कंप्यूटर ठीक करने गया तो पड़ोसन भाभी ने खुद खोल दी चूत

मेरा नाम राहुल है। मैं २५ साल का हूं और रायपुर में ही रहता हूं। हमारे पड़ोस में रहती हैं रेखा भाभी। उम्र करीब ३२ साल, लेकिन देखने में अभी भी कॉलेज की लड़की जैसी लगती हैं। गोरी-चिकनी त्वचा, भरी-भरी देह, गोल-गोल स्तन और कमर का वो नाजुक मोड़… भाभी को देखते ही मन में आग लग जाती थी। उनके पति अक्सर बाहर रहते थे जॉब की वजह से। भाभी घर पर अकेली रहतीं और कभी-कभी हेल्प के लिए मुझे बुला लेती थीं।

एक दिन शाम को उनका फोन आया।

“राहुल बेटा, कंप्यूटर में कुछ प्रॉब्लम हो गया है। स्क्रीन पर कुछ भी नहीं आ रहा। आकर देखोगे?”

“जी भाभी, अभी आता हूं।”

मैं टूल्स का बैग लेकर सीधा उनके घर पहुंच गया। भाभी ने दरवाजा खोला। वो हल्के गुलाबी सलवार कमीज में थीं। कमीज का दुपट्टा थोड़ा ढीला था, जिससे उनकी गहरी गर्दन और ऊपर वाले गोरे गोरे मांसल भाग साफ दिख रहे थे। मेरी नजर वहां रुक गई। भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा, “आओ अंदर।”

कंप्यूटर टेबल पर रखा था। मैं बैठ गया और चेक करने लगा। वायरिंग में कुछ इश्यू था। जैसे-जैसे मैं काम कर रहा था, भाभी मेरे पीछे खड़ी होकर देख रही थीं। उनकी सांसों की हल्की गर्माहट मेरी गर्दन पर पड़ रही थी।

“राहुल, तुम्हें कितना अच्छा आता है ये सब…” उन्होंने धीरे से कहा।

मैंने मुड़कर देखा। उनकी आंखों में एक अलग सी चमक थी। मैं मुस्कुराया, “भाभी, आपकी मदद करना तो मेरा काम है।”

कुछ देर बाद कंप्यूटर ऑन हो गया। भाभी खुश हो गईं। “वाह! तुम तो जादूगर हो।” उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा। वो स्पर्श सामान्य से ज्यादा देर तक रहा। मैंने महसूस किया कि उनकी उंगलियां हल्के से दबा रही हैं।

“भाभी, पानी पिलाइए ना।” मैंने कहा।

वे किचन गईं। जब वापस आईं तो उनके हाथ में दो ग्लास थे। बैठते वक्त उनकी सलवार थोड़ी ऊपर चढ़ गई, मोटी-मोटी जांघें झलक गईं। मैं नजर हटा नहीं पाया। भाभी ने देख लिया। लेकिन शर्माने की बजाय वे हल्के से मुस्कुराईं।

हम दोनों बातें करने लगे। उन्होंने बताया कि पति पिछले १५ दिन से बाहर हैं। घर अकेला लगता है। मैंने धीरे से कहा, “भाभी, अगर कभी कुछ चाहिए तो बता देना। मैं हूं ना।”

उन्होंने मेरी आंखों में देखा। “सच में? सब कुछ?”

उस “सब कुछ” में छुपा इशारा समझते देर नहीं लगी। मैंने हौले से उनका हाथ पकड़ लिया। भाभी ने हाथ नहीं छुड़ाया। बल्कि उंगलियों को और कस लिया।

“राहुल… मैं जानती हूं तुम मुझे कैसे देखते हो,” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा। “मुझे भी अच्छा लगता है।”

मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। मैंने आगे बढ़कर उनके होंठों को अपने होंठों से छू लिया। भाभी ने आंखें बंद कर लीं और धीरे-धीरे जवाब दिया। किस गहरा होता गया। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेलने लगी।

मैंने उन्हें गोद में उठा लिया और बेडरूम की तरफ ले गया। भाभी मेरी गर्दन में चिपक गईं। उनके नरम स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। बेड पर लिटाते ही मैंने उनकी कमीज का पहला बटन खोला। सफेद ब्रा से ढके हुए भारी-भारी स्तन बाहर झांक रहे थे।

“धीरे राहुल… आज पूरा समय है,” भाभी ने शर्माते हुए कहा।

मैंने उनकी कमीज पूरी उतार दी। ब्रा का हुक खोलते ही उनके गुलाबी-गुलाबी निप्पल्स सामने आए। मैंने एक को मुंह में ले लिया। भाभी की सांसें भारी हो गईं। “आह… राहुल… अच्छा लग रहा है…”

मैं चूसता रहा, हल्के से दबाता रहा। भाभी की कमर उठ-उठकर मुझसे सट रही थी। मैंने उनकी सलवार का नाड़ा खोल दिया। अंदर हल्का लेस वाला पैंटी था, जो पहले से ही गीला हो चुका था।

मैंने पैंटी उतारी। भाभी की साफ-सुथरी, गुलाबी चूत पूरी तरह नम थी। मैंने उंगलियों से हल्के से सहलाया। भाभी कांप उठीं।

“राहुल… तुम्हें देखकर कितना दिन से मन करता था…” उन्होंने स्वीकार किया।

मैंने अपना मुंह उनकी जांघों के बीच ले जाकर चूमना शुरू किया। मेरी जीभ उनकी क्लिटोरिस पर घूम रही थी। भाभी दोनों हाथों से मेरे बाल पकड़कर दबा रही थीं। उनकी आहें कमरे में गूंज रही थीं – “उफ्फ… हां… वहां… और गहरा…”

कुछ मिनटों बाद भाभी का शरीर तन गया। वे जोर से कांपीं और पहली बार झड़ गईं। उनके मुंह से मीठी-मीठी चीख निकली।

अब मेरी बारी थी। मैंने पैंट उतारी। मेरा लंड पहले से ही पूरा खड़ा और सख्त हो चुका था। भाभी ने उसे देखा और हाथ में ले लिया। “कितना मोटा है…”

वे उसे धीरे-धीरे सहलाने लगीं। फिर आगे झुककर मुंह में ले लिया। भाभी का गर्म और नम मुंह मेरे लंड को चूस रहा था। मैं आनंद से कराह उठा।

“भाभी… बहुत अच्छा कर रही हो…”

कुछ देर चूसने के बाद भाभी लेट गईं और टांगें फैला दीं। उनकी आंखों में इच्छा थी। मैं उनके ऊपर चढ़ गया। लंड की टिप को उनकी चूत पर रगड़ने लगा। भाभी ने खुद ही उठकर उसे अंदर लेने की कोशिश की।

धीरे-धीरे मैं अंदर घुसा। उनकी चूत बहुत टाइट और गर्म थी। पूरी तरह घुसते ही भाभी ने लंबी सांस ली। “आह… भर गया…”

मैं धीमी गति से स्टार्ट किया। हर थ्रस्ट के साथ उनके स्तन हिल रहे थे। मैं उन्हें चूमता, गर्दन चूसता, निप्पल्स पर काटता। भाभी मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थीं।

“जोर से राहुल… मुझे अपना बना लो…”

मैं रफ्तार बढ़ाने लगा। कमरे में चुटकी बजाने जैसी आवाजें और हम दोनों की आहें भर गईं। भाभी की चूत मेरे लंड को जोर से दबा रही थी। मैंने उन्हें चारों खाने चित्त करके फिर से घुसा। इस बार और गहराई तक।

भाभी का दूसरा ऑर्गेज्म आ गया। वे पूरी तरह कांप उठीं। मैं भी करीब था।

“भाभी, मैं आने वाला हूं…”

“अंदर ही… भर दो मुझे,” उन्होंने कहा।

मैंने आखिरी जोरदार धक्के दिए और पूरा माल उनके अंदर उड़ेल दिया। दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे।

कुछ देर बाद भाभी मेरे सीने पर सिर रखकर लेटीं। “आज के बाद तुम मेरे कंप्यूटर के अलावा मेरी सारी जरूरतें भी देखोगे ना?”

मैं मुस्कुराया और उनके बालों में हाथ फेरते हुए बोला, “हां भाभी… जब चाहो, बुला लेना।”

उस रात हम दो बार और मिले। दूसरी बार उन्होंने ऊपर बैठकर मुझे राइड किया। उनके स्तन मेरे मुंह के सामने उछल रहे थे। तीसरी बार मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में चोदा। उनकी गोल-गोल गांड पकड़कर जोर-जोर से थपथपाता रहा। भाभी हर बार चीखकर झड़ जातीं।

सुबह होने तक भाभी पूरी तरह संतुष्ट थीं। उनके चेहरे पर वो चमक थी जो लंबे समय बाद आई थी।

पड़ोसन भाभी की कंप्यूटर रिपेयरिंग वाली चुदाई सिर्फ एक बार की घटना नहीं रही। उसके बाद हर हफ्ते कम से कम दो-तीन बार मैं उनके कंप्यूटर की “रिपेयरिंग” करने जाता। कभी तो कंप्यूटर खराब भी नहीं होता, फिर भी भाभी बुला लेतीं।

एक बार तो उन्होंने नाइट सूट पहनकर बिठाया और खुद ही मेरी गोद में बैठ गईं। “आज जल्दी करो… मन बहुत कर रहा है।”

हम दोनों अब एक-दूसरे के शरीर को अच्छी तरह जानते थे। भाभी को सबसे ज्यादा पसंद था जब मैं उनकी जांघों के बीच मुंह लगाकर चाटता। और मुझे सबसे ज्यादा उनका वो आह भरा स्वर – “राहुल… और जोर से… फाड़ दो अपनी भाभी की चूत…”

हमारा रिश्ता गुप्त था, लेकिन बेहद मीठा और संतोष भरा। पड़ोसन भाभी अब मेरी थी। उनकी हर इच्छा, हर जरूरत मैं पूरी करता। और वे मुझे वो प्यार देतीं जो कोई और नहीं दे सकता था।

पड़ोस की आंटी ने कहा “मुझे चोद दो बेटा” मैंने पूरी रात चोदा

मेरा नाम स्वीट गाय है। मैं 26 साल का दिल्ली का लड़का हूँ। मेरा फिगर ठीक-ठाक है और अंडरवियर के अंदर मेरा 7 इंच का मोटा, पावरफुल टूल किसी को भी दीवाना बना सकता है। आज मैं आपको अपनी जिंदगी की वो सच्ची और सबसे हॉट घटना सुनाने जा रहा हूँ जो मैं कभी नहीं भूल सकता। ये कोई बड़ी उपलब्धि वाली कहानी नहीं, बल्कि एक बेहद सेक्सी, मीठा और यादगार अनुभव है।

हमारे घर के ठीक बगल में अंकल अपनी पत्नी यानी आंटी और उनकी इकलौती बेटी के साथ रहते थे। मैं उन्हें अंकल-आंटी ही कहता था। आंटी 36 साल की थीं, लेकिन उनकी बॉडी देखकर कोई भी पागल हो जाए। उनके पास दो भरी-पूरी 40D साइज की विशाल चूचियां थीं जो हर वक्त टाइट कपड़ों में उभरकर नजर आती थीं। उनकी गांड गोल-मटोल, भारी और लहराती हुई थी। उनकी बेटी भी कॉलेज फर्स्ट ईयर में थी और काफी हॉट थी – अच्छी शेप की चूचियां और स्लिम फिगर। लेकिन मेरी नजरें हमेशा आंटी पर ही अटक जाती थीं।

जब भी मौका मिलता, मैं आंटी को चुपके से घूरता रहता। उनकी चलती हुई भारी गांड, उछलती चूचियां देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता और रात को उनके बारे में सोच-सोचकर मैं खुद को राहत देता। वो सच में एक सेक्सी बम थीं। हमारे घर में किसी भी पार्टी या फंक्शन पर वो लोग जरूर आते थे।

एक दिन हमारे घर पार्टी थी। मैं उन्हें इनवाइट करने उनके घर गया। दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। थोड़ी देर बाद जोर-जोर से नॉक करने पर दरवाजा खुला। वो बंद था लेकिन लॉक नहीं था। मैं अंदर घुसा, ऊपर उनके कमरे की तरफ गया और आंटी को आवाज लगाई। तभी आंटी की मीठी आवाज आई, “आ जाओ बेटा, सोफे पर बैठ जाओ। कुछ मैगजीन पढ़ लो। मैं अभी नहाकर आ रही हूँ।”

मैं सोफे पर बैठ गया और मैगजीन उलटने-पलटने लगा। कुछ देर बाद आंटी बाहर आईं। ओह माय गॉड! वो एक गुलाबी सिल्की नाइटी पहने थीं जो स्लिपलेस थी और काफी ट्रांसपेरेंट। उनकी भीगी हुई लंबी बालें कंधों पर बिखरी हुई थीं। नाइटी के अंदर से उनकी बड़ी-बड़ी चूचियां और भारी गांड का पूरा आउटलाइन साफ दिख रहा था। सफेद ब्रा और पैंटी की झलक भी आ रही थी। मेरा लंड तुरंत सख्त होकर पैंट में तंबू बना चुका था।

मैंने जल्दी-जल्दी कहा, “आंटी, शाम को हमारे घर पार्टी है, आप लोग आना।” लेकिन आंटी ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और बोलीं, “अरे बेटा, इतनी जल्दी कहाँ भाग रहे हो? पहले कुछ खा-पी तो लो। मैंने अभी-अभी नहाया है, थोड़ा रुक जाओ ना।” उनकी आवाज में वो प्यार और आकर्षण था जो मुझे रोक ले गया। मैं मना नहीं कर पाया।

उन्होंने मुझे अपने बेडरूम में बुला लिया। वहाँ वो बाल कंघी कर रही थीं। उनकी गीली पीठ चमक रही थी और नाइटी के पीछे से ब्रा-पैंटी पूरी तरह दिख रही थी। मैं उनकी कमर, गांड और चूचियों को घूरता रह गया। आंटी ने अचानक पीछे मुड़कर मेरी तरफ देखा। उनकी नजर मेरे पैंट के टेंट पर पड़ी और वो शरारती मुस्कान दे दीं। “क्या हुआ बेटा? तुम ठीक तो हो? मैं अच्छी लग रही हूँ क्या?”

मैं शर्म से लाल हो गया, लेकिन सच्चाई बोल दी, “हाँ आंटी… आप बहुत अच्छी लग रही हैं।”

उन्होंने नाजुक स्वर में पूछा, “और… सेक्सी भी?”

मैं हैरान रह गया, लेकिन बोला, “बहुत… बहुत सेक्सी आंटी।”

उनकी मुस्कान और चौड़ी हो गई। उन्होंने धीरे से दरवाजा बंद कर दिया (लॉक नहीं किया) और मेरे पास आईं। बिना कुछ कहे उन्होंने मुझे जोर से गले लगा लिया। उनकी नरम, गर्म बॉडी मेरे सीने से सट गई। मैं भी उनका साथ देने लगा। फिर उन्होंने मेरे होंठों पर गहरा, प्यार भरा किस किया। मैंने भी उनके लाल-लाल होंठों को जोश से चूस लिया।

मेरा दाहिना हाथ उनकी पीठ पर सरक गया और नीचे उनकी भारी गांड को सहलाने लगा। आंटी ने आह भरते हुए कहा, “उफ्फ… तुम्हारे हाथ कितने अच्छे लग रहे हैं बेटा… मुझे भी तुमसे बहुत अट्रैक्शन था… आज मौका मिल गया।”

मैंने उनकी नाइटी ऊपर की तरफ खींची। वो खुद ही हाथ उठाकर मदद कर रही थीं। अब वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में खड़ी थीं। उनकी 40D वाली मोटी चूचियां ब्रा से बाहर निकलने को बेताब थीं। मैंने ब्रा का हुक खोल दिया। उनकी भरी-पूरी चूचियां आजाद हो गईं। गुलाबी निप्पल्स पहले से ही सख्त और खड़े थे।

मैंने एक चूची मुंह में ले ली और धीरे-धीरे चूसने लगा। आंटी ने मेरे सिर को अपनी छाती से चिपका लिया और कराह उठीं, “आह्ह्ह… हाँ बेटा… चूसो… अच्छे से चूसो मेरी चूचियां… कितने दिनों से तरस रही थी मैं… हाँ… और जोर से…”

मैंने दूसरी चूची को हाथ से मसलते हुए नीचे मुंह ले जाया। उनकी नाभि चाटी, जीभ घुमाई। फिर उनकी पैंटी के ऊपर किस किया। पैंटी पहले से ही पूरी गीली थी। मैंने उसे भी उतार दिया। उनकी साफ, गुलाबी चूत चमक रही थी और उससे मीठा रस टपक रहा था।

मैं घुटनों पर बैठ गया और अपनी जीभ से उनकी चूत चाटने लगा। “उम्म्म… आह्ह्ह… हाय भगवान… कितना अच्छा लग रहा है…” आंटी की जांघें कांप रही थीं। मैंने जीभ अंदर डाली और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। आंटी मेरे बाल पकड़कर अपना कूस मेरे मुंह पर दबा रही थीं। “हाँ… यही… चाटो मेरी चूत… मेरा पति तो कभी ऐसा नहीं करता… मैं कितने दिनों से प्यासी थी… हाँ बेटा… चूसो… मुझे प्यार दो…”

थोड़ी देर बाद उनकी बॉडी तन गई। उनकी चूत सिकुड़ने लगी और उन्होंने जोर से कराहते हुए ऑर्गेज्म कर दिया। उनका गर्म, मीठा रस मेरे मुंह में भर गया। मैंने सब पी लिया।

अब मेरा लंड फटने को तैयार था। आंटी ने मुस्कुराते हुए मेरी पैंट खोली और अंडरवियर उतार दिया। मेरा 7 इंच का मोटा लंड लहरा रहा था। “वाह… कितना सुंदर और बड़ा… आज इसे पूरा मजा दूंगी,” कहते हुए उन्होंने उसे प्यार से चूम लिया। फिर लिक किया, गोलियों को चूसा और पूरा मुंह में ले लिया। वो ऊपर-नीचे सिर हिला रही थीं, बहुत प्यार और जोश से सक रही थीं।

मैं भी कराह रहा था, “आंटी… उफ्फ… बहुत अच्छा लग रहा है…”

जब मैं झड़ने वाला था तो उन्होंने लंड अपनी चूचियों के बीच ले लिया। मैं उनके मोटे, नरम स्तनों पर अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया। आंटी ने मुस्कुराकर अपनी चूचियों से उसे चाट लिया। “स्वादिष्ट है बेटा…”

अब असली मजा शुरू होने वाला था। मैंने कहा, “आंटी, आप ऊपर बैठकर मुझे चोदो ना… मैं देखना चाहता हूँ आपको।” वो पूरी तरह तैयार थीं। उन्होंने मेरे ऊपर सवार होकर मेरा लंड अपनी गीली चूत पर रगड़ा और धीरे-धीरे अंदर ले लिया। “आह्ह्ह… कितना मोटा और गर्म है… पूरी भर गया…”

फिर वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगीं। उनकी भारी 40D चूचियां उछल-उछलकर नाच रही थीं। मैं नीचे से धक्के दे रहा था। कमरे में “पच-पच” की सेक्सी आवाज और हम दोनों की तेज सांसें गूंज रही थीं।

“हाँ आंटी… तेज… बहुत अच्छा लग रहा है…”

“आह्ह… हाँ बेटा… और जोर से… मेरी चूत को प्यार से भर दो… हाँ… और तेज…”

उनकी चूचियां मेरे चेहरे के सामने उछल रही थीं। मैंने उन्हें दोनों हाथों से पकड़कर चूस लिया। आंटी मेरे होंठों पर किस करने लगीं। हम दोनों एक साथ चरम पर पहुंच गए। मैंने अंदर ही अंदर अपना पूरा लोड छोड़ दिया और वो भी कांपते हुए झड़ गईं।

हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। उनकी चूचियां मेरी छाती से सटी हुई थीं। कुछ देर बाद आंटी ने मेरे गाल पर प्यार भरा किस किया और धीरे से कहा, “ये हमारा राज रहेगा… जब भी मन करे, आ जाना। मैं हमेशा तैयार रहूंगी।”

उस दिन के बाद हम कई बार ऐसे मीठे, गर्म पलों का आनंद लेते रहे। लेकिन कुछ महीनों बाद मुझे पता चला कि वो विदेश चली गई हैं। वो यादें आज भी मेरे मन में ताजा हैं और जब भी याद आती है, मुस्कुराहट आ जाती है।

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