मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली के एक शांत से इलाके में एक छोटे से फ्लैट में रहता हूं। मेरे ठीक बगल वाले फ्लैट में रहती थी नेहा। नेहा सिर्फ २२ साल की थी, लेकिन उसकी जवानियों ने किसी को भी दीवाना बना देना था। लंबे काले बाल, गोरा रंग, बड़ी-बड़ी आंखें और वो मासूम मुस्कान। उसकी छाती हमेशा टाइट टॉप में दबती हुई दिखती और उसकी गोल गंधे वाली कमर को देखकर मन करता कि बस छू लूं।
हम दोनों पड़ोसी थे, इसलिए धीरे-धीरे बातें होने लगीं। वो कॉलेज जाती थी और शाम को लौटकर अक्सर बालकनी में खड़ी होकर फोन पर बात करती। मैं भी अपनी बालकनी से उसे देखता रहता। एक दिन बिजली चली गई और उसका इन्वर्टर खराब हो गया। वो मेरे दरवाजे पर आई।
“राहुल भैया, थोड़ी देर चार्जर लगा लूं? मेरा फोन डेड हो गया है,” उसने शरमाते हुए कहा।
मैंने मुस्कुराते हुए अंदर बुलाया। वो पहली बार मेरे फ्लैट में आई थी। हल्का सा परफ्यूम उसकी बॉडी से आ रहा था। मैंने उसे सोफे पर बैठाया और पानी दिया। बातें शुरू हुईं। वो बहुत मासूम थी, लेकिन उसकी नजरों में कुछ जिज्ञासा थी। हम दोनों की उम्र लगभग बराबर थी, इसलिए जल्दी ही “भैया” हटकर “राहुल” हो गया।
अगले कुछ हफ्तों में हम काफी क्लोज हो गए। वो मुझे अपनी कॉलेज की बातें बताती, मैं उसे अपनी जॉब की। कभी-कभी हम साथ में चाय पीते, कभी बाहर घूमने जाते। मैंने देखा कि वो मेरे पास आने पर थोड़ा ज्यादा शरमाती है। उसकी आंखें झुक जातीं, लेकिन होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान रहती।
एक शाम बारिश हो रही थी। नेहा मेरे घर आई थी किताब लेने। बारिश इतनी तेज थी कि वो रुक गई। हम दोनों बालकनी में खड़े होकर बारिश देख रहे थे। उसकी साड़ी का पल्लू हल्का भीग गया था और उसकी ब्लाउज से उसकी ब्रा की आउटलाइन साफ दिख रही थी। मेरी नजर बार-बार वहां जा रही थी।
“राहुल… तुम मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो?” उसने धीरे से पूछा, लेकिन भागी नहीं।
“क्योंकि तुम बहुत खूबसूरत हो, नेहा,” मैंने सच्चाई से कहा।
वो शरमा गई। उसके गाल लाल हो गए। मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ा। वो हाथ खींची नहीं। बस नजरें नीचे कर लीं। मैंने उसे अपनी तरफ खींचा। हमारा पहला किस बहुत धीरे से हुआ। उसके होंठ नरम और गर्म थे। वो थोड़ी कांप रही थी, लेकिन मेरे सीने से चिपक गई।
“डर लग रहा है?” मैंने उसके कान में फुसफुसाया।
“थोड़ा… लेकिन तुम्हारे साथ अच्छा लग रहा है,” उसने शर्माते हुए जवाब दिया।
हम अंदर आए। मैंने उसे सोफे पर बिठाया। किसिंग जारी रही। मेरे हाथ उसकी पीठ पर घूम रहे थे। धीरे-धीरे मैंने उसकी साड़ी का पल्लू नीचे सरका दिया। उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। मैंने उसके ब्लाउज के हुक खोले। सफेद ब्रा में उसकी गोल-गोल ब्रेस्ट्स देखकर मेरा लंड तना हुआ जा रहा था।
“राहुल… धीरे से,” वो फुसफुसाई।
मैंने उसकी ब्रा उतारी। उसके गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने एक को मुंह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। नेहा की सांसें तेज हो गईं। “आह… राहुल…” वो कराह उठी। मेरे हाथ उसकी कमर पर, फिर उसकी नाभि पर घूम रहे थे। मैंने उसकी साड़ी का फंदा खोला। वो सिर्फ पैंटी में रह गई। उसकी जांघें मोटी और चिकनी थीं। पैंटी पर हल्का सा गीला धब्बा दिख रहा था।
मैंने अपनी शर्ट उतारी। नेहा ने पहली बार मेरी छाती को छुआ। उसके नाखून हल्के से खरोंच रहे थे। मैंने उसे उठाकर बेडरूम ले गया। लाइट्स डिम रखीं। वो बेड पर लेट गई। मैं उसके ऊपर आया। किस करते हुए मैं उसकी गर्दन, छाती, पेट सब चूम रहा था। जब मैं उसकी पैंटी उतारने लगा तो वो मेरी कलाई पकड़ ली।
“पहली बार है… प्लीज प्यार से,” उसकी आंखों में शर्म और चाहत दोनों थे।
मैंने उसे आश्वासन देते हुए कहा, “मैं तुम्हें कभी दर्द नहीं दूंगा, नेहा। तुम जब कहोगी, रुक जाऊंगा।”
उसने मुस्कुराकर सिर हिला दिया। मैंने उसकी पैंटी उतार दी। उसकी चिकनी, गुलाबी चूत बिल्कुल साफ और छोटी थी। हल्की सी नमी चमक रही थी। मैंने अपनी उंगलियां धीरे से उसकी जांघों के बीच फेरनी शुरू की। वो सिकुड़ गई, लेकिन फिर धीरे-धीरे फैल गई। मेरी उंगली उसकी चूत की ऊपरी हिस्से पर घूम रही थी। क्लिटोरिस को छूते ही वो झटके से कांप उठी।
“उम्म्म… क्या हो रहा है… अच्छा लग रहा है,” वो आंखें बंद करके बोली।
मैंने धीरे से उंगली अंदर डाली। वो बहुत टाइट थी। अंदर गर्मी और नमी थी। मैं धीरे-धीरे उंगली अंदर-बाहर करने लगा। नेहा की कमर उठने लगी। उसके मुंह से हल्की-हल्की सिसकारियां निकल रही थीं। मैंने अपना मुंह भी नीचे ले जाकर उसकी चूत को चाटना शुरू किया। जब मेरी जीभ उसके क्लिट पर घूमी तो वो जोर से चीख पड़ी।
“राहुल! ये… अह्ह्ह… बहुत अच्छा… मत रुको…”
मैंने उसे लाइटर और लाइटर चाटा। उसके जूस का स्वाद मीठा था। कुछ ही मिनटों में उसका पहला ऑर्गेज्म आ गया। वो पूरी तरह कांप उठी, दोनों हाथों से मेरा सिर दबाए हुए। उसके बाद वो थोड़ी देर शांत पड़ी रही।
अब मेरी बारी थी। मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड पूरा तना हुआ, मोटा और लंबा खड़ा था। नेहा ने पहली बार उसे देखा तो उसकी आंखें फैल गईं।
“ये… अंदर जाएगा?” उसने शरमाते हुए पूछा।
“धीरे-धीरे जाएगा। तुम रिलैक्स रहो,” मैंने उसे चूमते हुए कहा।
मैंने उसके पैर फैलाए। लंड का सिर उसके चूत के मुंह पर रखा और हल्का दबाव दिया। वो थोड़ी सी सिकुड़ी, लेकिन फिर खुद को खोल दिया। मैं बहुत धीरे से अंदर घुसने लगा। उसकी चूत बहुत टाइट थी, लेकिन गीली होने की वजह से आसानी से जा रहा था।
“आह… भरा हुआ लग रहा है… राहुल…” वो कराह रही थी।
मैं पूरी तरह अंदर चला गया। कुछ सेकंड रुका रहा ताकि वो आदत डाल ले। फिर धीरे-धीरे पिस्टन मूवमेंट शुरू किया। नेहा के हाथ मेरी पीठ पर थे। उसके नाखून हल्के से गड़ रहे थे, लेकिन दर्द नहीं, बस प्यार।
हमारी रफ्तार बढ़ती गई। मैं उसके स्तनों को चूसता, होंठ चूसता और नीचे धक्के मारता। नेहा अब पूरी तरह खुल गई थी। “जोर से… और जोर से राहुल… मुझे अच्छा लग रहा है,” वो बार-बार कह रही थी।
मैंने उसे डॉगी स्टाइल में किया। उसकी गोल-गोल गांड देखकर मेरा लंड और सख्त हो गया। मैंने पीछे से पकड़कर जोर-जोर से ठोका। उसके बाल पकड़े और हल्का खींचा। वो झुककर और पीछे उठाकर मिल रही थी।
“मैं फिर से… आ रही हूं…” वो चीखी।
दूसरा ऑर्गेज्म उसका और भी तेज था। उसकी चूत मेरे लंड को दबाने लगी। मैं भी किनारे पर था। मैंने पूछा, “अंदर छोड़ूं?”
“हां… मुझे महसूस करना है,” उसने सांसें चलाते हुए कहा।
मैंने जोर-जोर से धक्के मारे और आखिर में पूरा माल उसके अंदर उड़ेल दिया। गर्म-गर्म झटके लगे। हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए।
उसके बाद हम काफी देर तक चुपचाप लेटे रहे। मैं उसके बालों में उंगलियां फिराता रहा। वो मेरी छाती पर सिर रखे पड़ी थी।
“राहुल… ये सबसे खूबसूरत अनुभव था,” उसने धीरे से कहा।
“तुम्हारा पहला सेक्स याद रहेगा हमेशा,” मैंने उसे चूमते हुए कहा।
उस रात हम दो बार और प्यार किया। दूसरी बार वो ऊपर आई थी। उसकी जवान देह मेरे ऊपर उछल रही थी। उसके स्तन हिल रहे थे। मैंने नीचे से उसके कूल्हों को पकड़कर सहारा दिया। वो खुद रिदम बना रही थी। उसकी चूत अब पहले से ज्यादा आराम से मेरा लंड निगल रही थी।
सुबह जब वो उठी तो उसका चेहरा चमक रहा था। हमने साथ नहाया। शावर के नीचे फिर से किसिंग हुई। मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदा। पानी हमारे शरीरों पर बह रहा था। उसकी चीखें बारिश की आवाज में घुल गईं।
उस दिन के बाद नेहा और मैं एक-दूसरे के बहुत करीब हो गए। वो अब मेरे फ्लैट में खुलकर आती। कभी-कभी रात को भी रुक जाती। हम दोनों ने कई नई पोजीशन्स ट्राई कीं। कभी ६९, कभी स्पूनिंग। वो अब सेक्स के बारे में खुलकर बात करती। बताती कि उसे क्या पसंद है।
एक दिन उसने कहा, “राहुल, तुमने मुझे महिला बना दिया।”
मैंने उसे गले लगाते हुए कहा, “और तुमने मुझे सिखाया कि प्यार कैसे किया जाता है।”
हमारा रिलेशन सिर्फ सेक्स तक सीमित नहीं था। हम एक-दूसरे का ख्याल रखते, एक-दूसरे की मदद करते। पड़ोस वाले कुछ शक भी करते, लेकिन हम दोनों को कोई फर्क नहीं पड़ता था।
आज भी जब मैं उसकी याद करता हूं तो वो पहली रात याद आ जाती है। जब वो मेरे सामने पूरी तरह नंगी, शरमाती हुई, लेकिन पूरी तरह भरोसे के साथ खड़ी थी। उसकी जवान चूत, उसके गुलाबी निप्पल्स, उसकी गर्म सांसें… सब कुछ।
पड़ोस की जवान लड़की का पहला सेक्स न सिर्फ शारीरिक था, बल्कि भावनात्मक भी था। हम दोनों ने एक-दूसरे को पूरा किया। और आज भी जब कभी हम मिलते हैं, वो मुस्कुराकर कहती है, “आज फिर से?”