वर्जिन कॉलेज गर्ल की पहली चुदाई बस में

रिया की जिंदगी में वो रात कभी नहीं भूली। वो एक साधारण सी कॉलेज गर्ल थी – उम्र सिर्फ़ उन्नीस साल, दिल्ली यूनिवर्सिटी में पहला साल। गोरी, लंबे काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें और वो फिगर जो हर लड़के का ध्यान खींच लेता था। लेकिन रिया अब तक वर्जिन थी। उसने कभी किसी लड़के को इतना करीब नहीं आने दिया था। आज वो घर जा रही थी – लंबी बस जर्नी, रात की बस, लखनऊ से दिल्ली। टिकट कन्फर्म था, लेकिन सीट मिली थी आखिरी वाली बर्थ में।

बस स्टैंड पर भीड़ थी। रिया ने अपनी छोटी सी बैग संभाली, सफ़ेद टॉप और नीली जीन्स पहनी थी। टॉप थोड़ा टाइट था, जिससे उसकी नई-नई विकसित ब्रेस्ट्स का आकार साफ़ झलक रहा था। वो बस में चढ़ी तो देखा कि उसकी सीट पर पहले से एक लड़का बैठा था। लंबा, फेयर, मसल्स वाली बॉडी, उम्र करीब पच्चीस। उसका नाम था आर्यन। वो मुस्कुराया और बोला, “मैडम, आपकी सीट है ना? मैं शिफ़्ट हो जाता हूँ।”

रिया ने शरमाते हुए सिर हिलाया। “नहीं, कोई बात नहीं। बस में जगह तो है।” दोनों एक ही बर्थ पर बैठ गए। रात के दस बज चुके थे। बस स्टार्ट हुई। लाइट्स धीरे-धीरे कम हो गईं। बाहर अंधेरा। अंदर सिर्फ़ हल्की नीली लाइट जल रही थी। आर्यन ने बात शुरू की – “कॉलेज में पढ़ती हो? लगती हो स्टूडेंट।”

रिया हँसी। “हाँ, दिल्ली यूनिवर्सिटी। फर्स्ट ईयर। घर जा रही हूँ।” बातें बढ़ती गईं। आर्यन हंसमुख था, पढ़ा-लिखा, सॉफ्ट स्पोकन। रिया को उसकी आवाज़ अच्छी लगी। धीरे-धीरे वो दोनों करीब आ गए। बस हिल रही थी, कभी-कभी झटके लगते। रिया का कंधा आर्यन के कंधे से टकराता। उसने महसूस किया कि आर्यन का शरीर गर्म है।

रिया ने अपनी जाँघें थोड़ी सींच लीं। लेकिन बस की हिचकिचाहट में उसकी जाँघ आर्यन की जाँघ से रगड़ खा गई। दोनों ने एक-दूसरे को देखा। आर्यन की आँखों में कुछ अलग चमक थी। रिया ने महसूस किया कि उसकी साँसें तेज़ हो रही हैं। वो खुद को रोक नहीं पा रही थी। “ये क्या हो रहा है?” उसने मन में सोचा, लेकिन शरीर कुछ और ही कह रहा था।

आर्यन ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा। “ठंड लग रही है क्या?” रिया ने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुरा दी। आर्यन ने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगा। रिया की उँगलियाँ काँप रही थीं, लेकिन उसने हाथ नहीं छुड़ाया। बस अब और अंधेरी हो गई थी। आस-पास के पैसेंजर सो चुके थे। कंडक्टर ने भी लाइट ऑफ़ कर दी थी।

आर्यन ने रिया के कान के पास फुसफुसाया, “तुम बहुत प्यारी हो।” रिया का चेहरा लाल हो गया। वो शरमा रही थी, लेकिन अंदर से एक अजीब सी गर्मी फैल रही थी। उसने आर्यन की तरफ़ देखा। आर्यन ने धीरे से उसकी गर्दन पर एक हल्का सा किस किया। रिया ने आँखें बंद कर लीं। वो पहली बार किसी लड़के के होठों को अपनी त्वचा पर महसूस कर रही थी। सनसनी पूरे शरीर में दौड़ गई।

“मुझे… अच्छा लग रहा है,” रिया ने धीमी आवाज़ में कहा। उसकी आवाज़ में सहमती का एहसास था। आर्यन ने और करीब आकर उसके होंठों को चूम लिया। रिया ने भी जवाब दिया। उनके होंठ मिले, जीभें आपस में खेलने लगीं। रिया को लगा जैसे बिजली दौड़ गई हो। उसकी ब्रेस्ट्स आर्यन के सीने से दब रही थीं। आर्यन ने हाथ नीचे सरकाया और रिया की कमर को सहलाने लगा।

रिया ने खुद को रोकने की कोशिश की, लेकिन शरीर नहीं मान रहा था। वो आर्यन के गले में बाँहें डालकर और करीब आ गई। “आर्यन… मैं… कभी नहीं किया,” उसने शरमाते हुए कहा। आर्यन ने उसकी आँखों में देखा और मुस्कुराया, “मैं धीरे करूँगा। तुम्हें अच्छा लगेगा, भरोसा रखो।” रिया ने सिर हिला दिया। वो तैयार थी। उसका मन और शरीर दोनों एक साथ कह रहे थे – हाँ

आर्यन ने रिया का टॉप ऊपर किया। उसकी गोरी ब्रेस्ट्स बाहर आ गईं। ब्रा भी हटा दी। रिया की निप्पल्स पहले से ही खड़ी थीं। आर्यन ने एक निप्पल को मुँह में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। रिया की साँसें भारी हो गईं। “आह्ह…” वो धीमी सी कराह उठी। आर्यन दूसरी ब्रेस्ट को हाथ से दबा रहा था, उँगलियाँ निप्पल को घुमा रही थीं। रिया को लग रहा था जैसे पूरा शरीर पिघल रहा हो।

उसने आर्यन का शर्ट खोल दिया। उसकी छाती चौड़ी और मसल्ड थी। रिया ने हाथ फेरा। आर्यन का शरीर गर्म और सख्त था। आर्यन ने अब रिया की जीन्स का बटन खोला। धीरे-धीरे जीन्स नीचे सरकाई। रिया ने खुद ही मदद की। उसकी पैंटी भीगी हुई थी। आर्यन ने पैंटी को भी उतार दिया। अब रिया पूरी तरह नंगी थी – बस की बर्थ पर, अंधेरे में, आर्यन के सामने।

आर्यन ने उसकी जाँघों को फैलाया। रिया की चूत बिल्कुल साफ़ और गुलाबी थी। वो पहली बार किसी को इतना करीब देख रही थी। आर्यन ने झुककर उसकी चूत को चूम लिया। रिया चौंक गई, लेकिन फिर आनंद से कराह उठी। “उम्म्म… आर्यन… क्या कर रहे हो?” आर्यन ने जीभ से उसकी क्लिटोरिस को चाटा। रिया की कमर उठ गई। वो आर्यन के बालों को पकड़कर दबा रही थी।

आर्यन की जीभ अंदर-बाहर हो रही थी। रिया को ऐसा लग रहा था जैसे कोई जादू हो गया हो। उसकी चूत से रस निकल रहा था। आर्यन ने उँगली भी डाली – एक उँगली, फिर दो। धीरे-धीरे अंदर-बाहर। रिया की साँसें फूल रही थीं। “हाँ… और… अच्छा लग रहा है,” वो फुसफुसाई।

अब आर्यन ने अपना पैंट उतारा। उसका लंड बाहर आ गया – मोटा, लंबा, सख्त। रिया ने उसे देखा और शरमा गई, लेकिन उसकी आँखों में भूख थी। आर्यन ने रिया को अपनी गोद में बिठाया। रिया ने खुद आर्यन के लंड को पकड़ा और अपनी चूत पर रखा। वो धीरे-धीरे बैठ गई।

लंड धीरे-धीरे अंदर घुसा। रिया को हल्का सा दबाव महसूस हुआ, लेकिन दर्द नहीं। सिर्फ़ भरपूर आनंद। “आह्ह… पूरा… अंदर ले लो,” रिया ने कहा। आर्यन ने उसे कसकर पकड़ लिया और नीचे से धक्के देने लगा। बस हिल रही थी, लेकिन उनकी हिचकिचाहट उस हिलने में छुप गई थी।

रिया अब पूरी तरह आर्यन पर सवार थी। वो ऊपर-नीचे हो रही थी। उसके स्तन उछल रहे थे। आर्यन उन्हें चूस रहा था। “तुम बहुत टाइट हो… बहुत अच्छा लग रहा है,” आर्यन ने कहा। रिया की चूत लंड को चूस रही थी। हर धक्के पर वो कराह रही थी – “हाँ… और तेज़… मुझे चोदो… पहली बार… इतना मज़ा…”

वे दोनों एक-दूसरे में खो गए थे। आर्यन ने पोजीशन बदली। अब रिया नीचे थी, आर्यन ऊपर। वो धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर कर रहा था। रिया की टाँगें उसके कमर पर लिपटी थीं। दोनों के शरीर पसीने से भीग गए थे। रिया को ऑर्गेज़्म आने वाला था। उसने आर्यन को कसकर जकड़ लिया।

“मैं… आ रही हूँ… आह्हह!” रिया चीख पड़ी, लेकिन आवाज़ दबा दी। उसकी चूत सिकुड़ गई, रस बह निकला। आर्यन भी तेज़ हो गया। “मैं भी… निकलने वाला हूँ।” रिया ने कहा, “अंदर… भर दो… मुझे चाहिए।” आर्यन ने आखिरी जोरदार धक्का मारा और अपना गर्म वीर्य रिया की चूत में भर दिया

दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। बस अभी भी चल रही थी। रिया ने आर्यन की छाती पर सिर रख दिया। “ये… सबसे खूबसूरत पहली बार थी,” उसने फुसफुसाया। आर्यन ने उसके बालों को सहलाया। “तुमने मुझे अपना बना लिया।”

रात भर वे ऐसे ही लिपटे रहे। कभी-कभी फिर से शुरू हो जाते। दूसरी बार आर्यन ने रिया को डॉगी स्टाइल में चोदा। रिया को पीछे से लंड लेना बहुत पसंद आया। उसकी चूत फिर से भीग गई। तीसरी बार वो साइड पोजीशन में थे। रिया की एक टाँग ऊपर, आर्यन लंड अंदर डाले हुए धीरे-धीरे हिल रहा था। हर बार रिया ज़ोर-ज़ोर से कराहती – “हाँ… चोदो मुझे… तुम्हारी वर्जिन चूत अब तुम्हारी है।”

सुबह होने वाली थी। बस दिल्ली पहुँचने वाली थी। रिया ने कपड़े पहने। उसकी चूत अभी भी गीली थी, लेकिन मज़े से भरी हुई। आर्यन ने उसे किस किया। “फिर मिलेंगे ना?” रिया मुस्कुराई, “ज़रूर। ये बस जर्नी कभी नहीं भूलूँगी।”

वो बस से उतरी। लेकिन उसकी चाल में एक नई मस्ती थी। वर्जिन कॉलेज गर्ल की पहली चुदाई बस में हो गई थी – और वो पूरी तरह संतुष्ट थी। उस रात ने उसे औरत बना दिया था।

(कहानी जारी… लेकिन ये मुख्य भाग था। अब और विस्तार से समझते हैं कि कैसे सब शुरू हुआ।)

रिया जब बस में चढ़ी थी तो वो थोड़ी थकी हुई थी। कॉलेज का लास्ट लेक्चर खत्म करके सीधे बस पकड़ी थी। लेकिन आर्यन के साथ बैठते ही उसका मन हल्का हो गया। वो दोनों घंटों तक बातें करते रहे – कॉलेज की, लाइफ़ की, सपनों की। आर्यन ने बताया कि वो सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, दिल्ली जा रहा है प्रोजेक्ट के लिए।

धीरे-धीरे बातें पर्सनल हो गईं। आर्यन ने पूछा, “बॉयफ्रेंड है क्या?” रिया ने शरमाकर सिर हिलाया, “नहीं… अभी तक नहीं मिला सही वाला।” आर्यन ने मुस्कुराकर कहा, “मुझे लगता है आज मिल गया।” रिया हँस पड़ी, लेकिन अंदर से गर्मी महसूस हुई।

जब लाइट्स ऑफ़ हुईं तो आर्यन ने अपना जैकेट रिया पर डाल दिया। “ठंड लग रही होगी।” लेकिन जैकेट के नीचे उसका हाथ रिया की कमर पर था। रिया ने विरोध नहीं किया। बल्कि वो खुद आर्यन के सीने से सट गई। उसकी साँसें आर्यन के गले पर पड़ रही थीं।

पहला किस बहुत सॉफ्ट था। फिर दूसरे, तीसरे। रिया को किसिंग का इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया। आर्यन के होंठ उसके होंठों को चूस रहे थे, जीभ अंदर घुसकर खेल रही थी। रिया की जीभ भी जवाब दे रही थी। दोनों की सलाइवा आपस में मिल रही थी।

जब आर्यन ने ब्रेस्ट्स चूसीं तो रिया की निप्पल्स इतनी सेंसिटिव हो गईं कि हर चूसने पर वो कराह उठती। “आह… धीरे… लेकिन और… मत रुको।” आर्यन ने उन्हें दबाया, चूसा, काटा भी हल्का-हल्का, लेकिन सिर्फ़ मज़े के लिए।

जब आर्यन रिया की चूत चाट रहा था तो रिया ने अपनी जाँघें फैला दीं। वो पहली बार किसी की जीभ को वहाँ महसूस कर रही थी। क्लिटोरिस पर जीभ घूमते ही वो झटके खा रही थी। “ये… स्वर्ग है… आर्यन… चूसो… और चूसो।” उसका रस आर्यन के मुँह में जा रहा था। आर्यन उसे पी रहा था।

पेनिट्रेशन का पहला मोमेंट सबसे यादगार था। रिया ने खुद लंड को अपनी चूत पर रगड़ा। गीली चूत ने लंड को आसानी से अंदर ले लिया। धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर चला गया। रिया को लगा जैसे वो भर गई हो। “पूरा… अंदर है… मुझे लग रहा है तुम मेरे अंदर हो।”

फिर शुरू हुई रिदम। बस की हिलने की रिदम के साथ उनकी चुदाई की रिदम। हर धक्के पर रिया की ब्रेस्ट उछलती, उसकी चूत लंड को कसकर पकड़ती। “तुम्हारा लंड… इतना मोटा… मेरी चूत फट रही है मज़े से।”

ऑर्गेज़्म के वक्त रिया ने आर्यन को कसकर जकड़ लिया। उसका पूरा शरीर काँप गया। चूत से रस का फव्वारा निकला। आर्यन का वीर्य अंदर उबल रहा था। दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे।

दूसरी राउंड में रिया ने खुद इनिशिएट किया। वो आर्यन के लंड को मुँह में लेना चाहती थी। आर्यन ने उसे सिखाया। रिया ने झुककर लंड चूसा – पहले टिप, फिर पूरा। “स्वाद अच्छा है… तुम्हारा।” आर्यन ने उसके बाल पकड़कर हल्का-हल्का मुँह में धक्का दिया। रिया गैग नहीं हुई, बल्कि और जोर से चूसने लगी।

फिर उन्होंने फिर से चुदाई शुरू की। इस बार लंबी और गहरी। रिया की चूत अब पूरी तरह आर्यन के लंड की आदी हो चुकी थी। वो बार-बार कह रही थी, “चोदो… मेरी वर्जिन चूत को अपना बना लो… हाँ… और तेज़।”

सुबह बस दिल्ली पहुँची। दोनों ने नंबर एक्सचेंज किए। रिया उतरते वक्त मुस्कुराई और मन में सोचा – “ये बस मेरी जिंदगी की सबसे हॉट जर्नी थी। वर्जिन कॉलेज गर्ल की पहली चुदाई बस में… और वो भी इतनी खूबसूरत।”

उसके बाद रिया कॉलेज गई, लेकिन अब वो पहले से ज़्यादा कॉन्फिडेंट थी। उसकी चाल में एक नया आकर्षण था। और आर्यन? वो भी उस रात को कभी नहीं भूला।

अनजान लड़की से चैटिंग से सीधे सेक्स – वर्जिन रिया की टाइट चूत की चुदाई

रात के डेढ़ बजे एक रैंडम मैसेज ने कैसे दो अजनबियों को होटल के कमरे तक पहुंचा दिया? चंडीगढ़ में नौजवान कार्तिक और लुधियाना की हॉट रिया की पहली मुलाकात, पहली हग, पहला किस और पहली जोरदार चुदाई की पूरी सच्ची-सी कहानी। वर्जिन लड़की की टाइट चूत, चूसे हुए गुलाबी निप्पल्स, सिसकारियां और पांच घंटे की मस्ती – सब कुछ विस्तार से।

हाय दोस्तों, मैं कार्तिक, 22 साल का हूं। लुक्स में एवरेज हूं – न ज्यादा हैंडसम, न ज्यादा सादा – लेकिन दिल का बहुत शरारती। ये कहानी आज से ठीक एक साल पुरानी है, जब मैं चंडीगढ़ में नई-नई जॉब जॉइन करके आया था। सिटी नई थी, दोस्त कम थे, और रातें अकेली।

एक रात नींद बिल्कुल नहीं आ रही थी। बाहर तेज बारिश हो रही थी, खिड़की पर बूंदें टप-टप गिर रही थीं, हवा ठंडी और नम थी। मैं बिस्तर पर करवटें बदल रहा था, बॉडी गरम थी, मन बेचैन। फोन उठाया और रैंडमली एक नंबर डायल करके मैसेज भेज दिया – “हाय, नींद नहीं आ रही क्या?”

रात के करीब डेढ़ बज रहे थे। उम्मीद नहीं थी कि कोई रिप्लाई आएगा। लेकिन कुछ मिनट बाद ही फोन वाइब्रेट हुआ। “नहीं आ रही। तुम कौन?”

बस यहीं से शुरुआत हुई। नाम था उसका रिया। पहले तो सिर्फ हल्की-फुल्की बातें – मौसम कैसा है, जॉब कैसी चल रही, चंडीगढ़ कैसा लग रहा। लेकिन मेरी बातें उसे अच्छी लगने लगीं। मैं थोड़ा फ्लर्टी हूं, तो जल्दी ही मैंने “आई लव यू” लिख दिया। वो हंसकर इमोजी भेजकर टाल गई, लेकिन मैसेज करती रही।

धीरे-धीरे चैटिंग गहरी होती गई। डर्टी जोक्स शुरू हुए। वो भी बराबर से जवाब देती। कभी वो कोई जोक भेजती, कभी मैं। हंसते-हंसते इमोजी की बौछार होती। रात-रात भर बातें चलतीं। वो बताती कि उसे मेरी शरारतें बहुत पसंद हैं, कि मैं उसे हंसाता हूं, कि मेरी बातों में एक अलग ही मजा है। मैं उसे बताता कि वो कितनी स्मार्ट है, कितनी बोल्ड।

लगभग बीस दिन ऐसे ही बीते। हर रात चैट, कभी वॉइस मैसेज, कभी फोटोज। एक रात मैंने हिम्मत करके लिखा, “मिलोगी कभी?”

पहले तो उसने मना किया। “पागल हो गए हो? इतनी जल्दी? हम तो अभी एक-दूसरे को ठीक से जानते भी नहीं।”

लेकिन मुझे पता था – उसका मन भी था। बातों-बातों में उसने हां कर दी। वो लुधियाना में रहती थी, चंडीगढ़ से सिर्फ दो घंटे की दूरी। हमने प्लान बनाया। पहले ही साफ-साफ बात हो चुकी थी कि मिलते ही हम इंटीमेट होंगे। उसे कोई ऐतराज नहीं था। बल्कि वो खुद भी उतनी ही एक्साइटेड लग रही थी – मैसेज में लिखती, “बहुत नर्वस हूं, लेकिन एक्साइटेड भी।”

आखिरकार वो दिन आ गया। सुबह मैंने कॉल किया। उसकी आवाज में घबराहट और उत्साह दोनों थे। “मैं ऑफिस जाने का बहाना बनाकर निकल रही हूं। बस स्टैंड पर 11 बजे पहुंच जाऊंगी।”

मैं पहले से तैयार था। रूममेट्स ने मजाक में कंडोम का पैकेट थमा दिया था, बोले “सेफ रहो भाई”। मैं बाइक लेकर बस स्टैंड पहुंचा। फेसबुक पर उसकी फोटो देखी थी, लेकिन रियल में वो… बाप रे! हूर से कम नहीं थी। स्किन-टाइट ब्लैक जींस जो उसके गोल-मटोल कूल्हों को परफेक्टली हाइलाइट कर रही थी, ऊपर गले तक खुला व्हाइट टॉप जिससे उसकी गहरी क्लीवेज झलक रही थी, बाल खुले और हवा में लहरा रहे, लाइट मेकअप लेकिन लिप्स पर ग्लॉसी रेड लिपस्टिक। उसकी कमर पतली, कूल्हे चौड़े, चाल में आत्मविश्वास और थोड़ी शरारत।

मैंने दूर से आवाज दी, “हाय रिया!”

वो मुड़ी, थोड़ी शरमाई, आंखें नीची कर लीं, लेकिन मुस्कुरा भी दी। हमने दो मिनट वहीं बात की – नर्वस हंसी, हल्की छेड़छाड़। फिर वो बाइक पर पीछे बैठी। जैसे ही उसकी कमर पर हाथ रखा, उसकी गर्म बॉडी का एहसास हुआ, दिल तेज धड़कने लगा। उसकी खुशबू – हल्की परफ्यूम और बारिश की नमी – नाक में घुस रही थी।

थोड़ी देर शहर में घूमे। लंच किया, कॉफी पी। बातें करते रहे – पुरानी चैट्स याद करते, हंसते। फिर मैंने धीरे से पूछा, “होटल चलें?”

वो शरमाई, होंठ काटे, आंखें नीची करके बोली, “चलो… लेकिन ज्यादा शरारत मत करना।”

मैं उसका इशारा समझ गया। हम एक अच्छे होटल में गए। रूम लिया। जैसे ही दरवाजा बंद हुआ और लॉक किया, मैंने उसका हाथ पकड़ा, लाइट्स ऑफ कीं और उसे अपनी ओर खींच लिया। टाइट हग किया। उसकी सॉफ्ट बॉडी मेरी बॉडी से पूरी तरह सटी थी – उसके बूब्स मेरे सीने पर दब रहे थे, उसकी सांसें तेज और गर्म मेरी गर्दन पर लग रही थीं। मैंने उसकी गर्दन पर होंठ रखे, धीरे-धीरे किस करना शुरू किया – हल्के चूम, फिर जीभ से चाटना। उसकी बॉडी सिहर रही थी।

ये मेरा पहला मौका था। उसका भी। शायद इसी वजह से वो अचानक घबरा गई। उसने मुझे हल्का धक्का दिया और बोली, “नहीं कार्तिक… मैं तैयार नहीं हूं। मुझे घर जाना है।”

मैं रुक गया। ट्यूब लाइट ऑन की। “क्या हुआ जान? डर गई? कोई बात नहीं, हम जैसे हो वैसे ही रहेंगे।”

वो बेड पर बैठ गई, आंखें नीची। “बस… अभी मन नहीं है। बहुत तेजी से हो रहा है सब।”

मैं मुस्कुराया। “ठीक है। कोई जबरदस्ती नहीं। हम बस बातें करेंगे, हग करेंगे।” मैंने उसे गोद में उठाया, बेड पर बिठाया और धीरे-धीरे उसके हाथ सहलाने लगा। उसके टॉप से क्लीवेज साफ दिख रहा था – गहरी, सॉफ्ट, और उसकी सांसों से ऊपर-नीचे हो रही। मैं पागल हो रहा था, लेकिन कंट्रोल रखा।

धीरे-धीरे वो रिलैक्स होने लगी। हम पुरानी चैट्स की बातें करने लगे, डर्टी जोक्स याद करने लगे। मैंने कहा, “तुम सच में बहुत खूबसूरत हो। मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे तुम जैसी लड़की मिलेगी। तेरे होंठ तो गुलाब जैसे हैं, इतने रसीले।”

वो शरमाई, मुस्कुराई। मैंने हिम्मत करके उसके कंधे पर हाथ रखा और उसे बाहों में भर लिया। अब वो मेरे सीने पर सर रखकर लेटी थी। हम टाइट हग कर रहे थे। मैंने बहाने से अपना सर उसके बूब्स पर टिका दिया। वो सिहर तो गई, लेकिन मना नहीं किया। मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया।

मैंने धीरे से उसके बूब्स पर हाथ रखा, हल्के से दबाया। वो सिहर गई, मेरा हाथ हटाया और बोली, “शरारत मत करो।” लेकिन उसकी आंखों में शरारत थी, सांसें तेज हो रही थीं। मैंने फिर कोशिश की। कई बार वो टालती रही, लेकिन अब उसकी बॉडी रिएक्ट कर रही थी।

आखिर मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उसकी गर्दन पर फिर किस किया, टॉप को ऊपर उठाया और लेफ्ट बूब बाहर निकाला। ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा, फिर ब्रा का हुक खोला। उसके बूब्स बिल्कुल टाइट, गोल, 34 साइज के – सॉफ्ट लेकिन फर्म, निप्पल्स गुलाबी और पहले से ही हार्ड। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा – धीरे, फिर तेज। वो सिसकारी भरने लगी – “आह… उम्फ… कार्तिक… क्या कर रहे हो… आह्ह…”

दूसरे बूब को हाथ से मसल रहा था, निप्पल को उंगलियों से पिंच कर रहा था। वो अब पूरी तरह मस्त हो चुकी थी, कमर हिला रही थी। मैंने अपना हाथ उसकी जींस की जिप पर ले गया। उसने रोका, लेकिन कमजोर आवाज में। मैंने फिर उसके बूब्स चूसे और उसे और गरम कर दिया। दूसरी बार हाथ उसकी पैंटी में पहुंचा। इस बार उसने नहीं रोका। उसकी चूत पहले से ही गीली थी – गरम, चिकनी। जैसे ही उंगली से क्लिट छुआ, वो कांप गई, कमर ऊपर उठा दी और जोर से सिसकारी – “आआह्ह… कार्तिक…”

मैंने जींस की बटन खोली और खींचकर उतार दी। अब वो सिर्फ ब्लैक लेस पैंटी में थी – जो पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने अपनी शर्ट-जींस उतारी और उसके ऊपर लेट गया। उसकी टांगें फैलाईं। उसकी चूत पर उंगली फेरते रहा – क्लिट को रगड़ता, अंदर उंगली डालता। वो आंखें बंद किए सिसकारियां भर रही थी – “उम्फ… आह… हां… ऐसे ही…”

फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला। वो 6.5 इंच का था, पूरी तरह खड़ा, नसें उभरी हुईं। मैंने कहा, “इसे हाथ में लो ना।”

वो शरमाई, “नहीं… शरम आ रही है।”

फिर मैंने पूछा, “अंदर डाल दूं?”

वो कुछ नहीं बोली, बस धीरे से सर हिलाया और मुस्कुराई, आंखें बंद कर लीं।

मैंने कंडोम लगाया। लंड उसकी चूत पर रगड़ा – उसकी गीलापन मेरे लंड पर लग रहा था। वो तरस रही थी, कमर ऊपर उठा रही थी। अचानक उसने नीचे से झटका दिया और मेरा लंड आधा अंदर चला गया। वो वर्जिन थी, तो थोड़ा दर्द हुआ। वो चिल्लाई, “आह… धीरे… बहुत दर्द हो रहा है…”

मैंने धीरे-धीरे पूरा अंदर किया। उसकी चूत बहुत टाइट थी – गरम, गीली, मुझे पूरी तरह जकड़ रही थी। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। वो आहें भर रही थी – “आह… आह… कार्तिक… धीरे… आह्ह…”

आवाज बाहर न जाए इसलिए मैंने अपना हाथ उसके मुंह पर रख दिया। थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ और वो भी कमर हिलाने लगी। मैंने स्पीड बढ़ाई। वो भी ऑर्गेज्म तक पहुंच चुकी थी – उसकी चूत सिकुड़ रही थी, बॉडी कांप रही थी। मैं भी झड़ गया। हम पसीने से तर, एक-दूसरे की बाहों में लेटे रहे, सांसें तेज।

थोड़ी देर बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मैंने नया कंडोम लगाया। उसने कहा, “बस… अब नहीं। थक गई हूं।” लेकिन उसकी आंखें कुछ और कह रही थीं – शरारत और भूख। मैंने उसके बूब्स फिर चूसे, निप्पल्स काटे। वो फिर गरम हो गई, सिसकारियां भरने लगी।

इस बार मैंने उसका सर दीवार से सटा दिया, उसकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रखीं और पूरा लंड एक झटके में अंदर डाल दिया। वो जोर से चिल्लाई, “आआह्ह… धीरे-धीरे चोदो ना… बहुत दर्द हो रहा है…”

लेकिन उसकी कमर खुद ऊपर उठ रही थी, मुझे और गहराई दे रही थी। वो मुझे और जोर से चाह रही थी। मैंने स्पीड बढ़ा दी। जोर-जोर से धक्के मारने लगा – हर धक्के में आवाज हो रही थी। उसके बूब्स उछल रहे थे, मैं उन्हें मुंह से पकड़-पकड़ कर चूस रहा था। वो नाखून मेरी पीठ पर गड़ा रही थी। “आह… और जोर से… हां… चोदो मुझे… आह्ह…”

फिर मैं झड़ गया। वो भी दूसरी बार जोर से झड़ी – उसकी चूत ने मुझे पूरी तरह निचोड़ लिया।

हमने करीब पांच घंटे साथ बिताए। बहुत इंजॉय किया – हग किया, किस किया, बातें की। फिर मैंने उसे बस स्टैंड छोड़ा। जाते वक्त वो मुस्कुराई, मेरे गाल पर किस किया और बोली, “अगली बार फिर मिलेंगे। बहुत मजा आया।”

बस में बगल वाली अनजानी लड़की ने खुद खोली शलवार

मैं प्राइवेट AC बस के सेकंड लास्ट सीट पर आराम से बैठा था। मुंबई में एक हफ्ते की व्यस्तता के बाद हैदराबाद लौट रहा था। रात के 9:30 बजे मुंबई का आखिरी स्टॉप आया। अचानक बस का दरवाजा खुला और एक बेहद खूबसूरत लड़की अंदर आई। लंबे घने काले बाल कमर तक लहरा रहे थे, हाइट लगभग 5’8″, हेल्दी बॉडी, परफेक्ट कर्व्स। वो सफेद सूट-शलवार में थी — दुपट्टा हल्का सा सरककर उसके भरे हुए ब्रेस्ट्स को हल्का-हल्का दिखा रहा था।

उसने सीट नंबर चेक किया और मेरी बगल वाली सीट पर बैठ गई। नजरें मिलीं, दोनों ने शर्माते हुए मुस्कुराकर “हेलो” कहा। बस चल पड़ी तो मैं चुपके-चुपके उसे देखने लगा। उसकी कमर इतनी पतली कि हाथों में समा जाए, हिप्स गोल-गोल और भरे हुए, छाती इतनी भरी हुई कि सूट का कपड़ा तना हुआ था। उसकी खुशबू — हल्की मीठी परफ्यूम और लड़की की नॉर्चरल खुशबू — मुझे पागल कर रही थी। आंखें थकी हुई लेकिन शराबी सी चमक रही थीं।

धीरे-धीरे बातें शुरू हुईं। नाम पूछा — उसका नाम **रिया** था। वो UK जा रही थी, लेकिन इमिग्रेशन में वीजा इश्यू हो गया। एयरपोर्ट से निकली तो फैमिली पहले ही चली गई थी। थकान और डिप्रेशन से उसकी आंखें लाल थीं। मैंने उसे हंसाने की कोशिश की — मुंबई की मजेदार स्टोरीज सुनाईं, अपने एक्सपीरियंस शेयर किए। धीरे-धीरे वो खुल गई। हम दोनों बहुत क्लोज हो गए। मेरी घुटने जानबूझकर उसकी नरम जांघों से टच हो रही थीं। वो कुछ नहीं बोली, बस हल्का सा मुस्कुरा दी।

ढाबे पर डिनर स्टॉप लगा। हम साथ बैठकर खाना खाए — गरमा-गरम परांठे, दाल और चाय। खाते-खाते उसकी आंखों में अब हल्की शरारत दिखने लगी थी। “आप बहुत अच्छे हो,” उसने कहा और मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई।

बस फिर चली। रिया ने कहा, “विंडो साइड पर बैठूंगी, नींद आएगी।” हम दोनों उठे। वो सीट से हटी नहीं, मुझे अंदर से निकलने का इशारा किया। मौका मिल गया। मैं उसके सामने से गुजरा, जानबूझकर थोड़ा झुक गया। बस के झटके ने मुझे उसके ऊपर गिरा दिया। मेरा सीना उसके नरम, गर्म और भारी ब्रेस्ट्स से पूरी तरह दब गया। मेरा लिंग उसकी जांघों के बीच फंस गया और तुरंत खड़ा हो गया। उसकी सांसें तेज हो गईं। मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा, नाक उसके माथे से लगभग छू रही थी। वो भी मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुझे साइड करने लगी, लेकिन धीरे-धीरे, जैसे वो भी एंजॉय कर रही हो।

मैंने अपना हाथ उसके कमर पर फेरा, रास्ते में उसके ब्रेस्ट्स को हल्का स्पर्श दिया। वो हल्का सा कांपी, लेकिन “कोई नहीं” वाली नजर से देखा। अब वो मेरी दाईं तरफ थी।

थोड़ी देर बाद मैंने हिम्मत करके अपना दायां हाथ उसके लैप पर रख दिया। वो चुप रही, आंखें बंद कर लीं। मैं धीरे-धीरे उसके सॉफ्ट थाईज को सहलाने लगा। फिर घूमकर बायां हाथ उसके गले पर, कान के पीछे, फिर ब्रेस्ट्स पर। उसके निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने शर्ट के अंदर हाथ डाला। उसकी शलवार के अंदर कुछ नहीं था — बिल्कुल नंगी, गर्म, शेव्ड और पहले से ही गीली चूत।

“उफ्फ… प्लीज… कोई देख लेगा ना…” उसने बहुत धीमी, कांपती आवाज में कहा, लेकिन उसकी जांघें थोड़ी और खुल गईं। वो खुद मेरी पैंट की जिप खोलकर मेरे मोटे, सख्त लंड को बाहर निकालने लगी। दो उंगलियों से सहलाते हुए वो उसे दबा रही थी।

मैंने उसके नाभि को सहलाया, कमर को जकड़ा, फिर ब्रा खोलने को कहा। उसने खुद पीछे हाथ डालकर ब्रा खोल दी। मेरे हाथ उसके नंगे, मुलायम, भारी ब्रेस्ट्स पर थे। उन्हें मसलते, निप्पल्स को हल्का-हल्का दबाते, चुटकी लेते… वो “आह… उफ्फ… धीरे…” कर रही थी।

धीरे-धीरे मैंने उसकी शलवार का नाड़ा खोला। मेरी उंगलियां उसकी गर्म, भीगी चूत पर घूम रही थीं। क्लिटोरिस को हल्का-हल्का रगड़ते, दो उंगलियां अंदर डालकर धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। रिया कांप रही थी। उसकी सांसें बहुत तेज हो गईं। अचानक वो सिकुड़ गई और पहला ऑर्गेज्म आ गया। गर्म पानी जैसा रस मेरी उंगलियों पर बह निकला।

“बेबी… मैं कंट्रोल नहीं कर पा रही…” उसने कान में फुसफुसाया।

हम बस में पूरा नहीं कर सकते थे। मैंने उसे कन्विंस किया कि पुणे में उतरकर होटल में रुक जाते हैं। उसने घर को फोन करके “बस ब्रेकडाउन” का बहाना बना दिया। पुणे पहुंचकर हम एक अच्छे होटल में चेक-इन कर लिए।

रूम में घुसते ही मैंने उसे बालकनी में पीछे से जकड़ लिया। मेरा लंड उसके गोल-मोटे बट्स के बीच दबा हुआ ऊपर-नीचे रगड़ रहा था। दोनों हाथों से उसके ब्रेस्ट्स को जोर-जोर से मसलते हुए गर्दन, कान, कंधे चूम रहा था। वो मुड़कर मेरे होंठों को चूसने लगी — गहरी, गीली किस। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी।

बेड पर ले जाकर मैंने उसकी पूरी बॉडी को चूमना शुरू किया। नाभि में जीभ घुमाई, कमर को चाटा, ब्रेस्ट्स को दोनों हाथों से दबाते हुए निप्पल्स को जोर-जोर से चूसा। रिया कराह रही थी, “आह… और जोर से… हां… बेबी…”

उसने मेरी पैंट उतार दी और मेरे लंड को मुंह में ले लिया। गर्म, गीली जीभ से चूसते हुए वो ऊपर-नीचे कर रही थी। हम 69 पोजीशन में गए। मैं उसकी चूत चाट रहा था, उंगलियां अंदर डाल रहा था, वो मेरे लंड और बॉल्स को सहला रही थी।

“प्लीज… अब डाल दो… मैं बहुत गीली हो चुकी हूं…” उसने प्यार से कहा, आंखों में भूख।

मैंने उसकी टांगें फैलाईं और धीरे-धीरे अपना मोटा लंड उसके टाइट, गर्म, भीगे गद्दे में डाला। “आह… उफ्फ… स्लोली बेबी…” वो कराह उठी। मैंने उसके मुंह को किस से बंद कर दिया और धीरे-धीरे पूरा अंदर कर दिया। फिर रिदम बढ़ाया। उसके ब्रेस्ट्स उछल-उछलकर ताल दे रहे थे। वो अपनी कमर ऊपर उठाकर मेरा साथ दे रही थी।

हां… और जोर से… फाड़ दो मुझे… आह… मैं आ गई…” वो चीखते हुए ऑर्गेज्म हो गई। उसकी चूत मेरे लंड को जोर-जोर से दबा रही थी। मैंने भी उसके अंदर ही पूरा गर्म रस छोड़ दिया।

थोड़ी देर बाद शावर लिया। फिर दूसरी राउंड — कार्पेट पर। वो घुटनों के बल, गांड ऊपर करके लेटी। मैंने पीछे से घुसा, एक हाथ ब्रेस्ट्स मसलते, दूसरा कमर पकड़कर जोर-जोर से ठोकना शुरू किया। उसके बट्स पर चपतें मारते, कमर चूमते… आखिर में मैंने उसे पलटा और उसके ब्रेस्ट्स, पेट और चूत पर अपना सारा रस छोड़ दिया। रिया उसे अपनी उंगलियों से मल रही थी और आहें भर रही थी — “मmm… कितना गर्म है… कितना अच्छा लग रहा है…”

सुबह 5 बजे हम निकले। हैदराबाद पहुंचकर अगले तीन महीने हमने कई हॉट नाइट्स एंजॉय कीं — होटल, उसके फ्लैट, कभी-कभी कार में भी। फिर वो UK चली गई। आज भी जब बात होती है तो वो मुस्कुराते हुए कहती है, “वो बस जर्नी कभी नहीं भूलूंगी… तुमने मुझे वो रात दी जो मैं कभी एक्सपेक्ट नहीं कर रही थी।”

वो सफर सिर्फ ट्रैवल नहीं था… वो हमारी सबसे हॉट, रोमांटिक और यादगार लव स्टोरी बन गई।