पड़ोस की जवान लड़की का पहला सेक्स

मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली के एक शांत से इलाके में एक छोटे से फ्लैट में रहता हूं। मेरे ठीक बगल वाले फ्लैट में रहती थी नेहा। नेहा सिर्फ २२ साल की थी, लेकिन उसकी जवानियों ने किसी को भी दीवाना बना देना था। लंबे काले बाल, गोरा रंग, बड़ी-बड़ी आंखें और वो मासूम मुस्कान। उसकी छाती हमेशा टाइट टॉप में दबती हुई दिखती और उसकी गोल गंधे वाली कमर को देखकर मन करता कि बस छू लूं।

हम दोनों पड़ोसी थे, इसलिए धीरे-धीरे बातें होने लगीं। वो कॉलेज जाती थी और शाम को लौटकर अक्सर बालकनी में खड़ी होकर फोन पर बात करती। मैं भी अपनी बालकनी से उसे देखता रहता। एक दिन बिजली चली गई और उसका इन्वर्टर खराब हो गया। वो मेरे दरवाजे पर आई।

“राहुल भैया, थोड़ी देर चार्जर लगा लूं? मेरा फोन डेड हो गया है,” उसने शरमाते हुए कहा।

मैंने मुस्कुराते हुए अंदर बुलाया। वो पहली बार मेरे फ्लैट में आई थी। हल्का सा परफ्यूम उसकी बॉडी से आ रहा था। मैंने उसे सोफे पर बैठाया और पानी दिया। बातें शुरू हुईं। वो बहुत मासूम थी, लेकिन उसकी नजरों में कुछ जिज्ञासा थी। हम दोनों की उम्र लगभग बराबर थी, इसलिए जल्दी ही “भैया” हटकर “राहुल” हो गया।

अगले कुछ हफ्तों में हम काफी क्लोज हो गए। वो मुझे अपनी कॉलेज की बातें बताती, मैं उसे अपनी जॉब की। कभी-कभी हम साथ में चाय पीते, कभी बाहर घूमने जाते। मैंने देखा कि वो मेरे पास आने पर थोड़ा ज्यादा शरमाती है। उसकी आंखें झुक जातीं, लेकिन होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान रहती।

एक शाम बारिश हो रही थी। नेहा मेरे घर आई थी किताब लेने। बारिश इतनी तेज थी कि वो रुक गई। हम दोनों बालकनी में खड़े होकर बारिश देख रहे थे। उसकी साड़ी का पल्लू हल्का भीग गया था और उसकी ब्लाउज से उसकी ब्रा की आउटलाइन साफ दिख रही थी। मेरी नजर बार-बार वहां जा रही थी।

“राहुल… तुम मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो?” उसने धीरे से पूछा, लेकिन भागी नहीं।

“क्योंकि तुम बहुत खूबसूरत हो, नेहा,” मैंने सच्चाई से कहा।

वो शरमा गई। उसके गाल लाल हो गए। मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ा। वो हाथ खींची नहीं। बस नजरें नीचे कर लीं। मैंने उसे अपनी तरफ खींचा। हमारा पहला किस बहुत धीरे से हुआ। उसके होंठ नरम और गर्म थे। वो थोड़ी कांप रही थी, लेकिन मेरे सीने से चिपक गई।

“डर लग रहा है?” मैंने उसके कान में फुसफुसाया।

“थोड़ा… लेकिन तुम्हारे साथ अच्छा लग रहा है,” उसने शर्माते हुए जवाब दिया।

हम अंदर आए। मैंने उसे सोफे पर बिठाया। किसिंग जारी रही। मेरे हाथ उसकी पीठ पर घूम रहे थे। धीरे-धीरे मैंने उसकी साड़ी का पल्लू नीचे सरका दिया। उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। मैंने उसके ब्लाउज के हुक खोले। सफेद ब्रा में उसकी गोल-गोल ब्रेस्ट्स देखकर मेरा लंड तना हुआ जा रहा था।

“राहुल… धीरे से,” वो फुसफुसाई।

मैंने उसकी ब्रा उतारी। उसके गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने एक को मुंह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। नेहा की सांसें तेज हो गईं। “आह… राहुल…” वो कराह उठी। मेरे हाथ उसकी कमर पर, फिर उसकी नाभि पर घूम रहे थे। मैंने उसकी साड़ी का फंदा खोला। वो सिर्फ पैंटी में रह गई। उसकी जांघें मोटी और चिकनी थीं। पैंटी पर हल्का सा गीला धब्बा दिख रहा था।

मैंने अपनी शर्ट उतारी। नेहा ने पहली बार मेरी छाती को छुआ। उसके नाखून हल्के से खरोंच रहे थे। मैंने उसे उठाकर बेडरूम ले गया। लाइट्स डिम रखीं। वो बेड पर लेट गई। मैं उसके ऊपर आया। किस करते हुए मैं उसकी गर्दन, छाती, पेट सब चूम रहा था। जब मैं उसकी पैंटी उतारने लगा तो वो मेरी कलाई पकड़ ली।

“पहली बार है… प्लीज प्यार से,” उसकी आंखों में शर्म और चाहत दोनों थे।

मैंने उसे आश्वासन देते हुए कहा, “मैं तुम्हें कभी दर्द नहीं दूंगा, नेहा। तुम जब कहोगी, रुक जाऊंगा।”

उसने मुस्कुराकर सिर हिला दिया। मैंने उसकी पैंटी उतार दी। उसकी चिकनी, गुलाबी चूत बिल्कुल साफ और छोटी थी। हल्की सी नमी चमक रही थी। मैंने अपनी उंगलियां धीरे से उसकी जांघों के बीच फेरनी शुरू की। वो सिकुड़ गई, लेकिन फिर धीरे-धीरे फैल गई। मेरी उंगली उसकी चूत की ऊपरी हिस्से पर घूम रही थी। क्लिटोरिस को छूते ही वो झटके से कांप उठी।

“उम्म्म… क्या हो रहा है… अच्छा लग रहा है,” वो आंखें बंद करके बोली।

मैंने धीरे से उंगली अंदर डाली। वो बहुत टाइट थी। अंदर गर्मी और नमी थी। मैं धीरे-धीरे उंगली अंदर-बाहर करने लगा। नेहा की कमर उठने लगी। उसके मुंह से हल्की-हल्की सिसकारियां निकल रही थीं। मैंने अपना मुंह भी नीचे ले जाकर उसकी चूत को चाटना शुरू किया। जब मेरी जीभ उसके क्लिट पर घूमी तो वो जोर से चीख पड़ी।

“राहुल! ये… अह्ह्ह… बहुत अच्छा… मत रुको…”

मैंने उसे लाइटर और लाइटर चाटा। उसके जूस का स्वाद मीठा था। कुछ ही मिनटों में उसका पहला ऑर्गेज्म आ गया। वो पूरी तरह कांप उठी, दोनों हाथों से मेरा सिर दबाए हुए। उसके बाद वो थोड़ी देर शांत पड़ी रही।

अब मेरी बारी थी। मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड पूरा तना हुआ, मोटा और लंबा खड़ा था। नेहा ने पहली बार उसे देखा तो उसकी आंखें फैल गईं।

“ये… अंदर जाएगा?” उसने शरमाते हुए पूछा।

“धीरे-धीरे जाएगा। तुम रिलैक्स रहो,” मैंने उसे चूमते हुए कहा।

मैंने उसके पैर फैलाए। लंड का सिर उसके चूत के मुंह पर रखा और हल्का दबाव दिया। वो थोड़ी सी सिकुड़ी, लेकिन फिर खुद को खोल दिया। मैं बहुत धीरे से अंदर घुसने लगा। उसकी चूत बहुत टाइट थी, लेकिन गीली होने की वजह से आसानी से जा रहा था।

“आह… भरा हुआ लग रहा है… राहुल…” वो कराह रही थी।

मैं पूरी तरह अंदर चला गया। कुछ सेकंड रुका रहा ताकि वो आदत डाल ले। फिर धीरे-धीरे पिस्टन मूवमेंट शुरू किया। नेहा के हाथ मेरी पीठ पर थे। उसके नाखून हल्के से गड़ रहे थे, लेकिन दर्द नहीं, बस प्यार।

हमारी रफ्तार बढ़ती गई। मैं उसके स्तनों को चूसता, होंठ चूसता और नीचे धक्के मारता। नेहा अब पूरी तरह खुल गई थी। “जोर से… और जोर से राहुल… मुझे अच्छा लग रहा है,” वो बार-बार कह रही थी।

मैंने उसे डॉगी स्टाइल में किया। उसकी गोल-गोल गांड देखकर मेरा लंड और सख्त हो गया। मैंने पीछे से पकड़कर जोर-जोर से ठोका। उसके बाल पकड़े और हल्का खींचा। वो झुककर और पीछे उठाकर मिल रही थी।

“मैं फिर से… आ रही हूं…” वो चीखी।

दूसरा ऑर्गेज्म उसका और भी तेज था। उसकी चूत मेरे लंड को दबाने लगी। मैं भी किनारे पर था। मैंने पूछा, “अंदर छोड़ूं?”

“हां… मुझे महसूस करना है,” उसने सांसें चलाते हुए कहा।

मैंने जोर-जोर से धक्के मारे और आखिर में पूरा माल उसके अंदर उड़ेल दिया। गर्म-गर्म झटके लगे। हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए।

उसके बाद हम काफी देर तक चुपचाप लेटे रहे। मैं उसके बालों में उंगलियां फिराता रहा। वो मेरी छाती पर सिर रखे पड़ी थी।

“राहुल… ये सबसे खूबसूरत अनुभव था,” उसने धीरे से कहा।

“तुम्हारा पहला सेक्स याद रहेगा हमेशा,” मैंने उसे चूमते हुए कहा।

उस रात हम दो बार और प्यार किया। दूसरी बार वो ऊपर आई थी। उसकी जवान देह मेरे ऊपर उछल रही थी। उसके स्तन हिल रहे थे। मैंने नीचे से उसके कूल्हों को पकड़कर सहारा दिया। वो खुद रिदम बना रही थी। उसकी चूत अब पहले से ज्यादा आराम से मेरा लंड निगल रही थी।

सुबह जब वो उठी तो उसका चेहरा चमक रहा था। हमने साथ नहाया। शावर के नीचे फिर से किसिंग हुई। मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदा। पानी हमारे शरीरों पर बह रहा था। उसकी चीखें बारिश की आवाज में घुल गईं।

उस दिन के बाद नेहा और मैं एक-दूसरे के बहुत करीब हो गए। वो अब मेरे फ्लैट में खुलकर आती। कभी-कभी रात को भी रुक जाती। हम दोनों ने कई नई पोजीशन्स ट्राई कीं। कभी ६९, कभी स्पूनिंग। वो अब सेक्स के बारे में खुलकर बात करती। बताती कि उसे क्या पसंद है।

एक दिन उसने कहा, “राहुल, तुमने मुझे महिला बना दिया।”

मैंने उसे गले लगाते हुए कहा, “और तुमने मुझे सिखाया कि प्यार कैसे किया जाता है।”

हमारा रिलेशन सिर्फ सेक्स तक सीमित नहीं था। हम एक-दूसरे का ख्याल रखते, एक-दूसरे की मदद करते। पड़ोस वाले कुछ शक भी करते, लेकिन हम दोनों को कोई फर्क नहीं पड़ता था।

आज भी जब मैं उसकी याद करता हूं तो वो पहली रात याद आ जाती है। जब वो मेरे सामने पूरी तरह नंगी, शरमाती हुई, लेकिन पूरी तरह भरोसे के साथ खड़ी थी। उसकी जवान चूत, उसके गुलाबी निप्पल्स, उसकी गर्म सांसें… सब कुछ।

पड़ोस की जवान लड़की का पहला सेक्स न सिर्फ शारीरिक था, बल्कि भावनात्मक भी था। हम दोनों ने एक-दूसरे को पूरा किया। और आज भी जब कभी हम मिलते हैं, वो मुस्कुराकर कहती है, “आज फिर से?”

रश्मी की ब्रा-पेंटी उतार के जोरदार चुदाई

दोस्तों! मैं राजीव दिल्ली का लड़का हूँ। जिंदगी में कुछ पल ऐसे आ जाते हैं जो सब कुछ बदल देते हैं। वो पल मेरी जिंदगी को पहले से बिल्कुल अलग बना गए। आज मैं आपको अपनी उस अनुभव की पूरी कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जो मुझे दुनिया की सबसे गहरी और मीठी खुशी दे गई। ये सब शुरू हुआ हमारे मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के पहले दिन से।

क्लास शुरू होने से पहले मैं और मेरे हॉस्टल वाले दोस्त कैंपस घूमने निकले। पूरा कैंपस देखने के बाद हम मेन गेट के पास बैठ गए। नजरें उन लड़कियों पर घूम रही थीं जो कॉलेज आ रही थीं। हर कोई अपनी जगह अच्छी थी, लेकिन अचानक एक रिक्शा गेट पर रुका। उसमें से एक लड़की उतरी – नीली स्किन टाइट जींस और टाइट फिट लाल स्लीवलेस टी-शर्ट पहने। उसकी पीठ मेरी तरफ थी। लंबे खुल्ले बाल, कमर पतली, हिप्स गोल-गोल – फिगर करीब 34-32-35। रिक्शा वाले को पैसे देकर वो मुड़ी। जैसे बादलों भरे आसमान में अचानक पूरा चाँद निकल आए। चेहरा इतना प्यारा – भूरी आँखें, तेज नाक, रसीले होंठ। गोरा रंग, गुलाब की कली जैसी नाजुक सुंदरता। मैं उसे घूरता रह गया। उसकी छातियाँ गोल और भरी-भरी, टी-शर्ट और जींस में ब्रा और पैंटी की लाइन साफ दिख रही थी। जब वो चलने लगी तो उसके नितंबों का लहराता हुआ हिलना… वाह! मेरी जाँघों के बीच का सामान तुरंत खड़ा हो गया और सलाम ठोकने लगा। वो भीड़ में गायब हो गई, लेकिन मेरा दिल उसके उन गोल नितंबों के बीच खो गया।

लेक्चर की घंटी बजी। हम क्लास में घुसे। देखा तो वही लड़की हमारी क्लास में बैठी थी। नाम था रश्मि। मुंबई से आई थी। हमारे नाम के पहले अक्षर एक जैसे थे, इसलिए हम एक ही असाइनमेंट ग्रुप में थे। ग्रुप में दो और लड़कियाँ और एक लड़का था। कुछ ही दिनों में हम पाँचों अच्छे दोस्त बन गए। साथ में शहर घूमते, मस्ती करते। रश्मि बहुत एक्स्ट्रोवर्ट थी – हमेशा कॉलेज के किसी न किसी फंक्शन में व्यस्त। पढ़ाई में भी तेज थी, इसलिए ग्रुप की लीडर बन गई। उसके साथ समय बिताना मुझे हमेशा गर्म और एनर्जेटिक महसूस होता। उसका बदन मुझे हमेशा खींचता। मौका मिलते ही मैं उसके ब्लाउज में झाँकता, “अनजाने” में उसकी छातियों या पीठ को छू लेता। वो कभी गुस्सा नहीं करती। बस प्यारी सी डिंपल मुस्कान दे देती।

अन्युअल गेट टूगेदर से एक दिन पहले की बात है। रश्मि दौड़ती हुई मेरे पास आई और बोली, “राजीव, ग्रुप असाइनमेंट घर भूल आई हूँ। आज ही सबमिट करना है।” वो अपने फ्लैट में रहती थी, कॉलेज के पास ही, अपनी फ्रेंड साक्षी के साथ। मैंने कहा, “साक्षी को फोन करके मँगवा लो।” उसने बताया कि साक्षी घर चली गई है फैमिली फंक्शन के लिए, और वो खुद फैशन शो ऑर्गनाइज करने में बिजी है। आखिर मैं मान गया। उसने चाबी दे दी। मैं बाइक लेकर उसके फ्लैट पहुँच गया। पहले भी ग्रुप वर्क के लिए आया था, इसलिए फ्लैट की सेटिंग पता थी – टू बीएचके, हल्के रंग की दीवारें, आरामदायक।

उसके रूम में घुसा। असाइनमेंट टेबल पर रखा था। उठाया और जाने लगा, तभी बेड के नीचे बाल्टी नजर आई। उसमें कुछ कपड़े थे। निकाला तो – काला नाइट सूट, सफेद ब्रा और गुलाबी पैंटी। शायद कल की। मेरा दिल जोर से धड़का। मुझे लड़कियों के अंडरगारमेंट्स का हमेशा से क्रेज रहा है। ब्रा उठाई, चूमने लगा। पसीने की हल्की सी महक। फिर पैंटी उठाई – उसकी गंध इतनी कामुक कि मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया। अचानक डोर बेल बजी। मैंने सब बाल्टी में रख दिया, वैसा ही छोड़ दिया और दरवाजा खोलने गया।

रश्मि खड़ी थी। “क्या हुआ? क्यों वापस आ गई?” पूछा मैंने। बोली, “लेक्चर कैंसल हो गया। और फैशन शो का रिहर्सल भी ट्रांसफॉर्मर खराब होने से रुक गया।” हम लिविंग रूम के सोफे पर बैठ गए। वो थकी हुई लग रही थी। आँखें बंद करके आराम करने लगी। उसकी आर्मपिट्स पसीने से पूरी भीगी हुई थीं। टी-शर्ट से ब्रा का एक स्ट्रैप बाहर झाँक रहा था। मैं उसकी छातियों को घूर रहा था। बीच में छोटे-छोटे उभार साफ दिख रहे थे।

थोड़ी देर बाद उसने आँखें खोलीं और मुस्कुराते हुए बोली, “राजीव, तू बैठ यहाँ। मैं फ्रेश हो जाती हूँ और फ्रिज से कुछ फ्रूट्स ले आती हूँ।” वो बेडरूम में चली गई। मैं टीवी ऑन कर दिया। रिमोट खराब चल रहा था। उसी बीच बाथरूम का दरवाजा बंद हुआ और हल्की सी “प्श्श्श्श्श” की आवाज आने लगी। वो पेशाब कर रही थी। वो आवाज सुनकर मेरा लंड और भी तन गया। थोड़ी देर बाद वो बाहर आई और बाथरूम में नहाने चली गई। कुछ मिनट बाद लिविंग रूम में आई तो देखा – गहरे नीले नाइट सूट में, बाल खुल्ले, कंधों पर पानी की बूँदें चमक रही थीं। हाथ में फ्रूट्स की प्लेट। पास बैठ गई और मुझे ऑफर किया।

मैं फ्रूट्स खाते-खाते चैनल बदलने लगा। अचानक रिमोट पूरी तरह बंद। उसी चैनल पर एक बहुत हॉट रोमांटिक सीन चल रहा था – हीरोइन और हीरो गहरे प्यार में, एक-दूसरे को छू रहे थे, किस कर रहे थे, कपड़े उतर रहे थे। मैं शर्म से चैनल बदलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन रिमोट काम नहीं कर रहा था। मैं उठा कि टीवी के पास जाकर बदलूँ। रश्मि ने मेरा हाथ पकड़ लिया और नरम स्वर में बोली, “अरे राजीव, इतना घबरा क्यों रहा है? हम एक ही उम्र के हैं… हमारी इच्छाएँ भी एक जैसी हैं। इसमें शर्माने वाली क्या बात है?” उसकी आवाज में इतनी हिम्मत थी कि मैं वापस बैठ गया। हम दोनों ने पूरा सीन देखा। मेरा लंड पैंट में तंबू बना चुका था। रश्मि भी उत्तेजित हो गई थी – होंठ थोड़े खुले, पैर की उँगलियाँ बार-बार हिल रही थीं।

मैंने हिम्मत जुटाई और पूछ लिया, “रश्मि… तूने पहले कभी… मतलब… किया है?” वो शरमाते हुए बोली, “क्या? समझी नहीं।” मैंने साफ कहा, “किसी से फक हुआ है पहले?” वो आँखें नीची करके बोली, “नहीं… कभी नहीं।” मैंने आगे पूछा, “इंटरकोर्स के बारे में कितना जानती है?” उसने कहा, “बुक्स पढ़ी हैं… सेक्स और प्रेग्नेंसी वाली।” मैंने कहा, “लेकिन प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस?” वो बोली, “नहीं राजीव। शादी से पहले कैसे? और एड्स का डर भी है।” मैं हैरान था कि कॉलेज में इतनी मॉडर्न लगने वाली लड़की के मन में इतने गलत खयाल हैं।

मैंने धीरे से समझाया, “देख रश्मि, सिर्फ किताबी ज्ञान से काम नहीं चलेगा। प्रैक्टिकल पता न हो तो शादी में पार्टनर को खुश नहीं रख पाएगी। अगर सावधानी बरती जाए – कंडोम वगैरह – तो कोई खतरा भी नहीं।” वो सोचने लगी। फिर बोली, “तू सही कह रहा है… लेकिन कौन देगा मुझे ये प्रैक्टिकल नॉलेज? और अगर किसी को पता चल गया तो?” मैंने उसका हाथ पकड़ा, आँखों में देखा और बोली, “मैं दूँगा… अगर तुझे मुझ पर भरोसा है तो एक मौका दे।” वो मुस्कुराई, थोड़ा लाल हो गई और धीरे से बोली, “ओके…”

मैंने उसे अपनी बाहों में खींच लिया। उसने सिर मेरी छाती पर टिका दिया। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “रश्मि डार्लिंग, सबसे पहली बात – धीरे-धीरे, बिना जल्दबाजी के। तू यहीं बैठ। मैं कंडोम ले आता हूँ, फिर शुरू करते हैं।” वो सहमति में सिर हिला दी। मैं पास की मेडिकल शॉप से कंडोम और एक्स्ट्रा सेफ्टी के लिए टैबलेट्स ले आया।

लौटा तो रश्मि ने दरवाजा खोला। देखकर मैं हैरान रह गया – पीली साड़ी, स्लीवलेस ब्लाउज, माथे पर लाल बिंदी। इंडियन लुक में उसे पहले कभी नहीं देखा था। अंदर घुसा, दरवाजा लॉक किया, उसे जोर से अपनी बाहों में भर लिया और बोला, “आज स्वर्ग में रंभा भी तुझे देखकर जल रही होगी!” उसकी छातियाँ मेरी छाती से सटी हुई थीं। मैंने उसे लंबा, गहरा किस किया। वो साँस लेते हुए बोली, “हनी… मैं तेरी हूँ। जो करना है कर…”

मैंने उसे गोद में उठाया, बेडरूम ले गया। बेड पर लिटाया और उसके ऊपर लेट गया। कपड़ों के ऊपर से ही उसके हर हिस्से को किस करने लगा – पैरों की उँगलियों से शुरू करके घुटनों, जाँघों, कमर, पेट, छातियों, आर्मपिट्स, कंधों, गर्दन, गालों, होंठों और माथे तक। वो हल्के-हल्के कराहने लगी, “आह्ह्ह… राजीव…” उसका बदन गर्म हो रहा था, साँसें तेज। मैंने उसकी साड़ी खोल दी। अब वो पीली पेटीकोट और ब्लाउज में थी। ब्लाउज के हुक खोले, उतारा। अंदर ब्लैक नेटेड ब्रा। दोनों हाथों से ब्रा के ऊपर से ही छातियों को दबाने लगा। उसकी कराह बढ़ गई। फिर पेटीकोट का नादा खोला, नीचे सरका दिया। अब वो सिर्फ ब्लैक पैंटी में थी।

अब वो भी पूरी तरह शामिल हो गई। मेरी शर्ट उतारी, पैंट का हुक खोलकर नीचे सरका दिया। मैं अंडरवियर में, वो ब्रा-पैंटी में। मैंने ब्रा का हुक खोला। उसकी गुलाबी निप्पल्स वाली भरी-भरी छातियाँ बाहर आ गईं। मैंने उन्हें चूसना शुरू किया – जोर-जोर से, जीभ घुमाते हुए। वो मेरे बालों में उँगलियाँ फेर रही थी, दूसरा हाथ मेरे अंडरवियर में डालकर मेरे लंड को सहला रही थी। छातियाँ लाल और गर्म हो गईं।

फिर मैंने उसकी पैंटी नीचे सरका दी। उसकी साफ शेव्ड, प्यारी सी चूत सामने थी। वो शरमा कर दोनों हाथों से चेहरा छुपा लिया। मैंने हाथ हटाए, प्यार से चूम लिया। उँगलियों से धीरे-धीरे उसकी चूत को सहलाने लगा। कुछ ही देर में वो गीली हो गई। मैंने एक उँगली अंदर डाली। वो कराह उठी, “आह्ह्ह… राजीव… और गहरा…” अब वो पूरी तरह तैयार थी।

मैंने अपना अंडरवियर उतारा। मेरा लंड पूरा खड़ा। वो उसे देखकर मुस्कुराई, थोड़ा शरमाई, लेकिन डरी नहीं। मैंने कंडोम चढ़ाया। उसे पीठ के बल लिटाया, दोनों जाँघें उठाईं, घुटनों के बल बैठ गया। उसने खुद अपना हाथ बढ़ाया, मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत के मुहाने पर रख दिया। मैंने धीरे से, लेकिन मजबूती से धक्का दिया। वो आह भरकर बोली, “आह्ह्ह… राजीव… अंदर आ गया…” कोई दर्द नहीं, सिर्फ गर्मी और खुशी की लहर। मैं रुक गया, उसे समय दिया। फिर धीरे-धीरे स्टार्ट किया। वो भी कमर हिलाने लगी।

“हाँ… और तेज… राजीव… बहुत अच्छा लग रहा है…” उसकी छातियाँ लहरा रही थीं। मैंने रफ्तार बढ़ाई। २०-२५ स्टोक्स के बाद मैं झड़ गया। कंडोम में पूरा भर गया। मैं उसके ऊपर ही लेट गया। कुछ देर बाद निकाला, कंडोम फेंका और उसके पास लेट गया। वो मुझे जकड़कर बोली, “राजीव… आज तूने मुझे जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी दे दी। थैंक यू डार्लिंग… तू मेरा सेक्स गुरु है!” मैंने उसके होंठ चूमे और बोला, “स्वीटहार्ट, तेरे लिए कुछ भी!”

उसके बाद हम दोनों थककर सो गए।

इस घटना के बाद रश्मि कॉलेज में मुझे “गुरु” कहकर पुकारने लगी। कोई पूछता तो हम एक-दूसरे को देखकर शरारती मुस्कान देते। उसके बाद हमने उसके फ्लैट में कई पोजीशन्स में बार-बार किया – कभी मिशनरी, कभी डॉगी, कभी वो ऊपर। कभी कॉलेज की लेडीज बाथरूम में, कभी बस में छुप-छुपकर, कभी जंगल में ट्रिप के दौरान। जब रश्मि नहीं होती तो उसकी रूममेट साक्षी के साथ भी मजा लेता। जम्मू जाता तो पड़ोस की आंटी मनीषा और स्कूल फ्रेंड गौरी को भी नहीं छोड़ता।

वर्जिन कॉलेज गर्ल की पहली चुदाई बस में

रिया की जिंदगी में वो रात कभी नहीं भूली। वो एक साधारण सी कॉलेज गर्ल थी – उम्र सिर्फ़ उन्नीस साल, दिल्ली यूनिवर्सिटी में पहला साल। गोरी, लंबे काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें और वो फिगर जो हर लड़के का ध्यान खींच लेता था। लेकिन रिया अब तक वर्जिन थी। उसने कभी किसी लड़के को इतना करीब नहीं आने दिया था। आज वो घर जा रही थी – लंबी बस जर्नी, रात की बस, लखनऊ से दिल्ली। टिकट कन्फर्म था, लेकिन सीट मिली थी आखिरी वाली बर्थ में।

बस स्टैंड पर भीड़ थी। रिया ने अपनी छोटी सी बैग संभाली, सफ़ेद टॉप और नीली जीन्स पहनी थी। टॉप थोड़ा टाइट था, जिससे उसकी नई-नई विकसित ब्रेस्ट्स का आकार साफ़ झलक रहा था। वो बस में चढ़ी तो देखा कि उसकी सीट पर पहले से एक लड़का बैठा था। लंबा, फेयर, मसल्स वाली बॉडी, उम्र करीब पच्चीस। उसका नाम था आर्यन। वो मुस्कुराया और बोला, “मैडम, आपकी सीट है ना? मैं शिफ़्ट हो जाता हूँ।”

रिया ने शरमाते हुए सिर हिलाया। “नहीं, कोई बात नहीं। बस में जगह तो है।” दोनों एक ही बर्थ पर बैठ गए। रात के दस बज चुके थे। बस स्टार्ट हुई। लाइट्स धीरे-धीरे कम हो गईं। बाहर अंधेरा। अंदर सिर्फ़ हल्की नीली लाइट जल रही थी। आर्यन ने बात शुरू की – “कॉलेज में पढ़ती हो? लगती हो स्टूडेंट।”

रिया हँसी। “हाँ, दिल्ली यूनिवर्सिटी। फर्स्ट ईयर। घर जा रही हूँ।” बातें बढ़ती गईं। आर्यन हंसमुख था, पढ़ा-लिखा, सॉफ्ट स्पोकन। रिया को उसकी आवाज़ अच्छी लगी। धीरे-धीरे वो दोनों करीब आ गए। बस हिल रही थी, कभी-कभी झटके लगते। रिया का कंधा आर्यन के कंधे से टकराता। उसने महसूस किया कि आर्यन का शरीर गर्म है।

रिया ने अपनी जाँघें थोड़ी सींच लीं। लेकिन बस की हिचकिचाहट में उसकी जाँघ आर्यन की जाँघ से रगड़ खा गई। दोनों ने एक-दूसरे को देखा। आर्यन की आँखों में कुछ अलग चमक थी। रिया ने महसूस किया कि उसकी साँसें तेज़ हो रही हैं। वो खुद को रोक नहीं पा रही थी। “ये क्या हो रहा है?” उसने मन में सोचा, लेकिन शरीर कुछ और ही कह रहा था।

आर्यन ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा। “ठंड लग रही है क्या?” रिया ने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुरा दी। आर्यन ने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगा। रिया की उँगलियाँ काँप रही थीं, लेकिन उसने हाथ नहीं छुड़ाया। बस अब और अंधेरी हो गई थी। आस-पास के पैसेंजर सो चुके थे। कंडक्टर ने भी लाइट ऑफ़ कर दी थी।

आर्यन ने रिया के कान के पास फुसफुसाया, “तुम बहुत प्यारी हो।” रिया का चेहरा लाल हो गया। वो शरमा रही थी, लेकिन अंदर से एक अजीब सी गर्मी फैल रही थी। उसने आर्यन की तरफ़ देखा। आर्यन ने धीरे से उसकी गर्दन पर एक हल्का सा किस किया। रिया ने आँखें बंद कर लीं। वो पहली बार किसी लड़के के होठों को अपनी त्वचा पर महसूस कर रही थी। सनसनी पूरे शरीर में दौड़ गई।

“मुझे… अच्छा लग रहा है,” रिया ने धीमी आवाज़ में कहा। उसकी आवाज़ में सहमती का एहसास था। आर्यन ने और करीब आकर उसके होंठों को चूम लिया। रिया ने भी जवाब दिया। उनके होंठ मिले, जीभें आपस में खेलने लगीं। रिया को लगा जैसे बिजली दौड़ गई हो। उसकी ब्रेस्ट्स आर्यन के सीने से दब रही थीं। आर्यन ने हाथ नीचे सरकाया और रिया की कमर को सहलाने लगा।

रिया ने खुद को रोकने की कोशिश की, लेकिन शरीर नहीं मान रहा था। वो आर्यन के गले में बाँहें डालकर और करीब आ गई। “आर्यन… मैं… कभी नहीं किया,” उसने शरमाते हुए कहा। आर्यन ने उसकी आँखों में देखा और मुस्कुराया, “मैं धीरे करूँगा। तुम्हें अच्छा लगेगा, भरोसा रखो।” रिया ने सिर हिला दिया। वो तैयार थी। उसका मन और शरीर दोनों एक साथ कह रहे थे – हाँ

आर्यन ने रिया का टॉप ऊपर किया। उसकी गोरी ब्रेस्ट्स बाहर आ गईं। ब्रा भी हटा दी। रिया की निप्पल्स पहले से ही खड़ी थीं। आर्यन ने एक निप्पल को मुँह में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। रिया की साँसें भारी हो गईं। “आह्ह…” वो धीमी सी कराह उठी। आर्यन दूसरी ब्रेस्ट को हाथ से दबा रहा था, उँगलियाँ निप्पल को घुमा रही थीं। रिया को लग रहा था जैसे पूरा शरीर पिघल रहा हो।

उसने आर्यन का शर्ट खोल दिया। उसकी छाती चौड़ी और मसल्ड थी। रिया ने हाथ फेरा। आर्यन का शरीर गर्म और सख्त था। आर्यन ने अब रिया की जीन्स का बटन खोला। धीरे-धीरे जीन्स नीचे सरकाई। रिया ने खुद ही मदद की। उसकी पैंटी भीगी हुई थी। आर्यन ने पैंटी को भी उतार दिया। अब रिया पूरी तरह नंगी थी – बस की बर्थ पर, अंधेरे में, आर्यन के सामने।

आर्यन ने उसकी जाँघों को फैलाया। रिया की चूत बिल्कुल साफ़ और गुलाबी थी। वो पहली बार किसी को इतना करीब देख रही थी। आर्यन ने झुककर उसकी चूत को चूम लिया। रिया चौंक गई, लेकिन फिर आनंद से कराह उठी। “उम्म्म… आर्यन… क्या कर रहे हो?” आर्यन ने जीभ से उसकी क्लिटोरिस को चाटा। रिया की कमर उठ गई। वो आर्यन के बालों को पकड़कर दबा रही थी।

आर्यन की जीभ अंदर-बाहर हो रही थी। रिया को ऐसा लग रहा था जैसे कोई जादू हो गया हो। उसकी चूत से रस निकल रहा था। आर्यन ने उँगली भी डाली – एक उँगली, फिर दो। धीरे-धीरे अंदर-बाहर। रिया की साँसें फूल रही थीं। “हाँ… और… अच्छा लग रहा है,” वो फुसफुसाई।

अब आर्यन ने अपना पैंट उतारा। उसका लंड बाहर आ गया – मोटा, लंबा, सख्त। रिया ने उसे देखा और शरमा गई, लेकिन उसकी आँखों में भूख थी। आर्यन ने रिया को अपनी गोद में बिठाया। रिया ने खुद आर्यन के लंड को पकड़ा और अपनी चूत पर रखा। वो धीरे-धीरे बैठ गई।

लंड धीरे-धीरे अंदर घुसा। रिया को हल्का सा दबाव महसूस हुआ, लेकिन दर्द नहीं। सिर्फ़ भरपूर आनंद। “आह्ह… पूरा… अंदर ले लो,” रिया ने कहा। आर्यन ने उसे कसकर पकड़ लिया और नीचे से धक्के देने लगा। बस हिल रही थी, लेकिन उनकी हिचकिचाहट उस हिलने में छुप गई थी।

रिया अब पूरी तरह आर्यन पर सवार थी। वो ऊपर-नीचे हो रही थी। उसके स्तन उछल रहे थे। आर्यन उन्हें चूस रहा था। “तुम बहुत टाइट हो… बहुत अच्छा लग रहा है,” आर्यन ने कहा। रिया की चूत लंड को चूस रही थी। हर धक्के पर वो कराह रही थी – “हाँ… और तेज़… मुझे चोदो… पहली बार… इतना मज़ा…”

वे दोनों एक-दूसरे में खो गए थे। आर्यन ने पोजीशन बदली। अब रिया नीचे थी, आर्यन ऊपर। वो धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर कर रहा था। रिया की टाँगें उसके कमर पर लिपटी थीं। दोनों के शरीर पसीने से भीग गए थे। रिया को ऑर्गेज़्म आने वाला था। उसने आर्यन को कसकर जकड़ लिया।

“मैं… आ रही हूँ… आह्हह!” रिया चीख पड़ी, लेकिन आवाज़ दबा दी। उसकी चूत सिकुड़ गई, रस बह निकला। आर्यन भी तेज़ हो गया। “मैं भी… निकलने वाला हूँ।” रिया ने कहा, “अंदर… भर दो… मुझे चाहिए।” आर्यन ने आखिरी जोरदार धक्का मारा और अपना गर्म वीर्य रिया की चूत में भर दिया

दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। बस अभी भी चल रही थी। रिया ने आर्यन की छाती पर सिर रख दिया। “ये… सबसे खूबसूरत पहली बार थी,” उसने फुसफुसाया। आर्यन ने उसके बालों को सहलाया। “तुमने मुझे अपना बना लिया।”

रात भर वे ऐसे ही लिपटे रहे। कभी-कभी फिर से शुरू हो जाते। दूसरी बार आर्यन ने रिया को डॉगी स्टाइल में चोदा। रिया को पीछे से लंड लेना बहुत पसंद आया। उसकी चूत फिर से भीग गई। तीसरी बार वो साइड पोजीशन में थे। रिया की एक टाँग ऊपर, आर्यन लंड अंदर डाले हुए धीरे-धीरे हिल रहा था। हर बार रिया ज़ोर-ज़ोर से कराहती – “हाँ… चोदो मुझे… तुम्हारी वर्जिन चूत अब तुम्हारी है।”

सुबह होने वाली थी। बस दिल्ली पहुँचने वाली थी। रिया ने कपड़े पहने। उसकी चूत अभी भी गीली थी, लेकिन मज़े से भरी हुई। आर्यन ने उसे किस किया। “फिर मिलेंगे ना?” रिया मुस्कुराई, “ज़रूर। ये बस जर्नी कभी नहीं भूलूँगी।”

वो बस से उतरी। लेकिन उसकी चाल में एक नई मस्ती थी। वर्जिन कॉलेज गर्ल की पहली चुदाई बस में हो गई थी – और वो पूरी तरह संतुष्ट थी। उस रात ने उसे औरत बना दिया था।

(कहानी जारी… लेकिन ये मुख्य भाग था। अब और विस्तार से समझते हैं कि कैसे सब शुरू हुआ।)

रिया जब बस में चढ़ी थी तो वो थोड़ी थकी हुई थी। कॉलेज का लास्ट लेक्चर खत्म करके सीधे बस पकड़ी थी। लेकिन आर्यन के साथ बैठते ही उसका मन हल्का हो गया। वो दोनों घंटों तक बातें करते रहे – कॉलेज की, लाइफ़ की, सपनों की। आर्यन ने बताया कि वो सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, दिल्ली जा रहा है प्रोजेक्ट के लिए।

धीरे-धीरे बातें पर्सनल हो गईं। आर्यन ने पूछा, “बॉयफ्रेंड है क्या?” रिया ने शरमाकर सिर हिलाया, “नहीं… अभी तक नहीं मिला सही वाला।” आर्यन ने मुस्कुराकर कहा, “मुझे लगता है आज मिल गया।” रिया हँस पड़ी, लेकिन अंदर से गर्मी महसूस हुई।

जब लाइट्स ऑफ़ हुईं तो आर्यन ने अपना जैकेट रिया पर डाल दिया। “ठंड लग रही होगी।” लेकिन जैकेट के नीचे उसका हाथ रिया की कमर पर था। रिया ने विरोध नहीं किया। बल्कि वो खुद आर्यन के सीने से सट गई। उसकी साँसें आर्यन के गले पर पड़ रही थीं।

पहला किस बहुत सॉफ्ट था। फिर दूसरे, तीसरे। रिया को किसिंग का इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया। आर्यन के होंठ उसके होंठों को चूस रहे थे, जीभ अंदर घुसकर खेल रही थी। रिया की जीभ भी जवाब दे रही थी। दोनों की सलाइवा आपस में मिल रही थी।

जब आर्यन ने ब्रेस्ट्स चूसीं तो रिया की निप्पल्स इतनी सेंसिटिव हो गईं कि हर चूसने पर वो कराह उठती। “आह… धीरे… लेकिन और… मत रुको।” आर्यन ने उन्हें दबाया, चूसा, काटा भी हल्का-हल्का, लेकिन सिर्फ़ मज़े के लिए।

जब आर्यन रिया की चूत चाट रहा था तो रिया ने अपनी जाँघें फैला दीं। वो पहली बार किसी की जीभ को वहाँ महसूस कर रही थी। क्लिटोरिस पर जीभ घूमते ही वो झटके खा रही थी। “ये… स्वर्ग है… आर्यन… चूसो… और चूसो।” उसका रस आर्यन के मुँह में जा रहा था। आर्यन उसे पी रहा था।

पेनिट्रेशन का पहला मोमेंट सबसे यादगार था। रिया ने खुद लंड को अपनी चूत पर रगड़ा। गीली चूत ने लंड को आसानी से अंदर ले लिया। धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर चला गया। रिया को लगा जैसे वो भर गई हो। “पूरा… अंदर है… मुझे लग रहा है तुम मेरे अंदर हो।”

फिर शुरू हुई रिदम। बस की हिलने की रिदम के साथ उनकी चुदाई की रिदम। हर धक्के पर रिया की ब्रेस्ट उछलती, उसकी चूत लंड को कसकर पकड़ती। “तुम्हारा लंड… इतना मोटा… मेरी चूत फट रही है मज़े से।”

ऑर्गेज़्म के वक्त रिया ने आर्यन को कसकर जकड़ लिया। उसका पूरा शरीर काँप गया। चूत से रस का फव्वारा निकला। आर्यन का वीर्य अंदर उबल रहा था। दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे।

दूसरी राउंड में रिया ने खुद इनिशिएट किया। वो आर्यन के लंड को मुँह में लेना चाहती थी। आर्यन ने उसे सिखाया। रिया ने झुककर लंड चूसा – पहले टिप, फिर पूरा। “स्वाद अच्छा है… तुम्हारा।” आर्यन ने उसके बाल पकड़कर हल्का-हल्का मुँह में धक्का दिया। रिया गैग नहीं हुई, बल्कि और जोर से चूसने लगी।

फिर उन्होंने फिर से चुदाई शुरू की। इस बार लंबी और गहरी। रिया की चूत अब पूरी तरह आर्यन के लंड की आदी हो चुकी थी। वो बार-बार कह रही थी, “चोदो… मेरी वर्जिन चूत को अपना बना लो… हाँ… और तेज़।”

सुबह बस दिल्ली पहुँची। दोनों ने नंबर एक्सचेंज किए। रिया उतरते वक्त मुस्कुराई और मन में सोचा – “ये बस मेरी जिंदगी की सबसे हॉट जर्नी थी। वर्जिन कॉलेज गर्ल की पहली चुदाई बस में… और वो भी इतनी खूबसूरत।”

उसके बाद रिया कॉलेज गई, लेकिन अब वो पहले से ज़्यादा कॉन्फिडेंट थी। उसकी चाल में एक नया आकर्षण था। और आर्यन? वो भी उस रात को कभी नहीं भूला।

अनजान लड़की से चैटिंग से सीधे सेक्स – वर्जिन रिया की टाइट चूत की चुदाई

रात के डेढ़ बजे एक रैंडम मैसेज ने कैसे दो अजनबियों को होटल के कमरे तक पहुंचा दिया? चंडीगढ़ में नौजवान कार्तिक और लुधियाना की हॉट रिया की पहली मुलाकात, पहली हग, पहला किस और पहली जोरदार चुदाई की पूरी सच्ची-सी कहानी। वर्जिन लड़की की टाइट चूत, चूसे हुए गुलाबी निप्पल्स, सिसकारियां और पांच घंटे की मस्ती – सब कुछ विस्तार से।

हाय दोस्तों, मैं कार्तिक, 22 साल का हूं। लुक्स में एवरेज हूं – न ज्यादा हैंडसम, न ज्यादा सादा – लेकिन दिल का बहुत शरारती। ये कहानी आज से ठीक एक साल पुरानी है, जब मैं चंडीगढ़ में नई-नई जॉब जॉइन करके आया था। सिटी नई थी, दोस्त कम थे, और रातें अकेली।

एक रात नींद बिल्कुल नहीं आ रही थी। बाहर तेज बारिश हो रही थी, खिड़की पर बूंदें टप-टप गिर रही थीं, हवा ठंडी और नम थी। मैं बिस्तर पर करवटें बदल रहा था, बॉडी गरम थी, मन बेचैन। फोन उठाया और रैंडमली एक नंबर डायल करके मैसेज भेज दिया – “हाय, नींद नहीं आ रही क्या?”

रात के करीब डेढ़ बज रहे थे। उम्मीद नहीं थी कि कोई रिप्लाई आएगा। लेकिन कुछ मिनट बाद ही फोन वाइब्रेट हुआ। “नहीं आ रही। तुम कौन?”

बस यहीं से शुरुआत हुई। नाम था उसका रिया। पहले तो सिर्फ हल्की-फुल्की बातें – मौसम कैसा है, जॉब कैसी चल रही, चंडीगढ़ कैसा लग रहा। लेकिन मेरी बातें उसे अच्छी लगने लगीं। मैं थोड़ा फ्लर्टी हूं, तो जल्दी ही मैंने “आई लव यू” लिख दिया। वो हंसकर इमोजी भेजकर टाल गई, लेकिन मैसेज करती रही।

धीरे-धीरे चैटिंग गहरी होती गई। डर्टी जोक्स शुरू हुए। वो भी बराबर से जवाब देती। कभी वो कोई जोक भेजती, कभी मैं। हंसते-हंसते इमोजी की बौछार होती। रात-रात भर बातें चलतीं। वो बताती कि उसे मेरी शरारतें बहुत पसंद हैं, कि मैं उसे हंसाता हूं, कि मेरी बातों में एक अलग ही मजा है। मैं उसे बताता कि वो कितनी स्मार्ट है, कितनी बोल्ड।

लगभग बीस दिन ऐसे ही बीते। हर रात चैट, कभी वॉइस मैसेज, कभी फोटोज। एक रात मैंने हिम्मत करके लिखा, “मिलोगी कभी?”

पहले तो उसने मना किया। “पागल हो गए हो? इतनी जल्दी? हम तो अभी एक-दूसरे को ठीक से जानते भी नहीं।”

लेकिन मुझे पता था – उसका मन भी था। बातों-बातों में उसने हां कर दी। वो लुधियाना में रहती थी, चंडीगढ़ से सिर्फ दो घंटे की दूरी। हमने प्लान बनाया। पहले ही साफ-साफ बात हो चुकी थी कि मिलते ही हम इंटीमेट होंगे। उसे कोई ऐतराज नहीं था। बल्कि वो खुद भी उतनी ही एक्साइटेड लग रही थी – मैसेज में लिखती, “बहुत नर्वस हूं, लेकिन एक्साइटेड भी।”

आखिरकार वो दिन आ गया। सुबह मैंने कॉल किया। उसकी आवाज में घबराहट और उत्साह दोनों थे। “मैं ऑफिस जाने का बहाना बनाकर निकल रही हूं। बस स्टैंड पर 11 बजे पहुंच जाऊंगी।”

मैं पहले से तैयार था। रूममेट्स ने मजाक में कंडोम का पैकेट थमा दिया था, बोले “सेफ रहो भाई”। मैं बाइक लेकर बस स्टैंड पहुंचा। फेसबुक पर उसकी फोटो देखी थी, लेकिन रियल में वो… बाप रे! हूर से कम नहीं थी। स्किन-टाइट ब्लैक जींस जो उसके गोल-मटोल कूल्हों को परफेक्टली हाइलाइट कर रही थी, ऊपर गले तक खुला व्हाइट टॉप जिससे उसकी गहरी क्लीवेज झलक रही थी, बाल खुले और हवा में लहरा रहे, लाइट मेकअप लेकिन लिप्स पर ग्लॉसी रेड लिपस्टिक। उसकी कमर पतली, कूल्हे चौड़े, चाल में आत्मविश्वास और थोड़ी शरारत।

मैंने दूर से आवाज दी, “हाय रिया!”

वो मुड़ी, थोड़ी शरमाई, आंखें नीची कर लीं, लेकिन मुस्कुरा भी दी। हमने दो मिनट वहीं बात की – नर्वस हंसी, हल्की छेड़छाड़। फिर वो बाइक पर पीछे बैठी। जैसे ही उसकी कमर पर हाथ रखा, उसकी गर्म बॉडी का एहसास हुआ, दिल तेज धड़कने लगा। उसकी खुशबू – हल्की परफ्यूम और बारिश की नमी – नाक में घुस रही थी।

थोड़ी देर शहर में घूमे। लंच किया, कॉफी पी। बातें करते रहे – पुरानी चैट्स याद करते, हंसते। फिर मैंने धीरे से पूछा, “होटल चलें?”

वो शरमाई, होंठ काटे, आंखें नीची करके बोली, “चलो… लेकिन ज्यादा शरारत मत करना।”

मैं उसका इशारा समझ गया। हम एक अच्छे होटल में गए। रूम लिया। जैसे ही दरवाजा बंद हुआ और लॉक किया, मैंने उसका हाथ पकड़ा, लाइट्स ऑफ कीं और उसे अपनी ओर खींच लिया। टाइट हग किया। उसकी सॉफ्ट बॉडी मेरी बॉडी से पूरी तरह सटी थी – उसके बूब्स मेरे सीने पर दब रहे थे, उसकी सांसें तेज और गर्म मेरी गर्दन पर लग रही थीं। मैंने उसकी गर्दन पर होंठ रखे, धीरे-धीरे किस करना शुरू किया – हल्के चूम, फिर जीभ से चाटना। उसकी बॉडी सिहर रही थी।

ये मेरा पहला मौका था। उसका भी। शायद इसी वजह से वो अचानक घबरा गई। उसने मुझे हल्का धक्का दिया और बोली, “नहीं कार्तिक… मैं तैयार नहीं हूं। मुझे घर जाना है।”

मैं रुक गया। ट्यूब लाइट ऑन की। “क्या हुआ जान? डर गई? कोई बात नहीं, हम जैसे हो वैसे ही रहेंगे।”

वो बेड पर बैठ गई, आंखें नीची। “बस… अभी मन नहीं है। बहुत तेजी से हो रहा है सब।”

मैं मुस्कुराया। “ठीक है। कोई जबरदस्ती नहीं। हम बस बातें करेंगे, हग करेंगे।” मैंने उसे गोद में उठाया, बेड पर बिठाया और धीरे-धीरे उसके हाथ सहलाने लगा। उसके टॉप से क्लीवेज साफ दिख रहा था – गहरी, सॉफ्ट, और उसकी सांसों से ऊपर-नीचे हो रही। मैं पागल हो रहा था, लेकिन कंट्रोल रखा।

धीरे-धीरे वो रिलैक्स होने लगी। हम पुरानी चैट्स की बातें करने लगे, डर्टी जोक्स याद करने लगे। मैंने कहा, “तुम सच में बहुत खूबसूरत हो। मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे तुम जैसी लड़की मिलेगी। तेरे होंठ तो गुलाब जैसे हैं, इतने रसीले।”

वो शरमाई, मुस्कुराई। मैंने हिम्मत करके उसके कंधे पर हाथ रखा और उसे बाहों में भर लिया। अब वो मेरे सीने पर सर रखकर लेटी थी। हम टाइट हग कर रहे थे। मैंने बहाने से अपना सर उसके बूब्स पर टिका दिया। वो सिहर तो गई, लेकिन मना नहीं किया। मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया।

मैंने धीरे से उसके बूब्स पर हाथ रखा, हल्के से दबाया। वो सिहर गई, मेरा हाथ हटाया और बोली, “शरारत मत करो।” लेकिन उसकी आंखों में शरारत थी, सांसें तेज हो रही थीं। मैंने फिर कोशिश की। कई बार वो टालती रही, लेकिन अब उसकी बॉडी रिएक्ट कर रही थी।

आखिर मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उसकी गर्दन पर फिर किस किया, टॉप को ऊपर उठाया और लेफ्ट बूब बाहर निकाला। ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा, फिर ब्रा का हुक खोला। उसके बूब्स बिल्कुल टाइट, गोल, 34 साइज के – सॉफ्ट लेकिन फर्म, निप्पल्स गुलाबी और पहले से ही हार्ड। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा – धीरे, फिर तेज। वो सिसकारी भरने लगी – “आह… उम्फ… कार्तिक… क्या कर रहे हो… आह्ह…”

दूसरे बूब को हाथ से मसल रहा था, निप्पल को उंगलियों से पिंच कर रहा था। वो अब पूरी तरह मस्त हो चुकी थी, कमर हिला रही थी। मैंने अपना हाथ उसकी जींस की जिप पर ले गया। उसने रोका, लेकिन कमजोर आवाज में। मैंने फिर उसके बूब्स चूसे और उसे और गरम कर दिया। दूसरी बार हाथ उसकी पैंटी में पहुंचा। इस बार उसने नहीं रोका। उसकी चूत पहले से ही गीली थी – गरम, चिकनी। जैसे ही उंगली से क्लिट छुआ, वो कांप गई, कमर ऊपर उठा दी और जोर से सिसकारी – “आआह्ह… कार्तिक…”

मैंने जींस की बटन खोली और खींचकर उतार दी। अब वो सिर्फ ब्लैक लेस पैंटी में थी – जो पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने अपनी शर्ट-जींस उतारी और उसके ऊपर लेट गया। उसकी टांगें फैलाईं। उसकी चूत पर उंगली फेरते रहा – क्लिट को रगड़ता, अंदर उंगली डालता। वो आंखें बंद किए सिसकारियां भर रही थी – “उम्फ… आह… हां… ऐसे ही…”

फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला। वो 6.5 इंच का था, पूरी तरह खड़ा, नसें उभरी हुईं। मैंने कहा, “इसे हाथ में लो ना।”

वो शरमाई, “नहीं… शरम आ रही है।”

फिर मैंने पूछा, “अंदर डाल दूं?”

वो कुछ नहीं बोली, बस धीरे से सर हिलाया और मुस्कुराई, आंखें बंद कर लीं।

मैंने कंडोम लगाया। लंड उसकी चूत पर रगड़ा – उसकी गीलापन मेरे लंड पर लग रहा था। वो तरस रही थी, कमर ऊपर उठा रही थी। अचानक उसने नीचे से झटका दिया और मेरा लंड आधा अंदर चला गया। वो वर्जिन थी, तो थोड़ा दर्द हुआ। वो चिल्लाई, “आह… धीरे… बहुत दर्द हो रहा है…”

मैंने धीरे-धीरे पूरा अंदर किया। उसकी चूत बहुत टाइट थी – गरम, गीली, मुझे पूरी तरह जकड़ रही थी। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। वो आहें भर रही थी – “आह… आह… कार्तिक… धीरे… आह्ह…”

आवाज बाहर न जाए इसलिए मैंने अपना हाथ उसके मुंह पर रख दिया। थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ और वो भी कमर हिलाने लगी। मैंने स्पीड बढ़ाई। वो भी ऑर्गेज्म तक पहुंच चुकी थी – उसकी चूत सिकुड़ रही थी, बॉडी कांप रही थी। मैं भी झड़ गया। हम पसीने से तर, एक-दूसरे की बाहों में लेटे रहे, सांसें तेज।

थोड़ी देर बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मैंने नया कंडोम लगाया। उसने कहा, “बस… अब नहीं। थक गई हूं।” लेकिन उसकी आंखें कुछ और कह रही थीं – शरारत और भूख। मैंने उसके बूब्स फिर चूसे, निप्पल्स काटे। वो फिर गरम हो गई, सिसकारियां भरने लगी।

इस बार मैंने उसका सर दीवार से सटा दिया, उसकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रखीं और पूरा लंड एक झटके में अंदर डाल दिया। वो जोर से चिल्लाई, “आआह्ह… धीरे-धीरे चोदो ना… बहुत दर्द हो रहा है…”

लेकिन उसकी कमर खुद ऊपर उठ रही थी, मुझे और गहराई दे रही थी। वो मुझे और जोर से चाह रही थी। मैंने स्पीड बढ़ा दी। जोर-जोर से धक्के मारने लगा – हर धक्के में आवाज हो रही थी। उसके बूब्स उछल रहे थे, मैं उन्हें मुंह से पकड़-पकड़ कर चूस रहा था। वो नाखून मेरी पीठ पर गड़ा रही थी। “आह… और जोर से… हां… चोदो मुझे… आह्ह…”

फिर मैं झड़ गया। वो भी दूसरी बार जोर से झड़ी – उसकी चूत ने मुझे पूरी तरह निचोड़ लिया।

हमने करीब पांच घंटे साथ बिताए। बहुत इंजॉय किया – हग किया, किस किया, बातें की। फिर मैंने उसे बस स्टैंड छोड़ा। जाते वक्त वो मुस्कुराई, मेरे गाल पर किस किया और बोली, “अगली बार फिर मिलेंगे। बहुत मजा आया।”

साली की टाइट चूत का मजा – जीजू साली की हॉट देसी सेक्स स्टोरी

शादी को दो साल हो चुके थे। मैं, रोहन, अपनी बीवी प्रिया के साथ मुंबई में रहता था। प्रिया की छोटी बहन नेहा कॉलेज की पढ़ाई खत्म करके हमारे पास ही रहने लगी थी। नेहा उम्र में मुझसे काफी छोटी थी – बस 21 साल की, गोरी-चिट्टी, लंबे बाल, पतली कमर और वो कातिलाना अदाएं जो देखते ही दिल को छू जाती थीं। वो मुझे हमेशा जीजू कहकर चिढ़ाती, लेकिन उसकी नजरों में कुछ और ही चलता था। प्रिया जब ऑफिस जाती, तो घर में सिर्फ मैं और नेहा रह जाते। शुरू में तो सब नॉर्मल था, लेकिन धीरे-धीरे वो हंसी-मजाक बढ़ता गया।

एक दिन प्रिया को अपने ऑफिस के काम से दिल्ली जाना पड़ा, तीन दिन के लिए। घर में सिर्फ मैं और नेहा। सुबह प्रिया गई, तो नेहा किचन में नाश्ता बना रही थी। वो शॉर्ट्स और टाइट टॉप पहने थी, जिससे उसकी कर्वी बॉडी साफ दिख रही थी। मैं सोफे पर बैठा न्यूज देख रहा था, लेकिन नजर बार-बार उसपर जा रही थी। वो मुड़कर बोली, “जीजू, चाय पी लोगे? या कुछ और चाहिए?” उसकी आवाज में शरारत थी। मैंने हंसकर कहा, “चाय ही काफी है, लेकिन तुम्हारी मुस्कान के साथ।” वो शर्मा गई, लेकिन आंखें नीची करके मुस्कुराई।

दोपहर में बारिश शुरू हो गई। बिजली चली गई, घर अंधेरा हो गया। हम दोनों हॉल में बैठे बातें कर रहे थे। नेहा बोली, “जीजू, दीदी नहीं है तो बोर हो रहा है ना?” मैंने कहा, “बोर तो नहीं, लेकिन तुम्हारे साथ टाइम अच्छा लग रहा है।” वो मेरे पास सरककर बैठ गई। उसकी खुशबू मेरे नाक में घुस रही थी – वो हल्की सी परफ्यूम की स्मेल। हम पुरानी बातें करने लगे, कॉलेज की, शादी की। अचानक वो बोली, “जीजू, आप दीदी को इतना प्यार क्यों करते हो? वो तो इतनी स्ट्रिक्ट है।” मैं हंसा, “प्यार तो करता हूं, लेकिन तुम जैसी स्वीट कोई नहीं।” वो मेरी तरफ देखकर बोली, “सच में? मुझे स्वीट लगती हूं?” उसकी आंखों में चमक थी। मैंने उसके गाल पर हाथ फेरा, “बहुत स्वीट।”

वो चुप हो गई, लेकिन मेरे हाथ को नहीं हटाया। उल्टा, अपना सिर मेरे कंधे पर टिका दिया। बारिश की आवाज बाहर तेज हो रही थी, और अंदर हमारा दिल धड़क रहा था। मैंने धीरे से उसके बालों में उंगलियां फेरनी शुरू की। वो सांसें ले रही थी, गहरी-गहरी। फिर वो उठी, मेरे सामने खड़ी हो गई। “जीजू, मुझे गर्मी लग रही है।” कहकर उसने अपना टॉप ऊपर किया, ब्रा के ऊपर से ही उसकी छातियां साफ दिख रही थीं – गोल, मुलायम, टाइट। मैं कुछ बोल नहीं पाया। वो मुस्कुराई और मेरे गोद में बैठ गई। उसके होंठ मेरे इतने करीब थे कि मैं महसूस कर रहा था उसकी गर्म सांसें।

मैंने धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो पहले तो सहम गई, लेकिन फिर जवाब देने लगी। किस लंबा था, गीला, मीठा। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। मेरे हाथ उसकी कमर पर थे, फिर धीरे-धीरे ऊपर सरक गए। उसकी ब्रा के नीचे हाथ डाला, तो वो मुलायम छातियां हाथ में आ गईं। वो सिसकारी ली, “जीजू… आह…” लेकिन रुकने को नहीं बोली। उल्टा, मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी। हम दोनों एक-दूसरे को छू रहे थे, जैसे सालों से इंतजार कर रहे हों। वो मेरे ऊपर चढ़ गई, अपनी छातियां मेरे मुंह के पास लाई। मैंने उन्हें चूमा, चाटा, निप्पल्स को मुंह में लिया। वो कराह रही थी, “जीजू… कितना अच्छा लग रहा है…”

फिर हम बेडरूम में चले गए। मैंने उसे बेड पर लिटाया, उसके शॉर्ट्स उतार दिए। उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने उसे चूमा, नीचे से ऊपर तक। वो मेरे बाल पकड़कर दबा रही थी। “जीजू, मुझे छूओ ना… वहां…” मैंने उसकी पैंटी साइड की, उंगलियां उसकी चूत पर फेरी। वो कितनी टाइट थी, गर्म, रस से भरी। उंगलियां अंदर डालीं तो वो सिकुड़ गई, लेकिन खुशी से। वो बोली, “धीरे… लेकिन मत रुको।” मैं धीरे-धीरे उंगलियां अंदर-बाहर कर रहा था, और वो अपनी कमर उछाल रही थी। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि दो उंगलियां भी मुश्किल से जा रही थीं, लेकिन वो मजा ले रही थी, आंखें बंद करके।

मैंने अपना पैंट उतारा। मेरा लंड पूरा खड़ा था, सख्त। वो उसे देखकर मुस्कुराई, “जीजू, ये तो बहुत बड़ा है…” उसने हाथ में लिया, सहलाने लगी। फिर मुंह में लिया। उसकी गर्म जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी, ऊपर-नीचे। मैं पागल हो रहा था। कुछ देर बाद मैंने उसे रोका, “नेहा, अब नहीं रुक सकता।” वो लेट गई, पैर फैला दिए। मैं उसके ऊपर आया, लंड को उसकी चूत पर रगड़ा। वो गीली थी, तैयार। धीरे से अंदर डाला। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि पहले सिर्फ टॉप गया, लेकिन वो दर्द नहीं, मजा ले रही थी। “जीजू… और अंदर… पूरा…” मैंने धीरे-धीरे धक्का दिया, पूरा अंदर चला गया। वो चीखी नहीं, बस आह भरी, “ओह… कितना अच्छा… भर गया…”

अब हम रिदम में थे। मैं धीरे-धीरे पेल रहा था, और वो नीचे से कमर हिला रही थी। उसकी टाइट चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी, जैसे छोड़ना ही नहीं चाहती। हर धक्के में वो कराह रही थी, “जीजू… तेज… और तेज…” मैं स्पीड बढ़ा दी। उसके मुलायम बदन को छूते हुए, छातियां दबाते हुए। वो मेरे कंधों पर नाखून गड़ा रही थी, लेकिन प्यार से। हमारा पसीना मिल रहा था, सांसें तेज। उसकी चूत से आवाजें आ रही थीं – चप-चप। वो बोली, “जीजू, मैं झड़ने वाली हूं…” मैंने और जोर लगाया। वो कांप गई, चूत सिकुड़कर मेरे लंड को दबाने लगी। वो झड़ गई, पूरा बदन कांप रहा था।

मैं भी नहीं रुका। कुछ देर और पेला, फिर उसके अंदर ही झड़ गया। गर्म रस उसकी टाइट चूत में भर दिया। हम दोनों हांफ रहे थे, एक-दूसरे से चिपके। वो मेरे सीने पर सिर रखकर बोली, “जीजू, ये सबसे बेस्ट फीलिंग थी। आप कितने अच्छे हो…” मैंने उसे किस किया, “तुम्हारी टाइट चूत का मजा ही अलग है, नेहा।”

उसके बाद हम नहाए साथ में। शावर के नीचे फिर किस किया, छुआ। लेकिन अब आराम से। शाम को खाना बनाया, साथ खाया। रात को फिर बेड पर। इस बार वो ऊपर आई। मेरे लंड पर बैठ गई, धीरे-धीरे अंदर लिया। उसकी टाइट चूत फिर से मुझे पागल कर रही थी। वो ऊपर-नीचे हो रही थी, बाल बिखरे हुए, मुंह से सिसकारियां। मैं नीचे से उसके कूल्हों को पकड़कर मदद कर रहा था। वो बोली, “जीजू, मुझे आपका लंड बहुत पसंद है… हमेशा चाहिए।” मैंने कहा, “जब चाहे ले लो, बेबी।”

तीन दिन ऐसे ही बीते। हर वक्त प्यार, सेक्स, मजा। प्रिया वापस आई तो सब नॉर्मल हो गया, लेकिन नेहा की नजरें अब भी शरारत भरी थीं। जब मौका मिलता, चुपके से छू लेती, किस कर लेती। वो टाइट चूत का मजा मैं कभी नहीं भूल सकता। नेहा अब भी हमारे पास रहती है, और जब दीदी नहीं होती… तो हमारा सीक्रेट गेम चलता रहता है।

मेरी पहली चुदाई: बॉयफ्रेंड के साथ जन्नत के पल

हाय दोस्तों, जवानी का नशा ही तो ऐसा होता है ना, जो इंसान को पागल बना देता है! आपने मेरी पिछली कहानी पढ़ी होगी, जिसमें मैंने अपने भाई के साथ हुए उन अनोखे पलों को खुलकर शेयर किया था। वो कहानी पढ़कर आपको जो भी लगा, वो सब मुझे ईमेल के जरिए मिला। इतने सारे मैसेज, इतना प्यार… वाह! कुछ लोगों को तो मेरी स्टोरी इतनी पसंद आई कि वो खुद को रोक नहीं पाए और मुझे चोदने का ऑफर तक दे डाला। लेकिन दोस्तों, मैं अपनी हर एक रीडर और रीडर्स को साफ-साफ बता दूं – मैं चैटिंग की दीवानी हूं। अगर कोई बात करना चाहे, कोई राज शेयर करना चाहे, तो चैट बॉक्स में आ जाओ। मैं इंतजार करूंगी, बिना किसी हिचकिचाहट के।

अब ज्यादा देर बोर ना करते हुए, चलिए सीधे मेरी अगली कहानी पर आते हैं। पिछली स्टोरी में आपने पढ़ा था कि कैसे मेरे मामा के लड़के ने मेरी जवानी के रस को चखा और मुझे जन्नत के दरवाजे खोल दिए। लेकिन जैसा मैंने वोां में जिक्र किया था, उससे भी पहले मेरी जिंदगी में चुदाई का पहला असली रंग भरा था मेरे बॉयफ्रेंड ने। ये कहानी उसी की है – एक साल पहले की, जब मैं महज 22 साल की थी, कॉलेज की आखिरी क्लास में धुंआधार पढ़ाई के बीच जवानी के सपनों में खोई हुई। मेरा बॉयफ्रेंड, नाम था राहुल, मेरे ही क्लास का लड़का। वो हमेशा से मुझे नजरों में रखता था – क्लास में मेरी तरफ घूरता, लाइब्रेरी में चुपके से मुस्कुराता। आखिरकार, कॉलेज के फाइनल ईयर में उसने हिम्मत जुटाई और प्रपोज कर दिया। “समिता, तू मेरी जिंदगी है,” उसने कहा था, आंखों में वो चमक लिए जो मुझे आज भी याद है।

राहुल स्मार्ट था, पढ़ाई में टॉप करने वाला, लेकिन बदन से तो जैसे किसी एथलीट का – चौड़ी छाती, मजबूत बाजूएं, और वो हंसी जो मुझे हर बार गुदगुदा देती। मुझे भी वो पसंद था – उसकी वो शरारती नजरें, वो हल्का सा परफ्यूम का खुशबू जो हवा में तैरता। तो मैंने बिना सोचे-समझे हां कह दी। “हां राहुल, मैं तेरी हूं,” मैंने कहा, और बस, हमारी लव स्टोरी शुरू हो गई।

शुरुआती दिनों में सब कुछ इतना रोमांटिक था – कॉलेज के कैंटीन में चुपके से हाथ पकड़ना, शाम को पार्क में घूमना, और हां, वो किसिंग सेशन्स! जब भी मौका मिलता, वो मुझे दीवार के पास सटा लेता और होंठों पर होंठ रख देता। उसके हाथ मेरी कमर पर सरकते, फिर धीरे-धीरे ऊपर की ओर – मेरे मम्मों पर। कपड़ों के ऊपर से ही दबाता, निचोड़ता, जैसे कोई भूखा शेर अपनी शिकार को चख रहा हो। मैं सिहर उठती, सांसें तेज हो जातीं, लेकिन कभी आगे नहीं बढ़ पाते। घरवाले, दोस्त, कॉलेज – सब कुछ बीच में आ जाता। हम दोनों चुदाई के लिए तड़प रहे थे, रातों को बिस्तर पर लेटे-लेटे एक-दूसरे के बारे में सोचते और उंगली से खुद को संतुष्ट करते। मैंने कभी मुंह से नहीं कहा, “राहुल, मुझे चोदो ना,” क्योंकि शर्म तो आती थी ना? लड़की हूं मैं, शुरूआत तो लड़के ही करते हैं। और डर भी लगता था – क्या वो मुझे सस्ती समझेगा? लेकिन मन ही मन मैं प्रार्थना करती, “भगवान, बस एक मौका दे दो।”

फिर एक दिन वो मौका आ ही गया – जैसे किस्मत ने सुन ली हो। सुबह कॉलेज पहुंचते ही राहुल ने कान में फुसफुसाया, “समिता, आज मेरे घर कोई नहीं है। मम्मी-पापा गांव गए हैं, शाम को लौटेंगे। आना, अपना घर दिखाऊंगा तुझे।” उसकी आंखों में वो शरारत चमक रही थी, और मैं समझ गई – घर दिखाना तो बहाना है, असल में तो वो मेरी जवानी को नंगा देखना चाहता है। मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। चूत में एक हल्की सी गुदगुदी हुई, जैसे कोई बिजली का करंट दौड़ गया हो। “हां, आऊंगी,” मैंने कहा, और क्लास भर में बेचैन रही। घड़ी की सुई को घूरती रही, जैसे वो मेरी चाहत को पढ़ रही हो।

क्लास खत्म होते ही मैं उसकी बाइक पर सवार हो गई। हवा मेरे बालों में उड़ रही थी, उसकी पीठ से सटकर मैं महसूस कर रही थी उसके बदन की गर्मी। घर पहुंचे तो एक छोटा सा फ्लैट था – साफ-सुथरा, लेकिन आज वो मेरे लिए जन्नत था। दरवाजा बंद होते ही उसने अंदर से लॉक कर लिया। “बैठ जा सोफे पर,” कहा और टीवी ऑन कर दिया – कोई रोमांटिक मूवी चल रही थी, लेकिन हमारी नजरें तो एक-दूसरे पर टिकीं। “कैसा लगा मेरा घर?” उसने पूछा, मुस्कुराते हुए। “बहुत अच्छा,” मैंने कहा, लेकिन मन में चीख रही थी – ‘राहुल, अब बस कर, सीधे कह दे कि आज तू मेरी चूत में अपना लंड घुसाएगा!’

वो मेरे पास आया, मेरा हाथ पकड़ा और सहलाने लगा। उसकी उंगलियां मेरी हथेली पर सरक रही थीं, जैसे कोई जादू हो रहा हो। “समिता, आई लव यू,” बोला, आंखों में वो गहराई लिए। मैंने भी आंखें मिलाईं, “आई लव यू टू, राहुल।” बस, इतना ही काफी था। उसने मुझे अपनी ओर खींचा, अपनी मजबूत बाहों में कसकर जकड़ लिया। “तुम्हें पता नहीं, मैं तुम्हें कितना चाहता हूं। तुम्हारे बिना सांस नहीं आती। तुम्हारी ये आंखें, ये होंठ, ये बदन… सब कुछ परफेक्ट है।” मैं लजाते हुए बोली, “मैं भी तुझे बहुत चाहती हूं, राजा। तू मेरा सबकुछ है।” और फिर… उसके होंठ मेरे होंठों पर आ गए। वो किस इतना गहरा था, जैसे दो प्यासे यात्री पानी के स्रोत पर मिले हों। हमारी जीभें एक-दूसरे से लिपट गईं, सांसें मिलीं, लार का स्वाद महसूस हुआ। मैं उसके बालों में उंगलियां फेर रही थी, वो मेरी कमर को निचोड़ रहा था। कमरे में सिर्फ हमारी सिसकारियां गूंज रही थीं – आह्ह… उफ्फ… म्म्म…

पहले तो वो मेरी शर्ट के ऊपर से ही मम्मों को दबा रहा था, लेकिन जल्दी ही बर्दाश्त ना हो सका। हाथ पीछे सरका कर ब्रा का हुक खोल दिया। शर्ट ऊपर सरका दी, और पहली बार मेरे नंगे मम्मे उसके सामने थे – गोल, भरे-भरे, गुलाबी निप्पल्स तने हुए। मैं शरम से लाल हो गई, लेकिन जोश में डूबी हुई। “राहुल…” मैं फुसफुसाई। वो पागल हो गया – दोनों हाथों से मम्मों को पकड़ा, निचोड़ा, जैसे कोई बच्चा अपनी पसंदीदा खिलौना को दबा रहा हो। फिर सिर झुकाया और दाहिनी चूची को मुंह में भर लिया। ओह गॉड! वो चूसने लगा – छोटे बच्चे की तरह, जोर-जोर से। दांत हल्के से काटता, जीभ से चक्कर लगाता। दर्द और मजा का ऐसा मिश्रण, कि मेरी चूत से रस टपकने लगा। मैंने उसके सिर को कसकर पकड़ा, “चूसो राजा… हां, ऐसे ही… मर जाऊंगी मैं!” जैसे कोई मां अपने बच्चे को दूध पिला रही हो, मैं उसके बालों में उंगलियां फेर रही थी। मेरे मम्मे बड़े हैं – 34D साइज के – वो उन्हें मुंह में लेकर ऐसे चूस रहा था जैसे पूरा निगल जाएगा। जीभ निप्पल पर नाच रही थी, कभी चूचू-चूस, कभी चाट-चाट। करीब 20 मिनट ये सिलसिला चला – बारी-बारी दोनों चूचियों को। बीच-बीच में मैं उसके चेहरे को मम्मों पर दबा रही थी, सांसें तेज, बदन पसीने से भीगा। “राहुल, तू मुझे पागल कर देगा… आह्ह्ह!”

फिर वो उठा, अपनी शर्ट उतारी – उसकी छाती नंगी, मसल्स चमकते हुए। पैंट भी नीचे सरका दी, और उसका लंड बाहर आ गया – मोटा, लंबा, तना हुआ, टोपी लाल चमकती। मैं घूरती रह गई। “अब तू भी उतार,” बोला। मैंने स्कर्ट और पैंटी उतार फेंकी – अब हम दोनों नंगे। मेरे मम्मे चूसाई से चमक रहे थे, निप्पल्स और सख्त। जोश में मैं उसके ऊपर चढ़ गई, उसके लंड पर अपनी गांड और चूत रगड़ने लगी। वो नीचे लेटा सिसकारियां ले रहा था। मैंने पहले उसकी छाती पर किस किए – नमकीन स्वाद उसके पसीने का। फिर निप्पल्स को मुंह में लिया, चूसा। “हां डार्लिंग, चूसो इन्हें… ओह्ह, मजा आ रहा है!” वो कराहा। थोड़ी देर बाद मैं नीचे सरकी, उसके लंड तक। सांसें तेज, दिल धड़कता। लंड हाथ में लिया – गर्म, कड़ा, नसें फूली हुईं। “रानी, देख क्या रही है? चूस ले ना!” वो बोला।

मैंने जीभ निकाली, पहले टोपी पर चाटा – नमकीन, मस्की स्वाद। फिर होंठों से पकड़ा, चूसा। वो कराहा, “अह्ह्ह… जान, पूरा मुंह में ले… हां!” मैंने पूरा लंड मुंह में भरा – मुश्किल से आता था, लेकिन जोश में अंदर-बाहर करने लगी। सिर हिलाती, हाथ से सहलाती। “तुम तो एक्सपर्ट हो, समिता… ओह्ह फक!” वो तारीफ कर रहा था। फिर वो खड़ा हुआ, मैं घुटनों पर बैठ गई। लंड मुंह के पास – मैंने टाइट जकड़ा। अब वो मेरे मुंह की चुदाई करने लगा – जोर-जोर से अंदर-बाहर। गला तक जाता, आंसू आ जाते, लेकिन मजा… उफ्फ! 15 मिनट चला ये। अचानक स्पीड बढ़ी, और… गर्म रस मुंह में। पहली बार स्पर्म का स्वाद – थोड़ा नमकीन, चिपचिपा। मैं गर्म थी, सारा निगल गई। फिर लंड चाट-चाटकर साफ किया – चमक उठा वो।

अब हम साइड में लेटे, एक-दूसरे की बाहों में। सांसें धीमी हो रही थीं, लेकिन आग बुझी नहीं। थोड़ी देर बाद बोला, “फिर चूस ना।” मैंने ढीला लंड मुंह में लिया, चूसा – जल्दी ही फिर तन गया। अब उसने मुझे लिटाया, चूचियां चूसने लगा। हाथ नीचे सरका, चूत पर। मैं पहले से गीली थी – रस टपक रहा। उंगलियां होंठों पर फेरीं, फिर अलग कीं। “गीली हो गई रानी…” बोला। जोर से दबाया – आधी उंगली अंदर। “आह्ह!” दर्द और सुख की चीख निकली। फिर पूरी उंगली – मैं चिल्लाई। “घबराओ मत, अभी तो मेरा लंड तेरी चूत का रस पिएगा।” धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। अब मजा आने लगा – “जोर से करो!” मैं बोली। चूचियां चूसते हुए वो तेज हुआ, और मैं झड़ गई – शरीर कांप गया। उंगली निकाली, चाटी। “दुनिया का सबसे मीठा जूस… और मिलेगा?” “हां राजा, जितना चाहो।”

मैं आंखें बंद कर लेटी, लेकिन अचानक… उफ्फ! चूत पर नरम, गर्म एहसास। आंखें खोलीं – वो मुंह लगा रहा था! जीभ से चाट रहा, रस पी रहा। “ये… क्या?” मैं हंस पड़ी। “तेरा रस पी रहा हूं, डार्लिंग।” मैं तैयार हो गई, “चूस लो राजा… सारा रस पी लो, चूत को लाल कर दो!” सिर पकड़ा, दबाया। वो जीभ फेरने लगा – कुत्ते की तरह लंबी चाट। “जीभ अंदर घुसाओ!” बोली। पहले होंठों पर किस – जैसे मुंह पर। “ओह्ह… आह्ह… मर गई!” चीखी मैं। फिर जीभ अंदर – सांप की तरह लहराती। मैं बर्दाश्त ना कर सकी, सिर दबाया और उसके मुंह में झड़ गई – रस बह निकला। वो पीता रहा, चाटता रहा।

दोस्तों, ये तो बस शुरुआत थी – वो आग जो अभी सुलग रही थी। कैसे राहुल ने अपनी कुंवारी चूत में मोटा लंड घुसाया, मुझे चीखने पर मजबूर किया, और असली चुदाई का स्वर्ग दिखाया…

मेरा बॉयफ्रेंड मुझे पहली बार जमकर चोदा

आज मैं आपको अपनी पहली चुदाई की कहानी बताने जा रही हु, ये कहानी आज से मात्र तीन दिन पहले की है, बिलकुल ताजी सेक्स कहानी जो मैं आपसे शेयर कर रही हु. दोस्तों मेरा नाम रुपाली है मैं दिल्ली में रहती हु, मैं अठारह साल की हु, मैं अभी पढाई कर रही हु, मेरा इससे पहले कोई बॉय फ्रेंड नहीं था. पर मेरी एक दोस्त है कंचन, उसका एक बॉय फ्रेंड है राजीव, वो हमेशा राजीव के बारे में ही कहते रहती थी, आज राजीव ने ये किया आज राजीव ने वो किया आज मेरे चूत में लंड ऐसे घुसाया, ऐसे किश किया, ऐसे मेरे चूचियों को दबाया, दोस्तों ये सब सुन सुन कर मेरा मन भी चुदने का करने लगा. और मुझे भी लड़कों में इंटरेस्ट होने लगा.

मुझे भी लगा की मेरा भी कोई बॉय फ्रेंड हो और मैं इसकी चाहत में इधर उधर कोई सुन्दर और सेक्सी लड़का ढूंढने लगी. काफी दिन इधर उधर अपने लिए बॉयफ्रेंड ढूंढने के बाद मेरे क्लास का ही एक लड़का समीर, जो की बड़ी ही हॉट था, उसकी एक और गर्लफ्रेंड थी. पर मुझे इससे कोई मतलब नहीं था, मैं तो अपने चूत में लंड डलवाना चाहती थी, थोड़े दिन में ही वो मेरे कब्जे में आ गया, खूब घुमाया फिराया, चूचियां दबाया, अब मुझे असली मुकाम तक पहुचना था. मैं उसके बाइक पे पीछे बैठती और अपनी चूचियां उसके पीठ में चिपकाये हुए रखती. आखिर वो दिन आ गया जब वो मुझसे चूत मांग लिया. और मैंने पहले थोड़ा ना नुकुर की और फिर मैंने हामी भर दी. और फिर एक डेट फिक्स हो गया.

15 अगस्त के दिन ही मैंने अपने घर से बहाना बनाई की आज मेरी दोस्त के यहाँ पार्टी है. मैं वही जाउंगी. मेरे घर बाले ज्यादा कुछ पूछे भी नहीं. और उन्होंने कह दिया ठीक है शाम को जल्दी ही घर आ जाना. दिन के करीब ११ बज रहे थे मैंने समीर को व्हाट्सएप्प की की जल्दी आ जाओ. और मैंने अपने घर से थोड़े दूर पर ही उसका वेट करने लगी. वो बड़ा हैंडसम लग रहा था. बाइक पर था. ब्लैक कलर का चस्मा लगा कर बिलकुल हीरो लग रहा था. मैं तो उसके हीरोपंती से घायल हो गई. मैं पीछे बैठ गई और बाहों में भर लिया और उसके पीठ पर अपनी चूची को टिका दी.

मैंने कहा कही जगह है की कोई होटल में चले? तो उसने कहा की मेरे पास दोस्त के फ्लैट की चाभी है. मेरा दोस्त दिल्ली से बाहर गया है. हम दोनों वही आज एन्जॉय करेंगे. और फिर हम दोनों उसके फ्लैट पे चले गए. दोस्तों हम दोनों अंदर जाते ही. एक दूसरे के बाहों में हो गए. और वो मेरे होठ को चूसने लगा. और मैंने भी उसके होठ को चूसने लगी. वो मेरी चूचियों को दबाने लगा. और मैं भी उसके बाल को सहलाने लगी. धीरे धीरे हम दोनों बैडरूम में आ गए और समीर ने मुझे बेड पे पटक दिया, उसने मेरा समीज और सलवार उतार दिया और अपना भी कपड़ा उतार दिया.

वो जल्दबाजी नहीं करना चाह रहा था वो मुझे तड़पा रहा था, उसको लड़की चोदने का एक्सपीरेंस थे और मुझे कुछ भी नहीं पता था. वो मेरी दोस्त ने जो सेक्स के बारे में बताई वही पता था. मैं ब्रा और पेंटी में थी. वो मेरे होठ को चूमते हुए, मेरे कंधे को चूमते हुए मेरे चूचियों के बिच में मुह रगड़ रहा था मैं उस समय ब्रा में थी. फिर वो सरक कर निचे आया और मेरे पेट को जीभ से छूने लगा और थोड़ा निचे आकर मेरे नाभि में अपना जीभ डालने लगा. मैं तड़प रही थी, मेरे रोम रोम खड़े हो रहे थे. और मैं तकिये को अपने मुठी में पकड़ रही थी मेरे होठ अनायास ही दांत के बिच में जा रहा था. मेरी आँखे बंद हो रही थी. फिर वो थोड़ा सरक कर निचे गया और मेरी पेंटी को सूंघने लगा. मेरा तो हालात बहूत ज्यादा खराब होने लगा. वो फिर सरक कर निचे गया मेरे घुटने से होते हुए मेरे पैर के अंघूठे को अपने मुह में ले लिया. और फिर से ऊपर आ गया अब वो मेरा ब्रा को खोल दिया और अपने जीभ से निप्पल को छूने लगा. वो जोर से नहीं कुछ कर रहा था वो हलके हकले से निप्पल को छू रहा था, इससे मेरे शरीर में सिहरन होने लगी और मैं पुरे तरीके से तड़पने लगी.

वो फिर निचे आ गया और मेरी पेंटी को उतार दिया और फिर मेरे टांगो को अलग अलग करके. बिच में अपना मुह गुसा दिया और मेरे चूत के दोनों साइड की झिल्ली को अपने हाथो से अलग किया और बोला वाओ, और फिर अपना मुह लगा दिया. मैं तो पागल होने लगी. आज तक कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ था. बहूत ही मजा आ रहा था. गजब का एहसास था. जब वो मेरी चूत को चाट रहा था. फिर उसने चिर कर देखा , मैं वर्जिन थी. आज तक कभी चुदी नहीं थी. उसने बोला आज तो मैं तेरी वर्जिनिटी तोड़ दूंगा. मैं तुरंत बोल उठी ये मौक़ा मैं तुमको दे रही ही. आज तक मेरे चूत को किसी ने नहीं छुआ.

तभी समीर उठा गया और अपने पेंट की जेब से दस हजार रूपये मुझे दिए. और बोला ये तुम्हारा वर्जिनिटी खोने का इनाम है. मैं काफी दिन से ऐसी लड़की को ढूंढ रहा था जो आज तक चुदी ना हो. और आज मुझे तुम मिल गई. मैंने कहा कोई जल्दी बजी नहीं करना मुझे काफी दर्द हो सकता है. उसने कहा तुम चिंता नहीं करो मैं धीरे से तुम्हारी चूत की झिल्ली को तोडूंगा. और उसने अपना लंड निकाल लिया दोस्तों और उसमे थूक लगा कर मेरे चूत पर सेट किया, और अंदर घुसाने लगा. पर मेरे चूत के अंदर उसका लंड जा नहीं रहा था. क्यों की उसका लंड काफी मोटा था. और मेरी चूत की छेद काफी छोटी थी. उसने फिर से तरय किया तो थोड़ा सा अंदर गया. मुझे काफी दर्द होने लगा. मैंने कहा रुको रुको पर वो नहीं माना और जोर से धक्का दे दिया.

दोस्तों मैं दर्द से कराह उठी. उसने बोला हिलना मत अब दर्द ख़तम हो जायेगा. और हुआ भी वैसा ही. वो मुझे चोदने लगा. जोर जोर से मेरी चूत में लंड को पेलने लगा. मेरी चूत में उसका लंड बिलकुल सेट हो गया था. उसने फिर चूत से लंड निकाला और फिर से डाला. जब वो दुबारा घुसाता था मुझे काफी दर्द होने लगता था. तभी समीर बोल उठा अरे यार तेरी चूत से तो खून निकल रहा है. मैंने अपना हाथ लगा कर देखा तो सच में खून निकल रहा था. दोस्तों मैं पहले से ही नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे पढ़ चुकी थी की पहली बार चोदने पे खून निकलता है और समीर भी बोला की पहली बार में खून निकलता है यही होती है कोरी चूत की निशानी इसका मतलब होता है की इसके पहले तुम किसी और से नहीं चुदी है.

फिर क्या था दोस्तों मैं अपनी वर्जिनिटी खो चुकी थी. अब वो निचे आ गया था मैं ऊपर आ गई थी उसका लंड पकड़ कर मैं अपने चूत पे सेट की और अंदर समा ली. और फिर उछल उछल कर चुदवाने लगी. अब मुझे काफी मजा आने लगा. अब मुझे दर्द भी नहीं कर रहा था, करीब १० मिनट ऊपर चुदने के बाद फिर से मैं निचे आ गया. और फिर उसने मेरे चूत के कभी इधर से कभी उधर से कभी डौगी स्टाइल में कभी साइड से. खूब चोदा, दोस्तों उस दिन मैं करीब २ घंटे तक चुदी उसमे मैं करीब पांच बार झड़ चुकी थी और समीर भी दो बार अपने माल को निकाल चूका था.

दोस्तों आज मेरी हालात ऐसी है की मैं ठीक से चल नहीं पा रही हु, मेरी चूत काफी सूज चुकी है. चलने में भी दर्द हो रहा है. पर जो भी हो बहूत मजा आया था. अब अगली बार जब चुदुंगी मैं जरूर बताउंगी. तब तक के लिए आप भी मूठ मार लें.