साली की टाइट चूत का मजा – जीजू साली की हॉट देसी सेक्स स्टोरी

शादी को दो साल हो चुके थे। मैं, रोहन, अपनी बीवी प्रिया के साथ मुंबई में रहता था। प्रिया की छोटी बहन नेहा कॉलेज की पढ़ाई खत्म करके हमारे पास ही रहने लगी थी। नेहा उम्र में मुझसे काफी छोटी थी – बस 21 साल की, गोरी-चिट्टी, लंबे बाल, पतली कमर और वो कातिलाना अदाएं जो देखते ही दिल को छू जाती थीं। वो मुझे हमेशा जीजू कहकर चिढ़ाती, लेकिन उसकी नजरों में कुछ और ही चलता था। प्रिया जब ऑफिस जाती, तो घर में सिर्फ मैं और नेहा रह जाते। शुरू में तो सब नॉर्मल था, लेकिन धीरे-धीरे वो हंसी-मजाक बढ़ता गया।

एक दिन प्रिया को अपने ऑफिस के काम से दिल्ली जाना पड़ा, तीन दिन के लिए। घर में सिर्फ मैं और नेहा। सुबह प्रिया गई, तो नेहा किचन में नाश्ता बना रही थी। वो शॉर्ट्स और टाइट टॉप पहने थी, जिससे उसकी कर्वी बॉडी साफ दिख रही थी। मैं सोफे पर बैठा न्यूज देख रहा था, लेकिन नजर बार-बार उसपर जा रही थी। वो मुड़कर बोली, “जीजू, चाय पी लोगे? या कुछ और चाहिए?” उसकी आवाज में शरारत थी। मैंने हंसकर कहा, “चाय ही काफी है, लेकिन तुम्हारी मुस्कान के साथ।” वो शर्मा गई, लेकिन आंखें नीची करके मुस्कुराई।

दोपहर में बारिश शुरू हो गई। बिजली चली गई, घर अंधेरा हो गया। हम दोनों हॉल में बैठे बातें कर रहे थे। नेहा बोली, “जीजू, दीदी नहीं है तो बोर हो रहा है ना?” मैंने कहा, “बोर तो नहीं, लेकिन तुम्हारे साथ टाइम अच्छा लग रहा है।” वो मेरे पास सरककर बैठ गई। उसकी खुशबू मेरे नाक में घुस रही थी – वो हल्की सी परफ्यूम की स्मेल। हम पुरानी बातें करने लगे, कॉलेज की, शादी की। अचानक वो बोली, “जीजू, आप दीदी को इतना प्यार क्यों करते हो? वो तो इतनी स्ट्रिक्ट है।” मैं हंसा, “प्यार तो करता हूं, लेकिन तुम जैसी स्वीट कोई नहीं।” वो मेरी तरफ देखकर बोली, “सच में? मुझे स्वीट लगती हूं?” उसकी आंखों में चमक थी। मैंने उसके गाल पर हाथ फेरा, “बहुत स्वीट।”

वो चुप हो गई, लेकिन मेरे हाथ को नहीं हटाया। उल्टा, अपना सिर मेरे कंधे पर टिका दिया। बारिश की आवाज बाहर तेज हो रही थी, और अंदर हमारा दिल धड़क रहा था। मैंने धीरे से उसके बालों में उंगलियां फेरनी शुरू की। वो सांसें ले रही थी, गहरी-गहरी। फिर वो उठी, मेरे सामने खड़ी हो गई। “जीजू, मुझे गर्मी लग रही है।” कहकर उसने अपना टॉप ऊपर किया, ब्रा के ऊपर से ही उसकी छातियां साफ दिख रही थीं – गोल, मुलायम, टाइट। मैं कुछ बोल नहीं पाया। वो मुस्कुराई और मेरे गोद में बैठ गई। उसके होंठ मेरे इतने करीब थे कि मैं महसूस कर रहा था उसकी गर्म सांसें।

मैंने धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो पहले तो सहम गई, लेकिन फिर जवाब देने लगी। किस लंबा था, गीला, मीठा। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। मेरे हाथ उसकी कमर पर थे, फिर धीरे-धीरे ऊपर सरक गए। उसकी ब्रा के नीचे हाथ डाला, तो वो मुलायम छातियां हाथ में आ गईं। वो सिसकारी ली, “जीजू… आह…” लेकिन रुकने को नहीं बोली। उल्टा, मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी। हम दोनों एक-दूसरे को छू रहे थे, जैसे सालों से इंतजार कर रहे हों। वो मेरे ऊपर चढ़ गई, अपनी छातियां मेरे मुंह के पास लाई। मैंने उन्हें चूमा, चाटा, निप्पल्स को मुंह में लिया। वो कराह रही थी, “जीजू… कितना अच्छा लग रहा है…”

फिर हम बेडरूम में चले गए। मैंने उसे बेड पर लिटाया, उसके शॉर्ट्स उतार दिए। उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने उसे चूमा, नीचे से ऊपर तक। वो मेरे बाल पकड़कर दबा रही थी। “जीजू, मुझे छूओ ना… वहां…” मैंने उसकी पैंटी साइड की, उंगलियां उसकी चूत पर फेरी। वो कितनी टाइट थी, गर्म, रस से भरी। उंगलियां अंदर डालीं तो वो सिकुड़ गई, लेकिन खुशी से। वो बोली, “धीरे… लेकिन मत रुको।” मैं धीरे-धीरे उंगलियां अंदर-बाहर कर रहा था, और वो अपनी कमर उछाल रही थी। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि दो उंगलियां भी मुश्किल से जा रही थीं, लेकिन वो मजा ले रही थी, आंखें बंद करके।

मैंने अपना पैंट उतारा। मेरा लंड पूरा खड़ा था, सख्त। वो उसे देखकर मुस्कुराई, “जीजू, ये तो बहुत बड़ा है…” उसने हाथ में लिया, सहलाने लगी। फिर मुंह में लिया। उसकी गर्म जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी, ऊपर-नीचे। मैं पागल हो रहा था। कुछ देर बाद मैंने उसे रोका, “नेहा, अब नहीं रुक सकता।” वो लेट गई, पैर फैला दिए। मैं उसके ऊपर आया, लंड को उसकी चूत पर रगड़ा। वो गीली थी, तैयार। धीरे से अंदर डाला। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि पहले सिर्फ टॉप गया, लेकिन वो दर्द नहीं, मजा ले रही थी। “जीजू… और अंदर… पूरा…” मैंने धीरे-धीरे धक्का दिया, पूरा अंदर चला गया। वो चीखी नहीं, बस आह भरी, “ओह… कितना अच्छा… भर गया…”

अब हम रिदम में थे। मैं धीरे-धीरे पेल रहा था, और वो नीचे से कमर हिला रही थी। उसकी टाइट चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी, जैसे छोड़ना ही नहीं चाहती। हर धक्के में वो कराह रही थी, “जीजू… तेज… और तेज…” मैं स्पीड बढ़ा दी। उसके मुलायम बदन को छूते हुए, छातियां दबाते हुए। वो मेरे कंधों पर नाखून गड़ा रही थी, लेकिन प्यार से। हमारा पसीना मिल रहा था, सांसें तेज। उसकी चूत से आवाजें आ रही थीं – चप-चप। वो बोली, “जीजू, मैं झड़ने वाली हूं…” मैंने और जोर लगाया। वो कांप गई, चूत सिकुड़कर मेरे लंड को दबाने लगी। वो झड़ गई, पूरा बदन कांप रहा था।

मैं भी नहीं रुका। कुछ देर और पेला, फिर उसके अंदर ही झड़ गया। गर्म रस उसकी टाइट चूत में भर दिया। हम दोनों हांफ रहे थे, एक-दूसरे से चिपके। वो मेरे सीने पर सिर रखकर बोली, “जीजू, ये सबसे बेस्ट फीलिंग थी। आप कितने अच्छे हो…” मैंने उसे किस किया, “तुम्हारी टाइट चूत का मजा ही अलग है, नेहा।”

उसके बाद हम नहाए साथ में। शावर के नीचे फिर किस किया, छुआ। लेकिन अब आराम से। शाम को खाना बनाया, साथ खाया। रात को फिर बेड पर। इस बार वो ऊपर आई। मेरे लंड पर बैठ गई, धीरे-धीरे अंदर लिया। उसकी टाइट चूत फिर से मुझे पागल कर रही थी। वो ऊपर-नीचे हो रही थी, बाल बिखरे हुए, मुंह से सिसकारियां। मैं नीचे से उसके कूल्हों को पकड़कर मदद कर रहा था। वो बोली, “जीजू, मुझे आपका लंड बहुत पसंद है… हमेशा चाहिए।” मैंने कहा, “जब चाहे ले लो, बेबी।”

तीन दिन ऐसे ही बीते। हर वक्त प्यार, सेक्स, मजा। प्रिया वापस आई तो सब नॉर्मल हो गया, लेकिन नेहा की नजरें अब भी शरारत भरी थीं। जब मौका मिलता, चुपके से छू लेती, किस कर लेती। वो टाइट चूत का मजा मैं कभी नहीं भूल सकता। नेहा अब भी हमारे पास रहती है, और जब दीदी नहीं होती… तो हमारा सीक्रेट गेम चलता रहता है।

साली चंचल की कुंवारी चूत की सील तोड़ी और बच्चा दिया

मैं संजू एक बार फिर आप लोगों के सामने अपनी आपबीती लेकर आ गया हूँ। सबसे पहले सभी चूत वालियों और लंड वालों को मेरा नमस्कार। मेरे बारे में आप जानते ही हैं – मैं 38 साल का शादीशुदा मर्द हूँ और अब तक करीब 50 से ज्यादा चूतें चोद चुका हूँ (रेगुलर वाली गिनती अलग है)। ये वाकया बिल्कुल ताज़ा है और मैं चाहता हूँ कि इसे पढ़कर आप भी अपनी चूत और लंड का पानी रगड़-रगड़ कर निकालें।

पिछले महीने ऑफिस के काम से मैं दिल्ली गया था। वहाँ मेरे रिश्ते के बड़े भैया रहते हैं, मैं उनके घर ही रुका। काम तो दो-तीन दिन का था, लेकिन मेरी रिटर्न फ्लाइट दो दिन बाद की थी। काम एक ही दिन में निपट गया, तो अगले दिन मैं फ्री था। भैया-भाभी दोनों जॉब पर चले गए थे। मैं अपने रूम में कुछ पढ़ रहा था कि अचानक डोरबेल बजी। सोचा कोई कोरियर होगा। दरवाज़ा खोला तो सामने भाभी की सबसे छोटी बहन चंचल खड़ी थी।

मुझे देखकर वो चौंकी, फिर पहचान गई। मैंने बताया कि दीदी और जीजा घर पर नहीं हैं, शाम को आएँगे। उसे अंदर आने को कहा, सोफे पर बिठाया, पानी-चाय दी और खुद उसके सामने बैठ गया। उसका चेहरा उदास था, आँखें नम। चंचल करीब 27 साल की है – भाभी से कहीं ज्यादा सुंदर, बॉडी एकदम मस्त। 34-28-34 का फिगर, 5’3″ हाइट, पेट बिल्कुल फ्लैट, चूतड़ गोल-गोल उभरे हुए, चुचियाँ सुदौल और कसी हुईं, कमर पतली। कुल मिलाकर स्वर्ग की अप्सरा लगती थी। दो साल पहले उसकी शादी हुई थी।

मैंने पूछा, “क्या हुआ चंचल? इतनी उदास क्यों लग रही हो?” पहले तो वो चुप रही, फिर बोली, “दीदी कब आएँगी?” मैंने कहा, “शाम छह बजे।” फिर पूछा, “कोई ज़रूरी काम था?” वो कुछ देर सोचती रही, फिर खुल गई। उसका पति तलाक देना चाहता है। सास ने बच्चा न होने की वजह से झगड़ा करके उसे मायके भेज दिया और तलाक का नोटिस भिजवा दिया। असल में कमी उसके पति में है – वो कर ही नहीं पाता। लेकिन घरवाले मानने को तैयार नहीं। वो हर वक्त तलाक की टेंशन और अंदर की सेक्स की आग से जल रही थी।

मैंने धीरे से पूछा, “तेरी असली प्रॉब्लम क्या है?” वो बोली, “बच्चा नहीं हो रहा, इसलिए तलाक दे रहे हैं।” मैंने कहा, “डॉक्टर को दिखाओ ना।” वो शर्मा कर बोली, “मुझमें कोई कमी नहीं है संजू जी। बच्चा तो उंगली से थोड़े न होगा?” मैं समझ गया। फिर बोली, “वो चाहते हैं तो होता ही नहीं।” मैंने कहा, “तो तलाक लेकर दूसरी शादी कर लो।” वो बोली, “पापा की औकात नहीं दूसरी शादी कराने की, और मुझे उनसे बदला भी लेना है। जानबूझकर एक कुंवारी लड़की की ज़िंदगी बर्बाद की है। लेकिन बिना बच्चे के वो मुझे वापस नहीं लेंगे।”

ये सुनकर वो रोने लगी। बोली, “मेरी तकदीर ही खराब है संजू जी, कोई रास्ता नहीं दिख रहा। आखिर में ज़हर खाकर जान दे दूँगी।” मैं उठा, उसके पास गया। उसके सिर पर हाथ फेरा, गालों से आँसू पोंछे। उफ्फ… कितने मुलायम गाल थे। मैं यूँ ही सहलाते-सहलाते उसे अपनी तरफ खींच लिया। फिर खड़ा किया और बोला, “परेशान मत हो, कोई न कोई रास्ता निकल आएगा।”

उसे दिलासा देने के लिए मैंने उसे बाँहों में ले लिया। वो भी भावुक होकर और ज़ोर से लिपट गई। मेरे हाथ उसकी पीठ पर, फिर चूतड़ों पर फिसलने लगे। नरम-नरम उभरे हुए चूतड़… और उसकी सख्त चुचियाँ मेरे सीने में दबने लगीं। मैंने उसके माथे पर किस किया। वो और कसकर लिपट गई और कान में बोली, “संजू जी, एक बात कहूँ?” मैंने कहा, “बोलो।” वो बोली, “आज मुझे सच में आपकी ज़रूरत है। मेरी मुसीबत का एक ही रास्ता दिख रहा है – आप मुझे बच्चा दे दो।”

मैं चौंका, “ये क्या कह रही हो? तुम मेरे भाई की साली लगती हो।” वो बोली, “हिम्मत करके इतनी बड़ी बात आपसे कह दी। जीजा जी तो दीदी को भी माँ नहीं बना पाए। तुम्हारे दो बच्चे हैं… बस एक मुझे भी दे दो। अगर तुमने मना किया तो मैं किसी बाहर वाले से कर लूँगी, बदनामी होगी। मेरी ज़िंदगी का सवाल है संजू जी।”

वो फिर रोने लगी। मैंने उसे चुप कराने के लिए ज़ोर से लिपटा लिया, पीठ सहलाई, माथा चूमा। और यहीं से सब शुरू हो गया। वो पागलों की तरह मुझे किस करने लगी – मुँह पर, गालों पर। उसके लाल, रसीले होंठ देखकर मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए। पहले नरम-नरम किस, फिर चूसने लगा। वो आँखें बंद कर लीं। लंबा किस चला, दोनों की साँसें तेज़ हो गईं। जब होंठ छोड़े तो उसके होंठ और लाल हो गए थे। वो कसकर लिपटकर मेरे सीने में सिर छुपा लिया।

गरम किस से मेरा लंड खड़ा हो गया। वो मेरी पीठ सहलाते हुए दूसरा हाथ आगे लाई और लंड पर रख दिया। लुंगी के अंदर हाथ डालकर लंड बाहर निकाला। मेरा मोटा, तगड़ा लंड देखकर उसकी आँखों में चमक आ गई। “ओह माँ… इतना लंबा… इतना मोटा… कितना सख्त है!” उसने दोनों हाथों से पकड़ा और अचानक झुककर लंड चूम लिया। लंड फनफना उठा। वो कान में बोली, “संजू जी, अब मत तड़पाओ… जल्दी आ जाओ, बर्दाश्त नहीं हो रहा।”

मैं भी पूरा गरम था। उसे भैया-भाभी के बेडरूम में ले गया। पहले साड़ी उतारी, फिर ब्लाउज़। ब्रा खोलते ही वो शर्मा गई, चुचियों पर हाथ रख लिया। मैंने धीरे से हाथ हटाया, चुचियों को चूमा, हथेली से दबाया। वो सिसकारी, “इश्ह…” मैंने निप्पल जीभ से चाटा, फिर मुँह में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। वाह… क्या मस्त चुचियाँ थीं! लगता था उसके निकम्मे पति ने कभी इनका प्यार नहीं किया। थोड़ी देर चूसते ही उसकी शर्म भाग गई। वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी, “संजू जी जल्दी कीजिए… आज लग रहा है मैं औरत बन जाऊँगी… उफ्फ आपने मेरे अंदर आग लगा दी है… मैं मर जाऊँगी!”

उसकी आँखें मस्ती से लाल हो गई थीं। उसने मेरा हाथ पकड़कर पेटीकोट के ऊपर से चूत पर रख दिया। मैंने नाड़ा खोला, पेटीकोट नीचे खींचा। वो शर्म से पलट गई। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। मैंने उसे आगे झुकाया। उसकी फूली हुई, गदराई गोरी चूत पीछे की तरफ उभर आई। चूत के गुलाबी होंठों से रस की बूँदें टपक रही थीं। एक भी बाल नहीं – एकदम साफ, गोरी-गोरी चूत। मैंने चूत पर किस किया तो वो सीधी हो गई।

मैं घुटनों के बल बैठ गया। टाँगें फैलाईं और चूत का दाना चूसने लगा। दाना धीरे-धीरे सख्त होकर बाहर निकला। मैंने होंठों के बीच लिया, चूसते हुए बाहर खींचा और छोड़ा – कई बार। उसकी चूत से रस का झरना बहने लगा। वो चूतड़ मेरे मुँह पर दबाकर कराह रही थी, “आह्ह… ओह्ह… संजू जी… ये क्या कर दिया… पहली बार मेरी चूत की प्यास महसूस हो रही है… मैं मर जाऊँगी इस आनंद से… और… और…”

मैंने उसके चूतड़ दोनों हाथों से पकड़े और रस भरी चूत को पागलों की तरह चाटने लगा। उसकी चूत की प्यारी-प्यारी खुशबू मेरे दिमाग में चढ़ गई। मैं दीवाना होकर चूत और आसपास के हिस्से को चूमने-चाटने लगा। बीच-बीच में जीभ निकालकर रानों को भी चाटता। वो मस्ती से भरकर बोली, “हाय राजा… जीभ से चाटो ना… अब मत तड़पाओ… मेरी चूत को चाटो… जीभ अंदर डाल दो… जीभ से चोदो!”

उसकी नशीली चूत की खुशबू ने मुझे पूरी तरह पागल बन दिया। मैंने उसे बेड पर बिठाया, खुद ज़मीन पर। उसकी जाँघें फैलाईं, कंधों पर रखीं और जीभ से चूत के होंठ चाटने लगा। वो मस्ती से बड़बड़ाने लगी और चूतड़ आगे खिसकाकर चूत मेरे मुँह से सटा दी। उसके चूतड़ हवा में लटक रहे थे। मैंने जीभ पूरी की पूरी चूत में ठेल दी और अंदर की लाल दीवारों को सहलाने लगा। वो तिलमिला उठी, चूतड़ उचकाकर मेरी जीभ पर चूत दबाने लगी।

“हाय संजू जी… क्या मज़ा आ रहा है… अब जीभ अंदर-बाहर करो… चोदो राजा… जीभ से चोदो मुझे… तुम ही मेरे असली सैयां हो… पहले क्यों नहीं मिले… अब सारी कसर निकालूँगी… दो साल से तड़प रही हूँ… चोदो मेरी चूत को!”

मुझे भी जोश चढ़ आया। मैंने तेज़ी से जीभ अंदर-बाहर करने लगा। वो नीचे से कंबर उचकाकर मुझे चोद रही थी। मैंने जीभ कड़ी करके स्थिर कर ली और सिर आगे-पीछे करके चोदने लगा। उसका मज़ा दोगुना हो गया। वो ज़ोर-ज़ोर से चूतड़ उचकाते हुए बोली, “और जोर से संजू जी… आज मैं तुम्हारी हो गई… ज़िंदगी भर तुमसे चुदवाऊँगी… आज मुझे गर्भवती कर दो!”

वो झड़ने वाली थी। ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाते हुए चूत मेरे चेहरे पर रगड़ने लगी। मैं पूरी तेज़ी से जीभ लपलपाकर चाट रहा था। जब जीभ उसकी बच्चेदानी से टकराई तो उसका बाँध टूट गया। उसने जाँघों में मुझे जकड़ लिया, चूत मेरे मुँह से चिपका दी। चूत का पानी पिचकारी मारकर निकला – दो-तीन बार – मेरे चेहरे पर बहने लगा। मैंने चूत के दोनों होंठ मुँह में दबाकर उसका अमृत पीने लगा। ये उसकी ज़िंदगी का पहला ऑर्गेज़्म था।

चूत चाटने से वो पूरी पागल हो गई। मेरे सिर के बाल पकड़कर मुझे ऊपर खींच लिया। अब मैंने उसे बेड पर लिटाया – चूतड़ बाहर की तरफ, पैर लटकते हुए। उसके पैर अपनी कमर पर उठाए और लंड को चूत के सूराख पर रगड़ा। चूत एकदम कुंवारी लग रही थी – गुलाबी होंठ चिपके हुए, छेद टाइट। सुपारा चूत पर रखा तो उसका बदन काँपने लगा। बोली, “जल्दी घुसाओ संजू जी… अब रहा नहीं जा रहा… अंदर चींटियाँ रेंग रही हैं।”

मैंने कहा, “तेरी चूत बहुत टाइट है, थोड़ा दर्द होगा… सहन करोगी?” वो बोली, “डाल दो… दर्द की परवाह मत करो… आज पहली बार इतनी चुदास महसूस कर रही हूँ।” मैं खुश हो गया। चूत पहले से गीली थी, फिर भी थूक लगाकर लंड पर मला और धक्का मारा। सुपारा अंदर गया। वो चीखी, “आह्ह… धीरे… कितना मोटा है… चीर गई…”

मैं उसके ऊपर लेट गया, होंठ चूसने लगा। एक मिनट बाद तेज़ धक्का मारा – आधा से ज्यादा लंड अंदर। वो ज़ोर से चीखी, “हाय मर गई… बहुत दर्द… निकालो!” लेकिन मैंने पैरों में कैंची डाल रखी थी। फिर किस करके पूछा, “थोड़ा और है बस।” वो बोली, “पहली बार है ना इसलिए धीरे…” मुझे सरप्राइज़ हुआ। वो बोली, “संजू जी, मैं आज तक कुंवारी हूँ। उनका कभी खड़ा होता ही नहीं था। थोड़ा-बहुत हुआ भी तो बाहर ही झड़ जाता था।”

मेरा दिल बल्लियों उछल पड़ा – आज एक शादीशुदा लेकिन कुंवारी चूत की सील टूटने वाली है। लंड अंदर नहीं जा रहा था – सील मोटी हो गई थी। मैंने किस और बातों में उलझाकर मौका देखा और पूरी ताकत से आखिरी धक्का मारा। लंड उसकी कुंवारी चूत को फाड़ता हुआ पूरा अंदर, बच्चेदानी तक पहुँच गया। वो तड़पी, आँखें बाहर, ज़ोर की चीख – “आईईईई… माँ… मर गईईई!” मुझे धकेलने की कोशिश की लेकिन मैंने कसकर पकड़ रखा था।

वो दर्द से रोने लगी। मैंने चेहरा चूमा, चुचियाँ चूसीं, चूतड़ सहलाए। पाँच मिनट बाद दर्द कम हुआ। मैंने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। धीरे-धीरे उसे भी मज़ा आने लगा। बोली, “थोड़ा जोर से…” मैंने रफ्तार बढ़ाई और आखिर में पूरा हमाच-हमाच कर चोदने लगा। वो टाँगें ऊपर करके चुदवाने लगी, पागलों की तरह बोली, “हाय संजू जी… आज पूरा दिन कसकर चोद दो… मैं आपकी हो गई… आज ही मेरे पेट में अपना बच्चा डाल दो… और जोर से…”

वो झटके से लिपट गई और चीखी, “आह्ह संजू जी… मैं मर गई… मेरी चूत से पेशाब निकलेगा… निकाल लो…” मैंने कहा, “निकलने दो” और कसके धक्के मारे। उसका गरम रस लंड पर लगा। वो बुरी तरह झड़ रही थी, मुझे चिपककर चूतड़ झटके दे रही थी। ज़िंदगी में पहली बार लंड से चुदकर झड़ी।

मैंने रफ्तार थोड़ी धीमी की ताकि देर तक टिकूँ। उसे चूमा, चुचियाँ चूसीं और फिर शुरू। धीरे से पूछा, “चंचल, मुझे से चुदवाने में बुरा तो नहीं लगा ना?” वो मुझे और कसकर जकड़कर नीचे से चूतड़ उचकाते हुए बोली, “नहीं संजू जी… मेरी जवानी तुम्हारे नाम हो गई। जब चाहो, जहाँ चाहो डुबकी लगा लो। चुदाई में इतना मज़ा है, मुझे पता ही नहीं था। आज तुमने मुझे औरत बनाया… मोटे लंड से मेरी चूत का दरवाज़ा खोला… और मुझे बच्चा भी दोगे।”

ये सुनकर मैं और जोश में आ गया। कमर हिलाकर चोदने लगा। वो भी हर शॉट का जवाब कंबर उचकाकर दे रही थी। कमरे में फिर फच-फच की मधुर आवाज़ गूँजने लगी। वो टाँगें ऊपर करके मेरी कमर पर कस लीं और ज़ोर-ज़ोर से चूतड़ उचकाकर चुदवाने लगी। मैंने स्पीड बढ़ाई। उसकी चूत ने फिर पानी छोड़ा, फच-फच और तेज़। वो हाँफते हुए बोली, “मैं तो गई… तुम्हारी रानी गई… उई माँ क्या ज़ालिम लौड़ा है… चोद डाला मुझे… मैं गईईई!”

मैं भी नहीं रुका। उसकी चूत इतनी गरम थी कि 4-5 तेज़ धक्कों बाद मैंने आखिरी धक्का मारा – सुपारा बच्चेदानी को धक्का देता हुआ और लंड ने पिचकारी मारते हुए ढेर सारा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया। मैं भी झड़ गया और चूमते हुए लंड अंदर तक डाले उसके ऊपर लेट गया।

वो कसकर लिपट गई और कान में बोली, “अभी बाहर मत निकालना… बच्चा होने के लिए पूरा पानी बच्चेदानी में जाना ज़रूरी है।” मैं लंड अंदर डाले ही लेटा रहा। फिर हाथ नीचे ले जाकर चूत टटोली – हाथ पर खून लगा। वो बोली, “अब विश्वास हो गया ना? मैंने आपको बिना चुदी चूत दी है।” मैंने कहा, “हाँ चंचल, आज से तुम मेरी जान हो, मेरी रानी। तुमने अपना कुंवारा शरीर मुझे सौंपा।”

15-20 मिनट बाद उठा। उसकी चूत ने सारा पानी सोख लिया था। थोड़ा बाहर आया तो खून से लाल। मैंने कहा, “अजीब बात है – तुम्हारी दीदी यानी मेरी भाभी की सील भी इसी बेड पर मैंने तोड़ी थी, शादी के चार दिन बाद। आज तुम्हारी भी। दोनों बहनों को एक ही बेड पर औरत बनाया।” वो हँसकर बोली, “बहुत अच्छा हुआ। इसलिए दीदी शादी के नौ महीने बाद माँ बनीं… अब नौ महीने बाद मैं भी बनूँगी।”

उस दिन मैंने उसे शाम चार बजे तक पाँच बार चोदा। हम दोनों नंगे ही लिपटे रहे। बाद में तीन साल तक लगातार चोदकर दो बच्चे पैदा किए। पहली बार में ही वो प्रेग्नेंट हो गई। किसी बहाने पति को बुलाया, वो कर तो कुछ नहीं पाया लेकिन बच्चे की खबर पर खुश होकर ले गया। उसे अपनी कमज़ोरी का पता था, इसलिए चुप रहा। अब वो ससुराल में खुश है, इलाज भी करा लिया। उसे शक तो है कि दोनों बच्चे मेरे हैं – शक्ल मेरी जैसी है।

अब वो मुझे अपने यहाँ नहीं आने देता, चंचल को भी नहीं भेजता। लेकिन चंचल मौका निकालकर मुझसे मिलती है। महीने में 2-3 दिन मेरे साथ रहती है और मैं उसे 4-5 बार चोद डालता हूँ।

 

बीवी डिलीवरी में, रवी घर पर साली को चोदता रहा

रवी और रीमा की शादी को दो साल हो चुके थे। रवी का गारमेंट फैक्ट्री चलता था, जहाँ वो बहुत ही सेक्सी लेडीज नाइटियाँ बनाता था। फैक्ट्री की ये नाइटियाँ शहर भर में मशहूर थीं। कभी-कभी वो अपनी बनाई हुई खास नाइटियाँ घर ले आता और रीमा को पहनाकर देखता। रीमा का गोरा, मखमली बदन उन नाइटियों में और भी ज्यादा आकर्षक लगता। नाइटियाँ इतनी पतली और ट्रांसपेरेंट होतीं कि उसकी गोरी चींटी जैसी छातियाँ, पतली कमर और गोल-गोल नितंब सब झलकते रहते। रवी को ये बहुत पसंद था कि जब रीमा रात को बेडरूम में आती तो उसका बदन देखने के लिए उसे ज्यादा इंतजार न करना पड़े।

अभी रीमा प्रेग्नेंट थी और डिलीवरी का समय आ गया था। उसने अपने पीहर फोन करके अपनी चचेरी बहन रोमा को बुला लिया। रोमा अपनी दूसरी बहन लीना के साथ रीमा के घर आ गई। लीना को पेंटिंग करना बहुत शौक था, वो अपनी पेंटिंग की एग्जिबिशन लगाना चाहती थी, इसलिए रोमा के साथ चली आई। लीना एक बेहतरीन डांसर भी थी। कॉलेज के फंक्शन में जब वो डांस करती तो लड़कों की साँसें थम जातीं।

पिछली बार जब रोमा एक साल पहले आई थी तब रीमा, रवी और रोमा तीनों मिलकर बहुत मस्ती करते थे। रोमा अपने जीजा रवी के बहुत करीब हो गई थी। हालांकि उनके बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं बना था, लेकिन रीमा के सामने वो रवी से लिपट-लिपट कर बातें करती, गले लगाती और चुम्मा ले लेती। रीमा को ये बिल्कुल बुरा नहीं लगता। वो कहती, “जीजा और साली के बीच ये सब तो चलता है ना।” तीनों चचेरी बहनें थीं – रीमा, रोमा और लीना। उम्र में ज्यादा फर्क नहीं था। तीनों ही गोरी, सेक्सी और खूबसूरत थीं। कौन सबसे ज्यादा सुंदर है, ये कहना मुश्किल था।

शाम को जब रवी घर आया तो बेडरूम से हँसी-मज़ाक की आवाज़ें आने लगीं। उसका मन मचलने लगा। अंदर घुसते ही देखा – दोनों सालियाँ रीमा के साथ बेड पर बैठी उसकी नाइटियाँ देख रही थीं। रवी सीधा रोमा के पीछे गया, अपनी हथेलियों से उसकी आँखें बंद कर दीं और खुद से चिपक गया। रोमा हँसते हुए बोली, “अरे जीजा, इतनी देर कर दी! हम तो आज सुबह ही आने वाले थे।”

रवी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “सॉरी डार्लिंग, ऑफिस में काम आ गया था। अब माफ कर दो ना।” रोमा ने उसके हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा, “माफ तो कर दिया… लेकिन जीजी का ख्याल रखना। इस हाल में उन्हें अकेला मत छोड़ना।” लीना ने तुरंत जोड़ा, “हम भी तो हैं ना इस महफिल में!” रवी ने लीना को आँख मारते हुए कहा, “अब तुम दोनों को भी अकेला नहीं छोड़ूँगा।”

फिर तीनों ने नाइटियाँ देखनी शुरू कीं। रोमा ने एक नाइटियाँ उठाकर बीच से झाँकते हुए कहा, “देखो जीजा, ये पहनने के बाद नाइटियाँ दिखती हैं या हमारा बदन?” लीना ने शरारत से कहा, “जीजा, आपकी नाइटियाँ तो पूरा बदन उघाड़ देती हैं!” रवी हँसकर बोला, “तो पहनकर दिखाओ ना। हम भी देखें कि हमारी नाइटियाँ ज्यादा सेक्सी हैं या तुम्हारा बदन।”

इसी मजाक के बीच रीमा को इतनी हँसी आई कि अचानक दर्द शुरू हो गया। तुरंत तीनों उसे लेकर हॉस्पिटल चले गए। आधे घंटे बाद नर्स ने खुशखबरी दी – एक प्यारा सा लड़का पैदा हुआ है। रवी, रोमा और लीना तीनों बहुत खुश हुए। डॉक्टर की इजाजत लेकर रीमा से मिले। रात रुकने की बात पर डॉक्टर ने पहले मना किया, लेकिन ज़ोर देने पर बोला, “ठीक है, आज रात सिर्फ एक व्यक्ति रुक सकता है। कल कोई नहीं। नर्सें हैं देखभाल के लिए।”

रोमा ने तुरंत कहा, “मैं रुक जाती हूँ।” रवी थोड़ा उदास हो गया क्योंकि वो आज रात रोमा के साथ कुछ खास मनाने का प्लान बना रहा था। लेकिन कुछ न कहकर लीना को लेकर घर लौट आया। घर के नीचे लीना को छोड़कर बोला, “मैं आधे घंटे में आता हूँ।”

आधे घंटे बाद रवी व्हिस्की और शैंपेन की बोतल लेकर घर पहुँचा। डुप्लीकेट चाबी से दरवाजा खोला और लीना को आवाज दी। लीना बाथरूम में नहा रही थी। उसने कहा, “जीजा, मैं नहा रही हूँ। पंद्रह-बीस मिनट में आती हूँ।” रवी हॉल में सोफे पर बैठ गया, व्हिस्की का ग्लास बनाया और स्मार्ट टीवी पर एक सेक्सी डांस वीडियो चला दिया। स्क्रीन पर खूबसूरत लड़कियाँ हॉट म्यूजिक पर आधी नंगी नाच रही थीं।

जब लीना बाहर आई तो उसने रीमा की एक बहुत सेक्सी नाइटियाँ पहन ली थी। नाइटियाँ इतनी पतली थी कि उसका पूरा गोरा बदन साफ दिख रहा था। ऊपर उसने एक हल्का सा गाउन डाल रखा था। टीवी पर देखकर उसकी साँसें तेज हो गईं। वो पीछे से आकर रवी के गाल से अपना चेहरा सटाकर बोली, “क्या देख रहे हो जीजा?” रवी मुस्कुराया, “कुछ नहीं… आओ बैठो।” लीना खड़े-खड़े बोली, “अकेले ही पियोगे या हमें भी चखाओगे?”

रवी ने ग्लास उसके होठों के पास ले जाकर लगा दिया। लीना ने एक साँस में आधा ग्लास पी लिया और खाँसने लगी। रवी हँसते हुए उसके होठों पर पड़ी व्हिस्की की बूँदें चाट लीं और बोला, “हमे तो कड़वी नहीं लगती।” लीना शरमा गई, “पहली बार पी रही हूँ… पहले सिर्फ बीयर ट्राई की थी।” रवी ने उसे पास बिठाया और दो घूँट और पिलाए।

नशा चढ़ने लगा तो लीना बोली, “ये डांस तो कुछ खास नहीं… मैं इससे बेहतर नाच सकती हूँ।” रवी ने टीवी बंद कर दिया और कहा, “तो दिखाओ मेरी जान।” लीना ने रिमिक्स गाना लगा दिया – पहला सॉन्ग “कांटा लग्गा” था। वो नाचने लगी। बीच में अपना गाउन उतारकर रवी की तरफ उछाल दिया। अब सिर्फ वो पतली नाइटियाँ उसके बदन पर थी। उसका बदन आग की तरह जल रहा था।

वो नाचते-नाचते कभी पास आती, कभी दूर जाती, अपने भारी स्तनों को हिलाती, जाँघें फैलाती, नितंब मटकाती। रवी की साँसें भारी हो गईं। उसका लंड पैंट में तन गया। लीना ने सोफे पर आकर अपने नितंब रवी की जाँघों पर रख दिए और धीरे-धीरे रगड़ने लगी। रवी ने उसे अपनी बाहों में खींच लिया। दोनों के होठ मिल गए। गहरी, गीली किस। जीभें एक-दूसरे से खेलने लगीं।

रवी ने धीरे से उसकी नाइटियाँ के स्ट्रैप्स खोले। नाइटियाँ सरक गई। लीना की भरी-भरी, गोरी छातियाँ बाहर आ गईं। गुलाबी निप्पल्स कड़े हो चुके थे। रवी ने दोनों को हाथों में लेकर दबाया, सहलाया। लीना सिसक उठी, “उफ्फ… जीजा… और प्यार से… बहुत अच्छा लग रहा है।” रवी ने एक निप्पल मुँह में ले लिया और चूसने लगा। लीना की साँसें तेज हो गईं। वो खुद अपने नितंब रगड़ रही थी।

“मुझे भी देखना है…” लीना ने रवी की पैंट की चेन खोली। उसका मोटा, लंबा लंड बाहर निकल आया। लीना ने उसे हाथ में लिया और बोली, “कितना सुंदर और तगड़ा है…” उसने जीभ निकालकर सुपाड़े को चाटा। फिर धीरे-धीरे पूरा मुँह में ले लिया। रवी आहें भरने लगा।

थोड़ी देर बाद रवी ने उसे उठाकर बेडरूम ले गया। बेड पर लिटाकर उसकी जाँघों को चूमने लगा। लीना की जाँघें मखमल जैसी नरम थीं। फिर उसने अपनी जीभ लीना की चूत पर रख दी। लीना ने उसके बाल पकड़कर कहा, “हाँ जीजा… चूसो… और गहरी… मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।” लीना का पानी निकलने लगा। वो चीखी, “आह्ह्ह… मैं आ गई…!”

फिर लीना ऊपर चढ़ गई। रवी के लंड को अपनी चूत के मुहाने पर रखा और धीरे से बैठ गई। पूरा लंड अंदर चला गया। दोनों ने एक साथ आह भरी। लीना ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन उछल रहे थे। रवी उन्हें दबा रहा था। स्पीड बढ़ती गई। लीना चिल्लाई, “हाँ… और जोर से… तुम्हारा लंड मेरी चूत को स्वर्ग बना रहा है…!” दोनों एक साथ झड़ गए।

रात भर वो तीन बार और प्यार किया – कभी डॉगी स्टाइल में, कभी साइड में, कभी लीना नीचे और रवी ऊपर। हर बार लीना खुद कहती, “जीजा, मुझे और चाहिए… मुझे तुम्हारे साथ बहुत मज़ा आ रहा है… जितना मन करे कर लो।” सुबह फिर से एक राउंड हुआ। लीना बोली, “सच में तुम्हारा लंड लंबा और मोटा है… जो भी लड़की तुमसे प्यार करेगी, वो बहुत खुश होगी।”

फिर रवी हॉस्पिटल गया। रोमा को छुट्टी दी और लीना को घर भेजने को कहा। जब रोमा घर पहुँची तो लीना कपड़े बदल रही थी। लीना के चेहरे पर वो खास चमक देखकर रोमा समझ गई कि रात क्या-क्या हुआ होगा। वो मुस्कुराई और कुछ नहीं बोली।