पिछली होली भाभी के साथ फिर चुदाई – देवर भाभी सेक्स

कानपुर की उस पुरानी हवेली में, जहाँ गंगा की ठंडी हवा रात को खिड़कियों से आकर पर्दों को हल्का-हल्का हिलाती है और होली के रंग की महक पूरे घर में फैली रहती है, इस बार होली कुछ अलग ही थी। मैं, रमेश, २९ का, दिल्ली से छुट्टी लेकर आया था। घर में माँ-बाप, छोटा भाई और भाभी नेहा – २८ साल की, गोरी-चिट्टी, भरी हुई देह, लंबे काले बाल जो कमर तक लहराते हैं, होंठ गुलाबी और आँखें ऐसी कि एक नजर में आदमी का मन डोल जाए। भाई रोहन दिल्ली में ही नौकरी करता था, साल में दो-चार बार आता-जाता। नेहा घर संभालती, सबकी देखभाल करती, लेकिन अंदर से बहुत अकेली लगती थी।

पिछली होली में जो हुआ था, वो याद आते ही लंड तन जाता था। रंग खेलते-खेलते हम दोनों अकेले कमरे में पहुँच गए थे। नेहा की साड़ी रंग से तर-बतर, शरीर से चिपक गई थी। मैंने रंग लगाया तो हाथ उनकी कमर पर फिसला। वो हँसकर बोलीं, “अरे रमेश… इतना जोर से?” लेकिन हटी नहीं। फिर एक पल में मैंने उनका चेहरा पकड़ा और होंठ चूम लिए। वो पहले चौंकीं, फिर आँखें बंद कर लीं। जीभ अंदर डाली तो उन्होंने भी जवाब दिया। उसी दिन रात भर हमने एक-दूसरे को चखा। उनकी चूत की गर्मी, उनकी सिसकारियाँ, उनके स्तनों की नरमी – सब कुछ आज भी महसूस होता है। सुबह सब सामान्य हो गया, लेकिन वो राज हमारे बीच छिपा रहा।

इस बार होली की सुबह से ही हवा में कुछ अलग था। घर में सब रंग खेल रहे थे। माँ-बाप पड़ोस में चले गए। छोटा भाई दोस्तों के साथ गायब। नेहा और मैं घर में अकेले। वो सफेद साड़ी में थी – पतली, हल्की सी पारदर्शी। सुबह से पानी और रंग खेलते-खेलते पूरी भीग चुकी थी। साड़ी शरीर से चिपक गई थी, ब्लाउज गीला, स्तनों की गोलाई और निप्पल की उभार साफ दिख रहे थे। वो मेरे पास आई, हाथ में रंग का डिब्बा लिए। “रमेश… आज तो रंग लगाना ही पड़ेगा।” उसकी आवाज में शरारत थी।

मैंने रंग लिया। पहले गाल पर लगाया। फिर गर्दन पर। वो हँस पड़ी। “और लगाओ…” मैंने हाथ उनकी कमर पर रखा। वो सिहर उठी। उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए मैंने कहा, “भाभी… आज बहुत गर्म लग रही हो।” वो मेरी आँखों में देखकर बोली, “तू भी कम नहीं है।” मैंने उनका पल्लू खींचा। साड़ी नीचे सरकी। वो मेरे सीने से सट गईं। मैंने उनके होंठ चूम लिए। वो तुरंत जवाब देने लगीं। जीभ अंदर डाली तो उन्होंने मेरी जीभ पकड़ ली। किस इतना गहरा था कि सांस रुक गई।हम कमरे में चले गए। दरवाजा बंद किया। वो मेरे सामने खड़ी थीं। साड़ी गीली, चिपकी हुई। मैंने उनका पल्लू पूरी तरह खींच लिया। साड़ी नीचे गिर गई। ब्लाउज गीला। मैंने हुक खोले। ब्रा नहीं थी। गोरे, भरे हुए स्तन बाहर आए। निप्पल सख्त, गुलाबी। मैंने दोनों हाथों से दबाए। वो सिसकारी। “आह… रमेश… जोर से दबा… पिछले साल से याद है तेरे हाथ…” मैंने एक निप्पल मुंह में लिया। जोर से चूसा। जीभ से घुमाया। दांतों से हल्का काटा। वो चीख पड़ी। “आह… हाँ… काट… चूस… मेरे चुचे तेरे हैं… और जोर से चूस… दूध निकाल ले जैसे…” मैंने दूसरे को भी वैसा ही किया। वो मेरे बाल पकड़कर दबा रही थी। “रमेश… ओह… साल भर तरस रही थी… चूस… और चूस… मेरे निप्पल को लाल कर दे…”

मैंने उनकी साड़ी पूरी उतारी। पेटीकोट का नाड़ा खींचा। वो सिर्फ पैंटी में। मैंने घुटनों के बल बैठकर उनकी जांघें चूमीं। अंदर की तरफ। पैंटी गीली, रस से तर। मैंने उसे उतारा। उनकी चूत – गुलाबी, थोड़े बाल, रस बह रहा था। मैंने जीभ लगाई। वो कमर उठाकर चीखी। “रमेश… चाट… मेरी बुर… बहुत जल रही है… जीभ अंदर डाल…” मैंने जीभ अंदर डाली। क्लिट को चूसा। उँगलियाँ डालीं – दो, फिर तीन। वो कमर हिला रही थी। “आह… रमेश… उँगलियाँ… तेज… मेरी बुर फाड़… जीभ से चोद… ओह… और तेज… मैं झड़ने वाली हूं…” मैंने स्पीड बढ़ाई। वो काँपकर झड़ गई। उनका रस मेरे मुँह में बहा। मैंने सब चाट लिया। स्वाद मीठा-नमकीन। वो बोली, “रमेश… अब तेरा लंड चाहिए मुझे।”

वो उठी। मेरी शर्ट उतारी। छाती चूमी। नीचे आई। पैंट उतारी। लंड बाहर – सख्त, मोटा, नसें फूली हुईं। उन्होंने हाथ में लिया। “रमेश… कितना गरम और मोटा है तेरा… पिछले साल से और तगड़ा हो गया…” वो सहलाने लगी। फिर मुंह में लिया। जोर-जोर से चूसने लगी। जीभ सुपारे पर घुमाती। गले तक लेती। लार टपक रही थी। मैं सिसकारा। “भाभी… बहुत अच्छा… गहरा ले… आह… तेरी जीभ कमाल कर रही है… चूस… और चूस…” वो बोली, “अब डाल… मेरी बुर में आग लगी है।”

वो बेड पर लेट गई। जांघें फैलाईं। मैंने लंड उनकी चूत पर रखा। धीरे से अंदर। वो कराही। “आह… रमेश… बड़ा है… धीरे… पूरा अंदर ले रही हूँ…” मैं रुक गया। फिर धीरे-धीरे पूरा अंदर। वो चीखी। “हाँ… पूरा… अब चोद… जोर से…” मैंने धक्के शुरू किए। धीरे से तेज। वो कमर हिला रही थी। “रमेश… जोर से… मेरी बुर फाड़ दो… चोद… आह… तेज… और तेज… मेरी बुर तेरी है…” मैंने स्पीड बढ़ाई। उनके चुचे हिल रहे थे। मैंने दबाए। वो मेरी पीठ नाखूनों से खरोंच रही थी। “रमेश… अंदर झड़… मुझे भर दे… गर्म माल डाल… मैं तेरी हूँ…” मैंने और जोर से धक्के मारे। एक साथ झड़ गए। मेरा गरम माल उनकी बुर में भर गया। वो काँपकर थम गई।

लेकिन वो रुकने वाली नहीं थी। वो उठी। “रमेश… आज पूरी होली तेरी।” वो मेरे ऊपर चढ़ गई। उनकी बुर मेरे लंड पर। वो कमर हिला रही थी। ऊपर-नीचे। उनके चुचे मेरे मुँह में। मैं चूस रहा था। वो चीख रही थी। “रमेश… तेरे लंड ने मुझे पागल कर दिया… आह… गहरा… और गहरा… मैं ऊपर से चोद रही हूँ तुझे…” मैंने नीचे से धक्के मारे। वो तेज हो गई। “रमेश… मैं झड़ रही हूँ… आह…” वो झड़ गई। मैंने उन्हें पलटा। डॉगी में। उनकी गांड पकड़ी। लंड डाला। तेज-तेज। वो तकिए में मुँह दबाकर चीख रही थी। “रमेश… चोद… मेरी बुर और गांड दोनों तेरी… फाड़ दो… जोर से… मुझे तेरी रंडी बना दे… बाल पकड़… पीछे से पटक…” मैंने उनके बाल पकड़े। पीछे से जोर से धक्के। वो अपनी बुर सहला रही थी। हम कई बार झड़े।

फिर मैंने कहा, “भाभी… आज गांड में?” वो शरमा गई। “धीरे से… पिछली बार से याद है…” मैंने ऑयल लगाया। पहले उंगली। वो सिहर उठी। “रमेश… आह… दर्द… लेकिन अच्छा…” फिर दो उँगलियाँ। वो कमर हिला रही थी। “रमेश… और अंदर… तैयारी कर रही हूँ…” फिर लंड। धीरे से अंदर। वो चीखी। “आह… रमेश… बड़ा है… धीरे…” मैं रुक गया। फिर धीरे-धीरे पूरा। वो बोली, “अब चोद… मेरी गांड चोद…” मैंने धक्के शुरू किए। वो चीख रही थी। “रमेश… जोर से… फाड़ दो मेरी गांड… आह… बहुत मजा आ रहा है… अपनी बुर में उँगलियाँ डाल रही हूँ…” मैं तेज हो गया। वो अपनी बुर में उँगलियाँ डाल रही थी। हम दोनों झड़ गए।

दिन भर रंग खेलते रहे। लेकिन हर बार अकेले मिलते ही चुदाई। शाम को सब घर लौट आए। लेकिन रात में फिर कमरे में। नेहा मेरे बिस्तर पर। रात भर चुदाई। उनकी सिसकारियाँ दबाकर। “रमेश… चुप… कोई सुन लेगा…” लेकिन मजा कम नहीं हुआ।

हॉली खत्म हुई। मैं दिल्ली लौटा। लेकिन वो यादें रह गईं। नेहा की बुर की गर्मी, उनकी सिसकारियाँ, उनका स्पर्श। कानपुर की उस हवेली में हमारा राज छिपा रहा। हर होली पर मिलने का वादा। जहाँ रंग सिर्फ बाहर नहीं, अंदर भी लगते हैं।

 

घर का माल घर में: मेरी और ममेरी बहन की कहानी

दोस्तो! मेरा नाम देवांशु (बदला हुआ) है।
मैं उत्तर प्रदेश के ललितपुर का रहने वाला हूं।
घर में मां, पापा और भाई हैं और अभी मैं अपनी वाइफ के साथ इंदौर में रहता हूं।

ज्यादा बोर न करते हुए सीधे कजिन सेक्स स्टोरी पर आता हूं।

बात कुछ साल पहले की है, मेरी उम्र 19 साल थी और मैं नया-नया जवान हुआ था।

गर्मियों में मैं मामा के यहाँ गया था।
मेरे मामा की बेटी कुछ खास सुंदर नहीं है लेकिन उसका फिगर बहुत मस्त है।
उसे देख के पूरे मोहल्ले के लंड टाइट हो जाते थे।

तब उसकी चूचियां निकलती आ रही थीं।
हम दोनों एक ही बेड पे, एक ही कमरे में सोते थे।
हमारे बीच बहुत अच्छी दोस्ती और बॉन्डिंग थी।

उस रात मेरी नींद खुली तो देखा कि उसकी शर्ट पेट के ऊपर थी और उसने इनरवियर नहीं पहनी थी।
मेरा लंड खड़ा हो गया.

तो मैंने उसे किस किया, पेट पर हाथ घुमाया और दूध मसलने चालू कर दिए।

उसकी नींद खुल गई और वह बोली, “बहन हूं आपकी, ये गलत है!”
मैंने उसे सॉरी बोला और हमारे बीच सब नॉर्मल किया।

लेकिन मुझे उससे प्यार हो गया था और मैं उसे चोदने के लिए प्लान बनाने लगा क्योंकि वह सेक्स को गलत समझती थी।

कुछ महीने बाद वह मेरे घर रहने आई और अब उसके दूध मस्त 34 के हो गए थे।
जब मैंने उसको देखा तो अपना लंड पकड़ लिया और उसने यह नोटिस कर लिया।

रात के खाने के बाद हम दोनों साथ सो गए।
मैंने जानबूझकर पतला लोअर पहना था और अंडरवियर नहीं पहनी थी।

उसके सोने के बाद मैं उसको किस करने लगा और कमर में हाथ डाल के गले लगा लिया।

उसे मज़ा आने लगा और उसने किसिंग में मेरा साथ दिया।
मैंने उसकी शर्ट का बटन खोल के दूध पर किस किया और चुत पर उंगली फेरी।

यह उसको पसंद नहीं आया।
सुबह जब वह उठी तो रोने लगी- तुम हर बार ऐसा करते हो।
मैंने उससे माफी मांगी और सब नॉर्मल किया।

लेकिन उसके जिस्म को मेरे हाथ का टच अच्छा लगा था और वह रोज़ वॉशरूम में उंगली करने लगी।

तीन महीने बाद मैं मामा के यहाँ गया क्योंकि उसके एग्जाम थे और मामा का सारा परिवार वैष्णो देवी जा रहा था।

मुझे यह अच्छा मौका लगा कि साक्षी अगर नहीं मानी तो जबरदस्ती पेल दूंगा।
लेकिन उसका उल्टा हुआ।

एग्जाम दूसरे शहर में हो रहे थे और मैं उसको लेकर गया।

एग्जाम के बाद वह मुझे एक होटल में ले गई, खाना खिलाने के बहाने और उधर उसने सारा सेटअप कर रखा था।

उसने मुझे प्रपोज किया तो पहले तो मैंने मना कर दिया।
वह रोते हुए बोली, “मैं आपके बिना नहीं रह सकती!”

उसने मेरे पैर पकड़ लिए तो मैंने उसे एक्सेप्ट कर लिया।
शाम को घर आए तो उसकी आँखों में मैंने हवस देखी।

घर आते ही उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और किस करने लगी।
मैं भी उसके दूध दबाने लगा।

उसे दर्द होने लगा।

वह कहने लगी, “उफ़्फ़्… आह्ह्ह्ह्… जान प्लीज! बहुत सारा प्यार दो मुझे!”

उसने मेरा लंड निकाल लिया।
मेरा लंड देख के वह डर गई और बोली, “मैं नहीं ले पाऊंगी! बहुत बड़ा और मोटा है, बाहर से ही कर लो!”

मैंने ‘हाँ’ में जवाब दिया और चुत चाटने लगा।
वह तड़पने लगी।

वह चिल्लाई, “उफ़्फ़्… आह्ह्ह्ह्… आह्ह्ह्ह्… जान बहुत सारा प्यार दो मुझे! अपना बना लो!”

वह अपने दूध दबवाने लगी। फिर मैंने लंड को चुत पर रखकर दाने को 10 मिनट रगड़ा।

उससे रहा नहीं गया, उसने बोला, “जान डाल दो अंदर! मुझे अपना बना लो! चोद अपनी प्यारी फूल जैसी बहन को, बजा डालो! मां-चोद, बहन-चोद अपनी!”

मैंने भी देर ना करते हुए लंड पेल दिया।
2 इंच जाने पर ही उसकी चुत फट गई और वह चिल्ला कर रोने लगी।
मैंने होठों से उसका मुँह बंद कर एक और झटका मारा और पूरा लंबा लंड उसकी चुत को चीरता-फाड़ता हुआ घुस गया।

उसके मुँह से आवाज़ आई, “मम्मी मर गई!”
और वह बेहोश हो गई।

मैं समझ गया और धीरे-धीरे चोदता रहा।
10 मिनट बाद साक्षी को होश आया, तब तक दर्द कम हो चुका था और चुत में लंड रनिंग कर रहा था।

वह बोली, “उफ़्फ़्… आह्ह्ह्ह … जान चोदो! और ज़ोर से फाड़ दो! अपनी रंडी बना, बहन के लंड!”

उसको इतना मज़ा आया कि वह मेरे लंड पर बैठकर खुद चोदने लगी।

मैंने भी कहा, “मादरचोद रंडी! मैं तो तुझे पहले से चोदना चाहता था! ले रंडी, तेरी गांड फटती थी, जैसे तेरी इज़्ज़त तेरी चुत में ही हो!”
लगभग 30 मिनट तक साक्षी की चुत बजाई।

वह बोली, “जान उस वक्त मैं छोटी थी, मुझे सेक्स के बारे में कुछ नहीं मालूम था! लेकिन अब मैं तुम्हारी वाइफ हूं, जितना चोदना है चोद लो, फाड़ दो चुत को, मैं कुछ नहीं बोलूंगी!”

मैंने बोला, “बोलेगी कैसे? मैं मुँह में अपना बड़ा लंड फंसा दूंगा!”

हम एक साथ झड़ गए और एक-दूसरे से लिपट के सो गए।
उसने लंड को मुँह में लिया और चूसने लगी।

वह बोली, “वाह! क्या मस्त आइसक्रीम है जान!”

20 मिनट चूसने के बाद लंड फिर खड़ा हो गया तो उसने अपनी चुत फैला दी।
मैं बोला- तेरी चुत तो भोसड़ा बन गई है, तेरी गांड कसी हुई है।

वह डर गई, बोली, “बहुत दर्द होता है! प्लीज चुत में ही डालो जान!”

मैंने उसको उल्टा किया और गांड पे 4 थप्पड़ मारे तो वह लाल हो गई।
थूक लगाकर जो पेला तो आधा लंड घुस गया।

वह चिल्लाने लगी और हिलने-डुलने लगी।
मैं उसकी गांड पर चढ़ गया और उसके पैर पीछे सिर पर रखकर बजाने लगा।

उसकी गांड से खून आ रहा था, वह बहुत चिल्लाई।
वह बोली, “प्लीज छोड़ दो मुझे!”

लेकिन 15 मिनट बाद वह अपनी गांड उचकाने लगी और पूरा लंड गांड में लेने लगी।
मैं झड़ने वाला था तो चुत में लंड पेल दिया और पूरा रस चुत में भर दिया।

उस दिन मैंने 4 बार उसकी चुत और गांड को पेला।
वह मेरे लंड की दीवानी हो गई।

उस दिन उससे चला भी नहीं जा रहा था, गांड और चुत में सूजन हो गई थी।
वह बोली, “अगर पहले चोदते तो मैं मर ही जाती!”

जब तक मामा जी वापस नहीं आ गए, हम दोनों नंगे ही सोते थे।
फिर मैं घर आ गया।

उसके बाद मेरी गवर्नमेंट जॉब लग गई और मैं इंदौर आ गया।

1 महीने बाद साक्षी ने बताया कि वह प्रेग्नेंट हो गई है।
मैंने उसको दवाई लेने की सलाह दी पर वह नहीं मानी।

फिर हम दोनों ने भाग कर शादी कर ली।

योग ट्रेनर ने दी चुदाई की ट्रेनिंग

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम प्रियंका कौर है. मैं 20 साल की जवान लड़की हूं. आज मैं आप लोगों के सामने सेक्सी लड़की की चुदाई कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूं। यह मेरी पहली कहानी है तो कृपया करके मेरी गलतियों को माफ करें।

कहानी शुरू करने से पहले मैं अपने बारे में आपको कुछ और जानकारी दे देती हूं. मैं एक सेक्सी जिस्म की मालकिन हूं. मेरा रंग गोरा है और मेरे बूब्स का साइज 32बी है. मेरी कमर 26 की है और मेरी गांड 34 की है.
अपने जिस्म की इस सेक्सी फिगर को मेंटेन करना मुझे बहुत अच्छा लगता है. इसलिए मैंने योगा ट्रेनर रखने की सोची.

मैं कई बार नोटिस किया करती थी कि मेरे मौहल्ले के लड़के और मर्द मेरी ओर हवस भरी निगाहों से देखा करते थे. मुझे ये देख कर खुशी होती थी कि मैं इतनी सेक्सी हूं कि लोगों के मुंह से लार टपकवा सकती हूं. मगर मैं चेहरे पर ये सब जाहिर नहीं होने देती थी.

मेरी सेक्सी गांड को देखकर जवान तो क्या, बूढों का लंड भी सलामी देने लगता था. सभी लोग मुझे भोगने के लिए प्यासे दिखते थे. मगर मुझे सबको तड़पाने में बहुत मजा आता था. इसलिए मैं अपने फिगर की ओर बहुत ध्यान देती थी.

मेरे परिवार में मेरे अलावा मेरे माता-पिता और एक छोटी बहन भी है. पिताजी काम के कारण ज्यादातर बाहर ही रहते हैं. मेरी मां की तबियत ज्यादा ठीक नहीं रहती है इसलिए घर का काम हम दोनों बहनें ही करती हैं. मेरी छोटी बहन स्कूल चली जाती है. उसके बाद घर को मैं ही संभालती हूं.

कुछ दिन पहले ही मैंने योगा सीखने का सोचा. मैंने एक योगा ट्रेनर ढूंढा जो मुझे बहुत ही मुश्किल से मिला. वो मेरे घर आया और हमने बैठ कर सब कुछ तय कर लिया. उसने अपना नाम रवि बताया. मैंने उसे सुबह 7 बजे आने के लिए कह दिया.

वो बात करके चला गया. मैं खुश हो गयी कि कल से मेरी योगा क्लास शुरू होने जा रही है. रात को मैं काफी उत्साहित थी. अगली सुबह जब उठी तो छोटी बहन तैयार होकर स्कूल चली गयी. मैं फ्रेश होकर तैयार हो गयी.

7 बजे योगा ट्रेनर आ गया. मैंने दरवाजा खोला तो उसकी नजर मेरी नाइटी पर गयी. मैंने जालीदार नाइटी पहनी हुई थी जिसके अंदर से मेरी लाल रंग की ब्रा और पैंटी भी साफ झलक रही थी.

योगा ट्रेनर की नजर मेरे आधे बाहर झांक रहे बूब्स पर जम गयी थी. मैं अपनी नाईटी को ठीक करते हुए खांसी तो उसका ध्यान हटा. फिर मैंने उसे अपने पीछे आने के लिए कहा. मैं आगे की ओर मुड़ी तो उसका ध्यान मेरी गांड पर गया.

उसके मुंह से हल्की सी आवाज आयी- हाय … क्या माल है!
मैं बोली- जी? आपने कुछ कहा क्या?
वो बोली- नहीं मैडम, मैंने तो कुछ नहीं कहा.
फिर मैं आगे चलने लगी. हम लोग हॉल में आ गये.

मैंने उसको हॉल में सोफे पर बैठ कर इंतजार करने के लिए कहा. वो मेरे जिस्म को ऊपर से नीचे तक देख रहा था. वो देखने में अच्छा था लेकिन बहुत ही ठरकी किस्म का इन्सान लग रहा था.

मैं बोली- मैं एक बार जरा अपनी योगा पैंट्स पहन कर आती हूं. आप थोड़ा वेट करो.
वो बोला- योगा पैंट्स की कोई जरूरत नहीं है. आप इस तरह के कपड़ों में भी कर सकती हैं. बल्कि खुले कपड़ों में तो और ज्यादा अच्छा रहता है योगा करना.

उसकी बात मैंने सोच कर कहा- अच्छा ठीक है. तो फिर शुरू करते हैं.
वो बोला- जी. ठीक है.
कहकर उसने मैट नीचे वहीं फर्श पर बिछा दिया. वो मुझे पहले कुछ वार्म-अप एक्सरसाइज करवाने लगा.

जैसे जैसे वो कहता गया वैसे वैसे मैं करती गयी. वो भी मेरे साथ साथ कर रहा था. काफी देर तक एक्सरसाइज करने के बाद मेरी चूचियां मेरी ब्रा से बाहर आने को हो गयी थीं. उसकी नजर मेरी चूचियों को ही घूर रही थी.

उसके बदन में पसीना आ गया था. उसने अपना टीशर्ट उतार दिया.
मैं बोली- ये आप क्या कर रहे हैं?
वो बोला- मैडम कपड़े खराब हो जायेंगे, अभी तो पूरी प्रैक्टिस बची हुई है.
मैंने फिर कुछ नहीं कहा.

हम दोनों फिर एक्सरसाइज करने लगे. मैट पर कूदते हुए मेरे बूब्स भी ऊपर नीचे उछल रहे थे. अपने उछलते बूब्स को फील करके मुझे भी उत्तेजना होने लगी थी. सामने रवि का कसरती बदन देख कर मुझे सेक्स की फीलिंग भी आ रही थी.

कुछ देर के बाद उसने अपनी लोअर भी निकाल दी. वह केवल शॉर्ट्स में ही एक्सरसाइज करने लगा. मैं उसको देख रही थी.
फिर वो बोला- अब काफी वार्म अप हो गया है. अब योगा प्रैक्टिस करते हैं.

उसके बाद उसने मुझे कई सारे आसन करवाये. आखिर में फिर सेतुबन्धासन (ब्रिज पोज़) की प्रैक्टिस करवाने लगा. इस पोज में कमर को उठाते हुए पेट को ऊपर करते हुए शरीर को पुल के आकार में करना होता है.

इस पोजीशन में आने के बाद मेरी चूत ऊपर उठ गयी. रवि मेरी टांगों के बीच में आकर मुझे कमर से सपोर्ट दे रहा था. इस पोजीशन में उसका लंड उसके शॉर्ट्स में से मुझे मेरी पैंटी पर छूता हुआ महसूस हो रहा था. मैं फील कर पा रही थी कि उसका लंड टाइट हो रहा था.

उसके हाथ मेरी कमर पर थे और धीरे धीरे मेरे बूब्स के नीचे आ गये थे. उसके हाथों के अंगूठे मेरे बूब्स को दबा रहे थे. उसका लंड और ज्यादा कड़ा होकर मेरी चूत पर रगड़ने लगा था. वो मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा.

जब मुझे लगा कि बात बहुत आगे जा रही है तो मैंने बोला- बस… आज के लिये यह काफी है. बाकी कल करेंगे.
वो बोला- ठीक है, प्रियंका. मैं कल आपको ज्यादा देर तक प्रैक्टिस करवाऊंगा.

उसके बाद वो चला गया.

अगले दिन फिर वो अपने टाइम पर आ गया. छोटी बहन स्कूल चली गयी थी. मां हॉल में लेटी हुई थी. उनकी कमर में बहुत दर्द था. उनको डिस्टर्ब ना हो इसलिए हम वहां पर योगा प्रैक्टिस नहीं कर सकते थे.

मैंने कहा- आज तो यहां पर जगह नहीं है.
वो तपाक से बोला- कोई बात नहीं, अंदर किसी रूम में कर लेते हैं अगर आपको कोई प्रॉब्लम न हो तो.
मैंने कहा- ठीक है. अंदर रूम में आ जाओ.

हम दोनों रूम में चले गये. मैं अपनी योगा ड्रेस निकालने लगी.
वो बोला- अगर आपको जल्दी से अच्छे रिजल्ट्स चाहिएं तो आपको कम से कम कपड़ों में योगा करना चाहिए. आप चाहें तो ब्रा और पैंटी में ही कीजिये.

मैं बोली- लेकिन आपके सामने?
वो बोला- मेरी बाकी सभी क्लाइंट्स भी करती हैं. वो लोग तो बहुत ओपन माइंडेड हैं. अगर आपको ठीक नहीं लग रहा तो कोई बात नहीं.
मैंने सोचा कि अगर मैंने मना किया तो ये मुझे गंवार समझेगा. इसलिए मैंने उसको हां बोल दिया. मुझे नहीं पता था कि मेरे जैसी सेक्सी लड़की की चुदाई की तैयारी कर रहा है मेरा ट्रेनर.

अपनी नाइटी मैं उसके सामने ही उतारने लगी. उसकी नजरों से हवस टपक रही थी. उसके सामने मैं ब्रा और पैंटी में ही रह गयी. मैंने उस दिन ब्लैक ब्रा और ब्लैक ही पैंटी पहनी थी. उसके बॉर्डर पर जाली लगी हुई थी जिससे मेरी चूत और चूचियों को बहुत ही सेक्सी लुक मिल रहा था.

मैंने देखा कि मुझे इस रूप में देख कर रवि का लंड उसकी लोअर में ही अलग से दिखने लगा था. फिर हम दोनों वार्म अप करने लगे. कुछ देर वार्म करने के बाद वो पसीना पसीना हो गया और उसने अपनी बनियान और लोअर को निकाल दिया.

आज उसने एक वी-शेप का अंडरवियर पहना हुआ था. उसका लंड उसमें अलग से ही उठा हुआ दिख रहा था. उसके लंड को देख कर लग रहा था कि वो कम से कम 8 इंच लम्बा तो होगा ही. उसके लंड को इस तरह से देखकर मेरी चूत में भी कुछ कुछ होने लगा. मगर मैंने कुछ जाहिर नहीं होने दिया.

वो बोला- आज मैं आपको भुजंगासन (कोबरा पोज) करवाऊंगा. इसके लिए आपको बेड पर चलना होगा. यहां जमीन पर ठीक से नहीं होगा.
मैं उसकी बात मान गयी और उसने मुझे बेड पर पेट के बल लेटने के लिए कहा.

फिर वो मेरे पास पीछे आकर बैठ गया. उसने मुझे आगे से छाती उठाने के लिए कहा. मैं उठाने लगी लेकिन मेरे पैर भी पीछे से उठ रहे थे.
वो बोला- मैं आपके पैरो पर बैठ जाता हूं जिससे केवल छाती ही उठेगी.

वो मेरी गांड के ठीक बीच में मेरी जांघों पर बैठ गया. उसके अंडरवियर में से उसका लंड मेरी गांड पर टच होने लगा. उसने मुझे आगे से धड़ उठाने के लिए कहा.

मैं उठाने लगी तो नहीं उठा पाई. उसने मेरे कंधों को पकड़ लिया और मेरी मदद करने लगा. अब उसका लंड मेरी गांड की दरार में पहले से ज्यादा अंदर घुसता सा लगने लगा. मुझे मजा आने लगा. मेरी नर्म नर्म गोल गांड में लंड लगाने में उसको भी मजा आ रहा था.

वो बोला- ऊपर देखो.
मैं ऊपर देखने लगी. उसका लंड मेरी पैंटी की स्ट्रिप को हटाने की कोशिश कर रहा था. फिर उसने मुझे वापस नीचे आने को कहा. मैं सिर नीचे रख कर आराम से लेट गयी. कमर दर्द करने लगी.

मैं बोली- मेरी कमर में दर्द हो रहा है.
वो बोला- मैं मसाज कर देता हूं. वो मेरी कमर को मसाज देने लगा. उसके हाथ मेरी गांड को भी दबाने लगे. वो मेरे गोरे गोरे चूतड़ों से मेरी पैंटी की स्ट्रिप को हटा कर अपनी उंगलियों से मेरी गांड को सहलाने की कोशिश कर रहा था.

मुझे भी अच्छा लग रहा था. बीच बीच में वो मेरी जांघों के अंदर मेरी चूत के पास अपने लंड को भी टच कर रहा था. मेरी चूत में गीलापन आने लगा था.
मैं थोड़ा कसमसाने लगी थी.

उसको शायद पता लग गया था कि मैं गर्म हो रही हूं.
उसके बाद वो बोला- मैडम, इतना आराम नहीं करना है. शरीर ठंडा पड़ा जायेगा. चलिए, फिर से प्रैक्टिस करते हैं.

उसने फिर से मुझे आगे से धड़ उठाने के लिए कहा. इस बार जब उसकी जांघें मेरी जांघों के बीच में मेरी गांड के पास टच हुई तो मैंने पाया कि उसका लंड नंगा होकर मेरी गांड को छू रह था. पता नहीं कब उसने अपना अंडरवियर निकाल दिया था.

वो अपने लंड को मेरी पैंटी में घुसाने लगा. मैं कुछ नहीं बोली. हिम्मत पाकर उसने मेरी पैंटी खींच दी और मेरी चूत पर लंड को रगड़ने लगा. मेरी आंखें बंद होने लगीं. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. मेरे योगा ट्रेनर का गर्म गर्म लंड मेरी चूत को छू रहा था.

इससे पहले कि मैं कुछ और समझ पाती उसने मेरी चूत में एक जोर का धक्का लगा दिया. उसका 8 इंच का लंड मेरी चूत में जा घुसा और मेरी आंखों के सामने अंधेरा हो गया. मेरी कुंवारी चूत में जान निकाल देने वाला दर्द हुआ.

मैं बेसुध सी हो गयी. इसी का फायदा उठा कर उसने मेरी ब्रा भी खोल दी और मेरी चूचियों को भी नंगी कर दिया. अब मैं ऊपर से नीचे तक पूरी नंगी पड़ी हुई थी.

फिर वो मेरी चूचियों को आह्ह … आह्ह करते हुए दबाने लगा. मैं आधे होश में थी. जब पूरे होश में आयी तो उसके हाथ मेरी दोनों चूचियों को जोर जोर से भींच रहे थे. उसका लंड मेरी चूत में और अंदर घुसता जा रहा था.

धीरे धीरे करके उसने मेरी चूत में पूरा लंड घुसा दिया और मुझे चोदने लगा. मैं उठने लगी तो उसने मेरी गर्दन पकड़ कर मेरा मुंह को बेड में दबा लिया और मेरी चूत को पेलने लगा. फिर उसने मेरी गांड को ऊपर खींचा और नीचे एक तकिया दे दिया.

मैं बोली- रुको, मुझे बहुत दर्द हो रहा है.
वो बोला- नहीं रुक सकता मेरी जान … दर्द से ज्यादा अब तुम्हें मजा देने की बारी है. एक बार लंड का स्वाद चख लिया तो रोज ही मेरे लंड से खुद ही चुदने लगोगी.

तकिया रख देने से मेरी चूत उठ कर एकदम सही पोजीशन में आ गयी. उसने मेरे बालों से मुझे पकड़ लिया जैसे घोड़ी की लगाम पकड़ते हैं. रवि ने फिर से धक्का मारा और मेरी चूत में लंड फंसा कर उसको आगे पीछे करने लगा. मेरी चूत ने अब लंड को एडजस्ट कर लिया था और मैं चुदने का मजा लूटने लगी.

मेरे मुंह से कामुक सीत्कार आने लगा- आह्ह… ओहह … फक मी रवि … यस … आह्ह लव यू … फक मी हार्ड … आह्ह और जोर से. कमॉन .. आ्हह … करके मैं उसके लंड को चूत में लेती रही और वो मुझे चोदता रहा.

उसके धक्के इतने ताकतवर थे कि मेरी बच्चेदानी तक उसका लंड टक्कर मार रहा था. मेरी आंखें बंद होने लगी थीं. उसने सच ही कहा था. अब तो मेरा मन करने लगा था कि वो मुझे ऐसे ही चोदता रहे. मैं आंखें बंद करके उसके लंड का मजा लेने लगी.

वो मुझे घपाघप चोदता रहा. उसके मुंह से भी मस्त कामुक सिसकारियां निकल रही थीं- आह्ह … ओह्ह … हाय सेक्सी … आह्ह … ऐसी टाइट कुंवारी चूत बहुत दिनों के बाद नसीब हुई है. तुझे तो मैं अपनी रानी बना लूंगा मेरी जान … आह … ले मेरे लंड को, पूरा ले ले. आह्ह.. तुझे चूत की रानी न बना दिया तो मेरा नाम नहीं.

उसकी चुदाई इतनी मजेदार थी कि कुछ ही देर में मेरा पूरा जिस्म अकड़ने लगा. मैं उसके लंड पर ही झड़ने लगी. मेरी चूत से निकले रस ने उसके लंड को भिगो दिया और अब पच-पच की जोरदार आवाज होने लगी.

रवि का लंड अब चिकना होकर और ज्यादा अंदर तक मेरी चूत को फाड़ने लगा. वो मेरी चूत की गर्मी को अब ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाया और फिर मेरी चूत में ही झड़ने लगा. उसका गर्म गर्म वीर्य मुझे मेरी बच्चेदानी तक महसूस हुआ.

रवि थक कर मेरे ऊपर ही गया. मेरी हालत भी खराब हो गयी थी. हम दोनों हांफ रहे थे. फिर धीरे धीरे उसका लंड सिकुड़ने लगा और मेरी चूत से बाहर आने लगा. मैंने उठ कर देखा तो उसके लंड पर खूब सारा वीर्य और काफी सारा खून लगा हुआ था.

मैं खून देख कर डर गयी.
वो बोला- घबराओ नहीं, तुमने पहली बार सेक्स किया है. तुम्हारी चूत का ताला मैंने खोल दिया है. अब तुम आराम से सेक्स का मजा ले सकती हो. पहली बार में सभी लड़कियों का खून निकलता है जिनकी सील नहीं टूटी होती है.

उसके बाद वो मुझे चूमने लगा. मुझे प्यार करने लगा. फिर उसने मुझे साफ किया और वहीं बेड पर मेरे साथ लेट गया.
मैं बोली- अब तुम्हें जाना चाहिए. योगा टाइम खत्म हो गया है. अगर मां उठ कर आ गयी तो प्रॉब्लम हो जायेगी.

वो बोला- ठीक है डार्लिंग, अब मैं जा रहा हूं. मगर कल से मैं सेक्सी लड़की की चुदाई घर के हर एक कोने में करूंगा. तुमको चोद चोद कर अपनी रानी बना लूंगा.

उसके बाद उसने अपने कपड़े पहने और निकल गया. मैं भी कपड़े पहन कर बाहर आ गयी.

इस तरह मेरे योगा ट्रेनर ने मुझे चुदाई की ट्रेनिंग भी बखूबी दी. उसने मुझे चोद चोद कर मेरी चूत को अपने लंड की रानी बना लिया. मुझे पहले ही सेक्स में इतना दमदार लंड मिल गया.

मैं अपने योगा ट्रेनर से अब रोज ही अपनी चूत चुदवाती हूं. मुझे बहुत मजा आता है. उसके लंड से चुद चुद कर मेरी गांड और ज्यादा मोटी और रसीली हो गयी है. मेरी चूचियों का साइज भी बढ़ गया है. मैं पहले से ज्यादा सेक्सी हो गयी हूं और बहुत खुश हूं.

मुझे चोद कर अपनी बेइज्जती का बदला लिया

प्रिय पाठकों नमस्कार मैं वंदना आज आपको अपनी एक सच्ची chudai की कहानी बताने जा रही हुं के कैसे एक मौलवी ने मुझे चोद कर मेरे पति से अपने अपमान का बदला लिया मेरा नाम वंदना है मैं बिहार के पटना के पास एक गांव में रहती हुं मेरी उम्र 35 साल है मेरा फिगर काफ़ी सेक्सी हैं बूब्स बड़े बड़े गोरा रंग गदराया बदन मेरे बूब्स मेरी ब्रा और ब्लाउस को फाड़ कर बाहर आने को रहते हैं उन मै फिट ही नहीं होते.

बिहार में ज्यादातर महिलाएँ साड़ी ही पहनती हैं मै भी साड़ी ही पहनती हूं मैं एक घरेलू शादी शुदा औरत हुं मेरे घर में मैं मेरे पति और दो बच्चे हैं एक लड़की ओर एक लड़का मेरी शादी को 14 साल हो चुके हैं बेटी 13 साल की और बेटा 9 साल का है मेरे पति सुनार है हमारा गांव काफ़ी बड़ा है और उसमें एक मस्जिद भी है.

हमारे गांव में मुस्लिम लोग भी रहते है लेकिन आबादी इतनी ज्यादा नहीं है हमारे गांव के हिंदू मुस्लिम सब मिल कर रहते हैं मस्जिद हमारे घर के बिलकुल पास है मस्जिद का एक चोर दरवाजा है जो हमारे घर की बैक साइड में है लेकिन वो हमेशा मस्जिद के अंदर से बंद ही रहता है उस मस्जिद में मौलवी थे जिनका नाम फखरूदीन काजी है.

उम्र कोई 50 साल थी हट्टे कट्टे कसरती बदन उनका स्वभाव बहुत ही हसमुख था सबसे प्यार से बात करने वाले कभी गुस्सा नहीं करते थे थे मैं इस लिए लिख रही हूं क्योंकि वो अब पता नहीं कहां चले गए हैं। अब मैं अपनी कहानी पर आती हूं ये बात दो साल पहले की है जब मौलवी साहब गांव में थे.

एक दिन में अपने घर में अकेली थी बच्चे स्कूल थे तबी अचानक मुझे गली में शोर सुनाई दिया मैं शायद किसी मैं झगड़ा हो रहा था मैं भाग कर गली में गई तो मैंने देखा के मेरे पति और उस मौलवी के दरमियान किसी बात को लेकर बहस हो गई थी मेरे पति उस मौलवी को बुरी तरह पीट रहे थे.

मेरे पति अपने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर पीट रहे थे और बेचारा मौलवी साहब सीधा सादा चुपके से मार खा रहा था बात कुछ पैसों को लेकर थीं लेन देन की मौलवी को बहुत चोटें आईं थीं गली में सब ने मिलकर लड़ाई को खत्म और मौलवी को डॉक्टर के पास ले गए मुझे उस मौलवी पर बहुत तरस आया और अपने पति पर गुस्सा आया.

अगले दिन में चुपके से मस्जिद के अंदर गई उस समय मौलवी अकेला था अपने रूम में पूरी मस्जिद में कोई नहीं था मेरे घर पर मेरे बच्चे अकेले थे मैं उनको बोल कर आई थी के मैं पड़ोसन के घर जा रही हूं मैं थोड़ी देर बाद आऊंगी मैं सीधा ही उसके रूम में घुस गई वो अंदर अंडरवीयर में लेता हुआ था.

उसका लन्ड उसके अंडरवीयर में उफान मार रहा था उसका साइज देखकर ही मैं हैरान हो गई काफ़ी लम्बा और मोटा था कम से कम 9 इंच लम्बा और तीन इंच मोटा मेरे पति से भी बड़ा था उसका मुंह दूसरी तरफ था कमरे में पंखा फुल स्पीड में चल रहा था मैं उसका लन्ड देखकर अपने बूब्स मसल रही थी.

उसकी चौड़ी छाती से मेरे अंदर काम वासना जाग उठी थी तभी उसने मुझे देख लिया था और हड़बड़ा कर उठ गया और बोला भाभी जी आप मैं एकदम होश में आई बोला भाभी जी आप कब आई मैंने देखा नहीं और नाही आपने आवाज दी और वो धोती पहनने लगा और बोला आइए बैठिए किया पिएंगी चाय या शरबत. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैंने कहा कुछ नहीं और मैं अंदर आ कर बैठ गई कुर्सी पर मैंने कहा मैं आपसे माफी मांगने आई हूं अपने पति की तरफ से उन्होंने आप के साथ बहुत गलत किया है वो बोला आप माफी क्यों मांग रही है आपकी कोई गलती नहीं है प्लीज आप मुझसे माफी मांग कर शर्मिंदा मत कीजिए मुझे गर्मी बहुत है आप बैठिए मै आपके लिए शरबत लेके आता हूं.

मेरे मना करने के बाद भी वो शरबत बनाने लगा मैं खामोश हो कर बैठी रही वो मुझे शरबत देते हुए बोला आप को यहां नहीं आना चाहिए था किसी ने देख लिया तो हम दोनों की बहुत बदनामी होगी मैंने कहा मैं किसी से नहीं डरती हूं मैं आपका हाल चाल पूछने आई हूं कल मेरे पति ने आपके साथ झगड़ा किया था.

फिर हम दोनो बातें करने लगे मौलवी का ध्यान बार बार मेरे बूब्स क्लीवेज पर जा रहा था मैं उसकी नजर समझ गई मैं भी जानबूझकर उसको अपने बूब्स दिखा रही थी अपनी साड़ी का पल्लू हटा दिया था वो मेरा इशारा समझ गया था हम दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे.

मैंने कहा के आपका परिवार कहां है वो बोला मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है बीवी काफ़ी साल मर गई थी दो बेटे थे वो सऊदी अरब में रहते है मैने देखा कि मौलवी के सिर पर चोट थी मैं उठी और मौलवी के पास जाकर उसके सिर पर लगी चोट देखने लगी मैं जानबूझकर उसके साथ चिपक रही थी.

मैंने कहा कोई बात नही है चोट जल्दी ठीक हो जाएगी मेरे बूब्स उसके मुंह को टच कर रहे थे मौलवी से भी रहा नहीं गया और उसने अपने हाथ मेरी कमर पर रख दिए और मेरे पेट को मसलने लगा अपनी उंगलियां मेरी नाभि पर फेरने लगा मैं मदहोश हो रही थी अलग सा ही मजा आने लगा.

जब मैंने कोई रिएक्ट नहीं किया तो उसका होंसला बड़ गिया और मेरे बूब्स दबाने लगा मैं कुछ नहीं बोली कियोकि मै खुद यहीं चाहती थी वो उठा और मेरे चेहरे को अपने हाथों में लेकर मेरे होंठों को चूमने लगा मैं भी उसका पूरा साथ देने लगी वो मेरे होंठो को बुरी तरह काटने लगा दोपहर का वक्त था किसी के आने का खतरा नहीं था.

वो मेरी गर्दन और मेरे गालों पर कई चुम्बन जड़ दिए थे उसने मुझे कस के अपने सीने से लगा लिया था पीछे हाथ डाल कर मेरे ब्लाउस के बटन खोलने लगा उसने मेरा ब्लाउस और ब्रा भी उतार कर फैंक दी थी मेरा उपर का हिस्सा पूरा नंगा था मेरे बूब्स को दबाने लगा और बारी बारी दोनो को चूसने लगा.

एक को चूसता तो दूसरे को दबाता इतनी जोर से दबाता के के मेरी छाती में दर्द होने लगा बीच बीच में मेरे निप्पल को दातों से काट देता मैं दर्द से कराह उठती फिर उसने मेरा पटिकोट खोल दिया और मैंने अपनी पैंटी भी उतार दी अब मैं बिल्कुल नंगी थी उसने भी अपनी धोती और अंडरवीयर उतार दिए.

अब हम दोनो बिलकुल नंगे थे उसने मुझे अपना लन्ड चूसने को बोला मैं घुटनों के बल बैठ गई और उसका लन्ड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी उसके लन्ड का टोपा और सुपाड़ा काफ़ी दमदार था करीब पांच मिनट तक लन्ड चूसने के बाद उसने मुझे खडा किया और उठा कर बेड पर पलट दिया और दरवाजा बंद करने लगा.

फिर वो मेरे ऊपर चढ़ गया और मेरे होंठ चूसने लगा फिर सारे शरीर को चूमने चाटने लगा मैं मदहोश होने लगी फिर वो मेरी टांगो के बीच आ गया और मेरी दोनों टांगों को अपने कंधे पर रख दिया और अपने लन्ड को मेरी योनि के मुख पर रख दिया और मेरे मुम्मों को जोर से मसल कर कस के धक्का दिया.

लन्ड एक ही बार में योनि द्वार को चीरता हुआ अन्दर बच्चेदानी से जा टकराया मेरी चीख निकल गई तड़पने लगी दर्द से दोहरी हो गई लन्ड मोटा था तो उसने मेरी योनि को चौड़ा कर दिया था मेरी आंखों से आंसू आ गए फिर उसने धक्के लगाने शुरू कर दिया उसके हर धक्के से मैं बुरी तरह हिल रही थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

उसने फिर स्पीड बड़ा दी बड़ी तेजी से चोदने लगा मेरी सिसकारियां पूरे रूम में गूंज उठी थी फिर उसने मुझे घोड़ी बनाया फिर चोदने लगा अब मुझे भी मजा आने लगा था मैं फिर वो मेरे नीचे लेट गया मुझे उपर बैठा दिया मैं उसके लन्ड पर उछलने लगी मेरे बूब्स हवा में उछल रहे थे.

और वो मेरी पीठ पर जोर जोर से हाथ मार रहा था उसने मुझे फिर नीचे लिटा दिया और मेरे ऊपर आ गया और फिर चोदने लगा वो बोला क्यों जानेमन as रहा है मजा मैंने कहा हां मेरे राजा बहुत मजा आ रहा है साला कितने सालों बाद एक औरत को चोद रहा हूं जब से बीवी मरी थी तब से तड़प रहा था आज सारी कसरें निकलूंगा.

मैंने कहा निकल लो मैं अब तुम्हारी हुं चोद दो मुझे फाड़ दो ले लो अपना बदला मेरे पति से उसने कहा बदला ऐसे पूरा नहीं होगा जब तक तेरे अंदर अपना बीज ना डाल दूं तुमारा पेट अपने बच्चे से फूला हुआ देखना चाहता हूं मैं तो मैंने कहा ठीक है उसने मुझे करीब 40 मिनिट तक बुरी तरह से चोदा. मैं चार बार झड़ चुकी थी फिर वो मेरे ऊपर गिर गया और अपना सारा वीर्य मेरे अंदर छोड़ दिया बहुत सारा निकला उसका मॉल.

फिर मैं उठी और कपड़े पहनने लगी जब मैं जाने लगी तो मेरा हाथ पकड़ कर बोला फिर कब आयेगी मैंने कहा कल आऊंगी पीछे वाला दरवाजा खुला रखना. वो बोला ठीक है फिर हमको जब भी मौका मिलता हम जमकर संभोग करते वो पीछे वाला चोर दरवाजा खोल देता मैं चुपके से अंदर आ जाती मै जल्दी ही गर्भवती हो गई ये बात जब मैंने मौलवी को बताई तो वो बहुत खुश हुआ और बोला अपने पति को छोड़ कर मुझसे शादी करले तुझे रोज रोज बहुत मजा और हर साल मै एक बच्चा दूंगा.

मैंने कहा नहीं ये नहीं हो सकता लेकिन मै तुमसे ही अपनी मरवाऊंगी ये मेरा वादा है बच्चे का पति को शक न हो इसलिए मैंने दो तीन बार पति से भी चुदवा लिया था जब मैं 6 मंथ प्रेगनेंट थी तो मैंने अपना फूला हुआ पेट मौलवी को दिखाया तो वो बहुत खुश हुआ मैंने एक खूबसूरत लडके को जन्म दिया अब वो एक साल का हो गया है लेकिन मौलवी गांव से पता नहीं कहां चला गया था लेकिन उसके प्यार की निशानी मेरे पास थी ये है मेरी कहानी आपको कैसी लगी.

लड़की ने नौकरी का अहसान चूत से चुकाया

दोस्तो, मैं राज हूँ.
ये मेरी पहली सेक्स कहानी है, तो गलती होना लाजिमी है. प्लीज नजरअंदाज करते हुए माफ़ कीजिएगा.

पाठिकाओं के कौतूहल हेतु लिखना चाहता हूँ कि मेरे लंड का साइज़ सामान्य भारतीयों की तरह ही है, पर इसकी देर तक चलने की खासियत है, जिस वजह से लड़कियों और भाभियों के द्वारा मुझे बिस्तर में बेहद पसंद किया जाता है.
अपनी इसी गुणवत्ता के चलते मैंने बहुत सारी भाभियों और लड़कियों को खूब चोद कर खुश किया है.

आप सभी के लंडों से निवेदन है कि वे खड़े हो जाएं और अपनी अपनी चुत में घुस जाएं या चुत न हो तो हाथ से हिलाएं.
लड़कियों और भाभियों की प्यासी चूतों से प्यास लंड के लिए गर्म होने की इल्तिजा है.

ये फ्री सेक्स स्टोरी आज से 3 साल पहले की उस समय की है, जब मैं जॉब लगवाने का काम करता था.
अपने उसी काम के दौरान मुझे अपनी इस कहानी की नायिका मिली.

उस समय मैं दिल्ली में ही जॉब कर रहा था, साथ ही कम्पनीज में जॉब के लिए प्लेसमेंट भी करवाता था.
इसके एवज में मुझे कम्पनीज से कमीशन मिलता था और कैंडीडेट से भी एक महीने की सैलरी मिलती थी.

एक दिन किसी अनजान नंबर से कॉल आया कि मुझे जॉब की तलाश है.
मैंने उसे अपना रिज्यूमे और एक फोटो भेजने को कहा.

जब उसने अपना फोटो भेजा, तो कसम से लंड फनफना उठा … क्या माल थी यार.

मेरा लंड तो उसकी फोटो देखते ही खड़ा हो गया था.
मैंने उसे दूसरे दिन आने को कहा.

उसका नाम रजिया था (बदला हुआ नाम).
रजिया एकदम दूध जैसी गोरी लौंडिया थी.

उसके बूब्स 34 के, कमर 28 की और उसकी गांड 36 की थी … या यूँ कहूँ कि ऐसा लगा कोई परी उतर कर आ गई हो.
सामने से उसे कोई भी देखेगा तो उसका लंड हर हालत में तुनकी मारेगा, यह गारंटी थी.
मतलब उसके दूध और गांड के उभार देख कर तो किसी बूढ़े का भी लंड खड़ा हो जाएगा.

वह आई और मैंने उसका इंटरव्यू करवाया, पर उसका सिलेक्शन कुछ कारणों से नहीं हो पाया.

दरअसल उस कंपनी के बॉस को लड़की पसंद आ गई थी और वह उसे जॉब देने के पहले उससे ब्लो जॉब करवाना चाहता था, उसे चोदना चाहता था.

यह कंपनी एक फ्लैट बेचने का काम करने वाली कंपनी थी तो कस्टमर को पटाने के लिए उसके साथ लेटने का काम भी करना पड़ता था.
लड़की अनेक मर्दों से चुदने के लिए राजी नहीं थी.

मैंने उससे कहा कि कोई बात नहीं मैं किसी दूसरी कंपनी में बात करूंगा.

वह मुझसे बोली- मैं ऐसा काम नहीं कर सकती हूँ, जिधर मैं एक कॉल गर्ल बन कर रह जाऊं!
मैंने कहा- चलो किसी दूसरी कंपनी में देखता हूँ.
वह हूँ करके चली गई.

उस दिन के बाद मेरी उससे रोज़ाना बात होने लगी.
अब उससे मेरी गाहे बगाहे मुलाकात होना शुरू हो गई.
कुछ समय बाद उससे मेरी काफी सारी बातें होने लगीं.

एक दिन उसने बताया कि वह नई जगह शिफ्ट हुई है, तो उसे घर का कुछ सामान लाना है.
मैंने उसकी मदद की.

उस दिन से वह मुझसे कुछ ज़्यादा ही क्लोज़ हो गई.
फिर धीरे-धीरे हमारी बातें दोस्ती से प्यार की होने लगीं.

एक दिन मैंने उसकी जॉब एक अच्छी कंपनी में लगवा दी, उधर उसके साथ कुछ भी गड़बड़ होने की आशंका नहीं थी.
वह बहुत खुश थी.

मैंने उससे पार्टी मांगी.
उसने संडे को मिलने को बोल दिया.

मैंने कहा- संडे को ही क्यों?
वह मुस्कुरा कर बोली- जरा खुल कर मिल लेंगे!

मैं खुल कर मिल लेंगे का अर्थ समझ गया.
मैंने उससे कहा- रजिया मैं तुमसे प्यार करता हूँ और तुमसे अपना प्यार जताना चाहता हूँ.
वह हंस कर बोली- हां, मैं भी अपना प्यार जताना चाहती हूँ.

मैंने उसका हाथ दबाया तो उसने आंख दबा दी.
मैं समझ गया कि ये लड़की मुझसे चुदने के लिए राजी है.

मैंने पहले ही सारी तैयारी कर ली थी, क्योंकि आग दोनों तरफ़ बराबर लगी हुई थी.
लौड़े की सफाई कर ली थी और बियर की कैन्स ले ली थीं.

तय समय पर हम दोनों मिले.

मैंने एक रिसॉर्ट में रूम बुक कर लिया था.
रूम में आते ही वह मेरे सीने से लग गई.

साला लंड तो ऐसे कड़क हो गया था कि अभी पैंट फाड़ कर बाहर निकल जाएगा.
हमारे होंठ कब एक-दूसरे से जुड़े, पता ही नहीं चला.

कम से कम 20 मिनट तक हम एक-दूसरे की जीभ से खेलते रहे और होंठों को पीते रहे.
क्या होंठ थे उसके एकदम रूई जैसे मुलायम …

फिर मैंने उसके चूचों को धीरे-धीरे दबाना शुरू किया तो वह जोर-जोर से सिसकारियां लेने लगी.
मैंने जल्दी से उसकी टी-शर्ट उतारी और उसकी ब्रा को भी अलग कर दिया.

सच में बड़े ही मस्त बूब्स थे यार … कसम से देख कर ही ऐसा लगा कि बस इन्हें खाता ही रहूँ.

उसके बूब्स पर उसके गुलाबी निप्पलों की झलक तो ऐसी थी कि कसम से मजा ही आ गया.

मैंने एक निप्पल को अपने होंठों के बीच में दबाया और चूसना शुरू कर दिया.
वह मस्त हो रही थी और मादक आवाज निकालती हुई मुझे अपने हाथ से अपने दूध चुसवा रही थी.

मैंने उसके दोनों निप्पल बारी बारी से खूब देर देर तक चूसे और खींचे.
उसकी चूचियां कुछ ही देर में एकदम लाल हो गई थीं क्योंकि मैं एक दूध को चूस रहा था और दूसरे को अपनी मुट्ठी में भर कर मसल रहा था.

फिर दूध से मन भर लेने के बाद मैं नीचे को हुआ और उसके पेट पर किस करना शुरू कर दिया.

वह बिन पानी की मछली के जैसे मचल रही थी.
अब मुझसे भी कंट्रोल नहीं हो रहा था.
मैंने भी जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उतारे और उसकी पैंटी को उतार दिया.

आह मस्त चूत थी यार … कसम से एकदम कचौड़ी सी फूली और झांट रहित एकदम सफाचट चिकनी चमेली सी चुत … देख कर ही पता चल रहा था कि इसने लंड लेने के चक्कर में आज आने से पहले ही साफ़ की है.

चुत का रंग भी एकदम गुलाबी, जरा भी कालापन नहीं … यह इस बात का प्रमाण था कि चुत में लंड का आना जाना या तो हुआ ही नहीं है या अभी कम चली है.

फिर जैसे ही मैंने अपने होंठ उसकी चूत पर रखे, उसके मुँह से सिसकने की आवाज़ आने लगी.

मैंने भी जीभ अन्दर डाल दी और जीभ से चुत की दीवारों का रस चाटने लगा.
साथ ही मेरे होंठ उसकी चूत के दाने को पकड़ कर खींचने और रगड़ने में लग गए.

उसका बुरा हाल हो गया था और वह ऊँह ऊँह करती हुई मेरे सर को अपनी चुत पर दबाने लगी थी.

वह लगातार मादक आवाजें निकालती हुई तड़पने लगी ‘आह राज ये तुमने क्या कर दिया और तेज चूस लो आह राज ऐसे ही बस ऐसे ही करते रहो आह बहुत मजा आ रहा है!’

उसकी चूत लगातार पानी छोड़ रही थी, जिसे मैं पीता जा रहा था.

उसने झड़ते समय मुझे कस कर अपनी चूत में दबा लिया था … क्या खट्टा पानी था उसकी चुत का.
थोड़ी देर में वह पूरी तरह से झड़ गई और मैं उसका सारा पानी पी गया.
बड़ा ही टेस्टी पानी था उसकी चुत का.

मैं फिर से उसके होंठों को पीने लगा.
मन तो कर रहा था कि बस ऐसे ही इसके होंठों को खाता रहूँ, कभी न छोड़ूँ इसके होंठों को … मेरा लंड भी उसकी चूत से रगड़ खा रहा था.

वह खुद कमर हिलाकर लंड अपनी चूत में लेने की कोशिश करने लगी और बोलने लगी- बस अब बर्दाश्त नहीं होता जल्दी से चोद डालो.

मैंने उसे और तड़पाना ठीक नहीं समझा.

चुत में लंड पेलने से पहले मैंने उससे अपना लंड मुँह में लेने को कहा, तो उसने मना कर दिया.
मैंने भी कोई ज़बरदस्ती नहीं की और लंड उसकी चूत के ऊपर रख दिया और घिसने लगा.

उसके मुँह से भी ‘आह … आह …’ की आवाज़ आने लगी.
‘राज अब डाल दो अपना लंड अन्दर और मेरी प्यास बुझा दो!’

मैंने एक झटका मारा और मेरा पूरा लंड चूत को चीरता हुआ अन्दर तक घुस गया.

वह सील पैक माल थी तो चुत फट गई थी.
उसकी आंखों से आंसू आने लगे और उसे दर्द होने लगा.

मैंने थोड़ा सा लंड निकाल कर देखा तो थोड़ा सा खून भी निकला हुआ था.

थोड़ी देर में जब उसे थोड़ा आराम मिला, तो वह खुद ही कमर उठाने लगी और कहने लगी- और तेज करो राज … और तेज … और बना लो मुझे अपना!

मैं तेज-तेज चुदाई करने लगा.

कुछ देर बाद मैंने लंड चुत से खींचा और उससे उल्टा कर दिया.
वह समझ गई और घोड़ी बन गई.

जैसे ही वह घोड़ी बनी, मैंने पीछे से लंड छेद में पेल डाला.

लंड एक ही झटके में अन्दर सरक गया रहा तो वह एकदम से चीखी- हाय अम्मी मर गई!

मैं उसके दोनों दूध पकड़ कर चोदने लगा और वह भी दर्द भूल कर लंड का मजा लेने लगी.

मैंने उसे करीब 15 मिनट तक चोदा. इतने में वह 2 बार पानी छोड़ चुकी थी.

अब मेरा भी निकलने वाला था, तो मैंने पूछा- कहां निकालूँ?
वह बोली- अन्दर ही निकाल दो, अभी सेफ डेज हैं.

मैं और तेज तेज शॉट मारने लगा और उसकी चूत के अन्दर ही पानी निकाल दिया.
फिर मैंने उससे बाथरूम में चलने को कहा.

वह उठी तो चल ही नहीं पा रही थी, उसकी आह निकल गई.
मैंने मुड़ कर उसे देखा तो उससे चला भी नहीं जा रहा था.

तो मैंने उसे गोद में उठाया और बाथरूम में ले गया.
उधर उसने खुद को साफ़ किया.

मैंने देखा तो वहां बाथटब भी था.
मैंने बाथटब को पानी से भरा, उसे उठा कर बाथटब में लिटाया और खुद भी उसके साथ आ गया.

हम दोनों में फिर से मस्ती शुरू हो गई.
मैं उसके बूब्स से खेलने लगा और उसे गोद में बिठा कर प्यार करने लगा.

वह अपनी गांड मेरे लंड पर घिसने लगी.
तो मैंने उसके दूध पकड़ कर लौड़े को चुत की दरार पर सैट किया और पीछे से ही उसकी चूत में लंड डाल दिया.

वह आह आह करने लगी.
हम दोनों की मस्त चुदाई शुरू हो गई.

इस बार वह भी बहुत मजे से चूत चुदवा रही थी.

कुछ ही देर में वह खुद ही मेरे लंड पर कूदने लगी.
पानी से छप-छप की आवाज़ और उसके मुँह से ‘आह … आह …’ की आवाज़ निकल रही थी.
ऐसा लग रहा था, जैसे किसी ने कोई सुरीला म्यूजिक लगा दिया हो.

उस पूरी रात को मैंने उसे 4 बार चोदा.
सुबह उससे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था.

फिर मैं दर्द निवारक दवा लेकर आया और उसे पानी के साथ पिला दी.

कुछ देर आराम करने के बाद उसे चैन पड़ गया और हम दोनों कमरे से निकल कर अपने अपने घर चले गए.

आज भी जब मुझे उसके साथ बिताई वह रात याद आती है, तो लंड खड़ा हो जाता है.

उसके बाद भी हम कई बार मिले लेकिन उसने मेरे लंड को कभी नहीं चूसा.

कुछ दिन के बाद उसने अपनी एक सहेली की चूत दिलवाई और एक चचेरी बहन को चुदवाया.
वह सेक्स कहानी फिर कभी लिखूँगा.
तब तक के लिए लड़के अपने लंड हिलाएं और लड़कियां अपनी चूत में उंगली करती रहें.

भाभी की चुदाई होटल में – मुंबई की देवर भाभी सेक्स कहानी

मुंबई की अंधेरी ईस्ट की उस 5-स्टार होटल में, जहां लॉबी की क्रिस्टल चैंडेलियर से निकलती रोशनी फर्श पर हीरे जैसी चमक बिखेरती है और एयर में महंगे परफ्यूम की महक घुली रहती है, मैंने वो रातें गुजारीं जो जिंदगी भर याद रहेंगी। मैं, राहुल, 27 साल का, दिल्ली से कंपनी की मीटिंग के लिए मुंबई आया था। कंपनी ने मुझे और मेरी भाभी प्रिया को एक ही होटल में बुक किया था – रूम 1205 और 1207, पास-पास, 12वीं फ्लोर पर। भाई रोहन दिल्ली में ही था, लेकिन प्रिया को भी एक फैमिली मैरिज फंक्शन अटेंड करने मुंबई आना पड़ा था। प्रिया, 29 की – गोरी, भरी-भराई बॉडी, लंबे सिल्की बाल, गुलाबी होंठ, और आंखें ऐसी कि एक नजर में दिल थम जाए। शादी को पांच साल हो गए थे। बाहर से सब परफेक्ट लगता – खुशहाल जोड़ा, अच्छा घर। लेकिन अंदर, एक ऐसी चाहत सुलग रही थी जो धीरे-धीरे भड़क उठी।

पहली शाम। एयरपोर्ट से होटल तक टैक्सी में हम साथ थे। प्रिया ने सफेद कुर्ता-पजामा पहना था – टाइट, पसीने से थोड़ा गीला। वो मेरे बगल में बैठी थी। उसकी जांघ मेरी जांघ से छू रही थी। हर ब्रेक पर वो हल्का सा सरकती, स्पर्श और गहरा होता। वो बोली, “राहुल, मुंबई में इतने दिनों के लिए पहली बार आए हो?” मैंने कहा, “हां भाभी, मीटिंग्स हैं। तू?” वो मुस्कुराई। “मैं फैमिली फंक्शन के लिए। रोहन नहीं आ सका। अकेली हूं।” उसकी आवाज में एक हल्की सी उदासी थी। मैंने कुछ नहीं कहा। बस उसकी आंखों में देखता रहा। वो नजरें मिलाकर मुस्कुराई।

होटल पहुंचे। चेक-इन किया। लिफ्ट में अकेले थे। वो करीब आई। उसकी सांस मेरी गर्दन पर गर्म लग रही थी। मैंने उसकी कमर पर हाथ रखा। वो सिहर उठी। “राहुल… यहां?” मैंने कहा, “भाभी… बस एक पल।” लिफ्ट रुकी। हम अलग हो गए। लेकिन वो पल काफी था।

शाम को मीटिंग खत्म हुई। मैं लौटा। प्रिया का मैसेज आया – “राहुल, डिनर साथ? रूफटॉप रेस्टोरेंट में मिलते हैं।” मैंने हां कहा। रूफटॉप पर मुंबई की लाइट्स नीचे चमक रही थीं। प्रिया ने ब्लैक ड्रेस पहनी थी – डीप नेकलाइन, बैकलेस, सिल्की फैब्रिक जो उसके शरीर से चिपक रहा था। उसके स्तन की गहराई साफ दिख रही थी। वो बोली, “राहुल, आज बहुत अच्छा लग रहा है तू।” मैंने कहा, “भाभी, तू तो हमेशा स्टनिंग लगती है।” वो हंस पड़ी। वाइन ऑर्डर की। बातें शुरू हुईं – भाई की व्यस्तता, घर की बातें, और धीरे-धीरे पर्सनल। वो बोली, “राहुल… रोहन बहुत अच्छा है, लेकिन कभी-कभी लगता है कि वो मुझे पूरी तरह समझता नहीं। शारीरिक रूप से भी… दूरियां बढ़ गई हैं।” मैं चुप रहा। वो मेरे हाथ पर हाथ रख दिया। “तू समझता है न?” मैंने कहा, “हां भाभी… बहुत।”

वाइन का असर हो रहा था। हम उठे। लिफ्ट में फिर अकेले। इस बार वो खुद मेरे करीब आई। उसने मेरी कमर पकड़ ली। मैंने उसके होंठ चूम लिए। वो जवाब देने लगी। लिफ्ट रुकी। हम 1207 में – प्रिया के रूम में। दरवाजा बंद हुआ। वो मेरे सामने खड़ी थी। मैंने उसे दीवार से सटा दिया। उसके होंठ फिर चूमे। वो किस गहरा होता गया। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। मैंने उसकी ड्रेस की जिप खोली। ड्रेस नीचे। ब्रा और पैंटी में। काले लेस ब्रा में उसके गोरे स्तन। मैंने ब्रा उतारी। निप्पल सख्त, गुलाबी। मैंने उन्हें दबाया। वो सिसकारी। “आह… राहुल… जोर से… दबा… चूस…” मैंने एक निप्पल मुंह में लिया। जोर से चूसा। दांतों से हल्का काटा। वो चीख पड़ी। “आह… हां… काट… मेरे निप्पल को चूस… रस्सी बना दे… और जोर से…” मैंने दूसरे को भी वैसा ही किया। वो मेरे बाल पकड़कर दबा रही थी। “राहुल… ओह… सालों बाद किसी ने ऐसे छुआ है… चूस… और चूस…”

मैंने उसे बेड पर पटका। पैंटी उतारी। उसकी चूत – गुलाबी, पहले से गीली, रस टपक रहा। मैंने जीभ लगाई। वो कमर उठाकर चीखी। “राहुल… चाट… मेरी चूत… बहुत जल रही है… जीभ अंदर डाल…” मैंने जीभ अंदर डाली। क्लिट को चूसा। उंगलियां डालीं – दो, फिर तीन। वो कमर हिला रही थी। “आह… राहुल… उंगलियां… तेज… मेरी चूत को फाड़… जीभ से चोद… ओह… और तेज… मैं झड़ने वाली हूं…” मैंने स्पीड बढ़ाई। वो कांपकर झड़ गई। उसका रस मेरे मुंह में बहा। मैंने सब चाट लिया। वो बोली, “राहुल… अब तेरा नंबर।”

वो उठी। मेरी शर्ट उतारी। छाती चूमी। नीचे आई। पैंट उतारी। लंड बाहर – सख्त, मोटा, सुपारा चमक रहा। वो हाथ में लिया। “राहुल… कितना मोटा और लंबा है तेरा… रोहन से बहुत बड़ा…” वो सहलाने लगी। फिर मुंह में लिया। जोर-जोर से चूसने लगी। जीभ सुपारे पर घुमा रही थी। गले तक ले रही थी। लार टपक रही थी। मैं सिसकारा। “भाभी… बहुत अच्छा… गहरा ले… आह… तेरी जीभ जादू कर रही है… चूस… और चूस…” वो बोली, “अब डाल… मुझे तेरी जरूरत है।”

वो बेड पर लेट गई। जांघें फैलाईं। मैंने लंड उसकी चूत पर रखा। धीरे से अंदर। वो कराही। “आह… राहुल… बड़ा है… धीरे… पूरा अंदर ले रही हूं…” मैं रुक गया। फिर धीरे-धीरे पूरा अंदर। वो चीखी। “हां… पूरा… अब चोद… जोर से…” मैंने धक्के शुरू किए। धीरे से तेज। वो कमर हिला रही थी। “राहुल… जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… चोद… आह… तेज… और तेज… मेरी चूत तेरी है…” मैंने स्पीड बढ़ाई। उसके स्तन हिल रहे थे। मैंने दबाए। वो मेरी पीठ नाखूनों से खरोंच रही थी। “राहुल… अंदर झड़… मुझे भर दे… गर्म वीर्य डाल… मैं तेरी हूं…” मैंने और जोर से धक्के मारे। एक साथ झड़ गए। मेरा गरम वीर्य उसकी चूत में भर गया। वो कांपकर थम गई।

लेकिन रात खत्म नहीं हुई। वो उठी। “राहुल… आज पूरी रात।” वो मेरे ऊपर चढ़ गई। उसकी चूत मेरे लंड पर। वो कमर हिला रही थी। ऊपर-नीचे। उसके स्तन मेरे मुंह में। मैं चूस रहा था। वो चीख रही थी। “राहुल… तेरे लंड ने मुझे पागल कर दिया… आह… गहरा… और गहरा… मैं ऊपर से चोद रही हूं तुझे…” मैंने नीचे से धक्के मारे। वो तेज हो गई। “राहुल… मैं झड़ रही हूं… आह…” वो झड़ गई। मैंने उसे पलटा। डॉगी स्टाइल। उसकी गांड पकड़ी। लंड डाला। तेज-तेज। वो तकिए में मुंह दबाकर चीख रही थी। “राहुल… चोद… मेरी चूत और गांड दोनों तेरी… फाड़ दो… जोर से… मुझे तेरी रंडी बना दे… बाल पकड़… पीछे से पटक…” मैंने उसके बाल पकड़े। पीछे से जोर से धक्के। वो अपनी चूत सहला रही थी। हम कई बार झड़े।

फिर मैंने कहा, “भाभी… आज गांड में?” वो शरमा गई। “धीरे से… पहली बार…” मैंने ऑयल लगाया। पहले उंगली। वो सिहर उठी। “राहुल… आह… दर्द… लेकिन अच्छा…” फिर दो उंगलियां। वो कमर हिला रही थी। “राहुल… और अंदर… तैयारी कर रही हूं…” फिर लंड। धीरे से अंदर। वो चीखी। “आह… राहुल… बड़ा है… धीरे…” मैं रुक गया। फिर धीरे-धीरे पूरा। वो बोली, “अब चोद… मेरी गांड चोद…” मैंने धक्के शुरू किए। वो चीख रही थी। “राहुल… जोर से… फाड़ दो मेरी गांड… आह… बहुत मजा आ रहा है… अपनी चूत में उंगलियां डाल रही हूं…” मैं तेज हो गया। वो अपनी चूत में उंगलियां डाल रही थी। हम दोनों झड़ गए।

सुबह हुई। हम थके हुए लेटे थे। प्रिया बोली, “राहुल… ये हमारा राज रहेगा। लेकिन तू मेरी जान बन गया है।” मैंने कहा, “भाभी… मैं तुझे कभी नहीं छोड़ूंगा।” वो मुस्कुराई। “अब जब भी मुंबई आएं, इसी होटल में मिलेंगे।”

समय बीतता गया। भाई को शक नहीं हुआ। लेकिन हर बार मुंबई आने पर हम इसी होटल में मिलते। रात भर चुदाई। प्रिया की चूत में मेरा लंड, उसके होंठों पर मेरी जीभ, उसके स्तनों में मेरी उंगलियां। मुंबई की इन ऊंची दीवारों के बीच हमारा गुप्त संसार था। जहां बाहर सब सामान्य, अंदर हम जलते रहे – चाहत में, प्यार में, और उस गहरे बंधन में जो शायद कभी टूटे नहीं।

घर की नई बहु की चुदाई तीन तीन लौड़े से हो गयी

मेरा नाम चेतन आनन्द है। मैं मिर्जापुर का रहने वाला हूँ। हम लोग भोटिया जनजाति से है। बहुत कम लोगो को ये बात मालूम है की हमारे घरो में जब कोई नई बहू आती है तो घर के सभी मर्द उनकी चूत मारते है। ठीक ऐसा ही हुआ था। मेरे बड़े शिव भैया की शादी हुई थी। उनकी बीबी या बोलू की मेरी होने वाली भाभी कडक माल थी। शादी हो गयी और विदाई भी हो गयी थी। मेरी नई भाभी घर में आ गयी थी। घर की सब लेडीस बहुत खुश थी। फिर रात होने लगी थी। मेरे पापा भी नई वाली भाभी को चोदने का वेट कर रहे थे। हमारी भोटिया जनजाति में ये प्रथा बहुत सालो से चल रही है। नई बहू की चुदाई सभी मर्द करते है। भाभी को देखकर मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई थी। उनका रंग काफी गोरा था। 5 फिट 5 इंच की लम्बी चौड़ी लड़की थी वो। बड़ी बड़ी कजरारी आँखे थी उनकी। वो अंदर कमरे में बैठी हुई थी। उनका फिगर 36 30 38 का था। भाभी के जिस्म में खूब गोश था। मैं समझ गया की जो भी इनको चोदेगा, उसे भरपूर मजा मिलेगा। उनको भी पता था की आज रात वो 3 3 मर्दों से चुदेंगी। वो अच्छे से समझती थी। फिर रात के 12 बज गये।

“पापा जी!! आप पहले कमरे में जाइए” शिव भैया बोले

दोस्तों हमारी जाती में सबसे बुजुर्ग आदमी ही नई दुल्हन की सील तोड़ता था।

“ठीक है बेटा!! मैं जा रहा हूँ” पापा बोले

फिर वो कमरे में चले गये। मेरी भाभी शादी के जोड़े में बैठी लजा रही थी। धीरे धीरे मेरे पापा ने उनके चेहरे से घुंघट का पर्दा हटा दिया। फिर भाभी के चेहरे को देखने लगे। उनके चेहरे का फेस कट काफी अच्छा था।

“आह बहू!! तुम सच में कयामत हो!! आज मुझे तुम्हारी सेवा करने का मौका दो” पापा बोले और उन्होंने धीरे से भाभी को बिस्तर पर लिटा दिया। फिर उनके होठो पर किस करने लगे। भाभी भी जवान माल थी। वो भी चुदने को बेकरार थी। वो अच्छी तरह से संजी हुई थी। उन्होंने बालो में फूलो का गजरा लगा रखा था। कान में सोने की बड़ी बड़ी झुमकियाँ पहन रखी थी। भाभी के गले में सोने के बड़े से लोकेट वाला मंगल सूत्र था। उन्होंने अच्छे से मेकअप किया हुआ था। फेसियल की वजह से उनका चेहरा किसी हेरोइन की तरह चमक रहा था। मेरे चुदक्कड पापा चालू हो गये। वो भाभी के ओंठ पर ओंठ लगाकर किस करने लगे। भाभी भी चूसने लगी। दोनों का मौसम बन गया। दोनों ने इतनी होठ चुसाई कर डाली की भाभी गरमा गयी।

“बहू रानी!! अपने बड़े बड़े मम्मे का दर्शन तो करवाओ मुझे!!” मेरे पापा बेचैन होकर बोले

भाभी ने अपना ब्लाउस खोल दिया। फिर ब्रा खोल दी और निकाल दी।

“ओह्ह बहू!! तुम तो जबर्दस्त माल हो !!” पापा जी बोले

फिर वो भाभी की 36 इंच की बड़ी बड़ी चूची को हाथ में लेकर दबाने लगे। भाभी जी “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा सी सी सी” करने लगी। दोस्तों उनके मम्मे इतने गजब के थे की मेरे उम्रदराज पापा का लंड चड्डी में ही बहा जा रहा था। भाभी की चूचियां बड़ी बड़ी थी और निपल काली काली थी। उनके निपल के चारो ओर बड़े बड़े काले घेरे थे जो गजब के सेक्सी दिख रहे थे। मेरे पापा दबा दबाकर मजा लेते रहे। फिर किसी भूखे शेर की तरह टूट पड़े और भाभी को अपनी वासना का शिकार बनाने लगे।

“चुसाओ बहु!! अपने बड़े बड़े मम्मे को चूसने दो” पापा बोले

भाभी ने अपने हाथ अपनी 36” की बड़ी बड़ी चूची पर से हटा दिया। मेरे चुदक्कड पापा चूची को हाथ में लेकर पकड़ लिए और दबाने लगे। फिर मुंह में ले लिए और किसी जवान मर्द की तरह चूसने लगे। नई वाली भाभी “……अई…अई….अई…..इसस्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” करने लगी।

“…..सी सी सी सी….हा हा हा…”ससुर जी!! आप तो मेरी जान ही ले लेंगे… इसस्स्स्स्….. भाभी कहने लगी

मेरे ठरकी पापा ने निपल्स को मुंह में लेकर किसी संतरे के जैसे चूस डाला। सब रस निकाल लिया। फिर दांत गड़ाकर निपल्स को काटने लगे। भाभी तडप रही थी। मेरे पापा ने काफी देर तक दोनों दूध को मुंह में लेकर चूस डाला और भाभी को गर्म कर दिया। फिर उनकी साड़ी खोली। पेटीकोट उतार डाला। नई वाली भाभी ने काली रंग की चड्डी पहनी थी। पहले तो मेरे पापा उपर से उनकी काली चड्डी जीभ लगाकर चाटते रहे। फिर जब भाभी का बुरा हाल हो गया तो पापा ने दांत से पकड़कर उनकी चड्डी उतार डाली। भाभी की चूत बहुत ही साफ़ सुथरी और चिकनी थी। झांट का एक बाल भी उस पर नही था।

“अई…..अई….अई… ससुर जी!! मेरी बुर को आप अच्छे से चूसिये, उसके बाद ही आप मुझे चोदना!!” भाभी जी बोली

“ठीक है बहू!! मैं ऐसा ही करूंगा” पापा बोले

उसके बाद नई वाली भाभी ने अपनी दोनों टांगो को खोल दिया। पापा जी लेट गये और चूत पर जीभ लगा लगाकर चूसने लगे। पापा को भी खूब मजा मिल रहा था। नई दुलहन की चूत मारने का पहला मौका उनको ही दिया गया था क्यूंकि हम लोगो के यहाँ यही रिवाज है। पापा जी अच्छे से बुर के ओंठो को चाट रहे थे। चूत के दाने को अंगूर की तरह चूस रहे थे। उन्होंने 10 मिनट चूत चटाई की और अब नई वाली भाभी चुदने को तैयार थी। मेरे पापा ने अपना कुर्ता पजामा खोल दिया और अपना निकर उतार दिया। पापा 64 साल के उम्र दराज आदमी थे, पर आज भी किसी भी जवान औरत को चोद सकते थे। इतना पावर था उनके पास। उनका लंड बहुत काला था। वो हाथ में लेकर अपने 8 इंच लंड को फेटने लगे। फिर लंड कड़क हो गया।

“अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….चोदीये पापा!! अब मुझसे नही रहा जा रहा है” मेरी भाभी किसी रांड की तरह कहने लगी

पापा ने भाभी की टांग खोल दी। अपना लंड लेकर उनकी बुर पर घिसने लगे। भाभी की बुर बड़ी चिकनी थी। पापा अपने गुलाबी सुपाड़े को उनकी बुर के ओंठ पर घिस रहे थे। भाभी कामुक होती जा रही थी। काफी देर तक घिसते रहे। फिर लंड घुसा डाले। और जोर जोर से पेलने लगे। पापा जल्दी जल्दी नई भाभी को चोद रहे थे।

“पापा जी!! ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी….बहुत मजा आ रहा है” भाभी कहने लगी

“ले साली और ले!! आज अच्छे से चुदवा ले” मेरे पापा जी कहने लगे और गमागम भाभी की फूली मांसल चूत में धक्के देने लगे

भाभी को काफी मजा मिल रहा था। वो अपना मुंह खोल खोलकर आहे निकाल रही थी। मेरे पापा उनकी दोनों टांगो को खोलकर उनकी चूत की गपचिक गपचिक ठुकाई कर रहे थे। पापा का मोटा लंड भाभी की चूत की रसीली गली में सटर सटर फिसल रहा था।

“बहु!! तेरी बुर का जवाब नही!! …उ उ उ उ उ……” पापा बोल रहे थे।

वो भाभी की दोनों टांग उठाकर दनादन चोदन कार्यक्रम कर रहे थे। भाभी जोश में आकर तकिया को मुंह में लगाकर चबाने लगी। “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ…उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ….” की तेज आवाजे मेरी नई वाली भाभी निकाल रही थी। मेरे 64 वर्षीय पापा ने उनको 18 मिनट जल्दी जल्दी चोद लिया। फिर हाफ्ने लगे। लंड भाभी की बुर से निकाल लिया। भाभी पूरे बिस्तर पर मचलने लगी। वो लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी। जैसी हाफ रही थी। वो फिर पापा की तरफ देखने लगी। पापा की आँखों में सिर्फ और सिर्फ कामवासना थी।

“बहू!! तेरी बुर अब चाटूंगा। पैर खोल” पापा बोले

भाभी ने फिर से पैर खोल दिए। मेरे पापा जी उनकी रसीली चूत का दीदार करने लगे। फिर किसी कुत्ते की तरह जीभ निकाल निकालकर चाटने लगे। मैंने आपको बताया की भाभी अभी कच्ची कली थी। भरपूर जवान थी। इसलिए उनकी बुर भी कुछ कम हसीन नही थी। पापा जी मजे लेकर बुर चाटने लगे। भाभी सेक्सी होकर “ओहह्ह्ह….अह्हह्हह…अई..अई. .अई… उ उ उ उ उ…” की आवाजे निकालने लगी। उनकी चूत के दोनों लब लाल लाल थे। पापा की गुलाबी जीभ उनकी बुर के गुलाबी लबो को चूस चाट रही थी। इस तरह से उनको पापा ने दूसरी बार गर्म कर दिया।

““आआआअह्हह्हह…..चोद डालो ससुर जी…..देर न करो” नई वाली भाभी कहने लगी

“चल रंडी!! कुतिया बन जल्दी से” मेरे पापा बोले

फिर पीछे आ गये। अपने 8 इंच लंड को फिर से मुठ देने लगे। कुछ सेकंड में उनका लंड पहलवान जैसा हो गया था। लंड की एक एक नस तन गयी थी। कितना खूंखार और डरावना दिख रहा था। फिर कुतिया वाली पोजीशन में पीछे से भाभी की बुर में घुसा दिया और धकाधक पेलने लगे। कुछ देर में तेज तेज इंजन चलाने लगे। इस बार भी जल्दी जल्दी अपने खूंखार लंड को भाभी की नई नवेली बुर में दौड़ाने लगे और भाभी की चींखे निकलवा दी। उनको अच्छे से कुतिया बनाकर चोद डाला। अब पापा जी का माल झड़ने वाला था।

“बहु!! अब झड़ जाउंगा!! …उ उ उ उ उ……बोलो किधर माल निकालू” पापा जी बोले

“मेरे मुंह में माल झाड दीजिये” मेरी चुदक्कड भाभी बोली

मेरे 64 साल के उम्रदराज पापा ने जल्दी से लौड़ा उनकी चुद्दी से खींचा और भाभी के मुंह की तरफ चले गये। भाभी जी अपना मुंह खोल दी। पापा जी लंड को हाथ से पकड़कर फेटने लगे। फिर ……अअअअअ आआआआ…बोलते हुए भाभी के मुंह पर झड़ गये। उनका लंड माल की पिचकारी छोड़ने लगा। भाभी के पूरे मुंह पर पिचकारी चली गयी। मुंह में जो माल गया उसे को किसी रंडी की तरह चाट गयी और निगल गयी। नई वाली भाभी को चोदकर मेरे पापा चले गये। वो कमरे से बाहर आये। मेरे शिव भैया और मैं बाहर वेट कर रहे थे।

“शिव बेटा!! तेरी बीबी मस्त माल है!! मुझे उसकी चूत चोदकर बड़ा मजा आया है। अब तुम कमरे में चले जाओ। देखो चेतन को भी याद से भेज देना” पापा बोले

“जी पापा जी” शिव भैया बोले

वो कमरे में चले गये और दरवाजा बंद कर दिया। अब मैं क्या करता। मैं अपनी बारी का इंतजार करने लगा। जब भैया अंदर गये तो नई वाली भाभी नंग धडंग बिस्तर पर लेती हुई थी। दोनों हाथ पैर खोलकर लेती हुई थी। उनकी चूत चुद चुकी थी और पापा का माल अब भी उनकी बुर में भरा हुआ था।

“आओ पति जी” भाभी बोली

“मेरे पापा ने तुमको चोदा??” भैया बोले

“हाँ!! आपके पापा तो गबरू जवान की तरह ठुकाई करते है। मेरी तो एक एक हड्डी उन्होंने चटका दी” भाभी जी बोली

उसके बाद शिव भैया मेरी भाभी को चूमने चाटने लगे। नंगे हो गये, फिर वो उनको बाहों में लेकर प्यार करने लगे। वो भी जाकर भाभी के बदन पर लेट गये और उनके सेक्सी रसेदार लबो को चूसने लगे। लिप लोक होकर किस करने लगे। कुछ देर में दोनों का मौसम बन गया।

“बीबी!! आओ मेरी लंड चुसाई कर दो” शिव भैया भाभी ने बोले और बेड पर लेट गये। मेरी सेक्सी चुदक्कड भाभी बैठ गयी और भैया का लौड़ा फेटने लगी। शिव भैया का हथियार पापा ने भी लम्बा था। 9 इंची चाक़ू जैसा धारधार लंड था उनका। नई वाली भाभी ने भैया का लंड पकड़ लिया और जल्दी जल्दी मुठ देने लगी। अच्छे से खड़ा करने लगी। फिर झुक गई और मुंह में लेकर आइसक्रीम की तरह चूस रही थी। भैया का हथियार किसी मिसाइल की तरह था। भाभी मुठ दे देकर चूस रही थी। उनको काफी मजा आ रहा था। सिर को हिला हिलाकर चूस रही थी।

“….ओह्ह्ह्….अई…चूसो जानेमन!! और अच्छे से चूसो” शिव भैया कहने लगे

फिर भाभी भी और जोश में आ गयी और कायदे से चूसने लगी। वो हाथ से भैया की गोलियाँ दबा रही थी। फिर उसको भी मुंह में लेकर टॉफी की तरह चूस रही थी। कुछ देर बाद वो चुदने को रेडी थी।

“आओ जानेमन!! मेरे लंड की सवारी करो” शिव भैया बोले

वो बिस्तर पर सीधे लेट गये। भाभी उनकी कमर पर जाकर बैठ गयी। भैया का लंड पकड़कर अपनी कसी नई नवेली चूत में डालने लगी। फिर लंड अंदर तक घुस गया। अब भाभी उचक उचक कर खुद ही चुदाने लगी।

“और धक्के लगाओ जानेमन!! और तेज…” शिव भैया बोले

मेरी भाभी अब और तेज तेज धक्के लगाने लगी। वो शिव भैया के खूटे जैसे लंड पर उठ बैठ रही थी। जल्दी जल्दी चुदवा रही थी। दोनों मजे काट रहे थे। भैया का लंड किसी तेज धार चाक़ू की तरह भाभी की बुर को फाड़ रहा था। फिर शिव भैया भी जोश में आ गये। उन्होंने भाभी के दोनों मस्त मस्त चूतड़ पकड़ लिए और नीचे से चूत के छेद में धक्के देने लगे। मेरी भाभी “आआआअह्हह्हह…..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” करने लगी। पर अब तो मेरे भैया पूरे जोश में आ गये थे। वो 10 मिनट तक भाभी की कसी चूत को फाड़ते ही रहे और इतना चोदा की भाभी की अम्मा चुद गयी। फिर धक्के देते देते शिव भैया झड़ गये। फिर बाहर चले आये।

“जाओ चेतन!! अब तेरी बारी है। जाओ अपनी नई भाभी को अच्छे से खाओ जाकर” शिव भैया बोले

“ठीक है भैया” मैंने कहा

फिर अंदर चला गया। मेरी भाभी आज रंडी बन चुकी थी। कहने को उनकी शादी मेरे भैया से हुई थी। पर अब तक 2 मर्दों से चुदवा चुकी थी। तीसरा लंड अब खाने वाली थी। आज वो रंडी बन गयी थी। मुझे देखकर हंसने लगी।

“कैसे हो देवर जी??” वो कहने लगी

“अच्छा हूँ। आप बताओ” मैं बोला

“आओ मुझे चोद लो!!” नई वाली भाभी बोली

“मुझे तो आपकी गांड मारनी है” मैं बोला

वो जल्दी से घोड़ी बन गयी। उनकी गांड का छेद काफी चिकना दिख रहा था। कुछ देर मैं कामुक होकर उनका छेद देखता रहा। देखने में अनचुदी गांड दिख रही थी। मैं वासना में आकर जीभ लगा लगाकर चाटने लगा। मेरी भाभी जी “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” बोलने लगी। उनको भी पूरा मजा आ रहा था। मैं चाट चाटकर छेद को साफ़ कर दिया। फिर अपने 7 इंची लंड को किसी तरह घुसा डाला। जल्दी अंदर नही जा रहा था। फिर धीरे धीरे अपनी सगी भाभी की गांड मार ली। वो खूब कराही, खूब सिसकी लेती रही। पर मैं उनको घोड़ी बनाये रहा और उनकी कसी कुवारी गांड मारता रहा। फिर उसमे ही माल निकाल दिया। आज भी मेरी भाभी की चुदाई 3 3 मर्द करते है। वो ख़ुशी ख़ुशी पापा से, शिव भैया से और मुझसे अपने दोनों छेद चुदवा लेती है। क्यूंकि हमारे यहाँ यही रिवाज चलता है।

 

 

भाभी ने पैर मालिश के बहाने जबर्दस्ती संबंध बनाया

मेरा नाम राहुल है। उम्र बाईस साल। मैं दिल्ली के एक अच्छे कॉलेज में बी.कॉम फाइनल ईयर का छात्र हूँ। मेरे बड़े भाई अजय की शादी को तीन साल हो चुके हैं। उनकी पत्नी, यानी मेरी भाभी सिमरन, इस घर की सबसे आकर्षक औरत हैं। सिमरन भाभी की उम्र अट्ठाईस साल है, लेकिन उनकी हसीन अदाओं को देखकर कोई भी उन्हें पच्चीस से ज्यादा नहीं कह सकता। लंबे काले घने बाल, गोरी चिकनी त्वचा, गहरी कजरारी आँखें, भरी-भरी चूचियाँ जो हर साड़ी या कुर्ते में उभरकर आती हैं, पतली कमर और पीछे से देखते ही दिल धड़कने लगे वाली गोल-मटोल गांड। जब वो चलती हैं तो उनका बदन लहराता है, और जब वो मुस्कुराती हैं तो उनके गालों पर छोटे-छोटे गड्ढे पड़ जाते हैं।

भैया अजय एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर मैनेजर हैं। उनका काम ऐसा है कि हफ्ते में चार-पाँच दिन वो बाहर रहते हैं — कभी मुंबई, कभी बैंगलोर, कभी हैदराबाद। घर में ज्यादातर समय सिर्फ मैं और भाभी ही रहते हैं। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था। भाभी मुझे बहुत प्यार से “राहुल बेटा” कहकर बुलाती थीं, अच्छा खाना बनाती थीं, मेरी पढ़ाई का ध्यान रखती थीं। लेकिन पिछले छह-सात महीनों से उनका व्यवहार अचानक बदल गया था।

अब वो मेरे पास ज्यादा से ज्यादा बैठने लगी थीं। टीवी देखते समय मेरे कंधे पर सिर रख देतीं, कभी मेरे बालों में हाथ फेरतीं, कभी बात करते समय मेरी जाँघ पर हाथ रख देतीं। मैं समझ गया था कि भाभी में कुछ बदलाव आ रहा है, लेकिन मैं चुप रहता था। वो मेरी भाभी थीं, भाई की बीवी। सोच-सोचकर मैं खुद को रोक लेता था।
उस दिन शनिवार था। भैया सुबह सात बजे ही मुंबई के लिए फ्लाइट पकड़ चुके थे। उन्होंने कहा था कि वो रात दस बजे के बाद लौटेंगे। घर में सिर्फ मैं और भाभी थे। मैं लिविंग रूम के सोफे पर लेटा हुआ मोबाइल पर क्रिकेट मैच देख रहा था। भाभी रसोई से निकलकर आईं। उन्होंने हल्की क्रीम कलर की साड़ी पहनी हुई थी। साड़ी का ब्लाउज काफी टाइट था, जिसकी वजह से उनकी भारी चूचियाँ साफ उभरी हुई थीं। पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, जिससे उनकी नाभि और पेट की गोरी त्वचा झाँक रही थी।

“राहुल, मेरे पैर बहुत दर्द कर रहे हैं बेटा,” भाभी ने नरम और थोड़ी शरमाती हुई आवाज में कहा। “पूरे दिन खड़ी-खड़ी काम किया है। थोड़ा मालिश कर दोगे?”

मैं चौंक गया। “भाभी… मैं… कैसे करूँगा?”

“अरे पागल लड़के, बस पैर ही तो हैं। तू मेरा छोटा देवर है, भाई जैसा। शर्मा क्यों रहा है?” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा और सोफे पर आराम से लेट गईं। अपनी साड़ी को थोड़ा ऊपर सरकाकर दोनों पैर मेरी तरफ फैला दिए। उनकी पतली पिंडलियाँ और गोरी जाँघें आधी नंगी हो गईं।

मैं हिचकिचाते हुए उनके पैरों के पास बैठ गया। उनके पैर मेरे हाथों में थे — नरम, मुलायम, हल्की-हल्की महक वाली। मैंने धीरे-धीरे उनकी पिंडलियों की मालिश शुरू कर दी। भाभी आँखें बंद करके लेटी रहीं और हल्की सिसकारियाँ निकालने लगीं।

“आह… राहुल… बहुत अच्छा लग रहा है… हाथों में जादू है तेरे… और ऊपर करो… जाँघों तक…”

उनकी आवाज में एक अजीब-सी मिठास और कंपन था। मैंने हिम्मत करके उनकी जाँघों तक मालिश शुरू कर दी। साड़ी और ऊपर सरक गई। अब उनकी जाँघों का बड़ा हिस्सा मेरे सामने था। मेरे हाथ काँप रहे थे। भाभी ने अचानक मेरे एक हाथ को पकड़ लिया और उसे अपनी जाँघों के और अंदर ले गईं।

“भाभी… ये क्या कर रही हैं?” मैं घबरा गया।

“चुप कर राहुल। आज बहुत दिनों से मन कर रहा था। भैया तो महीने में एक-दो बार भी घर नहीं आ पाते। जब आते हैं तो थके-हारे सो जाते हैं। मुझे भी तो इंसान हूँ ना… प्यास लगती है…” उन्होंने मेरी आँखों में गहरी नजर डालते हुए कहा।

उनकी साँसें अब तेज हो चुकी थीं। उन्होंने खुद अपना पल्लू सरका दिया। ब्लाउज के ऊपर से उनकी चूचियाँ उभर रही थीं। मैं स्तब्ध बैठा था। भाभी ने मेरे दूसरे हाथ को भी पकड़कर अपने ब्लाउज पर रख दिया।

“दबा इन्हें… जोर से… मुझे बहुत अच्छा लगेगा।”

मेरा दिमाग लड़ रहा था, लेकिन शरीर नहीं मान रहा था। मैंने उनके ब्लाउज के हुक खोल दिए। ब्रा में लिपटी उनकी भारी, गोल चूचियाँ बाहर आ गईं। गुलाबी निप्पल्स पहले से ही खड़े हो चुके थे। मैंने दोनों हाथों से उन्हें दबाया। भाभी की आह निकल गई।

“आह… हाँ राहुल… और जोर से… चूस ले इन्हें… सालों से किसी ने ठीक से नहीं छुआ…”

मैं झुक गया और एक चूची मुंह में ले ली। चूसने लगा। भाभी मेरे बालों में हाथ फेर रही थीं और कराह रही थीं। “राहुल… तू बहुत अच्छा है… मुझे आज पूरी तरह चोद दे… मैं तेरी हूँ आज…”

उन्होंने मेरी शर्ट उतार दी और मेरे पैंट का बटन खोल दिया। मेरा लंड पहले से ही पूरा सख्त हो चुका था। भाभी ने उसे बाहर निकाला और मुट्ठी में कसकर पकड़ लिया।

“वाह… कितना मोटा और लंबा है तेरा लंड… भैया का तो आधा भी नहीं है। आज से ये मेरी चूत का मालिक है।”

भाभी ने मुझे सोफे पर लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गईं। उन्होंने अपनी साड़ी और पेटीकोट पूरी तरह ऊपर कर दिया। उनकी पैंटी गीली हो चुकी थी। उन्होंने पैंटी उतारी। उनकी चूत साफ, गुलाबी और पहले से ही रस से तर थी। उन्होंने मेरा लंड अपनी चूत पर रखा और धीरे-धीरे बैठने लगीं।

“आह… राहुल… कितना मोटा है… मेरी चूत फाड़ रहा है… धीरे… आह…”

धीरे-धीरे पूरा लंड उनकी चूत में समा गया। भाभी की आँखें बंद हो गईं। वो ऊपर-नीचे होने लगीं। उनकी चूचियाँ जोर-जोर से उछल रही थीं। मैंने उन्हें दोनों हाथों से पकड़कर दबाया और चूसा।

“हाँ… और जोर से चोद मुझे… राहुल… भाभी की चूत को फाड़ डाल… आह… बहुत दिनों बाद मिला है असली मर्द…”

मैंने उन्हें पलट दिया। अब भाभी कुत्ते की तरह घुटनों और हाथों के बल थीं। उनकी गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने उनकी गांड पकड़ी और पीछे से जोर से लंड अंदर डाला।

“आआह… फट गई… लेकिन मजा आ रहा है… और तेज… चोदो मुझे… जोर-जोर से…”

हर धक्के पर भाभी की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। फच-फच की आवाज के साथ उनका बदन हिल रहा था। मैं उनकी कमर पकड़कर तेज-तेज धक्के मार रहा था। भाभी कई बार झड़ चुकी थीं। उनकी चूत मेरे लंड को निचोड़ रही थी।

रात भर हमने कई बार सेक्स किया। पहले सोफे पर, फिर फर्श पर, फिर उनके बेडरूम में। भाभी ने मुझे तीन बार पानी छोड़ने दिया — पहली बार उनकी चूत में, दूसरी बार उनके मुंह में और तीसरी बार उनकी चूचियों और पेट पर। हर बार वो मुझे और उकसातीं — “और दो… और पानी दो… मेरी चूत भिगो दो…”

सुबह के चार बज चुके थे। हम दोनों थककर बेड पर लेटे थे। भाभी मेरे सीने पर सिर रखे लेटी थीं। उनकी उँगलियाँ मेरे लंड को हल्के-हल्के सहला रही थीं। उन्होंने धीरे से कहा,

“राहुल, आज जो हुआ वो हमारा राज रहेगा। भैया को कभी मत बताना। लेकिन जब भी वो बाहर जाएगा, तू मुझे इसी तरह चोदना। मैं अब तेरे बिना नहीं रह सकती। पैर मालिश तो बस बहाना था… असल में मुझे तेरे लंड की बहुत जरूरत थी।”

मैंने उनके माथे को चूमा और बोला, “जितनी बार चाहो भाभी… तुम्हारी चूत अब मेरी है। जब मन करे, बस कह देना — पैर दर्द कर रहे हैं।”

उस दिन के बाद भाभी के बहाने बदल गए। कभी “पैर दर्द कर रहा है”, कभी “कमर में दर्द है”, कभी “आज ब्लाउज बहुत टाइट हो गया है, खोल दो”, कभी “रात को नींद नहीं आ रही, पास सो जा”। और हर बहाने के पीछे एक ही मकसद था — मुझे जबर्दस्ती अपने पास बुलाकर चुदवाना।

कभी-कभी वो मुझे रसोई में खड़े-खड़े चोदतीं, कभी बालकनी में, कभी बाथरूम में। उनकी भूख दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी। मैं भी अब उनका दीवाना हो चुका था। भाभी की चूत, उनकी चूचियाँ, उनकी गांड — सब कुछ मुझे पागल कर देता था।

ये कहानी अभी भी जारी है। भैया जब भी बाहर जाते हैं, भाभी मुझे मैसेज करती हैं — “राहुल, जल्दी आ। पैर बहुत दर्द कर रहे हैं।” और मैं जान जाता हूँ कि आज फिर भाभी की चूत मेरे मोटे लंड की राह देख रही है।

विधवा आंटी की चुदाई के बाद माल को मुंह पर झारा

मेरा नाम जिगनेश अग्रवाल है। मैं गुजरात के गाँधीनगर का रहने वाला हूँ। मैं हीरे का व्यापार करता हूँ। मेरा बड़ा सा शोरूम है जिसमे हीरे की सेल्स भी होती है और तराशने का काम भी होता है। मेरे शोरूम में रोज लाखो की सेल्स होती है। इस वजह से कई बार चोर, लुटेरे भी शोरूम को लूटने की कोशिश करते रहते है। मेरे यहाँ कुल 20 लोगो का स्टाफ है जिसमे 12 जेट्स स्टाफ है और 8 लड़कियाँ है। मैं सिर्फ खूबसूरत लड़कियों को ही जॉब कर रखता हूँ।

जब मैं उनका इंटरव्यू लेता हूँ तो पहले ही चूत की सेटिंग कर लेता हूँ। जो लड़की चुदने को तैयार हो जाती है उसे ही नौकरी देता हूँ। दोस्तों मैं क्या करूं हर समय मेरा लंड खड़ा ही रहता है। जितनी बुर चोदता हूँ उतनी ही मेरी प्यास बढ़ जाती है। मैं अपने यहाँ काम करने वाली आठो लड़कियों की बुर चोद चूका हूँ। कुछ दिन पहले मेरे यहाँ एक लड़की नौकरी छोड़ कर चली गयी थी। मैंने न्यूसपेपर में विज्ञापन दे दिया और एक मस्त 30 साल की आंटी नौकरी करने आ गयी। वो मुझसे उम्र में बड़ी थी इसलिए मैं उसको आंटी बोल रहा था। उसका इंटरव्यू मैंने लिया। वो सेल्स का काम जानती थी। उनकेपति गुजर चुके थे और वो विधवा औरत थी। उनका नाम शांति था।

“आंटी!! अंत में सबसे जरूरी सवाल की क्या आप मुझे खुश करोगी??” मैंने पूछा

वो कुछ नही बोली। मैंने उसे नौकरी दे दी। आंटी जी मेहनत से नौकरी करने लगी। वो सुबह 9 बजे शोरूम खुलने से पहले आ जाती और रात में 9 बजे ही जाती थी। उनकी मेहनत देखकर मैं बहुत खुश था। दोस्तों मेरे शोरुम में मेरे पिता जी भी बैठते थे। उनके सामने मैं किसी लड़की को लाइन नही देता था क्यूंकि वो बड़े सख्त मिजाज आदमी थे। पर उनके जाने के बाद मैं सीटियाबाजी में लग जाता था। अब मुझे कैसे भी करके आंटी को चोदना था। सोमवार वाले दिन मेरे पिताजी को डॉक्टर से मिलने जाना था। वो कार में बैठकर चले गये। मैं सीधा शांति आंटी के पास चला गया और उनसे मीठी मीठी बात करने लगा। मेरे स्टाफ में कुछ लड़के मेरी तरह ही चोदू टाइप के थे। उनको भी मैं सेल्स गर्ल्स की चूत दिलवा देता था। वो लोग मुझे देखकर मुस्की मारने लगे। वो इस बात पर हंस रहे थे की आज शांति आंटी की चूत चुदाई होने वाली थी।

“आइये!! स्टाफ रूम में चले” मैं शांति आंटी से बोला

वो मेरे पीछे पीछे चली आई।

“क्या बात है जिगनेश बेटा!!” वो कहने लगी

मैं हीरा का शोरुम चलाता था इसलिए मेरे पास हीरे की ज्वेलरी की कोई कमी नही थी। मैंने हीरे का एक छोटा सा डाईमंड पेंडेंट अपनी जेब से निकाला।

“आंटी!! मुझे लगता है ये आपका है” मैंने पेंडेंट को दिखाते हुए कहा

वो खुश हो गयी क्यूंकि ऐसे ही कोई मर्द किसी औरत को इतनी महंगी जेवेलरी नही दे देगा। डायमंड पेंडेंट को ले ली और देखने लगी। फिर मैंने उनको खुद ही गले में पहना दिया। वो समझ गयी की मेरा कोई स्वार्थ जरुर है।

“जिगनेश बेटा!! इतनी मेहरबानी क्यों?? कुछ चाहिये तो नही मुझसे??” वो हँसकर कहने लगी

आंटी भी समझ गयी थी की आखिर मुझे क्या चाहिये। वो जान गयी थी की मैं उनके गदराये बदन को भोग लगाना चाहता हूँ। उनकेबाद वो खुद ही मेरे से आकर चिपक गयी। किस चालु कर दी। मुझे चुम्मा लेने लगी। वो साड़ी ब्लाउस में बहुत जँच रही थी। उन्होंने गोल्डन कलर के कपड़े वाला ब्लाउस पहना था जो आगे से काफी खुला हुआ था। मैं उनके 36” के मस्त मस्त आम देख सकता था। शांति आंटी का फिगर काफी सेक्सी और सुडौल था। 36 32 36 का ऐसा फिगर था की किसी भी मर्द का लंड खड़ा करवा दे। मैं भी देखकर पागल हो गया। मैं भी उनको बाहों में भरके किस करने लगा।

“जिगनेश बेटा!! मैं तो विधवा हूँ। मेरे लिए इस तरह की जेवेलरी का कोई काम नही” वो बोली और डायमंड पेंडेंट मुझे लौटाने लगी। मैं उसी वक्त उनकी मांग में ऊँगली से झूठ मूठ सिंदूर भर दिया प्रतीकात्मक रूप में।

“लो अब आप विधवा नही हो!! आप की शादी अब मुझसे हो गयी” मैंने कहा

उनकेबाद वो इमोशनल हो गयी और मेरे गले लग गयी। मुझे सही मौका मिल गया था। मैंने शांति आंटी को कसके दोनों हाथों से जकड़ लिया और उनके ओंठ पर ओंठ रख दिया और जल्दी जल्दी चुम्बन लेने लगा। वो भी मुझे चूसने लगी। हमारा प्यार मोह्बब्ब्त इस तरह से चालू हो गया। हम दोनों अच्छे से किस करने लगे। दोस्तों शांति आंटी अभी भी अच्छी माल लगती थी। बस थोड़ी सी ऐज जादा लगती थी। पर उनकेबावजूद भी सेक्सी औरत थी। मैं उनकी गर्म गर्म साँसों को पीने लगा।

शांति आंटी भी मेरे होठो को चूसने लगी। कुछ देर बाद हम दोनों का चुदाई वाला मौसम बन गया था। स्टाफ रूम में टेबल कुर्सी लगी हुई थी जिस पर लोग बैठकर अपना लंच करते थे। मैं उसी बेंच पर बैठ गया और आंटी को भी बिठा दिया। मै फ़ौरन ही उनकी कड़ी कड़ी 36” की शानदार चूचियों पर हाथ लगा दिया और ब्लाउस के उपर से ही दबाने लगा। शांति आंटी “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ…उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ….” करने लगी। उनको भी मजा आने लगा।

“जिगनेश बेटा!! तेरा इरादा क्या है??” वो चिहुक कर पूछने लगी।

“मेरा इरादा तो आपकी मस्त मस्त बुर को चूसने का है आंटी जी” मैं बोला

वो कुछ नही बोली और ब्लाउस खोलने लगी। अपना ब्लाउस उतार डाली। उन्होंने काली रंग की ब्रा पहनी थी। दोस्तों शांति आंटी की 36” की चूचियां बड़े हिफाजत से उनकी ब्रा में कैद थी। मैं हाथ से दबाने लगा। उन्होंने ब्रा भी खोल डाली और साइड रख दी। जैसे ही मैंने उनके बड़े बड़े कबूतर को देखा तो मौज आ गयी। इतने बड़े बड़े दूध मैंने आजतक नही देखे थे। फिर मैंने उनको बैठने वाली बेंच पर लिटा दिया। बेंच काफी लम्बी थी जिसपर शांति आंटी आराम से लेट सकती थी।

वो लेट गयी। मैं भी उनके उपर लेट गया। मैंने अपना मुंह उनकी बड़ी बड़ी चूची पर रख दिया और किस करने लगा। हाथ से दाबना चालू कर दिया। वो “ओहह्ह्ह….अह्हह्हह…अई..अई. .अई… उ उ उ उ उ…” करने लगी। मैं हाथ में उनके आमो को लेकर कस कसके दबाने लगा। वो भी मजा पाने लगी। फिर मैंने चूसना चालू कर दिया। अब उनके गले में सिर्फ वही डायमंड पेंडेंट था जो मैंने उनको दिया था। मैं उनकी जवानी का आज पूरा का पूरा रस पीना चाहता था। इसलिए मैंने बिना समय गवाये उनके दूध को मुंह में लेकर चूसना चालू कर दिया। शांति आंटी सी सी ऊई उई करने लगी।

“बेटा धीरे धीरे चूसो!! दर्द होता है मेरे दूध में! आराम से!!” वो बोली

मैं चूसने लगा पर जल्दी ही मेरी स्पीड बढ़ गयी। आंटी के दूध की मैं क्या तारीफ़ क्यों। बहुत खूबसूरत और सुडौल थे। कड़ी कड़ी चूचियां थी और जरा भी लटकी हुई न थी। अच्छे से टाईट चूचियां थी। मैं दोनों हाथ से दोनों छाती को दबाता और मुंह में लेकर चूस रहा था। अपना मुंह और दांत चला चलाकर चूस रहा था। शांति आंटी पूरा सहयोग कर रही थी। मेरे सिर को पकड़कर चुदासी होकर सहलाती जा रही थी।

“चूस ले जिगनेश बेटा!! आज तुम मेरे आशिक बन जाओ” वो बोले जा रही थी आँख बंद करके

मैं धकाधक उनकी जवानी का रस पी रहा था। मैंने उनकी एक चूची को जब अच्छे से चूस डाला तो दूसरी वाली चूसने लगा।

“बेटा!! तुम तो बड़ी मस्त चुसाईं करते हो!!” वो बोली

मैं अब उनके गुप्त अंगो को देखना चाहता था। उनकी चूत और गांड के दर्शन करना चाहता था। मैंने अब उनके पेट से खेलना शुरू कर दिया। उस पर किस करने लगा। हाथ से सहलाने लगा। आंटी फिर से “आआआअह्हह्हह…..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….”करने लगी। वो भी अपनी साड़ी खोलने लगी। उसे भी उतार डाली। शांति आंटी ने आसमानी रंग का पेटीकोट पहना हुआ था। उसकी डोरी खोलने लगी। मुझे बड़ी मौज गयी। उनके पेटीकोट के अंदर ही उनकी मस्त मस्त चूत छुपी हुई थी। पेटीकोट को आंटी जी उतार डाली। मैं उनकी काली पेंटी से खेलने लगा। अब उनकी पेंटी पर मैं हाथ से जल्दी जल्दी सहलाने और मलने लगा। आंटी को मजा आने लगा।

“अच्छा लग रहा है जिगनेश बेटा!! और करो!! आआआअह्हह्हह…..” वो कहने लगी

मैं उनकी चुस्त काली पेंटी के उपर से सहलाने लगा और उनको खूब मजा दिया। उनकी मस्त मस्त डबलरोटी जैसी चूत मुझे उपर से दिख रही थी। मैं काफी चुदासा हो गया था और उपर से ही जीभ निकालकर चाटने लगा। शांति आंटी “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ.”करने लगी। उसके बाद मेरी कामुकता बढ़ गयी और मुझे उनकी पेंटी उतारनी पड़ी। दोस्तों जब उनकी मस्त मस्त सावली सलोनी चूत के दर्शन हुए तो चूत अपने ही रस से नहा चुकी थी। मैं भी झुककर उनकी चूत पर जीभ लगाकर जोर जोर से चाटने लगा। वो अपनी गांड उठाने लगी। उनकी हालत किसी रंडी जैसी हो गयी थी। मैं तो किसी सेक्सी कुत्ते की तरह चाट रहा था जल्दी जल्दी। मैं आज उनका पूरा रस पी लेना चाहता था। शांति आंटी टांग खोलकर बड़े मजे से मुझे अपनी मस्त मस्त रसीली बुर पिला रही थी।

उनकी चूत की मैं क्या तारीफ़ करूँ बड़ी सेक्सी और गुलाबी दिखती थी। किसी परी की तरह दिख रही थी। चूत के लब बड़े बड़े साइड साइड को लटक रहे थे। आंटी के हसबैंड ने उनको चोद चोदकर चूत फाड़ डाली थी। मैंने भी अपनी ऊँगली उनके फटे हुए भोसड़े में डाल दी और जल्दी जल्दी चलाने लगा। शान्ति आंटी “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी… हा हा.. ओ हो हो….” करने लगी। मेरी अंदर भी वासना और हवस का ज्वालामुखी फूट पड़ा। मैं आंटी की चूत में जल्दी जल्दी ऊँगली चलाने लगा जिससे उनको बड़ी कामुकता मिलने लगी। अब वो और तेज तेज आवाज निकालने लगी। मैं भी जोश में आकर एक हाथ से ऊँगली उनकी मस्त मस्त रसीली चूत में दौड़ाने लगा और जीभ लगाकर प्यासे कुत्ते की तरह चाटने लगा। शान्ति आंटी को बड़ा आनन्द मिलने लगा।

“करते रहो जिगनेश बेटा!!! मेरी चूत में और ऊँगली करो!!” वो अपनी कमर उठाकर कहने लगी

मैं उनकी बात मानने लगा। मैंने 17 18 मिनट उनके फटे भोसड़े में ऊँगली चलाकर उनको मार डाला। अब चूत को अच्छी तरह से चाट भी चूका था। मैं भी कपड़े खोलने लगा। लंड हाथ में लेकर हिलाने लगा। दोस्तों मेरा लंड 9” का बड़ा सा खीरे जैसा था। मैं हाथ में लेकर जल्दी जल्दी मुठ देने लगा। कुछ ही देर में लंड लड़की जैसा मजबूत हो गया।

“आओ बेटा!! अब मेरी प्यास बुझा डालो!! जल्दी से मोटे लंड से मुझे चोद डालो” शांति आंटी बोली और दोनों पैर खोल दी।

दोस्तों मेरे शोरुम के इस स्टाफ रूम की बेंच काफी पतली थी, इस वजह से ये डर था की कही आंटी काम लगवाते समय नीचे न गिर जाए। अब मुझे हिसाब से उनको चोदना था। मैंने बेंच के दोनों तरफ अपने पैर डाल दिए। फिर सामने शांति आंटी की गद्दीदार बड़ी सी उभरी हुई चूत मेरा इन्तजार कर रही थी। मैंने अपने लंड को पकड़ा और उनकी चूत की पिटाई करने लगा। वो “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ…ऊँ…ऊँ….”करने लगी। मैंने काफी पिटाई की उनकी चूत की। अब लंड के सुपाडे से उनके छेद पर रगड़ने लगा। वो आनंदित होने लगी। 5 मिनट मैंने उनकी चूत पर अपना गुलाबी सुपाडा रगड़ा। फिर धक्का मारकर अंदर डाल दिया। आंटी आऊ कहने लगी। अब मैंने उनकी ठुकाई शुरू कर दी।

काम लगाना शुरू कर दिया। आंटी मुंह बनाने लगी जैसे सब औरते बनाती है। मैंने धक्को की स्पीड धीरे धीरे बनानी शुरू कर दी। आंटी बेंच पर उछलने लगी। मुझे लगा की कही गिर न जाए, इसलिए मैंने उनके कंधे पकड़ लिए।

“….उंह उंह उंह हूँ.. ohh!! yes yes मजा आ रहा है जिगनेश बेटा!! और करो !! .अई…..”शांति आंटी भी मुझे प्रोत्साहित करने लगी

उनके हावभाव देककर मुझे जादा ख़ुशी मिल रही थी। दोस्तों वो भरे हुए खूबसूरत जिस्म वाली मालकिन थी। इसलिए उन जैसी संस्कारवान औरत को चोदना एक बड़े गर्व की बात थी। इसलिए मैं धकाधक उनका काम लगाने लगा। अब धीरे धीरे हम दोनों के बीच में बड़ी हवस वाला रिश्ता बन गया था। मैंने नीचे निगाह डाली तो मेरा लंड जल्दी जल्दी उनकी चूत के बिल में सटाक सटाक घुसकर तहलका मचा रहा था। आंटी जी “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..” बोले जा रही थी।

मैं जल्दी नही झड़ना चाहता था। इसलिए कुछ देर बाद जब मुझे लगा की आउट हो जाऊँगा तो मैंने जल्दी से लंड हाथ से पकड़कर बाहर खींच लिया। शान्ति आंटी दोनों टांग खोलकर किसी कुतिया की तरह बेंच पर मचलने लगी।

“जिगनेश बेटा!! मुझे अपना लंड चूसा दो” वो कहने लगी

मुझे भी उनका ऑफर अच्छा लगा। पर उससे पहले मैंने अपना मुंह उनकी बड़ी सी चूत पर लगा दिया और जल्दी जल्दी उसका खोया चाटने लगा। उनकी बुर अभी भी आग की तरह गर्म थी। मैं फिर से चाटने लगा। वो “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…” करने लगी और अपनी 36” की बड़ी बड़ी दूध को मसलने लगी। अपनी निपल्स को पकड़कर खुद ही मरोड़ने लगी। उनके ऐसे चुदक्कड वाले रूप में देखकर मेरी वासना और जाग गयी। मैं जल्दी जल्दी उनकी चूत का खोया चाटने लगा। फिर अपना लंड उनके मुंह में डाल दिया। वो चूसने लगी और हाथ में लेकर मुठ देने लगी। मुझे उस पतली की बेंच पर लेटना पड़ गया। शांति आंटी बैठ गयी। मेरे लंड को पकड़कर अच्छे से फेटने लगी। दोस्तों, एक बार फिर से मुझे आनन्द मिलने लगा। आंटी अब मेरे सुपाड़े को जीभ निकालकर चाटने लगी। उनको इतना मजा कभी नही आया था। कुछ देर गुलाबी सुपाडे को चाटी। फिर पूरा 9” लंड मुंह में उतार ली और मस्ती भरे अंदाज में चूसने लगी।

“क्या बात है आंटी जी!! आप तो किसी प्रोफेशनल रंडी की तरह चूसती हो जिसको पूरी ट्रेनिंग मिली होती है” मैं बोला

वो मेरी बात सुनकर और भी जोश में आ गयी और मस्ती से चूसने लगी। साथ में उनके हाथ बड़ी तीव्रता से फेटने लगी। दोस्तों एक बार फिर से मेरा लंड उनकी चूत फाड़ने को तैयार था।

“शांति आंटी!! अब आप मेरे मोटे लंड की सवारी करो!! इसको घुडसवारी का मजा लो!! आओ बैठो इसपर!!” मैंने कहा

मैं पतली सी उस लड़की की बेंच पर सम्भल कर लेट गया। शांति आंटी आकर मेरे लंड को अपनी मस्त मस्त चूत में घुसाकर लेट गयी। और झटके दे देकर सेक्स करने लगी। वो चुदाने लगी। मैं लेटे लेटे मजे लुटने लगा। धीरे धीरे शांति आंटी रफ्तार बना ली और लंड पर कूदने जैसी जैसे बच्चे रस्सी कूद वाला खेल खेलते है। मेरा 9” का मजबूत लंड उनकी बुर को फाड़ फाड़कर उसका हलुआ बनाने लगा। आंटी जी “……अई…अई….अई…..इसस्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….”करने लगी। उनका खुला हुआ भव्य स्वरुप मुझे दिख रहा था। वो मेरे सामने पूरी तरह से नंगी होकर लंड पर घुड़सवारी करने लगी। उनके सेक्सी गोरे जिस्म का एक एक अंग मुझे दिख रहा था। कुछ देर बाद धक्का देते देते आंटी झड़ गयी। उनका बदन ढीला पड़ गया। वो नीचे उतर गयी और बेंच पर लेट गयी। मैंने जल्दी जल्दी अपने लंड को फेटा और उनके मुंह पर माल की धार छोड़ दी।

टीवी देखने आई आंटी की चूत सहलाने लगा

ये मेरी सच्ची कहानी है। दोस्तों ये 16-17 साल पहले की बात है। उस समय सिर्फ मेरे ही घर में टीवी हुआ करता था क्यूंकि उस जमाने में टीवी बहुत महँगा हुआ करता था और कुछ लोग ही इसे खरीद पाते थे। नया नया टीवी चला था और मेरे पापा को टीवी देखने का बहुत शौक था इसलिए वो ले आये थे।

धीरे धीरे मेरे मोहल्ले के सब लोग मेरे घर टीवी देखने आने लगे। उस समय एक सीरियल टीवी पर आता था, जो बहुत प्रसिद्ध सीरियल था। मेरे मोहल्ले के सब लोग मेरे घर टीवी देखने आते थे। बच्चे तो बच्चे बड़े और बूढ़े भी मेरे घर टीवी देखने आया करते थे। दोस्तों मेरे घर के बगल में मिश्रा आंटी रहती थी।

वो स्वभाव से बहुत लालची औरत थी और मेरे घर आकर रोज दूध, चीनी, सब्जी, रोटी, ब्रेड माँगा करती थी। भगवान जाने वो कैसी लालची औरत थी की उसे सामान मांगने में बिलकुल शर्म नही आती थी। बाद में मुझे पता चला की वो अपने पति से खर्च के लिए पैसे मांग लेती थी पर सारे पैसों को वो बचा लेती थी और ऐसे ही काम चला लेती थी।

हम लोग उनहे मिश्रा आंटी कहते थे क्यूंकि वो मिश्रा जाति की थी। बाद में धीरे धीरे मुझे उनके चाल चलन में बारे में पता चला। उसके पति के नौकरी पर जाते ही उसके घर में कई मर्द आते थे और बारी बारी से उसकी चूत बजाते थे। जमकर उसकी रसीली बुर में लंड खिलाते थे और मिश्रा आंटी की चूत की आग की शांत करते थे।

वो गैर मर्दों से पैसो के लिए छिपकर चुदवा लेती थी। उसकी चुदाई की बात उसके पति को नही मालुम थी वरना वो उसकी माँ चोद देता। धीरे धीरे मुझे मिश्रा आंटी के चाल चलन के बारे में सब कुछ पता चल गया था। दोस्तों वो लालची भले ही हो पर उसका बदन बिलकुल भरा हुआ था।

धीरे धीरे मैं जब भी उसे देख लेता मेरा लंड खड़ा हो जाता था। मिश्रा आंटी के २ खूबसूरत बच्चे थे प्रियंका और राहुल। दोनों बच्चे दूध जैसे सफ़ेद थे पर मिश्रा जी तो बहुत काले थे। इसी से पता चलता था की वो मिश्रा अंकल के बच्चे नही थे। बल्कि मिश्रा आंटी जिन मर्दों को घर में बुलाकर चुदवा लेती थी वो बच्चे उनके ही थे।

पर मिश्रा अंकल गोरे बच्चों को देखकर बहुत खुश थे। उनको अपनी चुदकक्ड बीबी के बारे में कुछ पता नही था। धीरे धीरे मैं जान गया की अगर मैं मिश्रा आंटी को पटा लूँ तो इसकी चूत मुझे जरुर मिल जाएगी। इसलिए मैं अपने मिशन पर लग गया। मैं मिश्रा आंटी को खूब मस्का लगाने लगा और उसने हंस हंसकर बात करने लगा।

जब वो मेरे घर कुछ मांगने आती तो मैं उनको दे देता। फिर मिश्रा आंटी मेरे घर महाभारत सिरिअल देखने आने लगी। उस जमाने में इस नाटक को बहुत अच्छा और मजेदार नाटक माना जाता था। ये रविवार को शाम को आया करता था तो सड़के खाली हो जाया करती थी।

दुकानदार अपनी दुकाने बंद करके महाभारत देखने चले जाया करते थे। दोस्तों धीरे धीरे मिश्रा आंटी मेरे घर में महाभारत देखने आने लगी। उनको टीवी देखने का बहुत शौंक था। मेरे मोहल्ले के बच्चे भी मेरे घर टीवी देखने आया करते थे। मेरा घर लोगो से भर जाया करता था।

मुझे अच्छी तरह से मालूम था की मिश्रा आंटी एक नम्बर की अल्टर माल है और उनको नये नये लंड खाने का बड़ा शौक है। पर वो पैसे की लालची औरत थी। उस जमाने में ५० रूपए की बड़ी वैल्यू हुआ करती थी और ५० रुपया ५०० रूपए के बराबर माना जाता था।

मैं अच्छे से जानता था की अगर मैं मिश्रा आंटी से उसकी रसीली बुर मागूंगा तो वो मुझसे पैसे जरुर मांगेगी इसलिए मेरे पास टीवी ही एक हथियार था। अगले रविवार को जैसे ही मिश्रा आंटी टीवी देखने आई मैंने टीवी बंद कर दिया और स्टैबलाइजर के पीछे वाली बटन मैंने जला दी। बिजली का वोलटेज जादा हो गया और लाल बत्ती जलने लगी और टीवी बंद हो गया।

“अरे राजीव बेटा….जल्दी से टीवी खोल। महाभारत शुरू हो गया है!!” मिश्रा आंटी बोली.

“आंटी टीवी में कुछ खराबी आ गयी है और टीवी नही चलेगा!!” मैंने कहा.

ये सुनते ही मिश्रा आंटी बड़ी बेचैन हो गयी। टीवी उनकी कमजोरी थी। ये बात मैं अच्छे से जानता था। आंटी रोज किसी न किसी मर्द को घर में बुलाकर चुदवा लेती थी और पैसा कमा लेती थी। उनके पास पैसे ही कमी नही थी। उन्होंने तुरंत अपने कसे ब्लाउस में हाथ डाला और एक छोटा सा पर्स निकाला और उसमे ने मुझे ५० रूपए का नोट तुरंत दे दिया।

“जाओ राजीव बेटा, भागकर मिस्त्री बुला लाओ और जल्दी से टीवी बनवा दो!!” मिश्रा आंटी बोली और उनके जाते ही मैंने स्टैबलाइजर की पीछे की बटन दबा दी और टीवी शुरू हो गया। कुछ देर में आंटी आकर देखने लगी। आज मेरा उनको चोदने का फुल मूड था।

मेरी मम्मी घर के दूसरे कमरे में काम कर रही थी। मैं मिश्रा आंटी के लिए गरमा गर्म चाय बना लाया और उनको दे दी। “अरे वाह राजीव बेटा…क्या बात है आज तू मुझे बड़ा मस्का मार रहा है!!” मिश्रा आंटी बोली। मैं हंस दिया और उसके पास ही बैठकर महाभारत देखने लग गया।

दोस्तों उस जमाने में लोग इतने अमीर नही हुआ करते थे। सोफे किसी के पास नही हुआ करते थे। हम लोग भी जमींन पर बोरा बिछाकर टीवी देखा करते थे। मैं भी मिश्रा आंटी के बगल दीवाल से टेक लगाकर टीवी देख रहा था। धीरे धीरे मैं अपने हाथ से आंटी के पैर को छूने लगा। कुछ देर में वो जान गयी।

“राजीव बेटा!! ये क्या कर रहे हो!!!” मिश्रा आंटी हंसकर बोली। दोस्तों वो कभी गुस्सा नही करती थी। हमेशा हंसती रहती थी। गुस्सा करना तो जैसे उनको आता ही नही था।

“आंटी आप इतनी खूबसूरत हो की जब भी आपको देखता हूँ मुझे कुछ कुछ होने लग जाता है!!” मैंने मस्का लगाया। वो मुस्कुरा दी.

“राजीव साफ साफ बता की तुझे क्या चाहिए???” मिश्रा आंटी बोली।

दोस्तों वो बहुत गोल मटोल मस्त माल थी। रंग बिलकुल गोरा था, जिस्म भरा हुआ था। फिगर 38 36 32 का था। उनको देखते ही मेरा उनकी रसीली चूत मारने का दिल करने लग जाता था। आज तो मैं अच्छे से सोच लिया था की आज उनको कसके चोदना था।

“आंटी!! बाहर बाहर के मर्द आपको चोद लेते है। आपके हुस्न की जवानी को पी लेते है और मैं तो आपके बगल ही रहता हूँ। फिर भी मैं प्यासा हूँ। आंटी मुझे आपकी मस्त चूत चोदनी है!” मैंने साफ साफ बक दिया। एक बार तो मिश्रा आंटी को जैसे सांप सूंघ गया। कुछ देर के लिए वो बिलकुल चुप हो गयी।

“तूने कब देखा की बाहर बाहर के मर्दों का लंड खाती हूँ???” आंटी ने मुझसे पूछा.

“आंटी! मैं कोई अंधा तो हूँ नही। जैसे ही मिश्रा अंकल अपनी नौकरी पर चले जाते है फिर नये नये मर्द आपके घर में रोज आते है और ३ ३ ४ ४ घंटे बाद बाहर निकलते है। अब आप उन मर्दों के साथ तबला तो बजाइंगी नही!!!” मैंने कहा.

“राजीव बेटा, वो सब मोटा पैसा खर्च करते है। तब मैं उनको अपनी रसीली बुर चोदने के लिए देती हूँ!!” आंटी बोली.

“आंटी मेरे पास भी पैसा है। आप मुझे चूत मारने को दे दो। मैं आपको पैसा दे दूंगा!!” मैंने कहा.

उसके पास अगले दिन जैसे ही मिश्रा अंकल अपनी नौकरी पर गये मिश्रा आंटी ने मुझे अपने घर में बुला लिया। उसके बच्चे प्रियंका और राहुल स्कुल पढने गये हुए थे। इसी खाली समय में वो रोज नये नये मर्दों का लम्बा लम्बा लंड खाती थी और जमकर अपनी चूत चुदवाती थी। मेरा काम बन गया था।

आज मैं अपनी बगल वाली आंटी को जी भरके चोदने खाने वाला था। मिश्रा आंटी मुझे अंदर बेडरूम में ले गयी। और हम दोनों बिस्तर पर जाकर लेट गये। मैंने आंटी को पकड़ लिया और होठो पर किस करने लगा। वो बहुत खूबसूरत और मस्त माल औरत थी। उनके चुच्चे तो बहुत बड़े बड़े थे।

धीरे धीरे वो नीचे चली गयी और मैं उनके उपर आ गया। हम दोनों लेटकर किस करने लगे। आंटी ने गुलाबी रंग की बड़ी गहरी लिपस्टिक लगा रखी थी जिसे मैं पूरा का पूरा चूसता जा रहा था। कुछ ही देर में हम दोनों गरमा गये। मैंने धीरे धीरे उनकी साडी निकालने लगा।

कुछ ही देर में मैंने मिश्रा आंटी की साड़ी निकलकर दूर फेक दी। मुझे उनके गहरे ब्लाउस के दर्शन हो रहे थे। उनके बहुत ही सुंदर मुलायम ३८” के दूध के दर्शन मुझे आंटी के गहरे गले वाले ब्लाउस से हो रहे थे। दोस्तों मैं रोज आंटी को देखकर मुठ मार लेता था पर कभी सोचा नही था की एक दिन उनकी चूत मारने को मिलेगी।

मैं पागल हो गया था और उसके ब्लाउस के उपर से ही मैं उनके मम्मो को दबाने लगा। आंटी “आआआअह्हह्हह……ईईईईईईई….ओह्ह्ह्हह्ह….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” की आवाज निकालने लगी। शायद उनको भी बहुत मजा आ रहा था। मैं उसके गहरे गले वाले ब्लाउस के उपर से उनके मुलायम चुच्चों को दबा रहा था।

मुझे बहुत मजा आ रहा था। कुछ देर में मैंने उनका ब्लाउस खोल लिया और निकाल कर फेक दिया। मिश्रा आंटी से चुस्त गुलाबी रंग की ब्रा पहन रखी थी। वो ब्रा में तो और भी जादा हसीन लग रही थी। मैं जुगाड़ करके उनकी ब्रा खोल दी और दूर फेक दी।

अब मेरे बगल वाली मिश्रा आंटी मेरे सामने बिलकुल नंगी हो गयी थी। उनके ३८” के भरे हुए चुच्चों को देखकर मेरा होश उड़ रहा था। मैं आंटी के उपर ही लेट गया और अपने हाथ से उनके स्तनों को दबाने लगा। वो मचलने लगी। दोस्तों आंटी के कबूतर इतने बड़े बड़े नर्म नर्म थे की मुस्किल से मेरे हाथो में आ पा रहे थे।

मुझे उनके कबूतर दबाने को जन्नत का मजा मिल रहा था। आज इस घर के माल को मुझे कसकर चोदना था। मैं आंटी के उपर लेट गया और मुंह लगाकर उनके शानदार थनों को मुंह में लेके पीने लगा। मुझे लगा की मैं स्वर्ग में आ गया हूँ। मैं हाथ से मिश्रा आंटी जैसी मस्त चोदने पेलने लायक माल के मम्मे दबा देता था।

वो “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” कहने लग जाती थी। दोस्तों बड़ी देर तक ये मनोरंजक खेल चलता रहा। मैं जी भर के उनके गोल गोल बहुत ही खूबसूरत मम्मो को हाथ से जोर जोर से दबाया और मुंह में लेकर चूसता रहा। आंटी भी मुझे बहुत प्यार कर रही थी।

उन्होंने मुझे दोनों बाहों में भर रखा था और किस कर रही थी। मेरे गाल पर किस कर देती थी। मेरे चेहरे को चूम लेती थी और मेरे होठो को चूमने लग जाती थी। ऐसा लग रहा था की वो मेरी आंटी नही बल्कि असली वाली बीबी है। फिर मैंने उनके पेटीकोट का नारा खोल दिया और निकाल दिया।

मिश्रा आंटी से तिकोनी जालीदार पेंटी पहन रखी थी। जिसमे वो बहुत सेक्सी और हॉट माल लग रही थी। मैंने उनकी पेंटी को खीचकर निकाल दिया। अब मिश्रा आंटी मेरे सामने पूरी तरह से नंगी थी। मैं उनके पेट को चूमने लगा और धीरे धीरे मैं नीचे बढ़ने लगा।

कुछ देर में मैं उनकी चूत पर पहुच गया था। बाप रे!! आंटी की चूत तो बहुत चिकनी, साफ ,सुंदर और बहुत ही खूबसूरत थी। मैं मुंह लगाकर उसकी खूबसूरत बुर को चाटने लगा। उधर मिश्रा आंटी की मजे मारने लगी। उनको भी फुल मजा आ रहा था। आंटी रोज नये नये मर्दों का लंड खाती थी इसलिए रोज अपनी झाटों को साफ़ कर लेती थी।

मैं किसी कुत्ते की तरह उनकी चिकनी बुर को चाट रहा था। वो “ओह्ह्ह्ह माँ।।। अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह।।।। उ उ उ।।।चूसो चूसो।।।।।और चूसो।।।मेरी चूत को।।।।अच्छे से पियो मेरी बुर” चिल्ला रही थी। उनको अपनी चूत को गैर मर्दों से चुस्वाने का बड़ा शौक था। उनको अपनी चूत पिलाना अच्छा लगता था।

कुछ देर बाद मैं अपना ७” का लंड आंटी के भोसड़े में डाल दिया और उनको चोदने लगा। किसी पेशेवर रंडी की तरह आंटी मुझसे चुदवा रही थी। “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ…आह आह उ उ उ उ उ…..अअअअअ आआआआ…” बोल बोलकर वो चुदवाने लगी और गपागप मेरा ७ इंच का मोटा लंड खाने लगी।

दोस्तों आज मेरी जिन्दगी का शायद सबसे खूबसूरत दिन था। रोज मैं सुबह शाम जिस खूबसूरत औरत को देखा करता था आज मैं उसकी रसीली बुर को चोद रहा था। मिश्रा आंटी की चूत मारना मेरे लिए एक बहुत बड़ी बात थी। मैंने अपनी बाहों में उनको लपेट लिया था और उनको अपनी औरत की तरह चोद रहा था, उसकी चिकनी चूत को बजा रहा था।

वो नंगी तो बहुत खूबसूरत लग रही थी। कपड़ों में भी वो बहुत अच्छी लगती थी पर मेरा हमेशा से ये सपना था की एक दिन उनको नंगा करके मैं उनकी रसीली चूत मारू और ऐश करूँ। कुछ देर बाद मैंने अपनी रफ्तार बढ़ा दी और जल्दी जल्दी उनकी बुर चोदने लगा। मैं मिश्रा आंटी को गाल, चेहरे और होठो पर चूम लेता था और उसके होठ पी लेता था

वो एक चुदकक्ड औरत थी पर थी बहुत खूबसूरत माल। मैं उनको जल्दी जल्दी पेलने लगा और मेरा लौड़ा तो उनकी चूत के छेद में जाकर और भी जादा मोटा हो गया था। मुझे सेक्स और वासना का नशा चढ़ गया था। मैं जल्दी जल्दी मिश्रा आंटी को बजाने लगा और ४० मिनट मैंने उनको नॉन स्टॉप चोदा। फिर अपना लौड़ा निकालकर मैंने अपना माल उनके खूबसूरत चेहरे पर गिरा दिया। मेरे मोटे लौड़े से ८ १० पिचकारी माल की निकली जो सीधा मिश्रा आंटी के खूबसूरत चेहरे पर जाकर गिरा।

वो बिलकुल चुदासी हो गयी और मेरे माल को जीभ निकालकर चाटने लगी। उसके बाद दोस्तों मैंने उनको अपनी कमर पर लंड पर बिठाकर ढेड़ घंटे चोदा। उसके बाद मैंने जो ५० रूपए उसने लिए थे वो ही उनको वापिस कर दिए। वो चुदवाकर खुश हो गयी। क्यूंकि आज उनको पैसे भी मिल गये थे। उसके बाद मिश्रा आंटी मुझसे सेट हो गयी थी और जब मैं कहता है मुझे चूत दे दिया करती थी और मुझसे चुदवा लिया करती थी।

मिल्फ आंटी ने अपने बूब्स से लंड मसाज किया

गर्मी की उन दिनों में दिल्ली का मौसम बहुत तेज था। मैं राहुल, २२ साल का जवान लड़का, अपनी पढ़ाई के लिए दिल्ली में रहता था। मेरे किराए के मकान के ठीक बगल में रहती थीं श्वेता आंटी। वो एक परफेक्ट मिल्फ थीं – उम्र करीब ४२ साल, लेकिन बॉडी ऐसी कि कोई भी जवान लड़का देखकर पागल हो जाए। उनकी बड़ी-बड़ी गोल-गोल ब्रेस्ट, पतली कमर, और मोटी-मोटी जांघें हमेशा साड़ी या टाइट टॉप में फिट रहती थीं। उनके पति ज्यादातर बिजनेस के सिलसिले में बाहर रहते थे, और उनकी बेटी कॉलेज में पढ़ती हुई हॉस्टल में थी।

श्वेता आंटी बहुत खुशमिजाज थीं। वो मुझे हमेशा “बेटा” कहकर बुलाती थीं, लेकिन उनकी नजरों में एक खास चमक होती थी जब वो मेरी तरफ देखतीं। मैं भी उन्हें चुपके-चुपके देखता रहता था। उनकी क्लीवेज देखकर मेरा लंड अक्सर खड़ा हो जाता था। एक दिन शाम को बिजली चली गई। मैं बालकनी में खड़ा था, तभी आंटी की बालकनी से आवाज आई।

“राहुल बेटा, तुम्हारे पास कोई टॉर्च है क्या? अंधेरा हो गया है।”

मैं तुरंत अपनी टॉर्च लेकर उनकी तरफ गया। दरवाजा खुला था। आंटी ने एक हल्की सी नाइट सूट पहना हुआ था – सफेद कलर का, जो उनके गोरे शरीर पर चिपका हुआ था। उनके बड़े बूब्स सूट के अंदर से साफ झांक रहे थे। मैंने टॉर्च थमाई, लेकिन नजरें उनकी छातियों पर अटक गईं।

“क्या देख रहे हो बेटा?” आंटी ने मुस्कुराते हुए पूछा। उनकी आवाज में शरारत थी।

“कुछ नहीं आंटी…” मैं शर्म से लाल हो गया।

आंटी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा। “अरे, शर्मा मत। मैं जानती हूं जवान लड़के क्या देखते हैं। आओ अंदर, चाय बनाती हूं।”

उस रात हम दोनों बालकनी में बैठकर बातें करते रहे। आंटी ने बताया कि उनके पति कितने बिजी रहते हैं, और वो अकेली कैसे फील करती हैं। मैंने भी अपनी लाइफ के बारे में बताया। धीरे-धीरे बातें पर्सनल होती गईं। आंटी ने मेरे हाथ को अपने हाथ में लिया और बोलीं, “राहुल, तुम बहुत अच्छे लड़के हो। मुझे तुम्हारी कंपनी अच्छी लगती है।”

उसके बाद से हम रोज मिलने लगे। कभी वो मुझे खाना खिलातीं, कभी हम साथ में मूवी देखते। एक शाम वो मेरे कमरे में आईं। उन्होंने एक लाल कलर की साड़ी पहनी हुई थी, ब्लाउज काफी डीप नेक वाला। उनके बूब्स का आधा हिस्सा बाहर झांक रहा था। मैं सोफे पर बैठा था, वो मेरे पास आकर बैठ गईं। उनकी जांघ मेरी जांघ से छू रही थी।

“राहुल, तुम्हें मेरी बॉडी अच्छी लगती है ना?” उन्होंने सीधे पूछ लिया।

मेरा मुंह सूख गया। “आंटी… वो…”

“बोलो ना। मुझे बताओ।” उनकी उंगलियां मेरी जांघ पर घूमने लगीं।

“हां आंटी, आप बहुत हॉट हो। आपके बूब्स… बहुत सुंदर हैं।” मैंने हिम्मत करके कह दिया।

आंटी मुस्कुराईं। उन्होंने मेरे हाथ को उठाकर अपनी छाती पर रख दिया। “छूकर देखो। ये तुम्हारे लिए हैं आज।”

मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा। मैंने धीरे से उनके बूब्स को दबाया। नरम, गर्म और भारी। आंटी की सांसें तेज हो गईं। “अह्ह… प्यार से दबाओ बेटा। मुझे अच्छा लग रहा है।”

मैंने उनका ब्लाउज खोलना शुरू किया। उन्होंने खुद मदद की। उनके बड़े-बड़े गोरे बूब्स ब्रा से बाहर निकल आए। ब्रा का साइज ३६डी था। मैंने ब्रा भी उतार दी। उनके गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुंह में ले लिया और चूसने लगा। आंटी मेरे बालों में हाथ फेरती हुईं कराह रही थीं – “उम्म्म… राहुल… और जोर से… हां ऐसे…”

उनकी एक हाथ मेरी पैंट पर गई। मेरा लंड पहले से ही फुल हार्ड था। उन्होंने पैंट का बटन खोला और लंड बाहर निकाल लिया। “वाह… कितना मोटा और लंबा है तुम्हारा।” उन्होंने धीरे-धीरे हाथ से रगड़ना शुरू किया।

मैं उनके दोनों बूब्स को दोनों हाथों से मसल रहा था। आंटी ने मुझे उठाकर बेड पर लिटाया। फिर वो मेरे ऊपर आईं। उनकी साड़ी कमर तक उठा दी उन्होंने। उनके गीले पैंटी से उनकी चूत की महक आ रही थी। लेकिन आज वो कुछ और करना चाहती थीं।

आंटी ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और अपने बूब्स के बीच रख दिया। “आज मैं तुम्हें अपना स्पेशल मसाज दूंगी।”

उन्होंने अपने दोनों बड़े बूब्स को दोनों हाथों से दबाकर मेरे लंड को उनके बीच ले लिया। नरम, गर्म, और क्रीमी बूब्स मेरे लंड को चारों तरफ से घेर चुके थे। आंटी ऊपर-नीचे हिलने लगीं। उनका मसाज अनोखा था। हर बार जब वो नीचे आतीं, मेरा लंड उनके बूब्स की गहराई में चला जाता, और ऊपर उठतीं तो लंड का टॉप उनके गले तक पहुंच जाता।

“कैसा लग रहा है बेटा?” आंटी ने पूछा, उनकी आंखों में कामुकता थी।

“बहुत अच्छा आंटी… आपकी ये बड़ी-बड़ी छातियां… उफ्फ… स्वर्ग जैसा फील हो रहा है।” मैं कराह उठा।

आंटी ने स्पीड बढ़ा दी। उनके बूब्स मेरे लंड पर फिसल रहे थे। कभी-कभी वो रुककर लंड के टॉप को चूम लेतीं। उनका मुंह गीला था, लार मेरे लंड पर गिर रही थी, जिससे मसाज और भी स्मूद हो गया। मैं उनके निप्पल्स को उंगलियों से दबा रहा था। आंटी की सांसें भारी हो चुकी थीं। “मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है… तुम्हारा लंड मेरे बूब्स के बीच कितना गर्म है…”

मैंने उन्हें पकड़कर और पास खींच लिया। अब वो मेरे लंड पर पूरी ताकत से मूवमेंट कर रही थीं। उनके बूब्स लंड को मसल रहे थे, दबा रहे थे, और चिपकाए हुए थे। मैं महसूस कर रहा था कि मेरा लंड उनके बूब्स की नरमाई में घुल रहा है। थोड़ी देर बाद आंटी ने अपना पैंटी उतार दिया। उनकी चूत पूरी तरह गीली थी। उन्होंने मेरे लंड को अपने बूब्स से मसाज करते हुए अपनी चूत पर रगड़ना शुरू किया।

“आंटी… मैं जल्दी झड़ने वाला हूं…” मैंने कहा।

“झड़ जाओ बेटा… मेरे बूब्स पर ही झड़ दो।” उन्होंने कहा और स्पीड बढ़ा दी।

मेरा लंड उनके बूब्स के बीच फंसकर पंप हो रहा था। आखिरकार मैं जोर से कराहा और मोटी-मोटी गर्म वीर्य की धार उनके गले, चेहरे और बूब्स पर गिरने लगी। आंटी ने मुंह खोलकर कुछ स्वाद लिया और मुस्कुराईं। “कितना ज्यादा है तुम्हारा… अच्छा लगा?”

मैं हांफ रहा था। आंटी ने मेरे लंड को साफ किया और अपने बूब्स को मेरे मुंह के पास किया। मैंने अपनी वीर्य चाट-चाटकर उनके बूब्स साफ किए। फिर वो मेरे बगल में लेट गईं। हम दोनों एक-दूसरे को चूम रहे थे। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी।

“राहुल, मुझे तुम्हारा साथ बहुत अच्छा लगता है। तुम मुझे जवान महसूस कराते हो।” उन्होंने मेरे कान में कहा।

उसके बाद हम अक्सर मिलते। कभी-कभी वो मुझे अपने घर बुलातीं। एक दिन उन्होंने मुझे सरप्राइज दिया। उन्होंने ब्लैक लेस ब्रा पहनी हुई थी, जो उनके बूब्स को और भी आकर्षक बना रही थी। हम बेडरूम में थे। आंटी ने मुझे नंगा किया और खुद भी नंगी हो गईं। उनकी चूत साफ शेव थी, गुलाबी और गीली।

मैं उनके पैरों के बीच घुटनों पर बैठ गया और उनकी चूत चाटने लगा। आंटी मेरे सिर को दबाए हुए थीं – “हां बेटा… जीभ अंदर डालो… चूसो मेरी क्लिट… अह्हह…”

उनकी चूत से मीठा रस निकल रहा था। मैं पूरी लगन से चाट रहा था। आंटी का शरीर तड़प रहा था। फिर उन्होंने मुझे ऊपर खींचा। “अब फिर से वही मसाज दो बेटा।”

इस बार वो ऑयल लेकर आईं। उन्होंने अपने बूब्स और मेरे लंड पर ऑयल लगाया। अब मसाज और भी स्लिपरी और सेक्सी हो गया। उनके चिकने बूब्स मेरे लंड पर फिसल रहे थे। वो कभी तेज, कभी धीरे मूवमेंट कर रही थीं। उनके निप्पल्स मेरे लंड के टॉप को छू रहे थे। मैंने उनके बाल पकड़कर उनका मुंह अपने लंड के पास किया। आंटी ने मुंह खोलकर लंड का टॉप चूस लिया, जबकि बूब्स अभी भी लंड को मसल रहे थे।

“उम्म्म… स्वादिष्ट है तुम्हारा लंड…” उन्होंने कहा।

मैं उनके मुंह और बूब्स दोनों का आनंद ले रहा था। आंटी पूरी तरह मेरी हो चुकी थीं। वो खुद को मेरे लंड पर रगड़ रही थीं। फिर मैंने उन्हें चारों खाने चित्त लिटाया और उनके बूब्स के बीच लंड डालकर फक करने लगा। वो अपने बूब्स को और दबाकर मेरी मदद कर रही थीं।

“जोर से करो राहुल… मुझे पसंद है… हां… और जोर से…”

हम दोनों पसीने से तर थे। कमरे में सिर्फ हमारी कराहटें और चमड़ी की चप-चप की आवाजें गूंज रही थीं। आंटी की आंखें बंद थीं, मुंह खुला था, और वो आनंद ले रही थीं। मैंने आखिरकार उनके मुंह में झड़ दिया। आंटी ने सारा वीर्य निगल लिया।

उसके बाद हम अक्सर ऐसे ही इंटीमेट होते। कभी किचन में, कभी शावर के नीचे। आंटी मुझे हर तरीके से खुश रखतीं। उनके बूब्स मेरे लंड के लिए हमेशा तैयार रहते। वो कहतीं, “ये मेरे बूब्स अब तुम्हारे हैं बेटा। जब चाहो, मसाज कर लो।”

एक रात हम दोनों नंगे लेटे थे। आंटी मेरी छाती पर सिर रखे हुए थीं। “राहुल, तुम्हारे साथ मुझे बहुत अच्छा लगता है। तुम मुझे कभी मजबूर नहीं करते, बल्कि मैं खुद तुम्हारे पास आना चाहती हूं।”

मैंने उन्हें चूम लिया। “आंटी, आप भी मुझे बहुत प्यारी लगती हो।”

हमारी ये कहानी ऐसे ही चलती रही। मिल्फ आंटी और मेरा ये हॉट अफेयर दिल्ली की गर्म रातों को और भी गर्म बनाए रखता। उनके बूब्स का वो सॉफ्ट मसाज, उनकी गीली चूत, और हमारी गहरी कामुकता – सब कुछ परफेक्ट था।

 

पड़ोस की जवान लड़की का पहला सेक्स

मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली के एक शांत से इलाके में एक छोटे से फ्लैट में रहता हूं। मेरे ठीक बगल वाले फ्लैट में रहती थी नेहा। नेहा सिर्फ २२ साल की थी, लेकिन उसकी जवानियों ने किसी को भी दीवाना बना देना था। लंबे काले बाल, गोरा रंग, बड़ी-बड़ी आंखें और वो मासूम मुस्कान। उसकी छाती हमेशा टाइट टॉप में दबती हुई दिखती और उसकी गोल गंधे वाली कमर को देखकर मन करता कि बस छू लूं।

हम दोनों पड़ोसी थे, इसलिए धीरे-धीरे बातें होने लगीं। वो कॉलेज जाती थी और शाम को लौटकर अक्सर बालकनी में खड़ी होकर फोन पर बात करती। मैं भी अपनी बालकनी से उसे देखता रहता। एक दिन बिजली चली गई और उसका इन्वर्टर खराब हो गया। वो मेरे दरवाजे पर आई।

“राहुल भैया, थोड़ी देर चार्जर लगा लूं? मेरा फोन डेड हो गया है,” उसने शरमाते हुए कहा।

मैंने मुस्कुराते हुए अंदर बुलाया। वो पहली बार मेरे फ्लैट में आई थी। हल्का सा परफ्यूम उसकी बॉडी से आ रहा था। मैंने उसे सोफे पर बैठाया और पानी दिया। बातें शुरू हुईं। वो बहुत मासूम थी, लेकिन उसकी नजरों में कुछ जिज्ञासा थी। हम दोनों की उम्र लगभग बराबर थी, इसलिए जल्दी ही “भैया” हटकर “राहुल” हो गया।

अगले कुछ हफ्तों में हम काफी क्लोज हो गए। वो मुझे अपनी कॉलेज की बातें बताती, मैं उसे अपनी जॉब की। कभी-कभी हम साथ में चाय पीते, कभी बाहर घूमने जाते। मैंने देखा कि वो मेरे पास आने पर थोड़ा ज्यादा शरमाती है। उसकी आंखें झुक जातीं, लेकिन होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान रहती।

एक शाम बारिश हो रही थी। नेहा मेरे घर आई थी किताब लेने। बारिश इतनी तेज थी कि वो रुक गई। हम दोनों बालकनी में खड़े होकर बारिश देख रहे थे। उसकी साड़ी का पल्लू हल्का भीग गया था और उसकी ब्लाउज से उसकी ब्रा की आउटलाइन साफ दिख रही थी। मेरी नजर बार-बार वहां जा रही थी।

“राहुल… तुम मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो?” उसने धीरे से पूछा, लेकिन भागी नहीं।

“क्योंकि तुम बहुत खूबसूरत हो, नेहा,” मैंने सच्चाई से कहा।

वो शरमा गई। उसके गाल लाल हो गए। मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ा। वो हाथ खींची नहीं। बस नजरें नीचे कर लीं। मैंने उसे अपनी तरफ खींचा। हमारा पहला किस बहुत धीरे से हुआ। उसके होंठ नरम और गर्म थे। वो थोड़ी कांप रही थी, लेकिन मेरे सीने से चिपक गई।

“डर लग रहा है?” मैंने उसके कान में फुसफुसाया।

“थोड़ा… लेकिन तुम्हारे साथ अच्छा लग रहा है,” उसने शर्माते हुए जवाब दिया।

हम अंदर आए। मैंने उसे सोफे पर बिठाया। किसिंग जारी रही। मेरे हाथ उसकी पीठ पर घूम रहे थे। धीरे-धीरे मैंने उसकी साड़ी का पल्लू नीचे सरका दिया। उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। मैंने उसके ब्लाउज के हुक खोले। सफेद ब्रा में उसकी गोल-गोल ब्रेस्ट्स देखकर मेरा लंड तना हुआ जा रहा था।

“राहुल… धीरे से,” वो फुसफुसाई।

मैंने उसकी ब्रा उतारी। उसके गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने एक को मुंह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। नेहा की सांसें तेज हो गईं। “आह… राहुल…” वो कराह उठी। मेरे हाथ उसकी कमर पर, फिर उसकी नाभि पर घूम रहे थे। मैंने उसकी साड़ी का फंदा खोला। वो सिर्फ पैंटी में रह गई। उसकी जांघें मोटी और चिकनी थीं। पैंटी पर हल्का सा गीला धब्बा दिख रहा था।

मैंने अपनी शर्ट उतारी। नेहा ने पहली बार मेरी छाती को छुआ। उसके नाखून हल्के से खरोंच रहे थे। मैंने उसे उठाकर बेडरूम ले गया। लाइट्स डिम रखीं। वो बेड पर लेट गई। मैं उसके ऊपर आया। किस करते हुए मैं उसकी गर्दन, छाती, पेट सब चूम रहा था। जब मैं उसकी पैंटी उतारने लगा तो वो मेरी कलाई पकड़ ली।

“पहली बार है… प्लीज प्यार से,” उसकी आंखों में शर्म और चाहत दोनों थे।

मैंने उसे आश्वासन देते हुए कहा, “मैं तुम्हें कभी दर्द नहीं दूंगा, नेहा। तुम जब कहोगी, रुक जाऊंगा।”

उसने मुस्कुराकर सिर हिला दिया। मैंने उसकी पैंटी उतार दी। उसकी चिकनी, गुलाबी चूत बिल्कुल साफ और छोटी थी। हल्की सी नमी चमक रही थी। मैंने अपनी उंगलियां धीरे से उसकी जांघों के बीच फेरनी शुरू की। वो सिकुड़ गई, लेकिन फिर धीरे-धीरे फैल गई। मेरी उंगली उसकी चूत की ऊपरी हिस्से पर घूम रही थी। क्लिटोरिस को छूते ही वो झटके से कांप उठी।

“उम्म्म… क्या हो रहा है… अच्छा लग रहा है,” वो आंखें बंद करके बोली।

मैंने धीरे से उंगली अंदर डाली। वो बहुत टाइट थी। अंदर गर्मी और नमी थी। मैं धीरे-धीरे उंगली अंदर-बाहर करने लगा। नेहा की कमर उठने लगी। उसके मुंह से हल्की-हल्की सिसकारियां निकल रही थीं। मैंने अपना मुंह भी नीचे ले जाकर उसकी चूत को चाटना शुरू किया। जब मेरी जीभ उसके क्लिट पर घूमी तो वो जोर से चीख पड़ी।

“राहुल! ये… अह्ह्ह… बहुत अच्छा… मत रुको…”

मैंने उसे लाइटर और लाइटर चाटा। उसके जूस का स्वाद मीठा था। कुछ ही मिनटों में उसका पहला ऑर्गेज्म आ गया। वो पूरी तरह कांप उठी, दोनों हाथों से मेरा सिर दबाए हुए। उसके बाद वो थोड़ी देर शांत पड़ी रही।

अब मेरी बारी थी। मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड पूरा तना हुआ, मोटा और लंबा खड़ा था। नेहा ने पहली बार उसे देखा तो उसकी आंखें फैल गईं।

“ये… अंदर जाएगा?” उसने शरमाते हुए पूछा।

“धीरे-धीरे जाएगा। तुम रिलैक्स रहो,” मैंने उसे चूमते हुए कहा।

मैंने उसके पैर फैलाए। लंड का सिर उसके चूत के मुंह पर रखा और हल्का दबाव दिया। वो थोड़ी सी सिकुड़ी, लेकिन फिर खुद को खोल दिया। मैं बहुत धीरे से अंदर घुसने लगा। उसकी चूत बहुत टाइट थी, लेकिन गीली होने की वजह से आसानी से जा रहा था।

“आह… भरा हुआ लग रहा है… राहुल…” वो कराह रही थी।

मैं पूरी तरह अंदर चला गया। कुछ सेकंड रुका रहा ताकि वो आदत डाल ले। फिर धीरे-धीरे पिस्टन मूवमेंट शुरू किया। नेहा के हाथ मेरी पीठ पर थे। उसके नाखून हल्के से गड़ रहे थे, लेकिन दर्द नहीं, बस प्यार।

हमारी रफ्तार बढ़ती गई। मैं उसके स्तनों को चूसता, होंठ चूसता और नीचे धक्के मारता। नेहा अब पूरी तरह खुल गई थी। “जोर से… और जोर से राहुल… मुझे अच्छा लग रहा है,” वो बार-बार कह रही थी।

मैंने उसे डॉगी स्टाइल में किया। उसकी गोल-गोल गांड देखकर मेरा लंड और सख्त हो गया। मैंने पीछे से पकड़कर जोर-जोर से ठोका। उसके बाल पकड़े और हल्का खींचा। वो झुककर और पीछे उठाकर मिल रही थी।

“मैं फिर से… आ रही हूं…” वो चीखी।

दूसरा ऑर्गेज्म उसका और भी तेज था। उसकी चूत मेरे लंड को दबाने लगी। मैं भी किनारे पर था। मैंने पूछा, “अंदर छोड़ूं?”

“हां… मुझे महसूस करना है,” उसने सांसें चलाते हुए कहा।

मैंने जोर-जोर से धक्के मारे और आखिर में पूरा माल उसके अंदर उड़ेल दिया। गर्म-गर्म झटके लगे। हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए।

उसके बाद हम काफी देर तक चुपचाप लेटे रहे। मैं उसके बालों में उंगलियां फिराता रहा। वो मेरी छाती पर सिर रखे पड़ी थी।

“राहुल… ये सबसे खूबसूरत अनुभव था,” उसने धीरे से कहा।

“तुम्हारा पहला सेक्स याद रहेगा हमेशा,” मैंने उसे चूमते हुए कहा।

उस रात हम दो बार और प्यार किया। दूसरी बार वो ऊपर आई थी। उसकी जवान देह मेरे ऊपर उछल रही थी। उसके स्तन हिल रहे थे। मैंने नीचे से उसके कूल्हों को पकड़कर सहारा दिया। वो खुद रिदम बना रही थी। उसकी चूत अब पहले से ज्यादा आराम से मेरा लंड निगल रही थी।

सुबह जब वो उठी तो उसका चेहरा चमक रहा था। हमने साथ नहाया। शावर के नीचे फिर से किसिंग हुई। मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदा। पानी हमारे शरीरों पर बह रहा था। उसकी चीखें बारिश की आवाज में घुल गईं।

उस दिन के बाद नेहा और मैं एक-दूसरे के बहुत करीब हो गए। वो अब मेरे फ्लैट में खुलकर आती। कभी-कभी रात को भी रुक जाती। हम दोनों ने कई नई पोजीशन्स ट्राई कीं। कभी ६९, कभी स्पूनिंग। वो अब सेक्स के बारे में खुलकर बात करती। बताती कि उसे क्या पसंद है।

एक दिन उसने कहा, “राहुल, तुमने मुझे महिला बना दिया।”

मैंने उसे गले लगाते हुए कहा, “और तुमने मुझे सिखाया कि प्यार कैसे किया जाता है।”

हमारा रिलेशन सिर्फ सेक्स तक सीमित नहीं था। हम एक-दूसरे का ख्याल रखते, एक-दूसरे की मदद करते। पड़ोस वाले कुछ शक भी करते, लेकिन हम दोनों को कोई फर्क नहीं पड़ता था।

आज भी जब मैं उसकी याद करता हूं तो वो पहली रात याद आ जाती है। जब वो मेरे सामने पूरी तरह नंगी, शरमाती हुई, लेकिन पूरी तरह भरोसे के साथ खड़ी थी। उसकी जवान चूत, उसके गुलाबी निप्पल्स, उसकी गर्म सांसें… सब कुछ।

पड़ोस की जवान लड़की का पहला सेक्स न सिर्फ शारीरिक था, बल्कि भावनात्मक भी था। हम दोनों ने एक-दूसरे को पूरा किया। और आज भी जब कभी हम मिलते हैं, वो मुस्कुराकर कहती है, “आज फिर से?”

रश्मी की ब्रा-पेंटी उतार के जोरदार चुदाई

दोस्तों! मैं राजीव दिल्ली का लड़का हूँ। जिंदगी में कुछ पल ऐसे आ जाते हैं जो सब कुछ बदल देते हैं। वो पल मेरी जिंदगी को पहले से बिल्कुल अलग बना गए। आज मैं आपको अपनी उस अनुभव की पूरी कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जो मुझे दुनिया की सबसे गहरी और मीठी खुशी दे गई। ये सब शुरू हुआ हमारे मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के पहले दिन से।

क्लास शुरू होने से पहले मैं और मेरे हॉस्टल वाले दोस्त कैंपस घूमने निकले। पूरा कैंपस देखने के बाद हम मेन गेट के पास बैठ गए। नजरें उन लड़कियों पर घूम रही थीं जो कॉलेज आ रही थीं। हर कोई अपनी जगह अच्छी थी, लेकिन अचानक एक रिक्शा गेट पर रुका। उसमें से एक लड़की उतरी – नीली स्किन टाइट जींस और टाइट फिट लाल स्लीवलेस टी-शर्ट पहने। उसकी पीठ मेरी तरफ थी। लंबे खुल्ले बाल, कमर पतली, हिप्स गोल-गोल – फिगर करीब 34-32-35। रिक्शा वाले को पैसे देकर वो मुड़ी। जैसे बादलों भरे आसमान में अचानक पूरा चाँद निकल आए। चेहरा इतना प्यारा – भूरी आँखें, तेज नाक, रसीले होंठ। गोरा रंग, गुलाब की कली जैसी नाजुक सुंदरता। मैं उसे घूरता रह गया। उसकी छातियाँ गोल और भरी-भरी, टी-शर्ट और जींस में ब्रा और पैंटी की लाइन साफ दिख रही थी। जब वो चलने लगी तो उसके नितंबों का लहराता हुआ हिलना… वाह! मेरी जाँघों के बीच का सामान तुरंत खड़ा हो गया और सलाम ठोकने लगा। वो भीड़ में गायब हो गई, लेकिन मेरा दिल उसके उन गोल नितंबों के बीच खो गया।

लेक्चर की घंटी बजी। हम क्लास में घुसे। देखा तो वही लड़की हमारी क्लास में बैठी थी। नाम था रश्मि। मुंबई से आई थी। हमारे नाम के पहले अक्षर एक जैसे थे, इसलिए हम एक ही असाइनमेंट ग्रुप में थे। ग्रुप में दो और लड़कियाँ और एक लड़का था। कुछ ही दिनों में हम पाँचों अच्छे दोस्त बन गए। साथ में शहर घूमते, मस्ती करते। रश्मि बहुत एक्स्ट्रोवर्ट थी – हमेशा कॉलेज के किसी न किसी फंक्शन में व्यस्त। पढ़ाई में भी तेज थी, इसलिए ग्रुप की लीडर बन गई। उसके साथ समय बिताना मुझे हमेशा गर्म और एनर्जेटिक महसूस होता। उसका बदन मुझे हमेशा खींचता। मौका मिलते ही मैं उसके ब्लाउज में झाँकता, “अनजाने” में उसकी छातियों या पीठ को छू लेता। वो कभी गुस्सा नहीं करती। बस प्यारी सी डिंपल मुस्कान दे देती।

अन्युअल गेट टूगेदर से एक दिन पहले की बात है। रश्मि दौड़ती हुई मेरे पास आई और बोली, “राजीव, ग्रुप असाइनमेंट घर भूल आई हूँ। आज ही सबमिट करना है।” वो अपने फ्लैट में रहती थी, कॉलेज के पास ही, अपनी फ्रेंड साक्षी के साथ। मैंने कहा, “साक्षी को फोन करके मँगवा लो।” उसने बताया कि साक्षी घर चली गई है फैमिली फंक्शन के लिए, और वो खुद फैशन शो ऑर्गनाइज करने में बिजी है। आखिर मैं मान गया। उसने चाबी दे दी। मैं बाइक लेकर उसके फ्लैट पहुँच गया। पहले भी ग्रुप वर्क के लिए आया था, इसलिए फ्लैट की सेटिंग पता थी – टू बीएचके, हल्के रंग की दीवारें, आरामदायक।

उसके रूम में घुसा। असाइनमेंट टेबल पर रखा था। उठाया और जाने लगा, तभी बेड के नीचे बाल्टी नजर आई। उसमें कुछ कपड़े थे। निकाला तो – काला नाइट सूट, सफेद ब्रा और गुलाबी पैंटी। शायद कल की। मेरा दिल जोर से धड़का। मुझे लड़कियों के अंडरगारमेंट्स का हमेशा से क्रेज रहा है। ब्रा उठाई, चूमने लगा। पसीने की हल्की सी महक। फिर पैंटी उठाई – उसकी गंध इतनी कामुक कि मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया। अचानक डोर बेल बजी। मैंने सब बाल्टी में रख दिया, वैसा ही छोड़ दिया और दरवाजा खोलने गया।

रश्मि खड़ी थी। “क्या हुआ? क्यों वापस आ गई?” पूछा मैंने। बोली, “लेक्चर कैंसल हो गया। और फैशन शो का रिहर्सल भी ट्रांसफॉर्मर खराब होने से रुक गया।” हम लिविंग रूम के सोफे पर बैठ गए। वो थकी हुई लग रही थी। आँखें बंद करके आराम करने लगी। उसकी आर्मपिट्स पसीने से पूरी भीगी हुई थीं। टी-शर्ट से ब्रा का एक स्ट्रैप बाहर झाँक रहा था। मैं उसकी छातियों को घूर रहा था। बीच में छोटे-छोटे उभार साफ दिख रहे थे।

थोड़ी देर बाद उसने आँखें खोलीं और मुस्कुराते हुए बोली, “राजीव, तू बैठ यहाँ। मैं फ्रेश हो जाती हूँ और फ्रिज से कुछ फ्रूट्स ले आती हूँ।” वो बेडरूम में चली गई। मैं टीवी ऑन कर दिया। रिमोट खराब चल रहा था। उसी बीच बाथरूम का दरवाजा बंद हुआ और हल्की सी “प्श्श्श्श्श” की आवाज आने लगी। वो पेशाब कर रही थी। वो आवाज सुनकर मेरा लंड और भी तन गया। थोड़ी देर बाद वो बाहर आई और बाथरूम में नहाने चली गई। कुछ मिनट बाद लिविंग रूम में आई तो देखा – गहरे नीले नाइट सूट में, बाल खुल्ले, कंधों पर पानी की बूँदें चमक रही थीं। हाथ में फ्रूट्स की प्लेट। पास बैठ गई और मुझे ऑफर किया।

मैं फ्रूट्स खाते-खाते चैनल बदलने लगा। अचानक रिमोट पूरी तरह बंद। उसी चैनल पर एक बहुत हॉट रोमांटिक सीन चल रहा था – हीरोइन और हीरो गहरे प्यार में, एक-दूसरे को छू रहे थे, किस कर रहे थे, कपड़े उतर रहे थे। मैं शर्म से चैनल बदलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन रिमोट काम नहीं कर रहा था। मैं उठा कि टीवी के पास जाकर बदलूँ। रश्मि ने मेरा हाथ पकड़ लिया और नरम स्वर में बोली, “अरे राजीव, इतना घबरा क्यों रहा है? हम एक ही उम्र के हैं… हमारी इच्छाएँ भी एक जैसी हैं। इसमें शर्माने वाली क्या बात है?” उसकी आवाज में इतनी हिम्मत थी कि मैं वापस बैठ गया। हम दोनों ने पूरा सीन देखा। मेरा लंड पैंट में तंबू बना चुका था। रश्मि भी उत्तेजित हो गई थी – होंठ थोड़े खुले, पैर की उँगलियाँ बार-बार हिल रही थीं।

मैंने हिम्मत जुटाई और पूछ लिया, “रश्मि… तूने पहले कभी… मतलब… किया है?” वो शरमाते हुए बोली, “क्या? समझी नहीं।” मैंने साफ कहा, “किसी से फक हुआ है पहले?” वो आँखें नीची करके बोली, “नहीं… कभी नहीं।” मैंने आगे पूछा, “इंटरकोर्स के बारे में कितना जानती है?” उसने कहा, “बुक्स पढ़ी हैं… सेक्स और प्रेग्नेंसी वाली।” मैंने कहा, “लेकिन प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस?” वो बोली, “नहीं राजीव। शादी से पहले कैसे? और एड्स का डर भी है।” मैं हैरान था कि कॉलेज में इतनी मॉडर्न लगने वाली लड़की के मन में इतने गलत खयाल हैं।

मैंने धीरे से समझाया, “देख रश्मि, सिर्फ किताबी ज्ञान से काम नहीं चलेगा। प्रैक्टिकल पता न हो तो शादी में पार्टनर को खुश नहीं रख पाएगी। अगर सावधानी बरती जाए – कंडोम वगैरह – तो कोई खतरा भी नहीं।” वो सोचने लगी। फिर बोली, “तू सही कह रहा है… लेकिन कौन देगा मुझे ये प्रैक्टिकल नॉलेज? और अगर किसी को पता चल गया तो?” मैंने उसका हाथ पकड़ा, आँखों में देखा और बोली, “मैं दूँगा… अगर तुझे मुझ पर भरोसा है तो एक मौका दे।” वो मुस्कुराई, थोड़ा लाल हो गई और धीरे से बोली, “ओके…”

मैंने उसे अपनी बाहों में खींच लिया। उसने सिर मेरी छाती पर टिका दिया। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “रश्मि डार्लिंग, सबसे पहली बात – धीरे-धीरे, बिना जल्दबाजी के। तू यहीं बैठ। मैं कंडोम ले आता हूँ, फिर शुरू करते हैं।” वो सहमति में सिर हिला दी। मैं पास की मेडिकल शॉप से कंडोम और एक्स्ट्रा सेफ्टी के लिए टैबलेट्स ले आया।

लौटा तो रश्मि ने दरवाजा खोला। देखकर मैं हैरान रह गया – पीली साड़ी, स्लीवलेस ब्लाउज, माथे पर लाल बिंदी। इंडियन लुक में उसे पहले कभी नहीं देखा था। अंदर घुसा, दरवाजा लॉक किया, उसे जोर से अपनी बाहों में भर लिया और बोला, “आज स्वर्ग में रंभा भी तुझे देखकर जल रही होगी!” उसकी छातियाँ मेरी छाती से सटी हुई थीं। मैंने उसे लंबा, गहरा किस किया। वो साँस लेते हुए बोली, “हनी… मैं तेरी हूँ। जो करना है कर…”

मैंने उसे गोद में उठाया, बेडरूम ले गया। बेड पर लिटाया और उसके ऊपर लेट गया। कपड़ों के ऊपर से ही उसके हर हिस्से को किस करने लगा – पैरों की उँगलियों से शुरू करके घुटनों, जाँघों, कमर, पेट, छातियों, आर्मपिट्स, कंधों, गर्दन, गालों, होंठों और माथे तक। वो हल्के-हल्के कराहने लगी, “आह्ह्ह… राजीव…” उसका बदन गर्म हो रहा था, साँसें तेज। मैंने उसकी साड़ी खोल दी। अब वो पीली पेटीकोट और ब्लाउज में थी। ब्लाउज के हुक खोले, उतारा। अंदर ब्लैक नेटेड ब्रा। दोनों हाथों से ब्रा के ऊपर से ही छातियों को दबाने लगा। उसकी कराह बढ़ गई। फिर पेटीकोट का नादा खोला, नीचे सरका दिया। अब वो सिर्फ ब्लैक पैंटी में थी।

अब वो भी पूरी तरह शामिल हो गई। मेरी शर्ट उतारी, पैंट का हुक खोलकर नीचे सरका दिया। मैं अंडरवियर में, वो ब्रा-पैंटी में। मैंने ब्रा का हुक खोला। उसकी गुलाबी निप्पल्स वाली भरी-भरी छातियाँ बाहर आ गईं। मैंने उन्हें चूसना शुरू किया – जोर-जोर से, जीभ घुमाते हुए। वो मेरे बालों में उँगलियाँ फेर रही थी, दूसरा हाथ मेरे अंडरवियर में डालकर मेरे लंड को सहला रही थी। छातियाँ लाल और गर्म हो गईं।

फिर मैंने उसकी पैंटी नीचे सरका दी। उसकी साफ शेव्ड, प्यारी सी चूत सामने थी। वो शरमा कर दोनों हाथों से चेहरा छुपा लिया। मैंने हाथ हटाए, प्यार से चूम लिया। उँगलियों से धीरे-धीरे उसकी चूत को सहलाने लगा। कुछ ही देर में वो गीली हो गई। मैंने एक उँगली अंदर डाली। वो कराह उठी, “आह्ह्ह… राजीव… और गहरा…” अब वो पूरी तरह तैयार थी।

मैंने अपना अंडरवियर उतारा। मेरा लंड पूरा खड़ा। वो उसे देखकर मुस्कुराई, थोड़ा शरमाई, लेकिन डरी नहीं। मैंने कंडोम चढ़ाया। उसे पीठ के बल लिटाया, दोनों जाँघें उठाईं, घुटनों के बल बैठ गया। उसने खुद अपना हाथ बढ़ाया, मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत के मुहाने पर रख दिया। मैंने धीरे से, लेकिन मजबूती से धक्का दिया। वो आह भरकर बोली, “आह्ह्ह… राजीव… अंदर आ गया…” कोई दर्द नहीं, सिर्फ गर्मी और खुशी की लहर। मैं रुक गया, उसे समय दिया। फिर धीरे-धीरे स्टार्ट किया। वो भी कमर हिलाने लगी।

“हाँ… और तेज… राजीव… बहुत अच्छा लग रहा है…” उसकी छातियाँ लहरा रही थीं। मैंने रफ्तार बढ़ाई। २०-२५ स्टोक्स के बाद मैं झड़ गया। कंडोम में पूरा भर गया। मैं उसके ऊपर ही लेट गया। कुछ देर बाद निकाला, कंडोम फेंका और उसके पास लेट गया। वो मुझे जकड़कर बोली, “राजीव… आज तूने मुझे जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी दे दी। थैंक यू डार्लिंग… तू मेरा सेक्स गुरु है!” मैंने उसके होंठ चूमे और बोला, “स्वीटहार्ट, तेरे लिए कुछ भी!”

उसके बाद हम दोनों थककर सो गए।

इस घटना के बाद रश्मि कॉलेज में मुझे “गुरु” कहकर पुकारने लगी। कोई पूछता तो हम एक-दूसरे को देखकर शरारती मुस्कान देते। उसके बाद हमने उसके फ्लैट में कई पोजीशन्स में बार-बार किया – कभी मिशनरी, कभी डॉगी, कभी वो ऊपर। कभी कॉलेज की लेडीज बाथरूम में, कभी बस में छुप-छुपकर, कभी जंगल में ट्रिप के दौरान। जब रश्मि नहीं होती तो उसकी रूममेट साक्षी के साथ भी मजा लेता। जम्मू जाता तो पड़ोस की आंटी मनीषा और स्कूल फ्रेंड गौरी को भी नहीं छोड़ता।

भाभी की चिकनी चूत चाटी

दोस्तों में राहुल और में दिल्ली का रहने वाला हूँ और मेरी हाईट 5.8 इंच है और मेरे लंड का साईज़ 7 इंच है और अब आप सभी लोगों का ज्यादा समय खराब ना करते हुए सीधा अपनी आज की कहानी पर आता हूँ। सभी भाभीयों से अनुरोध है कि अगर वो चाहे तो अपनी कामुक चूत में उंगली डाल सकती है।

दोस्तों यह बात आज से एक महीने पहले की है.. में वेस्ट दिल्ली में अकेला रहता हूँ और जैसा कि मैंने आप सभी को पहले बताया था कि में एक फार्मसिस्ट हूँ..
लेकिन सितम्बर की शुरुआत में दिल्ली में डेंगू के केस कुछ ज्यादा आने लगे थे.. तो हमारे सामने एक भाभी जो अपने पति के साथ रहती है और भाभी थोड़ी मोटी है.. लेकिन मुझे मोटी औरते बहुत पसंद है। उनके फिगर का साईज़ 36-30-36 है। दोस्तों मेरी भाभी से कभी ज्यादा बात नहीं हुई.. लेकिन हाँ जब में जिम से आकर शर्ट उतारकर अपनी बालकनी में बैठकर थोड़ा आराम करता हूँ.. तो भाभी मुझे अक्सर स्माईल देती और कई बार ऐसे भी बात हो जाती है कि काम कैसा चल रहा है। उनके पति मार्केटिंग में है और उन लोगों की शादी को शायद 4 साल हो गये थे.. लेकिन उनकी कोई औलाद नहीं है। फिर एक दिन रात के कुछ 11 बजे थे.. में एक इंग्लीश फिल्म लगाकर देख रहा था और तभी मेरे घर की बेल बजी। अरे दोस्तों में आप सभी को अपनी मस्त सेक्सी भाभी का नाम तो बताना ही भूल गया.. उनका नाम स्वाती है।

भाभी : हैल्लो राहुल.. क्या मैंने तुम्हे परेशान तो नहीं किया?

में : भाभी नहीं.. ऐसा कुछ नहीं है.. लेकिन आप इतनी रात को कैसे? क्यों सब ठीक तो है ना?

भाभी : नहीं राहुल तुम्हारे भैया को बहुत तेज़ बुखार है और अब मुझे समझ नहीं आ रहा है कि में क्या करूं.. प्लीज तुम आकर देखो ना।

में : ठीक है भाभी.. में अभी आता हूँ।

फिर मैंने जल्दी से शर्ट पहनी और भाभी के साथ चल दिया.. सीड़ी से उतरते हुए भाभी की गांड क्या मस्त लग रही थी.. मेरा तो मन कर रहा था कि अभी इसे अपने कमरे पर ले जाकर चोद दूँ। यह बात सोचकर मेरा लंड पजामे में ही एकदम तनकर खड़ा हो गया और में अपनी शर्ट के बटन बंद करते हुए जा रहा था। फिर भाभी अंधेरे की वजह से एकदम थोड़ा रुकी। मैंने ध्यान नहीं दिया और मेरा लंड एकदम सीधा उनकी गांड के ऊपर जाकर लगा और मैंने डर के मारे भाभी को सॉरी बोला। फिर उन्होंने मेरी तरफ देखकर बोला कि कोई बात नहीं.. वैसे गलती तो मेरी है.. क्योंकि में खुद ही एकदम से रुक गई थी और इतने में उनका घर आ गया। फिर मैंने भैया को देखा.. तो उन्हे बहुत तेज बुखार था और मेरी हॉस्पिटल में बहुत अच्छी जान पहचान थी.. इसलिए मैंने उनको एक बेड दिलवा दिया.. हॉस्पिटल में हमे एक बजे गए और उन्होंने हॉस्पिटल में अपने भाई को बुला लिया। उनके भाई ने बोला कि आप सुबह आ जाना और फिर में चला जाऊंगा.. उसके बाद में और स्वाती भाभी घर के लिए निकल लिए।

भाभी : धन्यवाद राहुल।

में : अरे भाभी इसमें धन्यवाद की क्या ज़रूरत है.. एक अच्छा पड़ोसी ही दूसरे पड़ोसी के काम आता है।

भाभी : ठीक है।

में : शायद भैया को डेंगू हो सकता है।

भाभी : हाँ.. मुझे भी ऐसा ही लग रहा है।

में : भैया का ब्लड ग्रूप क्या है?

भाभी : बी+

में : चलो मेरा भी यही है.. अगर ब्लड चाहिए होगा.. तो में दे दूँगा और इतने में हमारा घर आ गया।

भाभी : यार राहुल क्या तुम मेरा एक काम करोगे?

में : जी हाँ भाभी बोलिए।

भाभी : यार मुझे अकेले में बहुत डर लगेगा.. क्या आप आज की रात मेरे यहाँ पर सो सकते हो?

में : (मेरा लंड तो यह बात सुनकर ही खड़ा हो गया) मैंने बोला कि लेकिन भाभी कोई हमे देख लेगा तो?

भाभी : यार आज हमारी मंजिल पर कोई भी नहीं है।

में : ठीक है भाभी अगर आप कहती है.. तो में एक रात सो जाता हूँ।

भाभी : धन्यवाद राहुल बस आज रात की बात है.. कल से में अपनी छोटी बहन को बुला लूँगी।

में : हाँ ठीक है.. भाभी।

फिर हमने गाड़ी को एक साईड लगाई और हम उनके घर में गये.. भाभी ने अपने घर को बहुत अच्छा सजाया हुआ था। भाभी अपने बेडरूम में जाकर कपड़े चेंज करने लगी और में टी.वी. चालू करके देखने लगा और जब भाभी अपनी एक मस्त मेक्सी पहनकर बाहर आई.. तो वो क्या मस्त माल लग रही थी? उनकी जांघो तक काले कलर की मेक्सी में उनके 36 इंच के बूब्स बहुत हॉट, सेक्सी लग रहे थे और मेरा तो मन कर रहा था कि इन्हे आज चूसकर सारा रस पी जाऊँ। फिर शायद भाभी ने मुझे उनके बूब्स को देखते हुए देख लिया और वो थोड़ा अजीब सा महसूस करने लगी।

भाभी : तुमने अपनी गर्लफ्रेंड को तो नहीं बताया कि आज तुम्हे यहाँ पर सोना है?

में : नहीं भाभी उसे पता चलेगा.. तो वो पता नहीं क्या सोचेगी?

भाभी : वो क्या सोचेगी?

में : यही कि में एक किसी खूबसूरत लड़की के साथ आज पूरी रात रहूँगा।

भाभी : ( हंसने लगी ) क्या में सुंदर.. लेकिन में तुम्हे कहाँ से सुंदर लगती हूँ.. चलो यार अब मज़ाक मत करो?

में : अरे भाभी जो अभी आप पहनकर हो.. इन कपड़ो को पहनकर आप कभी भैया को दिखना। फिर वो आपको बताएँगे कि आप कितनी सुंदर हो?

भाभी : हाँ हाँ ठीक है.. चलो अब तुम ही बता दो कि में कितनी सुंदर लग रही हूँ।

में : एकदम मस्त माल.. मेरा तो मन कर रहा है कि..

भाभी : शैतान तुम बहुत बड़े हो गये हो.. मुझे अब लगता है कि आंटी से बात करके बोलना पड़ेगा कि इस लड़के की शादी करवा दो।

में : हाँ बोल दो और अपना हुलिया भी बता देना और उन्हे कह देना कि उसे ऐसी लड़की पसंद है।

भाभी : अच्छा.. तो तुम्हे मुझमे क्या अच्छा लगता है?

में : नहीं आप बुरा मान जाओगे।

भाभी : अरे नहीं.. बताओ ना।

में : नहीं आप बुरा मान जाओगे।

भाभी : अरे नहीं तुम्हारी कसम.. बताओ ना।

में : जब आप मेरी सीड़ियों से उतर रही थी और मेरा लंड आपसे जा लगा था.. मुझे आपकी वो बहुत मस्त लगती है। भाभी थोड़ा शरमाते हुए अच्छा जी.. अब तो सच में बहुत बड़ा हो गया है और मज़ाक मज़ाक में उन्होंने मेरी जांघ पर हाथ मारा। मेरा लंड तो उन्हे देखकर पहले से ही खड़ा था और फिर ग़लती से उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया। फिर उनके हाथ का स्पर्श पाकर तो मेरा लंड और भी ज्यादा तनकर खड़ा हो गया और मैंने उनकी आखों में देखा.. उन्हे भी मेरा लंड पकड़कर बहुत अच्छा लग रहा था और उनकी आखों से साफ साफ दिख रहा था कि उन्हे अब मुझसे क्या चाहिए?

भाभी : शरमाते हुए.. चलो में अब सोने जा रही हूँ।

में : ठीक है भाभी.. शुभ रात्रि।

दोस्तों मेरा तो बहुत बुरा हाल हो रहा था और में सोच रहा था कि में अब शुरू कहाँ से करूं और इतने में स्वाती भाभी की आवाज़ आई कि राहुल मुझे डर लग रहा है.. तुम भी मेरे ही रूम में सो जाओ। फिर मैंने कहा कि ठीक है और में अंदर बेडरूम में गया.. तो मैंने देखा कि भाभी कंबल ओढ़कर बेड पर लेटी हुई थी। फिर मैंने बोला कि भाभी आप ऊपर लेट जाओ.. में सोफे पर सो जाऊंगा।

भाभी : ठीक है।

फिर मुझे उनके इतने पास होने पर भी नींद नहीं आ रही थी और करीब एक घंटे के बाद भाभी उठकर वॉशरूम चली गयी और अब मुझे नींद आने ही वाली थी कि इतने में एक बहुत ज़ोर की आवाज़ आई और मेरी नींद खुली। फिर मैंने ध्यान से सुना.. वो स्वाती भाभी की आवाज़ थी.. राहुल। में झट से उठा और जैसे ही वॉशरूम में गया.. तो भाभी वहां पर नीचे गिरी हुई थी। फिर मैंने उन्हे सहारा देकर उठाया और उन्हे अपनी गोद में उठा लिया। दोस्तों वैसे तो वो मोटी है.. लेकिन में हर रोज जिम जाता हूँ.. तो मैंने उन्हे बहुत आसानी से उठा लिया। मैंने उन्हे गांड पर हाथ लगाकर उठाया.. तो मुझे उनकी पेंटी का एहसास मेरे हाथों पर हुआ और मेरा शैतान लंड फिर खड़ा हो गया और इनके पेट पर छूने लगा। फिर मैंने उन्हे बेड पर लाकर लेटाया और उनसे पूछा कि क्या आपको कहीं चोट तो नहीं लगी? उन्होंने कहा कि जो चीज़ तुम्हे सबसे ज्यादा पसंद है। फिर में समझ गया कि इनकी गांड पर चोट लगी है और फिर मैंने भाभी से बोला कि लाओ में तेल से मालिश कर दूँ.. तो उन्होंने इशारा किया कि तेल वहाँ पर रखा हुआ है। फिर मैंने उन्हे मुहं के बल सर नीचे रखकर लेटने को कहा। उन्हे इतना दर्द हो रहा था कि उन्हे होश ही नहीं था कि जब वो मुहं के बल लेटी.. तो उनकी मेक्सी ऊपर हो गई और मुझे उनकी गांड के दर्शन हो गये.. उन्होंने लाल कलर की पेंटी पहनी हुई थी।

फिर मेरा लंड अब अपने पूरे आकार में आ गया था। फिर में उनकी गांड की मालिश करने लगा और में अपने होश खोने लगा और मैंने उनकी गांड पर एक किस कर दिया और शायद उन्हे पता चल गया था कि में क्या कर रहा हूँ और अब उनका दर्द भी ख़त्म होने लगा था। फिर मैंने उनसे बोला कि स्वाती भाभी आपकी पेंटी थोड़ा बीच में आ रही है.. तो आप इसे उतार दो। फिर उन्होंने कहा कि तुम ही उतार दो और फिर मैंने उनकी पेंटी उतारी। वाहह क्या मस्त गांड थी यार उनकी.. मेरा तो मन कर रहा था कि इसे अभी कुतिया बनाऊँ और इसकी चूत में अपना लंड घुसा दूँ। फिर मैंने अपने कपड़े फटाफट उतारे और अपने लंड को उनकी गांड पर फेरने लगा.. उन्हे भी बहुत मज़ा आ रहा था और वो पलट गयी.. लेकिन अभी भी उनकी आँखे बंद ही थी। फिर उन्होंने अपनी चूत पर अपना एक हाथ रखा और बोला कि इसमे भी दर्द है.. थोड़ा इस पर भी लगाओ ना। दोस्तों क्या चूत थी उनकी? एकदम 18 साल की लड़की तरह एकदम गुलाबी गुलाबी और छोटे छोटे बाल जैसे कि तीन दिन पहले ही शेव की हो। फिर मैंने उनकी चूत के ऊपर हाथ फेरा और स्वाती भाभी मोन करने लगी.. आआह्ह्ह्ह उह्ह्ह माँ। फिर में अब उन्हे उंगली से चोदने लगा और भाभी अपने हाथ से चादर को कसकर पकड़कर लेटी हुई थी और उनकी आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी.. आईईईईईईईईईइ ओउुुह्ह्ह्हहुउउ और अब में और भाभी 69 पोज़िशन में आ गए और में उनकी चूत चाटने लगा। फिर वो एकदम चकित हो गयी और उछल पड़ी.. शायद भैया ने कभी उनकी चूत नहीं चाटी थी और भाभी के मुहं से एकदम से चीख निकल पड़ी.. राहूल यह क्या कर रहे हो? अह्ह्ह्ह तुम बहुत अच्छे हो.. अह्ह्ह राहुल और ज़ोर से चाटो मेरी चूत को खा जाओ इसे आआह्ह्ह्हह और इतना बोलकर उन्होंने मेरा लंड अपने मुहं में ले लिया और वो बोली कि..

भाभी : कितना बड़ा है तुम्हारा.. राहुल प्लीज इसे मेरी चूत में डाल दो.. अह्ह्ह्ह उह्ह्ह।

में : मेरी जान अभी चूत तो चाटने दो.. मुझे चूत चाटना बहुत पसंद है।

फिर मैंने अपनी जीभ स्वाती की चूत में डाली और उनके चेहरे से ऐसा लग रहा था कि मानो वो जन्नत में है और फिर मैंने भाभी से पूछा कि भाभी कंडोम है क्या? तो उन्होंने बोला कि अलमारी में से ज़ाकर ले आओ। फिर में उठा और कंडोम ले लाया और मैंने भाभी से कहा कि आप मुझे पहना दो। फिर उन्होंने बहुत प्यार से मेरा लंड चूसा और उस पर कंडोम चड़ाया। उस रात मैंने भाभी की दो बार जमकर चुदाई की और उनके कहने पर एक बार गांड भी मारी ।।

धन्यवाद …

वर्जिन कॉलेज गर्ल की पहली चुदाई बस में

रिया की जिंदगी में वो रात कभी नहीं भूली। वो एक साधारण सी कॉलेज गर्ल थी – उम्र सिर्फ़ उन्नीस साल, दिल्ली यूनिवर्सिटी में पहला साल। गोरी, लंबे काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें और वो फिगर जो हर लड़के का ध्यान खींच लेता था। लेकिन रिया अब तक वर्जिन थी। उसने कभी किसी लड़के को इतना करीब नहीं आने दिया था। आज वो घर जा रही थी – लंबी बस जर्नी, रात की बस, लखनऊ से दिल्ली। टिकट कन्फर्म था, लेकिन सीट मिली थी आखिरी वाली बर्थ में।

बस स्टैंड पर भीड़ थी। रिया ने अपनी छोटी सी बैग संभाली, सफ़ेद टॉप और नीली जीन्स पहनी थी। टॉप थोड़ा टाइट था, जिससे उसकी नई-नई विकसित ब्रेस्ट्स का आकार साफ़ झलक रहा था। वो बस में चढ़ी तो देखा कि उसकी सीट पर पहले से एक लड़का बैठा था। लंबा, फेयर, मसल्स वाली बॉडी, उम्र करीब पच्चीस। उसका नाम था आर्यन। वो मुस्कुराया और बोला, “मैडम, आपकी सीट है ना? मैं शिफ़्ट हो जाता हूँ।”

रिया ने शरमाते हुए सिर हिलाया। “नहीं, कोई बात नहीं। बस में जगह तो है।” दोनों एक ही बर्थ पर बैठ गए। रात के दस बज चुके थे। बस स्टार्ट हुई। लाइट्स धीरे-धीरे कम हो गईं। बाहर अंधेरा। अंदर सिर्फ़ हल्की नीली लाइट जल रही थी। आर्यन ने बात शुरू की – “कॉलेज में पढ़ती हो? लगती हो स्टूडेंट।”

रिया हँसी। “हाँ, दिल्ली यूनिवर्सिटी। फर्स्ट ईयर। घर जा रही हूँ।” बातें बढ़ती गईं। आर्यन हंसमुख था, पढ़ा-लिखा, सॉफ्ट स्पोकन। रिया को उसकी आवाज़ अच्छी लगी। धीरे-धीरे वो दोनों करीब आ गए। बस हिल रही थी, कभी-कभी झटके लगते। रिया का कंधा आर्यन के कंधे से टकराता। उसने महसूस किया कि आर्यन का शरीर गर्म है।

रिया ने अपनी जाँघें थोड़ी सींच लीं। लेकिन बस की हिचकिचाहट में उसकी जाँघ आर्यन की जाँघ से रगड़ खा गई। दोनों ने एक-दूसरे को देखा। आर्यन की आँखों में कुछ अलग चमक थी। रिया ने महसूस किया कि उसकी साँसें तेज़ हो रही हैं। वो खुद को रोक नहीं पा रही थी। “ये क्या हो रहा है?” उसने मन में सोचा, लेकिन शरीर कुछ और ही कह रहा था।

आर्यन ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा। “ठंड लग रही है क्या?” रिया ने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुरा दी। आर्यन ने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगा। रिया की उँगलियाँ काँप रही थीं, लेकिन उसने हाथ नहीं छुड़ाया। बस अब और अंधेरी हो गई थी। आस-पास के पैसेंजर सो चुके थे। कंडक्टर ने भी लाइट ऑफ़ कर दी थी।

आर्यन ने रिया के कान के पास फुसफुसाया, “तुम बहुत प्यारी हो।” रिया का चेहरा लाल हो गया। वो शरमा रही थी, लेकिन अंदर से एक अजीब सी गर्मी फैल रही थी। उसने आर्यन की तरफ़ देखा। आर्यन ने धीरे से उसकी गर्दन पर एक हल्का सा किस किया। रिया ने आँखें बंद कर लीं। वो पहली बार किसी लड़के के होठों को अपनी त्वचा पर महसूस कर रही थी। सनसनी पूरे शरीर में दौड़ गई।

“मुझे… अच्छा लग रहा है,” रिया ने धीमी आवाज़ में कहा। उसकी आवाज़ में सहमती का एहसास था। आर्यन ने और करीब आकर उसके होंठों को चूम लिया। रिया ने भी जवाब दिया। उनके होंठ मिले, जीभें आपस में खेलने लगीं। रिया को लगा जैसे बिजली दौड़ गई हो। उसकी ब्रेस्ट्स आर्यन के सीने से दब रही थीं। आर्यन ने हाथ नीचे सरकाया और रिया की कमर को सहलाने लगा।

रिया ने खुद को रोकने की कोशिश की, लेकिन शरीर नहीं मान रहा था। वो आर्यन के गले में बाँहें डालकर और करीब आ गई। “आर्यन… मैं… कभी नहीं किया,” उसने शरमाते हुए कहा। आर्यन ने उसकी आँखों में देखा और मुस्कुराया, “मैं धीरे करूँगा। तुम्हें अच्छा लगेगा, भरोसा रखो।” रिया ने सिर हिला दिया। वो तैयार थी। उसका मन और शरीर दोनों एक साथ कह रहे थे – हाँ

आर्यन ने रिया का टॉप ऊपर किया। उसकी गोरी ब्रेस्ट्स बाहर आ गईं। ब्रा भी हटा दी। रिया की निप्पल्स पहले से ही खड़ी थीं। आर्यन ने एक निप्पल को मुँह में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। रिया की साँसें भारी हो गईं। “आह्ह…” वो धीमी सी कराह उठी। आर्यन दूसरी ब्रेस्ट को हाथ से दबा रहा था, उँगलियाँ निप्पल को घुमा रही थीं। रिया को लग रहा था जैसे पूरा शरीर पिघल रहा हो।

उसने आर्यन का शर्ट खोल दिया। उसकी छाती चौड़ी और मसल्ड थी। रिया ने हाथ फेरा। आर्यन का शरीर गर्म और सख्त था। आर्यन ने अब रिया की जीन्स का बटन खोला। धीरे-धीरे जीन्स नीचे सरकाई। रिया ने खुद ही मदद की। उसकी पैंटी भीगी हुई थी। आर्यन ने पैंटी को भी उतार दिया। अब रिया पूरी तरह नंगी थी – बस की बर्थ पर, अंधेरे में, आर्यन के सामने।

आर्यन ने उसकी जाँघों को फैलाया। रिया की चूत बिल्कुल साफ़ और गुलाबी थी। वो पहली बार किसी को इतना करीब देख रही थी। आर्यन ने झुककर उसकी चूत को चूम लिया। रिया चौंक गई, लेकिन फिर आनंद से कराह उठी। “उम्म्म… आर्यन… क्या कर रहे हो?” आर्यन ने जीभ से उसकी क्लिटोरिस को चाटा। रिया की कमर उठ गई। वो आर्यन के बालों को पकड़कर दबा रही थी।

आर्यन की जीभ अंदर-बाहर हो रही थी। रिया को ऐसा लग रहा था जैसे कोई जादू हो गया हो। उसकी चूत से रस निकल रहा था। आर्यन ने उँगली भी डाली – एक उँगली, फिर दो। धीरे-धीरे अंदर-बाहर। रिया की साँसें फूल रही थीं। “हाँ… और… अच्छा लग रहा है,” वो फुसफुसाई।

अब आर्यन ने अपना पैंट उतारा। उसका लंड बाहर आ गया – मोटा, लंबा, सख्त। रिया ने उसे देखा और शरमा गई, लेकिन उसकी आँखों में भूख थी। आर्यन ने रिया को अपनी गोद में बिठाया। रिया ने खुद आर्यन के लंड को पकड़ा और अपनी चूत पर रखा। वो धीरे-धीरे बैठ गई।

लंड धीरे-धीरे अंदर घुसा। रिया को हल्का सा दबाव महसूस हुआ, लेकिन दर्द नहीं। सिर्फ़ भरपूर आनंद। “आह्ह… पूरा… अंदर ले लो,” रिया ने कहा। आर्यन ने उसे कसकर पकड़ लिया और नीचे से धक्के देने लगा। बस हिल रही थी, लेकिन उनकी हिचकिचाहट उस हिलने में छुप गई थी।

रिया अब पूरी तरह आर्यन पर सवार थी। वो ऊपर-नीचे हो रही थी। उसके स्तन उछल रहे थे। आर्यन उन्हें चूस रहा था। “तुम बहुत टाइट हो… बहुत अच्छा लग रहा है,” आर्यन ने कहा। रिया की चूत लंड को चूस रही थी। हर धक्के पर वो कराह रही थी – “हाँ… और तेज़… मुझे चोदो… पहली बार… इतना मज़ा…”

वे दोनों एक-दूसरे में खो गए थे। आर्यन ने पोजीशन बदली। अब रिया नीचे थी, आर्यन ऊपर। वो धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर कर रहा था। रिया की टाँगें उसके कमर पर लिपटी थीं। दोनों के शरीर पसीने से भीग गए थे। रिया को ऑर्गेज़्म आने वाला था। उसने आर्यन को कसकर जकड़ लिया।

“मैं… आ रही हूँ… आह्हह!” रिया चीख पड़ी, लेकिन आवाज़ दबा दी। उसकी चूत सिकुड़ गई, रस बह निकला। आर्यन भी तेज़ हो गया। “मैं भी… निकलने वाला हूँ।” रिया ने कहा, “अंदर… भर दो… मुझे चाहिए।” आर्यन ने आखिरी जोरदार धक्का मारा और अपना गर्म वीर्य रिया की चूत में भर दिया

दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। बस अभी भी चल रही थी। रिया ने आर्यन की छाती पर सिर रख दिया। “ये… सबसे खूबसूरत पहली बार थी,” उसने फुसफुसाया। आर्यन ने उसके बालों को सहलाया। “तुमने मुझे अपना बना लिया।”

रात भर वे ऐसे ही लिपटे रहे। कभी-कभी फिर से शुरू हो जाते। दूसरी बार आर्यन ने रिया को डॉगी स्टाइल में चोदा। रिया को पीछे से लंड लेना बहुत पसंद आया। उसकी चूत फिर से भीग गई। तीसरी बार वो साइड पोजीशन में थे। रिया की एक टाँग ऊपर, आर्यन लंड अंदर डाले हुए धीरे-धीरे हिल रहा था। हर बार रिया ज़ोर-ज़ोर से कराहती – “हाँ… चोदो मुझे… तुम्हारी वर्जिन चूत अब तुम्हारी है।”

सुबह होने वाली थी। बस दिल्ली पहुँचने वाली थी। रिया ने कपड़े पहने। उसकी चूत अभी भी गीली थी, लेकिन मज़े से भरी हुई। आर्यन ने उसे किस किया। “फिर मिलेंगे ना?” रिया मुस्कुराई, “ज़रूर। ये बस जर्नी कभी नहीं भूलूँगी।”

वो बस से उतरी। लेकिन उसकी चाल में एक नई मस्ती थी। वर्जिन कॉलेज गर्ल की पहली चुदाई बस में हो गई थी – और वो पूरी तरह संतुष्ट थी। उस रात ने उसे औरत बना दिया था।

(कहानी जारी… लेकिन ये मुख्य भाग था। अब और विस्तार से समझते हैं कि कैसे सब शुरू हुआ।)

रिया जब बस में चढ़ी थी तो वो थोड़ी थकी हुई थी। कॉलेज का लास्ट लेक्चर खत्म करके सीधे बस पकड़ी थी। लेकिन आर्यन के साथ बैठते ही उसका मन हल्का हो गया। वो दोनों घंटों तक बातें करते रहे – कॉलेज की, लाइफ़ की, सपनों की। आर्यन ने बताया कि वो सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, दिल्ली जा रहा है प्रोजेक्ट के लिए।

धीरे-धीरे बातें पर्सनल हो गईं। आर्यन ने पूछा, “बॉयफ्रेंड है क्या?” रिया ने शरमाकर सिर हिलाया, “नहीं… अभी तक नहीं मिला सही वाला।” आर्यन ने मुस्कुराकर कहा, “मुझे लगता है आज मिल गया।” रिया हँस पड़ी, लेकिन अंदर से गर्मी महसूस हुई।

जब लाइट्स ऑफ़ हुईं तो आर्यन ने अपना जैकेट रिया पर डाल दिया। “ठंड लग रही होगी।” लेकिन जैकेट के नीचे उसका हाथ रिया की कमर पर था। रिया ने विरोध नहीं किया। बल्कि वो खुद आर्यन के सीने से सट गई। उसकी साँसें आर्यन के गले पर पड़ रही थीं।

पहला किस बहुत सॉफ्ट था। फिर दूसरे, तीसरे। रिया को किसिंग का इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया। आर्यन के होंठ उसके होंठों को चूस रहे थे, जीभ अंदर घुसकर खेल रही थी। रिया की जीभ भी जवाब दे रही थी। दोनों की सलाइवा आपस में मिल रही थी।

जब आर्यन ने ब्रेस्ट्स चूसीं तो रिया की निप्पल्स इतनी सेंसिटिव हो गईं कि हर चूसने पर वो कराह उठती। “आह… धीरे… लेकिन और… मत रुको।” आर्यन ने उन्हें दबाया, चूसा, काटा भी हल्का-हल्का, लेकिन सिर्फ़ मज़े के लिए।

जब आर्यन रिया की चूत चाट रहा था तो रिया ने अपनी जाँघें फैला दीं। वो पहली बार किसी की जीभ को वहाँ महसूस कर रही थी। क्लिटोरिस पर जीभ घूमते ही वो झटके खा रही थी। “ये… स्वर्ग है… आर्यन… चूसो… और चूसो।” उसका रस आर्यन के मुँह में जा रहा था। आर्यन उसे पी रहा था।

पेनिट्रेशन का पहला मोमेंट सबसे यादगार था। रिया ने खुद लंड को अपनी चूत पर रगड़ा। गीली चूत ने लंड को आसानी से अंदर ले लिया। धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर चला गया। रिया को लगा जैसे वो भर गई हो। “पूरा… अंदर है… मुझे लग रहा है तुम मेरे अंदर हो।”

फिर शुरू हुई रिदम। बस की हिलने की रिदम के साथ उनकी चुदाई की रिदम। हर धक्के पर रिया की ब्रेस्ट उछलती, उसकी चूत लंड को कसकर पकड़ती। “तुम्हारा लंड… इतना मोटा… मेरी चूत फट रही है मज़े से।”

ऑर्गेज़्म के वक्त रिया ने आर्यन को कसकर जकड़ लिया। उसका पूरा शरीर काँप गया। चूत से रस का फव्वारा निकला। आर्यन का वीर्य अंदर उबल रहा था। दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे।

दूसरी राउंड में रिया ने खुद इनिशिएट किया। वो आर्यन के लंड को मुँह में लेना चाहती थी। आर्यन ने उसे सिखाया। रिया ने झुककर लंड चूसा – पहले टिप, फिर पूरा। “स्वाद अच्छा है… तुम्हारा।” आर्यन ने उसके बाल पकड़कर हल्का-हल्का मुँह में धक्का दिया। रिया गैग नहीं हुई, बल्कि और जोर से चूसने लगी।

फिर उन्होंने फिर से चुदाई शुरू की। इस बार लंबी और गहरी। रिया की चूत अब पूरी तरह आर्यन के लंड की आदी हो चुकी थी। वो बार-बार कह रही थी, “चोदो… मेरी वर्जिन चूत को अपना बना लो… हाँ… और तेज़।”

सुबह बस दिल्ली पहुँची। दोनों ने नंबर एक्सचेंज किए। रिया उतरते वक्त मुस्कुराई और मन में सोचा – “ये बस मेरी जिंदगी की सबसे हॉट जर्नी थी। वर्जिन कॉलेज गर्ल की पहली चुदाई बस में… और वो भी इतनी खूबसूरत।”

उसके बाद रिया कॉलेज गई, लेकिन अब वो पहले से ज़्यादा कॉन्फिडेंट थी। उसकी चाल में एक नया आकर्षण था। और आर्यन? वो भी उस रात को कभी नहीं भूला।

अनजान लड़की से चैटिंग से सीधे सेक्स – वर्जिन रिया की टाइट चूत की चुदाई

रात के डेढ़ बजे एक रैंडम मैसेज ने कैसे दो अजनबियों को होटल के कमरे तक पहुंचा दिया? चंडीगढ़ में नौजवान कार्तिक और लुधियाना की हॉट रिया की पहली मुलाकात, पहली हग, पहला किस और पहली जोरदार चुदाई की पूरी सच्ची-सी कहानी। वर्जिन लड़की की टाइट चूत, चूसे हुए गुलाबी निप्पल्स, सिसकारियां और पांच घंटे की मस्ती – सब कुछ विस्तार से।

हाय दोस्तों, मैं कार्तिक, 22 साल का हूं। लुक्स में एवरेज हूं – न ज्यादा हैंडसम, न ज्यादा सादा – लेकिन दिल का बहुत शरारती। ये कहानी आज से ठीक एक साल पुरानी है, जब मैं चंडीगढ़ में नई-नई जॉब जॉइन करके आया था। सिटी नई थी, दोस्त कम थे, और रातें अकेली।

एक रात नींद बिल्कुल नहीं आ रही थी। बाहर तेज बारिश हो रही थी, खिड़की पर बूंदें टप-टप गिर रही थीं, हवा ठंडी और नम थी। मैं बिस्तर पर करवटें बदल रहा था, बॉडी गरम थी, मन बेचैन। फोन उठाया और रैंडमली एक नंबर डायल करके मैसेज भेज दिया – “हाय, नींद नहीं आ रही क्या?”

रात के करीब डेढ़ बज रहे थे। उम्मीद नहीं थी कि कोई रिप्लाई आएगा। लेकिन कुछ मिनट बाद ही फोन वाइब्रेट हुआ। “नहीं आ रही। तुम कौन?”

बस यहीं से शुरुआत हुई। नाम था उसका रिया। पहले तो सिर्फ हल्की-फुल्की बातें – मौसम कैसा है, जॉब कैसी चल रही, चंडीगढ़ कैसा लग रहा। लेकिन मेरी बातें उसे अच्छी लगने लगीं। मैं थोड़ा फ्लर्टी हूं, तो जल्दी ही मैंने “आई लव यू” लिख दिया। वो हंसकर इमोजी भेजकर टाल गई, लेकिन मैसेज करती रही।

धीरे-धीरे चैटिंग गहरी होती गई। डर्टी जोक्स शुरू हुए। वो भी बराबर से जवाब देती। कभी वो कोई जोक भेजती, कभी मैं। हंसते-हंसते इमोजी की बौछार होती। रात-रात भर बातें चलतीं। वो बताती कि उसे मेरी शरारतें बहुत पसंद हैं, कि मैं उसे हंसाता हूं, कि मेरी बातों में एक अलग ही मजा है। मैं उसे बताता कि वो कितनी स्मार्ट है, कितनी बोल्ड।

लगभग बीस दिन ऐसे ही बीते। हर रात चैट, कभी वॉइस मैसेज, कभी फोटोज। एक रात मैंने हिम्मत करके लिखा, “मिलोगी कभी?”

पहले तो उसने मना किया। “पागल हो गए हो? इतनी जल्दी? हम तो अभी एक-दूसरे को ठीक से जानते भी नहीं।”

लेकिन मुझे पता था – उसका मन भी था। बातों-बातों में उसने हां कर दी। वो लुधियाना में रहती थी, चंडीगढ़ से सिर्फ दो घंटे की दूरी। हमने प्लान बनाया। पहले ही साफ-साफ बात हो चुकी थी कि मिलते ही हम इंटीमेट होंगे। उसे कोई ऐतराज नहीं था। बल्कि वो खुद भी उतनी ही एक्साइटेड लग रही थी – मैसेज में लिखती, “बहुत नर्वस हूं, लेकिन एक्साइटेड भी।”

आखिरकार वो दिन आ गया। सुबह मैंने कॉल किया। उसकी आवाज में घबराहट और उत्साह दोनों थे। “मैं ऑफिस जाने का बहाना बनाकर निकल रही हूं। बस स्टैंड पर 11 बजे पहुंच जाऊंगी।”

मैं पहले से तैयार था। रूममेट्स ने मजाक में कंडोम का पैकेट थमा दिया था, बोले “सेफ रहो भाई”। मैं बाइक लेकर बस स्टैंड पहुंचा। फेसबुक पर उसकी फोटो देखी थी, लेकिन रियल में वो… बाप रे! हूर से कम नहीं थी। स्किन-टाइट ब्लैक जींस जो उसके गोल-मटोल कूल्हों को परफेक्टली हाइलाइट कर रही थी, ऊपर गले तक खुला व्हाइट टॉप जिससे उसकी गहरी क्लीवेज झलक रही थी, बाल खुले और हवा में लहरा रहे, लाइट मेकअप लेकिन लिप्स पर ग्लॉसी रेड लिपस्टिक। उसकी कमर पतली, कूल्हे चौड़े, चाल में आत्मविश्वास और थोड़ी शरारत।

मैंने दूर से आवाज दी, “हाय रिया!”

वो मुड़ी, थोड़ी शरमाई, आंखें नीची कर लीं, लेकिन मुस्कुरा भी दी। हमने दो मिनट वहीं बात की – नर्वस हंसी, हल्की छेड़छाड़। फिर वो बाइक पर पीछे बैठी। जैसे ही उसकी कमर पर हाथ रखा, उसकी गर्म बॉडी का एहसास हुआ, दिल तेज धड़कने लगा। उसकी खुशबू – हल्की परफ्यूम और बारिश की नमी – नाक में घुस रही थी।

थोड़ी देर शहर में घूमे। लंच किया, कॉफी पी। बातें करते रहे – पुरानी चैट्स याद करते, हंसते। फिर मैंने धीरे से पूछा, “होटल चलें?”

वो शरमाई, होंठ काटे, आंखें नीची करके बोली, “चलो… लेकिन ज्यादा शरारत मत करना।”

मैं उसका इशारा समझ गया। हम एक अच्छे होटल में गए। रूम लिया। जैसे ही दरवाजा बंद हुआ और लॉक किया, मैंने उसका हाथ पकड़ा, लाइट्स ऑफ कीं और उसे अपनी ओर खींच लिया। टाइट हग किया। उसकी सॉफ्ट बॉडी मेरी बॉडी से पूरी तरह सटी थी – उसके बूब्स मेरे सीने पर दब रहे थे, उसकी सांसें तेज और गर्म मेरी गर्दन पर लग रही थीं। मैंने उसकी गर्दन पर होंठ रखे, धीरे-धीरे किस करना शुरू किया – हल्के चूम, फिर जीभ से चाटना। उसकी बॉडी सिहर रही थी।

ये मेरा पहला मौका था। उसका भी। शायद इसी वजह से वो अचानक घबरा गई। उसने मुझे हल्का धक्का दिया और बोली, “नहीं कार्तिक… मैं तैयार नहीं हूं। मुझे घर जाना है।”

मैं रुक गया। ट्यूब लाइट ऑन की। “क्या हुआ जान? डर गई? कोई बात नहीं, हम जैसे हो वैसे ही रहेंगे।”

वो बेड पर बैठ गई, आंखें नीची। “बस… अभी मन नहीं है। बहुत तेजी से हो रहा है सब।”

मैं मुस्कुराया। “ठीक है। कोई जबरदस्ती नहीं। हम बस बातें करेंगे, हग करेंगे।” मैंने उसे गोद में उठाया, बेड पर बिठाया और धीरे-धीरे उसके हाथ सहलाने लगा। उसके टॉप से क्लीवेज साफ दिख रहा था – गहरी, सॉफ्ट, और उसकी सांसों से ऊपर-नीचे हो रही। मैं पागल हो रहा था, लेकिन कंट्रोल रखा।

धीरे-धीरे वो रिलैक्स होने लगी। हम पुरानी चैट्स की बातें करने लगे, डर्टी जोक्स याद करने लगे। मैंने कहा, “तुम सच में बहुत खूबसूरत हो। मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे तुम जैसी लड़की मिलेगी। तेरे होंठ तो गुलाब जैसे हैं, इतने रसीले।”

वो शरमाई, मुस्कुराई। मैंने हिम्मत करके उसके कंधे पर हाथ रखा और उसे बाहों में भर लिया। अब वो मेरे सीने पर सर रखकर लेटी थी। हम टाइट हग कर रहे थे। मैंने बहाने से अपना सर उसके बूब्स पर टिका दिया। वो सिहर तो गई, लेकिन मना नहीं किया। मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया।

मैंने धीरे से उसके बूब्स पर हाथ रखा, हल्के से दबाया। वो सिहर गई, मेरा हाथ हटाया और बोली, “शरारत मत करो।” लेकिन उसकी आंखों में शरारत थी, सांसें तेज हो रही थीं। मैंने फिर कोशिश की। कई बार वो टालती रही, लेकिन अब उसकी बॉडी रिएक्ट कर रही थी।

आखिर मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उसकी गर्दन पर फिर किस किया, टॉप को ऊपर उठाया और लेफ्ट बूब बाहर निकाला। ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा, फिर ब्रा का हुक खोला। उसके बूब्स बिल्कुल टाइट, गोल, 34 साइज के – सॉफ्ट लेकिन फर्म, निप्पल्स गुलाबी और पहले से ही हार्ड। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा – धीरे, फिर तेज। वो सिसकारी भरने लगी – “आह… उम्फ… कार्तिक… क्या कर रहे हो… आह्ह…”

दूसरे बूब को हाथ से मसल रहा था, निप्पल को उंगलियों से पिंच कर रहा था। वो अब पूरी तरह मस्त हो चुकी थी, कमर हिला रही थी। मैंने अपना हाथ उसकी जींस की जिप पर ले गया। उसने रोका, लेकिन कमजोर आवाज में। मैंने फिर उसके बूब्स चूसे और उसे और गरम कर दिया। दूसरी बार हाथ उसकी पैंटी में पहुंचा। इस बार उसने नहीं रोका। उसकी चूत पहले से ही गीली थी – गरम, चिकनी। जैसे ही उंगली से क्लिट छुआ, वो कांप गई, कमर ऊपर उठा दी और जोर से सिसकारी – “आआह्ह… कार्तिक…”

मैंने जींस की बटन खोली और खींचकर उतार दी। अब वो सिर्फ ब्लैक लेस पैंटी में थी – जो पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने अपनी शर्ट-जींस उतारी और उसके ऊपर लेट गया। उसकी टांगें फैलाईं। उसकी चूत पर उंगली फेरते रहा – क्लिट को रगड़ता, अंदर उंगली डालता। वो आंखें बंद किए सिसकारियां भर रही थी – “उम्फ… आह… हां… ऐसे ही…”

फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला। वो 6.5 इंच का था, पूरी तरह खड़ा, नसें उभरी हुईं। मैंने कहा, “इसे हाथ में लो ना।”

वो शरमाई, “नहीं… शरम आ रही है।”

फिर मैंने पूछा, “अंदर डाल दूं?”

वो कुछ नहीं बोली, बस धीरे से सर हिलाया और मुस्कुराई, आंखें बंद कर लीं।

मैंने कंडोम लगाया। लंड उसकी चूत पर रगड़ा – उसकी गीलापन मेरे लंड पर लग रहा था। वो तरस रही थी, कमर ऊपर उठा रही थी। अचानक उसने नीचे से झटका दिया और मेरा लंड आधा अंदर चला गया। वो वर्जिन थी, तो थोड़ा दर्द हुआ। वो चिल्लाई, “आह… धीरे… बहुत दर्द हो रहा है…”

मैंने धीरे-धीरे पूरा अंदर किया। उसकी चूत बहुत टाइट थी – गरम, गीली, मुझे पूरी तरह जकड़ रही थी। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। वो आहें भर रही थी – “आह… आह… कार्तिक… धीरे… आह्ह…”

आवाज बाहर न जाए इसलिए मैंने अपना हाथ उसके मुंह पर रख दिया। थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ और वो भी कमर हिलाने लगी। मैंने स्पीड बढ़ाई। वो भी ऑर्गेज्म तक पहुंच चुकी थी – उसकी चूत सिकुड़ रही थी, बॉडी कांप रही थी। मैं भी झड़ गया। हम पसीने से तर, एक-दूसरे की बाहों में लेटे रहे, सांसें तेज।

थोड़ी देर बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मैंने नया कंडोम लगाया। उसने कहा, “बस… अब नहीं। थक गई हूं।” लेकिन उसकी आंखें कुछ और कह रही थीं – शरारत और भूख। मैंने उसके बूब्स फिर चूसे, निप्पल्स काटे। वो फिर गरम हो गई, सिसकारियां भरने लगी।

इस बार मैंने उसका सर दीवार से सटा दिया, उसकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रखीं और पूरा लंड एक झटके में अंदर डाल दिया। वो जोर से चिल्लाई, “आआह्ह… धीरे-धीरे चोदो ना… बहुत दर्द हो रहा है…”

लेकिन उसकी कमर खुद ऊपर उठ रही थी, मुझे और गहराई दे रही थी। वो मुझे और जोर से चाह रही थी। मैंने स्पीड बढ़ा दी। जोर-जोर से धक्के मारने लगा – हर धक्के में आवाज हो रही थी। उसके बूब्स उछल रहे थे, मैं उन्हें मुंह से पकड़-पकड़ कर चूस रहा था। वो नाखून मेरी पीठ पर गड़ा रही थी। “आह… और जोर से… हां… चोदो मुझे… आह्ह…”

फिर मैं झड़ गया। वो भी दूसरी बार जोर से झड़ी – उसकी चूत ने मुझे पूरी तरह निचोड़ लिया।

हमने करीब पांच घंटे साथ बिताए। बहुत इंजॉय किया – हग किया, किस किया, बातें की। फिर मैंने उसे बस स्टैंड छोड़ा। जाते वक्त वो मुस्कुराई, मेरे गाल पर किस किया और बोली, “अगली बार फिर मिलेंगे। बहुत मजा आया।”

बस में बगल वाली अनजानी लड़की ने खुद खोली शलवार

मैं प्राइवेट AC बस के सेकंड लास्ट सीट पर आराम से बैठा था। मुंबई में एक हफ्ते की व्यस्तता के बाद हैदराबाद लौट रहा था। रात के 9:30 बजे मुंबई का आखिरी स्टॉप आया। अचानक बस का दरवाजा खुला और एक बेहद खूबसूरत लड़की अंदर आई। लंबे घने काले बाल कमर तक लहरा रहे थे, हाइट लगभग 5’8″, हेल्दी बॉडी, परफेक्ट कर्व्स। वो सफेद सूट-शलवार में थी — दुपट्टा हल्का सा सरककर उसके भरे हुए ब्रेस्ट्स को हल्का-हल्का दिखा रहा था।

उसने सीट नंबर चेक किया और मेरी बगल वाली सीट पर बैठ गई। नजरें मिलीं, दोनों ने शर्माते हुए मुस्कुराकर “हेलो” कहा। बस चल पड़ी तो मैं चुपके-चुपके उसे देखने लगा। उसकी कमर इतनी पतली कि हाथों में समा जाए, हिप्स गोल-गोल और भरे हुए, छाती इतनी भरी हुई कि सूट का कपड़ा तना हुआ था। उसकी खुशबू — हल्की मीठी परफ्यूम और लड़की की नॉर्चरल खुशबू — मुझे पागल कर रही थी। आंखें थकी हुई लेकिन शराबी सी चमक रही थीं।

धीरे-धीरे बातें शुरू हुईं। नाम पूछा — उसका नाम **रिया** था। वो UK जा रही थी, लेकिन इमिग्रेशन में वीजा इश्यू हो गया। एयरपोर्ट से निकली तो फैमिली पहले ही चली गई थी। थकान और डिप्रेशन से उसकी आंखें लाल थीं। मैंने उसे हंसाने की कोशिश की — मुंबई की मजेदार स्टोरीज सुनाईं, अपने एक्सपीरियंस शेयर किए। धीरे-धीरे वो खुल गई। हम दोनों बहुत क्लोज हो गए। मेरी घुटने जानबूझकर उसकी नरम जांघों से टच हो रही थीं। वो कुछ नहीं बोली, बस हल्का सा मुस्कुरा दी।

ढाबे पर डिनर स्टॉप लगा। हम साथ बैठकर खाना खाए — गरमा-गरम परांठे, दाल और चाय। खाते-खाते उसकी आंखों में अब हल्की शरारत दिखने लगी थी। “आप बहुत अच्छे हो,” उसने कहा और मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई।

बस फिर चली। रिया ने कहा, “विंडो साइड पर बैठूंगी, नींद आएगी।” हम दोनों उठे। वो सीट से हटी नहीं, मुझे अंदर से निकलने का इशारा किया। मौका मिल गया। मैं उसके सामने से गुजरा, जानबूझकर थोड़ा झुक गया। बस के झटके ने मुझे उसके ऊपर गिरा दिया। मेरा सीना उसके नरम, गर्म और भारी ब्रेस्ट्स से पूरी तरह दब गया। मेरा लिंग उसकी जांघों के बीच फंस गया और तुरंत खड़ा हो गया। उसकी सांसें तेज हो गईं। मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा, नाक उसके माथे से लगभग छू रही थी। वो भी मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुझे साइड करने लगी, लेकिन धीरे-धीरे, जैसे वो भी एंजॉय कर रही हो।

मैंने अपना हाथ उसके कमर पर फेरा, रास्ते में उसके ब्रेस्ट्स को हल्का स्पर्श दिया। वो हल्का सा कांपी, लेकिन “कोई नहीं” वाली नजर से देखा। अब वो मेरी दाईं तरफ थी।

थोड़ी देर बाद मैंने हिम्मत करके अपना दायां हाथ उसके लैप पर रख दिया। वो चुप रही, आंखें बंद कर लीं। मैं धीरे-धीरे उसके सॉफ्ट थाईज को सहलाने लगा। फिर घूमकर बायां हाथ उसके गले पर, कान के पीछे, फिर ब्रेस्ट्स पर। उसके निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने शर्ट के अंदर हाथ डाला। उसकी शलवार के अंदर कुछ नहीं था — बिल्कुल नंगी, गर्म, शेव्ड और पहले से ही गीली चूत।

“उफ्फ… प्लीज… कोई देख लेगा ना…” उसने बहुत धीमी, कांपती आवाज में कहा, लेकिन उसकी जांघें थोड़ी और खुल गईं। वो खुद मेरी पैंट की जिप खोलकर मेरे मोटे, सख्त लंड को बाहर निकालने लगी। दो उंगलियों से सहलाते हुए वो उसे दबा रही थी।

मैंने उसके नाभि को सहलाया, कमर को जकड़ा, फिर ब्रा खोलने को कहा। उसने खुद पीछे हाथ डालकर ब्रा खोल दी। मेरे हाथ उसके नंगे, मुलायम, भारी ब्रेस्ट्स पर थे। उन्हें मसलते, निप्पल्स को हल्का-हल्का दबाते, चुटकी लेते… वो “आह… उफ्फ… धीरे…” कर रही थी।

धीरे-धीरे मैंने उसकी शलवार का नाड़ा खोला। मेरी उंगलियां उसकी गर्म, भीगी चूत पर घूम रही थीं। क्लिटोरिस को हल्का-हल्का रगड़ते, दो उंगलियां अंदर डालकर धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। रिया कांप रही थी। उसकी सांसें बहुत तेज हो गईं। अचानक वो सिकुड़ गई और पहला ऑर्गेज्म आ गया। गर्म पानी जैसा रस मेरी उंगलियों पर बह निकला।

“बेबी… मैं कंट्रोल नहीं कर पा रही…” उसने कान में फुसफुसाया।

हम बस में पूरा नहीं कर सकते थे। मैंने उसे कन्विंस किया कि पुणे में उतरकर होटल में रुक जाते हैं। उसने घर को फोन करके “बस ब्रेकडाउन” का बहाना बना दिया। पुणे पहुंचकर हम एक अच्छे होटल में चेक-इन कर लिए।

रूम में घुसते ही मैंने उसे बालकनी में पीछे से जकड़ लिया। मेरा लंड उसके गोल-मोटे बट्स के बीच दबा हुआ ऊपर-नीचे रगड़ रहा था। दोनों हाथों से उसके ब्रेस्ट्स को जोर-जोर से मसलते हुए गर्दन, कान, कंधे चूम रहा था। वो मुड़कर मेरे होंठों को चूसने लगी — गहरी, गीली किस। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी।

बेड पर ले जाकर मैंने उसकी पूरी बॉडी को चूमना शुरू किया। नाभि में जीभ घुमाई, कमर को चाटा, ब्रेस्ट्स को दोनों हाथों से दबाते हुए निप्पल्स को जोर-जोर से चूसा। रिया कराह रही थी, “आह… और जोर से… हां… बेबी…”

उसने मेरी पैंट उतार दी और मेरे लंड को मुंह में ले लिया। गर्म, गीली जीभ से चूसते हुए वो ऊपर-नीचे कर रही थी। हम 69 पोजीशन में गए। मैं उसकी चूत चाट रहा था, उंगलियां अंदर डाल रहा था, वो मेरे लंड और बॉल्स को सहला रही थी।

“प्लीज… अब डाल दो… मैं बहुत गीली हो चुकी हूं…” उसने प्यार से कहा, आंखों में भूख।

मैंने उसकी टांगें फैलाईं और धीरे-धीरे अपना मोटा लंड उसके टाइट, गर्म, भीगे गद्दे में डाला। “आह… उफ्फ… स्लोली बेबी…” वो कराह उठी। मैंने उसके मुंह को किस से बंद कर दिया और धीरे-धीरे पूरा अंदर कर दिया। फिर रिदम बढ़ाया। उसके ब्रेस्ट्स उछल-उछलकर ताल दे रहे थे। वो अपनी कमर ऊपर उठाकर मेरा साथ दे रही थी।

हां… और जोर से… फाड़ दो मुझे… आह… मैं आ गई…” वो चीखते हुए ऑर्गेज्म हो गई। उसकी चूत मेरे लंड को जोर-जोर से दबा रही थी। मैंने भी उसके अंदर ही पूरा गर्म रस छोड़ दिया।

थोड़ी देर बाद शावर लिया। फिर दूसरी राउंड — कार्पेट पर। वो घुटनों के बल, गांड ऊपर करके लेटी। मैंने पीछे से घुसा, एक हाथ ब्रेस्ट्स मसलते, दूसरा कमर पकड़कर जोर-जोर से ठोकना शुरू किया। उसके बट्स पर चपतें मारते, कमर चूमते… आखिर में मैंने उसे पलटा और उसके ब्रेस्ट्स, पेट और चूत पर अपना सारा रस छोड़ दिया। रिया उसे अपनी उंगलियों से मल रही थी और आहें भर रही थी — “मmm… कितना गर्म है… कितना अच्छा लग रहा है…”

सुबह 5 बजे हम निकले। हैदराबाद पहुंचकर अगले तीन महीने हमने कई हॉट नाइट्स एंजॉय कीं — होटल, उसके फ्लैट, कभी-कभी कार में भी। फिर वो UK चली गई। आज भी जब बात होती है तो वो मुस्कुराते हुए कहती है, “वो बस जर्नी कभी नहीं भूलूंगी… तुमने मुझे वो रात दी जो मैं कभी एक्सपेक्ट नहीं कर रही थी।”

वो सफर सिर्फ ट्रैवल नहीं था… वो हमारी सबसे हॉट, रोमांटिक और यादगार लव स्टोरी बन गई।

ऋतू चाची हॉट रंडी रेश्मा बनकर चुदी- 1

नमस्ते! सभी लंड वालो और चूत वालियों को मेरा लंड क्या प्रणाम। मैं हॉट सेक्स स्टोरी पर नया नहीं हूं मगर ये मेरी पहली कहानी है। बहुत सालों से कहानियाँ पढ़ रहा हूँ और हिला रहा हूँ। ऐसा एक दिन भी नहीं होता जब हॉट सेक्स स्टोरी पे लोग इन नहीं किया हो। बड़ी ही मस्त साइट है और मस्त कहानियाँ हैं। अब बकवास बंद करके माल पे आते हैं। अपनी पहली कहानी में मैं आपको अपने घर ले जाता हूं और अपनी रांड माल रितु चाची से मिलवाता हूं।

ऐसा कोई लंड ना होगा जो इस छिनाल को चोदना ना चाहे। साली रांड गजब की कातिल माल है. रितु चाची की उमर लगभाग 35 साल की होगी धमाका। रितु के दो बच्चे हैं।अब कहानी पर आता हूं। मैं 8वीं कक्षा में था जब मेरे छोटे चाचा की शादी हुई और रिउ हमारे घर पे आयी। मगर चाचा का कहीं बाहर अफेयर था और वो घर पर पड़ी इस रांड को प्यासा ही चोद के रखा था। जल्दी ही मेरी चाचीजी के साथ काफी बनने लगी और हम काफी बात करने लगे।

पर अभी तक मेरे आदमी में उसके लिए कोई ख़राब ख्याल नहीं था। एक बार मेरा एक दोस्त अर्पित आया हुआ था और उसने जब ऋतु चाची को देखा तो साला चुटिया पागल हो गया। मेरा काफी अच्छा दोस्त था तो इसलिए हम काफी फ्रैंक थे। उसने मेरेको बोला कि यार राजेश क्या जबरदस्त माल है, तेरी चाची साली रांड को पटक पटक कर चोदने में बहुत मजा आएगा।उस समय क्लास 10 में था मैं और नई नई चूत का शौक चढ़ा हुआ था।

अर्पित की बात सुनकर मेरा भी मन पलट गया और मैं भी ऋतु को अब अपनी चाची की तरफ नहीं बल्की एक चुदासी रांड की तरह देखने लगा। साली रंडी जब किचन में काम करती थी तो पसीने के कारण उसके ब्लाउज पर लाइन बन जाती थी। साली छिनाल की क्लीवेज और गठीली जवानी देख कर मेरा लंड तन जाता था।

मैंने उसकी पैंटी और ब्रा चुराना शुरू कर दिया था और चाचीजी की तस्वीरें भी खींची थीं। रात को उनकी फोटो देख कर उनकी ब्रा और पैंटी में मुँह मारता था और सुबह उनकी अलमारी में रख देता था। मेरे लंड के पानी से भरी हुई पैंटी और ब्रा पहन के वो रंडी की बच्ची घूमती थी तो मेरा लंड पागल हो जाता था और मन कर गया था कि वहीं पे लेता कर साली की कली मैं अपना लंड पेल के रुला दू हरामन को।ऐसा काफी दिन तक चलता रहा और मैं और अर्पित उसके नाम की मुथ मारते रहे। हम चाची के साथ घूमने भी जाने लगे। हम फिल्में, शॉपिंग और कई बार लंच पर जाते थे।

अब हम ऋतु चाची से काफी फ्रैंक हो गए थे मगर हमें समझ नहीं आ रहा था कि उसकी चूत तक कैसे पहुंचें। अपनी हताशा दूर करने के लिए हम रंडियां थोंक ने लागे। स्कूल के बाद हम दोनों कोठे पे जा के रंडी बजाते थे। बहुत जल्दी हमारी दोस्ती अनवर नाम के एक भदवे से हो गई। अब तक हम कक्षा 12 में पढ़ गए थे और ऋतु चाची को एक बेटा भी हो गया था। बड़े प्रेशर के बाद घर वालों के दवाब में आकर चाचा ने उसको बच्चे के लिए चोद तो दिया मगर साथ ही साथ उसकी चूत में आग भी लगा दी थी। माँ बनने के बाद उसके चूचे और गांड और फैल गई थी। अब साली रांड को देख कर हम लोगों से रहा नहीं जाता था। एक दिन अर्पित बोला: यार राजेश साला तू कब तक अपने घर का माल सदन देगा और रंडियां बजाएगा।

क्या जिंदगी भर तू अपनी रांड चाची की पैंटी में मूठ मारेगा। अब तो कुछ कर ना.मैने बोला: भाई अर्पित उस रांड को बजाना तो मेरेको भी है. अब मेरे से भी नहीं रहा जाता तू ही कोई तरकीब बता ना। फिर अचानक से अर्पित ने बोला: क्यों ना हम अनवर से मदद मांगेगे। वो साला सेक्स टेबलेट का इफ़ेक्ट लड़कियों को पटाने में माहिर है। वो जरूर कोई रास्ता निकाल लेगा। उसकी बात मेरेको समझ में आ गई। बात सच ही थी. फिर हमने सोचा कि 12वीं कक्षा की परीक्षा के बाद ये वाला काम पूरा करेगा।

परीक्षा के बाद मैं अर्पित और अनवर एक गंदे से बार मैं बैठ कर दारू पी रहे थे। तभी अर्पित ने बोला: यार अनवर भाई आपसे थोड़ी सी मदद चाहिए। बहुत ही रहस्य और महत्वपूर्ण बात है। अनवर: हां बोलो क्या होगा तुमको.साला इतना क्या महत्वपूर्ण काम है. हमने अनवर भाई को ऋतु चाची के बारे में बताया और उसकी फोटो भी दिखाई। देखता ही अनवर बोला साला तुम लोगों ने मेरेको इस रांड के बारे में पहले क्यों नहीं बताया ये तो साली मस्त छिनाल माल है। मस्त पटाखा है. अनवर भाई बोला: देखो लौंडो तुम्हारी चाची में दम है साली मस्त है।

मैं तुम लोगों की मदद कर सकता हूं लेकिन एक शर्त है मैं इस पटाखा को पहले में भुजूंगा इस की चूत मैं बजाऊंगा बाद में तुम्हें भी पक्का मौका मिलेगा।और राजेश तुम बुरा मत मानो ना मैं इस रांड से धंधा भी करवाऊंगा। आज कल ऐसी घरेलू राखैलों की डिमांड बहुत है मार्केट में। बोलो डील मंजूर है. अर्पित और मैं एक दूसरे को देखते रह गए और फिर हमने कहा मंजूर है। उसके बाद अनवर ने चाचीजी को पटाने का प्लान बना दिया।

अनवर भाई ने हमको कहा कि हमलोग रितु चाची को एक बार फिल्म के लिए ले कर आये। फिल्म के बाद अनवर भाई हमलोग से मिले। हमने उनको चाचीजी से इंट्रोड्यूस करवाया और कहा कि ये हमारे मैथ्स के टीचर हैं। मूवी के बाद बात होती होती हम दोनों ने कहा कि हमारा आज बहुत ही जरूरी काम है और हम चले गए। चाची जी और अनवर भाई शॉपिंग कर रहे थे। अनवर भाई कोई 6 इंच 5 फीट के होंगे और उनकी टैगडी बॉडी भी थी। देखने में एक बांध पहलावाएन ।

चाची जी जल्दी ही उनसे घुल मिल गई। शॉपिंग के बाद लंच करते हुए अनवर भाई ने चाची के खाने में नींद की गोली डाल दी। जैसे ही गोली असर करने लगी अनवर ने तूरंत चाची को गाड़ी में दाल के अपने कोठे पे ले लिया। हम भी उसके साथ आ गये। कोठे पे जा कर अनवर भाई ने हमको एक कैमरा दिया और वीडियो बनाने को कहा। अनवर भाई बिस्तार पर शेर की तरह कूदे और चाची जी की चुचियाँ मसलने लगे। साली क्या मस्त माल है तेरी रखेल चाची. क्या तो मैं आज माँ चोद दूँगा। बहुत दिन बाद ऐसा तगड़ा माल मिला है।

मैंने बोला चोद दो अनवर भाई चोद दो मेरी चाची को। इसकी चूत में बहुत खुजली है. मीता दो आज इसकी आग. साली के बदन ने हमारी भी जवानी को परेशान कर रखा है। मुठ मार मार के थक गए हैं अब। आज तो इस रांड को अपनी राखाइल बना दो। अब अनवर भाई जल्दी से दारू के दो पैग लगाते हुए चाची जी की चुची को मसलने लगे। उसने चाची की लाल रंग की साड़ी को उतार के साइड पे फेंक दिया और चाची के ऊपर बैठ के उनके डीप क्लीवेज को चाटने लगा। धीरे-धीरे ऋतु चाची को होश आने लगा और वो भी गरम गरम सिसकियाँ भर ने लगी थी।

अनवर भाई ने रितु चाची के ब्लाउज और ब्रा को खोल के फेंक दिया और चाची जी के बब्बो पे अपना मुंह लगा के पागल कुत्तों की तरह चुनने और चांटने लगे। एक हाथ से एक बब्बे को मसलते हुए वो दूसरे बब्बे को चूस रहा था। रितु चाची काम अग्नि में बहकते हुए तड़प ने लगी और आहीन भर ने लगी। मैं और अर्पित तो वीडियो बनाने में लगे हुए थे। मुझे अपने सपनों की रांड रितु चाची को चोदते हुए देख कर बहुत मजा आ रहा था। चाची के बब्बो को लाल करने के बाद अनवर भाई रितु चाची के होठों को अपने दांतों से चबाते हुए उनकी जीभ को छूने लगे।

ऐसा स्मूच मैंने कभी नहीं देखा था मुझे डर लगने लगा कि कहीं चाची की सांस ना रुक जाए और वो मर ना जाए। अनवर भाई को रोकना अब मुमकिन ना था। हम चाहते हैं कि रितु चाची को कोई छू न सके। अनवर भाई अपनी हर रंडी को पहले खुद चख थे बाद में अपने चमचो और कुत्तों को देते थे। आज तो वो चाची को अपने लंड की रानी बना कर ही मान ने वाले थे।

अपने स्मूच करने के बाद अनवर भाई ने चाची के पेटीकोट को ऊपर करके उनकी टांगों से खेलना शुरू कर दिया। इतने में ही चाची को अचानक से पूरा होश आ गया था। मेरी और अर्पित किट तो मोटी ही गई थी। रितु चाची ने अनवर भाई को धक्का दिया और वो पीछे हट गए। गुस्से में आकार अनवर भाई ने रितु चाची को दो कड़क झापड़ लगाये और बोला: अपनी औकात में रहकर साली रंडी तेरेको मालूम नहीं है हरामण तू किसके कोठे पे है। ज्यादा चू चा कि ए तो तेरी बॉडी भी नहीं मिलेगी।

देख तेरा भतीजा तेरेको मेरे पास लाया है। अब ये वीडियो बना रहा है. शांति से यहां का महौल गरम कर नहीं तो पूरा देश तेरी जवानी से अपना बिस्तार गरम करेगा। बेच दूंगा मैं ये वीडियो समझी। ऋतु चाची डर गई और मेरेको बोली कि राजेश तुमने ऐसा क्यों किया मेरे साथ। मैंने बोला चुप साली दो टेक कि छिनाल तेरे करण हम दोनों दोस्त रंडी चोद बन गए अब टब ही रंडी बन चुद सब से। अर्पित बोला: क्यों चाची जी बहुत गर्मी है ना आपकी जवानी में अब बेचो अपनी जवानी को इस कोठे पे।

यहां तो आपको रोजाना नए कानून मिलेंगे अपनी चूत की प्यास मिटाने को। ये सब सुनके रितु चाची रोने लगी। तब अनवर भाई ने उनको अपनी बाहों में भर के बोला। रितु डार्लिंग क्यों रो रही हो देखो हम सब के साथ मस्ती करो और ऐश करो ये रोने धोने से क्या होगा। तेरा रेट भी हाई रखूंगा मैं जैसे मर्द के साथ सोना चाहोगी वैसा ही लाऊंगा। टेंशन मत लो अब यहां से वापस जाने का कोई रास्ता नहीं है। ये बोलते बोलते उनको चाची का पेटीकोट खोल दिया और लाल रंग की उनकी पैंटी के पार से चाची जी की चूत पर उंगली घुमाना शुरू कर दिया।

चाची सारे रास्ते बंद होता देख धीरे-धीरे मस्त होने लगी और अनवर भाई के सीने में लिपटने लगी और उनकी चाटी छूने लगी। अनवर भाई ने बोला अब बनी ना तू अनवर की रांड. आ जाने मन तेरेको अब जन्नत दिखता हूं. ये कह के उनको चाची का हाथ अपने पजामे पे रखा। चाची ने बोला अनवर मियाँ ये क्या है।अनवर भाई ने बोला जाने मन ये मेरा लावड़ा है और तुम्हारा खिलोना। खेलो इसके साथ। ऋतु चाचीजी ने अनवर भाई का पजामा उतारा और उनकी चड्ढी भी उतार दी और एक सस्ती रंडी की तरह अनवर भाई का लौड़ा हिलाने लगी और उसे खेलने लगी।

अनवर भाई: और हिला मेरे लौड़े को रंडी और जोर से हिला ये तेरे नामर्द भड़वे पति का लौड़ा नहीं है। एक मर्द का लंड है. चूस इसको साली हरामन छिनाल। रितु चाची: अरे इतना भी मत जोश दिखाओ अनवर मियां. मेरी तो किस्मत की फोटो गई थी उस दिन जिस दिन मैंने इस हरामी के नपुंसक चाचा से शादी की थी। साला इनका खानदान ही नामर्दों से भरा है। इस को और इसके भड़वे दोस्त को इतनी लिफ्ट दी मैंने सालों में मुझे एक बार चोदने का दम भी ना था।

कहानी सेक्स टेबलेट का इफ़ेक्ट अगले भाग में जरी है।

ऋतू चाची हॉट रंडी रेश्मा बनकर चुदी- 2

चाची भतीजा चुदाई कहानी में पढ़ें कि आज पहली बार एक असली मर्द मिला है.दिखा दो अपनी सारी मर्दंगी. ये कह के रितु चाचीजी अनवर भाई का 7 इंच बड़ा मोटा लंड को कुत्तों की तरह चाटने लगी। अनवर भाई की आखें निकल गयीं. अनवर भाई: साली तेरे से भरी रंडी नहीं देखी है अब तक मैंने। क्या चूज़ ती है अंड ले पूरा इसको चाँद में खा जा इसको। आज टेरमैं चिकनी चूत को मेरा मुसाद लंड फाड़ दूंगा। ऋतु चाची : हाँ मेरे राजा. रितु चाची को पता नहीं क्या हो गया था। अपनी सारी शर्म खो ने के बाद हमें और किसी भी और रंडी में अब कोई फरक नहीं रह गया था।अनवर भाई: आआआह्ह्ह्ह और चूसो और जोर से देखो…।

साली रंडी बड़ी कुत्ती चीज़ है तू. आआआह्ह्ह्ह.ऋतु चाची: आ रहा है ना मजा….अनवर भाई: हां रानी हाआं…अनवर भाई चाचीजी की चड्ढी उतार ने लगे और चाची को बिल्कुल नंगा कर दिया. वो चाची जी की चूत में उंगली करने लगे। ऋतु चाची: आआह धीरे से दर्द होता है।

अनवर भाई: दर्द में ही तो मजा है जाने यार। ऋतु चाची: तेरी उंगली ने मेरा हाल ये कर दिया है तो तेरा लंड तो मुझे पागल हाय करदेगा.अनवर भाई: आज तक तूने लंड का स्वाद चखा ही कहां है. चूस इसको जोर से।अब अनवर भाई ने चाची को बिस्तार पे ले दिया और 69 पोजीशन में जा केर उनकी चूत को चाटने लगे और अपना लंड रितु चाची जी के मूंह में डाल दिया। अपनी एक उंगली उन्हें चाची जी के गांड में डाल कर हिलाना शुरू कर दी। चाची जी की हालत खराब हो गई थी।

ऋतु चाची : आआअहह…. हाऐइइइइ मेरी जवानी… साली बेकार ही हो जाती है… अगर आज आपका ये लंड नहीं मिलता। और जोर से हुसाओ उंगली. फाड़ डालो मेरी गांड को. अनवर भाई: हमारे और इस कोठे के होते हुए तेरी जवानी बेकार कैसे जाती रानी। तेरी इस चूत को तो मैं चूस चूस के बेहाल कर दूंगा और रहूंगी तेरी गांड वो तो मैं मारूंगा ही। साली छिनाल बड़ी ही मस्त आइटम है बे तू।साली कहाँ चिप थी इतने दिनों से। रितु चाची: आआहह मत रुको अब… आआह्ह्ह…. आआआह्ह्ह….अनवर भाई ने अपनी स्पीड और बढ़ा दी औरा बी वो चाची की चूत को काटने लगे और अपनी जीभ को पूरी उनकी चूत में घुसा दिया।

अनवर भाई की उंगलियाँ चाची के गांड के छेद को फाड़े जा रही थी और दूसरे हाथ से अनवर भाई चाची की गांड पर थप्पड़ लगाये जा रहे थे। अनवर भाई: और ले रंडी…आज निकलेगा तेरी मस्ती. साल्लिई एक नंबर की रांड है बे तू. रितु चाची: आआहह धीरे देखो भगवान के लिए… बहुत दर्द हो रहा है। अनवर भाई: इतना ही अगर दर्द हो रहा है तो जाके अपनी पत्नी जैसे किसी नामर्द से चुदवा रंडी।

यहां तेरी कोई नहीं सुनेगा…समझी…तेरा भगवान भी नहीं…ऋतु चाची : आआअहह ….हाआआआइई…थोड़े से तो प्यारर्र से करो ना राजा.. मैं कहीं भाग थोड़ी ना रही हूं…अनवर भाई: हाआ हाआ…साली भागे गी कहाँ हो तुम. तू अनवर भाई की रखाईल है समझी. और तेरी जैसी चिकनी रंडी को कैसे चोदना है ये मुझे बहुत दर्द से आता है।

भूल जा अब सब कुछ. आज से तू वही करेगी जो मैं बोलूंगा। समझ… बोल… समझ या नहीं..ऋतु चाची: समझ गई सब समझ गई… आआअहह… आआहह हाआआईईईईई भगवान मेरी छुट्टट…। आआअहहहहहह और्रर तेजज्ज औरररर…..येह….. हान्नन्न हन्नन्न बस्स्स ऐसे हीई…. हाआइइ आआह्ह्ह्ह….. आआह्ह्हाहा ..चाचीजी जोर से चिल्लाते हुए ठंडी हो गई। अनवर भाई का लंड अपने मुँह से निकल के चोद दिया और अपने पहले ऑर्गेज्म में पसीना पासीन हो गई।

अनवर भाई: क्यों रंडी साली हो। बस हो गई तू ठंडी. मेरे लंड को उक्सा ती है बे तू. ये ले साली छिनारर. अनवर भाई के तमाचे से चाची जी सहम गईं। मेरी और अर्पित की हालत ख़राब हो चुकी थी हम अपना लंड हिलाते हिलाते दो बार अपना माल चोद चुके थे।ऐसा भयानक सीन मैंने कभी नहीं देखा था। अनवर भाई ने रितु चाची को अपना गुलाम बना लिया था।

वो चाची को बिस्तर पे चोद के खड़े हो गए और बोले। अनवर भाई: चल रंडी खादी हो अभी बहुत काम बाकी है। तेरे को ठंडा करने नहीं आया मैं। तू आई है मेरेको ठंडा करने खड़ी हो के चूस मेरे लंड को। ऋतु चाची: थोड़ी देर रुक जाओ ना. प्लीज़ मेरे से और नहीं होगा. अनवर भाई: तेरे लिए रुकूंगा मैं। चल खड़ी हूं नहीं तो वापस मारूंगा तेरेको रंडी। रितु चाचीजी डर गई अनवर भाई का लंड मुँह में ले कर चुनने लगी।

मगर अपने पहले ऑर्गेज्म के कारण उनमें अब दम ना था और जिस तरह से अनवर भाई का लंड चूस रही थी उसे अनवर भाई ने घुसाया हो कर चाची जी को एक और थप्पड़ मारा। और अपना लंड निकाल के चाचीजी के मुँह के सामने रख दिया। अनवर भाई ने चाची जी के मूंह के ऊपर गुस्सा करना शुरू कर दिया और बोला। अनवर भाई: देख ले अपनी असली औकात. मेरा मुत है तू समझी. कल से तू मेरे से ही नहीं यहां के बाकी ग्रहको से भी चुड़ेगी। ज्यादा चू चा कि तो मार दूंगा तेरेको समझी।

साली कुतिया. तेरे जिस्म से बहुत पैसे कमाऊंगा मैं और तेरे वीडियो पर तो सारा इंडिया क्या पूरी दुनिया मूठ मारेगी। चल अब खादी हो। ऋतु चाचीजी रोते हुए अपने आप को संभाल के खड़ी हुई और अनवर भाई से माफ़ी माँग ने लगी। ऋतु चाची: मुझको माफ़ करदो। मैं भूल गई थी कि अब मैं एक रंडी हूं सिर्फ एक रंडी। जो आप बोलोगे वैसा ही होगा। आज से ये जिस्म मैं आपके हवाले करती हूं। माफ़ करदो मेरेको. अनवर भाई जोर जोर से हंसे लागे और अपना लंड हिलाते हुए बोले।

अनवर भाई: बहुत जल्दी समझ गई तेरी चाची राजेश. साली कुतिया पहले समझ जाती है तो इतनी मार ना खाती। मैं: अनवर भाई थोड़ा रहम करो ना चाची जी पर. आप इनको भले जब चाहे चोदो मगर रितु चाची से धंधा तो मत करवाओ ना।ये रंडी हमको दे दो। हम संभाल लेंगे इसको. अनवर भाई: (घुससे में) साले भदवे औकात में राह अपनी तेरा इस गली में आना बंद करवा दूंगा समझा। मेरेको मत सिखा क्या करना है. मैं: सॉरी अनवर भाई माफ़ करना, आप जैसा बोलोगे वैसा ही होगा। अनवर भाई: आजा रितु रानी अब तेरेको आगे की सैर करवाता हूँ। साला पूरा मूड खराब कर दिया तुम सब ने।

रितु चाची: हमारी नादानी को माफ करिएगा।रितु चाचीजी अनवर भाई का लंड पकड़ के उसको अब चूसने लगी। अपने हाथों से अनवर भाई के दांतों और थैलियों को मसलते हुए चाची भतीजा चुदाई कहानी में वो उनका लंड का सुपाड़ा अपने मूंह में डाल के चूसने लगी। अनवर भाई भी ढकेल लगा ने लगे और चाची जी के मूंह को चोदने लगे। उनके चाँद से आन्हह निकल ने लगी।

चाची जी ने अनवर मियां को खुश करने के लिए अपनी एक उंगली उनकी गांड में घुसा दी। अनवर भाई जैसे पागल हो गए और चाची जी के बालों को पकड़कर खींचने लगे और जोर से अपना लंड ढकाल ने लगाए। चाची जी की सांस फूलने लगी थी। मैं और अर्पित शांति से डर के करण वीडियो पर बैन लगाते रहे। अनवर भाई: अब जा के बनी ना तू रंडी. और चूसो साली छिनाल… हांन्न… और जोर से…अनवर भाई पूरी मस्ती में आने के बाद चाची जी को उनके कमर के बाल पटक दिया और उनकी दोनों टैंगो को ऊपर कर के उनकी चूत पे अपना चंद्रमा वापस रख के चाटने लगी।

चाची की चीख निकल ने लगी थी. वो जिस तरह से चाची जी की चूत चाट रहे थे और गांड में अपनी उंगली पेल रहे थे चाचीजी की हालत वापस खराब होने लगी थी। अपने हाथ को रितु चाची के गांड के छेद से निकल के वो रितु चाची के मूंह में डालने लगे। चाची जी उनकी उंगलियों का चैट ने लगी और आहें भरने लगी। अब चाची जी से और नहीं रहा जा रहा. ऋतु चाची: अनवर मियां चोद दो मुझे अपने लंड से. मार दो मेरी चूत को. कर दो मेरी चूत को अपने लंड से पकड़ो। और मत तड़पायो मैं मर जाऊँगी।

अब नहीं रहा जाता. अल्लाह के लिए बुझा दो मेरी आग. आज फाड़ दो मेरी चूत को।अनवर भाई: देख कैसे तड़प रही है तू मेरे लंड के लिए। हाआआ हाआ… ऐसी ही रखील अच्छी लगती है मेरेको जिसे अपनी औकात मालूम हो… चाहिए ना मेरा लंड तेरेको हांन… चाहिए ना… बोल ना… मेरेको बोल ना… साली बोल… रितु चाची: हां नहीं चाहिए मेरेको आप का लंड चाहिए।

मैं आपकी राखाइल हूं. दे दो मेरेको अपना लंड दे दो. भगवान के लिए बुझा दो मेरी आग. अनवर भाई ने चाची जी की चूत को चाटना बंद कर दिया और चाची जी के बाल पकड़ के खींच के उनको कुटिया बना दिया। . चाची जी तड़पने लगी और कराहेन भरने लगी। लंड रगड़ते रगड़ते अनवर भाई ने एक ही झटके में पूरे जोर से अपना लंड रितु चाची जी की चूत के अंदर पेल दिया।

रितु चाची जी जोर से चिल्लाने लगी मगर अनवर भाई ने बिना रुके एक के बाद एक जोरदार धक्के लगाने लगे। इतना मोटा लुंबा लंड चाची जी की छोटी सी नरम चूत को फाड़ते हुए जैसे ही अंदर घुसा चाची जी की जान निकल गई। अनवर भाई रितु चाची के बालों को और जोर से खींचते हुए अपना लंड अंदर बहार करने लगे और दूसरे हाथ से कभी चाची जी की गांड को मारते और कभी उनकी चुचियों को दबाते। चाची जी सिहर रही थी और चुदाई के कारण चिल्ला रही थी।

उनकी चिकनी चूत से कहाँ निकल रहा था। अनवर भाई: ले रंडी ले…मेरा लंड बहुत आग थी ना तेरे जिस्म में। देख मेरा लंड कैसे चोद रहा है तेरी चूत को.ऋतु चाची : आआअह्ह्ह्हह्ह धीरेर्री…. मेरी चूत फट जाएगी…. आआआअह्हह्हह…..अनवर भाई: साली छिनार तेरी चूत फाड़कर हाय ये मेरा लंड शांत होगा आज। देख रंडी आज मैं तेरी चूत को बिना कंडोम के चोद रहा हूँ। यही औकात है तेरी और तेरी चूत की। मेरे लंड का माल जब तेरी चूत में जायेगा तो तू मेरे नजायज़ बहुत की रांड माँ बनेगी। शायद मेरे बच्चे के करण हाय तेरे खानदान में कोई मरद पैदा होगा।

ऋतु चाची: आआअहह बहुत दर्द हो रहा हैईईई…। हाय ऐसा ना करो अनवर भाई….मैं एक शादी शुदा औरत हूं मेरे बारे में कुछ तो सोचो। अनवर भाई जोर जोर के झटके लगते हुए बोले: अनवर भाई: साली तू मेरी रखील है. तू पालगी मेरे बच्चे को अपने पति का बच्चा बना के। समझी अब तेरा घर ये कोठा है और तू मेरी रखील है भूल जा अपने पति को।

अनवर भाई ने रितु चाचीजी की कमर को पकड़ा और उनको गोदी में उठा के खड़े होगे। अन्होने चाची जी को पलट दिया और अपने लंड पर बिठा दिया। अब वो खड़े खड़े उनको चोद रहे हैं. अपने पति ऋतु चाची जी के होंठों पर रख कर वो चाची जी की चूत में खड़े-खड़े अपना लंड पेलने लगे। उन दोनो के बदन की गर्मी से पूरा कर्म गरम हो गया था। उन दोनो का बदन पसीने से भर गया था और वो चाची जी को चूमते और पेलते जा रहे थे। चाची जी की चूत भी अब मस्त हो गई थी।

रितु चाची जी जोर से चिल्लाने लगी मगर अनवर भाई ने बिना रुके एक के बाद एक जोरदार धक्के लगाने लगे। इतना मोटा लुंबा लंड चाची जी की छोटी सी नरम चूत को फाड़ते हुए जैसे ही अंदर घुसा चाची जी की जान निकल गई। अनवर भाई रितु चाची के बालों को और जोर से खींचते हुए अपना लंड अंदर बहार करने लगे और दूसरे हाथ से कभी चाची जी की गांड को मारते और कभी उनकी चुचियों को दबाते। चाची जी सिहर रही थी और चुदाई के कारण चिल्ला रही थी।

उनकी चिकनी चूत से कहाँ निकल रहा था। अनवर भाई: ले रंडी ले…मेरा लंड बहुत आग थी ना तेरे जिस्म में। देख मेरा लंड कैसे चोद रहा है तेरी चूत को.ऋतु चाची : आआअह्ह्ह्हह्ह धीरेर्री…. मेरी चूत फट जाएगी…. आआआअह्हह्हह…..अनवर भाई: साली छिनार तेरी चूत फाड़कर हाय ये मेरा लंड शांत होगा आज। देख रंडी आज मैं तेरी चूत को बिना कंडोम के चोद रहा हूँ। यही औकात है तेरी और तेरी चूत की। मेरे लंड का माल जब तेरी चूत में जायेगा तो तू मेरे नजायज़ बहुत की रांड माँ बनेगी। शायद मेरे बच्चे के करण हाय तेरे खानदान में कोई मरद पैदा होगा।

ऋतु चाची: आआअहह बहुत दर्द हो रहा हैईईई…। हाय ऐसा ना करो अनवर भाई….मैं एक शादी शुदा औरत हूं मेरे बारे में कुछ तो सोचो। अनवर भाई जोर जोर के झटके लगते हुए बोले: अनवर भाई: साली तू मेरी रखील है. तू पालगी मेरे बच्चे को अपने पति का बच्चा बना के। समझी अब तेरा घर ये कोठा है और तू मेरी रखील है भूल जा अपने पति को।

अनवर भाई ने रितु चाचीजी की कमर को पकड़ा और उनको गोदी में उठा के खड़े होगे। अन्होने चाची जी को पलट दिया और अपने लंड पर बिठा दिया। अब वो खड़े खड़े उनको चोद रहे हैं. अपने पति ऋतु चाची जी के होंठों पर रख कर वो चाची जी की चूत में खड़े-खड़े अपना लंड पेलने लगे। उन दोनो के बदन की गर्मी से पूरा कर्म गरम हो गया था। उन दोनो का बदन पसीने से भर गया था और वो चाची जी को चूमते और पेलते जा रहे थे। चाची जी की चूत भी अब मस्त हो गई थी।

चाची भतीजा चुदाई कहानी अगले भाग में जरी है।

ऋतू चाची हॉट रंडी रेश्मा बनकर चुदी- 3

3सम कैम सेक्स का मजा पहली बार एक मस्त लंड को अपनी चूत में पकाए वो अब मस्त हो गई थी वो भी अनवर भाई के बालों को पकड़ने के लिए लगी थी। ऋतु चाची : हाऐइइइइइइइइइइ… क्या लंड है आपका अनवर भाई… मत रुको पेलते जाओ अपना लंड मेरी चूत के अंदर बहुत मजा आ रहा है।

मत रुको मेरे राजा… हाऐइइइ… आअह्हह्हह्हह्हह्हह…. आआहहहअनवर भाई: साआअल्लीइ…मजा तो मुझे बीहाय बहुत आ रहा है तेरे नरम बदन से खेलने में और तेरी टाइट चूत मारने में… क्या गजब माल है तू… आआहहहह ये ले साली रंडी.. ये ले… ऋतु चाची: हायइइइइइइ मर जाऊं मैं तेरे लंड पे।

आज तक जिंदगी में ऐसा मजा कभी नहीं आया था। हाईईई… मस्त कर दिया है मेरेको तेरे लंड ने… क्या फौलाद है…. आआअहह हाऐइइइइ…. मैं आज से सिर्फ और सिर्फ तेरी रंडी हूं… तेरे लंड की गुलाम.. आआआह्ह्ह…. और जोर से देखो… आआअहह…. अनवर भाई ने अपने बाद में बहुत प्यार किया और जोर से पेलना शुरू कर दिया।

चाचीजी की बातें सुनके उनका जोश और भड़क गया और वो और बेहमी से रितु चाची को चोदने लगे। चाचीजी को बिस्तार पे लेता कर अब वो उनके ऊपर चढ़ गए और ऋतु चाची के मुँह को चूमते चाटते वो उनके पूरे चेहरे को छूने लगे। एक हाथ से चुचियांन्न मसलते हुए वो अपने लंड को आगे पीछे कर रहे थे। चाची जी का बदन सिकुड़ने लगा और चाची जी ने अपनी चूत को टाइट करते हुए अनवर भाई का लंड जकड़ लिया।

ऋतु चाची जी अनवर भाई के मजबूत हाथों में पिघलने लगी और दूसरी बार अपना पानी चोद के अधमरी हो गई। मगर अनवर भाई तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। अपना आसन बदलते हुए अब उन्हें चहसी जी को ऊपर कर दिया और खुद लेट गए। चाची जी उनक फौलादी लड़े के ऊपर बैठ के ऊपर नीचे होने लगी। अनवर भाई अब सीधे उनकी क्लिटोरिस और बची हुई दानी को चोद रहे हैं। कुछ ही देर में चाची वापस मस्त हो गई और जोर जोर से कूदने लगी और साथ में अनवर भाई भी चाचीजी की चुचियों को कसके निचोड़ते हुए तेजी से अपना लंड पेलने लगे।

दोनों ही अपने जिस्म की आग और प्यास को बुझाने के लिए पागल हो रहे थे। जैसे जैसे अनवर भाई अपना सारा माल चोदने के करीब आने लगे वो उतनी ही तेजी से पेलने लगे। चाची जीब ही मस्त होकर आखें बंद कर के बस मस्त हो कर अपना काम ज्वाला शांत करने में लगी थी। अनवर भाई: हाअन्नन्न रानी… आआह्ह्ह बहुत मजा आ रहा है… आआह्ह्ह साली मस्त कर दिया है आज तूने मुझको… ऋतु चाची: आआह्ह्ह्ह अनवर भाई आआह्ह्ह्ह… अब अनवर भाई अचानक से लंड पेलते चाची जी से लिपट गये। चाची जिब ही पागलों की तरह उनको अपनी बाहों में बहारने लगी।

डोनो जोर जोर से आहेन भरने लगे और अनवर भाई ने एक आखिरी जोर के झटके के साथ अपना सारा माल उनकी चूत में गिरा दिया। चाची जी ने भी अपना पानी चोद दिया और अनवर भाई के ऊपर गिर गई और उनको चूमने लगी। अनवर भाई धीरे-धीरे अपना लंड पेल जा रहे थे और फिर उनकी चोट से अपना लंड निकल लिया। रितु चाची जी की चूत फूल गई थी सुजान के कारण। रितु चाची के झटों पर अनवर भाई का माल गिरा हुआ था।

उनकी पूरी चूत माल से भर गई थी। वो दोनो पूरी तरह संतुष्ट हो कर बिस्तर पर लेते हुए थे। रितु चाची अनवर भाई के लंड को हाथों से पकड़ के सहला रही थी और अनवर भाई उनके बब्बन को हिला रहे थे। अनवर भाई: मजा आया या नहीं तेरेको मेरी रानी। रितु चाची: हाऐइइइ बहुत मजा आया। आज जा कर मैं पूरी औरत बनु हूँ। आपके लंड का पानी मेरी चूत की आग शांत हो गई है। अनवर भाई: साली तेरे जैसी कातिल रंडी पर मेरा लंड 3सम कैम सेक्स भी बहुत दिनों से खराब हुआ है।

 

तेरी कातिल जवानी ने मेरे लंड को पागल कर दिया है। ये कह कर अनवर भाई रितु चाची को चूमे लगे और अपनी बाहों में भरने लगे। थोड़ी देर बाद वो उठे और दारू के पैग बना के चाची को पिलाने लगे। वो दोनों दारू पी के नशे में दूसरे के हिस्सेदार से खेल रहे थे। कभी चाची जी उनके लंड को सहलाती कभी चूमती। अनवरभाई ऋतु चाची की चूत में उंगली करते थे और बुब्बन को डांटते हुए चूम रहे थे।

तभी अनवर भाई बोले: अनवर भाई: सुनो भड़वे राजेश. मैं: बोलिये अनवर भाई. अनवर भाई: बड़ा मस्त माल लाया है आज तूने. अब मेरा काम अपने चाचा को फोन कर के बोल कि तेरी चाची आज अपनी सहेली का यहाँ गई है और वहीं रुकेगी और तुम दोनो कोई काम में व्यस्त हो। साला मेरेको कोई अशांति नहीं मांगता है।

मैं: जैसा आप बोलोगे अनवर भाई. अनवर भाई: आज रात तेरी चाची मेरा बिस्तार गरम करेगी और तू और तेरा चुत्तड़ दोस्त जा कर किसी और रांड को बजायो। समझे.मैं: ठीक है अनवर भाई. जैसा आप बोलो. रितु चाची जी अनवर भाई की बाहों में लेती हुई उनको चूम रही थी और हम दोनो अनवर भाई के कमरे से निकल के बाहर जा रहे थे।

हमने अनवर भाई के कहने पर कैमरे को ऑन ही रख दिया था। मगर अंदर का नजारा हम मिस नहीं करना चाह रहे थे और अनवर भाई की रंडियों में हमें आज पहली बार कोई दिलचस्पी नहीं थी। हम दोनों गेट के बाहर खड़े हो कर अंदर का नजारा देख रहे थे। रितु चाची : क्यूं नहीं जाने दिया मेरेको हां. अब क्या इरादा है आपका आज।अनवर भाई: हा हा हा… आज तो तू रात भर मेरे बिस्तर पर गरम करेगी रानी।

कहीं नहीं जाने दूंगा तेरेको. सुन आज से तू ऋतु हो गी अपने घर पे। इस कोठे पर तेरा नाम होगा रेशमा। अनवर की राखाइल रेशमा रानी. रितु चाची : और तुम होगे मेरे चुद्दकड़ भड़वे अनवर मियाँ। मेरे मालिक. महज़ लंड डेटा. अनवर भाई: साली चिनार बहुत जल्दी हाय रंडियों जैसी बात करना सीख गई है तू। बहुत जल्दी बहुत आगे जायेगी तू. ऐसे ही मस्त बातें करते हैं और एक दूसरे की बॉडी से खेलते हुए अनवर भाई का लंड वापस तैयार हो रहा था।

वो लंड खड़ा हो रहा था और अनवर भाई अपनाप्यारी रांड रेशमा रानी को चूम ते जा रहे थे। चाचीजी भी गरम होने लगेंगी। अनवर भाई ने अचानक चाचीजी की गांड में उंगली डाल दी और चाची जी ने एक सेक्सी सी आह निकली… आआहह. उसके बाद तो जो हुआ वो देख कर मैं पागल ही हो गया था। अनवर भाई ने रितु चाची को दूसरी तरफ मोड़ दिया और उनकी गांड में अपनी नाक को घुसा दिया और सुंघने लगे।

थोड़ी देर बाद उन्हें अपनी जीभ से चाची जी की गांड को चाटना शुरू कर दिया। चाची जी मस्त हो गई थी वो अनवर भाई के लौड़े को अपनी पकड़ में लाने लगी। अनवर भाई उठे और रितु चाची की गांड को फेला दिया और अपना लंड उनकी गांड के छेद पर पोजीशन बनाने लगे।इससे पहले कि रितु चाची कुछ समझती और बोलती अनवर भाई ने एक जोर का झटका लगाया और अपना लंड रितु चाची की गांड मैंने पेल दिया. रितु चाची बहुत जोर से चिल्लायी और शोर मशीन लगी।

अनवर भाई ने अपने हाथ से रितु चाची का मुंह पकड़ के बंद किया और एक और झटके में अपना पूरा लंड चाची जी की गांड के अंदर घुसा दिया। थोड़े देर हल्के हल्के झटके मारने के बाद ऋतु चाची का दर्द थोड़ा बहुत कम हुआ और वो कुछ शांत हुई तो अनवर भाई चाची जी के बब्बन को बहस हुए उनकी गांड में लंड आगे पीछे करते रहे। ऋतु चाची तो बस आंखें बंद कर के सिसकियां भरती हुई मजे ले रही थी. अब दर्द काबू में होता देख कर अनवर भाई ने वही अपना जानवर रूप दिखाया दिया और बेरहामी से जोर जोर से अपना लंड रितु चाची की गांड में आगे पीछे करने लगे।

अन्होन रितु चाची को ऐसा चोदा कि रितु चाची की 7वीं पीढ़ी भी चुदाई को भूला न पायेगी। दर्द से बेहाल चाची जी रो रही थी और मस्ती भी ले रही थी। अनवर भाई ने अपनी पूरी हवस चाची के गामद पे निकल दी। हौसी दरिंदे की तरह उन्हें रितु चाची ने अपनी राखाइल रेशमा बना डाला। गांड मारते-मारते अनवर भाई ने अपनी दो उंगली चाची जी की चूत में घुसा दी। चाची जी को तो अपनी वासना की आग में कुछ समझ नहीं आ रहा था और वो सिर्फ गरम गरम सिसकियाँ भर रही थीं।

अब जब अनवर भाई झड़ने वाले थे तो उन्हें झटके से अपना लंड निकला और रितु चाची को पलटकर उनके मुँह में अपना लंड डाल दिया दीपक। रितु चाची लॉलीपॉप की तरह उनके दानव लंड को चूस रही थी। उसके बाद अनवर भाई ने अपना लंड निकाला और रितु चाची के मुँह के सामने उसको जोर जोर से हिलाने लगे। फिर वो अचानक जोर से चिल्लाए और अपना सारा माल रितु चाची के चेहरे, आंखों और होठों पर गिरा दिया। बच्चा हुआ माल उनकी चुचियों पे भी डाल दिया। रितु चाची समय एक बहुत ही सस्ती सी गलती लग रही थी। उनका वीडियो मार्केट में धूम मशीन वाला था।

अब उनको लंड का चस्का लग चुका था. अब ये आग सिर्फ लंड के पानी से ही जल सकती है। अनवर भाई का काम अब भी पूरा नहीं हुआ था। वो रितु चाची को पूरी रांड बना कर ही हर मन्ने वाले थे। अन्होन रितु चाचीजी के चेहरे और बुब्बन पे पड़े माल को चमचे से उठा कर एक गिलास में भरा और चाची जी को अपना चेहरा चाटने को बोला।

उसके बाद उन्होंने वो माल का गिलास रितु चाची जी को पिला दिया और एक ब्रश से अपने दांत अपने माल से ब्रश करने को बोला। रितु चाची जी के पास कोई और रास्ता ना था। धीरे-धीरे वो भी इस गंदी सी हरकत को एन्जॉय करने लगी और अनवर भाई के माल से ब्रश करते हुए उसे खेलने लगी।

कुछ देर खेलने के बाद उन्हें वो सारा माल एक झटके में पेशाब लग गया। ये सब होने के बाद अनवर भाई खड़े हुए और चाची जी के पूरे बदन पर वापस मुटना शुरू कर दिया और बोला की: “अब तू सिर्फ मेरी ही सिर्फ मेरी है रेशमा रानी। मेरी रखैल तेरी जवानी के हर एक रस को मैं चूस जाउंगा साली छिनाल” रितु चाची अधमरी हालत में पड़ी हुई कर रही थी। तभी अनवर भाई चिल्लाये: अनवर भाई: अबे बहन के लौड़े बहार से झाँक ना बंद करो और अंदर आओ।

मेरेको मालोम था कि तुम दोनों भड़के कहीं नहीं जाओगे। बहुत मस्त माल है तेरी चाची. इस का जिस्म बेच के जो भी कमाई होगी वो आधी-आधी बातें ठीक है। अब बुझा लो अपना हवस इसके साथ। चोदो और 3सम कैम सेक्स चोदो साली छिनार को। हम दोनो एक दूसरे का चाँद देख ने लगे और एक सेकंड में कपड़े उतार के रितु चाचीजी पे चढ़ गये। हम दोनो ने रात भर चाची जी को चोदा। थोड़ी देर बाद तो लगा कि मर गई है रंडी की बच्ची मगर हमें तो अपना हवस शांत करने से मतलब था और हम रात भर चाची जी को चोदते रहे।

कंप्यूटर ठीक करने गया तो पड़ोसन भाभी ने खुद खोल दी चूत

मेरा नाम राहुल है। मैं २५ साल का हूं और रायपुर में ही रहता हूं। हमारे पड़ोस में रहती हैं रेखा भाभी। उम्र करीब ३२ साल, लेकिन देखने में अभी भी कॉलेज की लड़की जैसी लगती हैं। गोरी-चिकनी त्वचा, भरी-भरी देह, गोल-गोल स्तन और कमर का वो नाजुक मोड़… भाभी को देखते ही मन में आग लग जाती थी। उनके पति अक्सर बाहर रहते थे जॉब की वजह से। भाभी घर पर अकेली रहतीं और कभी-कभी हेल्प के लिए मुझे बुला लेती थीं।

एक दिन शाम को उनका फोन आया।

“राहुल बेटा, कंप्यूटर में कुछ प्रॉब्लम हो गया है। स्क्रीन पर कुछ भी नहीं आ रहा। आकर देखोगे?”

“जी भाभी, अभी आता हूं।”

मैं टूल्स का बैग लेकर सीधा उनके घर पहुंच गया। भाभी ने दरवाजा खोला। वो हल्के गुलाबी सलवार कमीज में थीं। कमीज का दुपट्टा थोड़ा ढीला था, जिससे उनकी गहरी गर्दन और ऊपर वाले गोरे गोरे मांसल भाग साफ दिख रहे थे। मेरी नजर वहां रुक गई। भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा, “आओ अंदर।”

कंप्यूटर टेबल पर रखा था। मैं बैठ गया और चेक करने लगा। वायरिंग में कुछ इश्यू था। जैसे-जैसे मैं काम कर रहा था, भाभी मेरे पीछे खड़ी होकर देख रही थीं। उनकी सांसों की हल्की गर्माहट मेरी गर्दन पर पड़ रही थी।

“राहुल, तुम्हें कितना अच्छा आता है ये सब…” उन्होंने धीरे से कहा।

मैंने मुड़कर देखा। उनकी आंखों में एक अलग सी चमक थी। मैं मुस्कुराया, “भाभी, आपकी मदद करना तो मेरा काम है।”

कुछ देर बाद कंप्यूटर ऑन हो गया। भाभी खुश हो गईं। “वाह! तुम तो जादूगर हो।” उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा। वो स्पर्श सामान्य से ज्यादा देर तक रहा। मैंने महसूस किया कि उनकी उंगलियां हल्के से दबा रही हैं।

“भाभी, पानी पिलाइए ना।” मैंने कहा।

वे किचन गईं। जब वापस आईं तो उनके हाथ में दो ग्लास थे। बैठते वक्त उनकी सलवार थोड़ी ऊपर चढ़ गई, मोटी-मोटी जांघें झलक गईं। मैं नजर हटा नहीं पाया। भाभी ने देख लिया। लेकिन शर्माने की बजाय वे हल्के से मुस्कुराईं।

हम दोनों बातें करने लगे। उन्होंने बताया कि पति पिछले १५ दिन से बाहर हैं। घर अकेला लगता है। मैंने धीरे से कहा, “भाभी, अगर कभी कुछ चाहिए तो बता देना। मैं हूं ना।”

उन्होंने मेरी आंखों में देखा। “सच में? सब कुछ?”

उस “सब कुछ” में छुपा इशारा समझते देर नहीं लगी। मैंने हौले से उनका हाथ पकड़ लिया। भाभी ने हाथ नहीं छुड़ाया। बल्कि उंगलियों को और कस लिया।

“राहुल… मैं जानती हूं तुम मुझे कैसे देखते हो,” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा। “मुझे भी अच्छा लगता है।”

मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। मैंने आगे बढ़कर उनके होंठों को अपने होंठों से छू लिया। भाभी ने आंखें बंद कर लीं और धीरे-धीरे जवाब दिया। किस गहरा होता गया। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेलने लगी।

मैंने उन्हें गोद में उठा लिया और बेडरूम की तरफ ले गया। भाभी मेरी गर्दन में चिपक गईं। उनके नरम स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। बेड पर लिटाते ही मैंने उनकी कमीज का पहला बटन खोला। सफेद ब्रा से ढके हुए भारी-भारी स्तन बाहर झांक रहे थे।

“धीरे राहुल… आज पूरा समय है,” भाभी ने शर्माते हुए कहा।

मैंने उनकी कमीज पूरी उतार दी। ब्रा का हुक खोलते ही उनके गुलाबी-गुलाबी निप्पल्स सामने आए। मैंने एक को मुंह में ले लिया। भाभी की सांसें भारी हो गईं। “आह… राहुल… अच्छा लग रहा है…”

मैं चूसता रहा, हल्के से दबाता रहा। भाभी की कमर उठ-उठकर मुझसे सट रही थी। मैंने उनकी सलवार का नाड़ा खोल दिया। अंदर हल्का लेस वाला पैंटी था, जो पहले से ही गीला हो चुका था।

मैंने पैंटी उतारी। भाभी की साफ-सुथरी, गुलाबी चूत पूरी तरह नम थी। मैंने उंगलियों से हल्के से सहलाया। भाभी कांप उठीं।

“राहुल… तुम्हें देखकर कितना दिन से मन करता था…” उन्होंने स्वीकार किया।

मैंने अपना मुंह उनकी जांघों के बीच ले जाकर चूमना शुरू किया। मेरी जीभ उनकी क्लिटोरिस पर घूम रही थी। भाभी दोनों हाथों से मेरे बाल पकड़कर दबा रही थीं। उनकी आहें कमरे में गूंज रही थीं – “उफ्फ… हां… वहां… और गहरा…”

कुछ मिनटों बाद भाभी का शरीर तन गया। वे जोर से कांपीं और पहली बार झड़ गईं। उनके मुंह से मीठी-मीठी चीख निकली।

अब मेरी बारी थी। मैंने पैंट उतारी। मेरा लंड पहले से ही पूरा खड़ा और सख्त हो चुका था। भाभी ने उसे देखा और हाथ में ले लिया। “कितना मोटा है…”

वे उसे धीरे-धीरे सहलाने लगीं। फिर आगे झुककर मुंह में ले लिया। भाभी का गर्म और नम मुंह मेरे लंड को चूस रहा था। मैं आनंद से कराह उठा।

“भाभी… बहुत अच्छा कर रही हो…”

कुछ देर चूसने के बाद भाभी लेट गईं और टांगें फैला दीं। उनकी आंखों में इच्छा थी। मैं उनके ऊपर चढ़ गया। लंड की टिप को उनकी चूत पर रगड़ने लगा। भाभी ने खुद ही उठकर उसे अंदर लेने की कोशिश की।

धीरे-धीरे मैं अंदर घुसा। उनकी चूत बहुत टाइट और गर्म थी। पूरी तरह घुसते ही भाभी ने लंबी सांस ली। “आह… भर गया…”

मैं धीमी गति से स्टार्ट किया। हर थ्रस्ट के साथ उनके स्तन हिल रहे थे। मैं उन्हें चूमता, गर्दन चूसता, निप्पल्स पर काटता। भाभी मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थीं।

“जोर से राहुल… मुझे अपना बना लो…”

मैं रफ्तार बढ़ाने लगा। कमरे में चुटकी बजाने जैसी आवाजें और हम दोनों की आहें भर गईं। भाभी की चूत मेरे लंड को जोर से दबा रही थी। मैंने उन्हें चारों खाने चित्त करके फिर से घुसा। इस बार और गहराई तक।

भाभी का दूसरा ऑर्गेज्म आ गया। वे पूरी तरह कांप उठीं। मैं भी करीब था।

“भाभी, मैं आने वाला हूं…”

“अंदर ही… भर दो मुझे,” उन्होंने कहा।

मैंने आखिरी जोरदार धक्के दिए और पूरा माल उनके अंदर उड़ेल दिया। दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे।

कुछ देर बाद भाभी मेरे सीने पर सिर रखकर लेटीं। “आज के बाद तुम मेरे कंप्यूटर के अलावा मेरी सारी जरूरतें भी देखोगे ना?”

मैं मुस्कुराया और उनके बालों में हाथ फेरते हुए बोला, “हां भाभी… जब चाहो, बुला लेना।”

उस रात हम दो बार और मिले। दूसरी बार उन्होंने ऊपर बैठकर मुझे राइड किया। उनके स्तन मेरे मुंह के सामने उछल रहे थे। तीसरी बार मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में चोदा। उनकी गोल-गोल गांड पकड़कर जोर-जोर से थपथपाता रहा। भाभी हर बार चीखकर झड़ जातीं।

सुबह होने तक भाभी पूरी तरह संतुष्ट थीं। उनके चेहरे पर वो चमक थी जो लंबे समय बाद आई थी।

पड़ोसन भाभी की कंप्यूटर रिपेयरिंग वाली चुदाई सिर्फ एक बार की घटना नहीं रही। उसके बाद हर हफ्ते कम से कम दो-तीन बार मैं उनके कंप्यूटर की “रिपेयरिंग” करने जाता। कभी तो कंप्यूटर खराब भी नहीं होता, फिर भी भाभी बुला लेतीं।

एक बार तो उन्होंने नाइट सूट पहनकर बिठाया और खुद ही मेरी गोद में बैठ गईं। “आज जल्दी करो… मन बहुत कर रहा है।”

हम दोनों अब एक-दूसरे के शरीर को अच्छी तरह जानते थे। भाभी को सबसे ज्यादा पसंद था जब मैं उनकी जांघों के बीच मुंह लगाकर चाटता। और मुझे सबसे ज्यादा उनका वो आह भरा स्वर – “राहुल… और जोर से… फाड़ दो अपनी भाभी की चूत…”

हमारा रिश्ता गुप्त था, लेकिन बेहद मीठा और संतोष भरा। पड़ोसन भाभी अब मेरी थी। उनकी हर इच्छा, हर जरूरत मैं पूरी करता। और वे मुझे वो प्यार देतीं जो कोई और नहीं दे सकता था।

पड़ोस की आंटी ने कहा “मुझे चोद दो बेटा” मैंने पूरी रात चोदा

मेरा नाम स्वीट गाय है। मैं 26 साल का दिल्ली का लड़का हूँ। मेरा फिगर ठीक-ठाक है और अंडरवियर के अंदर मेरा 7 इंच का मोटा, पावरफुल टूल किसी को भी दीवाना बना सकता है। आज मैं आपको अपनी जिंदगी की वो सच्ची और सबसे हॉट घटना सुनाने जा रहा हूँ जो मैं कभी नहीं भूल सकता। ये कोई बड़ी उपलब्धि वाली कहानी नहीं, बल्कि एक बेहद सेक्सी, मीठा और यादगार अनुभव है।

हमारे घर के ठीक बगल में अंकल अपनी पत्नी यानी आंटी और उनकी इकलौती बेटी के साथ रहते थे। मैं उन्हें अंकल-आंटी ही कहता था। आंटी 36 साल की थीं, लेकिन उनकी बॉडी देखकर कोई भी पागल हो जाए। उनके पास दो भरी-पूरी 40D साइज की विशाल चूचियां थीं जो हर वक्त टाइट कपड़ों में उभरकर नजर आती थीं। उनकी गांड गोल-मटोल, भारी और लहराती हुई थी। उनकी बेटी भी कॉलेज फर्स्ट ईयर में थी और काफी हॉट थी – अच्छी शेप की चूचियां और स्लिम फिगर। लेकिन मेरी नजरें हमेशा आंटी पर ही अटक जाती थीं।

जब भी मौका मिलता, मैं आंटी को चुपके से घूरता रहता। उनकी चलती हुई भारी गांड, उछलती चूचियां देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता और रात को उनके बारे में सोच-सोचकर मैं खुद को राहत देता। वो सच में एक सेक्सी बम थीं। हमारे घर में किसी भी पार्टी या फंक्शन पर वो लोग जरूर आते थे।

एक दिन हमारे घर पार्टी थी। मैं उन्हें इनवाइट करने उनके घर गया। दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। थोड़ी देर बाद जोर-जोर से नॉक करने पर दरवाजा खुला। वो बंद था लेकिन लॉक नहीं था। मैं अंदर घुसा, ऊपर उनके कमरे की तरफ गया और आंटी को आवाज लगाई। तभी आंटी की मीठी आवाज आई, “आ जाओ बेटा, सोफे पर बैठ जाओ। कुछ मैगजीन पढ़ लो। मैं अभी नहाकर आ रही हूँ।”

मैं सोफे पर बैठ गया और मैगजीन उलटने-पलटने लगा। कुछ देर बाद आंटी बाहर आईं। ओह माय गॉड! वो एक गुलाबी सिल्की नाइटी पहने थीं जो स्लिपलेस थी और काफी ट्रांसपेरेंट। उनकी भीगी हुई लंबी बालें कंधों पर बिखरी हुई थीं। नाइटी के अंदर से उनकी बड़ी-बड़ी चूचियां और भारी गांड का पूरा आउटलाइन साफ दिख रहा था। सफेद ब्रा और पैंटी की झलक भी आ रही थी। मेरा लंड तुरंत सख्त होकर पैंट में तंबू बना चुका था।

मैंने जल्दी-जल्दी कहा, “आंटी, शाम को हमारे घर पार्टी है, आप लोग आना।” लेकिन आंटी ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और बोलीं, “अरे बेटा, इतनी जल्दी कहाँ भाग रहे हो? पहले कुछ खा-पी तो लो। मैंने अभी-अभी नहाया है, थोड़ा रुक जाओ ना।” उनकी आवाज में वो प्यार और आकर्षण था जो मुझे रोक ले गया। मैं मना नहीं कर पाया।

उन्होंने मुझे अपने बेडरूम में बुला लिया। वहाँ वो बाल कंघी कर रही थीं। उनकी गीली पीठ चमक रही थी और नाइटी के पीछे से ब्रा-पैंटी पूरी तरह दिख रही थी। मैं उनकी कमर, गांड और चूचियों को घूरता रह गया। आंटी ने अचानक पीछे मुड़कर मेरी तरफ देखा। उनकी नजर मेरे पैंट के टेंट पर पड़ी और वो शरारती मुस्कान दे दीं। “क्या हुआ बेटा? तुम ठीक तो हो? मैं अच्छी लग रही हूँ क्या?”

मैं शर्म से लाल हो गया, लेकिन सच्चाई बोल दी, “हाँ आंटी… आप बहुत अच्छी लग रही हैं।”

उन्होंने नाजुक स्वर में पूछा, “और… सेक्सी भी?”

मैं हैरान रह गया, लेकिन बोला, “बहुत… बहुत सेक्सी आंटी।”

उनकी मुस्कान और चौड़ी हो गई। उन्होंने धीरे से दरवाजा बंद कर दिया (लॉक नहीं किया) और मेरे पास आईं। बिना कुछ कहे उन्होंने मुझे जोर से गले लगा लिया। उनकी नरम, गर्म बॉडी मेरे सीने से सट गई। मैं भी उनका साथ देने लगा। फिर उन्होंने मेरे होंठों पर गहरा, प्यार भरा किस किया। मैंने भी उनके लाल-लाल होंठों को जोश से चूस लिया।

मेरा दाहिना हाथ उनकी पीठ पर सरक गया और नीचे उनकी भारी गांड को सहलाने लगा। आंटी ने आह भरते हुए कहा, “उफ्फ… तुम्हारे हाथ कितने अच्छे लग रहे हैं बेटा… मुझे भी तुमसे बहुत अट्रैक्शन था… आज मौका मिल गया।”

मैंने उनकी नाइटी ऊपर की तरफ खींची। वो खुद ही हाथ उठाकर मदद कर रही थीं। अब वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में खड़ी थीं। उनकी 40D वाली मोटी चूचियां ब्रा से बाहर निकलने को बेताब थीं। मैंने ब्रा का हुक खोल दिया। उनकी भरी-पूरी चूचियां आजाद हो गईं। गुलाबी निप्पल्स पहले से ही सख्त और खड़े थे।

मैंने एक चूची मुंह में ले ली और धीरे-धीरे चूसने लगा। आंटी ने मेरे सिर को अपनी छाती से चिपका लिया और कराह उठीं, “आह्ह्ह… हाँ बेटा… चूसो… अच्छे से चूसो मेरी चूचियां… कितने दिनों से तरस रही थी मैं… हाँ… और जोर से…”

मैंने दूसरी चूची को हाथ से मसलते हुए नीचे मुंह ले जाया। उनकी नाभि चाटी, जीभ घुमाई। फिर उनकी पैंटी के ऊपर किस किया। पैंटी पहले से ही पूरी गीली थी। मैंने उसे भी उतार दिया। उनकी साफ, गुलाबी चूत चमक रही थी और उससे मीठा रस टपक रहा था।

मैं घुटनों पर बैठ गया और अपनी जीभ से उनकी चूत चाटने लगा। “उम्म्म… आह्ह्ह… हाय भगवान… कितना अच्छा लग रहा है…” आंटी की जांघें कांप रही थीं। मैंने जीभ अंदर डाली और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। आंटी मेरे बाल पकड़कर अपना कूस मेरे मुंह पर दबा रही थीं। “हाँ… यही… चाटो मेरी चूत… मेरा पति तो कभी ऐसा नहीं करता… मैं कितने दिनों से प्यासी थी… हाँ बेटा… चूसो… मुझे प्यार दो…”

थोड़ी देर बाद उनकी बॉडी तन गई। उनकी चूत सिकुड़ने लगी और उन्होंने जोर से कराहते हुए ऑर्गेज्म कर दिया। उनका गर्म, मीठा रस मेरे मुंह में भर गया। मैंने सब पी लिया।

अब मेरा लंड फटने को तैयार था। आंटी ने मुस्कुराते हुए मेरी पैंट खोली और अंडरवियर उतार दिया। मेरा 7 इंच का मोटा लंड लहरा रहा था। “वाह… कितना सुंदर और बड़ा… आज इसे पूरा मजा दूंगी,” कहते हुए उन्होंने उसे प्यार से चूम लिया। फिर लिक किया, गोलियों को चूसा और पूरा मुंह में ले लिया। वो ऊपर-नीचे सिर हिला रही थीं, बहुत प्यार और जोश से सक रही थीं।

मैं भी कराह रहा था, “आंटी… उफ्फ… बहुत अच्छा लग रहा है…”

जब मैं झड़ने वाला था तो उन्होंने लंड अपनी चूचियों के बीच ले लिया। मैं उनके मोटे, नरम स्तनों पर अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया। आंटी ने मुस्कुराकर अपनी चूचियों से उसे चाट लिया। “स्वादिष्ट है बेटा…”

अब असली मजा शुरू होने वाला था। मैंने कहा, “आंटी, आप ऊपर बैठकर मुझे चोदो ना… मैं देखना चाहता हूँ आपको।” वो पूरी तरह तैयार थीं। उन्होंने मेरे ऊपर सवार होकर मेरा लंड अपनी गीली चूत पर रगड़ा और धीरे-धीरे अंदर ले लिया। “आह्ह्ह… कितना मोटा और गर्म है… पूरी भर गया…”

फिर वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगीं। उनकी भारी 40D चूचियां उछल-उछलकर नाच रही थीं। मैं नीचे से धक्के दे रहा था। कमरे में “पच-पच” की सेक्सी आवाज और हम दोनों की तेज सांसें गूंज रही थीं।

“हाँ आंटी… तेज… बहुत अच्छा लग रहा है…”

“आह्ह… हाँ बेटा… और जोर से… मेरी चूत को प्यार से भर दो… हाँ… और तेज…”

उनकी चूचियां मेरे चेहरे के सामने उछल रही थीं। मैंने उन्हें दोनों हाथों से पकड़कर चूस लिया। आंटी मेरे होंठों पर किस करने लगीं। हम दोनों एक साथ चरम पर पहुंच गए। मैंने अंदर ही अंदर अपना पूरा लोड छोड़ दिया और वो भी कांपते हुए झड़ गईं।

हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। उनकी चूचियां मेरी छाती से सटी हुई थीं। कुछ देर बाद आंटी ने मेरे गाल पर प्यार भरा किस किया और धीरे से कहा, “ये हमारा राज रहेगा… जब भी मन करे, आ जाना। मैं हमेशा तैयार रहूंगी।”

उस दिन के बाद हम कई बार ऐसे मीठे, गर्म पलों का आनंद लेते रहे। लेकिन कुछ महीनों बाद मुझे पता चला कि वो विदेश चली गई हैं। वो यादें आज भी मेरे मन में ताजा हैं और जब भी याद आती है, मुस्कुराहट आ जाती है।

कविता आंटी ने नंगी होकर बुलाया और पूरी रात जोर से चुदवाया

नमस्ते, मैं गुरु राज हूँ। चेन्नई का लड़का, 24 साल का, फिट और एनर्जेटिक। मैं पुणे में अपने एक साल के कोर्स के लिए आया था, इसलिए मैंने वहाँ एक शानदार अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में 7वीं मंजिल का फ्लैट किराए पर ले लिया था। वो इलाके का सबसे ऊँचा बिल्डिंग था। मेरे साथ एक दोस्त भी रहता था, लेकिन ज्यादातर वक्त हम दोनों अपनी पढ़ाई और काम में व्यस्त रहते थे।

मेरे फ्लैट के ठीक सामने, बिल्कुल ऑपोजिट में एक और फ्लैट था। मेरी बेडरूम की बालकनी से उस फ्लैट का बाथरूम साफ-साफ दिखता था। वहाँ रहने वाली कविता आंटी हर रोज सुबह करीब 11 बजे नहाने आती थीं। वो 37-38 साल की थीं, लेकिन देखने में इतनी आकर्षक और सेक्सी कि कोई भी जवान लड़का एक बार देख ले तो नजरें हटा ही न पाए। उनका नाम कविता था। कोई बच्चे नहीं थे। पति कंपनी में अच्छी जॉब करते थे, लेकिन महीने में 10-15 दिन टूर पर रहते थे।

कविता आंटी का फिगर था 36-30-36 – गोल-मटोल चुचियां, नरम और गोल गाँड, गोरी-गोरी त्वचा, लंबे ब्राउन बाल, गोल चेहरा, लंबी सेक्सी गर्दन। वो हमेशा साड़ी पहनती थीं जो उनके बॉडी को और भी हॉट बना देती थी। हम कभी-कभी नीचे लिफ्ट में या कॉम्प्लेक्स के फंक्शन में मिलते तो बस मुस्कुरा देते। मैं कभी उनसे बात नहीं करता था, लेकिन दिल में हमेशा एक आकर्षण रहता था।

एक शनिवार की सुबह का वो दिन था। मेरा दोस्त टूर पर चला गया था, घर में मैं अकेला। सुबह से ही मन बोर हो रहा था। मैंने जे-लो की गाने ब्लास्ट कर दिए, थोड़ी देर दोस्तों से फोन पर बात की। 10 बजे तक मैंने सोचा, चलो नहा लेता हूँ, तरो-ताजा हो जाऊँ। नहाने के बाद मैंने कपड़े नहीं पहने क्योंकि घर खाली था। बस कमर में तौलिया लपेट लिया। बालकनी की तरफ गया। शरीर पर पानी की बूँदें चमक रही थीं, मसल्स टाइट दिख रहे थे।

जैसे ही मैं बालकनी में पहुँचा, नजरें सामने वाले बाथरूम पर पड़ीं। कविता आंटी पीले रंग की साड़ी पहने अंदर आईं। मैंने स्टेयर करना शुरू कर दिया। वो तौलिया रैक पर रखकर धीरे-धीरे साड़ी खोलने लगीं। वो नहीं जानती थीं कि कोई उन्हें देख रहा है। साड़ी पूरी खुल गई। अब वो ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थीं – दोनों पीले। फिर उन्होंने ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके… और उनकी ब्रा में कैद बड़ी-बड़ी गोल चुचियां बाहर झाँकने लगीं। ब्रा भी खोल दी। फिर पेटीकोट का नाड़ा खींचा… पैंटी उतारी। अब वो पूरी नंगी थीं।

मेरा लौड़ा एकदम खड़ा हो गया। बहुत हार्ड और फर्म। मैंने हाथ अपने लौड़े पर फेरना शुरू कर दिया। वो नहाने लगीं। पानी उनके गोरे बदन पर बह रहा था, चुचियाँ चमक रही थीं, गाँड हिल रही थी। अचानक उनकी नजर मेरी तरफ पड़ी। मैं डर गया। सोचा, अब शिकायत कर देंगी। लेकिन… वो और करीब आईं खिड़की के पास। पूरी नंगी अवस्था में मीठी-मीठी मुस्कुराईं। उनकी आँखों में शरारत और चाहत थी। मैंने भी मुस्कुरा कर जवाब दिया। फिर उन्होंने हाथ से इशारा किया – आ जाओ मेरे घर। मेरे पूरे शरीर में रोमांच दौड़ गया। मैंने तुरंत साइन दिया – आ रहा हूँ।

15 मिनट में मैं तैयार होकर उनके फ्लैट पहुँच गया। घंटी बजाई। दरवाजा खुला। वाह! कविता आंटी अब नीली साड़ी में थीं। बाल अभी भी गीले, गहरी नाभि दिख रही थी। साड़ी बहुत नीचे बँधी थी। लगता था ब्रा नहीं पहनी है – उनकी बड़ी चुचियाँ साड़ी को फाड़ने को तैयार थीं।

“प्लीज कम इन,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।
“थैंक यू,” मैं बोला।

वो मुझे सोफे पर बिठाया और खुद मेरे सामने बैठ गईं। मैंने पूछा, “आंकल कहाँ हैं?”
“वो काम से बाहर गए हैं, तीन दिन बाद आएंगे,” उन्होंने कहा।

मेरे मन में ख्याल आया – वाह, क्या सुनहरा मौका! फिर अचानक उन्होंने पूछा, “तो तुम्हें आज मुझे नहाते हुए कैसा लगा?”
मैं थोड़ा घबरा गया, लेकिन बोला, “बहुत अच्छा लगा आंटी…”
“और मुझे नंगी देखकर?” उनकी आँखों में शरारत थी।
मैंने हिम्मत जुटाई, “वो भी बहुत अच्छा था…”

वो उठीं, दरवाजा लॉक किया, वापस आईं और मेरे बगल में बैठ गईं। अब उनकी जाँघ मेरी जाँघ से छू रही थी। उन्होंने धीरे से कहा, “क्या तुम मुझे चोदोगे गुरु राज? मेरे पति मुझे पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाते… मैं रोज तुम्हें देखती हूँ, तुम्हारी मसल्स, तुम्हारी जवान एनर्जी… मुझे बहुत मन करता है तुमसे। आज मौका मिल गया है। मैं तुम्हें अपना बनाना चाहती हूँ… जो मन करे करो मेरे साथ।”

उनकी बातें सुनकर मेरा लौड़ा फिर से खड़ा हो गया। मैंने कहा, “हाँ आंटी… मैं भी चाहता हूँ।”

वो और करीब आईं। अपना हाथ मेरी गोद में रखा और मेरे होंठों पर हल्का सा किस किया। फिर मैंने उन्हें खींच लिया। हम दोनों के होंठ एक-दूसरे में घुल गए। जीभें एक-दूसरे के साथ खेलने लगीं। सलाइवा का स्वाद, गर्मी… पाँच मिनट तक हम दोनों जुनून से किस करते रहे।

मैंने उनकी साड़ी धीरे-धीरे खोल दी। अब वो ब्लाउज और पेटीकोट में थीं। मैंने उन्हें गोद में उठाया और बेडरूम ले गया। बेड पर पटक दिया। मैंने अपनी शर्ट उतारी, सिर्फ ट्राउजर में उनके ऊपर झुका। उनके गले, गालों, होंठों और उस सेक्सी नाभि पर किस करने लगा। नाभि इतनी गहरी थी कि लग रही थी छोटी-सी चूत। मैंने दो मिनट तक चूमा।

फिर ब्लाउज के बटन खोले। अंदर ब्रा नहीं थी। वाह! क्या खूबसूरत चुचियाँ – पूरी सफेद, हल्के ब्राउन निप्पल्स, बड़े और गोल। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया, चूसा, दबाया। वो आहें भरने लगीं, “आह्ह… उम्म… गुरु राज… मत छोड़ो… और जोर से चूसो…”

मैंने नीचे जाकर पेटीकोट का नाड़ा खोला। पैंटी नहीं पहनी थी। उनकी चूत बिल्कुल साफ और गीली चमक रही थी। मैंने पेटीकोट पूरी उतार दी। अब वो पूरी नंगी मेरे सामने लेटी थीं, साँसें तेज। उन्होंने सेक्सी स्माइल दी और बोलीं, “ये बदन अब सिर्फ तुम्हारा है… इसमें तुम्हारा राज है… जो करना है करो।”

मैंने अपनी पैंट और अंडरवियर उतार दी। मेरा लौड़ा रॉकेट की तरह खड़ा था। हम दोनों दिन के उजाले में नंगे थे। दोपहर के 12:30 बजे।

मैं उनके पैरों के बीच घुटनों पर बैठा, उनके जाँघों को मोड़ा। उनकी चूत की खुशबू इतनी मीठी थी कि मैं भूल ही नहीं सकता। मैंने मुंह लगाया, जीभ से चाटना शुरू किया। हाथों से चूत की दीवारें अलग कीं। अंदर गीला रस चमक रहा था। वो जोर-जोर से कराहने लगीं, “आह्ह… और जोर से चाटो… उमम्म…”

फिर मैं खड़ा हुआ। उन्हें खींचकर बोला, “मेरा लौड़ा चूसो।” उन्होंने बिना देर किए हाथ में पकड़ा, स्ट्रोक किया और मुंह में ले लिया। चूसने लगीं, जीभ घुमाती हुई। मैं स्वर्ग में था। आँखें बंद हो गईं। जब मैं झड़ने वाला था तो बोला। उन्होंने मुंह खोल दिया। मैंने पूरा गर्म वीर्य उनके मुंह और चेहरे पर उछाल दिया। कुछ बूँदें उनके होंठों से टपक रही थीं। उन्होंने सब पी लिया और मुस्कुराते हुए बोलीं, “और दो…”

फिर उन्होंने और जोर से चूसना शुरू किया। लौड़ा फिर से हार्ड हो गया। उन्होंने नरम स्वर में कहा, “अब मेरी चूत में अपना लौड़ा घुसाओ…”

मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में किया। पीछे से धीरे-धीरे अंदर डाला। वो शुरू में हल्का सा कराहीं, फिर पूरा आनंद आने लगा। मैंने उनकी गाँड पकड़ ली, चुचियाँ लटक रही थीं। धीरे-धीरे पंपिंग शुरू की। वो चीखने लगीं, “ओओओ गुरु राज… और जोर से चोदो… आह्ह… मैं तुम्हारी रानी हूँ… चोदो मुझे… मर जाऊँगी…”

हमने पोजीशन बदली। मैं लेट गया, वो ऊपर चढ़ गईं। अपनी चूत में लौड़ा डाला और झुककर राइड करने लगीं। उनकी बड़ी-बड़ी चुचियाँ उछल-उछलकर नाच रही थीं। मैंने दोनों हाथों से दबाईं, मसलीं। वो जोर-जोर से हिल रही थीं, “उम्ममम… आह्ह्ह्ह… कितना मजा आ रहा है…” उनके बाल मेरे चेहरे पर गिर रहे थे।

मैं फिर झड़ने वाला था। उन्होंने फिर मुंह में ले लिया। मैं खड़ा हो गया और गर्म वीर्य उनके मुंह में भर दिया। वो हर बूँद पी गईं।

फिर हम दोनों बाथरूम गए। शावर ऑन किया। एक-दूसरे को किस करते रहे। मैंने फिर उनकी चूत चाटी, उन्होंने मेरा लौड़ा चूसा। उस दिन हमने तीन बार सेक्स किया। शाम के 3 बजे तक। आखिर में हम एक-दूसरे की बाहों में लेटे रहे।

मैं जल्दी चला गया क्योंकि शाम को लोग आने वाले थे। लेकिन मैंने कविता आंटी को वादा किया – जब भी उनके पति टूर पर जाएँगे, मैं आऊँगा। और हमने वो वादा कई बार निभाया। जब भी मौका मिलता, हम दोनों जुनून से एक-दूसरे को भोगते। वो मेरा था, मैं उनका।

ये हमारी सेक्सी कहानी है… जो आज भी याद करके मेरे शरीर में रोमांच पैदा कर देती है।

साली की टाइट चूत का मजा – जीजू साली की हॉट देसी सेक्स स्टोरी

शादी को दो साल हो चुके थे। मैं, रोहन, अपनी बीवी प्रिया के साथ मुंबई में रहता था। प्रिया की छोटी बहन नेहा कॉलेज की पढ़ाई खत्म करके हमारे पास ही रहने लगी थी। नेहा उम्र में मुझसे काफी छोटी थी – बस 21 साल की, गोरी-चिट्टी, लंबे बाल, पतली कमर और वो कातिलाना अदाएं जो देखते ही दिल को छू जाती थीं। वो मुझे हमेशा जीजू कहकर चिढ़ाती, लेकिन उसकी नजरों में कुछ और ही चलता था। प्रिया जब ऑफिस जाती, तो घर में सिर्फ मैं और नेहा रह जाते। शुरू में तो सब नॉर्मल था, लेकिन धीरे-धीरे वो हंसी-मजाक बढ़ता गया।

एक दिन प्रिया को अपने ऑफिस के काम से दिल्ली जाना पड़ा, तीन दिन के लिए। घर में सिर्फ मैं और नेहा। सुबह प्रिया गई, तो नेहा किचन में नाश्ता बना रही थी। वो शॉर्ट्स और टाइट टॉप पहने थी, जिससे उसकी कर्वी बॉडी साफ दिख रही थी। मैं सोफे पर बैठा न्यूज देख रहा था, लेकिन नजर बार-बार उसपर जा रही थी। वो मुड़कर बोली, “जीजू, चाय पी लोगे? या कुछ और चाहिए?” उसकी आवाज में शरारत थी। मैंने हंसकर कहा, “चाय ही काफी है, लेकिन तुम्हारी मुस्कान के साथ।” वो शर्मा गई, लेकिन आंखें नीची करके मुस्कुराई।

दोपहर में बारिश शुरू हो गई। बिजली चली गई, घर अंधेरा हो गया। हम दोनों हॉल में बैठे बातें कर रहे थे। नेहा बोली, “जीजू, दीदी नहीं है तो बोर हो रहा है ना?” मैंने कहा, “बोर तो नहीं, लेकिन तुम्हारे साथ टाइम अच्छा लग रहा है।” वो मेरे पास सरककर बैठ गई। उसकी खुशबू मेरे नाक में घुस रही थी – वो हल्की सी परफ्यूम की स्मेल। हम पुरानी बातें करने लगे, कॉलेज की, शादी की। अचानक वो बोली, “जीजू, आप दीदी को इतना प्यार क्यों करते हो? वो तो इतनी स्ट्रिक्ट है।” मैं हंसा, “प्यार तो करता हूं, लेकिन तुम जैसी स्वीट कोई नहीं।” वो मेरी तरफ देखकर बोली, “सच में? मुझे स्वीट लगती हूं?” उसकी आंखों में चमक थी। मैंने उसके गाल पर हाथ फेरा, “बहुत स्वीट।”

वो चुप हो गई, लेकिन मेरे हाथ को नहीं हटाया। उल्टा, अपना सिर मेरे कंधे पर टिका दिया। बारिश की आवाज बाहर तेज हो रही थी, और अंदर हमारा दिल धड़क रहा था। मैंने धीरे से उसके बालों में उंगलियां फेरनी शुरू की। वो सांसें ले रही थी, गहरी-गहरी। फिर वो उठी, मेरे सामने खड़ी हो गई। “जीजू, मुझे गर्मी लग रही है।” कहकर उसने अपना टॉप ऊपर किया, ब्रा के ऊपर से ही उसकी छातियां साफ दिख रही थीं – गोल, मुलायम, टाइट। मैं कुछ बोल नहीं पाया। वो मुस्कुराई और मेरे गोद में बैठ गई। उसके होंठ मेरे इतने करीब थे कि मैं महसूस कर रहा था उसकी गर्म सांसें।

मैंने धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो पहले तो सहम गई, लेकिन फिर जवाब देने लगी। किस लंबा था, गीला, मीठा। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। मेरे हाथ उसकी कमर पर थे, फिर धीरे-धीरे ऊपर सरक गए। उसकी ब्रा के नीचे हाथ डाला, तो वो मुलायम छातियां हाथ में आ गईं। वो सिसकारी ली, “जीजू… आह…” लेकिन रुकने को नहीं बोली। उल्टा, मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी। हम दोनों एक-दूसरे को छू रहे थे, जैसे सालों से इंतजार कर रहे हों। वो मेरे ऊपर चढ़ गई, अपनी छातियां मेरे मुंह के पास लाई। मैंने उन्हें चूमा, चाटा, निप्पल्स को मुंह में लिया। वो कराह रही थी, “जीजू… कितना अच्छा लग रहा है…”

फिर हम बेडरूम में चले गए। मैंने उसे बेड पर लिटाया, उसके शॉर्ट्स उतार दिए। उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने उसे चूमा, नीचे से ऊपर तक। वो मेरे बाल पकड़कर दबा रही थी। “जीजू, मुझे छूओ ना… वहां…” मैंने उसकी पैंटी साइड की, उंगलियां उसकी चूत पर फेरी। वो कितनी टाइट थी, गर्म, रस से भरी। उंगलियां अंदर डालीं तो वो सिकुड़ गई, लेकिन खुशी से। वो बोली, “धीरे… लेकिन मत रुको।” मैं धीरे-धीरे उंगलियां अंदर-बाहर कर रहा था, और वो अपनी कमर उछाल रही थी। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि दो उंगलियां भी मुश्किल से जा रही थीं, लेकिन वो मजा ले रही थी, आंखें बंद करके।

मैंने अपना पैंट उतारा। मेरा लंड पूरा खड़ा था, सख्त। वो उसे देखकर मुस्कुराई, “जीजू, ये तो बहुत बड़ा है…” उसने हाथ में लिया, सहलाने लगी। फिर मुंह में लिया। उसकी गर्म जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी, ऊपर-नीचे। मैं पागल हो रहा था। कुछ देर बाद मैंने उसे रोका, “नेहा, अब नहीं रुक सकता।” वो लेट गई, पैर फैला दिए। मैं उसके ऊपर आया, लंड को उसकी चूत पर रगड़ा। वो गीली थी, तैयार। धीरे से अंदर डाला। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि पहले सिर्फ टॉप गया, लेकिन वो दर्द नहीं, मजा ले रही थी। “जीजू… और अंदर… पूरा…” मैंने धीरे-धीरे धक्का दिया, पूरा अंदर चला गया। वो चीखी नहीं, बस आह भरी, “ओह… कितना अच्छा… भर गया…”

अब हम रिदम में थे। मैं धीरे-धीरे पेल रहा था, और वो नीचे से कमर हिला रही थी। उसकी टाइट चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी, जैसे छोड़ना ही नहीं चाहती। हर धक्के में वो कराह रही थी, “जीजू… तेज… और तेज…” मैं स्पीड बढ़ा दी। उसके मुलायम बदन को छूते हुए, छातियां दबाते हुए। वो मेरे कंधों पर नाखून गड़ा रही थी, लेकिन प्यार से। हमारा पसीना मिल रहा था, सांसें तेज। उसकी चूत से आवाजें आ रही थीं – चप-चप। वो बोली, “जीजू, मैं झड़ने वाली हूं…” मैंने और जोर लगाया। वो कांप गई, चूत सिकुड़कर मेरे लंड को दबाने लगी। वो झड़ गई, पूरा बदन कांप रहा था।

मैं भी नहीं रुका। कुछ देर और पेला, फिर उसके अंदर ही झड़ गया। गर्म रस उसकी टाइट चूत में भर दिया। हम दोनों हांफ रहे थे, एक-दूसरे से चिपके। वो मेरे सीने पर सिर रखकर बोली, “जीजू, ये सबसे बेस्ट फीलिंग थी। आप कितने अच्छे हो…” मैंने उसे किस किया, “तुम्हारी टाइट चूत का मजा ही अलग है, नेहा।”

उसके बाद हम नहाए साथ में। शावर के नीचे फिर किस किया, छुआ। लेकिन अब आराम से। शाम को खाना बनाया, साथ खाया। रात को फिर बेड पर। इस बार वो ऊपर आई। मेरे लंड पर बैठ गई, धीरे-धीरे अंदर लिया। उसकी टाइट चूत फिर से मुझे पागल कर रही थी। वो ऊपर-नीचे हो रही थी, बाल बिखरे हुए, मुंह से सिसकारियां। मैं नीचे से उसके कूल्हों को पकड़कर मदद कर रहा था। वो बोली, “जीजू, मुझे आपका लंड बहुत पसंद है… हमेशा चाहिए।” मैंने कहा, “जब चाहे ले लो, बेबी।”

तीन दिन ऐसे ही बीते। हर वक्त प्यार, सेक्स, मजा। प्रिया वापस आई तो सब नॉर्मल हो गया, लेकिन नेहा की नजरें अब भी शरारत भरी थीं। जब मौका मिलता, चुपके से छू लेती, किस कर लेती। वो टाइट चूत का मजा मैं कभी नहीं भूल सकता। नेहा अब भी हमारे पास रहती है, और जब दीदी नहीं होती… तो हमारा सीक्रेट गेम चलता रहता है।

साली चंचल की कुंवारी चूत की सील तोड़ी और बच्चा दिया

मैं संजू एक बार फिर आप लोगों के सामने अपनी आपबीती लेकर आ गया हूँ। सबसे पहले सभी चूत वालियों और लंड वालों को मेरा नमस्कार। मेरे बारे में आप जानते ही हैं – मैं 38 साल का शादीशुदा मर्द हूँ और अब तक करीब 50 से ज्यादा चूतें चोद चुका हूँ (रेगुलर वाली गिनती अलग है)। ये वाकया बिल्कुल ताज़ा है और मैं चाहता हूँ कि इसे पढ़कर आप भी अपनी चूत और लंड का पानी रगड़-रगड़ कर निकालें।

पिछले महीने ऑफिस के काम से मैं दिल्ली गया था। वहाँ मेरे रिश्ते के बड़े भैया रहते हैं, मैं उनके घर ही रुका। काम तो दो-तीन दिन का था, लेकिन मेरी रिटर्न फ्लाइट दो दिन बाद की थी। काम एक ही दिन में निपट गया, तो अगले दिन मैं फ्री था। भैया-भाभी दोनों जॉब पर चले गए थे। मैं अपने रूम में कुछ पढ़ रहा था कि अचानक डोरबेल बजी। सोचा कोई कोरियर होगा। दरवाज़ा खोला तो सामने भाभी की सबसे छोटी बहन चंचल खड़ी थी।

मुझे देखकर वो चौंकी, फिर पहचान गई। मैंने बताया कि दीदी और जीजा घर पर नहीं हैं, शाम को आएँगे। उसे अंदर आने को कहा, सोफे पर बिठाया, पानी-चाय दी और खुद उसके सामने बैठ गया। उसका चेहरा उदास था, आँखें नम। चंचल करीब 27 साल की है – भाभी से कहीं ज्यादा सुंदर, बॉडी एकदम मस्त। 34-28-34 का फिगर, 5’3″ हाइट, पेट बिल्कुल फ्लैट, चूतड़ गोल-गोल उभरे हुए, चुचियाँ सुदौल और कसी हुईं, कमर पतली। कुल मिलाकर स्वर्ग की अप्सरा लगती थी। दो साल पहले उसकी शादी हुई थी।

मैंने पूछा, “क्या हुआ चंचल? इतनी उदास क्यों लग रही हो?” पहले तो वो चुप रही, फिर बोली, “दीदी कब आएँगी?” मैंने कहा, “शाम छह बजे।” फिर पूछा, “कोई ज़रूरी काम था?” वो कुछ देर सोचती रही, फिर खुल गई। उसका पति तलाक देना चाहता है। सास ने बच्चा न होने की वजह से झगड़ा करके उसे मायके भेज दिया और तलाक का नोटिस भिजवा दिया। असल में कमी उसके पति में है – वो कर ही नहीं पाता। लेकिन घरवाले मानने को तैयार नहीं। वो हर वक्त तलाक की टेंशन और अंदर की सेक्स की आग से जल रही थी।

मैंने धीरे से पूछा, “तेरी असली प्रॉब्लम क्या है?” वो बोली, “बच्चा नहीं हो रहा, इसलिए तलाक दे रहे हैं।” मैंने कहा, “डॉक्टर को दिखाओ ना।” वो शर्मा कर बोली, “मुझमें कोई कमी नहीं है संजू जी। बच्चा तो उंगली से थोड़े न होगा?” मैं समझ गया। फिर बोली, “वो चाहते हैं तो होता ही नहीं।” मैंने कहा, “तो तलाक लेकर दूसरी शादी कर लो।” वो बोली, “पापा की औकात नहीं दूसरी शादी कराने की, और मुझे उनसे बदला भी लेना है। जानबूझकर एक कुंवारी लड़की की ज़िंदगी बर्बाद की है। लेकिन बिना बच्चे के वो मुझे वापस नहीं लेंगे।”

ये सुनकर वो रोने लगी। बोली, “मेरी तकदीर ही खराब है संजू जी, कोई रास्ता नहीं दिख रहा। आखिर में ज़हर खाकर जान दे दूँगी।” मैं उठा, उसके पास गया। उसके सिर पर हाथ फेरा, गालों से आँसू पोंछे। उफ्फ… कितने मुलायम गाल थे। मैं यूँ ही सहलाते-सहलाते उसे अपनी तरफ खींच लिया। फिर खड़ा किया और बोला, “परेशान मत हो, कोई न कोई रास्ता निकल आएगा।”

उसे दिलासा देने के लिए मैंने उसे बाँहों में ले लिया। वो भी भावुक होकर और ज़ोर से लिपट गई। मेरे हाथ उसकी पीठ पर, फिर चूतड़ों पर फिसलने लगे। नरम-नरम उभरे हुए चूतड़… और उसकी सख्त चुचियाँ मेरे सीने में दबने लगीं। मैंने उसके माथे पर किस किया। वो और कसकर लिपट गई और कान में बोली, “संजू जी, एक बात कहूँ?” मैंने कहा, “बोलो।” वो बोली, “आज मुझे सच में आपकी ज़रूरत है। मेरी मुसीबत का एक ही रास्ता दिख रहा है – आप मुझे बच्चा दे दो।”

मैं चौंका, “ये क्या कह रही हो? तुम मेरे भाई की साली लगती हो।” वो बोली, “हिम्मत करके इतनी बड़ी बात आपसे कह दी। जीजा जी तो दीदी को भी माँ नहीं बना पाए। तुम्हारे दो बच्चे हैं… बस एक मुझे भी दे दो। अगर तुमने मना किया तो मैं किसी बाहर वाले से कर लूँगी, बदनामी होगी। मेरी ज़िंदगी का सवाल है संजू जी।”

वो फिर रोने लगी। मैंने उसे चुप कराने के लिए ज़ोर से लिपटा लिया, पीठ सहलाई, माथा चूमा। और यहीं से सब शुरू हो गया। वो पागलों की तरह मुझे किस करने लगी – मुँह पर, गालों पर। उसके लाल, रसीले होंठ देखकर मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए। पहले नरम-नरम किस, फिर चूसने लगा। वो आँखें बंद कर लीं। लंबा किस चला, दोनों की साँसें तेज़ हो गईं। जब होंठ छोड़े तो उसके होंठ और लाल हो गए थे। वो कसकर लिपटकर मेरे सीने में सिर छुपा लिया।

गरम किस से मेरा लंड खड़ा हो गया। वो मेरी पीठ सहलाते हुए दूसरा हाथ आगे लाई और लंड पर रख दिया। लुंगी के अंदर हाथ डालकर लंड बाहर निकाला। मेरा मोटा, तगड़ा लंड देखकर उसकी आँखों में चमक आ गई। “ओह माँ… इतना लंबा… इतना मोटा… कितना सख्त है!” उसने दोनों हाथों से पकड़ा और अचानक झुककर लंड चूम लिया। लंड फनफना उठा। वो कान में बोली, “संजू जी, अब मत तड़पाओ… जल्दी आ जाओ, बर्दाश्त नहीं हो रहा।”

मैं भी पूरा गरम था। उसे भैया-भाभी के बेडरूम में ले गया। पहले साड़ी उतारी, फिर ब्लाउज़। ब्रा खोलते ही वो शर्मा गई, चुचियों पर हाथ रख लिया। मैंने धीरे से हाथ हटाया, चुचियों को चूमा, हथेली से दबाया। वो सिसकारी, “इश्ह…” मैंने निप्पल जीभ से चाटा, फिर मुँह में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। वाह… क्या मस्त चुचियाँ थीं! लगता था उसके निकम्मे पति ने कभी इनका प्यार नहीं किया। थोड़ी देर चूसते ही उसकी शर्म भाग गई। वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी, “संजू जी जल्दी कीजिए… आज लग रहा है मैं औरत बन जाऊँगी… उफ्फ आपने मेरे अंदर आग लगा दी है… मैं मर जाऊँगी!”

उसकी आँखें मस्ती से लाल हो गई थीं। उसने मेरा हाथ पकड़कर पेटीकोट के ऊपर से चूत पर रख दिया। मैंने नाड़ा खोला, पेटीकोट नीचे खींचा। वो शर्म से पलट गई। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। मैंने उसे आगे झुकाया। उसकी फूली हुई, गदराई गोरी चूत पीछे की तरफ उभर आई। चूत के गुलाबी होंठों से रस की बूँदें टपक रही थीं। एक भी बाल नहीं – एकदम साफ, गोरी-गोरी चूत। मैंने चूत पर किस किया तो वो सीधी हो गई।

मैं घुटनों के बल बैठ गया। टाँगें फैलाईं और चूत का दाना चूसने लगा। दाना धीरे-धीरे सख्त होकर बाहर निकला। मैंने होंठों के बीच लिया, चूसते हुए बाहर खींचा और छोड़ा – कई बार। उसकी चूत से रस का झरना बहने लगा। वो चूतड़ मेरे मुँह पर दबाकर कराह रही थी, “आह्ह… ओह्ह… संजू जी… ये क्या कर दिया… पहली बार मेरी चूत की प्यास महसूस हो रही है… मैं मर जाऊँगी इस आनंद से… और… और…”

मैंने उसके चूतड़ दोनों हाथों से पकड़े और रस भरी चूत को पागलों की तरह चाटने लगा। उसकी चूत की प्यारी-प्यारी खुशबू मेरे दिमाग में चढ़ गई। मैं दीवाना होकर चूत और आसपास के हिस्से को चूमने-चाटने लगा। बीच-बीच में जीभ निकालकर रानों को भी चाटता। वो मस्ती से भरकर बोली, “हाय राजा… जीभ से चाटो ना… अब मत तड़पाओ… मेरी चूत को चाटो… जीभ अंदर डाल दो… जीभ से चोदो!”

उसकी नशीली चूत की खुशबू ने मुझे पूरी तरह पागल बन दिया। मैंने उसे बेड पर बिठाया, खुद ज़मीन पर। उसकी जाँघें फैलाईं, कंधों पर रखीं और जीभ से चूत के होंठ चाटने लगा। वो मस्ती से बड़बड़ाने लगी और चूतड़ आगे खिसकाकर चूत मेरे मुँह से सटा दी। उसके चूतड़ हवा में लटक रहे थे। मैंने जीभ पूरी की पूरी चूत में ठेल दी और अंदर की लाल दीवारों को सहलाने लगा। वो तिलमिला उठी, चूतड़ उचकाकर मेरी जीभ पर चूत दबाने लगी।

“हाय संजू जी… क्या मज़ा आ रहा है… अब जीभ अंदर-बाहर करो… चोदो राजा… जीभ से चोदो मुझे… तुम ही मेरे असली सैयां हो… पहले क्यों नहीं मिले… अब सारी कसर निकालूँगी… दो साल से तड़प रही हूँ… चोदो मेरी चूत को!”

मुझे भी जोश चढ़ आया। मैंने तेज़ी से जीभ अंदर-बाहर करने लगा। वो नीचे से कंबर उचकाकर मुझे चोद रही थी। मैंने जीभ कड़ी करके स्थिर कर ली और सिर आगे-पीछे करके चोदने लगा। उसका मज़ा दोगुना हो गया। वो ज़ोर-ज़ोर से चूतड़ उचकाते हुए बोली, “और जोर से संजू जी… आज मैं तुम्हारी हो गई… ज़िंदगी भर तुमसे चुदवाऊँगी… आज मुझे गर्भवती कर दो!”

वो झड़ने वाली थी। ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाते हुए चूत मेरे चेहरे पर रगड़ने लगी। मैं पूरी तेज़ी से जीभ लपलपाकर चाट रहा था। जब जीभ उसकी बच्चेदानी से टकराई तो उसका बाँध टूट गया। उसने जाँघों में मुझे जकड़ लिया, चूत मेरे मुँह से चिपका दी। चूत का पानी पिचकारी मारकर निकला – दो-तीन बार – मेरे चेहरे पर बहने लगा। मैंने चूत के दोनों होंठ मुँह में दबाकर उसका अमृत पीने लगा। ये उसकी ज़िंदगी का पहला ऑर्गेज़्म था।

चूत चाटने से वो पूरी पागल हो गई। मेरे सिर के बाल पकड़कर मुझे ऊपर खींच लिया। अब मैंने उसे बेड पर लिटाया – चूतड़ बाहर की तरफ, पैर लटकते हुए। उसके पैर अपनी कमर पर उठाए और लंड को चूत के सूराख पर रगड़ा। चूत एकदम कुंवारी लग रही थी – गुलाबी होंठ चिपके हुए, छेद टाइट। सुपारा चूत पर रखा तो उसका बदन काँपने लगा। बोली, “जल्दी घुसाओ संजू जी… अब रहा नहीं जा रहा… अंदर चींटियाँ रेंग रही हैं।”

मैंने कहा, “तेरी चूत बहुत टाइट है, थोड़ा दर्द होगा… सहन करोगी?” वो बोली, “डाल दो… दर्द की परवाह मत करो… आज पहली बार इतनी चुदास महसूस कर रही हूँ।” मैं खुश हो गया। चूत पहले से गीली थी, फिर भी थूक लगाकर लंड पर मला और धक्का मारा। सुपारा अंदर गया। वो चीखी, “आह्ह… धीरे… कितना मोटा है… चीर गई…”

मैं उसके ऊपर लेट गया, होंठ चूसने लगा। एक मिनट बाद तेज़ धक्का मारा – आधा से ज्यादा लंड अंदर। वो ज़ोर से चीखी, “हाय मर गई… बहुत दर्द… निकालो!” लेकिन मैंने पैरों में कैंची डाल रखी थी। फिर किस करके पूछा, “थोड़ा और है बस।” वो बोली, “पहली बार है ना इसलिए धीरे…” मुझे सरप्राइज़ हुआ। वो बोली, “संजू जी, मैं आज तक कुंवारी हूँ। उनका कभी खड़ा होता ही नहीं था। थोड़ा-बहुत हुआ भी तो बाहर ही झड़ जाता था।”

मेरा दिल बल्लियों उछल पड़ा – आज एक शादीशुदा लेकिन कुंवारी चूत की सील टूटने वाली है। लंड अंदर नहीं जा रहा था – सील मोटी हो गई थी। मैंने किस और बातों में उलझाकर मौका देखा और पूरी ताकत से आखिरी धक्का मारा। लंड उसकी कुंवारी चूत को फाड़ता हुआ पूरा अंदर, बच्चेदानी तक पहुँच गया। वो तड़पी, आँखें बाहर, ज़ोर की चीख – “आईईईई… माँ… मर गईईई!” मुझे धकेलने की कोशिश की लेकिन मैंने कसकर पकड़ रखा था।

वो दर्द से रोने लगी। मैंने चेहरा चूमा, चुचियाँ चूसीं, चूतड़ सहलाए। पाँच मिनट बाद दर्द कम हुआ। मैंने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। धीरे-धीरे उसे भी मज़ा आने लगा। बोली, “थोड़ा जोर से…” मैंने रफ्तार बढ़ाई और आखिर में पूरा हमाच-हमाच कर चोदने लगा। वो टाँगें ऊपर करके चुदवाने लगी, पागलों की तरह बोली, “हाय संजू जी… आज पूरा दिन कसकर चोद दो… मैं आपकी हो गई… आज ही मेरे पेट में अपना बच्चा डाल दो… और जोर से…”

वो झटके से लिपट गई और चीखी, “आह्ह संजू जी… मैं मर गई… मेरी चूत से पेशाब निकलेगा… निकाल लो…” मैंने कहा, “निकलने दो” और कसके धक्के मारे। उसका गरम रस लंड पर लगा। वो बुरी तरह झड़ रही थी, मुझे चिपककर चूतड़ झटके दे रही थी। ज़िंदगी में पहली बार लंड से चुदकर झड़ी।

मैंने रफ्तार थोड़ी धीमी की ताकि देर तक टिकूँ। उसे चूमा, चुचियाँ चूसीं और फिर शुरू। धीरे से पूछा, “चंचल, मुझे से चुदवाने में बुरा तो नहीं लगा ना?” वो मुझे और कसकर जकड़कर नीचे से चूतड़ उचकाते हुए बोली, “नहीं संजू जी… मेरी जवानी तुम्हारे नाम हो गई। जब चाहो, जहाँ चाहो डुबकी लगा लो। चुदाई में इतना मज़ा है, मुझे पता ही नहीं था। आज तुमने मुझे औरत बनाया… मोटे लंड से मेरी चूत का दरवाज़ा खोला… और मुझे बच्चा भी दोगे।”

ये सुनकर मैं और जोश में आ गया। कमर हिलाकर चोदने लगा। वो भी हर शॉट का जवाब कंबर उचकाकर दे रही थी। कमरे में फिर फच-फच की मधुर आवाज़ गूँजने लगी। वो टाँगें ऊपर करके मेरी कमर पर कस लीं और ज़ोर-ज़ोर से चूतड़ उचकाकर चुदवाने लगी। मैंने स्पीड बढ़ाई। उसकी चूत ने फिर पानी छोड़ा, फच-फच और तेज़। वो हाँफते हुए बोली, “मैं तो गई… तुम्हारी रानी गई… उई माँ क्या ज़ालिम लौड़ा है… चोद डाला मुझे… मैं गईईई!”

मैं भी नहीं रुका। उसकी चूत इतनी गरम थी कि 4-5 तेज़ धक्कों बाद मैंने आखिरी धक्का मारा – सुपारा बच्चेदानी को धक्का देता हुआ और लंड ने पिचकारी मारते हुए ढेर सारा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया। मैं भी झड़ गया और चूमते हुए लंड अंदर तक डाले उसके ऊपर लेट गया।

वो कसकर लिपट गई और कान में बोली, “अभी बाहर मत निकालना… बच्चा होने के लिए पूरा पानी बच्चेदानी में जाना ज़रूरी है।” मैं लंड अंदर डाले ही लेटा रहा। फिर हाथ नीचे ले जाकर चूत टटोली – हाथ पर खून लगा। वो बोली, “अब विश्वास हो गया ना? मैंने आपको बिना चुदी चूत दी है।” मैंने कहा, “हाँ चंचल, आज से तुम मेरी जान हो, मेरी रानी। तुमने अपना कुंवारा शरीर मुझे सौंपा।”

15-20 मिनट बाद उठा। उसकी चूत ने सारा पानी सोख लिया था। थोड़ा बाहर आया तो खून से लाल। मैंने कहा, “अजीब बात है – तुम्हारी दीदी यानी मेरी भाभी की सील भी इसी बेड पर मैंने तोड़ी थी, शादी के चार दिन बाद। आज तुम्हारी भी। दोनों बहनों को एक ही बेड पर औरत बनाया।” वो हँसकर बोली, “बहुत अच्छा हुआ। इसलिए दीदी शादी के नौ महीने बाद माँ बनीं… अब नौ महीने बाद मैं भी बनूँगी।”

उस दिन मैंने उसे शाम चार बजे तक पाँच बार चोदा। हम दोनों नंगे ही लिपटे रहे। बाद में तीन साल तक लगातार चोदकर दो बच्चे पैदा किए। पहली बार में ही वो प्रेग्नेंट हो गई। किसी बहाने पति को बुलाया, वो कर तो कुछ नहीं पाया लेकिन बच्चे की खबर पर खुश होकर ले गया। उसे अपनी कमज़ोरी का पता था, इसलिए चुप रहा। अब वो ससुराल में खुश है, इलाज भी करा लिया। उसे शक तो है कि दोनों बच्चे मेरे हैं – शक्ल मेरी जैसी है।

अब वो मुझे अपने यहाँ नहीं आने देता, चंचल को भी नहीं भेजता। लेकिन चंचल मौका निकालकर मुझसे मिलती है। महीने में 2-3 दिन मेरे साथ रहती है और मैं उसे 4-5 बार चोद डालता हूँ।