योग सिखने के बहाने चुदवाने लगी मेरी बीवी टीचर से

मेरी बीवी नैंसी की उम्र 27 साल है और वो एक मदमस्त 36-28-38 की फिगर वाले जिस्म की मालकिन है. जो भी उसे एक बार देखे, वो मुठ मारे बिना नहीं रह सकता. जब वो 23 साल की थी तब हमारी शादी हो गई थी. हम दोनों की सेक्स लाइफ बहुत मस्त चल रही थी. दो साल में उसने ट्विन्स को जन्म दिया.

लेकिन उसके बाद वो दोनों बच्चे की देखभाल में लग गई और कभी कभी ही मुझ से चुदती. मैं भी उसकी परिस्थितियों को समझता था. हम सब संयुक्त परिवार में रहते थे. बाद में मेरे बिज़नेस की वजह से मैंने नया मकान लिया और हम दोनों वहीं शिफ्ट हो गए. इसलिए ज्यादा काम नहीं रहता था.

पर वो तीन साल में नैंसी का वजन 50 किलो से 80 किलो हो गया. उसी वजह से हमें सेक्स में दिक्कत होने लगी. हम दोनों ने कई उपाय किये, पर वजन नहीं कम हुआ. फिर एक दिन मैंने इंटरनेट पर सर्च किया तो प्राइवेट योग टीचर का पता मिला.

मैं- नैंसी, तुम्हारी समस्या का समाधान मिल गया.

नैंसी- सच? मजाक मत करो किशोर.

मैं- मजाक नहीं कर रहा डार्लिंग, एक प्राइवेट योग टीचर मिला है. वो योग की विधि द्वारा तुम्हारी समस्या का निवारण कर सकता है.

नैंसी- ओके.. वैसे भी मैं क्लास नहीं जा सकती ना, दोनों बच्चे को कौन देखेगा. तुम उसी से बात कर लो.

मैं- ओके डार्लिंग.. अभी करता हूँ. बच्चों के लिए मैंने बात कर ली है इधर पास में ही एक चाइल्ड केयर सेंटर है, तू उससे बात कर लेना.

मैंने उस योग टीचर प्रभाकर से बात की और शाम को घर पे मीटिंग फिक्स की. ठीक समय 6 बजे घंटी बजी और ये उसी ने बजाई थी. मैंने जाकर दरवाजा खोला तो एक 38 साल का पहाड़ी आदमी अन्दर आया.

मैं- आईये प्रभाकर जी, यहाँ बैठिये.

प्रभाकर- ओके सर जी, थैंक्स.

मैं- क्या लेंगे चाय या ठंडा.

प्रभाकर- निम्बू शरबत और कुछ नहीं.

मैं- नैंसी, तीन गिलास निम्बू शर्बत बना लो. प्रभाकर जी आप बहुत फिट लगते हो.. इसका राज़ क्या है?

प्रभाकर- मैं पहले फौज में था. वहीं जवानों को योग ही सिखाता था.. और अब रिटायर के बाद प्राइवेट में रोज 2 घंटे योग सिखाता हूँ.

मैं- अच्छी बात है.. आपकी फीस क्या है?

प्रभाकर- मेरी फीस ज्यादा है अगर आप दे पाएं, तो ही बात आगे करते हैं. मैं दस हजार महीने का लेता हूं.

मैं- फीस की कोई दिक्कत नहीं पर मुझे रिजल्ट चाहिए.

प्रभाकर- डोंट वरी, मैं कभी फेल नहीं हुआ.

इतने में नैंसी शर्बत लेकर आ गई. हम सबने ठंडा पिया.

नैंसी- मैंने सुना है कि फौजी कड़क होते है, पर मैं तो बहुत आलसी हूँ. तभी तो ये वजन बढ़ गया है.

प्रभाकर- आपके वजन के साथ साथ आपका आलस भी दूर कर दूंगा.

यह कह कर प्रभाकर चला गया और रोज़ सुबह 7 से 9 बजे का आने का टाइम फिक्स हुआ. उसके बाद हर रोज 2 घंटे योग का सेशन होता. उस सेशन के बाद मैं ऑफिस जाता था. प्रभाकर सचमुच नियम का पक्का था. नैंसी का रोज पसीना निकलता था और धीरे धीरे वजन कम होने लगा.

हम दोनों प्रभाकर के साथ घुल मिल गए और वो भी. उसने मुझे भी योग की आदत डाल दी. फिर मैं भी रोज योग करने लगा. मेरी बीवी भी उसके तारीफ करती थी. वो उसमें थोड़ा इंटरेस्ट ले रही थी. ये सब 4 महीने तक चलता रहा. तब तक उसने कभी नैंसी को बुरी नजर से नहीं देखा, ये मैं जानता था.

अब नैंसी का वजन 50 के करीब आ गया था और मेरी बीवी का फिगर भी पहले जैसा दिखने लगा था जो कि जो सबके लंड खड़े कर दे. इसमें प्रभाकर का बचना भी मुश्किल था, पर जब तक नैंसी कोई पहल न करे और मुझे उस पर पूरा भरोसा था कि वो नहीं करेगी.

मैं कई बार नैंसी को फैंटसी की बारे में बात करना चाहता, पर वो हर बार मना कर देती ओर कहती कि तुम पागल हो गए हो. एक दिन में 8 बजे उठा, पर सेशन तो 7 बजे स्टार्ट हो गया था. सेशन तो हॉल में ही होता है.

मैंने बाहर निकल कर देखा रोज की तरह नैंसी केपरी और शार्ट टी-शर्ट में योग करती थी. आज कमर की कसरत थी, तो वो उल्टी पड़ी हुई थी. प्रभाकर उसकी कमर को दबा रहा था. कभी कभार वो उसके पेट पर भी हाथ रख देता था और नैंसी चुपके से मुस्कान दे देती थी इस तरह कि प्रभाकर को पता न चले.

प्रभाकर- अब आपकी बॉडी बहुत कम हो गई है नैंसी जी.

नैंसी- हां, पहले जैसी बॉडी हो गई है.

फिर वो धीरे धीरे नैंसी के पेट को सहलाने लगा और नैंसी भी हल्की हल्की आहें भरने लगी. मुझे तो विश्वास नहीं हो रहा था, पर ये सच था कि उसको प्रभाकर अच्छा लगने लगा था. फिर प्रभाकर नैंसी के मम्मों को ऊपर से दबाने लगा.. और अपना हाथ ब्रा में डालने ही वाला था कि नैंसी ने उसे पकड़ लिया.

नैंसी- ये गलत है प्रभाकर.

प्रभाकर- इसमें क्या गलत है नैंसी?

नैंसी- मैं किसी की बीवी हूँ. मैं अपने पति को धोखा नहीं दे सकती.

तभी मैंने राहत की सांस ली और अपना दरवाजा नॉक किया और वो दोनों फिर से नार्मल हो गए.

मैं- नैंसी मेरे लिए नाश्ता बनाओ और प्रभाकर जी आपको फिटनेस के लिए हमने रखा था, वो लक्ष्य पूरा हुआ और ये रहे आपके पैसे.

प्रभाकर- जी धन्यवाद.. आपको मेरी ओर से कोई परेशानी हुई हो तो माफी चाहता हूँ.

मैं- ये क्या कह रहे हो. हमें तो आप से बहुत कुछ सीखने को मिला प्रभाकर जी.

नैंसी- ये क्या कर रहे हो आप? अभी तो मेरी लेग की कुछ एक्सरसाइज बाकी है. और प्रभाकर जी आपने इन्हें बताया क्यों नहीं?

प्रभाकर- नैंसी जी मैंने और किशोर जी ने 3-4 महीने का डिसाइड किया था जो टाइम खत्म हो गया है.

नैंसी- किशोर, अभी मेरी लेग की कसरत बाकी है, वो तो मुझे खत्म करनी ही है.

मैं- ओके डार्लिंग, सिर्फ 1 महीना.. उससे ज्यादा नहीं.

नैंसी- ओके नो प्रोब्लम डार्लिंग.

फिर प्रभाकर चला गया. मैंने जानबूझ कर नैंसी का फ़ोन गिरा दिया और वो टूट गया.

नैंसी- अरे ये क्या हो गया? अब मैं क्या करूँगी?

मैं- डोंट वरी डार्लिंग, मैं नया फोन लेकर तुम्हें दूंगा.

नैंसी- तुम कितना प्यार करते हो मुझसे जानू.. मैंने तुम्हारे लिए ये सब किया किशोर.

मैं- ये तो सही है.. पर तुम्हारे जिस्म का जादू प्रभाकर पर भी सवार है, ध्यान रखना नैंसी डार्लिंग.

नैंसी- ऐसा कुछ नहीं है.. झूठे कहीं के.. बीवी जरा सा आगे निकल जाए, ये पतियों को पसंद ही नहीं. अब मुझे नाश्ता बनाना है.

मैं नाश्ता करके ऑफिस चला गया. आते वक्त मैंने एक मोबाइल लिया जिसमें सीक्रेट तरीके से फ़ोन रिकॉर्ड हो सके और किसी को पता न चले. वो लेकर में घर आया और नैंसी फोन देखकर बहुत खुश हुई. फिर रोज योग का सेशन होने लगा.

और एक दिन मुझे रात को ऑफिस जाने का आईडिया आया और मैंने नैंसी को बताया तो वो थोड़ी नाराज हुई पर बाद में समझाने पर मान गई. मैं उस दिन रात को गया और सुबह आया. मैं आते ही सोने गया और फिर प्रभाकर आया और योगासन शुरू हुए.

प्रभाकर- क्या आज किशोर नहीं है या जल्दी चले गए?

नैंसी- वो सोये हुए है.. कल रात को उनकी नाईट शिफ्ट थी इसलिए.

प्रभाकर- ओके तो आज शांति से कसरत करेंगे.

पर मुझे नींद नहीं आ रही थी.. इसलिए मैं उन दोनों को सुनने का प्रयास कर रहा था.

थोड़ी देर में मैंने महसूस किया कि सन्नाटा सा हो गया. मैंने बाहर जाकर देखा तो नैंसी सीधी लेटी हुई थी और प्रभाकर उसके पेट को हल्के से चूम रहा था और धीरे धीरे मेरी बीवी के होंठों को चूस रहा था.

तभी नैंसी ने उसे हटाया और कहा- ये सही नहीं है.. किशोर भी यही पास में सोये हैं.

प्रभाकर तो कुछ सुन नहीं रहा था. वो तो नैंसी को किस करे जा रहा था और नैंसी के जिस्म को सहला भी रहा था. फिर वो खड़ा हुआ और जाने लगा.

नैंसी- क्या हुआ?

प्रभाकर- तुम हर बार मुझे टाल देती हो.

नैंसी- मैं मेरे पति को धोखा नहीं दे सकती और तुम्हारे बिना रहा भी नहीं जाता.

फिर वो धीरे से प्रभाकर के पास गई और उसे किस करने लगी. प्रभाकर भी मेरी बीवी के होंठों के रस को पीने लगा.

नैंसी- अभी तुम जाओ, बाद में देखती हूं.

फिर प्रभाकर चला गया. दूसरे दिन मैंने रात को आकर नैंसी का फ़ोन चैक किया तो प्रभाकर से थोड़ी बात हुई थी.. जो मैंने सुनी, वो दोनों दोपहर को मूवी देखने जाने वाले थे. मैंने भी दोपहर से छुट्टी ले ली. मैंने उसके पीछे की लाइन में बुकिंग करवाई. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मूवी शुरू होने के 2 मिनट बाद मैं आया और बैठ गया. मूवी में किस का सीन आया. प्रभाकर नैंसी का हाथ मसलने लगा. नैंसी कुछ नहीं बोली. फिर वो नैंसी की पीठ को सहलाने लगा. फिर धीरे धीरे प्रभाकर ने नैंसी के ब्लाउज में हाथ डाल दिया. नैंसी ने हल्की सी आह भरी. मेरा लंड तो खड़ा हो गया.

नैंसी ने प्रभाकर की जींस की जिप खोली और उसके लंड को मसलने लगी. थोड़ी देर ये सब चला फिर वो दोनों उठकर वहां से चले गए. मैं भी उनके पीछे आ गया. वो मेरे ही घर आ गए और सीधे बेडरूम में आ गए. दोनों आते ही एक दूसरे को किस करने लगे.

वो योग गुरू प्रभाकर मेरी बीवी नैंसी के होंठों के रस को पी रहा था और मेरी बीवी के हुस्न की दावत उड़ा रहा था. प्रभाकर ने साड़ी को उतार फेंका. इसके बाद ब्लाउज और पेटीकोट भी नैंसी के जिस्म से अलग हो गए. प्रभाकर नैंसी के पूरे बदन को चूमता रहा.

अब तक नैंसी भी बहुत गर्म हो चुकी थी. वो प्रभाकर का सिर पकड़ कर अपनी क्लीवेज में घुसाकर दबाने लगी. प्रभाकर ने ब्रा का हुक खोल दिया और नैंसी के दोनों कबूतरों को आज़ाद कर दिया. नैंसी को भी शर्म महसूस होने लगी और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं. प्रभाकर नैंसी के मम्मों को चूसने और मसलने लगा और नैंसी ज्यादा गर्म हो गई.

नैंसी- आह.. चूसो प्रभाकर जी मसल दो इनको आह..

प्रभाकर- यस नैंसी.. आज तुमको मसल के रख दूंगा.

फिर उसी वक्त मैंने नैंसी को कॉल किया और उसको बोला- मैं 30 मिनट में आ रहा हूँ.

नैंसी- प्रभाकर तुम यहां से जाओ. मेरे पति आधे घंटे में आ रहे हैं.

प्रभाकर- डोंट वरी नैंसी, अभी आधा घंटा तो है ना.

फिर प्रभाकर ने अपना लंड बाहर निकाला तो करीब 9 इंच का था और मोटा भी बहुत था. उसको देख नैंसी चौंक गई. प्रभाकर ने देर ना करते हुए नैंसी के मुँह से लगा दिया तो उसने लंड चूसने से मना कर दिया.. और लंड हटा दिया. प्रभाकर फिर लंड को चुत के होंठों के पास लेकर गया और नैंसी की चूत फैला कर एक जोर का धक्का लगा दिया, जिससे आधा लंड नैंसी की चूत में घुस गया.

नैंसी- अरे मर गई.. बहुत मोटा है.. आह.. निकालो इसे..

प्रभाकर- दर्द के बाद तो मज़ा है.

यह बोल कर उसने दूसरा दे धक्का दिया और पूरा लंड नैंसी की चूत में घुसा दिया. नैंसी चीखने लगी क्योंकि उसने कभी इतने बड़े लंड को झेला नहीं था. उसकी आँखों में अंधेरा हो गया. प्रभाकर फिर उसे किस करने लगा, कुछ पल बाद नैंसी को होश आया. बाद में वो लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा. अब नैंसी को भी मज़ा आने लगा.

नैंसी- आह.. तेज़ करो प्रभाकर.

प्रभाकर- यस नैंसी.. तुम्हारे लिए.

प्रभाकर ने स्पीड बढ़ा दी.

नैंसी- आह, आह कम ऑन प्रभाकर.. फ़क मी हार्ड.

दस मिनट तक वो लेटे हुए चोदता रहा, फिर वो नीचे लेट गया और नैंसी को लंड पर बैठा दिया. अब वो नीचे से धक्के मारने लगा ओर नैंसी भी उसका भरपूर साथ दे रही थी. फच फच और नैंसी की आह आह की आवाज़ से पूरा कमरा गूंज उठा. नैंसी खुलकर सीत्कार करने लगी.

ऐसे प्रभाकर ने उसे 10 मिनट तक चोदा और उसने नैंसी के पेट पर अपने गर्म वीर्य की पिचकारी दे मारी. फिर रूमाल से वीर्य को पोंछा और दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए. वो नैंसी को किस करके जल्दी से मेरे घर से निकल गया. उसके बाद मैंने बाहर आकर कॉलबेल बजाई. नैंसी ने तुरंत दरवाजा खोला. उसे देख कर लगा ही नहीं कि उसके साथ कुछ हुआ. वो बहुत खुश लग रही थी.

मैं- आज बड़ी खुश लग रही हो तुम.

वो- कुछ नहीं बस ऐसे ही. आप भी ना..

उसके जाने के बाद मैंने बाहर आकर कॉलबेल बजाई. नैंसी ने तुरंत दरवाजा खोला. उसे देख कर लगा ही नहीं कि उसके साथ कुछ हुआ. वो बहुत खुश लग रही थी.

मैं- आज बड़ी खुश लग रही हो तुम.

वो- कुछ नहीं बस ऐसे ही. आप भी ना..

मैं- मेरे साथ गोवा चलोगी? मुझे कल ऑफिस के काम से 4 दिन जाना है.

वो- वाओ, गोवा.. मैंने कभी नहीं देखा.. मैं जरूर चलूंगी.

मैं- मैंने एक कमरा भी सितारा होटल में 201 नंबर का बुक करवा लिया है.

मैंने ये जानबूझ कर बताया था. वैसे भी मुझे ऑफिस में कुछ काम नहीं था. मैं भी छुट्टी पर था. दूसरे दिन आकर मैंने नैंसी के फ़ोन की रिकॉर्डिंग सुनी.

नैंसी- हैलो प्रभाकर, एक खुशखबरी है.

प्रभाकर- क्या है जान?

मोन- मैं कल गोवा जा रही हूँ. चार दिन के लिए पति के साथ. उसने एक होटल में 201 नंबर का कमरा बुक करवाया है और वो ऑफिस काम से आए हैं इसलिए व्यस्त रहेंगे.

प्रभाकर- अरे ये तो बात बन गई. मैं भी गोवा आ जाता हूं. हम लोग वहां पर मस्त होकर घूमेंगे.

नैंसी- ठीक है तुम गोवा आकर मुझे अपने होटल और कमरा नम्बर वगैरह मैसेज कर देना. तब तक कोई बात नहीं.. अब रखती हूं.

ये सुनकर मेरे दिल को बड़ी तसल्ली हुई क्योंकि इसी लिए तो मैंने ये सब प्लान किया था. फिर हम दूसरे दिन गोवा के लिए फ्लाइट ले ली. दो घंटे में तो होटल में चैक इन भी कर लिया. मैं कमरे की बाल्कनी में खड़ा था और नैंसी फ्रेश होने बाथरूम में थी. तभी मैंने नीचे एक टैक्सी को देखा. उसमें से प्रभाकर बाहर आया. कुछ पल बाद नैंसी के फ़ोन पर मैसेज आया. मैंने उसको न पढ़ना ही मुनासिब समझा.

इतने में नैंसी नहाकर आई तो मैंने कहा- किसी का मैसेज आया है.

उसने पढ़ा और खुश हो गई. मैंने उसके बाद मैसेज पढ़ा तो हैरान हो गया. वो प्रभाकर का मैसेज था. होटल सितारा और वो कमरा 200 में था.. मतलब बाजू में था. पर मैं भी कम नहीं था. मुझे भेष बदलना अच्छे से आता था और उसके लिए सब जरूरी सामान मेरे पास था. पहले भी मैंने कई बार ट्राय किया, मेरी बीवी कभी भी मुझे पहचान नहीं पाई थी. इसी लिए मेरा आत्मविश्वास और बढ़ गया.

मैं- नैंसी, मैं मीटिंग में जा रहा हूँ.. पर तुम कहां जाओगी?

नैंसी- पता नहीं.. कोई अच्छी जगह लगी तो जाऊँगी.

तभी उसके फ़ोन पर एक और मैसेज आया. मैं वहां से निकल कर सीधा गया कमरा 199 में.. ये कमरा भी मैंने बुक करवाया था. मैंने ऑफिस के कपड़े निकाल कर रोमियो हिप्पियों जैसे पहन लिए.. साथ में दाड़ी मूंछ भी लगा ली.. और फुल मेकअप करके मैं बाहर टहलने लगा.

थोड़ी ही देर में नैंसी सजधज के बाहर निकली. उसने ब्लू जींस और सफेद टॉप पहना था.. और बाल तो ऐसे बनाए थे कि बता नहीं सकता. मेरे लिए वो कभी भी इतनी सजी नहीं थी. वो प्रभाकर के कमरे के पास गई और प्रभाकर भी बाहर आया. फिर वो दोनों गले मिले और हाथ में हाथ मिलाकर चले गए. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

वो दोनों बीच पर घूमने गए, मैंने पीछे लगा था, बाद में वे दोनों पब में गए और काफी पी. इसके बाद 6 बजे वे लोग वापस होटल आ गए. लेकिन मेरा सपना पूरा नहीं हुआ. फिर मैं पुराने गेटअप में आ गया और कमरे में आया.

मैं- क्या हुआ नैंसी डार्लिंग आज किधर टाइम पास किया?

नैंसी- मैं तो अपनी एक सहेली के साथ रही, हम लोग कई जगह घूमने गए और काफी शराब भी पी.

मैं- वाह तुम्हारी सहेली भी आई है.. तो फिर ठीक है पूरे 3 दिन अपनी सहेली के साथ घूमना.

नैंसी- आई नहीं, यहीं बना ली है एक… चलो मैं फ्रेश होकर आती हूँ.

फिर हमने शाम को डिनर किया और नैंसी के साथ संभोग भी किया और दोनों सो गए. थोड़ी देर बाद नैंसी उठी. कमरे से बाहर आई. मेरी नींद तो कब की खुली हुई थी. मैंने तुरंत उसके कमरे के पास गया और झाँ

कने की कोशिश कर रहा था तभी दरवाजे के की-होल से देखा तो पूरा कमरा दिखाई दे रहा था।

नैंसी प्रभाकर के कमरे में गई. उसने काली नाइटी पहनी थी. वो सीधे जाकर प्रभाकर से गले मिली. फिर दोनों एक दूसरे के होंठों के रस का रसपान करने लगे. प्रभाकर फिर उसके गले तो चूमने लगा और फिर गाल, सिर, कान सभी जगह. फिर वापस होंठों को चूसने लगा साथ में नैंसी की गांड को सहलाने लगा.

ये सब 20 मिनट तक चलता रहा. दोनों के हाथ लाल हो गए. नैंसी ने कभी इतना लंबा किस मुझसे नहीं किया था पर प्रभाकर के साथ काफी खुली हुई थी ये सच था. उसके बाद नैंसी की नाइटी को प्रभाकर ने उतार दिया. इसकी वजह से नैंसी सिर्फ ब्रा और पेंटी में रह गई.

उस वक्त काफी सेक्सी लग रही थी. खुले हुए बाल, भोलेपन वाली हंसी, तने हुए स्तन और मदमस्त यौवन. ऐसा लगा कि कोई अप्सरा मेनका धरती पर आ गई हो. प्रभाकर उसके पास गया और दोनों हाथों से पकड़ कर उसका चेहरा थोड़ी देर देखा और बोला- तुम आज काफी सुंदर लग रही हो. इतनी तो घर पे भी नहीं लग रही थी नैंसी.

नैंसी ने शर्माते हुए कहा- ये सब आप के लिए किया प्रभाकर जी.. मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं.

प्रभाकर वापस उसे किस करने लगा, फिर उसके स्तनों के बीच में बनती रेखा को चूमने लगा. इससे नैंसी रोमांचित हो उठी. वो प्रभाकर का सिर पकड़ कर उसके सर को दबाने लगी और अपने मुँह से आह आह सीत्कार निकालने लगी.

उसके साथ साथ प्रभाकर उसके स्तनों को ब्रा के ऊपर से मसलता रहा. वो मेरी बीवी के कोमल और तने हुए स्तनों को दबाकर उसको और गर्म कर रहा था. जब जब वो स्तन को मसलता हर बार नैंसी की ‘आह आह..’ सीत्कार निकलती.

थोड़ी ही देर में प्रभाकर ने ब्रा को स्तनों से अलग कर दिया. प्रभाकर ने फिर नैंसी की ओर देखा तो नैंसी शर्मा कर नीचे देखने लगी. तभी प्रभाकर ने उसे कमरे में रखे सोफे पर बिठाया और वो घुटनों के बल नीचे बैठ गया. फिर प्रभाकर नैंसी की नाभि को चूमने लगा. धीरे धीरे वो उसको चूमते हुए स्तनों तक आ गया. उसने नैंसी के एक निप्पल को धीरे से काटा.

नैंसी- आह काट क्यों रहे हो जानू?

प्रभाकर- अच्छा नहीं लगा जान?

नैंसी- बहुत अच्छा लगा.. पहली बार किसी ने ये किया.

प्रभाकर- तुम्हारे पति ने कभी नहीं काटा?

नैंसी- कभी नहीं.

प्रभाकर- आज मैं तुम्हें सभी अहसास करवाऊंगा.

फिर प्रभाकर बारी बारी से एक एक स्तन को अपने मुँह में लेकर चूसता और कभी कभी निप्पलों को काट भी लेता था.

नैंसी- आह.. और चूसो और मसलो जानू.. आह आह आह..

यह बोल कर प्रभाकर के सिर को और जोर से दबा देती. बीच बीच में प्रभाकर नैंसी के होंठों का रसपान भी करने लगता. करीब 15 मिनट तक उसके स्तनों को चूम कर और मसल कर लाल कर दिया. उसके बाद नैंसी की पेंटी को उतार दिया. और उसकी योनि के दाने को छुआ, तो वो ‘आउच..’ करके मचल उठी और प्रभाकर के हाथ को पकड़ लिया.

नैंसी- ये तो गलत है जानू.. तुम इसको छू नहीं सकते.. दूर चले जाओ.

प्रभाकर ने घबराते हुए कहा- क्या हुआ जान? मुझसे क्या भूल हुई?

नैंसी- यही कि मेरे कपड़े उतार कर मुझे नंगी कर दिया, पर खुद के कपड़े नहीं उतारे..

प्रभाकर- अरे जानू इस बात के लिए मुझसे नाराज हो? चलो ऐसा करो तुम्हीं अपने हाथों से उतार दो.

नैंसी ने प्रभाकर के कपड़े उतारने शुरू किए. पहले टी-शर्ट को उतारा. प्रभाकर का सीना भी बालों से भरा हुआ था. नैंसी उसके सीने को चूमने लगी. थोड़ी देर बाद उसका लोअर भी उतार दिया. उसने अन्दर कच्छा तो पहना भी नहीं था, शायद वो सीधे संभोग के लिए ही तैयार था.

फिर प्रभाकर ने नैंसी के पैरों को चूमना शुरू किया. उसके पैर के अंगूठे को पहले चूम कर वो धीरे से आगे बढ़ा. फिर वो नैंसी की जांघों को प्यार से चूम कर वापिस उसकी योनि के पास आ गया. वो धीरे से योनि को सहलाने लगा और नैंसी ‘आ..आह..’ करने लगी.

फिर प्रभाकर ने दोनों हाथों का इस्तेमाल करके नैंसी की योनि को थोड़ा सा खोल दिया. नैंसी की चूत की फांकों पर अपनी जीभ फेर कर चूत को चूमना शुरू किया. अब नैंसी भी उसके लंड को पकड़ लिया और चमड़ी को नीचे उतार कर सुपारा बाहर निकाल लिया.

नैंसी लंड को हिलाने लगी. थोड़ी ही देर में प्रभाकर का लंड काफी बड़ा हो गया, करीबन 9 इंच का. फिर दोनों 69 की अवस्था में आ गए. नैंसी उसके लम्बे लंड को मुँह में लेकर मुख मैथुन कर रही थी और प्रभाकर उसकी योनि का रसपान कर रहा था. दोनों दस मिनट तक इस अवस्था में रहे. वो दोनों एक दूसरे को चुंबन करने लगे, उसके बाद प्रभाकर अपना लिंग नैंसी की योनि के पास रगड़ने लगा.

नैंसी- अब कितना तड़पाओगे जानू? डाल दो ना

प्रभाकर- तड़प में ही मज़ा है जान.. अभी तो थोड़ी देर लगेगी.

नैंसी- कितनी देर? अब यही तो बचा है.

प्रभाकर नैंसी के स्तन मसलते हुए बोला- थोड़ा सब्र रखो मेरी जान.

फिर उसने बैग में से एक पाऊच निकाला, उसमें जैम था. नैंसी देखकर हैरान रह गई और पूछने लगी- इसका क्या करोगे जानू?

प्रभाकर कुछ बोले बिना ही जैम को नैंसी के स्तनों पर लगाने लगा. जैम ठंडा होने की वजह से नैंसी मचलने लगी. प्रभाकर ने नैंसी के दोनों स्तनों को जैम से पूरा लाल कर दिया. फिर थोड़ा जैम उसकी योनि में भी लगा दिया. अब उसने मेरी बीवी का एक स्तन अपने मुँह में भरा और निप्पल चूसने लगा.. फिर पूरा स्तन मुँह में भर लिया. साथ ही वो अपने हाथ से नैंसी की योनि को मसलने लगा जिससे नैंसी मचलने लगी.

नैंसी- आह जानू, बहुत अच्छा लग रहा है… आह आह..

प्रभाकर- तुम्हारा पति कुछ नहीं करता इस तरह?

नैंसी- आह जानू, कभी भी नहीं.

प्रभाकर- औरत को खुश करना भी नहीं आता चूतिये को.

नैंसी- हम्म आह आआआह करते रहो.

ये देख कर मुझे ऐसा लग रहा था कि उसका इंटरेस्ट मुझसे थोड़ा कम हुआ है पर वो तो आने वाला वक्त ही बताएगा. फिर प्रभाकर ने नैंसी के दूसरे स्तन को मुँह में लिया और चूसने लगा. अपना एक हाथ पहले स्तन पर रख कर मसलने लगा. उसके हाथ गीले होने की वजह से स्तन पर फिसल से रहे थे. बाद में वो नैंसी के गले को चूमने लगा. नैंसी ने उसके बालों को कसके पकड़ लिया और अपना प्यार जताने लगी. फिर वो एक दूसरे को किस करने लगे.

प्रभाकर- अब तुमको असली सुख दूंगा जान.

नैंसी- जल्दी करो मेरे राजा.. मेरी मुनिया कब से तड़प रही है.

प्रभाकर ने अपने लिंग की नोक को नैंसी की योनि द्वार पर रख कर एक जोर का झटका दिया और आधा लिंग योनि में घुस गया.

नैंसी चीख पड़ी- आह मर गई जानू..

फिर प्रभाकर ने दूसरा धक्का दिया और पूरा लिंग चला गया योनि कि जड़ में उतर गया.

नैंसी चिल्लाने लगी- निकालो इसे प्रभाकर, मैं मर जाउंगी..

प्रभाकर थोड़ा रुक गया और नैंसी को स्मूच करने लगा. थोड़ा दर्द कम होने पर धीरे धीरे धक्के देने लगा. दो मिनट बाद नैंसी का दर्द कम हुआ. फिर उसने नैंसी को अपने लिंग के ऊपर बैठा दिया. धीरे धीरे नेहा को भी मज़ा आने लगा. वो उछल उछल कर प्रभाकर को साथ देने लगी.

नैंसी- आज पहली बार मेरी योनि में बड़ा मूसल ठीक से गया है और एडजस्ट भी हुआ है.. आह उम्म्ह… अहह… हय… याह… और तेज़ करो प्रभाकर.

प्रभाकर- आह आह आह उफ्फ..

नैंसी- यस फ़क मी हार्ड..

दस मिनट की चुदाई के बाद प्रभाकर ने लिंग को बाहर निकल कर नैंसी की योनि के ऊपर अपने वीर्य की पिचकारी डाली. फिर एक रूमाल से उसकी योनि को साफ किया.

प्रभाकर नैंसी के पास लेट गया और उसको किस किया. फिर बोला- मज़ा आया जान?

नैंसी- बहुत मज़ा आया जानू, तुमने तो मुझे जन्नत की सैर करा दी. आज तो ऐसा लग रहा था कि असली सुहागरात थी.

प्रभाकर- अभी सुहागरात पूरी कहां हुई.

नैंसी- मतलब? मैं अभी किशोर से चुद कर आई हूं.. फिर तुमने चोदा.. क्या अब फिर से? मेरी चूत सूज जाएगी.. नहीं जानू.

प्रभाकर नैंसी की गांड पर एक चांटा मार कर बोला- इसका तो बाजा बजाना बाकी है.

नैंसी- नहीं प्रभाकर, गांड नहीं.. सुना है दर्द होता है.

प्रभाकर ने बिना कुछ बोले नैंसी को घोड़ी बनाया और अपना लिंग नैंसी की गांड पर रगड़ने लगा. फिर अपने बैग से एक क्रीम निकाल कर नैंसी की गांड के छेद पर लगाई, फिर अपने लिंग पर. नैंसी मना करती रही, पर उसकी एक ना सुनी. प्रभाकर ने एक धक्का दिया तो थोड़ा ही लिंग अन्दर गया, इतने में तो नैंसी छटपटाने लगी.. जैसे मुर्गी कटने वाली हो.

नैंसी- ऊई माँ, मर गई जानू.

प्रभाकर ने थोड़ी देर बाद दूसरा धक्का दिया और पूरा लिंग घुसा दिया. थोड़ी देर तो ऐसा लगा कि नैंसी बेहोश हो गई.. पर फिर जोर से चीखी.

प्रभाकर- बहुत कसी हुई गांड है जान तेरी.. लगता है किसी ने नहीं मारी.

नैंसी- आह प्लीज निकालो इसे.. बहुत दर्द हो रहा है.

प्रभाकर धीरे धीरे धक्के लगाता रहा और उसका लिंग मेरी बीवी की गांड में एडजस्ट हो गया. अब तो नैंसी को भी मज़ा आने लगा. नैंसी भी अब गांड हिला कर प्रभाकर का साथ दे रही थी.

नैंसी- बहुत मज़ा आ रहा है जानू, अहह आआआह..

प्रभाकर- दर्द के बाद मज़ा ही होता है.

नैंसी- आआआआह… और तेज करो जानू.

प्रभाकर नैंसी की हिरनी जैसी पतली कमर को पकड़ कर तेज़ धक्के दे रहा था. हर धक्के पे नैंसी के चेहरे पर प्यास और बढ़ रही थी और थोड़ी सन्तुष्टि का भाव भी दिख रहा था. फिर प्रभाकर ने नैंसी को दीवार के सहारे खड़ा किया और उसके स्तनों को पकड़ लिया. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

नैंसी के स्तनों को मसलते वापस वो उसकी गांड मारने लगा. कुछ मिनट बाद उसकी गांड में ही झड़ गया. उसके बाद गांड से लंड निकाल कर दोनों बाथरूम की और गए. नैंसी तो ठीक से चल भी नहीं पा रही थी. दोनों ने एक दूसरे को रगड़ रगड़ के साफ किया और बेड पे आकर एक दूसरे से चिपक कर बातें करने लगे.

नैंसी- आज तो पागल बना दिया प्रभाकर तुमने. सच में आज पहली बार मेरी असली सुहागरात हुई.

प्रभाकर- तुम जैसी जवान और खूबसूरत लड़की के साथ संभोग करने मिला यही बहुत है. वैसे तुम्हारा पति चूतिया है ना?

नैंसी- क्यों?

प्रभाकर- तुम जैसी पटाखा माल और गोवा में भी मस्ती की बजाए ऑफिस जाता है.

नैंसी- मेरे लिए तुम तो हो ना.

फिर वो दोनों सो गए. मैं भी बीवी की चुदाई देख मुठ मार के सो गया. सुबह नींद खुली 8 बजे तो नैंसी मेरे साथ बेड पर सोई थी.

मैंने उसको जगाया- नैंसी, उठो भी यार.. रात को 10 बजे ही हम सो गए थे.. अब कितनी देर तक यहां पड़ी रहोगी?

नैंसी- सोने दो ना किशोर, रात को बड़ी देर से नींद आई थी. कल पूरा दिन घूम लिया था सो थक गई हूं. तुम ऑफिस चले जाओ.

मैंने भी उसे सोने देना मुनासिब समझा. मैं भी मेरे दूसरे वाले कमरे में चल दिया. वो दोनों आज भी घूमने गए, मैं भी पीछे पीछे गया. वो किसी अनजान बीच पर गए, वहां पे कोई नहीं था. वहां पर दोनों ने जमकर चुदाई की. शाम को वो वापस होटल आ गई. थोड़ी देर में मैं भी आ गया. दरवाजा खोला तो नैंसी मेरे सामने सती सावित्री बन कर साड़ी पहन कर खड़ी थी. फिर मैं फ्रेश हुआ और हमने डिनर किया. उसने फिर नाइटी पहन ली.

मैं- अपनी सखी के साथ आज कहां गई थी?

नैंसी- आज तो उसने मुझे कई बीच दिखाए और पैदल चला चला कर बॉडी की बैंड बजा दी.

मैंने नैंसी को किस किया, फिर उसकी नाइटी उतारने लगा तो मुझको दूर कर दिया.

वो- आज तो मैं थक गई हूं. आज नहीं किशोर.. कल करना.

मुझे भी थोड़ा गुस्सा आया क्योंकि उसका प्रभाकर की ओर झुकाव बढ़ रहा था.

मैं- कल सुबह पैकिंग कर लेना, दोपहर को हमें निकलना है.

इतना बोलते ही उसकी थकान दूर हो गई.

वो- क्यों क्या हुआ? तुम तो चार दिन की बात कर रहे थे, अभी तो सिर्फ 2 हुए हैं.

मैं- ऑफिस का काम खत्म हो गया है.

दूसरे दिन मैं उसके साथ वापस आ गया, पर वो नाराज थी. मैं ऑफिस चला गया. वैसे ही कुछ दिन बीत गए. मैं रोज रात को उसे किस करने जाता, तो कोई न कोई बहाना करके मना कर देती. एक दिन मैंने सोचा कि उसे सरप्राईज दूँ.

मैंने मूवी की टिकट ले ली फिर हाफ लीव लेकर घर गया. जैसे ही मैं घर पहुँचा, दरवाजा बंद था पर किचन की विंडो थोड़ी खुली हुई थी. मैं तो अन्दर का दृश्य देख कर हैरान हो गया. प्रभाकर ने मेरी बीवी को अपनी बांहों में कस के पकड़ कर खड़ा था, नैंसी चाय बना रही थी.

प्रभाकर- उतार दो न ये ब्लाउज नैंसी डार्लिंग.

नैंसी- अरे बाबा तुम खुद क्यों नहीं उतार देते.

नैंसी का ब्लाउज उतर गया तो मैं हैरान रह गया क्योंकि नैंसी ने पिंक कलर की ब्रा पहनी थी जो उसे बिल्कुल पसंद नहीं थी, ऐसा उसने मुझे बताया था. तो फिर आज क्यों पहनी?

मैं फिर दरवाजे का लॉक खोल कर चुपके से अन्दर आ गया और पर्दे के पीछे छिप गया. वो दोनों हॉल में आए.

प्रभाकर- जानू, मैं तुम्हारे लिए रेड वाइन लाया हूं और तुम चाय बना रही हो.

नैंसी- ये क्यों लाए.. मेरे पति को पता चला तो? मैंने उससे झूठ बोला है कि मुझे वाइन पसंद नहीं.

प्रभाकर- तुम्हारे पति को तो बहुत कुछ पता नहीं जानू.

नैंसी- मेरे परिवार वालों ने मेरी शादी जबरदस्ती कर दी थी. मुझे वो पसंद नहीं थे. पर फिर सोचा कि कोई तो ऐसा बंदा मिलेगा जो मुझे समझे, उसे ही मैं अपनी पसंद नापसंद बताऊँगी.

मैं ये सब सुनकर हिल गया. इतना बड़ा धोखा?

प्रभाकर- छोड़ो इन सब बातों को.

यह कह कर उसने नैंसी की साड़ी को अलग कर दिया. दोनों ने टीवी चालू किया और ब्लू फिल्म लगा ली. मुझे तो शॉक पे शॉक मिल रहे थे. मेरी बीवी ब्लू फ़िल्म का नाम सुन कर चिढ़ जाती थी, आज वो ही देख रही थी. फ़िल्म में 2 आदमी एक औरत को बेरहमी से चोद रहे थे.

ये देख दोनों की आंखों में वासना का नशा दिख रहा था. तभी नैंसी ने पीछे दरवाजे की ओर देखा, उसकी नजर पर्दे के पीछे खड़े में जूतों पर गई. शायद उसे मेरी हाजिरी का पता चल गया था इसीलिए उसने पर्दे के सामने थोड़ी स्माइल दी.

फिर प्रभाकर ने उसकी ब्रा को उतार दिया और स्तनों को मसलने लगा. फिर उसने ग्लास में पड़ी रेडवाईन को स्तनों पर डाल दिया, वो नीचे जाती हुई उसके पेटीकोट के अन्दर चली गई. फिर वो नैंसी के स्तनों को बेरहमी से चूसने लगा.

नैंसी उसका सर दबा कर मेरी ओर देखते हुए सिसकारियां निकलने लगी- आह प्रभाकर, आह..

अब तो मुझसे भी नहीं रहा जा रहा था. मैं उनके सामने जाकर खड़ा हो गया ये देख प्रभाकर हड़बड़ाहट से दूर हो गया. नैंसी ने भी नाटक किया.

मैं- ये सब क्या है प्रभाकर?

वो- सॉरी, आज मैं बहक गया.

नैंसी- प्रभाकर आओ.. कस कर मसलो मेरे स्तनों को.. ये तो कब से हमें देख रहा है.

वो दो पल रुका और अचानक ही नार्मल हो गया. आकर स्तनों को मसलने लगा.

मैं- ये सब क्यों किया नैंसी?

नैंसी- तो फिर क्या करती मैं किशोर? मुझे भी तो अपनी लाइफ एन्जॉय करनी थी. रोज रात को तुम मुझे तड़पती छोड़ कर सो जाते थे. प्रभाकर ने मुझे पहली बार सही मायने में औरत का सुख दिया.

मैं- ये सब कब से चल रहा है?

नैंसी- प्रभाकर, तुम अब चले जाओ कल आना.

प्रभाकर- ओके जान.

वो किस करके निकल गया.

मैं बहुत अपसैट था. रात को हमने डिनर किया फिर मैं बेड पे लेट गया. बच्चे भी दूसरे कमरे में सो गए थे. फिर नैंसी रात को ब्लैक नाइटी पहनकर आई और मेरे साथ लेट गई.

नैंसी- तुमको एक बात बतानी थी किशोर. मुझको आज जी भरकर प्यार करो.

मैं- क्यों? क्या हुआ? पछतावा हो रहा है?

नैंसी- बताती हूँ.. पहले मेरी चूत को चाट ना..

मैं उसकी पैंटी को हटाकर उसकी योनि को चाटने लगा.. वो मचलने लगी.

नैंसी- आह किशोर, आह जी भर के चूसो. आज रात मैं तुम्हारी हूँ. कल से मुझ पर प्रभाकर के पूरा हक होगा. वो जो कहेगा, वही मुझे करना पड़ेगा.

उसकी इस बात से मुझ पर से तो सेक्स का नशा ही उतर गया.

मैं- ये क्या कह रही हो तुम?

नैंसी- वो मुझे बहुत खुश रखता है. उसने तो मुझे तुम्हें ना छूने देने को कहा था पर तुम मेरे पति हो, इसलिए सोचा कि एक बार तो तुम्हारा मुझपे हक़ बनता है. इसीलिए में कह रही हूँ कि जी भरके आज रात प्यार कर लो.

मुझे ये सब बातें सुनकर रोना आ गया और मैं रोने लगा. तो उसने मेरा सर पकड़ कर अपने सीने पे रख दिया. मेरे बालों को सहलाने लगी. फिर उसने अपनी ब्रा को उतार फैंका.

फिर वो बोली- अब रोने से क्या होगा किशोर, तुम मेरे पति हो इसलिए मैं प्रभाकर को एक रात धोखा दे रही हूँ.

फिर उसने मेरे मुँह में अपना एक स्तन दे दिया. वापस ना चाहते हुए भी मेरी वासना मुझ पर हावी होने लगी. मैं उसके स्तन को चूमने लगा.

नैंसी- आह किशोर, चूसो इसको.

फिर मैं नैंसी का दूसरा स्तन भी चूसने लगा और जमकर चुदाई की. बाद में मैंने अपना लिंग नैंसी की गांड पे रखा और वो कुछ बोले, मैंने लंड को पेल दिया. उसकी गांड प्रभाकर की मेहरबानी से थोड़ी खुली हुई थी.

नैंसी- आह, आज तक तुमने मेरी गांड क्यों नहीं मारी. चूत से ज्यादा गांड में मज़ा आता है.

मैं बिना कुछ बोले उसकी गांड मारने लगा.. और अन्दर ही झड़ गया. फिर दोनों ने अपने आपको साफ किया और बेड पर लेट गए.

नैंसी- कल से मैं थोड़ा गुस्सा कर दूँ तो बुरा मत मानना.

फिर हम दोनों सो गए. सुबह उठकर फ्रेश हुए. तभी दरवाजे पर घंटी बजी. मैंने दरवाजा खोला तो देखा प्रभाकर एक बैग लेकर खड़ा था.

मैं- तुम यहां?

प्रभाकर- अबे लौड़े, ये मेरा घर है यहां मेरी बीवी रहती है, जब मेरा मन करेगा, मैं इधर आ सकता हूँ.

नैंसी- अरे प्रभाकर तुम कब आए, ये बैग अपनी बीवी को दे दो. मैं उसे हमारे बेडरूम में रख देती हूं.

मैं- ये सब हो क्या रहा है बताएगा कोई?

नैंसी- कुछ नहीं किशोर, अब से प्रभाकर यहां रहेंगे.

मैं- अब कमीने..

नैंसी- तमीज से बात करो किशोर, मैं अपने पति की बेइज्जती बर्दाश्त नहीं कर सकती.

फिर वो दोनों कमरे में गए और सामान एडजस्ट कर दिया. मैं रोज रात को बच्चों के साथ सो जाता और नैंसी के कमरे से ‘आह आह आह..’ की सिसकारियां और चीखें सुनता और रोकर सो जाता. मुझे गोवा की ट्रिप बड़ी ही महंगी पड़ गई. नैंसी सुबह जल्दी उठकर नंगी ही किचन में चाय बनाने जाती और मैं रोज उनकी ओर देखता रहता.

वो अब बिंदास लाइफ एन्जॉय कर रही थी. वो एक दूसरे को मेरे सामने भी किस करते और अंगों को मसलते. मैंने एक दिन अपना आपा खो दिया. जैसे ही नैंसी किचन में गई और चाय बनाने लगी. मैं पीछे से जाकर अपना मुँह सीधा ही उसके योनि पर रख दिया और चूमने लगा. उसको लगा कि प्रभाकर है.

वो आँखें बंध कर मेरा सर दबाने लगी- आह प्रभाकर, पूरी रात तो चूत को चाटा अब भी जी नहीं भर रहा, आह…

फिर मैंने खड़ा होकर अपना लिंग उसकी चूत में पीछे से पेल दिया और जैसे ही एक धक्का लगाया कि उसे पता चल गया कि मैं हूँ.

वो चीखने लगी- प्रभाकर..

तभी मैंने उसके मुँह पे हाथ रखकर उसकी आवाज को रोक दिया और बोला- मैंने तुम्हारे पापा को और परिवार को बता दिए है ये सब तुम्हारे अच्छे कर्म शांति रखो और जो हो रहा है उसे होने दो.

मैंने उसके मुँह से हाथ हटाया तो वो चुप रही और रोते हुए मेरे धक्कों को सहने लगी.

“ये क्या कर दिया तुमने किशोर, अब मैं प्रभाकर को क्या कहूंगी?”

मैं- ज्यादा नखरे मत कर रंडी, मैं भी उसी दिन ऐसे ही रो रहा था, पर तुम पर तो प्रभाकर का भूत ही सवार था. ना तो बच्चों के बारे में सोचा ना तो परिवार के बारे में. और मैंने प्रभाकर को खाने में ऐसी दवा खिलाई है कि वह नामर्द बन जायेगा अपना पूरा जीवन हिजड़ो की तरह तालिया बजा कर गुजारेगा और तू रंडी बनकर अपनी हवस की आग बुझाते रहना.

क्योंकि मैंने तुम्हारा पूरा वीडियो शूट किया है जो तुम्हे रंडी साबित करता है तो तुम मेरे घर और जिंदगी से दूर हो जाओ मैंने तुम्हारे घर वालो को भी सब बता दिया है वह भी तुम्हारा मुँह नही देखना चाहते मैं तुम्हारी छोटी बहन से शादी कर रहा हु वह भी मुझसे शादी करना चाहती है तो बच्चों को नई माँ मिल जायेगी मैं उनपर तुम्हारा साया भी नही पड़ने देना चाहता तो तुम्ह अपने हिजड़े यार के साथ जहा जाना चाहती है जा सकती हो मेरी बला से.

फिर वो रोते हुए अपने कमरे में गई और कमरे को बंद कर लिया. प्रभाकर को जगाया और कुछ बात करने लगी. क्या बात हुई वो पता नहीं चला. दो घंटे बाद दरवाजा खुला और देखा तो प्रभाकर अपना बड़ा बैग लेकर बाहर आया और उसकी आंख में भी आंसू थे.

मैं सोफे पर बैठा था. वो मेरे पास आया और बोला- सॉरी यार, हो सके तो मुझे माफ कर देना. मैं क्या करने यहां आया और मैंने क्या कर दिया. तुम्हारी जिंदगी उजाड़ कर रख दी, सिर्फ अपनी भूख मिटाने के लिए.

मैं- मुझे कुछ नहीं सुनना, तुम दोनो यहां से चले जाओ.

नैंसी भी रोते हुए आई और मेरे पैरों में सर रख कर रोने लगी.

नैंसी- किशोर, मैं वासना की आग में अंधी हो गई थी. मुझे कुछ नहीं दिखाई दिया.

मैं- देखो जो हुआ, उसे बदल नहीं सकते ना तुम मेरे साथ खुश हो ना मैं तुम्हारे साथ फिर जिंदगी में कभी मुझे अपनी मनहूस शकल मत दिखाना मैंने उसके सामने डिवोर्स के पेपर रख दिये और कहा जाते जाते इनपर साइन करना फिर उसे और प्रभाकर को घर से बाहर निकाल दिया ओर दरवाजा बंद कर दीया

मैने गोवा में ही यह सब तय किया था कि घर जाते ही सबूत जुटाऊंगा और नैंसी नाम की गंदगी अपनी लाईफ से निकाल फेंकूँगा पर उनको उनके किये की सजा भी जरूर दूँगा उस दवा की वजह से प्रभाकर किसी काम का नही रहेगा ना कोई काम कर सकेगा ना किसी को चोद पायेगा जिंदा लाश बनकर एडी रगड़ रगड़ कर मरेगा.

मैंने नैंसी को नही बताया पर उसको भी मैंने वही दवाई खिलाई थी क्यों कि जो उनलोगों ने मेरे साथ किया था ऐसे कैसे उन्हें छोड़ देता दोनो ने मुझे मेरे घर मे जलील किया था मुझे कमजोर समझने की गलती उन्हें बहुत महंगी पड़ गई थी. कुछ दिन लाइफ ऐसे ही चली बाद में थोड़ी धीरे धीरे नार्मल हुई. फिर मैने उसकी बहन के साथ शादी कर ली, आज हमारी शादी को पांच साल हो गये है हमारे तीन बच्चें है मैं भी अब मेरा सारा खाली समय अपने बीवी बच्चों को देता हूं वह गलती मैं दोबारा नही करना चाहता.

कुछ सालों बाद मेरे एक दोस्त की जुबानी पता चला कि प्रभाकर और नैंसी कुछ समय साथ रहे फिर अलग हो गये फिर नैंसी गोवा में कॉल गर्ल का काम करती थी फिर गंदी बीमारी से सरकारी दवाखाने में बेनाम मर गयी सेक्स की वजह से वह योग से भोग तक फिर भोग से रोग तक पहुंच गई फिर हम अपनी नार्मल लाइफ एन्जॉय करने लगे, पर जब भी हम प्रभाकर और नैंसी का नाम सुनते तब वो समय कांटे की तरह चुभता.

बस में बगल वाली अनजानी लड़की ने खुद खोली शलवार

मैं प्राइवेट AC बस के सेकंड लास्ट सीट पर आराम से बैठा था। मुंबई में एक हफ्ते की व्यस्तता के बाद हैदराबाद लौट रहा था। रात के 9:30 बजे मुंबई का आखिरी स्टॉप आया। अचानक बस का दरवाजा खुला और एक बेहद खूबसूरत लड़की अंदर आई। लंबे घने काले बाल कमर तक लहरा रहे थे, हाइट लगभग 5’8″, हेल्दी बॉडी, परफेक्ट कर्व्स। वो सफेद सूट-शलवार में थी — दुपट्टा हल्का सा सरककर उसके भरे हुए ब्रेस्ट्स को हल्का-हल्का दिखा रहा था।

उसने सीट नंबर चेक किया और मेरी बगल वाली सीट पर बैठ गई। नजरें मिलीं, दोनों ने शर्माते हुए मुस्कुराकर “हेलो” कहा। बस चल पड़ी तो मैं चुपके-चुपके उसे देखने लगा। उसकी कमर इतनी पतली कि हाथों में समा जाए, हिप्स गोल-गोल और भरे हुए, छाती इतनी भरी हुई कि सूट का कपड़ा तना हुआ था। उसकी खुशबू — हल्की मीठी परफ्यूम और लड़की की नॉर्चरल खुशबू — मुझे पागल कर रही थी। आंखें थकी हुई लेकिन शराबी सी चमक रही थीं।

धीरे-धीरे बातें शुरू हुईं। नाम पूछा — उसका नाम **रिया** था। वो UK जा रही थी, लेकिन इमिग्रेशन में वीजा इश्यू हो गया। एयरपोर्ट से निकली तो फैमिली पहले ही चली गई थी। थकान और डिप्रेशन से उसकी आंखें लाल थीं। मैंने उसे हंसाने की कोशिश की — मुंबई की मजेदार स्टोरीज सुनाईं, अपने एक्सपीरियंस शेयर किए। धीरे-धीरे वो खुल गई। हम दोनों बहुत क्लोज हो गए। मेरी घुटने जानबूझकर उसकी नरम जांघों से टच हो रही थीं। वो कुछ नहीं बोली, बस हल्का सा मुस्कुरा दी।

ढाबे पर डिनर स्टॉप लगा। हम साथ बैठकर खाना खाए — गरमा-गरम परांठे, दाल और चाय। खाते-खाते उसकी आंखों में अब हल्की शरारत दिखने लगी थी। “आप बहुत अच्छे हो,” उसने कहा और मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई।

बस फिर चली। रिया ने कहा, “विंडो साइड पर बैठूंगी, नींद आएगी।” हम दोनों उठे। वो सीट से हटी नहीं, मुझे अंदर से निकलने का इशारा किया। मौका मिल गया। मैं उसके सामने से गुजरा, जानबूझकर थोड़ा झुक गया। बस के झटके ने मुझे उसके ऊपर गिरा दिया। मेरा सीना उसके नरम, गर्म और भारी ब्रेस्ट्स से पूरी तरह दब गया। मेरा लिंग उसकी जांघों के बीच फंस गया और तुरंत खड़ा हो गया। उसकी सांसें तेज हो गईं। मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा, नाक उसके माथे से लगभग छू रही थी। वो भी मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुझे साइड करने लगी, लेकिन धीरे-धीरे, जैसे वो भी एंजॉय कर रही हो।

मैंने अपना हाथ उसके कमर पर फेरा, रास्ते में उसके ब्रेस्ट्स को हल्का स्पर्श दिया। वो हल्का सा कांपी, लेकिन “कोई नहीं” वाली नजर से देखा। अब वो मेरी दाईं तरफ थी।

थोड़ी देर बाद मैंने हिम्मत करके अपना दायां हाथ उसके लैप पर रख दिया। वो चुप रही, आंखें बंद कर लीं। मैं धीरे-धीरे उसके सॉफ्ट थाईज को सहलाने लगा। फिर घूमकर बायां हाथ उसके गले पर, कान के पीछे, फिर ब्रेस्ट्स पर। उसके निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने शर्ट के अंदर हाथ डाला। उसकी शलवार के अंदर कुछ नहीं था — बिल्कुल नंगी, गर्म, शेव्ड और पहले से ही गीली चूत।

“उफ्फ… प्लीज… कोई देख लेगा ना…” उसने बहुत धीमी, कांपती आवाज में कहा, लेकिन उसकी जांघें थोड़ी और खुल गईं। वो खुद मेरी पैंट की जिप खोलकर मेरे मोटे, सख्त लंड को बाहर निकालने लगी। दो उंगलियों से सहलाते हुए वो उसे दबा रही थी।

मैंने उसके नाभि को सहलाया, कमर को जकड़ा, फिर ब्रा खोलने को कहा। उसने खुद पीछे हाथ डालकर ब्रा खोल दी। मेरे हाथ उसके नंगे, मुलायम, भारी ब्रेस्ट्स पर थे। उन्हें मसलते, निप्पल्स को हल्का-हल्का दबाते, चुटकी लेते… वो “आह… उफ्फ… धीरे…” कर रही थी।

धीरे-धीरे मैंने उसकी शलवार का नाड़ा खोला। मेरी उंगलियां उसकी गर्म, भीगी चूत पर घूम रही थीं। क्लिटोरिस को हल्का-हल्का रगड़ते, दो उंगलियां अंदर डालकर धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। रिया कांप रही थी। उसकी सांसें बहुत तेज हो गईं। अचानक वो सिकुड़ गई और पहला ऑर्गेज्म आ गया। गर्म पानी जैसा रस मेरी उंगलियों पर बह निकला।

“बेबी… मैं कंट्रोल नहीं कर पा रही…” उसने कान में फुसफुसाया।

हम बस में पूरा नहीं कर सकते थे। मैंने उसे कन्विंस किया कि पुणे में उतरकर होटल में रुक जाते हैं। उसने घर को फोन करके “बस ब्रेकडाउन” का बहाना बना दिया। पुणे पहुंचकर हम एक अच्छे होटल में चेक-इन कर लिए।

रूम में घुसते ही मैंने उसे बालकनी में पीछे से जकड़ लिया। मेरा लंड उसके गोल-मोटे बट्स के बीच दबा हुआ ऊपर-नीचे रगड़ रहा था। दोनों हाथों से उसके ब्रेस्ट्स को जोर-जोर से मसलते हुए गर्दन, कान, कंधे चूम रहा था। वो मुड़कर मेरे होंठों को चूसने लगी — गहरी, गीली किस। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी।

बेड पर ले जाकर मैंने उसकी पूरी बॉडी को चूमना शुरू किया। नाभि में जीभ घुमाई, कमर को चाटा, ब्रेस्ट्स को दोनों हाथों से दबाते हुए निप्पल्स को जोर-जोर से चूसा। रिया कराह रही थी, “आह… और जोर से… हां… बेबी…”

उसने मेरी पैंट उतार दी और मेरे लंड को मुंह में ले लिया। गर्म, गीली जीभ से चूसते हुए वो ऊपर-नीचे कर रही थी। हम 69 पोजीशन में गए। मैं उसकी चूत चाट रहा था, उंगलियां अंदर डाल रहा था, वो मेरे लंड और बॉल्स को सहला रही थी।

“प्लीज… अब डाल दो… मैं बहुत गीली हो चुकी हूं…” उसने प्यार से कहा, आंखों में भूख।

मैंने उसकी टांगें फैलाईं और धीरे-धीरे अपना मोटा लंड उसके टाइट, गर्म, भीगे गद्दे में डाला। “आह… उफ्फ… स्लोली बेबी…” वो कराह उठी। मैंने उसके मुंह को किस से बंद कर दिया और धीरे-धीरे पूरा अंदर कर दिया। फिर रिदम बढ़ाया। उसके ब्रेस्ट्स उछल-उछलकर ताल दे रहे थे। वो अपनी कमर ऊपर उठाकर मेरा साथ दे रही थी।

हां… और जोर से… फाड़ दो मुझे… आह… मैं आ गई…” वो चीखते हुए ऑर्गेज्म हो गई। उसकी चूत मेरे लंड को जोर-जोर से दबा रही थी। मैंने भी उसके अंदर ही पूरा गर्म रस छोड़ दिया।

थोड़ी देर बाद शावर लिया। फिर दूसरी राउंड — कार्पेट पर। वो घुटनों के बल, गांड ऊपर करके लेटी। मैंने पीछे से घुसा, एक हाथ ब्रेस्ट्स मसलते, दूसरा कमर पकड़कर जोर-जोर से ठोकना शुरू किया। उसके बट्स पर चपतें मारते, कमर चूमते… आखिर में मैंने उसे पलटा और उसके ब्रेस्ट्स, पेट और चूत पर अपना सारा रस छोड़ दिया। रिया उसे अपनी उंगलियों से मल रही थी और आहें भर रही थी — “मmm… कितना गर्म है… कितना अच्छा लग रहा है…”

सुबह 5 बजे हम निकले। हैदराबाद पहुंचकर अगले तीन महीने हमने कई हॉट नाइट्स एंजॉय कीं — होटल, उसके फ्लैट, कभी-कभी कार में भी। फिर वो UK चली गई। आज भी जब बात होती है तो वो मुस्कुराते हुए कहती है, “वो बस जर्नी कभी नहीं भूलूंगी… तुमने मुझे वो रात दी जो मैं कभी एक्सपेक्ट नहीं कर रही थी।”

वो सफर सिर्फ ट्रैवल नहीं था… वो हमारी सबसे हॉट, रोमांटिक और यादगार लव स्टोरी बन गई।

बॉस के साथ सेक्सी अफेयर

नीलू की ये कहानी है, एक जवान लड़की की, जो अपनी नई जॉब में बॉस को खुश रखने के लिए अपनी खूबसूरती और सेक्सी अदा का इस्तेमाल करती है। ऑफिस के अंदर की वो रोमांचक पल, स्ट्रिपटीज और पैशनेट मोमेंट्स वाली ये स्टोरी हिंदी में है, जो तुम्हें गर्म कर देगी। पढ़ो कैसे उनका रिश्ता सिर्फ काम से शुरू होकर प्यार तक पहुंचता है, लेकिन बीच में ढेर सारी हॉट और इंटेंस सेक्सुअल एनकाउंटर्स के साथ।

मेरे दोस्त और कलीग्स मुझे नीलू कहकर बुलाते थे, नीलुमिनी की जगह। ये नाम मेरे लिए बहुत क्यूट बन गया था। मैंने अपनी पहली जॉब एक प्राइवेट कंपनी में सेक्रेटरी के रूप में की थी। वहां ढेर सारी मीठी यादें बनीं, लेकिन अब 29 साल की हो गई थी और बेहतर ऑपर्चुनिटी की तलाश में थी। मैंने पुरानी जॉब से रिजाइन कर दिया, क्योंकि मुझे यकीन था कि मेरा एक्सपीरियंस और एजुकेशन मुझे अच्छी जगह दिलाएगा। फिर मैंने एक बड़ी गारमेंट कंपनी में पर्सनल सेक्रेटरी की पोस्ट के लिए अप्लाई किया।

इंटरव्यू के लिए मैंने साड़ी पहनी थी – सिंपल लेकिन एलिगेंट। बालों को पीछे टाइट बांधा, गले में ब्लैक बीड्स का नेकलेस, कान में इयररिंग्स और मैचिंग शूज। मेरी फेयर स्किन और कर्वी फिगर मुझे बहुत अट्रैक्टिव लुक देता था। मेरे ब्रेस्ट्स फुल और राउंड थे, हिप्स स्विंग करने वाले, और थाइज स्मूद और टोनड। इंटरव्यू पैनल में एक सीनियर डायरेक्टर और दो ऑफिसर्स थे। मनो सर ने काफी सख्त सवाल पूछे, लेकिन उनकी आंखें मेरे बॉडी पर घूमती रहीं। एक बार तो मेरे डीप नेक जैकेट से झांकते क्लिवेज पर रुक गईं, जहां मेरे निप्पल्स हल्के से उभर रहे थे। मैंने साड़ी को थोड़ा एडजस्ट किया, लेकिन ऐसी नजरें तो मुझे अक्सर पड़ती थीं। मुझे अपनी ब्यूटी पर प्राउड था, क्योंकि लड़के-लड़कियां दोनों मुझे एडमायरिंग लुक्स देते थे, और कभी-कभी तो मैं जानबूझकर थोड़ा ज्यादा शो करती थी।

इंटरव्यू खत्म हुआ और उन्होंने कहा, “हम कॉन्टैक्ट करेंगे।” डेढ़ हफ्ते बाद कॉल आया – मैं सिलेक्ट हो गई थी। सोमवार को एग्रीमेंट साइन करने के लिए बुलाया। वीकेंड में मैंने कुछ नए क्लोथ्स शॉप किए – सेक्सी वाले, जो मेरी कर्व्स को हाइलाइट करें। ऑफिस पहुंची तो रिसेप्शन पर वेट कराया गया। फिर मनो सर के कैबिन में गई। डोर ऑटोमैटिक बंद हो गया। रूम कमाल का था – कूल एसी, फ्रेश फीलिंग, और विंडो से सिटी का व्यू। मैंने महसूस किया कि एसी की ठंडक से मेरे निप्पल्स हार्ड हो रहे थे, ब्लाउज के नीचे से उभरकर।

“नमस्ते सर, क्या अंदर आ जाऊं?” मैंने पॉलिटली पूछा, लेकिन थोड़ा सेक्सी टोन में।

“हां, आओ,” उन्होंने बिना देखे कहा। मैं उनके सामने वाली चेयर पर बैठ गई, लेग्स क्रॉस करके, स्कर्ट थोड़ी ऊपर चढ़ गई। फिर उन्होंने आंखें उठाईं, और उनकी नजरें मेरे चेहरे से नीचे सरक गईं। “वेलकम टू दिस ऑफिस। तुम्हारी रिस्पॉन्सिबिलिटी मेरे साथ है – सेक्रेटरी और पर्सनल असिस्टेंट। कोऑर्डिनेशन, लॉन्ग आवर्स, आउटिंग ट्रिप्स। लेकिन मैंने तुम्हें चुना क्योंकि तुम्हारी पर्सनैलिटी, ब्यूटी और फिगर एक्स्ट्रा क्वालिफिकेशन हैं। उम्मीद है तुम मुझे स्ट्रेस से रिलीफ दोगी, इन चार दीवारों के अंदर। शायद थोड़ा ज्यादा इंटिमेट तरीके से। इसलिए हाई सैलरी, कार और दूसरी फैसिलिटीज।”

उनकी बातों से लगा कि वो पर्सनल नीड्स चाहते हैं, लेकिन सिर्फ ऑफिस में। मेरी योनि में हल्की सी गुदगुदी हुई सोचकर। मैंने सोचा, ये ठीक लग रहा है – जॉब अच्छी है, और थोड़ा फन भी। “जी सर, मैं एग्री हूं,” मैंने कहा और एग्रीमेंट साइन कर दिया। मैंने मन बना लिया कि उन्हें फुल सैटिस्फैक्शन दूंगी, चाहे जो करना पड़े।

“नीलू,” पहली बार उन्होंने मेरा नाम लिया, और उनकी आवाज में एक हस्की टोन था। “अब से साड़ी नहीं। मैं चाहता हूं कि सब मेरी सेक्रेटरी की तारीफ करें – क्यूट, सेक्सी गर्ल। शॉर्ट, बॉडी शो करने वाला स्टाइल। स्कर्ट्स जो थाइज दिखाएं, ब्लाउज जो क्लिवेज हाइलाइट करें।”

मैं खुश हो गई। लगा वो मॉडर्न, सेक्सी सेक्रेटरी चाहते हैं – क्लाइंट्स को इम्प्रेस करने और खुद को रिलैक्स करने के लिए। मुझे अलग कैबिन मिला था, अटैच्ड बाथरूम के साथ। लेकिन लंच के बाद मैं उनके कैबिन में कंप्यूटर पर काम करती थी, जहां वो मुझे घूरते रहते।

पहले दो हफ्ते मैंने जॉब सीखी। बॉस ने काफी प्रेज की। एक दिन उन्होंने मुझे डिक्टेशन के लिए बुलाया – लेटर टाइप करने। शाम को वो मेरे डेस्क पर आए, स्क्रीन देखी, लेकिन उनकी आंखें मेरी लेग्स पर थीं। “पिंक कलर तुम पर सूट करता है।” मैं मुस्कुराई, लेकिन कन्फ्यूज हुई – मैं तो ब्लू शॉर्ट स्कर्ट और व्हाइट ब्लाउज में थी। फिर बाथरूम में याद आया, पिंक अंडरवेयर! टेबल के नीचे से दिख गया होगा, जहां मेरी पैंटी थोड़ी गीली हो गई थी उनकी नजरों से। मुझे शर्म आई, लेकिन साथ ही एक्साइटमेंट भी – मेरी योनि में हल्का सा वेट फील हो रहा था।

अगले दिन मैंने लेग्स क्रॉस करके रखीं, लेकिन जानबूझकर थोड़ा स्प्रेड किया। शाम को वो फिर आए। “नीलू, ध्यान से सुनो। मैंने तुम्हें चुना क्योंकि तुम सिर्फ सेक्रेटरी नहीं, ऑफिस पार्टनर हो। तुम्हारी स्माइल, ब्रेन, ब्यूटी, सेक्सी लुक – ये असेट्स हैं। मैं हमेशा प्रेशर में रहता हूं। तुम मुझे रिलीफ दो। नॉर्मल पार्टनर नहीं, वरना सिटी के एक्सपेंसिव क्लब्स में हाई प्राइस वाली लड़कियां हैं। सोच लो, अगर रेडी हो तो रहो, नहीं तो जाओ। लेकिन अगर रहो, तो मुझे अपनी बॉडी से प्लेजर दो – देखकर, छूकर, जो भी।”

उनकी बातों ने मुझे थोड़ा टेंशन दिया, लेकिन रात बेड पर लेटकर सोचा, मैं उन्हें अपनी सेक्सी प्रेजेंस से खुश रखूंगी। उंगलियां अपनी योनि पर फेरते हुए मैंने इमेजिन किया। अगले दिन सबसे शॉर्ट स्कर्ट और डीप नेक ब्लाउज पहना, जहां मेरे ब्रेस्ट्स हाफ बाहर झांक रहे थे। शाम को उनके सामने काम किया, लेग्स स्प्रेड करके इनर थाइज दिखाईं, जहां मेरी पैंटी का ट्रायंगल विजिबल था। उनकी आंखें कैच हुईं, और मैंने देखा उनका पैंट में उभार। मुझे भी एक्साइटमेंट चढ़ा – शो ऑफ करना अच्छा लगा। लड़कियों को ऑपोजिट सेक्स का अटेंशन पसंद आता है – ब्रेस्ट, हिप्स, थाइज दिखाकर। मेरी योनि गीली हो गई, क्लिट थ्रोबिंग।

बॉस आए, “कन्फर्म, तुम नहीं जाओगी। व्हाइट कलर भी ब्यूटीफुल है।” स्माइल करके चले गए। अच्छा हुआ, अंडरवेयर पर वेट स्पॉट्स नहीं देखे, लेकिन मैं तो इतनी हॉट थी कि टच करने को जी चाह रहा था।

एक शाम साइन के लिए गई। पर्पजली ब्लाउज के टॉप बटन्स ओपन रखे, क्लिवेज दिखाया। बेंड होकर शो किया, जहां मेरे निप्पल्स हार्ड थे। वो स्माइल किए, “गुड गर्ल।” पेन को मेरे ब्रेस्ट्स के बीच रखा, “ये पेन लकी है।” हम दोनों हंसे, लेकिन मेरे ब्रेस्ट्स पर उनका टच मुझे इलेक्ट्रिक शॉक जैसा लगा।

कभी फाइल्स सर्च करते हुए बेंड होकर हिप्स प्रोजेक्ट करती, शॉर्ट स्कर्ट ऊपर चढ़ जाती, पैंटी दिखती, और मैं जानती थी वो मेरी अस क्रैक देख रहे। वो खुश होते, “गुड गर्ल” कहते, और कभी हल्का सा स्पैंक करते।

एक दिन हैवी वर्क के बाद वो टायर्ड थे। मैं पेमेंट अप्रूवल लेने गई। साइन करके बोले, “आज टफ डे था, बैंक लोन अप्रूव हुआ। मुझे रिलैक्स करो।” मैं स्माइल की, सोचा कैसे।

बाथरूम में गई। मिरर में आईडिया आया। येलो यू-नेक ब्लाउज उतारा, रेड ब्रा में, जहां मेरे निप्पल्स पोक कर रहे। ब्राउन टाइट स्कर्ट उतारी। मैचिंग पैंटी – बैक में टी-शेप, फ्रंट में स्मॉल ट्रायंगल, थाइज और राउंड हिप्स एक्सपोज। ब्रा स्ट्रैप्स एडजस्ट कीं, पैंटी कमर पर ऊपर की, लेकिन क्लिट को रब किया थोड़ा। सेक्सी लुक। बाल ओपन किए, शोल्डर्स पर वेवी। ब्लैक हाई हील्स में प्लेबॉय मॉडल लग रही थी।

कैबिन में आई, उनके सामने कंप्यूटर पर काम किया, लेकिन लेग्स स्प्रेड, पैंटी दिखाकर। वो आए, “तुम रियली खुश कर रही हो। गुड गर्ल। वीनस जैसी ब्यूटीफुल।” पहली बार इतनी कॉम्प्लिमेंट। लेकिन टच नहीं किया – एग्रीमेंट था। वो मेरी हर मूवमेंट एन्जॉय करते रहे, और मैंने देखा उनका हाथ पैंट पर गया। जाते हुए, “क्लोथ्स पहनना मत भूलना।” हम हंसे, लेकिन मैं तो गीली हो चुकी थी।

कुछ दिन नॉर्मल गुजरे। मैंने रूल ब्रेक किया – साड़ी पहनी। रेड कश्मीरी साड़ी, बैकलेस डीप नेक जैकेट विथ थ्रेड्स। नो ब्रा, बिल्ट-इन कप्स, लेकिन मेरे निप्पल्स रबिंग से हार्ड। साड़ी लो वेस्ट में टक की, बॉडी कर्व्स हाइलाइट, नवेल डीप और सेक्सी। शाम को फाइल्स से ब्रेस्ट्स कवर करके गई। उनकी आंखें फैलीं, “वाह, तुम अमेजिंग हो। तुम्हारी नवेल में उंगली डालने को जी चाह रहा है।”

“थैंक यू सर।”

मैं टर्न हुई, जानती थी वो एप्रिशिएट कर रहे। हिप्स स्विंग कर रहे थे, साड़ी से अस शेप विजिबल। “लेकिन रूल ब्रोकन। पनिशमेंट मिलेगी।” मैं स्केयर्ड हुई। फाइल्स रखीं, साड़ी पल्लू गिरा, ब्रेस्ट्स एक्सपोज, निप्पल्स हार्ड। “क्या पनिशमेंट?”

“सॉरी सर, अगैन नहीं करूंगी।”

वो हंसे। “नेवेल पर रिंग लगाओ, पेन होगा। लेकिन साड़ी में खुश किया, तो साड़ी शॉप का वाउचर गिफ्ट। और आज रात मेरे साथ डिनर।” मैं रिलीफ से हंसी, लेकिन एक्साइटेड भी।

वीकेंड में पियर्सिंग कराई। ब्लू पेंडेंट लगाया, दर्द हुआ लेकिन हॉट लगी – नवेल रिंग स्विंग करते हुए योनि तक वाइब्रेशन। नेक्स्ट वीक बॉस बैंकॉक ट्रिप पर गए। मैं बोर हो गई, लेकिन रातें सेल्फ-प्लेजर में गुजारीं। डेस्क पर एनवेलप “गुड गर्ल”। साड़ी शॉप का बिग वाउचर। खुशी हुई।

सोमवार को वो आए, हैपी। गिफ्ट दिया – एक्सपेंसिव परफ्यूम और बॉक्स। “थैंक यू सर।”

शाम को बोले, “पेंडेंट अब लगाओ।” मैं कैबिन में गई। बॉक्स ओपन किया – निप्पल रिंग्स! बाथरूम में ब्लाउज उतारा, ब्रा रिमूव, निप्पल्स रब करके हार्ड किए, रिंग्स फिट कीं – दर्द और प्लेजर का मिक्स। सेक्सी रिफ्लेक्शन। स्कर्ट उतारी, रेड जी-स्ट्रिंग पैंटी, जहां क्लिट पोक कर रही। नेवेल पेंडेंट के साथ कमाल।

चलते हुए पेंडेंट्स स्विंग कर रहे, निप्पल्स पर पुल फील हो रहा, योनि गीली। चेयर पर बैठने से पहले, “आओ यहां, गुड गर्ल।” मैं शर्माई। “मेरा चॉइस राइट है। आई एम लकी बॉस।” फोटोज लिए, और एक बार हल्का सा निप्पल पिंच किया। मैं मोन की। मैं एन्जॉय की, रात कई ऑर्गेज्म सेल्फ-प्लेजर से, इमेजिन करते हुए उनका लिंग।

कुछ वीक्स बाद कंपनी ने कॉम्पिटीटर बाय किया। बॉस हैपी आए। “कॉन्ग्रेट्स सर,” मैंने हैंडशेक किया, लेकिन उन्होंने मुझे हग किया, ब्रेस्ट्स उनके चेस्ट से प्रेस। “थैंक्स गुड गर्ल। आज मूड बूस्ट करो।”

मैं सोची। विंडो से सिटी देख रही थी, वो बैक से आए, कमर पकड़ी। “क्या थिंकिंग? चाय पियो।” टेबल पर सिटिंग। “आज बिग डे। मुझे पावरफुल फील कराओ। टेबल पर स्टैंड हो।”

मैं क्लाइंब की। प्राउड फील हुआ। डीप ब्लू कोट, व्हाइट शर्ट, शॉर्ट ब्लू स्कर्ट, ब्लैक हाई हील्स। वो अंडरवेयर देख रहे। म्यूजिक प्ले किया। मैं डांस की, कोट रिमूव, शर्ट आउट, बटन्स ओपन, ब्रा शो। ब्रेस्ट्स प्रेस किए, निप्पल रिंग्स पुल करके मोन की। बैक टर्न, शर्ट ऑफ, स्कर्ट जिप डाउन, राउंड हिप्स और मिल्की थाइज शो। पैंटी में बेंड होकर अस क्रैक शो, फिंगर से टच करके। आर्म्स अप, आर्मपिट्स शो। ब्रा हुक ओपन, कप्स होल्ड करके शाइनेस एक्ट। ब्रा ऑफ, हैंड्स से कवर, लेकिन फिर रिवील – ब्रेस्ट्स बाउंस। फिर पैंटी डाउन, न्यूड। पैंटी उनकी लैप में थ्रो। वो स्मेल किए, “ओह, इतनी गीली।” मैं ब्रेस्ट्स रब, निप्पल्स पुल, क्लिट फिंगर।

“ओह यू आर गुड गर्ल एंड अमेजिंग।” मैं बेंड, लेग्स स्प्रेड-क्लोज। पुसी वेटनेस शो, जूस ड्रिपिंग। फीट से उनकी थाइज प्रेस, जहां उनका हार्डन विजिबल।

वो कंट्रोल नहीं कर पाए। मुझे लैप में लिया। मैंने लेग्स चेयर आर्म्स पर रखे। वो निप्पल्स सक, रिंग्स से पुल, बाइट – दर्द और प्लेजर। हिप्स ग्रैब, फिंगर्स अस में। मैं मोन की, “ओह सर… हाँ…” मुझे टेबल पर लेटाया, थाइज किस, लेग्स स्प्रेड वाइड। टंग से पुसी स्लिट लिक, क्लिट सक – मैं रिथ्ड, कमर उठाई, “ओह्ह… गॉड… अह्ह्ह… ओह्ह्ह… चाटो और…”

क्लिट पर फास्ट, दो फिंगर्स पुसी में, एक अस में। मैं स्क्विर्ट के करीब, “फास्टर… ओह…” वो क्लोथ्स ऑफ, चेस्ट हेरी, पेनिस ह्यूज – थिक, वीनी, प्रीकम ड्रिपिंग। टिप से पुसी रब, क्लिट टच। फिर इनसर्ट – स्लो, लेकिन डीप। हॉट रॉड इनसाइड, वॉल्स ग्रिप, मैं चीखी, “ओह फक… इतना बड़ा… हाँ…” थ्रस्ट्स स्लो से फास्ट, ब्रेस्ट्स बाउंस, रिंग्स स्विंग।

म्यूजिक स्टॉप, सिर्फ हमारी मोन्स और स्लैपिंग साउंड। पेनिस आउट, माउथ में दिया – मैं डीप थ्रोट, गैग, लेकिन सक हार्ड। फिर बैक इन, डॉगी स्टाइल, हिप्स ग्रैब, स्पैंक। तेज गति, मैं येल, “ओह गॉड… किल मी… ओह्ह… यस… कमिंग… सर… ओह्ह… आ रही हूं… अह्ह्ह…”

मैं ऑर्गेज्म हिट, पुसी कांट्रैक्ट, लेकिन वो जारी। फिर पोज चेंज, मुझे ऊपर – मैं राइड, ब्रेस्ट्स बाउंस, क्लिट रब। वो ग्रोन, “ओह… टाइट पुसी…” मैं फिर कम, स्क्विर्ट। वो पुल आउट, कम स्प्रे ऑन ब्रेस्ट्स, फेस। “ओह… ओह… गुड गर्ल…” मैं कम रब, फिंगर्स लिक, टेस्ट किया।

“तुम रियली गुड गर्ल। लेकिन मैंने एग्रीमेंट ब्रोकन, टच किया। अब तुम पनिशमेंट दो।” मैं स्माइल की, हैपी। “पनिशमेंट? अगली बार और हार्ड।”

ये रिश्ता अब सिर्फ बॉस-सेक्रेटरी नहीं रहा। धीरे-धीरे हमारी मीटिंग्स ज्यादा इंटिमेट हो गईं। कभी लंच ब्रेक में क्विक ब्लो जॉब, कभी ट्रिप्स पर होटल रूम में पूरी रात सेक्स – एनल, रोल प्ले, टॉयज। मैंने महसूस किया कि वो सिर्फ सेक्स नहीं चाहते, बल्कि केयर भी करते हैं। एक दिन उन्होंने कहा, “नीलू, तुम मेरी लाइफ का पार्ट हो। आई लव यू।” और मैंने भी एडमिट किया कि मुझे उनसे प्यार हो गया है। ऑफिस की दीवारों से बाहर निकलकर हमारा रिलेशन रियल लव स्टोरी बन गया, लेकिन हमेशा पैशनेट और इरोटिक। अब हम साथ हैं, खुश, और हर रात नई हाइट्स एक्सप्लोर करते।

सेक्सी बॉस ने खुद बुलाया घर और पूरी रात चुदवाया

नमस्ते दोस्तों, देसी कहानी में मैं नया हूँ। मेरे दोस्तों के कहने पर यहाँ कुछ कहानियाँ पढ़ीं – कुछ झूठी लगीं, कुछ पढ़कर इतना मज़ा आया कि सोचा क्यों न अपनी सच्ची कहानी आपसे शेयर करूँ। मेरा नाम अनुराग है, मैं मुंबई में रहता हूँ। उम्र 22 साल, हाइट 6 फुट, जिम जाने से बॉडी टाइट और मसल्स मजबूत। मेरा लंड 6 इंच का, मोटा और हमेशा तैयार रहता है।

बात उस वक़्त की है जब मैंने मुंबई में नई जॉब शुरू की थी। एक बड़ी MNC में सीनियर की पोस्ट मिली। पहला दिन ऑफिस गया तो वहाँ ढेर सारी लड़कियाँ थीं, लेकिन कोई खास अट्रैक्शन नहीं हुआ। फिर थोड़ी देर बाद मेरी ड्रीम गर्ल मेरे सामने से गुज़री। उस दिन उसे थोड़ा लेट हो गया था। क्या बताऊँ दोस्तों, मेरे तो होश ही उड़ गए। नाम था रिचा। फिगर 32-28-36 – परफेक्ट कर्व्स, गोरी त्वचा, लंबे बाल और वो सेक्सी स्माइल।

किस्मत अच्छी थी कि हम दोनों का बॉस एक ही था। उसने हमें इंट्रोड्यूस करवाया। उस दिन मैं बहुत खुश था। अगले दिन उसने मुझे अपने पास बुलाया, मेरे बारे में पूछा। मैंने सब बताया, वो बहुत इंटरेस्ट ले रही थी। ऐसे ही दिन बीतते गए। हम साथ काम करते, साथ लंच करते, कैंटीन में साथ जाते। वो मेरे साथ बहुत फ्रैंक हो गई – मेरे मसल्स को छूती, मजाक करती, मेरी आर्म्स को सहलाती। मुझे बहुत अच्छा लगता। मैं तो उसके पीछे पागल हो चुका था।

मुझे किसी भी तरह उसे चोदना था। मजाक-मजाक में हम इतने करीब आते कि उसके सॉफ्ट बूब्स मेरे सीने से टच हो जाते। मुझे बहुत मज़ा आता और मुझे पता था कि उसे भी बुरा नहीं लगता, बल्कि वो और करीब आती। वो मेरी आँखों में देखकर मुस्कुराती, जैसे कह रही हो – मुझे भी तुम्हारा टच पसंद है।

एक दिन लंच टाइम हुआ, सब लोग चले गए। हम दोनों काम में बिज़ी थे, पूरा ऑफिस खाली। मैंने सोचा इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा। हिम्मत जुटाकर उसके पास गया। उसके साइड से बूब्स देखकर मन में आग लग गई – सोचा अगर आज इन्हें नहीं दबाया तो कोई और ले जाएगा। मैंने उसका हाथ पकड़ा और बोला, “रिचा, बुरा मत मानना… मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ। I love you।”

और झट से उसके गुलाबी होंठों पर किस कर दिया। उसने मुझे रोका नहीं, बल्कि उसकी साँसें तेज़ हो गईं। मैंने इसे ग्रीन सिग्नल समझा और एक हाथ से उसके बूब्स को छूने लगा। वो इतने सॉफ्ट और गरम थे। तभी वो हल्के से बोली, “ये क्या कर रहे हो… यहाँ कोई देख लेगा।”

मैंने पूछा, “क्यों, तुम्हें मुझसे प्यार नहीं है?” वो शरमाते हुए बोली, “है ना… बहुत है। लेकिन यहाँ रिस्क है।” मैं जोश में आ गया। बोला, “सब लंच पर गए हैं, कोई नहीं आएगा।” अब मैं सिर्फ़ छू नहीं रहा था, ज़ोर-ज़ोर से दबा रहा था। वो सिसक रही थी, लेकिन उसकी आँखें कह रही थीं – और करो।

फिर वो बोली, “नहीं… रिस्क नहीं लेते। अब मैं तुम्हारी हूँ, बाद में जो करना है कर लेना।” मैंने उसे एक लंबा किस दिया और हम लंच पर चले गए।

कई दिन ऐसे ही ऊपर-ऊपर मज़े लिए। फिर एक दिन उसने बताया कि उसके मम्मी-पापा शादी में पुणे जा रहे हैं, घर खाली रहेगा। ये सुनकर मैं पागल हो गया। हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में आने को बेचैन थे। उस दिन मैंने घर पर बोला कि दोस्त के यहाँ जा रहा हूँ, रात नहीं आऊँगा।

ऑफिस छूटा तो हम लेट निकले ताकि किसी को शक न हो। रास्ते में मेडिकल शॉप से कंडोम लिया। फिर मेरी बाइक पर वो मेरे पीछे बैठी, उसके बूब्स मेरी पीठ से दब रहे थे। उसके घर पहुँचे। दरवाज़ा खोला और जैसे ही अंदर आए, मैंने उसे बाहों में जकड़ लिया। वो हँसकर बोली, “जानू, थोड़ा इंतज़ार कर लो। आज पूरी रात तुम्हारी हूँ। पहले फ्रेश हो जाएँ।”

मैंने उसे किस किया और छोड़ दिया। हम फ्रेश हुए। मैं सोफे पर बैठा तो वो नहाकर बाहर आई – क्या लग रही थी! स्पघेटी टॉप में, अंदर सिर्फ़ रेड ब्रा और पैंटी, जो बाहर से झलक रही थीं। मेरे लंड ने तुरंत सलामी दी, टॉवल पर टेंट बन गया। वो करीब आई, मुस्कुराकर बोली, “ये क्या है?”

मैंने कहा, “मेरी जान, ये वो चीज़ है जो आज तुम्हें सोने नहीं देगी।” वो शरमाकर हँसी और बोली, “मैं भी तो देखूँ इसमें कितना दम है?” हम दोनों मुस्कुराए और मैंने उसे बाहों में ले लिया।

गहरा किस किया। वो भी पूरा रिस्पॉन्स दे रही थी – उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। फिर मैंने उसके गाल, कान, गर्दन पर किस किया। गर्दन पर जैसे ही किस किया, उसके मुँह से लंबी “आआआह…” निकली। मुझे पता चल गया – वो पूरी गरम हो चुकी है। मैंने दोनों हाथों से उसके बूब्स ज़ोर से दबाए। वो बोली, “धीरे जानू… दर्द होता है।” लेकिन उसकी सिसकियाँ कह रही थीं – और ज़ोर से करो।

एक हाथ नीचे ले जाकर पैंटी के ऊपर से उसकी चूत सहलाने लगा। वो सिसकियाँ भरने लगी – “आह… ऊँह… अनुराग…” मैंने स्पघेटी उतारी। रेड ब्रा-पैंटी में वो सेक्स की देवी लग रही थी। फिर ब्रा उतारी – गुलाबी निप्पल्स तने हुए। पैंटी उतारी – चूत बिल्कुल क्लीन शेव्ड, गुलाबी और पहले से गीली।

अब बोला, “तेरी बारी, मेरे कपड़े उतार।” उसने टॉवल खोला, फिर अंडरवियर। मेरा मोटा लंड देखकर वो दंग रह गई। बोली, “इतना बड़ा और मोटा…?” मैंने कहा, “सब तुम्हारे लिए।” उसने हाथ में लिया और आगे-पीछे हिलाने लगी। फिर मैंने कहा, “मुँह में लो ना।” वो झुककर चूसने लगी – गरम मुँह, जीभ का जादू। मैं स्वर्ग में था।

फिर बोला, “बेडरूम चलें?” वो बोली, “जल्दी चलो, इंतज़ार नहीं होता।” मैंने उसे गोद में उठाया और बेडरूम में ले जाकर बेड पर लिटाया। टाँगें फैलाईं और मुँह उसकी चूत पर लगाया। वो पहले से इतनी गीली थी कि रस बह रहा था। मैं चाटने लगा तो वो पागल हो गई – “आह… अनुराग… बहुत अच्छा लग रहा है… और ज़ोर से…” वो झड़ गई, मेरा मुँह उसके रस से भर गया।

मैंने कहा, “ये तो ट्रेलर था, पिक्चर अभी बाकी है।” वो बोली, “जानू, इतना बड़ा लंड मेरी चूत में कैसे जाएगा?” मैंने कहा, “जाएगा, थोड़ा दर्द होगा लेकिन फिर सिर्फ़ मज़ा।” कंडोम पहनने लगा तो वो बोली, “नहीं जानू, हमारी पहली बार है। बिना कंडोम के करो, मुझे तुम्हारा लंड और मेरी चूत एक होते हुए फील करना है। आज सेफ पीरियड है।”

मैंने कंडोम फेंका और लंड को उसकी चूत पर रगड़ने लगा। वो सिसकियाँ ले रही थी। धीरे-धीरे अंदर करने लगा। टाइट थी, दर्द हो रहा था। फिर एक ज़ोर का झटका – वो चीख पड़ी, “आह… निकालो… बहुत दर्द हो रहा है।” मैंने उसे किस किया, बोला, “बस थोड़ी देर, फिर मज़ा आएगा।” फिर एक और झटका – पूरा लंड अंदर। उसके आँसू आ गए, लंड पर खून लगा था – उसकी सील टूटी थी।

मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। थोड़ी देर बाद वो भी साथ देने लगी – कमर उठा-उठाकर। फिर स्पीड बढ़ाई। वो चिल्लाने लगी – “आह… ऊँह… और ज़ोर से… फाड़ दो मेरी चूत… प्लीज़ और तेज़…” मैं और जोश में आ गया, ज़ोर-ज़ोर के झटके मारने लगा। जब झड़ने वाला था तो पूछा, “कहाँ निकालूँ?” वो बोली, “अंदर ही… प्लीज़ अंदर भर दो।”

मैं उसकी चूत में झड़ गया। वो दो बार झड़ चुकी थी। फिर हम लिपटकर लेटे। थोड़ा आराम के बाद फिर शुरू हुए – इस बार उसे ऊपर बिठाया, घुड़सवारी करवाई। उसके बूब्स उछल रहे थे, कमाल का नज़ारा।

फिर वो किचन में खाना बनाने गई। मैं पीछे से गया और वहाँ भी चोदा – उसे काउंटर पर टिकाकर। रात में खाना खाने के बाद तीन बार और चुदाई की। आखिरी बार मेरा लंड उसकी चूत में डालकर ही सो गए। सुबह देर से उठे, उस दिन ऑफिस नहीं गए – पूरा दिन सिर्फ़ सेक्स, सेक्स और सेक्स। शाम को उसके मम्मी-पापा आने वाले थे तो मैं निकल गया।

आज भी जब मौका मिलता है हम चुदाई करते हैं। वो मेरे लंड की दीवानी हो गई है। उसने वादा किया है कि ज़िंदगी भर मुझसे चुदवाएगी, चाहे वो कहीं भी रहे।

दोस्तों, ये थी मेरी सेक्सी बॉस रिचा की पहली चुदाई की सच्ची कहानी। उम्मीद है आपको गरमागरम मज़ा आया होगा। कमेंट्स का इंतज़ार रहेगा!

पति के दोस्त ने शराब पिलाकर मुझे चोदा पूरी रात

मेरा नाम मनीषा है और मैं एक सरकारी डिपाटमेंट में काम करती हूँ। मेरा पति भी एक कंपनी में इंजीनियर है। शादी हुए अभी मात्र एक साल ही हुए है पर मुझे भी एक इंसान जो की मेरे पति के दोस्त हैं उनको मैं पसंद करने लगी हूँ। और उन्होंने मुझे एक रात शराब पिला कर पूरी रात मेरे साथ रंगरेलियां मनाया और मैं भी उनका साथ दी क्यों की उनका जो स्टाइल चोदने का था और मेरे जिस्म के साथ खेलने का था वो बड़ा ही रोमांटिक था। इसलिए मैं भी इस जनवरी की रात में खूब मजे ली। अब बिना देर किये आपको पूरी कहानी सुनाने जा रही हूँ।

ये कहानी ज्यादा दिन की नहीं है मात्र आज से चार दिन पहले की है। असल में जिस फ्लैट में मैं रहती हूँ उसकी बिल्डिंग के निचे वो रहते हैं। उनकी पत्नी मायके गयी है क्यों की उनके पापा का तबियत ख़राब है। मेरे पति ऑफिस के काम से बंगलुरु गए है तो अपने घर में सिर्फ मैं ही हूँ। तो हुआ यूँ की जब मेरे पति रहते थे और उनकी वाइफ रहती थी तो हम लोग आपस में मिलते थे एक दूसरे के यहाँ पार्टी करते थे और शराब पीते थे। क्यों की मैं भी शराब पीती हु मेरे पति भी पीते है और रमेश जी भी पीते हैं उनकी वाइफ नहीं पीती है।

पर वो बैठी जरूर रहती है जब तक हम तीनो पीते है। तो जब रमेश जी की पत्नी नहीं है यहाँ और मेरे पति भी बाहर हैं तो रूटिंग हम दोनों का ही ख़राब हो गया है। क्यों जब मैं रमेश जी को फ़ोन कर के पूछी की आजकल खाना पीना कैसे हो रहा है तो वो बोले की आजकल तो बाहर से ही खाना मांगा लेते है। और मैं भी आजकल ऐसा ही कर रही उन घर में मैं ऐसे भी नहीं बनाती हूँ और पति नहीं है तो बाहर ही खा लेती हूँ या जोमाटो से माँगा लेती हूँ।

एक दिन की बात है उनका फ़ोन आया और उन्होंने बोला की क्या कर रही हो आप आज। तो मैंने कह दिया कुछ नहीं तो रमेश जी बोले मैं दो दिन की छुट्टी पर हूँ सर्दी है इसलिए तो मैंने सोचा आज रात को चिकन लाते हैं और रम का बोतल लाते हैं और एन्जॉय किया जाये। तो आ भी आइये मिलकर एन्जॉय करते हैं। तो मैं बोली पति तो हैं नहीं और पति के बिना रात में जाना अच्छी बात नहीं है। तो उन्होंने कहा उनको कहने कौन जा रहा है की आप मेरे यहाँ पार्टी कर रही हैं। मुझे भी लगा अरे हां वो तो यहाँ हैं नहीं।

तो मैंने कहा ठीक है फिर आज रात का रखते हैं आपके ही फ्लैट पर मैं जल्दी आ जाउंगी ऑफिस से और मैं करीब चार बजे ही उस दिन आ गयी। घर आकर कुछ काम था और करीब सात बजे शाम को मैं रमेश जी के फ्लैट पर चली गयी। उनका कमरा काफी गर्म हो गया था हीटर चला कर। और वो चिकन बना रहे थे। वो मेरा ही इंतज़ार कर रहे थे।

जाते ही उन्होंने तुरंत दो ग्लास निकाला और भुजते हुए चिकन हम दोनों चिकन टेस्ट किये और फिर एक एक पेग ले लिए। फिर धीरे धीरे अपनी अपनी बात करने लगे। अपने सुख दुःख की बात करने लगे और हम दोनों ही काफी एक दूसरे के बातों को समझने लगे मुझे ही काफी हल्का महसूस होने लगा क्यों की मैं अपनी दिल की बात को उनके सामने रखी.

खाना खाने का टाइम हो गया तो हम दोनों टेबल पर खाना निकाले और खाना खाते हुए पेग बना बना कर पीने लगे। खाते पीते करीब ग्यारह बज गए थे। अब उन्होंने अपनी सेक्स लाइफ पर बात करने लगे कहने लगे की मेरी वाइफ ज्योति मुझे संतुष्ट नहीं कर पाती है सेक्स में वो बहुत जल्दी थक जाती है।

और मेरे साथ उल्टा था मेरा पति जल्दी थक जाता है। तो मैंने कहा मेरा पति जल्दी थक जाता है जब मैं गरम होती हूँ तब तक वो ठंढा हो जाता है। ये सुनकर रमेश जी चहक उठे बोले बताइये हम दोनों के साथ एक जैसी समस्या है। फिर उन्होंने पेग बनाया और हम दोनों ने एक एक पेग फिर लिए।

मुझे नशा आने लगा था एक बार जैसी ही उठी पानी लेने के लिए मैं लड़खड़ा गयी और उन्होंने मुझे अपनी बाहों में थाम लिया। मैं भी उनके कंधे पर अपना सर रख दी उन्हों मुझे सहलाया तो मेरे तन बदन में आग लग गयी। मैंने जब उनकी तरफ देखा तो उनके होठ हिल रहे थे और आँखे मेरे होठ को घूर रही थी। मैंने उनके होठ पर किस कर लिया।

इतना होते ही हम दोनों का प्यार परवान चढ़ गया। मैं पानी पी और उन्होंने अपनी बाहों में ले लिया वो मेरे पीठ को सहलाते हुए मेरे ब्रा को महसूस कर रहे थे अपनी उँगलियों से मेरा गदराया हुआ बदन मचल रहा था। हम दोनों ने ही एक दूसरे को गले से लगा लिया और फिर एक दूसरे को चूमने लगे। वो मुझे मैं उन्हें। आप हम दू के लिप लॉक हो गए थे। उनका जीभ मेरे मुँह में और मेरा जीभ उनके मुँह में।

हम दोनों बैडरूम में चले गए उन्होंने मुझे लिटा दिया और मेरे कपडे उतार दिए पूरा फ्लैट ऐसे ही गर्म था तो ज्यादा ठण्ड नहीं लग रही थी हीटर की वजह से। मैंने उनका लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी। उन्होंने अपना कपड़ा उतार दिया तो लंड देखकर मैं पागल हो गयी करीब नौ इंच का मोटा लंड ऊपर की तरफ मुँह ओह्ह्ह्हह्ह ऐसा लग रहा था की झंडा का डंडा रहे।

मैं तुरंत ही अपने मुँह में ले ली और चूसने लगी उन्होंने मेरे बाल को पकड़ पर चुसवाने लगे। ओह्ह्ह्हह्हह मजा आने लगा था ऊपर से नशा और फिर लंड चूसने का नशा। उन्होंने मुझे लेटने को कहा और मैं लेट गयी वो ऊपर मेरे से अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया और चोदने लगे बार बार वो लंड को मुँह से निकाले फिर डालने उनका लंड काफी गीली हो गयी थी मेरी थूक से। अब उन्होंने निचे आकर दोनों मेरी बड़ी बड़ी टाइट और सुडौल चूचियों को मसलना और पीना शुरू किया।

फिर निप्पल को अपनी उनलगी से रगड़ते तो मैं गांड उठा लेती क्यों की वसना मेरी भड़क जाती। फिर उन्होंने मेरी दोनों चूचियों के बिच में अपना लंड डालते और दोनों तरफ से बूब्स को दबाते और अंदर बाहर अपने लंड को करते। ओह्ह्ह्हह्हह ये भी मजेदार था ऐसा कभी भी मेरे पति नहीं किया था ये नया था।

अब उन्होंने निचे जाकर दोनों पैरों को अलग अलग किया और मेरी गीली चूत को चाटने लगे। मेरा पति भी ऐसा चाटता था पर रमेश जो तो नाक भी अंदर दे रहे थे। और बार बार अपनी जीभ से चूत को मलाई को चाट जाते फिर तेज तेज ऊँगली घुसाने लगते। और फिर चाट जाते। ओह्ह्ह्हह्ह मैं आहा ओह्ह ओह्ह्ह आह आह आह वफ्फ ओफ़्फ़्फ़ की आवाज निकालते हुए खुद ही अपनी चूचियों को मसलने लगती।

उन्होंने फिर मुझे पलट दिया और पीठ को खूब चाटा। उन्होंने मेरी गांड के छेद को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया तो मेरे मुँह से सिसकारियां निकलने लगी। ऐसा भी पहली बार हो रहा था। ऐसा कभी भी मेरे पति ने नहीं किया था। फिर क्या बताऊँ दोस्तों मैं तो पागल होने लगी। वो उठे फिर से दो पेग बना लिए एक मुझे पिलाया और खुद पिये और जो बचा वो मेरी गांड में और चूत में डालकर फिर से चाट गए।

उसके बाद शुरू हो गया असल का खेला। अपना लंन्ड मेरी चूत के मुँह पर रखा और जोर से घुसा दिया। जिसे ही लंड मेरी चूत में गया मैं छटपटा गयी क्यों की लंड और भी मोटा हो गया था। पर मैं भी कम नहीं थी। जोर जोर से उनके लंड को अंदर बाहर लेने लगी अपना गांड खुद गोल गोल घुमाकर। वो भी कम हरामी नहीं थे। दोनों हाथ से मेरी दोनों चूचियों को मसलना शुरू किया और जोर जोर से धक्के भी देने लगे।

अब कमरे में फच फच और आआह्ह्ह आआअह्ह्ह्ह की आवाज आने लगी और दोनों दोनों ही शराब के नशे में एक दूसरे को साथ देने लगे। वो मुझे दारु पिला पिला कर खुब चोदा पूरी रात चोदा। मुझे भी उन्होंने संतुष्ट किया और मैं भी उनको संतुष्ट की। उनको जो जो अच्छा लगा पोज और जैसे उनको चोदने का मन था मैं वो सब करने दी कोई चीज मना नहीं की।

मैं भी संतुष्ट हुई वो भी संतुष्ट हुए अभी रोजाना हम दोनों रात को साथ में ही रहते हैं। और रात भर हम दोनों दारु पी पी कर चुदवाती हूँ और वो मुझे चोदते हैं।

बीवी और उसकी भाभी की चूत एक साथ मारी

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मेरा नाम मनोज शर्मा है। मेरी शादी को 7 साल हो चुके हैं। मेरी बीवी का नाम विनिता है। शादी के इतने साल होने के बावजूद भी हम दोनों आज भी एक दूसरे को दिलोजान से प्यार करते हैं। यह स्टोरी कुछ दिनों पहले की है, मैं शाम को एक दो ड्रिंक करने बाद बाथरूम … Read more

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हॉट मामी वांट सेक्स कहानी में मेरे मामा के एक्सिडेंट से वे असमर्थ हो गए थे. मैं उनकी सेवा के लिए उनके पास रहने लगा. चुदाई के बिना मामी की वासना बढ़ रही थी. मैंने उसका हल किया। फ्रेंड्स, मेरा नाम मुकुंद है। मैं जबलपुर का रहने वाला हूँ। मेरे परिवार में मैं मेरी मम्मी … Read more

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ससुर बहू सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि बच्चा होने के बाद मेरे पति ने चुदाई कम कर दी. मेरी चूत प्यासी रहने लगी. एक दिन मुझे ससुर जी का लंड दिखा. मैंने ठान लिया कि यही लंड लूंगी अपनी चूत में! सभी दोस्तो को मेरा हैलो। मेरा नाम ज्योति है. मैं अपनी ससुर बहू सेक्स … Read more

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मैं अभी 45 साल का हूँ और मेरे तिन बेटे हे. दो तो शहर में रहते हे और वही पर पढ़ाई करते हे. और बड़े बेटे की शादी अभी बस एक महीने पहले ही करवाई हे मैंने. खेतो का सारा काम मेरा बड़ा बेटा रमन ही देखता हे. घर में बहु के के आने के … Read more

Taarak mehta ki chudai story

Hello dosto mai ajj ek story series start karne ja raha hun jisme app Tarak Mehta ka ooltah chashma iss television series ke characters ki sex stories sunenge jisme hamare lead character….. Aur koi nahi sabke chahite Jethalal honge. Mai apko pehle hi bata doun ki mai ek Long hair lover houn. So agar kabhi … Read more