रोक देना.. मैं तो मजे में इतनी मदहोश थी कि मैंने उसे कह दिया हां अक्षत जो करना है करो, मुझे पागल कर दो.. यह सुनते कि वह नीचे बैठा और मेरी चूत चाटने लगा. मैं तो बस मौन ही कर रही थी आह्ह उऔउ ओह्ह हहह औउ यस हहह इतना मजा आ रहा था कि क्या बताऊं??

५ मिनिट तक वह मेरी चूत चूस रहा था और मैं उसका सर अपनी चूत में दबाए जा रही थी. फिर उसने कहा तुम दूसरी बार झड़ गई, इतना मजा आया तुमको? तब मुझे पता नहीं था की जड़ना क्या होता है? फिर उसने कहा मैंने तुम्हें इतना मजा दिया थोड़ा तुम भी मुझे मजा दे दो. मुझे समझ नहीं आ रहा था तो उसने अपना ६.५ इंच लंबा मोटा लंड पेंट खोल के निकाल दिया. मैंने पहली बार किसी आदमी का तना हुआ लंड देखा था.

उसने कहा इसे छुओ, चुसो और इससे जैसे खेलना है खेलो. मैंने उसे छुआ फिर वह मुझे बताने लगा तूम ईसे हीलाओ, मैं वैसा वैसा करने लगी जैसा वह कह रहा था. फिर उसने कहा इसे चुसो.. मैंने उसे मुंह में लिया तो कुछ नमकीन सा पानी मेरी जुबान पर लग गया. मैं उसे चूसने लगी और वह मोंन कर रहा था.

५ मिनट तक उसका लंड चूसा, फिर उसने अपनी जेब से कंडोम निकाला. मैं डर गई मैंने कहा मुझे सेक्स नहीं करना, यह सब ठीक है. तो अक्षत बोला अभी तक ईतना मजा आया है, यह करके देख बहुत मजा आएगा. मैं बहुत देर मना कर रही थी फिर उसको गुस्सा आ गया.

अक्षत – इतनी आग लगा दी, अब चुदने के लिए मना कर रही है.

मै डर गई उसने मुझे धक्का देकर उस गुफा में ले जाकर लेटा दिया, और मेरी चूत चाटने लगा. मैं सब कुछ भूल कर मोन करने लगी. इतनी देर में उसने कंडोम खोल दिया, मेरे ऊपर आ गया और कंडोम चढ़ाने लगा. मैंने कहा प्लीज मत करो. अक्षत बोला एक बार करके तो देख, मैं रोने लगी पर वह मेरी एक नहीं सुन रहा था.

उसने अपना लंड का टोपा मेरी चूत पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा. मेरी तो चीख निकल गई अहः ईई अमा ओऊ माया ईई माआआ ऊ उऔउ इई ऊऊ पर उसने मेरे मुंह पर हाथ रख दिया और कहने लगा, आराम से करूंगा. फिर थोड़ा दर्द कम हुआ तो एक और झटका मारा, आधा लंड अंदर चला गया था. मुझे बहुत दर्द हो रहा था.

फिर एक फाइनल जटका और उसका पूरा मोटा लंड मेरी चूत में था, मैं दर्द से तड़प रही थी. तब अक्षत ने मुझे कहा आराम से, बस थोड़ा सा दर्द होगा, अभी जब धक्के मारूंगा तो अपनी गांड उछल उछल कर चुदोगी.

फिर थोड़ी देर में उसने धक्के मारना शुरू किया, क्या बताऊं? मुझे बहुत मजा आने लगा था. मैं आह औउ अय्य्य औउ ई ऊऊ ओह्ह हहह औऊ यस्स कर रही थी. हर धक्के पर आह्ह ययय ईह हहह ओह्ह हहह. फिर उसने स्पीड बढ़ाई और मैं मौन कर रही थी. वह स्पीड बढ़ाते जा रहा था और जैसा की अक्षत ने कहा था, मैं गांड उछाल उछाल कर उस की चुदाई में साथ दे रही थी.

काफी देर उसने मेरी चुदाई की और मैं बस मोन किया जा रही थी, आः औऊ अहह ओह्ह हह्ह्ह फक मी अक्षत, बहुत मजा आ रहा है अक्षत, फिर उसका पानी निकल गया कंडोम में. और हम दोनों सांसे भर गई थी, हमने अपने अपने कपड़े पहने और वहां थोड़ी देर बैठ गए. वह मुझे किस कर रहा था और मैं भी उसका साथ दे रही थी, फिर हम अपने अपने घर चले गए.

 

मेरी पहली चुदाई: बॉयफ्रेंड के साथ जन्नत के पल

हाय दोस्तों, जवानी का नशा ही तो ऐसा होता है ना, जो इंसान को पागल बना देता है! आपने मेरी पिछली कहानी पढ़ी होगी, जिसमें मैंने अपने भाई के साथ हुए उन अनोखे पलों को खुलकर शेयर किया था। वो कहानी पढ़कर आपको जो भी लगा, वो सब मुझे ईमेल के जरिए मिला। इतने सारे मैसेज, इतना प्यार… वाह! कुछ लोगों को तो मेरी स्टोरी इतनी पसंद आई कि वो खुद को रोक नहीं पाए और मुझे चोदने का ऑफर तक दे डाला। लेकिन दोस्तों, मैं अपनी हर एक रीडर और रीडर्स को साफ-साफ बता दूं – मैं चैटिंग की दीवानी हूं। अगर कोई बात करना चाहे, कोई राज शेयर करना चाहे, तो चैट बॉक्स में आ जाओ। मैं इंतजार करूंगी, बिना किसी हिचकिचाहट के।

अब ज्यादा देर बोर ना करते हुए, चलिए सीधे मेरी अगली कहानी पर आते हैं। पिछली स्टोरी में आपने पढ़ा था कि कैसे मेरे मामा के लड़के ने मेरी जवानी के रस को चखा और मुझे जन्नत के दरवाजे खोल दिए। लेकिन जैसा मैंने वोां में जिक्र किया था, उससे भी पहले मेरी जिंदगी में चुदाई का पहला असली रंग भरा था मेरे बॉयफ्रेंड ने। ये कहानी उसी की है – एक साल पहले की, जब मैं महज 22 साल की थी, कॉलेज की आखिरी क्लास में धुंआधार पढ़ाई के बीच जवानी के सपनों में खोई हुई। मेरा बॉयफ्रेंड, नाम था राहुल, मेरे ही क्लास का लड़का। वो हमेशा से मुझे नजरों में रखता था – क्लास में मेरी तरफ घूरता, लाइब्रेरी में चुपके से मुस्कुराता। आखिरकार, कॉलेज के फाइनल ईयर में उसने हिम्मत जुटाई और प्रपोज कर दिया। “समिता, तू मेरी जिंदगी है,” उसने कहा था, आंखों में वो चमक लिए जो मुझे आज भी याद है।

राहुल स्मार्ट था, पढ़ाई में टॉप करने वाला, लेकिन बदन से तो जैसे किसी एथलीट का – चौड़ी छाती, मजबूत बाजूएं, और वो हंसी जो मुझे हर बार गुदगुदा देती। मुझे भी वो पसंद था – उसकी वो शरारती नजरें, वो हल्का सा परफ्यूम का खुशबू जो हवा में तैरता। तो मैंने बिना सोचे-समझे हां कह दी। “हां राहुल, मैं तेरी हूं,” मैंने कहा, और बस, हमारी लव स्टोरी शुरू हो गई।

शुरुआती दिनों में सब कुछ इतना रोमांटिक था – कॉलेज के कैंटीन में चुपके से हाथ पकड़ना, शाम को पार्क में घूमना, और हां, वो किसिंग सेशन्स! जब भी मौका मिलता, वो मुझे दीवार के पास सटा लेता और होंठों पर होंठ रख देता। उसके हाथ मेरी कमर पर सरकते, फिर धीरे-धीरे ऊपर की ओर – मेरे मम्मों पर। कपड़ों के ऊपर से ही दबाता, निचोड़ता, जैसे कोई भूखा शेर अपनी शिकार को चख रहा हो। मैं सिहर उठती, सांसें तेज हो जातीं, लेकिन कभी आगे नहीं बढ़ पाते। घरवाले, दोस्त, कॉलेज – सब कुछ बीच में आ जाता। हम दोनों चुदाई के लिए तड़प रहे थे, रातों को बिस्तर पर लेटे-लेटे एक-दूसरे के बारे में सोचते और उंगली से खुद को संतुष्ट करते। मैंने कभी मुंह से नहीं कहा, “राहुल, मुझे चोदो ना,” क्योंकि शर्म तो आती थी ना? लड़की हूं मैं, शुरूआत तो लड़के ही करते हैं। और डर भी लगता था – क्या वो मुझे सस्ती समझेगा? लेकिन मन ही मन मैं प्रार्थना करती, “भगवान, बस एक मौका दे दो।”

फिर एक दिन वो मौका आ ही गया – जैसे किस्मत ने सुन ली हो। सुबह कॉलेज पहुंचते ही राहुल ने कान में फुसफुसाया, “समिता, आज मेरे घर कोई नहीं है। मम्मी-पापा गांव गए हैं, शाम को लौटेंगे। आना, अपना घर दिखाऊंगा तुझे।” उसकी आंखों में वो शरारत चमक रही थी, और मैं समझ गई – घर दिखाना तो बहाना है, असल में तो वो मेरी जवानी को नंगा देखना चाहता है। मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। चूत में एक हल्की सी गुदगुदी हुई, जैसे कोई बिजली का करंट दौड़ गया हो। “हां, आऊंगी,” मैंने कहा, और क्लास भर में बेचैन रही। घड़ी की सुई को घूरती रही, जैसे वो मेरी चाहत को पढ़ रही हो।

क्लास खत्म होते ही मैं उसकी बाइक पर सवार हो गई। हवा मेरे बालों में उड़ रही थी, उसकी पीठ से सटकर मैं महसूस कर रही थी उसके बदन की गर्मी। घर पहुंचे तो एक छोटा सा फ्लैट था – साफ-सुथरा, लेकिन आज वो मेरे लिए जन्नत था। दरवाजा बंद होते ही उसने अंदर से लॉक कर लिया। “बैठ जा सोफे पर,” कहा और टीवी ऑन कर दिया – कोई रोमांटिक मूवी चल रही थी, लेकिन हमारी नजरें तो एक-दूसरे पर टिकीं। “कैसा लगा मेरा घर?” उसने पूछा, मुस्कुराते हुए। “बहुत अच्छा,” मैंने कहा, लेकिन मन में चीख रही थी – ‘राहुल, अब बस कर, सीधे कह दे कि आज तू मेरी चूत में अपना लंड घुसाएगा!’

वो मेरे पास आया, मेरा हाथ पकड़ा और सहलाने लगा। उसकी उंगलियां मेरी हथेली पर सरक रही थीं, जैसे कोई जादू हो रहा हो। “समिता, आई लव यू,” बोला, आंखों में वो गहराई लिए। मैंने भी आंखें मिलाईं, “आई लव यू टू, राहुल।” बस, इतना ही काफी था। उसने मुझे अपनी ओर खींचा, अपनी मजबूत बाहों में कसकर जकड़ लिया। “तुम्हें पता नहीं, मैं तुम्हें कितना चाहता हूं। तुम्हारे बिना सांस नहीं आती। तुम्हारी ये आंखें, ये होंठ, ये बदन… सब कुछ परफेक्ट है।” मैं लजाते हुए बोली, “मैं भी तुझे बहुत चाहती हूं, राजा। तू मेरा सबकुछ है।” और फिर… उसके होंठ मेरे होंठों पर आ गए। वो किस इतना गहरा था, जैसे दो प्यासे यात्री पानी के स्रोत पर मिले हों। हमारी जीभें एक-दूसरे से लिपट गईं, सांसें मिलीं, लार का स्वाद महसूस हुआ। मैं उसके बालों में उंगलियां फेर रही थी, वो मेरी कमर को निचोड़ रहा था। कमरे में सिर्फ हमारी सिसकारियां गूंज रही थीं – आह्ह… उफ्फ… म्म्म…

पहले तो वो मेरी शर्ट के ऊपर से ही मम्मों को दबा रहा था, लेकिन जल्दी ही बर्दाश्त ना हो सका। हाथ पीछे सरका कर ब्रा का हुक खोल दिया। शर्ट ऊपर सरका दी, और पहली बार मेरे नंगे मम्मे उसके सामने थे – गोल, भरे-भरे, गुलाबी निप्पल्स तने हुए। मैं शरम से लाल हो गई, लेकिन जोश में डूबी हुई। “राहुल…” मैं फुसफुसाई। वो पागल हो गया – दोनों हाथों से मम्मों को पकड़ा, निचोड़ा, जैसे कोई बच्चा अपनी पसंदीदा खिलौना को दबा रहा हो। फिर सिर झुकाया और दाहिनी चूची को मुंह में भर लिया। ओह गॉड! वो चूसने लगा – छोटे बच्चे की तरह, जोर-जोर से। दांत हल्के से काटता, जीभ से चक्कर लगाता। दर्द और मजा का ऐसा मिश्रण, कि मेरी चूत से रस टपकने लगा। मैंने उसके सिर को कसकर पकड़ा, “चूसो राजा… हां, ऐसे ही… मर जाऊंगी मैं!” जैसे कोई मां अपने बच्चे को दूध पिला रही हो, मैं उसके बालों में उंगलियां फेर रही थी। मेरे मम्मे बड़े हैं – 34D साइज के – वो उन्हें मुंह में लेकर ऐसे चूस रहा था जैसे पूरा निगल जाएगा। जीभ निप्पल पर नाच रही थी, कभी चूचू-चूस, कभी चाट-चाट। करीब 20 मिनट ये सिलसिला चला – बारी-बारी दोनों चूचियों को। बीच-बीच में मैं उसके चेहरे को मम्मों पर दबा रही थी, सांसें तेज, बदन पसीने से भीगा। “राहुल, तू मुझे पागल कर देगा… आह्ह्ह!”

फिर वो उठा, अपनी शर्ट उतारी – उसकी छाती नंगी, मसल्स चमकते हुए। पैंट भी नीचे सरका दी, और उसका लंड बाहर आ गया – मोटा, लंबा, तना हुआ, टोपी लाल चमकती। मैं घूरती रह गई। “अब तू भी उतार,” बोला। मैंने स्कर्ट और पैंटी उतार फेंकी – अब हम दोनों नंगे। मेरे मम्मे चूसाई से चमक रहे थे, निप्पल्स और सख्त। जोश में मैं उसके ऊपर चढ़ गई, उसके लंड पर अपनी गांड और चूत रगड़ने लगी। वो नीचे लेटा सिसकारियां ले रहा था। मैंने पहले उसकी छाती पर किस किए – नमकीन स्वाद उसके पसीने का। फिर निप्पल्स को मुंह में लिया, चूसा। “हां डार्लिंग, चूसो इन्हें… ओह्ह, मजा आ रहा है!” वो कराहा। थोड़ी देर बाद मैं नीचे सरकी, उसके लंड तक। सांसें तेज, दिल धड़कता। लंड हाथ में लिया – गर्म, कड़ा, नसें फूली हुईं। “रानी, देख क्या रही है? चूस ले ना!” वो बोला।

मैंने जीभ निकाली, पहले टोपी पर चाटा – नमकीन, मस्की स्वाद। फिर होंठों से पकड़ा, चूसा। वो कराहा, “अह्ह्ह… जान, पूरा मुंह में ले… हां!” मैंने पूरा लंड मुंह में भरा – मुश्किल से आता था, लेकिन जोश में अंदर-बाहर करने लगी। सिर हिलाती, हाथ से सहलाती। “तुम तो एक्सपर्ट हो, समिता… ओह्ह फक!” वो तारीफ कर रहा था। फिर वो खड़ा हुआ, मैं घुटनों पर बैठ गई। लंड मुंह के पास – मैंने टाइट जकड़ा। अब वो मेरे मुंह की चुदाई करने लगा – जोर-जोर से अंदर-बाहर। गला तक जाता, आंसू आ जाते, लेकिन मजा… उफ्फ! 15 मिनट चला ये। अचानक स्पीड बढ़ी, और… गर्म रस मुंह में। पहली बार स्पर्म का स्वाद – थोड़ा नमकीन, चिपचिपा। मैं गर्म थी, सारा निगल गई। फिर लंड चाट-चाटकर साफ किया – चमक उठा वो।

अब हम साइड में लेटे, एक-दूसरे की बाहों में। सांसें धीमी हो रही थीं, लेकिन आग बुझी नहीं। थोड़ी देर बाद बोला, “फिर चूस ना।” मैंने ढीला लंड मुंह में लिया, चूसा – जल्दी ही फिर तन गया। अब उसने मुझे लिटाया, चूचियां चूसने लगा। हाथ नीचे सरका, चूत पर। मैं पहले से गीली थी – रस टपक रहा। उंगलियां होंठों पर फेरीं, फिर अलग कीं। “गीली हो गई रानी…” बोला। जोर से दबाया – आधी उंगली अंदर। “आह्ह!” दर्द और सुख की चीख निकली। फिर पूरी उंगली – मैं चिल्लाई। “घबराओ मत, अभी तो मेरा लंड तेरी चूत का रस पिएगा।” धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। अब मजा आने लगा – “जोर से करो!” मैं बोली। चूचियां चूसते हुए वो तेज हुआ, और मैं झड़ गई – शरीर कांप गया। उंगली निकाली, चाटी। “दुनिया का सबसे मीठा जूस… और मिलेगा?” “हां राजा, जितना चाहो।”

मैं आंखें बंद कर लेटी, लेकिन अचानक… उफ्फ! चूत पर नरम, गर्म एहसास। आंखें खोलीं – वो मुंह लगा रहा था! जीभ से चाट रहा, रस पी रहा। “ये… क्या?” मैं हंस पड़ी। “तेरा रस पी रहा हूं, डार्लिंग।” मैं तैयार हो गई, “चूस लो राजा… सारा रस पी लो, चूत को लाल कर दो!” सिर पकड़ा, दबाया। वो जीभ फेरने लगा – कुत्ते की तरह लंबी चाट। “जीभ अंदर घुसाओ!” बोली। पहले होंठों पर किस – जैसे मुंह पर। “ओह्ह… आह्ह… मर गई!” चीखी मैं। फिर जीभ अंदर – सांप की तरह लहराती। मैं बर्दाश्त ना कर सकी, सिर दबाया और उसके मुंह में झड़ गई – रस बह निकला। वो पीता रहा, चाटता रहा।

दोस्तों, ये तो बस शुरुआत थी – वो आग जो अभी सुलग रही थी। कैसे राहुल ने अपनी कुंवारी चूत में मोटा लंड घुसाया, मुझे चीखने पर मजबूर किया, और असली चुदाई का स्वर्ग दिखाया…

एक रात पति के दोस्त के साथ

मुंबई की बारिश भरी रात में, अनुश्री अपने पति रवि के साथ अपने आलीशान अपार्टमेंट में थी। अनुश्री, 29 साल की, गोरी, लंबे रेशमी बालों वाली, और कातिलाना फिगर वाली औरत थी। उसकी टाइट काली ड्रेस उसके भरे हुए बूब्स और गोल गांड को उभार रही थी, और उसकी आँखों में एक कामुक चमक थी। रवि, 34 साल का, एक बिज़नेसमैन था, जो अक्सर काम में व्यस्त रहता था। उस रात रवि का दोस्त, करण, उनके घर पर रुका था। करण, 32 साल का, मज़बूत जिस्म और आकर्षक मुस्कान वाला मर्द था, जिसकी नज़रें अनुश्री की हॉटनेस पर टिक गई थीं।

रवि को एक इमरजेंसी कॉल आया, और उसे रात में ही ऑफिस जाना पड़ा। “करण, तुम यहीं रुको, मैं सुबह तक आ जाऊँगा,” रवि ने कहा और जल्दी से निकल गया। अनुश्री और करण अकेले रह गए। बारिश की बूँदें खिड़कियों पर थपथपा रही थीं, और माहौल में एक अजीब सी कामुकता थी। अनुश्री ने करण को वाइन ऑफर की, और दोनों सोफे पर बैठकर बातें करने लगे। “तुम्हारी ड्रेस बहुत हॉट है, अनुश्री,” करण ने हँसते हुए कहा, और उसका लंड उसकी जीन्स में हलचल करने लगा। अनुश्री ने अपने होंठ चाटे और जवाब दिया, “तो तुम भी तो कुछ करो, मेरी चूत बेकरार हो रही है।”

करण की आँखें चमक उठीं। उसने अपनी वाइन का ग्लास साइड में रखा और अनुश्री के पास सरक गया। उसने अनुश्री का हाथ पकड़ा और उसे अपनी ओर खींच लिया। “तेरी चूचियाँ देखकर मेरा लंड काबू में नहीं है,” उसने फुसफुसाया। अनुश्री ने एक सेक्सी मुस्कान दी और अपनी ड्रेस का गला थोड़ा नीचे खींचा, जिससे उसके बूब्स की गहरी लकीर दिखने लगी। करण ने अनुश्री को दीवार से सटा लिया और उसके होंठों को चूमा, पहले धीरे, फिर गहराई से, उसकी जीभ को चूसते हुए। अनुश्री की चूत में एक सिहरन दौड़ गई, और उसने करण की शर्ट में उंगलियाँ डालकर उसे और करीब खींच लिया।

“तेरे होंठ कितने रसीले हैं,” करण ने कहा, और अनुश्री ने जवाब दिया, “तो मेरी चूत का स्वाद भी ले लो।” उसकी बात ने करण के लंड को और सख्त कर दिया। उसने अनुश्री की ड्रेस का ज़िप खोला, और उसकी काली ब्रा में कैद भारी चूचियाँ देखकर उसका लंड जीन्स में उछलने लगा। करण ने ब्रा का हुक खोला, और अनुश्री के बूब्स आज़ाद हो गए। उसने उन्हें कस के दबाया, उनके निप्पल्स को चूसा, और हल्के से काटा। “तेरी चूचियाँ कितनी मस्त हैं,” करण ने कराहते हुए कहा, और अनुश्री की सिसकियाँ कमरे में गूंजने लगीं।

अनुश्री ने करण को सोफे पर धकेल दिया और उसकी जीन्स खोली। उसका सख्त लंड बाहर आया, और अनुश्री ने उसे अपने हाथों में लिया। “वाह, तेरा लंड तो मोटा है,” उसने सेक्सी अंदाज़ में कहा, और उसे अपने होंठों से चूमा। उसने करण के लंड को धीरे-धीरे चूसना शुरू किया, अपनी जीभ से उसे सहलाते हुए। करण की सिसकियाँ निकलने लगीं, और उसने अनुश्री के बाल पकड़कर उसे और गहरे तक चूसने को कहा। अनुश्री की चूत में चुदाई की प्यास बढ़ रही थी, और उसने अपनी जांघें चौड़ी कर दीं।

करण ने अनुश्री को बिस्तर पर ले गया और उसकी ड्रेस पूरी तरह उतार दी। उसकी काली पैंटी पहले ही उसकी गीली चूत से चिपक चुकी थी। उसने पैंटी उतारी और अपनी उंगलियाँ अनुश्री की चूत में डालीं, उसे धीरे-धीरे रगड़ते हुए। “तेरी चूत कितनी गर्म और टाइट है,” करण ने फुसफुसाया, और अनुश्री ने कराहते हुए कहा, “तो अपने मोटे लंड से इसे चोद दे।” करण ने अपने लंड को अनुश्री की चूत पर रगड़ा और धीरे से अंदर डाल दिया। अनुश्री की एक हल्की सी चीख निकली, क्योंकि करण का लंड उसकी चूत को पूरा भर रहा था।

करण ने अनुश्री की चूत में अपने लंड को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। हर धक्के के साथ अनुश्री की चूचियाँ उछल रही थीं, और उसकी सिसकियाँ कमरे में गूंज रही थीं। “हाँ, मेरी चूत को चोद,” अनुश्री ने फुसफुसाया, और करण ने अपनी रफ्तार बढ़ा दी। उसका लंड अनुश्री की चूत की गहराई को छू रहा था, और उसकी गांड हर धक्के के साथ बिस्तर पर रगड़ रही थी। अनुश्री ने अपनी जांघें और चौड़ी कीं, जैसे करण के लंड को और गहरे तक बुला रही हो।

तभी रवि का दूसरा दोस्त, आदित्य, 30 साल का, मज़बूत जिस्म और शरारती मुस्कान वाला मर्द, अपार्टमेंट में आया। उसने दरवाज़ा खुला देखा और अंदर आ गया। अनुश्री की नंगी चूचियाँ और चुदाई देखकर उसका लंड तन गया। “अनुश्री, मुझे भी मज़ा चाहिए,” आदित्य ने हँसते हुए कहा, और अनुश्री ने एक सेक्सी मुस्कान के साथ जवाब दिया, “आ जा, मेरी चूत और गांड दोनों तैयार हैं।” करण ने हँसते हुए आदित्य को पास बुलाया, और दोनों ने अनुश्री को अपनी भूख का शिकार बनाया।

आदित्य ने अनुश्री की गांड को कस के पकड़ा और उसे थप्पड़ मारा। “तेरी गांड कितनी मस्त है,” उसने कहा, और अपनी उंगलियाँ अनुश्री की गांड के छेद पर फेरी। उसने धीरे से अपनी उंगली अंदर डाली, और अनुश्री की सिसकी और तेज़ हो गई। “मेरी गांड भी चोद,” उसने कराहते हुए कहा। करण ने अनुश्री की चूत में अपने लंड को और तेज़ी से चलाया, जबकि आदित्य ने अपने लंड को अनुश्री की गांड पर रगड़ा और धीरे से अंदर डाला। अनुश्री की चीख अब एक कामुक संगीत बन चुकी थी।

अनुश्री के जिस्म में दो लंड एक साथ थे—करण का लंड उसकी चूत चोद रहा था, और आदित्य का लंड उसकी गांड। उसकी चूचियाँ हवा में उछल रही थीं, और उसने दोनों को कस के पकड़ लिया। “हाँ, मेरी चूत और गांड को चोदो,” उसने सिसकते हुए कहा। करण ने अनुश्री के होंठों को फिर से चूमा, उसकी जीभ को चूसते हुए, जबकि आदित्य ने उसकी चूचियाँ दबाईं और उन्हें चूसा। अनुश्री का जिस्म पसीने और चुदाई की गर्मी से गीला हो चुका था।

तभी रवि का एक और दोस्त, सूरज, 35 साल का, अनुभवी और मज़बूत मर्द, अपार्टमेंट में आया। उसने अनुश्री की चुदाई देखकर अपना मोटा लंड पकड़ लिया। “अनुश्री, मुझे भी बुला ले,” उसने गहरी आवाज़ में कहा, और अनुश्री ने उसे एक सेक्सी नज़र दी। “सूरज, मेरे बूब्स और मुँह बाकी हैं,” उसने कहा। सूरज ने अपनी पैंट उतारी और अपना मोटा लंड अनुश्री के मुँह में डाल दिया। अनुश्री ने उसे चूसना शुरू किया, उसकी जीभ से उसके मोटे लंड को सहलाते हुए।

करण अब अनुश्री की चूत को ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था, उसका लंड हर धक्के में उसकी चूत की गहराई को छू रहा था। आदित्य ने उसकी गांड में अपने लंड को और गहरे तक धकेला, और अनुश्री की सिसकियाँ चीखों में बदल गईं। सूरज ने अनुश्री के बाल पकड़कर अपने मोटे लंड को उसके मुँह में और गहरे तक डाला, और अनुश्री ने उसे चूसते हुए सिसकियाँ भरीं। “तेरे मुँह में मेरा मोटा लंड कितना अच्छा लग रहा है,” सूरज ने कराहते हुए कहा।

चुदाई का ये खेल घंटों चला। अनुश्री की चूत, गांड, और मुँह तीनों मर्दों के लंड से भरे थे। करण ने अनुश्री की चूत में अपने लंड को और तेज़ी से चलाया, और आखिरकार उसकी चूत में अपनी गर्मी छोड़ दी। आदित्य ने उसकी गांड को चोदते हुए अपने लंड का रस उसकी गांड में छोड़ा। सूरज ने अनुश्री के मुँह से अपना मोटा लंड निकाला और उसकी चूचियों पर अपनी गर्मी बिखेर दी। अनुश्री का जिस्म पसीने, चुदाई, और तृप्ति से गीला था।

उस रात अनुश्री ने तीनों को एक सेक्सी मुस्कान दी और फुसफुसाया, “तुम्हारे लंडों ने मेरी चूत और गांड को यादगार बना दिया।” करण, आदित्य, और सूरज ने उसे अपनी बाहों में लिया, और बारिश की ठंडी रात में उनकी चुदाई की गर्मी सुबह तक बाकी थी।

पति के दोस्त ने शराब पिलाकर मुझे चोदा पूरी रात

मेरा नाम मनीषा है और मैं एक सरकारी डिपाटमेंट में काम करती हूँ। मेरा पति भी एक कंपनी में इंजीनियर है। शादी हुए अभी मात्र एक साल ही हुए है पर मुझे भी एक इंसान जो की मेरे पति के दोस्त हैं उनको मैं पसंद करने लगी हूँ। और उन्होंने मुझे एक रात शराब पिला कर पूरी रात मेरे साथ रंगरेलियां मनाया और मैं भी उनका साथ दी क्यों की उनका जो स्टाइल चोदने का था और मेरे जिस्म के साथ खेलने का था वो बड़ा ही रोमांटिक था। इसलिए मैं भी इस जनवरी की रात में खूब मजे ली। अब बिना देर किये आपको पूरी कहानी सुनाने जा रही हूँ।

ये कहानी ज्यादा दिन की नहीं है मात्र आज से चार दिन पहले की है। असल में जिस फ्लैट में मैं रहती हूँ उसकी बिल्डिंग के निचे वो रहते हैं। उनकी पत्नी मायके गयी है क्यों की उनके पापा का तबियत ख़राब है। मेरे पति ऑफिस के काम से बंगलुरु गए है तो अपने घर में सिर्फ मैं ही हूँ। तो हुआ यूँ की जब मेरे पति रहते थे और उनकी वाइफ रहती थी तो हम लोग आपस में मिलते थे एक दूसरे के यहाँ पार्टी करते थे और शराब पीते थे। क्यों की मैं भी शराब पीती हु मेरे पति भी पीते है और रमेश जी भी पीते हैं उनकी वाइफ नहीं पीती है।

पर वो बैठी जरूर रहती है जब तक हम तीनो पीते है। तो जब रमेश जी की पत्नी नहीं है यहाँ और मेरे पति भी बाहर हैं तो रूटिंग हम दोनों का ही ख़राब हो गया है। क्यों जब मैं रमेश जी को फ़ोन कर के पूछी की आजकल खाना पीना कैसे हो रहा है तो वो बोले की आजकल तो बाहर से ही खाना मांगा लेते है। और मैं भी आजकल ऐसा ही कर रही उन घर में मैं ऐसे भी नहीं बनाती हूँ और पति नहीं है तो बाहर ही खा लेती हूँ या जोमाटो से माँगा लेती हूँ।

एक दिन की बात है उनका फ़ोन आया और उन्होंने बोला की क्या कर रही हो आप आज। तो मैंने कह दिया कुछ नहीं तो रमेश जी बोले मैं दो दिन की छुट्टी पर हूँ सर्दी है इसलिए तो मैंने सोचा आज रात को चिकन लाते हैं और रम का बोतल लाते हैं और एन्जॉय किया जाये। तो आ भी आइये मिलकर एन्जॉय करते हैं। तो मैं बोली पति तो हैं नहीं और पति के बिना रात में जाना अच्छी बात नहीं है। तो उन्होंने कहा उनको कहने कौन जा रहा है की आप मेरे यहाँ पार्टी कर रही हैं। मुझे भी लगा अरे हां वो तो यहाँ हैं नहीं।

तो मैंने कहा ठीक है फिर आज रात का रखते हैं आपके ही फ्लैट पर मैं जल्दी आ जाउंगी ऑफिस से और मैं करीब चार बजे ही उस दिन आ गयी। घर आकर कुछ काम था और करीब सात बजे शाम को मैं रमेश जी के फ्लैट पर चली गयी। उनका कमरा काफी गर्म हो गया था हीटर चला कर। और वो चिकन बना रहे थे। वो मेरा ही इंतज़ार कर रहे थे।

जाते ही उन्होंने तुरंत दो ग्लास निकाला और भुजते हुए चिकन हम दोनों चिकन टेस्ट किये और फिर एक एक पेग ले लिए। फिर धीरे धीरे अपनी अपनी बात करने लगे। अपने सुख दुःख की बात करने लगे और हम दोनों ही काफी एक दूसरे के बातों को समझने लगे मुझे ही काफी हल्का महसूस होने लगा क्यों की मैं अपनी दिल की बात को उनके सामने रखी.

खाना खाने का टाइम हो गया तो हम दोनों टेबल पर खाना निकाले और खाना खाते हुए पेग बना बना कर पीने लगे। खाते पीते करीब ग्यारह बज गए थे। अब उन्होंने अपनी सेक्स लाइफ पर बात करने लगे कहने लगे की मेरी वाइफ ज्योति मुझे संतुष्ट नहीं कर पाती है सेक्स में वो बहुत जल्दी थक जाती है।

और मेरे साथ उल्टा था मेरा पति जल्दी थक जाता है। तो मैंने कहा मेरा पति जल्दी थक जाता है जब मैं गरम होती हूँ तब तक वो ठंढा हो जाता है। ये सुनकर रमेश जी चहक उठे बोले बताइये हम दोनों के साथ एक जैसी समस्या है। फिर उन्होंने पेग बनाया और हम दोनों ने एक एक पेग फिर लिए।

मुझे नशा आने लगा था एक बार जैसी ही उठी पानी लेने के लिए मैं लड़खड़ा गयी और उन्होंने मुझे अपनी बाहों में थाम लिया। मैं भी उनके कंधे पर अपना सर रख दी उन्हों मुझे सहलाया तो मेरे तन बदन में आग लग गयी। मैंने जब उनकी तरफ देखा तो उनके होठ हिल रहे थे और आँखे मेरे होठ को घूर रही थी। मैंने उनके होठ पर किस कर लिया।

इतना होते ही हम दोनों का प्यार परवान चढ़ गया। मैं पानी पी और उन्होंने अपनी बाहों में ले लिया वो मेरे पीठ को सहलाते हुए मेरे ब्रा को महसूस कर रहे थे अपनी उँगलियों से मेरा गदराया हुआ बदन मचल रहा था। हम दोनों ने ही एक दूसरे को गले से लगा लिया और फिर एक दूसरे को चूमने लगे। वो मुझे मैं उन्हें। आप हम दू के लिप लॉक हो गए थे। उनका जीभ मेरे मुँह में और मेरा जीभ उनके मुँह में।

हम दोनों बैडरूम में चले गए उन्होंने मुझे लिटा दिया और मेरे कपडे उतार दिए पूरा फ्लैट ऐसे ही गर्म था तो ज्यादा ठण्ड नहीं लग रही थी हीटर की वजह से। मैंने उनका लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी। उन्होंने अपना कपड़ा उतार दिया तो लंड देखकर मैं पागल हो गयी करीब नौ इंच का मोटा लंड ऊपर की तरफ मुँह ओह्ह्ह्हह्ह ऐसा लग रहा था की झंडा का डंडा रहे।

मैं तुरंत ही अपने मुँह में ले ली और चूसने लगी उन्होंने मेरे बाल को पकड़ पर चुसवाने लगे। ओह्ह्ह्हह्हह मजा आने लगा था ऊपर से नशा और फिर लंड चूसने का नशा। उन्होंने मुझे लेटने को कहा और मैं लेट गयी वो ऊपर मेरे से अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया और चोदने लगे बार बार वो लंड को मुँह से निकाले फिर डालने उनका लंड काफी गीली हो गयी थी मेरी थूक से। अब उन्होंने निचे आकर दोनों मेरी बड़ी बड़ी टाइट और सुडौल चूचियों को मसलना और पीना शुरू किया।

फिर निप्पल को अपनी उनलगी से रगड़ते तो मैं गांड उठा लेती क्यों की वसना मेरी भड़क जाती। फिर उन्होंने मेरी दोनों चूचियों के बिच में अपना लंड डालते और दोनों तरफ से बूब्स को दबाते और अंदर बाहर अपने लंड को करते। ओह्ह्ह्हह्हह ये भी मजेदार था ऐसा कभी भी मेरे पति नहीं किया था ये नया था।

अब उन्होंने निचे जाकर दोनों पैरों को अलग अलग किया और मेरी गीली चूत को चाटने लगे। मेरा पति भी ऐसा चाटता था पर रमेश जो तो नाक भी अंदर दे रहे थे। और बार बार अपनी जीभ से चूत को मलाई को चाट जाते फिर तेज तेज ऊँगली घुसाने लगते। और फिर चाट जाते। ओह्ह्ह्हह्ह मैं आहा ओह्ह ओह्ह्ह आह आह आह वफ्फ ओफ़्फ़्फ़ की आवाज निकालते हुए खुद ही अपनी चूचियों को मसलने लगती।

उन्होंने फिर मुझे पलट दिया और पीठ को खूब चाटा। उन्होंने मेरी गांड के छेद को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया तो मेरे मुँह से सिसकारियां निकलने लगी। ऐसा भी पहली बार हो रहा था। ऐसा कभी भी मेरे पति ने नहीं किया था। फिर क्या बताऊँ दोस्तों मैं तो पागल होने लगी। वो उठे फिर से दो पेग बना लिए एक मुझे पिलाया और खुद पिये और जो बचा वो मेरी गांड में और चूत में डालकर फिर से चाट गए।

उसके बाद शुरू हो गया असल का खेला। अपना लंन्ड मेरी चूत के मुँह पर रखा और जोर से घुसा दिया। जिसे ही लंड मेरी चूत में गया मैं छटपटा गयी क्यों की लंड और भी मोटा हो गया था। पर मैं भी कम नहीं थी। जोर जोर से उनके लंड को अंदर बाहर लेने लगी अपना गांड खुद गोल गोल घुमाकर। वो भी कम हरामी नहीं थे। दोनों हाथ से मेरी दोनों चूचियों को मसलना शुरू किया और जोर जोर से धक्के भी देने लगे।

अब कमरे में फच फच और आआह्ह्ह आआअह्ह्ह्ह की आवाज आने लगी और दोनों दोनों ही शराब के नशे में एक दूसरे को साथ देने लगे। वो मुझे दारु पिला पिला कर खुब चोदा पूरी रात चोदा। मुझे भी उन्होंने संतुष्ट किया और मैं भी उनको संतुष्ट की। उनको जो जो अच्छा लगा पोज और जैसे उनको चोदने का मन था मैं वो सब करने दी कोई चीज मना नहीं की।

मैं भी संतुष्ट हुई वो भी संतुष्ट हुए अभी रोजाना हम दोनों रात को साथ में ही रहते हैं। और रात भर हम दोनों दारु पी पी कर चुदवाती हूँ और वो मुझे चोदते हैं।

नौकरानी की juicy चूत और गोल गाँड का मजा लिया पूरे वीकेंड

मेरी ये कहानी हाईटि की है, जब मैं सिर्फ 18 साल का लड़का था। अब मैं 34 का हूँ और अमेरिका में सेटल्ड हूँ। HSS की कहानियाँ पढ़-पढ़कर मन हुआ कि अपनी असली घटना भी शेयर करूँ। गिसेल हमारी घर की मदद करने वाली थी – 21 साल की, डार्क शाइनिंग स्किन, भारी-भारी और टाइट ब्रेस्ट्स, पतली कमर और नीचे वो गोल-मटोल onion ass जो हर बार झुकते वक्त मुझे पागल कर देती थी। घर में सब एक ही बड़े कमरे में सोते थे, कोई प्राइवेसी नहीं। मेरा क्वीन साइज बेड सबसे पीछे था।

एक सुबह मैं जल्दी उठा तो देखा गिसेल मेरे बगल में लेटी हुई है। उसकी नंगी जाँघ मेरी जाँघ से छू रही थी, साँसें धीरे-धीरे मेरे गाल पर पड़ रही थीं। दिल जोर से धड़कने लगा, लेकिन मैं चुपचाप उठकर अपनी वर्कआउट पर चला गया। घर लौटकर भी उसका ख्याल मन से नहीं हट रहा था। स्कूल में दिन भर यही सोचता रहा कि वो मेरे बेड पर क्यों आई? लेकिन कुछ दिन बीत गए, वो फिर नहीं आई। मैंने सोच लिया शायद नींद में गलती से आ गई होगी।

उस वक्त मेरा पूरा ध्यान पड़ोस की गोरी-सी लड़की पर था। मैं उसके घर घंटों बैठता, कविताएँ लिखकर देता, लेकिन वो बस मुस्कुराती रहती। स्कूल के दोस्त servant girls के साथ अपनी stories सुनाते और कहते, “भाई servant pussy सबसे स्वादिष्ट होती है।” मैं उन्हें सुनकर मुस्कुरा देता, सोचता कि मैं तो ऊँचे स्टैंडर्ड वाली लड़की चाहता हूँ। लेकिन किस्मत ने मुझे गिसेल के पास ले आया।

फ्राइडे को स्कूल जल्दी छूटा। मैंने घर फोन किया और बोला कि वीकेंड बेस्ट फ्रेंड के घर बिताऊँगा। दोस्त के घर पहुँचकर Sega खेलते-खेलते रात हो गई। अचानक नींद खुली तो देखा मेरा दोस्त अपनी servant को doggy style में चोद रहा है। लड़की की आहें और उसके हाथों का पकड़ना… सब देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया, लेकिन मैंने चुपचाप आँखें बंद कर लीं।

अगली सुबह गुस्सा मन में लेकर घर लौट आया। घर बिल्कुल खाली था। बैग फेंका और सीधा लिविंग रूम में मूवी लगाने चला। पेशाब करने बाथरूम गया तो… ओह माय गॉड! गिसेल बिल्कुल नंगी खड़ी थी, शावर लेने वाली थी। उसकी काली चमकदार स्किन पर पानी की बूँदें, भारी ब्रेस्ट्स जिनके गुलाबी-काले निप्पल्स सख्त हो चुके थे, पतली कमर, और नीचे हल्के-हल्के बालों वाला juicy pussy। देखते ही मेरे शरीर में बिजली दौड़ गई।

वो चौंककर मुड़ी, लेकिन भागी नहीं। उसकी आँखों में शर्म के साथ एक गहरी चाहत थी। मैं धीरे-धीरे उसके पास गया, उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ा और उसे अपने सीने से चिपका लिया। “गिसेल…” मैंने फुसफुसाया। उसने हल्का सा सिर हिलाया, जैसे इजाजत दे रही हो। मैंने झुककर उसका एक ब्रेस्ट मुँह में ले लिया। निप्पल को जीभ से घुमाते हुए, धीरे-धीरे चूसने लगा। दूसरा ब्रेस्ट हाथ में दबाते हुए मसल रहा था। गिसेल की साँसें तेज हो गईं, उसने मेरी पीठ पर नाखून गड़ा दिए और हल्के से कराह उठी – “आह… Maxi…”

मैं रफ्तार धीमी रखे हुए था। उसके ब्रेस्ट छोड़कर नीचे झुका, उसकी गहरी नाभि में जीभ घुमाई। अंदर बाहर करते हुए चूसने लगा। वो आँखें बंद करके सिर पीछे झुका लेती, शरीर काँप रहा था। मैंने थोड़ा पीछे हटकर उसे पूरा निहारा – क्या खूबसूरत मास्टरपीस थी! काली चमकती देह, भरे हुए स्तन, चिकनी जाँघें और वो साफ-सुथरा pussy।

मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए। मेरा लंड पूरा खड़ा, नसें फूली हुई। “गिसेल, आओ…” मैंने टब की तरफ इशारा किया। वो बिना कुछ बोले मेरे साथ अंदर आ गई। मैंने शावर ऑन किया, गुनगुना पानी दोनों के शरीर पर बहने लगा। मैंने उसे सावधानी से शेव किया, हर बाल साफ करते हुए। अब उसका pussy बिल्कुल स्मूद, गुलाबी और चमकदार हो गया।

मैं घुटनों पर बैठ गया, उसकी एक टांग अपने कंधे पर रखी और अपना मुँह उसके गीले, गरम छेद पर लगा दिया। जीभ से क्लिट को हल्के-हल्के फ्लिक करते हुए, कभी पूरा मुंह लगाकर चूसते हुए, कभी जीभ अंदर डालकर घुमाते हुए। पानी उसके ब्रेस्ट्स पर बह रहा था, वो मेरे बालों में हाथ फेर रही थी और लगातार कराह रही थी – “हाँ… वहाँ… धीरे… Maxi… आह!” उसका शरीर तन गया, जाँघें मेरे कंधे को जकड़ लीं और वो जोर से झड़ गई। पहली बार उसका रस मेरे मुंह में आया – मीठा और गर्म। मैंने उसे सहारा दिया, वो मेरी छाती पर सिर रखकर भारी-भारी साँसें ले रही थी।

“ये… पहली बार था… इतना मजा कभी नहीं आया,” वो हाँफते हुए बोली। मैंने पूछा तो पता चला कि वो पहले लोकल लड़कों के साथ थी, लेकिन किसी ने इतना प्यार और ध्यान नहीं दिया। फिर उसने बताया कि घर के बाकी सब लोग countryside गए हैं, सिर्फ वो रह गई थी ताकि मैं जल्दी आ गया तो घर खाली न पड़े। सुनकर मेरे मन में खुशी की लहर दौड़ गई – पूरे तीन दिन सिर्फ हम दोनों!

हम शावर से निकले, शरीरों पर पानी की बूँदें चमक रही थीं। मैंने उसे गोद में उठाया, उसके गोल गाँड को सहलाते हुए बेडरूम ले गया और बेड के बीच में लिटा दिया। उसकी टाँगें फैलाईं। गिसेल मुस्कुराई, मेरे मोटे लंड को नरम हाथों में पकड़ा और बोली, “इतना बड़ा और मोटा… उम्र से ज्यादा gifted हो तुम।” मैंने हँसते हुए कहा, “अब देखो इसे कैसे यूज करता हूँ।”

वो खुद ही मेरे लंड को अपने गीले, चिकने छेद पर रगड़ने लगी। मैं धीरे-धीरे अंदर घुसा। वो आह भरकर मेरी कमर को जकड़ ली। पूरा अंदर जाने पर मैं रुक गया, उसे आदत होने दिया। फिर हल्के-हल्के धक्के देने लगा, हर थ्रस्ट में उसके क्लिट पर रगड़ लगाते हुए। 15-20 मिनट बाद उसका शरीर फिर तन गया, आँखें बंद, मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं और वो जोर से झड़ गई – इस बार चुदाई के साथ पहली बार। उसकी चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी, बहुत गर्म और गीली।

उसके बाद हम रुके नहीं। missionary में, फिर doggy में – उसके गोल गाँड को पकड़कर जोर-जोर से थपथपाते हुए। Cowgirl में वो ऊपर बैठकर खुद राइड कर रही थी, ब्रेस्ट्स उछल रहे थे। Spooning में पीछे से चिपककर, उसके कान में फुसफुसाते हुए। शावर में दोबारा, किचन काउंटर पर, सोफे पर – हर जगह। कभी वो मेरे लंड को मुँह में लेती, गहरी तक चूसती, कभी मैं उसके pussy को घंटों चाटता।

तीन दिन तक हमने एक-दूसरे को बार-बार चखा। वो हर बार खुद माँगती – “और करो… गहरा… हाँ… मुझे भर दो…” मैं भी पूरी तरह उसकी हो गया था। उसके ब्रेस्ट्स चूसना, गाँड सहलाना, पसीने से भीगी देह चूमना – सब स्वर्ग जैसा लग रहा था।

जब घर वाले लौटे तो हम दोनों की नजरें मिलती तो चुपके से मुस्कुरा देते। वो अब भी मेरी सबसे हॉट और यादगार यार है।

सख्त भाभी को नौकर गोविंद ने बनाया अपनी रंडी

मेरा नाम अंकित है। मैं अठारह साल का जवान लड़का हूँ, कॉलेज का पहला साल चल रहा है। घर में भैया-भाभी के साथ रहता हूँ। भैया अक्सर बाहर रहते हैं, काम की वजह से। और घर की मालकिन हैं मेरी सुनीता भाभी – पैंतीस साल की, लेकिन देखने में पच्चीस की लगती हैं। गोरी-दूधिया रंग, मोटी-मांसल बदन, कसी हुई कमर, भारी-भारी नितंब और सबसे खास – उनके बड़े-बड़े, लटकते हुए स्तन। साड़ी पहनती हैं तो उनकी चूचियाँ ब्लाउज फाड़ने को तैयार रहती हैं। पूरे घर में सब उनसे डरते हैं। भैया भी उनकी सख्ती से परेशान रहते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा परेशान है हमारा नौकर गोविंद।

गोविंद तेईस साल का है – लंबा, तगड़ा, काला-कलूटा लेकिन बेहद मर्दाना। चौड़ी छाती, मोटी बाहें, और उसकी पैंट के अंदर जो उभार दिखता है, वो किसी भी औरत को पागल कर सकता है। भाभी उसे हर छोटी-मोटी बात पर डाँटतीं। “गोविंद, ये काम नहीं किया?” “गोविंद, कितनी बार बोलूँ?” कभी-कभी तो बिना वजह ही झाड़ लगातीं। गोविंद चुपचाप सब सह लेता, लेकिन उसके अंदर आग जल रही थी। मैंने कई बार देखा था – भाभी जब झुककर कुछ उठातीं, तो गोविंद की नजरें उनकी गांड पर टिक जातीं। या जब भाभी साड़ी संवारतीं तो उनकी चूचियों पर उसकी आँखें चिपक जातीं।

एक दोपहर की बात है। भैया किसी दोस्त से मिलने बाहर गए हुए थे। गर्मी का मौसम था, पंखा भी तेज चल रहा था। मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था, मोबाइल पर कुछ देख रहा था। अचानक ड्रॉइंग रूम से भाभी की तेज, सख्त आवाज आई – “गोविंद! इधर आ!” मैंने दरवाजा थोड़ा सा खोलकर झाँका। गोविंद खड़ा था, सिर झुकाए। भाभी उसे कुछ काम न करने की वजह से बुरी तरह डाँट रही थीं। उनकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था, ब्लाउज से उनकी भारी चूचियाँ उभरी हुई दिख रही थीं।

अचानक गोविंद ने आगे बढ़कर भाभी के घने, काले बालों को हल्के से पकड़ लिया। भाभी चौंक गईं। “क्या कर रहा है तू? पागल हो गया है? छोड़ मुझे!” उनकी आवाज में गुस्सा था, लेकिन गोविंद की आँखों में आज कुछ और ही चमक थी – वो दबी हुई भूख जो सालों से जल रही थी। वह धीरे से, लेकिन दृढ़ता से बोला, “मालकिन… बहुत दिन से तुम्हारी सख्ती सह रहा हूँ। तुम्हारी चीखें, तुम्हारी डाँट… अब बस। आज मेरी बारी है।”

भाभी ने हाथ-पैर मारे, विरोध किया, “छोड़! मैं चीख दूँगी!” लेकिन गोविंद ने उन्हें दीवार से सटाकर खड़ा कर दिया। उसका एक हाथ उनके बालों में था, दूसरा हाथ उनकी कमर पर, उन्हें अपनी तरफ खींचे हुए। उसने धीरे-धीरे भाभी की गरदन पर होंठ रख दिए, फिर चूमने लगा। भाभी काँप गईं, “नहीं… गोविंद… ये पाप है… छोड़ दे…” लेकिन उनकी साँसें तेज हो चुकी थीं। गोविंद ने उनकी बातों को अनसुनी कर दिया। उसने भाभी की ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोलने शुरू कर दिए।

बटन खुले। भाभी की भारी-भारी, गोरी-गोरी चूचियाँ काले रंग की ब्रा में कैद दिखाई देने लगीं। गोविंद ने ब्रा का हुक खोला और नीचे सरका दिया। बाहर आ गईं दोनों बड़े-बड़े, गुलाबी निप्पल वाली चूचियाँ – भारी, नरम, हिलती हुई। गोविंद ने एक चूची को हथेली में भर लिया और हल्के से दबाया। भाभी के मुँह से अनायास ही “आह्ह्ह…” निकल गया। “देखो मालकिन,” गोविंद मुस्कुराया, “तुम्हारा बदन कितना प्यासा है… कितने दिन से ये चूचियाँ मेरे मुँह को तरस रही थीं।”

उसने झुककर एक चूची को मुँह में ले लिया। धीरे-धीरे चूसने लगा, जीभ से निप्पल को घुमाने लगा, काटने लगा। भाभी की साँसें और तेज हो गईं। उन्होंने विरोध में हाथ मारा, लेकिन गोविंद ने दूसरे हाथ से उनकी दूसरी चूची को जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया। भाभी की आँखें बंद हो गईं। “उफ्फ़… गोविंद… मत करो… आह्ह्ह… ओह्ह… हाँ…” उनकी आवाज में अब दर्द नहीं, बल्कि प्यास थी।

गोविंद ने भाभी को धीरे से फर्श पर लिटा दिया। उनकी साड़ी ऊपर सरकाई। भाभी की मोटी, चिकनी, गोरी जाँघें और सफेद पैंटी दिख गई। गोविंद ने पैंटी को एक झटके में उतार दिया। भाभी की बिना बाल वाली, गुलाबी-गुलाबी चूत अब पूरी तरह नंगी थी – थोड़ी सी गीली हो चुकी थी। गोविंद ने अपनी उँगली से हल्के से चूत की फाँक को छुआ। भाभी काँप उठीं, “नहीं… वहाँ मत छू… आह्ह्ह…” लेकिन गोविंद ने झुककर चूत की ऊपरी फाँक को चाटना शुरू कर दिया। जीभ अंदर-बाहर करने लगा, चूसने लगा। भाभी अब खुद ही जाँघें फैला रही थीं। “आह्ह्ह… गोविंद… क्या कर रहा है… उफ्फ़… हाँ… यही… और गहरी… आह्ह्ह… मैं पागल हो रही हूँ…”

गोविंद ने अपनी पैंट उतार दी। उसका लंड – मोटा, लंबा, करीब नौ इंच का, काला और नसों वाला – खड़ा होकर तन गया था। भाभी की आँखें फैल गईं। “इतना बड़ा… नहीं… ये अंदर नहीं जाएगा…” लेकिन गोविंद ने भाभी को टेबल पर झुकाया। भाभी अब खुद ही अपनी साड़ी ऊपर कर रही थीं। गोविंद ने लंड का सिरा भाभी की चूत पर रगड़ा, फिर धीरे-धीरे अंदर डाल दिया। भाभी की चूत पूरी तरह भर गई। “आआह्ह्ह्ह… कितना मोटा है… उफ्फ़… गोविंद… फट जाएगी मेरी चूत… आह्ह्ह…”

गोविंद ने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। हर धक्के के साथ भाभी की भारी चूचियाँ जोर-जोर से हिल रही थीं। भाभी अब चीख नहीं, मोहक आहें भर रही थीं – “हाँ… और जोर से… आह्ह्ह… चोद मुझे… मैं तेरी हूँ आज… तेरी रंडी हूँ…” गोविंद ने रफ्तार बढ़ाई। भाभी की चूत से चिकनाई निकल रही थी, आवाजें “पच-पच” कर रही थीं। उसने भाभी की कमर पकड़कर पीछे से तेज-तेज धक्के मारे। भाभी की मोटी गांड हर धक्के पर लहरा रही थी। “आह्ह्ह… गोविंद… मैं तेरी गुलाम हूँ… जो कहेगा वो करूँगी… बस मत छोड़ना… चोदते रहो मुझे…”

गोविंद ने भाभी को उठाकर अपनी गोद में ले लिया। भाभी ने अपनी दोनों जाँघें गोविंद की कमर पर लपेट लीं। लंड अब भी चूत के अंदर था। गोविंद उन्हें उठाकर किचन तक ले गया। वहाँ काउंटर पर बिठाकर बिना रुके चोदता रहा। भाभी का बदन पसीने से तर था। उनकी चूचियाँ गोविंद के सीने से रगड़ खा रही थीं। “हाँ… किचन में ही चोद… मैं तेरी हूँ… आह्ह्ह…”

फिर स्टोर रूम में ले जाकर गोविंद ने भाभी को दीवार से सटाकर खड़ा किया और पीछे से फिर चोदने लगा। भाभी अब पूरी तरह टूट चुकी थीं। वे खुद पीछे गांड हिला रही थीं। “हाँ… मेरी गांड भी मार… मैं तेरी रंडी हूँ आज…” गोविंद ने भाभी की गांड पर हल्के से थपकी मारी और लंड को चूत से निकालकर गांड के अंदर सरका दिया। भाभी ने पहले हल्का सा “आह्ह्ह…” कहा, फिर खुद ही गांड पीछे की ओर धकेलने लगीं। “उफ्फ़… दर्द हो रहा है… लेकिन अच्छा लग रहा है… और गहरी… चोद मेरी गांड…”

मैं सब कुछ अपने कमरे से छिपकर देख रहा था। मेरा लंड पत्थर की तरह खड़ा हो गया था। भाभी को इस हालत में देखकर मुझे यकीन नहीं हो रहा था – वही सख्त मालकिन, जो कभी किसी को नहीं मानती थीं, आज नंगी होकर गोविंद के लंड पर चढ़ी हुई चीख-चीख कर चुद रही थीं।

बाथरूम में भी उन्होंने चुदाई की। गोविंद ने भाभी को शावर के नीचे खड़ा करके चोदा। पानी उनके बदन पर बह रहा था। भाभी की चूचियाँ चमक रही थीं, पानी की बूँदें उनकी निप्पल से टपक रही थीं। गोविंद ने भाभी को घुटनों पर बैठाकर अपना लंड मुँह में दिया। भाभी ने बिना हिचकिचाहट चूसना शुरू कर दिया – गला भरकर, जीभ घुमाकर। “मुझे पिला दो… सब पिला दो…” गोविंद ने भाभी के मुँह में ही जोर-जोर से झड़ दिया। भाभी ने सारा गाढ़ा, गर्म रस पी लिया, एक बूँद भी नहीं छोड़ी।

फिर बेडरूम में आखिरी राउंड। गोविंद ने भाभी को कुत्ते की तरह बनाया। भाभी ने खुद साड़ी ऊपर करके अपनी मोटी, सफेद गांड फैला दी। गोविंद ने लंड चूत में डाला और तेज-तेज चोदने लगा। भाभी चीख रही थीं – “आह्ह्ह… मार डाला… हाँ… और जोर से… मैं तेरी गुलाम हूँ गोविंद… हमेशा तेरी रहूँगी… चोदते रहो मुझे… कभी मत छोड़ना…” गोविंद ने भाभी की चूचियों को पीछे से पकड़कर खींचा और आखिरी बार जोरदार झटके दिए। दोनों एक साथ झड़ गए – भाभी की चूत से रस बह रहा था, गोविंद का लंड उनके अंदर दूध उगल रहा था।

उस दिन के बाद भाभी पूरी तरह बदल गईं। अब वे गोविंद को कभी नहीं डाँटतीं। बल्कि जब भी मौका मिलता, भाभी खुद गोविंद को बुलातीं – “गोविंद… कमरे में आ…” और चुपके से उससे चुदवातीं। कभी किचन में खड़े-खड़े, कभी बाथरूम में शावर के नीचे, कभी बेडरूम में पूरी रात। मैं सब छिपकर देखता रहता। भाभी अब खुशी-खुशी गोविंद की गुलाम बन गई थीं – और ये गुलामी उन्हें बहुत पसंद आ रही थी। उनकी आँखों में अब वही पुरानी सख्ती नहीं, बल्कि एक नई चमक थी – चुदाई की चमक।

और मैं… मैं रोज देखता हूँ और सोचता हूँ – काश मैं भी गोविंद की जगह होता। लेकिन फिलहाल, ये गुप्त तमाशा देखकर ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है।

घर की सफाई वाली लड़की से जंगली चुदाई

मेरा नाम जफर है, उम्र 22 साल, और मैं दिल्ली में रहता हूँ। मैं जिम में रेगुलर वर्कआउट करता हूँ, इसलिए मेरा बॉडी फिट और आकर्षक है—चौड़े कंधे, टोन्ड एब्स, और गोरा रंग जो लड़कियों को इम्प्रेस कर देता है। और हाँ, मेरा 7 इंच का टूल हमेशा तैयार रहता है, मोटा और नसों वाला, जो लॉकर रूम में भी सबकी नजरें खींच लेता है। लेकिन चलो, सीधे कहानी पर आते हैं, बिना किसी फालतू की बात के।

हमारे घर में एक सर्वेंट आंटी आती थीं, जो अपनी बेटी के साथ सफाई का काम करतीं। आंटी की बेटी, इकरा, 20 साल की थी, और वो हमारे घर की सफाई करके पड़ोस के दूसरे घरों में चली जाती। वो गोरी-चिट्टी थी, स्मार्ट फिगर वाली—क्या बताऊँ, उसकी कमर पतली, हिप्स गोल और भरे हुए, और ब्रेस्ट्स फुल और पर्की, जो उसके सिंपल सलवार कमीज में भी उभरकर दिखते थे। उसका चेहरा इतना क्यूट था—बड़ी-बड़ी आँखें, मुलायम होंठ, और जब वो चलती तो उसकी चाल में एक सेक्सी स्विंग होता, जो दिल की धड़कन तेज कर देता। वो इतनी सेक्सी लगती कि बस देखते ही मन करता उसे छू लूँ। मैं अक्सर सोचता कि काश उसके साथ कुछ हो जाए।

मॉम अक्सर बाहर जातीं—कभी शॉपिंग, कभी रिश्तेदारों के यहाँ—और तब घर में मैं और इकरा अकेले रह जाते। मैं मौके का फायदा उठाता, आने-जाने में उसकी बॉडी को हल्के से टच करता। जैसे जब वो किचन में बर्तन धो रही होती, मैं ग्लास लेने के बहाने उसके पीछे से गुजरता और मेरा हाथ उसकी अस पर ब्रश हो जाता—उसकी नरम, गोल गांड की फीलिंग इतनी अच्छी लगती कि मेरा लंड तुरंत खड़ा हो जाता। वो पीछे मुड़कर शरमाती हुई मुस्कुराती, लेकिन कभी मना नहीं करती। मैं जानता था कि वो भी मुझे नोटिस करती है, उसकी आँखों में वो चमक थी जो बताती कि इंटरेस्ट दोनों तरफ से है।

एक दिन मॉम को किसी रिश्तेदार के घर जाना था, घर में कोई नहीं था, और मैं ट्यूशन गया हुआ था। जाते वक्त मॉम ने कहा, “जफर, टाइम पर घर आ जाना, इकरा अकेली होगी।” उस दिन हमने इकरा को घर नहीं जाने दिया, ताकि वो खाना बना सके। हमारा घर कभी लॉक नहीं होता था, क्योंकि कोई न कोई हमेशा रहता। इसलिए उसे रोक लिया गया। मैं ट्यूशन से जल्दी फ्री हो गया—उस दिन मैंने सोचा कि आज उसके साथ कुछ स्पेशल टाइम स्पेंड करूँगा, शायद वो मोमेंट आए जो मैं इंतजार कर रहा था। घर पहुँचा तो वो किचन में चावल साफ कर रही थी। उसने चोले भिगो रखे थे खाना बनाने के लिए। मैंने कहा, “इकरा, ऊपर आओ ना, मैं तुम्हें कुछ अच्छा म्यूजिक सुनाता हूँ। मॉम आने से पहले खाना बना लेना।” मैं भूल गया बताना कि उसे म्यूजिक बहुत पसंद था, वो अक्सर काम करते हुए गुनगुनाती रहती। वो हिचकिचाई, लेकिन मेरी बात मान ली और कंप्यूटर रूम में आ गई।

वहाँ पहुँचकर मैंने उससे कैजुअल बातें शुरू कीं—कैसे हो, क्या चल रहा है, वगैरह। बातों-बातों में मैंने कंप्यूटर पर सेव्ड कुछ सेक्सी पिक्चर्स ओपन कर दीं—हॉट मॉडल्स की इमेजेस, जो थोड़ी बोल्ड थीं। वो चौंक गई, “ये क्या खोल दिया आपने, जफर?” मैंने मुस्कुराकर उसका बाजू पकड़ा, धीरे से उसे पास के बेड पर लिटा दिया। वो शरम से लाल हो गई, लेकिन विरोध नहीं किया। मैंने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और प्यार से उसके होंठों पर किस करना शुरू किया। उसके होंठ इतने मुलायम थे, जैसे मखमल, और वो पहले तो थोड़ा पीछे हटी, लेकिन फिर सरेंडर कर दी। मैं जानता था कि वो भी मुझे पसंद करती है—हमारी आँखों में वो स्पार्क था, जो बताता कि ये म्यूचुअल है। किस करते-करते मैंने उसके बूब्स को सॉफ्टली प्रेस करना शुरू किया, उसके दुपट्टे को साइड किया और कमीज ऊपर उठाने लगा। वो मुस्कुरा रही थी, जैसे कह रही हो कि ये सब अच्छा लग रहा है, जारी रखो।

फिर मैंने उसकी कमीज उतार दी, उसके ब्रेस्ट्स अब मेरे सामने थे—गोरे, फर्म, और निप्पल्स पिंकिश ब्राउन, जो उत्तेजना से सख्त हो चुके थे। मैंने उसके बूब्स पर किस किए, जीभ से चाटा, और बॉडी पर हाथ फेरने लगा—उसकी कमर से लेकर हिप्स तक। वो अब चुप हो गई थी, बस एंजॉय कर रही थी, उसकी साँसें तेज हो रही थीं। मैंने उसकी ब्रा अनहुक की और निप्पल्स को मुँह में लेकर चूसने लगा, हल्के से काटा भी। अब उसे मजा आने लगा था, उसके मुँह से धीमी-धीमी आहें निकल रही थीं, “आह्ह्ह… उह्ह्ह… जफर…” और वो मेरे बालों में उंगलियाँ फेर रही थी, मुझे और करीब खींच रही। किस करते-करते मैंने उसकी शलवार का नाड़ा ढीला किया और नीचे खींचना शुरू किया। मैं उसके ऊपर लेटा था, हमारी बॉडीज एक-दूसरे से चिपकी हुईं। शलवार थोड़ी नीचे करने के बाद मैंने उसे उठाया और पूरी उतार दी। नीचे उसने कुछ नहीं पहना था—उसकी चूत साफ, गुलाबी, और पहले से ही गीली हो चुकी थी। अब वो मेरे सामने पूरी न्यूड थी, उसकी बॉडी परफेक्ट थी, जैसे कोई स्कल्प्चर।

फिर उसने शरमाते हुए कहा, “आपने मुझे न्यूड कर दिया, लेकिन आप अभी कपड़ों में हो। अनफेयर है ना?” मैंने हँसा और उसकी मदद से अपनी शर्ट उतारी, फिर ट्राउजर भी। अब हम दोनों बिल्कुल न्यूड थे—मेरा लंड फुल इरेक्शन में, जो उसे देखकर और एक्साइटेड हो गया। मैं उसके बूब्स चूसने लगा, पागलों की तरह, उन्हें दबाते हुए, और साथ ही उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा—उंगलियाँ से क्लिट को रब किया, अंदर-बाहर किया। वो तड़प रही थी, उसकी चूत गीली हो गई थी। थोड़ी देर बाद मैंने बूब्स छोड़े और उसे अपना लंड पकड़ाया—जिसे देखकर वो पहले ही एक्साइटेड हो गई थी, उसकी आँखें चमक रही थीं। पहले तो इनकार किया, “नहीं जफर, शर्म आती है,” लेकिन मैंने इंसिस्ट किया और वो मान गई। वो मुँह में लेकर चूसने लगी—धीरे-धीरे, लेकिन जल्दी ही एक्सपर्ट की तरह। अब मैं बेड पर बैठा था और वो जमीन पर घुटनों के बल बैठी मुझे ब्लोजॉब दे रही थी, दुनिया का सबसे ज्यादा मजा। मैं उसके बाल पकड़कर उसके सिर को आगे-पीछे कर रहा था, डीप थ्रोट करवा रहा था। इससे पहले जब मैं उंगली से उसकी चूत सहला रहा था, वो दो बार झड़ चुकी थी—उसकी बॉडी काँप उठी थी, और वो “आह्ह्ह… जफर… बस…” कहती रही। और जब मेरा क्लाइमैक्स आया तो मैंने उसके सिर को और जोर से मूव किया। फिर मैं उसके मुँह में ही झड़ गया—गर्म कम बाहर निकला, उसने कुछ स्वॉलो किया और बाकी उसके चिन पर गिर गया। वो मुस्कुराई और उसे साफ किया।

उसके बाद मैं नीचे झुका और जीभ से उसकी चूत के चारों तरफ सर्कल बनाने लगा—क्लिट को चाटा, अंदर जीभ डाली। वो पागल हो गई, “जफर, पता नहीं मुझे क्या हो रहा है… इतना अच्छा लग रहा है… अपनी चीज मेरी चूत में डालो… प्लीज, अब सहन नहीं होता।” मैंने उसकी बात मान ली क्योंकि मेरा टूल भी पूरी तरह रेडी था, फिर से हार्ड। तो मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रखा और धीरे-धीरे अंदर डालने लगा। उसकी चूत टाइट थी, वर्जिन लग रही थी, लेकिन गीली होने से आसान हो गया। मैंने धीरे-धीरे किया ताकि मजा आए, कोई दर्द न हो। वो वर्जिन थी, लेकिन सब सॉफ्टली हुआ—कोई ब्लड नहीं, बस प्लेजर। इस बार उसकी टोपी अंदर चली गई। वो आवाजें निकाल रही थी, “अंदर करो… मुझे इसकी जरूरत है… और डालो, जफर।” मैंने एक सॉफ्ट पुश से अपना आधा लंड उसकी चूत में डाला तो वो सिसकारी, “ओऊऊ… मजा आ रहा है…” लेकिन कोई दर्द नहीं, बस एक्स्टसी। मैंने बात नहीं मानी और दूसरी स्ट्रोक में और अंदर किया, जितनी जगह मिली। और अब फुल स्ट्रोक्स लगाने लगा—धीरे से स्पीड बढ़ाई। उसकी पहले की सिसकारियाँ अब “हम्म… आह्ह्ह्ह्ह… ओोोह्ह्ह्ह… मजा आ रहा है… और जोर से करो, जफर… हाँ, ऐसे ही…” में बदल गईं। और वो भी अपनी बॉडी को मेरे स्ट्रोक्स के साथ मूव करने लगी, हिप्स ऊपर उठाकर मुझे और डीप ले रही थी। हमारी बॉडीज का स्लैपिंग साउंड रूम में गूँज रहा था, पसीना बह रहा था। तकरीबन 6 मिनट बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने फौरन लंड बाहर निकाला और उसके चेस्ट पर सारा कम डाल दिया—गर्म, स्टिकी फ्लूइड उसके बूब्स पर फैल गया। वो उसे अपने चेस्ट पर मलने लगी, जैसे एंजॉय कर रही हो, और फिर मुझे अपने साथ लेटने को कहा। मैं लेटा तो हमने जोर से एक-दूसरे को हग किया, हमारी नंगी बॉडीज चिपकी हुईं, और थोड़ी देर ऐसे ही रहे—साँसें मिलाकर, दिल की धड़कनें सुनकर। फिर वो कहने लगी, “मुझे नहीं पता था कि ये सब करने से इतना मजा आता है… तुमने मुझे जन्नत दिखा दी।”

 

बेडशीट पर कुछ स्पॉट्स थे—हमारे कम के, लेकिन कोई ब्लड नहीं। हम जल्दी उठे और वो बाथरूम नहाने गई, साथ बेडशीट भी धोने ले गई। दरवाजा खुला था तो मैं पहले बाहर से देखता रहा—उसकी न्यूड बॉडी पानी के नीचे चमक रही थी, ब्रेस्ट्स पर पानी बहता हुआ। जब वो बेडशीट धोकर नहाने लगी तो मैं पीछे से जाकर पकड़ लिया, उसे दीवार से सटाया और वहाँ भी किस किया—उसके होंठों पर पड़ा पानी और उसकी स्वीटनेस टेस्ट करने लगा। नहाने के दौरान भी मैंने उसे बहुत टीज किया—उसकी चूत पर हाथ फेरा, बूब्स दबाए, और वो हँसते हुए कहती, “जफर, अब मुझे जाने दो, ऐसा न हो कि आपकी मॉम आ जाएँ और मुझे खाना भी बनाना है।” बाहर आकर उसने नई बेडशीट बेड पर डाली और नीचे जाकर खाना बनाने लग गई। मैं भी ऊपर कंप्यूटर पर गाने सुनने लग गया, लेकिन मन में वो मोमेंट्स रीप्ले हो रहे थे। इसके बाद हमने कई बार ऐसे एंजॉय किया—जब भी मौका मिलता, घर में अकेले होते, तो वो इंटेंस सेशंस। अब उसकी शादी हो गई है और एक बच्चा भी है उसका। लेकिन अब भी जब वो अपनी मॉम-डैड के साथ मिलने आती है, तो हमारे घर जरूर आती है—शायद पुरानी यादें ताजा करने। तुम मुझे जरूर बताना कि ये स्टोरी कैसी लगी। अपनी कमेंट्स मेरे ईमेल आईडी पर जरूर भेजना और अगर कोई लड़की या आंटी चाहे तो मैं हूँ ना। मेरा ईमेल आईडी…

मेमसाहिब रिम्पी और नौकर कल्लू की पूरी रात की चुदाई

मैं रिम्पी हूँ, अमृतसर की रहने वाली। उम्र उस वक्त अठारह की थी। बारहवीं की परीक्षाएँ खत्म हो चुकी थीं और गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू हो गई थीं। मम्मी-पापा दोनों सरकारी नौकरी में थे, इसलिए दिन का ज्यादातर वक्त घर में मैं अकेली ही रहती थी। हमारा पुराना नौकर कल्लू भी घर पर ही रहता था। कल्लू तीस साल का जवान, गाँव का साँवला आदमी था। उसका बदन कसरती – चौड़ी छाती, मजबूत बाजूएँ, मोटी जाँघें। जब वो काम करता तो उसकी पसीने से तर शर्ट उसके बदन से चिपक जाती और मसल्स साफ नजर आते। मैंने कई बार चुपके से उसे देखा था, और मन में एक अजीब-सी हलचल महसूस की थी।

एक दोपहर की बात है। गर्मी जोरों पर थी। मम्मी-पापा ऑफिस गए थे। मैं अपने कमरे में पंखे के नीचे लेटी थी, सिर्फ एक पतला सा स्लीवलेस टॉप और छोटी स्कर्ट पहने हुए। ब्रा भी नहीं पहनी थी क्योंकि घर में अकेली थी। मन बोर हो रहा था। अचानक कल्लू दरवाजे पर दस्तक देकर आया। उसके हाथ में पानी का ग्लास था। “मेम साहिब, गर्मी बहुत है… पानी पी लो।”

मैंने मुस्कुराकर ग्लास लिया। वो पास ही खड़ा रहा। उसकी नजरें मेरे बदन पर घूम रही थीं – मेरे उभरे हुए स्तनों पर, नंगी जाँघों पर। मैंने नोटिस किया, लेकिन कुछ कहा नहीं। बल्कि मन में एक रोमांच सा हुआ।

“कल्लू, तुम भी बैठो ना। इतनी गर्मी में काम कर रहे हो।”

वो हिचकिचाया, फिर बेड के किनारे पर बैठ गया। बातें शुरू हुईं। वो अपनी घरवाली की बात करने लगा – नेपाल के गाँव में है, महीनों से नहीं मिला। उसकी आँखों में उदासी थी, लेकिन साथ में एक आग भी। “मेम साहिब, बहुत याद आती है… रातों में नींद नहीं आती।”

मैंने सहानुभूति से कहा, “अच्छा? तो तुम क्या करते हो याद आने पर?”

वो शरमाया, फिर धीमी आवाज में बोला, “जो पति-पत्नी करते हैं… वो सब याद आता है। बहुत मज़ा आता था उसके साथ।”

मेरा चेहरा लाल हो गया। मैंने कभी किसी से ऐसे खुलकर नहीं सुना था। लेकिन जिज्ञासा भी हो रही थी। “कैसा मज़ा? बताओ ना…”

वो पास खिसक आया। उसकी गर्म साँसें मेरे चेहरे पर लग रही थीं। “मेम साहिब, बताने से क्या होगा… करके दिखाऊँ तो समझ आएगा।”

मैंने नज़रें झुका लीं, लेकिन मना नहीं किया। दिल तेजी से धड़क रहा था। वो धीरे से मेरे कंधे पर हाथ रखा। उसका स्पर्श बिजली सा था। मैं सिहर गई, लेकिन पीछे नहीं हटी। “अगर अच्छा न लगे तो रोक देना,” वो फुसफुसाया।

मैंने कुछ नहीं कहा। बस आँखें बंद कर लीं। उसने मेरे गाल सहलाए, फिर होंठों पर उँगली फेरी। फिर झुककर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहला किस… मीठा, नरम, गर्म। मैंने भी जवाब दिया। मेरे होंठ उसके साथ मिल गए। उसकी जीभ अंदर आई, मेरी जीभ से खेलने लगी। मैंने भी अपनी जीभ उससे लपेट दी। किस लंबा होता गया, गहरा होता गया। मेरे हाथ उसके चौड़े कंधों पर चले गए।

उसके हाथ मेरे टॉप के नीचे घुस गए। मेरे नंगे स्तनों को छुआ। मेरे निप्पल्स पहले से ही तन गए थे। वो उन्हें उँगलियों से मसलने लगा। मैंने सिसकारी ली, “आह्ह्ह… कल्लू…” मेरी आवाज़ काँप रही थी। वो मेरे टॉप को ऊपर उठाकर उतार फेंका। अब मैं ऊपर से पूरी नंगी थी। उसके मुँह ने मेरे एक स्तन को पूरा मुँह में ले लिया। जीभ से निप्पल चाट रहा था, चूस रहा था। दूसरा स्तन उसकी उँगलियाँ मसल रही थीं। मेरी चूत में आग लग रही थी। गीलापन शुरू हो गया था।

मैंने खुद उसके बालों में उँगलियाँ फेरीं और उसके सिर को अपने स्तनों पर दबाया। “और चूसो… हाँ… ऐसे ही…” मैं खुद हैरान थी अपनी बेबाकी पर।

फिर वो नीचे खिसका। मेरी स्कर्ट ऊपर की और पैंटी एक झटके में उतार दी। मैं पूरी नंगी उसके सामने थी। मेरी गुलाबी, चिकनी चूत पर उसकी नजरें टिक गईं। “वाह मेम साहिब… कितनी सुंदर चूत है तुम्हारी… बिल्कुल ताज़ा माल।”

उसने मेरी जाँघें फैलाईं और मुँह लगा दिया। जीभ से क्लिटोरिस को चाटने लगा। मैं चिहुँक उठी, “ओह्ह्ह गॉड… कल्लू… क्या कर रहे हो… आह्ह्ह्ह…” लेकिन पैर और फैला दिए। उसकी जीभ चूत के अंदर-बाहर हो रही थी। उँगलियाँ भी अंदर डालकर चोद रहा था। मैं पागल हो रही थी। कमर खुद ऊपर उठ रही थी। कुछ ही मिनटों में मैं पहली बार झड़ी। बदन काँप गया, चूत से रस बह निकला। वो सब पी गया।

अब बारी उसकी थी। उसने अपनी शर्ट और लुंगी उतारी। उसका लंड बाहर आया – सात इंच लंबा, दो इंच मोटा, सख्त जैसे लोहा। नसें उभरी हुईं, सुपारा लाल। मैंने पहली बार इतने करीब किसी मर्द का लंड देखा। डर लगा, लेकिन ललचाई नजरें भी। मैंने खुद हाथ बढ़ाकर उसे छुआ। गर्म, सख्त। मैंने सहलाया, ऊपर-नीचे किया। वो कराहा, “आह्ह्ह मेम साहिब… कितना अच्छा लग रहा है।”

फिर मैंने मुँह में ले लिया। जीभ से चाटा, चूसा। वो मेरे बाल पकड़कर मुँह चोदने लगा। मुझे गले तक महसूस हो रहा था।

फिर वो मुझे बेड पर लिटाया। मेरे ऊपर आया। लंड को चूत पर रगड़ा। मैंने खुद कमर उठाकर कहा, “डालो ना… अब और मत तरसाओ… चोदो मुझे।”

उसने धीरे से धक्का दिया। सिर अंदर गया। थोड़ा दर्द, लेकिन मज़ा ज्यादा। फिर आधा लंड अंदर। मेरी सील टूट गई, थोड़ा खून निकला। मैंने दाँत भींचे, लेकिन बोली, “रुको मत… पूरा डालो… फाड़ दो मेरी चूत।”

तीसरे धक्के में पूरा लंड अंदर। मैं चीखी, लेकिन खुशी की चीख। वो रुक गया, मेरे स्तनों को चूसने लगा, किस करने लगा। दर्द कम हुआ। फिर धीरे-धीरे चुदाई शुरू की। हर झटके के साथ मज़ा बढ़ता गया। मैं भी कमर उछालकर साथ देने लगी। “आह्ह… हाँ… और तेज़… कल्लू… चोदो ज़ोर से… ओह्ह्ह फक… येस…”

कमरा हमारी सिसकारियों, चुदाई की चाप-चाप और गंदी बातों से भर गया। वो मुझे अलग-अलग पोजीशन में चोदता रहा। पहले मिशनरी में, फिर मुझे ऊपर बिठाया – मैं उसके लंड पर उछल रही थी, स्तन हिल रहे थे। फिर घोड़ी बनाकर पीछे से पेला। गांड पर थप्पड़ मार रहा था। “कितनी टाइट चूत है तेरी… फाड़ दूँगा आज।”

मैं चीख रही थी, “हाँ… फाड़ दो… और गहराई तक… आह्ह्ह… मैं तेरी रंडी हूँ आज…”

फिर 69 पोजीशन – मैं उसका लंड चूस रही थी, वो मेरी चूत। मैं दो-तीन बार झड़ी। फिर उसने मेरी गांड में डालने की कोशिश की। पहले दर्द बहुत हुआ, लेकिन धीरे-धीरे मज़ा आने लगा। गांड चुदाई में भी मैं झड़ गई।

पूरे दो घंटे तक चुदाई चली। आखिर में उसने मेरे मुँह में झड़ दिया। गाढ़ा, गरम वीर्य। मैंने सब पी लिया। फिर हम नंगे ही लिपटकर लेटे रहे। पसीने से तर बदन, खुशबू से भरा कमरा।

शाम को वो जाने लगा। जाते-जाते बोला, “मेम साहिब, तुमने जो सुख दिया… ज़िंदगी भर याद रहेगा। तुम मेरी सेक्स की रानी हो।”

मैंने मुस्कुराकर कहा, “तुम भी कमाल हो कल्लू… कभी फिर आना। ये चूत हमेशा तुम्हारे लिए तैयार रहेगी।”

उसके जाने के बाद मैंने किसी को नहीं बताया। लेकिन वो दिन… वो पहली चुदाई… वो आग, वो सुख, वो पागलपन… आज भी याद आता है तो बदन में झुरझुरी दौड़ जाती है और चूत गीली हो जाती है। सच में, मेरी ज़िंदगी की सबसे हसीन और गरम याद है वो।

गर्मी की दोपहर में खुल गई चूत की सील,
कल्लू के सात इंच ने भर दी रिम्पी की खाली डील।
पहली चुदाई में दर्द भी था, मज़ा भी था अपार,
आज भी याद आए तो चूत हो जाए बेकरार।

दोस्त की बीवी संतुष्ट हुई मेरे लंड से खूब चोदा जयपुर में

मैं अर्जुन. चंडीगढ़ से हू, मेरी उम्र 25 साल है. इस कहानी की मल्लिका जो है उसकी उम्र 24 साल है. उसके शरीर की बनावट काफी हॉट है 36-32-38. वो गजब की औरत है, कोई भी देख ले तो उसका दिमाग ख़राब हो जाये और उसके याद में तो मूठ जरूर मारेगा, वो एक सेक्स की मल्लिका के तरह है.

अब मैं आपको उस मल्लिका की चुदाई की कहानी आपके सामने नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे सूना रहा हु. ये चुदाई स्टोरी एक साल पहले की. एक बार मैं कुछ काम से जयपुर गया. तो वह मैंरा दोस्त कुणाल रहता था. मैने उससे फोन करके पूछा कहा हो तुम? कुणाल बोला घर पे ही हू. मैं बोला ठीक ह मैं आ रहा हू. क्यों की मैं जयपुर आया हुआ हु. सोचा तुमसे मिल भी लूंगा, मैं उसके घर गया वहा भाभी ने दरवाजा ओपन किया, वाउ क्या माल थी सेक्सी लग रही थी. मैने सिमरन को दो साल बाद देखा था भाभी में काफी चेंज आ गया था. वो पहले से ही ज्यादा सुन्दर हो गई थी और शरीर का हरेक अंग भर गया था यहाँ तक की चूचियां टाइट टाइट हो गई थी.

दोस्तों क्या बताऊँ, वो गजब की लग रही थी और मेरा तो मन कर रहा था साली को यही पकड़ के चोद डालु लेकिन फ्रेंड की बीवी की थी. कंट्रोल किया उसने मुझे एक सेक्सी स्माइल दी. ये मुझे फर्स्ट इंडिकेशन दिया. मेरा साहस बढ़ गया. यानी की मैं थोड़ा अगर पटाने के लिए सोचूं तो आराम से मैं अपने दोस्त की बीवी को चोद सकता हु.

फिर मैं अंदर गया दोस्त से बहूत सारी बात की. मुझे थोड़ा लग रहा था की दोस्त खुश नहीं है अपनी लाइफ से. मैने पूछा कुणाल तुम खुश नहीं लग रहे हो. उसने बोला ऐसा कुछ नहीं सब बढियां है. मैने उससे और पूछा तो उसने बताया बाद मैं बात करते हैं अभी नहीं.

सब लोगो ने खाना खाया. बीच बीच मैं सिमरन मुझे लाइन दे रही थी. मुझे लग गया. ये मैंरा लंड लेके ही मानेगी. जब खाने की प्लेट मैं किचन मैं रखने गया सिमरन को पीछे से पकड़ लिया मैने बूब्स दबा दिए उसने थोड़ी से आवाज़ निकली और बोली अभी जल्दी क्या है, मैं 2 दिन के लिए तुम्हारी ही हू. मेरे पति यानी की कुणाल ऑफिस के काम से जयपुर से बाहर जा रहे है.

मुझे तो बहुत खुशी हुई. अब मैं ये सोचने लग गया क्या क्या करना है सिमरन के साथ प्लान बनाने लगा. रात को तो मैं दूसरे रूम मैं सोया. रात को मैं टाय्लेट करने गया तो देखा सिमरन बातरूम मैं उंगली कर रही थी अपनी चूत मैं. गेट थोड़ा खुला हुआ था तो मुझे दिख गया. मैं गया सिमरन के पास. मैने बोला जब तुम्हारे पास 2 -2 लंड होके भी फिंगर दाल रही हो डार्लिंग. क्या हुआ. बोला उसने क्या करू अर्जुन मैंरे पति का तो खड़ा नहीं होता.

वो तो जब भी चोदना सुरु करते है और कुछ ही देर में वो धराशायी हो जाते है यानी की वो अपना काम तुरंत ही खत्म कर देते है. और मैंने अनसॅटिस्फाइड रह जाती हू. मैने बोला मैं आ गया हू ना. जल्दी से मैंने अपना लैंड निकाला और तुरंत ही उसके मुह में डाल दिया. वो लोलीपोप की तरह चूस रही थी जैसे कभी मिला ही नि लंड,उसने बोला बाकी सब कुछ कल हज़्बेंड के जाने के बाद कहीं हज़्बेंड जग गया तो तो पता चल जाएगा.

मैं ब्लोवजोब मैं ही खुश था. दूसरे दिन दोस्त बोला अर्जुन मुझे कुछ काम से जोधपुर जाना ह तो रहो सिमरन के साथ इसका ख़याल रखना. मैने बोला हा डॉन’त वरी. मैं पूरा ख्याल रखूँगा. वो चला गया. जैसे ही वो गया मैं सिमरन के उपर भूखे शेर की तरह टूट पड़ा . मैंने उसके सारे कपडे उतार दिए और वो सिर्फ ब्रा और पेंटी में थी. दोस्तों हम दोनों वही सोफे पर ही स्टार्ट हो गए. वो मुझे स्मूच कर रही थी और मैं उसे, एक दूसरे को हम दोनों पूरा साथ दे रहे थे.

वो मैंरे लंड को मूह मैं लेके चूस रही थी मैं उसकी चूत को चाट रहा था. 2 मीं. किस किया उससे. अब वो बोलने लगी कल रत से वेट कर रही हो तुम्हारे लंड का अर्जुन मैंरी चूत प्यासी है डाल दे अपने बड़े लंड को. मैने बोला इतते जल्दी क्या ह अभी तडपा तडपा के डालूँगा.

फिर हम बेडरूम मैं चले गये और वो बोली मुझे उपर आना. मैं तैयार हो गया.

वो तो मेरे लैंड को ऐसे चूस रही थी जैसे 10-15 साल से लंड नहीं मिला. आवाज़ निकल रही थी ऑश.उम्म्म ह फक में हार्ड माय डार्लिंग अर्जुन, मैं बोला रंडी. अभी देखा कहा अभी तो तेरी गांड मारनी ह फिर बोलना फक मैं हार्ड फिर वो डर गयी बोली गांड नहीं . मैं बोला अरे रंडी तूने अभी गांड का मज़ा नहीं लिया इसलिए बोल रही है एक बार लेगी तब नहीं बोलेगी. बहुत कहने पे वो मानी.

फिर वो उल्टी लेट गयी मैने थोड़ा ही लंड घुसाया था वो बोली प्लीज़ निकालो ना मैने बोला तोड़ा वेट करो. अभी बीच मैं ही निकल लेंगे तो ज़्यादा दर्द होगा. कुछ टाइम दर्द सहन कर ले तो बोली ठीक ह लेकिन स्लोली करो. मैने धीरे धीरे डाला. दोस्तों उसकी चूत काफी गरम और टाइट थी शायद टाइट होने का यही वजह था की कुणाल उससे ज्यादा चोदा नहीं था. मैं भी ऐसी चूत को पाकर बहूत खुश था और मेरा लंड टनटना रहा था और मेरे अंदर वासना भरी हुयी थी. दोस्तों कभी वो निचे कभी मैं निचे, उसकी चूचियों को मस्लहते हुए जब मैं लंड को उसकी चूत में डालता था, उसके मुह से सिर्फ आह आह आह आह आह आज मैं बहूत खुश हु मेरे राजा.

आज मुझे पहली बार किसी मर्द से पाला पड़ा है. आज ऐसा लग रहा है जैसे पहली बार मुझे सेक्स का आनंद मिला है. आज मैं तर गई. धन्य हो गई. आह अतः आह मेरे गांड में ऊँगली घुसाओ आह और चूत में लंड पेलते रहो. मेरी चूचियों को पीओ. आह आह देखो दूध निकल रहा है. मैंने कहा अरे रंडी जब तुम माँ नहीं bani हो दूध कैसे निकलेगा. वो कहने लगी. चुसो खूब चुसो मैं बिना बच्चा दिए ही तुम्हे दूध पिलाऊंगी आह आह आह और वो झड़ गई. दोस्तों मैं तुरंत निचे हुआ और उसकी चूत की पानी को अपने जीभ से साफ़ कर दिया. वो आह आह आह कर रही थी. फिर मैंने उसको उलटा कर दिया,

अपना लंड उसके गांड पर रखा, और घुसाने की कोशिश की पर वो जोर से चिल्लाई, बोली मेरा गांड का छेद बहूत छोटा है और तुम्हारा लंड बहूत मोटा कैसे जायेगा? मैंने मर जाउंगी. मैंने कहा मेरी जान. रूक, फिर मैंने पाने लंड में थूक लगाया और और फिर कोशिश की. लंड करीब २ इंच ही अंदर गया पर वो जोर जोर से चिल्लाने लगी. निकालो निकालो, मैंने उसके पीठ को सहलाया और उसके बूब्स को भी. उसके बाद फिर मैंने वापस गांड से लंड निकाला और फिर चूत में एक बार डाला उसकी चूत काफी गीली थी अब मेरा लंड भी काफी गीली हो गई थी. उसके बाद तुरंत ही मैंने गांड में डाली, मेरा लंड इस बार अंदर चला गया और वो बोली हां अच्छा लगा. और मैं फिर गांड मारना सुरु किया. दोस्तों वो जोर जोर से झटके देने लगी. उसका चूतड़ हिल रहा था हरेक झटके पे. और मैं पूरा माल उसके गांड में ही छोड़ दिया.

थोड़े देर रुकने के बाद फिर से हम दोनों स्टार्ट हो गए. और फिर से चूत मारना सुरु कर दिया. इस तरह से हम दोनों ने रात भी खूब चुदाई की. रात भर खूब चोदा. दोस्तों बहूत मजा आया था.

फिर हमने शवर लेते हुई सेक्स किया. बहुत मज़ा आया.सिमरन मुझे बता रही थी अभी तक का सबसे सच्चे सेक्स मज़ा तुमने दिया है अर्जुन. दोस्तों उसके बाद मेरा दोस्त तीन दिन बाद आया था उस तीन दिन में उसको मैंने खूब संतुष्ट किया. तीन दिन तक सिर्फ चुदाई ही चुदाई करता था.

अब वो मेरे से हमेशा चुदती है. मैं जयपुर चला जाता हु. वह होटल में रुकता हु, और वो आ जाती है जब कुणाल ड्यूटी जाता है फिर हम उसकी खूब चुदाई करते है.

मेरा बॉयफ्रेंड मुझे पहली बार जमकर चोदा

आज मैं आपको अपनी पहली चुदाई की कहानी बताने जा रही हु, ये कहानी आज से मात्र तीन दिन पहले की है, बिलकुल ताजी सेक्स कहानी जो मैं आपसे शेयर कर रही हु. दोस्तों मेरा नाम रुपाली है मैं दिल्ली में रहती हु, मैं अठारह साल की हु, मैं अभी पढाई कर रही हु, मेरा इससे पहले कोई बॉय फ्रेंड नहीं था. पर मेरी एक दोस्त है कंचन, उसका एक बॉय फ्रेंड है राजीव, वो हमेशा राजीव के बारे में ही कहते रहती थी, आज राजीव ने ये किया आज राजीव ने वो किया आज मेरे चूत में लंड ऐसे घुसाया, ऐसे किश किया, ऐसे मेरे चूचियों को दबाया, दोस्तों ये सब सुन सुन कर मेरा मन भी चुदने का करने लगा. और मुझे भी लड़कों में इंटरेस्ट होने लगा.

मुझे भी लगा की मेरा भी कोई बॉय फ्रेंड हो और मैं इसकी चाहत में इधर उधर कोई सुन्दर और सेक्सी लड़का ढूंढने लगी. काफी दिन इधर उधर अपने लिए बॉयफ्रेंड ढूंढने के बाद मेरे क्लास का ही एक लड़का समीर, जो की बड़ी ही हॉट था, उसकी एक और गर्लफ्रेंड थी. पर मुझे इससे कोई मतलब नहीं था, मैं तो अपने चूत में लंड डलवाना चाहती थी, थोड़े दिन में ही वो मेरे कब्जे में आ गया, खूब घुमाया फिराया, चूचियां दबाया, अब मुझे असली मुकाम तक पहुचना था. मैं उसके बाइक पे पीछे बैठती और अपनी चूचियां उसके पीठ में चिपकाये हुए रखती. आखिर वो दिन आ गया जब वो मुझसे चूत मांग लिया. और मैंने पहले थोड़ा ना नुकुर की और फिर मैंने हामी भर दी. और फिर एक डेट फिक्स हो गया.

15 अगस्त के दिन ही मैंने अपने घर से बहाना बनाई की आज मेरी दोस्त के यहाँ पार्टी है. मैं वही जाउंगी. मेरे घर बाले ज्यादा कुछ पूछे भी नहीं. और उन्होंने कह दिया ठीक है शाम को जल्दी ही घर आ जाना. दिन के करीब ११ बज रहे थे मैंने समीर को व्हाट्सएप्प की की जल्दी आ जाओ. और मैंने अपने घर से थोड़े दूर पर ही उसका वेट करने लगी. वो बड़ा हैंडसम लग रहा था. बाइक पर था. ब्लैक कलर का चस्मा लगा कर बिलकुल हीरो लग रहा था. मैं तो उसके हीरोपंती से घायल हो गई. मैं पीछे बैठ गई और बाहों में भर लिया और उसके पीठ पर अपनी चूची को टिका दी.

मैंने कहा कही जगह है की कोई होटल में चले? तो उसने कहा की मेरे पास दोस्त के फ्लैट की चाभी है. मेरा दोस्त दिल्ली से बाहर गया है. हम दोनों वही आज एन्जॉय करेंगे. और फिर हम दोनों उसके फ्लैट पे चले गए. दोस्तों हम दोनों अंदर जाते ही. एक दूसरे के बाहों में हो गए. और वो मेरे होठ को चूसने लगा. और मैंने भी उसके होठ को चूसने लगी. वो मेरी चूचियों को दबाने लगा. और मैं भी उसके बाल को सहलाने लगी. धीरे धीरे हम दोनों बैडरूम में आ गए और समीर ने मुझे बेड पे पटक दिया, उसने मेरा समीज और सलवार उतार दिया और अपना भी कपड़ा उतार दिया.

वो जल्दबाजी नहीं करना चाह रहा था वो मुझे तड़पा रहा था, उसको लड़की चोदने का एक्सपीरेंस थे और मुझे कुछ भी नहीं पता था. वो मेरी दोस्त ने जो सेक्स के बारे में बताई वही पता था. मैं ब्रा और पेंटी में थी. वो मेरे होठ को चूमते हुए, मेरे कंधे को चूमते हुए मेरे चूचियों के बिच में मुह रगड़ रहा था मैं उस समय ब्रा में थी. फिर वो सरक कर निचे आया और मेरे पेट को जीभ से छूने लगा और थोड़ा निचे आकर मेरे नाभि में अपना जीभ डालने लगा. मैं तड़प रही थी, मेरे रोम रोम खड़े हो रहे थे. और मैं तकिये को अपने मुठी में पकड़ रही थी मेरे होठ अनायास ही दांत के बिच में जा रहा था. मेरी आँखे बंद हो रही थी. फिर वो थोड़ा सरक कर निचे गया और मेरी पेंटी को सूंघने लगा. मेरा तो हालात बहूत ज्यादा खराब होने लगा. वो फिर सरक कर निचे गया मेरे घुटने से होते हुए मेरे पैर के अंघूठे को अपने मुह में ले लिया. और फिर से ऊपर आ गया अब वो मेरा ब्रा को खोल दिया और अपने जीभ से निप्पल को छूने लगा. वो जोर से नहीं कुछ कर रहा था वो हलके हकले से निप्पल को छू रहा था, इससे मेरे शरीर में सिहरन होने लगी और मैं पुरे तरीके से तड़पने लगी.

वो फिर निचे आ गया और मेरी पेंटी को उतार दिया और फिर मेरे टांगो को अलग अलग करके. बिच में अपना मुह गुसा दिया और मेरे चूत के दोनों साइड की झिल्ली को अपने हाथो से अलग किया और बोला वाओ, और फिर अपना मुह लगा दिया. मैं तो पागल होने लगी. आज तक कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ था. बहूत ही मजा आ रहा था. गजब का एहसास था. जब वो मेरी चूत को चाट रहा था. फिर उसने चिर कर देखा , मैं वर्जिन थी. आज तक कभी चुदी नहीं थी. उसने बोला आज तो मैं तेरी वर्जिनिटी तोड़ दूंगा. मैं तुरंत बोल उठी ये मौक़ा मैं तुमको दे रही ही. आज तक मेरे चूत को किसी ने नहीं छुआ.

तभी समीर उठा गया और अपने पेंट की जेब से दस हजार रूपये मुझे दिए. और बोला ये तुम्हारा वर्जिनिटी खोने का इनाम है. मैं काफी दिन से ऐसी लड़की को ढूंढ रहा था जो आज तक चुदी ना हो. और आज मुझे तुम मिल गई. मैंने कहा कोई जल्दी बजी नहीं करना मुझे काफी दर्द हो सकता है. उसने कहा तुम चिंता नहीं करो मैं धीरे से तुम्हारी चूत की झिल्ली को तोडूंगा. और उसने अपना लंड निकाल लिया दोस्तों और उसमे थूक लगा कर मेरे चूत पर सेट किया, और अंदर घुसाने लगा. पर मेरे चूत के अंदर उसका लंड जा नहीं रहा था. क्यों की उसका लंड काफी मोटा था. और मेरी चूत की छेद काफी छोटी थी. उसने फिर से तरय किया तो थोड़ा सा अंदर गया. मुझे काफी दर्द होने लगा. मैंने कहा रुको रुको पर वो नहीं माना और जोर से धक्का दे दिया.

दोस्तों मैं दर्द से कराह उठी. उसने बोला हिलना मत अब दर्द ख़तम हो जायेगा. और हुआ भी वैसा ही. वो मुझे चोदने लगा. जोर जोर से मेरी चूत में लंड को पेलने लगा. मेरी चूत में उसका लंड बिलकुल सेट हो गया था. उसने फिर चूत से लंड निकाला और फिर से डाला. जब वो दुबारा घुसाता था मुझे काफी दर्द होने लगता था. तभी समीर बोल उठा अरे यार तेरी चूत से तो खून निकल रहा है. मैंने अपना हाथ लगा कर देखा तो सच में खून निकल रहा था. दोस्तों मैं पहले से ही नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे पढ़ चुकी थी की पहली बार चोदने पे खून निकलता है और समीर भी बोला की पहली बार में खून निकलता है यही होती है कोरी चूत की निशानी इसका मतलब होता है की इसके पहले तुम किसी और से नहीं चुदी है.

फिर क्या था दोस्तों मैं अपनी वर्जिनिटी खो चुकी थी. अब वो निचे आ गया था मैं ऊपर आ गई थी उसका लंड पकड़ कर मैं अपने चूत पे सेट की और अंदर समा ली. और फिर उछल उछल कर चुदवाने लगी. अब मुझे काफी मजा आने लगा. अब मुझे दर्द भी नहीं कर रहा था, करीब १० मिनट ऊपर चुदने के बाद फिर से मैं निचे आ गया. और फिर उसने मेरे चूत के कभी इधर से कभी उधर से कभी डौगी स्टाइल में कभी साइड से. खूब चोदा, दोस्तों उस दिन मैं करीब २ घंटे तक चुदी उसमे मैं करीब पांच बार झड़ चुकी थी और समीर भी दो बार अपने माल को निकाल चूका था.

दोस्तों आज मेरी हालात ऐसी है की मैं ठीक से चल नहीं पा रही हु, मेरी चूत काफी सूज चुकी है. चलने में भी दर्द हो रहा है. पर जो भी हो बहूत मजा आया था. अब अगली बार जब चुदुंगी मैं जरूर बताउंगी. तब तक के लिए आप भी मूठ मार लें.

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