टप्पू ने किया बबीता को प्रेगनेंट

सभी पाठकों को मालूम है कि बबीता को अभी तक कोई बच्चा नहीं हुआ था। बबीता और अय्यर की शादी को पूरे दस साल हो चुके थे, लेकिन अय्यर बबीता को माँ बनाने में नाकाम रहा था। बबीता, 32 साल की एक खूबसूरत औरत, जिसका गोरा रंग, भरी हुई चूचियाँ, और टाइट गांड हर मर्द का ध्यान खींचती थी। उसकी हँसी और बोलने का अंदाज़ इतना सेक्सी था कि कोई भी उसकी ओर आकर्षित हो जाए। दूसरी तरफ, अय्यर, 38 साल का, एक साधारण सा वैज्ञानिक, जिसे अपनी बीवी की खूबसूरती पर गर्व था, लेकिन बिस्तर पर वो बबीता की आग को शांत नहीं कर पाता था। और फिर था टप्पू, 21 साल का जवान लड़का, कॉलेज स्टूडेंट, लंबा, गोरा, मस्कुलर बॉडी, और एक ऐसा लंड जो किसी भी औरत को पागल कर दे। टप्पू का कॉन्फिडेंस और उसकी चाल-ढाल उसे सोसाइटी का सबसे चहेता लड़का बनाती थी।

एक सोमवार की सुबह, टप्पू अपनी चमचमाती बाइक पर कॉलेज के लिए निकल रहा था। उसने काले रंग की टी-शर्ट और टाइट जीन्स पहनी थी, जो उसकी मस्कुलर बॉडी को और निखार रही थी। जैसे ही वो सोसाइटी के कंपाउंड से गुज़र रहा था, उसकी नज़र बबीता पर पड़ी। बबीता ने टाइट सफेद कुर्ती और नीली लेगिंग्स पहनी थी, जिसमें उसकी भरी चूचियाँ और गोल गांड साफ झलक रही थी। वो अपने बालों को लहराते हुए तेज़ कदमों से कहीं जा रही थी।

टप्पू ने बाइक रोकते हुए ज़ोर से कहा, “गुड मॉर्निंग बबीता आंटी! आप कहाँ जा रही हो?”

बबीता ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “गुड मॉर्निंग टप्पू! मैं अपनी फ्रेंड के घर जा रही हूँ, सनराइज़ अपार्टमेंट, बस तीन घंटे के लिए।”

टप्पू ने तुरंत मौका देखते हुए कहा, “अरे आंटी, वो तो मेरे कॉलेज के पास ही है! आ जाओ, मैं आपको ड्रॉप कर देता हूँ, और बाद में पिक भी कर लूँगा।”

बबीता ने उसकी ओर देखा, उसकी मासूमियत भरी मुस्कान पर फिदा हो गई। “अरे, कितना स्वीट है तू टप्पू!” उसने कहा और बाइक पर पीछे बैठ गई। जैसे ही बबीता टप्पू के पीछे बैठी, उसकी चूचियाँ टप्पू की पीठ से टकराईं, और टप्पू को एक हल्का सा करंट सा लगा। बबीता ने अपनी बाहें टप्पू की कमर पर कस दीं, और उसकी उंगलियाँ धीरे से उसकी एब्स को टटोल रही थीं। टप्पू ने बाइक स्टार्ट की और दोनों सनराइज़ अपार्टमेंट की ओर निकल पड़े।

जब टप्पू बबीता को लेकर कॉलेज के सामने से गुज़रा, तो कॉलेज के सारे लड़के उसे घूरने लगे। “क्या माल पटा लिया टप्पू ने!” एक लड़के ने अपने दोस्त से फुसफुसाते हुए कहा। बबीता की टाइट कुर्ती में उसकी चूचियाँ उछल रही थीं, और उसकी लेगिंग्स में उसकी गांड का उभार साफ दिख रहा था। टप्पू को ये देखकर गर्व महसूस हुआ, और उसने बाइक की स्पीड और बढ़ा दी।

कॉलेज खत्म होने के बाद, टप्पू बबीता को पिक करने सनराइज़ अपार्टमेंट पहुँचा। बबीता बाहर इंतज़ार कर रही थी, और उसने अब एक हल्का मेकअप कर लिया था, जिससे वो और भी हॉट लग रही थी। टप्पू ने कहा, “आंटी, मुझे मॉल से एक जीन्स लेनी है, बस 10 मिनट का काम है। आप चलोगी?”

बबीता ने हँसते हुए कहा, “हाँ, क्यों नहीं! चल, मैं भी कुछ देख लूँगी।” दोनों मॉल की ओर निकल पड़े। मॉल में टप्पू ने एक टाइट ब्लू जीन्स पसंद की, और बबीता ने एक सेक्सी रेड ड्रेस चुनी, जो इतनी टाइट थी कि उसमें उसकी चूचियाँ और गांड पूरी तरह हाइलाइट हो रही थीं। टप्पू चेंजिंग रूम की ओर गया, लेकिन जल्दबाज़ी में उसने दरवाज़ा लॉक करना भूल गया। बबीता भी अपनी ड्रेस ट्राय करने के लिए चेंजिंग रूम की ओर गई, और गलती से उसी रूम में घुस गई जहाँ टप्पू था।

जैसे ही बबीता ने दरवाज़ा खोला, उसकी नज़र टप्पू पर पड़ी। टप्पू ने नीचे कुछ नहीं पहना था, और उसका 12.5 इंच का मोटा, काला लंड पूरी तरह तना हुआ था। उसका लंड इतना मोटा और लंबा था कि बबीता की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने ज़ोर से चीख मारी, “अरे टप्पू!”

टप्पू ने फटाफट दरवाज़ा लॉक किया और कहा, “अरे बबीता आंटी, आप मेरे रूम में क्यों आ गईं?”

बबीता ने हड़बड़ाते हुए कहा, “टप्पू, और कोई रूम खाली नहीं था!” उसकी साँसें तेज़ थीं, और उसकी आँखें बार-बार टप्पू के लंड की ओर जा रही थीं।

टप्पू ने हँसते हुए कहा, “ठीक है आंटी, मैं अपनी जीन्स ट्राय कर रहा हूँ, आप अपनी ड्रेस ट्राय कर लो।” बबीता ने हिचकते हुए अपनी कुर्ती उतारी। जैसे ही उसने कुर्ती खींची, उसकी भारी चूचियाँ ब्रा से बाहर उछल पड़ीं। उसकी काली ब्रा में उसकी चूचियाँ इतनी टाइट थीं कि लग रहा था ब्रा फट जाएगी। टप्पू की नज़रें उसकी चूचियों पर टिक गईं, और उसका लंड अब 12.5 से 15 इंच का हो गया। उसका लंड इतना सख्त था कि वो हिल भी नहीं रहा था।

बबीता ने टप्पू की हालत देखी और उसकी साँसें और तेज़ हो गईं। उसने अपनी लेगिंग्स भी उतार दी, और अब वो सिर्फ़ काली ब्रा और पैंटी में थी। उसकी पैंटी इतनी टाइट थी कि उसकी चूत का उभार साफ दिख रहा था। टप्पू का कंट्रोल अब टूट रहा था। उसने धीरे से कहा, “बबीता आंटी, आप तो बहुत सेक्सी हो… क… क्या मैं…?”

बबीता ने उसकी बात काटते हुए कहा, “टप्पू, ये गलत है… लेकिन…” उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। वो जानती थी कि अय्यर उसे कभी संतुष्ट नहीं कर पाया था, और टप्पू का ये विशाल लंड उसे पागल कर रहा था। उसने धीरे से अपनी ब्रा का हुक खोला, और उसकी भारी चूचियाँ आज़ाद हो गईं। उसकी चूचियाँ इतनी सख्त और गोल थीं कि टप्पू की साँस रुक गई।

 

टप्पू ने अब और इंतज़ार नहीं किया। वो बबीता के पास गया और उसकी चूचियों पर टूट पड़ा। उसने एक चूची को अपने मुँह में लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा। “आआह… टप्पू…” बबीता की सिसकारियाँ निकलने लगीं। उसने टप्पू के बाल पकड़ लिए और उसे और ज़ोर से अपनी चूचियों पर दबाने लगी। टप्पू ने दूसरी चूची को अपने हाथ से मसला, और उसका निप्पल इतना सख्त था कि टप्पू को लगा वो फट जाएगा।

बबीता ने सिसकारी लेते हुए कहा, “टप्पू, तेरा लंड… इतना बड़ा… मैंने कभी नहीं देखा…” टप्पू ने उसकी पैंटी की ओर देखा, जो अब पूरी गीली हो चुकी थी। उसने धीरे से बबीता की पैंटी उतारी, और उसकी गुलाबी चूत नज़र आई, जो पूरी तरह गीली थी और चमक रही थी। टप्पू ने अपनी उंगलियाँ उसकी चूत पर फिराईं, और बबीता की सिसकारी और तेज़ हो गई। “आआह… टप्पू… मत तड़पाओ…” उसने कहा।

टप्पू ने बबीता को चेंजिंग रूम की दीवार से टिका दिया और उसकी टाँगें चौड़ी कीं। उसने अपना मोटा लंड उसकी चूत पर रगड़ा, और बबीता की सिसकारियाँ अब चीखों में बदल गईं। “आआह… टप्पू… धीरे…” उसने कहा, लेकिन टप्पू का कंट्रोल अब पूरी तरह खत्म हो चुका था। उसने अपना लंड धीरे से उसकी चूत में घुसाया, लेकिन उसकी चूत इतनी टाइट थी कि सिर्फ़ आधा लंड ही अंदर गया। “आआह… टप्पू… तेरा लंड… इतना मोटा…” बबीता की आवाज़ काँप रही थी।

टप्पू ने एक ज़ोर का धक्का मारा, और उसका पूरा 15 इंच का लंड बबीता की चूत में समा गया। “आआआह… उउउह… टप्पू… मार डालेगा क्या…” बबीता चीख पड़ी। टप्पू ने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए, और हर धक्के के साथ बबीता की चूचियाँ उछल रही थीं। “थप… थप… थप…” की आवाज़ चेंजिंग रूम में गूँज रही थी। बबीता की सिसकारियाँ अब पूरे मॉल में सुनाई दे रही थीं। “आआह… उउउह… टप्पू… और ज़ोर से… फाड़ दे मेरी चूत…” उसने चीखते हुए कहा।

टप्पू ने अपनी स्पीड बढ़ा दी। उसका लंड बबीता की चूत को चीरता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था। बबीता की चूत से रस टपक रहा था, जो चेंजिंग रूम की फर्श पर गिर रहा था। टप्पू ने बबीता को घुमाया और उसे दीवार पर झुका दिया। उसने बबीता की गांड पर एक ज़ोर का चमाट मारा, और बबीता की चीख निकल गई। “आआह… टप्पू… तू कितना जंगली है…” उसने कहा।

टप्पू ने अपना लंड बबीता की गांड के छेद पर रगड़ा। “आंटी, आपकी गांड तो और भी टाइट लग रही है… थोड़ा एनल ट्राय करें?” उसने पूछा। बबीता ने हिचकते हुए कहा, “टप्पू… वो बहुत बड़ा है… मैं नहीं ले पाऊँगी…” लेकिन टप्पू ने उसकी बात अनसुनी कर दी। उसने अपना लंड धीरे से उसकी गांड में घुसाया, और बबीता की चीख पूरे मॉल में गूँज गई। “आआआह… टप्पू… फट गई मेरी गांड…” उसने चीखते हुए कहा।

टप्पू ने धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढ़ाई, और अब उसका लंड बबीता की गांड को चीर रहा था। “थप… थप… थप…” की आवाज़ के साथ बबीता की सिसकारियाँ मॉल में गूँज रही थीं। “आआह… उउउह… टप्पू… तू कितना मर्द है… आआह…” बबीता बार-बार चीख रही थी। टप्पू ने 15 मिनट तक उसकी गांड मारी, और बबीता की हालत ऐसी हो गई थी कि वो ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी।

फिर बबीता ने टप्पू को नीचे बिठाया और उसका लंड अपने मुँह में ले लिया। “उम्म… स्लर्प… उग्ग…” उसने ज़ोर-ज़ोर से टप्पू का लंड चूसा। उसका लंड इतना मोटा था कि बबीता का मुँह पूरा खुल गया। टप्पू ने बबीता के बाल पकड़ लिए और उसके मुँह को और ज़ोर से अपने लंड पर दबाया। “आआह… बबीता आंटी… आप तो कमाल हो…” टप्पू ने सिसकारी लेते हुए कहा।

बबीता ने टप्पू का लंड चूसते हुए कहा, “टप्पू… तेरा लंड… इतना मज़ा दे रहा है… आआह…” उसने टप्पू के लंड को चाटा, चूसा, और फिर से उसकी चूत में ले लिया। टप्पू ने फिर से बबीता की चूत को निशाना बनाया और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा। “थप… थप… थप…” की आवाज़ के साथ बबीता की चीखें फिर से गूँजने लगीं। “आआह… टप्पू… धीरे… मेरी चूत फट जाएगी…” उसने कहा, लेकिन टप्पू ने उसकी एक न सुनी।

टप्पू ने एक आखिरी ज़ोर का धक्का मारा, और उसका सारा माल बबीता की चूत में भर गया। इतना सारा माल था कि बबीता की चूत से ओवरफ्लो होकर चेंजिंग रूम की फर्श पर गिर गया। बबीता की चूत पूरी तरह फट चुकी थी, और वो थककर दीवार से टिक गई। उसने अपनी ज़िंदगी में पहली बार इतना ज़ोरदार और ब्रूटल सेक्स किया था। टप्पू ने भी हाँफते हुए कहा, “बबीता आंटी… आपकी चूत और गांड… बस मज़ा आ गया।”

दोनों ने अपने कपड़े पहने और चेंजिंग रूम से बाहर निकले। जैसे ही वो निकले, कुछ और औरतें चेंजिंग रूम में घुसीं और टप्पू का बचा हुआ माल चाटने लगीं। बबीता को ये देखकर थोड़ा अजीब लगा, लेकिन वो चुप रही।

दो दिन बाद, बबीता के पीरियड्स मिस हो गए। उसने डरते-डरते प्रेगनेंसी टेस्ट किया, और रिजल्ट पॉजिटिव आया। वो प्रेगनेंट थी। अय्यर दस साल में बबीता को प्रेगनेंट नहीं कर पाया, लेकिन टप्पू ने सिर्फ़ 10 मिनट में ये कर दिखाया। बबीता ने टप्पू को फोन किया और ये खबर दी। टप्पू तो खुशी से उछल पड़ा, लेकिन बबीता टेंशन में थी। उसका दिल धड़क रहा था, और वो सोच रही थी कि अब क्या होगा।

विधवा आंटी की चुदाई के बाद माल को मुंह पर झारा

मेरा नाम जिगनेश अग्रवाल है। मैं गुजरात के गाँधीनगर का रहने वाला हूँ। मैं हीरे का व्यापार करता हूँ। मेरा बड़ा सा शोरूम है जिसमे हीरे की सेल्स भी होती है और तराशने का काम भी होता है। मेरे शोरूम में रोज लाखो की सेल्स होती है। इस वजह से कई बार चोर, लुटेरे भी शोरूम को लूटने की कोशिश करते रहते है। मेरे यहाँ कुल 20 लोगो का स्टाफ है जिसमे 12 जेट्स स्टाफ है और 8 लड़कियाँ है। मैं सिर्फ खूबसूरत लड़कियों को ही जॉब कर रखता हूँ।

जब मैं उनका इंटरव्यू लेता हूँ तो पहले ही चूत की सेटिंग कर लेता हूँ। जो लड़की चुदने को तैयार हो जाती है उसे ही नौकरी देता हूँ। दोस्तों मैं क्या करूं हर समय मेरा लंड खड़ा ही रहता है। जितनी बुर चोदता हूँ उतनी ही मेरी प्यास बढ़ जाती है। मैं अपने यहाँ काम करने वाली आठो लड़कियों की बुर चोद चूका हूँ। कुछ दिन पहले मेरे यहाँ एक लड़की नौकरी छोड़ कर चली गयी थी। मैंने न्यूसपेपर में विज्ञापन दे दिया और एक मस्त 30 साल की आंटी नौकरी करने आ गयी। वो मुझसे उम्र में बड़ी थी इसलिए मैं उसको आंटी बोल रहा था। उसका इंटरव्यू मैंने लिया। वो सेल्स का काम जानती थी। उनकेपति गुजर चुके थे और वो विधवा औरत थी। उनका नाम शांति था।

“आंटी!! अंत में सबसे जरूरी सवाल की क्या आप मुझे खुश करोगी??” मैंने पूछा

वो कुछ नही बोली। मैंने उसे नौकरी दे दी। आंटी जी मेहनत से नौकरी करने लगी। वो सुबह 9 बजे शोरूम खुलने से पहले आ जाती और रात में 9 बजे ही जाती थी। उनकी मेहनत देखकर मैं बहुत खुश था। दोस्तों मेरे शोरुम में मेरे पिता जी भी बैठते थे। उनके सामने मैं किसी लड़की को लाइन नही देता था क्यूंकि वो बड़े सख्त मिजाज आदमी थे। पर उनके जाने के बाद मैं सीटियाबाजी में लग जाता था। अब मुझे कैसे भी करके आंटी को चोदना था। सोमवार वाले दिन मेरे पिताजी को डॉक्टर से मिलने जाना था। वो कार में बैठकर चले गये। मैं सीधा शांति आंटी के पास चला गया और उनसे मीठी मीठी बात करने लगा। मेरे स्टाफ में कुछ लड़के मेरी तरह ही चोदू टाइप के थे। उनको भी मैं सेल्स गर्ल्स की चूत दिलवा देता था। वो लोग मुझे देखकर मुस्की मारने लगे। वो इस बात पर हंस रहे थे की आज शांति आंटी की चूत चुदाई होने वाली थी।

“आइये!! स्टाफ रूम में चले” मैं शांति आंटी से बोला

वो मेरे पीछे पीछे चली आई।

“क्या बात है जिगनेश बेटा!!” वो कहने लगी

मैं हीरा का शोरुम चलाता था इसलिए मेरे पास हीरे की ज्वेलरी की कोई कमी नही थी। मैंने हीरे का एक छोटा सा डाईमंड पेंडेंट अपनी जेब से निकाला।

“आंटी!! मुझे लगता है ये आपका है” मैंने पेंडेंट को दिखाते हुए कहा

वो खुश हो गयी क्यूंकि ऐसे ही कोई मर्द किसी औरत को इतनी महंगी जेवेलरी नही दे देगा। डायमंड पेंडेंट को ले ली और देखने लगी। फिर मैंने उनको खुद ही गले में पहना दिया। वो समझ गयी की मेरा कोई स्वार्थ जरुर है।

“जिगनेश बेटा!! इतनी मेहरबानी क्यों?? कुछ चाहिये तो नही मुझसे??” वो हँसकर कहने लगी

आंटी भी समझ गयी थी की आखिर मुझे क्या चाहिये। वो जान गयी थी की मैं उनके गदराये बदन को भोग लगाना चाहता हूँ। उनकेबाद वो खुद ही मेरे से आकर चिपक गयी। किस चालु कर दी। मुझे चुम्मा लेने लगी। वो साड़ी ब्लाउस में बहुत जँच रही थी। उन्होंने गोल्डन कलर के कपड़े वाला ब्लाउस पहना था जो आगे से काफी खुला हुआ था। मैं उनके 36” के मस्त मस्त आम देख सकता था। शांति आंटी का फिगर काफी सेक्सी और सुडौल था। 36 32 36 का ऐसा फिगर था की किसी भी मर्द का लंड खड़ा करवा दे। मैं भी देखकर पागल हो गया। मैं भी उनको बाहों में भरके किस करने लगा।

“जिगनेश बेटा!! मैं तो विधवा हूँ। मेरे लिए इस तरह की जेवेलरी का कोई काम नही” वो बोली और डायमंड पेंडेंट मुझे लौटाने लगी। मैं उसी वक्त उनकी मांग में ऊँगली से झूठ मूठ सिंदूर भर दिया प्रतीकात्मक रूप में।

“लो अब आप विधवा नही हो!! आप की शादी अब मुझसे हो गयी” मैंने कहा

उनकेबाद वो इमोशनल हो गयी और मेरे गले लग गयी। मुझे सही मौका मिल गया था। मैंने शांति आंटी को कसके दोनों हाथों से जकड़ लिया और उनके ओंठ पर ओंठ रख दिया और जल्दी जल्दी चुम्बन लेने लगा। वो भी मुझे चूसने लगी। हमारा प्यार मोह्बब्ब्त इस तरह से चालू हो गया। हम दोनों अच्छे से किस करने लगे। दोस्तों शांति आंटी अभी भी अच्छी माल लगती थी। बस थोड़ी सी ऐज जादा लगती थी। पर उनकेबावजूद भी सेक्सी औरत थी। मैं उनकी गर्म गर्म साँसों को पीने लगा।

शांति आंटी भी मेरे होठो को चूसने लगी। कुछ देर बाद हम दोनों का चुदाई वाला मौसम बन गया था। स्टाफ रूम में टेबल कुर्सी लगी हुई थी जिस पर लोग बैठकर अपना लंच करते थे। मैं उसी बेंच पर बैठ गया और आंटी को भी बिठा दिया। मै फ़ौरन ही उनकी कड़ी कड़ी 36” की शानदार चूचियों पर हाथ लगा दिया और ब्लाउस के उपर से ही दबाने लगा। शांति आंटी “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ…उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ….” करने लगी। उनको भी मजा आने लगा।

“जिगनेश बेटा!! तेरा इरादा क्या है??” वो चिहुक कर पूछने लगी।

“मेरा इरादा तो आपकी मस्त मस्त बुर को चूसने का है आंटी जी” मैं बोला

वो कुछ नही बोली और ब्लाउस खोलने लगी। अपना ब्लाउस उतार डाली। उन्होंने काली रंग की ब्रा पहनी थी। दोस्तों शांति आंटी की 36” की चूचियां बड़े हिफाजत से उनकी ब्रा में कैद थी। मैं हाथ से दबाने लगा। उन्होंने ब्रा भी खोल डाली और साइड रख दी। जैसे ही मैंने उनके बड़े बड़े कबूतर को देखा तो मौज आ गयी। इतने बड़े बड़े दूध मैंने आजतक नही देखे थे। फिर मैंने उनको बैठने वाली बेंच पर लिटा दिया। बेंच काफी लम्बी थी जिसपर शांति आंटी आराम से लेट सकती थी।

वो लेट गयी। मैं भी उनके उपर लेट गया। मैंने अपना मुंह उनकी बड़ी बड़ी चूची पर रख दिया और किस करने लगा। हाथ से दाबना चालू कर दिया। वो “ओहह्ह्ह….अह्हह्हह…अई..अई. .अई… उ उ उ उ उ…” करने लगी। मैं हाथ में उनके आमो को लेकर कस कसके दबाने लगा। वो भी मजा पाने लगी। फिर मैंने चूसना चालू कर दिया। अब उनके गले में सिर्फ वही डायमंड पेंडेंट था जो मैंने उनको दिया था। मैं उनकी जवानी का आज पूरा का पूरा रस पीना चाहता था। इसलिए मैंने बिना समय गवाये उनके दूध को मुंह में लेकर चूसना चालू कर दिया। शांति आंटी सी सी ऊई उई करने लगी।

“बेटा धीरे धीरे चूसो!! दर्द होता है मेरे दूध में! आराम से!!” वो बोली

मैं चूसने लगा पर जल्दी ही मेरी स्पीड बढ़ गयी। आंटी के दूध की मैं क्या तारीफ़ क्यों। बहुत खूबसूरत और सुडौल थे। कड़ी कड़ी चूचियां थी और जरा भी लटकी हुई न थी। अच्छे से टाईट चूचियां थी। मैं दोनों हाथ से दोनों छाती को दबाता और मुंह में लेकर चूस रहा था। अपना मुंह और दांत चला चलाकर चूस रहा था। शांति आंटी पूरा सहयोग कर रही थी। मेरे सिर को पकड़कर चुदासी होकर सहलाती जा रही थी।

“चूस ले जिगनेश बेटा!! आज तुम मेरे आशिक बन जाओ” वो बोले जा रही थी आँख बंद करके

मैं धकाधक उनकी जवानी का रस पी रहा था। मैंने उनकी एक चूची को जब अच्छे से चूस डाला तो दूसरी वाली चूसने लगा।

“बेटा!! तुम तो बड़ी मस्त चुसाईं करते हो!!” वो बोली

मैं अब उनके गुप्त अंगो को देखना चाहता था। उनकी चूत और गांड के दर्शन करना चाहता था। मैंने अब उनके पेट से खेलना शुरू कर दिया। उस पर किस करने लगा। हाथ से सहलाने लगा। आंटी फिर से “आआआअह्हह्हह…..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….”करने लगी। वो भी अपनी साड़ी खोलने लगी। उसे भी उतार डाली। शांति आंटी ने आसमानी रंग का पेटीकोट पहना हुआ था। उसकी डोरी खोलने लगी। मुझे बड़ी मौज गयी। उनके पेटीकोट के अंदर ही उनकी मस्त मस्त चूत छुपी हुई थी। पेटीकोट को आंटी जी उतार डाली। मैं उनकी काली पेंटी से खेलने लगा। अब उनकी पेंटी पर मैं हाथ से जल्दी जल्दी सहलाने और मलने लगा। आंटी को मजा आने लगा।

“अच्छा लग रहा है जिगनेश बेटा!! और करो!! आआआअह्हह्हह…..” वो कहने लगी

मैं उनकी चुस्त काली पेंटी के उपर से सहलाने लगा और उनको खूब मजा दिया। उनकी मस्त मस्त डबलरोटी जैसी चूत मुझे उपर से दिख रही थी। मैं काफी चुदासा हो गया था और उपर से ही जीभ निकालकर चाटने लगा। शांति आंटी “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ.”करने लगी। उसके बाद मेरी कामुकता बढ़ गयी और मुझे उनकी पेंटी उतारनी पड़ी। दोस्तों जब उनकी मस्त मस्त सावली सलोनी चूत के दर्शन हुए तो चूत अपने ही रस से नहा चुकी थी। मैं भी झुककर उनकी चूत पर जीभ लगाकर जोर जोर से चाटने लगा। वो अपनी गांड उठाने लगी। उनकी हालत किसी रंडी जैसी हो गयी थी। मैं तो किसी सेक्सी कुत्ते की तरह चाट रहा था जल्दी जल्दी। मैं आज उनका पूरा रस पी लेना चाहता था। शांति आंटी टांग खोलकर बड़े मजे से मुझे अपनी मस्त मस्त रसीली बुर पिला रही थी।

उनकी चूत की मैं क्या तारीफ़ करूँ बड़ी सेक्सी और गुलाबी दिखती थी। किसी परी की तरह दिख रही थी। चूत के लब बड़े बड़े साइड साइड को लटक रहे थे। आंटी के हसबैंड ने उनको चोद चोदकर चूत फाड़ डाली थी। मैंने भी अपनी ऊँगली उनके फटे हुए भोसड़े में डाल दी और जल्दी जल्दी चलाने लगा। शान्ति आंटी “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी… हा हा.. ओ हो हो….” करने लगी। मेरी अंदर भी वासना और हवस का ज्वालामुखी फूट पड़ा। मैं आंटी की चूत में जल्दी जल्दी ऊँगली चलाने लगा जिससे उनको बड़ी कामुकता मिलने लगी। अब वो और तेज तेज आवाज निकालने लगी। मैं भी जोश में आकर एक हाथ से ऊँगली उनकी मस्त मस्त रसीली चूत में दौड़ाने लगा और जीभ लगाकर प्यासे कुत्ते की तरह चाटने लगा। शान्ति आंटी को बड़ा आनन्द मिलने लगा।

“करते रहो जिगनेश बेटा!!! मेरी चूत में और ऊँगली करो!!” वो अपनी कमर उठाकर कहने लगी

मैं उनकी बात मानने लगा। मैंने 17 18 मिनट उनके फटे भोसड़े में ऊँगली चलाकर उनको मार डाला। अब चूत को अच्छी तरह से चाट भी चूका था। मैं भी कपड़े खोलने लगा। लंड हाथ में लेकर हिलाने लगा। दोस्तों मेरा लंड 9” का बड़ा सा खीरे जैसा था। मैं हाथ में लेकर जल्दी जल्दी मुठ देने लगा। कुछ ही देर में लंड लड़की जैसा मजबूत हो गया।

“आओ बेटा!! अब मेरी प्यास बुझा डालो!! जल्दी से मोटे लंड से मुझे चोद डालो” शांति आंटी बोली और दोनों पैर खोल दी।

दोस्तों मेरे शोरुम के इस स्टाफ रूम की बेंच काफी पतली थी, इस वजह से ये डर था की कही आंटी काम लगवाते समय नीचे न गिर जाए। अब मुझे हिसाब से उनको चोदना था। मैंने बेंच के दोनों तरफ अपने पैर डाल दिए। फिर सामने शांति आंटी की गद्दीदार बड़ी सी उभरी हुई चूत मेरा इन्तजार कर रही थी। मैंने अपने लंड को पकड़ा और उनकी चूत की पिटाई करने लगा। वो “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ…ऊँ…ऊँ….”करने लगी। मैंने काफी पिटाई की उनकी चूत की। अब लंड के सुपाडे से उनके छेद पर रगड़ने लगा। वो आनंदित होने लगी। 5 मिनट मैंने उनकी चूत पर अपना गुलाबी सुपाडा रगड़ा। फिर धक्का मारकर अंदर डाल दिया। आंटी आऊ कहने लगी। अब मैंने उनकी ठुकाई शुरू कर दी।

काम लगाना शुरू कर दिया। आंटी मुंह बनाने लगी जैसे सब औरते बनाती है। मैंने धक्को की स्पीड धीरे धीरे बनानी शुरू कर दी। आंटी बेंच पर उछलने लगी। मुझे लगा की कही गिर न जाए, इसलिए मैंने उनके कंधे पकड़ लिए।

“….उंह उंह उंह हूँ.. ohh!! yes yes मजा आ रहा है जिगनेश बेटा!! और करो !! .अई…..”शांति आंटी भी मुझे प्रोत्साहित करने लगी

उनके हावभाव देककर मुझे जादा ख़ुशी मिल रही थी। दोस्तों वो भरे हुए खूबसूरत जिस्म वाली मालकिन थी। इसलिए उन जैसी संस्कारवान औरत को चोदना एक बड़े गर्व की बात थी। इसलिए मैं धकाधक उनका काम लगाने लगा। अब धीरे धीरे हम दोनों के बीच में बड़ी हवस वाला रिश्ता बन गया था। मैंने नीचे निगाह डाली तो मेरा लंड जल्दी जल्दी उनकी चूत के बिल में सटाक सटाक घुसकर तहलका मचा रहा था। आंटी जी “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..” बोले जा रही थी।

मैं जल्दी नही झड़ना चाहता था। इसलिए कुछ देर बाद जब मुझे लगा की आउट हो जाऊँगा तो मैंने जल्दी से लंड हाथ से पकड़कर बाहर खींच लिया। शान्ति आंटी दोनों टांग खोलकर किसी कुतिया की तरह बेंच पर मचलने लगी।

“जिगनेश बेटा!! मुझे अपना लंड चूसा दो” वो कहने लगी

मुझे भी उनका ऑफर अच्छा लगा। पर उससे पहले मैंने अपना मुंह उनकी बड़ी सी चूत पर लगा दिया और जल्दी जल्दी उसका खोया चाटने लगा। उनकी बुर अभी भी आग की तरह गर्म थी। मैं फिर से चाटने लगा। वो “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…” करने लगी और अपनी 36” की बड़ी बड़ी दूध को मसलने लगी। अपनी निपल्स को पकड़कर खुद ही मरोड़ने लगी। उनके ऐसे चुदक्कड वाले रूप में देखकर मेरी वासना और जाग गयी। मैं जल्दी जल्दी उनकी चूत का खोया चाटने लगा। फिर अपना लंड उनके मुंह में डाल दिया। वो चूसने लगी और हाथ में लेकर मुठ देने लगी। मुझे उस पतली की बेंच पर लेटना पड़ गया। शांति आंटी बैठ गयी। मेरे लंड को पकड़कर अच्छे से फेटने लगी। दोस्तों, एक बार फिर से मुझे आनन्द मिलने लगा। आंटी अब मेरे सुपाड़े को जीभ निकालकर चाटने लगी। उनको इतना मजा कभी नही आया था। कुछ देर गुलाबी सुपाडे को चाटी। फिर पूरा 9” लंड मुंह में उतार ली और मस्ती भरे अंदाज में चूसने लगी।

“क्या बात है आंटी जी!! आप तो किसी प्रोफेशनल रंडी की तरह चूसती हो जिसको पूरी ट्रेनिंग मिली होती है” मैं बोला

वो मेरी बात सुनकर और भी जोश में आ गयी और मस्ती से चूसने लगी। साथ में उनके हाथ बड़ी तीव्रता से फेटने लगी। दोस्तों एक बार फिर से मेरा लंड उनकी चूत फाड़ने को तैयार था।

“शांति आंटी!! अब आप मेरे मोटे लंड की सवारी करो!! इसको घुडसवारी का मजा लो!! आओ बैठो इसपर!!” मैंने कहा

मैं पतली सी उस लड़की की बेंच पर सम्भल कर लेट गया। शांति आंटी आकर मेरे लंड को अपनी मस्त मस्त चूत में घुसाकर लेट गयी। और झटके दे देकर सेक्स करने लगी। वो चुदाने लगी। मैं लेटे लेटे मजे लुटने लगा। धीरे धीरे शांति आंटी रफ्तार बना ली और लंड पर कूदने जैसी जैसे बच्चे रस्सी कूद वाला खेल खेलते है। मेरा 9” का मजबूत लंड उनकी बुर को फाड़ फाड़कर उसका हलुआ बनाने लगा। आंटी जी “……अई…अई….अई…..इसस्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….”करने लगी। उनका खुला हुआ भव्य स्वरुप मुझे दिख रहा था। वो मेरे सामने पूरी तरह से नंगी होकर लंड पर घुड़सवारी करने लगी। उनके सेक्सी गोरे जिस्म का एक एक अंग मुझे दिख रहा था। कुछ देर बाद धक्का देते देते आंटी झड़ गयी। उनका बदन ढीला पड़ गया। वो नीचे उतर गयी और बेंच पर लेट गयी। मैंने जल्दी जल्दी अपने लंड को फेटा और उनके मुंह पर माल की धार छोड़ दी।

टीवी देखने आई आंटी की चूत सहलाने लगा

ये मेरी सच्ची कहानी है। दोस्तों ये 16-17 साल पहले की बात है। उस समय सिर्फ मेरे ही घर में टीवी हुआ करता था क्यूंकि उस जमाने में टीवी बहुत महँगा हुआ करता था और कुछ लोग ही इसे खरीद पाते थे। नया नया टीवी चला था और मेरे पापा को टीवी देखने का बहुत शौक था इसलिए वो ले आये थे।

धीरे धीरे मेरे मोहल्ले के सब लोग मेरे घर टीवी देखने आने लगे। उस समय एक सीरियल टीवी पर आता था, जो बहुत प्रसिद्ध सीरियल था। मेरे मोहल्ले के सब लोग मेरे घर टीवी देखने आते थे। बच्चे तो बच्चे बड़े और बूढ़े भी मेरे घर टीवी देखने आया करते थे। दोस्तों मेरे घर के बगल में मिश्रा आंटी रहती थी।

वो स्वभाव से बहुत लालची औरत थी और मेरे घर आकर रोज दूध, चीनी, सब्जी, रोटी, ब्रेड माँगा करती थी। भगवान जाने वो कैसी लालची औरत थी की उसे सामान मांगने में बिलकुल शर्म नही आती थी। बाद में मुझे पता चला की वो अपने पति से खर्च के लिए पैसे मांग लेती थी पर सारे पैसों को वो बचा लेती थी और ऐसे ही काम चला लेती थी।

हम लोग उनहे मिश्रा आंटी कहते थे क्यूंकि वो मिश्रा जाति की थी। बाद में धीरे धीरे मुझे उनके चाल चलन में बारे में पता चला। उसके पति के नौकरी पर जाते ही उसके घर में कई मर्द आते थे और बारी बारी से उसकी चूत बजाते थे। जमकर उसकी रसीली बुर में लंड खिलाते थे और मिश्रा आंटी की चूत की आग की शांत करते थे।

वो गैर मर्दों से पैसो के लिए छिपकर चुदवा लेती थी। उसकी चुदाई की बात उसके पति को नही मालुम थी वरना वो उसकी माँ चोद देता। धीरे धीरे मुझे मिश्रा आंटी के चाल चलन के बारे में सब कुछ पता चल गया था। दोस्तों वो लालची भले ही हो पर उसका बदन बिलकुल भरा हुआ था।

धीरे धीरे मैं जब भी उसे देख लेता मेरा लंड खड़ा हो जाता था। मिश्रा आंटी के २ खूबसूरत बच्चे थे प्रियंका और राहुल। दोनों बच्चे दूध जैसे सफ़ेद थे पर मिश्रा जी तो बहुत काले थे। इसी से पता चलता था की वो मिश्रा अंकल के बच्चे नही थे। बल्कि मिश्रा आंटी जिन मर्दों को घर में बुलाकर चुदवा लेती थी वो बच्चे उनके ही थे।

पर मिश्रा अंकल गोरे बच्चों को देखकर बहुत खुश थे। उनको अपनी चुदकक्ड बीबी के बारे में कुछ पता नही था। धीरे धीरे मैं जान गया की अगर मैं मिश्रा आंटी को पटा लूँ तो इसकी चूत मुझे जरुर मिल जाएगी। इसलिए मैं अपने मिशन पर लग गया। मैं मिश्रा आंटी को खूब मस्का लगाने लगा और उसने हंस हंसकर बात करने लगा।

जब वो मेरे घर कुछ मांगने आती तो मैं उनको दे देता। फिर मिश्रा आंटी मेरे घर महाभारत सिरिअल देखने आने लगी। उस जमाने में इस नाटक को बहुत अच्छा और मजेदार नाटक माना जाता था। ये रविवार को शाम को आया करता था तो सड़के खाली हो जाया करती थी।

दुकानदार अपनी दुकाने बंद करके महाभारत देखने चले जाया करते थे। दोस्तों धीरे धीरे मिश्रा आंटी मेरे घर में महाभारत देखने आने लगी। उनको टीवी देखने का बहुत शौंक था। मेरे मोहल्ले के बच्चे भी मेरे घर टीवी देखने आया करते थे। मेरा घर लोगो से भर जाया करता था।

मुझे अच्छी तरह से मालूम था की मिश्रा आंटी एक नम्बर की अल्टर माल है और उनको नये नये लंड खाने का बड़ा शौक है। पर वो पैसे की लालची औरत थी। उस जमाने में ५० रूपए की बड़ी वैल्यू हुआ करती थी और ५० रुपया ५०० रूपए के बराबर माना जाता था।

मैं अच्छे से जानता था की अगर मैं मिश्रा आंटी से उसकी रसीली बुर मागूंगा तो वो मुझसे पैसे जरुर मांगेगी इसलिए मेरे पास टीवी ही एक हथियार था। अगले रविवार को जैसे ही मिश्रा आंटी टीवी देखने आई मैंने टीवी बंद कर दिया और स्टैबलाइजर के पीछे वाली बटन मैंने जला दी। बिजली का वोलटेज जादा हो गया और लाल बत्ती जलने लगी और टीवी बंद हो गया।

“अरे राजीव बेटा….जल्दी से टीवी खोल। महाभारत शुरू हो गया है!!” मिश्रा आंटी बोली.

“आंटी टीवी में कुछ खराबी आ गयी है और टीवी नही चलेगा!!” मैंने कहा.

ये सुनते ही मिश्रा आंटी बड़ी बेचैन हो गयी। टीवी उनकी कमजोरी थी। ये बात मैं अच्छे से जानता था। आंटी रोज किसी न किसी मर्द को घर में बुलाकर चुदवा लेती थी और पैसा कमा लेती थी। उनके पास पैसे ही कमी नही थी। उन्होंने तुरंत अपने कसे ब्लाउस में हाथ डाला और एक छोटा सा पर्स निकाला और उसमे ने मुझे ५० रूपए का नोट तुरंत दे दिया।

“जाओ राजीव बेटा, भागकर मिस्त्री बुला लाओ और जल्दी से टीवी बनवा दो!!” मिश्रा आंटी बोली और उनके जाते ही मैंने स्टैबलाइजर की पीछे की बटन दबा दी और टीवी शुरू हो गया। कुछ देर में आंटी आकर देखने लगी। आज मेरा उनको चोदने का फुल मूड था।

मेरी मम्मी घर के दूसरे कमरे में काम कर रही थी। मैं मिश्रा आंटी के लिए गरमा गर्म चाय बना लाया और उनको दे दी। “अरे वाह राजीव बेटा…क्या बात है आज तू मुझे बड़ा मस्का मार रहा है!!” मिश्रा आंटी बोली। मैं हंस दिया और उसके पास ही बैठकर महाभारत देखने लग गया।

दोस्तों उस जमाने में लोग इतने अमीर नही हुआ करते थे। सोफे किसी के पास नही हुआ करते थे। हम लोग भी जमींन पर बोरा बिछाकर टीवी देखा करते थे। मैं भी मिश्रा आंटी के बगल दीवाल से टेक लगाकर टीवी देख रहा था। धीरे धीरे मैं अपने हाथ से आंटी के पैर को छूने लगा। कुछ देर में वो जान गयी।

“राजीव बेटा!! ये क्या कर रहे हो!!!” मिश्रा आंटी हंसकर बोली। दोस्तों वो कभी गुस्सा नही करती थी। हमेशा हंसती रहती थी। गुस्सा करना तो जैसे उनको आता ही नही था।

“आंटी आप इतनी खूबसूरत हो की जब भी आपको देखता हूँ मुझे कुछ कुछ होने लग जाता है!!” मैंने मस्का लगाया। वो मुस्कुरा दी.

“राजीव साफ साफ बता की तुझे क्या चाहिए???” मिश्रा आंटी बोली।

दोस्तों वो बहुत गोल मटोल मस्त माल थी। रंग बिलकुल गोरा था, जिस्म भरा हुआ था। फिगर 38 36 32 का था। उनको देखते ही मेरा उनकी रसीली चूत मारने का दिल करने लग जाता था। आज तो मैं अच्छे से सोच लिया था की आज उनको कसके चोदना था।

“आंटी!! बाहर बाहर के मर्द आपको चोद लेते है। आपके हुस्न की जवानी को पी लेते है और मैं तो आपके बगल ही रहता हूँ। फिर भी मैं प्यासा हूँ। आंटी मुझे आपकी मस्त चूत चोदनी है!” मैंने साफ साफ बक दिया। एक बार तो मिश्रा आंटी को जैसे सांप सूंघ गया। कुछ देर के लिए वो बिलकुल चुप हो गयी।

“तूने कब देखा की बाहर बाहर के मर्दों का लंड खाती हूँ???” आंटी ने मुझसे पूछा.

“आंटी! मैं कोई अंधा तो हूँ नही। जैसे ही मिश्रा अंकल अपनी नौकरी पर चले जाते है फिर नये नये मर्द आपके घर में रोज आते है और ३ ३ ४ ४ घंटे बाद बाहर निकलते है। अब आप उन मर्दों के साथ तबला तो बजाइंगी नही!!!” मैंने कहा.

“राजीव बेटा, वो सब मोटा पैसा खर्च करते है। तब मैं उनको अपनी रसीली बुर चोदने के लिए देती हूँ!!” आंटी बोली.

“आंटी मेरे पास भी पैसा है। आप मुझे चूत मारने को दे दो। मैं आपको पैसा दे दूंगा!!” मैंने कहा.

उसके पास अगले दिन जैसे ही मिश्रा अंकल अपनी नौकरी पर गये मिश्रा आंटी ने मुझे अपने घर में बुला लिया। उसके बच्चे प्रियंका और राहुल स्कुल पढने गये हुए थे। इसी खाली समय में वो रोज नये नये मर्दों का लम्बा लम्बा लंड खाती थी और जमकर अपनी चूत चुदवाती थी। मेरा काम बन गया था।

आज मैं अपनी बगल वाली आंटी को जी भरके चोदने खाने वाला था। मिश्रा आंटी मुझे अंदर बेडरूम में ले गयी। और हम दोनों बिस्तर पर जाकर लेट गये। मैंने आंटी को पकड़ लिया और होठो पर किस करने लगा। वो बहुत खूबसूरत और मस्त माल औरत थी। उनके चुच्चे तो बहुत बड़े बड़े थे।

धीरे धीरे वो नीचे चली गयी और मैं उनके उपर आ गया। हम दोनों लेटकर किस करने लगे। आंटी ने गुलाबी रंग की बड़ी गहरी लिपस्टिक लगा रखी थी जिसे मैं पूरा का पूरा चूसता जा रहा था। कुछ ही देर में हम दोनों गरमा गये। मैंने धीरे धीरे उनकी साडी निकालने लगा।

कुछ ही देर में मैंने मिश्रा आंटी की साड़ी निकलकर दूर फेक दी। मुझे उनके गहरे ब्लाउस के दर्शन हो रहे थे। उनके बहुत ही सुंदर मुलायम ३८” के दूध के दर्शन मुझे आंटी के गहरे गले वाले ब्लाउस से हो रहे थे। दोस्तों मैं रोज आंटी को देखकर मुठ मार लेता था पर कभी सोचा नही था की एक दिन उनकी चूत मारने को मिलेगी।

मैं पागल हो गया था और उसके ब्लाउस के उपर से ही मैं उनके मम्मो को दबाने लगा। आंटी “आआआअह्हह्हह……ईईईईईईई….ओह्ह्ह्हह्ह….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” की आवाज निकालने लगी। शायद उनको भी बहुत मजा आ रहा था। मैं उसके गहरे गले वाले ब्लाउस के उपर से उनके मुलायम चुच्चों को दबा रहा था।

मुझे बहुत मजा आ रहा था। कुछ देर में मैंने उनका ब्लाउस खोल लिया और निकाल कर फेक दिया। मिश्रा आंटी से चुस्त गुलाबी रंग की ब्रा पहन रखी थी। वो ब्रा में तो और भी जादा हसीन लग रही थी। मैं जुगाड़ करके उनकी ब्रा खोल दी और दूर फेक दी।

अब मेरे बगल वाली मिश्रा आंटी मेरे सामने बिलकुल नंगी हो गयी थी। उनके ३८” के भरे हुए चुच्चों को देखकर मेरा होश उड़ रहा था। मैं आंटी के उपर ही लेट गया और अपने हाथ से उनके स्तनों को दबाने लगा। वो मचलने लगी। दोस्तों आंटी के कबूतर इतने बड़े बड़े नर्म नर्म थे की मुस्किल से मेरे हाथो में आ पा रहे थे।

मुझे उनके कबूतर दबाने को जन्नत का मजा मिल रहा था। आज इस घर के माल को मुझे कसकर चोदना था। मैं आंटी के उपर लेट गया और मुंह लगाकर उनके शानदार थनों को मुंह में लेके पीने लगा। मुझे लगा की मैं स्वर्ग में आ गया हूँ। मैं हाथ से मिश्रा आंटी जैसी मस्त चोदने पेलने लायक माल के मम्मे दबा देता था।

वो “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” कहने लग जाती थी। दोस्तों बड़ी देर तक ये मनोरंजक खेल चलता रहा। मैं जी भर के उनके गोल गोल बहुत ही खूबसूरत मम्मो को हाथ से जोर जोर से दबाया और मुंह में लेकर चूसता रहा। आंटी भी मुझे बहुत प्यार कर रही थी।

उन्होंने मुझे दोनों बाहों में भर रखा था और किस कर रही थी। मेरे गाल पर किस कर देती थी। मेरे चेहरे को चूम लेती थी और मेरे होठो को चूमने लग जाती थी। ऐसा लग रहा था की वो मेरी आंटी नही बल्कि असली वाली बीबी है। फिर मैंने उनके पेटीकोट का नारा खोल दिया और निकाल दिया।

मिश्रा आंटी से तिकोनी जालीदार पेंटी पहन रखी थी। जिसमे वो बहुत सेक्सी और हॉट माल लग रही थी। मैंने उनकी पेंटी को खीचकर निकाल दिया। अब मिश्रा आंटी मेरे सामने पूरी तरह से नंगी थी। मैं उनके पेट को चूमने लगा और धीरे धीरे मैं नीचे बढ़ने लगा।

कुछ देर में मैं उनकी चूत पर पहुच गया था। बाप रे!! आंटी की चूत तो बहुत चिकनी, साफ ,सुंदर और बहुत ही खूबसूरत थी। मैं मुंह लगाकर उसकी खूबसूरत बुर को चाटने लगा। उधर मिश्रा आंटी की मजे मारने लगी। उनको भी फुल मजा आ रहा था। आंटी रोज नये नये मर्दों का लंड खाती थी इसलिए रोज अपनी झाटों को साफ़ कर लेती थी।

मैं किसी कुत्ते की तरह उनकी चिकनी बुर को चाट रहा था। वो “ओह्ह्ह्ह माँ।।। अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह।।।। उ उ उ।।।चूसो चूसो।।।।।और चूसो।।।मेरी चूत को।।।।अच्छे से पियो मेरी बुर” चिल्ला रही थी। उनको अपनी चूत को गैर मर्दों से चुस्वाने का बड़ा शौक था। उनको अपनी चूत पिलाना अच्छा लगता था।

कुछ देर बाद मैं अपना ७” का लंड आंटी के भोसड़े में डाल दिया और उनको चोदने लगा। किसी पेशेवर रंडी की तरह आंटी मुझसे चुदवा रही थी। “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ…आह आह उ उ उ उ उ…..अअअअअ आआआआ…” बोल बोलकर वो चुदवाने लगी और गपागप मेरा ७ इंच का मोटा लंड खाने लगी।

दोस्तों आज मेरी जिन्दगी का शायद सबसे खूबसूरत दिन था। रोज मैं सुबह शाम जिस खूबसूरत औरत को देखा करता था आज मैं उसकी रसीली बुर को चोद रहा था। मिश्रा आंटी की चूत मारना मेरे लिए एक बहुत बड़ी बात थी। मैंने अपनी बाहों में उनको लपेट लिया था और उनको अपनी औरत की तरह चोद रहा था, उसकी चिकनी चूत को बजा रहा था।

वो नंगी तो बहुत खूबसूरत लग रही थी। कपड़ों में भी वो बहुत अच्छी लगती थी पर मेरा हमेशा से ये सपना था की एक दिन उनको नंगा करके मैं उनकी रसीली चूत मारू और ऐश करूँ। कुछ देर बाद मैंने अपनी रफ्तार बढ़ा दी और जल्दी जल्दी उनकी बुर चोदने लगा। मैं मिश्रा आंटी को गाल, चेहरे और होठो पर चूम लेता था और उसके होठ पी लेता था

वो एक चुदकक्ड औरत थी पर थी बहुत खूबसूरत माल। मैं उनको जल्दी जल्दी पेलने लगा और मेरा लौड़ा तो उनकी चूत के छेद में जाकर और भी जादा मोटा हो गया था। मुझे सेक्स और वासना का नशा चढ़ गया था। मैं जल्दी जल्दी मिश्रा आंटी को बजाने लगा और ४० मिनट मैंने उनको नॉन स्टॉप चोदा। फिर अपना लौड़ा निकालकर मैंने अपना माल उनके खूबसूरत चेहरे पर गिरा दिया। मेरे मोटे लौड़े से ८ १० पिचकारी माल की निकली जो सीधा मिश्रा आंटी के खूबसूरत चेहरे पर जाकर गिरा।

वो बिलकुल चुदासी हो गयी और मेरे माल को जीभ निकालकर चाटने लगी। उसके बाद दोस्तों मैंने उनको अपनी कमर पर लंड पर बिठाकर ढेड़ घंटे चोदा। उसके बाद मैंने जो ५० रूपए उसने लिए थे वो ही उनको वापिस कर दिए। वो चुदवाकर खुश हो गयी। क्यूंकि आज उनको पैसे भी मिल गये थे। उसके बाद मिश्रा आंटी मुझसे सेट हो गयी थी और जब मैं कहता है मुझे चूत दे दिया करती थी और मुझसे चुदवा लिया करती थी।

मिल्फ आंटी ने अपने बूब्स से लंड मसाज किया

गर्मी की उन दिनों में दिल्ली का मौसम बहुत तेज था। मैं राहुल, २२ साल का जवान लड़का, अपनी पढ़ाई के लिए दिल्ली में रहता था। मेरे किराए के मकान के ठीक बगल में रहती थीं श्वेता आंटी। वो एक परफेक्ट मिल्फ थीं – उम्र करीब ४२ साल, लेकिन बॉडी ऐसी कि कोई भी जवान लड़का देखकर पागल हो जाए। उनकी बड़ी-बड़ी गोल-गोल ब्रेस्ट, पतली कमर, और मोटी-मोटी जांघें हमेशा साड़ी या टाइट टॉप में फिट रहती थीं। उनके पति ज्यादातर बिजनेस के सिलसिले में बाहर रहते थे, और उनकी बेटी कॉलेज में पढ़ती हुई हॉस्टल में थी।

श्वेता आंटी बहुत खुशमिजाज थीं। वो मुझे हमेशा “बेटा” कहकर बुलाती थीं, लेकिन उनकी नजरों में एक खास चमक होती थी जब वो मेरी तरफ देखतीं। मैं भी उन्हें चुपके-चुपके देखता रहता था। उनकी क्लीवेज देखकर मेरा लंड अक्सर खड़ा हो जाता था। एक दिन शाम को बिजली चली गई। मैं बालकनी में खड़ा था, तभी आंटी की बालकनी से आवाज आई।

“राहुल बेटा, तुम्हारे पास कोई टॉर्च है क्या? अंधेरा हो गया है।”

मैं तुरंत अपनी टॉर्च लेकर उनकी तरफ गया। दरवाजा खुला था। आंटी ने एक हल्की सी नाइट सूट पहना हुआ था – सफेद कलर का, जो उनके गोरे शरीर पर चिपका हुआ था। उनके बड़े बूब्स सूट के अंदर से साफ झांक रहे थे। मैंने टॉर्च थमाई, लेकिन नजरें उनकी छातियों पर अटक गईं।

“क्या देख रहे हो बेटा?” आंटी ने मुस्कुराते हुए पूछा। उनकी आवाज में शरारत थी।

“कुछ नहीं आंटी…” मैं शर्म से लाल हो गया।

आंटी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा। “अरे, शर्मा मत। मैं जानती हूं जवान लड़के क्या देखते हैं। आओ अंदर, चाय बनाती हूं।”

उस रात हम दोनों बालकनी में बैठकर बातें करते रहे। आंटी ने बताया कि उनके पति कितने बिजी रहते हैं, और वो अकेली कैसे फील करती हैं। मैंने भी अपनी लाइफ के बारे में बताया। धीरे-धीरे बातें पर्सनल होती गईं। आंटी ने मेरे हाथ को अपने हाथ में लिया और बोलीं, “राहुल, तुम बहुत अच्छे लड़के हो। मुझे तुम्हारी कंपनी अच्छी लगती है।”

उसके बाद से हम रोज मिलने लगे। कभी वो मुझे खाना खिलातीं, कभी हम साथ में मूवी देखते। एक शाम वो मेरे कमरे में आईं। उन्होंने एक लाल कलर की साड़ी पहनी हुई थी, ब्लाउज काफी डीप नेक वाला। उनके बूब्स का आधा हिस्सा बाहर झांक रहा था। मैं सोफे पर बैठा था, वो मेरे पास आकर बैठ गईं। उनकी जांघ मेरी जांघ से छू रही थी।

“राहुल, तुम्हें मेरी बॉडी अच्छी लगती है ना?” उन्होंने सीधे पूछ लिया।

मेरा मुंह सूख गया। “आंटी… वो…”

“बोलो ना। मुझे बताओ।” उनकी उंगलियां मेरी जांघ पर घूमने लगीं।

“हां आंटी, आप बहुत हॉट हो। आपके बूब्स… बहुत सुंदर हैं।” मैंने हिम्मत करके कह दिया।

आंटी मुस्कुराईं। उन्होंने मेरे हाथ को उठाकर अपनी छाती पर रख दिया। “छूकर देखो। ये तुम्हारे लिए हैं आज।”

मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा। मैंने धीरे से उनके बूब्स को दबाया। नरम, गर्म और भारी। आंटी की सांसें तेज हो गईं। “अह्ह… प्यार से दबाओ बेटा। मुझे अच्छा लग रहा है।”

मैंने उनका ब्लाउज खोलना शुरू किया। उन्होंने खुद मदद की। उनके बड़े-बड़े गोरे बूब्स ब्रा से बाहर निकल आए। ब्रा का साइज ३६डी था। मैंने ब्रा भी उतार दी। उनके गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुंह में ले लिया और चूसने लगा। आंटी मेरे बालों में हाथ फेरती हुईं कराह रही थीं – “उम्म्म… राहुल… और जोर से… हां ऐसे…”

उनकी एक हाथ मेरी पैंट पर गई। मेरा लंड पहले से ही फुल हार्ड था। उन्होंने पैंट का बटन खोला और लंड बाहर निकाल लिया। “वाह… कितना मोटा और लंबा है तुम्हारा।” उन्होंने धीरे-धीरे हाथ से रगड़ना शुरू किया।

मैं उनके दोनों बूब्स को दोनों हाथों से मसल रहा था। आंटी ने मुझे उठाकर बेड पर लिटाया। फिर वो मेरे ऊपर आईं। उनकी साड़ी कमर तक उठा दी उन्होंने। उनके गीले पैंटी से उनकी चूत की महक आ रही थी। लेकिन आज वो कुछ और करना चाहती थीं।

आंटी ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और अपने बूब्स के बीच रख दिया। “आज मैं तुम्हें अपना स्पेशल मसाज दूंगी।”

उन्होंने अपने दोनों बड़े बूब्स को दोनों हाथों से दबाकर मेरे लंड को उनके बीच ले लिया। नरम, गर्म, और क्रीमी बूब्स मेरे लंड को चारों तरफ से घेर चुके थे। आंटी ऊपर-नीचे हिलने लगीं। उनका मसाज अनोखा था। हर बार जब वो नीचे आतीं, मेरा लंड उनके बूब्स की गहराई में चला जाता, और ऊपर उठतीं तो लंड का टॉप उनके गले तक पहुंच जाता।

“कैसा लग रहा है बेटा?” आंटी ने पूछा, उनकी आंखों में कामुकता थी।

“बहुत अच्छा आंटी… आपकी ये बड़ी-बड़ी छातियां… उफ्फ… स्वर्ग जैसा फील हो रहा है।” मैं कराह उठा।

आंटी ने स्पीड बढ़ा दी। उनके बूब्स मेरे लंड पर फिसल रहे थे। कभी-कभी वो रुककर लंड के टॉप को चूम लेतीं। उनका मुंह गीला था, लार मेरे लंड पर गिर रही थी, जिससे मसाज और भी स्मूद हो गया। मैं उनके निप्पल्स को उंगलियों से दबा रहा था। आंटी की सांसें भारी हो चुकी थीं। “मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है… तुम्हारा लंड मेरे बूब्स के बीच कितना गर्म है…”

मैंने उन्हें पकड़कर और पास खींच लिया। अब वो मेरे लंड पर पूरी ताकत से मूवमेंट कर रही थीं। उनके बूब्स लंड को मसल रहे थे, दबा रहे थे, और चिपकाए हुए थे। मैं महसूस कर रहा था कि मेरा लंड उनके बूब्स की नरमाई में घुल रहा है। थोड़ी देर बाद आंटी ने अपना पैंटी उतार दिया। उनकी चूत पूरी तरह गीली थी। उन्होंने मेरे लंड को अपने बूब्स से मसाज करते हुए अपनी चूत पर रगड़ना शुरू किया।

“आंटी… मैं जल्दी झड़ने वाला हूं…” मैंने कहा।

“झड़ जाओ बेटा… मेरे बूब्स पर ही झड़ दो।” उन्होंने कहा और स्पीड बढ़ा दी।

मेरा लंड उनके बूब्स के बीच फंसकर पंप हो रहा था। आखिरकार मैं जोर से कराहा और मोटी-मोटी गर्म वीर्य की धार उनके गले, चेहरे और बूब्स पर गिरने लगी। आंटी ने मुंह खोलकर कुछ स्वाद लिया और मुस्कुराईं। “कितना ज्यादा है तुम्हारा… अच्छा लगा?”

मैं हांफ रहा था। आंटी ने मेरे लंड को साफ किया और अपने बूब्स को मेरे मुंह के पास किया। मैंने अपनी वीर्य चाट-चाटकर उनके बूब्स साफ किए। फिर वो मेरे बगल में लेट गईं। हम दोनों एक-दूसरे को चूम रहे थे। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी।

“राहुल, मुझे तुम्हारा साथ बहुत अच्छा लगता है। तुम मुझे जवान महसूस कराते हो।” उन्होंने मेरे कान में कहा।

उसके बाद हम अक्सर मिलते। कभी-कभी वो मुझे अपने घर बुलातीं। एक दिन उन्होंने मुझे सरप्राइज दिया। उन्होंने ब्लैक लेस ब्रा पहनी हुई थी, जो उनके बूब्स को और भी आकर्षक बना रही थी। हम बेडरूम में थे। आंटी ने मुझे नंगा किया और खुद भी नंगी हो गईं। उनकी चूत साफ शेव थी, गुलाबी और गीली।

मैं उनके पैरों के बीच घुटनों पर बैठ गया और उनकी चूत चाटने लगा। आंटी मेरे सिर को दबाए हुए थीं – “हां बेटा… जीभ अंदर डालो… चूसो मेरी क्लिट… अह्हह…”

उनकी चूत से मीठा रस निकल रहा था। मैं पूरी लगन से चाट रहा था। आंटी का शरीर तड़प रहा था। फिर उन्होंने मुझे ऊपर खींचा। “अब फिर से वही मसाज दो बेटा।”

इस बार वो ऑयल लेकर आईं। उन्होंने अपने बूब्स और मेरे लंड पर ऑयल लगाया। अब मसाज और भी स्लिपरी और सेक्सी हो गया। उनके चिकने बूब्स मेरे लंड पर फिसल रहे थे। वो कभी तेज, कभी धीरे मूवमेंट कर रही थीं। उनके निप्पल्स मेरे लंड के टॉप को छू रहे थे। मैंने उनके बाल पकड़कर उनका मुंह अपने लंड के पास किया। आंटी ने मुंह खोलकर लंड का टॉप चूस लिया, जबकि बूब्स अभी भी लंड को मसल रहे थे।

“उम्म्म… स्वादिष्ट है तुम्हारा लंड…” उन्होंने कहा।

मैं उनके मुंह और बूब्स दोनों का आनंद ले रहा था। आंटी पूरी तरह मेरी हो चुकी थीं। वो खुद को मेरे लंड पर रगड़ रही थीं। फिर मैंने उन्हें चारों खाने चित्त लिटाया और उनके बूब्स के बीच लंड डालकर फक करने लगा। वो अपने बूब्स को और दबाकर मेरी मदद कर रही थीं।

“जोर से करो राहुल… मुझे पसंद है… हां… और जोर से…”

हम दोनों पसीने से तर थे। कमरे में सिर्फ हमारी कराहटें और चमड़ी की चप-चप की आवाजें गूंज रही थीं। आंटी की आंखें बंद थीं, मुंह खुला था, और वो आनंद ले रही थीं। मैंने आखिरकार उनके मुंह में झड़ दिया। आंटी ने सारा वीर्य निगल लिया।

उसके बाद हम अक्सर ऐसे ही इंटीमेट होते। कभी किचन में, कभी शावर के नीचे। आंटी मुझे हर तरीके से खुश रखतीं। उनके बूब्स मेरे लंड के लिए हमेशा तैयार रहते। वो कहतीं, “ये मेरे बूब्स अब तुम्हारे हैं बेटा। जब चाहो, मसाज कर लो।”

एक रात हम दोनों नंगे लेटे थे। आंटी मेरी छाती पर सिर रखे हुए थीं। “राहुल, तुम्हारे साथ मुझे बहुत अच्छा लगता है। तुम मुझे कभी मजबूर नहीं करते, बल्कि मैं खुद तुम्हारे पास आना चाहती हूं।”

मैंने उन्हें चूम लिया। “आंटी, आप भी मुझे बहुत प्यारी लगती हो।”

हमारी ये कहानी ऐसे ही चलती रही। मिल्फ आंटी और मेरा ये हॉट अफेयर दिल्ली की गर्म रातों को और भी गर्म बनाए रखता। उनके बूब्स का वो सॉफ्ट मसाज, उनकी गीली चूत, और हमारी गहरी कामुकता – सब कुछ परफेक्ट था।

 

टीचर आंटी ने रिवॉर्ड में अपनी वर्जिन टाइट चूत दे दी

राहुल कॉलेज का आखिरी साल पूरा कर रहा था। उसकी क्लास टीचर थीं मिसेस रीना शर्मा, जिन्हें सब टीचर आंटी कहते थे। रीना आंटी की उम्र करीब ३८ साल थी, लेकिन उनका फिगर इतना आकर्षक था कि कॉलेज के लड़के उनकी एक झलक के लिए तरसते रहते थे। गोरी चमकदार स्किन, भरी-भरी छातियां जो साड़ी के ब्लाउज में फिट होकर उभर आती थीं, गोल-मटोल कूल्हे और कमर इतनी पतली कि देखते ही मन ललचा जाता। उनकी मुस्कान में मिठास थी और आंखों में वो नमक जो किसी को भी दीवाना बना दे।

राहुल अच्छा स्टूडेंट था। पढ़ाई में हमेशा टॉप करता, लेकिन आंटी की क्लास में उसका मन ज्यादा पढ़ाई पर नहीं, बल्कि आंटी की साड़ी के पल्लू पर टिकता। रीना आंटी को भी राहुल पसंद था। वो हमेशा उसे एक्स्ट्रा अटेंशन देतीं। “राहुल बेटा, तुम्हारी मेहनत देखकर बहुत खुशी होती है,” वो अक्सर कहतीं और उसकी पीठ पर हाथ फेर देतीं। उस स्पर्श में कुछ ज्यादा ही गर्माहट होती।

फाइनल एग्जाम के बाद रीना आंटी ने क्लास में अनाउंस किया, “जो स्टूडेंट सबसे ज्यादा मार्क्स लाएगा, उसे स्पेशल रिवॉर्ड मिलेगा।” सब हंस पड़े। राहुल ने मन ही मन सोचा, काश वो टॉप कर जाए। रिजल्ट आया तो राहुल ने टॉप किया। आंटी ने उसे क्लास के बाद रुकने को कहा।

“राहुल, तुमने बहुत अच्छा किया। मैंने वादा किया था रिवॉर्ड का। बताओ, क्या चाहिए?” रीना आंटी मुस्कुराते हुए बोलीं। उनकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था, जिससे क्लैवेज की झलक साफ दिख रही थी। राहुल का दिल जोरों से धड़कने लगा।

“आंटी, कुछ भी जो आप देना चाहें,” उसने शर्माते हुए कहा।

रीना आंटी ने दरवाजा बंद किया और पर्दे खींच दिए। कमरे में सिर्फ उनकी सांसें और हल्की AC की आवाज गूंज रही थी। “तो फिर आज मैं तुम्हें वो रिवॉर्ड दूंगी जो तुम्हें हमेशा याद रहेगा।” उन्होंने राहुल की तरफ देखा, आंखों में वासना की चमक। राहुल समझ गया कि आंटी क्या चाह रही हैं। वो खुद भी पिछले कई महीनों से आंटी के सपने देखता था।

रीना आंटी पास आईं। “डरो मत बेटा। मैं जानती हूं तुम क्या चाहते हो। मैं भी चाहती हूं।” उन्होंने राहुल का हाथ पकड़ा और अपनी कमर पर रख दिया। राहुल ने हल्के से दबाया। आंटी की सॉफ्ट कमर छूते ही उसका लंड खड़ा हो गया। रीना आंटी ने खुद को उसके सीने से चिपका लिया। उनके भारी स्तन राहुल की छाती पर दब रहे थे।

“आंटी…” राहुल ने धीरे से कहा।

“शश… बस एंजॉय करो। आज तुम मेरे हो,” रीना आंटी ने उसके होंठों पर अपनी उंगली रखी। फिर उन्होंने अपना मुंह आगे बढ़ाया। दोनों के होंठ मिले। शुरुआत में सॉफ्ट किस, फिर धीरे-धीरे गहरा। रीना आंटी की जीभ राहुल की जीभ से खेल रही थी। वो चूस रही थीं, काट रही थीं हल्के-हल्के। राहुल के हाथ उनकी पीठ पर घूम रहे थे। साड़ी का ब्लाउज खोलने की कोशिश कर रहा था।

रीना आंटी हंस पड़ीं। “इतना जल्दी? ठीक है, मैं मदद करती हूं।” उन्होंने अपना ब्लाउज के हुक खोले। सफेद लेस वाला ब्रा सामने आ गया। उनके बड़े-बड़े स्तन उस ब्रा में कैद थे, लेकिन ऊपर से उछलने को तैयार। राहुल ने ब्रा के ऊपर से ही दबाया। “उफ्फ आंटी, कितने सॉफ्ट हैं…”

रीना आंटी ने ब्रा उतार दिया। उनके गुलाबी निप्पल्स खड़े हो चुके थे। राहुल ने एक को मुंह में ले लिया। चूसने लगा, जीभ से घुमाने लगा। रीना आंटी की सांसें तेज हो गईं। “हां बेटा… और जोर से… आह…” उनकी उंगलियां राहुल के बालों में फंस गईं। राहुल दूसरे स्तन को मसल रहा था। आंटी का बदन गरम हो रहा था।

रीना आंटी ने राहुल की शर्ट उतारी। उसके युवा, फिट बॉडी को देखकर उनकी आंखें चमक उठीं। “कितना सुंदर है मेरा स्टूडेंट।” उन्होंने राहुल की पैंट की चेन खोली। अंदर से उसका खड़ा लंड बाहर निकला। रीना आंटी ने उसे हाथ में लिया। “वाह… इतना मोटा और लंबा। आज ये मुझे भर देगा।”

उन्होंने घुटनों पर बैठकर राहुल का लंड मुंह में लिया। गर्म, नम मुंह। रीना आंटी चूस रही थीं जैसे कोई आइसक्रीम। ऊपर-नीचे, जीभ से चाटती हुईं। राहुल की आंखें बंद हो गईं। “आंटी… बहुत अच्छा लग रहा है…” रीना आंटी ने पूरा लंड गले तक ले लिया, फिर छोड़ दिया। थूक की धार लंड पर चमक रही थी।

अब रीना आंटी उठीं। साड़ी का पेटीकोट उतारा। उनकी जांघें मोटी और गोरी थीं। पैंटी में से उनकी चूत की आउटलाइन साफ दिख रही थी। राहुल ने उन्हें बेड पर लिटाया। उनकी जांघों को चूमते हुए ऊपर चढ़ा। पैंटी उतारी तो सामने थी आंटी की शेव्ड, गुलाबी चूत। पहले से ही गीली। राहुल ने अपनी जीभ फेर दी।

“आह राहुल… हां… चाटो अपनी आंटी की चूत…” रीना आंटी ने अपने कूल्हे ऊपर उठाए। राहुल जोर-जोर से चाट रहा था। क्लिटोरिस को चूस रहा था। आंटी का बदन तड़प रहा था। उनके हाथ राहुल के सिर को दबा रहे थे। कुछ ही मिनटों में रीना आंटी का पहला ऑर्गेज्म आ गया। “मैं आ गई… आह…!”

रीना आंटी ने राहुल को ऊपर खींचा। “अब अंदर डालो बेटा। मुझे भर दो।” राहुल ने अपना लंड आंटी की चूत पर रगड़ा। फिर धीरे से दबाया। गर्म, टाइट, गीली चूत ने उसे निगल लिया। “उफ्फ आंटी… कितनी गरम है आपकी…”

धीरे-धीरे पूरे लंड को अंदर डाला। रीना आंटी ने अपनी टांगें राहुल की कमर पर लपेट लीं। “जोर से… डर मत… मैं सब सह लूंगी।” राहुल ने रफ्तार बढ़ाई। धप-धप की आवाज कमरे में गूंज रही थी। आंटी के स्तन उछल रहे थे। राहुल उन्हें चूस रहा था।

रीना आंटी की आंखें आनंद से बंद थीं। “हां मेरे राजा… फाड़ दो अपनी आंटी की चूत… आज तुम्हारा रिवॉर्ड है ये…” उनका बदन लहरा रहा था। राहुल का लंड बार-बार अंदर-बाहर हो रहा था। कभी तेज, कभी धीमा। आंटी की चूत का रस लंड पर चिपक रहा था।

पोजीशन बदली। रीना आंटी डॉगी स्टाइल में हो गईं। उनका गोल-गोल गांड ऊपर था। राहुल ने पीछे से लंड डाला। अब और गहराई तक जा रहा था। आंटी चीख रही थीं, “आह… हां… और जोर से… मारो मुझे…” राहुल उनके कूल्हों को पकड़कर जोर-जोर से ठोक रहा था। आंटी के स्तन लटक रहे थे, वो उन्हें खुद मसल रही थीं।

लंबी देर तक चुदाई चली। दोनों पसीने से तर थे। रीना आंटी ने कई बार ऑर्गेज्म किया। आखिर में राहुल भी रुकने वाला था। “आंटी… मैं निकालने वाला हूं…”

“अंदर ही निकाल दो बेटा… मुझे पूरा महसूस करो,” रीना आंटी ने कहा। राहुल ने आखिरी जोरदार धक्के दिए और अंदर ही झड़ गया। गर्म वीर्य आंटी की चूत में भर गया। दोनों थककर लेट गए।

पड़ोस की आंटी ने कहा “मुझे चोद दो बेटा” मैंने पूरी रात चोदा

मेरा नाम स्वीट गाय है। मैं 26 साल का दिल्ली का लड़का हूँ। मेरा फिगर ठीक-ठाक है और अंडरवियर के अंदर मेरा 7 इंच का मोटा, पावरफुल टूल किसी को भी दीवाना बना सकता है। आज मैं आपको अपनी जिंदगी की वो सच्ची और सबसे हॉट घटना सुनाने जा रहा हूँ जो मैं कभी नहीं भूल सकता। ये कोई बड़ी उपलब्धि वाली कहानी नहीं, बल्कि एक बेहद सेक्सी, मीठा और यादगार अनुभव है।

हमारे घर के ठीक बगल में अंकल अपनी पत्नी यानी आंटी और उनकी इकलौती बेटी के साथ रहते थे। मैं उन्हें अंकल-आंटी ही कहता था। आंटी 36 साल की थीं, लेकिन उनकी बॉडी देखकर कोई भी पागल हो जाए। उनके पास दो भरी-पूरी 40D साइज की विशाल चूचियां थीं जो हर वक्त टाइट कपड़ों में उभरकर नजर आती थीं। उनकी गांड गोल-मटोल, भारी और लहराती हुई थी। उनकी बेटी भी कॉलेज फर्स्ट ईयर में थी और काफी हॉट थी – अच्छी शेप की चूचियां और स्लिम फिगर। लेकिन मेरी नजरें हमेशा आंटी पर ही अटक जाती थीं।

जब भी मौका मिलता, मैं आंटी को चुपके से घूरता रहता। उनकी चलती हुई भारी गांड, उछलती चूचियां देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता और रात को उनके बारे में सोच-सोचकर मैं खुद को राहत देता। वो सच में एक सेक्सी बम थीं। हमारे घर में किसी भी पार्टी या फंक्शन पर वो लोग जरूर आते थे।

एक दिन हमारे घर पार्टी थी। मैं उन्हें इनवाइट करने उनके घर गया। दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। थोड़ी देर बाद जोर-जोर से नॉक करने पर दरवाजा खुला। वो बंद था लेकिन लॉक नहीं था। मैं अंदर घुसा, ऊपर उनके कमरे की तरफ गया और आंटी को आवाज लगाई। तभी आंटी की मीठी आवाज आई, “आ जाओ बेटा, सोफे पर बैठ जाओ। कुछ मैगजीन पढ़ लो। मैं अभी नहाकर आ रही हूँ।”

मैं सोफे पर बैठ गया और मैगजीन उलटने-पलटने लगा। कुछ देर बाद आंटी बाहर आईं। ओह माय गॉड! वो एक गुलाबी सिल्की नाइटी पहने थीं जो स्लिपलेस थी और काफी ट्रांसपेरेंट। उनकी भीगी हुई लंबी बालें कंधों पर बिखरी हुई थीं। नाइटी के अंदर से उनकी बड़ी-बड़ी चूचियां और भारी गांड का पूरा आउटलाइन साफ दिख रहा था। सफेद ब्रा और पैंटी की झलक भी आ रही थी। मेरा लंड तुरंत सख्त होकर पैंट में तंबू बना चुका था।

मैंने जल्दी-जल्दी कहा, “आंटी, शाम को हमारे घर पार्टी है, आप लोग आना।” लेकिन आंटी ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और बोलीं, “अरे बेटा, इतनी जल्दी कहाँ भाग रहे हो? पहले कुछ खा-पी तो लो। मैंने अभी-अभी नहाया है, थोड़ा रुक जाओ ना।” उनकी आवाज में वो प्यार और आकर्षण था जो मुझे रोक ले गया। मैं मना नहीं कर पाया।

उन्होंने मुझे अपने बेडरूम में बुला लिया। वहाँ वो बाल कंघी कर रही थीं। उनकी गीली पीठ चमक रही थी और नाइटी के पीछे से ब्रा-पैंटी पूरी तरह दिख रही थी। मैं उनकी कमर, गांड और चूचियों को घूरता रह गया। आंटी ने अचानक पीछे मुड़कर मेरी तरफ देखा। उनकी नजर मेरे पैंट के टेंट पर पड़ी और वो शरारती मुस्कान दे दीं। “क्या हुआ बेटा? तुम ठीक तो हो? मैं अच्छी लग रही हूँ क्या?”

मैं शर्म से लाल हो गया, लेकिन सच्चाई बोल दी, “हाँ आंटी… आप बहुत अच्छी लग रही हैं।”

उन्होंने नाजुक स्वर में पूछा, “और… सेक्सी भी?”

मैं हैरान रह गया, लेकिन बोला, “बहुत… बहुत सेक्सी आंटी।”

उनकी मुस्कान और चौड़ी हो गई। उन्होंने धीरे से दरवाजा बंद कर दिया (लॉक नहीं किया) और मेरे पास आईं। बिना कुछ कहे उन्होंने मुझे जोर से गले लगा लिया। उनकी नरम, गर्म बॉडी मेरे सीने से सट गई। मैं भी उनका साथ देने लगा। फिर उन्होंने मेरे होंठों पर गहरा, प्यार भरा किस किया। मैंने भी उनके लाल-लाल होंठों को जोश से चूस लिया।

मेरा दाहिना हाथ उनकी पीठ पर सरक गया और नीचे उनकी भारी गांड को सहलाने लगा। आंटी ने आह भरते हुए कहा, “उफ्फ… तुम्हारे हाथ कितने अच्छे लग रहे हैं बेटा… मुझे भी तुमसे बहुत अट्रैक्शन था… आज मौका मिल गया।”

मैंने उनकी नाइटी ऊपर की तरफ खींची। वो खुद ही हाथ उठाकर मदद कर रही थीं। अब वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में खड़ी थीं। उनकी 40D वाली मोटी चूचियां ब्रा से बाहर निकलने को बेताब थीं। मैंने ब्रा का हुक खोल दिया। उनकी भरी-पूरी चूचियां आजाद हो गईं। गुलाबी निप्पल्स पहले से ही सख्त और खड़े थे।

मैंने एक चूची मुंह में ले ली और धीरे-धीरे चूसने लगा। आंटी ने मेरे सिर को अपनी छाती से चिपका लिया और कराह उठीं, “आह्ह्ह… हाँ बेटा… चूसो… अच्छे से चूसो मेरी चूचियां… कितने दिनों से तरस रही थी मैं… हाँ… और जोर से…”

मैंने दूसरी चूची को हाथ से मसलते हुए नीचे मुंह ले जाया। उनकी नाभि चाटी, जीभ घुमाई। फिर उनकी पैंटी के ऊपर किस किया। पैंटी पहले से ही पूरी गीली थी। मैंने उसे भी उतार दिया। उनकी साफ, गुलाबी चूत चमक रही थी और उससे मीठा रस टपक रहा था।

मैं घुटनों पर बैठ गया और अपनी जीभ से उनकी चूत चाटने लगा। “उम्म्म… आह्ह्ह… हाय भगवान… कितना अच्छा लग रहा है…” आंटी की जांघें कांप रही थीं। मैंने जीभ अंदर डाली और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। आंटी मेरे बाल पकड़कर अपना कूस मेरे मुंह पर दबा रही थीं। “हाँ… यही… चाटो मेरी चूत… मेरा पति तो कभी ऐसा नहीं करता… मैं कितने दिनों से प्यासी थी… हाँ बेटा… चूसो… मुझे प्यार दो…”

थोड़ी देर बाद उनकी बॉडी तन गई। उनकी चूत सिकुड़ने लगी और उन्होंने जोर से कराहते हुए ऑर्गेज्म कर दिया। उनका गर्म, मीठा रस मेरे मुंह में भर गया। मैंने सब पी लिया।

अब मेरा लंड फटने को तैयार था। आंटी ने मुस्कुराते हुए मेरी पैंट खोली और अंडरवियर उतार दिया। मेरा 7 इंच का मोटा लंड लहरा रहा था। “वाह… कितना सुंदर और बड़ा… आज इसे पूरा मजा दूंगी,” कहते हुए उन्होंने उसे प्यार से चूम लिया। फिर लिक किया, गोलियों को चूसा और पूरा मुंह में ले लिया। वो ऊपर-नीचे सिर हिला रही थीं, बहुत प्यार और जोश से सक रही थीं।

मैं भी कराह रहा था, “आंटी… उफ्फ… बहुत अच्छा लग रहा है…”

जब मैं झड़ने वाला था तो उन्होंने लंड अपनी चूचियों के बीच ले लिया। मैं उनके मोटे, नरम स्तनों पर अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया। आंटी ने मुस्कुराकर अपनी चूचियों से उसे चाट लिया। “स्वादिष्ट है बेटा…”

अब असली मजा शुरू होने वाला था। मैंने कहा, “आंटी, आप ऊपर बैठकर मुझे चोदो ना… मैं देखना चाहता हूँ आपको।” वो पूरी तरह तैयार थीं। उन्होंने मेरे ऊपर सवार होकर मेरा लंड अपनी गीली चूत पर रगड़ा और धीरे-धीरे अंदर ले लिया। “आह्ह्ह… कितना मोटा और गर्म है… पूरी भर गया…”

फिर वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगीं। उनकी भारी 40D चूचियां उछल-उछलकर नाच रही थीं। मैं नीचे से धक्के दे रहा था। कमरे में “पच-पच” की सेक्सी आवाज और हम दोनों की तेज सांसें गूंज रही थीं।

“हाँ आंटी… तेज… बहुत अच्छा लग रहा है…”

“आह्ह… हाँ बेटा… और जोर से… मेरी चूत को प्यार से भर दो… हाँ… और तेज…”

उनकी चूचियां मेरे चेहरे के सामने उछल रही थीं। मैंने उन्हें दोनों हाथों से पकड़कर चूस लिया। आंटी मेरे होंठों पर किस करने लगीं। हम दोनों एक साथ चरम पर पहुंच गए। मैंने अंदर ही अंदर अपना पूरा लोड छोड़ दिया और वो भी कांपते हुए झड़ गईं।

हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। उनकी चूचियां मेरी छाती से सटी हुई थीं। कुछ देर बाद आंटी ने मेरे गाल पर प्यार भरा किस किया और धीरे से कहा, “ये हमारा राज रहेगा… जब भी मन करे, आ जाना। मैं हमेशा तैयार रहूंगी।”

उस दिन के बाद हम कई बार ऐसे मीठे, गर्म पलों का आनंद लेते रहे। लेकिन कुछ महीनों बाद मुझे पता चला कि वो विदेश चली गई हैं। वो यादें आज भी मेरे मन में ताजा हैं और जब भी याद आती है, मुस्कुराहट आ जाती है।

कविता आंटी ने नंगी होकर बुलाया और पूरी रात जोर से चुदवाया

नमस्ते, मैं गुरु राज हूँ। चेन्नई का लड़का, 24 साल का, फिट और एनर्जेटिक। मैं पुणे में अपने एक साल के कोर्स के लिए आया था, इसलिए मैंने वहाँ एक शानदार अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में 7वीं मंजिल का फ्लैट किराए पर ले लिया था। वो इलाके का सबसे ऊँचा बिल्डिंग था। मेरे साथ एक दोस्त भी रहता था, लेकिन ज्यादातर वक्त हम दोनों अपनी पढ़ाई और काम में व्यस्त रहते थे।

मेरे फ्लैट के ठीक सामने, बिल्कुल ऑपोजिट में एक और फ्लैट था। मेरी बेडरूम की बालकनी से उस फ्लैट का बाथरूम साफ-साफ दिखता था। वहाँ रहने वाली कविता आंटी हर रोज सुबह करीब 11 बजे नहाने आती थीं। वो 37-38 साल की थीं, लेकिन देखने में इतनी आकर्षक और सेक्सी कि कोई भी जवान लड़का एक बार देख ले तो नजरें हटा ही न पाए। उनका नाम कविता था। कोई बच्चे नहीं थे। पति कंपनी में अच्छी जॉब करते थे, लेकिन महीने में 10-15 दिन टूर पर रहते थे।

कविता आंटी का फिगर था 36-30-36 – गोल-मटोल चुचियां, नरम और गोल गाँड, गोरी-गोरी त्वचा, लंबे ब्राउन बाल, गोल चेहरा, लंबी सेक्सी गर्दन। वो हमेशा साड़ी पहनती थीं जो उनके बॉडी को और भी हॉट बना देती थी। हम कभी-कभी नीचे लिफ्ट में या कॉम्प्लेक्स के फंक्शन में मिलते तो बस मुस्कुरा देते। मैं कभी उनसे बात नहीं करता था, लेकिन दिल में हमेशा एक आकर्षण रहता था।

एक शनिवार की सुबह का वो दिन था। मेरा दोस्त टूर पर चला गया था, घर में मैं अकेला। सुबह से ही मन बोर हो रहा था। मैंने जे-लो की गाने ब्लास्ट कर दिए, थोड़ी देर दोस्तों से फोन पर बात की। 10 बजे तक मैंने सोचा, चलो नहा लेता हूँ, तरो-ताजा हो जाऊँ। नहाने के बाद मैंने कपड़े नहीं पहने क्योंकि घर खाली था। बस कमर में तौलिया लपेट लिया। बालकनी की तरफ गया। शरीर पर पानी की बूँदें चमक रही थीं, मसल्स टाइट दिख रहे थे।

जैसे ही मैं बालकनी में पहुँचा, नजरें सामने वाले बाथरूम पर पड़ीं। कविता आंटी पीले रंग की साड़ी पहने अंदर आईं। मैंने स्टेयर करना शुरू कर दिया। वो तौलिया रैक पर रखकर धीरे-धीरे साड़ी खोलने लगीं। वो नहीं जानती थीं कि कोई उन्हें देख रहा है। साड़ी पूरी खुल गई। अब वो ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थीं – दोनों पीले। फिर उन्होंने ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके… और उनकी ब्रा में कैद बड़ी-बड़ी गोल चुचियां बाहर झाँकने लगीं। ब्रा भी खोल दी। फिर पेटीकोट का नाड़ा खींचा… पैंटी उतारी। अब वो पूरी नंगी थीं।

मेरा लौड़ा एकदम खड़ा हो गया। बहुत हार्ड और फर्म। मैंने हाथ अपने लौड़े पर फेरना शुरू कर दिया। वो नहाने लगीं। पानी उनके गोरे बदन पर बह रहा था, चुचियाँ चमक रही थीं, गाँड हिल रही थी। अचानक उनकी नजर मेरी तरफ पड़ी। मैं डर गया। सोचा, अब शिकायत कर देंगी। लेकिन… वो और करीब आईं खिड़की के पास। पूरी नंगी अवस्था में मीठी-मीठी मुस्कुराईं। उनकी आँखों में शरारत और चाहत थी। मैंने भी मुस्कुरा कर जवाब दिया। फिर उन्होंने हाथ से इशारा किया – आ जाओ मेरे घर। मेरे पूरे शरीर में रोमांच दौड़ गया। मैंने तुरंत साइन दिया – आ रहा हूँ।

15 मिनट में मैं तैयार होकर उनके फ्लैट पहुँच गया। घंटी बजाई। दरवाजा खुला। वाह! कविता आंटी अब नीली साड़ी में थीं। बाल अभी भी गीले, गहरी नाभि दिख रही थी। साड़ी बहुत नीचे बँधी थी। लगता था ब्रा नहीं पहनी है – उनकी बड़ी चुचियाँ साड़ी को फाड़ने को तैयार थीं।

“प्लीज कम इन,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।
“थैंक यू,” मैं बोला।

वो मुझे सोफे पर बिठाया और खुद मेरे सामने बैठ गईं। मैंने पूछा, “आंकल कहाँ हैं?”
“वो काम से बाहर गए हैं, तीन दिन बाद आएंगे,” उन्होंने कहा।

मेरे मन में ख्याल आया – वाह, क्या सुनहरा मौका! फिर अचानक उन्होंने पूछा, “तो तुम्हें आज मुझे नहाते हुए कैसा लगा?”
मैं थोड़ा घबरा गया, लेकिन बोला, “बहुत अच्छा लगा आंटी…”
“और मुझे नंगी देखकर?” उनकी आँखों में शरारत थी।
मैंने हिम्मत जुटाई, “वो भी बहुत अच्छा था…”

वो उठीं, दरवाजा लॉक किया, वापस आईं और मेरे बगल में बैठ गईं। अब उनकी जाँघ मेरी जाँघ से छू रही थी। उन्होंने धीरे से कहा, “क्या तुम मुझे चोदोगे गुरु राज? मेरे पति मुझे पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाते… मैं रोज तुम्हें देखती हूँ, तुम्हारी मसल्स, तुम्हारी जवान एनर्जी… मुझे बहुत मन करता है तुमसे। आज मौका मिल गया है। मैं तुम्हें अपना बनाना चाहती हूँ… जो मन करे करो मेरे साथ।”

उनकी बातें सुनकर मेरा लौड़ा फिर से खड़ा हो गया। मैंने कहा, “हाँ आंटी… मैं भी चाहता हूँ।”

वो और करीब आईं। अपना हाथ मेरी गोद में रखा और मेरे होंठों पर हल्का सा किस किया। फिर मैंने उन्हें खींच लिया। हम दोनों के होंठ एक-दूसरे में घुल गए। जीभें एक-दूसरे के साथ खेलने लगीं। सलाइवा का स्वाद, गर्मी… पाँच मिनट तक हम दोनों जुनून से किस करते रहे।

मैंने उनकी साड़ी धीरे-धीरे खोल दी। अब वो ब्लाउज और पेटीकोट में थीं। मैंने उन्हें गोद में उठाया और बेडरूम ले गया। बेड पर पटक दिया। मैंने अपनी शर्ट उतारी, सिर्फ ट्राउजर में उनके ऊपर झुका। उनके गले, गालों, होंठों और उस सेक्सी नाभि पर किस करने लगा। नाभि इतनी गहरी थी कि लग रही थी छोटी-सी चूत। मैंने दो मिनट तक चूमा।

फिर ब्लाउज के बटन खोले। अंदर ब्रा नहीं थी। वाह! क्या खूबसूरत चुचियाँ – पूरी सफेद, हल्के ब्राउन निप्पल्स, बड़े और गोल। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया, चूसा, दबाया। वो आहें भरने लगीं, “आह्ह… उम्म… गुरु राज… मत छोड़ो… और जोर से चूसो…”

मैंने नीचे जाकर पेटीकोट का नाड़ा खोला। पैंटी नहीं पहनी थी। उनकी चूत बिल्कुल साफ और गीली चमक रही थी। मैंने पेटीकोट पूरी उतार दी। अब वो पूरी नंगी मेरे सामने लेटी थीं, साँसें तेज। उन्होंने सेक्सी स्माइल दी और बोलीं, “ये बदन अब सिर्फ तुम्हारा है… इसमें तुम्हारा राज है… जो करना है करो।”

मैंने अपनी पैंट और अंडरवियर उतार दी। मेरा लौड़ा रॉकेट की तरह खड़ा था। हम दोनों दिन के उजाले में नंगे थे। दोपहर के 12:30 बजे।

मैं उनके पैरों के बीच घुटनों पर बैठा, उनके जाँघों को मोड़ा। उनकी चूत की खुशबू इतनी मीठी थी कि मैं भूल ही नहीं सकता। मैंने मुंह लगाया, जीभ से चाटना शुरू किया। हाथों से चूत की दीवारें अलग कीं। अंदर गीला रस चमक रहा था। वो जोर-जोर से कराहने लगीं, “आह्ह… और जोर से चाटो… उमम्म…”

फिर मैं खड़ा हुआ। उन्हें खींचकर बोला, “मेरा लौड़ा चूसो।” उन्होंने बिना देर किए हाथ में पकड़ा, स्ट्रोक किया और मुंह में ले लिया। चूसने लगीं, जीभ घुमाती हुई। मैं स्वर्ग में था। आँखें बंद हो गईं। जब मैं झड़ने वाला था तो बोला। उन्होंने मुंह खोल दिया। मैंने पूरा गर्म वीर्य उनके मुंह और चेहरे पर उछाल दिया। कुछ बूँदें उनके होंठों से टपक रही थीं। उन्होंने सब पी लिया और मुस्कुराते हुए बोलीं, “और दो…”

फिर उन्होंने और जोर से चूसना शुरू किया। लौड़ा फिर से हार्ड हो गया। उन्होंने नरम स्वर में कहा, “अब मेरी चूत में अपना लौड़ा घुसाओ…”

मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में किया। पीछे से धीरे-धीरे अंदर डाला। वो शुरू में हल्का सा कराहीं, फिर पूरा आनंद आने लगा। मैंने उनकी गाँड पकड़ ली, चुचियाँ लटक रही थीं। धीरे-धीरे पंपिंग शुरू की। वो चीखने लगीं, “ओओओ गुरु राज… और जोर से चोदो… आह्ह… मैं तुम्हारी रानी हूँ… चोदो मुझे… मर जाऊँगी…”

हमने पोजीशन बदली। मैं लेट गया, वो ऊपर चढ़ गईं। अपनी चूत में लौड़ा डाला और झुककर राइड करने लगीं। उनकी बड़ी-बड़ी चुचियाँ उछल-उछलकर नाच रही थीं। मैंने दोनों हाथों से दबाईं, मसलीं। वो जोर-जोर से हिल रही थीं, “उम्ममम… आह्ह्ह्ह… कितना मजा आ रहा है…” उनके बाल मेरे चेहरे पर गिर रहे थे।

मैं फिर झड़ने वाला था। उन्होंने फिर मुंह में ले लिया। मैं खड़ा हो गया और गर्म वीर्य उनके मुंह में भर दिया। वो हर बूँद पी गईं।

फिर हम दोनों बाथरूम गए। शावर ऑन किया। एक-दूसरे को किस करते रहे। मैंने फिर उनकी चूत चाटी, उन्होंने मेरा लौड़ा चूसा। उस दिन हमने तीन बार सेक्स किया। शाम के 3 बजे तक। आखिर में हम एक-दूसरे की बाहों में लेटे रहे।

मैं जल्दी चला गया क्योंकि शाम को लोग आने वाले थे। लेकिन मैंने कविता आंटी को वादा किया – जब भी उनके पति टूर पर जाएँगे, मैं आऊँगा। और हमने वो वादा कई बार निभाया। जब भी मौका मिलता, हम दोनों जुनून से एक-दूसरे को भोगते। वो मेरा था, मैं उनका।

ये हमारी सेक्सी कहानी है… जो आज भी याद करके मेरे शरीर में रोमांच पैदा कर देती है।

आंटी के पति ने मुझे बांधकर जबरदस्ती चोद दिया

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हेल्लो दोस्तों,  मै सोनाली गुप्ता आज मै आप सभी को अपनी जिन्दगी की सबसे खतरनाक चुदाई का महागाथा सुनाने जा रही हूँ। मै फैजाबाद की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र लगभग 19 साल होगी और मेरी कद लगभग 5.4 फीट होगा। अब मै अपने बारे में आप लोगो को क्या बताऊँ, वैसे तो मेरा रंग … Read more

पड़ोसन आंटी को उनके घर जाकर चोदा

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दोस्तो, जब किसी लंड को एक बार सेक्स का स्वाद लग जाता है, तो फिर लंड चूत के लिए पागल हो जाता है. मेरा लौड़ा भी पड़ोसन आंटी की टाइट चूत गांड का स्वाद ले चुका था और अब लौड़ा आंटी की चूत का शैदाई हो गया था. आंटी की चूत गांड की चुदाई हुए … Read more

सपने में पड़ोसन आंटी की मालिश करके चोदा

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नमस्कार दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी है। मेरा नाम राहुल है, मैं 25 साल का हूं और लखनऊ का रहने वाला हूं। मुझे लड़कियों से ज्यादा आंटी अच्छी लगती हैं. शायद इसीलिये अभी तक मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। 20 साल की उम्र से ही मैं अन्तर्वासना की कहानी पढ़ता आ रहा हूं। मैं हमेशा … Read more

चुदक्कड़ आंटी और मेरा लण्ड-2

Aunty sex story hindi

मेरी भूखी नज़रें उसको बड़े गोल मम्मों और नंगी पेट पर टिकी हुई थीं। मैं चूची तो साफ देख रहा था.. पर चूत देखने के लिए तड़प रहा था। मैं उसके मादक शरीर की गर्मी महसूस कर रहा था.. वो कमीनी खुद सोने का नाटक कर रही थी। मैं सोच रहा था कि इस रंडी … Read more

चुदक्कड़ आंटी और मेरा लण्ड-1

नमस्ते दोस्तो.. मेरा नाम साहिल है.. मैं लखनऊ का रहने वाला हूँ। मैं आज पहली बार अपनी लाइफ की एक सच्ची घटना लेकर आप लोगों के सामने हाजिर हूँ.. जिसने मुझे पहली बार सेक्स का मज़ा दिया था। बात उन दिनों की है.. जब एक बार मैं कुछ दिनों के लिए छुट्टियाँ बिताने मुंबई गया … Read more

देसी औरत की चुदाई- 2

Desi aurat chudai ki kahani

मैं राजस्थानी औरत के घर पर था और उसके पति की अनुपस्थिति में उसके साथ मजा लेने लगा था। उसने खुद अपने हाथ से अपनी चोली उतार दी थी. अन्दर कुछ ना पहना होने की वजह से उसके ख़ूबसूरत और गोरे गोरे दूध मेरे सामने नंगे हो गए थे। मैं तो उसके दूध देख कर … Read more

देसी औरत की चुदाई- 1

Desi aurat sex story

मेरा नाम अजीत है और मैं दिल्ली से जयपुर अपने काम से आया था. दिल्ली  में मैं एक कम्पनी में काम करता हूँ और इधर जयपुर में कम्पनी की तरफ से कुछ समय के लिए आया था. मैंने जयपुर में एक कमरा किराये पर लिया था और रोज़ सुबह जल्दी घर से निकल जाता था. … Read more

पड़ोसन आंटी की चूत चुदाई -2

Aunty sex story 2

वो मेरे गले में दोनों हाथ डाल करके बोलीं- कितनी फिकर है तुझे मेरी.. मुझे बहुत पसंद करते हो तुम.. कुछ देर हम दोनों चुप रहे और वो मेरी आँखों में यूँ ही कामुकता से देखती रहीं। उनकी निगाहें मुझे चूत चुदाई के लिए बुला रही थी.. मुझे उनकी और अपनी साँस तेज़ चलने की … Read more

पड़ोसन आंटी की चूत चुदाई -1

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हाय, मेरा नाम शशांक है.. मेरी उम्र 25 वर्ष है.. कद 5’5″ इंच.. रंग गोरा और स्लिम फिट जिस्म है, मैं पूना में रहता हूँ। मेरे घर के बगल में एक आंटी रहती हैं उनका नाम सपना है.. वो लगभग 32 साल की हैं और बहुत ही सुंदर और गोरी हैं। उनकी हाईट करीब 5’4″ … Read more

चुदक्कड़ आंटी से चुदाई

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मेरा नाम अनुराग है, अभी मैं जयपुर में रहता हूँ, वैसे मैं जोधपुर का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 24 साल है और मेरा कद 5 फुट 7 इंच है। मेरा रंग साफ़ है नैन-नक्श तीखे हैं और शरीर न बहुत पतला और न ही मोटा यानि कि औसत शरीर का मालिक हूँ, पर व्यक्तित्व … Read more

दुकान वाली आंटी की चुदाई

दोस्तो, मैं पंकज … आज आपके सामने जीवन की एक सच्ची कहानी पेश कर रहा हूँ। मैं एक कंपनी में काम करता था.. तो मेरा आना-जाना एक ही रास्ते से होता था और मैं उधर पड़ने वाली एक ही दुकान पर रुक कर रोज़ सिगरेट पीता था। वहां एक आंटी दुकान पर होती थीं.. मैं … Read more

आंटी का चुदाई वाला प्यार

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मेरा नाम रोहन है। मैं अभी जयपुर की एक कम्पनी में काम करता हूँ। यह घटना दो साल पहले की है, जब मैं अपने कॉलेज के दूसरे साल में पढ़ रहा था। तब मेरी उम्र बीस साल हो गई थी और पढ़ने के लिए पूना गया था। मेरा घर वहाँ नहीं था, इसलिए रहने के … Read more

गर्लफ्रेंड की सेक्सी माँ को चोदकर आया मज़ा

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हैलो दोस्तो.. मेरा नाम विराज मैडी है. मैं 20 साल का जवान लड़का हूँ, मेरी हाईट 5 फीट 6 इंच है. मेरा रंग हल्का सांवला है.. लेकिन ठीक ठाक दिखता हूँ, डील डौल ठीक ठाक है. मेरी एक गर्लफ्रेंड है, जिसका नाम जाह्नवी है, वो दो साल से मेरी गर्ल फ्रेंड है, वो स्कूल में … Read more

आंटी की मस्त चूत

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हैलो दोस्तो, मेरा नाम गौरव है, मैं मुंबई में रहता हूँ। मेरी उम्र 25 साल की है, मेरा लंड 6.5 इंच का और काफ़ी मोटा है। यह मेरी पहली कहानी मेरी और मेरी पड़ोसन शालिनी की है, वो एक शादीशुदा औरत है, उसके पति की वो दूसरी औरत है, उसके पति का पहले से एक … Read more

आन्टी की प्यास

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नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम सचिन है और मैं कानपुर का रहने वाला हूँ। मैं एक कॉल बॉय हूँ, यह मेरी पहली कहानी है। यह उस वक़्त की बात है जब मैं पढ़ता था। हमारे घर के बगल में एक बुटीक थी जो उन्होंने घर में ही खोल रखी थी। मैं उन्हें आंटी कहता था पर उनका … Read more

आंटी की चूत चुदाई

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मेरा नाम दीपक हैं  मैं कानपुर रहने वाला हूँ। मैं 21 साल का हूँ, बी कॉम कर रहा हूँ! यह मेरी पहली सेक्स की कहानी है। मेरे मोहल्ले में एक आंटी किराये पर रहने आयी थी उनका नाम कविता है उनकी उम्र लगभग 30 साल है, फिगर 38-30-38 है, हालांकि वे सांवली हैं फिर भी … Read more

आन्टी ने मालिश के बहाने चूत चुदवाई

Malish-aunty

मेरे घर में हम 3 लोग हैं। मेरे पापा मम्मी और मैं.. वैसे तो मैं बिजनेस करता हूँ.. लेकिन मैं बचपन से ही बहुत अच्छी मालिश करता था। हमारे रिश्तेदारों में सबको पता है कि मेरे मालिश करने से दर्द आदि सब खत्म हो जाया करता है। कुछ दिन पहले की ही बात है.. हमारे … Read more

आंटी की गांड चाटी और चुदाई की

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जब मैं ग्रेजुएशन कर रहा था. उसी बीच मैंने एक सरकारी नौकरी के लिए एग्जाम दिया था। मैं उसका एग्जाम देने कोलकाता गया था. जब मैं पेपर देकर वापस आया, तो मैंने हावड़ा से दिल्ली के लिए टिकट ली हुई थी. मैं ट्रेन में बैठ गया। मेरा सफ़र मस्ती से चल रहा था. जैसे ही … Read more