शादी को दो साल हो चुके थे। मैं, रोहन, अपनी बीवी प्रिया के साथ मुंबई में रहता था। प्रिया की छोटी बहन नेहा कॉलेज की पढ़ाई खत्म करके हमारे पास ही रहने लगी थी। नेहा उम्र में मुझसे काफी छोटी थी – बस 21 साल की, गोरी-चिट्टी, लंबे बाल, पतली कमर और वो कातिलाना अदाएं जो देखते ही दिल को छू जाती थीं। वो मुझे हमेशा जीजू कहकर चिढ़ाती, लेकिन उसकी नजरों में कुछ और ही चलता था। प्रिया जब ऑफिस जाती, तो घर में सिर्फ मैं और नेहा रह जाते। शुरू में तो सब नॉर्मल था, लेकिन धीरे-धीरे वो हंसी-मजाक बढ़ता गया।
एक दिन प्रिया को अपने ऑफिस के काम से दिल्ली जाना पड़ा, तीन दिन के लिए। घर में सिर्फ मैं और नेहा। सुबह प्रिया गई, तो नेहा किचन में नाश्ता बना रही थी। वो शॉर्ट्स और टाइट टॉप पहने थी, जिससे उसकी कर्वी बॉडी साफ दिख रही थी। मैं सोफे पर बैठा न्यूज देख रहा था, लेकिन नजर बार-बार उसपर जा रही थी। वो मुड़कर बोली, “जीजू, चाय पी लोगे? या कुछ और चाहिए?” उसकी आवाज में शरारत थी। मैंने हंसकर कहा, “चाय ही काफी है, लेकिन तुम्हारी मुस्कान के साथ।” वो शर्मा गई, लेकिन आंखें नीची करके मुस्कुराई।
दोपहर में बारिश शुरू हो गई। बिजली चली गई, घर अंधेरा हो गया। हम दोनों हॉल में बैठे बातें कर रहे थे। नेहा बोली, “जीजू, दीदी नहीं है तो बोर हो रहा है ना?” मैंने कहा, “बोर तो नहीं, लेकिन तुम्हारे साथ टाइम अच्छा लग रहा है।” वो मेरे पास सरककर बैठ गई। उसकी खुशबू मेरे नाक में घुस रही थी – वो हल्की सी परफ्यूम की स्मेल। हम पुरानी बातें करने लगे, कॉलेज की, शादी की। अचानक वो बोली, “जीजू, आप दीदी को इतना प्यार क्यों करते हो? वो तो इतनी स्ट्रिक्ट है।” मैं हंसा, “प्यार तो करता हूं, लेकिन तुम जैसी स्वीट कोई नहीं।” वो मेरी तरफ देखकर बोली, “सच में? मुझे स्वीट लगती हूं?” उसकी आंखों में चमक थी। मैंने उसके गाल पर हाथ फेरा, “बहुत स्वीट।”
वो चुप हो गई, लेकिन मेरे हाथ को नहीं हटाया। उल्टा, अपना सिर मेरे कंधे पर टिका दिया। बारिश की आवाज बाहर तेज हो रही थी, और अंदर हमारा दिल धड़क रहा था। मैंने धीरे से उसके बालों में उंगलियां फेरनी शुरू की। वो सांसें ले रही थी, गहरी-गहरी। फिर वो उठी, मेरे सामने खड़ी हो गई। “जीजू, मुझे गर्मी लग रही है।” कहकर उसने अपना टॉप ऊपर किया, ब्रा के ऊपर से ही उसकी छातियां साफ दिख रही थीं – गोल, मुलायम, टाइट। मैं कुछ बोल नहीं पाया। वो मुस्कुराई और मेरे गोद में बैठ गई। उसके होंठ मेरे इतने करीब थे कि मैं महसूस कर रहा था उसकी गर्म सांसें।
मैंने धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो पहले तो सहम गई, लेकिन फिर जवाब देने लगी। किस लंबा था, गीला, मीठा। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। मेरे हाथ उसकी कमर पर थे, फिर धीरे-धीरे ऊपर सरक गए। उसकी ब्रा के नीचे हाथ डाला, तो वो मुलायम छातियां हाथ में आ गईं। वो सिसकारी ली, “जीजू… आह…” लेकिन रुकने को नहीं बोली। उल्टा, मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी। हम दोनों एक-दूसरे को छू रहे थे, जैसे सालों से इंतजार कर रहे हों। वो मेरे ऊपर चढ़ गई, अपनी छातियां मेरे मुंह के पास लाई। मैंने उन्हें चूमा, चाटा, निप्पल्स को मुंह में लिया। वो कराह रही थी, “जीजू… कितना अच्छा लग रहा है…”
फिर हम बेडरूम में चले गए। मैंने उसे बेड पर लिटाया, उसके शॉर्ट्स उतार दिए। उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने उसे चूमा, नीचे से ऊपर तक। वो मेरे बाल पकड़कर दबा रही थी। “जीजू, मुझे छूओ ना… वहां…” मैंने उसकी पैंटी साइड की, उंगलियां उसकी चूत पर फेरी। वो कितनी टाइट थी, गर्म, रस से भरी। उंगलियां अंदर डालीं तो वो सिकुड़ गई, लेकिन खुशी से। वो बोली, “धीरे… लेकिन मत रुको।” मैं धीरे-धीरे उंगलियां अंदर-बाहर कर रहा था, और वो अपनी कमर उछाल रही थी। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि दो उंगलियां भी मुश्किल से जा रही थीं, लेकिन वो मजा ले रही थी, आंखें बंद करके।
मैंने अपना पैंट उतारा। मेरा लंड पूरा खड़ा था, सख्त। वो उसे देखकर मुस्कुराई, “जीजू, ये तो बहुत बड़ा है…” उसने हाथ में लिया, सहलाने लगी। फिर मुंह में लिया। उसकी गर्म जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी, ऊपर-नीचे। मैं पागल हो रहा था। कुछ देर बाद मैंने उसे रोका, “नेहा, अब नहीं रुक सकता।” वो लेट गई, पैर फैला दिए। मैं उसके ऊपर आया, लंड को उसकी चूत पर रगड़ा। वो गीली थी, तैयार। धीरे से अंदर डाला। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि पहले सिर्फ टॉप गया, लेकिन वो दर्द नहीं, मजा ले रही थी। “जीजू… और अंदर… पूरा…” मैंने धीरे-धीरे धक्का दिया, पूरा अंदर चला गया। वो चीखी नहीं, बस आह भरी, “ओह… कितना अच्छा… भर गया…”
अब हम रिदम में थे। मैं धीरे-धीरे पेल रहा था, और वो नीचे से कमर हिला रही थी। उसकी टाइट चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी, जैसे छोड़ना ही नहीं चाहती। हर धक्के में वो कराह रही थी, “जीजू… तेज… और तेज…” मैं स्पीड बढ़ा दी। उसके मुलायम बदन को छूते हुए, छातियां दबाते हुए। वो मेरे कंधों पर नाखून गड़ा रही थी, लेकिन प्यार से। हमारा पसीना मिल रहा था, सांसें तेज। उसकी चूत से आवाजें आ रही थीं – चप-चप। वो बोली, “जीजू, मैं झड़ने वाली हूं…” मैंने और जोर लगाया। वो कांप गई, चूत सिकुड़कर मेरे लंड को दबाने लगी। वो झड़ गई, पूरा बदन कांप रहा था।
मैं भी नहीं रुका। कुछ देर और पेला, फिर उसके अंदर ही झड़ गया। गर्म रस उसकी टाइट चूत में भर दिया। हम दोनों हांफ रहे थे, एक-दूसरे से चिपके। वो मेरे सीने पर सिर रखकर बोली, “जीजू, ये सबसे बेस्ट फीलिंग थी। आप कितने अच्छे हो…” मैंने उसे किस किया, “तुम्हारी टाइट चूत का मजा ही अलग है, नेहा।”
उसके बाद हम नहाए साथ में। शावर के नीचे फिर किस किया, छुआ। लेकिन अब आराम से। शाम को खाना बनाया, साथ खाया। रात को फिर बेड पर। इस बार वो ऊपर आई। मेरे लंड पर बैठ गई, धीरे-धीरे अंदर लिया। उसकी टाइट चूत फिर से मुझे पागल कर रही थी। वो ऊपर-नीचे हो रही थी, बाल बिखरे हुए, मुंह से सिसकारियां। मैं नीचे से उसके कूल्हों को पकड़कर मदद कर रहा था। वो बोली, “जीजू, मुझे आपका लंड बहुत पसंद है… हमेशा चाहिए।” मैंने कहा, “जब चाहे ले लो, बेबी।”
तीन दिन ऐसे ही बीते। हर वक्त प्यार, सेक्स, मजा। प्रिया वापस आई तो सब नॉर्मल हो गया, लेकिन नेहा की नजरें अब भी शरारत भरी थीं। जब मौका मिलता, चुपके से छू लेती, किस कर लेती। वो टाइट चूत का मजा मैं कभी नहीं भूल सकता। नेहा अब भी हमारे पास रहती है, और जब दीदी नहीं होती… तो हमारा सीक्रेट गेम चलता रहता है।