वर्जिन कॉलेज गर्ल की पहली चुदाई बस में

रिया की जिंदगी में वो रात कभी नहीं भूली। वो एक साधारण सी कॉलेज गर्ल थी – उम्र सिर्फ़ उन्नीस साल, दिल्ली यूनिवर्सिटी में पहला साल। गोरी, लंबे काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें और वो फिगर जो हर लड़के का ध्यान खींच लेता था। लेकिन रिया अब तक वर्जिन थी। उसने कभी किसी लड़के को इतना करीब नहीं आने दिया था। आज वो घर जा रही थी – लंबी बस जर्नी, रात की बस, लखनऊ से दिल्ली। टिकट कन्फर्म था, लेकिन सीट मिली थी आखिरी वाली बर्थ में।

बस स्टैंड पर भीड़ थी। रिया ने अपनी छोटी सी बैग संभाली, सफ़ेद टॉप और नीली जीन्स पहनी थी। टॉप थोड़ा टाइट था, जिससे उसकी नई-नई विकसित ब्रेस्ट्स का आकार साफ़ झलक रहा था। वो बस में चढ़ी तो देखा कि उसकी सीट पर पहले से एक लड़का बैठा था। लंबा, फेयर, मसल्स वाली बॉडी, उम्र करीब पच्चीस। उसका नाम था आर्यन। वो मुस्कुराया और बोला, “मैडम, आपकी सीट है ना? मैं शिफ़्ट हो जाता हूँ।”

रिया ने शरमाते हुए सिर हिलाया। “नहीं, कोई बात नहीं। बस में जगह तो है।” दोनों एक ही बर्थ पर बैठ गए। रात के दस बज चुके थे। बस स्टार्ट हुई। लाइट्स धीरे-धीरे कम हो गईं। बाहर अंधेरा। अंदर सिर्फ़ हल्की नीली लाइट जल रही थी। आर्यन ने बात शुरू की – “कॉलेज में पढ़ती हो? लगती हो स्टूडेंट।”

रिया हँसी। “हाँ, दिल्ली यूनिवर्सिटी। फर्स्ट ईयर। घर जा रही हूँ।” बातें बढ़ती गईं। आर्यन हंसमुख था, पढ़ा-लिखा, सॉफ्ट स्पोकन। रिया को उसकी आवाज़ अच्छी लगी। धीरे-धीरे वो दोनों करीब आ गए। बस हिल रही थी, कभी-कभी झटके लगते। रिया का कंधा आर्यन के कंधे से टकराता। उसने महसूस किया कि आर्यन का शरीर गर्म है।

रिया ने अपनी जाँघें थोड़ी सींच लीं। लेकिन बस की हिचकिचाहट में उसकी जाँघ आर्यन की जाँघ से रगड़ खा गई। दोनों ने एक-दूसरे को देखा। आर्यन की आँखों में कुछ अलग चमक थी। रिया ने महसूस किया कि उसकी साँसें तेज़ हो रही हैं। वो खुद को रोक नहीं पा रही थी। “ये क्या हो रहा है?” उसने मन में सोचा, लेकिन शरीर कुछ और ही कह रहा था।

आर्यन ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा। “ठंड लग रही है क्या?” रिया ने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुरा दी। आर्यन ने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगा। रिया की उँगलियाँ काँप रही थीं, लेकिन उसने हाथ नहीं छुड़ाया। बस अब और अंधेरी हो गई थी। आस-पास के पैसेंजर सो चुके थे। कंडक्टर ने भी लाइट ऑफ़ कर दी थी।

आर्यन ने रिया के कान के पास फुसफुसाया, “तुम बहुत प्यारी हो।” रिया का चेहरा लाल हो गया। वो शरमा रही थी, लेकिन अंदर से एक अजीब सी गर्मी फैल रही थी। उसने आर्यन की तरफ़ देखा। आर्यन ने धीरे से उसकी गर्दन पर एक हल्का सा किस किया। रिया ने आँखें बंद कर लीं। वो पहली बार किसी लड़के के होठों को अपनी त्वचा पर महसूस कर रही थी। सनसनी पूरे शरीर में दौड़ गई।

“मुझे… अच्छा लग रहा है,” रिया ने धीमी आवाज़ में कहा। उसकी आवाज़ में सहमती का एहसास था। आर्यन ने और करीब आकर उसके होंठों को चूम लिया। रिया ने भी जवाब दिया। उनके होंठ मिले, जीभें आपस में खेलने लगीं। रिया को लगा जैसे बिजली दौड़ गई हो। उसकी ब्रेस्ट्स आर्यन के सीने से दब रही थीं। आर्यन ने हाथ नीचे सरकाया और रिया की कमर को सहलाने लगा।

रिया ने खुद को रोकने की कोशिश की, लेकिन शरीर नहीं मान रहा था। वो आर्यन के गले में बाँहें डालकर और करीब आ गई। “आर्यन… मैं… कभी नहीं किया,” उसने शरमाते हुए कहा। आर्यन ने उसकी आँखों में देखा और मुस्कुराया, “मैं धीरे करूँगा। तुम्हें अच्छा लगेगा, भरोसा रखो।” रिया ने सिर हिला दिया। वो तैयार थी। उसका मन और शरीर दोनों एक साथ कह रहे थे – हाँ

आर्यन ने रिया का टॉप ऊपर किया। उसकी गोरी ब्रेस्ट्स बाहर आ गईं। ब्रा भी हटा दी। रिया की निप्पल्स पहले से ही खड़ी थीं। आर्यन ने एक निप्पल को मुँह में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। रिया की साँसें भारी हो गईं। “आह्ह…” वो धीमी सी कराह उठी। आर्यन दूसरी ब्रेस्ट को हाथ से दबा रहा था, उँगलियाँ निप्पल को घुमा रही थीं। रिया को लग रहा था जैसे पूरा शरीर पिघल रहा हो।

उसने आर्यन का शर्ट खोल दिया। उसकी छाती चौड़ी और मसल्ड थी। रिया ने हाथ फेरा। आर्यन का शरीर गर्म और सख्त था। आर्यन ने अब रिया की जीन्स का बटन खोला। धीरे-धीरे जीन्स नीचे सरकाई। रिया ने खुद ही मदद की। उसकी पैंटी भीगी हुई थी। आर्यन ने पैंटी को भी उतार दिया। अब रिया पूरी तरह नंगी थी – बस की बर्थ पर, अंधेरे में, आर्यन के सामने।

आर्यन ने उसकी जाँघों को फैलाया। रिया की चूत बिल्कुल साफ़ और गुलाबी थी। वो पहली बार किसी को इतना करीब देख रही थी। आर्यन ने झुककर उसकी चूत को चूम लिया। रिया चौंक गई, लेकिन फिर आनंद से कराह उठी। “उम्म्म… आर्यन… क्या कर रहे हो?” आर्यन ने जीभ से उसकी क्लिटोरिस को चाटा। रिया की कमर उठ गई। वो आर्यन के बालों को पकड़कर दबा रही थी।

आर्यन की जीभ अंदर-बाहर हो रही थी। रिया को ऐसा लग रहा था जैसे कोई जादू हो गया हो। उसकी चूत से रस निकल रहा था। आर्यन ने उँगली भी डाली – एक उँगली, फिर दो। धीरे-धीरे अंदर-बाहर। रिया की साँसें फूल रही थीं। “हाँ… और… अच्छा लग रहा है,” वो फुसफुसाई।

अब आर्यन ने अपना पैंट उतारा। उसका लंड बाहर आ गया – मोटा, लंबा, सख्त। रिया ने उसे देखा और शरमा गई, लेकिन उसकी आँखों में भूख थी। आर्यन ने रिया को अपनी गोद में बिठाया। रिया ने खुद आर्यन के लंड को पकड़ा और अपनी चूत पर रखा। वो धीरे-धीरे बैठ गई।

लंड धीरे-धीरे अंदर घुसा। रिया को हल्का सा दबाव महसूस हुआ, लेकिन दर्द नहीं। सिर्फ़ भरपूर आनंद। “आह्ह… पूरा… अंदर ले लो,” रिया ने कहा। आर्यन ने उसे कसकर पकड़ लिया और नीचे से धक्के देने लगा। बस हिल रही थी, लेकिन उनकी हिचकिचाहट उस हिलने में छुप गई थी।

रिया अब पूरी तरह आर्यन पर सवार थी। वो ऊपर-नीचे हो रही थी। उसके स्तन उछल रहे थे। आर्यन उन्हें चूस रहा था। “तुम बहुत टाइट हो… बहुत अच्छा लग रहा है,” आर्यन ने कहा। रिया की चूत लंड को चूस रही थी। हर धक्के पर वो कराह रही थी – “हाँ… और तेज़… मुझे चोदो… पहली बार… इतना मज़ा…”

वे दोनों एक-दूसरे में खो गए थे। आर्यन ने पोजीशन बदली। अब रिया नीचे थी, आर्यन ऊपर। वो धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर कर रहा था। रिया की टाँगें उसके कमर पर लिपटी थीं। दोनों के शरीर पसीने से भीग गए थे। रिया को ऑर्गेज़्म आने वाला था। उसने आर्यन को कसकर जकड़ लिया।

“मैं… आ रही हूँ… आह्हह!” रिया चीख पड़ी, लेकिन आवाज़ दबा दी। उसकी चूत सिकुड़ गई, रस बह निकला। आर्यन भी तेज़ हो गया। “मैं भी… निकलने वाला हूँ।” रिया ने कहा, “अंदर… भर दो… मुझे चाहिए।” आर्यन ने आखिरी जोरदार धक्का मारा और अपना गर्म वीर्य रिया की चूत में भर दिया

दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। बस अभी भी चल रही थी। रिया ने आर्यन की छाती पर सिर रख दिया। “ये… सबसे खूबसूरत पहली बार थी,” उसने फुसफुसाया। आर्यन ने उसके बालों को सहलाया। “तुमने मुझे अपना बना लिया।”

रात भर वे ऐसे ही लिपटे रहे। कभी-कभी फिर से शुरू हो जाते। दूसरी बार आर्यन ने रिया को डॉगी स्टाइल में चोदा। रिया को पीछे से लंड लेना बहुत पसंद आया। उसकी चूत फिर से भीग गई। तीसरी बार वो साइड पोजीशन में थे। रिया की एक टाँग ऊपर, आर्यन लंड अंदर डाले हुए धीरे-धीरे हिल रहा था। हर बार रिया ज़ोर-ज़ोर से कराहती – “हाँ… चोदो मुझे… तुम्हारी वर्जिन चूत अब तुम्हारी है।”

सुबह होने वाली थी। बस दिल्ली पहुँचने वाली थी। रिया ने कपड़े पहने। उसकी चूत अभी भी गीली थी, लेकिन मज़े से भरी हुई। आर्यन ने उसे किस किया। “फिर मिलेंगे ना?” रिया मुस्कुराई, “ज़रूर। ये बस जर्नी कभी नहीं भूलूँगी।”

वो बस से उतरी। लेकिन उसकी चाल में एक नई मस्ती थी। वर्जिन कॉलेज गर्ल की पहली चुदाई बस में हो गई थी – और वो पूरी तरह संतुष्ट थी। उस रात ने उसे औरत बना दिया था।

(कहानी जारी… लेकिन ये मुख्य भाग था। अब और विस्तार से समझते हैं कि कैसे सब शुरू हुआ।)

रिया जब बस में चढ़ी थी तो वो थोड़ी थकी हुई थी। कॉलेज का लास्ट लेक्चर खत्म करके सीधे बस पकड़ी थी। लेकिन आर्यन के साथ बैठते ही उसका मन हल्का हो गया। वो दोनों घंटों तक बातें करते रहे – कॉलेज की, लाइफ़ की, सपनों की। आर्यन ने बताया कि वो सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, दिल्ली जा रहा है प्रोजेक्ट के लिए।

धीरे-धीरे बातें पर्सनल हो गईं। आर्यन ने पूछा, “बॉयफ्रेंड है क्या?” रिया ने शरमाकर सिर हिलाया, “नहीं… अभी तक नहीं मिला सही वाला।” आर्यन ने मुस्कुराकर कहा, “मुझे लगता है आज मिल गया।” रिया हँस पड़ी, लेकिन अंदर से गर्मी महसूस हुई।

जब लाइट्स ऑफ़ हुईं तो आर्यन ने अपना जैकेट रिया पर डाल दिया। “ठंड लग रही होगी।” लेकिन जैकेट के नीचे उसका हाथ रिया की कमर पर था। रिया ने विरोध नहीं किया। बल्कि वो खुद आर्यन के सीने से सट गई। उसकी साँसें आर्यन के गले पर पड़ रही थीं।

पहला किस बहुत सॉफ्ट था। फिर दूसरे, तीसरे। रिया को किसिंग का इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया। आर्यन के होंठ उसके होंठों को चूस रहे थे, जीभ अंदर घुसकर खेल रही थी। रिया की जीभ भी जवाब दे रही थी। दोनों की सलाइवा आपस में मिल रही थी।

जब आर्यन ने ब्रेस्ट्स चूसीं तो रिया की निप्पल्स इतनी सेंसिटिव हो गईं कि हर चूसने पर वो कराह उठती। “आह… धीरे… लेकिन और… मत रुको।” आर्यन ने उन्हें दबाया, चूसा, काटा भी हल्का-हल्का, लेकिन सिर्फ़ मज़े के लिए।

जब आर्यन रिया की चूत चाट रहा था तो रिया ने अपनी जाँघें फैला दीं। वो पहली बार किसी की जीभ को वहाँ महसूस कर रही थी। क्लिटोरिस पर जीभ घूमते ही वो झटके खा रही थी। “ये… स्वर्ग है… आर्यन… चूसो… और चूसो।” उसका रस आर्यन के मुँह में जा रहा था। आर्यन उसे पी रहा था।

पेनिट्रेशन का पहला मोमेंट सबसे यादगार था। रिया ने खुद लंड को अपनी चूत पर रगड़ा। गीली चूत ने लंड को आसानी से अंदर ले लिया। धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर चला गया। रिया को लगा जैसे वो भर गई हो। “पूरा… अंदर है… मुझे लग रहा है तुम मेरे अंदर हो।”

फिर शुरू हुई रिदम। बस की हिलने की रिदम के साथ उनकी चुदाई की रिदम। हर धक्के पर रिया की ब्रेस्ट उछलती, उसकी चूत लंड को कसकर पकड़ती। “तुम्हारा लंड… इतना मोटा… मेरी चूत फट रही है मज़े से।”

ऑर्गेज़्म के वक्त रिया ने आर्यन को कसकर जकड़ लिया। उसका पूरा शरीर काँप गया। चूत से रस का फव्वारा निकला। आर्यन का वीर्य अंदर उबल रहा था। दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे।

दूसरी राउंड में रिया ने खुद इनिशिएट किया। वो आर्यन के लंड को मुँह में लेना चाहती थी। आर्यन ने उसे सिखाया। रिया ने झुककर लंड चूसा – पहले टिप, फिर पूरा। “स्वाद अच्छा है… तुम्हारा।” आर्यन ने उसके बाल पकड़कर हल्का-हल्का मुँह में धक्का दिया। रिया गैग नहीं हुई, बल्कि और जोर से चूसने लगी।

फिर उन्होंने फिर से चुदाई शुरू की। इस बार लंबी और गहरी। रिया की चूत अब पूरी तरह आर्यन के लंड की आदी हो चुकी थी। वो बार-बार कह रही थी, “चोदो… मेरी वर्जिन चूत को अपना बना लो… हाँ… और तेज़।”

सुबह बस दिल्ली पहुँची। दोनों ने नंबर एक्सचेंज किए। रिया उतरते वक्त मुस्कुराई और मन में सोचा – “ये बस मेरी जिंदगी की सबसे हॉट जर्नी थी। वर्जिन कॉलेज गर्ल की पहली चुदाई बस में… और वो भी इतनी खूबसूरत।”

उसके बाद रिया कॉलेज गई, लेकिन अब वो पहले से ज़्यादा कॉन्फिडेंट थी। उसकी चाल में एक नया आकर्षण था। और आर्यन? वो भी उस रात को कभी नहीं भूला।

अनजान लड़की से चैटिंग से सीधे सेक्स – वर्जिन रिया की टाइट चूत की चुदाई

रात के डेढ़ बजे एक रैंडम मैसेज ने कैसे दो अजनबियों को होटल के कमरे तक पहुंचा दिया? चंडीगढ़ में नौजवान कार्तिक और लुधियाना की हॉट रिया की पहली मुलाकात, पहली हग, पहला किस और पहली जोरदार चुदाई की पूरी सच्ची-सी कहानी। वर्जिन लड़की की टाइट चूत, चूसे हुए गुलाबी निप्पल्स, सिसकारियां और पांच घंटे की मस्ती – सब कुछ विस्तार से।

हाय दोस्तों, मैं कार्तिक, 22 साल का हूं। लुक्स में एवरेज हूं – न ज्यादा हैंडसम, न ज्यादा सादा – लेकिन दिल का बहुत शरारती। ये कहानी आज से ठीक एक साल पुरानी है, जब मैं चंडीगढ़ में नई-नई जॉब जॉइन करके आया था। सिटी नई थी, दोस्त कम थे, और रातें अकेली।

एक रात नींद बिल्कुल नहीं आ रही थी। बाहर तेज बारिश हो रही थी, खिड़की पर बूंदें टप-टप गिर रही थीं, हवा ठंडी और नम थी। मैं बिस्तर पर करवटें बदल रहा था, बॉडी गरम थी, मन बेचैन। फोन उठाया और रैंडमली एक नंबर डायल करके मैसेज भेज दिया – “हाय, नींद नहीं आ रही क्या?”

रात के करीब डेढ़ बज रहे थे। उम्मीद नहीं थी कि कोई रिप्लाई आएगा। लेकिन कुछ मिनट बाद ही फोन वाइब्रेट हुआ। “नहीं आ रही। तुम कौन?”

बस यहीं से शुरुआत हुई। नाम था उसका रिया। पहले तो सिर्फ हल्की-फुल्की बातें – मौसम कैसा है, जॉब कैसी चल रही, चंडीगढ़ कैसा लग रहा। लेकिन मेरी बातें उसे अच्छी लगने लगीं। मैं थोड़ा फ्लर्टी हूं, तो जल्दी ही मैंने “आई लव यू” लिख दिया। वो हंसकर इमोजी भेजकर टाल गई, लेकिन मैसेज करती रही।

धीरे-धीरे चैटिंग गहरी होती गई। डर्टी जोक्स शुरू हुए। वो भी बराबर से जवाब देती। कभी वो कोई जोक भेजती, कभी मैं। हंसते-हंसते इमोजी की बौछार होती। रात-रात भर बातें चलतीं। वो बताती कि उसे मेरी शरारतें बहुत पसंद हैं, कि मैं उसे हंसाता हूं, कि मेरी बातों में एक अलग ही मजा है। मैं उसे बताता कि वो कितनी स्मार्ट है, कितनी बोल्ड।

लगभग बीस दिन ऐसे ही बीते। हर रात चैट, कभी वॉइस मैसेज, कभी फोटोज। एक रात मैंने हिम्मत करके लिखा, “मिलोगी कभी?”

पहले तो उसने मना किया। “पागल हो गए हो? इतनी जल्दी? हम तो अभी एक-दूसरे को ठीक से जानते भी नहीं।”

लेकिन मुझे पता था – उसका मन भी था। बातों-बातों में उसने हां कर दी। वो लुधियाना में रहती थी, चंडीगढ़ से सिर्फ दो घंटे की दूरी। हमने प्लान बनाया। पहले ही साफ-साफ बात हो चुकी थी कि मिलते ही हम इंटीमेट होंगे। उसे कोई ऐतराज नहीं था। बल्कि वो खुद भी उतनी ही एक्साइटेड लग रही थी – मैसेज में लिखती, “बहुत नर्वस हूं, लेकिन एक्साइटेड भी।”

आखिरकार वो दिन आ गया। सुबह मैंने कॉल किया। उसकी आवाज में घबराहट और उत्साह दोनों थे। “मैं ऑफिस जाने का बहाना बनाकर निकल रही हूं। बस स्टैंड पर 11 बजे पहुंच जाऊंगी।”

मैं पहले से तैयार था। रूममेट्स ने मजाक में कंडोम का पैकेट थमा दिया था, बोले “सेफ रहो भाई”। मैं बाइक लेकर बस स्टैंड पहुंचा। फेसबुक पर उसकी फोटो देखी थी, लेकिन रियल में वो… बाप रे! हूर से कम नहीं थी। स्किन-टाइट ब्लैक जींस जो उसके गोल-मटोल कूल्हों को परफेक्टली हाइलाइट कर रही थी, ऊपर गले तक खुला व्हाइट टॉप जिससे उसकी गहरी क्लीवेज झलक रही थी, बाल खुले और हवा में लहरा रहे, लाइट मेकअप लेकिन लिप्स पर ग्लॉसी रेड लिपस्टिक। उसकी कमर पतली, कूल्हे चौड़े, चाल में आत्मविश्वास और थोड़ी शरारत।

मैंने दूर से आवाज दी, “हाय रिया!”

वो मुड़ी, थोड़ी शरमाई, आंखें नीची कर लीं, लेकिन मुस्कुरा भी दी। हमने दो मिनट वहीं बात की – नर्वस हंसी, हल्की छेड़छाड़। फिर वो बाइक पर पीछे बैठी। जैसे ही उसकी कमर पर हाथ रखा, उसकी गर्म बॉडी का एहसास हुआ, दिल तेज धड़कने लगा। उसकी खुशबू – हल्की परफ्यूम और बारिश की नमी – नाक में घुस रही थी।

थोड़ी देर शहर में घूमे। लंच किया, कॉफी पी। बातें करते रहे – पुरानी चैट्स याद करते, हंसते। फिर मैंने धीरे से पूछा, “होटल चलें?”

वो शरमाई, होंठ काटे, आंखें नीची करके बोली, “चलो… लेकिन ज्यादा शरारत मत करना।”

मैं उसका इशारा समझ गया। हम एक अच्छे होटल में गए। रूम लिया। जैसे ही दरवाजा बंद हुआ और लॉक किया, मैंने उसका हाथ पकड़ा, लाइट्स ऑफ कीं और उसे अपनी ओर खींच लिया। टाइट हग किया। उसकी सॉफ्ट बॉडी मेरी बॉडी से पूरी तरह सटी थी – उसके बूब्स मेरे सीने पर दब रहे थे, उसकी सांसें तेज और गर्म मेरी गर्दन पर लग रही थीं। मैंने उसकी गर्दन पर होंठ रखे, धीरे-धीरे किस करना शुरू किया – हल्के चूम, फिर जीभ से चाटना। उसकी बॉडी सिहर रही थी।

ये मेरा पहला मौका था। उसका भी। शायद इसी वजह से वो अचानक घबरा गई। उसने मुझे हल्का धक्का दिया और बोली, “नहीं कार्तिक… मैं तैयार नहीं हूं। मुझे घर जाना है।”

मैं रुक गया। ट्यूब लाइट ऑन की। “क्या हुआ जान? डर गई? कोई बात नहीं, हम जैसे हो वैसे ही रहेंगे।”

वो बेड पर बैठ गई, आंखें नीची। “बस… अभी मन नहीं है। बहुत तेजी से हो रहा है सब।”

मैं मुस्कुराया। “ठीक है। कोई जबरदस्ती नहीं। हम बस बातें करेंगे, हग करेंगे।” मैंने उसे गोद में उठाया, बेड पर बिठाया और धीरे-धीरे उसके हाथ सहलाने लगा। उसके टॉप से क्लीवेज साफ दिख रहा था – गहरी, सॉफ्ट, और उसकी सांसों से ऊपर-नीचे हो रही। मैं पागल हो रहा था, लेकिन कंट्रोल रखा।

धीरे-धीरे वो रिलैक्स होने लगी। हम पुरानी चैट्स की बातें करने लगे, डर्टी जोक्स याद करने लगे। मैंने कहा, “तुम सच में बहुत खूबसूरत हो। मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे तुम जैसी लड़की मिलेगी। तेरे होंठ तो गुलाब जैसे हैं, इतने रसीले।”

वो शरमाई, मुस्कुराई। मैंने हिम्मत करके उसके कंधे पर हाथ रखा और उसे बाहों में भर लिया। अब वो मेरे सीने पर सर रखकर लेटी थी। हम टाइट हग कर रहे थे। मैंने बहाने से अपना सर उसके बूब्स पर टिका दिया। वो सिहर तो गई, लेकिन मना नहीं किया। मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया।

मैंने धीरे से उसके बूब्स पर हाथ रखा, हल्के से दबाया। वो सिहर गई, मेरा हाथ हटाया और बोली, “शरारत मत करो।” लेकिन उसकी आंखों में शरारत थी, सांसें तेज हो रही थीं। मैंने फिर कोशिश की। कई बार वो टालती रही, लेकिन अब उसकी बॉडी रिएक्ट कर रही थी।

आखिर मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उसकी गर्दन पर फिर किस किया, टॉप को ऊपर उठाया और लेफ्ट बूब बाहर निकाला। ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा, फिर ब्रा का हुक खोला। उसके बूब्स बिल्कुल टाइट, गोल, 34 साइज के – सॉफ्ट लेकिन फर्म, निप्पल्स गुलाबी और पहले से ही हार्ड। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा – धीरे, फिर तेज। वो सिसकारी भरने लगी – “आह… उम्फ… कार्तिक… क्या कर रहे हो… आह्ह…”

दूसरे बूब को हाथ से मसल रहा था, निप्पल को उंगलियों से पिंच कर रहा था। वो अब पूरी तरह मस्त हो चुकी थी, कमर हिला रही थी। मैंने अपना हाथ उसकी जींस की जिप पर ले गया। उसने रोका, लेकिन कमजोर आवाज में। मैंने फिर उसके बूब्स चूसे और उसे और गरम कर दिया। दूसरी बार हाथ उसकी पैंटी में पहुंचा। इस बार उसने नहीं रोका। उसकी चूत पहले से ही गीली थी – गरम, चिकनी। जैसे ही उंगली से क्लिट छुआ, वो कांप गई, कमर ऊपर उठा दी और जोर से सिसकारी – “आआह्ह… कार्तिक…”

मैंने जींस की बटन खोली और खींचकर उतार दी। अब वो सिर्फ ब्लैक लेस पैंटी में थी – जो पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने अपनी शर्ट-जींस उतारी और उसके ऊपर लेट गया। उसकी टांगें फैलाईं। उसकी चूत पर उंगली फेरते रहा – क्लिट को रगड़ता, अंदर उंगली डालता। वो आंखें बंद किए सिसकारियां भर रही थी – “उम्फ… आह… हां… ऐसे ही…”

फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला। वो 6.5 इंच का था, पूरी तरह खड़ा, नसें उभरी हुईं। मैंने कहा, “इसे हाथ में लो ना।”

वो शरमाई, “नहीं… शरम आ रही है।”

फिर मैंने पूछा, “अंदर डाल दूं?”

वो कुछ नहीं बोली, बस धीरे से सर हिलाया और मुस्कुराई, आंखें बंद कर लीं।

मैंने कंडोम लगाया। लंड उसकी चूत पर रगड़ा – उसकी गीलापन मेरे लंड पर लग रहा था। वो तरस रही थी, कमर ऊपर उठा रही थी। अचानक उसने नीचे से झटका दिया और मेरा लंड आधा अंदर चला गया। वो वर्जिन थी, तो थोड़ा दर्द हुआ। वो चिल्लाई, “आह… धीरे… बहुत दर्द हो रहा है…”

मैंने धीरे-धीरे पूरा अंदर किया। उसकी चूत बहुत टाइट थी – गरम, गीली, मुझे पूरी तरह जकड़ रही थी। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। वो आहें भर रही थी – “आह… आह… कार्तिक… धीरे… आह्ह…”

आवाज बाहर न जाए इसलिए मैंने अपना हाथ उसके मुंह पर रख दिया। थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ और वो भी कमर हिलाने लगी। मैंने स्पीड बढ़ाई। वो भी ऑर्गेज्म तक पहुंच चुकी थी – उसकी चूत सिकुड़ रही थी, बॉडी कांप रही थी। मैं भी झड़ गया। हम पसीने से तर, एक-दूसरे की बाहों में लेटे रहे, सांसें तेज।

थोड़ी देर बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मैंने नया कंडोम लगाया। उसने कहा, “बस… अब नहीं। थक गई हूं।” लेकिन उसकी आंखें कुछ और कह रही थीं – शरारत और भूख। मैंने उसके बूब्स फिर चूसे, निप्पल्स काटे। वो फिर गरम हो गई, सिसकारियां भरने लगी।

इस बार मैंने उसका सर दीवार से सटा दिया, उसकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रखीं और पूरा लंड एक झटके में अंदर डाल दिया। वो जोर से चिल्लाई, “आआह्ह… धीरे-धीरे चोदो ना… बहुत दर्द हो रहा है…”

लेकिन उसकी कमर खुद ऊपर उठ रही थी, मुझे और गहराई दे रही थी। वो मुझे और जोर से चाह रही थी। मैंने स्पीड बढ़ा दी। जोर-जोर से धक्के मारने लगा – हर धक्के में आवाज हो रही थी। उसके बूब्स उछल रहे थे, मैं उन्हें मुंह से पकड़-पकड़ कर चूस रहा था। वो नाखून मेरी पीठ पर गड़ा रही थी। “आह… और जोर से… हां… चोदो मुझे… आह्ह…”

फिर मैं झड़ गया। वो भी दूसरी बार जोर से झड़ी – उसकी चूत ने मुझे पूरी तरह निचोड़ लिया।

हमने करीब पांच घंटे साथ बिताए। बहुत इंजॉय किया – हग किया, किस किया, बातें की। फिर मैंने उसे बस स्टैंड छोड़ा। जाते वक्त वो मुस्कुराई, मेरे गाल पर किस किया और बोली, “अगली बार फिर मिलेंगे। बहुत मजा आया।”

ऋतू चाची हॉट रंडी रेश्मा बनकर चुदी- 2

चाची भतीजा चुदाई कहानी में पढ़ें कि आज पहली बार एक असली मर्द मिला है.दिखा दो अपनी सारी मर्दंगी. ये कह के रितु चाचीजी अनवर भाई का 7 इंच बड़ा मोटा लंड को कुत्तों की तरह चाटने लगी। अनवर भाई की आखें निकल गयीं. अनवर भाई: साली तेरे से भरी रंडी नहीं देखी है अब तक मैंने। क्या चूज़ ती है अंड ले पूरा इसको चाँद में खा जा इसको। आज टेरमैं चिकनी चूत को मेरा मुसाद लंड फाड़ दूंगा। ऋतु चाची : हाँ मेरे राजा. रितु चाची को पता नहीं क्या हो गया था। अपनी सारी शर्म खो ने के बाद हमें और किसी भी और रंडी में अब कोई फरक नहीं रह गया था।अनवर भाई: आआआह्ह्ह्ह और चूसो और जोर से देखो…।

साली रंडी बड़ी कुत्ती चीज़ है तू. आआआह्ह्ह्ह.ऋतु चाची: आ रहा है ना मजा….अनवर भाई: हां रानी हाआं…अनवर भाई चाचीजी की चड्ढी उतार ने लगे और चाची को बिल्कुल नंगा कर दिया. वो चाची जी की चूत में उंगली करने लगे। ऋतु चाची: आआह धीरे से दर्द होता है।

अनवर भाई: दर्द में ही तो मजा है जाने यार। ऋतु चाची: तेरी उंगली ने मेरा हाल ये कर दिया है तो तेरा लंड तो मुझे पागल हाय करदेगा.अनवर भाई: आज तक तूने लंड का स्वाद चखा ही कहां है. चूस इसको जोर से।अब अनवर भाई ने चाची को बिस्तार पे ले दिया और 69 पोजीशन में जा केर उनकी चूत को चाटने लगे और अपना लंड रितु चाची जी के मूंह में डाल दिया। अपनी एक उंगली उन्हें चाची जी के गांड में डाल कर हिलाना शुरू कर दी। चाची जी की हालत खराब हो गई थी।

ऋतु चाची : आआअहह…. हाऐइइइइ मेरी जवानी… साली बेकार ही हो जाती है… अगर आज आपका ये लंड नहीं मिलता। और जोर से हुसाओ उंगली. फाड़ डालो मेरी गांड को. अनवर भाई: हमारे और इस कोठे के होते हुए तेरी जवानी बेकार कैसे जाती रानी। तेरी इस चूत को तो मैं चूस चूस के बेहाल कर दूंगा और रहूंगी तेरी गांड वो तो मैं मारूंगा ही। साली छिनाल बड़ी ही मस्त आइटम है बे तू।साली कहाँ चिप थी इतने दिनों से। रितु चाची: आआहह मत रुको अब… आआह्ह्ह…. आआआह्ह्ह….अनवर भाई ने अपनी स्पीड और बढ़ा दी औरा बी वो चाची की चूत को काटने लगे और अपनी जीभ को पूरी उनकी चूत में घुसा दिया।

अनवर भाई की उंगलियाँ चाची के गांड के छेद को फाड़े जा रही थी और दूसरे हाथ से अनवर भाई चाची की गांड पर थप्पड़ लगाये जा रहे थे। अनवर भाई: और ले रंडी…आज निकलेगा तेरी मस्ती. साल्लिई एक नंबर की रांड है बे तू. रितु चाची: आआहह धीरे देखो भगवान के लिए… बहुत दर्द हो रहा है। अनवर भाई: इतना ही अगर दर्द हो रहा है तो जाके अपनी पत्नी जैसे किसी नामर्द से चुदवा रंडी।

यहां तेरी कोई नहीं सुनेगा…समझी…तेरा भगवान भी नहीं…ऋतु चाची : आआअहह ….हाआआआइई…थोड़े से तो प्यारर्र से करो ना राजा.. मैं कहीं भाग थोड़ी ना रही हूं…अनवर भाई: हाआ हाआ…साली भागे गी कहाँ हो तुम. तू अनवर भाई की रखाईल है समझी. और तेरी जैसी चिकनी रंडी को कैसे चोदना है ये मुझे बहुत दर्द से आता है।

भूल जा अब सब कुछ. आज से तू वही करेगी जो मैं बोलूंगा। समझ… बोल… समझ या नहीं..ऋतु चाची: समझ गई सब समझ गई… आआअहह… आआहह हाआआईईईईई भगवान मेरी छुट्टट…। आआअहहहहहह और्रर तेजज्ज औरररर…..येह….. हान्नन्न हन्नन्न बस्स्स ऐसे हीई…. हाआइइ आआह्ह्ह्ह….. आआह्ह्हाहा ..चाचीजी जोर से चिल्लाते हुए ठंडी हो गई। अनवर भाई का लंड अपने मुँह से निकल के चोद दिया और अपने पहले ऑर्गेज्म में पसीना पासीन हो गई।

अनवर भाई: क्यों रंडी साली हो। बस हो गई तू ठंडी. मेरे लंड को उक्सा ती है बे तू. ये ले साली छिनारर. अनवर भाई के तमाचे से चाची जी सहम गईं। मेरी और अर्पित की हालत ख़राब हो चुकी थी हम अपना लंड हिलाते हिलाते दो बार अपना माल चोद चुके थे।ऐसा भयानक सीन मैंने कभी नहीं देखा था। अनवर भाई ने रितु चाची को अपना गुलाम बना लिया था।

वो चाची को बिस्तर पे चोद के खड़े हो गए और बोले। अनवर भाई: चल रंडी खादी हो अभी बहुत काम बाकी है। तेरे को ठंडा करने नहीं आया मैं। तू आई है मेरेको ठंडा करने खड़ी हो के चूस मेरे लंड को। ऋतु चाची: थोड़ी देर रुक जाओ ना. प्लीज़ मेरे से और नहीं होगा. अनवर भाई: तेरे लिए रुकूंगा मैं। चल खड़ी हूं नहीं तो वापस मारूंगा तेरेको रंडी। रितु चाचीजी डर गई अनवर भाई का लंड मुँह में ले कर चुनने लगी।

मगर अपने पहले ऑर्गेज्म के कारण उनमें अब दम ना था और जिस तरह से अनवर भाई का लंड चूस रही थी उसे अनवर भाई ने घुसाया हो कर चाची जी को एक और थप्पड़ मारा। और अपना लंड निकाल के चाचीजी के मुँह के सामने रख दिया। अनवर भाई ने चाची जी के मूंह के ऊपर गुस्सा करना शुरू कर दिया और बोला। अनवर भाई: देख ले अपनी असली औकात. मेरा मुत है तू समझी. कल से तू मेरे से ही नहीं यहां के बाकी ग्रहको से भी चुड़ेगी। ज्यादा चू चा कि तो मार दूंगा तेरेको समझी।

साली कुतिया. तेरे जिस्म से बहुत पैसे कमाऊंगा मैं और तेरे वीडियो पर तो सारा इंडिया क्या पूरी दुनिया मूठ मारेगी। चल अब खादी हो। ऋतु चाचीजी रोते हुए अपने आप को संभाल के खड़ी हुई और अनवर भाई से माफ़ी माँग ने लगी। ऋतु चाची: मुझको माफ़ करदो। मैं भूल गई थी कि अब मैं एक रंडी हूं सिर्फ एक रंडी। जो आप बोलोगे वैसा ही होगा। आज से ये जिस्म मैं आपके हवाले करती हूं। माफ़ करदो मेरेको. अनवर भाई जोर जोर से हंसे लागे और अपना लंड हिलाते हुए बोले।

अनवर भाई: बहुत जल्दी समझ गई तेरी चाची राजेश. साली कुतिया पहले समझ जाती है तो इतनी मार ना खाती। मैं: अनवर भाई थोड़ा रहम करो ना चाची जी पर. आप इनको भले जब चाहे चोदो मगर रितु चाची से धंधा तो मत करवाओ ना।ये रंडी हमको दे दो। हम संभाल लेंगे इसको. अनवर भाई: (घुससे में) साले भदवे औकात में राह अपनी तेरा इस गली में आना बंद करवा दूंगा समझा। मेरेको मत सिखा क्या करना है. मैं: सॉरी अनवर भाई माफ़ करना, आप जैसा बोलोगे वैसा ही होगा। अनवर भाई: आजा रितु रानी अब तेरेको आगे की सैर करवाता हूँ। साला पूरा मूड खराब कर दिया तुम सब ने।

रितु चाची: हमारी नादानी को माफ करिएगा।रितु चाचीजी अनवर भाई का लंड पकड़ के उसको अब चूसने लगी। अपने हाथों से अनवर भाई के दांतों और थैलियों को मसलते हुए चाची भतीजा चुदाई कहानी में वो उनका लंड का सुपाड़ा अपने मूंह में डाल के चूसने लगी। अनवर भाई भी ढकेल लगा ने लगे और चाची जी के मूंह को चोदने लगे। उनके चाँद से आन्हह निकल ने लगी।

चाची जी ने अनवर मियां को खुश करने के लिए अपनी एक उंगली उनकी गांड में घुसा दी। अनवर भाई जैसे पागल हो गए और चाची जी के बालों को पकड़कर खींचने लगे और जोर से अपना लंड ढकाल ने लगाए। चाची जी की सांस फूलने लगी थी। मैं और अर्पित शांति से डर के करण वीडियो पर बैन लगाते रहे। अनवर भाई: अब जा के बनी ना तू रंडी. और चूसो साली छिनाल… हांन्न… और जोर से…अनवर भाई पूरी मस्ती में आने के बाद चाची जी को उनके कमर के बाल पटक दिया और उनकी दोनों टैंगो को ऊपर कर के उनकी चूत पे अपना चंद्रमा वापस रख के चाटने लगी।

चाची की चीख निकल ने लगी थी. वो जिस तरह से चाची जी की चूत चाट रहे थे और गांड में अपनी उंगली पेल रहे थे चाचीजी की हालत वापस खराब होने लगी थी। अपने हाथ को रितु चाची के गांड के छेद से निकल के वो रितु चाची के मूंह में डालने लगे। चाची जी उनकी उंगलियों का चैट ने लगी और आहें भरने लगी। अब चाची जी से और नहीं रहा जा रहा. ऋतु चाची: अनवर मियां चोद दो मुझे अपने लंड से. मार दो मेरी चूत को. कर दो मेरी चूत को अपने लंड से पकड़ो। और मत तड़पायो मैं मर जाऊँगी।

अब नहीं रहा जाता. अल्लाह के लिए बुझा दो मेरी आग. आज फाड़ दो मेरी चूत को।अनवर भाई: देख कैसे तड़प रही है तू मेरे लंड के लिए। हाआआ हाआ… ऐसी ही रखील अच्छी लगती है मेरेको जिसे अपनी औकात मालूम हो… चाहिए ना मेरा लंड तेरेको हांन… चाहिए ना… बोल ना… मेरेको बोल ना… साली बोल… रितु चाची: हां नहीं चाहिए मेरेको आप का लंड चाहिए।

मैं आपकी राखाइल हूं. दे दो मेरेको अपना लंड दे दो. भगवान के लिए बुझा दो मेरी आग. अनवर भाई ने चाची जी की चूत को चाटना बंद कर दिया और चाची जी के बाल पकड़ के खींच के उनको कुटिया बना दिया। . चाची जी तड़पने लगी और कराहेन भरने लगी। लंड रगड़ते रगड़ते अनवर भाई ने एक ही झटके में पूरे जोर से अपना लंड रितु चाची जी की चूत के अंदर पेल दिया।

रितु चाची जी जोर से चिल्लाने लगी मगर अनवर भाई ने बिना रुके एक के बाद एक जोरदार धक्के लगाने लगे। इतना मोटा लुंबा लंड चाची जी की छोटी सी नरम चूत को फाड़ते हुए जैसे ही अंदर घुसा चाची जी की जान निकल गई। अनवर भाई रितु चाची के बालों को और जोर से खींचते हुए अपना लंड अंदर बहार करने लगे और दूसरे हाथ से कभी चाची जी की गांड को मारते और कभी उनकी चुचियों को दबाते। चाची जी सिहर रही थी और चुदाई के कारण चिल्ला रही थी।

उनकी चिकनी चूत से कहाँ निकल रहा था। अनवर भाई: ले रंडी ले…मेरा लंड बहुत आग थी ना तेरे जिस्म में। देख मेरा लंड कैसे चोद रहा है तेरी चूत को.ऋतु चाची : आआअह्ह्ह्हह्ह धीरेर्री…. मेरी चूत फट जाएगी…. आआआअह्हह्हह…..अनवर भाई: साली छिनार तेरी चूत फाड़कर हाय ये मेरा लंड शांत होगा आज। देख रंडी आज मैं तेरी चूत को बिना कंडोम के चोद रहा हूँ। यही औकात है तेरी और तेरी चूत की। मेरे लंड का माल जब तेरी चूत में जायेगा तो तू मेरे नजायज़ बहुत की रांड माँ बनेगी। शायद मेरे बच्चे के करण हाय तेरे खानदान में कोई मरद पैदा होगा।

ऋतु चाची: आआअहह बहुत दर्द हो रहा हैईईई…। हाय ऐसा ना करो अनवर भाई….मैं एक शादी शुदा औरत हूं मेरे बारे में कुछ तो सोचो। अनवर भाई जोर जोर के झटके लगते हुए बोले: अनवर भाई: साली तू मेरी रखील है. तू पालगी मेरे बच्चे को अपने पति का बच्चा बना के। समझी अब तेरा घर ये कोठा है और तू मेरी रखील है भूल जा अपने पति को।

अनवर भाई ने रितु चाचीजी की कमर को पकड़ा और उनको गोदी में उठा के खड़े होगे। अन्होने चाची जी को पलट दिया और अपने लंड पर बिठा दिया। अब वो खड़े खड़े उनको चोद रहे हैं. अपने पति ऋतु चाची जी के होंठों पर रख कर वो चाची जी की चूत में खड़े-खड़े अपना लंड पेलने लगे। उन दोनो के बदन की गर्मी से पूरा कर्म गरम हो गया था। उन दोनो का बदन पसीने से भर गया था और वो चाची जी को चूमते और पेलते जा रहे थे। चाची जी की चूत भी अब मस्त हो गई थी।

रितु चाची जी जोर से चिल्लाने लगी मगर अनवर भाई ने बिना रुके एक के बाद एक जोरदार धक्के लगाने लगे। इतना मोटा लुंबा लंड चाची जी की छोटी सी नरम चूत को फाड़ते हुए जैसे ही अंदर घुसा चाची जी की जान निकल गई। अनवर भाई रितु चाची के बालों को और जोर से खींचते हुए अपना लंड अंदर बहार करने लगे और दूसरे हाथ से कभी चाची जी की गांड को मारते और कभी उनकी चुचियों को दबाते। चाची जी सिहर रही थी और चुदाई के कारण चिल्ला रही थी।

उनकी चिकनी चूत से कहाँ निकल रहा था। अनवर भाई: ले रंडी ले…मेरा लंड बहुत आग थी ना तेरे जिस्म में। देख मेरा लंड कैसे चोद रहा है तेरी चूत को.ऋतु चाची : आआअह्ह्ह्हह्ह धीरेर्री…. मेरी चूत फट जाएगी…. आआआअह्हह्हह…..अनवर भाई: साली छिनार तेरी चूत फाड़कर हाय ये मेरा लंड शांत होगा आज। देख रंडी आज मैं तेरी चूत को बिना कंडोम के चोद रहा हूँ। यही औकात है तेरी और तेरी चूत की। मेरे लंड का माल जब तेरी चूत में जायेगा तो तू मेरे नजायज़ बहुत की रांड माँ बनेगी। शायद मेरे बच्चे के करण हाय तेरे खानदान में कोई मरद पैदा होगा।

ऋतु चाची: आआअहह बहुत दर्द हो रहा हैईईई…। हाय ऐसा ना करो अनवर भाई….मैं एक शादी शुदा औरत हूं मेरे बारे में कुछ तो सोचो। अनवर भाई जोर जोर के झटके लगते हुए बोले: अनवर भाई: साली तू मेरी रखील है. तू पालगी मेरे बच्चे को अपने पति का बच्चा बना के। समझी अब तेरा घर ये कोठा है और तू मेरी रखील है भूल जा अपने पति को।

अनवर भाई ने रितु चाचीजी की कमर को पकड़ा और उनको गोदी में उठा के खड़े होगे। अन्होने चाची जी को पलट दिया और अपने लंड पर बिठा दिया। अब वो खड़े खड़े उनको चोद रहे हैं. अपने पति ऋतु चाची जी के होंठों पर रख कर वो चाची जी की चूत में खड़े-खड़े अपना लंड पेलने लगे। उन दोनो के बदन की गर्मी से पूरा कर्म गरम हो गया था। उन दोनो का बदन पसीने से भर गया था और वो चाची जी को चूमते और पेलते जा रहे थे। चाची जी की चूत भी अब मस्त हो गई थी।

चाची भतीजा चुदाई कहानी अगले भाग में जरी है।

ऋतू चाची हॉट रंडी रेश्मा बनकर चुदी- 3

3सम कैम सेक्स का मजा पहली बार एक मस्त लंड को अपनी चूत में पकाए वो अब मस्त हो गई थी वो भी अनवर भाई के बालों को पकड़ने के लिए लगी थी। ऋतु चाची : हाऐइइइइइइइइइइ… क्या लंड है आपका अनवर भाई… मत रुको पेलते जाओ अपना लंड मेरी चूत के अंदर बहुत मजा आ रहा है।

मत रुको मेरे राजा… हाऐइइइ… आअह्हह्हह्हह्हह्हह…. आआहहहअनवर भाई: साआअल्लीइ…मजा तो मुझे बीहाय बहुत आ रहा है तेरे नरम बदन से खेलने में और तेरी टाइट चूत मारने में… क्या गजब माल है तू… आआहहहह ये ले साली रंडी.. ये ले… ऋतु चाची: हायइइइइइइ मर जाऊं मैं तेरे लंड पे।

आज तक जिंदगी में ऐसा मजा कभी नहीं आया था। हाईईई… मस्त कर दिया है मेरेको तेरे लंड ने… क्या फौलाद है…. आआअहह हाऐइइइइ…. मैं आज से सिर्फ और सिर्फ तेरी रंडी हूं… तेरे लंड की गुलाम.. आआआह्ह्ह…. और जोर से देखो… आआअहह…. अनवर भाई ने अपने बाद में बहुत प्यार किया और जोर से पेलना शुरू कर दिया।

चाचीजी की बातें सुनके उनका जोश और भड़क गया और वो और बेहमी से रितु चाची को चोदने लगे। चाचीजी को बिस्तार पे लेता कर अब वो उनके ऊपर चढ़ गए और ऋतु चाची के मुँह को चूमते चाटते वो उनके पूरे चेहरे को छूने लगे। एक हाथ से चुचियांन्न मसलते हुए वो अपने लंड को आगे पीछे कर रहे थे। चाची जी का बदन सिकुड़ने लगा और चाची जी ने अपनी चूत को टाइट करते हुए अनवर भाई का लंड जकड़ लिया।

ऋतु चाची जी अनवर भाई के मजबूत हाथों में पिघलने लगी और दूसरी बार अपना पानी चोद के अधमरी हो गई। मगर अनवर भाई तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। अपना आसन बदलते हुए अब उन्हें चहसी जी को ऊपर कर दिया और खुद लेट गए। चाची जी उनक फौलादी लड़े के ऊपर बैठ के ऊपर नीचे होने लगी। अनवर भाई अब सीधे उनकी क्लिटोरिस और बची हुई दानी को चोद रहे हैं। कुछ ही देर में चाची वापस मस्त हो गई और जोर जोर से कूदने लगी और साथ में अनवर भाई भी चाचीजी की चुचियों को कसके निचोड़ते हुए तेजी से अपना लंड पेलने लगे।

दोनों ही अपने जिस्म की आग और प्यास को बुझाने के लिए पागल हो रहे थे। जैसे जैसे अनवर भाई अपना सारा माल चोदने के करीब आने लगे वो उतनी ही तेजी से पेलने लगे। चाची जीब ही मस्त होकर आखें बंद कर के बस मस्त हो कर अपना काम ज्वाला शांत करने में लगी थी। अनवर भाई: हाअन्नन्न रानी… आआह्ह्ह बहुत मजा आ रहा है… आआह्ह्ह साली मस्त कर दिया है आज तूने मुझको… ऋतु चाची: आआह्ह्ह्ह अनवर भाई आआह्ह्ह्ह… अब अनवर भाई अचानक से लंड पेलते चाची जी से लिपट गये। चाची जिब ही पागलों की तरह उनको अपनी बाहों में बहारने लगी।

डोनो जोर जोर से आहेन भरने लगे और अनवर भाई ने एक आखिरी जोर के झटके के साथ अपना सारा माल उनकी चूत में गिरा दिया। चाची जी ने भी अपना पानी चोद दिया और अनवर भाई के ऊपर गिर गई और उनको चूमने लगी। अनवर भाई धीरे-धीरे अपना लंड पेल जा रहे थे और फिर उनकी चोट से अपना लंड निकल लिया। रितु चाची जी की चूत फूल गई थी सुजान के कारण। रितु चाची के झटों पर अनवर भाई का माल गिरा हुआ था।

उनकी पूरी चूत माल से भर गई थी। वो दोनो पूरी तरह संतुष्ट हो कर बिस्तर पर लेते हुए थे। रितु चाची अनवर भाई के लंड को हाथों से पकड़ के सहला रही थी और अनवर भाई उनके बब्बन को हिला रहे थे। अनवर भाई: मजा आया या नहीं तेरेको मेरी रानी। रितु चाची: हाऐइइइ बहुत मजा आया। आज जा कर मैं पूरी औरत बनु हूँ। आपके लंड का पानी मेरी चूत की आग शांत हो गई है। अनवर भाई: साली तेरे जैसी कातिल रंडी पर मेरा लंड 3सम कैम सेक्स भी बहुत दिनों से खराब हुआ है।

 

तेरी कातिल जवानी ने मेरे लंड को पागल कर दिया है। ये कह कर अनवर भाई रितु चाची को चूमे लगे और अपनी बाहों में भरने लगे। थोड़ी देर बाद वो उठे और दारू के पैग बना के चाची को पिलाने लगे। वो दोनों दारू पी के नशे में दूसरे के हिस्सेदार से खेल रहे थे। कभी चाची जी उनके लंड को सहलाती कभी चूमती। अनवरभाई ऋतु चाची की चूत में उंगली करते थे और बुब्बन को डांटते हुए चूम रहे थे।

तभी अनवर भाई बोले: अनवर भाई: सुनो भड़वे राजेश. मैं: बोलिये अनवर भाई. अनवर भाई: बड़ा मस्त माल लाया है आज तूने. अब मेरा काम अपने चाचा को फोन कर के बोल कि तेरी चाची आज अपनी सहेली का यहाँ गई है और वहीं रुकेगी और तुम दोनो कोई काम में व्यस्त हो। साला मेरेको कोई अशांति नहीं मांगता है।

मैं: जैसा आप बोलोगे अनवर भाई. अनवर भाई: आज रात तेरी चाची मेरा बिस्तार गरम करेगी और तू और तेरा चुत्तड़ दोस्त जा कर किसी और रांड को बजायो। समझे.मैं: ठीक है अनवर भाई. जैसा आप बोलो. रितु चाची जी अनवर भाई की बाहों में लेती हुई उनको चूम रही थी और हम दोनो अनवर भाई के कमरे से निकल के बाहर जा रहे थे।

हमने अनवर भाई के कहने पर कैमरे को ऑन ही रख दिया था। मगर अंदर का नजारा हम मिस नहीं करना चाह रहे थे और अनवर भाई की रंडियों में हमें आज पहली बार कोई दिलचस्पी नहीं थी। हम दोनों गेट के बाहर खड़े हो कर अंदर का नजारा देख रहे थे। रितु चाची : क्यूं नहीं जाने दिया मेरेको हां. अब क्या इरादा है आपका आज।अनवर भाई: हा हा हा… आज तो तू रात भर मेरे बिस्तर पर गरम करेगी रानी।

कहीं नहीं जाने दूंगा तेरेको. सुन आज से तू ऋतु हो गी अपने घर पे। इस कोठे पर तेरा नाम होगा रेशमा। अनवर की राखाइल रेशमा रानी. रितु चाची : और तुम होगे मेरे चुद्दकड़ भड़वे अनवर मियाँ। मेरे मालिक. महज़ लंड डेटा. अनवर भाई: साली चिनार बहुत जल्दी हाय रंडियों जैसी बात करना सीख गई है तू। बहुत जल्दी बहुत आगे जायेगी तू. ऐसे ही मस्त बातें करते हैं और एक दूसरे की बॉडी से खेलते हुए अनवर भाई का लंड वापस तैयार हो रहा था।

वो लंड खड़ा हो रहा था और अनवर भाई अपनाप्यारी रांड रेशमा रानी को चूम ते जा रहे थे। चाचीजी भी गरम होने लगेंगी। अनवर भाई ने अचानक चाचीजी की गांड में उंगली डाल दी और चाची जी ने एक सेक्सी सी आह निकली… आआहह. उसके बाद तो जो हुआ वो देख कर मैं पागल ही हो गया था। अनवर भाई ने रितु चाची को दूसरी तरफ मोड़ दिया और उनकी गांड में अपनी नाक को घुसा दिया और सुंघने लगे।

थोड़ी देर बाद उन्हें अपनी जीभ से चाची जी की गांड को चाटना शुरू कर दिया। चाची जी मस्त हो गई थी वो अनवर भाई के लौड़े को अपनी पकड़ में लाने लगी। अनवर भाई उठे और रितु चाची की गांड को फेला दिया और अपना लंड उनकी गांड के छेद पर पोजीशन बनाने लगे।इससे पहले कि रितु चाची कुछ समझती और बोलती अनवर भाई ने एक जोर का झटका लगाया और अपना लंड रितु चाची की गांड मैंने पेल दिया. रितु चाची बहुत जोर से चिल्लायी और शोर मशीन लगी।

अनवर भाई ने अपने हाथ से रितु चाची का मुंह पकड़ के बंद किया और एक और झटके में अपना पूरा लंड चाची जी की गांड के अंदर घुसा दिया। थोड़े देर हल्के हल्के झटके मारने के बाद ऋतु चाची का दर्द थोड़ा बहुत कम हुआ और वो कुछ शांत हुई तो अनवर भाई चाची जी के बब्बन को बहस हुए उनकी गांड में लंड आगे पीछे करते रहे। ऋतु चाची तो बस आंखें बंद कर के सिसकियां भरती हुई मजे ले रही थी. अब दर्द काबू में होता देख कर अनवर भाई ने वही अपना जानवर रूप दिखाया दिया और बेरहामी से जोर जोर से अपना लंड रितु चाची की गांड में आगे पीछे करने लगे।

अन्होन रितु चाची को ऐसा चोदा कि रितु चाची की 7वीं पीढ़ी भी चुदाई को भूला न पायेगी। दर्द से बेहाल चाची जी रो रही थी और मस्ती भी ले रही थी। अनवर भाई ने अपनी पूरी हवस चाची के गामद पे निकल दी। हौसी दरिंदे की तरह उन्हें रितु चाची ने अपनी राखाइल रेशमा बना डाला। गांड मारते-मारते अनवर भाई ने अपनी दो उंगली चाची जी की चूत में घुसा दी। चाची जी को तो अपनी वासना की आग में कुछ समझ नहीं आ रहा था और वो सिर्फ गरम गरम सिसकियाँ भर रही थीं।

अब जब अनवर भाई झड़ने वाले थे तो उन्हें झटके से अपना लंड निकला और रितु चाची को पलटकर उनके मुँह में अपना लंड डाल दिया दीपक। रितु चाची लॉलीपॉप की तरह उनके दानव लंड को चूस रही थी। उसके बाद अनवर भाई ने अपना लंड निकाला और रितु चाची के मुँह के सामने उसको जोर जोर से हिलाने लगे। फिर वो अचानक जोर से चिल्लाए और अपना सारा माल रितु चाची के चेहरे, आंखों और होठों पर गिरा दिया। बच्चा हुआ माल उनकी चुचियों पे भी डाल दिया। रितु चाची समय एक बहुत ही सस्ती सी गलती लग रही थी। उनका वीडियो मार्केट में धूम मशीन वाला था।

अब उनको लंड का चस्का लग चुका था. अब ये आग सिर्फ लंड के पानी से ही जल सकती है। अनवर भाई का काम अब भी पूरा नहीं हुआ था। वो रितु चाची को पूरी रांड बना कर ही हर मन्ने वाले थे। अन्होन रितु चाचीजी के चेहरे और बुब्बन पे पड़े माल को चमचे से उठा कर एक गिलास में भरा और चाची जी को अपना चेहरा चाटने को बोला।

उसके बाद उन्होंने वो माल का गिलास रितु चाची जी को पिला दिया और एक ब्रश से अपने दांत अपने माल से ब्रश करने को बोला। रितु चाची जी के पास कोई और रास्ता ना था। धीरे-धीरे वो भी इस गंदी सी हरकत को एन्जॉय करने लगी और अनवर भाई के माल से ब्रश करते हुए उसे खेलने लगी।

कुछ देर खेलने के बाद उन्हें वो सारा माल एक झटके में पेशाब लग गया। ये सब होने के बाद अनवर भाई खड़े हुए और चाची जी के पूरे बदन पर वापस मुटना शुरू कर दिया और बोला की: “अब तू सिर्फ मेरी ही सिर्फ मेरी है रेशमा रानी। मेरी रखैल तेरी जवानी के हर एक रस को मैं चूस जाउंगा साली छिनाल” रितु चाची अधमरी हालत में पड़ी हुई कर रही थी। तभी अनवर भाई चिल्लाये: अनवर भाई: अबे बहन के लौड़े बहार से झाँक ना बंद करो और अंदर आओ।

मेरेको मालोम था कि तुम दोनों भड़के कहीं नहीं जाओगे। बहुत मस्त माल है तेरी चाची. इस का जिस्म बेच के जो भी कमाई होगी वो आधी-आधी बातें ठीक है। अब बुझा लो अपना हवस इसके साथ। चोदो और 3सम कैम सेक्स चोदो साली छिनार को। हम दोनो एक दूसरे का चाँद देख ने लगे और एक सेकंड में कपड़े उतार के रितु चाचीजी पे चढ़ गये। हम दोनो ने रात भर चाची जी को चोदा। थोड़ी देर बाद तो लगा कि मर गई है रंडी की बच्ची मगर हमें तो अपना हवस शांत करने से मतलब था और हम रात भर चाची जी को चोदते रहे।

कंप्यूटर ठीक करने गया तो पड़ोसन भाभी ने खुद खोल दी चूत

मेरा नाम राहुल है। मैं २५ साल का हूं और रायपुर में ही रहता हूं। हमारे पड़ोस में रहती हैं रेखा भाभी। उम्र करीब ३२ साल, लेकिन देखने में अभी भी कॉलेज की लड़की जैसी लगती हैं। गोरी-चिकनी त्वचा, भरी-भरी देह, गोल-गोल स्तन और कमर का वो नाजुक मोड़… भाभी को देखते ही मन में आग लग जाती थी। उनके पति अक्सर बाहर रहते थे जॉब की वजह से। भाभी घर पर अकेली रहतीं और कभी-कभी हेल्प के लिए मुझे बुला लेती थीं।

एक दिन शाम को उनका फोन आया।

“राहुल बेटा, कंप्यूटर में कुछ प्रॉब्लम हो गया है। स्क्रीन पर कुछ भी नहीं आ रहा। आकर देखोगे?”

“जी भाभी, अभी आता हूं।”

मैं टूल्स का बैग लेकर सीधा उनके घर पहुंच गया। भाभी ने दरवाजा खोला। वो हल्के गुलाबी सलवार कमीज में थीं। कमीज का दुपट्टा थोड़ा ढीला था, जिससे उनकी गहरी गर्दन और ऊपर वाले गोरे गोरे मांसल भाग साफ दिख रहे थे। मेरी नजर वहां रुक गई। भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा, “आओ अंदर।”

कंप्यूटर टेबल पर रखा था। मैं बैठ गया और चेक करने लगा। वायरिंग में कुछ इश्यू था। जैसे-जैसे मैं काम कर रहा था, भाभी मेरे पीछे खड़ी होकर देख रही थीं। उनकी सांसों की हल्की गर्माहट मेरी गर्दन पर पड़ रही थी।

“राहुल, तुम्हें कितना अच्छा आता है ये सब…” उन्होंने धीरे से कहा।

मैंने मुड़कर देखा। उनकी आंखों में एक अलग सी चमक थी। मैं मुस्कुराया, “भाभी, आपकी मदद करना तो मेरा काम है।”

कुछ देर बाद कंप्यूटर ऑन हो गया। भाभी खुश हो गईं। “वाह! तुम तो जादूगर हो।” उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा। वो स्पर्श सामान्य से ज्यादा देर तक रहा। मैंने महसूस किया कि उनकी उंगलियां हल्के से दबा रही हैं।

“भाभी, पानी पिलाइए ना।” मैंने कहा।

वे किचन गईं। जब वापस आईं तो उनके हाथ में दो ग्लास थे। बैठते वक्त उनकी सलवार थोड़ी ऊपर चढ़ गई, मोटी-मोटी जांघें झलक गईं। मैं नजर हटा नहीं पाया। भाभी ने देख लिया। लेकिन शर्माने की बजाय वे हल्के से मुस्कुराईं।

हम दोनों बातें करने लगे। उन्होंने बताया कि पति पिछले १५ दिन से बाहर हैं। घर अकेला लगता है। मैंने धीरे से कहा, “भाभी, अगर कभी कुछ चाहिए तो बता देना। मैं हूं ना।”

उन्होंने मेरी आंखों में देखा। “सच में? सब कुछ?”

उस “सब कुछ” में छुपा इशारा समझते देर नहीं लगी। मैंने हौले से उनका हाथ पकड़ लिया। भाभी ने हाथ नहीं छुड़ाया। बल्कि उंगलियों को और कस लिया।

“राहुल… मैं जानती हूं तुम मुझे कैसे देखते हो,” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा। “मुझे भी अच्छा लगता है।”

मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। मैंने आगे बढ़कर उनके होंठों को अपने होंठों से छू लिया। भाभी ने आंखें बंद कर लीं और धीरे-धीरे जवाब दिया। किस गहरा होता गया। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेलने लगी।

मैंने उन्हें गोद में उठा लिया और बेडरूम की तरफ ले गया। भाभी मेरी गर्दन में चिपक गईं। उनके नरम स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। बेड पर लिटाते ही मैंने उनकी कमीज का पहला बटन खोला। सफेद ब्रा से ढके हुए भारी-भारी स्तन बाहर झांक रहे थे।

“धीरे राहुल… आज पूरा समय है,” भाभी ने शर्माते हुए कहा।

मैंने उनकी कमीज पूरी उतार दी। ब्रा का हुक खोलते ही उनके गुलाबी-गुलाबी निप्पल्स सामने आए। मैंने एक को मुंह में ले लिया। भाभी की सांसें भारी हो गईं। “आह… राहुल… अच्छा लग रहा है…”

मैं चूसता रहा, हल्के से दबाता रहा। भाभी की कमर उठ-उठकर मुझसे सट रही थी। मैंने उनकी सलवार का नाड़ा खोल दिया। अंदर हल्का लेस वाला पैंटी था, जो पहले से ही गीला हो चुका था।

मैंने पैंटी उतारी। भाभी की साफ-सुथरी, गुलाबी चूत पूरी तरह नम थी। मैंने उंगलियों से हल्के से सहलाया। भाभी कांप उठीं।

“राहुल… तुम्हें देखकर कितना दिन से मन करता था…” उन्होंने स्वीकार किया।

मैंने अपना मुंह उनकी जांघों के बीच ले जाकर चूमना शुरू किया। मेरी जीभ उनकी क्लिटोरिस पर घूम रही थी। भाभी दोनों हाथों से मेरे बाल पकड़कर दबा रही थीं। उनकी आहें कमरे में गूंज रही थीं – “उफ्फ… हां… वहां… और गहरा…”

कुछ मिनटों बाद भाभी का शरीर तन गया। वे जोर से कांपीं और पहली बार झड़ गईं। उनके मुंह से मीठी-मीठी चीख निकली।

अब मेरी बारी थी। मैंने पैंट उतारी। मेरा लंड पहले से ही पूरा खड़ा और सख्त हो चुका था। भाभी ने उसे देखा और हाथ में ले लिया। “कितना मोटा है…”

वे उसे धीरे-धीरे सहलाने लगीं। फिर आगे झुककर मुंह में ले लिया। भाभी का गर्म और नम मुंह मेरे लंड को चूस रहा था। मैं आनंद से कराह उठा।

“भाभी… बहुत अच्छा कर रही हो…”

कुछ देर चूसने के बाद भाभी लेट गईं और टांगें फैला दीं। उनकी आंखों में इच्छा थी। मैं उनके ऊपर चढ़ गया। लंड की टिप को उनकी चूत पर रगड़ने लगा। भाभी ने खुद ही उठकर उसे अंदर लेने की कोशिश की।

धीरे-धीरे मैं अंदर घुसा। उनकी चूत बहुत टाइट और गर्म थी। पूरी तरह घुसते ही भाभी ने लंबी सांस ली। “आह… भर गया…”

मैं धीमी गति से स्टार्ट किया। हर थ्रस्ट के साथ उनके स्तन हिल रहे थे। मैं उन्हें चूमता, गर्दन चूसता, निप्पल्स पर काटता। भाभी मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थीं।

“जोर से राहुल… मुझे अपना बना लो…”

मैं रफ्तार बढ़ाने लगा। कमरे में चुटकी बजाने जैसी आवाजें और हम दोनों की आहें भर गईं। भाभी की चूत मेरे लंड को जोर से दबा रही थी। मैंने उन्हें चारों खाने चित्त करके फिर से घुसा। इस बार और गहराई तक।

भाभी का दूसरा ऑर्गेज्म आ गया। वे पूरी तरह कांप उठीं। मैं भी करीब था।

“भाभी, मैं आने वाला हूं…”

“अंदर ही… भर दो मुझे,” उन्होंने कहा।

मैंने आखिरी जोरदार धक्के दिए और पूरा माल उनके अंदर उड़ेल दिया। दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे।

कुछ देर बाद भाभी मेरे सीने पर सिर रखकर लेटीं। “आज के बाद तुम मेरे कंप्यूटर के अलावा मेरी सारी जरूरतें भी देखोगे ना?”

मैं मुस्कुराया और उनके बालों में हाथ फेरते हुए बोला, “हां भाभी… जब चाहो, बुला लेना।”

उस रात हम दो बार और मिले। दूसरी बार उन्होंने ऊपर बैठकर मुझे राइड किया। उनके स्तन मेरे मुंह के सामने उछल रहे थे। तीसरी बार मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में चोदा। उनकी गोल-गोल गांड पकड़कर जोर-जोर से थपथपाता रहा। भाभी हर बार चीखकर झड़ जातीं।

सुबह होने तक भाभी पूरी तरह संतुष्ट थीं। उनके चेहरे पर वो चमक थी जो लंबे समय बाद आई थी।

पड़ोसन भाभी की कंप्यूटर रिपेयरिंग वाली चुदाई सिर्फ एक बार की घटना नहीं रही। उसके बाद हर हफ्ते कम से कम दो-तीन बार मैं उनके कंप्यूटर की “रिपेयरिंग” करने जाता। कभी तो कंप्यूटर खराब भी नहीं होता, फिर भी भाभी बुला लेतीं।

एक बार तो उन्होंने नाइट सूट पहनकर बिठाया और खुद ही मेरी गोद में बैठ गईं। “आज जल्दी करो… मन बहुत कर रहा है।”

हम दोनों अब एक-दूसरे के शरीर को अच्छी तरह जानते थे। भाभी को सबसे ज्यादा पसंद था जब मैं उनकी जांघों के बीच मुंह लगाकर चाटता। और मुझे सबसे ज्यादा उनका वो आह भरा स्वर – “राहुल… और जोर से… फाड़ दो अपनी भाभी की चूत…”

हमारा रिश्ता गुप्त था, लेकिन बेहद मीठा और संतोष भरा। पड़ोसन भाभी अब मेरी थी। उनकी हर इच्छा, हर जरूरत मैं पूरी करता। और वे मुझे वो प्यार देतीं जो कोई और नहीं दे सकता था।

पड़ोस की आंटी ने कहा “मुझे चोद दो बेटा” मैंने पूरी रात चोदा

मेरा नाम स्वीट गाय है। मैं 26 साल का दिल्ली का लड़का हूँ। मेरा फिगर ठीक-ठाक है और अंडरवियर के अंदर मेरा 7 इंच का मोटा, पावरफुल टूल किसी को भी दीवाना बना सकता है। आज मैं आपको अपनी जिंदगी की वो सच्ची और सबसे हॉट घटना सुनाने जा रहा हूँ जो मैं कभी नहीं भूल सकता। ये कोई बड़ी उपलब्धि वाली कहानी नहीं, बल्कि एक बेहद सेक्सी, मीठा और यादगार अनुभव है।

हमारे घर के ठीक बगल में अंकल अपनी पत्नी यानी आंटी और उनकी इकलौती बेटी के साथ रहते थे। मैं उन्हें अंकल-आंटी ही कहता था। आंटी 36 साल की थीं, लेकिन उनकी बॉडी देखकर कोई भी पागल हो जाए। उनके पास दो भरी-पूरी 40D साइज की विशाल चूचियां थीं जो हर वक्त टाइट कपड़ों में उभरकर नजर आती थीं। उनकी गांड गोल-मटोल, भारी और लहराती हुई थी। उनकी बेटी भी कॉलेज फर्स्ट ईयर में थी और काफी हॉट थी – अच्छी शेप की चूचियां और स्लिम फिगर। लेकिन मेरी नजरें हमेशा आंटी पर ही अटक जाती थीं।

जब भी मौका मिलता, मैं आंटी को चुपके से घूरता रहता। उनकी चलती हुई भारी गांड, उछलती चूचियां देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता और रात को उनके बारे में सोच-सोचकर मैं खुद को राहत देता। वो सच में एक सेक्सी बम थीं। हमारे घर में किसी भी पार्टी या फंक्शन पर वो लोग जरूर आते थे।

एक दिन हमारे घर पार्टी थी। मैं उन्हें इनवाइट करने उनके घर गया। दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। थोड़ी देर बाद जोर-जोर से नॉक करने पर दरवाजा खुला। वो बंद था लेकिन लॉक नहीं था। मैं अंदर घुसा, ऊपर उनके कमरे की तरफ गया और आंटी को आवाज लगाई। तभी आंटी की मीठी आवाज आई, “आ जाओ बेटा, सोफे पर बैठ जाओ। कुछ मैगजीन पढ़ लो। मैं अभी नहाकर आ रही हूँ।”

मैं सोफे पर बैठ गया और मैगजीन उलटने-पलटने लगा। कुछ देर बाद आंटी बाहर आईं। ओह माय गॉड! वो एक गुलाबी सिल्की नाइटी पहने थीं जो स्लिपलेस थी और काफी ट्रांसपेरेंट। उनकी भीगी हुई लंबी बालें कंधों पर बिखरी हुई थीं। नाइटी के अंदर से उनकी बड़ी-बड़ी चूचियां और भारी गांड का पूरा आउटलाइन साफ दिख रहा था। सफेद ब्रा और पैंटी की झलक भी आ रही थी। मेरा लंड तुरंत सख्त होकर पैंट में तंबू बना चुका था।

मैंने जल्दी-जल्दी कहा, “आंटी, शाम को हमारे घर पार्टी है, आप लोग आना।” लेकिन आंटी ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और बोलीं, “अरे बेटा, इतनी जल्दी कहाँ भाग रहे हो? पहले कुछ खा-पी तो लो। मैंने अभी-अभी नहाया है, थोड़ा रुक जाओ ना।” उनकी आवाज में वो प्यार और आकर्षण था जो मुझे रोक ले गया। मैं मना नहीं कर पाया।

उन्होंने मुझे अपने बेडरूम में बुला लिया। वहाँ वो बाल कंघी कर रही थीं। उनकी गीली पीठ चमक रही थी और नाइटी के पीछे से ब्रा-पैंटी पूरी तरह दिख रही थी। मैं उनकी कमर, गांड और चूचियों को घूरता रह गया। आंटी ने अचानक पीछे मुड़कर मेरी तरफ देखा। उनकी नजर मेरे पैंट के टेंट पर पड़ी और वो शरारती मुस्कान दे दीं। “क्या हुआ बेटा? तुम ठीक तो हो? मैं अच्छी लग रही हूँ क्या?”

मैं शर्म से लाल हो गया, लेकिन सच्चाई बोल दी, “हाँ आंटी… आप बहुत अच्छी लग रही हैं।”

उन्होंने नाजुक स्वर में पूछा, “और… सेक्सी भी?”

मैं हैरान रह गया, लेकिन बोला, “बहुत… बहुत सेक्सी आंटी।”

उनकी मुस्कान और चौड़ी हो गई। उन्होंने धीरे से दरवाजा बंद कर दिया (लॉक नहीं किया) और मेरे पास आईं। बिना कुछ कहे उन्होंने मुझे जोर से गले लगा लिया। उनकी नरम, गर्म बॉडी मेरे सीने से सट गई। मैं भी उनका साथ देने लगा। फिर उन्होंने मेरे होंठों पर गहरा, प्यार भरा किस किया। मैंने भी उनके लाल-लाल होंठों को जोश से चूस लिया।

मेरा दाहिना हाथ उनकी पीठ पर सरक गया और नीचे उनकी भारी गांड को सहलाने लगा। आंटी ने आह भरते हुए कहा, “उफ्फ… तुम्हारे हाथ कितने अच्छे लग रहे हैं बेटा… मुझे भी तुमसे बहुत अट्रैक्शन था… आज मौका मिल गया।”

मैंने उनकी नाइटी ऊपर की तरफ खींची। वो खुद ही हाथ उठाकर मदद कर रही थीं। अब वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में खड़ी थीं। उनकी 40D वाली मोटी चूचियां ब्रा से बाहर निकलने को बेताब थीं। मैंने ब्रा का हुक खोल दिया। उनकी भरी-पूरी चूचियां आजाद हो गईं। गुलाबी निप्पल्स पहले से ही सख्त और खड़े थे।

मैंने एक चूची मुंह में ले ली और धीरे-धीरे चूसने लगा। आंटी ने मेरे सिर को अपनी छाती से चिपका लिया और कराह उठीं, “आह्ह्ह… हाँ बेटा… चूसो… अच्छे से चूसो मेरी चूचियां… कितने दिनों से तरस रही थी मैं… हाँ… और जोर से…”

मैंने दूसरी चूची को हाथ से मसलते हुए नीचे मुंह ले जाया। उनकी नाभि चाटी, जीभ घुमाई। फिर उनकी पैंटी के ऊपर किस किया। पैंटी पहले से ही पूरी गीली थी। मैंने उसे भी उतार दिया। उनकी साफ, गुलाबी चूत चमक रही थी और उससे मीठा रस टपक रहा था।

मैं घुटनों पर बैठ गया और अपनी जीभ से उनकी चूत चाटने लगा। “उम्म्म… आह्ह्ह… हाय भगवान… कितना अच्छा लग रहा है…” आंटी की जांघें कांप रही थीं। मैंने जीभ अंदर डाली और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। आंटी मेरे बाल पकड़कर अपना कूस मेरे मुंह पर दबा रही थीं। “हाँ… यही… चाटो मेरी चूत… मेरा पति तो कभी ऐसा नहीं करता… मैं कितने दिनों से प्यासी थी… हाँ बेटा… चूसो… मुझे प्यार दो…”

थोड़ी देर बाद उनकी बॉडी तन गई। उनकी चूत सिकुड़ने लगी और उन्होंने जोर से कराहते हुए ऑर्गेज्म कर दिया। उनका गर्म, मीठा रस मेरे मुंह में भर गया। मैंने सब पी लिया।

अब मेरा लंड फटने को तैयार था। आंटी ने मुस्कुराते हुए मेरी पैंट खोली और अंडरवियर उतार दिया। मेरा 7 इंच का मोटा लंड लहरा रहा था। “वाह… कितना सुंदर और बड़ा… आज इसे पूरा मजा दूंगी,” कहते हुए उन्होंने उसे प्यार से चूम लिया। फिर लिक किया, गोलियों को चूसा और पूरा मुंह में ले लिया। वो ऊपर-नीचे सिर हिला रही थीं, बहुत प्यार और जोश से सक रही थीं।

मैं भी कराह रहा था, “आंटी… उफ्फ… बहुत अच्छा लग रहा है…”

जब मैं झड़ने वाला था तो उन्होंने लंड अपनी चूचियों के बीच ले लिया। मैं उनके मोटे, नरम स्तनों पर अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया। आंटी ने मुस्कुराकर अपनी चूचियों से उसे चाट लिया। “स्वादिष्ट है बेटा…”

अब असली मजा शुरू होने वाला था। मैंने कहा, “आंटी, आप ऊपर बैठकर मुझे चोदो ना… मैं देखना चाहता हूँ आपको।” वो पूरी तरह तैयार थीं। उन्होंने मेरे ऊपर सवार होकर मेरा लंड अपनी गीली चूत पर रगड़ा और धीरे-धीरे अंदर ले लिया। “आह्ह्ह… कितना मोटा और गर्म है… पूरी भर गया…”

फिर वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगीं। उनकी भारी 40D चूचियां उछल-उछलकर नाच रही थीं। मैं नीचे से धक्के दे रहा था। कमरे में “पच-पच” की सेक्सी आवाज और हम दोनों की तेज सांसें गूंज रही थीं।

“हाँ आंटी… तेज… बहुत अच्छा लग रहा है…”

“आह्ह… हाँ बेटा… और जोर से… मेरी चूत को प्यार से भर दो… हाँ… और तेज…”

उनकी चूचियां मेरे चेहरे के सामने उछल रही थीं। मैंने उन्हें दोनों हाथों से पकड़कर चूस लिया। आंटी मेरे होंठों पर किस करने लगीं। हम दोनों एक साथ चरम पर पहुंच गए। मैंने अंदर ही अंदर अपना पूरा लोड छोड़ दिया और वो भी कांपते हुए झड़ गईं।

हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। उनकी चूचियां मेरी छाती से सटी हुई थीं। कुछ देर बाद आंटी ने मेरे गाल पर प्यार भरा किस किया और धीरे से कहा, “ये हमारा राज रहेगा… जब भी मन करे, आ जाना। मैं हमेशा तैयार रहूंगी।”

उस दिन के बाद हम कई बार ऐसे मीठे, गर्म पलों का आनंद लेते रहे। लेकिन कुछ महीनों बाद मुझे पता चला कि वो विदेश चली गई हैं। वो यादें आज भी मेरे मन में ताजा हैं और जब भी याद आती है, मुस्कुराहट आ जाती है।

साली की टाइट चूत का मजा – जीजू साली की हॉट देसी सेक्स स्टोरी

शादी को दो साल हो चुके थे। मैं, रोहन, अपनी बीवी प्रिया के साथ मुंबई में रहता था। प्रिया की छोटी बहन नेहा कॉलेज की पढ़ाई खत्म करके हमारे पास ही रहने लगी थी। नेहा उम्र में मुझसे काफी छोटी थी – बस 21 साल की, गोरी-चिट्टी, लंबे बाल, पतली कमर और वो कातिलाना अदाएं जो देखते ही दिल को छू जाती थीं। वो मुझे हमेशा जीजू कहकर चिढ़ाती, लेकिन उसकी नजरों में कुछ और ही चलता था। प्रिया जब ऑफिस जाती, तो घर में सिर्फ मैं और नेहा रह जाते। शुरू में तो सब नॉर्मल था, लेकिन धीरे-धीरे वो हंसी-मजाक बढ़ता गया।

एक दिन प्रिया को अपने ऑफिस के काम से दिल्ली जाना पड़ा, तीन दिन के लिए। घर में सिर्फ मैं और नेहा। सुबह प्रिया गई, तो नेहा किचन में नाश्ता बना रही थी। वो शॉर्ट्स और टाइट टॉप पहने थी, जिससे उसकी कर्वी बॉडी साफ दिख रही थी। मैं सोफे पर बैठा न्यूज देख रहा था, लेकिन नजर बार-बार उसपर जा रही थी। वो मुड़कर बोली, “जीजू, चाय पी लोगे? या कुछ और चाहिए?” उसकी आवाज में शरारत थी। मैंने हंसकर कहा, “चाय ही काफी है, लेकिन तुम्हारी मुस्कान के साथ।” वो शर्मा गई, लेकिन आंखें नीची करके मुस्कुराई।

दोपहर में बारिश शुरू हो गई। बिजली चली गई, घर अंधेरा हो गया। हम दोनों हॉल में बैठे बातें कर रहे थे। नेहा बोली, “जीजू, दीदी नहीं है तो बोर हो रहा है ना?” मैंने कहा, “बोर तो नहीं, लेकिन तुम्हारे साथ टाइम अच्छा लग रहा है।” वो मेरे पास सरककर बैठ गई। उसकी खुशबू मेरे नाक में घुस रही थी – वो हल्की सी परफ्यूम की स्मेल। हम पुरानी बातें करने लगे, कॉलेज की, शादी की। अचानक वो बोली, “जीजू, आप दीदी को इतना प्यार क्यों करते हो? वो तो इतनी स्ट्रिक्ट है।” मैं हंसा, “प्यार तो करता हूं, लेकिन तुम जैसी स्वीट कोई नहीं।” वो मेरी तरफ देखकर बोली, “सच में? मुझे स्वीट लगती हूं?” उसकी आंखों में चमक थी। मैंने उसके गाल पर हाथ फेरा, “बहुत स्वीट।”

वो चुप हो गई, लेकिन मेरे हाथ को नहीं हटाया। उल्टा, अपना सिर मेरे कंधे पर टिका दिया। बारिश की आवाज बाहर तेज हो रही थी, और अंदर हमारा दिल धड़क रहा था। मैंने धीरे से उसके बालों में उंगलियां फेरनी शुरू की। वो सांसें ले रही थी, गहरी-गहरी। फिर वो उठी, मेरे सामने खड़ी हो गई। “जीजू, मुझे गर्मी लग रही है।” कहकर उसने अपना टॉप ऊपर किया, ब्रा के ऊपर से ही उसकी छातियां साफ दिख रही थीं – गोल, मुलायम, टाइट। मैं कुछ बोल नहीं पाया। वो मुस्कुराई और मेरे गोद में बैठ गई। उसके होंठ मेरे इतने करीब थे कि मैं महसूस कर रहा था उसकी गर्म सांसें।

मैंने धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो पहले तो सहम गई, लेकिन फिर जवाब देने लगी। किस लंबा था, गीला, मीठा। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। मेरे हाथ उसकी कमर पर थे, फिर धीरे-धीरे ऊपर सरक गए। उसकी ब्रा के नीचे हाथ डाला, तो वो मुलायम छातियां हाथ में आ गईं। वो सिसकारी ली, “जीजू… आह…” लेकिन रुकने को नहीं बोली। उल्टा, मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी। हम दोनों एक-दूसरे को छू रहे थे, जैसे सालों से इंतजार कर रहे हों। वो मेरे ऊपर चढ़ गई, अपनी छातियां मेरे मुंह के पास लाई। मैंने उन्हें चूमा, चाटा, निप्पल्स को मुंह में लिया। वो कराह रही थी, “जीजू… कितना अच्छा लग रहा है…”

फिर हम बेडरूम में चले गए। मैंने उसे बेड पर लिटाया, उसके शॉर्ट्स उतार दिए। उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने उसे चूमा, नीचे से ऊपर तक। वो मेरे बाल पकड़कर दबा रही थी। “जीजू, मुझे छूओ ना… वहां…” मैंने उसकी पैंटी साइड की, उंगलियां उसकी चूत पर फेरी। वो कितनी टाइट थी, गर्म, रस से भरी। उंगलियां अंदर डालीं तो वो सिकुड़ गई, लेकिन खुशी से। वो बोली, “धीरे… लेकिन मत रुको।” मैं धीरे-धीरे उंगलियां अंदर-बाहर कर रहा था, और वो अपनी कमर उछाल रही थी। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि दो उंगलियां भी मुश्किल से जा रही थीं, लेकिन वो मजा ले रही थी, आंखें बंद करके।

मैंने अपना पैंट उतारा। मेरा लंड पूरा खड़ा था, सख्त। वो उसे देखकर मुस्कुराई, “जीजू, ये तो बहुत बड़ा है…” उसने हाथ में लिया, सहलाने लगी। फिर मुंह में लिया। उसकी गर्म जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी, ऊपर-नीचे। मैं पागल हो रहा था। कुछ देर बाद मैंने उसे रोका, “नेहा, अब नहीं रुक सकता।” वो लेट गई, पैर फैला दिए। मैं उसके ऊपर आया, लंड को उसकी चूत पर रगड़ा। वो गीली थी, तैयार। धीरे से अंदर डाला। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि पहले सिर्फ टॉप गया, लेकिन वो दर्द नहीं, मजा ले रही थी। “जीजू… और अंदर… पूरा…” मैंने धीरे-धीरे धक्का दिया, पूरा अंदर चला गया। वो चीखी नहीं, बस आह भरी, “ओह… कितना अच्छा… भर गया…”

अब हम रिदम में थे। मैं धीरे-धीरे पेल रहा था, और वो नीचे से कमर हिला रही थी। उसकी टाइट चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी, जैसे छोड़ना ही नहीं चाहती। हर धक्के में वो कराह रही थी, “जीजू… तेज… और तेज…” मैं स्पीड बढ़ा दी। उसके मुलायम बदन को छूते हुए, छातियां दबाते हुए। वो मेरे कंधों पर नाखून गड़ा रही थी, लेकिन प्यार से। हमारा पसीना मिल रहा था, सांसें तेज। उसकी चूत से आवाजें आ रही थीं – चप-चप। वो बोली, “जीजू, मैं झड़ने वाली हूं…” मैंने और जोर लगाया। वो कांप गई, चूत सिकुड़कर मेरे लंड को दबाने लगी। वो झड़ गई, पूरा बदन कांप रहा था।

मैं भी नहीं रुका। कुछ देर और पेला, फिर उसके अंदर ही झड़ गया। गर्म रस उसकी टाइट चूत में भर दिया। हम दोनों हांफ रहे थे, एक-दूसरे से चिपके। वो मेरे सीने पर सिर रखकर बोली, “जीजू, ये सबसे बेस्ट फीलिंग थी। आप कितने अच्छे हो…” मैंने उसे किस किया, “तुम्हारी टाइट चूत का मजा ही अलग है, नेहा।”

उसके बाद हम नहाए साथ में। शावर के नीचे फिर किस किया, छुआ। लेकिन अब आराम से। शाम को खाना बनाया, साथ खाया। रात को फिर बेड पर। इस बार वो ऊपर आई। मेरे लंड पर बैठ गई, धीरे-धीरे अंदर लिया। उसकी टाइट चूत फिर से मुझे पागल कर रही थी। वो ऊपर-नीचे हो रही थी, बाल बिखरे हुए, मुंह से सिसकारियां। मैं नीचे से उसके कूल्हों को पकड़कर मदद कर रहा था। वो बोली, “जीजू, मुझे आपका लंड बहुत पसंद है… हमेशा चाहिए।” मैंने कहा, “जब चाहे ले लो, बेबी।”

तीन दिन ऐसे ही बीते। हर वक्त प्यार, सेक्स, मजा। प्रिया वापस आई तो सब नॉर्मल हो गया, लेकिन नेहा की नजरें अब भी शरारत भरी थीं। जब मौका मिलता, चुपके से छू लेती, किस कर लेती। वो टाइट चूत का मजा मैं कभी नहीं भूल सकता। नेहा अब भी हमारे पास रहती है, और जब दीदी नहीं होती… तो हमारा सीक्रेट गेम चलता रहता है।

साली चंचल की कुंवारी चूत की सील तोड़ी और बच्चा दिया

मैं संजू एक बार फिर आप लोगों के सामने अपनी आपबीती लेकर आ गया हूँ। सबसे पहले सभी चूत वालियों और लंड वालों को मेरा नमस्कार। मेरे बारे में आप जानते ही हैं – मैं 38 साल का शादीशुदा मर्द हूँ और अब तक करीब 50 से ज्यादा चूतें चोद चुका हूँ (रेगुलर वाली गिनती अलग है)। ये वाकया बिल्कुल ताज़ा है और मैं चाहता हूँ कि इसे पढ़कर आप भी अपनी चूत और लंड का पानी रगड़-रगड़ कर निकालें।

पिछले महीने ऑफिस के काम से मैं दिल्ली गया था। वहाँ मेरे रिश्ते के बड़े भैया रहते हैं, मैं उनके घर ही रुका। काम तो दो-तीन दिन का था, लेकिन मेरी रिटर्न फ्लाइट दो दिन बाद की थी। काम एक ही दिन में निपट गया, तो अगले दिन मैं फ्री था। भैया-भाभी दोनों जॉब पर चले गए थे। मैं अपने रूम में कुछ पढ़ रहा था कि अचानक डोरबेल बजी। सोचा कोई कोरियर होगा। दरवाज़ा खोला तो सामने भाभी की सबसे छोटी बहन चंचल खड़ी थी।

मुझे देखकर वो चौंकी, फिर पहचान गई। मैंने बताया कि दीदी और जीजा घर पर नहीं हैं, शाम को आएँगे। उसे अंदर आने को कहा, सोफे पर बिठाया, पानी-चाय दी और खुद उसके सामने बैठ गया। उसका चेहरा उदास था, आँखें नम। चंचल करीब 27 साल की है – भाभी से कहीं ज्यादा सुंदर, बॉडी एकदम मस्त। 34-28-34 का फिगर, 5’3″ हाइट, पेट बिल्कुल फ्लैट, चूतड़ गोल-गोल उभरे हुए, चुचियाँ सुदौल और कसी हुईं, कमर पतली। कुल मिलाकर स्वर्ग की अप्सरा लगती थी। दो साल पहले उसकी शादी हुई थी।

मैंने पूछा, “क्या हुआ चंचल? इतनी उदास क्यों लग रही हो?” पहले तो वो चुप रही, फिर बोली, “दीदी कब आएँगी?” मैंने कहा, “शाम छह बजे।” फिर पूछा, “कोई ज़रूरी काम था?” वो कुछ देर सोचती रही, फिर खुल गई। उसका पति तलाक देना चाहता है। सास ने बच्चा न होने की वजह से झगड़ा करके उसे मायके भेज दिया और तलाक का नोटिस भिजवा दिया। असल में कमी उसके पति में है – वो कर ही नहीं पाता। लेकिन घरवाले मानने को तैयार नहीं। वो हर वक्त तलाक की टेंशन और अंदर की सेक्स की आग से जल रही थी।

मैंने धीरे से पूछा, “तेरी असली प्रॉब्लम क्या है?” वो बोली, “बच्चा नहीं हो रहा, इसलिए तलाक दे रहे हैं।” मैंने कहा, “डॉक्टर को दिखाओ ना।” वो शर्मा कर बोली, “मुझमें कोई कमी नहीं है संजू जी। बच्चा तो उंगली से थोड़े न होगा?” मैं समझ गया। फिर बोली, “वो चाहते हैं तो होता ही नहीं।” मैंने कहा, “तो तलाक लेकर दूसरी शादी कर लो।” वो बोली, “पापा की औकात नहीं दूसरी शादी कराने की, और मुझे उनसे बदला भी लेना है। जानबूझकर एक कुंवारी लड़की की ज़िंदगी बर्बाद की है। लेकिन बिना बच्चे के वो मुझे वापस नहीं लेंगे।”

ये सुनकर वो रोने लगी। बोली, “मेरी तकदीर ही खराब है संजू जी, कोई रास्ता नहीं दिख रहा। आखिर में ज़हर खाकर जान दे दूँगी।” मैं उठा, उसके पास गया। उसके सिर पर हाथ फेरा, गालों से आँसू पोंछे। उफ्फ… कितने मुलायम गाल थे। मैं यूँ ही सहलाते-सहलाते उसे अपनी तरफ खींच लिया। फिर खड़ा किया और बोला, “परेशान मत हो, कोई न कोई रास्ता निकल आएगा।”

उसे दिलासा देने के लिए मैंने उसे बाँहों में ले लिया। वो भी भावुक होकर और ज़ोर से लिपट गई। मेरे हाथ उसकी पीठ पर, फिर चूतड़ों पर फिसलने लगे। नरम-नरम उभरे हुए चूतड़… और उसकी सख्त चुचियाँ मेरे सीने में दबने लगीं। मैंने उसके माथे पर किस किया। वो और कसकर लिपट गई और कान में बोली, “संजू जी, एक बात कहूँ?” मैंने कहा, “बोलो।” वो बोली, “आज मुझे सच में आपकी ज़रूरत है। मेरी मुसीबत का एक ही रास्ता दिख रहा है – आप मुझे बच्चा दे दो।”

मैं चौंका, “ये क्या कह रही हो? तुम मेरे भाई की साली लगती हो।” वो बोली, “हिम्मत करके इतनी बड़ी बात आपसे कह दी। जीजा जी तो दीदी को भी माँ नहीं बना पाए। तुम्हारे दो बच्चे हैं… बस एक मुझे भी दे दो। अगर तुमने मना किया तो मैं किसी बाहर वाले से कर लूँगी, बदनामी होगी। मेरी ज़िंदगी का सवाल है संजू जी।”

वो फिर रोने लगी। मैंने उसे चुप कराने के लिए ज़ोर से लिपटा लिया, पीठ सहलाई, माथा चूमा। और यहीं से सब शुरू हो गया। वो पागलों की तरह मुझे किस करने लगी – मुँह पर, गालों पर। उसके लाल, रसीले होंठ देखकर मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए। पहले नरम-नरम किस, फिर चूसने लगा। वो आँखें बंद कर लीं। लंबा किस चला, दोनों की साँसें तेज़ हो गईं। जब होंठ छोड़े तो उसके होंठ और लाल हो गए थे। वो कसकर लिपटकर मेरे सीने में सिर छुपा लिया।

गरम किस से मेरा लंड खड़ा हो गया। वो मेरी पीठ सहलाते हुए दूसरा हाथ आगे लाई और लंड पर रख दिया। लुंगी के अंदर हाथ डालकर लंड बाहर निकाला। मेरा मोटा, तगड़ा लंड देखकर उसकी आँखों में चमक आ गई। “ओह माँ… इतना लंबा… इतना मोटा… कितना सख्त है!” उसने दोनों हाथों से पकड़ा और अचानक झुककर लंड चूम लिया। लंड फनफना उठा। वो कान में बोली, “संजू जी, अब मत तड़पाओ… जल्दी आ जाओ, बर्दाश्त नहीं हो रहा।”

मैं भी पूरा गरम था। उसे भैया-भाभी के बेडरूम में ले गया। पहले साड़ी उतारी, फिर ब्लाउज़। ब्रा खोलते ही वो शर्मा गई, चुचियों पर हाथ रख लिया। मैंने धीरे से हाथ हटाया, चुचियों को चूमा, हथेली से दबाया। वो सिसकारी, “इश्ह…” मैंने निप्पल जीभ से चाटा, फिर मुँह में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। वाह… क्या मस्त चुचियाँ थीं! लगता था उसके निकम्मे पति ने कभी इनका प्यार नहीं किया। थोड़ी देर चूसते ही उसकी शर्म भाग गई। वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी, “संजू जी जल्दी कीजिए… आज लग रहा है मैं औरत बन जाऊँगी… उफ्फ आपने मेरे अंदर आग लगा दी है… मैं मर जाऊँगी!”

उसकी आँखें मस्ती से लाल हो गई थीं। उसने मेरा हाथ पकड़कर पेटीकोट के ऊपर से चूत पर रख दिया। मैंने नाड़ा खोला, पेटीकोट नीचे खींचा। वो शर्म से पलट गई। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। मैंने उसे आगे झुकाया। उसकी फूली हुई, गदराई गोरी चूत पीछे की तरफ उभर आई। चूत के गुलाबी होंठों से रस की बूँदें टपक रही थीं। एक भी बाल नहीं – एकदम साफ, गोरी-गोरी चूत। मैंने चूत पर किस किया तो वो सीधी हो गई।

मैं घुटनों के बल बैठ गया। टाँगें फैलाईं और चूत का दाना चूसने लगा। दाना धीरे-धीरे सख्त होकर बाहर निकला। मैंने होंठों के बीच लिया, चूसते हुए बाहर खींचा और छोड़ा – कई बार। उसकी चूत से रस का झरना बहने लगा। वो चूतड़ मेरे मुँह पर दबाकर कराह रही थी, “आह्ह… ओह्ह… संजू जी… ये क्या कर दिया… पहली बार मेरी चूत की प्यास महसूस हो रही है… मैं मर जाऊँगी इस आनंद से… और… और…”

मैंने उसके चूतड़ दोनों हाथों से पकड़े और रस भरी चूत को पागलों की तरह चाटने लगा। उसकी चूत की प्यारी-प्यारी खुशबू मेरे दिमाग में चढ़ गई। मैं दीवाना होकर चूत और आसपास के हिस्से को चूमने-चाटने लगा। बीच-बीच में जीभ निकालकर रानों को भी चाटता। वो मस्ती से भरकर बोली, “हाय राजा… जीभ से चाटो ना… अब मत तड़पाओ… मेरी चूत को चाटो… जीभ अंदर डाल दो… जीभ से चोदो!”

उसकी नशीली चूत की खुशबू ने मुझे पूरी तरह पागल बन दिया। मैंने उसे बेड पर बिठाया, खुद ज़मीन पर। उसकी जाँघें फैलाईं, कंधों पर रखीं और जीभ से चूत के होंठ चाटने लगा। वो मस्ती से बड़बड़ाने लगी और चूतड़ आगे खिसकाकर चूत मेरे मुँह से सटा दी। उसके चूतड़ हवा में लटक रहे थे। मैंने जीभ पूरी की पूरी चूत में ठेल दी और अंदर की लाल दीवारों को सहलाने लगा। वो तिलमिला उठी, चूतड़ उचकाकर मेरी जीभ पर चूत दबाने लगी।

“हाय संजू जी… क्या मज़ा आ रहा है… अब जीभ अंदर-बाहर करो… चोदो राजा… जीभ से चोदो मुझे… तुम ही मेरे असली सैयां हो… पहले क्यों नहीं मिले… अब सारी कसर निकालूँगी… दो साल से तड़प रही हूँ… चोदो मेरी चूत को!”

मुझे भी जोश चढ़ आया। मैंने तेज़ी से जीभ अंदर-बाहर करने लगा। वो नीचे से कंबर उचकाकर मुझे चोद रही थी। मैंने जीभ कड़ी करके स्थिर कर ली और सिर आगे-पीछे करके चोदने लगा। उसका मज़ा दोगुना हो गया। वो ज़ोर-ज़ोर से चूतड़ उचकाते हुए बोली, “और जोर से संजू जी… आज मैं तुम्हारी हो गई… ज़िंदगी भर तुमसे चुदवाऊँगी… आज मुझे गर्भवती कर दो!”

वो झड़ने वाली थी। ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाते हुए चूत मेरे चेहरे पर रगड़ने लगी। मैं पूरी तेज़ी से जीभ लपलपाकर चाट रहा था। जब जीभ उसकी बच्चेदानी से टकराई तो उसका बाँध टूट गया। उसने जाँघों में मुझे जकड़ लिया, चूत मेरे मुँह से चिपका दी। चूत का पानी पिचकारी मारकर निकला – दो-तीन बार – मेरे चेहरे पर बहने लगा। मैंने चूत के दोनों होंठ मुँह में दबाकर उसका अमृत पीने लगा। ये उसकी ज़िंदगी का पहला ऑर्गेज़्म था।

चूत चाटने से वो पूरी पागल हो गई। मेरे सिर के बाल पकड़कर मुझे ऊपर खींच लिया। अब मैंने उसे बेड पर लिटाया – चूतड़ बाहर की तरफ, पैर लटकते हुए। उसके पैर अपनी कमर पर उठाए और लंड को चूत के सूराख पर रगड़ा। चूत एकदम कुंवारी लग रही थी – गुलाबी होंठ चिपके हुए, छेद टाइट। सुपारा चूत पर रखा तो उसका बदन काँपने लगा। बोली, “जल्दी घुसाओ संजू जी… अब रहा नहीं जा रहा… अंदर चींटियाँ रेंग रही हैं।”

मैंने कहा, “तेरी चूत बहुत टाइट है, थोड़ा दर्द होगा… सहन करोगी?” वो बोली, “डाल दो… दर्द की परवाह मत करो… आज पहली बार इतनी चुदास महसूस कर रही हूँ।” मैं खुश हो गया। चूत पहले से गीली थी, फिर भी थूक लगाकर लंड पर मला और धक्का मारा। सुपारा अंदर गया। वो चीखी, “आह्ह… धीरे… कितना मोटा है… चीर गई…”

मैं उसके ऊपर लेट गया, होंठ चूसने लगा। एक मिनट बाद तेज़ धक्का मारा – आधा से ज्यादा लंड अंदर। वो ज़ोर से चीखी, “हाय मर गई… बहुत दर्द… निकालो!” लेकिन मैंने पैरों में कैंची डाल रखी थी। फिर किस करके पूछा, “थोड़ा और है बस।” वो बोली, “पहली बार है ना इसलिए धीरे…” मुझे सरप्राइज़ हुआ। वो बोली, “संजू जी, मैं आज तक कुंवारी हूँ। उनका कभी खड़ा होता ही नहीं था। थोड़ा-बहुत हुआ भी तो बाहर ही झड़ जाता था।”

मेरा दिल बल्लियों उछल पड़ा – आज एक शादीशुदा लेकिन कुंवारी चूत की सील टूटने वाली है। लंड अंदर नहीं जा रहा था – सील मोटी हो गई थी। मैंने किस और बातों में उलझाकर मौका देखा और पूरी ताकत से आखिरी धक्का मारा। लंड उसकी कुंवारी चूत को फाड़ता हुआ पूरा अंदर, बच्चेदानी तक पहुँच गया। वो तड़पी, आँखें बाहर, ज़ोर की चीख – “आईईईई… माँ… मर गईईई!” मुझे धकेलने की कोशिश की लेकिन मैंने कसकर पकड़ रखा था।

वो दर्द से रोने लगी। मैंने चेहरा चूमा, चुचियाँ चूसीं, चूतड़ सहलाए। पाँच मिनट बाद दर्द कम हुआ। मैंने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। धीरे-धीरे उसे भी मज़ा आने लगा। बोली, “थोड़ा जोर से…” मैंने रफ्तार बढ़ाई और आखिर में पूरा हमाच-हमाच कर चोदने लगा। वो टाँगें ऊपर करके चुदवाने लगी, पागलों की तरह बोली, “हाय संजू जी… आज पूरा दिन कसकर चोद दो… मैं आपकी हो गई… आज ही मेरे पेट में अपना बच्चा डाल दो… और जोर से…”

वो झटके से लिपट गई और चीखी, “आह्ह संजू जी… मैं मर गई… मेरी चूत से पेशाब निकलेगा… निकाल लो…” मैंने कहा, “निकलने दो” और कसके धक्के मारे। उसका गरम रस लंड पर लगा। वो बुरी तरह झड़ रही थी, मुझे चिपककर चूतड़ झटके दे रही थी। ज़िंदगी में पहली बार लंड से चुदकर झड़ी।

मैंने रफ्तार थोड़ी धीमी की ताकि देर तक टिकूँ। उसे चूमा, चुचियाँ चूसीं और फिर शुरू। धीरे से पूछा, “चंचल, मुझे से चुदवाने में बुरा तो नहीं लगा ना?” वो मुझे और कसकर जकड़कर नीचे से चूतड़ उचकाते हुए बोली, “नहीं संजू जी… मेरी जवानी तुम्हारे नाम हो गई। जब चाहो, जहाँ चाहो डुबकी लगा लो। चुदाई में इतना मज़ा है, मुझे पता ही नहीं था। आज तुमने मुझे औरत बनाया… मोटे लंड से मेरी चूत का दरवाज़ा खोला… और मुझे बच्चा भी दोगे।”

ये सुनकर मैं और जोश में आ गया। कमर हिलाकर चोदने लगा। वो भी हर शॉट का जवाब कंबर उचकाकर दे रही थी। कमरे में फिर फच-फच की मधुर आवाज़ गूँजने लगी। वो टाँगें ऊपर करके मेरी कमर पर कस लीं और ज़ोर-ज़ोर से चूतड़ उचकाकर चुदवाने लगी। मैंने स्पीड बढ़ाई। उसकी चूत ने फिर पानी छोड़ा, फच-फच और तेज़। वो हाँफते हुए बोली, “मैं तो गई… तुम्हारी रानी गई… उई माँ क्या ज़ालिम लौड़ा है… चोद डाला मुझे… मैं गईईई!”

मैं भी नहीं रुका। उसकी चूत इतनी गरम थी कि 4-5 तेज़ धक्कों बाद मैंने आखिरी धक्का मारा – सुपारा बच्चेदानी को धक्का देता हुआ और लंड ने पिचकारी मारते हुए ढेर सारा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया। मैं भी झड़ गया और चूमते हुए लंड अंदर तक डाले उसके ऊपर लेट गया।

वो कसकर लिपट गई और कान में बोली, “अभी बाहर मत निकालना… बच्चा होने के लिए पूरा पानी बच्चेदानी में जाना ज़रूरी है।” मैं लंड अंदर डाले ही लेटा रहा। फिर हाथ नीचे ले जाकर चूत टटोली – हाथ पर खून लगा। वो बोली, “अब विश्वास हो गया ना? मैंने आपको बिना चुदी चूत दी है।” मैंने कहा, “हाँ चंचल, आज से तुम मेरी जान हो, मेरी रानी। तुमने अपना कुंवारा शरीर मुझे सौंपा।”

15-20 मिनट बाद उठा। उसकी चूत ने सारा पानी सोख लिया था। थोड़ा बाहर आया तो खून से लाल। मैंने कहा, “अजीब बात है – तुम्हारी दीदी यानी मेरी भाभी की सील भी इसी बेड पर मैंने तोड़ी थी, शादी के चार दिन बाद। आज तुम्हारी भी। दोनों बहनों को एक ही बेड पर औरत बनाया।” वो हँसकर बोली, “बहुत अच्छा हुआ। इसलिए दीदी शादी के नौ महीने बाद माँ बनीं… अब नौ महीने बाद मैं भी बनूँगी।”

उस दिन मैंने उसे शाम चार बजे तक पाँच बार चोदा। हम दोनों नंगे ही लिपटे रहे। बाद में तीन साल तक लगातार चोदकर दो बच्चे पैदा किए। पहली बार में ही वो प्रेग्नेंट हो गई। किसी बहाने पति को बुलाया, वो कर तो कुछ नहीं पाया लेकिन बच्चे की खबर पर खुश होकर ले गया। उसे अपनी कमज़ोरी का पता था, इसलिए चुप रहा। अब वो ससुराल में खुश है, इलाज भी करा लिया। उसे शक तो है कि दोनों बच्चे मेरे हैं – शक्ल मेरी जैसी है।

अब वो मुझे अपने यहाँ नहीं आने देता, चंचल को भी नहीं भेजता। लेकिन चंचल मौका निकालकर मुझसे मिलती है। महीने में 2-3 दिन मेरे साथ रहती है और मैं उसे 4-5 बार चोद डालता हूँ।

नौकरी बचाने के चक्कर में मैडम के साथ पहली बार चुदाई

मेरा नाम अहमद है। मैं लाहौर से सटे एक छोटे शहर में एक FMCG कंपनी में सेल्स एक्जीक्यूटिव था। कंपनी का नाम ‘फ्रेशलाइफ प्रोडक्ट्स’ था – डिटर्जेंट, शैंपू, साबुन जैसी चीजें सप्लाई करती थी। हमारा काम था छोटे-छोटे दुकानदारों को डीलर बनाना। हर नए डीलर से 1000 रुपये सिक्योरिटी ली जाती थी – रिफंडेबल, लेकिन कंपनी के अकाउंट में जमा करवानी पड़ती थी। रसीद मैं खुद बनाता था, और पैसे कैश में लेता था। ज्यादातर दुकानदार 500-1000 के नोट देते थे। कभी-कभी 2000 का नोट भी आ जाता, लेकिन ज्यादातर छोटे नोट।

मैं तीन साल से वहाँ था। सैलरी 25,000 रुपये। घर में माँ-बाप, छोटा भाई। पापा रिटायर्ड टीचर थे, माँ घर संभालती थीं। जिंदगी चल रही थी, लेकिन हमेशा पैसों की किल्लत। एक दिन शाम को, करीब 6 बजे, मैंने एक पुराने दुकानदार चाचा गुलाम हुसैन से डील फाइनल की। उन्होंने 1000 रुपये का नया नोट दिया। मैंने रसीद काटी, उन्हें स्टॉक का ऑर्डर दिया। घर लौटते वक्त मन में सोचा – कल सुबह बैंक जाकर जमा करवा दूँगा।

लेकिन उसी रात 11 बजे माँ की तबीयत बिगड़ गई। सीने में तेज दर्द, साँस फूल रही थी। पापा घबरा गए। मैंने तुरंत नजदीकी क्लिनिक पर फोन किया। डॉक्टर ने कहा – एंजाइना का अटैक हो सकता है, इंजेक्शन लगाना पड़ेगा। दवाई की दुकान पर गया। कुल 950 रुपये लगे – इंजेक्शन, टैबलेट्स, कुछ और। मेरे पास सिर्फ 400-500 रुपये थे। बाकी वही 1000 का नोट निकाला और खर्च कर दिया। मन में आया – कल किसी से उधार लेकर जमा करवा लूँगा। लेकिन अगले दिन सुबह माँ की हालत ठीक हुई, लेकिन मैं ऑफिस जाने के चक्कर में भूल गया।

तीन दिन बीत गए। ऑफिस में सब नॉर्मल था। लेकिन चौथे दिन दोपहर करीब 3 बजे पीओन अब्दुल्लाह आया। उसका चेहरा पीला पड़ गया था।
“अहमद भाई, मैडम आपको बुला रही हैं। अभी। केबिन में। बहुत गुस्से में लग रही हैं।”

रुबिना मैडम। ब्रांच हेड। उम्र 39, लेकिन दिखती 30-32 की। लंबी, गोरी, फिगर परफेक्ट। हमेशा सूट या साड़ी में, मेकअप क्रिस्प, बात में अथॉरिटी। ऑफिस में सब उन्हें ‘मैडम’ कहते थे। सलीम साहब उनके पति थे – कंपनी के डायरेक्टर, ज्यादातर लाहौर ऑफिस में रहते थे। रुबिना मैडम यहाँ की बॉस थीं।

मैं केबिन में घुसा। वो खिड़की के पास खड़ी थीं। बाहर हल्की बारिश हो रही थी। शीशे पर बूँदें सरक रही थीं। उनकी सफेद सिल्क ब्लाउज थोड़ी भीगी लग रही थी – शायद कार से उतरते वक्त बारिश लगी हो। वो मुड़ीं नहीं। बस बोलीं –
“रशीद को पता चल गया है। वो कह रहा है तुमने 1000 रुपये लिए, लेकिन जमा नहीं करवाए। वो तुम्हें आज ही निकालना चाहता है। मैंने रोका है। कहा है सलीम साहब कल शाम लाहौर से आ रहे हैं, तब फैसला होगा।”

मेरा दिल धड़क गया। पैर काँपने लगे। रशीद अकाउंट्स वाला था – सख्त, झगड़ालू। वो मुझे पहले से पसंद नहीं करता था।
मैं कुछ बोल नहीं पाया। बस सिर झुकाए खड़ा रहा।
फिर वो पलटीं। उनकी आँखें गहरी, लेकिन उसमें गुस्सा नहीं – एक अजीब सी चमक। जैसे कोई प्लान हो।
“आज शाम 8 बजे हमारे डिफेंस वाले बंगले पर आ जाना। एड्रेस मैसेज कर दूँगी। अकेले। कोई बहाना मत बनाना।”

मैंने बस ‘जी मैडम’ कहा और बाहर निकल आया। पूरा दिन टेंशन में रहा। घर जाकर माँ से बात की, लेकिन कुछ बताया नहीं। रात 7:30 बजे मैडम का मैसेज आया – “डिफेंस फेज 5, प्लॉट 112। गेट पर नाम बोल देना।”

शाम 8 बजे मैं वहाँ पहुँचा। बारिश थम चुकी थी। हवा में ठंडक और मिट्टी की खुशबू। गेट ऑटोमैटिक खुला। लॉन में सोलर लाइट्स जल रही थीं। मुख्य दरवाजा खुला था। रुबिना मैडम खड़ी थीं।

टाइट मिडनाइट ब्लू जीन्स, जो उनकी पतली कमर और गोल कूल्हों को बिल्कुल हाईलाइट कर रही थीं। ऊपर ऑफ-शोल्डर ब्लैक क्रॉप टॉप, गहरा V-नेक, जिसमें उनकी गोरी गर्दन, कॉलरबोन और थोड़ा-सा क्लीवेज चमक रहा था। बाल खुले, हल्की कर्ली लहरों में। होंठों पर डार्क बेरी लिपस्टिक। हाथ में क्रिस्टल ग्लास में व्हिस्की। वो हल्के से झूम रही थीं। आँखें थोड़ी लाल, नशा साफ झलक रहा था।

“आ गए आखिरकार, अहमद…” मुस्कान के साथ बोलीं। आवाज मीठी, लेकिन गहरी। “अंदर आओ। डरो मत।”

मैं अंदर गया। लिविंग रूम लग्जरी था – मार्बल फ्लोर, बड़े सोफे, दीवार पर एब्सट्रैक्ट पेंटिंग्स। लेकिन वो सीधे बेडरूम की तरफ ले गईं। कमरा बड़ा, डिम येलो लाइट्स। हवा में वेनिला कैंडल्स की खुशबू और उनकी परफ्यूम – क्रिएड अवेंटस जैसी महक। किंग साइज बेड पर डार्क ग्रे सिल्क शीट्स। साइड टेबल पर जॉनी वॉकर ब्लू लेबल की बॉटल, आइस बकेट, दो ग्लास – एक में आधा भरा।

वो बेड के किनारे बैठ गईं। ग्लास उठाया, एक लंबा सिप लिया। फिर मेरी तरफ देखा।
“बैठो ना। इतना तनाव क्यों?”

मैं पास बैठा। उनकी उँगलियाँ मेरे हाथ पर रखीं – गर्म, नरम। नाखून लंबे, रेड पॉलिश।
“ये क्या किया तुमने? 1000 रुपये क्यों नहीं जमा करवाए?” आवाज में डाँट थी, लेकिन उसमें एक कोमलता भी।

मैंने सब बता दिया – माँ की इमरजेंसी, दवाई, इरादा लौटाने का। आँखें नम हो गईं।
वो चुप रहीं। फिर उठीं, बेडसाइड अलमारी से पर्स निकाला। दो 1000 के नोट।
“ये लो। एक जमा करवा दो। दूसरा रख लो। इमरजेंसी के लिए। और आगे कभी पैसों की जरूरत हो… मुझसे कह देना। मैं तुम्हें बहुत पसंद करती हूँ, अहमद। जो मुझे अच्छा लगता है, उसे मैं जाने नहीं देती।”

मैं हैरान। “मैडम… ये… मैं…”

उन्होंने मेरे गले में बाहें डाल दीं। उनका बदन मेरे बदन से सटा। साँसें गर्म, व्हिस्की की महक।
“मैडम छोड़ो। आज से रुबिना। या रूबी। हम अब दोस्त हैं ना?”

और फिर उनके होंठ मेरे होंठों पर। हल्का किस। मैं फ्रीज हो गया। लेकिन उनका स्पर्श जादुई था। मैंने भी उन्हें कस लिया। किस गहरी हुई। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। नशे ने उन्हें और बोल्ड बना दिया।

उन्होंने मुझे बेड पर धकेला। ऊपर झुककर मेरी गर्दन, कान चूमने लगीं। मैंने उनकी कमर पकड़ी।
“रूबी… कोई देख लेगा तो?”

“कोई नहीं है। सलीम लाहौर में मीटिंग में। बेटा लंदन में यूनिवर्सिटी। बेटी की शादी हो चुकी, वो दुबई में सेटल। आज सिर्फ तुम और मैं।” वो हँसीं। फिर मेरी शर्ट के बटन खोलने लगीं।

उनकी टॉप उतरी। काली लेस ब्रा में भरे हुए गोरे स्तन। ब्रा उतारी। मेरे हाथ पकड़कर अपने स्तनों पर रखे।
“छुओ… आज ये सिर्फ तुम्हारे। दबाओ…”

मैंने धीरे दबाया। मुलायम, गर्म। निप्पल्स सख्त। मैंने एक को मुँह में लिया। चूसा। वो सिसकारी – “आह्ह्ह… हाँ… ऐसे ही… ज़ोर से… उफ्फ़… मज़ा आ रहा है हनी…”

उन्होंने मेरी पैंट उतारी। मेरा लिंग हाथ में लिया। धीरे मसलने लगीं। “वाह… कितना सख्त… गरम… आज़मा लो रूबी को… चीख मत पड़ जाना।”

उनकी जीन्स उतरी। ब्लैक लेस पैंटी गीली। पैंटी उतारी। उनका बदन – चिकना, परफेक्ट कर्व्स। वो लेट गईं, टांगें फैलाईं।
“आओ… दिखाओ कितना दम है।”

मैं उनके बीच। उनका गीला स्पर्श। वो फुसफुसाईं – “अगर मुझे हरा दिया तो एक्स्ट्रा 2000 इनाम। तैयार?”

एक गहरा धक्का। वो “आह्ह्ह…” बोलीं। मैंने रिदम बनाया। स्पीड बढ़ाई। उनकी सिसकारियाँ – “हाँ… तेज़… गहरा… चोदो मुझे… ज़ोर से…”

टांगें मेरी कमर पर लिपटीं। पसीना, कराहें। करीब 50-55 मिनट तक। वो कई बार चरम पर। आखिर वो चीखीं – “बस… हार गई… ड्रॉ कर लो…”

मैंने तेज किया। वो काँप उठीं। मैं झड़ गया। हम थककर लेटे।

बाद में वो मुस्कुराईं। 2000 दिए। “इनाम। और कभी याद आए… मैसेज कर देना।”

मैंने कहा, “रूबी जानी… हमेशा हाजिर।”

उसके बाद हमारा रिश्ता चलता रहा। कभी ऑफिस के बाद, कभी वीकेंड पर। वो मुझे कभी-कभी एक्स्ट्रा काम देतीं, बोनस भी। लेकिन सबसे बड़ा बोनस – वो राज़दार रातें। आज भी, जब वो ऑफिस में मुझे देखकर मुस्कुराती हैं, मैं समझ जाता हूँ – आज शाम बंगला बुला रहा है।

बीवी डिलीवरी में, रवी घर पर साली को चोदता रहा

रवी और रीमा की शादी को दो साल हो चुके थे। रवी का गारमेंट फैक्ट्री चलता था, जहाँ वो बहुत ही सेक्सी लेडीज नाइटियाँ बनाता था। फैक्ट्री की ये नाइटियाँ शहर भर में मशहूर थीं। कभी-कभी वो अपनी बनाई हुई खास नाइटियाँ घर ले आता और रीमा को पहनाकर देखता। रीमा का गोरा, मखमली बदन उन नाइटियों में और भी ज्यादा आकर्षक लगता। नाइटियाँ इतनी पतली और ट्रांसपेरेंट होतीं कि उसकी गोरी चींटी जैसी छातियाँ, पतली कमर और गोल-गोल नितंब सब झलकते रहते। रवी को ये बहुत पसंद था कि जब रीमा रात को बेडरूम में आती तो उसका बदन देखने के लिए उसे ज्यादा इंतजार न करना पड़े।

अभी रीमा प्रेग्नेंट थी और डिलीवरी का समय आ गया था। उसने अपने पीहर फोन करके अपनी चचेरी बहन रोमा को बुला लिया। रोमा अपनी दूसरी बहन लीना के साथ रीमा के घर आ गई। लीना को पेंटिंग करना बहुत शौक था, वो अपनी पेंटिंग की एग्जिबिशन लगाना चाहती थी, इसलिए रोमा के साथ चली आई। लीना एक बेहतरीन डांसर भी थी। कॉलेज के फंक्शन में जब वो डांस करती तो लड़कों की साँसें थम जातीं।

पिछली बार जब रोमा एक साल पहले आई थी तब रीमा, रवी और रोमा तीनों मिलकर बहुत मस्ती करते थे। रोमा अपने जीजा रवी के बहुत करीब हो गई थी। हालांकि उनके बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं बना था, लेकिन रीमा के सामने वो रवी से लिपट-लिपट कर बातें करती, गले लगाती और चुम्मा ले लेती। रीमा को ये बिल्कुल बुरा नहीं लगता। वो कहती, “जीजा और साली के बीच ये सब तो चलता है ना।” तीनों चचेरी बहनें थीं – रीमा, रोमा और लीना। उम्र में ज्यादा फर्क नहीं था। तीनों ही गोरी, सेक्सी और खूबसूरत थीं। कौन सबसे ज्यादा सुंदर है, ये कहना मुश्किल था।

शाम को जब रवी घर आया तो बेडरूम से हँसी-मज़ाक की आवाज़ें आने लगीं। उसका मन मचलने लगा। अंदर घुसते ही देखा – दोनों सालियाँ रीमा के साथ बेड पर बैठी उसकी नाइटियाँ देख रही थीं। रवी सीधा रोमा के पीछे गया, अपनी हथेलियों से उसकी आँखें बंद कर दीं और खुद से चिपक गया। रोमा हँसते हुए बोली, “अरे जीजा, इतनी देर कर दी! हम तो आज सुबह ही आने वाले थे।”

रवी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “सॉरी डार्लिंग, ऑफिस में काम आ गया था। अब माफ कर दो ना।” रोमा ने उसके हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा, “माफ तो कर दिया… लेकिन जीजी का ख्याल रखना। इस हाल में उन्हें अकेला मत छोड़ना।” लीना ने तुरंत जोड़ा, “हम भी तो हैं ना इस महफिल में!” रवी ने लीना को आँख मारते हुए कहा, “अब तुम दोनों को भी अकेला नहीं छोड़ूँगा।”

फिर तीनों ने नाइटियाँ देखनी शुरू कीं। रोमा ने एक नाइटियाँ उठाकर बीच से झाँकते हुए कहा, “देखो जीजा, ये पहनने के बाद नाइटियाँ दिखती हैं या हमारा बदन?” लीना ने शरारत से कहा, “जीजा, आपकी नाइटियाँ तो पूरा बदन उघाड़ देती हैं!” रवी हँसकर बोला, “तो पहनकर दिखाओ ना। हम भी देखें कि हमारी नाइटियाँ ज्यादा सेक्सी हैं या तुम्हारा बदन।”

इसी मजाक के बीच रीमा को इतनी हँसी आई कि अचानक दर्द शुरू हो गया। तुरंत तीनों उसे लेकर हॉस्पिटल चले गए। आधे घंटे बाद नर्स ने खुशखबरी दी – एक प्यारा सा लड़का पैदा हुआ है। रवी, रोमा और लीना तीनों बहुत खुश हुए। डॉक्टर की इजाजत लेकर रीमा से मिले। रात रुकने की बात पर डॉक्टर ने पहले मना किया, लेकिन ज़ोर देने पर बोला, “ठीक है, आज रात सिर्फ एक व्यक्ति रुक सकता है। कल कोई नहीं। नर्सें हैं देखभाल के लिए।”

रोमा ने तुरंत कहा, “मैं रुक जाती हूँ।” रवी थोड़ा उदास हो गया क्योंकि वो आज रात रोमा के साथ कुछ खास मनाने का प्लान बना रहा था। लेकिन कुछ न कहकर लीना को लेकर घर लौट आया। घर के नीचे लीना को छोड़कर बोला, “मैं आधे घंटे में आता हूँ।”

आधे घंटे बाद रवी व्हिस्की और शैंपेन की बोतल लेकर घर पहुँचा। डुप्लीकेट चाबी से दरवाजा खोला और लीना को आवाज दी। लीना बाथरूम में नहा रही थी। उसने कहा, “जीजा, मैं नहा रही हूँ। पंद्रह-बीस मिनट में आती हूँ।” रवी हॉल में सोफे पर बैठ गया, व्हिस्की का ग्लास बनाया और स्मार्ट टीवी पर एक सेक्सी डांस वीडियो चला दिया। स्क्रीन पर खूबसूरत लड़कियाँ हॉट म्यूजिक पर आधी नंगी नाच रही थीं।

जब लीना बाहर आई तो उसने रीमा की एक बहुत सेक्सी नाइटियाँ पहन ली थी। नाइटियाँ इतनी पतली थी कि उसका पूरा गोरा बदन साफ दिख रहा था। ऊपर उसने एक हल्का सा गाउन डाल रखा था। टीवी पर देखकर उसकी साँसें तेज हो गईं। वो पीछे से आकर रवी के गाल से अपना चेहरा सटाकर बोली, “क्या देख रहे हो जीजा?” रवी मुस्कुराया, “कुछ नहीं… आओ बैठो।” लीना खड़े-खड़े बोली, “अकेले ही पियोगे या हमें भी चखाओगे?”

रवी ने ग्लास उसके होठों के पास ले जाकर लगा दिया। लीना ने एक साँस में आधा ग्लास पी लिया और खाँसने लगी। रवी हँसते हुए उसके होठों पर पड़ी व्हिस्की की बूँदें चाट लीं और बोला, “हमे तो कड़वी नहीं लगती।” लीना शरमा गई, “पहली बार पी रही हूँ… पहले सिर्फ बीयर ट्राई की थी।” रवी ने उसे पास बिठाया और दो घूँट और पिलाए।

नशा चढ़ने लगा तो लीना बोली, “ये डांस तो कुछ खास नहीं… मैं इससे बेहतर नाच सकती हूँ।” रवी ने टीवी बंद कर दिया और कहा, “तो दिखाओ मेरी जान।” लीना ने रिमिक्स गाना लगा दिया – पहला सॉन्ग “कांटा लग्गा” था। वो नाचने लगी। बीच में अपना गाउन उतारकर रवी की तरफ उछाल दिया। अब सिर्फ वो पतली नाइटियाँ उसके बदन पर थी। उसका बदन आग की तरह जल रहा था।

वो नाचते-नाचते कभी पास आती, कभी दूर जाती, अपने भारी स्तनों को हिलाती, जाँघें फैलाती, नितंब मटकाती। रवी की साँसें भारी हो गईं। उसका लंड पैंट में तन गया। लीना ने सोफे पर आकर अपने नितंब रवी की जाँघों पर रख दिए और धीरे-धीरे रगड़ने लगी। रवी ने उसे अपनी बाहों में खींच लिया। दोनों के होठ मिल गए। गहरी, गीली किस। जीभें एक-दूसरे से खेलने लगीं।

रवी ने धीरे से उसकी नाइटियाँ के स्ट्रैप्स खोले। नाइटियाँ सरक गई। लीना की भरी-भरी, गोरी छातियाँ बाहर आ गईं। गुलाबी निप्पल्स कड़े हो चुके थे। रवी ने दोनों को हाथों में लेकर दबाया, सहलाया। लीना सिसक उठी, “उफ्फ… जीजा… और प्यार से… बहुत अच्छा लग रहा है।” रवी ने एक निप्पल मुँह में ले लिया और चूसने लगा। लीना की साँसें तेज हो गईं। वो खुद अपने नितंब रगड़ रही थी।

“मुझे भी देखना है…” लीना ने रवी की पैंट की चेन खोली। उसका मोटा, लंबा लंड बाहर निकल आया। लीना ने उसे हाथ में लिया और बोली, “कितना सुंदर और तगड़ा है…” उसने जीभ निकालकर सुपाड़े को चाटा। फिर धीरे-धीरे पूरा मुँह में ले लिया। रवी आहें भरने लगा।

थोड़ी देर बाद रवी ने उसे उठाकर बेडरूम ले गया। बेड पर लिटाकर उसकी जाँघों को चूमने लगा। लीना की जाँघें मखमल जैसी नरम थीं। फिर उसने अपनी जीभ लीना की चूत पर रख दी। लीना ने उसके बाल पकड़कर कहा, “हाँ जीजा… चूसो… और गहरी… मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।” लीना का पानी निकलने लगा। वो चीखी, “आह्ह्ह… मैं आ गई…!”

फिर लीना ऊपर चढ़ गई। रवी के लंड को अपनी चूत के मुहाने पर रखा और धीरे से बैठ गई। पूरा लंड अंदर चला गया। दोनों ने एक साथ आह भरी। लीना ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे। रवी उन्हें दबा रहा था। स्पीड बढ़ती गई। लीना चिल्लाई, “हाँ… और जोर से… तुम्हारा लंड मेरी चूत को स्वर्ग बना रहा है…!” दोनों एक साथ झड़ गए।

रात भर वो तीन बार और प्यार किया – कभी डॉगी स्टाइल में, कभी साइड में, कभी लीना नीचे और रवी ऊपर। हर बार लीना खुद कहती, “जीजा, मुझे और चाहिए… मुझे तुम्हारे साथ बहुत मज़ा आ रहा है… जितना मन करे कर लो।” सुबह फिर से एक राउंड हुआ। लीना बोली, “सच में तुम्हारा लंड लंबा और मोटा है… जो भी लड़की तुमसे प्यार करेगी, वो बहुत खुश होगी।”

फिर रवी हॉस्पिटल गया। रोमा को छुट्टी दी और लीना को घर भेजने को कहा। जब रोमा घर पहुँची तो लीना कपड़े बदल रही थी। लीना के चेहरे पर वो खास चमक देखकर रोमा समझ गई कि रात क्या-क्या हुआ होगा। वो मुस्कुराई और कुछ नहीं बोली।

बॉस के साथ सेक्सी अफेयर

नीलू की ये कहानी है, एक जवान लड़की की, जो अपनी नई जॉब में बॉस को खुश रखने के लिए अपनी खूबसूरती और सेक्सी अदा का इस्तेमाल करती है। ऑफिस के अंदर की वो रोमांचक पल, स्ट्रिपटीज और पैशनेट मोमेंट्स वाली ये स्टोरी हिंदी में है, जो तुम्हें गर्म कर देगी। पढ़ो कैसे उनका रिश्ता सिर्फ काम से शुरू होकर प्यार तक पहुंचता है, लेकिन बीच में ढेर सारी हॉट और इंटेंस सेक्सुअल एनकाउंटर्स के साथ।

मेरे दोस्त और कलीग्स मुझे नीलू कहकर बुलाते थे, नीलुमिनी की जगह। ये नाम मेरे लिए बहुत क्यूट बन गया था। मैंने अपनी पहली जॉब एक प्राइवेट कंपनी में सेक्रेटरी के रूप में की थी। वहां ढेर सारी मीठी यादें बनीं, लेकिन अब 29 साल की हो गई थी और बेहतर ऑपर्चुनिटी की तलाश में थी। मैंने पुरानी जॉब से रिजाइन कर दिया, क्योंकि मुझे यकीन था कि मेरा एक्सपीरियंस और एजुकेशन मुझे अच्छी जगह दिलाएगा। फिर मैंने एक बड़ी गारमेंट कंपनी में पर्सनल सेक्रेटरी की पोस्ट के लिए अप्लाई किया।

इंटरव्यू के लिए मैंने साड़ी पहनी थी – सिंपल लेकिन एलिगेंट। बालों को पीछे टाइट बांधा, गले में ब्लैक बीड्स का नेकलेस, कान में इयररिंग्स और मैचिंग शूज। मेरी फेयर स्किन और कर्वी फिगर मुझे बहुत अट्रैक्टिव लुक देता था। मेरे ब्रेस्ट्स फुल और राउंड थे, हिप्स स्विंग करने वाले, और थाइज स्मूद और टोनड। इंटरव्यू पैनल में एक सीनियर डायरेक्टर और दो ऑफिसर्स थे। मनो सर ने काफी सख्त सवाल पूछे, लेकिन उनकी आंखें मेरे बॉडी पर घूमती रहीं। एक बार तो मेरे डीप नेक जैकेट से झांकते क्लिवेज पर रुक गईं, जहां मेरे निप्पल्स हल्के से उभर रहे थे। मैंने साड़ी को थोड़ा एडजस्ट किया, लेकिन ऐसी नजरें तो मुझे अक्सर पड़ती थीं। मुझे अपनी ब्यूटी पर प्राउड था, क्योंकि लड़के-लड़कियां दोनों मुझे एडमायरिंग लुक्स देते थे, और कभी-कभी तो मैं जानबूझकर थोड़ा ज्यादा शो करती थी।

इंटरव्यू खत्म हुआ और उन्होंने कहा, “हम कॉन्टैक्ट करेंगे।” डेढ़ हफ्ते बाद कॉल आया – मैं सिलेक्ट हो गई थी। सोमवार को एग्रीमेंट साइन करने के लिए बुलाया। वीकेंड में मैंने कुछ नए क्लोथ्स शॉप किए – सेक्सी वाले, जो मेरी कर्व्स को हाइलाइट करें। ऑफिस पहुंची तो रिसेप्शन पर वेट कराया गया। फिर मनो सर के कैबिन में गई। डोर ऑटोमैटिक बंद हो गया। रूम कमाल का था – कूल एसी, फ्रेश फीलिंग, और विंडो से सिटी का व्यू। मैंने महसूस किया कि एसी की ठंडक से मेरे निप्पल्स हार्ड हो रहे थे, ब्लाउज के नीचे से उभरकर।

“नमस्ते सर, क्या अंदर आ जाऊं?” मैंने पॉलिटली पूछा, लेकिन थोड़ा सेक्सी टोन में।

“हां, आओ,” उन्होंने बिना देखे कहा। मैं उनके सामने वाली चेयर पर बैठ गई, लेग्स क्रॉस करके, स्कर्ट थोड़ी ऊपर चढ़ गई। फिर उन्होंने आंखें उठाईं, और उनकी नजरें मेरे चेहरे से नीचे सरक गईं। “वेलकम टू दिस ऑफिस। तुम्हारी रिस्पॉन्सिबिलिटी मेरे साथ है – सेक्रेटरी और पर्सनल असिस्टेंट। कोऑर्डिनेशन, लॉन्ग आवर्स, आउटिंग ट्रिप्स। लेकिन मैंने तुम्हें चुना क्योंकि तुम्हारी पर्सनैलिटी, ब्यूटी और फिगर एक्स्ट्रा क्वालिफिकेशन हैं। उम्मीद है तुम मुझे स्ट्रेस से रिलीफ दोगी, इन चार दीवारों के अंदर। शायद थोड़ा ज्यादा इंटिमेट तरीके से। इसलिए हाई सैलरी, कार और दूसरी फैसिलिटीज।”

उनकी बातों से लगा कि वो पर्सनल नीड्स चाहते हैं, लेकिन सिर्फ ऑफिस में। मेरी योनि में हल्की सी गुदगुदी हुई सोचकर। मैंने सोचा, ये ठीक लग रहा है – जॉब अच्छी है, और थोड़ा फन भी। “जी सर, मैं एग्री हूं,” मैंने कहा और एग्रीमेंट साइन कर दिया। मैंने मन बना लिया कि उन्हें फुल सैटिस्फैक्शन दूंगी, चाहे जो करना पड़े।

“नीलू,” पहली बार उन्होंने मेरा नाम लिया, और उनकी आवाज में एक हस्की टोन था। “अब से साड़ी नहीं। मैं चाहता हूं कि सब मेरी सेक्रेटरी की तारीफ करें – क्यूट, सेक्सी गर्ल। शॉर्ट, बॉडी शो करने वाला स्टाइल। स्कर्ट्स जो थाइज दिखाएं, ब्लाउज जो क्लिवेज हाइलाइट करें।”

मैं खुश हो गई। लगा वो मॉडर्न, सेक्सी सेक्रेटरी चाहते हैं – क्लाइंट्स को इम्प्रेस करने और खुद को रिलैक्स करने के लिए। मुझे अलग कैबिन मिला था, अटैच्ड बाथरूम के साथ। लेकिन लंच के बाद मैं उनके कैबिन में कंप्यूटर पर काम करती थी, जहां वो मुझे घूरते रहते।

पहले दो हफ्ते मैंने जॉब सीखी। बॉस ने काफी प्रेज की। एक दिन उन्होंने मुझे डिक्टेशन के लिए बुलाया – लेटर टाइप करने। शाम को वो मेरे डेस्क पर आए, स्क्रीन देखी, लेकिन उनकी आंखें मेरी लेग्स पर थीं। “पिंक कलर तुम पर सूट करता है।” मैं मुस्कुराई, लेकिन कन्फ्यूज हुई – मैं तो ब्लू शॉर्ट स्कर्ट और व्हाइट ब्लाउज में थी। फिर बाथरूम में याद आया, पिंक अंडरवेयर! टेबल के नीचे से दिख गया होगा, जहां मेरी पैंटी थोड़ी गीली हो गई थी उनकी नजरों से। मुझे शर्म आई, लेकिन साथ ही एक्साइटमेंट भी – मेरी योनि में हल्का सा वेट फील हो रहा था।

अगले दिन मैंने लेग्स क्रॉस करके रखीं, लेकिन जानबूझकर थोड़ा स्प्रेड किया। शाम को वो फिर आए। “नीलू, ध्यान से सुनो। मैंने तुम्हें चुना क्योंकि तुम सिर्फ सेक्रेटरी नहीं, ऑफिस पार्टनर हो। तुम्हारी स्माइल, ब्रेन, ब्यूटी, सेक्सी लुक – ये असेट्स हैं। मैं हमेशा प्रेशर में रहता हूं। तुम मुझे रिलीफ दो। नॉर्मल पार्टनर नहीं, वरना सिटी के एक्सपेंसिव क्लब्स में हाई प्राइस वाली लड़कियां हैं। सोच लो, अगर रेडी हो तो रहो, नहीं तो जाओ। लेकिन अगर रहो, तो मुझे अपनी बॉडी से प्लेजर दो – देखकर, छूकर, जो भी।”

उनकी बातों ने मुझे थोड़ा टेंशन दिया, लेकिन रात बेड पर लेटकर सोचा, मैं उन्हें अपनी सेक्सी प्रेजेंस से खुश रखूंगी। उंगलियां अपनी योनि पर फेरते हुए मैंने इमेजिन किया। अगले दिन सबसे शॉर्ट स्कर्ट और डीप नेक ब्लाउज पहना, जहां मेरे ब्रेस्ट्स हाफ बाहर झांक रहे थे। शाम को उनके सामने काम किया, लेग्स स्प्रेड करके इनर थाइज दिखाईं, जहां मेरी पैंटी का ट्रायंगल विजिबल था। उनकी आंखें कैच हुईं, और मैंने देखा उनका पैंट में उभार। मुझे भी एक्साइटमेंट चढ़ा – शो ऑफ करना अच्छा लगा। लड़कियों को ऑपोजिट सेक्स का अटेंशन पसंद आता है – ब्रेस्ट, हिप्स, थाइज दिखाकर। मेरी योनि गीली हो गई, क्लिट थ्रोबिंग।

बॉस आए, “कन्फर्म, तुम नहीं जाओगी। व्हाइट कलर भी ब्यूटीफुल है।” स्माइल करके चले गए। अच्छा हुआ, अंडरवेयर पर वेट स्पॉट्स नहीं देखे, लेकिन मैं तो इतनी हॉट थी कि टच करने को जी चाह रहा था।

एक शाम साइन के लिए गई। पर्पजली ब्लाउज के टॉप बटन्स ओपन रखे, क्लिवेज दिखाया। बेंड होकर शो किया, जहां मेरे निप्पल्स हार्ड थे। वो स्माइल किए, “गुड गर्ल।” पेन को मेरे ब्रेस्ट्स के बीच रखा, “ये पेन लकी है।” हम दोनों हंसे, लेकिन मेरे ब्रेस्ट्स पर उनका टच मुझे इलेक्ट्रिक शॉक जैसा लगा।

कभी फाइल्स सर्च करते हुए बेंड होकर हिप्स प्रोजेक्ट करती, शॉर्ट स्कर्ट ऊपर चढ़ जाती, पैंटी दिखती, और मैं जानती थी वो मेरी अस क्रैक देख रहे। वो खुश होते, “गुड गर्ल” कहते, और कभी हल्का सा स्पैंक करते।

एक दिन हैवी वर्क के बाद वो टायर्ड थे। मैं पेमेंट अप्रूवल लेने गई। साइन करके बोले, “आज टफ डे था, बैंक लोन अप्रूव हुआ। मुझे रिलैक्स करो।” मैं स्माइल की, सोचा कैसे।

बाथरूम में गई। मिरर में आईडिया आया। येलो यू-नेक ब्लाउज उतारा, रेड ब्रा में, जहां मेरे निप्पल्स पोक कर रहे। ब्राउन टाइट स्कर्ट उतारी। मैचिंग पैंटी – बैक में टी-शेप, फ्रंट में स्मॉल ट्रायंगल, थाइज और राउंड हिप्स एक्सपोज। ब्रा स्ट्रैप्स एडजस्ट कीं, पैंटी कमर पर ऊपर की, लेकिन क्लिट को रब किया थोड़ा। सेक्सी लुक। बाल ओपन किए, शोल्डर्स पर वेवी। ब्लैक हाई हील्स में प्लेबॉय मॉडल लग रही थी।

कैबिन में आई, उनके सामने कंप्यूटर पर काम किया, लेकिन लेग्स स्प्रेड, पैंटी दिखाकर। वो आए, “तुम रियली खुश कर रही हो। गुड गर्ल। वीनस जैसी ब्यूटीफुल।” पहली बार इतनी कॉम्प्लिमेंट। लेकिन टच नहीं किया – एग्रीमेंट था। वो मेरी हर मूवमेंट एन्जॉय करते रहे, और मैंने देखा उनका हाथ पैंट पर गया। जाते हुए, “क्लोथ्स पहनना मत भूलना।” हम हंसे, लेकिन मैं तो गीली हो चुकी थी।

कुछ दिन नॉर्मल गुजरे। मैंने रूल ब्रेक किया – साड़ी पहनी। रेड कश्मीरी साड़ी, बैकलेस डीप नेक जैकेट विथ थ्रेड्स। नो ब्रा, बिल्ट-इन कप्स, लेकिन मेरे निप्पल्स रबिंग से हार्ड। साड़ी लो वेस्ट में टक की, बॉडी कर्व्स हाइलाइट, नवेल डीप और सेक्सी। शाम को फाइल्स से ब्रेस्ट्स कवर करके गई। उनकी आंखें फैलीं, “वाह, तुम अमेजिंग हो। तुम्हारी नवेल में उंगली डालने को जी चाह रहा है।”

“थैंक यू सर।”

मैं टर्न हुई, जानती थी वो एप्रिशिएट कर रहे। हिप्स स्विंग कर रहे थे, साड़ी से अस शेप विजिबल। “लेकिन रूल ब्रोकन। पनिशमेंट मिलेगी।” मैं स्केयर्ड हुई। फाइल्स रखीं, साड़ी पल्लू गिरा, ब्रेस्ट्स एक्सपोज, निप्पल्स हार्ड। “क्या पनिशमेंट?”

“सॉरी सर, अगैन नहीं करूंगी।”

वो हंसे। “नेवेल पर रिंग लगाओ, पेन होगा। लेकिन साड़ी में खुश किया, तो साड़ी शॉप का वाउचर गिफ्ट। और आज रात मेरे साथ डिनर।” मैं रिलीफ से हंसी, लेकिन एक्साइटेड भी।

वीकेंड में पियर्सिंग कराई। ब्लू पेंडेंट लगाया, दर्द हुआ लेकिन हॉट लगी – नवेल रिंग स्विंग करते हुए योनि तक वाइब्रेशन। नेक्स्ट वीक बॉस बैंकॉक ट्रिप पर गए। मैं बोर हो गई, लेकिन रातें सेल्फ-प्लेजर में गुजारीं। डेस्क पर एनवेलप “गुड गर्ल”। साड़ी शॉप का बिग वाउचर। खुशी हुई।

सोमवार को वो आए, हैपी। गिफ्ट दिया – एक्सपेंसिव परफ्यूम और बॉक्स। “थैंक यू सर।”

शाम को बोले, “पेंडेंट अब लगाओ।” मैं कैबिन में गई। बॉक्स ओपन किया – निप्पल रिंग्स! बाथरूम में ब्लाउज उतारा, ब्रा रिमूव, निप्पल्स रब करके हार्ड किए, रिंग्स फिट कीं – दर्द और प्लेजर का मिक्स। सेक्सी रिफ्लेक्शन। स्कर्ट उतारी, रेड जी-स्ट्रिंग पैंटी, जहां क्लिट पोक कर रही। नेवेल पेंडेंट के साथ कमाल।

चलते हुए पेंडेंट्स स्विंग कर रहे, निप्पल्स पर पुल फील हो रहा, योनि गीली। चेयर पर बैठने से पहले, “आओ यहां, गुड गर्ल।” मैं शर्माई। “मेरा चॉइस राइट है। आई एम लकी बॉस।” फोटोज लिए, और एक बार हल्का सा निप्पल पिंच किया। मैं मोन की। मैं एन्जॉय की, रात कई ऑर्गेज्म सेल्फ-प्लेजर से, इमेजिन करते हुए उनका लिंग।

कुछ वीक्स बाद कंपनी ने कॉम्पिटीटर बाय किया। बॉस हैपी आए। “कॉन्ग्रेट्स सर,” मैंने हैंडशेक किया, लेकिन उन्होंने मुझे हग किया, ब्रेस्ट्स उनके चेस्ट से प्रेस। “थैंक्स गुड गर्ल। आज मूड बूस्ट करो।”

मैं सोची। विंडो से सिटी देख रही थी, वो बैक से आए, कमर पकड़ी। “क्या थिंकिंग? चाय पियो।” टेबल पर सिटिंग। “आज बिग डे। मुझे पावरफुल फील कराओ। टेबल पर स्टैंड हो।”

मैं क्लाइंब की। प्राउड फील हुआ। डीप ब्लू कोट, व्हाइट शर्ट, शॉर्ट ब्लू स्कर्ट, ब्लैक हाई हील्स। वो अंडरवेयर देख रहे। म्यूजिक प्ले किया। मैं डांस की, कोट रिमूव, शर्ट आउट, बटन्स ओपन, ब्रा शो। ब्रेस्ट्स प्रेस किए, निप्पल रिंग्स पुल करके मोन की। बैक टर्न, शर्ट ऑफ, स्कर्ट जिप डाउन, राउंड हिप्स और मिल्की थाइज शो। पैंटी में बेंड होकर अस क्रैक शो, फिंगर से टच करके। आर्म्स अप, आर्मपिट्स शो। ब्रा हुक ओपन, कप्स होल्ड करके शाइनेस एक्ट। ब्रा ऑफ, हैंड्स से कवर, लेकिन फिर रिवील – ब्रेस्ट्स बाउंस। फिर पैंटी डाउन, न्यूड। पैंटी उनकी लैप में थ्रो। वो स्मेल किए, “ओह, इतनी गीली।” मैं ब्रेस्ट्स रब, निप्पल्स पुल, क्लिट फिंगर।

“ओह यू आर गुड गर्ल एंड अमेजिंग।” मैं बेंड, लेग्स स्प्रेड-क्लोज। पुसी वेटनेस शो, जूस ड्रिपिंग। फीट से उनकी थाइज प्रेस, जहां उनका हार्डन विजिबल।

वो कंट्रोल नहीं कर पाए। मुझे लैप में लिया। मैंने लेग्स चेयर आर्म्स पर रखे। वो निप्पल्स सक, रिंग्स से पुल, बाइट – दर्द और प्लेजर। हिप्स ग्रैब, फिंगर्स अस में। मैं मोन की, “ओह सर… हाँ…” मुझे टेबल पर लेटाया, थाइज किस, लेग्स स्प्रेड वाइड। टंग से पुसी स्लिट लिक, क्लिट सक – मैं रिथ्ड, कमर उठाई, “ओह्ह… गॉड… अह्ह्ह… ओह्ह्ह… चाटो और…”

क्लिट पर फास्ट, दो फिंगर्स पुसी में, एक अस में। मैं स्क्विर्ट के करीब, “फास्टर… ओह…” वो क्लोथ्स ऑफ, चेस्ट हेरी, पेनिस ह्यूज – थिक, वीनी, प्रीकम ड्रिपिंग। टिप से पुसी रब, क्लिट टच। फिर इनसर्ट – स्लो, लेकिन डीप। हॉट रॉड इनसाइड, वॉल्स ग्रिप, मैं चीखी, “ओह फक… इतना बड़ा… हाँ…” थ्रस्ट्स स्लो से फास्ट, ब्रेस्ट्स बाउंस, रिंग्स स्विंग।

म्यूजिक स्टॉप, सिर्फ हमारी मोन्स और स्लैपिंग साउंड। पेनिस आउट, माउथ में दिया – मैं डीप थ्रोट, गैग, लेकिन सक हार्ड। फिर बैक इन, डॉगी स्टाइल, हिप्स ग्रैब, स्पैंक। तेज गति, मैं येल, “ओह गॉड… किल मी… ओह्ह… यस… कमिंग… सर… ओह्ह… आ रही हूं… अह्ह्ह…”

मैं ऑर्गेज्म हिट, पुसी कांट्रैक्ट, लेकिन वो जारी। फिर पोज चेंज, मुझे ऊपर – मैं राइड, ब्रेस्ट्स बाउंस, क्लिट रब। वो ग्रोन, “ओह… टाइट पुसी…” मैं फिर कम, स्क्विर्ट। वो पुल आउट, कम स्प्रे ऑन ब्रेस्ट्स, फेस। “ओह… ओह… गुड गर्ल…” मैं कम रब, फिंगर्स लिक, टेस्ट किया।

“तुम रियली गुड गर्ल। लेकिन मैंने एग्रीमेंट ब्रोकन, टच किया। अब तुम पनिशमेंट दो।” मैं स्माइल की, हैपी। “पनिशमेंट? अगली बार और हार्ड।”

ये रिश्ता अब सिर्फ बॉस-सेक्रेटरी नहीं रहा। धीरे-धीरे हमारी मीटिंग्स ज्यादा इंटिमेट हो गईं। कभी लंच ब्रेक में क्विक ब्लो जॉब, कभी ट्रिप्स पर होटल रूम में पूरी रात सेक्स – एनल, रोल प्ले, टॉयज। मैंने महसूस किया कि वो सिर्फ सेक्स नहीं चाहते, बल्कि केयर भी करते हैं। एक दिन उन्होंने कहा, “नीलू, तुम मेरी लाइफ का पार्ट हो। आई लव यू।” और मैंने भी एडमिट किया कि मुझे उनसे प्यार हो गया है। ऑफिस की दीवारों से बाहर निकलकर हमारा रिलेशन रियल लव स्टोरी बन गया, लेकिन हमेशा पैशनेट और इरोटिक। अब हम साथ हैं, खुश, और हर रात नई हाइट्स एक्सप्लोर करते।

सेक्सी बॉस ने खुद बुलाया घर और पूरी रात चुदवाया

नमस्ते दोस्तों, देसी कहानी में मैं नया हूँ। मेरे दोस्तों के कहने पर यहाँ कुछ कहानियाँ पढ़ीं – कुछ झूठी लगीं, कुछ पढ़कर इतना मज़ा आया कि सोचा क्यों न अपनी सच्ची कहानी आपसे शेयर करूँ। मेरा नाम अनुराग है, मैं मुंबई में रहता हूँ। उम्र 22 साल, हाइट 6 फुट, जिम जाने से बॉडी टाइट और मसल्स मजबूत। मेरा लंड 6 इंच का, मोटा और हमेशा तैयार रहता है।

बात उस वक़्त की है जब मैंने मुंबई में नई जॉब शुरू की थी। एक बड़ी MNC में सीनियर की पोस्ट मिली। पहला दिन ऑफिस गया तो वहाँ ढेर सारी लड़कियाँ थीं, लेकिन कोई खास अट्रैक्शन नहीं हुआ। फिर थोड़ी देर बाद मेरी ड्रीम गर्ल मेरे सामने से गुज़री। उस दिन उसे थोड़ा लेट हो गया था। क्या बताऊँ दोस्तों, मेरे तो होश ही उड़ गए। नाम था रिचा। फिगर 32-28-36 – परफेक्ट कर्व्स, गोरी त्वचा, लंबे बाल और वो सेक्सी स्माइल।

किस्मत अच्छी थी कि हम दोनों का बॉस एक ही था। उसने हमें इंट्रोड्यूस करवाया। उस दिन मैं बहुत खुश था। अगले दिन उसने मुझे अपने पास बुलाया, मेरे बारे में पूछा। मैंने सब बताया, वो बहुत इंटरेस्ट ले रही थी। ऐसे ही दिन बीतते गए। हम साथ काम करते, साथ लंच करते, कैंटीन में साथ जाते। वो मेरे साथ बहुत फ्रैंक हो गई – मेरे मसल्स को छूती, मजाक करती, मेरी आर्म्स को सहलाती। मुझे बहुत अच्छा लगता। मैं तो उसके पीछे पागल हो चुका था।

मुझे किसी भी तरह उसे चोदना था। मजाक-मजाक में हम इतने करीब आते कि उसके सॉफ्ट बूब्स मेरे सीने से टच हो जाते। मुझे बहुत मज़ा आता और मुझे पता था कि उसे भी बुरा नहीं लगता, बल्कि वो और करीब आती। वो मेरी आँखों में देखकर मुस्कुराती, जैसे कह रही हो – मुझे भी तुम्हारा टच पसंद है।

एक दिन लंच टाइम हुआ, सब लोग चले गए। हम दोनों काम में बिज़ी थे, पूरा ऑफिस खाली। मैंने सोचा इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा। हिम्मत जुटाकर उसके पास गया। उसके साइड से बूब्स देखकर मन में आग लग गई – सोचा अगर आज इन्हें नहीं दबाया तो कोई और ले जाएगा। मैंने उसका हाथ पकड़ा और बोला, “रिचा, बुरा मत मानना… मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ। I love you।”

और झट से उसके गुलाबी होंठों पर किस कर दिया। उसने मुझे रोका नहीं, बल्कि उसकी साँसें तेज़ हो गईं। मैंने इसे ग्रीन सिग्नल समझा और एक हाथ से उसके बूब्स को छूने लगा। वो इतने सॉफ्ट और गरम थे। तभी वो हल्के से बोली, “ये क्या कर रहे हो… यहाँ कोई देख लेगा।”

मैंने पूछा, “क्यों, तुम्हें मुझसे प्यार नहीं है?” वो शरमाते हुए बोली, “है ना… बहुत है। लेकिन यहाँ रिस्क है।” मैं जोश में आ गया। बोला, “सब लंच पर गए हैं, कोई नहीं आएगा।” अब मैं सिर्फ़ छू नहीं रहा था, ज़ोर-ज़ोर से दबा रहा था। वो सिसक रही थी, लेकिन उसकी आँखें कह रही थीं – और करो।

फिर वो बोली, “नहीं… रिस्क नहीं लेते। अब मैं तुम्हारी हूँ, बाद में जो करना है कर लेना।” मैंने उसे एक लंबा किस दिया और हम लंच पर चले गए।

कई दिन ऐसे ही ऊपर-ऊपर मज़े लिए। फिर एक दिन उसने बताया कि उसके मम्मी-पापा शादी में पुणे जा रहे हैं, घर खाली रहेगा। ये सुनकर मैं पागल हो गया। हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में आने को बेचैन थे। उस दिन मैंने घर पर बोला कि दोस्त के यहाँ जा रहा हूँ, रात नहीं आऊँगा।

ऑफिस छूटा तो हम लेट निकले ताकि किसी को शक न हो। रास्ते में मेडिकल शॉप से कंडोम लिया। फिर मेरी बाइक पर वो मेरे पीछे बैठी, उसके बूब्स मेरी पीठ से दब रहे थे। उसके घर पहुँचे। दरवाज़ा खोला और जैसे ही अंदर आए, मैंने उसे बाहों में जकड़ लिया। वो हँसकर बोली, “जानू, थोड़ा इंतज़ार कर लो। आज पूरी रात तुम्हारी हूँ। पहले फ्रेश हो जाएँ।”

मैंने उसे किस किया और छोड़ दिया। हम फ्रेश हुए। मैं सोफे पर बैठा तो वो नहाकर बाहर आई – क्या लग रही थी! स्पघेटी टॉप में, अंदर सिर्फ़ रेड ब्रा और पैंटी, जो बाहर से झलक रही थीं। मेरे लंड ने तुरंत सलामी दी, टॉवल पर टेंट बन गया। वो करीब आई, मुस्कुराकर बोली, “ये क्या है?”

मैंने कहा, “मेरी जान, ये वो चीज़ है जो आज तुम्हें सोने नहीं देगी।” वो शरमाकर हँसी और बोली, “मैं भी तो देखूँ इसमें कितना दम है?” हम दोनों मुस्कुराए और मैंने उसे बाहों में ले लिया।

गहरा किस किया। वो भी पूरा रिस्पॉन्स दे रही थी – उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। फिर मैंने उसके गाल, कान, गर्दन पर किस किया। गर्दन पर जैसे ही किस किया, उसके मुँह से लंबी “आआआह…” निकली। मुझे पता चल गया – वो पूरी गरम हो चुकी है। मैंने दोनों हाथों से उसके बूब्स ज़ोर से दबाए। वो बोली, “धीरे जानू… दर्द होता है।” लेकिन उसकी सिसकियाँ कह रही थीं – और ज़ोर से करो।

एक हाथ नीचे ले जाकर पैंटी के ऊपर से उसकी चूत सहलाने लगा। वो सिसकियाँ भरने लगी – “आह… ऊँह… अनुराग…” मैंने स्पघेटी उतारी। रेड ब्रा-पैंटी में वो सेक्स की देवी लग रही थी। फिर ब्रा उतारी – गुलाबी निप्पल्स तने हुए। पैंटी उतारी – चूत बिल्कुल क्लीन शेव्ड, गुलाबी और पहले से गीली।

अब बोला, “तेरी बारी, मेरे कपड़े उतार।” उसने टॉवल खोला, फिर अंडरवियर। मेरा मोटा लंड देखकर वो दंग रह गई। बोली, “इतना बड़ा और मोटा…?” मैंने कहा, “सब तुम्हारे लिए।” उसने हाथ में लिया और आगे-पीछे हिलाने लगी। फिर मैंने कहा, “मुँह में लो ना।” वो झुककर चूसने लगी – गरम मुँह, जीभ का जादू। मैं स्वर्ग में था।

फिर बोला, “बेडरूम चलें?” वो बोली, “जल्दी चलो, इंतज़ार नहीं होता।” मैंने उसे गोद में उठाया और बेडरूम में ले जाकर बेड पर लिटाया। टाँगें फैलाईं और मुँह उसकी चूत पर लगाया। वो पहले से इतनी गीली थी कि रस बह रहा था। मैं चाटने लगा तो वो पागल हो गई – “आह… अनुराग… बहुत अच्छा लग रहा है… और ज़ोर से…” वो झड़ गई, मेरा मुँह उसके रस से भर गया।

मैंने कहा, “ये तो ट्रेलर था, पिक्चर अभी बाकी है।” वो बोली, “जानू, इतना बड़ा लंड मेरी चूत में कैसे जाएगा?” मैंने कहा, “जाएगा, थोड़ा दर्द होगा लेकिन फिर सिर्फ़ मज़ा।” कंडोम पहनने लगा तो वो बोली, “नहीं जानू, हमारी पहली बार है। बिना कंडोम के करो, मुझे तुम्हारा लंड और मेरी चूत एक होते हुए फील करना है। आज सेफ पीरियड है।”

मैंने कंडोम फेंका और लंड को उसकी चूत पर रगड़ने लगा। वो सिसकियाँ ले रही थी। धीरे-धीरे अंदर करने लगा। टाइट थी, दर्द हो रहा था। फिर एक ज़ोर का झटका – वो चीख पड़ी, “आह… निकालो… बहुत दर्द हो रहा है।” मैंने उसे किस किया, बोला, “बस थोड़ी देर, फिर मज़ा आएगा।” फिर एक और झटका – पूरा लंड अंदर। उसके आँसू आ गए, लंड पर खून लगा था – उसकी सील टूटी थी।

मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। थोड़ी देर बाद वो भी साथ देने लगी – कमर उठा-उठाकर। फिर स्पीड बढ़ाई। वो चिल्लाने लगी – “आह… ऊँह… और ज़ोर से… फाड़ दो मेरी चूत… प्लीज़ और तेज़…” मैं और जोश में आ गया, ज़ोर-ज़ोर के झटके मारने लगा। जब झड़ने वाला था तो पूछा, “कहाँ निकालूँ?” वो बोली, “अंदर ही… प्लीज़ अंदर भर दो।”

मैं उसकी चूत में झड़ गया। वो दो बार झड़ चुकी थी। फिर हम लिपटकर लेटे। थोड़ा आराम के बाद फिर शुरू हुए – इस बार उसे ऊपर बिठाया, घुड़सवारी करवाई। उसके बूब्स उछल रहे थे, कमाल का नज़ारा।

फिर वो किचन में खाना बनाने गई। मैं पीछे से गया और वहाँ भी चोदा – उसे काउंटर पर टिकाकर। रात में खाना खाने के बाद तीन बार और चुदाई की। आखिरी बार मेरा लंड उसकी चूत में डालकर ही सो गए। सुबह देर से उठे, उस दिन ऑफिस नहीं गए – पूरा दिन सिर्फ़ सेक्स, सेक्स और सेक्स। शाम को उसके मम्मी-पापा आने वाले थे तो मैं निकल गया।

आज भी जब मौका मिलता है हम चुदाई करते हैं। वो मेरे लंड की दीवानी हो गई है। उसने वादा किया है कि ज़िंदगी भर मुझसे चुदवाएगी, चाहे वो कहीं भी रहे।

दोस्तों, ये थी मेरी सेक्सी बॉस रिचा की पहली चुदाई की सच्ची कहानी। उम्मीद है आपको गरमागरम मज़ा आया होगा। कमेंट्स का इंतज़ार रहेगा!

बॉयफ्रेंड ने झाड़ियों में ले जाकर चोदा

कहानी के पहले मैं अपने बारे में बता दूं. मेरा नाम शैली है और मैं २४ साल की हूं, मेरा फिगर ३२-३२-४० है और हाइट ५ फुट ८ इंच है, यह तब की बात है जब मैं १२ वीं क्लास में थी, तब मेरा फिगर ३२-३०-३६ हुआ करता था.

तब मेरा एक बॉयफ्रेंड था जिस से मेरा ब्रेकअप हो गया था, उसके साथ मैंने बस किस किया था. ब्रेकअप के बाद में भी अब बहुत ज्यादा उदास रहा करती थी. मेरी बेस्ट फ्रेंड के बॉयफ्रेंड ने मुझे अपने भाई से मिलवाया.

वह मुझसे उम्र में थोड़ा बड़ा था और दिखने में एवरेज था, उसका नाम अक्षत था. अक्षत और मैं रोज फोन पर बातें करने लगे. फिर एक दिन मेरी बेस्ट फ्रेंड उसका बॉयफ्रेंड अक्षत और मैंने मिलने का प्लान बनाया.

हम थोड़ी देर घुमे फिरे थे. उसके बाद अक्षत मुझे अपनी बाइक पर बिठा कर एक बहुत सुंदर जगह ले गया, वह हिल पॉइंट था और वहां से उतर कर झाड़ियां थी. वह मुझे झाड़ियों के अंदर लेकर चला गया. मैंने उस दिन एक फ्रॉक टाइप टॉप पहना था. जो मेरे बुब पर टाइट था और नीचे से ढीला, घुटने तक और उस के नीचे लेगी पहना था. झाड़ियों में जाने के बाद वहां पर एक गुफा जैसे बडी चट्टान थी.

हम वहां एक चट्टान के सहारे खड़े हो गए, मुझे चट्टान से टिका के वह मुझे किस करने लगा. मैं भी उसे किस कर रही थी. फिर उसने अपना हाथ मेरे बूब्स पर रख दिया और दबाया, क्योंकि यह मैंने पहले नहीं किया था, तो मैं घबरा कर पीछे हो गई. तो उसने कहा क्या हुआ? तो मैंने उसे कहा कि मैंने यह सब नहीं किया है.

तब उसने कहा बहुत मजा आएगा, तुम एक बार मुझे करने दो. पहले तो मैं मना कर रही थी पर फिर मैं मान गई. अक्षत मुझे फिर किस करने लगा और बूब्स दबाने लगा. क्या बताऊं बहुत अच्छा लग रहा था? लेकिन मैं डर गई थी, इसलिए रिस्पांस नहीं दे रही थी.

तब अक्षत ने मुझे कहा लेट गो एवरीथिंग और इस मोमेंट को इंजॉय करो बस, कुछ मत सोचो. उसके बाद जब उसने मेरे बूब्स दबाते हुए किस किया तो मैं मोन करने लगी थी और अहः अय्य्य औऊ ईई अह्ह्ह ओऊ हह हां अम्म्म अह्ह्ह अम्म्म ईई औउ ओह्ह हहह की आवाज निकाल रही थी.

फिर उसने धीरे से मेरे टॉप में हाथ डालना शुरु किया और मेरे बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाना शुरु कर दिया. मैं भी उसका साथ दे रही थी और मौन कर रही थी, और उसका सर पकड़कर किस कर रही थी और मौन कर रही थी.

फिर वो धीरे धीरे नीचे जाने लगा, और मेरे गले पर बहुत सारे किस करने लगा. और बहुत सारे किस करने लगा और अपने हाथों से मेरे बूब को टॉप के अंदर दबा रहा था, और मेरी पीठ और पेट पर हाथ फेर रहा था. फिर उसने मेरा टॉप उठाया और ब्रा के ऊपर से बूब्स को चूसने लगा. क्या बताऊं कितना अच्छा लग रहा था.

मैं भी अपनी छाती उछाल कर बाहर निकाल निकाल के उसके सर को अपने बुब्स पर दबा रही थी उसके हाथ मेरी पीठ पर थे और धीरे से उसने मेरी ब्रा खोल दी. अब टॉप और ब्रा उठाकर वह मेरे नंगी बुब से खेल रहा था दबा रहा था और मैं पागलों की तरह मोअन कर रही थी.

फिर उसने मेरे राइट बूब्स के निप्पल को अपने मुंह में भरा और चूसने लगा. क्या बताऊं पूरे शरीर में बिजली दौड़ गई थी और मैं नीचे से गीली भी होने लगी थी.

वह एकदम भूखे शेर की तरफ मेरे बूब्स पर टूट पड़ा और बहुत तेज तेज चूस रहा था और लेफ्ट बूब को अपने हाथों से दबा रहा था. मैं भी उसका सर पकड़कर अपने बूब्स में दबा रही थी. क्या मजा आ रहा था यारो!!!

फिर वह मेरे लेफ्ट की बुब को चूसने लगा १०-१५ मिनट तक उसने राइट बूब्स को चूसा और १०-१५ मिनट उसने लेफ्ट बूब्स को निचोड़ा. आह्ह औउ अह्ह्ह मम्मम इतना मजा तो मुझे जिंदगी में कभी नहीं आया था. अब वो धीरे धीरे नीचे जाने लगा और मेरे पूरे शरीर पर किस करने लगा. और उसका हाथ मेरे चूत पर जा रहा था.

वह मेरी लेगी के ऊपर से मेरी चूत सहला रहा था अहह औउ उई  ईतना मजा आ रहा था आह औऊ ओह्ह हहह अम्म्म मैं उसका नाम लेकर मोअन कर रही थी अहह औउ इई अक्षत मैं इतनी गीली हो गई थी कि मेरे पानी से पैंटी और लेगी दोनों गीले हो गए थे. उसे जैसे ही मेरा लेगी गिला लगा, उसने कहा देखो कितना मजा दिया कि ईतनी गीली हो गई.

फिर उसने मेरी पैंटी में हाथ डाल दिया और मेरी चूत को सहलाने लगा. मैं सीहर गई ऐसा लग रहा था कि सातवें आसमान पर हूं. फिर उसे सहलाने में अनकंफर्टेबल हो रहा था तो उसने मेरी पैंटी और लेगी नीचे कर दी.

अब मेरी चूत उसके सामने थी और वह मुझे फिंगरिंग कर रहा था, क्या मजा आ रहा था फिर उसने मेरा टॉप उठाया और बूब्स को बारी बारी से फिर से चूसने लगा. और साथ में चूत से भी खेल रहा था. फिर वह मुझे किस करने लगा.

फिर उसने मुझसे कहा शैली मैं कुछ करना चाहता हूं, कर लू, मैंने उसे पूछा क्या? तो उसने कहा मजे करने दो, ना मजा आए तो रोक देना.. मैं तो मजे में इतनी मदहोश थी कि मैंने उसे कह दिया हां अक्षत जो करना है करो, मुझे पागल कर दो.. यह सुनते कि वह नीचे बैठा और मेरी चूत चाटने लगा. मैं तो बस मौन ही कर रही थी आह्ह उऔउ ओह्ह हहह औउ यस हहह इतना मजा आ रहा था कि क्या बताऊं??

५ मिनिट तक वह मेरी चूत चूस रहा था और मैं उसका सर अपनी चूत में दबाए जा रही थी. फिर उसने कहा तुम दूसरी बार झड़ गई, इतना मजा आया तुमको? तब मुझे पता नहीं था की जड़ना क्या होता है? फिर उसने कहा मैंने तुम्हें इतना मजा दिया थोड़ा तुम भी मुझे मजा दे दो. मुझे समझ नहीं आ रहा था तो उसने अपना ६.५ इंच लंबा मोटा लंड पेंट खोल के निकाल दिया. मैंने पहली बार किसी आदमी का तना हुआ लंड देखा था.

उसने कहा इसे छुओ, चुसो और इससे जैसे खेलना है खेलो. मैंने उसे छुआ फिर वह मुझे बताने लगा तूम ईसे हीलाओ, मैं वैसा वैसा करने लगी जैसा वह कह रहा था. फिर उसने कहा इसे चुसो.. मैंने उसे मुंह में लिया तो कुछ नमकीन सा पानी मेरी जुबान पर लग गया. मैं उसे चूसने लगी और वह मोंन कर रहा था.

५ मिनट तक उसका लंड चूसा, फिर उसने अपनी जेब से कंडोम निकाला. मैं डर गई मैंने कहा मुझे सेक्स नहीं करना, यह सब ठीक है. तो अक्षत बोला अभी तक ईतना मजा आया है, यह करके देख बहुत मजा आएगा. मैं बहुत देर मना कर रही थी फिर उसको गुस्सा आ गया.

अक्षत – इतनी आग लगा दी, अब चुदने के लिए मना कर रही है.

मै डर गई उसने मुझे धक्का देकर उस गुफा में ले जाकर लेटा दिया, और मेरी चूत चाटने लगा. मैं सब कुछ भूल कर मोन करने लगी. इतनी देर में उसने कंडोम खोल दिया, मेरे ऊपर आ गया और कंडोम चढ़ाने लगा. मैंने कहा प्लीज मत करो. अक्षत बोला एक बार करके तो देख, मैं रोने लगी पर वह मेरी एक नहीं सुन रहा था.

उसने अपना लंड का टोपा मेरी चूत पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा. मेरी तो चीख निकल गई अहः ईई अमा ओऊ माया ईई माआआ ऊ उऔउ इई ऊऊ पर उसने मेरे मुंह पर हाथ रख दिया और कहने लगा, आराम से करूंगा. फिर थोड़ा दर्द कम हुआ तो एक और झटका मारा, आधा लंड अंदर चला गया था. मुझे बहुत दर्द हो रहा था.

फिर एक फाइनल जटका और उसका पूरा मोटा लंड मेरी चूत में था, मैं दर्द से तड़प रही थी. तब अक्षत ने मुझे कहा आराम से, बस थोड़ा सा दर्द होगा, अभी जब धक्के मारूंगा तो अपनी गांड उछल उछल कर चुदोगी.

फिर थोड़ी देर में उसने धक्के मारना शुरू किया, क्या बताऊं? मुझे बहुत मजा आने लगा था. मैं आह औउ अय्य्य औउ ई ऊऊ ओह्ह हहह औऊ यस्स कर रही थी. हर धक्के पर आह्ह ययय ईह हहह ओह्ह हहह. फिर उसने स्पीड बढ़ाई और मैं मौन कर रही थी. वह स्पीड बढ़ाते जा रहा था और जैसा की अक्षत ने कहा था, मैं गांड उछाल उछाल कर उस की चुदाई में साथ दे रही थी.

काफी देर उसने मेरी चुदाई की और मैं बस मोन किया जा रही थी, आः औऊ अहह ओह्ह हह्ह्ह फक मी अक्षत, बहुत मजा आ रहा है अक्षत, फिर उसका पानी निकल गया कंडोम में. और हम दोनों सांसे भर गई थी, हमने अपने अपने कपड़े पहने और वहां थोड़ी देर बैठ गए. वह मुझे किस कर रहा था और मैं भी उसका साथ दे रही थी, फिर हम अपने अपने घर चले गए.

 

मेरी पहली चुदाई: बॉयफ्रेंड के साथ जन्नत के पल

हाय दोस्तों, जवानी का नशा ही तो ऐसा होता है ना, जो इंसान को पागल बना देता है! आपने मेरी पिछली कहानी पढ़ी होगी, जिसमें मैंने अपने भाई के साथ हुए उन अनोखे पलों को खुलकर शेयर किया था। वो कहानी पढ़कर आपको जो भी लगा, वो सब मुझे ईमेल के जरिए मिला। इतने सारे मैसेज, इतना प्यार… वाह! कुछ लोगों को तो मेरी स्टोरी इतनी पसंद आई कि वो खुद को रोक नहीं पाए और मुझे चोदने का ऑफर तक दे डाला। लेकिन दोस्तों, मैं अपनी हर एक रीडर और रीडर्स को साफ-साफ बता दूं – मैं चैटिंग की दीवानी हूं। अगर कोई बात करना चाहे, कोई राज शेयर करना चाहे, तो चैट बॉक्स में आ जाओ। मैं इंतजार करूंगी, बिना किसी हिचकिचाहट के।

अब ज्यादा देर बोर ना करते हुए, चलिए सीधे मेरी अगली कहानी पर आते हैं। पिछली स्टोरी में आपने पढ़ा था कि कैसे मेरे मामा के लड़के ने मेरी जवानी के रस को चखा और मुझे जन्नत के दरवाजे खोल दिए। लेकिन जैसा मैंने वोां में जिक्र किया था, उससे भी पहले मेरी जिंदगी में चुदाई का पहला असली रंग भरा था मेरे बॉयफ्रेंड ने। ये कहानी उसी की है – एक साल पहले की, जब मैं महज 22 साल की थी, कॉलेज की आखिरी क्लास में धुंआधार पढ़ाई के बीच जवानी के सपनों में खोई हुई। मेरा बॉयफ्रेंड, नाम था राहुल, मेरे ही क्लास का लड़का। वो हमेशा से मुझे नजरों में रखता था – क्लास में मेरी तरफ घूरता, लाइब्रेरी में चुपके से मुस्कुराता। आखिरकार, कॉलेज के फाइनल ईयर में उसने हिम्मत जुटाई और प्रपोज कर दिया। “समिता, तू मेरी जिंदगी है,” उसने कहा था, आंखों में वो चमक लिए जो मुझे आज भी याद है।

राहुल स्मार्ट था, पढ़ाई में टॉप करने वाला, लेकिन बदन से तो जैसे किसी एथलीट का – चौड़ी छाती, मजबूत बाजूएं, और वो हंसी जो मुझे हर बार गुदगुदा देती। मुझे भी वो पसंद था – उसकी वो शरारती नजरें, वो हल्का सा परफ्यूम का खुशबू जो हवा में तैरता। तो मैंने बिना सोचे-समझे हां कह दी। “हां राहुल, मैं तेरी हूं,” मैंने कहा, और बस, हमारी लव स्टोरी शुरू हो गई।

शुरुआती दिनों में सब कुछ इतना रोमांटिक था – कॉलेज के कैंटीन में चुपके से हाथ पकड़ना, शाम को पार्क में घूमना, और हां, वो किसिंग सेशन्स! जब भी मौका मिलता, वो मुझे दीवार के पास सटा लेता और होंठों पर होंठ रख देता। उसके हाथ मेरी कमर पर सरकते, फिर धीरे-धीरे ऊपर की ओर – मेरे मम्मों पर। कपड़ों के ऊपर से ही दबाता, निचोड़ता, जैसे कोई भूखा शेर अपनी शिकार को चख रहा हो। मैं सिहर उठती, सांसें तेज हो जातीं, लेकिन कभी आगे नहीं बढ़ पाते। घरवाले, दोस्त, कॉलेज – सब कुछ बीच में आ जाता। हम दोनों चुदाई के लिए तड़प रहे थे, रातों को बिस्तर पर लेटे-लेटे एक-दूसरे के बारे में सोचते और उंगली से खुद को संतुष्ट करते। मैंने कभी मुंह से नहीं कहा, “राहुल, मुझे चोदो ना,” क्योंकि शर्म तो आती थी ना? लड़की हूं मैं, शुरूआत तो लड़के ही करते हैं। और डर भी लगता था – क्या वो मुझे सस्ती समझेगा? लेकिन मन ही मन मैं प्रार्थना करती, “भगवान, बस एक मौका दे दो।”

फिर एक दिन वो मौका आ ही गया – जैसे किस्मत ने सुन ली हो। सुबह कॉलेज पहुंचते ही राहुल ने कान में फुसफुसाया, “समिता, आज मेरे घर कोई नहीं है। मम्मी-पापा गांव गए हैं, शाम को लौटेंगे। आना, अपना घर दिखाऊंगा तुझे।” उसकी आंखों में वो शरारत चमक रही थी, और मैं समझ गई – घर दिखाना तो बहाना है, असल में तो वो मेरी जवानी को नंगा देखना चाहता है। मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। चूत में एक हल्की सी गुदगुदी हुई, जैसे कोई बिजली का करंट दौड़ गया हो। “हां, आऊंगी,” मैंने कहा, और क्लास भर में बेचैन रही। घड़ी की सुई को घूरती रही, जैसे वो मेरी चाहत को पढ़ रही हो।

क्लास खत्म होते ही मैं उसकी बाइक पर सवार हो गई। हवा मेरे बालों में उड़ रही थी, उसकी पीठ से सटकर मैं महसूस कर रही थी उसके बदन की गर्मी। घर पहुंचे तो एक छोटा सा फ्लैट था – साफ-सुथरा, लेकिन आज वो मेरे लिए जन्नत था। दरवाजा बंद होते ही उसने अंदर से लॉक कर लिया। “बैठ जा सोफे पर,” कहा और टीवी ऑन कर दिया – कोई रोमांटिक मूवी चल रही थी, लेकिन हमारी नजरें तो एक-दूसरे पर टिकीं। “कैसा लगा मेरा घर?” उसने पूछा, मुस्कुराते हुए। “बहुत अच्छा,” मैंने कहा, लेकिन मन में चीख रही थी – ‘राहुल, अब बस कर, सीधे कह दे कि आज तू मेरी चूत में अपना लंड घुसाएगा!’

वो मेरे पास आया, मेरा हाथ पकड़ा और सहलाने लगा। उसकी उंगलियां मेरी हथेली पर सरक रही थीं, जैसे कोई जादू हो रहा हो। “समिता, आई लव यू,” बोला, आंखों में वो गहराई लिए। मैंने भी आंखें मिलाईं, “आई लव यू टू, राहुल।” बस, इतना ही काफी था। उसने मुझे अपनी ओर खींचा, अपनी मजबूत बाहों में कसकर जकड़ लिया। “तुम्हें पता नहीं, मैं तुम्हें कितना चाहता हूं। तुम्हारे बिना सांस नहीं आती। तुम्हारी ये आंखें, ये होंठ, ये बदन… सब कुछ परफेक्ट है।” मैं लजाते हुए बोली, “मैं भी तुझे बहुत चाहती हूं, राजा। तू मेरा सबकुछ है।” और फिर… उसके होंठ मेरे होंठों पर आ गए। वो किस इतना गहरा था, जैसे दो प्यासे यात्री पानी के स्रोत पर मिले हों। हमारी जीभें एक-दूसरे से लिपट गईं, सांसें मिलीं, लार का स्वाद महसूस हुआ। मैं उसके बालों में उंगलियां फेर रही थी, वो मेरी कमर को निचोड़ रहा था। कमरे में सिर्फ हमारी सिसकारियां गूंज रही थीं – आह्ह… उफ्फ… म्म्म…

पहले तो वो मेरी शर्ट के ऊपर से ही मम्मों को दबा रहा था, लेकिन जल्दी ही बर्दाश्त ना हो सका। हाथ पीछे सरका कर ब्रा का हुक खोल दिया। शर्ट ऊपर सरका दी, और पहली बार मेरे नंगे मम्मे उसके सामने थे – गोल, भरे-भरे, गुलाबी निप्पल्स तने हुए। मैं शरम से लाल हो गई, लेकिन जोश में डूबी हुई। “राहुल…” मैं फुसफुसाई। वो पागल हो गया – दोनों हाथों से मम्मों को पकड़ा, निचोड़ा, जैसे कोई बच्चा अपनी पसंदीदा खिलौना को दबा रहा हो। फिर सिर झुकाया और दाहिनी चूची को मुंह में भर लिया। ओह गॉड! वो चूसने लगा – छोटे बच्चे की तरह, जोर-जोर से। दांत हल्के से काटता, जीभ से चक्कर लगाता। दर्द और मजा का ऐसा मिश्रण, कि मेरी चूत से रस टपकने लगा। मैंने उसके सिर को कसकर पकड़ा, “चूसो राजा… हां, ऐसे ही… मर जाऊंगी मैं!” जैसे कोई मां अपने बच्चे को दूध पिला रही हो, मैं उसके बालों में उंगलियां फेर रही थी। मेरे मम्मे बड़े हैं – 34D साइज के – वो उन्हें मुंह में लेकर ऐसे चूस रहा था जैसे पूरा निगल जाएगा। जीभ निप्पल पर नाच रही थी, कभी चूचू-चूस, कभी चाट-चाट। करीब 20 मिनट ये सिलसिला चला – बारी-बारी दोनों चूचियों को। बीच-बीच में मैं उसके चेहरे को मम्मों पर दबा रही थी, सांसें तेज, बदन पसीने से भीगा। “राहुल, तू मुझे पागल कर देगा… आह्ह्ह!”

फिर वो उठा, अपनी शर्ट उतारी – उसकी छाती नंगी, मसल्स चमकते हुए। पैंट भी नीचे सरका दी, और उसका लंड बाहर आ गया – मोटा, लंबा, तना हुआ, टोपी लाल चमकती। मैं घूरती रह गई। “अब तू भी उतार,” बोला। मैंने स्कर्ट और पैंटी उतार फेंकी – अब हम दोनों नंगे। मेरे मम्मे चूसाई से चमक रहे थे, निप्पल्स और सख्त। जोश में मैं उसके ऊपर चढ़ गई, उसके लंड पर अपनी गांड और चूत रगड़ने लगी। वो नीचे लेटा सिसकारियां ले रहा था। मैंने पहले उसकी छाती पर किस किए – नमकीन स्वाद उसके पसीने का। फिर निप्पल्स को मुंह में लिया, चूसा। “हां डार्लिंग, चूसो इन्हें… ओह्ह, मजा आ रहा है!” वो कराहा। थोड़ी देर बाद मैं नीचे सरकी, उसके लंड तक। सांसें तेज, दिल धड़कता। लंड हाथ में लिया – गर्म, कड़ा, नसें फूली हुईं। “रानी, देख क्या रही है? चूस ले ना!” वो बोला।

मैंने जीभ निकाली, पहले टोपी पर चाटा – नमकीन, मस्की स्वाद। फिर होंठों से पकड़ा, चूसा। वो कराहा, “अह्ह्ह… जान, पूरा मुंह में ले… हां!” मैंने पूरा लंड मुंह में भरा – मुश्किल से आता था, लेकिन जोश में अंदर-बाहर करने लगी। सिर हिलाती, हाथ से सहलाती। “तुम तो एक्सपर्ट हो, समिता… ओह्ह फक!” वो तारीफ कर रहा था। फिर वो खड़ा हुआ, मैं घुटनों पर बैठ गई। लंड मुंह के पास – मैंने टाइट जकड़ा। अब वो मेरे मुंह की चुदाई करने लगा – जोर-जोर से अंदर-बाहर। गला तक जाता, आंसू आ जाते, लेकिन मजा… उफ्फ! 15 मिनट चला ये। अचानक स्पीड बढ़ी, और… गर्म रस मुंह में। पहली बार स्पर्म का स्वाद – थोड़ा नमकीन, चिपचिपा। मैं गर्म थी, सारा निगल गई। फिर लंड चाट-चाटकर साफ किया – चमक उठा वो।

अब हम साइड में लेटे, एक-दूसरे की बाहों में। सांसें धीमी हो रही थीं, लेकिन आग बुझी नहीं। थोड़ी देर बाद बोला, “फिर चूस ना।” मैंने ढीला लंड मुंह में लिया, चूसा – जल्दी ही फिर तन गया। अब उसने मुझे लिटाया, चूचियां चूसने लगा। हाथ नीचे सरका, चूत पर। मैं पहले से गीली थी – रस टपक रहा। उंगलियां होंठों पर फेरीं, फिर अलग कीं। “गीली हो गई रानी…” बोला। जोर से दबाया – आधी उंगली अंदर। “आह्ह!” दर्द और सुख की चीख निकली। फिर पूरी उंगली – मैं चिल्लाई। “घबराओ मत, अभी तो मेरा लंड तेरी चूत का रस पिएगा।” धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। अब मजा आने लगा – “जोर से करो!” मैं बोली। चूचियां चूसते हुए वो तेज हुआ, और मैं झड़ गई – शरीर कांप गया। उंगली निकाली, चाटी। “दुनिया का सबसे मीठा जूस… और मिलेगा?” “हां राजा, जितना चाहो।”

मैं आंखें बंद कर लेटी, लेकिन अचानक… उफ्फ! चूत पर नरम, गर्म एहसास। आंखें खोलीं – वो मुंह लगा रहा था! जीभ से चाट रहा, रस पी रहा। “ये… क्या?” मैं हंस पड़ी। “तेरा रस पी रहा हूं, डार्लिंग।” मैं तैयार हो गई, “चूस लो राजा… सारा रस पी लो, चूत को लाल कर दो!” सिर पकड़ा, दबाया। वो जीभ फेरने लगा – कुत्ते की तरह लंबी चाट। “जीभ अंदर घुसाओ!” बोली। पहले होंठों पर किस – जैसे मुंह पर। “ओह्ह… आह्ह… मर गई!” चीखी मैं। फिर जीभ अंदर – सांप की तरह लहराती। मैं बर्दाश्त ना कर सकी, सिर दबाया और उसके मुंह में झड़ गई – रस बह निकला। वो पीता रहा, चाटता रहा।

दोस्तों, ये तो बस शुरुआत थी – वो आग जो अभी सुलग रही थी। कैसे राहुल ने अपनी कुंवारी चूत में मोटा लंड घुसाया, मुझे चीखने पर मजबूर किया, और असली चुदाई का स्वर्ग दिखाया…

एक रात पति के दोस्त के साथ

मुंबई की बारिश भरी रात में, अनुश्री अपने पति रवि के साथ अपने आलीशान अपार्टमेंट में थी। अनुश्री, 29 साल की, गोरी, लंबे रेशमी बालों वाली, और कातिलाना फिगर वाली औरत थी। उसकी टाइट काली ड्रेस उसके भरे हुए बूब्स और गोल गांड को उभार रही थी, और उसकी आँखों में एक कामुक चमक थी। रवि, 34 साल का, एक बिज़नेसमैन था, जो अक्सर काम में व्यस्त रहता था। उस रात रवि का दोस्त, करण, उनके घर पर रुका था। करण, 32 साल का, मज़बूत जिस्म और आकर्षक मुस्कान वाला मर्द था, जिसकी नज़रें अनुश्री की हॉटनेस पर टिक गई थीं।

रवि को एक इमरजेंसी कॉल आया, और उसे रात में ही ऑफिस जाना पड़ा। “करण, तुम यहीं रुको, मैं सुबह तक आ जाऊँगा,” रवि ने कहा और जल्दी से निकल गया। अनुश्री और करण अकेले रह गए। बारिश की बूँदें खिड़कियों पर थपथपा रही थीं, और माहौल में एक अजीब सी कामुकता थी। अनुश्री ने करण को वाइन ऑफर की, और दोनों सोफे पर बैठकर बातें करने लगे। “तुम्हारी ड्रेस बहुत हॉट है, अनुश्री,” करण ने हँसते हुए कहा, और उसका लंड उसकी जीन्स में हलचल करने लगा। अनुश्री ने अपने होंठ चाटे और जवाब दिया, “तो तुम भी तो कुछ करो, मेरी चूत बेकरार हो रही है।”

करण की आँखें चमक उठीं। उसने अपनी वाइन का ग्लास साइड में रखा और अनुश्री के पास सरक गया। उसने अनुश्री का हाथ पकड़ा और उसे अपनी ओर खींच लिया। “तेरी चूचियाँ देखकर मेरा लंड काबू में नहीं है,” उसने फुसफुसाया। अनुश्री ने एक सेक्सी मुस्कान दी और अपनी ड्रेस का गला थोड़ा नीचे खींचा, जिससे उसके बूब्स की गहरी लकीर दिखने लगी। करण ने अनुश्री को दीवार से सटा लिया और उसके होंठों को चूमा, पहले धीरे, फिर गहराई से, उसकी जीभ को चूसते हुए। अनुश्री की चूत में एक सिहरन दौड़ गई, और उसने करण की शर्ट में उंगलियाँ डालकर उसे और करीब खींच लिया।

“तेरे होंठ कितने रसीले हैं,” करण ने कहा, और अनुश्री ने जवाब दिया, “तो मेरी चूत का स्वाद भी ले लो।” उसकी बात ने करण के लंड को और सख्त कर दिया। उसने अनुश्री की ड्रेस का ज़िप खोला, और उसकी काली ब्रा में कैद भारी चूचियाँ देखकर उसका लंड जीन्स में उछलने लगा। करण ने ब्रा का हुक खोला, और अनुश्री के बूब्स आज़ाद हो गए। उसने उन्हें कस के दबाया, उनके निप्पल्स को चूसा, और हल्के से काटा। “तेरी चूचियाँ कितनी मस्त हैं,” करण ने कराहते हुए कहा, और अनुश्री की सिसकियाँ कमरे में गूंजने लगीं।

अनुश्री ने करण को सोफे पर धकेल दिया और उसकी जीन्स खोली। उसका सख्त लंड बाहर आया, और अनुश्री ने उसे अपने हाथों में लिया। “वाह, तेरा लंड तो मोटा है,” उसने सेक्सी अंदाज़ में कहा, और उसे अपने होंठों से चूमा। उसने करण के लंड को धीरे-धीरे चूसना शुरू किया, अपनी जीभ से उसे सहलाते हुए। करण की सिसकियाँ निकलने लगीं, और उसने अनुश्री के बाल पकड़कर उसे और गहरे तक चूसने को कहा। अनुश्री की चूत में चुदाई की प्यास बढ़ रही थी, और उसने अपनी जांघें चौड़ी कर दीं।

करण ने अनुश्री को बिस्तर पर ले गया और उसकी ड्रेस पूरी तरह उतार दी। उसकी काली पैंटी पहले ही उसकी गीली चूत से चिपक चुकी थी। उसने पैंटी उतारी और अपनी उंगलियाँ अनुश्री की चूत में डालीं, उसे धीरे-धीरे रगड़ते हुए। “तेरी चूत कितनी गर्म और टाइट है,” करण ने फुसफुसाया, और अनुश्री ने कराहते हुए कहा, “तो अपने मोटे लंड से इसे चोद दे।” करण ने अपने लंड को अनुश्री की चूत पर रगड़ा और धीरे से अंदर डाल दिया। अनुश्री की एक हल्की सी चीख निकली, क्योंकि करण का लंड उसकी चूत को पूरा भर रहा था।

करण ने अनुश्री की चूत में अपने लंड को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। हर धक्के के साथ अनुश्री की चूचियाँ उछल रही थीं, और उसकी सिसकियाँ कमरे में गूंज रही थीं। “हाँ, मेरी चूत को चोद,” अनुश्री ने फुसफुसाया, और करण ने अपनी रफ्तार बढ़ा दी। उसका लंड अनुश्री की चूत की गहराई को छू रहा था, और उसकी गांड हर धक्के के साथ बिस्तर पर रगड़ रही थी। अनुश्री ने अपनी जांघें और चौड़ी कीं, जैसे करण के लंड को और गहरे तक बुला रही हो।

तभी रवि का दूसरा दोस्त, आदित्य, 30 साल का, मज़बूत जिस्म और शरारती मुस्कान वाला मर्द, अपार्टमेंट में आया। उसने दरवाज़ा खुला देखा और अंदर आ गया। अनुश्री की नंगी चूचियाँ और चुदाई देखकर उसका लंड तन गया। “अनुश्री, मुझे भी मज़ा चाहिए,” आदित्य ने हँसते हुए कहा, और अनुश्री ने एक सेक्सी मुस्कान के साथ जवाब दिया, “आ जा, मेरी चूत और गांड दोनों तैयार हैं।” करण ने हँसते हुए आदित्य को पास बुलाया, और दोनों ने अनुश्री को अपनी भूख का शिकार बनाया।

आदित्य ने अनुश्री की गांड को कस के पकड़ा और उसे थप्पड़ मारा। “तेरी गांड कितनी मस्त है,” उसने कहा, और अपनी उंगलियाँ अनुश्री की गांड के छेद पर फेरी। उसने धीरे से अपनी उंगली अंदर डाली, और अनुश्री की सिसकी और तेज़ हो गई। “मेरी गांड भी चोद,” उसने कराहते हुए कहा। करण ने अनुश्री की चूत में अपने लंड को और तेज़ी से चलाया, जबकि आदित्य ने अपने लंड को अनुश्री की गांड पर रगड़ा और धीरे से अंदर डाला। अनुश्री की चीख अब एक कामुक संगीत बन चुकी थी।

अनुश्री के जिस्म में दो लंड एक साथ थे—करण का लंड उसकी चूत चोद रहा था, और आदित्य का लंड उसकी गांड। उसकी चूचियाँ हवा में उछल रही थीं, और उसने दोनों को कस के पकड़ लिया। “हाँ, मेरी चूत और गांड को चोदो,” उसने सिसकते हुए कहा। करण ने अनुश्री के होंठों को फिर से चूमा, उसकी जीभ को चूसते हुए, जबकि आदित्य ने उसकी चूचियाँ दबाईं और उन्हें चूसा। अनुश्री का जिस्म पसीने और चुदाई की गर्मी से गीला हो चुका था।

तभी रवि का एक और दोस्त, सूरज, 35 साल का, अनुभवी और मज़बूत मर्द, अपार्टमेंट में आया। उसने अनुश्री की चुदाई देखकर अपना मोटा लंड पकड़ लिया। “अनुश्री, मुझे भी बुला ले,” उसने गहरी आवाज़ में कहा, और अनुश्री ने उसे एक सेक्सी नज़र दी। “सूरज, मेरे बूब्स और मुँह बाकी हैं,” उसने कहा। सूरज ने अपनी पैंट उतारी और अपना मोटा लंड अनुश्री के मुँह में डाल दिया। अनुश्री ने उसे चूसना शुरू किया, उसकी जीभ से उसके मोटे लंड को सहलाते हुए।

करण अब अनुश्री की चूत को ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था, उसका लंड हर धक्के में उसकी चूत की गहराई को छू रहा था। आदित्य ने उसकी गांड में अपने लंड को और गहरे तक धकेला, और अनुश्री की सिसकियाँ चीखों में बदल गईं। सूरज ने अनुश्री के बाल पकड़कर अपने मोटे लंड को उसके मुँह में और गहरे तक डाला, और अनुश्री ने उसे चूसते हुए सिसकियाँ भरीं। “तेरे मुँह में मेरा मोटा लंड कितना अच्छा लग रहा है,” सूरज ने कराहते हुए कहा।

चुदाई का ये खेल घंटों चला। अनुश्री की चूत, गांड, और मुँह तीनों मर्दों के लंड से भरे थे। करण ने अनुश्री की चूत में अपने लंड को और तेज़ी से चलाया, और आखिरकार उसकी चूत में अपनी गर्मी छोड़ दी। आदित्य ने उसकी गांड को चोदते हुए अपने लंड का रस उसकी गांड में छोड़ा। सूरज ने अनुश्री के मुँह से अपना मोटा लंड निकाला और उसकी चूचियों पर अपनी गर्मी बिखेर दी। अनुश्री का जिस्म पसीने, चुदाई, और तृप्ति से गीला था।

उस रात अनुश्री ने तीनों को एक सेक्सी मुस्कान दी और फुसफुसाया, “तुम्हारे लंडों ने मेरी चूत और गांड को यादगार बना दिया।” करण, आदित्य, और सूरज ने उसे अपनी बाहों में लिया, और बारिश की ठंडी रात में उनकी चुदाई की गर्मी सुबह तक बाकी थी।

नौकरानी की juicy चूत और गोल गाँड का मजा लिया पूरे वीकेंड

मेरी ये कहानी हाईटि की है, जब मैं सिर्फ 18 साल का लड़का था। अब मैं 34 का हूँ और अमेरिका में सेटल्ड हूँ। HSS की कहानियाँ पढ़-पढ़कर मन हुआ कि अपनी असली घटना भी शेयर करूँ। गिसेल हमारी घर की मदद करने वाली थी – 21 साल की, डार्क शाइनिंग स्किन, भारी-भारी और टाइट ब्रेस्ट्स, पतली कमर और नीचे वो गोल-मटोल onion ass जो हर बार झुकते वक्त मुझे पागल कर देती थी। घर में सब एक ही बड़े कमरे में सोते थे, कोई प्राइवेसी नहीं। मेरा क्वीन साइज बेड सबसे पीछे था।

एक सुबह मैं जल्दी उठा तो देखा गिसेल मेरे बगल में लेटी हुई है। उसकी नंगी जाँघ मेरी जाँघ से छू रही थी, साँसें धीरे-धीरे मेरे गाल पर पड़ रही थीं। दिल जोर से धड़कने लगा, लेकिन मैं चुपचाप उठकर अपनी वर्कआउट पर चला गया। घर लौटकर भी उसका ख्याल मन से नहीं हट रहा था। स्कूल में दिन भर यही सोचता रहा कि वो मेरे बेड पर क्यों आई? लेकिन कुछ दिन बीत गए, वो फिर नहीं आई। मैंने सोच लिया शायद नींद में गलती से आ गई होगी।

उस वक्त मेरा पूरा ध्यान पड़ोस की गोरी-सी लड़की पर था। मैं उसके घर घंटों बैठता, कविताएँ लिखकर देता, लेकिन वो बस मुस्कुराती रहती। स्कूल के दोस्त servant girls के साथ अपनी stories सुनाते और कहते, “भाई servant pussy सबसे स्वादिष्ट होती है।” मैं उन्हें सुनकर मुस्कुरा देता, सोचता कि मैं तो ऊँचे स्टैंडर्ड वाली लड़की चाहता हूँ। लेकिन किस्मत ने मुझे गिसेल के पास ले आया।

फ्राइडे को स्कूल जल्दी छूटा। मैंने घर फोन किया और बोला कि वीकेंड बेस्ट फ्रेंड के घर बिताऊँगा। दोस्त के घर पहुँचकर Sega खेलते-खेलते रात हो गई। अचानक नींद खुली तो देखा मेरा दोस्त अपनी servant को doggy style में चोद रहा है। लड़की की आहें और उसके हाथों का पकड़ना… सब देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया, लेकिन मैंने चुपचाप आँखें बंद कर लीं।

अगली सुबह गुस्सा मन में लेकर घर लौट आया। घर बिल्कुल खाली था। बैग फेंका और सीधा लिविंग रूम में मूवी लगाने चला। पेशाब करने बाथरूम गया तो… ओह माय गॉड! गिसेल बिल्कुल नंगी खड़ी थी, शावर लेने वाली थी। उसकी काली चमकदार स्किन पर पानी की बूँदें, भारी ब्रेस्ट्स जिनके गुलाबी-काले निप्पल्स सख्त हो चुके थे, पतली कमर, और नीचे हल्के-हल्के बालों वाला juicy pussy। देखते ही मेरे शरीर में बिजली दौड़ गई।

वो चौंककर मुड़ी, लेकिन भागी नहीं। उसकी आँखों में शर्म के साथ एक गहरी चाहत थी। मैं धीरे-धीरे उसके पास गया, उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ा और उसे अपने सीने से चिपका लिया। “गिसेल…” मैंने फुसफुसाया। उसने हल्का सा सिर हिलाया, जैसे इजाजत दे रही हो। मैंने झुककर उसका एक ब्रेस्ट मुँह में ले लिया। निप्पल को जीभ से घुमाते हुए, धीरे-धीरे चूसने लगा। दूसरा ब्रेस्ट हाथ में दबाते हुए मसल रहा था। गिसेल की साँसें तेज हो गईं, उसने मेरी पीठ पर नाखून गड़ा दिए और हल्के से कराह उठी – “आह… Maxi…”

मैं रफ्तार धीमी रखे हुए था। उसके ब्रेस्ट छोड़कर नीचे झुका, उसकी गहरी नाभि में जीभ घुमाई। अंदर बाहर करते हुए चूसने लगा। वो आँखें बंद करके सिर पीछे झुका लेती, शरीर काँप रहा था। मैंने थोड़ा पीछे हटकर उसे पूरा निहारा – क्या खूबसूरत मास्टरपीस थी! काली चमकती देह, भरे हुए स्तन, चिकनी जाँघें और वो साफ-सुथरा pussy।

मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए। मेरा लंड पूरा खड़ा, नसें फूली हुई। “गिसेल, आओ…” मैंने टब की तरफ इशारा किया। वो बिना कुछ बोले मेरे साथ अंदर आ गई। मैंने शावर ऑन किया, गुनगुना पानी दोनों के शरीर पर बहने लगा। मैंने उसे सावधानी से शेव किया, हर बाल साफ करते हुए। अब उसका pussy बिल्कुल स्मूद, गुलाबी और चमकदार हो गया।

मैं घुटनों पर बैठ गया, उसकी एक टांग अपने कंधे पर रखी और अपना मुँह उसके गीले, गरम छेद पर लगा दिया। जीभ से क्लिट को हल्के-हल्के फ्लिक करते हुए, कभी पूरा मुंह लगाकर चूसते हुए, कभी जीभ अंदर डालकर घुमाते हुए। पानी उसके ब्रेस्ट्स पर बह रहा था, वो मेरे बालों में हाथ फेर रही थी और लगातार कराह रही थी – “हाँ… वहाँ… धीरे… Maxi… आह!” उसका शरीर तन गया, जाँघें मेरे कंधे को जकड़ लीं और वो जोर से झड़ गई। पहली बार उसका रस मेरे मुंह में आया – मीठा और गर्म। मैंने उसे सहारा दिया, वो मेरी छाती पर सिर रखकर भारी-भारी साँसें ले रही थी।

“ये… पहली बार था… इतना मजा कभी नहीं आया,” वो हाँफते हुए बोली। मैंने पूछा तो पता चला कि वो पहले लोकल लड़कों के साथ थी, लेकिन किसी ने इतना प्यार और ध्यान नहीं दिया। फिर उसने बताया कि घर के बाकी सब लोग countryside गए हैं, सिर्फ वो रह गई थी ताकि मैं जल्दी आ गया तो घर खाली न पड़े। सुनकर मेरे मन में खुशी की लहर दौड़ गई – पूरे तीन दिन सिर्फ हम दोनों!

हम शावर से निकले, शरीरों पर पानी की बूँदें चमक रही थीं। मैंने उसे गोद में उठाया, उसके गोल गाँड को सहलाते हुए बेडरूम ले गया और बेड के बीच में लिटा दिया। उसकी टाँगें फैलाईं। गिसेल मुस्कुराई, मेरे मोटे लंड को नरम हाथों में पकड़ा और बोली, “इतना बड़ा और मोटा… उम्र से ज्यादा gifted हो तुम।” मैंने हँसते हुए कहा, “अब देखो इसे कैसे यूज करता हूँ।”

वो खुद ही मेरे लंड को अपने गीले, चिकने छेद पर रगड़ने लगी। मैं धीरे-धीरे अंदर घुसा। वो आह भरकर मेरी कमर को जकड़ ली। पूरा अंदर जाने पर मैं रुक गया, उसे आदत होने दिया। फिर हल्के-हल्के धक्के देने लगा, हर थ्रस्ट में उसके क्लिट पर रगड़ लगाते हुए। 15-20 मिनट बाद उसका शरीर फिर तन गया, आँखें बंद, मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं और वो जोर से झड़ गई – इस बार चुदाई के साथ पहली बार। उसकी चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी, बहुत गर्म और गीली।

उसके बाद हम रुके नहीं। missionary में, फिर doggy में – उसके गोल गाँड को पकड़कर जोर-जोर से थपथपाते हुए। Cowgirl में वो ऊपर बैठकर खुद राइड कर रही थी, ब्रेस्ट्स उछल रहे थे। Spooning में पीछे से चिपककर, उसके कान में फुसफुसाते हुए। शावर में दोबारा, किचन काउंटर पर, सोफे पर – हर जगह। कभी वो मेरे लंड को मुँह में लेती, गहरी तक चूसती, कभी मैं उसके pussy को घंटों चाटता।

तीन दिन तक हमने एक-दूसरे को बार-बार चखा। वो हर बार खुद माँगती – “और करो… गहरा… हाँ… मुझे भर दो…” मैं भी पूरी तरह उसकी हो गया था। उसके ब्रेस्ट्स चूसना, गाँड सहलाना, पसीने से भीगी देह चूमना – सब स्वर्ग जैसा लग रहा था।

जब घर वाले लौटे तो हम दोनों की नजरें मिलती तो चुपके से मुस्कुरा देते। वो अब भी मेरी सबसे हॉट और यादगार यार है।

सख्त भाभी को नौकर गोविंद ने बनाया अपनी रंडी

मेरा नाम अंकित है। मैं अठारह साल का जवान लड़का हूँ, कॉलेज का पहला साल चल रहा है। घर में भैया-भाभी के साथ रहता हूँ। भैया अक्सर बाहर रहते हैं, काम की वजह से। और घर की मालकिन हैं मेरी सुनीता भाभी – पैंतीस साल की, लेकिन देखने में पच्चीस की लगती हैं। गोरी-दूधिया रंग, मोटी-मांसल बदन, कसी हुई कमर, भारी-भारी नितंब और सबसे खास – उनके बड़े-बड़े, लटकते हुए स्तन। साड़ी पहनती हैं तो उनकी चूचियाँ ब्लाउज फाड़ने को तैयार रहती हैं। पूरे घर में सब उनसे डरते हैं। भैया भी उनकी सख्ती से परेशान रहते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा परेशान है हमारा नौकर गोविंद।

गोविंद तेईस साल का है – लंबा, तगड़ा, काला-कलूटा लेकिन बेहद मर्दाना। चौड़ी छाती, मोटी बाहें, और उसकी पैंट के अंदर जो उभार दिखता है, वो किसी भी औरत को पागल कर सकता है। भाभी उसे हर छोटी-मोटी बात पर डाँटतीं। “गोविंद, ये काम नहीं किया?” “गोविंद, कितनी बार बोलूँ?” कभी-कभी तो बिना वजह ही झाड़ लगातीं। गोविंद चुपचाप सब सह लेता, लेकिन उसके अंदर आग जल रही थी। मैंने कई बार देखा था – भाभी जब झुककर कुछ उठातीं, तो गोविंद की नजरें उनकी गांड पर टिक जातीं। या जब भाभी साड़ी संवारतीं तो उनकी चूचियों पर उसकी आँखें चिपक जातीं।

एक दोपहर की बात है। भैया किसी दोस्त से मिलने बाहर गए हुए थे। गर्मी का मौसम था, पंखा भी तेज चल रहा था। मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था, मोबाइल पर कुछ देख रहा था। अचानक ड्रॉइंग रूम से भाभी की तेज, सख्त आवाज आई – “गोविंद! इधर आ!” मैंने दरवाजा थोड़ा सा खोलकर झाँका। गोविंद खड़ा था, सिर झुकाए। भाभी उसे कुछ काम न करने की वजह से बुरी तरह डाँट रही थीं। उनकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था, ब्लाउज से उनकी भारी चूचियाँ उभरी हुई दिख रही थीं।

अचानक गोविंद ने आगे बढ़कर भाभी के घने, काले बालों को हल्के से पकड़ लिया। भाभी चौंक गईं। “क्या कर रहा है तू? पागल हो गया है? छोड़ मुझे!” उनकी आवाज में गुस्सा था, लेकिन गोविंद की आँखों में आज कुछ और ही चमक थी – वो दबी हुई भूख जो सालों से जल रही थी। वह धीरे से, लेकिन दृढ़ता से बोला, “मालकिन… बहुत दिन से तुम्हारी सख्ती सह रहा हूँ। तुम्हारी चीखें, तुम्हारी डाँट… अब बस। आज मेरी बारी है।”

भाभी ने हाथ-पैर मारे, विरोध किया, “छोड़! मैं चीख दूँगी!” लेकिन गोविंद ने उन्हें दीवार से सटाकर खड़ा कर दिया। उसका एक हाथ उनके बालों में था, दूसरा हाथ उनकी कमर पर, उन्हें अपनी तरफ खींचे हुए। उसने धीरे-धीरे भाभी की गरदन पर होंठ रख दिए, फिर चूमने लगा। भाभी काँप गईं, “नहीं… गोविंद… ये पाप है… छोड़ दे…” लेकिन उनकी साँसें तेज हो चुकी थीं। गोविंद ने उनकी बातों को अनसुनी कर दिया। उसने भाभी की ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोलने शुरू कर दिए।

बटन खुले। भाभी की भारी-भारी, गोरी-गोरी चूचियाँ काले रंग की ब्रा में कैद दिखाई देने लगीं। गोविंद ने ब्रा का हुक खोला और नीचे सरका दिया। बाहर आ गईं दोनों बड़े-बड़े, गुलाबी निप्पल वाली चूचियाँ – भारी, नरम, हिलती हुई। गोविंद ने एक चूची को हथेली में भर लिया और हल्के से दबाया। भाभी के मुँह से अनायास ही “आह्ह्ह…” निकल गया। “देखो मालकिन,” गोविंद मुस्कुराया, “तुम्हारा बदन कितना प्यासा है… कितने दिन से ये चूचियाँ मेरे मुँह को तरस रही थीं।”

उसने झुककर एक चूची को मुँह में ले लिया। धीरे-धीरे चूसने लगा, जीभ से निप्पल को घुमाने लगा, काटने लगा। भाभी की साँसें और तेज हो गईं। उन्होंने विरोध में हाथ मारा, लेकिन गोविंद ने दूसरे हाथ से उनकी दूसरी चूची को जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया। भाभी की आँखें बंद हो गईं। “उफ्फ़… गोविंद… मत करो… आह्ह्ह… ओह्ह… हाँ…” उनकी आवाज में अब दर्द नहीं, बल्कि प्यास थी।

गोविंद ने भाभी को धीरे से फर्श पर लिटा दिया। उनकी साड़ी ऊपर सरकाई। भाभी की मोटी, चिकनी, गोरी जाँघें और सफेद पैंटी दिख गई। गोविंद ने पैंटी को एक झटके में उतार दिया। भाभी की बिना बाल वाली, गुलाबी-गुलाबी चूत अब पूरी तरह नंगी थी – थोड़ी सी गीली हो चुकी थी। गोविंद ने अपनी उँगली से हल्के से चूत की फाँक को छुआ। भाभी काँप उठीं, “नहीं… वहाँ मत छू… आह्ह्ह…” लेकिन गोविंद ने झुककर चूत की ऊपरी फाँक को चाटना शुरू कर दिया। जीभ अंदर-बाहर करने लगा, चूसने लगा। भाभी अब खुद ही जाँघें फैला रही थीं। “आह्ह्ह… गोविंद… क्या कर रहा है… उफ्फ़… हाँ… यही… और गहरी… आह्ह्ह… मैं पागल हो रही हूँ…”

गोविंद ने अपनी पैंट उतार दी। उसका लंड – मोटा, लंबा, करीब नौ इंच का, काला और नसों वाला – खड़ा होकर तन गया था। भाभी की आँखें फैल गईं। “इतना बड़ा… नहीं… ये अंदर नहीं जाएगा…” लेकिन गोविंद ने भाभी को टेबल पर झुकाया। भाभी अब खुद ही अपनी साड़ी ऊपर कर रही थीं। गोविंद ने लंड का सिरा भाभी की चूत पर रगड़ा, फिर धीरे-धीरे अंदर डाल दिया। भाभी की चूत पूरी तरह भर गई। “आआह्ह्ह्ह… कितना मोटा है… उफ्फ़… गोविंद… फट जाएगी मेरी चूत… आह्ह्ह…”

गोविंद ने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। हर धक्के के साथ भाभी की भारी चूचियाँ जोर-जोर से हिल रही थीं। भाभी अब चीख नहीं, मोहक आहें भर रही थीं – “हाँ… और जोर से… आह्ह्ह… चोद मुझे… मैं तेरी हूँ आज… तेरी रंडी हूँ…” गोविंद ने रफ्तार बढ़ाई। भाभी की चूत से चिकनाई निकल रही थी, आवाजें “पच-पच” कर रही थीं। उसने भाभी की कमर पकड़कर पीछे से तेज-तेज धक्के मारे। भाभी की मोटी गांड हर धक्के पर लहरा रही थी। “आह्ह्ह… गोविंद… मैं तेरी गुलाम हूँ… जो कहेगा वो करूँगी… बस मत छोड़ना… चोदते रहो मुझे…”

गोविंद ने भाभी को उठाकर अपनी गोद में ले लिया। भाभी ने अपनी दोनों जाँघें गोविंद की कमर पर लपेट लीं। लंड अब भी चूत के अंदर था। गोविंद उन्हें उठाकर किचन तक ले गया। वहाँ काउंटर पर बिठाकर बिना रुके चोदता रहा। भाभी का बदन पसीने से तर था। उनकी चूचियाँ गोविंद के सीने से रगड़ खा रही थीं। “हाँ… किचन में ही चोद… मैं तेरी हूँ… आह्ह्ह…”

फिर स्टोर रूम में ले जाकर गोविंद ने भाभी को दीवार से सटाकर खड़ा किया और पीछे से फिर चोदने लगा। भाभी अब पूरी तरह टूट चुकी थीं। वे खुद पीछे गांड हिला रही थीं। “हाँ… मेरी गांड भी मार… मैं तेरी रंडी हूँ आज…” गोविंद ने भाभी की गांड पर हल्के से थपकी मारी और लंड को चूत से निकालकर गांड के अंदर सरका दिया। भाभी ने पहले हल्का सा “आह्ह्ह…” कहा, फिर खुद ही गांड पीछे की ओर धकेलने लगीं। “उफ्फ़… दर्द हो रहा है… लेकिन अच्छा लग रहा है… और गहरी… चोद मेरी गांड…”

मैं सब कुछ अपने कमरे से छिपकर देख रहा था। मेरा लंड पत्थर की तरह खड़ा हो गया था। भाभी को इस हालत में देखकर मुझे यकीन नहीं हो रहा था – वही सख्त मालकिन, जो कभी किसी को नहीं मानती थीं, आज नंगी होकर गोविंद के लंड पर चढ़ी हुई चीख-चीख कर चुद रही थीं।

बाथरूम में भी उन्होंने चुदाई की। गोविंद ने भाभी को शावर के नीचे खड़ा करके चोदा। पानी उनके बदन पर बह रहा था। भाभी की चूचियाँ चमक रही थीं, पानी की बूँदें उनकी निप्पल से टपक रही थीं। गोविंद ने भाभी को घुटनों पर बैठाकर अपना लंड मुँह में दिया। भाभी ने बिना हिचकिचाहट चूसना शुरू कर दिया – गला भरकर, जीभ घुमाकर। “मुझे पिला दो… सब पिला दो…” गोविंद ने भाभी के मुँह में ही जोर-जोर से झड़ दिया। भाभी ने सारा गाढ़ा, गर्म रस पी लिया, एक बूँद भी नहीं छोड़ी।

फिर बेडरूम में आखिरी राउंड। गोविंद ने भाभी को कुत्ते की तरह बनाया। भाभी ने खुद साड़ी ऊपर करके अपनी मोटी, सफेद गांड फैला दी। गोविंद ने लंड चूत में डाला और तेज-तेज चोदने लगा। भाभी चीख रही थीं – “आह्ह्ह… मार डाला… हाँ… और जोर से… मैं तेरी गुलाम हूँ गोविंद… हमेशा तेरी रहूँगी… चोदते रहो मुझे… कभी मत छोड़ना…” गोविंद ने भाभी की चूचियों को पीछे से पकड़कर खींचा और आखिरी बार जोरदार झटके दिए। दोनों एक साथ झड़ गए – भाभी की चूत से रस बह रहा था, गोविंद का लंड उनके अंदर दूध उगल रहा था।

उस दिन के बाद भाभी पूरी तरह बदल गईं। अब वे गोविंद को कभी नहीं डाँटतीं। बल्कि जब भी मौका मिलता, भाभी खुद गोविंद को बुलातीं – “गोविंद… कमरे में आ…” और चुपके से उससे चुदवातीं। कभी किचन में खड़े-खड़े, कभी बाथरूम में शावर के नीचे, कभी बेडरूम में पूरी रात। मैं सब छिपकर देखता रहता। भाभी अब खुशी-खुशी गोविंद की गुलाम बन गई थीं – और ये गुलामी उन्हें बहुत पसंद आ रही थी। उनकी आँखों में अब वही पुरानी सख्ती नहीं, बल्कि एक नई चमक थी – चुदाई की चमक।

और मैं… मैं रोज देखता हूँ और सोचता हूँ – काश मैं भी गोविंद की जगह होता। लेकिन फिलहाल, ये गुप्त तमाशा देखकर ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है।

घर की सफाई वाली लड़की से जंगली चुदाई

मेरा नाम जफर है, उम्र 22 साल, और मैं दिल्ली में रहता हूँ। मैं जिम में रेगुलर वर्कआउट करता हूँ, इसलिए मेरा बॉडी फिट और आकर्षक है—चौड़े कंधे, टोन्ड एब्स, और गोरा रंग जो लड़कियों को इम्प्रेस कर देता है। और हाँ, मेरा 7 इंच का टूल हमेशा तैयार रहता है, मोटा और नसों वाला, जो लॉकर रूम में भी सबकी नजरें खींच लेता है। लेकिन चलो, सीधे कहानी पर आते हैं, बिना किसी फालतू की बात के।

हमारे घर में एक सर्वेंट आंटी आती थीं, जो अपनी बेटी के साथ सफाई का काम करतीं। आंटी की बेटी, इकरा, 20 साल की थी, और वो हमारे घर की सफाई करके पड़ोस के दूसरे घरों में चली जाती। वो गोरी-चिट्टी थी, स्मार्ट फिगर वाली—क्या बताऊँ, उसकी कमर पतली, हिप्स गोल और भरे हुए, और ब्रेस्ट्स फुल और पर्की, जो उसके सिंपल सलवार कमीज में भी उभरकर दिखते थे। उसका चेहरा इतना क्यूट था—बड़ी-बड़ी आँखें, मुलायम होंठ, और जब वो चलती तो उसकी चाल में एक सेक्सी स्विंग होता, जो दिल की धड़कन तेज कर देता। वो इतनी सेक्सी लगती कि बस देखते ही मन करता उसे छू लूँ। मैं अक्सर सोचता कि काश उसके साथ कुछ हो जाए।

मॉम अक्सर बाहर जातीं—कभी शॉपिंग, कभी रिश्तेदारों के यहाँ—और तब घर में मैं और इकरा अकेले रह जाते। मैं मौके का फायदा उठाता, आने-जाने में उसकी बॉडी को हल्के से टच करता। जैसे जब वो किचन में बर्तन धो रही होती, मैं ग्लास लेने के बहाने उसके पीछे से गुजरता और मेरा हाथ उसकी अस पर ब्रश हो जाता—उसकी नरम, गोल गांड की फीलिंग इतनी अच्छी लगती कि मेरा लंड तुरंत खड़ा हो जाता। वो पीछे मुड़कर शरमाती हुई मुस्कुराती, लेकिन कभी मना नहीं करती। मैं जानता था कि वो भी मुझे नोटिस करती है, उसकी आँखों में वो चमक थी जो बताती कि इंटरेस्ट दोनों तरफ से है।

एक दिन मॉम को किसी रिश्तेदार के घर जाना था, घर में कोई नहीं था, और मैं ट्यूशन गया हुआ था। जाते वक्त मॉम ने कहा, “जफर, टाइम पर घर आ जाना, इकरा अकेली होगी।” उस दिन हमने इकरा को घर नहीं जाने दिया, ताकि वो खाना बना सके। हमारा घर कभी लॉक नहीं होता था, क्योंकि कोई न कोई हमेशा रहता। इसलिए उसे रोक लिया गया। मैं ट्यूशन से जल्दी फ्री हो गया—उस दिन मैंने सोचा कि आज उसके साथ कुछ स्पेशल टाइम स्पेंड करूँगा, शायद वो मोमेंट आए जो मैं इंतजार कर रहा था। घर पहुँचा तो वो किचन में चावल साफ कर रही थी। उसने चोले भिगो रखे थे खाना बनाने के लिए। मैंने कहा, “इकरा, ऊपर आओ ना, मैं तुम्हें कुछ अच्छा म्यूजिक सुनाता हूँ। मॉम आने से पहले खाना बना लेना।” मैं भूल गया बताना कि उसे म्यूजिक बहुत पसंद था, वो अक्सर काम करते हुए गुनगुनाती रहती। वो हिचकिचाई, लेकिन मेरी बात मान ली और कंप्यूटर रूम में आ गई।

वहाँ पहुँचकर मैंने उससे कैजुअल बातें शुरू कीं—कैसे हो, क्या चल रहा है, वगैरह। बातों-बातों में मैंने कंप्यूटर पर सेव्ड कुछ सेक्सी पिक्चर्स ओपन कर दीं—हॉट मॉडल्स की इमेजेस, जो थोड़ी बोल्ड थीं। वो चौंक गई, “ये क्या खोल दिया आपने, जफर?” मैंने मुस्कुराकर उसका बाजू पकड़ा, धीरे से उसे पास के बेड पर लिटा दिया। वो शरम से लाल हो गई, लेकिन विरोध नहीं किया। मैंने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और प्यार से उसके होंठों पर किस करना शुरू किया। उसके होंठ इतने मुलायम थे, जैसे मखमल, और वो पहले तो थोड़ा पीछे हटी, लेकिन फिर सरेंडर कर दी। मैं जानता था कि वो भी मुझे पसंद करती है—हमारी आँखों में वो स्पार्क था, जो बताता कि ये म्यूचुअल है। किस करते-करते मैंने उसके बूब्स को सॉफ्टली प्रेस करना शुरू किया, उसके दुपट्टे को साइड किया और कमीज ऊपर उठाने लगा। वो मुस्कुरा रही थी, जैसे कह रही हो कि ये सब अच्छा लग रहा है, जारी रखो।

फिर मैंने उसकी कमीज उतार दी, उसके ब्रेस्ट्स अब मेरे सामने थे—गोरे, फर्म, और निप्पल्स पिंकिश ब्राउन, जो उत्तेजना से सख्त हो चुके थे। मैंने उसके बूब्स पर किस किए, जीभ से चाटा, और बॉडी पर हाथ फेरने लगा—उसकी कमर से लेकर हिप्स तक। वो अब चुप हो गई थी, बस एंजॉय कर रही थी, उसकी साँसें तेज हो रही थीं। मैंने उसकी ब्रा अनहुक की और निप्पल्स को मुँह में लेकर चूसने लगा, हल्के से काटा भी। अब उसे मजा आने लगा था, उसके मुँह से धीमी-धीमी आहें निकल रही थीं, “आह्ह्ह… उह्ह्ह… जफर…” और वो मेरे बालों में उंगलियाँ फेर रही थी, मुझे और करीब खींच रही। किस करते-करते मैंने उसकी शलवार का नाड़ा ढीला किया और नीचे खींचना शुरू किया। मैं उसके ऊपर लेटा था, हमारी बॉडीज एक-दूसरे से चिपकी हुईं। शलवार थोड़ी नीचे करने के बाद मैंने उसे उठाया और पूरी उतार दी। नीचे उसने कुछ नहीं पहना था—उसकी चूत साफ, गुलाबी, और पहले से ही गीली हो चुकी थी। अब वो मेरे सामने पूरी न्यूड थी, उसकी बॉडी परफेक्ट थी, जैसे कोई स्कल्प्चर।

फिर उसने शरमाते हुए कहा, “आपने मुझे न्यूड कर दिया, लेकिन आप अभी कपड़ों में हो। अनफेयर है ना?” मैंने हँसा और उसकी मदद से अपनी शर्ट उतारी, फिर ट्राउजर भी। अब हम दोनों बिल्कुल न्यूड थे—मेरा लंड फुल इरेक्शन में, जो उसे देखकर और एक्साइटेड हो गया। मैं उसके बूब्स चूसने लगा, पागलों की तरह, उन्हें दबाते हुए, और साथ ही उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा—उंगलियाँ से क्लिट को रब किया, अंदर-बाहर किया। वो तड़प रही थी, उसकी चूत गीली हो गई थी। थोड़ी देर बाद मैंने बूब्स छोड़े और उसे अपना लंड पकड़ाया—जिसे देखकर वो पहले ही एक्साइटेड हो गई थी, उसकी आँखें चमक रही थीं। पहले तो इनकार किया, “नहीं जफर, शर्म आती है,” लेकिन मैंने इंसिस्ट किया और वो मान गई। वो मुँह में लेकर चूसने लगी—धीरे-धीरे, लेकिन जल्दी ही एक्सपर्ट की तरह। अब मैं बेड पर बैठा था और वो जमीन पर घुटनों के बल बैठी मुझे ब्लोजॉब दे रही थी, दुनिया का सबसे ज्यादा मजा। मैं उसके बाल पकड़कर उसके सिर को आगे-पीछे कर रहा था, डीप थ्रोट करवा रहा था। इससे पहले जब मैं उंगली से उसकी चूत सहला रहा था, वो दो बार झड़ चुकी थी—उसकी बॉडी काँप उठी थी, और वो “आह्ह्ह… जफर… बस…” कहती रही। और जब मेरा क्लाइमैक्स आया तो मैंने उसके सिर को और जोर से मूव किया। फिर मैं उसके मुँह में ही झड़ गया—गर्म कम बाहर निकला, उसने कुछ स्वॉलो किया और बाकी उसके चिन पर गिर गया। वो मुस्कुराई और उसे साफ किया।

उसके बाद मैं नीचे झुका और जीभ से उसकी चूत के चारों तरफ सर्कल बनाने लगा—क्लिट को चाटा, अंदर जीभ डाली। वो पागल हो गई, “जफर, पता नहीं मुझे क्या हो रहा है… इतना अच्छा लग रहा है… अपनी चीज मेरी चूत में डालो… प्लीज, अब सहन नहीं होता।” मैंने उसकी बात मान ली क्योंकि मेरा टूल भी पूरी तरह रेडी था, फिर से हार्ड। तो मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रखा और धीरे-धीरे अंदर डालने लगा। उसकी चूत टाइट थी, वर्जिन लग रही थी, लेकिन गीली होने से आसान हो गया। मैंने धीरे-धीरे किया ताकि मजा आए, कोई दर्द न हो। वो वर्जिन थी, लेकिन सब सॉफ्टली हुआ—कोई ब्लड नहीं, बस प्लेजर। इस बार उसकी टोपी अंदर चली गई। वो आवाजें निकाल रही थी, “अंदर करो… मुझे इसकी जरूरत है… और डालो, जफर।” मैंने एक सॉफ्ट पुश से अपना आधा लंड उसकी चूत में डाला तो वो सिसकारी, “ओऊऊ… मजा आ रहा है…” लेकिन कोई दर्द नहीं, बस एक्स्टसी। मैंने बात नहीं मानी और दूसरी स्ट्रोक में और अंदर किया, जितनी जगह मिली। और अब फुल स्ट्रोक्स लगाने लगा—धीरे से स्पीड बढ़ाई। उसकी पहले की सिसकारियाँ अब “हम्म… आह्ह्ह्ह्ह… ओोोह्ह्ह्ह… मजा आ रहा है… और जोर से करो, जफर… हाँ, ऐसे ही…” में बदल गईं। और वो भी अपनी बॉडी को मेरे स्ट्रोक्स के साथ मूव करने लगी, हिप्स ऊपर उठाकर मुझे और डीप ले रही थी। हमारी बॉडीज का स्लैपिंग साउंड रूम में गूँज रहा था, पसीना बह रहा था। तकरीबन 6 मिनट बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने फौरन लंड बाहर निकाला और उसके चेस्ट पर सारा कम डाल दिया—गर्म, स्टिकी फ्लूइड उसके बूब्स पर फैल गया। वो उसे अपने चेस्ट पर मलने लगी, जैसे एंजॉय कर रही हो, और फिर मुझे अपने साथ लेटने को कहा। मैं लेटा तो हमने जोर से एक-दूसरे को हग किया, हमारी नंगी बॉडीज चिपकी हुईं, और थोड़ी देर ऐसे ही रहे—साँसें मिलाकर, दिल की धड़कनें सुनकर। फिर वो कहने लगी, “मुझे नहीं पता था कि ये सब करने से इतना मजा आता है… तुमने मुझे जन्नत दिखा दी।”

 

बेडशीट पर कुछ स्पॉट्स थे—हमारे कम के, लेकिन कोई ब्लड नहीं। हम जल्दी उठे और वो बाथरूम नहाने गई, साथ बेडशीट भी धोने ले गई। दरवाजा खुला था तो मैं पहले बाहर से देखता रहा—उसकी न्यूड बॉडी पानी के नीचे चमक रही थी, ब्रेस्ट्स पर पानी बहता हुआ। जब वो बेडशीट धोकर नहाने लगी तो मैं पीछे से जाकर पकड़ लिया, उसे दीवार से सटाया और वहाँ भी किस किया—उसके होंठों पर पड़ा पानी और उसकी स्वीटनेस टेस्ट करने लगा। नहाने के दौरान भी मैंने उसे बहुत टीज किया—उसकी चूत पर हाथ फेरा, बूब्स दबाए, और वो हँसते हुए कहती, “जफर, अब मुझे जाने दो, ऐसा न हो कि आपकी मॉम आ जाएँ और मुझे खाना भी बनाना है।” बाहर आकर उसने नई बेडशीट बेड पर डाली और नीचे जाकर खाना बनाने लग गई। मैं भी ऊपर कंप्यूटर पर गाने सुनने लग गया, लेकिन मन में वो मोमेंट्स रीप्ले हो रहे थे। इसके बाद हमने कई बार ऐसे एंजॉय किया—जब भी मौका मिलता, घर में अकेले होते, तो वो इंटेंस सेशंस। अब उसकी शादी हो गई है और एक बच्चा भी है उसका। लेकिन अब भी जब वो अपनी मॉम-डैड के साथ मिलने आती है, तो हमारे घर जरूर आती है—शायद पुरानी यादें ताजा करने। तुम मुझे जरूर बताना कि ये स्टोरी कैसी लगी। अपनी कमेंट्स मेरे ईमेल आईडी पर जरूर भेजना और अगर कोई लड़की या आंटी चाहे तो मैं हूँ ना। मेरा ईमेल आईडी…

साहब ने उर्मिला बाई को ब्लाउज़-पेटीकोट में ही चोद डाला

महाराष्ट्र के छोटे कस्बे में २४ साल के साहब और ३२ साल की मरियल उर्मिला बाई की पहली मुलाकात। कैसे नौकरानी उर्मिला बन गई साहब की गुप्त सेक्स पार्टनर। भारी छातियाँ, घनी काली चोटी, मोटी गांड और जूड़ा खोलकर की गई पहली चुदाई की पूरी गर्म कहानी। असली देसी हिंदी सेक्स स्टोरी पढ़ें।

महाराष्ट्र के एक छोटे-से कस्बे में मेरी कंपनी ने मुझे ट्रांसफर कर दिया था। मात्र २४ साल का, सिंगल, अच्छी सैलरी और एक सुंदर दो-बेडरूम फ्लैट। बाहर से देखने में सब कुछ परफेक्ट लगता था, लेकिन अंदर से अकेलापन मुझे रात-रात भर सताता था। खासकर उन ठंडी, सुनसान रातों में जब मन में सिर्फ़ एक ही बात घूमती — महाराष्ट्रीयन औरतों का वो अनोखा जादू।

मुझे हमेशा से उनकी घनी, काली, रेशमी चोटियाँ, मोटी-मोटी कमर, भारी-भरकम छातियाँ, चौड़े कूल्हे और नशीली आँखें बेहद आकर्षित करती थीं। सबसे ज्यादा दीवाना था उन “बाई” और “माई” टाइप की औरतों का, जिनकी देह इतनी गोल-मोल, रसीली और मांसल होती है कि एक नजर में ही लोहे की तरह खड़ा हो जाता है।

कुछ दिनों बाद मैंने फैसला कर लिया कि अब अकेले रहना मुश्किल है। साथी कर्मचारियों से पूछताछ की तो सबने एक ही नाम लिया — **उर्मिला**.

“३२ साल की है साहब। पति ने दो साल पहले छोड़ दिया। कोई बच्चा नहीं। बहुत गरीब है, लेकिन काम बहुत ईमानदारी से करती है,” उन्होंने बताया।

अगली सुबह ठीक ७:३० बजे दरवाज़े पर दस्तक हुई।

जैसे ही मैंने दरवाज़ा खोला, मेरा सारा शरीर सिहर उठा। सामने उर्मिला खड़ी थी।

साधारण लेकिन बेहद आकर्षक महाराष्ट्रीयन साड़ी — गहरे लाल और पीले रंग की, जो उसके चौड़े कूल्हों और मोटी कमर पर इतनी टाइट और लुभावने ढंग से लिपटी हुई थी कि देखते ही साँस अटक गई। ब्लाउज़ उसकी भारी, गोल-गोल छातियों को मुश्किल से समेट पा रहा था। दो बड़े-बड़े, पके आमों की तरह वे ब्लाउज़ के कपड़े को फाड़ने को तैयार लग रहे थे। बालों में तेल लगाकर कसकर जूड़ा बाँधा हुआ था, जिससे उसकी लंबी, मोटी गरदन और गोरी पीठ साफ़ दिख रही थी। चेहरे पर हल्का पसीना, नशीली आँखें और मोटे, गुलाबी होंठ।

पहली ही नजर में मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया। पजामे के अंदर सख्ती से तन गया।

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “अंदर आ जा उर्मिला। चाय और नाश्ता बना दे।”

जैसे ही वह किचन की तरफ़ बढ़ी, मैंने मुख्य दरवाज़ा धीरे से बंद किया और चिटकनी चढ़ा दी। फिर चुपके से उसके पीछे पहुँच गया।

उसकी कमर पर दोनों हाथ रखे। उर्मिला चौंककर रुक गई। मैंने अपना शरीर उसके शरीर से सटा दिया और अपनी सख्त, गर्म लट्ठी को उसकी भारी, नरम गांड पर धीरे-धीरे रगड़ने लगा।

“साहब…!” वह हल्के से घबरा गई और हाथ हिलाकर मुझे हटाने की कोशिश करने लगी।

लेकिन मैंने उसे और कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया। मेरे होंठ उसके बाएँ कान के बिल्कुल पास पहुँच गए। गहरी, भारी आवाज़ में फुसफुसाया,

“डर मत उर्मिला… मैं तुझे कोई नुकसान नहीं पहुँचाऊँगा। बस… मुझे पता है कि तुझे भी ये अकेलापन बहुत सताता होगा। आज से तू सिर्फ़ इस घर की सफाई और खाना ही नहीं करेगी… तू मेरी हर इच्छा भी पूरी करेगी। जितना मैं तुझे खुश रखूँगा, उतना ही तुझे भी अच्छा लगेगा। समझी?”

उसकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं। मैंने अपना एक हाथ उसके ब्लाउज़ के अंदर सरका दिया। गर्म, नरम, भारी छातियों को अपनी हथेली में भर लिया। उँगलियों से उसके कठोर होते जा रहे निप्पल्स को धीरे-धीरे घुमाने लगा। दूसरे हाथ से उसकी कमर को सहलाते हुए, उसके गले और कान पर हल्के-हल्के गीले चुंबन बिखेरने लगा।

उर्मिला की साँसें अब और भी भारी हो गई थीं। उसका शरीर पहले विरोध कर रहा था, लेकिन धीरे-धीरे ढीला पड़ने लगा। उसकी आँखें बंद हो गईं।

मैंने उसे धीरे से अपनी तरफ़ घुमाया। उसकी आँखों में गहरी नजर डाली और मुस्कुराया। फिर उसकी साड़ी का पल्लू पकड़कर धीरे से खींचा। साड़ी सरकती हुई फर्श पर गिर गई। अब वह सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में मेरे सामने खड़ी थी — शर्म से दोनों हाथों से अपनी भारी छातियाँ ढक ली थीं।

मैंने प्यार से उसके हाथ हटाए और धीमी आवाज़ में बोला,

“शर्मा मत… तू बहुत सुंदर है उर्मिला। सच में… बहुत रसीली।”

फिर मैंने उसके जूड़े में हाथ डाला। एक हल्का सा खींचा और… झट से उसके घने, काले, रेशमी बाल खुल गए।

वाह…!

लंबे, घने, चमकदार बाल उसकी कमर से भी नीचे तक लहराते हुए गिर गए। इतने मोटे और सुंदर कि देखते ही मन हुआ कि इन्हें अपने हाथों में लपेट लूँ, चेहरे पर मल लूँ।

मैंने उसके बालों को अपनी मुट्ठी में भर लिया और धीरे से उसे नीचे घुटनों पर बिठा दिया। पजामा उतारा और अपना मोटा, नसों वाला, पूरी तरह खड़ा लंड उसके चेहरे के सामने कर दिया।

“चूस ले… धीरे-धीरे… बहुत प्यार से।”

शुरू में उर्मिला हिचकिचाई। उसकी आँखों में शर्म और डर दोनों थे। लेकिन जब मैंने उसके बालों को प्यार से सहलाते हुए फुसफुसाया,

“तुझे भी अच्छा लगेगा… मैं वादा करता हूँ। आज से हम दोनों का अकेलापन खत्म हो जाएगा।”

तो उसने धीरे-धीरे अपना गर्म, नम मुँह खोला। जैसे ही मेरा लंड उसके होंठों के बीच घुसा, मुझे एक झटका-सा लगा। गर्मी, नमी और उसकी जीभ का स्पर्श — स्वर्ग जैसा एहसास था।

वह धीरे-धीरे चूसने लगी। मैंने उसके सिर को दोनों हाथों से पकड़कर हल्की गति से आगे-पीछे करना शुरू कर दिया। बीच-बीच में उसके लंबे बालों को अपनी उँगलियों में लपेट लेता, हल्का-हल्का खींचता, जिससे उसे हल्का दर्द और ज्यादा उत्तेजना दोनों मिलती।

जब मैं क्लाइमेक्स के बहुत करीब पहुँच गया, तो लंड बाहर निकाला। उसके बालों को मुट्ठी में कसकर पकड़कर उसका चेहरा ऊपर की तरफ़ किया और गर्म-गर्म, गाढ़ा वीर्य उसके चेहरे, गालों, होंठों और ठोड़ी पर फव्वारे की तरह छोड़ दिया। कुछ बूँदें उसके खुली चोटी के बालों पर भी गिर गईं।

उर्मिला आँखें बंद किए हुए थी। उसके चेहरे पर शर्म थी, लेकिन साथ ही एक अजीब सी लालिमा और संतोष भी दिख रहा था।

मैंने उसे प्यार से उठाया, उसके चेहरे को टॉवल से साफ़ किया और बोला,

“अब से जब भी हम दोनों अकेले हों, तू सिर्फ ब्लाउज़ और पेटीकोट में ही काम करेगी। और हाँ… बाल हमेशा जूड़े में बाँधकर आना। क्यूँकि मुझे उन्हें खोलने में बहुत मज़ा आता है।”

उसने शर्माते हुए सिर हिला दिया।

नाश्ते के बाद जब वह बर्तन माँज रही थी, मैंने उसे फिर से अपनी गोद में खींच लिया। इस बार मैंने उसके ब्लाउज़ के सभी हुक धीरे-धीरे खोले। जैसे ही उसके भारी, गोल, दूधिया छातियाँ बाहर निकलीं, मैंने एक-एक करके उन्हें चूमा, चाटा, हल्के से दबाया और निप्पल्स को मुँह में लेकर चूसा।

उर्मिला अब हल्की-हल्की सिसकारियाँ भरने लगी थी — “आह… साहब… उफ्फ…”

मैंने पेटीकोट की नाड़ी खींची। वह सरककर नीचे गिर गया। अब वह पूरी तरह नंगी थी — सिर्फ़ खुले हुए घने काले बाल और मेरी भूखी नजरों के सामने।

उसकी योनि पर हल्के-हल्के काले बाल थे, जो उसे और भी सेक्सी बना रहे थे। मैंने उसे बेडरूम में ले जाकर प्यार से बिस्तर पर लिटाया।

उसके पैरों को फैलाया, उँगलियों से उसकी गीली, गर्म, रसीली चूत को सहलाया। वह अब पूरी तरह तैयार थी। आँखें बंद, होंठ काँप रहे थे, साँसें तेज़।

मैंने अपना मोटा लंड उसके चूत के मुहाने पर रखा और बहुत आहिस्ता से अंदर धकेला।

“आआह्ह्ह…” उर्मिला एक लंबी कराह के साथ सिहर उठी। दर्द नहीं, बल्कि भराव और गहरी खुशी का एहसास था।

“आराम से… पूरा ले ले…” मैंने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा।

फिर मैंने धीमी लेकिन गहरी गति से उसे चोदा। उसके भारी स्तन हर झटके पर जोर-जोर से हिल रहे थे। मैं बीच-बीच में झुककर उन्हें चूसता, उसके बालों को मुट्ठी में भरकर हल्का खींचता, जिससे वह और भी पागल हो जाती।

कुछ देर बाद मैंने उसे कुत्ते की मुद्रा में कर दिया। उसके पीछे से घुसा, एक हाथ से उसके लंबे बाल पकड़े, दूसरे से कमर थाम ली और अब तेज़ लेकिन गहरे झटके देने लगा। हर झटके पर उसके मुँह से “आह… साहब… उफ्फ… हाँ…” जैसी sexy आवाज़ें निकल रही थीं।

जब मैं दूसरी बार झड़ने वाला था, तो लंड बाहर निकाला, उसे पलटा और मुँह में डाल दिया। अब उर्मिला बिना किसी हिचक के जोर-जोर से चूस रही थी। कुछ ही पलों में मैंने अपना पूरा वीर्य उसके मुँह में उड़ेल दिया। वह बिना कुछ गिराए, सब निगल गई — पूरी तरह आज्ञाकारी बनकर।

उस दिन के बाद उर्मिला सिर्फ़ मेरी नौकरानी नहीं, मेरी गुप्त, रसीली, सेक्सी साथी बन गई।

हर सुबह वह जूड़ा बाँधकर आती। दरवाज़ा बंद होते ही मैं उसके बाल खोल देता। वह खुद मेरे पास आकर बैठ जाती, अपनी भारी छातियाँ मेरे मुँह के पास कर देती और शर्माते हुए फुसफुसाती,

“साहब… आज आपका मूड कैसा है?”

मैं उसके बालों में हाथ फिराता, मुस्कुराता और कहता,

“आज तो तुझे बहुत देर तक, बहुत प्यार से… बहुत गहरा चोदूँगा उर्मिला…”

और फिर हम दोनों की वो गर्म, रसीली, लंबी और अनकही कहानी शुरू हो जाती…

सांवली मालिश वाली रानी को फुल नंगी करके चोदा

दोस्तों, मेरा नाम जॉय है, उम्र 19 साल, मुंबई में रहता हूँ। ये बात कुछ समय पहले की है जब मैं कॉलेज में था और घर पर अक्सर अकेला रहता था। मेरी मम्मी को हाथ-पैर में बहुत दर्द रहता था, इसलिए उन्होंने एक मालिश वाली रखी थी – नाम था रानी। वो करीब 20 साल की थी, रंग सांवला पर बेहद खूबसूरत, आँखें बड़ी-बड़ी, होंठ गुलाबी और बॉडी… उफ्फ! कमाल की कर्वी – लगभग 36-28-36। उसके बड़े-बड़े boobs, पतली कमर और गोल-गोल hips देखकर कोई भी दीवाना हो जाए। वो हर संडे हमारे घर आती थी मम्मी की मालिश करने।

शुरू-शुरू में मुझे कुछ खास फीलिंग नहीं हुई, लेकिन एक दिन जब वो मम्मी को मालिश कर रही थी, गर्मी की वजह से वो पसीने से तर थी। उसकी साड़ी ब्लाउज के ऊपर से खिसक रही थी और उसके boobs ब्लाउज में से एकदम टाइट और शेप में दिख रहे थे – पुरानी हिरोइनों जैसे, बड़े, गोल और भरे-भरे। उस दिन से मेरे अंदर कुछ बदल गया। रात को मैं उसे सोचकर मुठ मारता, उसके कर्व्स, उसकी मुस्कान, उसकी आवाज – सब कुछ मेरे दिमाग में घूमता रहता था।

फिर एक संडे आया जब मम्मी-पापा को अचानक बाहर जाना पड़ा। वो सुबह ही निकल गए और बोले कि रात तक आएंगे। थोड़ी देर बाद रानी आई। दरवाजा खोला तो वो मुस्कुराते हुए अंदर आई, लेकिन मम्मी को न देखकर चौंकी।

रानी: “मेमसाब कहाँ हैं?”

मैं: “मम्मी-पापा बाहर गए हैं, आज कोई जरूरी काम था। रात तक आएंगे।”

रानी: “अरे, ये क्या… मैं इतनी दूर से आई और अब कोई मालिश भी नहीं करनी?”

वो थोड़ा उदास हो गई। मैंने कहा, “अरे बैठो ना, पानी पी लो। बस भी जल्दी नहीं मिलेगी।”

वो सोफे पर बैठ गई, पानी पीते हुए बोली, “अब क्या करूँ? घर वापस जाना भी मुश्किल है।”

मैंने हिम्मत करके कहा, “वैसे… मेरे हाथ-पैर और पीठ में भी बहुत दर्द हो रहा है। अगर तुम मेरी मालिश कर दो तो?”

वो हँस पड़ी, “चलो ठीक है, यहाँ तक आई हूँ तो कर ही देती हूँ।”

मैंने थैंक्स बोला और उसे अंदर ले गया। उसने पूछा, “कहाँ-कहाँ दर्द है?”

मैं: “हाथ, पैर और पीठ।”

वो बोली, “शर्ट और जींस उतारकर लेट जाओ।”

मैंने शर्ट-जींस उतार दी, सिर्फ अंडरवियर में लेट गया। उसने तेल लिया और मेरे हाथों पर लगाकर मालिश शुरू की। जैसे ही उसके नरम हाथ मेरे हाथों से टच हुए, मेरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया। फिर वो मेरी पीठ पर आई। उसके हाथ धीरे-धीरे मसल रहे थे, प्रेशर एकदम परफेक्ट। मैं आनंद से आँखें बंद कर रहा था। उसने कहा, “तुम्हारी स्किन कितनी सॉफ्ट है यार…”

फिर उसके हाथ मेरे hips तक पहुँच गए। मुझे और मजा आने लगा। तभी तेल ज्यादा गिर गया और उसकी साड़ी पर लग गया। वो साड़ी साफ करने लगी। मैंने कहा, “इसे पानी से धोकर बाहर रख दो ना।”

वो थोड़ा शरमाई, लेकिन मुस्कुराकर बोली, “ठीक है…” और साड़ी उतारकर बाहर रख आई। अब वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। उसके कर्व्स और साफ दिख रहे थे – ब्लाउज में से उसके बड़े boobs उभरे हुए, पेटीकोट कमर पर टाइट बंधा हुआ।

वो फिर मालिश करने लगी। मैंने पूछा, “तुम सबकी मालिश करती हो, खुद को कोई मालिश नहीं करता?”

वो हँसकर बोली, “हाँ तो है जरूरत, लेकिन कौन करेगा?”

मैंने कहा, “मैं अच्छी मालिश करता हूँ। मैं कर दूँ तुम्हारी?”

वो थोड़ा रुक गई, फिर शरमाते हुए बोली, “अच्छा… ठीक है, कर दो।”

म। मैंने कहा, “लड़कियों की मालिश ब्लाउज-पेटीकोट में ठीक से नहीं होती। आराम से हो तो और मजा आएगा।”

वो शरमाई, लेकिन आँखों में चमक थी। बोली, “बस… धीरे-धीरे करो।”

वो लेट गई। मैंने उसके हाथों से शुरू किया, फिर पैरों पर। धीरे-धीरे पेटीकोट ऊपर सरकाता गया, उसकी नरम जाँघें नजर आने लगीं। वो चुप थी, आँखें बंद करके मजा ले रही थी। फिर मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरा। उसका पेटीकोट घुटनों तक था। मैंने उसे सीधा किया और पेट पर मालिश शुरू की।

पूछा, “कैसा लग रहा है?”

वो आह भरते हुए बोली, “बहुत… बहुत मजा आ रहा है…”

मैंने हिम्मत की और कहा, “अगर और मजा चाहिए तो ब्लाउज हटा दो ना…”

वो शरमाई, लेकिन मुस्कुराकर बोली, “तुम भी ना… ठीक है।”

मैंने उसका ब्लाउज खोला। ब्लाउज हटाते ही मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं – काली ब्रा में उसके बड़े-बड़े boobs फँसे हुए थे, गोल, टाइट और भरे-भरे। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने ब्रा के साइड से मालिश की, फिर पेट पर। फिर बिना पूछे पेटीकोट की डोरी खोली। वो थोड़ा चौंकी, लेकिन बोली, “तुम तो… बहुत शरारती हो।”

मैंने कहा, “इसे भी हटा दो, फुल बॉडी मसाज में मजा दोगुना हो जाएगा।”

वो हँस पड़ी और खुद ही पेटीकोट नीचे सरका दिया। अब वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। उसकी चूत पैंटी से हल्की-हल्की दिख रही थी। मैंने पैंटी के साइड से मालिश की। वो सिसकारी ले रही थी। फिर वो पलट गई। मैंने उसकी पीठ पर मालिश करते हुए ब्रा का हुक खोल दिया। वो चुप रही, कोई विरोध नहीं। मेरी हिम्मत बढ़ गई। फिर धीरे से उसकी पैंटी नीचे सरकाने लगा। वो बोली, “ये क्या…?”

मैंने कहा, “शर्माओ मत, पूरा मजा लो ना…”

वो मुस्कुराई और खुद ही पैंटी नीचे कर दी। अब वो पूरी नंगी थी। उसकी गाँड इतनी चिकनी और गोल थी कि देखते ही मेरा लंड फटने को हो गया। मैंने उसकी गाँड पर तेल लगाकर मालिश की। वो आहें भर रही थी। फिर बोला, “अब सीधी हो जाओ।”

जैसे ही वो सीधी हुई, उसके बड़े-बड़े boobs मेरे सामने थे – ब्राउन निप्पल्स टाइट, बिल्कुल परफेक्ट। मैंने उनके ऊपर तेल लगाकर मालिश शुरू की। वो आँखें बंद करके मजा ले रही थी। अचानक उसका हाथ मेरे लंड पर पहुँचा। वो धीरे-धीरे हिलाने लगी। फिर मेरी अंडरवियर उतार दी और मेरा लंड पकड़कर बोली, “मैं जानती हूँ तुम क्या चाहते हो… मैं भी महीनों से सोच रही थी तुम्हारे बारे में…”

उसकी ये बात सुनकर मैं पागल हो गया। मैं उसके boobs जोर-जोर से दबाने लगा, निप्पल्स चूसने लगा। वो सिसकारियाँ ले रही थी – “आह्ह… जॉय… और जोर से…” मैंने उसकी नाभि चाटी, फिर नीचे की तरफ गया। उसकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे। मैंने पहले आसपास हाथ फेरा, फिर चूत को किस किया और जीभ से चाटने लगा। वो पागल हो गई, मेरे बाल पकड़कर जोर से दबाने लगी – “आह्ह… और अंदर… और जोर से…”

मैंने एक उंगली डाली, वो चीखी लेकिन मजा लेते हुए बोली, “और…” फिर दो उंगलियाँ डालकर तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। थोड़ी देर में उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया – वो काँप रही थी।

फिर वो उठी और मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। आइसक्रीम की तरह चाट रही थी, बॉल्स से खेल रही थी। मैंने उसका सिर दबाया और वो गले तक लेने लगी। थोड़ी देर में मैं भी झड़ गया उसके मुँह में।

फिर मैंने उसे उठाया, बेडरूम में ले जाकर बिस्तर पर लिटाया। 69 पोजीशन में हम दोनों एक-दूसरे को चाटने-चूसने लगे। दस मिनट बाद मैंने अलमारी से कंडोम निकाला (पापा का स्टॉक पता था)। उसने खुद मुझे कंडोम पहनाया और बोली, “अब देर मत करो…”

वो बिस्तर पर लेटी, दोनों पैर फैलाए। मैंने लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे-धीरे अंदर डाला। आधा गया तो एक जोर का धक्का – पूरा अंदर। वो चीखी, थोड़ा रस निकला लेकिन बोली, “बस… अब जोर-जोर से…” मैंने तेज-तेज धक्के मारने शुरू किए। वो भी कमर उचका-उचकाकर साथ दे रही थी।

फिर डॉगी स्टाइल में उसकी गाँड ऊँची की और पीछे से पेलने लगा। उसके मुँह से बस आहें और “और जोर से…” निकल रहा था। फिर मैं लेट गया, वो मेरे ऊपर आई और खुद लंड गाँड में लेकर उछलने लगी। उसके boobs मेरे मुँह में थे, मैं चूस रहा था।

हमने कई पोजीशन ट्राई की – स्टैंडिंग, साइड से, मिशनरी… आखिर में कंडोम उतारा, वो मेरा लंड चूसने लगी और मैं उसके boobs के बीच में लंड डालकर टिटजॉब करने लगा। फिर मैं उसके boobs पर झड़ गया।

बाद में हम बाथरूम में नहाने गए। वहाँ भी मैंने उसकी चूत चाटी, boobs से खेला। नहाकर बाहर आए तो मैंने उसके नंगे बदन की फोटो लीं (उसने हँसते हुए पोज दिए)। फिर उसने कपड़े पहने, मैंने उसे लिप-किस किया, boobs दबाए, चूत पर हाथ फेरा। जाने से पहले उसने फिर मेरा लंड चूसा और बोली, “अब जब भी मौका मिलेगा…”

तब से जब भी मम्मी घर पर नहीं होतीं, हम दोनों खूब मजा करते हैं। रानी अब सिर्फ मालिश वाली नहीं, मेरी सीक्रेट लवर है।

तेल की मालिश से शुरू हुई बात,
ब्लाउज खुला तो दिल की धड़कन बढ़ी।
रानी की चूत में लंड डाला जॉय ने,
सिसकारियों से कमरा भर गया आग सी।

 

मेमसाहिब रिम्पी और नौकर कल्लू की पूरी रात की चुदाई

मैं रिम्पी हूँ, अमृतसर की रहने वाली। उम्र उस वक्त अठारह की थी। बारहवीं की परीक्षाएँ खत्म हो चुकी थीं और गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू हो गई थीं। मम्मी-पापा दोनों सरकारी नौकरी में थे, इसलिए दिन का ज्यादातर वक्त घर में मैं अकेली ही रहती थी। हमारा पुराना नौकर कल्लू भी घर पर ही रहता था। कल्लू तीस साल का जवान, गाँव का साँवला आदमी था। उसका बदन कसरती – चौड़ी छाती, मजबूत बाजूएँ, मोटी जाँघें। जब वो काम करता तो उसकी पसीने से तर शर्ट उसके बदन से चिपक जाती और मसल्स साफ नजर आते। मैंने कई बार चुपके से उसे देखा था, और मन में एक अजीब-सी हलचल महसूस की थी।

एक दोपहर की बात है। गर्मी जोरों पर थी। मम्मी-पापा ऑफिस गए थे। मैं अपने कमरे में पंखे के नीचे लेटी थी, सिर्फ एक पतला सा स्लीवलेस टॉप और छोटी स्कर्ट पहने हुए। ब्रा भी नहीं पहनी थी क्योंकि घर में अकेली थी। मन बोर हो रहा था। अचानक कल्लू दरवाजे पर दस्तक देकर आया। उसके हाथ में पानी का ग्लास था। “मेम साहिब, गर्मी बहुत है… पानी पी लो।”

मैंने मुस्कुराकर ग्लास लिया। वो पास ही खड़ा रहा। उसकी नजरें मेरे बदन पर घूम रही थीं – मेरे उभरे हुए स्तनों पर, नंगी जाँघों पर। मैंने नोटिस किया, लेकिन कुछ कहा नहीं। बल्कि मन में एक रोमांच सा हुआ।

“कल्लू, तुम भी बैठो ना। इतनी गर्मी में काम कर रहे हो।”

वो हिचकिचाया, फिर बेड के किनारे पर बैठ गया। बातें शुरू हुईं। वो अपनी घरवाली की बात करने लगा – नेपाल के गाँव में है, महीनों से नहीं मिला। उसकी आँखों में उदासी थी, लेकिन साथ में एक आग भी। “मेम साहिब, बहुत याद आती है… रातों में नींद नहीं आती।”

मैंने सहानुभूति से कहा, “अच्छा? तो तुम क्या करते हो याद आने पर?”

वो शरमाया, फिर धीमी आवाज में बोला, “जो पति-पत्नी करते हैं… वो सब याद आता है। बहुत मज़ा आता था उसके साथ।”

मेरा चेहरा लाल हो गया। मैंने कभी किसी से ऐसे खुलकर नहीं सुना था। लेकिन जिज्ञासा भी हो रही थी। “कैसा मज़ा? बताओ ना…”

वो पास खिसक आया। उसकी गर्म साँसें मेरे चेहरे पर लग रही थीं। “मेम साहिब, बताने से क्या होगा… करके दिखाऊँ तो समझ आएगा।”

मैंने नज़रें झुका लीं, लेकिन मना नहीं किया। दिल तेजी से धड़क रहा था। वो धीरे से मेरे कंधे पर हाथ रखा। उसका स्पर्श बिजली सा था। मैं सिहर गई, लेकिन पीछे नहीं हटी। “अगर अच्छा न लगे तो रोक देना,” वो फुसफुसाया।

मैंने कुछ नहीं कहा। बस आँखें बंद कर लीं। उसने मेरे गाल सहलाए, फिर होंठों पर उँगली फेरी। फिर झुककर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहला किस… मीठा, नरम, गर्म। मैंने भी जवाब दिया। मेरे होंठ उसके साथ मिल गए। उसकी जीभ अंदर आई, मेरी जीभ से खेलने लगी। मैंने भी अपनी जीभ उससे लपेट दी। किस लंबा होता गया, गहरा होता गया। मेरे हाथ उसके चौड़े कंधों पर चले गए।

उसके हाथ मेरे टॉप के नीचे घुस गए। मेरे नंगे स्तनों को छुआ। मेरे निप्पल्स पहले से ही तन गए थे। वो उन्हें उँगलियों से मसलने लगा। मैंने सिसकारी ली, “आह्ह्ह… कल्लू…” मेरी आवाज़ काँप रही थी। वो मेरे टॉप को ऊपर उठाकर उतार फेंका। अब मैं ऊपर से पूरी नंगी थी। उसके मुँह ने मेरे एक स्तन को पूरा मुँह में ले लिया। जीभ से निप्पल चाट रहा था, चूस रहा था। दूसरा स्तन उसकी उँगलियाँ मसल रही थीं। मेरी चूत में आग लग रही थी। गीलापन शुरू हो गया था।

मैंने खुद उसके बालों में उँगलियाँ फेरीं और उसके सिर को अपने स्तनों पर दबाया। “और चूसो… हाँ… ऐसे ही…” मैं खुद हैरान थी अपनी बेबाकी पर।

फिर वो नीचे खिसका। मेरी स्कर्ट ऊपर की और पैंटी एक झटके में उतार दी। मैं पूरी नंगी उसके सामने थी। मेरी गुलाबी, चिकनी चूत पर उसकी नजरें टिक गईं। “वाह मेम साहिब… कितनी सुंदर चूत है तुम्हारी… बिल्कुल ताज़ा माल।”

उसने मेरी जाँघें फैलाईं और मुँह लगा दिया। जीभ से क्लिटोरिस को चाटने लगा। मैं चिहुँक उठी, “ओह्ह्ह गॉड… कल्लू… क्या कर रहे हो… आह्ह्ह्ह…” लेकिन पैर और फैला दिए। उसकी जीभ चूत के अंदर-बाहर हो रही थी। उँगलियाँ भी अंदर डालकर चोद रहा था। मैं पागल हो रही थी। कमर खुद ऊपर उठ रही थी। कुछ ही मिनटों में मैं पहली बार झड़ी। बदन काँप गया, चूत से रस बह निकला। वो सब पी गया।

अब बारी उसकी थी। उसने अपनी शर्ट और लुंगी उतारी। उसका लंड बाहर आया – सात इंच लंबा, दो इंच मोटा, सख्त जैसे लोहा। नसें उभरी हुईं, सुपारा लाल। मैंने पहली बार इतने करीब किसी मर्द का लंड देखा। डर लगा, लेकिन ललचाई नजरें भी। मैंने खुद हाथ बढ़ाकर उसे छुआ। गर्म, सख्त। मैंने सहलाया, ऊपर-नीचे किया। वो कराहा, “आह्ह्ह मेम साहिब… कितना अच्छा लग रहा है।”

फिर मैंने मुँह में ले लिया। जीभ से चाटा, चूसा। वो मेरे बाल पकड़कर मुँह चोदने लगा। मुझे गले तक महसूस हो रहा था।

फिर वो मुझे बेड पर लिटाया। मेरे ऊपर आया। लंड को चूत पर रगड़ा। मैंने खुद कमर उठाकर कहा, “डालो ना… अब और मत तरसाओ… चोदो मुझे।”

उसने धीरे से धक्का दिया। सिर अंदर गया। थोड़ा दर्द, लेकिन मज़ा ज्यादा। फिर आधा लंड अंदर। मेरी सील टूट गई, थोड़ा खून निकला। मैंने दाँत भींचे, लेकिन बोली, “रुको मत… पूरा डालो… फाड़ दो मेरी चूत।”

तीसरे धक्के में पूरा लंड अंदर। मैं चीखी, लेकिन खुशी की चीख। वो रुक गया, मेरे स्तनों को चूसने लगा, किस करने लगा। दर्द कम हुआ। फिर धीरे-धीरे चुदाई शुरू की। हर झटके के साथ मज़ा बढ़ता गया। मैं भी कमर उछालकर साथ देने लगी। “आह्ह… हाँ… और तेज़… कल्लू… चोदो ज़ोर से… ओह्ह्ह फक… येस…”

कमरा हमारी सिसकारियों, चुदाई की चाप-चाप और गंदी बातों से भर गया। वो मुझे अलग-अलग पोजीशन में चोदता रहा। पहले मिशनरी में, फिर मुझे ऊपर बिठाया – मैं उसके लंड पर उछल रही थी, स्तन हिल रहे थे। फिर घोड़ी बनाकर पीछे से पेला। गांड पर थप्पड़ मार रहा था। “कितनी टाइट चूत है तेरी… फाड़ दूँगा आज।”

मैं चीख रही थी, “हाँ… फाड़ दो… और गहराई तक… आह्ह्ह… मैं तेरी रंडी हूँ आज…”

फिर 69 पोजीशन – मैं उसका लंड चूस रही थी, वो मेरी चूत। मैं दो-तीन बार झड़ी। फिर उसने मेरी गांड में डालने की कोशिश की। पहले दर्द बहुत हुआ, लेकिन धीरे-धीरे मज़ा आने लगा। गांड चुदाई में भी मैं झड़ गई।

पूरे दो घंटे तक चुदाई चली। आखिर में उसने मेरे मुँह में झड़ दिया। गाढ़ा, गरम वीर्य। मैंने सब पी लिया। फिर हम नंगे ही लिपटकर लेटे रहे। पसीने से तर बदन, खुशबू से भरा कमरा।

शाम को वो जाने लगा। जाते-जाते बोला, “मेम साहिब, तुमने जो सुख दिया… ज़िंदगी भर याद रहेगा। तुम मेरी सेक्स की रानी हो।”

मैंने मुस्कुराकर कहा, “तुम भी कमाल हो कल्लू… कभी फिर आना। ये चूत हमेशा तुम्हारे लिए तैयार रहेगी।”

उसके जाने के बाद मैंने किसी को नहीं बताया। लेकिन वो दिन… वो पहली चुदाई… वो आग, वो सुख, वो पागलपन… आज भी याद आता है तो बदन में झुरझुरी दौड़ जाती है और चूत गीली हो जाती है। सच में, मेरी ज़िंदगी की सबसे हसीन और गरम याद है वो।

गर्मी की दोपहर में खुल गई चूत की सील,
कल्लू के सात इंच ने भर दी रिम्पी की खाली डील।
पहली चुदाई में दर्द भी था, मज़ा भी था अपार,
आज भी याद आए तो चूत हो जाए बेकरार।

दोस्त की बीवी संतुष्ट हुई मेरे लंड से खूब चोदा जयपुर में

मैं अर्जुन. चंडीगढ़ से हू, मेरी उम्र 25 साल है. इस कहानी की मल्लिका जो है उसकी उम्र 24 साल है. उसके शरीर की बनावट काफी हॉट है 36-32-38. वो गजब की औरत है, कोई भी देख ले तो उसका दिमाग ख़राब हो जाये और उसके याद में तो मूठ जरूर मारेगा, वो एक सेक्स की मल्लिका के तरह है.

अब मैं आपको उस मल्लिका की चुदाई की कहानी आपके सामने नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे सूना रहा हु. ये चुदाई स्टोरी एक साल पहले की. एक बार मैं कुछ काम से जयपुर गया. तो वह मैंरा दोस्त कुणाल रहता था. मैने उससे फोन करके पूछा कहा हो तुम? कुणाल बोला घर पे ही हू. मैं बोला ठीक ह मैं आ रहा हू. क्यों की मैं जयपुर आया हुआ हु. सोचा तुमसे मिल भी लूंगा, मैं उसके घर गया वहा भाभी ने दरवाजा ओपन किया, वाउ क्या माल थी सेक्सी लग रही थी. मैने सिमरन को दो साल बाद देखा था भाभी में काफी चेंज आ गया था. वो पहले से ही ज्यादा सुन्दर हो गई थी और शरीर का हरेक अंग भर गया था यहाँ तक की चूचियां टाइट टाइट हो गई थी.

दोस्तों क्या बताऊँ, वो गजब की लग रही थी और मेरा तो मन कर रहा था साली को यही पकड़ के चोद डालु लेकिन फ्रेंड की बीवी की थी. कंट्रोल किया उसने मुझे एक सेक्सी स्माइल दी. ये मुझे फर्स्ट इंडिकेशन दिया. मेरा साहस बढ़ गया. यानी की मैं थोड़ा अगर पटाने के लिए सोचूं तो आराम से मैं अपने दोस्त की बीवी को चोद सकता हु.

फिर मैं अंदर गया दोस्त से बहूत सारी बात की. मुझे थोड़ा लग रहा था की दोस्त खुश नहीं है अपनी लाइफ से. मैने पूछा कुणाल तुम खुश नहीं लग रहे हो. उसने बोला ऐसा कुछ नहीं सब बढियां है. मैने उससे और पूछा तो उसने बताया बाद मैं बात करते हैं अभी नहीं.

सब लोगो ने खाना खाया. बीच बीच मैं सिमरन मुझे लाइन दे रही थी. मुझे लग गया. ये मैंरा लंड लेके ही मानेगी. जब खाने की प्लेट मैं किचन मैं रखने गया सिमरन को पीछे से पकड़ लिया मैने बूब्स दबा दिए उसने थोड़ी से आवाज़ निकली और बोली अभी जल्दी क्या है, मैं 2 दिन के लिए तुम्हारी ही हू. मेरे पति यानी की कुणाल ऑफिस के काम से जयपुर से बाहर जा रहे है.

मुझे तो बहुत खुशी हुई. अब मैं ये सोचने लग गया क्या क्या करना है सिमरन के साथ प्लान बनाने लगा. रात को तो मैं दूसरे रूम मैं सोया. रात को मैं टाय्लेट करने गया तो देखा सिमरन बातरूम मैं उंगली कर रही थी अपनी चूत मैं. गेट थोड़ा खुला हुआ था तो मुझे दिख गया. मैं गया सिमरन के पास. मैने बोला जब तुम्हारे पास 2 -2 लंड होके भी फिंगर दाल रही हो डार्लिंग. क्या हुआ. बोला उसने क्या करू अर्जुन मैंरे पति का तो खड़ा नहीं होता.

वो तो जब भी चोदना सुरु करते है और कुछ ही देर में वो धराशायी हो जाते है यानी की वो अपना काम तुरंत ही खत्म कर देते है. और मैंने अनसॅटिस्फाइड रह जाती हू. मैने बोला मैं आ गया हू ना. जल्दी से मैंने अपना लैंड निकाला और तुरंत ही उसके मुह में डाल दिया. वो लोलीपोप की तरह चूस रही थी जैसे कभी मिला ही नि लंड,उसने बोला बाकी सब कुछ कल हज़्बेंड के जाने के बाद कहीं हज़्बेंड जग गया तो तो पता चल जाएगा.

मैं ब्लोवजोब मैं ही खुश था. दूसरे दिन दोस्त बोला अर्जुन मुझे कुछ काम से जोधपुर जाना ह तो रहो सिमरन के साथ इसका ख़याल रखना. मैने बोला हा डॉन’त वरी. मैं पूरा ख्याल रखूँगा. वो चला गया. जैसे ही वो गया मैं सिमरन के उपर भूखे शेर की तरह टूट पड़ा . मैंने उसके सारे कपडे उतार दिए और वो सिर्फ ब्रा और पेंटी में थी. दोस्तों हम दोनों वही सोफे पर ही स्टार्ट हो गए. वो मुझे स्मूच कर रही थी और मैं उसे, एक दूसरे को हम दोनों पूरा साथ दे रहे थे.

वो मैंरे लंड को मूह मैं लेके चूस रही थी मैं उसकी चूत को चाट रहा था. 2 मीं. किस किया उससे. अब वो बोलने लगी कल रत से वेट कर रही हो तुम्हारे लंड का अर्जुन मैंरी चूत प्यासी है डाल दे अपने बड़े लंड को. मैने बोला इतते जल्दी क्या ह अभी तडपा तडपा के डालूँगा.

फिर हम बेडरूम मैं चले गये और वो बोली मुझे उपर आना. मैं तैयार हो गया.

वो तो मेरे लैंड को ऐसे चूस रही थी जैसे 10-15 साल से लंड नहीं मिला. आवाज़ निकल रही थी ऑश.उम्म्म ह फक में हार्ड माय डार्लिंग अर्जुन, मैं बोला रंडी. अभी देखा कहा अभी तो तेरी गांड मारनी ह फिर बोलना फक मैं हार्ड फिर वो डर गयी बोली गांड नहीं . मैं बोला अरे रंडी तूने अभी गांड का मज़ा नहीं लिया इसलिए बोल रही है एक बार लेगी तब नहीं बोलेगी. बहुत कहने पे वो मानी.

फिर वो उल्टी लेट गयी मैने थोड़ा ही लंड घुसाया था वो बोली प्लीज़ निकालो ना मैने बोला तोड़ा वेट करो. अभी बीच मैं ही निकल लेंगे तो ज़्यादा दर्द होगा. कुछ टाइम दर्द सहन कर ले तो बोली ठीक ह लेकिन स्लोली करो. मैने धीरे धीरे डाला. दोस्तों उसकी चूत काफी गरम और टाइट थी शायद टाइट होने का यही वजह था की कुणाल उससे ज्यादा चोदा नहीं था. मैं भी ऐसी चूत को पाकर बहूत खुश था और मेरा लंड टनटना रहा था और मेरे अंदर वासना भरी हुयी थी. दोस्तों कभी वो निचे कभी मैं निचे, उसकी चूचियों को मस्लहते हुए जब मैं लंड को उसकी चूत में डालता था, उसके मुह से सिर्फ आह आह आह आह आह आज मैं बहूत खुश हु मेरे राजा.

आज मुझे पहली बार किसी मर्द से पाला पड़ा है. आज ऐसा लग रहा है जैसे पहली बार मुझे सेक्स का आनंद मिला है. आज मैं तर गई. धन्य हो गई. आह अतः आह मेरे गांड में ऊँगली घुसाओ आह और चूत में लंड पेलते रहो. मेरी चूचियों को पीओ. आह आह देखो दूध निकल रहा है. मैंने कहा अरे रंडी जब तुम माँ नहीं bani हो दूध कैसे निकलेगा. वो कहने लगी. चुसो खूब चुसो मैं बिना बच्चा दिए ही तुम्हे दूध पिलाऊंगी आह आह आह और वो झड़ गई. दोस्तों मैं तुरंत निचे हुआ और उसकी चूत की पानी को अपने जीभ से साफ़ कर दिया. वो आह आह आह कर रही थी. फिर मैंने उसको उलटा कर दिया,

अपना लंड उसके गांड पर रखा, और घुसाने की कोशिश की पर वो जोर से चिल्लाई, बोली मेरा गांड का छेद बहूत छोटा है और तुम्हारा लंड बहूत मोटा कैसे जायेगा? मैंने मर जाउंगी. मैंने कहा मेरी जान. रूक, फिर मैंने पाने लंड में थूक लगाया और और फिर कोशिश की. लंड करीब २ इंच ही अंदर गया पर वो जोर जोर से चिल्लाने लगी. निकालो निकालो, मैंने उसके पीठ को सहलाया और उसके बूब्स को भी. उसके बाद फिर मैंने वापस गांड से लंड निकाला और फिर चूत में एक बार डाला उसकी चूत काफी गीली थी अब मेरा लंड भी काफी गीली हो गई थी. उसके बाद तुरंत ही मैंने गांड में डाली, मेरा लंड इस बार अंदर चला गया और वो बोली हां अच्छा लगा. और मैं फिर गांड मारना सुरु किया. दोस्तों वो जोर जोर से झटके देने लगी. उसका चूतड़ हिल रहा था हरेक झटके पे. और मैं पूरा माल उसके गांड में ही छोड़ दिया.

थोड़े देर रुकने के बाद फिर से हम दोनों स्टार्ट हो गए. और फिर से चूत मारना सुरु कर दिया. इस तरह से हम दोनों ने रात भी खूब चुदाई की. रात भर खूब चोदा. दोस्तों बहूत मजा आया था.

फिर हमने शवर लेते हुई सेक्स किया. बहुत मज़ा आया.सिमरन मुझे बता रही थी अभी तक का सबसे सच्चे सेक्स मज़ा तुमने दिया है अर्जुन. दोस्तों उसके बाद मेरा दोस्त तीन दिन बाद आया था उस तीन दिन में उसको मैंने खूब संतुष्ट किया. तीन दिन तक सिर्फ चुदाई ही चुदाई करता था.

अब वो मेरे से हमेशा चुदती है. मैं जयपुर चला जाता हु. वह होटल में रुकता हु, और वो आ जाती है जब कुणाल ड्यूटी जाता है फिर हम उसकी खूब चुदाई करते है.

मेरा बॉयफ्रेंड मुझे पहली बार जमकर चोदा

आज मैं आपको अपनी पहली चुदाई की कहानी बताने जा रही हु, ये कहानी आज से मात्र तीन दिन पहले की है, बिलकुल ताजी सेक्स कहानी जो मैं आपसे शेयर कर रही हु. दोस्तों मेरा नाम रुपाली है मैं दिल्ली में रहती हु, मैं अठारह साल की हु, मैं अभी पढाई कर रही हु, मेरा इससे पहले कोई बॉय फ्रेंड नहीं था. पर मेरी एक दोस्त है कंचन, उसका एक बॉय फ्रेंड है राजीव, वो हमेशा राजीव के बारे में ही कहते रहती थी, आज राजीव ने ये किया आज राजीव ने वो किया आज मेरे चूत में लंड ऐसे घुसाया, ऐसे किश किया, ऐसे मेरे चूचियों को दबाया, दोस्तों ये सब सुन सुन कर मेरा मन भी चुदने का करने लगा. और मुझे भी लड़कों में इंटरेस्ट होने लगा.

मुझे भी लगा की मेरा भी कोई बॉय फ्रेंड हो और मैं इसकी चाहत में इधर उधर कोई सुन्दर और सेक्सी लड़का ढूंढने लगी. काफी दिन इधर उधर अपने लिए बॉयफ्रेंड ढूंढने के बाद मेरे क्लास का ही एक लड़का समीर, जो की बड़ी ही हॉट था, उसकी एक और गर्लफ्रेंड थी. पर मुझे इससे कोई मतलब नहीं था, मैं तो अपने चूत में लंड डलवाना चाहती थी, थोड़े दिन में ही वो मेरे कब्जे में आ गया, खूब घुमाया फिराया, चूचियां दबाया, अब मुझे असली मुकाम तक पहुचना था. मैं उसके बाइक पे पीछे बैठती और अपनी चूचियां उसके पीठ में चिपकाये हुए रखती. आखिर वो दिन आ गया जब वो मुझसे चूत मांग लिया. और मैंने पहले थोड़ा ना नुकुर की और फिर मैंने हामी भर दी. और फिर एक डेट फिक्स हो गया.

15 अगस्त के दिन ही मैंने अपने घर से बहाना बनाई की आज मेरी दोस्त के यहाँ पार्टी है. मैं वही जाउंगी. मेरे घर बाले ज्यादा कुछ पूछे भी नहीं. और उन्होंने कह दिया ठीक है शाम को जल्दी ही घर आ जाना. दिन के करीब ११ बज रहे थे मैंने समीर को व्हाट्सएप्प की की जल्दी आ जाओ. और मैंने अपने घर से थोड़े दूर पर ही उसका वेट करने लगी. वो बड़ा हैंडसम लग रहा था. बाइक पर था. ब्लैक कलर का चस्मा लगा कर बिलकुल हीरो लग रहा था. मैं तो उसके हीरोपंती से घायल हो गई. मैं पीछे बैठ गई और बाहों में भर लिया और उसके पीठ पर अपनी चूची को टिका दी.

मैंने कहा कही जगह है की कोई होटल में चले? तो उसने कहा की मेरे पास दोस्त के फ्लैट की चाभी है. मेरा दोस्त दिल्ली से बाहर गया है. हम दोनों वही आज एन्जॉय करेंगे. और फिर हम दोनों उसके फ्लैट पे चले गए. दोस्तों हम दोनों अंदर जाते ही. एक दूसरे के बाहों में हो गए. और वो मेरे होठ को चूसने लगा. और मैंने भी उसके होठ को चूसने लगी. वो मेरी चूचियों को दबाने लगा. और मैं भी उसके बाल को सहलाने लगी. धीरे धीरे हम दोनों बैडरूम में आ गए और समीर ने मुझे बेड पे पटक दिया, उसने मेरा समीज और सलवार उतार दिया और अपना भी कपड़ा उतार दिया.

वो जल्दबाजी नहीं करना चाह रहा था वो मुझे तड़पा रहा था, उसको लड़की चोदने का एक्सपीरेंस थे और मुझे कुछ भी नहीं पता था. वो मेरी दोस्त ने जो सेक्स के बारे में बताई वही पता था. मैं ब्रा और पेंटी में थी. वो मेरे होठ को चूमते हुए, मेरे कंधे को चूमते हुए मेरे चूचियों के बिच में मुह रगड़ रहा था मैं उस समय ब्रा में थी. फिर वो सरक कर निचे आया और मेरे पेट को जीभ से छूने लगा और थोड़ा निचे आकर मेरे नाभि में अपना जीभ डालने लगा. मैं तड़प रही थी, मेरे रोम रोम खड़े हो रहे थे. और मैं तकिये को अपने मुठी में पकड़ रही थी मेरे होठ अनायास ही दांत के बिच में जा रहा था. मेरी आँखे बंद हो रही थी. फिर वो थोड़ा सरक कर निचे गया और मेरी पेंटी को सूंघने लगा. मेरा तो हालात बहूत ज्यादा खराब होने लगा. वो फिर सरक कर निचे गया मेरे घुटने से होते हुए मेरे पैर के अंघूठे को अपने मुह में ले लिया. और फिर से ऊपर आ गया अब वो मेरा ब्रा को खोल दिया और अपने जीभ से निप्पल को छूने लगा. वो जोर से नहीं कुछ कर रहा था वो हलके हकले से निप्पल को छू रहा था, इससे मेरे शरीर में सिहरन होने लगी और मैं पुरे तरीके से तड़पने लगी.

वो फिर निचे आ गया और मेरी पेंटी को उतार दिया और फिर मेरे टांगो को अलग अलग करके. बिच में अपना मुह गुसा दिया और मेरे चूत के दोनों साइड की झिल्ली को अपने हाथो से अलग किया और बोला वाओ, और फिर अपना मुह लगा दिया. मैं तो पागल होने लगी. आज तक कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ था. बहूत ही मजा आ रहा था. गजब का एहसास था. जब वो मेरी चूत को चाट रहा था. फिर उसने चिर कर देखा , मैं वर्जिन थी. आज तक कभी चुदी नहीं थी. उसने बोला आज तो मैं तेरी वर्जिनिटी तोड़ दूंगा. मैं तुरंत बोल उठी ये मौक़ा मैं तुमको दे रही ही. आज तक मेरे चूत को किसी ने नहीं छुआ.

तभी समीर उठा गया और अपने पेंट की जेब से दस हजार रूपये मुझे दिए. और बोला ये तुम्हारा वर्जिनिटी खोने का इनाम है. मैं काफी दिन से ऐसी लड़की को ढूंढ रहा था जो आज तक चुदी ना हो. और आज मुझे तुम मिल गई. मैंने कहा कोई जल्दी बजी नहीं करना मुझे काफी दर्द हो सकता है. उसने कहा तुम चिंता नहीं करो मैं धीरे से तुम्हारी चूत की झिल्ली को तोडूंगा. और उसने अपना लंड निकाल लिया दोस्तों और उसमे थूक लगा कर मेरे चूत पर सेट किया, और अंदर घुसाने लगा. पर मेरे चूत के अंदर उसका लंड जा नहीं रहा था. क्यों की उसका लंड काफी मोटा था. और मेरी चूत की छेद काफी छोटी थी. उसने फिर से तरय किया तो थोड़ा सा अंदर गया. मुझे काफी दर्द होने लगा. मैंने कहा रुको रुको पर वो नहीं माना और जोर से धक्का दे दिया.

दोस्तों मैं दर्द से कराह उठी. उसने बोला हिलना मत अब दर्द ख़तम हो जायेगा. और हुआ भी वैसा ही. वो मुझे चोदने लगा. जोर जोर से मेरी चूत में लंड को पेलने लगा. मेरी चूत में उसका लंड बिलकुल सेट हो गया था. उसने फिर चूत से लंड निकाला और फिर से डाला. जब वो दुबारा घुसाता था मुझे काफी दर्द होने लगता था. तभी समीर बोल उठा अरे यार तेरी चूत से तो खून निकल रहा है. मैंने अपना हाथ लगा कर देखा तो सच में खून निकल रहा था. दोस्तों मैं पहले से ही नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे पढ़ चुकी थी की पहली बार चोदने पे खून निकलता है और समीर भी बोला की पहली बार में खून निकलता है यही होती है कोरी चूत की निशानी इसका मतलब होता है की इसके पहले तुम किसी और से नहीं चुदी है.

फिर क्या था दोस्तों मैं अपनी वर्जिनिटी खो चुकी थी. अब वो निचे आ गया था मैं ऊपर आ गई थी उसका लंड पकड़ कर मैं अपने चूत पे सेट की और अंदर समा ली. और फिर उछल उछल कर चुदवाने लगी. अब मुझे काफी मजा आने लगा. अब मुझे दर्द भी नहीं कर रहा था, करीब १० मिनट ऊपर चुदने के बाद फिर से मैं निचे आ गया. और फिर उसने मेरे चूत के कभी इधर से कभी उधर से कभी डौगी स्टाइल में कभी साइड से. खूब चोदा, दोस्तों उस दिन मैं करीब २ घंटे तक चुदी उसमे मैं करीब पांच बार झड़ चुकी थी और समीर भी दो बार अपने माल को निकाल चूका था.

दोस्तों आज मेरी हालात ऐसी है की मैं ठीक से चल नहीं पा रही हु, मेरी चूत काफी सूज चुकी है. चलने में भी दर्द हो रहा है. पर जो भी हो बहूत मजा आया था. अब अगली बार जब चुदुंगी मैं जरूर बताउंगी. तब तक के लिए आप भी मूठ मार लें.

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हेल्लो दोस्तों,  मै सोनाली गुप्ता आज मै आप सभी को अपनी जिन्दगी की सबसे खतरनाक चुदाई का महागाथा सुनाने जा रही हूँ। मै फैजाबाद की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र लगभग 19 साल होगी और मेरी कद लगभग 5.4 फीट होगा। अब मै अपने बारे में आप लोगो को क्या बताऊँ, वैसे तो मेरा रंग … Read more

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नमस्कार दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी है। मेरा नाम राहुल है, मैं 25 साल का हूं और लखनऊ का रहने वाला हूं। मुझे लड़कियों से ज्यादा आंटी अच्छी लगती हैं. शायद इसीलिये अभी तक मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। 20 साल की उम्र से ही मैं अन्तर्वासना की कहानी पढ़ता आ रहा हूं। मैं हमेशा … Read more