पिछली होली भाभी के साथ फिर चुदाई – देवर भाभी सेक्स

कानपुर की उस पुरानी हवेली में, जहाँ गंगा की ठंडी हवा रात को खिड़कियों से आकर पर्दों को हल्का-हल्का हिलाती है और होली के रंग की महक पूरे घर में फैली रहती है, इस बार होली कुछ अलग ही थी। मैं, रमेश, २९ का, दिल्ली से छुट्टी लेकर आया था। घर में माँ-बाप, छोटा भाई और भाभी नेहा – २८ साल की, गोरी-चिट्टी, भरी हुई देह, लंबे काले बाल जो कमर तक लहराते हैं, होंठ गुलाबी और आँखें ऐसी कि एक नजर में आदमी का मन डोल जाए। भाई रोहन दिल्ली में ही नौकरी करता था, साल में दो-चार बार आता-जाता। नेहा घर संभालती, सबकी देखभाल करती, लेकिन अंदर से बहुत अकेली लगती थी।

पिछली होली में जो हुआ था, वो याद आते ही लंड तन जाता था। रंग खेलते-खेलते हम दोनों अकेले कमरे में पहुँच गए थे। नेहा की साड़ी रंग से तर-बतर, शरीर से चिपक गई थी। मैंने रंग लगाया तो हाथ उनकी कमर पर फिसला। वो हँसकर बोलीं, “अरे रमेश… इतना जोर से?” लेकिन हटी नहीं। फिर एक पल में मैंने उनका चेहरा पकड़ा और होंठ चूम लिए। वो पहले चौंकीं, फिर आँखें बंद कर लीं। जीभ अंदर डाली तो उन्होंने भी जवाब दिया। उसी दिन रात भर हमने एक-दूसरे को चखा। उनकी चूत की गर्मी, उनकी सिसकारियाँ, उनके स्तनों की नरमी – सब कुछ आज भी महसूस होता है। सुबह सब सामान्य हो गया, लेकिन वो राज हमारे बीच छिपा रहा।

इस बार होली की सुबह से ही हवा में कुछ अलग था। घर में सब रंग खेल रहे थे। माँ-बाप पड़ोस में चले गए। छोटा भाई दोस्तों के साथ गायब। नेहा और मैं घर में अकेले। वो सफेद साड़ी में थी – पतली, हल्की सी पारदर्शी। सुबह से पानी और रंग खेलते-खेलते पूरी भीग चुकी थी। साड़ी शरीर से चिपक गई थी, ब्लाउज गीला, स्तनों की गोलाई और निप्पल की उभार साफ दिख रहे थे। वो मेरे पास आई, हाथ में रंग का डिब्बा लिए। “रमेश… आज तो रंग लगाना ही पड़ेगा।” उसकी आवाज में शरारत थी।

मैंने रंग लिया। पहले गाल पर लगाया। फिर गर्दन पर। वो हँस पड़ी। “और लगाओ…” मैंने हाथ उनकी कमर पर रखा। वो सिहर उठी। उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए मैंने कहा, “भाभी… आज बहुत गर्म लग रही हो।” वो मेरी आँखों में देखकर बोली, “तू भी कम नहीं है।” मैंने उनका पल्लू खींचा। साड़ी नीचे सरकी। वो मेरे सीने से सट गईं। मैंने उनके होंठ चूम लिए। वो तुरंत जवाब देने लगीं। जीभ अंदर डाली तो उन्होंने मेरी जीभ पकड़ ली। किस इतना गहरा था कि सांस रुक गई।हम कमरे में चले गए। दरवाजा बंद किया। वो मेरे सामने खड़ी थीं। साड़ी गीली, चिपकी हुई। मैंने उनका पल्लू पूरी तरह खींच लिया। साड़ी नीचे गिर गई। ब्लाउज गीला। मैंने हुक खोले। ब्रा नहीं थी। गोरे, भरे हुए स्तन बाहर आए। निप्पल सख्त, गुलाबी। मैंने दोनों हाथों से दबाए। वो सिसकारी। “आह… रमेश… जोर से दबा… पिछले साल से याद है तेरे हाथ…” मैंने एक निप्पल मुंह में लिया। जोर से चूसा। जीभ से घुमाया। दांतों से हल्का काटा। वो चीख पड़ी। “आह… हाँ… काट… चूस… मेरे चुचे तेरे हैं… और जोर से चूस… दूध निकाल ले जैसे…” मैंने दूसरे को भी वैसा ही किया। वो मेरे बाल पकड़कर दबा रही थी। “रमेश… ओह… साल भर तरस रही थी… चूस… और चूस… मेरे निप्पल को लाल कर दे…”

मैंने उनकी साड़ी पूरी उतारी। पेटीकोट का नाड़ा खींचा। वो सिर्फ पैंटी में। मैंने घुटनों के बल बैठकर उनकी जांघें चूमीं। अंदर की तरफ। पैंटी गीली, रस से तर। मैंने उसे उतारा। उनकी चूत – गुलाबी, थोड़े बाल, रस बह रहा था। मैंने जीभ लगाई। वो कमर उठाकर चीखी। “रमेश… चाट… मेरी बुर… बहुत जल रही है… जीभ अंदर डाल…” मैंने जीभ अंदर डाली। क्लिट को चूसा। उँगलियाँ डालीं – दो, फिर तीन। वो कमर हिला रही थी। “आह… रमेश… उँगलियाँ… तेज… मेरी बुर फाड़… जीभ से चोद… ओह… और तेज… मैं झड़ने वाली हूं…” मैंने स्पीड बढ़ाई। वो काँपकर झड़ गई। उनका रस मेरे मुँह में बहा। मैंने सब चाट लिया। स्वाद मीठा-नमकीन। वो बोली, “रमेश… अब तेरा लंड चाहिए मुझे।”

वो उठी। मेरी शर्ट उतारी। छाती चूमी। नीचे आई। पैंट उतारी। लंड बाहर – सख्त, मोटा, नसें फूली हुईं। उन्होंने हाथ में लिया। “रमेश… कितना गरम और मोटा है तेरा… पिछले साल से और तगड़ा हो गया…” वो सहलाने लगी। फिर मुंह में लिया। जोर-जोर से चूसने लगी। जीभ सुपारे पर घुमाती। गले तक लेती। लार टपक रही थी। मैं सिसकारा। “भाभी… बहुत अच्छा… गहरा ले… आह… तेरी जीभ कमाल कर रही है… चूस… और चूस…” वो बोली, “अब डाल… मेरी बुर में आग लगी है।”

वो बेड पर लेट गई। जांघें फैलाईं। मैंने लंड उनकी चूत पर रखा। धीरे से अंदर। वो कराही। “आह… रमेश… बड़ा है… धीरे… पूरा अंदर ले रही हूँ…” मैं रुक गया। फिर धीरे-धीरे पूरा अंदर। वो चीखी। “हाँ… पूरा… अब चोद… जोर से…” मैंने धक्के शुरू किए। धीरे से तेज। वो कमर हिला रही थी। “रमेश… जोर से… मेरी बुर फाड़ दो… चोद… आह… तेज… और तेज… मेरी बुर तेरी है…” मैंने स्पीड बढ़ाई। उनके चुचे हिल रहे थे। मैंने दबाए। वो मेरी पीठ नाखूनों से खरोंच रही थी। “रमेश… अंदर झड़… मुझे भर दे… गर्म माल डाल… मैं तेरी हूँ…” मैंने और जोर से धक्के मारे। एक साथ झड़ गए। मेरा गरम माल उनकी बुर में भर गया। वो काँपकर थम गई।

लेकिन वो रुकने वाली नहीं थी। वो उठी। “रमेश… आज पूरी होली तेरी।” वो मेरे ऊपर चढ़ गई। उनकी बुर मेरे लंड पर। वो कमर हिला रही थी। ऊपर-नीचे। उनके चुचे मेरे मुँह में। मैं चूस रहा था। वो चीख रही थी। “रमेश… तेरे लंड ने मुझे पागल कर दिया… आह… गहरा… और गहरा… मैं ऊपर से चोद रही हूँ तुझे…” मैंने नीचे से धक्के मारे। वो तेज हो गई। “रमेश… मैं झड़ रही हूँ… आह…” वो झड़ गई। मैंने उन्हें पलटा। डॉगी में। उनकी गांड पकड़ी। लंड डाला। तेज-तेज। वो तकिए में मुँह दबाकर चीख रही थी। “रमेश… चोद… मेरी बुर और गांड दोनों तेरी… फाड़ दो… जोर से… मुझे तेरी रंडी बना दे… बाल पकड़… पीछे से पटक…” मैंने उनके बाल पकड़े। पीछे से जोर से धक्के। वो अपनी बुर सहला रही थी। हम कई बार झड़े।

फिर मैंने कहा, “भाभी… आज गांड में?” वो शरमा गई। “धीरे से… पिछली बार से याद है…” मैंने ऑयल लगाया। पहले उंगली। वो सिहर उठी। “रमेश… आह… दर्द… लेकिन अच्छा…” फिर दो उँगलियाँ। वो कमर हिला रही थी। “रमेश… और अंदर… तैयारी कर रही हूँ…” फिर लंड। धीरे से अंदर। वो चीखी। “आह… रमेश… बड़ा है… धीरे…” मैं रुक गया। फिर धीरे-धीरे पूरा। वो बोली, “अब चोद… मेरी गांड चोद…” मैंने धक्के शुरू किए। वो चीख रही थी। “रमेश… जोर से… फाड़ दो मेरी गांड… आह… बहुत मजा आ रहा है… अपनी बुर में उँगलियाँ डाल रही हूँ…” मैं तेज हो गया। वो अपनी बुर में उँगलियाँ डाल रही थी। हम दोनों झड़ गए।

दिन भर रंग खेलते रहे। लेकिन हर बार अकेले मिलते ही चुदाई। शाम को सब घर लौट आए। लेकिन रात में फिर कमरे में। नेहा मेरे बिस्तर पर। रात भर चुदाई। उनकी सिसकारियाँ दबाकर। “रमेश… चुप… कोई सुन लेगा…” लेकिन मजा कम नहीं हुआ।

हॉली खत्म हुई। मैं दिल्ली लौटा। लेकिन वो यादें रह गईं। नेहा की बुर की गर्मी, उनकी सिसकारियाँ, उनका स्पर्श। कानपुर की उस हवेली में हमारा राज छिपा रहा। हर होली पर मिलने का वादा। जहाँ रंग सिर्फ बाहर नहीं, अंदर भी लगते हैं।

 

बबिता जी की मां बनने की इच्छा-1

हैलो दोस्तों मेरा नाम अंकित गोयल है। मैं अपनी पहली कहानी लिखने जा रहा हूँ। आशा करता हूँ कि आपको अच्छा लगेगा। तो आइये अब कहानी शुरू करते हैं।

अच्छा तो जैसा कि आप सब जानते हैं, कि गोकुलधाम की सारी महिलाएं माँ बन चुकी हैं, लेकिन सिर्फ बबिता और अंजलि ही हैं जिनके कोई अभी बच्चे नहीं हैं। इसलिए एक दोपहर अंजलि और बबिता आपस में एक-दूसरे से बात कर रही है, और वो सोच रही है क्यों ना अब वे भी माँ बन जाए। तो इस पर बबिता कहती हैं कि वो इस बारे में अय्यर से बात करेगी और अंजलि भी इस बारे में तारक से बात करने वाली थी।

रात के समय जब अय्यर ऑफिस से घर आता है तो बबिता उसे वेलकम करती है और फिर वो दोनों डिनर करने के लिए बैठ जाते हैं डिनर टेबल पर। बबिता थोड़ी शरमाती हुई अय्यर से कहती है कि क्यों ना उन्हें अब बच्चा कर लेना चाहिए। अय्यर एक-दम से चौंक जाता है और बबिता को कहता है “क्या!” इस पर बबिता कहती है कि हाँ उसने ठीक सुना।

वो प्रेग्नेंट होना चाहती है। फिर अय्यर थोड़ा सोचता है, और उसके बाद मान जाता है। वह बबिता को कहता है कि वह सोडा पीने जा रहा है, और जब वह वापस आएगा तो बबिता उसके लिए तैयार रहें। और ये कह कर वह सोडा पीने चला जाता है।

अय्यर के जाने के बाद बबिता पहले थोड़ा शरमाती है, और फिर बाथरूम में चली जाती है। बाथरूम में जाकर पहले वह अपने सारे कपड़े उतारती है, और फिर ब्लैक कलर की ब्रा और पेंटी पहन लेती है, जो कि ट्रांसपैरेंट थी दोनों ही। उसके बाद वह एक ब्लू कलर का चमकदार सूट पहनती है, और नीचे लाल कलर की सलवार होती है हाथों में खनकती हुई चूड़ियां थी। कानों में झुमके, गले में एक सुंदर सा हार पैरों में पायल और घर की लाइट थोड़ी डिम कर देती है।

चारों तरफ एयर फ्रेशनर की वजह से बहुत अच्छी खुशबू आ रही थी। बबिता भी बहुत अच्छा परफ्यूम लगा लेती है। वह अपने बालों को खुले ही रखती है। मांग में सिंदूर और गले में मंगलसूत्र पहनती है, और थोड़ी लो हील्स पहनती है। अब वह पूरी तरह से अय्यर के लिए तैयार थी।

अय्यर जब सोडा पीके वापस आता है, तो बबिता ने दरवाजा खुला ही रखा होता है। तो वह सीधा अंदर आ जाता है। अंदर आके वह देखता है एक डिम लाइट, इतनी अच्छी खुशबू, और बहुत ही रोमांटिक माहौल होता है। फिर वह आवाज देता है “बबिता, बबिता”। आवाज सुन कर बबिता बेडरूम से धीरे-धीरे कैटवॉक करते हुए बाहर आती है, क्योंकि उसने पैरों में पायल पहनी हुई थी तो पूरे घर में छ्न छ्न छन छ्न की आवाज गूंज रही थी।

बबिता धीरे-धीरे अय्यर के पास आती है। अय्यर उसे देखते ही रह जाता है, क्योंकि वह इतनी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी, और अब आप सब जानते ही हैं बबिता की ब्रेस्ट का साइज तो। और ऊपर से उसने एक दम फिट सूट पहना हुआ था। अय्यर उसे देख के पागल हो जाता है। अय्यर कहता है, “बबिता अब एक बच्चे से काम नहीं चलेगा लगता है। 10-12 बच्चे तो करने ही पड़ेंगे”।

इसके बाद वह बबिता का हाथ पकड़ कर उसे बेडरूम में ले जाता है। बबिता शर्माती हुई अपनी पायल की छ्न छ्न की आवाज के साथ बेडरूम में चली जाती है। अय्यर बेडरूम का दरवाजा बंद कर लेता है।

क्योंकि अय्यर को पता था कि आज उसे बबिता के साथ सेक्स करना था। इसीलिए उसने अब्दुल की दुकान पे ही वायग्रा की दो गोलियां खा ली थी। ऊपर से बबिता इतनी हॉट लग रही थी कि अय्यर का लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था। वह बबिता का हाथ पकड़ता है और उसे झटके से अपनी ओर खींचता है, जिससे बबिता अय्यर से टकरा जाती है।

बबिता की चूचियां अय्यर के सीने में गढ़ रही थी, और उसका खड़ा लौडा बबिता को महसूस हो रहा था अपने पेट पर। अब बबिता थोड़ा शर्मा जाती है। अय्यर अपना एक हाथ उसकी कमर में डाल देता है और दूसरे हाथ से उसके चूत्तड़ पकड़ लेता है, और ज़ोर से दबा देता है बबिता के मुँह से आह निकल जाती है। अब अय्यर और बबिता बिल्कुल नजदीक थे। उनके बीच में किसी चीज़ के लिए कोई जगह नहीं थी।

उनकी सांसें एक-दूसरे से टकरा रही थी उनके होंठ एक-दूसरे को खा जाने के लिए तैयार थे। बबिता भी पूरी तरह से तैयार थी माँ बनने के लिए। अब अय्यर आगे बढ़ता है, और बबिता को गाल पे एक किस कर देता है जिससे बबिता थोड़ा सहम जाती है। अब वह अपने दोनों हाथ बबिता के गालों पर रखता है, और उसे अपने पास ले आता है, और अय्यर बबिता के होठों पर किस करना शुरू कर देता है।

इस समय बबिता ने अपने हाथों को अय्यर की कमर पर रखा हुआ था। अय्यर उसके नीचे वाले होठ को पकड़ लेता है, और ऐसे चूसता है जैसे कोई छोटा बच्चा आइसक्रीम चूस रहा हो। वह उसे लगातार चूसता रहता है। इतना चूसता है कि अय्यर के दांत उसमें गढ़ जाते हैं और उसके होंठ पे खून आ जाता है।

फिर बबिता कहती है, “पागल हो गए हो क्या? ऐसे तो तुम मुझे खा ही जाओगे”। फिर अय्यर थोड़ा होश में आता है और उसके होठों पर नॉर्मल किस करना शुरू करता है। अब पूरे कमरे में सिर्फ उनके किस की आवाजें गूंज रही थी पुच… पुच… पुच… पुच…

बबिता की सांसें तेज हो रही थी। उन दोनों का ये चुंबन लगभग 15 मिनट चलता है।इसके बाद अय्यर और बबिता ने एक-दूसरे को देखा, और उन दोनों के चेहरे पर एक दूसरे का थूक लगा हुआ था। इसे देख कर वो दोनों स्माइल करते हैं।

उसके बाद अय्यर बेड पे बैठ जाता है और बबिता को अपनी गोद में बिठा लेता है अब अय्यर का खड़ा लंड़ बबिता की गांड में चुभ रहा था। बबिता को यह बहुत अच्छा लग रहा था। फिर वह बबिता की गर्दन से बालों को हटाता है, और धीरे से उसके नेकलेस को उतार देता है और उसकी गर्दन पर किस करना शुरू कर देता है। अब बबिता धीरे-धीरे मौन करना लगती है, और बबिता कि चूत पानी छोड़ना शुरू कर देती है।

बबिता ने अपने हाथों से बेड को कस कर पकड़ा हुआ था और वह बस मज़े ले रही थी। अय्यर उसे चाट रहा था। उसकी गर्दन को चाट रहा था और अपने हाथ अय्यर ने बबिता की जांघों पर रखे हुए थे। बीच-बीच में वह उसकी वजाइना को भी छू रहा था। इस तरह से किस करने के बाद अय्यर बबिता के हाथों को पकड़ लेता है, और धीरे-धीरे अपने हाथ उसकी बाहों के ऊपर ले जाने लगता है।

वो उसके कंधों तक पहुँच जाता है‌, और  उसके कंधों से सूट को हटा देता है। फिर पीछे की डोरी खोल कर उसकी काले रंग की ब्रा स्ट्रैप बाहर आ जाती है और सूट चूचियों से थोड़ा नीचे चला जाता है तो उसकी चूचियां भी दिख रही थी। उनके बीच में मंगलसूत्र फंसा हुआ था। वह फिर से उसकी कमर में किस करता है। फिर वह उसी पोजिशन में बैठे-बैठे बबिता को सूट निकालने को कहता है।

बबिता को थोड़ी मुश्किल होती है, पर वह सूट निकाल देती हैं। जैसे ही सूट निकलता है, अय्यर कस कर उसके पेट को पकड़ लेता है और उसकी कमर को चाटने लगता है। अय्यर उसकी बरा भी उतार के फेंक देता है, और फिर आप सब जानते हैं कि क्या हुआ होगा। अय्यर उसकी चूचियों को ज़ोर से पकड़ लेता है और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगता है। क्योंकि बबिता का मंगलसूत्र उसकी चूचियों के बीच मे फसा हुआ था, तो अय्यर के जोर से दबाने के कारण मंगलसूत्र बबिता की चूचियों में गड़ जाता है।

इसके कारण बबिता को दर्द होता है और बबिता की चीख निकल जाती है आहहह… और बबिता की चूचियों से खून निकल जाता है। उसके बाद अय्यर बबिता के पिंक निप्पलस को अपनी उंगलियों से मसलता है, जिसकी वजह से बबिता को दर्द होता है और वह बोलती है कि, “आराम से करो ना अय्यर, ऐसे तो मैं दर्द से मर जाऊंगी”।

पर अय्यर बबिता कि बात पर ध्यान नहीं देता, और लगातार बबिता की गोरी-गोरी चूचियों को दबाता रहता है, और बीच-बीच में उसके पिंक निप्पलस को मसलता रहता है, जिसके कारण बबिता को दर्द हो रहा था, और वह चीख रही थी, “आहहह आहहह आहहह माँ, मर गई आहहह”। और उसकी आँखों में आंसू आ जाते हैं। पूरे कमरे में बस बबिता की चीखें और उसके रोने की आवाज गूंज रही थी।

फिर अय्यर उसकी सलवार का नाड़ा पकड़ता है, और उसे झटके से खोल देता है। फिर बबिता को खड़ा करता है, जिससे उसकी सलवार नीचे गिर जाती है। फिर वह उसकी पेंटी को फाड़ देता है, और खुद भी अपने सारे कपड़े उतार देता है, तो अब आप सोच सकते हैं कमरे में क्या सीन होगा। बबिता जैसी हॉट औरत बिल्कुल नंगी खड़ी थी अय्यर के सामने चुदने को तैयार।

अब अय्यर बबिता को अपनी गोद में उल्टा लिटा लेता है। मतलब अय्यर बैठा हुआ था और बबिता की पेट अय्यर के घुटनों पे था, और वह बेड पे उल्टी लेटी हुई थी। जिससे कि बबिता के चूतड़ अय्यर के मुँह के सामने थे। अब अय्यर वहाँ पड़े आइस बॉक्स में से बर्फ़ का एक टुकड़ा निकलता है, और उसे बबिता की कमर पर लगाता है। क्योंकि सर्दी का मौसम था, और एक-दम से बर्फ़ लगने से बबिता को बुरी तरह से झटका लगता है।

अब वो धीरे-धीरे बर्फ़ को उसकी गांड के छेद के पास ले जाता है, और धीरे से बर्फ़ को बबिता की गांड के छेद में डाल देता है। जिससे बबिता को दर्द होता है तो बबिता करहाती है आहह आहह। अय्यर अपने दोनों हाथों से बबिता के चूतड़ों को ज़ोर-ज़ोर से दबाता है। बीच-बीच में उन पर थप्पड़ भी मारता है।

जैसे ही वह थप्पड़ मारता है बबिता के मुँह से आहह निकल जाती है दर्द के कारण। फिर वह बबिता की चूत में अपना हाथ रख देता है, जिससे मानो बबिता कांप जाती है एक-दम से। फिर वह बिना कुछ सोचे एक-दम से अपनी दो उंगलियां बबिता की चूत के अंदर डाल देता है। अब बबिता के मुँह से सिसकारियां निकलने लगती है, “आहह आहह आहह आहह आहहह”।

अय्यर अपनी उंगलियों को ज़ोर-ज़ोर से अंदर बाहर करने लगता है, जिससे बबिता पानी छोड़ देती है। बबिता सिसकारियां लिए जा रही थी। अब वह बबिता को बेड पे लिटा देता है। बबिता बिल्कुल नंगी बेड पर लेटी हुई थी, और सेक्स के लिए तड़प रही थी। अब अय्यर बबिता के ऊपर जाता है। पहले उसके गालों पर किस करता है। फिर उसके होठों पर बहुत ज़ोर से किस करता है, जिसकी वजह से पहले जहाँ होंठ फटा था वहाँ से दोबारा खून आने लगता है।

फिर अय्यर बबिता की चूचियों पर किस करता है उनके निपल्स को जोर से काटता है, जिसकी वजह से बबिता की आंख में आंसू आ जाते हैं दर्द के कारण। फिर वह उसके पेट को चूमना शुरू करता है। बबिता की नाभि को तो मानो वो खा ही जाएगा।

फिर वह उसकी चूत के पास आता है। उसकी टांगों को किस करता है। उसके चूतड़ों को दबाता है, और अब अय्यर का लोड़ा भी पूरी तरह से खड़ा हो गया था। लोड़ा बबिता को प्रेग्नेंट करने के लिए बिल्कुल तैयार था। बबिता से भी रहा नहीं जा रहा था, तो वह कहती हैं, “अय्यर अब मुझे और मत तड़पाओ, प्लीज़ मेरे साथ सेक्स करो ना”।

आज की कहानी को यहीं विराम देता हूँ। इससे आगे की कहानी अगले पार्ट में। आशा करता हूँ कि आपको यह कहानी अच्छी लगी होगी।

टप्पू ने किया बबीता को प्रेगनेंट

सभी पाठकों को मालूम है कि बबीता को अभी तक कोई बच्चा नहीं हुआ था। बबीता और अय्यर की शादी को पूरे दस साल हो चुके थे, लेकिन अय्यर बबीता को माँ बनाने में नाकाम रहा था। बबीता, 32 साल की एक खूबसूरत औरत, जिसका गोरा रंग, भरी हुई चूचियाँ, और टाइट गांड हर मर्द का ध्यान खींचती थी। उसकी हँसी और बोलने का अंदाज़ इतना सेक्सी था कि कोई भी उसकी ओर आकर्षित हो जाए। दूसरी तरफ, अय्यर, 38 साल का, एक साधारण सा वैज्ञानिक, जिसे अपनी बीवी की खूबसूरती पर गर्व था, लेकिन बिस्तर पर वो बबीता की आग को शांत नहीं कर पाता था। और फिर था टप्पू, 21 साल का जवान लड़का, कॉलेज स्टूडेंट, लंबा, गोरा, मस्कुलर बॉडी, और एक ऐसा लंड जो किसी भी औरत को पागल कर दे। टप्पू का कॉन्फिडेंस और उसकी चाल-ढाल उसे सोसाइटी का सबसे चहेता लड़का बनाती थी।

एक सोमवार की सुबह, टप्पू अपनी चमचमाती बाइक पर कॉलेज के लिए निकल रहा था। उसने काले रंग की टी-शर्ट और टाइट जीन्स पहनी थी, जो उसकी मस्कुलर बॉडी को और निखार रही थी। जैसे ही वो सोसाइटी के कंपाउंड से गुज़र रहा था, उसकी नज़र बबीता पर पड़ी। बबीता ने टाइट सफेद कुर्ती और नीली लेगिंग्स पहनी थी, जिसमें उसकी भरी चूचियाँ और गोल गांड साफ झलक रही थी। वो अपने बालों को लहराते हुए तेज़ कदमों से कहीं जा रही थी।

टप्पू ने बाइक रोकते हुए ज़ोर से कहा, “गुड मॉर्निंग बबीता आंटी! आप कहाँ जा रही हो?”

बबीता ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “गुड मॉर्निंग टप्पू! मैं अपनी फ्रेंड के घर जा रही हूँ, सनराइज़ अपार्टमेंट, बस तीन घंटे के लिए।”

टप्पू ने तुरंत मौका देखते हुए कहा, “अरे आंटी, वो तो मेरे कॉलेज के पास ही है! आ जाओ, मैं आपको ड्रॉप कर देता हूँ, और बाद में पिक भी कर लूँगा।”

बबीता ने उसकी ओर देखा, उसकी मासूमियत भरी मुस्कान पर फिदा हो गई। “अरे, कितना स्वीट है तू टप्पू!” उसने कहा और बाइक पर पीछे बैठ गई। जैसे ही बबीता टप्पू के पीछे बैठी, उसकी चूचियाँ टप्पू की पीठ से टकराईं, और टप्पू को एक हल्का सा करंट सा लगा। बबीता ने अपनी बाहें टप्पू की कमर पर कस दीं, और उसकी उंगलियाँ धीरे से उसकी एब्स को टटोल रही थीं। टप्पू ने बाइक स्टार्ट की और दोनों सनराइज़ अपार्टमेंट की ओर निकल पड़े।

जब टप्पू बबीता को लेकर कॉलेज के सामने से गुज़रा, तो कॉलेज के सारे लड़के उसे घूरने लगे। “क्या माल पटा लिया टप्पू ने!” एक लड़के ने अपने दोस्त से फुसफुसाते हुए कहा। बबीता की टाइट कुर्ती में उसकी चूचियाँ उछल रही थीं, और उसकी लेगिंग्स में उसकी गांड का उभार साफ दिख रहा था। टप्पू को ये देखकर गर्व महसूस हुआ, और उसने बाइक की स्पीड और बढ़ा दी।

कॉलेज खत्म होने के बाद, टप्पू बबीता को पिक करने सनराइज़ अपार्टमेंट पहुँचा। बबीता बाहर इंतज़ार कर रही थी, और उसने अब एक हल्का मेकअप कर लिया था, जिससे वो और भी हॉट लग रही थी। टप्पू ने कहा, “आंटी, मुझे मॉल से एक जीन्स लेनी है, बस 10 मिनट का काम है। आप चलोगी?”

बबीता ने हँसते हुए कहा, “हाँ, क्यों नहीं! चल, मैं भी कुछ देख लूँगी।” दोनों मॉल की ओर निकल पड़े। मॉल में टप्पू ने एक टाइट ब्लू जीन्स पसंद की, और बबीता ने एक सेक्सी रेड ड्रेस चुनी, जो इतनी टाइट थी कि उसमें उसकी चूचियाँ और गांड पूरी तरह हाइलाइट हो रही थीं। टप्पू चेंजिंग रूम की ओर गया, लेकिन जल्दबाज़ी में उसने दरवाज़ा लॉक करना भूल गया। बबीता भी अपनी ड्रेस ट्राय करने के लिए चेंजिंग रूम की ओर गई, और गलती से उसी रूम में घुस गई जहाँ टप्पू था।

जैसे ही बबीता ने दरवाज़ा खोला, उसकी नज़र टप्पू पर पड़ी। टप्पू ने नीचे कुछ नहीं पहना था, और उसका 12.5 इंच का मोटा, काला लंड पूरी तरह तना हुआ था। उसका लंड इतना मोटा और लंबा था कि बबीता की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने ज़ोर से चीख मारी, “अरे टप्पू!”

टप्पू ने फटाफट दरवाज़ा लॉक किया और कहा, “अरे बबीता आंटी, आप मेरे रूम में क्यों आ गईं?”

बबीता ने हड़बड़ाते हुए कहा, “टप्पू, और कोई रूम खाली नहीं था!” उसकी साँसें तेज़ थीं, और उसकी आँखें बार-बार टप्पू के लंड की ओर जा रही थीं।

टप्पू ने हँसते हुए कहा, “ठीक है आंटी, मैं अपनी जीन्स ट्राय कर रहा हूँ, आप अपनी ड्रेस ट्राय कर लो।” बबीता ने हिचकते हुए अपनी कुर्ती उतारी। जैसे ही उसने कुर्ती खींची, उसकी भारी चूचियाँ ब्रा से बाहर उछल पड़ीं। उसकी काली ब्रा में उसकी चूचियाँ इतनी टाइट थीं कि लग रहा था ब्रा फट जाएगी। टप्पू की नज़रें उसकी चूचियों पर टिक गईं, और उसका लंड अब 12.5 से 15 इंच का हो गया। उसका लंड इतना सख्त था कि वो हिल भी नहीं रहा था।

बबीता ने टप्पू की हालत देखी और उसकी साँसें और तेज़ हो गईं। उसने अपनी लेगिंग्स भी उतार दी, और अब वो सिर्फ़ काली ब्रा और पैंटी में थी। उसकी पैंटी इतनी टाइट थी कि उसकी चूत का उभार साफ दिख रहा था। टप्पू का कंट्रोल अब टूट रहा था। उसने धीरे से कहा, “बबीता आंटी, आप तो बहुत सेक्सी हो… क… क्या मैं…?”

बबीता ने उसकी बात काटते हुए कहा, “टप्पू, ये गलत है… लेकिन…” उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। वो जानती थी कि अय्यर उसे कभी संतुष्ट नहीं कर पाया था, और टप्पू का ये विशाल लंड उसे पागल कर रहा था। उसने धीरे से अपनी ब्रा का हुक खोला, और उसकी भारी चूचियाँ आज़ाद हो गईं। उसकी चूचियाँ इतनी सख्त और गोल थीं कि टप्पू की साँस रुक गई।

 

टप्पू ने अब और इंतज़ार नहीं किया। वो बबीता के पास गया और उसकी चूचियों पर टूट पड़ा। उसने एक चूची को अपने मुँह में लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा। “आआह… टप्पू…” बबीता की सिसकारियाँ निकलने लगीं। उसने टप्पू के बाल पकड़ लिए और उसे और ज़ोर से अपनी चूचियों पर दबाने लगी। टप्पू ने दूसरी चूची को अपने हाथ से मसला, और उसका निप्पल इतना सख्त था कि टप्पू को लगा वो फट जाएगा।

बबीता ने सिसकारी लेते हुए कहा, “टप्पू, तेरा लंड… इतना बड़ा… मैंने कभी नहीं देखा…” टप्पू ने उसकी पैंटी की ओर देखा, जो अब पूरी गीली हो चुकी थी। उसने धीरे से बबीता की पैंटी उतारी, और उसकी गुलाबी चूत नज़र आई, जो पूरी तरह गीली थी और चमक रही थी। टप्पू ने अपनी उंगलियाँ उसकी चूत पर फिराईं, और बबीता की सिसकारी और तेज़ हो गई। “आआह… टप्पू… मत तड़पाओ…” उसने कहा।

टप्पू ने बबीता को चेंजिंग रूम की दीवार से टिका दिया और उसकी टाँगें चौड़ी कीं। उसने अपना मोटा लंड उसकी चूत पर रगड़ा, और बबीता की सिसकारियाँ अब चीखों में बदल गईं। “आआह… टप्पू… धीरे…” उसने कहा, लेकिन टप्पू का कंट्रोल अब पूरी तरह खत्म हो चुका था। उसने अपना लंड धीरे से उसकी चूत में घुसाया, लेकिन उसकी चूत इतनी टाइट थी कि सिर्फ़ आधा लंड ही अंदर गया। “आआह… टप्पू… तेरा लंड… इतना मोटा…” बबीता की आवाज़ काँप रही थी।

टप्पू ने एक ज़ोर का धक्का मारा, और उसका पूरा 15 इंच का लंड बबीता की चूत में समा गया। “आआआह… उउउह… टप्पू… मार डालेगा क्या…” बबीता चीख पड़ी। टप्पू ने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए, और हर धक्के के साथ बबीता की चूचियाँ उछल रही थीं। “थप… थप… थप…” की आवाज़ चेंजिंग रूम में गूँज रही थी। बबीता की सिसकारियाँ अब पूरे मॉल में सुनाई दे रही थीं। “आआह… उउउह… टप्पू… और ज़ोर से… फाड़ दे मेरी चूत…” उसने चीखते हुए कहा।

टप्पू ने अपनी स्पीड बढ़ा दी। उसका लंड बबीता की चूत को चीरता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था। बबीता की चूत से रस टपक रहा था, जो चेंजिंग रूम की फर्श पर गिर रहा था। टप्पू ने बबीता को घुमाया और उसे दीवार पर झुका दिया। उसने बबीता की गांड पर एक ज़ोर का चमाट मारा, और बबीता की चीख निकल गई। “आआह… टप्पू… तू कितना जंगली है…” उसने कहा।

टप्पू ने अपना लंड बबीता की गांड के छेद पर रगड़ा। “आंटी, आपकी गांड तो और भी टाइट लग रही है… थोड़ा एनल ट्राय करें?” उसने पूछा। बबीता ने हिचकते हुए कहा, “टप्पू… वो बहुत बड़ा है… मैं नहीं ले पाऊँगी…” लेकिन टप्पू ने उसकी बात अनसुनी कर दी। उसने अपना लंड धीरे से उसकी गांड में घुसाया, और बबीता की चीख पूरे मॉल में गूँज गई। “आआआह… टप्पू… फट गई मेरी गांड…” उसने चीखते हुए कहा।

टप्पू ने धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढ़ाई, और अब उसका लंड बबीता की गांड को चीर रहा था। “थप… थप… थप…” की आवाज़ के साथ बबीता की सिसकारियाँ मॉल में गूँज रही थीं। “आआह… उउउह… टप्पू… तू कितना मर्द है… आआह…” बबीता बार-बार चीख रही थी। टप्पू ने 15 मिनट तक उसकी गांड मारी, और बबीता की हालत ऐसी हो गई थी कि वो ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी।

फिर बबीता ने टप्पू को नीचे बिठाया और उसका लंड अपने मुँह में ले लिया। “उम्म… स्लर्प… उग्ग…” उसने ज़ोर-ज़ोर से टप्पू का लंड चूसा। उसका लंड इतना मोटा था कि बबीता का मुँह पूरा खुल गया। टप्पू ने बबीता के बाल पकड़ लिए और उसके मुँह को और ज़ोर से अपने लंड पर दबाया। “आआह… बबीता आंटी… आप तो कमाल हो…” टप्पू ने सिसकारी लेते हुए कहा।

बबीता ने टप्पू का लंड चूसते हुए कहा, “टप्पू… तेरा लंड… इतना मज़ा दे रहा है… आआह…” उसने टप्पू के लंड को चाटा, चूसा, और फिर से उसकी चूत में ले लिया। टप्पू ने फिर से बबीता की चूत को निशाना बनाया और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा। “थप… थप… थप…” की आवाज़ के साथ बबीता की चीखें फिर से गूँजने लगीं। “आआह… टप्पू… धीरे… मेरी चूत फट जाएगी…” उसने कहा, लेकिन टप्पू ने उसकी एक न सुनी।

टप्पू ने एक आखिरी ज़ोर का धक्का मारा, और उसका सारा माल बबीता की चूत में भर गया। इतना सारा माल था कि बबीता की चूत से ओवरफ्लो होकर चेंजिंग रूम की फर्श पर गिर गया। बबीता की चूत पूरी तरह फट चुकी थी, और वो थककर दीवार से टिक गई। उसने अपनी ज़िंदगी में पहली बार इतना ज़ोरदार और ब्रूटल सेक्स किया था। टप्पू ने भी हाँफते हुए कहा, “बबीता आंटी… आपकी चूत और गांड… बस मज़ा आ गया।”

दोनों ने अपने कपड़े पहने और चेंजिंग रूम से बाहर निकले। जैसे ही वो निकले, कुछ और औरतें चेंजिंग रूम में घुसीं और टप्पू का बचा हुआ माल चाटने लगीं। बबीता को ये देखकर थोड़ा अजीब लगा, लेकिन वो चुप रही।

दो दिन बाद, बबीता के पीरियड्स मिस हो गए। उसने डरते-डरते प्रेगनेंसी टेस्ट किया, और रिजल्ट पॉजिटिव आया। वो प्रेगनेंट थी। अय्यर दस साल में बबीता को प्रेगनेंट नहीं कर पाया, लेकिन टप्पू ने सिर्फ़ 10 मिनट में ये कर दिखाया। बबीता ने टप्पू को फोन किया और ये खबर दी। टप्पू तो खुशी से उछल पड़ा, लेकिन बबीता टेंशन में थी। उसका दिल धड़क रहा था, और वो सोच रही थी कि अब क्या होगा।

बबिता जी की मां बनने की इच्छा-2

अय्यर बबिता मिशनरी पोजिशन में थे। अय्यर अपने लोड़े को बबिता की चूत के ऊपर सेट करता है, और धीरे-धीरे अंदर डालने लगता है। लंड का ऊपरी सिरा बबिता की चूत में चला जाता है। बबिता के मुँह से आह निकलती है।

फिर अय्यर एक जोरदार धक्का मारता है, जिससे अय्यर का पूरा लंड बबिता की चूत में चला जाता है। जिसकी वजह से बबिता को बहुत ज्यादा दर्द होता है, क्योंकि उसने बहुत लंबे समय से सेक्स नहीं किया था। और दर्द की वजह से उसके मुँह से चीख निकल जाती है, “आहहहहहह मर गई माँ”, और उसकी आँखों में आंसू आ जाते हैं।

वह इतनी ज़ोर से चीखती है, कि उसकी चीख उसके बेडरूम से होते हुए उसके हॉल से होते हुए बाहर तक सुनाई दे रही थी , और बाहर वहां से पोपट लाल गुज़र रहा था। वह चीख सुनता है और समझ जाता है कि आज बबिता की अच्छी सेवा होने वाली थी। तो हम वापस आते हैं अय्यर और बबिता के बेडरूम में जहाँ बबिता नंगी लेटी हुई है। अय्यर उसके ऊपर लेटा हुआ है, और अय्यर का पूरा लंड बबिता की चूत में घुसा हुआ है। बबिता की आंख में आंसू हैं। दर्द के मारे उसका बुरा हाल है, और उसके मुँह से चीख निकल रही है।

बबिता अय्यर से कहती हैं, “थोड़ा आराम से करो ना, मुझे बहुत दर्द हो रहा है”। पर अय्यर कहता है, “बबिता बेबी, अगर तुम्हें माँ बनना है तो दर्द तो सहना पड़ेगा, और एक बार नहीं कई बार सहना पड़ेगा”। फिर वह प्यार से बबिता के माथे पर हाथ फेरता है और उसे किस करता है, और फिर अपना लंड बबिता की चूत से बाहर निकालता है और वापिस पूरा अंदर डाल देता है। इसकी वजह से फिर से बबिता को बहुत ज्यादा दर्द होता है, और उसकी आँखों से और आंसू निकलते हैं, और मुँह से चीख निकलती जाती है, “आहहहह माँ मर गई”।

फिर अय्यर बबिता की चूचियों को अपने हाथों से दबाता है, और बबिता से कहता है कि, “बबिता बेबी, अपनी माँ को क्या याद कर रही हो। तुम्हें पैदा करने के लिए तुम्हारी माँ भी तुम्हारे बाप से इसी तरह चुदी होगी”, और बबिता की चूत में धक्के मारना शुरू कर देता है।

पर क्योंकि बबिता की चूत बहुत ज्यादा टाइट थी, इस वजह से उसमें लगातार दर्द होता ही रहता है, और बबिता की आँखों से लगातार आंसू निकल रहे थे, और उसके मुँह से लगातार चीखें निकल रही थी, और अब कमरे में बस बबिता की चीखों की आवाज गूंज रही थी, और साथ में अय्यर के धक्के की आवाज फट फट फट गूंज रही थी।

क्योंकि बबिता के चूतड़ अय्यर से टकरा रहे थे, और बबिता बस लगातार चीखें जा रही थी, “आहहहहह मर गई माँ आहहहह आहहहहह आहहहह आहहहहह आहहहहह अय्यर कुत्ते धीरे चोद मुझे आज चोद-चोद के ही मार डालेगा क्या”? पर अय्यर बिना कुछ सोचे पागलों की तरह धक्के मार रहा था। क्योंकि उसने वायग्रा की दो गोलियां खाई हुई थी। बबिता कहती हैं, “इस तरह तो तुम मुझे सुबह चलने लायक भी नहीं छोड़ोगे”।

पर अय्यर ये सब बातें नहीं सुनता। वह लगातार बबिता की चूत में धक्के मार रहा था तेजी से, और धक्के मारने की वजह से बबिता की चूत से थोड़ा सा खून भी निकल जाता है। क्योंकि घर्षण की वजह से शायद उसकी चूत में कुछ स्क्रैच लग गए थे। बबिता अब लगातार रो रही थी और चीख रही थी, “आहहहह आहहहहह माँ आहहहह आहहहहह मर गई माँ, आहहहहहह आहहहहहह”। और अय्यर धक्के मारे ही जा रहा था मिशनरी पोज़ीशन में।

फिर अय्यर बबिता को कहता है कि, “पोजिशन चेंज करते है”। और वह बबिता को कुतिया बनने को कहता है। अब बबिता कुतिया बन जाती है। उसकी दो बड़ी-बड़ी चूचियां नीचे लटक रही थी, जैसे बड़े-बड़े आम हों और बबिता का मंगलसूत्र उसकी चुचियों के बीच में ही फंसा हुआ था। हाथ बेड पर रखे हुए थे। हाथों में चूड़ियां थीं। पैरों में पायल थी। पैर कांप रहे थे दर्द के कारण।

फिर अय्यर बबिता के पीछे जाता है, और अपना लंड बबिता की चूत पर सेट करता है, और ज़ोर से धक्का मारता है। क्योंकि वह कुतिया बनी हुई थी, तो उसका लंड पूरी तरह से बबिता की चूत में चला जाता है, और लगातार बबिता की जी-स्पोट को टच कर रहा होता है। अब अय्यर बबिता की गांड को पकड़ता है और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारना शुरू कर देता है। बबिता का दर्द के कारण बहुत बुरा हाल था। वह रो रही थी।

उसकी आँखों से आंसू और मुँह से चीख निकल रही थी, “माँ मर गई आहहहहहह आहहहहह आहहहहह आहहहहह अय्यर कुत्ते तेरा बाप भी तेरी माँ की इसी तरह से चीखे निकलवाता होगा। इसीलिए तो आज मेरी चूत का भोसड़ा बनाने पर लगा हुआ है”। ये सुन कर अय्यर को गुस्सा आ जाता है, और वह ज़ोर से बबिता के चूतड़ों पर थप्पड़ मारता है पांच-छह जिसकी वजह से बबिता को और दर्द होता है, और वह रोने लगती है, और चीख तो रही ही होती है चुदाई के कारण।

यह मंजर लगभग 40 मिनट तक चला। अय्यर बबिता को चौदता रहा, और बबिता रोती और चीखती रही। पर अय्यर ने उसकी एक बात नहीं सुनी। 40 मिनट बाद अब अय्यर बबिता के अंदर अपना वीर्य छोड़ने वाला था, तो वह बबिता को कहता हैं, “बेबी क्या तुम माँ बनने के लिए तैयार हो?” बबिता कहती हैं, “हाँ प्लीज़, उसी के लिए तो इतनी देर से दर्द सह रही हूँ आईईईईईई आईईईईई”।

फिर वह तेजी से धक्के मारना शुरू करता है, और बबिता का दर्द भी बढ़ जाता है, और वह और ज़ोर से चीख रही थी। फिर अय्यर अपना पूरा वीर्य बबिता की चूत के अंदर डाल देता है और अपना लड़ धीरे-धीरे बाहर निकालता है। इससे बबिता को थोड़ी राहत मिलती है। अब बबिता बिस्तर पर नंगी ही लेट जाती है और अय्यर उसके बाजू में लेटा हुआ था। बबिता अब अय्यर के कंधे पर सिर रखती है और उससे चिपक जाती है।

अय्यर बबिता को गले लगा लेता है और कहता है, “सॉरी बेबी आज मैंने तुम्हें बहुत दर्द दिया। तुम्हें बहुत रुलाया है। तो बबिता कहती है, “कोई बात नहीं, माँ बनने के लिए इतना दर्द तो सहना ही पड़ता है”। तो अय्यर उसे कहता है कि, “एक बार सेक्स करने से तुम माँ नहीं बन जाओगी। बल्कि पूरी तरह से माँ बनने के लिए तुम्हें कई बारी इसी तरह से अच्छा सेक्स करना होगा। और खासतौर पर तुम्हारे पीरियड्स के आने से एक हफ्ता पहले सेक्स करना होगा, जिससे तुम्हारी माँ बनने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाएगी”।

बबिता ये सोच के थोड़ी चिंता में आ जाती है। क्योंकि उसे आज जितना दर्द हुआ था, उतना ही दर्द उसे कई बार और सहना पड़ेगा। पर बबिता कहती हैं कि ठीक है वह माँ बनने के लिए कुछ भी करने को तैयार है और वह कई बार इस तरह से सेक्स करेगी। अब क्योंकि बबिता को बहुत अधिक दर्द हो रहा था खून भी निकला था, तो अय्यर बबिता की चूत में बर्फ़ लगाता है। इससे बबिता को जलन में थोड़ी राहत मिलती है, और वह शांत हो जाती है। फिर बबिता और अय्यर नंगे ही एक-दूसरे को चिपक के सो जाते है।

अब जब सुबह का वक्त होता है, अलार्म बजता है। बबिता जैसे ही बेड से उठने की कोशिश करती है, तो उसके चूतड़ों में और कमर के निचले भाग में बहुत ज्यादा दर्द होता है। क्योंकि उसने रात को इतने लंबे समय तक चुदाई जो की थी। वह ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। तो अय्यर उसे पकड़ कर बाथरूम तक ले जाता है। बबिता को इतना दर्द हो रहा था, कि वह कुछ भी नहीं कर पा रही थी। इसलिए अय्यर बबिता के साथ ही बाथरूम के अंदर चला जाता है।

अब क्योंकि उन दोनों ने कपड़े नहीं पहने हुए थे, तो अय्यर बबिता को पहले टॉयलेट सीट पर बिठा देता है। बबिता फ्रेश होती है। फिर अय्यर उसे उठाता है, और खुद भी फ्रेश हो जाता है। फिर वह गर्म पानी का शावर ओन करता है और बबिता को नहलाता है, और साथ में खुद भी नहा लेता है। नहाने के बाद वह खुद को और बबिता को तौलिए से पोंछता है और फिर वह बबिता की चूत में दवाई लगा देता है, और साथ में उसे पेन-किलर भी देता है ताकि उसका दर्द ठीक हो जाए।

अब वह बबिता को कपड़े पहनाता है। वह बबिता को एक नाइटी ही पहनता है। बबिता ने अंदर पैन्टी और ब्रा भी नहीं पहनी थी। उसके बाद वह बाहर से खाना ऑर्डर करता है। अब क्योंकि बबिता चल नहीं पा रही थी, तो वह बबिता को गोद में उठा कर बेड पे बिठा देता है, उसे चद्दर उड़ाता है, और अपने हाथों से नाश्ता खिलाता है। जब अय्यर इस तरह से बबिता की सेवा करता है, यह देख कर बबिता को बहुत अच्छा लगता है, और वह अय्यर से कहती हैं कि, “तुम बहुत अच्छे हो। तुम मेरा कितना ख्याल रखते हो”।

तो अय्यर कहता है, “इसमें कौन सी बड़ी बात है बबिता? बेबी आई लव यू ना”। तो बबिता भी कहती है, “आई लव यू टू अय्यर”। फिर बबिता को कुछ अच्छा नहीं लग रहा था। उसे उल्टी जैसा महसूस हो रहा था। तो बबिता अय्यर से कहती है, कही वो एक रात में ही तो प्रेग्नेंट नहीं हो गई ना। तो अय्यर कहता है, “ऐसा नहीं होता बेबी, इतनी जल्दी प्रेग्नेंट नहीं हो सकती तुम। उसमें अभी थोड़ा टाइम लगेगा”। फिर वह बबिता का टेम्परेचर चेक करता है तो पता चलता है कि बबिता को हल्का बुखार था, जिसके कारण उसे उल्टी जैसा महसूस हो रहा था।

फिर वह बबिता को बुखार की दवाई देता है, और कहता है कि वह आज ऑफिस नहीं जाएगा, और पूरा दिन बबिता का ख्याल रखेगा। यह सुन कर बबिता बहुत खुश हो जाती है पर तभी अय्यर को एक फ़ोन आता है जो कि उसके ऑफिस से था, और वह उससे कहते हैं कि उसे आज ऑफिस आना ही पड़ेगा। क्योंकि एक बहुत इम्पोर्टेन्ट मीटिंग है। तो अय्यर कहता है सॉरी बेबी, उसे ऑफिस जाना पड़ेगा। तो बबिता भी कहती है, “ठीक है चले जाओ, मैं अपना ख्याल रख लूँगी”। पर बबिता थोड़ी उदास होती है। अय्यर नाश्ता करके चला जाता है, और बबिता दवाई लेकर आराम ही कर रही थी।

दोपहर के समय में उसकी डोरबेल बजती है। वह धीरे-धीरे लंगड़ाते हुए दरवाजे तक जाती है, और दरवाजा खोलती है तो सामने अंजलि खड़ी थी। अंजलि बबिता की ऐसी हालत देख कर चौंक जाती है। क्योंकि बबिता ने सिर्फ एक पिंक कलर की नाइटी पहनी हुई थी। उसके अंदर ब्रा और पेंटी भी नहीं थे। ब्रा के ना होने की वजह से बबिता की चूचियां साफ-साफ दिख रही थी, और उनके ऊपर मंगलसूत्र की वजह से लगा कट भी दिख रहा था।

साथ में ही बबिता की टांगें भी कांप रही थी दर्द की वजह से। वह ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थी। इसलिए वह दरवाजे का सहारा लेकर खड़ी थी। उसका होठ भी फटा हुआ था। अंजलि समझ नहीं पा रही थी कि बबिता के साथ क्या हुआ। फिर बबिता अंजलि को अंदर बुलाती है और दरवाजा बंद कर लेती है। अब वो दोनों सोफे पर बैठी थी।

तब अंजलि बबिता से पूछती है, “क्या हुआ बबिता जी, आपकी ऐसी हालत क्यों है”? तो बबिता कहती है कि उसने अय्यर से बच्चे के बारे में बात की और अय्यर ने हाँ कह दी है, और कल रात अय्यर ने बच्चे के लिए उसे चोद दिया बुरी तरह से। बबिता उसे बताती है कि किस तरह कल रात अय्यर ने उसका बैंड बाजा सब बजा दिया, और उसकी क्या हालत हो चुकी थी।

बबिता अंजलि से कहती है कि उसकी चूत में बहुत ज्यादा जलन हो रही थी, और दर्द भी हो रहा था। तो अंजलि कहती है कि क्या वह देख सकती है। बबिता पहले थोड़ा शर्माती है पर क्योंकि अंजलि बबिता की बहुत अच्छी दोस्त थी, और कल उन दोनों ने साथ में ही तय किया था कि वो प्रेग्नेंट होंगी। तो बबिता कहती है, “ठीक है” और वह अपनी नाइटी खोल देती है। अंजलि उनकी चूत का हाल देखती है तो वह दंग रह जाती है।

बबिता की चूत का भोंसड़ा बना हुआ था, और बबिता के चूतड़ों पर अय्यर के थप्पड़ों के निशान थे जो बहुत जल रहे थे। फिर अंजलि पहले उन निशानों पर और बबिता की चूत में और बबिता की चूचियों पर बर्फ़ लगाती है जिससे बबिता को राहत मिलती है। फिर वह उन पर एलोवीरा जैल लगाती है, तथा साथ में बबिता को एक पेन किलर भी देती है, और कहती हैं कि अब बबिता को आराम करना चाहिए। फिर वह वहाँ से चली जाती है, और बबिता भी अपने कमरे में जाकर आराम करती है।

भाई-बहन, एक दूजे के सहारे

सुरिंदर छोटे से गांव का रहने वाला है. उसके माँ बाप मर चुके हैं गाँव में बस उसके माँ बाप और बहन ही थे गांव में घोर गरीबी के चलते उसे 15 साल की ही उम्र अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ कर दिल्ली आना पड़ा. दिल्ली आते ही उसे एक कारखाने में नौकरी मिल गयी. उसने तुरंत ही अपनी लगन एवं इमानदारी का इनाम पाया और उसकी तरक्की सिर्फ एक साल में ही सुपरवाइजर में हो गयी.

अब उसे ज्यादा वेतन मिलने लगा था. अब वो अपने गाँव अपने माँ बाप और बहन से मुलाक़ात करने एवं उन्हें यहाँ लाने की सोच रहा था. तभी एक दिन उसके पास उसकी बहन का फोन आया कि उसके माँ बाप का एक्सिडेंट हो गया है. सुरिंदर जल्दी से अपने गाँव के लिए छुट्टी ले कर निकला. दिल्ली से गाँव जाने में उसे तीन दिन लग गए. मगर दुर्भाग्यवश वो ज्यों ही अपने घर पहुंचा उसके अगले दिन ही उसके माँ बाप की मृत्यु हो गयी. होनी को कौन टाल सकता था. माँ बाप के गुजरने के बाद सुरिंदर अपनी बहन को दिल्ली ले जाने की सोचने लगा क्यों कि यहाँ वो बिलकुल ही अकेली रहती और गाँव में कोई खेती- बाड़ी भी नही थी जिसके लिए उसकी बहन गाँव में रहती. पहले तो उसकी बहन अपने गाँव को छोड़ना नही चाहती थी मगर भाई के समझाने पर वो मान गयी और भाई के साथ दिल्ली चली आयी. उसकी बहन का नाम सुगंधा है. उसकी उम्र 20-21 साल की है. गाँव में मनोज नाम के लड़के से उसका चक्कर चला था। वो लड़का सुगंधा को चोद कर भाग गया था।

सुरिंदर ने दिल्ली में एक छोटा सा कमरा किराया पर ले रखा था. इसमें एक किचन और बाथरूम अटैच था. उसके जिस मकान में यह कमरा ले रखा था उसमे चारों तरफ इसी तरह के छोटे छोटे कमरे थे. वहां पर लगभग सभी बाहरी लोग ही किराए पर रहते थे. इसलिए किसी को किसी से मतलब नही था. सुरिंदर का कमरे में सिर्फ एक खिडकी और एक मुख्य दरवाजा था. सुगंधा पहली बार अपने गाँव से बाहर निकली थी. दिल्ली की भव्यता ने उसकी उसकी आँखे चुंधिया दी. जब सुरिंदर अपनी बहन सुगंधा को अपने कमरे में ले कर गया तो सुगंधा को वह छोटा सा कमरा भी आलिशान लग रहा था. क्यों कि वो आज तक किसी पक्के मकान में नही रही थी. वो गाँव में एक छोटे से झोपड़े में अपना जीवन यापन कर रही थी. उसे उसके भाई ने अपने कमरे के बारे में बताया . किचन और बाथरूम के बारे में बताया. यह भी बताया कि यहाँ गाँव कि तरह कोई नदी नहीं है कि जब मन करे जा कर पानी ले आये और काम करे. यहाँ पानी आने का टाइम रहता है. इसी में अपना काम कर लेना है. पहले दिन उसने अपनी बहन को बाहर ले जा कर खाना खिलाया. सुगंधा के लिए ये सचमुच अनोखा अनुभव था. वो हिंदी भाषा ना तो समझ पाती थी ना ही बोल पाती थी. वो परेशान थी . लेकिन ने उसे समझाया कि वो धीरे धीरे सब समझने लगेगी.

रात में जब सोने का समय आया तो दोनों एक ही बिस्तर पर सो गए. सुरिंदर का बिस्तर डबल था. इसलिए दोनों को सोने में परेशानी तो नही हुई. परन्तु सुरिंदर तो आदतानुसार किसी तरह सो गया लेकिन पहाड़ों पर रहने वाली सुगंधा को दिल्लीकी उमस भरी रात पसंद नही आ रही थी.वो रात भर करवट लेती रही. खैर! सुबह हुई. सुरिंदर अपने कारखाने जाने केलिए निकलने लगा. सुगंधा ने उसके लिए नाश्ता बना दिया. सुरिंदर ने सुगंधा को सभी जरुरी बातें समझा कर अपने कारखाने चला गया. सुगंधा ने दिन भर अपने कमरे की साफ़ सफाई की एवं कमरे को व्यवस्थित किया.शाम को जब सुरिंदर वापस आया तो अपना कमरा सजा हुआ पाया तो बहुत खुश हुआ. उसने सुगंधा को बाजार घुमाने लेगया और रात का खाना भी बाहर ही खाया.

सुगंधा अब धीरे धीरे अपने गाँव को भूलने लगी थी. अगले 3 -4 दिनों में सुगंधा अपने माँ बाप की यादों से बाहर निकलने लगीथी और अपने आप को दिल्ली के वातावरण अनुसार ढालने की कोशिश करने लगी. सुरिंदर सुगंधा पर धीरे धीरे हावी होने लगा था. सुरिंदर जो कहता सुगंधा उसे चुप चाप स्वीकारकरती थी. क्यों कि वो समझती थी कि अब उसका भरण – पोषण करने वाला सिर्फ उसका भाई ही है. सुरिंदर भी अब सुगंधा का अभिभावक के तरह व्यवहार करने लगा था.

सुरिंदर रात में सिर्फ अंडरवियर पहन कर सोता था. एक रात में उसकी नींद खुली तो वो देखता है कि उसकी बहन बैठी हुई.

सुरिंदर – क्या हुआ? सोती क्यों नहीं?

सुगंधा – इतनी गरमी है यहाँ.

सुरिंदर – तो इतने भारी भरकम कपडे क्यों पहन रखे हैं?

सुगंधा – मेरे पास तो यही कपडे हैं.

सुरिंदर – गाउन नहीं है क्या?

सुगंधा – नहीं.

सुरिंदर – तुमने पहले मुझे बताया क्यों नहीं? कल मै लेते आऊँगा.

अगले दिन सुरिंदर अपनी बहन के लिए एक बिलकूल पतली सी नाइटी खरीद कर लेते आया. ताकि रात में बहन को आराम मिल सके. जब उसने अपनी बहन को वो नाइटी दिखाया तोवो बड़े ही असमंजस में पड़ गयी. उसने आज तक कभी नाइटी नही पहनी थी. लेकिन जब सुरिंदर ने बताया कि दिल्ली में सभी औरतें नाइटी पहन कर ही सोती हैं तो उसने पूछा कि इसे पहनूं कैसे? सुरिंदर ने कहा – अन्दर के सभी कपडे खोल दो. और सिर्फ नाइटी पहनलो. बेचारी सुगंधा ने ऐसा ही किया. उसने किचन में जा कर अपनी पहले के सभी कपडे खोले और सिर्फ नाइटी पहनली. नाइटी काफी पतली थी. सुगंधा का जवान जिस्म अभी 20 साल का ही था. उस पर पहाड़ी औरत का जिस्म काफी गदराया हुआ था. गोरी और जवान सुगंधा के मुम्में बड़े बड़े थे. गाउन का गला इतना नीचे था कि सुगंधा के मुम्में का निप्पल सिर्फ बाहर आने से बच रहा था.

सुगंधा ने गाउन को पहन कर कमरे में आयी और सुरिंदर से कहा – देख तो,ठीक है?

सुरिंदर ने अपनी बहन को इतने पतले से नाइटी में देखा तो उसके होश उड़ गए. सुगंधा का सारा जिस्म का अंदाजा इस पतले से नाइटी से साफ़ साफ़ दिख रहा था. सुगंधा के आधे मुम्में तो बाहर दिख रहे थे. सुरिंदर ने तो कभी ये सोचा भी नही था कि उसकी बहन के मुम्में इतनी गोरे और बड़े होंगे. वो बोला – अच्छी है. अब तू यही पहन कर सोना. देखना गरमी नहीं लगेगी

उस रात सुगंधा सचमुच आराम से सोई. लेकिन सुरिंदर का दिमाग बहन के बदन पर टिक गया था. वो आधी रात तक अपनी बहन के बदन के बारे में सोचता रहा. वो अपनी बहन के बदन को और भी अधिक देखना चाहने लगा. उसने उठकर कमरे का लाईट जला दिया. उसकी बहन का गाउन उसकी जांघ तक चढ़ चुका था. जिस से सुगंधा की गोरी चिकनी जांघ सुरिंदर को दिख रही थी. सुरिंदर ने गौर से सुगंधा के मुम्में की तरफ देखा. उसने देखा कि सुगंधा के मुम्में का निप्पल भी साफ़ साफ़ पता चल रहा है. वो और भी अधिक पागल हो गया. उसका लंड अपनी बहन के बदन को देख कर खड़ा हो गया. वो बाथरूम जा कर वहां से अपनी सोई हुई बहन के बदन को देख देख कर मुठ मारने लगा. मुठ मारने पर उसे कुछ शान्ति मिली. और वापस कमरे में आ कर लाईट बंद कर के सो गया. सुबह उठा तो देखा सुगंधा फिर से अपने पुराने कपडे पहन कर घर का काम कर रही है. लेकिन उसके दिमाग में सुगंधा का बदन अभी भी घूम रहा था.

उसने कहा – सुगंधा, रात कैसी नींद आयी?

सुगंधा – कल बहुत ही अच्छी नींद आयी. गाउन पहनने से काफी आराम मिला.

सुरिंदर – लेकिन, मैंने तो सिर्फ एक ही गाउन लाया. आगे रात को तू क्या पहनेगी?

सुगंधा – वही पहन लुंगी.

सुरिंदर – नहीं, एक और लेता आऊँगा. कम से कम दो तो होने ही चाहिए.

सुगंधा – ठीक है, जैसी तेरी मर्जी.

सुरिंदर शाम कारखाने से घर लौटते समय बाज़ार गया और जान बुझ कर झीनी कपड़ों वाली गाउन वो भी बिना बांह वाली खरीद कर लेता आया.

उसने शाम में अपनी बहन को वो गाउन दिया और कहा आज रात में सोते समय यही पहन लेना.

रात में सोते समय जब सुगंधा ने वो गाउन पहना तो उसके अन्दर सिवाय पेंटी के कुछ भी नही पहना. उसका सारा बदन उस पारदर्शी गाउन से दिख रहा था. यहाँ तक कि उसकी पेंटी भी स्पष्ट रूप से दिख रहे थे. उसका गोरा गोरा मुम्मा और निप्पल तो पूरा ही दिख रहा था. उस गाउन को पहन कर वो सुरिंदर के सामने आयी. सुरिंदर अपनी बहन के बदन को एकटक देखता रहा.

सुगंधा- देख तो कैसा है, मुझे लगता है कि कुछ पतला कपडा है.

सुरिंदर – अरे सुगंधा, आजकल यही फैशन है. तू आराम से पहन.

अचानक उसकी नजारा अपनी बहन के कांख के बालों पर चली गयी. कटी हुई बांह वाली गाउन से सुगंधा के बगल वाले बाल बाहर निकल गए थे.

सुरिंदर ने आश्चर्य से कहा – सुगंधा , तू अपने कांख के बाल नही बनाती?

सुगंधा – नहीं आज तक नहीं बनाया.

सुरिंदर – अरे सुगंधा, आजकल ऐसे कोई नहीं रखता.

सुगंधा – मुझे तो बाल बनाना भी नही आता.

सुरिंदर – ला , मै बना देता हूँ.

सुगंधा आजकल सुरिंदर के किसी बात का विरोध नहीं करती थी. सुरिंदर ने अपना शेविग बॉक्स निकाला और रेजर निकाल कर ब्लेड लगा कर तैयार किया. उसने सुगंधा को कहा- अपने हाथ ऊपर कर. उसकी बहन ने अपनी हाथ को ऊपर किया और सुरिंदर ने अपनी बहन के कांख के बाल को साफ़ करने लगा. साफ़ करते समय वो जान बुझ कर काफी समय लगा रहा था. और हाथ से अपनी बहन के कांखको बार बार छूता था. इस बीच इसका लंड पानी पानी हो रहा था. वो तो अच्छा था कि उसने अन्दर अंडरवियर पहन रखा था. किसी तरह से सुरिंदर ने कांपते हाथों से अपनी बहन के कांख के बाल साफ़ किये.

बाल साफ़ करने के बाद सुगंधा तो सो गयी. मगर सुरिंदर को नींद ही नहीं आ रही थी. वो अपनी बहन की बगल में लेटे हुए अँधेरे में अपने अंडरवियर को खोल कर अपने लंड से खेल रहा था.अचानक उसे कब नींद आ गयी. उसे ख़याल भी नहीं रहा और उसका अंडरवियर खुला हुआ ही रह गया. सुबह होने पर रोज़ कि तरह सुगंधा पहले उठी तो वो अपने भाई को नंगा सोया हुआ देख कर चौक गयी. वो सुरिंदर के लंड को देखकर आश्चर्यचकित हो गयी. उसे पता नहीं था कि उसके भाई का लंड अब जवान हो गया है और उस पर बाल भी हो गए है. वो समझ गयी कि उसका भाई अब जवान हो गया है. उसके लंड का साइज़ देख कर भी वो आश्चर्यचकित थी क्यों कि उसने आज तक अपने यार मनोज के लंड के सिवा कोई और जवान लंड नहीं देखा था. मनोज का लंड इस से छोटा ही था. हालांकि उसके मन में कोई बुरा ख़याल नही आया और सोचा कि शायद रात में गरमी के मारे इसने अंडरवियर खोल दिया होगा. वो अभी सोच ही रही थी कि अचानक सुरिंदर की आँख खुल गयी और उसने अपने आप को अपनी बहन के सामने नंगा पाया. वो थोडा शर्मिंदा हुआ लेकिन आराम से तौलिया को लपेटा और कहा – सुगंधा, चाय बना दे न.

सुगंधा थोडा सा मुस्कुरा कर कहा – अभी बना देती हूँ.

सुरिंदर ने सोचा – चलो सुगंधा कम से कम नाराज तो नहीं हुई.

लेकिन उसकी हिम्मत थोड़ी बढ़ गयी. अगली ही रात को सुरिंदर ने सोने के समय जान बुझ कर अपना अंडरवियर पूरी तरह खोल दिया और एक हाथ लंड पर रख सो गया. सुबह सुगंधा उठी तो देखती है कि उसका भाई लंड पर हाथ रख कर सोया हुआ है. उसने सुरिंदर को कुछ नही कहा और वो कमरे को साफ़ सुथरा करने लगी. उसने सुरिंदर के लिए चाय बनाई और सुरिंदर को जगाया. सुरिंदर उठा तो अपने आप को नंगा पाया ,.

सुरिंदर थोडा झिझकते हुए कहा – पता नहीं रात में अंडरवियर कैसे खुल गया था.

सुगंधा – तो क्या हुआ? यहाँ कौन दुसरा है? मै क्या तुझे नंगा नहीं देखी हूँ? बहन के सामने इतनी शर्म कैसी?

सुरिंदर – वो तो मेरे बचपन में ना देखी हो. अब बात दूसरी है.

सुगंधा – पहले और अब में क्या फर्क है? यही ना अब थोडा बड़ा हो गया है और थोडा बाल हो गया है , और क्या? अब मेरा भाई जवान हो गया है. लेकिन बहन के सामने शर्माने की जरुरत नहीं.

सुरिंदर समझ गया कि सुगंधा को उसके नंगे सोने पर कोई आपत्ति नहीं है.

अगले दिन रविवार है. शाम को सुरिंदर ने आधा किलो मांस लाया और सुगंधा ने उसे बनाया . दोनों ने ही बड़े ही प्रेम से मांस और भात खाया. सुगंधा अब पूरी तरह से सुरिंदर के अधीन हो चुकी थी.

सुगंधा अपने झीनी गाउन को पहन कर बिस्तर पर आ गयी. सुरिंदर वहां तौलिया लपेटे लेटा हुआ था. सुरिंदर ने अपनी जेब से सिगरेट निकाला और सुगंधा से माचिस लाने को कहा. सुगंधा ने चुप- चाप माचिस ला कर दे दिया. सुरिंदर ने सुगंधा के सामने ही सिगरेट सुलगाई और पीने लगा. सुगंधा ने कुछ नही कहा क्यों कि उसके विचार से सिगरेट पीने वाले लोग अमीर लोग होते हैं.

सुरिंदर – सुगंधा, तू सिगरेट पीयेगी?

सुगंधा – नहीं रे .

सुरिंदर – अरे पी ले, मांस भात खाने केबाद सिगरेट पीने से खाना जल्दी पचता है. कहते हुए अपनी सिगरेट सुगंधा को दे दिया. और खुद दुसरा सिगरेट जला दिया. सुगंधा ने सिगरेट से ज्यों ही कश लगाया वो खांसने लगी.

सुरिंदर ने कहा – आराम से सुगंधा. धीरे धीर पी. पहले सिर्फ मुह में ले. धुंआ अन्दर मत ले. सुगंधा ने वैसा ही किया. 3 -4 कश के बाद वो सिगरेट पीने जान गयी. आज वो बहुत खुश थी. उसका गोरा बदन उसके काले झीने गाउन से साफ़ झलक रहा था.

सुरिंदर – कैसा लग रहा है सुगंधा?

सुगंधा – कुछ पता नहीं चल रहा है. लेकिन धुआं छोड़ने में अच्छा लगता है.

सुरिंदर हंसने लगा. कुछ दिन यूँ ही और गुजर गए. सुगंधा अपने भाई से धीरे धीरे खुलने लगी थी. सुरिंदर भी अब रोज़ सुबह नंगा ही पाया जाता था. सुरिंदर ने अब शर्माना सचमुच छोड़ दिया था. सुरिंदर ने अपनी बहन को ब्यूटी पार्लर ले जा कर मेकअप और हेयर डाई भी करवा दिया था. वह उसके मेक-अप के लिए लिपस्टिक, पाउडर क्रीम आदि भी लेता आया था. सुगंधा दिन ब दिन और भी खुबसूरत होती जा रही थी.

एक रात सुरिंदर ने सिगरेट पीते हुए अपनी बहन को सिगरेट दिया. सुगंधा भी सिगरेट के काश ले रही थी. सुगंधा काला वाला झीने कपडे वाला पारदर्शी गाउन पहन रखा था. उसका गोरा बदन उसके काले झीने गाउन से साफ़ झलक रहा था.

सुरिंदर – सुगंधा एक बात कहूँ.

सुगंधा – हाँ बोल.

सुरिंदर – तू रोज़ गाउन पहन के क्यों सोती है? क्या तेरे पास ब्रा और पेंटी नहीं हैं?

सुगंधा – हाँ हैं, लेकिन तेरे सामने पहनने में शर्म आती है.

सुरिंदर – जब मै तेरे सामने नही शर्माता तो तू मेरे सामने क्यों शर्माती हो? इसमें शर्माने की क्या बात है? कभी कभी वो पहन कर भी सोना चाहिए. ताकि पुरे शरीर को हवा लग सके. दिल्ली में शरीर में हवा लगाना बहुत जरुरी है नहीं तो यहाँ के वातावरण में इतना अधिक प्रदुषण है कि बदन पर खुजली हो जायेंगे. देखती हो मै तो यूँ ही बिना कपडे के सो जाता हूँ.

सुगंधा – तो अभी पहन लूँ?

सुरिंदर – हाँ बिलकूल.

सुगंधा अन्दर गयी और अपना गाउन उतार कर एक पुरानी ब्रा पहन कर बाहर आ गयी. पुरानी पेंटी तो उसने पहले ही पहन रखी थी. सुगंधा को ब्रा और पेंटी में देख सुरिंदर का माथा खराब हो गया. वो कभी सोच भी नहीं सकता था कि उसकी बहन इतनी जवान है.उसका लंड खड़ा हो गया. उसके तौलिया में उसका लंड खड़ा हो रहा था लेकिन उसने अपने लंड को छुपाने की जरुरतनहीं समझी.

वो बोला – हाँ , अब थोड़ी हवा लगेगी. तेरे पास नयी ब्रा और पेंटी नहीं है?

सुगंधा – नहीं. यही है जो गाँव के हाट में मिलता था.

सुरिंदर – अच्छा कोई बात नहीं, मै कल ला दूंगा.

सुगंधा ने लाईट ऑफ कर दिया, लेकिन सुरिंदर की आँखों में नींद कहाँ? थोड़ी देर में जब उसे यकीं हो गया कि सुगंधा सो गयी है तो उसने अपना तौलिया निकाला और अपने खड़े लंड को मसलने लगा. सुगंधा के चूत और चूची को याद कर कर के उसने बिस्तर पर ही मुठ मार दिया. सारा माल उसके बदन पर एवं बिस्तर पर जा गिरा. एक बार मुठ मारने से भी सुरिंदर का जी शांत नहीं हुआ. 10 मिनट के बाद उसने फिर से मुठ मारा. इस बार मुठ मारनेके बाद उसे गहरी नींद आ गयी. और वो बेसुध हो कर सो गया.

सुबह होने पर सुगंधा ने देखा कि सुरिंदर रोज़ की तरह नंगा सोया है और आज उसके बदन एवं बिस्तर पर माल भी गिरा है. उसे ये पहचानने में देर नहीं हुई कि ये सुरिंदर का वीर्य है. वो समझ गयी कि रात में उसने मुठ मारा होगा. लेकिन वो जरा भी बुरा नहीं मानी. वो समझती है कि उस का भाई जवान है, एवं समझदार है इसलिए वो जो करता है वो सही है. वो कपडे पहन कर सुरिंदर के लिए चाय बनाने चली गयी. तभी सुरिंदर भी उठ गया. वो उठ कर बैठा ही था कि उसकी बहन चाय लेकर आ गयी. सुरिंदर अभी तक नंगा ही था.

सुगंधा ने कहा – देख तो, तुने ये क्या किया? जा कर बाथरूम में अपना बदन साफ़ कर ले. मै बिछावन साफ़ कर लुंगी.

सुरिंदर बिना कपडे पहने ही बाथरूम गया. और अपने बदन पर से अपना वीर्य धो पोछ कर वापस आया तब उसने तौलिया लपेटा. तब तक सुगंधा ने वीर्य लगे बिछवान को हटा कर नए बिछावन को बिछा दिया.

उस दिन रविवार था. सुरिंदर बाज़ार गया और अपनी बहन के लिए बिलकुल छोटी सी ब्रा और पेंटी खरीद कर लाया. ब्रा और पेंटी भी ऐसी कि सिर्फ नाम के कपडे थे उस पर. पूरी तरह जालीदार ब्रा और पेंटी लाया. शाम में उसने अपनी सुगंधा को वो ब्रा और पेंटी दिए और रात में उसे पहनने को बोला. रात को खाना खाने के बाद सुरिंदर ने सिगरेट सुलगाई और उधर उसकी बहन ने नयी ब्रा और पेंटी पहनी. उसे पहनना और ना पहनना दोनों बराबर था. क्यों कि उसके चूत और मुम्मों का पूरा दर्शन हो रहा था. लेकिन सुगंधा ने सोचा जब उसके भाई ने ये पहनने को कहा है तो उसे तो पहनना ही पड़ेगा. उसे भी अब सुरिंदर से कोई शर्म नही रह गयी थी. पेंटी तो इंतनी छोटी थी कि चूत के बाल बिलकुल बाहर थे. सिर्फ चूत एक जालीदार कपडे से किसी तरह ढकी हुई थी. ब्रा का भी वही हाल था. सिर्फ निप्पल को जालीदार कपडे ने कवर कियाहुआ था लेकिन जालीदार कपड़ा से सब कुछ दिख रहा था. उसे पहन कर वो सुरिंदर के सामने आयी. सुरिंदर को तो सिगरेट का धुंआ निगलना मुश्किल हो रहा था. सिर्फ बोला – अच्छी है.

सुगंधा ने कहा – कुछ छोटी है. फिर उसने अपनी चूत के बाल की तरफ इशारा किया और कहा – देख न बाल भी नहीं ढका रहें हैं.

सुरिंदर – ओह, तो क्या हो गया. यहाँ मेरे सिवा और कौन है? इसमें शर्म की क्या बात है. खैर! मेरे शेविंग बॉक्स से रेजर ले कर नीचे वाले बाल बना लो.

सुगंधा – मुझे नही आते हैं शेविंग करना. मुझे डर लगता है.

सुरिंदर – इसमें डरने की क्या बात है?

सुगंधा – कहीं कट जाए तो?

सुरिंदर – देख सुगंधा, इसमें कुछ भी नहीं है. अच्छा , ला मै ही बना देता हूँ.

सुगंधा – हाँ, ठीक है.

सुगंधा ने उसका शेविग बॉक्स में से रेजर निकाला और सुरिंदर को थमा दिया. सुरिंदर ने उसके चूत के बाल पर हाथ घसा और उसे धीरे धीरे रेज़र से साफ़ किया.

उसका लंड तौलिया के अन्दर तम्बू के तरह खड़ा था. किसी तरह उसने अपने हाथ से चूत के बाल साफ़ किया. फिर उसने उसने अपनी बहन को सिगरेट दिया और खुद भी पीने लगा. वो लगातार अपनी बहन के चूची और चूत को ही देख रहा था और अपने तौलिये के ऊपर लंड को सहला रहा था.

सुरिंदर ने कहा – अब ठीक है. चूत के बाल साफ़ करने के बाद तू एकदम सेक्सी लगती है रे.

सुगंधा ने हँसते हुए कहा – चल हट बदमाश, सोने दे मुझे. खुद भी सो जा.कल तुझे कारखाना भी जाना है ना.

सुरिंदर ने अपना तौलिया खोला और खड़े लंड को सहलाते हुए कहा – देख ना सुगंधा, तुझे देख कर मेरा लंड भी खडा हो गया है.

सुगंधा ने कहा – वो तो तेरा रोज ही खड़ा होता है. रोज की तरह आज भी मुठ मार ले.

सुरिंदर ने हँसते हुए कहा – ठीक है. लेकिन आज तेरे सामने मुठ मारने का मन कर रहा है.

सुगंधा ने कहा – ठीक है. आजा बिस्तर पर लेट जा और मेरे सामने मुठ मार ले. मै भी तो जरा देखूं कि मेरा जवान भाई कैसे मुठ मारता है?

सुगंधा और सुरिंदर बिस्तर पर लेट गए. सुरिंदर ने बिस्तर पर अपनी बहन के बगल में लेटे लेटे ही मुठ मारना शुरू कर दिया. सुगंधा अपने भाई को मुठ मारते हुए देख रही थी. पांच मिनट मुठ मारने के बाद सुरिंदर के लंड ने माल निकालने का सिग्नल दे दिया. वो जोर से आवाज़ करने लगा.उसने झट से अपनी बहन को एक हाथ से लपेटा और अपने लंड को उसके पेट पर दाब कर सारा माल सुगंधा के पेट पर निकाल दिया. ये सब इतना जल्दी में हुआ कि सुगंधा को संभलने का मौक़ा भी नही मिला. जब तक वो संभलतीऔर समझती तन तक सुरिंदर का माल उसके पेट पर निकलना शुरू हो गया था. सुगंधा भी अपने भाई को मना नही करना चाहती थी. उसने आराम से अपने शरीर पर अपने भाई को अपना माल निकालने दिया. थोड़ी देर में सुरिंदर का माल की खुशबु रूम में फ़ैल गयी. सुगंधा का पेंटी भी सुरिंदर के माल से गीला हो गया. थोड़ी देर में सुरिंदर शांत हो गया. और अपनी बहन के बदन पर से हट गया. लेकिन थोड़ी ही देर में उसने अपनी बहन के शरीर को अच्छी तरह दबा कर देख चुका था. सुगंधा भी गर्म हो चुकी थी. उसने भीअपने पुरे कपडे उतारे और बिस्तर पर ही मुठ मारने लगी. उसने भी अपना माल निकाल कर शांत होने पर नींद मारी. सुबह होने पर सुगंधा ने आराम से बिछावन को हटाया और नया बिछावन बिछा दिया.

अगली रात को लाईट ऑफ कर दोनों बिस्तर पर लेट गए. सुगंधा ने सुरिंदर के पसंदीदा ब्रा और पेंटी पहन रखी थी. आज सुरिंदर अपनी बहन का इम्तहान लेना चाहता था. उसने अपनी टांग को पीछे से अपनी बहन की जांघ पर रखा. उसकी बहन उसकी तरफ पीठ कर के लेती थी. सुगंधा ने अपने नंगी जांघ पर सुरिंदर के टांग का कोई प्रतिरोध नहीं किया. सुरिंदर की हिम्मत और बढी.वो अपनी टांगो से अपनी बहन के चिकने जाँघों को घसने लगा. उसका लंड खडा हो रहा था. उसने एक हाथ को सुगंधा के पेट पर रखा. सुगंधा ने कुछ नही कहा. सुरिंदर धीरे धीरे सुगंधा में पीछे से सट गया. उसने धीरे धीरे अपना हाथ अपनी बहन के पेंटी में डाला और उसके गांड को घसने लगा. धीरे धीरे उसने अपनी बहन के पेंटी को नीचे की तरफ सरकाने लगा.

पहले तो सुगंधा आसानी से अपनी पेंटी खोलना नही चाहती थी मगर सुरिंदर ने कहा – सुगंधा ये पेंटी खोल ना.आज तू भी पूरी तरह से पूरी तरह से नंगी सोएगी. सुगंधा भी यही चाहती थी. उसने अपनी कमर को थोड़ा ऊपर किया जिस से कि सुरिंदर ने उसके पेंटी को उसके कमर से नीचे सरका दिया और पूरी तरह से खोल दिया. अब सुगंधा सिर्फ ब्रा पहने हुए थी. सुरिंदर ने उसके ब्रा के हुक को पीछे से खोल दिया और सुगंधा ने ब्रा को अपने शरीर से अलग कर दिया. अब वो दोनों बिलकूल ही नंगे थे. सुरिंदर ने अपनी बहन को पीछे से पकड़ कर अपने लंड को अपनी बहन के गांड में सटाने लगा. उसका तना हुआ लंड सुगंधा की गांड में चुभने लगा. सुगंधा को मज़ा आ रहा था. उसकी भी साँसे गरम होने लगी थी. जब सुगंधा ने कोई प्रतिरोध नही किया तो सुरिंदरने अपनी बहन के बदन पर हाथ फेरना चालु कर दिया. उसने अपना एक हाथ सुगंधा के मुम्मों पर रख उसे दबाने लगा.

उसने सुगंधा से कहा – सुगंधा, मेरा मुठ मारने का मन कर रहा है.

सुगंधा – मार ना. मैंने मना किया है क्या?

सुरिंदर – आज तू मेरा मुठ मार दे ना सुगंधा.

सुगंधा – ठीक है . कह कर वो सुरिंदर की तरफ पलटी और उसके लंड को पकड़ ली. खुद सुगंधा को अहसास नही था की सुरिंदर का लंड इतना जबरदस्त है. वो बड़े ही प्यार से सुरिंदर का लंड सहलाने लगी. सुरिंदर तो मानो अपने सुध बुध ही खो बैठा. वो अपने आप को जन्नत में पा रहा था. सुगंधा अँधेरे में ही सुरिंदर का मुठ मारने लगी. सुगंधा भी मस्त हो गयी.

वो बोली – रुक , आज मै तेरा अच्छी तरह से मुठ मारती हूँ. कह कर वो नीचे झूकी और अपने भाई सुरिंदर का लंड को मुह में ले ली. सुरिंदर को जबये अहसास हुआ कि उसकी बहन ने उसके लंड को मुह में ले लिया है तो वो उत्तेजना के मारे पागल होने लगा. उधर सुगंधा सुरिंदर के लंड को अपने कंठ तक भर कर चूस रही थी. थोड़ी ही देर में सुरिंदर का लंड माल निकालने वाला था.

वो बोला – सुगंधा – छोड़ दे लंड को माल निकलने वाला है.

सुगंधा ने उसके लंड को चुसना चालु रखा. अचानक सुरिंदर के लंड ने माल का फव्वारा छोड़ दिया. सुगंधा ने सारा माल अपने मुह में ही भर लिया और सब पी गयी. अपने भाई का वीर्य पीना का आनंद ही कुछ और था. थोड़ी देर में बसन्ती ने सुरिंदर के लंड को मुह से निकाल दिया. और वो बाथरूम जा कर कुल्ला कर के आई.

तब सुरिंदर ने कहा – सुगंधा , तुने तो कमाल कर दिया.

सुगंधा ने बेड पर लेटते हुए कहा – तेरा लंड का माल काफी अच्छा है रे.

कह कर वो सुरिंदर कि तरफ पीठ कर के सोने लगी. मगर सुरिंदर का जवान लंड अभी हार नहीं मानने वाला था. उसने अपनी बहन को फिर से पीछे से पकड़ कर लपेटा और उसके बदन पर हाथ फेरने लगा. उसका लंड फिर खड़ा हो गया. इस बार उसका लंड सुगंधा की चिकनी गांड के दरार में घुसा हुआ था. ये सब उसके लिए पहला अनुभव था. वो अपनी बहन के गांड के दरार में लंड घुसा कर लंड को उसी दरार में घसने लगा. वो इतना गर्म हो गया की दो मिनट में ही उसके लंड ने माल निकालना चालु कर दिया और सारा माल सुगंधा के गांड के दरारों में ही गिरा दिया. उत्तेजना के मारे फिर से उसका बहुत माल निकल गया था.सुगंधा का गांड पीछे से पूरी तरह भींग गया. धीरे धीरे जब सुरिंदर का लंड शांत हुआ तो तो सुगंधा के बदन को छोड़ कर बगल लेट गया और थक के सो गया. इधर सुगंधा उठ कर बाथरूम गयी और अपने गांड को धोया और वो वापस बिना पेंटी के ही सो गयी. वो जानती थी कि सुरिंदर उससे पहले नहीं उठेगा और सुबह होने पर वो नए कपडे पहन लेगी. लेकिन वो भी गर्म हो गयी थी. काफी अरसे बाद उसके शरीर से किसी लंड का मिलन हुआ था. वो सोचने लगी कि उसके भाई का लंड उसके यार मनोज से थोड़ा ज्यादा ही बड़ा और मोटा है. उसे भी मनोज के साथ मस्ती की बातें याद आने लगी. ये सब सोचते हुए वो सो गयी. सुबह वो पहले ही उठी और कपडे पहन लिए. सुरिंदर ज्यों ही उठा उसकी बहन सुगंधा उसके लिए गरमा गरम कॉफी लायी और मुस्कुरा कर उसे दिया.

योग ट्रेनर ने दी चुदाई की ट्रेनिंग

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम प्रियंका कौर है. मैं 20 साल की जवान लड़की हूं. आज मैं आप लोगों के सामने सेक्सी लड़की की चुदाई कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूं। यह मेरी पहली कहानी है तो कृपया करके मेरी गलतियों को माफ करें।

कहानी शुरू करने से पहले मैं अपने बारे में आपको कुछ और जानकारी दे देती हूं. मैं एक सेक्सी जिस्म की मालकिन हूं. मेरा रंग गोरा है और मेरे बूब्स का साइज 32बी है. मेरी कमर 26 की है और मेरी गांड 34 की है.
अपने जिस्म की इस सेक्सी फिगर को मेंटेन करना मुझे बहुत अच्छा लगता है. इसलिए मैंने योगा ट्रेनर रखने की सोची.

मैं कई बार नोटिस किया करती थी कि मेरे मौहल्ले के लड़के और मर्द मेरी ओर हवस भरी निगाहों से देखा करते थे. मुझे ये देख कर खुशी होती थी कि मैं इतनी सेक्सी हूं कि लोगों के मुंह से लार टपकवा सकती हूं. मगर मैं चेहरे पर ये सब जाहिर नहीं होने देती थी.

मेरी सेक्सी गांड को देखकर जवान तो क्या, बूढों का लंड भी सलामी देने लगता था. सभी लोग मुझे भोगने के लिए प्यासे दिखते थे. मगर मुझे सबको तड़पाने में बहुत मजा आता था. इसलिए मैं अपने फिगर की ओर बहुत ध्यान देती थी.

मेरे परिवार में मेरे अलावा मेरे माता-पिता और एक छोटी बहन भी है. पिताजी काम के कारण ज्यादातर बाहर ही रहते हैं. मेरी मां की तबियत ज्यादा ठीक नहीं रहती है इसलिए घर का काम हम दोनों बहनें ही करती हैं. मेरी छोटी बहन स्कूल चली जाती है. उसके बाद घर को मैं ही संभालती हूं.

कुछ दिन पहले ही मैंने योगा सीखने का सोचा. मैंने एक योगा ट्रेनर ढूंढा जो मुझे बहुत ही मुश्किल से मिला. वो मेरे घर आया और हमने बैठ कर सब कुछ तय कर लिया. उसने अपना नाम रवि बताया. मैंने उसे सुबह 7 बजे आने के लिए कह दिया.

वो बात करके चला गया. मैं खुश हो गयी कि कल से मेरी योगा क्लास शुरू होने जा रही है. रात को मैं काफी उत्साहित थी. अगली सुबह जब उठी तो छोटी बहन तैयार होकर स्कूल चली गयी. मैं फ्रेश होकर तैयार हो गयी.

7 बजे योगा ट्रेनर आ गया. मैंने दरवाजा खोला तो उसकी नजर मेरी नाइटी पर गयी. मैंने जालीदार नाइटी पहनी हुई थी जिसके अंदर से मेरी लाल रंग की ब्रा और पैंटी भी साफ झलक रही थी.

योगा ट्रेनर की नजर मेरे आधे बाहर झांक रहे बूब्स पर जम गयी थी. मैं अपनी नाईटी को ठीक करते हुए खांसी तो उसका ध्यान हटा. फिर मैंने उसे अपने पीछे आने के लिए कहा. मैं आगे की ओर मुड़ी तो उसका ध्यान मेरी गांड पर गया.

उसके मुंह से हल्की सी आवाज आयी- हाय … क्या माल है!
मैं बोली- जी? आपने कुछ कहा क्या?
वो बोली- नहीं मैडम, मैंने तो कुछ नहीं कहा.
फिर मैं आगे चलने लगी. हम लोग हॉल में आ गये.

मैंने उसको हॉल में सोफे पर बैठ कर इंतजार करने के लिए कहा. वो मेरे जिस्म को ऊपर से नीचे तक देख रहा था. वो देखने में अच्छा था लेकिन बहुत ही ठरकी किस्म का इन्सान लग रहा था.

मैं बोली- मैं एक बार जरा अपनी योगा पैंट्स पहन कर आती हूं. आप थोड़ा वेट करो.
वो बोला- योगा पैंट्स की कोई जरूरत नहीं है. आप इस तरह के कपड़ों में भी कर सकती हैं. बल्कि खुले कपड़ों में तो और ज्यादा अच्छा रहता है योगा करना.

उसकी बात मैंने सोच कर कहा- अच्छा ठीक है. तो फिर शुरू करते हैं.
वो बोला- जी. ठीक है.
कहकर उसने मैट नीचे वहीं फर्श पर बिछा दिया. वो मुझे पहले कुछ वार्म-अप एक्सरसाइज करवाने लगा.

जैसे जैसे वो कहता गया वैसे वैसे मैं करती गयी. वो भी मेरे साथ साथ कर रहा था. काफी देर तक एक्सरसाइज करने के बाद मेरी चूचियां मेरी ब्रा से बाहर आने को हो गयी थीं. उसकी नजर मेरी चूचियों को ही घूर रही थी.

उसके बदन में पसीना आ गया था. उसने अपना टीशर्ट उतार दिया.
मैं बोली- ये आप क्या कर रहे हैं?
वो बोला- मैडम कपड़े खराब हो जायेंगे, अभी तो पूरी प्रैक्टिस बची हुई है.
मैंने फिर कुछ नहीं कहा.

हम दोनों फिर एक्सरसाइज करने लगे. मैट पर कूदते हुए मेरे बूब्स भी ऊपर नीचे उछल रहे थे. अपने उछलते बूब्स को फील करके मुझे भी उत्तेजना होने लगी थी. सामने रवि का कसरती बदन देख कर मुझे सेक्स की फीलिंग भी आ रही थी.

कुछ देर के बाद उसने अपनी लोअर भी निकाल दी. वह केवल शॉर्ट्स में ही एक्सरसाइज करने लगा. मैं उसको देख रही थी.
फिर वो बोला- अब काफी वार्म अप हो गया है. अब योगा प्रैक्टिस करते हैं.

उसके बाद उसने मुझे कई सारे आसन करवाये. आखिर में फिर सेतुबन्धासन (ब्रिज पोज़) की प्रैक्टिस करवाने लगा. इस पोज में कमर को उठाते हुए पेट को ऊपर करते हुए शरीर को पुल के आकार में करना होता है.

इस पोजीशन में आने के बाद मेरी चूत ऊपर उठ गयी. रवि मेरी टांगों के बीच में आकर मुझे कमर से सपोर्ट दे रहा था. इस पोजीशन में उसका लंड उसके शॉर्ट्स में से मुझे मेरी पैंटी पर छूता हुआ महसूस हो रहा था. मैं फील कर पा रही थी कि उसका लंड टाइट हो रहा था.

उसके हाथ मेरी कमर पर थे और धीरे धीरे मेरे बूब्स के नीचे आ गये थे. उसके हाथों के अंगूठे मेरे बूब्स को दबा रहे थे. उसका लंड और ज्यादा कड़ा होकर मेरी चूत पर रगड़ने लगा था. वो मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा.

जब मुझे लगा कि बात बहुत आगे जा रही है तो मैंने बोला- बस… आज के लिये यह काफी है. बाकी कल करेंगे.
वो बोला- ठीक है, प्रियंका. मैं कल आपको ज्यादा देर तक प्रैक्टिस करवाऊंगा.

उसके बाद वो चला गया.

अगले दिन फिर वो अपने टाइम पर आ गया. छोटी बहन स्कूल चली गयी थी. मां हॉल में लेटी हुई थी. उनकी कमर में बहुत दर्द था. उनको डिस्टर्ब ना हो इसलिए हम वहां पर योगा प्रैक्टिस नहीं कर सकते थे.

मैंने कहा- आज तो यहां पर जगह नहीं है.
वो तपाक से बोला- कोई बात नहीं, अंदर किसी रूम में कर लेते हैं अगर आपको कोई प्रॉब्लम न हो तो.
मैंने कहा- ठीक है. अंदर रूम में आ जाओ.

हम दोनों रूम में चले गये. मैं अपनी योगा ड्रेस निकालने लगी.
वो बोला- अगर आपको जल्दी से अच्छे रिजल्ट्स चाहिएं तो आपको कम से कम कपड़ों में योगा करना चाहिए. आप चाहें तो ब्रा और पैंटी में ही कीजिये.

मैं बोली- लेकिन आपके सामने?
वो बोला- मेरी बाकी सभी क्लाइंट्स भी करती हैं. वो लोग तो बहुत ओपन माइंडेड हैं. अगर आपको ठीक नहीं लग रहा तो कोई बात नहीं.
मैंने सोचा कि अगर मैंने मना किया तो ये मुझे गंवार समझेगा. इसलिए मैंने उसको हां बोल दिया. मुझे नहीं पता था कि मेरे जैसी सेक्सी लड़की की चुदाई की तैयारी कर रहा है मेरा ट्रेनर.

अपनी नाइटी मैं उसके सामने ही उतारने लगी. उसकी नजरों से हवस टपक रही थी. उसके सामने मैं ब्रा और पैंटी में ही रह गयी. मैंने उस दिन ब्लैक ब्रा और ब्लैक ही पैंटी पहनी थी. उसके बॉर्डर पर जाली लगी हुई थी जिससे मेरी चूत और चूचियों को बहुत ही सेक्सी लुक मिल रहा था.

मैंने देखा कि मुझे इस रूप में देख कर रवि का लंड उसकी लोअर में ही अलग से दिखने लगा था. फिर हम दोनों वार्म अप करने लगे. कुछ देर वार्म करने के बाद वो पसीना पसीना हो गया और उसने अपनी बनियान और लोअर को निकाल दिया.

आज उसने एक वी-शेप का अंडरवियर पहना हुआ था. उसका लंड उसमें अलग से ही उठा हुआ दिख रहा था. उसके लंड को देख कर लग रहा था कि वो कम से कम 8 इंच लम्बा तो होगा ही. उसके लंड को इस तरह से देखकर मेरी चूत में भी कुछ कुछ होने लगा. मगर मैंने कुछ जाहिर नहीं होने दिया.

वो बोला- आज मैं आपको भुजंगासन (कोबरा पोज) करवाऊंगा. इसके लिए आपको बेड पर चलना होगा. यहां जमीन पर ठीक से नहीं होगा.
मैं उसकी बात मान गयी और उसने मुझे बेड पर पेट के बल लेटने के लिए कहा.

फिर वो मेरे पास पीछे आकर बैठ गया. उसने मुझे आगे से छाती उठाने के लिए कहा. मैं उठाने लगी लेकिन मेरे पैर भी पीछे से उठ रहे थे.
वो बोला- मैं आपके पैरो पर बैठ जाता हूं जिससे केवल छाती ही उठेगी.

वो मेरी गांड के ठीक बीच में मेरी जांघों पर बैठ गया. उसके अंडरवियर में से उसका लंड मेरी गांड पर टच होने लगा. उसने मुझे आगे से धड़ उठाने के लिए कहा.

मैं उठाने लगी तो नहीं उठा पाई. उसने मेरे कंधों को पकड़ लिया और मेरी मदद करने लगा. अब उसका लंड मेरी गांड की दरार में पहले से ज्यादा अंदर घुसता सा लगने लगा. मुझे मजा आने लगा. मेरी नर्म नर्म गोल गांड में लंड लगाने में उसको भी मजा आ रहा था.

वो बोला- ऊपर देखो.
मैं ऊपर देखने लगी. उसका लंड मेरी पैंटी की स्ट्रिप को हटाने की कोशिश कर रहा था. फिर उसने मुझे वापस नीचे आने को कहा. मैं सिर नीचे रख कर आराम से लेट गयी. कमर दर्द करने लगी.

मैं बोली- मेरी कमर में दर्द हो रहा है.
वो बोला- मैं मसाज कर देता हूं. वो मेरी कमर को मसाज देने लगा. उसके हाथ मेरी गांड को भी दबाने लगे. वो मेरे गोरे गोरे चूतड़ों से मेरी पैंटी की स्ट्रिप को हटा कर अपनी उंगलियों से मेरी गांड को सहलाने की कोशिश कर रहा था.

मुझे भी अच्छा लग रहा था. बीच बीच में वो मेरी जांघों के अंदर मेरी चूत के पास अपने लंड को भी टच कर रहा था. मेरी चूत में गीलापन आने लगा था.
मैं थोड़ा कसमसाने लगी थी.

उसको शायद पता लग गया था कि मैं गर्म हो रही हूं.
उसके बाद वो बोला- मैडम, इतना आराम नहीं करना है. शरीर ठंडा पड़ा जायेगा. चलिए, फिर से प्रैक्टिस करते हैं.

उसने फिर से मुझे आगे से धड़ उठाने के लिए कहा. इस बार जब उसकी जांघें मेरी जांघों के बीच में मेरी गांड के पास टच हुई तो मैंने पाया कि उसका लंड नंगा होकर मेरी गांड को छू रह था. पता नहीं कब उसने अपना अंडरवियर निकाल दिया था.

वो अपने लंड को मेरी पैंटी में घुसाने लगा. मैं कुछ नहीं बोली. हिम्मत पाकर उसने मेरी पैंटी खींच दी और मेरी चूत पर लंड को रगड़ने लगा. मेरी आंखें बंद होने लगीं. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. मेरे योगा ट्रेनर का गर्म गर्म लंड मेरी चूत को छू रहा था.

इससे पहले कि मैं कुछ और समझ पाती उसने मेरी चूत में एक जोर का धक्का लगा दिया. उसका 8 इंच का लंड मेरी चूत में जा घुसा और मेरी आंखों के सामने अंधेरा हो गया. मेरी कुंवारी चूत में जान निकाल देने वाला दर्द हुआ.

मैं बेसुध सी हो गयी. इसी का फायदा उठा कर उसने मेरी ब्रा भी खोल दी और मेरी चूचियों को भी नंगी कर दिया. अब मैं ऊपर से नीचे तक पूरी नंगी पड़ी हुई थी.

फिर वो मेरी चूचियों को आह्ह … आह्ह करते हुए दबाने लगा. मैं आधे होश में थी. जब पूरे होश में आयी तो उसके हाथ मेरी दोनों चूचियों को जोर जोर से भींच रहे थे. उसका लंड मेरी चूत में और अंदर घुसता जा रहा था.

धीरे धीरे करके उसने मेरी चूत में पूरा लंड घुसा दिया और मुझे चोदने लगा. मैं उठने लगी तो उसने मेरी गर्दन पकड़ कर मेरा मुंह को बेड में दबा लिया और मेरी चूत को पेलने लगा. फिर उसने मेरी गांड को ऊपर खींचा और नीचे एक तकिया दे दिया.

मैं बोली- रुको, मुझे बहुत दर्द हो रहा है.
वो बोला- नहीं रुक सकता मेरी जान … दर्द से ज्यादा अब तुम्हें मजा देने की बारी है. एक बार लंड का स्वाद चख लिया तो रोज ही मेरे लंड से खुद ही चुदने लगोगी.

तकिया रख देने से मेरी चूत उठ कर एकदम सही पोजीशन में आ गयी. उसने मेरे बालों से मुझे पकड़ लिया जैसे घोड़ी की लगाम पकड़ते हैं. रवि ने फिर से धक्का मारा और मेरी चूत में लंड फंसा कर उसको आगे पीछे करने लगा. मेरी चूत ने अब लंड को एडजस्ट कर लिया था और मैं चुदने का मजा लूटने लगी.

मेरे मुंह से कामुक सीत्कार आने लगा- आह्ह… ओहह … फक मी रवि … यस … आह्ह लव यू … फक मी हार्ड … आह्ह और जोर से. कमॉन .. आ्हह … करके मैं उसके लंड को चूत में लेती रही और वो मुझे चोदता रहा.

उसके धक्के इतने ताकतवर थे कि मेरी बच्चेदानी तक उसका लंड टक्कर मार रहा था. मेरी आंखें बंद होने लगी थीं. उसने सच ही कहा था. अब तो मेरा मन करने लगा था कि वो मुझे ऐसे ही चोदता रहे. मैं आंखें बंद करके उसके लंड का मजा लेने लगी.

वो मुझे घपाघप चोदता रहा. उसके मुंह से भी मस्त कामुक सिसकारियां निकल रही थीं- आह्ह … ओह्ह … हाय सेक्सी … आह्ह … ऐसी टाइट कुंवारी चूत बहुत दिनों के बाद नसीब हुई है. तुझे तो मैं अपनी रानी बना लूंगा मेरी जान … आह … ले मेरे लंड को, पूरा ले ले. आह्ह.. तुझे चूत की रानी न बना दिया तो मेरा नाम नहीं.

उसकी चुदाई इतनी मजेदार थी कि कुछ ही देर में मेरा पूरा जिस्म अकड़ने लगा. मैं उसके लंड पर ही झड़ने लगी. मेरी चूत से निकले रस ने उसके लंड को भिगो दिया और अब पच-पच की जोरदार आवाज होने लगी.

रवि का लंड अब चिकना होकर और ज्यादा अंदर तक मेरी चूत को फाड़ने लगा. वो मेरी चूत की गर्मी को अब ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाया और फिर मेरी चूत में ही झड़ने लगा. उसका गर्म गर्म वीर्य मुझे मेरी बच्चेदानी तक महसूस हुआ.

रवि थक कर मेरे ऊपर ही गया. मेरी हालत भी खराब हो गयी थी. हम दोनों हांफ रहे थे. फिर धीरे धीरे उसका लंड सिकुड़ने लगा और मेरी चूत से बाहर आने लगा. मैंने उठ कर देखा तो उसके लंड पर खूब सारा वीर्य और काफी सारा खून लगा हुआ था.

मैं खून देख कर डर गयी.
वो बोला- घबराओ नहीं, तुमने पहली बार सेक्स किया है. तुम्हारी चूत का ताला मैंने खोल दिया है. अब तुम आराम से सेक्स का मजा ले सकती हो. पहली बार में सभी लड़कियों का खून निकलता है जिनकी सील नहीं टूटी होती है.

उसके बाद वो मुझे चूमने लगा. मुझे प्यार करने लगा. फिर उसने मुझे साफ किया और वहीं बेड पर मेरे साथ लेट गया.
मैं बोली- अब तुम्हें जाना चाहिए. योगा टाइम खत्म हो गया है. अगर मां उठ कर आ गयी तो प्रॉब्लम हो जायेगी.

वो बोला- ठीक है डार्लिंग, अब मैं जा रहा हूं. मगर कल से मैं सेक्सी लड़की की चुदाई घर के हर एक कोने में करूंगा. तुमको चोद चोद कर अपनी रानी बना लूंगा.

उसके बाद उसने अपने कपड़े पहने और निकल गया. मैं भी कपड़े पहन कर बाहर आ गयी.

इस तरह मेरे योगा ट्रेनर ने मुझे चुदाई की ट्रेनिंग भी बखूबी दी. उसने मुझे चोद चोद कर मेरी चूत को अपने लंड की रानी बना लिया. मुझे पहले ही सेक्स में इतना दमदार लंड मिल गया.

मैं अपने योगा ट्रेनर से अब रोज ही अपनी चूत चुदवाती हूं. मुझे बहुत मजा आता है. उसके लंड से चुद चुद कर मेरी गांड और ज्यादा मोटी और रसीली हो गयी है. मेरी चूचियों का साइज भी बढ़ गया है. मैं पहले से ज्यादा सेक्सी हो गयी हूं और बहुत खुश हूं.

योग सिखने के बहाने चुदवाने लगी मेरी बीवी टीचर से

मेरी बीवी नैंसी की उम्र 27 साल है और वो एक मदमस्त 36-28-38 की फिगर वाले जिस्म की मालकिन है. जो भी उसे एक बार देखे, वो मुठ मारे बिना नहीं रह सकता. जब वो 23 साल की थी तब हमारी शादी हो गई थी. हम दोनों की सेक्स लाइफ बहुत मस्त चल रही थी. दो साल में उसने ट्विन्स को जन्म दिया.

लेकिन उसके बाद वो दोनों बच्चे की देखभाल में लग गई और कभी कभी ही मुझ से चुदती. मैं भी उसकी परिस्थितियों को समझता था. हम सब संयुक्त परिवार में रहते थे. बाद में मेरे बिज़नेस की वजह से मैंने नया मकान लिया और हम दोनों वहीं शिफ्ट हो गए. इसलिए ज्यादा काम नहीं रहता था.

पर वो तीन साल में नैंसी का वजन 50 किलो से 80 किलो हो गया. उसी वजह से हमें सेक्स में दिक्कत होने लगी. हम दोनों ने कई उपाय किये, पर वजन नहीं कम हुआ. फिर एक दिन मैंने इंटरनेट पर सर्च किया तो प्राइवेट योग टीचर का पता मिला.

मैं- नैंसी, तुम्हारी समस्या का समाधान मिल गया.

नैंसी- सच? मजाक मत करो किशोर.

मैं- मजाक नहीं कर रहा डार्लिंग, एक प्राइवेट योग टीचर मिला है. वो योग की विधि द्वारा तुम्हारी समस्या का निवारण कर सकता है.

नैंसी- ओके.. वैसे भी मैं क्लास नहीं जा सकती ना, दोनों बच्चे को कौन देखेगा. तुम उसी से बात कर लो.

मैं- ओके डार्लिंग.. अभी करता हूँ. बच्चों के लिए मैंने बात कर ली है इधर पास में ही एक चाइल्ड केयर सेंटर है, तू उससे बात कर लेना.

मैंने उस योग टीचर प्रभाकर से बात की और शाम को घर पे मीटिंग फिक्स की. ठीक समय 6 बजे घंटी बजी और ये उसी ने बजाई थी. मैंने जाकर दरवाजा खोला तो एक 38 साल का पहाड़ी आदमी अन्दर आया.

मैं- आईये प्रभाकर जी, यहाँ बैठिये.

प्रभाकर- ओके सर जी, थैंक्स.

मैं- क्या लेंगे चाय या ठंडा.

प्रभाकर- निम्बू शरबत और कुछ नहीं.

मैं- नैंसी, तीन गिलास निम्बू शर्बत बना लो. प्रभाकर जी आप बहुत फिट लगते हो.. इसका राज़ क्या है?

प्रभाकर- मैं पहले फौज में था. वहीं जवानों को योग ही सिखाता था.. और अब रिटायर के बाद प्राइवेट में रोज 2 घंटे योग सिखाता हूँ.

मैं- अच्छी बात है.. आपकी फीस क्या है?

प्रभाकर- मेरी फीस ज्यादा है अगर आप दे पाएं, तो ही बात आगे करते हैं. मैं दस हजार महीने का लेता हूं.

मैं- फीस की कोई दिक्कत नहीं पर मुझे रिजल्ट चाहिए.

प्रभाकर- डोंट वरी, मैं कभी फेल नहीं हुआ.

इतने में नैंसी शर्बत लेकर आ गई. हम सबने ठंडा पिया.

नैंसी- मैंने सुना है कि फौजी कड़क होते है, पर मैं तो बहुत आलसी हूँ. तभी तो ये वजन बढ़ गया है.

प्रभाकर- आपके वजन के साथ साथ आपका आलस भी दूर कर दूंगा.

यह कह कर प्रभाकर चला गया और रोज़ सुबह 7 से 9 बजे का आने का टाइम फिक्स हुआ. उसके बाद हर रोज 2 घंटे योग का सेशन होता. उस सेशन के बाद मैं ऑफिस जाता था. प्रभाकर सचमुच नियम का पक्का था. नैंसी का रोज पसीना निकलता था और धीरे धीरे वजन कम होने लगा.

हम दोनों प्रभाकर के साथ घुल मिल गए और वो भी. उसने मुझे भी योग की आदत डाल दी. फिर मैं भी रोज योग करने लगा. मेरी बीवी भी उसके तारीफ करती थी. वो उसमें थोड़ा इंटरेस्ट ले रही थी. ये सब 4 महीने तक चलता रहा. तब तक उसने कभी नैंसी को बुरी नजर से नहीं देखा, ये मैं जानता था.

अब नैंसी का वजन 50 के करीब आ गया था और मेरी बीवी का फिगर भी पहले जैसा दिखने लगा था जो कि जो सबके लंड खड़े कर दे. इसमें प्रभाकर का बचना भी मुश्किल था, पर जब तक नैंसी कोई पहल न करे और मुझे उस पर पूरा भरोसा था कि वो नहीं करेगी.

मैं कई बार नैंसी को फैंटसी की बारे में बात करना चाहता, पर वो हर बार मना कर देती ओर कहती कि तुम पागल हो गए हो. एक दिन में 8 बजे उठा, पर सेशन तो 7 बजे स्टार्ट हो गया था. सेशन तो हॉल में ही होता है.

मैंने बाहर निकल कर देखा रोज की तरह नैंसी केपरी और शार्ट टी-शर्ट में योग करती थी. आज कमर की कसरत थी, तो वो उल्टी पड़ी हुई थी. प्रभाकर उसकी कमर को दबा रहा था. कभी कभार वो उसके पेट पर भी हाथ रख देता था और नैंसी चुपके से मुस्कान दे देती थी इस तरह कि प्रभाकर को पता न चले.

प्रभाकर- अब आपकी बॉडी बहुत कम हो गई है नैंसी जी.

नैंसी- हां, पहले जैसी बॉडी हो गई है.

फिर वो धीरे धीरे नैंसी के पेट को सहलाने लगा और नैंसी भी हल्की हल्की आहें भरने लगी. मुझे तो विश्वास नहीं हो रहा था, पर ये सच था कि उसको प्रभाकर अच्छा लगने लगा था. फिर प्रभाकर नैंसी के मम्मों को ऊपर से दबाने लगा.. और अपना हाथ ब्रा में डालने ही वाला था कि नैंसी ने उसे पकड़ लिया.

नैंसी- ये गलत है प्रभाकर.

प्रभाकर- इसमें क्या गलत है नैंसी?

नैंसी- मैं किसी की बीवी हूँ. मैं अपने पति को धोखा नहीं दे सकती.

तभी मैंने राहत की सांस ली और अपना दरवाजा नॉक किया और वो दोनों फिर से नार्मल हो गए.

मैं- नैंसी मेरे लिए नाश्ता बनाओ और प्रभाकर जी आपको फिटनेस के लिए हमने रखा था, वो लक्ष्य पूरा हुआ और ये रहे आपके पैसे.

प्रभाकर- जी धन्यवाद.. आपको मेरी ओर से कोई परेशानी हुई हो तो माफी चाहता हूँ.

मैं- ये क्या कह रहे हो. हमें तो आप से बहुत कुछ सीखने को मिला प्रभाकर जी.

नैंसी- ये क्या कर रहे हो आप? अभी तो मेरी लेग की कुछ एक्सरसाइज बाकी है. और प्रभाकर जी आपने इन्हें बताया क्यों नहीं?

प्रभाकर- नैंसी जी मैंने और किशोर जी ने 3-4 महीने का डिसाइड किया था जो टाइम खत्म हो गया है.

नैंसी- किशोर, अभी मेरी लेग की कसरत बाकी है, वो तो मुझे खत्म करनी ही है.

मैं- ओके डार्लिंग, सिर्फ 1 महीना.. उससे ज्यादा नहीं.

नैंसी- ओके नो प्रोब्लम डार्लिंग.

फिर प्रभाकर चला गया. मैंने जानबूझ कर नैंसी का फ़ोन गिरा दिया और वो टूट गया.

नैंसी- अरे ये क्या हो गया? अब मैं क्या करूँगी?

मैं- डोंट वरी डार्लिंग, मैं नया फोन लेकर तुम्हें दूंगा.

नैंसी- तुम कितना प्यार करते हो मुझसे जानू.. मैंने तुम्हारे लिए ये सब किया किशोर.

मैं- ये तो सही है.. पर तुम्हारे जिस्म का जादू प्रभाकर पर भी सवार है, ध्यान रखना नैंसी डार्लिंग.

नैंसी- ऐसा कुछ नहीं है.. झूठे कहीं के.. बीवी जरा सा आगे निकल जाए, ये पतियों को पसंद ही नहीं. अब मुझे नाश्ता बनाना है.

मैं नाश्ता करके ऑफिस चला गया. आते वक्त मैंने एक मोबाइल लिया जिसमें सीक्रेट तरीके से फ़ोन रिकॉर्ड हो सके और किसी को पता न चले. वो लेकर में घर आया और नैंसी फोन देखकर बहुत खुश हुई. फिर रोज योग का सेशन होने लगा.

और एक दिन मुझे रात को ऑफिस जाने का आईडिया आया और मैंने नैंसी को बताया तो वो थोड़ी नाराज हुई पर बाद में समझाने पर मान गई. मैं उस दिन रात को गया और सुबह आया. मैं आते ही सोने गया और फिर प्रभाकर आया और योगासन शुरू हुए.

प्रभाकर- क्या आज किशोर नहीं है या जल्दी चले गए?

नैंसी- वो सोये हुए है.. कल रात को उनकी नाईट शिफ्ट थी इसलिए.

प्रभाकर- ओके तो आज शांति से कसरत करेंगे.

पर मुझे नींद नहीं आ रही थी.. इसलिए मैं उन दोनों को सुनने का प्रयास कर रहा था.

थोड़ी देर में मैंने महसूस किया कि सन्नाटा सा हो गया. मैंने बाहर जाकर देखा तो नैंसी सीधी लेटी हुई थी और प्रभाकर उसके पेट को हल्के से चूम रहा था और धीरे धीरे मेरी बीवी के होंठों को चूस रहा था.

तभी नैंसी ने उसे हटाया और कहा- ये सही नहीं है.. किशोर भी यही पास में सोये हैं.

प्रभाकर तो कुछ सुन नहीं रहा था. वो तो नैंसी को किस करे जा रहा था और नैंसी के जिस्म को सहला भी रहा था. फिर वो खड़ा हुआ और जाने लगा.

नैंसी- क्या हुआ?

प्रभाकर- तुम हर बार मुझे टाल देती हो.

नैंसी- मैं मेरे पति को धोखा नहीं दे सकती और तुम्हारे बिना रहा भी नहीं जाता.

फिर वो धीरे से प्रभाकर के पास गई और उसे किस करने लगी. प्रभाकर भी मेरी बीवी के होंठों के रस को पीने लगा.

नैंसी- अभी तुम जाओ, बाद में देखती हूं.

फिर प्रभाकर चला गया. दूसरे दिन मैंने रात को आकर नैंसी का फ़ोन चैक किया तो प्रभाकर से थोड़ी बात हुई थी.. जो मैंने सुनी, वो दोनों दोपहर को मूवी देखने जाने वाले थे. मैंने भी दोपहर से छुट्टी ले ली. मैंने उसके पीछे की लाइन में बुकिंग करवाई. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मूवी शुरू होने के 2 मिनट बाद मैं आया और बैठ गया. मूवी में किस का सीन आया. प्रभाकर नैंसी का हाथ मसलने लगा. नैंसी कुछ नहीं बोली. फिर वो नैंसी की पीठ को सहलाने लगा. फिर धीरे धीरे प्रभाकर ने नैंसी के ब्लाउज में हाथ डाल दिया. नैंसी ने हल्की सी आह भरी. मेरा लंड तो खड़ा हो गया.

नैंसी ने प्रभाकर की जींस की जिप खोली और उसके लंड को मसलने लगी. थोड़ी देर ये सब चला फिर वो दोनों उठकर वहां से चले गए. मैं भी उनके पीछे आ गया. वो मेरे ही घर आ गए और सीधे बेडरूम में आ गए. दोनों आते ही एक दूसरे को किस करने लगे.

वो योग गुरू प्रभाकर मेरी बीवी नैंसी के होंठों के रस को पी रहा था और मेरी बीवी के हुस्न की दावत उड़ा रहा था. प्रभाकर ने साड़ी को उतार फेंका. इसके बाद ब्लाउज और पेटीकोट भी नैंसी के जिस्म से अलग हो गए. प्रभाकर नैंसी के पूरे बदन को चूमता रहा.

अब तक नैंसी भी बहुत गर्म हो चुकी थी. वो प्रभाकर का सिर पकड़ कर अपनी क्लीवेज में घुसाकर दबाने लगी. प्रभाकर ने ब्रा का हुक खोल दिया और नैंसी के दोनों कबूतरों को आज़ाद कर दिया. नैंसी को भी शर्म महसूस होने लगी और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं. प्रभाकर नैंसी के मम्मों को चूसने और मसलने लगा और नैंसी ज्यादा गर्म हो गई.

नैंसी- आह.. चूसो प्रभाकर जी मसल दो इनको आह..

प्रभाकर- यस नैंसी.. आज तुमको मसल के रख दूंगा.

फिर उसी वक्त मैंने नैंसी को कॉल किया और उसको बोला- मैं 30 मिनट में आ रहा हूँ.

नैंसी- प्रभाकर तुम यहां से जाओ. मेरे पति आधे घंटे में आ रहे हैं.

प्रभाकर- डोंट वरी नैंसी, अभी आधा घंटा तो है ना.

फिर प्रभाकर ने अपना लंड बाहर निकाला तो करीब 9 इंच का था और मोटा भी बहुत था. उसको देख नैंसी चौंक गई. प्रभाकर ने देर ना करते हुए नैंसी के मुँह से लगा दिया तो उसने लंड चूसने से मना कर दिया.. और लंड हटा दिया. प्रभाकर फिर लंड को चुत के होंठों के पास लेकर गया और नैंसी की चूत फैला कर एक जोर का धक्का लगा दिया, जिससे आधा लंड नैंसी की चूत में घुस गया.

नैंसी- अरे मर गई.. बहुत मोटा है.. आह.. निकालो इसे..

प्रभाकर- दर्द के बाद तो मज़ा है.

यह बोल कर उसने दूसरा दे धक्का दिया और पूरा लंड नैंसी की चूत में घुसा दिया. नैंसी चीखने लगी क्योंकि उसने कभी इतने बड़े लंड को झेला नहीं था. उसकी आँखों में अंधेरा हो गया. प्रभाकर फिर उसे किस करने लगा, कुछ पल बाद नैंसी को होश आया. बाद में वो लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा. अब नैंसी को भी मज़ा आने लगा.

नैंसी- आह.. तेज़ करो प्रभाकर.

प्रभाकर- यस नैंसी.. तुम्हारे लिए.

प्रभाकर ने स्पीड बढ़ा दी.

नैंसी- आह, आह कम ऑन प्रभाकर.. फ़क मी हार्ड.

दस मिनट तक वो लेटे हुए चोदता रहा, फिर वो नीचे लेट गया और नैंसी को लंड पर बैठा दिया. अब वो नीचे से धक्के मारने लगा ओर नैंसी भी उसका भरपूर साथ दे रही थी. फच फच और नैंसी की आह आह की आवाज़ से पूरा कमरा गूंज उठा. नैंसी खुलकर सीत्कार करने लगी.

ऐसे प्रभाकर ने उसे 10 मिनट तक चोदा और उसने नैंसी के पेट पर अपने गर्म वीर्य की पिचकारी दे मारी. फिर रूमाल से वीर्य को पोंछा और दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए. वो नैंसी को किस करके जल्दी से मेरे घर से निकल गया. उसके बाद मैंने बाहर आकर कॉलबेल बजाई. नैंसी ने तुरंत दरवाजा खोला. उसे देख कर लगा ही नहीं कि उसके साथ कुछ हुआ. वो बहुत खुश लग रही थी.

मैं- आज बड़ी खुश लग रही हो तुम.

वो- कुछ नहीं बस ऐसे ही. आप भी ना..

उसके जाने के बाद मैंने बाहर आकर कॉलबेल बजाई. नैंसी ने तुरंत दरवाजा खोला. उसे देख कर लगा ही नहीं कि उसके साथ कुछ हुआ. वो बहुत खुश लग रही थी.

मैं- आज बड़ी खुश लग रही हो तुम.

वो- कुछ नहीं बस ऐसे ही. आप भी ना..

मैं- मेरे साथ गोवा चलोगी? मुझे कल ऑफिस के काम से 4 दिन जाना है.

वो- वाओ, गोवा.. मैंने कभी नहीं देखा.. मैं जरूर चलूंगी.

मैं- मैंने एक कमरा भी सितारा होटल में 201 नंबर का बुक करवा लिया है.

मैंने ये जानबूझ कर बताया था. वैसे भी मुझे ऑफिस में कुछ काम नहीं था. मैं भी छुट्टी पर था. दूसरे दिन आकर मैंने नैंसी के फ़ोन की रिकॉर्डिंग सुनी.

नैंसी- हैलो प्रभाकर, एक खुशखबरी है.

प्रभाकर- क्या है जान?

मोन- मैं कल गोवा जा रही हूँ. चार दिन के लिए पति के साथ. उसने एक होटल में 201 नंबर का कमरा बुक करवाया है और वो ऑफिस काम से आए हैं इसलिए व्यस्त रहेंगे.

प्रभाकर- अरे ये तो बात बन गई. मैं भी गोवा आ जाता हूं. हम लोग वहां पर मस्त होकर घूमेंगे.

नैंसी- ठीक है तुम गोवा आकर मुझे अपने होटल और कमरा नम्बर वगैरह मैसेज कर देना. तब तक कोई बात नहीं.. अब रखती हूं.

ये सुनकर मेरे दिल को बड़ी तसल्ली हुई क्योंकि इसी लिए तो मैंने ये सब प्लान किया था. फिर हम दूसरे दिन गोवा के लिए फ्लाइट ले ली. दो घंटे में तो होटल में चैक इन भी कर लिया. मैं कमरे की बाल्कनी में खड़ा था और नैंसी फ्रेश होने बाथरूम में थी. तभी मैंने नीचे एक टैक्सी को देखा. उसमें से प्रभाकर बाहर आया. कुछ पल बाद नैंसी के फ़ोन पर मैसेज आया. मैंने उसको न पढ़ना ही मुनासिब समझा.

इतने में नैंसी नहाकर आई तो मैंने कहा- किसी का मैसेज आया है.

उसने पढ़ा और खुश हो गई. मैंने उसके बाद मैसेज पढ़ा तो हैरान हो गया. वो प्रभाकर का मैसेज था. होटल सितारा और वो कमरा 200 में था.. मतलब बाजू में था. पर मैं भी कम नहीं था. मुझे भेष बदलना अच्छे से आता था और उसके लिए सब जरूरी सामान मेरे पास था. पहले भी मैंने कई बार ट्राय किया, मेरी बीवी कभी भी मुझे पहचान नहीं पाई थी. इसी लिए मेरा आत्मविश्वास और बढ़ गया.

मैं- नैंसी, मैं मीटिंग में जा रहा हूँ.. पर तुम कहां जाओगी?

नैंसी- पता नहीं.. कोई अच्छी जगह लगी तो जाऊँगी.

तभी उसके फ़ोन पर एक और मैसेज आया. मैं वहां से निकल कर सीधा गया कमरा 199 में.. ये कमरा भी मैंने बुक करवाया था. मैंने ऑफिस के कपड़े निकाल कर रोमियो हिप्पियों जैसे पहन लिए.. साथ में दाड़ी मूंछ भी लगा ली.. और फुल मेकअप करके मैं बाहर टहलने लगा.

थोड़ी ही देर में नैंसी सजधज के बाहर निकली. उसने ब्लू जींस और सफेद टॉप पहना था.. और बाल तो ऐसे बनाए थे कि बता नहीं सकता. मेरे लिए वो कभी भी इतनी सजी नहीं थी. वो प्रभाकर के कमरे के पास गई और प्रभाकर भी बाहर आया. फिर वो दोनों गले मिले और हाथ में हाथ मिलाकर चले गए. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

वो दोनों बीच पर घूमने गए, मैंने पीछे लगा था, बाद में वे दोनों पब में गए और काफी पी. इसके बाद 6 बजे वे लोग वापस होटल आ गए. लेकिन मेरा सपना पूरा नहीं हुआ. फिर मैं पुराने गेटअप में आ गया और कमरे में आया.

मैं- क्या हुआ नैंसी डार्लिंग आज किधर टाइम पास किया?

नैंसी- मैं तो अपनी एक सहेली के साथ रही, हम लोग कई जगह घूमने गए और काफी शराब भी पी.

मैं- वाह तुम्हारी सहेली भी आई है.. तो फिर ठीक है पूरे 3 दिन अपनी सहेली के साथ घूमना.

नैंसी- आई नहीं, यहीं बना ली है एक… चलो मैं फ्रेश होकर आती हूँ.

फिर हमने शाम को डिनर किया और नैंसी के साथ संभोग भी किया और दोनों सो गए. थोड़ी देर बाद नैंसी उठी. कमरे से बाहर आई. मेरी नींद तो कब की खुली हुई थी. मैंने तुरंत उसके कमरे के पास गया और झाँ

कने की कोशिश कर रहा था तभी दरवाजे के की-होल से देखा तो पूरा कमरा दिखाई दे रहा था।

नैंसी प्रभाकर के कमरे में गई. उसने काली नाइटी पहनी थी. वो सीधे जाकर प्रभाकर से गले मिली. फिर दोनों एक दूसरे के होंठों के रस का रसपान करने लगे. प्रभाकर फिर उसके गले तो चूमने लगा और फिर गाल, सिर, कान सभी जगह. फिर वापस होंठों को चूसने लगा साथ में नैंसी की गांड को सहलाने लगा.

ये सब 20 मिनट तक चलता रहा. दोनों के हाथ लाल हो गए. नैंसी ने कभी इतना लंबा किस मुझसे नहीं किया था पर प्रभाकर के साथ काफी खुली हुई थी ये सच था. उसके बाद नैंसी की नाइटी को प्रभाकर ने उतार दिया. इसकी वजह से नैंसी सिर्फ ब्रा और पेंटी में रह गई.

उस वक्त काफी सेक्सी लग रही थी. खुले हुए बाल, भोलेपन वाली हंसी, तने हुए स्तन और मदमस्त यौवन. ऐसा लगा कि कोई अप्सरा मेनका धरती पर आ गई हो. प्रभाकर उसके पास गया और दोनों हाथों से पकड़ कर उसका चेहरा थोड़ी देर देखा और बोला- तुम आज काफी सुंदर लग रही हो. इतनी तो घर पे भी नहीं लग रही थी नैंसी.

नैंसी ने शर्माते हुए कहा- ये सब आप के लिए किया प्रभाकर जी.. मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं.

प्रभाकर वापस उसे किस करने लगा, फिर उसके स्तनों के बीच में बनती रेखा को चूमने लगा. इससे नैंसी रोमांचित हो उठी. वो प्रभाकर का सिर पकड़ कर उसके सर को दबाने लगी और अपने मुँह से आह आह सीत्कार निकालने लगी.

उसके साथ साथ प्रभाकर उसके स्तनों को ब्रा के ऊपर से मसलता रहा. वो मेरी बीवी के कोमल और तने हुए स्तनों को दबाकर उसको और गर्म कर रहा था. जब जब वो स्तन को मसलता हर बार नैंसी की ‘आह आह..’ सीत्कार निकलती.

थोड़ी ही देर में प्रभाकर ने ब्रा को स्तनों से अलग कर दिया. प्रभाकर ने फिर नैंसी की ओर देखा तो नैंसी शर्मा कर नीचे देखने लगी. तभी प्रभाकर ने उसे कमरे में रखे सोफे पर बिठाया और वो घुटनों के बल नीचे बैठ गया. फिर प्रभाकर नैंसी की नाभि को चूमने लगा. धीरे धीरे वो उसको चूमते हुए स्तनों तक आ गया. उसने नैंसी के एक निप्पल को धीरे से काटा.

नैंसी- आह काट क्यों रहे हो जानू?

प्रभाकर- अच्छा नहीं लगा जान?

नैंसी- बहुत अच्छा लगा.. पहली बार किसी ने ये किया.

प्रभाकर- तुम्हारे पति ने कभी नहीं काटा?

नैंसी- कभी नहीं.

प्रभाकर- आज मैं तुम्हें सभी अहसास करवाऊंगा.

फिर प्रभाकर बारी बारी से एक एक स्तन को अपने मुँह में लेकर चूसता और कभी कभी निप्पलों को काट भी लेता था.

नैंसी- आह.. और चूसो और मसलो जानू.. आह आह आह..

यह बोल कर प्रभाकर के सिर को और जोर से दबा देती. बीच बीच में प्रभाकर नैंसी के होंठों का रसपान भी करने लगता. करीब 15 मिनट तक उसके स्तनों को चूम कर और मसल कर लाल कर दिया. उसके बाद नैंसी की पेंटी को उतार दिया. और उसकी योनि के दाने को छुआ, तो वो ‘आउच..’ करके मचल उठी और प्रभाकर के हाथ को पकड़ लिया.

नैंसी- ये तो गलत है जानू.. तुम इसको छू नहीं सकते.. दूर चले जाओ.

प्रभाकर ने घबराते हुए कहा- क्या हुआ जान? मुझसे क्या भूल हुई?

नैंसी- यही कि मेरे कपड़े उतार कर मुझे नंगी कर दिया, पर खुद के कपड़े नहीं उतारे..

प्रभाकर- अरे जानू इस बात के लिए मुझसे नाराज हो? चलो ऐसा करो तुम्हीं अपने हाथों से उतार दो.

नैंसी ने प्रभाकर के कपड़े उतारने शुरू किए. पहले टी-शर्ट को उतारा. प्रभाकर का सीना भी बालों से भरा हुआ था. नैंसी उसके सीने को चूमने लगी. थोड़ी देर बाद उसका लोअर भी उतार दिया. उसने अन्दर कच्छा तो पहना भी नहीं था, शायद वो सीधे संभोग के लिए ही तैयार था.

फिर प्रभाकर ने नैंसी के पैरों को चूमना शुरू किया. उसके पैर के अंगूठे को पहले चूम कर वो धीरे से आगे बढ़ा. फिर वो नैंसी की जांघों को प्यार से चूम कर वापिस उसकी योनि के पास आ गया. वो धीरे से योनि को सहलाने लगा और नैंसी ‘आ..आह..’ करने लगी.

फिर प्रभाकर ने दोनों हाथों का इस्तेमाल करके नैंसी की योनि को थोड़ा सा खोल दिया. नैंसी की चूत की फांकों पर अपनी जीभ फेर कर चूत को चूमना शुरू किया. अब नैंसी भी उसके लंड को पकड़ लिया और चमड़ी को नीचे उतार कर सुपारा बाहर निकाल लिया.

नैंसी लंड को हिलाने लगी. थोड़ी ही देर में प्रभाकर का लंड काफी बड़ा हो गया, करीबन 9 इंच का. फिर दोनों 69 की अवस्था में आ गए. नैंसी उसके लम्बे लंड को मुँह में लेकर मुख मैथुन कर रही थी और प्रभाकर उसकी योनि का रसपान कर रहा था. दोनों दस मिनट तक इस अवस्था में रहे. वो दोनों एक दूसरे को चुंबन करने लगे, उसके बाद प्रभाकर अपना लिंग नैंसी की योनि के पास रगड़ने लगा.

नैंसी- अब कितना तड़पाओगे जानू? डाल दो ना

प्रभाकर- तड़प में ही मज़ा है जान.. अभी तो थोड़ी देर लगेगी.

नैंसी- कितनी देर? अब यही तो बचा है.

प्रभाकर नैंसी के स्तन मसलते हुए बोला- थोड़ा सब्र रखो मेरी जान.

फिर उसने बैग में से एक पाऊच निकाला, उसमें जैम था. नैंसी देखकर हैरान रह गई और पूछने लगी- इसका क्या करोगे जानू?

प्रभाकर कुछ बोले बिना ही जैम को नैंसी के स्तनों पर लगाने लगा. जैम ठंडा होने की वजह से नैंसी मचलने लगी. प्रभाकर ने नैंसी के दोनों स्तनों को जैम से पूरा लाल कर दिया. फिर थोड़ा जैम उसकी योनि में भी लगा दिया. अब उसने मेरी बीवी का एक स्तन अपने मुँह में भरा और निप्पल चूसने लगा.. फिर पूरा स्तन मुँह में भर लिया. साथ ही वो अपने हाथ से नैंसी की योनि को मसलने लगा जिससे नैंसी मचलने लगी.

नैंसी- आह जानू, बहुत अच्छा लग रहा है… आह आह..

प्रभाकर- तुम्हारा पति कुछ नहीं करता इस तरह?

नैंसी- आह जानू, कभी भी नहीं.

प्रभाकर- औरत को खुश करना भी नहीं आता चूतिये को.

नैंसी- हम्म आह आआआह करते रहो.

ये देख कर मुझे ऐसा लग रहा था कि उसका इंटरेस्ट मुझसे थोड़ा कम हुआ है पर वो तो आने वाला वक्त ही बताएगा. फिर प्रभाकर ने नैंसी के दूसरे स्तन को मुँह में लिया और चूसने लगा. अपना एक हाथ पहले स्तन पर रख कर मसलने लगा. उसके हाथ गीले होने की वजह से स्तन पर फिसल से रहे थे. बाद में वो नैंसी के गले को चूमने लगा. नैंसी ने उसके बालों को कसके पकड़ लिया और अपना प्यार जताने लगी. फिर वो एक दूसरे को किस करने लगे.

प्रभाकर- अब तुमको असली सुख दूंगा जान.

नैंसी- जल्दी करो मेरे राजा.. मेरी मुनिया कब से तड़प रही है.

प्रभाकर ने अपने लिंग की नोक को नैंसी की योनि द्वार पर रख कर एक जोर का झटका दिया और आधा लिंग योनि में घुस गया.

नैंसी चीख पड़ी- आह मर गई जानू..

फिर प्रभाकर ने दूसरा धक्का दिया और पूरा लिंग चला गया योनि कि जड़ में उतर गया.

नैंसी चिल्लाने लगी- निकालो इसे प्रभाकर, मैं मर जाउंगी..

प्रभाकर थोड़ा रुक गया और नैंसी को स्मूच करने लगा. थोड़ा दर्द कम होने पर धीरे धीरे धक्के देने लगा. दो मिनट बाद नैंसी का दर्द कम हुआ. फिर उसने नैंसी को अपने लिंग के ऊपर बैठा दिया. धीरे धीरे नेहा को भी मज़ा आने लगा. वो उछल उछल कर प्रभाकर को साथ देने लगी.

नैंसी- आज पहली बार मेरी योनि में बड़ा मूसल ठीक से गया है और एडजस्ट भी हुआ है.. आह उम्म्ह… अहह… हय… याह… और तेज़ करो प्रभाकर.

प्रभाकर- आह आह आह उफ्फ..

नैंसी- यस फ़क मी हार्ड..

दस मिनट की चुदाई के बाद प्रभाकर ने लिंग को बाहर निकल कर नैंसी की योनि के ऊपर अपने वीर्य की पिचकारी डाली. फिर एक रूमाल से उसकी योनि को साफ किया.

प्रभाकर नैंसी के पास लेट गया और उसको किस किया. फिर बोला- मज़ा आया जान?

नैंसी- बहुत मज़ा आया जानू, तुमने तो मुझे जन्नत की सैर करा दी. आज तो ऐसा लग रहा था कि असली सुहागरात थी.

प्रभाकर- अभी सुहागरात पूरी कहां हुई.

नैंसी- मतलब? मैं अभी किशोर से चुद कर आई हूं.. फिर तुमने चोदा.. क्या अब फिर से? मेरी चूत सूज जाएगी.. नहीं जानू.

प्रभाकर नैंसी की गांड पर एक चांटा मार कर बोला- इसका तो बाजा बजाना बाकी है.

नैंसी- नहीं प्रभाकर, गांड नहीं.. सुना है दर्द होता है.

प्रभाकर ने बिना कुछ बोले नैंसी को घोड़ी बनाया और अपना लिंग नैंसी की गांड पर रगड़ने लगा. फिर अपने बैग से एक क्रीम निकाल कर नैंसी की गांड के छेद पर लगाई, फिर अपने लिंग पर. नैंसी मना करती रही, पर उसकी एक ना सुनी. प्रभाकर ने एक धक्का दिया तो थोड़ा ही लिंग अन्दर गया, इतने में तो नैंसी छटपटाने लगी.. जैसे मुर्गी कटने वाली हो.

नैंसी- ऊई माँ, मर गई जानू.

प्रभाकर ने थोड़ी देर बाद दूसरा धक्का दिया और पूरा लिंग घुसा दिया. थोड़ी देर तो ऐसा लगा कि नैंसी बेहोश हो गई.. पर फिर जोर से चीखी.

प्रभाकर- बहुत कसी हुई गांड है जान तेरी.. लगता है किसी ने नहीं मारी.

नैंसी- आह प्लीज निकालो इसे.. बहुत दर्द हो रहा है.

प्रभाकर धीरे धीरे धक्के लगाता रहा और उसका लिंग मेरी बीवी की गांड में एडजस्ट हो गया. अब तो नैंसी को भी मज़ा आने लगा. नैंसी भी अब गांड हिला कर प्रभाकर का साथ दे रही थी.

नैंसी- बहुत मज़ा आ रहा है जानू, अहह आआआह..

प्रभाकर- दर्द के बाद मज़ा ही होता है.

नैंसी- आआआआह… और तेज करो जानू.

प्रभाकर नैंसी की हिरनी जैसी पतली कमर को पकड़ कर तेज़ धक्के दे रहा था. हर धक्के पे नैंसी के चेहरे पर प्यास और बढ़ रही थी और थोड़ी सन्तुष्टि का भाव भी दिख रहा था. फिर प्रभाकर ने नैंसी को दीवार के सहारे खड़ा किया और उसके स्तनों को पकड़ लिया. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

नैंसी के स्तनों को मसलते वापस वो उसकी गांड मारने लगा. कुछ मिनट बाद उसकी गांड में ही झड़ गया. उसके बाद गांड से लंड निकाल कर दोनों बाथरूम की और गए. नैंसी तो ठीक से चल भी नहीं पा रही थी. दोनों ने एक दूसरे को रगड़ रगड़ के साफ किया और बेड पे आकर एक दूसरे से चिपक कर बातें करने लगे.

नैंसी- आज तो पागल बना दिया प्रभाकर तुमने. सच में आज पहली बार मेरी असली सुहागरात हुई.

प्रभाकर- तुम जैसी जवान और खूबसूरत लड़की के साथ संभोग करने मिला यही बहुत है. वैसे तुम्हारा पति चूतिया है ना?

नैंसी- क्यों?

प्रभाकर- तुम जैसी पटाखा माल और गोवा में भी मस्ती की बजाए ऑफिस जाता है.

नैंसी- मेरे लिए तुम तो हो ना.

फिर वो दोनों सो गए. मैं भी बीवी की चुदाई देख मुठ मार के सो गया. सुबह नींद खुली 8 बजे तो नैंसी मेरे साथ बेड पर सोई थी.

मैंने उसको जगाया- नैंसी, उठो भी यार.. रात को 10 बजे ही हम सो गए थे.. अब कितनी देर तक यहां पड़ी रहोगी?

नैंसी- सोने दो ना किशोर, रात को बड़ी देर से नींद आई थी. कल पूरा दिन घूम लिया था सो थक गई हूं. तुम ऑफिस चले जाओ.

मैंने भी उसे सोने देना मुनासिब समझा. मैं भी मेरे दूसरे वाले कमरे में चल दिया. वो दोनों आज भी घूमने गए, मैं भी पीछे पीछे गया. वो किसी अनजान बीच पर गए, वहां पे कोई नहीं था. वहां पर दोनों ने जमकर चुदाई की. शाम को वो वापस होटल आ गई. थोड़ी देर में मैं भी आ गया. दरवाजा खोला तो नैंसी मेरे सामने सती सावित्री बन कर साड़ी पहन कर खड़ी थी. फिर मैं फ्रेश हुआ और हमने डिनर किया. उसने फिर नाइटी पहन ली.

मैं- अपनी सखी के साथ आज कहां गई थी?

नैंसी- आज तो उसने मुझे कई बीच दिखाए और पैदल चला चला कर बॉडी की बैंड बजा दी.

मैंने नैंसी को किस किया, फिर उसकी नाइटी उतारने लगा तो मुझको दूर कर दिया.

वो- आज तो मैं थक गई हूं. आज नहीं किशोर.. कल करना.

मुझे भी थोड़ा गुस्सा आया क्योंकि उसका प्रभाकर की ओर झुकाव बढ़ रहा था.

मैं- कल सुबह पैकिंग कर लेना, दोपहर को हमें निकलना है.

इतना बोलते ही उसकी थकान दूर हो गई.

वो- क्यों क्या हुआ? तुम तो चार दिन की बात कर रहे थे, अभी तो सिर्फ 2 हुए हैं.

मैं- ऑफिस का काम खत्म हो गया है.

दूसरे दिन मैं उसके साथ वापस आ गया, पर वो नाराज थी. मैं ऑफिस चला गया. वैसे ही कुछ दिन बीत गए. मैं रोज रात को उसे किस करने जाता, तो कोई न कोई बहाना करके मना कर देती. एक दिन मैंने सोचा कि उसे सरप्राईज दूँ.

मैंने मूवी की टिकट ले ली फिर हाफ लीव लेकर घर गया. जैसे ही मैं घर पहुँचा, दरवाजा बंद था पर किचन की विंडो थोड़ी खुली हुई थी. मैं तो अन्दर का दृश्य देख कर हैरान हो गया. प्रभाकर ने मेरी बीवी को अपनी बांहों में कस के पकड़ कर खड़ा था, नैंसी चाय बना रही थी.

प्रभाकर- उतार दो न ये ब्लाउज नैंसी डार्लिंग.

नैंसी- अरे बाबा तुम खुद क्यों नहीं उतार देते.

नैंसी का ब्लाउज उतर गया तो मैं हैरान रह गया क्योंकि नैंसी ने पिंक कलर की ब्रा पहनी थी जो उसे बिल्कुल पसंद नहीं थी, ऐसा उसने मुझे बताया था. तो फिर आज क्यों पहनी?

मैं फिर दरवाजे का लॉक खोल कर चुपके से अन्दर आ गया और पर्दे के पीछे छिप गया. वो दोनों हॉल में आए.

प्रभाकर- जानू, मैं तुम्हारे लिए रेड वाइन लाया हूं और तुम चाय बना रही हो.

नैंसी- ये क्यों लाए.. मेरे पति को पता चला तो? मैंने उससे झूठ बोला है कि मुझे वाइन पसंद नहीं.

प्रभाकर- तुम्हारे पति को तो बहुत कुछ पता नहीं जानू.

नैंसी- मेरे परिवार वालों ने मेरी शादी जबरदस्ती कर दी थी. मुझे वो पसंद नहीं थे. पर फिर सोचा कि कोई तो ऐसा बंदा मिलेगा जो मुझे समझे, उसे ही मैं अपनी पसंद नापसंद बताऊँगी.

मैं ये सब सुनकर हिल गया. इतना बड़ा धोखा?

प्रभाकर- छोड़ो इन सब बातों को.

यह कह कर उसने नैंसी की साड़ी को अलग कर दिया. दोनों ने टीवी चालू किया और ब्लू फिल्म लगा ली. मुझे तो शॉक पे शॉक मिल रहे थे. मेरी बीवी ब्लू फ़िल्म का नाम सुन कर चिढ़ जाती थी, आज वो ही देख रही थी. फ़िल्म में 2 आदमी एक औरत को बेरहमी से चोद रहे थे.

ये देख दोनों की आंखों में वासना का नशा दिख रहा था. तभी नैंसी ने पीछे दरवाजे की ओर देखा, उसकी नजर पर्दे के पीछे खड़े में जूतों पर गई. शायद उसे मेरी हाजिरी का पता चल गया था इसीलिए उसने पर्दे के सामने थोड़ी स्माइल दी.

फिर प्रभाकर ने उसकी ब्रा को उतार दिया और स्तनों को मसलने लगा. फिर उसने ग्लास में पड़ी रेडवाईन को स्तनों पर डाल दिया, वो नीचे जाती हुई उसके पेटीकोट के अन्दर चली गई. फिर वो नैंसी के स्तनों को बेरहमी से चूसने लगा.

नैंसी उसका सर दबा कर मेरी ओर देखते हुए सिसकारियां निकलने लगी- आह प्रभाकर, आह..

अब तो मुझसे भी नहीं रहा जा रहा था. मैं उनके सामने जाकर खड़ा हो गया ये देख प्रभाकर हड़बड़ाहट से दूर हो गया. नैंसी ने भी नाटक किया.

मैं- ये सब क्या है प्रभाकर?

वो- सॉरी, आज मैं बहक गया.

नैंसी- प्रभाकर आओ.. कस कर मसलो मेरे स्तनों को.. ये तो कब से हमें देख रहा है.

वो दो पल रुका और अचानक ही नार्मल हो गया. आकर स्तनों को मसलने लगा.

मैं- ये सब क्यों किया नैंसी?

नैंसी- तो फिर क्या करती मैं किशोर? मुझे भी तो अपनी लाइफ एन्जॉय करनी थी. रोज रात को तुम मुझे तड़पती छोड़ कर सो जाते थे. प्रभाकर ने मुझे पहली बार सही मायने में औरत का सुख दिया.

मैं- ये सब कब से चल रहा है?

नैंसी- प्रभाकर, तुम अब चले जाओ कल आना.

प्रभाकर- ओके जान.

वो किस करके निकल गया.

मैं बहुत अपसैट था. रात को हमने डिनर किया फिर मैं बेड पे लेट गया. बच्चे भी दूसरे कमरे में सो गए थे. फिर नैंसी रात को ब्लैक नाइटी पहनकर आई और मेरे साथ लेट गई.

नैंसी- तुमको एक बात बतानी थी किशोर. मुझको आज जी भरकर प्यार करो.

मैं- क्यों? क्या हुआ? पछतावा हो रहा है?

नैंसी- बताती हूँ.. पहले मेरी चूत को चाट ना..

मैं उसकी पैंटी को हटाकर उसकी योनि को चाटने लगा.. वो मचलने लगी.

नैंसी- आह किशोर, आह जी भर के चूसो. आज रात मैं तुम्हारी हूँ. कल से मुझ पर प्रभाकर के पूरा हक होगा. वो जो कहेगा, वही मुझे करना पड़ेगा.

उसकी इस बात से मुझ पर से तो सेक्स का नशा ही उतर गया.

मैं- ये क्या कह रही हो तुम?

नैंसी- वो मुझे बहुत खुश रखता है. उसने तो मुझे तुम्हें ना छूने देने को कहा था पर तुम मेरे पति हो, इसलिए सोचा कि एक बार तो तुम्हारा मुझपे हक़ बनता है. इसीलिए में कह रही हूँ कि जी भरके आज रात प्यार कर लो.

मुझे ये सब बातें सुनकर रोना आ गया और मैं रोने लगा. तो उसने मेरा सर पकड़ कर अपने सीने पे रख दिया. मेरे बालों को सहलाने लगी. फिर उसने अपनी ब्रा को उतार फैंका.

फिर वो बोली- अब रोने से क्या होगा किशोर, तुम मेरे पति हो इसलिए मैं प्रभाकर को एक रात धोखा दे रही हूँ.

फिर उसने मेरे मुँह में अपना एक स्तन दे दिया. वापस ना चाहते हुए भी मेरी वासना मुझ पर हावी होने लगी. मैं उसके स्तन को चूमने लगा.

नैंसी- आह किशोर, चूसो इसको.

फिर मैं नैंसी का दूसरा स्तन भी चूसने लगा और जमकर चुदाई की. बाद में मैंने अपना लिंग नैंसी की गांड पे रखा और वो कुछ बोले, मैंने लंड को पेल दिया. उसकी गांड प्रभाकर की मेहरबानी से थोड़ी खुली हुई थी.

नैंसी- आह, आज तक तुमने मेरी गांड क्यों नहीं मारी. चूत से ज्यादा गांड में मज़ा आता है.

मैं बिना कुछ बोले उसकी गांड मारने लगा.. और अन्दर ही झड़ गया. फिर दोनों ने अपने आपको साफ किया और बेड पर लेट गए.

नैंसी- कल से मैं थोड़ा गुस्सा कर दूँ तो बुरा मत मानना.

फिर हम दोनों सो गए. सुबह उठकर फ्रेश हुए. तभी दरवाजे पर घंटी बजी. मैंने दरवाजा खोला तो देखा प्रभाकर एक बैग लेकर खड़ा था.

मैं- तुम यहां?

प्रभाकर- अबे लौड़े, ये मेरा घर है यहां मेरी बीवी रहती है, जब मेरा मन करेगा, मैं इधर आ सकता हूँ.

नैंसी- अरे प्रभाकर तुम कब आए, ये बैग अपनी बीवी को दे दो. मैं उसे हमारे बेडरूम में रख देती हूं.

मैं- ये सब हो क्या रहा है बताएगा कोई?

नैंसी- कुछ नहीं किशोर, अब से प्रभाकर यहां रहेंगे.

मैं- अब कमीने..

नैंसी- तमीज से बात करो किशोर, मैं अपने पति की बेइज्जती बर्दाश्त नहीं कर सकती.

फिर वो दोनों कमरे में गए और सामान एडजस्ट कर दिया. मैं रोज रात को बच्चों के साथ सो जाता और नैंसी के कमरे से ‘आह आह आह..’ की सिसकारियां और चीखें सुनता और रोकर सो जाता. मुझे गोवा की ट्रिप बड़ी ही महंगी पड़ गई. नैंसी सुबह जल्दी उठकर नंगी ही किचन में चाय बनाने जाती और मैं रोज उनकी ओर देखता रहता.

वो अब बिंदास लाइफ एन्जॉय कर रही थी. वो एक दूसरे को मेरे सामने भी किस करते और अंगों को मसलते. मैंने एक दिन अपना आपा खो दिया. जैसे ही नैंसी किचन में गई और चाय बनाने लगी. मैं पीछे से जाकर अपना मुँह सीधा ही उसके योनि पर रख दिया और चूमने लगा. उसको लगा कि प्रभाकर है.

वो आँखें बंध कर मेरा सर दबाने लगी- आह प्रभाकर, पूरी रात तो चूत को चाटा अब भी जी नहीं भर रहा, आह…

फिर मैंने खड़ा होकर अपना लिंग उसकी चूत में पीछे से पेल दिया और जैसे ही एक धक्का लगाया कि उसे पता चल गया कि मैं हूँ.

वो चीखने लगी- प्रभाकर..

तभी मैंने उसके मुँह पे हाथ रखकर उसकी आवाज को रोक दिया और बोला- मैंने तुम्हारे पापा को और परिवार को बता दिए है ये सब तुम्हारे अच्छे कर्म शांति रखो और जो हो रहा है उसे होने दो.

मैंने उसके मुँह से हाथ हटाया तो वो चुप रही और रोते हुए मेरे धक्कों को सहने लगी.

“ये क्या कर दिया तुमने किशोर, अब मैं प्रभाकर को क्या कहूंगी?”

मैं- ज्यादा नखरे मत कर रंडी, मैं भी उसी दिन ऐसे ही रो रहा था, पर तुम पर तो प्रभाकर का भूत ही सवार था. ना तो बच्चों के बारे में सोचा ना तो परिवार के बारे में. और मैंने प्रभाकर को खाने में ऐसी दवा खिलाई है कि वह नामर्द बन जायेगा अपना पूरा जीवन हिजड़ो की तरह तालिया बजा कर गुजारेगा और तू रंडी बनकर अपनी हवस की आग बुझाते रहना.

क्योंकि मैंने तुम्हारा पूरा वीडियो शूट किया है जो तुम्हे रंडी साबित करता है तो तुम मेरे घर और जिंदगी से दूर हो जाओ मैंने तुम्हारे घर वालो को भी सब बता दिया है वह भी तुम्हारा मुँह नही देखना चाहते मैं तुम्हारी छोटी बहन से शादी कर रहा हु वह भी मुझसे शादी करना चाहती है तो बच्चों को नई माँ मिल जायेगी मैं उनपर तुम्हारा साया भी नही पड़ने देना चाहता तो तुम्ह अपने हिजड़े यार के साथ जहा जाना चाहती है जा सकती हो मेरी बला से.

फिर वो रोते हुए अपने कमरे में गई और कमरे को बंद कर लिया. प्रभाकर को जगाया और कुछ बात करने लगी. क्या बात हुई वो पता नहीं चला. दो घंटे बाद दरवाजा खुला और देखा तो प्रभाकर अपना बड़ा बैग लेकर बाहर आया और उसकी आंख में भी आंसू थे.

मैं सोफे पर बैठा था. वो मेरे पास आया और बोला- सॉरी यार, हो सके तो मुझे माफ कर देना. मैं क्या करने यहां आया और मैंने क्या कर दिया. तुम्हारी जिंदगी उजाड़ कर रख दी, सिर्फ अपनी भूख मिटाने के लिए.

मैं- मुझे कुछ नहीं सुनना, तुम दोनो यहां से चले जाओ.

नैंसी भी रोते हुए आई और मेरे पैरों में सर रख कर रोने लगी.

नैंसी- किशोर, मैं वासना की आग में अंधी हो गई थी. मुझे कुछ नहीं दिखाई दिया.

मैं- देखो जो हुआ, उसे बदल नहीं सकते ना तुम मेरे साथ खुश हो ना मैं तुम्हारे साथ फिर जिंदगी में कभी मुझे अपनी मनहूस शकल मत दिखाना मैंने उसके सामने डिवोर्स के पेपर रख दिये और कहा जाते जाते इनपर साइन करना फिर उसे और प्रभाकर को घर से बाहर निकाल दिया ओर दरवाजा बंद कर दीया

मैने गोवा में ही यह सब तय किया था कि घर जाते ही सबूत जुटाऊंगा और नैंसी नाम की गंदगी अपनी लाईफ से निकाल फेंकूँगा पर उनको उनके किये की सजा भी जरूर दूँगा उस दवा की वजह से प्रभाकर किसी काम का नही रहेगा ना कोई काम कर सकेगा ना किसी को चोद पायेगा जिंदा लाश बनकर एडी रगड़ रगड़ कर मरेगा.

मैंने नैंसी को नही बताया पर उसको भी मैंने वही दवाई खिलाई थी क्यों कि जो उनलोगों ने मेरे साथ किया था ऐसे कैसे उन्हें छोड़ देता दोनो ने मुझे मेरे घर मे जलील किया था मुझे कमजोर समझने की गलती उन्हें बहुत महंगी पड़ गई थी. कुछ दिन लाइफ ऐसे ही चली बाद में थोड़ी धीरे धीरे नार्मल हुई. फिर मैने उसकी बहन के साथ शादी कर ली, आज हमारी शादी को पांच साल हो गये है हमारे तीन बच्चें है मैं भी अब मेरा सारा खाली समय अपने बीवी बच्चों को देता हूं वह गलती मैं दोबारा नही करना चाहता.

कुछ सालों बाद मेरे एक दोस्त की जुबानी पता चला कि प्रभाकर और नैंसी कुछ समय साथ रहे फिर अलग हो गये फिर नैंसी गोवा में कॉल गर्ल का काम करती थी फिर गंदी बीमारी से सरकारी दवाखाने में बेनाम मर गयी सेक्स की वजह से वह योग से भोग तक फिर भोग से रोग तक पहुंच गई फिर हम अपनी नार्मल लाइफ एन्जॉय करने लगे, पर जब भी हम प्रभाकर और नैंसी का नाम सुनते तब वो समय कांटे की तरह चुभता.

लड़की ने नौकरी का अहसान चूत से चुकाया

दोस्तो, मैं राज हूँ.
ये मेरी पहली सेक्स कहानी है, तो गलती होना लाजिमी है. प्लीज नजरअंदाज करते हुए माफ़ कीजिएगा.

पाठिकाओं के कौतूहल हेतु लिखना चाहता हूँ कि मेरे लंड का साइज़ सामान्य भारतीयों की तरह ही है, पर इसकी देर तक चलने की खासियत है, जिस वजह से लड़कियों और भाभियों के द्वारा मुझे बिस्तर में बेहद पसंद किया जाता है.
अपनी इसी गुणवत्ता के चलते मैंने बहुत सारी भाभियों और लड़कियों को खूब चोद कर खुश किया है.

आप सभी के लंडों से निवेदन है कि वे खड़े हो जाएं और अपनी अपनी चुत में घुस जाएं या चुत न हो तो हाथ से हिलाएं.
लड़कियों और भाभियों की प्यासी चूतों से प्यास लंड के लिए गर्म होने की इल्तिजा है.

ये फ्री सेक्स स्टोरी आज से 3 साल पहले की उस समय की है, जब मैं जॉब लगवाने का काम करता था.
अपने उसी काम के दौरान मुझे अपनी इस कहानी की नायिका मिली.

उस समय मैं दिल्ली में ही जॉब कर रहा था, साथ ही कम्पनीज में जॉब के लिए प्लेसमेंट भी करवाता था.
इसके एवज में मुझे कम्पनीज से कमीशन मिलता था और कैंडीडेट से भी एक महीने की सैलरी मिलती थी.

एक दिन किसी अनजान नंबर से कॉल आया कि मुझे जॉब की तलाश है.
मैंने उसे अपना रिज्यूमे और एक फोटो भेजने को कहा.

जब उसने अपना फोटो भेजा, तो कसम से लंड फनफना उठा … क्या माल थी यार.

मेरा लंड तो उसकी फोटो देखते ही खड़ा हो गया था.
मैंने उसे दूसरे दिन आने को कहा.

उसका नाम रजिया था (बदला हुआ नाम).
रजिया एकदम दूध जैसी गोरी लौंडिया थी.

उसके बूब्स 34 के, कमर 28 की और उसकी गांड 36 की थी … या यूँ कहूँ कि ऐसा लगा कोई परी उतर कर आ गई हो.
सामने से उसे कोई भी देखेगा तो उसका लंड हर हालत में तुनकी मारेगा, यह गारंटी थी.
मतलब उसके दूध और गांड के उभार देख कर तो किसी बूढ़े का भी लंड खड़ा हो जाएगा.

वह आई और मैंने उसका इंटरव्यू करवाया, पर उसका सिलेक्शन कुछ कारणों से नहीं हो पाया.

दरअसल उस कंपनी के बॉस को लड़की पसंद आ गई थी और वह उसे जॉब देने के पहले उससे ब्लो जॉब करवाना चाहता था, उसे चोदना चाहता था.

यह कंपनी एक फ्लैट बेचने का काम करने वाली कंपनी थी तो कस्टमर को पटाने के लिए उसके साथ लेटने का काम भी करना पड़ता था.
लड़की अनेक मर्दों से चुदने के लिए राजी नहीं थी.

मैंने उससे कहा कि कोई बात नहीं मैं किसी दूसरी कंपनी में बात करूंगा.

वह मुझसे बोली- मैं ऐसा काम नहीं कर सकती हूँ, जिधर मैं एक कॉल गर्ल बन कर रह जाऊं!
मैंने कहा- चलो किसी दूसरी कंपनी में देखता हूँ.
वह हूँ करके चली गई.

उस दिन के बाद मेरी उससे रोज़ाना बात होने लगी.
अब उससे मेरी गाहे बगाहे मुलाकात होना शुरू हो गई.
कुछ समय बाद उससे मेरी काफी सारी बातें होने लगीं.

एक दिन उसने बताया कि वह नई जगह शिफ्ट हुई है, तो उसे घर का कुछ सामान लाना है.
मैंने उसकी मदद की.

उस दिन से वह मुझसे कुछ ज़्यादा ही क्लोज़ हो गई.
फिर धीरे-धीरे हमारी बातें दोस्ती से प्यार की होने लगीं.

एक दिन मैंने उसकी जॉब एक अच्छी कंपनी में लगवा दी, उधर उसके साथ कुछ भी गड़बड़ होने की आशंका नहीं थी.
वह बहुत खुश थी.

मैंने उससे पार्टी मांगी.
उसने संडे को मिलने को बोल दिया.

मैंने कहा- संडे को ही क्यों?
वह मुस्कुरा कर बोली- जरा खुल कर मिल लेंगे!

मैं खुल कर मिल लेंगे का अर्थ समझ गया.
मैंने उससे कहा- रजिया मैं तुमसे प्यार करता हूँ और तुमसे अपना प्यार जताना चाहता हूँ.
वह हंस कर बोली- हां, मैं भी अपना प्यार जताना चाहती हूँ.

मैंने उसका हाथ दबाया तो उसने आंख दबा दी.
मैं समझ गया कि ये लड़की मुझसे चुदने के लिए राजी है.

मैंने पहले ही सारी तैयारी कर ली थी, क्योंकि आग दोनों तरफ़ बराबर लगी हुई थी.
लौड़े की सफाई कर ली थी और बियर की कैन्स ले ली थीं.

तय समय पर हम दोनों मिले.

मैंने एक रिसॉर्ट में रूम बुक कर लिया था.
रूम में आते ही वह मेरे सीने से लग गई.

साला लंड तो ऐसे कड़क हो गया था कि अभी पैंट फाड़ कर बाहर निकल जाएगा.
हमारे होंठ कब एक-दूसरे से जुड़े, पता ही नहीं चला.

कम से कम 20 मिनट तक हम एक-दूसरे की जीभ से खेलते रहे और होंठों को पीते रहे.
क्या होंठ थे उसके एकदम रूई जैसे मुलायम …

फिर मैंने उसके चूचों को धीरे-धीरे दबाना शुरू किया तो वह जोर-जोर से सिसकारियां लेने लगी.
मैंने जल्दी से उसकी टी-शर्ट उतारी और उसकी ब्रा को भी अलग कर दिया.

सच में बड़े ही मस्त बूब्स थे यार … कसम से देख कर ही ऐसा लगा कि बस इन्हें खाता ही रहूँ.

उसके बूब्स पर उसके गुलाबी निप्पलों की झलक तो ऐसी थी कि कसम से मजा ही आ गया.

मैंने एक निप्पल को अपने होंठों के बीच में दबाया और चूसना शुरू कर दिया.
वह मस्त हो रही थी और मादक आवाज निकालती हुई मुझे अपने हाथ से अपने दूध चुसवा रही थी.

मैंने उसके दोनों निप्पल बारी बारी से खूब देर देर तक चूसे और खींचे.
उसकी चूचियां कुछ ही देर में एकदम लाल हो गई थीं क्योंकि मैं एक दूध को चूस रहा था और दूसरे को अपनी मुट्ठी में भर कर मसल रहा था.

फिर दूध से मन भर लेने के बाद मैं नीचे को हुआ और उसके पेट पर किस करना शुरू कर दिया.

वह बिन पानी की मछली के जैसे मचल रही थी.
अब मुझसे भी कंट्रोल नहीं हो रहा था.
मैंने भी जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उतारे और उसकी पैंटी को उतार दिया.

आह मस्त चूत थी यार … कसम से एकदम कचौड़ी सी फूली और झांट रहित एकदम सफाचट चिकनी चमेली सी चुत … देख कर ही पता चल रहा था कि इसने लंड लेने के चक्कर में आज आने से पहले ही साफ़ की है.

चुत का रंग भी एकदम गुलाबी, जरा भी कालापन नहीं … यह इस बात का प्रमाण था कि चुत में लंड का आना जाना या तो हुआ ही नहीं है या अभी कम चली है.

फिर जैसे ही मैंने अपने होंठ उसकी चूत पर रखे, उसके मुँह से सिसकने की आवाज़ आने लगी.

मैंने भी जीभ अन्दर डाल दी और जीभ से चुत की दीवारों का रस चाटने लगा.
साथ ही मेरे होंठ उसकी चूत के दाने को पकड़ कर खींचने और रगड़ने में लग गए.

उसका बुरा हाल हो गया था और वह ऊँह ऊँह करती हुई मेरे सर को अपनी चुत पर दबाने लगी थी.

वह लगातार मादक आवाजें निकालती हुई तड़पने लगी ‘आह राज ये तुमने क्या कर दिया और तेज चूस लो आह राज ऐसे ही बस ऐसे ही करते रहो आह बहुत मजा आ रहा है!’

उसकी चूत लगातार पानी छोड़ रही थी, जिसे मैं पीता जा रहा था.

उसने झड़ते समय मुझे कस कर अपनी चूत में दबा लिया था … क्या खट्टा पानी था उसकी चुत का.
थोड़ी देर में वह पूरी तरह से झड़ गई और मैं उसका सारा पानी पी गया.
बड़ा ही टेस्टी पानी था उसकी चुत का.

मैं फिर से उसके होंठों को पीने लगा.
मन तो कर रहा था कि बस ऐसे ही इसके होंठों को खाता रहूँ, कभी न छोड़ूँ इसके होंठों को … मेरा लंड भी उसकी चूत से रगड़ खा रहा था.

वह खुद कमर हिलाकर लंड अपनी चूत में लेने की कोशिश करने लगी और बोलने लगी- बस अब बर्दाश्त नहीं होता जल्दी से चोद डालो.

मैंने उसे और तड़पाना ठीक नहीं समझा.

चुत में लंड पेलने से पहले मैंने उससे अपना लंड मुँह में लेने को कहा, तो उसने मना कर दिया.
मैंने भी कोई ज़बरदस्ती नहीं की और लंड उसकी चूत के ऊपर रख दिया और घिसने लगा.

उसके मुँह से भी ‘आह … आह …’ की आवाज़ आने लगी.
‘राज अब डाल दो अपना लंड अन्दर और मेरी प्यास बुझा दो!’

मैंने एक झटका मारा और मेरा पूरा लंड चूत को चीरता हुआ अन्दर तक घुस गया.

वह सील पैक माल थी तो चुत फट गई थी.
उसकी आंखों से आंसू आने लगे और उसे दर्द होने लगा.

मैंने थोड़ा सा लंड निकाल कर देखा तो थोड़ा सा खून भी निकला हुआ था.

थोड़ी देर में जब उसे थोड़ा आराम मिला, तो वह खुद ही कमर उठाने लगी और कहने लगी- और तेज करो राज … और तेज … और बना लो मुझे अपना!

मैं तेज-तेज चुदाई करने लगा.

कुछ देर बाद मैंने लंड चुत से खींचा और उससे उल्टा कर दिया.
वह समझ गई और घोड़ी बन गई.

जैसे ही वह घोड़ी बनी, मैंने पीछे से लंड छेद में पेल डाला.

लंड एक ही झटके में अन्दर सरक गया रहा तो वह एकदम से चीखी- हाय अम्मी मर गई!

मैं उसके दोनों दूध पकड़ कर चोदने लगा और वह भी दर्द भूल कर लंड का मजा लेने लगी.

मैंने उसे करीब 15 मिनट तक चोदा. इतने में वह 2 बार पानी छोड़ चुकी थी.

अब मेरा भी निकलने वाला था, तो मैंने पूछा- कहां निकालूँ?
वह बोली- अन्दर ही निकाल दो, अभी सेफ डेज हैं.

मैं और तेज तेज शॉट मारने लगा और उसकी चूत के अन्दर ही पानी निकाल दिया.
फिर मैंने उससे बाथरूम में चलने को कहा.

वह उठी तो चल ही नहीं पा रही थी, उसकी आह निकल गई.
मैंने मुड़ कर उसे देखा तो उससे चला भी नहीं जा रहा था.

तो मैंने उसे गोद में उठाया और बाथरूम में ले गया.
उधर उसने खुद को साफ़ किया.

मैंने देखा तो वहां बाथटब भी था.
मैंने बाथटब को पानी से भरा, उसे उठा कर बाथटब में लिटाया और खुद भी उसके साथ आ गया.

हम दोनों में फिर से मस्ती शुरू हो गई.
मैं उसके बूब्स से खेलने लगा और उसे गोद में बिठा कर प्यार करने लगा.

वह अपनी गांड मेरे लंड पर घिसने लगी.
तो मैंने उसके दूध पकड़ कर लौड़े को चुत की दरार पर सैट किया और पीछे से ही उसकी चूत में लंड डाल दिया.

वह आह आह करने लगी.
हम दोनों की मस्त चुदाई शुरू हो गई.

इस बार वह भी बहुत मजे से चूत चुदवा रही थी.

कुछ ही देर में वह खुद ही मेरे लंड पर कूदने लगी.
पानी से छप-छप की आवाज़ और उसके मुँह से ‘आह … आह …’ की आवाज़ निकल रही थी.
ऐसा लग रहा था, जैसे किसी ने कोई सुरीला म्यूजिक लगा दिया हो.

उस पूरी रात को मैंने उसे 4 बार चोदा.
सुबह उससे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था.

फिर मैं दर्द निवारक दवा लेकर आया और उसे पानी के साथ पिला दी.

कुछ देर आराम करने के बाद उसे चैन पड़ गया और हम दोनों कमरे से निकल कर अपने अपने घर चले गए.

आज भी जब मुझे उसके साथ बिताई वह रात याद आती है, तो लंड खड़ा हो जाता है.

उसके बाद भी हम कई बार मिले लेकिन उसने मेरे लंड को कभी नहीं चूसा.

कुछ दिन के बाद उसने अपनी एक सहेली की चूत दिलवाई और एक चचेरी बहन को चुदवाया.
वह सेक्स कहानी फिर कभी लिखूँगा.
तब तक के लिए लड़के अपने लंड हिलाएं और लड़कियां अपनी चूत में उंगली करती रहें.

बीवी की मस्त चुदाई – हॉट थ्रीसम स्टोरी हिंदी में

हाय दोस्तो, कैसे हो आप सब? उम्मीद है कि आप लोग भी ज़िंदगी के मज़े ले रहे होंगे। आज मैं एक ऐसी कहानी लेकर आया हूं जो आपकी रातों को और गर्म बना देगी। ये स्टोरी मेरी बीवी की है, जो बिल्कुल सच्ची घटना पर बेस्ड है। पढ़ते-पढ़ते आपका मन करेगा कि हाथ खुद-ब-खुद नीचे … Read more

भाभी की चुदाई होटल में – मुंबई की देवर भाभी सेक्स कहानी

मुंबई की अंधेरी ईस्ट की उस 5-स्टार होटल में, जहां लॉबी की क्रिस्टल चैंडेलियर से निकलती रोशनी फर्श पर हीरे जैसी चमक बिखेरती है और एयर में महंगे परफ्यूम की महक घुली रहती है, मैंने वो रातें गुजारीं जो जिंदगी भर याद रहेंगी। मैं, राहुल, 27 साल का, दिल्ली से कंपनी की मीटिंग के लिए मुंबई आया था। कंपनी ने मुझे और मेरी भाभी प्रिया को एक ही होटल में बुक किया था – रूम 1205 और 1207, पास-पास, 12वीं फ्लोर पर। भाई रोहन दिल्ली में ही था, लेकिन प्रिया को भी एक फैमिली मैरिज फंक्शन अटेंड करने मुंबई आना पड़ा था। प्रिया, 29 की – गोरी, भरी-भराई बॉडी, लंबे सिल्की बाल, गुलाबी होंठ, और आंखें ऐसी कि एक नजर में दिल थम जाए। शादी को पांच साल हो गए थे। बाहर से सब परफेक्ट लगता – खुशहाल जोड़ा, अच्छा घर। लेकिन अंदर, एक ऐसी चाहत सुलग रही थी जो धीरे-धीरे भड़क उठी।

पहली शाम। एयरपोर्ट से होटल तक टैक्सी में हम साथ थे। प्रिया ने सफेद कुर्ता-पजामा पहना था – टाइट, पसीने से थोड़ा गीला। वो मेरे बगल में बैठी थी। उसकी जांघ मेरी जांघ से छू रही थी। हर ब्रेक पर वो हल्का सा सरकती, स्पर्श और गहरा होता। वो बोली, “राहुल, मुंबई में इतने दिनों के लिए पहली बार आए हो?” मैंने कहा, “हां भाभी, मीटिंग्स हैं। तू?” वो मुस्कुराई। “मैं फैमिली फंक्शन के लिए। रोहन नहीं आ सका। अकेली हूं।” उसकी आवाज में एक हल्की सी उदासी थी। मैंने कुछ नहीं कहा। बस उसकी आंखों में देखता रहा। वो नजरें मिलाकर मुस्कुराई।

होटल पहुंचे। चेक-इन किया। लिफ्ट में अकेले थे। वो करीब आई। उसकी सांस मेरी गर्दन पर गर्म लग रही थी। मैंने उसकी कमर पर हाथ रखा। वो सिहर उठी। “राहुल… यहां?” मैंने कहा, “भाभी… बस एक पल।” लिफ्ट रुकी। हम अलग हो गए। लेकिन वो पल काफी था।

शाम को मीटिंग खत्म हुई। मैं लौटा। प्रिया का मैसेज आया – “राहुल, डिनर साथ? रूफटॉप रेस्टोरेंट में मिलते हैं।” मैंने हां कहा। रूफटॉप पर मुंबई की लाइट्स नीचे चमक रही थीं। प्रिया ने ब्लैक ड्रेस पहनी थी – डीप नेकलाइन, बैकलेस, सिल्की फैब्रिक जो उसके शरीर से चिपक रहा था। उसके स्तन की गहराई साफ दिख रही थी। वो बोली, “राहुल, आज बहुत अच्छा लग रहा है तू।” मैंने कहा, “भाभी, तू तो हमेशा स्टनिंग लगती है।” वो हंस पड़ी। वाइन ऑर्डर की। बातें शुरू हुईं – भाई की व्यस्तता, घर की बातें, और धीरे-धीरे पर्सनल। वो बोली, “राहुल… रोहन बहुत अच्छा है, लेकिन कभी-कभी लगता है कि वो मुझे पूरी तरह समझता नहीं। शारीरिक रूप से भी… दूरियां बढ़ गई हैं।” मैं चुप रहा। वो मेरे हाथ पर हाथ रख दिया। “तू समझता है न?” मैंने कहा, “हां भाभी… बहुत।”

वाइन का असर हो रहा था। हम उठे। लिफ्ट में फिर अकेले। इस बार वो खुद मेरे करीब आई। उसने मेरी कमर पकड़ ली। मैंने उसके होंठ चूम लिए। वो जवाब देने लगी। लिफ्ट रुकी। हम 1207 में – प्रिया के रूम में। दरवाजा बंद हुआ। वो मेरे सामने खड़ी थी। मैंने उसे दीवार से सटा दिया। उसके होंठ फिर चूमे। वो किस गहरा होता गया। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। मैंने उसकी ड्रेस की जिप खोली। ड्रेस नीचे। ब्रा और पैंटी में। काले लेस ब्रा में उसके गोरे स्तन। मैंने ब्रा उतारी। निप्पल सख्त, गुलाबी। मैंने उन्हें दबाया। वो सिसकारी। “आह… राहुल… जोर से… दबा… चूस…” मैंने एक निप्पल मुंह में लिया। जोर से चूसा। दांतों से हल्का काटा। वो चीख पड़ी। “आह… हां… काट… मेरे निप्पल को चूस… रस्सी बना दे… और जोर से…” मैंने दूसरे को भी वैसा ही किया। वो मेरे बाल पकड़कर दबा रही थी। “राहुल… ओह… सालों बाद किसी ने ऐसे छुआ है… चूस… और चूस…”

मैंने उसे बेड पर पटका। पैंटी उतारी। उसकी चूत – गुलाबी, पहले से गीली, रस टपक रहा। मैंने जीभ लगाई। वो कमर उठाकर चीखी। “राहुल… चाट… मेरी चूत… बहुत जल रही है… जीभ अंदर डाल…” मैंने जीभ अंदर डाली। क्लिट को चूसा। उंगलियां डालीं – दो, फिर तीन। वो कमर हिला रही थी। “आह… राहुल… उंगलियां… तेज… मेरी चूत को फाड़… जीभ से चोद… ओह… और तेज… मैं झड़ने वाली हूं…” मैंने स्पीड बढ़ाई। वो कांपकर झड़ गई। उसका रस मेरे मुंह में बहा। मैंने सब चाट लिया। वो बोली, “राहुल… अब तेरा नंबर।”

वो उठी। मेरी शर्ट उतारी। छाती चूमी। नीचे आई। पैंट उतारी। लंड बाहर – सख्त, मोटा, सुपारा चमक रहा। वो हाथ में लिया। “राहुल… कितना मोटा और लंबा है तेरा… रोहन से बहुत बड़ा…” वो सहलाने लगी। फिर मुंह में लिया। जोर-जोर से चूसने लगी। जीभ सुपारे पर घुमा रही थी। गले तक ले रही थी। लार टपक रही थी। मैं सिसकारा। “भाभी… बहुत अच्छा… गहरा ले… आह… तेरी जीभ जादू कर रही है… चूस… और चूस…” वो बोली, “अब डाल… मुझे तेरी जरूरत है।”

वो बेड पर लेट गई। जांघें फैलाईं। मैंने लंड उसकी चूत पर रखा। धीरे से अंदर। वो कराही। “आह… राहुल… बड़ा है… धीरे… पूरा अंदर ले रही हूं…” मैं रुक गया। फिर धीरे-धीरे पूरा अंदर। वो चीखी। “हां… पूरा… अब चोद… जोर से…” मैंने धक्के शुरू किए। धीरे से तेज। वो कमर हिला रही थी। “राहुल… जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… चोद… आह… तेज… और तेज… मेरी चूत तेरी है…” मैंने स्पीड बढ़ाई। उसके स्तन हिल रहे थे। मैंने दबाए। वो मेरी पीठ नाखूनों से खरोंच रही थी। “राहुल… अंदर झड़… मुझे भर दे… गर्म वीर्य डाल… मैं तेरी हूं…” मैंने और जोर से धक्के मारे। एक साथ झड़ गए। मेरा गरम वीर्य उसकी चूत में भर गया। वो कांपकर थम गई।

लेकिन रात खत्म नहीं हुई। वो उठी। “राहुल… आज पूरी रात।” वो मेरे ऊपर चढ़ गई। उसकी चूत मेरे लंड पर। वो कमर हिला रही थी। ऊपर-नीचे। उसके स्तन मेरे मुंह में। मैं चूस रहा था। वो चीख रही थी। “राहुल… तेरे लंड ने मुझे पागल कर दिया… आह… गहरा… और गहरा… मैं ऊपर से चोद रही हूं तुझे…” मैंने नीचे से धक्के मारे। वो तेज हो गई। “राहुल… मैं झड़ रही हूं… आह…” वो झड़ गई। मैंने उसे पलटा। डॉगी स्टाइल। उसकी गांड पकड़ी। लंड डाला। तेज-तेज। वो तकिए में मुंह दबाकर चीख रही थी। “राहुल… चोद… मेरी चूत और गांड दोनों तेरी… फाड़ दो… जोर से… मुझे तेरी रंडी बना दे… बाल पकड़… पीछे से पटक…” मैंने उसके बाल पकड़े। पीछे से जोर से धक्के। वो अपनी चूत सहला रही थी। हम कई बार झड़े।

फिर मैंने कहा, “भाभी… आज गांड में?” वो शरमा गई। “धीरे से… पहली बार…” मैंने ऑयल लगाया। पहले उंगली। वो सिहर उठी। “राहुल… आह… दर्द… लेकिन अच्छा…” फिर दो उंगलियां। वो कमर हिला रही थी। “राहुल… और अंदर… तैयारी कर रही हूं…” फिर लंड। धीरे से अंदर। वो चीखी। “आह… राहुल… बड़ा है… धीरे…” मैं रुक गया। फिर धीरे-धीरे पूरा। वो बोली, “अब चोद… मेरी गांड चोद…” मैंने धक्के शुरू किए। वो चीख रही थी। “राहुल… जोर से… फाड़ दो मेरी गांड… आह… बहुत मजा आ रहा है… अपनी चूत में उंगलियां डाल रही हूं…” मैं तेज हो गया। वो अपनी चूत में उंगलियां डाल रही थी। हम दोनों झड़ गए।

सुबह हुई। हम थके हुए लेटे थे। प्रिया बोली, “राहुल… ये हमारा राज रहेगा। लेकिन तू मेरी जान बन गया है।” मैंने कहा, “भाभी… मैं तुझे कभी नहीं छोड़ूंगा।” वो मुस्कुराई। “अब जब भी मुंबई आएं, इसी होटल में मिलेंगे।”

समय बीतता गया। भाई को शक नहीं हुआ। लेकिन हर बार मुंबई आने पर हम इसी होटल में मिलते। रात भर चुदाई। प्रिया की चूत में मेरा लंड, उसके होंठों पर मेरी जीभ, उसके स्तनों में मेरी उंगलियां। मुंबई की इन ऊंची दीवारों के बीच हमारा गुप्त संसार था। जहां बाहर सब सामान्य, अंदर हम जलते रहे – चाहत में, प्यार में, और उस गहरे बंधन में जो शायद कभी टूटे नहीं।

भाभी ने पैर मालिश के बहाने जबर्दस्ती संबंध बनाया

मेरा नाम राहुल है। उम्र बाईस साल। मैं दिल्ली के एक अच्छे कॉलेज में बी.कॉम फाइनल ईयर का छात्र हूँ। मेरे बड़े भाई अजय की शादी को तीन साल हो चुके हैं। उनकी पत्नी, यानी मेरी भाभी सिमरन, इस घर की सबसे आकर्षक औरत हैं। सिमरन भाभी की उम्र अट्ठाईस साल है, लेकिन उनकी हसीन अदाओं को देखकर कोई भी उन्हें पच्चीस से ज्यादा नहीं कह सकता। लंबे काले घने बाल, गोरी चिकनी त्वचा, गहरी कजरारी आँखें, भरी-भरी चूचियाँ जो हर साड़ी या कुर्ते में उभरकर आती हैं, पतली कमर और पीछे से देखते ही दिल धड़कने लगे वाली गोल-मटोल गांड। जब वो चलती हैं तो उनका बदन लहराता है, और जब वो मुस्कुराती हैं तो उनके गालों पर छोटे-छोटे गड्ढे पड़ जाते हैं।

भैया अजय एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर मैनेजर हैं। उनका काम ऐसा है कि हफ्ते में चार-पाँच दिन वो बाहर रहते हैं — कभी मुंबई, कभी बैंगलोर, कभी हैदराबाद। घर में ज्यादातर समय सिर्फ मैं और भाभी ही रहते हैं। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था। भाभी मुझे बहुत प्यार से “राहुल बेटा” कहकर बुलाती थीं, अच्छा खाना बनाती थीं, मेरी पढ़ाई का ध्यान रखती थीं। लेकिन पिछले छह-सात महीनों से उनका व्यवहार अचानक बदल गया था।

अब वो मेरे पास ज्यादा से ज्यादा बैठने लगी थीं। टीवी देखते समय मेरे कंधे पर सिर रख देतीं, कभी मेरे बालों में हाथ फेरतीं, कभी बात करते समय मेरी जाँघ पर हाथ रख देतीं। मैं समझ गया था कि भाभी में कुछ बदलाव आ रहा है, लेकिन मैं चुप रहता था। वो मेरी भाभी थीं, भाई की बीवी। सोच-सोचकर मैं खुद को रोक लेता था।
उस दिन शनिवार था। भैया सुबह सात बजे ही मुंबई के लिए फ्लाइट पकड़ चुके थे। उन्होंने कहा था कि वो रात दस बजे के बाद लौटेंगे। घर में सिर्फ मैं और भाभी थे। मैं लिविंग रूम के सोफे पर लेटा हुआ मोबाइल पर क्रिकेट मैच देख रहा था। भाभी रसोई से निकलकर आईं। उन्होंने हल्की क्रीम कलर की साड़ी पहनी हुई थी। साड़ी का ब्लाउज काफी टाइट था, जिसकी वजह से उनकी भारी चूचियाँ साफ उभरी हुई थीं। पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, जिससे उनकी नाभि और पेट की गोरी त्वचा झाँक रही थी।

“राहुल, मेरे पैर बहुत दर्द कर रहे हैं बेटा,” भाभी ने नरम और थोड़ी शरमाती हुई आवाज में कहा। “पूरे दिन खड़ी-खड़ी काम किया है। थोड़ा मालिश कर दोगे?”

मैं चौंक गया। “भाभी… मैं… कैसे करूँगा?”

“अरे पागल लड़के, बस पैर ही तो हैं। तू मेरा छोटा देवर है, भाई जैसा। शर्मा क्यों रहा है?” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा और सोफे पर आराम से लेट गईं। अपनी साड़ी को थोड़ा ऊपर सरकाकर दोनों पैर मेरी तरफ फैला दिए। उनकी पतली पिंडलियाँ और गोरी जाँघें आधी नंगी हो गईं।

मैं हिचकिचाते हुए उनके पैरों के पास बैठ गया। उनके पैर मेरे हाथों में थे — नरम, मुलायम, हल्की-हल्की महक वाली। मैंने धीरे-धीरे उनकी पिंडलियों की मालिश शुरू कर दी। भाभी आँखें बंद करके लेटी रहीं और हल्की सिसकारियाँ निकालने लगीं।

“आह… राहुल… बहुत अच्छा लग रहा है… हाथों में जादू है तेरे… और ऊपर करो… जाँघों तक…”

उनकी आवाज में एक अजीब-सी मिठास और कंपन था। मैंने हिम्मत करके उनकी जाँघों तक मालिश शुरू कर दी। साड़ी और ऊपर सरक गई। अब उनकी जाँघों का बड़ा हिस्सा मेरे सामने था। मेरे हाथ काँप रहे थे। भाभी ने अचानक मेरे एक हाथ को पकड़ लिया और उसे अपनी जाँघों के और अंदर ले गईं।

“भाभी… ये क्या कर रही हैं?” मैं घबरा गया।

“चुप कर राहुल। आज बहुत दिनों से मन कर रहा था। भैया तो महीने में एक-दो बार भी घर नहीं आ पाते। जब आते हैं तो थके-हारे सो जाते हैं। मुझे भी तो इंसान हूँ ना… प्यास लगती है…” उन्होंने मेरी आँखों में गहरी नजर डालते हुए कहा।

उनकी साँसें अब तेज हो चुकी थीं। उन्होंने खुद अपना पल्लू सरका दिया। ब्लाउज के ऊपर से उनकी चूचियाँ उभर रही थीं। मैं स्तब्ध बैठा था। भाभी ने मेरे दूसरे हाथ को भी पकड़कर अपने ब्लाउज पर रख दिया।

“दबा इन्हें… जोर से… मुझे बहुत अच्छा लगेगा।”

मेरा दिमाग लड़ रहा था, लेकिन शरीर नहीं मान रहा था। मैंने उनके ब्लाउज के हुक खोल दिए। ब्रा में लिपटी उनकी भारी, गोल चूचियाँ बाहर आ गईं। गुलाबी निप्पल्स पहले से ही खड़े हो चुके थे। मैंने दोनों हाथों से उन्हें दबाया। भाभी की आह निकल गई।

“आह… हाँ राहुल… और जोर से… चूस ले इन्हें… सालों से किसी ने ठीक से नहीं छुआ…”

मैं झुक गया और एक चूची मुंह में ले ली। चूसने लगा। भाभी मेरे बालों में हाथ फेर रही थीं और कराह रही थीं। “राहुल… तू बहुत अच्छा है… मुझे आज पूरी तरह चोद दे… मैं तेरी हूँ आज…”

उन्होंने मेरी शर्ट उतार दी और मेरे पैंट का बटन खोल दिया। मेरा लंड पहले से ही पूरा सख्त हो चुका था। भाभी ने उसे बाहर निकाला और मुट्ठी में कसकर पकड़ लिया।

“वाह… कितना मोटा और लंबा है तेरा लंड… भैया का तो आधा भी नहीं है। आज से ये मेरी चूत का मालिक है।”

भाभी ने मुझे सोफे पर लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गईं। उन्होंने अपनी साड़ी और पेटीकोट पूरी तरह ऊपर कर दिया। उनकी पैंटी गीली हो चुकी थी। उन्होंने पैंटी उतारी। उनकी चूत साफ, गुलाबी और पहले से ही रस से तर थी। उन्होंने मेरा लंड अपनी चूत पर रखा और धीरे-धीरे बैठने लगीं।

“आह… राहुल… कितना मोटा है… मेरी चूत फाड़ रहा है… धीरे… आह…”

धीरे-धीरे पूरा लंड उनकी चूत में समा गया। भाभी की आँखें बंद हो गईं। वो ऊपर-नीचे होने लगीं। उनकी चूचियाँ जोर-जोर से उछल रही थीं। मैंने उन्हें दोनों हाथों से पकड़कर दबाया और चूसा।

“हाँ… और जोर से चोद मुझे… राहुल… भाभी की चूत को फाड़ डाल… आह… बहुत दिनों बाद मिला है असली मर्द…”

मैंने उन्हें पलट दिया। अब भाभी कुत्ते की तरह घुटनों और हाथों के बल थीं। उनकी गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने उनकी गांड पकड़ी और पीछे से जोर से लंड अंदर डाला।

“आआह… फट गई… लेकिन मजा आ रहा है… और तेज… चोदो मुझे… जोर-जोर से…”

हर धक्के पर भाभी की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। फच-फच की आवाज के साथ उनका बदन हिल रहा था। मैं उनकी कमर पकड़कर तेज-तेज धक्के मार रहा था। भाभी कई बार झड़ चुकी थीं। उनकी चूत मेरे लंड को निचोड़ रही थी।

रात भर हमने कई बार सेक्स किया। पहले सोफे पर, फिर फर्श पर, फिर उनके बेडरूम में। भाभी ने मुझे तीन बार पानी छोड़ने दिया — पहली बार उनकी चूत में, दूसरी बार उनके मुंह में और तीसरी बार उनकी चूचियों और पेट पर। हर बार वो मुझे और उकसातीं — “और दो… और पानी दो… मेरी चूत भिगो दो…”

सुबह के चार बज चुके थे। हम दोनों थककर बेड पर लेटे थे। भाभी मेरे सीने पर सिर रखे लेटी थीं। उनकी उँगलियाँ मेरे लंड को हल्के-हल्के सहला रही थीं। उन्होंने धीरे से कहा,

“राहुल, आज जो हुआ वो हमारा राज रहेगा। भैया को कभी मत बताना। लेकिन जब भी वो बाहर जाएगा, तू मुझे इसी तरह चोदना। मैं अब तेरे बिना नहीं रह सकती। पैर मालिश तो बस बहाना था… असल में मुझे तेरे लंड की बहुत जरूरत थी।”

मैंने उनके माथे को चूमा और बोला, “जितनी बार चाहो भाभी… तुम्हारी चूत अब मेरी है। जब मन करे, बस कह देना — पैर दर्द कर रहे हैं।”

उस दिन के बाद भाभी के बहाने बदल गए। कभी “पैर दर्द कर रहा है”, कभी “कमर में दर्द है”, कभी “आज ब्लाउज बहुत टाइट हो गया है, खोल दो”, कभी “रात को नींद नहीं आ रही, पास सो जा”। और हर बहाने के पीछे एक ही मकसद था — मुझे जबर्दस्ती अपने पास बुलाकर चुदवाना।

कभी-कभी वो मुझे रसोई में खड़े-खड़े चोदतीं, कभी बालकनी में, कभी बाथरूम में। उनकी भूख दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी। मैं भी अब उनका दीवाना हो चुका था। भाभी की चूत, उनकी चूचियाँ, उनकी गांड — सब कुछ मुझे पागल कर देता था।

ये कहानी अभी भी जारी है। भैया जब भी बाहर जाते हैं, भाभी मुझे मैसेज करती हैं — “राहुल, जल्दी आ। पैर बहुत दर्द कर रहे हैं।” और मैं जान जाता हूँ कि आज फिर भाभी की चूत मेरे मोटे लंड की राह देख रही है।

मैथ्स टीचर ने लंड पर शहद डालकर चूसा

मेरा नाम राजू है। ये बात तब की है जब मैं 18 साल का था। मैं एक अच्छे खानदानी परिवार से हूं, जहां सब कुछ आरामदायक और शानदार था। सेक्स की दुनिया से मेरा वास्ता 14 साल की उम्र से ही हो गया था। मैं खूब सेक्स स्टोरी बुक्स पढ़ता, दिन में कम से कम एक बार मुठ मारता और कल्पनाओं में खो जाता। लेकिन असल जिंदगी में कभी कुछ नहीं हुआ।

तब मेरी लाइफ में आई ललिता। 28 साल की, कोल्लम की रहने वाली, बहुत ही स्वादिष्ट और आकर्षक। मेरी आंटी की दोस्त थीं, इसलिए हमारे बड़े से घर में पेइंग गेस्ट बनकर रहने लगीं। घर में सिर्फ मैं और मम्मी थे, बाकी सब जॉब्स के सिलसिले में बाहर। ललिता मिडिल क्लास फैमिली से थीं, लेकिन उनकी खूबसूरती देखकर कोई भी पागल हो सकता था।

उनका फिगर? वाह! गोल-गोल, परफेक्ट शेप वाली छातियां, कसी हुई कमर, और वो गदराई हुई गांड – बिल्कुल वीणा के पिछले हिस्से जैसी, निचली और भारी। घर में वो स्कर्ट और लंबा जंपर पहनती थीं। ब्रा तो अक्सर नहीं पहनती थीं, इसलिए जंपर के नीचे उनकी छातियां आजाद घूमती रहतीं। गहरी नाभि, जो देखते ही मन में तूफान ला देती।

मैथ्स में मैं बहुत कमजोर था। मम्मी ने उन पर प्रेशर डाल दिया कि मुझे ट्यूशन दो। ललिता ने हामी भर ली। स्कूल के बाद रोज शाम को मेरे कमरे में क्लास होती। वो पहले फ्लोर पर मेरे कमरे के बगल में ही रहती थीं। बाहर से वो बहुत रिजर्व्ड और सख्त लगतीं, खासकर मेरी उम्र के लड़कों से। लेकिन अंदर से? वो एकदम आग थीं।

एक दिन मैं पानी पीने नीचे गया। वो फर्श पर बैठकर मम्मी के साथ खाना बना रही थीं। जंपर का कट गहरा था। जब उन्होंने झुककर कुछ लिया, तो उनकी दोनों छातियां पूरी तरह दिख गईं – गोल, सफेद, ब्राउन निपल्स के साथ। मैं वहीं खड़ा रह गया। वो नहीं जानती थीं कि मैं देख रहा हूं। उस दिन से उनकी वो छातियां मेरी रातों की रानी बन गईं। मैं कल्पना करता – उनकी छातियां चूस रहा हूं, गांड सहला रहा हूं, नाभि में जीभ घुमा रहा हूं – और मुठ मारता।

लेकिन मैं जानता था, ये सपने कभी सच नहीं होंगे। वो मुझे बहुत सख्ती से पढ़ाती थीं।

फिर एक दिन मौका आ गया। मम्मी कोइंबटूर में किसी की शादी में चली गईं। घर में सिर्फ मैं और ललिता। मैं अपने कमरे में बैठा एक हॉट सेक्स मैगजीन पढ़ रहा था। उसमें एक कहानी थी – 18 साल के लड़के को उसकी ट्यूशन टीचर सिड्यूस करती है। कहानी में लड़का टीचर को मलयालम फिल्म “रतिनिर्वेदम” की हॉट सीन बताता है। मैं वैसे ही सपना देख रहा था कि ललिता मेरी टीचर हैं और मैं वो लड़का।

अचानक वो कमरे में आ गईं। मैं छुपा नहीं पाया। उन्होंने मैगजीन और फिल्म मैगजीन दोनों मेरे किताबों के बीच से निकाल लीं। मैं घबरा गया। पैरों तले जमीन खिसक गई। मैंने हाथ जोड़कर मिन्नतें कीं – “ची, प्लीज मम्मी को मत बताना। ये मेरी गलती है।”

लेकिन वो मुस्कुराईं, मैगजीन लेकर अपनी रूम में चली गईं। मैं शॉक में बाथरूम चला गया। एक घंटे बाद वो वापस आईं। चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान थी।

“रख लो ये किताबें, लेकिन बहुत सावधानी से,” उन्होंने कहा। फिर क्लास शुरू हुई, लेकिन आज उनका मूड बिल्कुल अलग था। वो मुस्कुरा-मुस्कुराकर बात कर रही थीं। मैं समझ गया – उन्होंने वो कहानी जरूर पढ़ी होगी।

उन्होंने कुछ प्रॉब्लम्स सॉल्व करवाए और बाथ लेने चली गईं। नहाकर आईं तो मेरे बिल्कुल पास खड़ी हो गईं। गीली बालों से महकती हुई जाई साबुन की खुशबू। उनका बदन मेरे कंधे से छू रहा था। अचानक उन्होंने हाथ मेरे कंधे पर रखा, मेरे कान के पास मुंह लाकर फुसफुसाया,

“रजू… क्या तुम भी चाहते हो कि मैं तुम्हें उसी लड़के की तरह सिखाऊं… जैसा मैगजीन में है?”

मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। मैं तो सपने में भी नहीं सोच सकता था कि सख्त ललिता ऐसा बोलेंगी। बाहर अचानक बारिश शुरू हो गई। तेज बारिश, गरज और बिजली। उन्होंने कहा, “चलो डाइनिंग रूम में खाना खाते हैं।”

रात 9:30 बजे खाना खत्म हुआ। वो अपनी रूम में चली गईं। थोड़ी देर बाद उनकी आवाज आई, “रजू… इधर आओ ना।”

मैं गया। कमरे में सिर्फ हल्की लाइट जल रही थी। वो डबल बेड पर लेटी थीं। साड़ी ठीक वैसी ही जैसे फिल्म की रति वाली – लेकिन उन पर वो साड़ी और भी सेक्सी लग रही थी। सफेद पारदर्शी साड़ी, जिसमें उनकी गोल छातियां साफ दिख रही थीं। निपल्स खड़े होकर साड़ी को ऊपर उठा रहे थे। गहरी नाभि पूरी तरह खुले में थी। साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, जिससे उनकी जांघें और प्यारी-सी लव ट्रायंगल की आउटलाइन झलक रही थी।

मैं बिस्तर के पास बैठ गया। उनकी आंखें बंद थीं। मैंने धीरे से साड़ी का पल्लू हटाया। पहली बार 18 साल का लड़का किसी नंगी औरत को इतने करीब से देख रहा था। उनका बदन परफेक्ट था – न तो ज्यादा मोटा, न पतला। गोल्डन बालों वाली मुलायम चूत, भारी छातियां, कसी हुई गांड।

अचानक उन्होंने मुझे खींचकर बिस्तर पर लिटा लिया। उनके होंठ मेरे होंठों पर आ गए। गहरी किस। उनकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई। मैं भी जवाब दे रहा था। उन्होंने मेरी शर्ट उतारी, मेरी छाती चूमने लगीं। निपल्स को चूस-चूसकर लुभा रही थीं। फिर नीचे उतरीं… पेट… और आखिरकार मेरे पैंट खोल दिए।

मेरा लंड पहले ही पूरा खड़ा हो चुका था। 7 इंच का मोटा, कड़ा लंड। उन्होंने उसे हाथ में लिया, आंखें फैल गईं। “वाह रजू… इतना बड़ा…!” उन्होंने फ्रिज से शहद की बोतल निकाली। ठंडा शहद मेरे लंड पर डाला। फिर पूरा मुंह में ले लिया। जैसे आइसक्रीम चूस रही हों। गर्म मुंह और ठंडा शहद… मैं पागल हो गया। उनकी गति तेज होती गई। मैं कांपने लगा। आखिरकार मैं उनके मुंह में ही झड़ गया। उन्होंने सारा रस चटकर पी लिया।

“मुझे भी झड़ गया रजू…” उन्होंने सांसें लेते हुए कहा, “तुम्हारा स्वाद शहद के साथ… लाजवाब है।”

अब मेरी बारी थी। मैंने उनके चेहरे को चूमा, कान की लोब चूसी, गर्दन चूमते हुए उनकी छातियों तक पहुंचा। दोनों छातियां बारी-बारी से चूसीं, निपल्स को हल्के-हल्के दांतों से दबाया। वो कराह रही थीं, “हम्म… रजू… और जोर से…”

फिर नाभि। मैंने उसमें जीभ घुमाई। वो गहरी थी, बिल्कुल आइसक्रीम कप जैसी। आखिरकार मैं उनकी जांघों के बीच पहुंचा। मुलायम बाल हटाकर उनकी गीली चूत चूमने लगा। जीभ अंदर-बाहर। क्लिटोरिस को चूसता। वो सांप की तरह फनफना रही थीं। दोनों हाथों से मेरे सिर को अपनी चूत में दबा रही थीं। कुछ ही देर में वो जोर से झड़ गईं।

थोड़ी देर आराम के बाद उन्होंने मुझे खींचा, “रजू… अब मुझे ले लो… मैं तैयार हूं।”

मैं उनके ऊपर चढ़ा। उन्होंने तेल लगाकर मेरा लंड अपनी चूत पर रखा। बहुत धीरे-धीरे मैं अंदर गया। उनकी चूत बहुत टाइट थी। गर्मी और नमी… अनमोल। हम दोनों साथ-साथ हिलने लगे। फिर उन्होंने पोजीशन बदली। अब वो ऊपर थीं। उनकी छातियां ऊपर-नीचे उछल रही थीं। मैंने उन्हें जोर से पकड़ लिया। उनकी गति तेज होती गई। हम दोनों एक साथ झड़ गए।

उस रात हम दो बार और प्यार कर चुके थे। सुबह 8 बजे तक सोए रहे।

अगले दो दिन घर खाली था। हमने हर पोजीशन ट्राई की – डॉगी, 69, खड़े-खड़े… वो पूरी तरह आजाद थीं। नहाते वक्त उन्होंने मुझे दिखाया कि उनकी छातियों, नाभि, जांघों और गांड पर मेरे निशान कितने प्यारे लग रहे हैं। मुस्कुराते हुए बोलीं, “कुट्टा… तूने मुझे क्या कर दिया है?”

फिर हम कोल्लम चले गए। वहां उनके घर में भी कोई नहीं था। वहां भी हमने खूब प्यार किया। एक दिन उन्होंने बताया कि उनकी कजिन गीता (30 साल) भी कल आ रही है। गीता के साथ उनकी लेस्बियन रिलेशनशिप थी, लेकिन गीता कभी लड़के के साथ असली मजा नहीं ले पाई थी। ललिता ने गीता को मेरे बारे में बताया था।

“डरो मत रजू,” उन्होंने मेरी छातियों के बीच मुंह रखते हुए कहा, “कल तुम दोनों को साथ में देखूंगी… और शायद हम तीनों साथ भी… अगर तुम चाहो।”

मैं मुस्कुराया। ललिता ने मुझे चूम लिया।

जिंदगी अचानक बहुत खूबसूरत हो गई थी। मेरी सेक्स टीचर ने मुझे न सिर्फ सेक्स सिखाया, बल्कि प्यार की असली मिठास भी दी। और ये सिर्फ शुरुआत थी…

मेरे चारो स्टूडेंट मुझे रोज चोदता है

मेरा नाम सुधा है मैं 28 साल की हूँ मेरी शादी को 6 साल हो गए पर कोई बच्चा नहीं हो रहा है। पति के साथ मैं कोटा में रहती हूँ। पति सरकारी नौकरी में है। वो तो सुबह जाते हैं और रात के करीब आठ बजे तक आते है। मैं पढ़ी लिखी हूँ। और मैं चार लडके को ट्युसन पढ़ाती हूँ। वो चारो मेरे घर पर आते हैं पढ़ने के लिए। सभी व्यस्क है। आखिर ये ट्युसन क्लास चुदाई की क्लास में कैसे बदल गया वही बता रही हूँ। और अब तो ट्युसन बाद में पहले चुदाई करवाती हूँ फिर एक घंटे की चुदाई के बाद एक घंटे क्लास लेती हूँ। मैं भी खुश और चारो स्टूडेंट भी खुश।

मैं बहुत ही हॉट और सेक्सी हूँ। मेरी चूचियां 34 साइज की है। मेरे गांड गोल है उभार है, कमर पतली है। मेरे लम्बे लम्बे बाल है। मेरे होठ नैचुरली पिंक है मैं गोरी हूँ। जब मैं साडी पहनती हु तो कहर ढाह देती हूँ। मेरे स्तन का उभार बाहर के तरफ है और नुकीली है। मेरी नाभि देखते ही अच्छे अच्छे का दिमाग और लंड में हरकत होने शुरू हो जाते है। मेरी कजरारी आँख जो लोगों का आकर्षण है।

जैसा की आपको पहले से ही पता है मैं साड़ी पहनती हूँ। वो मेरे अंग अंग दिखाई देते है। जब मेरे स्टूडेंट मुझे साडी में देखते थे तो खुश हो जाते थे कहते थे मैडम आप साडी में ही अच्छी लगती हो। सच तो ये है की मैं उन चारों को रिझाने की कोशिश भी करने लगी। मैं स्टाइलिस्ट ब्लाउज पहनती जिसमे डीप गला हो। बिना बाँह बाला ब्लाउज। जब झुकती थी कुछ बताने तो मेरी दोनों चूचियां दिखाई देती थी। उन लोगो की नजर मेरी चूचियों पर पड़ती। और वो लोग एक टक से देखते रहते। कई बार मैं आँचल सरका देती थी।

तो उनलोगो का लंड खड़ा हो जाता था। अब वो लोग मेरे में इंटरेस्ट लेने लगे। एक दिन की बात है। मैं बोल दी की तुम लोगो मुझे देखने की बजाय अगर पढाई पर ध्यान दे दो तो अच्छे नम्बर आ जायँगे। तो उसमे से एक बोला मैडम यही तो नहीं हो पा रहा है। पढाई में ध्यान नहीं लग रहा है। रात भर आपके बारे में सोचते रहती हु और अनिल तो पता नहीं क्या क्या करता है आपके बारे में सोच कर। अनिल सर झुका लिया मैं पूछ ली क्या है अनिल क्या करता है। वो एक ने कहा मैडम ये आपकी याद में हिलाता है रात में।

अनिल बोला नहीं मैडम रघु बोल रहा था वो ऐसा करता है कहता है मैडम का ब्रैस्ट बहुत मस्त है। तो दूसरे ने कहा तीसरा ये कहता है तो चौथा ये कहता है। मैं समझ गयी ये चारो मेरे दीवाने हो गए है और रात में सब मुठ मारता है। उसमे से एक ने कहा की मैडम इसके पास तो आपका फोटो भी है। ब्लाउज वाला जिस दिन आपका आँचल गिर गया था उसने फोटो खींच लिया अतः। मैं समझ गयी ये लोग आगे निकल चुका है।

मैं बोली क्या चाहता है तुमलोग। तो एक ने कहा मैडम हम चारो आपसे प्यार करते है। तो मैं बोली प्यार करता है मैं तो शादी शुदा हूँ।

पति सुबह ही चले गए बोलकर गए हो सकता है रात में नहीं आऊंगा. और वो चारो 10 बजे आ गए। दरवाजा खुला ही छोड़ी थी और मैं नहा रही थी। ताकि वो लोग अंदर आ जाये। वो चारो अंदर आ गया और पुकारने लगा। मैं बोली नहा रही हूँ। तुमलोगो बैठो। पर वो लोग बैठा नहीं मेरे बाथरूम के दरवाजे के पास आ गया और बोला मैडम प्लीज खोलो दरवाजा मैं नहाते देखना चाहता हूँ। पहले तो बोली नहीं नहीं। फिर भी वो लोग रिक्वेस्ट करने लगा और आखिर मैंने दरवाजा खोल दिया।

और तुम चारो एक औरत से प्यार करते हो और वो जो तुम्हारी ट्युसन टीचर है। तो वो चारो बोला मैडम आपको हम चारो बहुत खुश रखेंगे. तो मैं बोली कैसे खुश रखेगा? तो वो बोलै मैडम आपको सेक्स करना चाहता हूँ। वो लोग इतना खुल गया था सेक्स के लिए कह नहीं सकती है। मैं भी डोल गयी लगा की अगर मैं हां कह देती हूँ तो मजे भी लुंगी जवान लंड का और किसी को पता भी नहीं चलेगा और ये चुदाई का रिश्ता काफी समय तक चल सकता है।

फिर मैं बोली ठीक है। पर कल सुबह आना होगा दस बजे। वो मान गया उस दिन मेरे पति सुबह से दूसरे शहर जाने वाले थे। रात भर मैं सोचते रही की कल क्या होगा चार चार मिलकर चोदेगा तो चूत का क्या हाल होगा। पर मैं खुश भी हो रही थी और डर भी लग रहा था।

मैं नंगी था पर तौलिया लपेट ली। वो चारो अंदर आ गया और तुरंत ही मेरा तौलिया हटा दिया। मैं नंगी हो गयी एक ने झरना चला दिया। और चारो मेरे ऊपर टूट पड़ा। कोइ मेरी चूचियां दबा रहा था कोई मुझे चूम रहा था को गांड सहला रहा था। सबने कपडे खोल दिए और चारो का लंड सलामी दे रहा था। मैं भी जिसको चाहती उसमे होठ को चूसने लगी थी।

मैं निचे बैठ गई और चारों का लंड पकड़ पर बारी बारी से चूसने लगी। एक से एक लंड मोटा गोरा काला सब तरीके का लौड़ा। उसके बाद जैसे ही खड़ी हुई सब ने मुझे घेर लिया और अपना अपना लौड़ा मेरी गांड में तो चूत में तो मेरी जांघ में सटाने लगा और रगड़ने लगा। मेरी वासना भड़क गई थी। मेरे शरीर में बिजली दौड़ रही थी। अब मैं सब के लंड को चूत में लेना चाह रही थी। मैं बोली चलो बैडरूम में। सबने मुझे उठाया और मुझे बैडरूम में ले गया।

फर्स पर लेट गई टाँगे फैला दी। कोई मेरी चूचियां पी रहा था कोई मेरी चूत चाट रहा था कोई मेरे मुँह में लंड घुसा रहा था कोइ मेरे बदन को जीभ से चाट रहा था। मैं भी कभी किसी का लंड तो कभी किसी का लंड अपने मुँह में ले रही थी। और चाट रही थी। उसके बाद मेरी चुदाई शुरू हो गयी। एक एक लड़का मुझे पांच मिनट चोदता था तब तक मैं तीन के लंड को चाटती थी बारी बारी से। सब लोग मेरी जिस्म को सहला रहा था मेरी निप्पल को दबा रहा था। चूचियां दबा रहा था।

करीब २ घंटे तक तीनो ने मुझे चोदा मैं तीन से चार बार झड़ चुकी थी। और वो चारो भी दो दो बार खलास हो गया था। मेरे शरीर में लाल लाल निशान हो गए थे किसी ने कस के दबा लिए तो किसी ने जोर से किस कर लिया था। पर जो भी हुआ था दोस्तों बहोत मजा आया था। अब रोजाना चारो मिल कर मुझे चोदता है और मजे ले रही हूँ।

 

विधवा आंटी की चुदाई के बाद माल को मुंह पर झारा

मेरा नाम जिगनेश अग्रवाल है। मैं गुजरात के गाँधीनगर का रहने वाला हूँ। मैं हीरे का व्यापार करता हूँ। मेरा बड़ा सा शोरूम है जिसमे हीरे की सेल्स भी होती है और तराशने का काम भी होता है। मेरे शोरूम में रोज लाखो की सेल्स होती है। इस वजह से कई बार चोर, लुटेरे भी शोरूम को लूटने की कोशिश करते रहते है। मेरे यहाँ कुल 20 लोगो का स्टाफ है जिसमे 12 जेट्स स्टाफ है और 8 लड़कियाँ है। मैं सिर्फ खूबसूरत लड़कियों को ही जॉब कर रखता हूँ।

जब मैं उनका इंटरव्यू लेता हूँ तो पहले ही चूत की सेटिंग कर लेता हूँ। जो लड़की चुदने को तैयार हो जाती है उसे ही नौकरी देता हूँ। दोस्तों मैं क्या करूं हर समय मेरा लंड खड़ा ही रहता है। जितनी बुर चोदता हूँ उतनी ही मेरी प्यास बढ़ जाती है। मैं अपने यहाँ काम करने वाली आठो लड़कियों की बुर चोद चूका हूँ। कुछ दिन पहले मेरे यहाँ एक लड़की नौकरी छोड़ कर चली गयी थी। मैंने न्यूसपेपर में विज्ञापन दे दिया और एक मस्त 30 साल की आंटी नौकरी करने आ गयी। वो मुझसे उम्र में बड़ी थी इसलिए मैं उसको आंटी बोल रहा था। उसका इंटरव्यू मैंने लिया। वो सेल्स का काम जानती थी। उनकेपति गुजर चुके थे और वो विधवा औरत थी। उनका नाम शांति था।

“आंटी!! अंत में सबसे जरूरी सवाल की क्या आप मुझे खुश करोगी??” मैंने पूछा

वो कुछ नही बोली। मैंने उसे नौकरी दे दी। आंटी जी मेहनत से नौकरी करने लगी। वो सुबह 9 बजे शोरूम खुलने से पहले आ जाती और रात में 9 बजे ही जाती थी। उनकी मेहनत देखकर मैं बहुत खुश था। दोस्तों मेरे शोरुम में मेरे पिता जी भी बैठते थे। उनके सामने मैं किसी लड़की को लाइन नही देता था क्यूंकि वो बड़े सख्त मिजाज आदमी थे। पर उनके जाने के बाद मैं सीटियाबाजी में लग जाता था। अब मुझे कैसे भी करके आंटी को चोदना था। सोमवार वाले दिन मेरे पिताजी को डॉक्टर से मिलने जाना था। वो कार में बैठकर चले गये। मैं सीधा शांति आंटी के पास चला गया और उनसे मीठी मीठी बात करने लगा। मेरे स्टाफ में कुछ लड़के मेरी तरह ही चोदू टाइप के थे। उनको भी मैं सेल्स गर्ल्स की चूत दिलवा देता था। वो लोग मुझे देखकर मुस्की मारने लगे। वो इस बात पर हंस रहे थे की आज शांति आंटी की चूत चुदाई होने वाली थी।

“आइये!! स्टाफ रूम में चले” मैं शांति आंटी से बोला

वो मेरे पीछे पीछे चली आई।

“क्या बात है जिगनेश बेटा!!” वो कहने लगी

मैं हीरा का शोरुम चलाता था इसलिए मेरे पास हीरे की ज्वेलरी की कोई कमी नही थी। मैंने हीरे का एक छोटा सा डाईमंड पेंडेंट अपनी जेब से निकाला।

“आंटी!! मुझे लगता है ये आपका है” मैंने पेंडेंट को दिखाते हुए कहा

वो खुश हो गयी क्यूंकि ऐसे ही कोई मर्द किसी औरत को इतनी महंगी जेवेलरी नही दे देगा। डायमंड पेंडेंट को ले ली और देखने लगी। फिर मैंने उनको खुद ही गले में पहना दिया। वो समझ गयी की मेरा कोई स्वार्थ जरुर है।

“जिगनेश बेटा!! इतनी मेहरबानी क्यों?? कुछ चाहिये तो नही मुझसे??” वो हँसकर कहने लगी

आंटी भी समझ गयी थी की आखिर मुझे क्या चाहिये। वो जान गयी थी की मैं उनके गदराये बदन को भोग लगाना चाहता हूँ। उनकेबाद वो खुद ही मेरे से आकर चिपक गयी। किस चालु कर दी। मुझे चुम्मा लेने लगी। वो साड़ी ब्लाउस में बहुत जँच रही थी। उन्होंने गोल्डन कलर के कपड़े वाला ब्लाउस पहना था जो आगे से काफी खुला हुआ था। मैं उनके 36” के मस्त मस्त आम देख सकता था। शांति आंटी का फिगर काफी सेक्सी और सुडौल था। 36 32 36 का ऐसा फिगर था की किसी भी मर्द का लंड खड़ा करवा दे। मैं भी देखकर पागल हो गया। मैं भी उनको बाहों में भरके किस करने लगा।

“जिगनेश बेटा!! मैं तो विधवा हूँ। मेरे लिए इस तरह की जेवेलरी का कोई काम नही” वो बोली और डायमंड पेंडेंट मुझे लौटाने लगी। मैं उसी वक्त उनकी मांग में ऊँगली से झूठ मूठ सिंदूर भर दिया प्रतीकात्मक रूप में।

“लो अब आप विधवा नही हो!! आप की शादी अब मुझसे हो गयी” मैंने कहा

उनकेबाद वो इमोशनल हो गयी और मेरे गले लग गयी। मुझे सही मौका मिल गया था। मैंने शांति आंटी को कसके दोनों हाथों से जकड़ लिया और उनके ओंठ पर ओंठ रख दिया और जल्दी जल्दी चुम्बन लेने लगा। वो भी मुझे चूसने लगी। हमारा प्यार मोह्बब्ब्त इस तरह से चालू हो गया। हम दोनों अच्छे से किस करने लगे। दोस्तों शांति आंटी अभी भी अच्छी माल लगती थी। बस थोड़ी सी ऐज जादा लगती थी। पर उनकेबावजूद भी सेक्सी औरत थी। मैं उनकी गर्म गर्म साँसों को पीने लगा।

शांति आंटी भी मेरे होठो को चूसने लगी। कुछ देर बाद हम दोनों का चुदाई वाला मौसम बन गया था। स्टाफ रूम में टेबल कुर्सी लगी हुई थी जिस पर लोग बैठकर अपना लंच करते थे। मैं उसी बेंच पर बैठ गया और आंटी को भी बिठा दिया। मै फ़ौरन ही उनकी कड़ी कड़ी 36” की शानदार चूचियों पर हाथ लगा दिया और ब्लाउस के उपर से ही दबाने लगा। शांति आंटी “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ…उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ….” करने लगी। उनको भी मजा आने लगा।

“जिगनेश बेटा!! तेरा इरादा क्या है??” वो चिहुक कर पूछने लगी।

“मेरा इरादा तो आपकी मस्त मस्त बुर को चूसने का है आंटी जी” मैं बोला

वो कुछ नही बोली और ब्लाउस खोलने लगी। अपना ब्लाउस उतार डाली। उन्होंने काली रंग की ब्रा पहनी थी। दोस्तों शांति आंटी की 36” की चूचियां बड़े हिफाजत से उनकी ब्रा में कैद थी। मैं हाथ से दबाने लगा। उन्होंने ब्रा भी खोल डाली और साइड रख दी। जैसे ही मैंने उनके बड़े बड़े कबूतर को देखा तो मौज आ गयी। इतने बड़े बड़े दूध मैंने आजतक नही देखे थे। फिर मैंने उनको बैठने वाली बेंच पर लिटा दिया। बेंच काफी लम्बी थी जिसपर शांति आंटी आराम से लेट सकती थी।

वो लेट गयी। मैं भी उनके उपर लेट गया। मैंने अपना मुंह उनकी बड़ी बड़ी चूची पर रख दिया और किस करने लगा। हाथ से दाबना चालू कर दिया। वो “ओहह्ह्ह….अह्हह्हह…अई..अई. .अई… उ उ उ उ उ…” करने लगी। मैं हाथ में उनके आमो को लेकर कस कसके दबाने लगा। वो भी मजा पाने लगी। फिर मैंने चूसना चालू कर दिया। अब उनके गले में सिर्फ वही डायमंड पेंडेंट था जो मैंने उनको दिया था। मैं उनकी जवानी का आज पूरा का पूरा रस पीना चाहता था। इसलिए मैंने बिना समय गवाये उनके दूध को मुंह में लेकर चूसना चालू कर दिया। शांति आंटी सी सी ऊई उई करने लगी।

“बेटा धीरे धीरे चूसो!! दर्द होता है मेरे दूध में! आराम से!!” वो बोली

मैं चूसने लगा पर जल्दी ही मेरी स्पीड बढ़ गयी। आंटी के दूध की मैं क्या तारीफ़ क्यों। बहुत खूबसूरत और सुडौल थे। कड़ी कड़ी चूचियां थी और जरा भी लटकी हुई न थी। अच्छे से टाईट चूचियां थी। मैं दोनों हाथ से दोनों छाती को दबाता और मुंह में लेकर चूस रहा था। अपना मुंह और दांत चला चलाकर चूस रहा था। शांति आंटी पूरा सहयोग कर रही थी। मेरे सिर को पकड़कर चुदासी होकर सहलाती जा रही थी।

“चूस ले जिगनेश बेटा!! आज तुम मेरे आशिक बन जाओ” वो बोले जा रही थी आँख बंद करके

मैं धकाधक उनकी जवानी का रस पी रहा था। मैंने उनकी एक चूची को जब अच्छे से चूस डाला तो दूसरी वाली चूसने लगा।

“बेटा!! तुम तो बड़ी मस्त चुसाईं करते हो!!” वो बोली

मैं अब उनके गुप्त अंगो को देखना चाहता था। उनकी चूत और गांड के दर्शन करना चाहता था। मैंने अब उनके पेट से खेलना शुरू कर दिया। उस पर किस करने लगा। हाथ से सहलाने लगा। आंटी फिर से “आआआअह्हह्हह…..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….”करने लगी। वो भी अपनी साड़ी खोलने लगी। उसे भी उतार डाली। शांति आंटी ने आसमानी रंग का पेटीकोट पहना हुआ था। उसकी डोरी खोलने लगी। मुझे बड़ी मौज गयी। उनके पेटीकोट के अंदर ही उनकी मस्त मस्त चूत छुपी हुई थी। पेटीकोट को आंटी जी उतार डाली। मैं उनकी काली पेंटी से खेलने लगा। अब उनकी पेंटी पर मैं हाथ से जल्दी जल्दी सहलाने और मलने लगा। आंटी को मजा आने लगा।

“अच्छा लग रहा है जिगनेश बेटा!! और करो!! आआआअह्हह्हह…..” वो कहने लगी

मैं उनकी चुस्त काली पेंटी के उपर से सहलाने लगा और उनको खूब मजा दिया। उनकी मस्त मस्त डबलरोटी जैसी चूत मुझे उपर से दिख रही थी। मैं काफी चुदासा हो गया था और उपर से ही जीभ निकालकर चाटने लगा। शांति आंटी “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ.”करने लगी। उसके बाद मेरी कामुकता बढ़ गयी और मुझे उनकी पेंटी उतारनी पड़ी। दोस्तों जब उनकी मस्त मस्त सावली सलोनी चूत के दर्शन हुए तो चूत अपने ही रस से नहा चुकी थी। मैं भी झुककर उनकी चूत पर जीभ लगाकर जोर जोर से चाटने लगा। वो अपनी गांड उठाने लगी। उनकी हालत किसी रंडी जैसी हो गयी थी। मैं तो किसी सेक्सी कुत्ते की तरह चाट रहा था जल्दी जल्दी। मैं आज उनका पूरा रस पी लेना चाहता था। शांति आंटी टांग खोलकर बड़े मजे से मुझे अपनी मस्त मस्त रसीली बुर पिला रही थी।

उनकी चूत की मैं क्या तारीफ़ करूँ बड़ी सेक्सी और गुलाबी दिखती थी। किसी परी की तरह दिख रही थी। चूत के लब बड़े बड़े साइड साइड को लटक रहे थे। आंटी के हसबैंड ने उनको चोद चोदकर चूत फाड़ डाली थी। मैंने भी अपनी ऊँगली उनके फटे हुए भोसड़े में डाल दी और जल्दी जल्दी चलाने लगा। शान्ति आंटी “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी… हा हा.. ओ हो हो….” करने लगी। मेरी अंदर भी वासना और हवस का ज्वालामुखी फूट पड़ा। मैं आंटी की चूत में जल्दी जल्दी ऊँगली चलाने लगा जिससे उनको बड़ी कामुकता मिलने लगी। अब वो और तेज तेज आवाज निकालने लगी। मैं भी जोश में आकर एक हाथ से ऊँगली उनकी मस्त मस्त रसीली चूत में दौड़ाने लगा और जीभ लगाकर प्यासे कुत्ते की तरह चाटने लगा। शान्ति आंटी को बड़ा आनन्द मिलने लगा।

“करते रहो जिगनेश बेटा!!! मेरी चूत में और ऊँगली करो!!” वो अपनी कमर उठाकर कहने लगी

मैं उनकी बात मानने लगा। मैंने 17 18 मिनट उनके फटे भोसड़े में ऊँगली चलाकर उनको मार डाला। अब चूत को अच्छी तरह से चाट भी चूका था। मैं भी कपड़े खोलने लगा। लंड हाथ में लेकर हिलाने लगा। दोस्तों मेरा लंड 9” का बड़ा सा खीरे जैसा था। मैं हाथ में लेकर जल्दी जल्दी मुठ देने लगा। कुछ ही देर में लंड लड़की जैसा मजबूत हो गया।

“आओ बेटा!! अब मेरी प्यास बुझा डालो!! जल्दी से मोटे लंड से मुझे चोद डालो” शांति आंटी बोली और दोनों पैर खोल दी।

दोस्तों मेरे शोरुम के इस स्टाफ रूम की बेंच काफी पतली थी, इस वजह से ये डर था की कही आंटी काम लगवाते समय नीचे न गिर जाए। अब मुझे हिसाब से उनको चोदना था। मैंने बेंच के दोनों तरफ अपने पैर डाल दिए। फिर सामने शांति आंटी की गद्दीदार बड़ी सी उभरी हुई चूत मेरा इन्तजार कर रही थी। मैंने अपने लंड को पकड़ा और उनकी चूत की पिटाई करने लगा। वो “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ…ऊँ…ऊँ….”करने लगी। मैंने काफी पिटाई की उनकी चूत की। अब लंड के सुपाडे से उनके छेद पर रगड़ने लगा। वो आनंदित होने लगी। 5 मिनट मैंने उनकी चूत पर अपना गुलाबी सुपाडा रगड़ा। फिर धक्का मारकर अंदर डाल दिया। आंटी आऊ कहने लगी। अब मैंने उनकी ठुकाई शुरू कर दी।

काम लगाना शुरू कर दिया। आंटी मुंह बनाने लगी जैसे सब औरते बनाती है। मैंने धक्को की स्पीड धीरे धीरे बनानी शुरू कर दी। आंटी बेंच पर उछलने लगी। मुझे लगा की कही गिर न जाए, इसलिए मैंने उनके कंधे पकड़ लिए।

“….उंह उंह उंह हूँ.. ohh!! yes yes मजा आ रहा है जिगनेश बेटा!! और करो !! .अई…..”शांति आंटी भी मुझे प्रोत्साहित करने लगी

उनके हावभाव देककर मुझे जादा ख़ुशी मिल रही थी। दोस्तों वो भरे हुए खूबसूरत जिस्म वाली मालकिन थी। इसलिए उन जैसी संस्कारवान औरत को चोदना एक बड़े गर्व की बात थी। इसलिए मैं धकाधक उनका काम लगाने लगा। अब धीरे धीरे हम दोनों के बीच में बड़ी हवस वाला रिश्ता बन गया था। मैंने नीचे निगाह डाली तो मेरा लंड जल्दी जल्दी उनकी चूत के बिल में सटाक सटाक घुसकर तहलका मचा रहा था। आंटी जी “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..” बोले जा रही थी।

मैं जल्दी नही झड़ना चाहता था। इसलिए कुछ देर बाद जब मुझे लगा की आउट हो जाऊँगा तो मैंने जल्दी से लंड हाथ से पकड़कर बाहर खींच लिया। शान्ति आंटी दोनों टांग खोलकर किसी कुतिया की तरह बेंच पर मचलने लगी।

“जिगनेश बेटा!! मुझे अपना लंड चूसा दो” वो कहने लगी

मुझे भी उनका ऑफर अच्छा लगा। पर उससे पहले मैंने अपना मुंह उनकी बड़ी सी चूत पर लगा दिया और जल्दी जल्दी उसका खोया चाटने लगा। उनकी बुर अभी भी आग की तरह गर्म थी। मैं फिर से चाटने लगा। वो “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…” करने लगी और अपनी 36” की बड़ी बड़ी दूध को मसलने लगी। अपनी निपल्स को पकड़कर खुद ही मरोड़ने लगी। उनके ऐसे चुदक्कड वाले रूप में देखकर मेरी वासना और जाग गयी। मैं जल्दी जल्दी उनकी चूत का खोया चाटने लगा। फिर अपना लंड उनके मुंह में डाल दिया। वो चूसने लगी और हाथ में लेकर मुठ देने लगी। मुझे उस पतली की बेंच पर लेटना पड़ गया। शांति आंटी बैठ गयी। मेरे लंड को पकड़कर अच्छे से फेटने लगी। दोस्तों, एक बार फिर से मुझे आनन्द मिलने लगा। आंटी अब मेरे सुपाड़े को जीभ निकालकर चाटने लगी। उनको इतना मजा कभी नही आया था। कुछ देर गुलाबी सुपाडे को चाटी। फिर पूरा 9” लंड मुंह में उतार ली और मस्ती भरे अंदाज में चूसने लगी।

“क्या बात है आंटी जी!! आप तो किसी प्रोफेशनल रंडी की तरह चूसती हो जिसको पूरी ट्रेनिंग मिली होती है” मैं बोला

वो मेरी बात सुनकर और भी जोश में आ गयी और मस्ती से चूसने लगी। साथ में उनके हाथ बड़ी तीव्रता से फेटने लगी। दोस्तों एक बार फिर से मेरा लंड उनकी चूत फाड़ने को तैयार था।

“शांति आंटी!! अब आप मेरे मोटे लंड की सवारी करो!! इसको घुडसवारी का मजा लो!! आओ बैठो इसपर!!” मैंने कहा

मैं पतली सी उस लड़की की बेंच पर सम्भल कर लेट गया। शांति आंटी आकर मेरे लंड को अपनी मस्त मस्त चूत में घुसाकर लेट गयी। और झटके दे देकर सेक्स करने लगी। वो चुदाने लगी। मैं लेटे लेटे मजे लुटने लगा। धीरे धीरे शांति आंटी रफ्तार बना ली और लंड पर कूदने जैसी जैसे बच्चे रस्सी कूद वाला खेल खेलते है। मेरा 9” का मजबूत लंड उनकी बुर को फाड़ फाड़कर उसका हलुआ बनाने लगा। आंटी जी “……अई…अई….अई…..इसस्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….”करने लगी। उनका खुला हुआ भव्य स्वरुप मुझे दिख रहा था। वो मेरे सामने पूरी तरह से नंगी होकर लंड पर घुड़सवारी करने लगी। उनके सेक्सी गोरे जिस्म का एक एक अंग मुझे दिख रहा था। कुछ देर बाद धक्का देते देते आंटी झड़ गयी। उनका बदन ढीला पड़ गया। वो नीचे उतर गयी और बेंच पर लेट गयी। मैंने जल्दी जल्दी अपने लंड को फेटा और उनके मुंह पर माल की धार छोड़ दी।

टीवी देखने आई आंटी की चूत सहलाने लगा

ये मेरी सच्ची कहानी है। दोस्तों ये 16-17 साल पहले की बात है। उस समय सिर्फ मेरे ही घर में टीवी हुआ करता था क्यूंकि उस जमाने में टीवी बहुत महँगा हुआ करता था और कुछ लोग ही इसे खरीद पाते थे। नया नया टीवी चला था और मेरे पापा को टीवी देखने का बहुत शौक था इसलिए वो ले आये थे।

धीरे धीरे मेरे मोहल्ले के सब लोग मेरे घर टीवी देखने आने लगे। उस समय एक सीरियल टीवी पर आता था, जो बहुत प्रसिद्ध सीरियल था। मेरे मोहल्ले के सब लोग मेरे घर टीवी देखने आते थे। बच्चे तो बच्चे बड़े और बूढ़े भी मेरे घर टीवी देखने आया करते थे। दोस्तों मेरे घर के बगल में मिश्रा आंटी रहती थी।

वो स्वभाव से बहुत लालची औरत थी और मेरे घर आकर रोज दूध, चीनी, सब्जी, रोटी, ब्रेड माँगा करती थी। भगवान जाने वो कैसी लालची औरत थी की उसे सामान मांगने में बिलकुल शर्म नही आती थी। बाद में मुझे पता चला की वो अपने पति से खर्च के लिए पैसे मांग लेती थी पर सारे पैसों को वो बचा लेती थी और ऐसे ही काम चला लेती थी।

हम लोग उनहे मिश्रा आंटी कहते थे क्यूंकि वो मिश्रा जाति की थी। बाद में धीरे धीरे मुझे उनके चाल चलन में बारे में पता चला। उसके पति के नौकरी पर जाते ही उसके घर में कई मर्द आते थे और बारी बारी से उसकी चूत बजाते थे। जमकर उसकी रसीली बुर में लंड खिलाते थे और मिश्रा आंटी की चूत की आग की शांत करते थे।

वो गैर मर्दों से पैसो के लिए छिपकर चुदवा लेती थी। उसकी चुदाई की बात उसके पति को नही मालुम थी वरना वो उसकी माँ चोद देता। धीरे धीरे मुझे मिश्रा आंटी के चाल चलन के बारे में सब कुछ पता चल गया था। दोस्तों वो लालची भले ही हो पर उसका बदन बिलकुल भरा हुआ था।

धीरे धीरे मैं जब भी उसे देख लेता मेरा लंड खड़ा हो जाता था। मिश्रा आंटी के २ खूबसूरत बच्चे थे प्रियंका और राहुल। दोनों बच्चे दूध जैसे सफ़ेद थे पर मिश्रा जी तो बहुत काले थे। इसी से पता चलता था की वो मिश्रा अंकल के बच्चे नही थे। बल्कि मिश्रा आंटी जिन मर्दों को घर में बुलाकर चुदवा लेती थी वो बच्चे उनके ही थे।

पर मिश्रा अंकल गोरे बच्चों को देखकर बहुत खुश थे। उनको अपनी चुदकक्ड बीबी के बारे में कुछ पता नही था। धीरे धीरे मैं जान गया की अगर मैं मिश्रा आंटी को पटा लूँ तो इसकी चूत मुझे जरुर मिल जाएगी। इसलिए मैं अपने मिशन पर लग गया। मैं मिश्रा आंटी को खूब मस्का लगाने लगा और उसने हंस हंसकर बात करने लगा।

जब वो मेरे घर कुछ मांगने आती तो मैं उनको दे देता। फिर मिश्रा आंटी मेरे घर महाभारत सिरिअल देखने आने लगी। उस जमाने में इस नाटक को बहुत अच्छा और मजेदार नाटक माना जाता था। ये रविवार को शाम को आया करता था तो सड़के खाली हो जाया करती थी।

दुकानदार अपनी दुकाने बंद करके महाभारत देखने चले जाया करते थे। दोस्तों धीरे धीरे मिश्रा आंटी मेरे घर में महाभारत देखने आने लगी। उनको टीवी देखने का बहुत शौंक था। मेरे मोहल्ले के बच्चे भी मेरे घर टीवी देखने आया करते थे। मेरा घर लोगो से भर जाया करता था।

मुझे अच्छी तरह से मालूम था की मिश्रा आंटी एक नम्बर की अल्टर माल है और उनको नये नये लंड खाने का बड़ा शौक है। पर वो पैसे की लालची औरत थी। उस जमाने में ५० रूपए की बड़ी वैल्यू हुआ करती थी और ५० रुपया ५०० रूपए के बराबर माना जाता था।

मैं अच्छे से जानता था की अगर मैं मिश्रा आंटी से उसकी रसीली बुर मागूंगा तो वो मुझसे पैसे जरुर मांगेगी इसलिए मेरे पास टीवी ही एक हथियार था। अगले रविवार को जैसे ही मिश्रा आंटी टीवी देखने आई मैंने टीवी बंद कर दिया और स्टैबलाइजर के पीछे वाली बटन मैंने जला दी। बिजली का वोलटेज जादा हो गया और लाल बत्ती जलने लगी और टीवी बंद हो गया।

“अरे राजीव बेटा….जल्दी से टीवी खोल। महाभारत शुरू हो गया है!!” मिश्रा आंटी बोली.

“आंटी टीवी में कुछ खराबी आ गयी है और टीवी नही चलेगा!!” मैंने कहा.

ये सुनते ही मिश्रा आंटी बड़ी बेचैन हो गयी। टीवी उनकी कमजोरी थी। ये बात मैं अच्छे से जानता था। आंटी रोज किसी न किसी मर्द को घर में बुलाकर चुदवा लेती थी और पैसा कमा लेती थी। उनके पास पैसे ही कमी नही थी। उन्होंने तुरंत अपने कसे ब्लाउस में हाथ डाला और एक छोटा सा पर्स निकाला और उसमे ने मुझे ५० रूपए का नोट तुरंत दे दिया।

“जाओ राजीव बेटा, भागकर मिस्त्री बुला लाओ और जल्दी से टीवी बनवा दो!!” मिश्रा आंटी बोली और उनके जाते ही मैंने स्टैबलाइजर की पीछे की बटन दबा दी और टीवी शुरू हो गया। कुछ देर में आंटी आकर देखने लगी। आज मेरा उनको चोदने का फुल मूड था।

मेरी मम्मी घर के दूसरे कमरे में काम कर रही थी। मैं मिश्रा आंटी के लिए गरमा गर्म चाय बना लाया और उनको दे दी। “अरे वाह राजीव बेटा…क्या बात है आज तू मुझे बड़ा मस्का मार रहा है!!” मिश्रा आंटी बोली। मैं हंस दिया और उसके पास ही बैठकर महाभारत देखने लग गया।

दोस्तों उस जमाने में लोग इतने अमीर नही हुआ करते थे। सोफे किसी के पास नही हुआ करते थे। हम लोग भी जमींन पर बोरा बिछाकर टीवी देखा करते थे। मैं भी मिश्रा आंटी के बगल दीवाल से टेक लगाकर टीवी देख रहा था। धीरे धीरे मैं अपने हाथ से आंटी के पैर को छूने लगा। कुछ देर में वो जान गयी।

“राजीव बेटा!! ये क्या कर रहे हो!!!” मिश्रा आंटी हंसकर बोली। दोस्तों वो कभी गुस्सा नही करती थी। हमेशा हंसती रहती थी। गुस्सा करना तो जैसे उनको आता ही नही था।

“आंटी आप इतनी खूबसूरत हो की जब भी आपको देखता हूँ मुझे कुछ कुछ होने लग जाता है!!” मैंने मस्का लगाया। वो मुस्कुरा दी.

“राजीव साफ साफ बता की तुझे क्या चाहिए???” मिश्रा आंटी बोली।

दोस्तों वो बहुत गोल मटोल मस्त माल थी। रंग बिलकुल गोरा था, जिस्म भरा हुआ था। फिगर 38 36 32 का था। उनको देखते ही मेरा उनकी रसीली चूत मारने का दिल करने लग जाता था। आज तो मैं अच्छे से सोच लिया था की आज उनको कसके चोदना था।

“आंटी!! बाहर बाहर के मर्द आपको चोद लेते है। आपके हुस्न की जवानी को पी लेते है और मैं तो आपके बगल ही रहता हूँ। फिर भी मैं प्यासा हूँ। आंटी मुझे आपकी मस्त चूत चोदनी है!” मैंने साफ साफ बक दिया। एक बार तो मिश्रा आंटी को जैसे सांप सूंघ गया। कुछ देर के लिए वो बिलकुल चुप हो गयी।

“तूने कब देखा की बाहर बाहर के मर्दों का लंड खाती हूँ???” आंटी ने मुझसे पूछा.

“आंटी! मैं कोई अंधा तो हूँ नही। जैसे ही मिश्रा अंकल अपनी नौकरी पर चले जाते है फिर नये नये मर्द आपके घर में रोज आते है और ३ ३ ४ ४ घंटे बाद बाहर निकलते है। अब आप उन मर्दों के साथ तबला तो बजाइंगी नही!!!” मैंने कहा.

“राजीव बेटा, वो सब मोटा पैसा खर्च करते है। तब मैं उनको अपनी रसीली बुर चोदने के लिए देती हूँ!!” आंटी बोली.

“आंटी मेरे पास भी पैसा है। आप मुझे चूत मारने को दे दो। मैं आपको पैसा दे दूंगा!!” मैंने कहा.

उसके पास अगले दिन जैसे ही मिश्रा अंकल अपनी नौकरी पर गये मिश्रा आंटी ने मुझे अपने घर में बुला लिया। उसके बच्चे प्रियंका और राहुल स्कुल पढने गये हुए थे। इसी खाली समय में वो रोज नये नये मर्दों का लम्बा लम्बा लंड खाती थी और जमकर अपनी चूत चुदवाती थी। मेरा काम बन गया था।

आज मैं अपनी बगल वाली आंटी को जी भरके चोदने खाने वाला था। मिश्रा आंटी मुझे अंदर बेडरूम में ले गयी। और हम दोनों बिस्तर पर जाकर लेट गये। मैंने आंटी को पकड़ लिया और होठो पर किस करने लगा। वो बहुत खूबसूरत और मस्त माल औरत थी। उनके चुच्चे तो बहुत बड़े बड़े थे।

धीरे धीरे वो नीचे चली गयी और मैं उनके उपर आ गया। हम दोनों लेटकर किस करने लगे। आंटी ने गुलाबी रंग की बड़ी गहरी लिपस्टिक लगा रखी थी जिसे मैं पूरा का पूरा चूसता जा रहा था। कुछ ही देर में हम दोनों गरमा गये। मैंने धीरे धीरे उनकी साडी निकालने लगा।

कुछ ही देर में मैंने मिश्रा आंटी की साड़ी निकलकर दूर फेक दी। मुझे उनके गहरे ब्लाउस के दर्शन हो रहे थे। उनके बहुत ही सुंदर मुलायम ३८” के दूध के दर्शन मुझे आंटी के गहरे गले वाले ब्लाउस से हो रहे थे। दोस्तों मैं रोज आंटी को देखकर मुठ मार लेता था पर कभी सोचा नही था की एक दिन उनकी चूत मारने को मिलेगी।

मैं पागल हो गया था और उसके ब्लाउस के उपर से ही मैं उनके मम्मो को दबाने लगा। आंटी “आआआअह्हह्हह……ईईईईईईई….ओह्ह्ह्हह्ह….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” की आवाज निकालने लगी। शायद उनको भी बहुत मजा आ रहा था। मैं उसके गहरे गले वाले ब्लाउस के उपर से उनके मुलायम चुच्चों को दबा रहा था।

मुझे बहुत मजा आ रहा था। कुछ देर में मैंने उनका ब्लाउस खोल लिया और निकाल कर फेक दिया। मिश्रा आंटी से चुस्त गुलाबी रंग की ब्रा पहन रखी थी। वो ब्रा में तो और भी जादा हसीन लग रही थी। मैं जुगाड़ करके उनकी ब्रा खोल दी और दूर फेक दी।

अब मेरे बगल वाली मिश्रा आंटी मेरे सामने बिलकुल नंगी हो गयी थी। उनके ३८” के भरे हुए चुच्चों को देखकर मेरा होश उड़ रहा था। मैं आंटी के उपर ही लेट गया और अपने हाथ से उनके स्तनों को दबाने लगा। वो मचलने लगी। दोस्तों आंटी के कबूतर इतने बड़े बड़े नर्म नर्म थे की मुस्किल से मेरे हाथो में आ पा रहे थे।

मुझे उनके कबूतर दबाने को जन्नत का मजा मिल रहा था। आज इस घर के माल को मुझे कसकर चोदना था। मैं आंटी के उपर लेट गया और मुंह लगाकर उनके शानदार थनों को मुंह में लेके पीने लगा। मुझे लगा की मैं स्वर्ग में आ गया हूँ। मैं हाथ से मिश्रा आंटी जैसी मस्त चोदने पेलने लायक माल के मम्मे दबा देता था।

वो “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” कहने लग जाती थी। दोस्तों बड़ी देर तक ये मनोरंजक खेल चलता रहा। मैं जी भर के उनके गोल गोल बहुत ही खूबसूरत मम्मो को हाथ से जोर जोर से दबाया और मुंह में लेकर चूसता रहा। आंटी भी मुझे बहुत प्यार कर रही थी।

उन्होंने मुझे दोनों बाहों में भर रखा था और किस कर रही थी। मेरे गाल पर किस कर देती थी। मेरे चेहरे को चूम लेती थी और मेरे होठो को चूमने लग जाती थी। ऐसा लग रहा था की वो मेरी आंटी नही बल्कि असली वाली बीबी है। फिर मैंने उनके पेटीकोट का नारा खोल दिया और निकाल दिया।

मिश्रा आंटी से तिकोनी जालीदार पेंटी पहन रखी थी। जिसमे वो बहुत सेक्सी और हॉट माल लग रही थी। मैंने उनकी पेंटी को खीचकर निकाल दिया। अब मिश्रा आंटी मेरे सामने पूरी तरह से नंगी थी। मैं उनके पेट को चूमने लगा और धीरे धीरे मैं नीचे बढ़ने लगा।

कुछ देर में मैं उनकी चूत पर पहुच गया था। बाप रे!! आंटी की चूत तो बहुत चिकनी, साफ ,सुंदर और बहुत ही खूबसूरत थी। मैं मुंह लगाकर उसकी खूबसूरत बुर को चाटने लगा। उधर मिश्रा आंटी की मजे मारने लगी। उनको भी फुल मजा आ रहा था। आंटी रोज नये नये मर्दों का लंड खाती थी इसलिए रोज अपनी झाटों को साफ़ कर लेती थी।

मैं किसी कुत्ते की तरह उनकी चिकनी बुर को चाट रहा था। वो “ओह्ह्ह्ह माँ।।। अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह।।।। उ उ उ।।।चूसो चूसो।।।।।और चूसो।।।मेरी चूत को।।।।अच्छे से पियो मेरी बुर” चिल्ला रही थी। उनको अपनी चूत को गैर मर्दों से चुस्वाने का बड़ा शौक था। उनको अपनी चूत पिलाना अच्छा लगता था।

कुछ देर बाद मैं अपना ७” का लंड आंटी के भोसड़े में डाल दिया और उनको चोदने लगा। किसी पेशेवर रंडी की तरह आंटी मुझसे चुदवा रही थी। “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ…आह आह उ उ उ उ उ…..अअअअअ आआआआ…” बोल बोलकर वो चुदवाने लगी और गपागप मेरा ७ इंच का मोटा लंड खाने लगी।

दोस्तों आज मेरी जिन्दगी का शायद सबसे खूबसूरत दिन था। रोज मैं सुबह शाम जिस खूबसूरत औरत को देखा करता था आज मैं उसकी रसीली बुर को चोद रहा था। मिश्रा आंटी की चूत मारना मेरे लिए एक बहुत बड़ी बात थी। मैंने अपनी बाहों में उनको लपेट लिया था और उनको अपनी औरत की तरह चोद रहा था, उसकी चिकनी चूत को बजा रहा था।

वो नंगी तो बहुत खूबसूरत लग रही थी। कपड़ों में भी वो बहुत अच्छी लगती थी पर मेरा हमेशा से ये सपना था की एक दिन उनको नंगा करके मैं उनकी रसीली चूत मारू और ऐश करूँ। कुछ देर बाद मैंने अपनी रफ्तार बढ़ा दी और जल्दी जल्दी उनकी बुर चोदने लगा। मैं मिश्रा आंटी को गाल, चेहरे और होठो पर चूम लेता था और उसके होठ पी लेता था

वो एक चुदकक्ड औरत थी पर थी बहुत खूबसूरत माल। मैं उनको जल्दी जल्दी पेलने लगा और मेरा लौड़ा तो उनकी चूत के छेद में जाकर और भी जादा मोटा हो गया था। मुझे सेक्स और वासना का नशा चढ़ गया था। मैं जल्दी जल्दी मिश्रा आंटी को बजाने लगा और ४० मिनट मैंने उनको नॉन स्टॉप चोदा। फिर अपना लौड़ा निकालकर मैंने अपना माल उनके खूबसूरत चेहरे पर गिरा दिया। मेरे मोटे लौड़े से ८ १० पिचकारी माल की निकली जो सीधा मिश्रा आंटी के खूबसूरत चेहरे पर जाकर गिरा।

वो बिलकुल चुदासी हो गयी और मेरे माल को जीभ निकालकर चाटने लगी। उसके बाद दोस्तों मैंने उनको अपनी कमर पर लंड पर बिठाकर ढेड़ घंटे चोदा। उसके बाद मैंने जो ५० रूपए उसने लिए थे वो ही उनको वापिस कर दिए। वो चुदवाकर खुश हो गयी। क्यूंकि आज उनको पैसे भी मिल गये थे। उसके बाद मिश्रा आंटी मुझसे सेट हो गयी थी और जब मैं कहता है मुझे चूत दे दिया करती थी और मुझसे चुदवा लिया करती थी।

मिल्फ आंटी ने अपने बूब्स से लंड मसाज किया

गर्मी की उन दिनों में दिल्ली का मौसम बहुत तेज था। मैं राहुल, २२ साल का जवान लड़का, अपनी पढ़ाई के लिए दिल्ली में रहता था। मेरे किराए के मकान के ठीक बगल में रहती थीं श्वेता आंटी। वो एक परफेक्ट मिल्फ थीं – उम्र करीब ४२ साल, लेकिन बॉडी ऐसी कि कोई भी जवान लड़का देखकर पागल हो जाए। उनकी बड़ी-बड़ी गोल-गोल ब्रेस्ट, पतली कमर, और मोटी-मोटी जांघें हमेशा साड़ी या टाइट टॉप में फिट रहती थीं। उनके पति ज्यादातर बिजनेस के सिलसिले में बाहर रहते थे, और उनकी बेटी कॉलेज में पढ़ती हुई हॉस्टल में थी।

श्वेता आंटी बहुत खुशमिजाज थीं। वो मुझे हमेशा “बेटा” कहकर बुलाती थीं, लेकिन उनकी नजरों में एक खास चमक होती थी जब वो मेरी तरफ देखतीं। मैं भी उन्हें चुपके-चुपके देखता रहता था। उनकी क्लीवेज देखकर मेरा लंड अक्सर खड़ा हो जाता था। एक दिन शाम को बिजली चली गई। मैं बालकनी में खड़ा था, तभी आंटी की बालकनी से आवाज आई।

“राहुल बेटा, तुम्हारे पास कोई टॉर्च है क्या? अंधेरा हो गया है।”

मैं तुरंत अपनी टॉर्च लेकर उनकी तरफ गया। दरवाजा खुला था। आंटी ने एक हल्की सी नाइट सूट पहना हुआ था – सफेद कलर का, जो उनके गोरे शरीर पर चिपका हुआ था। उनके बड़े बूब्स सूट के अंदर से साफ झांक रहे थे। मैंने टॉर्च थमाई, लेकिन नजरें उनकी छातियों पर अटक गईं।

“क्या देख रहे हो बेटा?” आंटी ने मुस्कुराते हुए पूछा। उनकी आवाज में शरारत थी।

“कुछ नहीं आंटी…” मैं शर्म से लाल हो गया।

आंटी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा। “अरे, शर्मा मत। मैं जानती हूं जवान लड़के क्या देखते हैं। आओ अंदर, चाय बनाती हूं।”

उस रात हम दोनों बालकनी में बैठकर बातें करते रहे। आंटी ने बताया कि उनके पति कितने बिजी रहते हैं, और वो अकेली कैसे फील करती हैं। मैंने भी अपनी लाइफ के बारे में बताया। धीरे-धीरे बातें पर्सनल होती गईं। आंटी ने मेरे हाथ को अपने हाथ में लिया और बोलीं, “राहुल, तुम बहुत अच्छे लड़के हो। मुझे तुम्हारी कंपनी अच्छी लगती है।”

उसके बाद से हम रोज मिलने लगे। कभी वो मुझे खाना खिलातीं, कभी हम साथ में मूवी देखते। एक शाम वो मेरे कमरे में आईं। उन्होंने एक लाल कलर की साड़ी पहनी हुई थी, ब्लाउज काफी डीप नेक वाला। उनके बूब्स का आधा हिस्सा बाहर झांक रहा था। मैं सोफे पर बैठा था, वो मेरे पास आकर बैठ गईं। उनकी जांघ मेरी जांघ से छू रही थी।

“राहुल, तुम्हें मेरी बॉडी अच्छी लगती है ना?” उन्होंने सीधे पूछ लिया।

मेरा मुंह सूख गया। “आंटी… वो…”

“बोलो ना। मुझे बताओ।” उनकी उंगलियां मेरी जांघ पर घूमने लगीं।

“हां आंटी, आप बहुत हॉट हो। आपके बूब्स… बहुत सुंदर हैं।” मैंने हिम्मत करके कह दिया।

आंटी मुस्कुराईं। उन्होंने मेरे हाथ को उठाकर अपनी छाती पर रख दिया। “छूकर देखो। ये तुम्हारे लिए हैं आज।”

मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा। मैंने धीरे से उनके बूब्स को दबाया। नरम, गर्म और भारी। आंटी की सांसें तेज हो गईं। “अह्ह… प्यार से दबाओ बेटा। मुझे अच्छा लग रहा है।”

मैंने उनका ब्लाउज खोलना शुरू किया। उन्होंने खुद मदद की। उनके बड़े-बड़े गोरे बूब्स ब्रा से बाहर निकल आए। ब्रा का साइज ३६डी था। मैंने ब्रा भी उतार दी। उनके गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुंह में ले लिया और चूसने लगा। आंटी मेरे बालों में हाथ फेरती हुईं कराह रही थीं – “उम्म्म… राहुल… और जोर से… हां ऐसे…”

उनकी एक हाथ मेरी पैंट पर गई। मेरा लंड पहले से ही फुल हार्ड था। उन्होंने पैंट का बटन खोला और लंड बाहर निकाल लिया। “वाह… कितना मोटा और लंबा है तुम्हारा।” उन्होंने धीरे-धीरे हाथ से रगड़ना शुरू किया।

मैं उनके दोनों बूब्स को दोनों हाथों से मसल रहा था। आंटी ने मुझे उठाकर बेड पर लिटाया। फिर वो मेरे ऊपर आईं। उनकी साड़ी कमर तक उठा दी उन्होंने। उनके गीले पैंटी से उनकी चूत की महक आ रही थी। लेकिन आज वो कुछ और करना चाहती थीं।

आंटी ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और अपने बूब्स के बीच रख दिया। “आज मैं तुम्हें अपना स्पेशल मसाज दूंगी।”

उन्होंने अपने दोनों बड़े बूब्स को दोनों हाथों से दबाकर मेरे लंड को उनके बीच ले लिया। नरम, गर्म, और क्रीमी बूब्स मेरे लंड को चारों तरफ से घेर चुके थे। आंटी ऊपर-नीचे हिलने लगीं। उनका मसाज अनोखा था। हर बार जब वो नीचे आतीं, मेरा लंड उनके बूब्स की गहराई में चला जाता, और ऊपर उठतीं तो लंड का टॉप उनके गले तक पहुंच जाता।

“कैसा लग रहा है बेटा?” आंटी ने पूछा, उनकी आंखों में कामुकता थी।

“बहुत अच्छा आंटी… आपकी ये बड़ी-बड़ी छातियां… उफ्फ… स्वर्ग जैसा फील हो रहा है।” मैं कराह उठा।

आंटी ने स्पीड बढ़ा दी। उनके बूब्स मेरे लंड पर फिसल रहे थे। कभी-कभी वो रुककर लंड के टॉप को चूम लेतीं। उनका मुंह गीला था, लार मेरे लंड पर गिर रही थी, जिससे मसाज और भी स्मूद हो गया। मैं उनके निप्पल्स को उंगलियों से दबा रहा था। आंटी की सांसें भारी हो चुकी थीं। “मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है… तुम्हारा लंड मेरे बूब्स के बीच कितना गर्म है…”

मैंने उन्हें पकड़कर और पास खींच लिया। अब वो मेरे लंड पर पूरी ताकत से मूवमेंट कर रही थीं। उनके बूब्स लंड को मसल रहे थे, दबा रहे थे, और चिपकाए हुए थे। मैं महसूस कर रहा था कि मेरा लंड उनके बूब्स की नरमाई में घुल रहा है। थोड़ी देर बाद आंटी ने अपना पैंटी उतार दिया। उनकी चूत पूरी तरह गीली थी। उन्होंने मेरे लंड को अपने बूब्स से मसाज करते हुए अपनी चूत पर रगड़ना शुरू किया।

“आंटी… मैं जल्दी झड़ने वाला हूं…” मैंने कहा।

“झड़ जाओ बेटा… मेरे बूब्स पर ही झड़ दो।” उन्होंने कहा और स्पीड बढ़ा दी।

मेरा लंड उनके बूब्स के बीच फंसकर पंप हो रहा था। आखिरकार मैं जोर से कराहा और मोटी-मोटी गर्म वीर्य की धार उनके गले, चेहरे और बूब्स पर गिरने लगी। आंटी ने मुंह खोलकर कुछ स्वाद लिया और मुस्कुराईं। “कितना ज्यादा है तुम्हारा… अच्छा लगा?”

मैं हांफ रहा था। आंटी ने मेरे लंड को साफ किया और अपने बूब्स को मेरे मुंह के पास किया। मैंने अपनी वीर्य चाट-चाटकर उनके बूब्स साफ किए। फिर वो मेरे बगल में लेट गईं। हम दोनों एक-दूसरे को चूम रहे थे। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी।

“राहुल, मुझे तुम्हारा साथ बहुत अच्छा लगता है। तुम मुझे जवान महसूस कराते हो।” उन्होंने मेरे कान में कहा।

उसके बाद हम अक्सर मिलते। कभी-कभी वो मुझे अपने घर बुलातीं। एक दिन उन्होंने मुझे सरप्राइज दिया। उन्होंने ब्लैक लेस ब्रा पहनी हुई थी, जो उनके बूब्स को और भी आकर्षक बना रही थी। हम बेडरूम में थे। आंटी ने मुझे नंगा किया और खुद भी नंगी हो गईं। उनकी चूत साफ शेव थी, गुलाबी और गीली।

मैं उनके पैरों के बीच घुटनों पर बैठ गया और उनकी चूत चाटने लगा। आंटी मेरे सिर को दबाए हुए थीं – “हां बेटा… जीभ अंदर डालो… चूसो मेरी क्लिट… अह्हह…”

उनकी चूत से मीठा रस निकल रहा था। मैं पूरी लगन से चाट रहा था। आंटी का शरीर तड़प रहा था। फिर उन्होंने मुझे ऊपर खींचा। “अब फिर से वही मसाज दो बेटा।”

इस बार वो ऑयल लेकर आईं। उन्होंने अपने बूब्स और मेरे लंड पर ऑयल लगाया। अब मसाज और भी स्लिपरी और सेक्सी हो गया। उनके चिकने बूब्स मेरे लंड पर फिसल रहे थे। वो कभी तेज, कभी धीरे मूवमेंट कर रही थीं। उनके निप्पल्स मेरे लंड के टॉप को छू रहे थे। मैंने उनके बाल पकड़कर उनका मुंह अपने लंड के पास किया। आंटी ने मुंह खोलकर लंड का टॉप चूस लिया, जबकि बूब्स अभी भी लंड को मसल रहे थे।

“उम्म्म… स्वादिष्ट है तुम्हारा लंड…” उन्होंने कहा।

मैं उनके मुंह और बूब्स दोनों का आनंद ले रहा था। आंटी पूरी तरह मेरी हो चुकी थीं। वो खुद को मेरे लंड पर रगड़ रही थीं। फिर मैंने उन्हें चारों खाने चित्त लिटाया और उनके बूब्स के बीच लंड डालकर फक करने लगा। वो अपने बूब्स को और दबाकर मेरी मदद कर रही थीं।

“जोर से करो राहुल… मुझे पसंद है… हां… और जोर से…”

हम दोनों पसीने से तर थे। कमरे में सिर्फ हमारी कराहटें और चमड़ी की चप-चप की आवाजें गूंज रही थीं। आंटी की आंखें बंद थीं, मुंह खुला था, और वो आनंद ले रही थीं। मैंने आखिरकार उनके मुंह में झड़ दिया। आंटी ने सारा वीर्य निगल लिया।

उसके बाद हम अक्सर ऐसे ही इंटीमेट होते। कभी किचन में, कभी शावर के नीचे। आंटी मुझे हर तरीके से खुश रखतीं। उनके बूब्स मेरे लंड के लिए हमेशा तैयार रहते। वो कहतीं, “ये मेरे बूब्स अब तुम्हारे हैं बेटा। जब चाहो, मसाज कर लो।”

एक रात हम दोनों नंगे लेटे थे। आंटी मेरी छाती पर सिर रखे हुए थीं। “राहुल, तुम्हारे साथ मुझे बहुत अच्छा लगता है। तुम मुझे कभी मजबूर नहीं करते, बल्कि मैं खुद तुम्हारे पास आना चाहती हूं।”

मैंने उन्हें चूम लिया। “आंटी, आप भी मुझे बहुत प्यारी लगती हो।”

हमारी ये कहानी ऐसे ही चलती रही। मिल्फ आंटी और मेरा ये हॉट अफेयर दिल्ली की गर्म रातों को और भी गर्म बनाए रखता। उनके बूब्स का वो सॉफ्ट मसाज, उनकी गीली चूत, और हमारी गहरी कामुकता – सब कुछ परफेक्ट था।

 

पड़ोस की जवान लड़की का पहला सेक्स

मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली के एक शांत से इलाके में एक छोटे से फ्लैट में रहता हूं। मेरे ठीक बगल वाले फ्लैट में रहती थी नेहा। नेहा सिर्फ २२ साल की थी, लेकिन उसकी जवानियों ने किसी को भी दीवाना बना देना था। लंबे काले बाल, गोरा रंग, बड़ी-बड़ी आंखें और वो मासूम मुस्कान। उसकी छाती हमेशा टाइट टॉप में दबती हुई दिखती और उसकी गोल गंधे वाली कमर को देखकर मन करता कि बस छू लूं।

हम दोनों पड़ोसी थे, इसलिए धीरे-धीरे बातें होने लगीं। वो कॉलेज जाती थी और शाम को लौटकर अक्सर बालकनी में खड़ी होकर फोन पर बात करती। मैं भी अपनी बालकनी से उसे देखता रहता। एक दिन बिजली चली गई और उसका इन्वर्टर खराब हो गया। वो मेरे दरवाजे पर आई।

“राहुल भैया, थोड़ी देर चार्जर लगा लूं? मेरा फोन डेड हो गया है,” उसने शरमाते हुए कहा।

मैंने मुस्कुराते हुए अंदर बुलाया। वो पहली बार मेरे फ्लैट में आई थी। हल्का सा परफ्यूम उसकी बॉडी से आ रहा था। मैंने उसे सोफे पर बैठाया और पानी दिया। बातें शुरू हुईं। वो बहुत मासूम थी, लेकिन उसकी नजरों में कुछ जिज्ञासा थी। हम दोनों की उम्र लगभग बराबर थी, इसलिए जल्दी ही “भैया” हटकर “राहुल” हो गया।

अगले कुछ हफ्तों में हम काफी क्लोज हो गए। वो मुझे अपनी कॉलेज की बातें बताती, मैं उसे अपनी जॉब की। कभी-कभी हम साथ में चाय पीते, कभी बाहर घूमने जाते। मैंने देखा कि वो मेरे पास आने पर थोड़ा ज्यादा शरमाती है। उसकी आंखें झुक जातीं, लेकिन होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान रहती।

एक शाम बारिश हो रही थी। नेहा मेरे घर आई थी किताब लेने। बारिश इतनी तेज थी कि वो रुक गई। हम दोनों बालकनी में खड़े होकर बारिश देख रहे थे। उसकी साड़ी का पल्लू हल्का भीग गया था और उसकी ब्लाउज से उसकी ब्रा की आउटलाइन साफ दिख रही थी। मेरी नजर बार-बार वहां जा रही थी।

“राहुल… तुम मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो?” उसने धीरे से पूछा, लेकिन भागी नहीं।

“क्योंकि तुम बहुत खूबसूरत हो, नेहा,” मैंने सच्चाई से कहा।

वो शरमा गई। उसके गाल लाल हो गए। मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ा। वो हाथ खींची नहीं। बस नजरें नीचे कर लीं। मैंने उसे अपनी तरफ खींचा। हमारा पहला किस बहुत धीरे से हुआ। उसके होंठ नरम और गर्म थे। वो थोड़ी कांप रही थी, लेकिन मेरे सीने से चिपक गई।

“डर लग रहा है?” मैंने उसके कान में फुसफुसाया।

“थोड़ा… लेकिन तुम्हारे साथ अच्छा लग रहा है,” उसने शर्माते हुए जवाब दिया।

हम अंदर आए। मैंने उसे सोफे पर बिठाया। किसिंग जारी रही। मेरे हाथ उसकी पीठ पर घूम रहे थे। धीरे-धीरे मैंने उसकी साड़ी का पल्लू नीचे सरका दिया। उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। मैंने उसके ब्लाउज के हुक खोले। सफेद ब्रा में उसकी गोल-गोल ब्रेस्ट्स देखकर मेरा लंड तना हुआ जा रहा था।

“राहुल… धीरे से,” वो फुसफुसाई।

मैंने उसकी ब्रा उतारी। उसके गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने एक को मुंह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। नेहा की सांसें तेज हो गईं। “आह… राहुल…” वो कराह उठी। मेरे हाथ उसकी कमर पर, फिर उसकी नाभि पर घूम रहे थे। मैंने उसकी साड़ी का फंदा खोला। वो सिर्फ पैंटी में रह गई। उसकी जांघें मोटी और चिकनी थीं। पैंटी पर हल्का सा गीला धब्बा दिख रहा था।

मैंने अपनी शर्ट उतारी। नेहा ने पहली बार मेरी छाती को छुआ। उसके नाखून हल्के से खरोंच रहे थे। मैंने उसे उठाकर बेडरूम ले गया। लाइट्स डिम रखीं। वो बेड पर लेट गई। मैं उसके ऊपर आया। किस करते हुए मैं उसकी गर्दन, छाती, पेट सब चूम रहा था। जब मैं उसकी पैंटी उतारने लगा तो वो मेरी कलाई पकड़ ली।

“पहली बार है… प्लीज प्यार से,” उसकी आंखों में शर्म और चाहत दोनों थे।

मैंने उसे आश्वासन देते हुए कहा, “मैं तुम्हें कभी दर्द नहीं दूंगा, नेहा। तुम जब कहोगी, रुक जाऊंगा।”

उसने मुस्कुराकर सिर हिला दिया। मैंने उसकी पैंटी उतार दी। उसकी चिकनी, गुलाबी चूत बिल्कुल साफ और छोटी थी। हल्की सी नमी चमक रही थी। मैंने अपनी उंगलियां धीरे से उसकी जांघों के बीच फेरनी शुरू की। वो सिकुड़ गई, लेकिन फिर धीरे-धीरे फैल गई। मेरी उंगली उसकी चूत की ऊपरी हिस्से पर घूम रही थी। क्लिटोरिस को छूते ही वो झटके से कांप उठी।

“उम्म्म… क्या हो रहा है… अच्छा लग रहा है,” वो आंखें बंद करके बोली।

मैंने धीरे से उंगली अंदर डाली। वो बहुत टाइट थी। अंदर गर्मी और नमी थी। मैं धीरे-धीरे उंगली अंदर-बाहर करने लगा। नेहा की कमर उठने लगी। उसके मुंह से हल्की-हल्की सिसकारियां निकल रही थीं। मैंने अपना मुंह भी नीचे ले जाकर उसकी चूत को चाटना शुरू किया। जब मेरी जीभ उसके क्लिट पर घूमी तो वो जोर से चीख पड़ी।

“राहुल! ये… अह्ह्ह… बहुत अच्छा… मत रुको…”

मैंने उसे लाइटर और लाइटर चाटा। उसके जूस का स्वाद मीठा था। कुछ ही मिनटों में उसका पहला ऑर्गेज्म आ गया। वो पूरी तरह कांप उठी, दोनों हाथों से मेरा सिर दबाए हुए। उसके बाद वो थोड़ी देर शांत पड़ी रही।

अब मेरी बारी थी। मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड पूरा तना हुआ, मोटा और लंबा खड़ा था। नेहा ने पहली बार उसे देखा तो उसकी आंखें फैल गईं।

“ये… अंदर जाएगा?” उसने शरमाते हुए पूछा।

“धीरे-धीरे जाएगा। तुम रिलैक्स रहो,” मैंने उसे चूमते हुए कहा।

मैंने उसके पैर फैलाए। लंड का सिर उसके चूत के मुंह पर रखा और हल्का दबाव दिया। वो थोड़ी सी सिकुड़ी, लेकिन फिर खुद को खोल दिया। मैं बहुत धीरे से अंदर घुसने लगा। उसकी चूत बहुत टाइट थी, लेकिन गीली होने की वजह से आसानी से जा रहा था।

“आह… भरा हुआ लग रहा है… राहुल…” वो कराह रही थी।

मैं पूरी तरह अंदर चला गया। कुछ सेकंड रुका रहा ताकि वो आदत डाल ले। फिर धीरे-धीरे पिस्टन मूवमेंट शुरू किया। नेहा के हाथ मेरी पीठ पर थे। उसके नाखून हल्के से गड़ रहे थे, लेकिन दर्द नहीं, बस प्यार।

हमारी रफ्तार बढ़ती गई। मैं उसके स्तनों को चूसता, होंठ चूसता और नीचे धक्के मारता। नेहा अब पूरी तरह खुल गई थी। “जोर से… और जोर से राहुल… मुझे अच्छा लग रहा है,” वो बार-बार कह रही थी।

मैंने उसे डॉगी स्टाइल में किया। उसकी गोल-गोल गांड देखकर मेरा लंड और सख्त हो गया। मैंने पीछे से पकड़कर जोर-जोर से ठोका। उसके बाल पकड़े और हल्का खींचा। वो झुककर और पीछे उठाकर मिल रही थी।

“मैं फिर से… आ रही हूं…” वो चीखी।

दूसरा ऑर्गेज्म उसका और भी तेज था। उसकी चूत मेरे लंड को दबाने लगी। मैं भी किनारे पर था। मैंने पूछा, “अंदर छोड़ूं?”

“हां… मुझे महसूस करना है,” उसने सांसें चलाते हुए कहा।

मैंने जोर-जोर से धक्के मारे और आखिर में पूरा माल उसके अंदर उड़ेल दिया। गर्म-गर्म झटके लगे। हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए।

उसके बाद हम काफी देर तक चुपचाप लेटे रहे। मैं उसके बालों में उंगलियां फिराता रहा। वो मेरी छाती पर सिर रखे पड़ी थी।

“राहुल… ये सबसे खूबसूरत अनुभव था,” उसने धीरे से कहा।

“तुम्हारा पहला सेक्स याद रहेगा हमेशा,” मैंने उसे चूमते हुए कहा।

उस रात हम दो बार और प्यार किया। दूसरी बार वो ऊपर आई थी। उसकी जवान देह मेरे ऊपर उछल रही थी। उसके स्तन हिल रहे थे। मैंने नीचे से उसके कूल्हों को पकड़कर सहारा दिया। वो खुद रिदम बना रही थी। उसकी चूत अब पहले से ज्यादा आराम से मेरा लंड निगल रही थी।

सुबह जब वो उठी तो उसका चेहरा चमक रहा था। हमने साथ नहाया। शावर के नीचे फिर से किसिंग हुई। मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदा। पानी हमारे शरीरों पर बह रहा था। उसकी चीखें बारिश की आवाज में घुल गईं।

उस दिन के बाद नेहा और मैं एक-दूसरे के बहुत करीब हो गए। वो अब मेरे फ्लैट में खुलकर आती। कभी-कभी रात को भी रुक जाती। हम दोनों ने कई नई पोजीशन्स ट्राई कीं। कभी ६९, कभी स्पूनिंग। वो अब सेक्स के बारे में खुलकर बात करती। बताती कि उसे क्या पसंद है।

एक दिन उसने कहा, “राहुल, तुमने मुझे महिला बना दिया।”

मैंने उसे गले लगाते हुए कहा, “और तुमने मुझे सिखाया कि प्यार कैसे किया जाता है।”

हमारा रिलेशन सिर्फ सेक्स तक सीमित नहीं था। हम एक-दूसरे का ख्याल रखते, एक-दूसरे की मदद करते। पड़ोस वाले कुछ शक भी करते, लेकिन हम दोनों को कोई फर्क नहीं पड़ता था।

आज भी जब मैं उसकी याद करता हूं तो वो पहली रात याद आ जाती है। जब वो मेरे सामने पूरी तरह नंगी, शरमाती हुई, लेकिन पूरी तरह भरोसे के साथ खड़ी थी। उसकी जवान चूत, उसके गुलाबी निप्पल्स, उसकी गर्म सांसें… सब कुछ।

पड़ोस की जवान लड़की का पहला सेक्स न सिर्फ शारीरिक था, बल्कि भावनात्मक भी था। हम दोनों ने एक-दूसरे को पूरा किया। और आज भी जब कभी हम मिलते हैं, वो मुस्कुराकर कहती है, “आज फिर से?”

भाभी की चिकनी चूत चाटी

दोस्तों में राहुल और में दिल्ली का रहने वाला हूँ और मेरी हाईट 5.8 इंच है और मेरे लंड का साईज़ 7 इंच है और अब आप सभी लोगों का ज्यादा समय खराब ना करते हुए सीधा अपनी आज की कहानी पर आता हूँ। सभी भाभीयों से अनुरोध है कि अगर वो चाहे तो अपनी कामुक चूत में उंगली डाल सकती है।

दोस्तों यह बात आज से एक महीने पहले की है.. में वेस्ट दिल्ली में अकेला रहता हूँ और जैसा कि मैंने आप सभी को पहले बताया था कि में एक फार्मसिस्ट हूँ..
लेकिन सितम्बर की शुरुआत में दिल्ली में डेंगू के केस कुछ ज्यादा आने लगे थे.. तो हमारे सामने एक भाभी जो अपने पति के साथ रहती है और भाभी थोड़ी मोटी है.. लेकिन मुझे मोटी औरते बहुत पसंद है। उनके फिगर का साईज़ 36-30-36 है। दोस्तों मेरी भाभी से कभी ज्यादा बात नहीं हुई.. लेकिन हाँ जब में जिम से आकर शर्ट उतारकर अपनी बालकनी में बैठकर थोड़ा आराम करता हूँ.. तो भाभी मुझे अक्सर स्माईल देती और कई बार ऐसे भी बात हो जाती है कि काम कैसा चल रहा है। उनके पति मार्केटिंग में है और उन लोगों की शादी को शायद 4 साल हो गये थे.. लेकिन उनकी कोई औलाद नहीं है। फिर एक दिन रात के कुछ 11 बजे थे.. में एक इंग्लीश फिल्म लगाकर देख रहा था और तभी मेरे घर की बेल बजी। अरे दोस्तों में आप सभी को अपनी मस्त सेक्सी भाभी का नाम तो बताना ही भूल गया.. उनका नाम स्वाती है।

भाभी : हैल्लो राहुल.. क्या मैंने तुम्हे परेशान तो नहीं किया?

में : भाभी नहीं.. ऐसा कुछ नहीं है.. लेकिन आप इतनी रात को कैसे? क्यों सब ठीक तो है ना?

भाभी : नहीं राहुल तुम्हारे भैया को बहुत तेज़ बुखार है और अब मुझे समझ नहीं आ रहा है कि में क्या करूं.. प्लीज तुम आकर देखो ना।

में : ठीक है भाभी.. में अभी आता हूँ।

फिर मैंने जल्दी से शर्ट पहनी और भाभी के साथ चल दिया.. सीड़ी से उतरते हुए भाभी की गांड क्या मस्त लग रही थी.. मेरा तो मन कर रहा था कि अभी इसे अपने कमरे पर ले जाकर चोद दूँ। यह बात सोचकर मेरा लंड पजामे में ही एकदम तनकर खड़ा हो गया और में अपनी शर्ट के बटन बंद करते हुए जा रहा था। फिर भाभी अंधेरे की वजह से एकदम थोड़ा रुकी। मैंने ध्यान नहीं दिया और मेरा लंड एकदम सीधा उनकी गांड के ऊपर जाकर लगा और मैंने डर के मारे भाभी को सॉरी बोला। फिर उन्होंने मेरी तरफ देखकर बोला कि कोई बात नहीं.. वैसे गलती तो मेरी है.. क्योंकि में खुद ही एकदम से रुक गई थी और इतने में उनका घर आ गया। फिर मैंने भैया को देखा.. तो उन्हे बहुत तेज बुखार था और मेरी हॉस्पिटल में बहुत अच्छी जान पहचान थी.. इसलिए मैंने उनको एक बेड दिलवा दिया.. हॉस्पिटल में हमे एक बजे गए और उन्होंने हॉस्पिटल में अपने भाई को बुला लिया। उनके भाई ने बोला कि आप सुबह आ जाना और फिर में चला जाऊंगा.. उसके बाद में और स्वाती भाभी घर के लिए निकल लिए।

भाभी : धन्यवाद राहुल।

में : अरे भाभी इसमें धन्यवाद की क्या ज़रूरत है.. एक अच्छा पड़ोसी ही दूसरे पड़ोसी के काम आता है।

भाभी : ठीक है।

में : शायद भैया को डेंगू हो सकता है।

भाभी : हाँ.. मुझे भी ऐसा ही लग रहा है।

में : भैया का ब्लड ग्रूप क्या है?

भाभी : बी+

में : चलो मेरा भी यही है.. अगर ब्लड चाहिए होगा.. तो में दे दूँगा और इतने में हमारा घर आ गया।

भाभी : यार राहुल क्या तुम मेरा एक काम करोगे?

में : जी हाँ भाभी बोलिए।

भाभी : यार मुझे अकेले में बहुत डर लगेगा.. क्या आप आज की रात मेरे यहाँ पर सो सकते हो?

में : (मेरा लंड तो यह बात सुनकर ही खड़ा हो गया) मैंने बोला कि लेकिन भाभी कोई हमे देख लेगा तो?

भाभी : यार आज हमारी मंजिल पर कोई भी नहीं है।

में : ठीक है भाभी अगर आप कहती है.. तो में एक रात सो जाता हूँ।

भाभी : धन्यवाद राहुल बस आज रात की बात है.. कल से में अपनी छोटी बहन को बुला लूँगी।

में : हाँ ठीक है.. भाभी।

फिर हमने गाड़ी को एक साईड लगाई और हम उनके घर में गये.. भाभी ने अपने घर को बहुत अच्छा सजाया हुआ था। भाभी अपने बेडरूम में जाकर कपड़े चेंज करने लगी और में टी.वी. चालू करके देखने लगा और जब भाभी अपनी एक मस्त मेक्सी पहनकर बाहर आई.. तो वो क्या मस्त माल लग रही थी? उनकी जांघो तक काले कलर की मेक्सी में उनके 36 इंच के बूब्स बहुत हॉट, सेक्सी लग रहे थे और मेरा तो मन कर रहा था कि इन्हे आज चूसकर सारा रस पी जाऊँ। फिर शायद भाभी ने मुझे उनके बूब्स को देखते हुए देख लिया और वो थोड़ा अजीब सा महसूस करने लगी।

भाभी : तुमने अपनी गर्लफ्रेंड को तो नहीं बताया कि आज तुम्हे यहाँ पर सोना है?

में : नहीं भाभी उसे पता चलेगा.. तो वो पता नहीं क्या सोचेगी?

भाभी : वो क्या सोचेगी?

में : यही कि में एक किसी खूबसूरत लड़की के साथ आज पूरी रात रहूँगा।

भाभी : ( हंसने लगी ) क्या में सुंदर.. लेकिन में तुम्हे कहाँ से सुंदर लगती हूँ.. चलो यार अब मज़ाक मत करो?

में : अरे भाभी जो अभी आप पहनकर हो.. इन कपड़ो को पहनकर आप कभी भैया को दिखना। फिर वो आपको बताएँगे कि आप कितनी सुंदर हो?

भाभी : हाँ हाँ ठीक है.. चलो अब तुम ही बता दो कि में कितनी सुंदर लग रही हूँ।

में : एकदम मस्त माल.. मेरा तो मन कर रहा है कि..

भाभी : शैतान तुम बहुत बड़े हो गये हो.. मुझे अब लगता है कि आंटी से बात करके बोलना पड़ेगा कि इस लड़के की शादी करवा दो।

में : हाँ बोल दो और अपना हुलिया भी बता देना और उन्हे कह देना कि उसे ऐसी लड़की पसंद है।

भाभी : अच्छा.. तो तुम्हे मुझमे क्या अच्छा लगता है?

में : नहीं आप बुरा मान जाओगे।

भाभी : अरे नहीं.. बताओ ना।

में : नहीं आप बुरा मान जाओगे।

भाभी : अरे नहीं तुम्हारी कसम.. बताओ ना।

में : जब आप मेरी सीड़ियों से उतर रही थी और मेरा लंड आपसे जा लगा था.. मुझे आपकी वो बहुत मस्त लगती है। भाभी थोड़ा शरमाते हुए अच्छा जी.. अब तो सच में बहुत बड़ा हो गया है और मज़ाक मज़ाक में उन्होंने मेरी जांघ पर हाथ मारा। मेरा लंड तो उन्हे देखकर पहले से ही खड़ा था और फिर ग़लती से उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया। फिर उनके हाथ का स्पर्श पाकर तो मेरा लंड और भी ज्यादा तनकर खड़ा हो गया और मैंने उनकी आखों में देखा.. उन्हे भी मेरा लंड पकड़कर बहुत अच्छा लग रहा था और उनकी आखों से साफ साफ दिख रहा था कि उन्हे अब मुझसे क्या चाहिए?

भाभी : शरमाते हुए.. चलो में अब सोने जा रही हूँ।

में : ठीक है भाभी.. शुभ रात्रि।

दोस्तों मेरा तो बहुत बुरा हाल हो रहा था और में सोच रहा था कि में अब शुरू कहाँ से करूं और इतने में स्वाती भाभी की आवाज़ आई कि राहुल मुझे डर लग रहा है.. तुम भी मेरे ही रूम में सो जाओ। फिर मैंने कहा कि ठीक है और में अंदर बेडरूम में गया.. तो मैंने देखा कि भाभी कंबल ओढ़कर बेड पर लेटी हुई थी। फिर मैंने बोला कि भाभी आप ऊपर लेट जाओ.. में सोफे पर सो जाऊंगा।

भाभी : ठीक है।

फिर मुझे उनके इतने पास होने पर भी नींद नहीं आ रही थी और करीब एक घंटे के बाद भाभी उठकर वॉशरूम चली गयी और अब मुझे नींद आने ही वाली थी कि इतने में एक बहुत ज़ोर की आवाज़ आई और मेरी नींद खुली। फिर मैंने ध्यान से सुना.. वो स्वाती भाभी की आवाज़ थी.. राहुल। में झट से उठा और जैसे ही वॉशरूम में गया.. तो भाभी वहां पर नीचे गिरी हुई थी। फिर मैंने उन्हे सहारा देकर उठाया और उन्हे अपनी गोद में उठा लिया। दोस्तों वैसे तो वो मोटी है.. लेकिन में हर रोज जिम जाता हूँ.. तो मैंने उन्हे बहुत आसानी से उठा लिया। मैंने उन्हे गांड पर हाथ लगाकर उठाया.. तो मुझे उनकी पेंटी का एहसास मेरे हाथों पर हुआ और मेरा शैतान लंड फिर खड़ा हो गया और इनके पेट पर छूने लगा। फिर मैंने उन्हे बेड पर लाकर लेटाया और उनसे पूछा कि क्या आपको कहीं चोट तो नहीं लगी? उन्होंने कहा कि जो चीज़ तुम्हे सबसे ज्यादा पसंद है। फिर में समझ गया कि इनकी गांड पर चोट लगी है और फिर मैंने भाभी से बोला कि लाओ में तेल से मालिश कर दूँ.. तो उन्होंने इशारा किया कि तेल वहाँ पर रखा हुआ है। फिर मैंने उन्हे मुहं के बल सर नीचे रखकर लेटने को कहा। उन्हे इतना दर्द हो रहा था कि उन्हे होश ही नहीं था कि जब वो मुहं के बल लेटी.. तो उनकी मेक्सी ऊपर हो गई और मुझे उनकी गांड के दर्शन हो गये.. उन्होंने लाल कलर की पेंटी पहनी हुई थी।

फिर मेरा लंड अब अपने पूरे आकार में आ गया था। फिर में उनकी गांड की मालिश करने लगा और में अपने होश खोने लगा और मैंने उनकी गांड पर एक किस कर दिया और शायद उन्हे पता चल गया था कि में क्या कर रहा हूँ और अब उनका दर्द भी ख़त्म होने लगा था। फिर मैंने उनसे बोला कि स्वाती भाभी आपकी पेंटी थोड़ा बीच में आ रही है.. तो आप इसे उतार दो। फिर उन्होंने कहा कि तुम ही उतार दो और फिर मैंने उनकी पेंटी उतारी। वाहह क्या मस्त गांड थी यार उनकी.. मेरा तो मन कर रहा था कि इसे अभी कुतिया बनाऊँ और इसकी चूत में अपना लंड घुसा दूँ। फिर मैंने अपने कपड़े फटाफट उतारे और अपने लंड को उनकी गांड पर फेरने लगा.. उन्हे भी बहुत मज़ा आ रहा था और वो पलट गयी.. लेकिन अभी भी उनकी आँखे बंद ही थी। फिर उन्होंने अपनी चूत पर अपना एक हाथ रखा और बोला कि इसमे भी दर्द है.. थोड़ा इस पर भी लगाओ ना। दोस्तों क्या चूत थी उनकी? एकदम 18 साल की लड़की तरह एकदम गुलाबी गुलाबी और छोटे छोटे बाल जैसे कि तीन दिन पहले ही शेव की हो। फिर मैंने उनकी चूत के ऊपर हाथ फेरा और स्वाती भाभी मोन करने लगी.. आआह्ह्ह्ह उह्ह्ह माँ। फिर में अब उन्हे उंगली से चोदने लगा और भाभी अपने हाथ से चादर को कसकर पकड़कर लेटी हुई थी और उनकी आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी.. आईईईईईईईईईइ ओउुुह्ह्ह्हहुउउ और अब में और भाभी 69 पोज़िशन में आ गए और में उनकी चूत चाटने लगा। फिर वो एकदम चकित हो गयी और उछल पड़ी.. शायद भैया ने कभी उनकी चूत नहीं चाटी थी और भाभी के मुहं से एकदम से चीख निकल पड़ी.. राहूल यह क्या कर रहे हो? अह्ह्ह्ह तुम बहुत अच्छे हो.. अह्ह्ह राहुल और ज़ोर से चाटो मेरी चूत को खा जाओ इसे आआह्ह्ह्हह और इतना बोलकर उन्होंने मेरा लंड अपने मुहं में ले लिया और वो बोली कि..

भाभी : कितना बड़ा है तुम्हारा.. राहुल प्लीज इसे मेरी चूत में डाल दो.. अह्ह्ह्ह उह्ह्ह।

में : मेरी जान अभी चूत तो चाटने दो.. मुझे चूत चाटना बहुत पसंद है।

फिर मैंने अपनी जीभ स्वाती की चूत में डाली और उनके चेहरे से ऐसा लग रहा था कि मानो वो जन्नत में है और फिर मैंने भाभी से पूछा कि भाभी कंडोम है क्या? तो उन्होंने बोला कि अलमारी में से ज़ाकर ले आओ। फिर में उठा और कंडोम ले लाया और मैंने भाभी से कहा कि आप मुझे पहना दो। फिर उन्होंने बहुत प्यार से मेरा लंड चूसा और उस पर कंडोम चड़ाया। उस रात मैंने भाभी की दो बार जमकर चुदाई की और उनके कहने पर एक बार गांड भी मारी ।।

धन्यवाद …

वर्जिन कॉलेज गर्ल की पहली चुदाई बस में

रिया की जिंदगी में वो रात कभी नहीं भूली। वो एक साधारण सी कॉलेज गर्ल थी – उम्र सिर्फ़ उन्नीस साल, दिल्ली यूनिवर्सिटी में पहला साल। गोरी, लंबे काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें और वो फिगर जो हर लड़के का ध्यान खींच लेता था। लेकिन रिया अब तक वर्जिन थी। उसने कभी किसी लड़के को इतना करीब नहीं आने दिया था। आज वो घर जा रही थी – लंबी बस जर्नी, रात की बस, लखनऊ से दिल्ली। टिकट कन्फर्म था, लेकिन सीट मिली थी आखिरी वाली बर्थ में।

बस स्टैंड पर भीड़ थी। रिया ने अपनी छोटी सी बैग संभाली, सफ़ेद टॉप और नीली जीन्स पहनी थी। टॉप थोड़ा टाइट था, जिससे उसकी नई-नई विकसित ब्रेस्ट्स का आकार साफ़ झलक रहा था। वो बस में चढ़ी तो देखा कि उसकी सीट पर पहले से एक लड़का बैठा था। लंबा, फेयर, मसल्स वाली बॉडी, उम्र करीब पच्चीस। उसका नाम था आर्यन। वो मुस्कुराया और बोला, “मैडम, आपकी सीट है ना? मैं शिफ़्ट हो जाता हूँ।”

रिया ने शरमाते हुए सिर हिलाया। “नहीं, कोई बात नहीं। बस में जगह तो है।” दोनों एक ही बर्थ पर बैठ गए। रात के दस बज चुके थे। बस स्टार्ट हुई। लाइट्स धीरे-धीरे कम हो गईं। बाहर अंधेरा। अंदर सिर्फ़ हल्की नीली लाइट जल रही थी। आर्यन ने बात शुरू की – “कॉलेज में पढ़ती हो? लगती हो स्टूडेंट।”

रिया हँसी। “हाँ, दिल्ली यूनिवर्सिटी। फर्स्ट ईयर। घर जा रही हूँ।” बातें बढ़ती गईं। आर्यन हंसमुख था, पढ़ा-लिखा, सॉफ्ट स्पोकन। रिया को उसकी आवाज़ अच्छी लगी। धीरे-धीरे वो दोनों करीब आ गए। बस हिल रही थी, कभी-कभी झटके लगते। रिया का कंधा आर्यन के कंधे से टकराता। उसने महसूस किया कि आर्यन का शरीर गर्म है।

रिया ने अपनी जाँघें थोड़ी सींच लीं। लेकिन बस की हिचकिचाहट में उसकी जाँघ आर्यन की जाँघ से रगड़ खा गई। दोनों ने एक-दूसरे को देखा। आर्यन की आँखों में कुछ अलग चमक थी। रिया ने महसूस किया कि उसकी साँसें तेज़ हो रही हैं। वो खुद को रोक नहीं पा रही थी। “ये क्या हो रहा है?” उसने मन में सोचा, लेकिन शरीर कुछ और ही कह रहा था।

आर्यन ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा। “ठंड लग रही है क्या?” रिया ने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुरा दी। आर्यन ने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगा। रिया की उँगलियाँ काँप रही थीं, लेकिन उसने हाथ नहीं छुड़ाया। बस अब और अंधेरी हो गई थी। आस-पास के पैसेंजर सो चुके थे। कंडक्टर ने भी लाइट ऑफ़ कर दी थी।

आर्यन ने रिया के कान के पास फुसफुसाया, “तुम बहुत प्यारी हो।” रिया का चेहरा लाल हो गया। वो शरमा रही थी, लेकिन अंदर से एक अजीब सी गर्मी फैल रही थी। उसने आर्यन की तरफ़ देखा। आर्यन ने धीरे से उसकी गर्दन पर एक हल्का सा किस किया। रिया ने आँखें बंद कर लीं। वो पहली बार किसी लड़के के होठों को अपनी त्वचा पर महसूस कर रही थी। सनसनी पूरे शरीर में दौड़ गई।

“मुझे… अच्छा लग रहा है,” रिया ने धीमी आवाज़ में कहा। उसकी आवाज़ में सहमती का एहसास था। आर्यन ने और करीब आकर उसके होंठों को चूम लिया। रिया ने भी जवाब दिया। उनके होंठ मिले, जीभें आपस में खेलने लगीं। रिया को लगा जैसे बिजली दौड़ गई हो। उसकी ब्रेस्ट्स आर्यन के सीने से दब रही थीं। आर्यन ने हाथ नीचे सरकाया और रिया की कमर को सहलाने लगा।

रिया ने खुद को रोकने की कोशिश की, लेकिन शरीर नहीं मान रहा था। वो आर्यन के गले में बाँहें डालकर और करीब आ गई। “आर्यन… मैं… कभी नहीं किया,” उसने शरमाते हुए कहा। आर्यन ने उसकी आँखों में देखा और मुस्कुराया, “मैं धीरे करूँगा। तुम्हें अच्छा लगेगा, भरोसा रखो।” रिया ने सिर हिला दिया। वो तैयार थी। उसका मन और शरीर दोनों एक साथ कह रहे थे – हाँ

आर्यन ने रिया का टॉप ऊपर किया। उसकी गोरी ब्रेस्ट्स बाहर आ गईं। ब्रा भी हटा दी। रिया की निप्पल्स पहले से ही खड़ी थीं। आर्यन ने एक निप्पल को मुँह में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। रिया की साँसें भारी हो गईं। “आह्ह…” वो धीमी सी कराह उठी। आर्यन दूसरी ब्रेस्ट को हाथ से दबा रहा था, उँगलियाँ निप्पल को घुमा रही थीं। रिया को लग रहा था जैसे पूरा शरीर पिघल रहा हो।

उसने आर्यन का शर्ट खोल दिया। उसकी छाती चौड़ी और मसल्ड थी। रिया ने हाथ फेरा। आर्यन का शरीर गर्म और सख्त था। आर्यन ने अब रिया की जीन्स का बटन खोला। धीरे-धीरे जीन्स नीचे सरकाई। रिया ने खुद ही मदद की। उसकी पैंटी भीगी हुई थी। आर्यन ने पैंटी को भी उतार दिया। अब रिया पूरी तरह नंगी थी – बस की बर्थ पर, अंधेरे में, आर्यन के सामने।

आर्यन ने उसकी जाँघों को फैलाया। रिया की चूत बिल्कुल साफ़ और गुलाबी थी। वो पहली बार किसी को इतना करीब देख रही थी। आर्यन ने झुककर उसकी चूत को चूम लिया। रिया चौंक गई, लेकिन फिर आनंद से कराह उठी। “उम्म्म… आर्यन… क्या कर रहे हो?” आर्यन ने जीभ से उसकी क्लिटोरिस को चाटा। रिया की कमर उठ गई। वो आर्यन के बालों को पकड़कर दबा रही थी।

आर्यन की जीभ अंदर-बाहर हो रही थी। रिया को ऐसा लग रहा था जैसे कोई जादू हो गया हो। उसकी चूत से रस निकल रहा था। आर्यन ने उँगली भी डाली – एक उँगली, फिर दो। धीरे-धीरे अंदर-बाहर। रिया की साँसें फूल रही थीं। “हाँ… और… अच्छा लग रहा है,” वो फुसफुसाई।

अब आर्यन ने अपना पैंट उतारा। उसका लंड बाहर आ गया – मोटा, लंबा, सख्त। रिया ने उसे देखा और शरमा गई, लेकिन उसकी आँखों में भूख थी। आर्यन ने रिया को अपनी गोद में बिठाया। रिया ने खुद आर्यन के लंड को पकड़ा और अपनी चूत पर रखा। वो धीरे-धीरे बैठ गई।

लंड धीरे-धीरे अंदर घुसा। रिया को हल्का सा दबाव महसूस हुआ, लेकिन दर्द नहीं। सिर्फ़ भरपूर आनंद। “आह्ह… पूरा… अंदर ले लो,” रिया ने कहा। आर्यन ने उसे कसकर पकड़ लिया और नीचे से धक्के देने लगा। बस हिल रही थी, लेकिन उनकी हिचकिचाहट उस हिलने में छुप गई थी।

रिया अब पूरी तरह आर्यन पर सवार थी। वो ऊपर-नीचे हो रही थी। उसके स्तन उछल रहे थे। आर्यन उन्हें चूस रहा था। “तुम बहुत टाइट हो… बहुत अच्छा लग रहा है,” आर्यन ने कहा। रिया की चूत लंड को चूस रही थी। हर धक्के पर वो कराह रही थी – “हाँ… और तेज़… मुझे चोदो… पहली बार… इतना मज़ा…”

वे दोनों एक-दूसरे में खो गए थे। आर्यन ने पोजीशन बदली। अब रिया नीचे थी, आर्यन ऊपर। वो धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर कर रहा था। रिया की टाँगें उसके कमर पर लिपटी थीं। दोनों के शरीर पसीने से भीग गए थे। रिया को ऑर्गेज़्म आने वाला था। उसने आर्यन को कसकर जकड़ लिया।

“मैं… आ रही हूँ… आह्हह!” रिया चीख पड़ी, लेकिन आवाज़ दबा दी। उसकी चूत सिकुड़ गई, रस बह निकला। आर्यन भी तेज़ हो गया। “मैं भी… निकलने वाला हूँ।” रिया ने कहा, “अंदर… भर दो… मुझे चाहिए।” आर्यन ने आखिरी जोरदार धक्का मारा और अपना गर्म वीर्य रिया की चूत में भर दिया

दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। बस अभी भी चल रही थी। रिया ने आर्यन की छाती पर सिर रख दिया। “ये… सबसे खूबसूरत पहली बार थी,” उसने फुसफुसाया। आर्यन ने उसके बालों को सहलाया। “तुमने मुझे अपना बना लिया।”

रात भर वे ऐसे ही लिपटे रहे। कभी-कभी फिर से शुरू हो जाते। दूसरी बार आर्यन ने रिया को डॉगी स्टाइल में चोदा। रिया को पीछे से लंड लेना बहुत पसंद आया। उसकी चूत फिर से भीग गई। तीसरी बार वो साइड पोजीशन में थे। रिया की एक टाँग ऊपर, आर्यन लंड अंदर डाले हुए धीरे-धीरे हिल रहा था। हर बार रिया ज़ोर-ज़ोर से कराहती – “हाँ… चोदो मुझे… तुम्हारी वर्जिन चूत अब तुम्हारी है।”

सुबह होने वाली थी। बस दिल्ली पहुँचने वाली थी। रिया ने कपड़े पहने। उसकी चूत अभी भी गीली थी, लेकिन मज़े से भरी हुई। आर्यन ने उसे किस किया। “फिर मिलेंगे ना?” रिया मुस्कुराई, “ज़रूर। ये बस जर्नी कभी नहीं भूलूँगी।”

वो बस से उतरी। लेकिन उसकी चाल में एक नई मस्ती थी। वर्जिन कॉलेज गर्ल की पहली चुदाई बस में हो गई थी – और वो पूरी तरह संतुष्ट थी। उस रात ने उसे औरत बना दिया था।

(कहानी जारी… लेकिन ये मुख्य भाग था। अब और विस्तार से समझते हैं कि कैसे सब शुरू हुआ।)

रिया जब बस में चढ़ी थी तो वो थोड़ी थकी हुई थी। कॉलेज का लास्ट लेक्चर खत्म करके सीधे बस पकड़ी थी। लेकिन आर्यन के साथ बैठते ही उसका मन हल्का हो गया। वो दोनों घंटों तक बातें करते रहे – कॉलेज की, लाइफ़ की, सपनों की। आर्यन ने बताया कि वो सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, दिल्ली जा रहा है प्रोजेक्ट के लिए।

धीरे-धीरे बातें पर्सनल हो गईं। आर्यन ने पूछा, “बॉयफ्रेंड है क्या?” रिया ने शरमाकर सिर हिलाया, “नहीं… अभी तक नहीं मिला सही वाला।” आर्यन ने मुस्कुराकर कहा, “मुझे लगता है आज मिल गया।” रिया हँस पड़ी, लेकिन अंदर से गर्मी महसूस हुई।

जब लाइट्स ऑफ़ हुईं तो आर्यन ने अपना जैकेट रिया पर डाल दिया। “ठंड लग रही होगी।” लेकिन जैकेट के नीचे उसका हाथ रिया की कमर पर था। रिया ने विरोध नहीं किया। बल्कि वो खुद आर्यन के सीने से सट गई। उसकी साँसें आर्यन के गले पर पड़ रही थीं।

पहला किस बहुत सॉफ्ट था। फिर दूसरे, तीसरे। रिया को किसिंग का इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया। आर्यन के होंठ उसके होंठों को चूस रहे थे, जीभ अंदर घुसकर खेल रही थी। रिया की जीभ भी जवाब दे रही थी। दोनों की सलाइवा आपस में मिल रही थी।

जब आर्यन ने ब्रेस्ट्स चूसीं तो रिया की निप्पल्स इतनी सेंसिटिव हो गईं कि हर चूसने पर वो कराह उठती। “आह… धीरे… लेकिन और… मत रुको।” आर्यन ने उन्हें दबाया, चूसा, काटा भी हल्का-हल्का, लेकिन सिर्फ़ मज़े के लिए।

जब आर्यन रिया की चूत चाट रहा था तो रिया ने अपनी जाँघें फैला दीं। वो पहली बार किसी की जीभ को वहाँ महसूस कर रही थी। क्लिटोरिस पर जीभ घूमते ही वो झटके खा रही थी। “ये… स्वर्ग है… आर्यन… चूसो… और चूसो।” उसका रस आर्यन के मुँह में जा रहा था। आर्यन उसे पी रहा था।

पेनिट्रेशन का पहला मोमेंट सबसे यादगार था। रिया ने खुद लंड को अपनी चूत पर रगड़ा। गीली चूत ने लंड को आसानी से अंदर ले लिया। धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर चला गया। रिया को लगा जैसे वो भर गई हो। “पूरा… अंदर है… मुझे लग रहा है तुम मेरे अंदर हो।”

फिर शुरू हुई रिदम। बस की हिलने की रिदम के साथ उनकी चुदाई की रिदम। हर धक्के पर रिया की ब्रेस्ट उछलती, उसकी चूत लंड को कसकर पकड़ती। “तुम्हारा लंड… इतना मोटा… मेरी चूत फट रही है मज़े से।”

ऑर्गेज़्म के वक्त रिया ने आर्यन को कसकर जकड़ लिया। उसका पूरा शरीर काँप गया। चूत से रस का फव्वारा निकला। आर्यन का वीर्य अंदर उबल रहा था। दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे।

दूसरी राउंड में रिया ने खुद इनिशिएट किया। वो आर्यन के लंड को मुँह में लेना चाहती थी। आर्यन ने उसे सिखाया। रिया ने झुककर लंड चूसा – पहले टिप, फिर पूरा। “स्वाद अच्छा है… तुम्हारा।” आर्यन ने उसके बाल पकड़कर हल्का-हल्का मुँह में धक्का दिया। रिया गैग नहीं हुई, बल्कि और जोर से चूसने लगी।

फिर उन्होंने फिर से चुदाई शुरू की। इस बार लंबी और गहरी। रिया की चूत अब पूरी तरह आर्यन के लंड की आदी हो चुकी थी। वो बार-बार कह रही थी, “चोदो… मेरी वर्जिन चूत को अपना बना लो… हाँ… और तेज़।”

सुबह बस दिल्ली पहुँची। दोनों ने नंबर एक्सचेंज किए। रिया उतरते वक्त मुस्कुराई और मन में सोचा – “ये बस मेरी जिंदगी की सबसे हॉट जर्नी थी। वर्जिन कॉलेज गर्ल की पहली चुदाई बस में… और वो भी इतनी खूबसूरत।”

उसके बाद रिया कॉलेज गई, लेकिन अब वो पहले से ज़्यादा कॉन्फिडेंट थी। उसकी चाल में एक नया आकर्षण था। और आर्यन? वो भी उस रात को कभी नहीं भूला।

अनजान लड़की से चैटिंग से सीधे सेक्स – वर्जिन रिया की टाइट चूत की चुदाई

रात के डेढ़ बजे एक रैंडम मैसेज ने कैसे दो अजनबियों को होटल के कमरे तक पहुंचा दिया? चंडीगढ़ में नौजवान कार्तिक और लुधियाना की हॉट रिया की पहली मुलाकात, पहली हग, पहला किस और पहली जोरदार चुदाई की पूरी सच्ची-सी कहानी। वर्जिन लड़की की टाइट चूत, चूसे हुए गुलाबी निप्पल्स, सिसकारियां और पांच घंटे की मस्ती – सब कुछ विस्तार से।

हाय दोस्तों, मैं कार्तिक, 22 साल का हूं। लुक्स में एवरेज हूं – न ज्यादा हैंडसम, न ज्यादा सादा – लेकिन दिल का बहुत शरारती। ये कहानी आज से ठीक एक साल पुरानी है, जब मैं चंडीगढ़ में नई-नई जॉब जॉइन करके आया था। सिटी नई थी, दोस्त कम थे, और रातें अकेली।

एक रात नींद बिल्कुल नहीं आ रही थी। बाहर तेज बारिश हो रही थी, खिड़की पर बूंदें टप-टप गिर रही थीं, हवा ठंडी और नम थी। मैं बिस्तर पर करवटें बदल रहा था, बॉडी गरम थी, मन बेचैन। फोन उठाया और रैंडमली एक नंबर डायल करके मैसेज भेज दिया – “हाय, नींद नहीं आ रही क्या?”

रात के करीब डेढ़ बज रहे थे। उम्मीद नहीं थी कि कोई रिप्लाई आएगा। लेकिन कुछ मिनट बाद ही फोन वाइब्रेट हुआ। “नहीं आ रही। तुम कौन?”

बस यहीं से शुरुआत हुई। नाम था उसका रिया। पहले तो सिर्फ हल्की-फुल्की बातें – मौसम कैसा है, जॉब कैसी चल रही, चंडीगढ़ कैसा लग रहा। लेकिन मेरी बातें उसे अच्छी लगने लगीं। मैं थोड़ा फ्लर्टी हूं, तो जल्दी ही मैंने “आई लव यू” लिख दिया। वो हंसकर इमोजी भेजकर टाल गई, लेकिन मैसेज करती रही।

धीरे-धीरे चैटिंग गहरी होती गई। डर्टी जोक्स शुरू हुए। वो भी बराबर से जवाब देती। कभी वो कोई जोक भेजती, कभी मैं। हंसते-हंसते इमोजी की बौछार होती। रात-रात भर बातें चलतीं। वो बताती कि उसे मेरी शरारतें बहुत पसंद हैं, कि मैं उसे हंसाता हूं, कि मेरी बातों में एक अलग ही मजा है। मैं उसे बताता कि वो कितनी स्मार्ट है, कितनी बोल्ड।

लगभग बीस दिन ऐसे ही बीते। हर रात चैट, कभी वॉइस मैसेज, कभी फोटोज। एक रात मैंने हिम्मत करके लिखा, “मिलोगी कभी?”

पहले तो उसने मना किया। “पागल हो गए हो? इतनी जल्दी? हम तो अभी एक-दूसरे को ठीक से जानते भी नहीं।”

लेकिन मुझे पता था – उसका मन भी था। बातों-बातों में उसने हां कर दी। वो लुधियाना में रहती थी, चंडीगढ़ से सिर्फ दो घंटे की दूरी। हमने प्लान बनाया। पहले ही साफ-साफ बात हो चुकी थी कि मिलते ही हम इंटीमेट होंगे। उसे कोई ऐतराज नहीं था। बल्कि वो खुद भी उतनी ही एक्साइटेड लग रही थी – मैसेज में लिखती, “बहुत नर्वस हूं, लेकिन एक्साइटेड भी।”

आखिरकार वो दिन आ गया। सुबह मैंने कॉल किया। उसकी आवाज में घबराहट और उत्साह दोनों थे। “मैं ऑफिस जाने का बहाना बनाकर निकल रही हूं। बस स्टैंड पर 11 बजे पहुंच जाऊंगी।”

मैं पहले से तैयार था। रूममेट्स ने मजाक में कंडोम का पैकेट थमा दिया था, बोले “सेफ रहो भाई”। मैं बाइक लेकर बस स्टैंड पहुंचा। फेसबुक पर उसकी फोटो देखी थी, लेकिन रियल में वो… बाप रे! हूर से कम नहीं थी। स्किन-टाइट ब्लैक जींस जो उसके गोल-मटोल कूल्हों को परफेक्टली हाइलाइट कर रही थी, ऊपर गले तक खुला व्हाइट टॉप जिससे उसकी गहरी क्लीवेज झलक रही थी, बाल खुले और हवा में लहरा रहे, लाइट मेकअप लेकिन लिप्स पर ग्लॉसी रेड लिपस्टिक। उसकी कमर पतली, कूल्हे चौड़े, चाल में आत्मविश्वास और थोड़ी शरारत।

मैंने दूर से आवाज दी, “हाय रिया!”

वो मुड़ी, थोड़ी शरमाई, आंखें नीची कर लीं, लेकिन मुस्कुरा भी दी। हमने दो मिनट वहीं बात की – नर्वस हंसी, हल्की छेड़छाड़। फिर वो बाइक पर पीछे बैठी। जैसे ही उसकी कमर पर हाथ रखा, उसकी गर्म बॉडी का एहसास हुआ, दिल तेज धड़कने लगा। उसकी खुशबू – हल्की परफ्यूम और बारिश की नमी – नाक में घुस रही थी।

थोड़ी देर शहर में घूमे। लंच किया, कॉफी पी। बातें करते रहे – पुरानी चैट्स याद करते, हंसते। फिर मैंने धीरे से पूछा, “होटल चलें?”

वो शरमाई, होंठ काटे, आंखें नीची करके बोली, “चलो… लेकिन ज्यादा शरारत मत करना।”

मैं उसका इशारा समझ गया। हम एक अच्छे होटल में गए। रूम लिया। जैसे ही दरवाजा बंद हुआ और लॉक किया, मैंने उसका हाथ पकड़ा, लाइट्स ऑफ कीं और उसे अपनी ओर खींच लिया। टाइट हग किया। उसकी सॉफ्ट बॉडी मेरी बॉडी से पूरी तरह सटी थी – उसके बूब्स मेरे सीने पर दब रहे थे, उसकी सांसें तेज और गर्म मेरी गर्दन पर लग रही थीं। मैंने उसकी गर्दन पर होंठ रखे, धीरे-धीरे किस करना शुरू किया – हल्के चूम, फिर जीभ से चाटना। उसकी बॉडी सिहर रही थी।

ये मेरा पहला मौका था। उसका भी। शायद इसी वजह से वो अचानक घबरा गई। उसने मुझे हल्का धक्का दिया और बोली, “नहीं कार्तिक… मैं तैयार नहीं हूं। मुझे घर जाना है।”

मैं रुक गया। ट्यूब लाइट ऑन की। “क्या हुआ जान? डर गई? कोई बात नहीं, हम जैसे हो वैसे ही रहेंगे।”

वो बेड पर बैठ गई, आंखें नीची। “बस… अभी मन नहीं है। बहुत तेजी से हो रहा है सब।”

मैं मुस्कुराया। “ठीक है। कोई जबरदस्ती नहीं। हम बस बातें करेंगे, हग करेंगे।” मैंने उसे गोद में उठाया, बेड पर बिठाया और धीरे-धीरे उसके हाथ सहलाने लगा। उसके टॉप से क्लीवेज साफ दिख रहा था – गहरी, सॉफ्ट, और उसकी सांसों से ऊपर-नीचे हो रही। मैं पागल हो रहा था, लेकिन कंट्रोल रखा।

धीरे-धीरे वो रिलैक्स होने लगी। हम पुरानी चैट्स की बातें करने लगे, डर्टी जोक्स याद करने लगे। मैंने कहा, “तुम सच में बहुत खूबसूरत हो। मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे तुम जैसी लड़की मिलेगी। तेरे होंठ तो गुलाब जैसे हैं, इतने रसीले।”

वो शरमाई, मुस्कुराई। मैंने हिम्मत करके उसके कंधे पर हाथ रखा और उसे बाहों में भर लिया। अब वो मेरे सीने पर सर रखकर लेटी थी। हम टाइट हग कर रहे थे। मैंने बहाने से अपना सर उसके बूब्स पर टिका दिया। वो सिहर तो गई, लेकिन मना नहीं किया। मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया।

मैंने धीरे से उसके बूब्स पर हाथ रखा, हल्के से दबाया। वो सिहर गई, मेरा हाथ हटाया और बोली, “शरारत मत करो।” लेकिन उसकी आंखों में शरारत थी, सांसें तेज हो रही थीं। मैंने फिर कोशिश की। कई बार वो टालती रही, लेकिन अब उसकी बॉडी रिएक्ट कर रही थी।

आखिर मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उसकी गर्दन पर फिर किस किया, टॉप को ऊपर उठाया और लेफ्ट बूब बाहर निकाला। ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा, फिर ब्रा का हुक खोला। उसके बूब्स बिल्कुल टाइट, गोल, 34 साइज के – सॉफ्ट लेकिन फर्म, निप्पल्स गुलाबी और पहले से ही हार्ड। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा – धीरे, फिर तेज। वो सिसकारी भरने लगी – “आह… उम्फ… कार्तिक… क्या कर रहे हो… आह्ह…”

दूसरे बूब को हाथ से मसल रहा था, निप्पल को उंगलियों से पिंच कर रहा था। वो अब पूरी तरह मस्त हो चुकी थी, कमर हिला रही थी। मैंने अपना हाथ उसकी जींस की जिप पर ले गया। उसने रोका, लेकिन कमजोर आवाज में। मैंने फिर उसके बूब्स चूसे और उसे और गरम कर दिया। दूसरी बार हाथ उसकी पैंटी में पहुंचा। इस बार उसने नहीं रोका। उसकी चूत पहले से ही गीली थी – गरम, चिकनी। जैसे ही उंगली से क्लिट छुआ, वो कांप गई, कमर ऊपर उठा दी और जोर से सिसकारी – “आआह्ह… कार्तिक…”

मैंने जींस की बटन खोली और खींचकर उतार दी। अब वो सिर्फ ब्लैक लेस पैंटी में थी – जो पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने अपनी शर्ट-जींस उतारी और उसके ऊपर लेट गया। उसकी टांगें फैलाईं। उसकी चूत पर उंगली फेरते रहा – क्लिट को रगड़ता, अंदर उंगली डालता। वो आंखें बंद किए सिसकारियां भर रही थी – “उम्फ… आह… हां… ऐसे ही…”

फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला। वो 6.5 इंच का था, पूरी तरह खड़ा, नसें उभरी हुईं। मैंने कहा, “इसे हाथ में लो ना।”

वो शरमाई, “नहीं… शरम आ रही है।”

फिर मैंने पूछा, “अंदर डाल दूं?”

वो कुछ नहीं बोली, बस धीरे से सर हिलाया और मुस्कुराई, आंखें बंद कर लीं।

मैंने कंडोम लगाया। लंड उसकी चूत पर रगड़ा – उसकी गीलापन मेरे लंड पर लग रहा था। वो तरस रही थी, कमर ऊपर उठा रही थी। अचानक उसने नीचे से झटका दिया और मेरा लंड आधा अंदर चला गया। वो वर्जिन थी, तो थोड़ा दर्द हुआ। वो चिल्लाई, “आह… धीरे… बहुत दर्द हो रहा है…”

मैंने धीरे-धीरे पूरा अंदर किया। उसकी चूत बहुत टाइट थी – गरम, गीली, मुझे पूरी तरह जकड़ रही थी। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। वो आहें भर रही थी – “आह… आह… कार्तिक… धीरे… आह्ह…”

आवाज बाहर न जाए इसलिए मैंने अपना हाथ उसके मुंह पर रख दिया। थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ और वो भी कमर हिलाने लगी। मैंने स्पीड बढ़ाई। वो भी ऑर्गेज्म तक पहुंच चुकी थी – उसकी चूत सिकुड़ रही थी, बॉडी कांप रही थी। मैं भी झड़ गया। हम पसीने से तर, एक-दूसरे की बाहों में लेटे रहे, सांसें तेज।

थोड़ी देर बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मैंने नया कंडोम लगाया। उसने कहा, “बस… अब नहीं। थक गई हूं।” लेकिन उसकी आंखें कुछ और कह रही थीं – शरारत और भूख। मैंने उसके बूब्स फिर चूसे, निप्पल्स काटे। वो फिर गरम हो गई, सिसकारियां भरने लगी।

इस बार मैंने उसका सर दीवार से सटा दिया, उसकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रखीं और पूरा लंड एक झटके में अंदर डाल दिया। वो जोर से चिल्लाई, “आआह्ह… धीरे-धीरे चोदो ना… बहुत दर्द हो रहा है…”

लेकिन उसकी कमर खुद ऊपर उठ रही थी, मुझे और गहराई दे रही थी। वो मुझे और जोर से चाह रही थी। मैंने स्पीड बढ़ा दी। जोर-जोर से धक्के मारने लगा – हर धक्के में आवाज हो रही थी। उसके बूब्स उछल रहे थे, मैं उन्हें मुंह से पकड़-पकड़ कर चूस रहा था। वो नाखून मेरी पीठ पर गड़ा रही थी। “आह… और जोर से… हां… चोदो मुझे… आह्ह…”

फिर मैं झड़ गया। वो भी दूसरी बार जोर से झड़ी – उसकी चूत ने मुझे पूरी तरह निचोड़ लिया।

हमने करीब पांच घंटे साथ बिताए। बहुत इंजॉय किया – हग किया, किस किया, बातें की। फिर मैंने उसे बस स्टैंड छोड़ा। जाते वक्त वो मुस्कुराई, मेरे गाल पर किस किया और बोली, “अगली बार फिर मिलेंगे। बहुत मजा आया।”

बस में बगल वाली अनजानी लड़की ने खुद खोली शलवार

मैं प्राइवेट AC बस के सेकंड लास्ट सीट पर आराम से बैठा था। मुंबई में एक हफ्ते की व्यस्तता के बाद हैदराबाद लौट रहा था। रात के 9:30 बजे मुंबई का आखिरी स्टॉप आया। अचानक बस का दरवाजा खुला और एक बेहद खूबसूरत लड़की अंदर आई। लंबे घने काले बाल कमर तक लहरा रहे थे, हाइट लगभग 5’8″, हेल्दी बॉडी, परफेक्ट कर्व्स। वो सफेद सूट-शलवार में थी — दुपट्टा हल्का सा सरककर उसके भरे हुए ब्रेस्ट्स को हल्का-हल्का दिखा रहा था।

उसने सीट नंबर चेक किया और मेरी बगल वाली सीट पर बैठ गई। नजरें मिलीं, दोनों ने शर्माते हुए मुस्कुराकर “हेलो” कहा। बस चल पड़ी तो मैं चुपके-चुपके उसे देखने लगा। उसकी कमर इतनी पतली कि हाथों में समा जाए, हिप्स गोल-गोल और भरे हुए, छाती इतनी भरी हुई कि सूट का कपड़ा तना हुआ था। उसकी खुशबू — हल्की मीठी परफ्यूम और लड़की की नॉर्चरल खुशबू — मुझे पागल कर रही थी। आंखें थकी हुई लेकिन शराबी सी चमक रही थीं।

धीरे-धीरे बातें शुरू हुईं। नाम पूछा — उसका नाम **रिया** था। वो UK जा रही थी, लेकिन इमिग्रेशन में वीजा इश्यू हो गया। एयरपोर्ट से निकली तो फैमिली पहले ही चली गई थी। थकान और डिप्रेशन से उसकी आंखें लाल थीं। मैंने उसे हंसाने की कोशिश की — मुंबई की मजेदार स्टोरीज सुनाईं, अपने एक्सपीरियंस शेयर किए। धीरे-धीरे वो खुल गई। हम दोनों बहुत क्लोज हो गए। मेरी घुटने जानबूझकर उसकी नरम जांघों से टच हो रही थीं। वो कुछ नहीं बोली, बस हल्का सा मुस्कुरा दी।

ढाबे पर डिनर स्टॉप लगा। हम साथ बैठकर खाना खाए — गरमा-गरम परांठे, दाल और चाय। खाते-खाते उसकी आंखों में अब हल्की शरारत दिखने लगी थी। “आप बहुत अच्छे हो,” उसने कहा और मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई।

बस फिर चली। रिया ने कहा, “विंडो साइड पर बैठूंगी, नींद आएगी।” हम दोनों उठे। वो सीट से हटी नहीं, मुझे अंदर से निकलने का इशारा किया। मौका मिल गया। मैं उसके सामने से गुजरा, जानबूझकर थोड़ा झुक गया। बस के झटके ने मुझे उसके ऊपर गिरा दिया। मेरा सीना उसके नरम, गर्म और भारी ब्रेस्ट्स से पूरी तरह दब गया। मेरा लिंग उसकी जांघों के बीच फंस गया और तुरंत खड़ा हो गया। उसकी सांसें तेज हो गईं। मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा, नाक उसके माथे से लगभग छू रही थी। वो भी मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुझे साइड करने लगी, लेकिन धीरे-धीरे, जैसे वो भी एंजॉय कर रही हो।

मैंने अपना हाथ उसके कमर पर फेरा, रास्ते में उसके ब्रेस्ट्स को हल्का स्पर्श दिया। वो हल्का सा कांपी, लेकिन “कोई नहीं” वाली नजर से देखा। अब वो मेरी दाईं तरफ थी।

थोड़ी देर बाद मैंने हिम्मत करके अपना दायां हाथ उसके लैप पर रख दिया। वो चुप रही, आंखें बंद कर लीं। मैं धीरे-धीरे उसके सॉफ्ट थाईज को सहलाने लगा। फिर घूमकर बायां हाथ उसके गले पर, कान के पीछे, फिर ब्रेस्ट्स पर। उसके निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने शर्ट के अंदर हाथ डाला। उसकी शलवार के अंदर कुछ नहीं था — बिल्कुल नंगी, गर्म, शेव्ड और पहले से ही गीली चूत।

“उफ्फ… प्लीज… कोई देख लेगा ना…” उसने बहुत धीमी, कांपती आवाज में कहा, लेकिन उसकी जांघें थोड़ी और खुल गईं। वो खुद मेरी पैंट की जिप खोलकर मेरे मोटे, सख्त लंड को बाहर निकालने लगी। दो उंगलियों से सहलाते हुए वो उसे दबा रही थी।

मैंने उसके नाभि को सहलाया, कमर को जकड़ा, फिर ब्रा खोलने को कहा। उसने खुद पीछे हाथ डालकर ब्रा खोल दी। मेरे हाथ उसके नंगे, मुलायम, भारी ब्रेस्ट्स पर थे। उन्हें मसलते, निप्पल्स को हल्का-हल्का दबाते, चुटकी लेते… वो “आह… उफ्फ… धीरे…” कर रही थी।

धीरे-धीरे मैंने उसकी शलवार का नाड़ा खोला। मेरी उंगलियां उसकी गर्म, भीगी चूत पर घूम रही थीं। क्लिटोरिस को हल्का-हल्का रगड़ते, दो उंगलियां अंदर डालकर धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। रिया कांप रही थी। उसकी सांसें बहुत तेज हो गईं। अचानक वो सिकुड़ गई और पहला ऑर्गेज्म आ गया। गर्म पानी जैसा रस मेरी उंगलियों पर बह निकला।

“बेबी… मैं कंट्रोल नहीं कर पा रही…” उसने कान में फुसफुसाया।

हम बस में पूरा नहीं कर सकते थे। मैंने उसे कन्विंस किया कि पुणे में उतरकर होटल में रुक जाते हैं। उसने घर को फोन करके “बस ब्रेकडाउन” का बहाना बना दिया। पुणे पहुंचकर हम एक अच्छे होटल में चेक-इन कर लिए।

रूम में घुसते ही मैंने उसे बालकनी में पीछे से जकड़ लिया। मेरा लंड उसके गोल-मोटे बट्स के बीच दबा हुआ ऊपर-नीचे रगड़ रहा था। दोनों हाथों से उसके ब्रेस्ट्स को जोर-जोर से मसलते हुए गर्दन, कान, कंधे चूम रहा था। वो मुड़कर मेरे होंठों को चूसने लगी — गहरी, गीली किस। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी।

बेड पर ले जाकर मैंने उसकी पूरी बॉडी को चूमना शुरू किया। नाभि में जीभ घुमाई, कमर को चाटा, ब्रेस्ट्स को दोनों हाथों से दबाते हुए निप्पल्स को जोर-जोर से चूसा। रिया कराह रही थी, “आह… और जोर से… हां… बेबी…”

उसने मेरी पैंट उतार दी और मेरे लंड को मुंह में ले लिया। गर्म, गीली जीभ से चूसते हुए वो ऊपर-नीचे कर रही थी। हम 69 पोजीशन में गए। मैं उसकी चूत चाट रहा था, उंगलियां अंदर डाल रहा था, वो मेरे लंड और बॉल्स को सहला रही थी।

“प्लीज… अब डाल दो… मैं बहुत गीली हो चुकी हूं…” उसने प्यार से कहा, आंखों में भूख।

मैंने उसकी टांगें फैलाईं और धीरे-धीरे अपना मोटा लंड उसके टाइट, गर्म, भीगे गद्दे में डाला। “आह… उफ्फ… स्लोली बेबी…” वो कराह उठी। मैंने उसके मुंह को किस से बंद कर दिया और धीरे-धीरे पूरा अंदर कर दिया। फिर रिदम बढ़ाया। उसके ब्रेस्ट्स उछल-उछलकर ताल दे रहे थे। वो अपनी कमर ऊपर उठाकर मेरा साथ दे रही थी।

हां… और जोर से… फाड़ दो मुझे… आह… मैं आ गई…” वो चीखते हुए ऑर्गेज्म हो गई। उसकी चूत मेरे लंड को जोर-जोर से दबा रही थी। मैंने भी उसके अंदर ही पूरा गर्म रस छोड़ दिया।

थोड़ी देर बाद शावर लिया। फिर दूसरी राउंड — कार्पेट पर। वो घुटनों के बल, गांड ऊपर करके लेटी। मैंने पीछे से घुसा, एक हाथ ब्रेस्ट्स मसलते, दूसरा कमर पकड़कर जोर-जोर से ठोकना शुरू किया। उसके बट्स पर चपतें मारते, कमर चूमते… आखिर में मैंने उसे पलटा और उसके ब्रेस्ट्स, पेट और चूत पर अपना सारा रस छोड़ दिया। रिया उसे अपनी उंगलियों से मल रही थी और आहें भर रही थी — “मmm… कितना गर्म है… कितना अच्छा लग रहा है…”

सुबह 5 बजे हम निकले। हैदराबाद पहुंचकर अगले तीन महीने हमने कई हॉट नाइट्स एंजॉय कीं — होटल, उसके फ्लैट, कभी-कभी कार में भी। फिर वो UK चली गई। आज भी जब बात होती है तो वो मुस्कुराते हुए कहती है, “वो बस जर्नी कभी नहीं भूलूंगी… तुमने मुझे वो रात दी जो मैं कभी एक्सपेक्ट नहीं कर रही थी।”

वो सफर सिर्फ ट्रैवल नहीं था… वो हमारी सबसे हॉट, रोमांटिक और यादगार लव स्टोरी बन गई।

ऋतू चाची हॉट रंडी रेश्मा बनकर चुदी- 1

नमस्ते! सभी लंड वालो और चूत वालियों को मेरा लंड क्या प्रणाम। मैं हॉट सेक्स स्टोरी पर नया नहीं हूं मगर ये मेरी पहली कहानी है। बहुत सालों से कहानियाँ पढ़ रहा हूँ और हिला रहा हूँ। ऐसा एक दिन भी नहीं होता जब हॉट सेक्स स्टोरी पे लोग इन नहीं किया हो। बड़ी ही मस्त साइट है और मस्त कहानियाँ हैं। अब बकवास बंद करके माल पे आते हैं। अपनी पहली कहानी में मैं आपको अपने घर ले जाता हूं और अपनी रांड माल रितु चाची से मिलवाता हूं।

ऐसा कोई लंड ना होगा जो इस छिनाल को चोदना ना चाहे। साली रांड गजब की कातिल माल है. रितु चाची की उमर लगभाग 35 साल की होगी धमाका। रितु के दो बच्चे हैं।अब कहानी पर आता हूं। मैं 8वीं कक्षा में था जब मेरे छोटे चाचा की शादी हुई और रिउ हमारे घर पे आयी। मगर चाचा का कहीं बाहर अफेयर था और वो घर पर पड़ी इस रांड को प्यासा ही चोद के रखा था। जल्दी ही मेरी चाचीजी के साथ काफी बनने लगी और हम काफी बात करने लगे।

पर अभी तक मेरे आदमी में उसके लिए कोई ख़राब ख्याल नहीं था। एक बार मेरा एक दोस्त अर्पित आया हुआ था और उसने जब ऋतु चाची को देखा तो साला चुटिया पागल हो गया। मेरा काफी अच्छा दोस्त था तो इसलिए हम काफी फ्रैंक थे। उसने मेरेको बोला कि यार राजेश क्या जबरदस्त माल है, तेरी चाची साली रांड को पटक पटक कर चोदने में बहुत मजा आएगा।उस समय क्लास 10 में था मैं और नई नई चूत का शौक चढ़ा हुआ था।

अर्पित की बात सुनकर मेरा भी मन पलट गया और मैं भी ऋतु को अब अपनी चाची की तरफ नहीं बल्की एक चुदासी रांड की तरह देखने लगा। साली रंडी जब किचन में काम करती थी तो पसीने के कारण उसके ब्लाउज पर लाइन बन जाती थी। साली छिनाल की क्लीवेज और गठीली जवानी देख कर मेरा लंड तन जाता था।

मैंने उसकी पैंटी और ब्रा चुराना शुरू कर दिया था और चाचीजी की तस्वीरें भी खींची थीं। रात को उनकी फोटो देख कर उनकी ब्रा और पैंटी में मुँह मारता था और सुबह उनकी अलमारी में रख देता था। मेरे लंड के पानी से भरी हुई पैंटी और ब्रा पहन के वो रंडी की बच्ची घूमती थी तो मेरा लंड पागल हो जाता था और मन कर गया था कि वहीं पे लेता कर साली की कली मैं अपना लंड पेल के रुला दू हरामन को।ऐसा काफी दिन तक चलता रहा और मैं और अर्पित उसके नाम की मुथ मारते रहे। हम चाची के साथ घूमने भी जाने लगे। हम फिल्में, शॉपिंग और कई बार लंच पर जाते थे।

अब हम ऋतु चाची से काफी फ्रैंक हो गए थे मगर हमें समझ नहीं आ रहा था कि उसकी चूत तक कैसे पहुंचें। अपनी हताशा दूर करने के लिए हम रंडियां थोंक ने लागे। स्कूल के बाद हम दोनों कोठे पे जा के रंडी बजाते थे। बहुत जल्दी हमारी दोस्ती अनवर नाम के एक भदवे से हो गई। अब तक हम कक्षा 12 में पढ़ गए थे और ऋतु चाची को एक बेटा भी हो गया था। बड़े प्रेशर के बाद घर वालों के दवाब में आकर चाचा ने उसको बच्चे के लिए चोद तो दिया मगर साथ ही साथ उसकी चूत में आग भी लगा दी थी। माँ बनने के बाद उसके चूचे और गांड और फैल गई थी। अब साली रांड को देख कर हम लोगों से रहा नहीं जाता था। एक दिन अर्पित बोला: यार राजेश साला तू कब तक अपने घर का माल सदन देगा और रंडियां बजाएगा।

क्या जिंदगी भर तू अपनी रांड चाची की पैंटी में मूठ मारेगा। अब तो कुछ कर ना.मैने बोला: भाई अर्पित उस रांड को बजाना तो मेरेको भी है. अब मेरे से भी नहीं रहा जाता तू ही कोई तरकीब बता ना। फिर अचानक से अर्पित ने बोला: क्यों ना हम अनवर से मदद मांगेगे। वो साला सेक्स टेबलेट का इफ़ेक्ट लड़कियों को पटाने में माहिर है। वो जरूर कोई रास्ता निकाल लेगा। उसकी बात मेरेको समझ में आ गई। बात सच ही थी. फिर हमने सोचा कि 12वीं कक्षा की परीक्षा के बाद ये वाला काम पूरा करेगा।

परीक्षा के बाद मैं अर्पित और अनवर एक गंदे से बार मैं बैठ कर दारू पी रहे थे। तभी अर्पित ने बोला: यार अनवर भाई आपसे थोड़ी सी मदद चाहिए। बहुत ही रहस्य और महत्वपूर्ण बात है। अनवर: हां बोलो क्या होगा तुमको.साला इतना क्या महत्वपूर्ण काम है. हमने अनवर भाई को ऋतु चाची के बारे में बताया और उसकी फोटो भी दिखाई। देखता ही अनवर बोला साला तुम लोगों ने मेरेको इस रांड के बारे में पहले क्यों नहीं बताया ये तो साली मस्त छिनाल माल है। मस्त पटाखा है. अनवर भाई बोला: देखो लौंडो तुम्हारी चाची में दम है साली मस्त है।

मैं तुम लोगों की मदद कर सकता हूं लेकिन एक शर्त है मैं इस पटाखा को पहले में भुजूंगा इस की चूत मैं बजाऊंगा बाद में तुम्हें भी पक्का मौका मिलेगा।और राजेश तुम बुरा मत मानो ना मैं इस रांड से धंधा भी करवाऊंगा। आज कल ऐसी घरेलू राखैलों की डिमांड बहुत है मार्केट में। बोलो डील मंजूर है. अर्पित और मैं एक दूसरे को देखते रह गए और फिर हमने कहा मंजूर है। उसके बाद अनवर ने चाचीजी को पटाने का प्लान बना दिया।

अनवर भाई ने हमको कहा कि हमलोग रितु चाची को एक बार फिल्म के लिए ले कर आये। फिल्म के बाद अनवर भाई हमलोग से मिले। हमने उनको चाचीजी से इंट्रोड्यूस करवाया और कहा कि ये हमारे मैथ्स के टीचर हैं। मूवी के बाद बात होती होती हम दोनों ने कहा कि हमारा आज बहुत ही जरूरी काम है और हम चले गए। चाची जी और अनवर भाई शॉपिंग कर रहे थे। अनवर भाई कोई 6 इंच 5 फीट के होंगे और उनकी टैगडी बॉडी भी थी। देखने में एक बांध पहलावाएन ।

चाची जी जल्दी ही उनसे घुल मिल गई। शॉपिंग के बाद लंच करते हुए अनवर भाई ने चाची के खाने में नींद की गोली डाल दी। जैसे ही गोली असर करने लगी अनवर ने तूरंत चाची को गाड़ी में दाल के अपने कोठे पे ले लिया। हम भी उसके साथ आ गये। कोठे पे जा कर अनवर भाई ने हमको एक कैमरा दिया और वीडियो बनाने को कहा। अनवर भाई बिस्तार पर शेर की तरह कूदे और चाची जी की चुचियाँ मसलने लगे। साली क्या मस्त माल है तेरी रखेल चाची. क्या तो मैं आज माँ चोद दूँगा। बहुत दिन बाद ऐसा तगड़ा माल मिला है।

मैंने बोला चोद दो अनवर भाई चोद दो मेरी चाची को। इसकी चूत में बहुत खुजली है. मीता दो आज इसकी आग. साली के बदन ने हमारी भी जवानी को परेशान कर रखा है। मुठ मार मार के थक गए हैं अब। आज तो इस रांड को अपनी राखाइल बना दो। अब अनवर भाई जल्दी से दारू के दो पैग लगाते हुए चाची जी की चुची को मसलने लगे। उसने चाची की लाल रंग की साड़ी को उतार के साइड पे फेंक दिया और चाची के ऊपर बैठ के उनके डीप क्लीवेज को चाटने लगा। धीरे-धीरे ऋतु चाची को होश आने लगा और वो भी गरम गरम सिसकियाँ भर ने लगी थी।

अनवर भाई ने रितु चाची के ब्लाउज और ब्रा को खोल के फेंक दिया और चाची जी के बब्बो पे अपना मुंह लगा के पागल कुत्तों की तरह चुनने और चांटने लगे। एक हाथ से एक बब्बे को मसलते हुए वो दूसरे बब्बे को चूस रहा था। रितु चाची काम अग्नि में बहकते हुए तड़प ने लगी और आहीन भर ने लगी। मैं और अर्पित तो वीडियो बनाने में लगे हुए थे। मुझे अपने सपनों की रांड रितु चाची को चोदते हुए देख कर बहुत मजा आ रहा था। चाची के बब्बो को लाल करने के बाद अनवर भाई रितु चाची के होठों को अपने दांतों से चबाते हुए उनकी जीभ को छूने लगे।

ऐसा स्मूच मैंने कभी नहीं देखा था मुझे डर लगने लगा कि कहीं चाची की सांस ना रुक जाए और वो मर ना जाए। अनवर भाई को रोकना अब मुमकिन ना था। हम चाहते हैं कि रितु चाची को कोई छू न सके। अनवर भाई अपनी हर रंडी को पहले खुद चख थे बाद में अपने चमचो और कुत्तों को देते थे। आज तो वो चाची को अपने लंड की रानी बना कर ही मान ने वाले थे।

अपने स्मूच करने के बाद अनवर भाई ने चाची के पेटीकोट को ऊपर करके उनकी टांगों से खेलना शुरू कर दिया। इतने में ही चाची को अचानक से पूरा होश आ गया था। मेरी और अर्पित किट तो मोटी ही गई थी। रितु चाची ने अनवर भाई को धक्का दिया और वो पीछे हट गए। गुस्से में आकार अनवर भाई ने रितु चाची को दो कड़क झापड़ लगाये और बोला: अपनी औकात में रहकर साली रंडी तेरेको मालूम नहीं है हरामण तू किसके कोठे पे है। ज्यादा चू चा कि ए तो तेरी बॉडी भी नहीं मिलेगी।

देख तेरा भतीजा तेरेको मेरे पास लाया है। अब ये वीडियो बना रहा है. शांति से यहां का महौल गरम कर नहीं तो पूरा देश तेरी जवानी से अपना बिस्तार गरम करेगा। बेच दूंगा मैं ये वीडियो समझी। ऋतु चाची डर गई और मेरेको बोली कि राजेश तुमने ऐसा क्यों किया मेरे साथ। मैंने बोला चुप साली दो टेक कि छिनाल तेरे करण हम दोनों दोस्त रंडी चोद बन गए अब टब ही रंडी बन चुद सब से। अर्पित बोला: क्यों चाची जी बहुत गर्मी है ना आपकी जवानी में अब बेचो अपनी जवानी को इस कोठे पे।

यहां तो आपको रोजाना नए कानून मिलेंगे अपनी चूत की प्यास मिटाने को। ये सब सुनके रितु चाची रोने लगी। तब अनवर भाई ने उनको अपनी बाहों में भर के बोला। रितु डार्लिंग क्यों रो रही हो देखो हम सब के साथ मस्ती करो और ऐश करो ये रोने धोने से क्या होगा। तेरा रेट भी हाई रखूंगा मैं जैसे मर्द के साथ सोना चाहोगी वैसा ही लाऊंगा। टेंशन मत लो अब यहां से वापस जाने का कोई रास्ता नहीं है। ये बोलते बोलते उनको चाची का पेटीकोट खोल दिया और लाल रंग की उनकी पैंटी के पार से चाची जी की चूत पर उंगली घुमाना शुरू कर दिया।

चाची सारे रास्ते बंद होता देख धीरे-धीरे मस्त होने लगी और अनवर भाई के सीने में लिपटने लगी और उनकी चाटी छूने लगी। अनवर भाई ने बोला अब बनी ना तू अनवर की रांड. आ जाने मन तेरेको अब जन्नत दिखता हूं. ये कह के उनको चाची का हाथ अपने पजामे पे रखा। चाची ने बोला अनवर मियाँ ये क्या है।अनवर भाई ने बोला जाने मन ये मेरा लावड़ा है और तुम्हारा खिलोना। खेलो इसके साथ। ऋतु चाचीजी ने अनवर भाई का पजामा उतारा और उनकी चड्ढी भी उतार दी और एक सस्ती रंडी की तरह अनवर भाई का लौड़ा हिलाने लगी और उसे खेलने लगी।

अनवर भाई: और हिला मेरे लौड़े को रंडी और जोर से हिला ये तेरे नामर्द भड़वे पति का लौड़ा नहीं है। एक मर्द का लंड है. चूस इसको साली हरामन छिनाल। रितु चाची: अरे इतना भी मत जोश दिखाओ अनवर मियां. मेरी तो किस्मत की फोटो गई थी उस दिन जिस दिन मैंने इस हरामी के नपुंसक चाचा से शादी की थी। साला इनका खानदान ही नामर्दों से भरा है। इस को और इसके भड़वे दोस्त को इतनी लिफ्ट दी मैंने सालों में मुझे एक बार चोदने का दम भी ना था।

कहानी सेक्स टेबलेट का इफ़ेक्ट अगले भाग में जरी है।

ऋतू चाची हॉट रंडी रेश्मा बनकर चुदी- 2

चाची भतीजा चुदाई कहानी में पढ़ें कि आज पहली बार एक असली मर्द मिला है.दिखा दो अपनी सारी मर्दंगी. ये कह के रितु चाचीजी अनवर भाई का 7 इंच बड़ा मोटा लंड को कुत्तों की तरह चाटने लगी। अनवर भाई की आखें निकल गयीं. अनवर भाई: साली तेरे से भरी रंडी नहीं देखी है अब तक मैंने। क्या चूज़ ती है अंड ले पूरा इसको चाँद में खा जा इसको। आज टेरमैं चिकनी चूत को मेरा मुसाद लंड फाड़ दूंगा। ऋतु चाची : हाँ मेरे राजा. रितु चाची को पता नहीं क्या हो गया था। अपनी सारी शर्म खो ने के बाद हमें और किसी भी और रंडी में अब कोई फरक नहीं रह गया था।अनवर भाई: आआआह्ह्ह्ह और चूसो और जोर से देखो…।

साली रंडी बड़ी कुत्ती चीज़ है तू. आआआह्ह्ह्ह.ऋतु चाची: आ रहा है ना मजा….अनवर भाई: हां रानी हाआं…अनवर भाई चाचीजी की चड्ढी उतार ने लगे और चाची को बिल्कुल नंगा कर दिया. वो चाची जी की चूत में उंगली करने लगे। ऋतु चाची: आआह धीरे से दर्द होता है।

अनवर भाई: दर्द में ही तो मजा है जाने यार। ऋतु चाची: तेरी उंगली ने मेरा हाल ये कर दिया है तो तेरा लंड तो मुझे पागल हाय करदेगा.अनवर भाई: आज तक तूने लंड का स्वाद चखा ही कहां है. चूस इसको जोर से।अब अनवर भाई ने चाची को बिस्तार पे ले दिया और 69 पोजीशन में जा केर उनकी चूत को चाटने लगे और अपना लंड रितु चाची जी के मूंह में डाल दिया। अपनी एक उंगली उन्हें चाची जी के गांड में डाल कर हिलाना शुरू कर दी। चाची जी की हालत खराब हो गई थी।

ऋतु चाची : आआअहह…. हाऐइइइइ मेरी जवानी… साली बेकार ही हो जाती है… अगर आज आपका ये लंड नहीं मिलता। और जोर से हुसाओ उंगली. फाड़ डालो मेरी गांड को. अनवर भाई: हमारे और इस कोठे के होते हुए तेरी जवानी बेकार कैसे जाती रानी। तेरी इस चूत को तो मैं चूस चूस के बेहाल कर दूंगा और रहूंगी तेरी गांड वो तो मैं मारूंगा ही। साली छिनाल बड़ी ही मस्त आइटम है बे तू।साली कहाँ चिप थी इतने दिनों से। रितु चाची: आआहह मत रुको अब… आआह्ह्ह…. आआआह्ह्ह….अनवर भाई ने अपनी स्पीड और बढ़ा दी औरा बी वो चाची की चूत को काटने लगे और अपनी जीभ को पूरी उनकी चूत में घुसा दिया।

अनवर भाई की उंगलियाँ चाची के गांड के छेद को फाड़े जा रही थी और दूसरे हाथ से अनवर भाई चाची की गांड पर थप्पड़ लगाये जा रहे थे। अनवर भाई: और ले रंडी…आज निकलेगा तेरी मस्ती. साल्लिई एक नंबर की रांड है बे तू. रितु चाची: आआहह धीरे देखो भगवान के लिए… बहुत दर्द हो रहा है। अनवर भाई: इतना ही अगर दर्द हो रहा है तो जाके अपनी पत्नी जैसे किसी नामर्द से चुदवा रंडी।

यहां तेरी कोई नहीं सुनेगा…समझी…तेरा भगवान भी नहीं…ऋतु चाची : आआअहह ….हाआआआइई…थोड़े से तो प्यारर्र से करो ना राजा.. मैं कहीं भाग थोड़ी ना रही हूं…अनवर भाई: हाआ हाआ…साली भागे गी कहाँ हो तुम. तू अनवर भाई की रखाईल है समझी. और तेरी जैसी चिकनी रंडी को कैसे चोदना है ये मुझे बहुत दर्द से आता है।

भूल जा अब सब कुछ. आज से तू वही करेगी जो मैं बोलूंगा। समझ… बोल… समझ या नहीं..ऋतु चाची: समझ गई सब समझ गई… आआअहह… आआहह हाआआईईईईई भगवान मेरी छुट्टट…। आआअहहहहहह और्रर तेजज्ज औरररर…..येह….. हान्नन्न हन्नन्न बस्स्स ऐसे हीई…. हाआइइ आआह्ह्ह्ह….. आआह्ह्हाहा ..चाचीजी जोर से चिल्लाते हुए ठंडी हो गई। अनवर भाई का लंड अपने मुँह से निकल के चोद दिया और अपने पहले ऑर्गेज्म में पसीना पासीन हो गई।

अनवर भाई: क्यों रंडी साली हो। बस हो गई तू ठंडी. मेरे लंड को उक्सा ती है बे तू. ये ले साली छिनारर. अनवर भाई के तमाचे से चाची जी सहम गईं। मेरी और अर्पित की हालत ख़राब हो चुकी थी हम अपना लंड हिलाते हिलाते दो बार अपना माल चोद चुके थे।ऐसा भयानक सीन मैंने कभी नहीं देखा था। अनवर भाई ने रितु चाची को अपना गुलाम बना लिया था।

वो चाची को बिस्तर पे चोद के खड़े हो गए और बोले। अनवर भाई: चल रंडी खादी हो अभी बहुत काम बाकी है। तेरे को ठंडा करने नहीं आया मैं। तू आई है मेरेको ठंडा करने खड़ी हो के चूस मेरे लंड को। ऋतु चाची: थोड़ी देर रुक जाओ ना. प्लीज़ मेरे से और नहीं होगा. अनवर भाई: तेरे लिए रुकूंगा मैं। चल खड़ी हूं नहीं तो वापस मारूंगा तेरेको रंडी। रितु चाचीजी डर गई अनवर भाई का लंड मुँह में ले कर चुनने लगी।

मगर अपने पहले ऑर्गेज्म के कारण उनमें अब दम ना था और जिस तरह से अनवर भाई का लंड चूस रही थी उसे अनवर भाई ने घुसाया हो कर चाची जी को एक और थप्पड़ मारा। और अपना लंड निकाल के चाचीजी के मुँह के सामने रख दिया। अनवर भाई ने चाची जी के मूंह के ऊपर गुस्सा करना शुरू कर दिया और बोला। अनवर भाई: देख ले अपनी असली औकात. मेरा मुत है तू समझी. कल से तू मेरे से ही नहीं यहां के बाकी ग्रहको से भी चुड़ेगी। ज्यादा चू चा कि तो मार दूंगा तेरेको समझी।

साली कुतिया. तेरे जिस्म से बहुत पैसे कमाऊंगा मैं और तेरे वीडियो पर तो सारा इंडिया क्या पूरी दुनिया मूठ मारेगी। चल अब खादी हो। ऋतु चाचीजी रोते हुए अपने आप को संभाल के खड़ी हुई और अनवर भाई से माफ़ी माँग ने लगी। ऋतु चाची: मुझको माफ़ करदो। मैं भूल गई थी कि अब मैं एक रंडी हूं सिर्फ एक रंडी। जो आप बोलोगे वैसा ही होगा। आज से ये जिस्म मैं आपके हवाले करती हूं। माफ़ करदो मेरेको. अनवर भाई जोर जोर से हंसे लागे और अपना लंड हिलाते हुए बोले।

अनवर भाई: बहुत जल्दी समझ गई तेरी चाची राजेश. साली कुतिया पहले समझ जाती है तो इतनी मार ना खाती। मैं: अनवर भाई थोड़ा रहम करो ना चाची जी पर. आप इनको भले जब चाहे चोदो मगर रितु चाची से धंधा तो मत करवाओ ना।ये रंडी हमको दे दो। हम संभाल लेंगे इसको. अनवर भाई: (घुससे में) साले भदवे औकात में राह अपनी तेरा इस गली में आना बंद करवा दूंगा समझा। मेरेको मत सिखा क्या करना है. मैं: सॉरी अनवर भाई माफ़ करना, आप जैसा बोलोगे वैसा ही होगा। अनवर भाई: आजा रितु रानी अब तेरेको आगे की सैर करवाता हूँ। साला पूरा मूड खराब कर दिया तुम सब ने।

रितु चाची: हमारी नादानी को माफ करिएगा।रितु चाचीजी अनवर भाई का लंड पकड़ के उसको अब चूसने लगी। अपने हाथों से अनवर भाई के दांतों और थैलियों को मसलते हुए चाची भतीजा चुदाई कहानी में वो उनका लंड का सुपाड़ा अपने मूंह में डाल के चूसने लगी। अनवर भाई भी ढकेल लगा ने लगे और चाची जी के मूंह को चोदने लगे। उनके चाँद से आन्हह निकल ने लगी।

चाची जी ने अनवर मियां को खुश करने के लिए अपनी एक उंगली उनकी गांड में घुसा दी। अनवर भाई जैसे पागल हो गए और चाची जी के बालों को पकड़कर खींचने लगे और जोर से अपना लंड ढकाल ने लगाए। चाची जी की सांस फूलने लगी थी। मैं और अर्पित शांति से डर के करण वीडियो पर बैन लगाते रहे। अनवर भाई: अब जा के बनी ना तू रंडी. और चूसो साली छिनाल… हांन्न… और जोर से…अनवर भाई पूरी मस्ती में आने के बाद चाची जी को उनके कमर के बाल पटक दिया और उनकी दोनों टैंगो को ऊपर कर के उनकी चूत पे अपना चंद्रमा वापस रख के चाटने लगी।

चाची की चीख निकल ने लगी थी. वो जिस तरह से चाची जी की चूत चाट रहे थे और गांड में अपनी उंगली पेल रहे थे चाचीजी की हालत वापस खराब होने लगी थी। अपने हाथ को रितु चाची के गांड के छेद से निकल के वो रितु चाची के मूंह में डालने लगे। चाची जी उनकी उंगलियों का चैट ने लगी और आहें भरने लगी। अब चाची जी से और नहीं रहा जा रहा. ऋतु चाची: अनवर मियां चोद दो मुझे अपने लंड से. मार दो मेरी चूत को. कर दो मेरी चूत को अपने लंड से पकड़ो। और मत तड़पायो मैं मर जाऊँगी।

अब नहीं रहा जाता. अल्लाह के लिए बुझा दो मेरी आग. आज फाड़ दो मेरी चूत को।अनवर भाई: देख कैसे तड़प रही है तू मेरे लंड के लिए। हाआआ हाआ… ऐसी ही रखील अच्छी लगती है मेरेको जिसे अपनी औकात मालूम हो… चाहिए ना मेरा लंड तेरेको हांन… चाहिए ना… बोल ना… मेरेको बोल ना… साली बोल… रितु चाची: हां नहीं चाहिए मेरेको आप का लंड चाहिए।

मैं आपकी राखाइल हूं. दे दो मेरेको अपना लंड दे दो. भगवान के लिए बुझा दो मेरी आग. अनवर भाई ने चाची जी की चूत को चाटना बंद कर दिया और चाची जी के बाल पकड़ के खींच के उनको कुटिया बना दिया। . चाची जी तड़पने लगी और कराहेन भरने लगी। लंड रगड़ते रगड़ते अनवर भाई ने एक ही झटके में पूरे जोर से अपना लंड रितु चाची जी की चूत के अंदर पेल दिया।

रितु चाची जी जोर से चिल्लाने लगी मगर अनवर भाई ने बिना रुके एक के बाद एक जोरदार धक्के लगाने लगे। इतना मोटा लुंबा लंड चाची जी की छोटी सी नरम चूत को फाड़ते हुए जैसे ही अंदर घुसा चाची जी की जान निकल गई। अनवर भाई रितु चाची के बालों को और जोर से खींचते हुए अपना लंड अंदर बहार करने लगे और दूसरे हाथ से कभी चाची जी की गांड को मारते और कभी उनकी चुचियों को दबाते। चाची जी सिहर रही थी और चुदाई के कारण चिल्ला रही थी।

उनकी चिकनी चूत से कहाँ निकल रहा था। अनवर भाई: ले रंडी ले…मेरा लंड बहुत आग थी ना तेरे जिस्म में। देख मेरा लंड कैसे चोद रहा है तेरी चूत को.ऋतु चाची : आआअह्ह्ह्हह्ह धीरेर्री…. मेरी चूत फट जाएगी…. आआआअह्हह्हह…..अनवर भाई: साली छिनार तेरी चूत फाड़कर हाय ये मेरा लंड शांत होगा आज। देख रंडी आज मैं तेरी चूत को बिना कंडोम के चोद रहा हूँ। यही औकात है तेरी और तेरी चूत की। मेरे लंड का माल जब तेरी चूत में जायेगा तो तू मेरे नजायज़ बहुत की रांड माँ बनेगी। शायद मेरे बच्चे के करण हाय तेरे खानदान में कोई मरद पैदा होगा।

ऋतु चाची: आआअहह बहुत दर्द हो रहा हैईईई…। हाय ऐसा ना करो अनवर भाई….मैं एक शादी शुदा औरत हूं मेरे बारे में कुछ तो सोचो। अनवर भाई जोर जोर के झटके लगते हुए बोले: अनवर भाई: साली तू मेरी रखील है. तू पालगी मेरे बच्चे को अपने पति का बच्चा बना के। समझी अब तेरा घर ये कोठा है और तू मेरी रखील है भूल जा अपने पति को।

अनवर भाई ने रितु चाचीजी की कमर को पकड़ा और उनको गोदी में उठा के खड़े होगे। अन्होने चाची जी को पलट दिया और अपने लंड पर बिठा दिया। अब वो खड़े खड़े उनको चोद रहे हैं. अपने पति ऋतु चाची जी के होंठों पर रख कर वो चाची जी की चूत में खड़े-खड़े अपना लंड पेलने लगे। उन दोनो के बदन की गर्मी से पूरा कर्म गरम हो गया था। उन दोनो का बदन पसीने से भर गया था और वो चाची जी को चूमते और पेलते जा रहे थे। चाची जी की चूत भी अब मस्त हो गई थी।

रितु चाची जी जोर से चिल्लाने लगी मगर अनवर भाई ने बिना रुके एक के बाद एक जोरदार धक्के लगाने लगे। इतना मोटा लुंबा लंड चाची जी की छोटी सी नरम चूत को फाड़ते हुए जैसे ही अंदर घुसा चाची जी की जान निकल गई। अनवर भाई रितु चाची के बालों को और जोर से खींचते हुए अपना लंड अंदर बहार करने लगे और दूसरे हाथ से कभी चाची जी की गांड को मारते और कभी उनकी चुचियों को दबाते। चाची जी सिहर रही थी और चुदाई के कारण चिल्ला रही थी।

उनकी चिकनी चूत से कहाँ निकल रहा था। अनवर भाई: ले रंडी ले…मेरा लंड बहुत आग थी ना तेरे जिस्म में। देख मेरा लंड कैसे चोद रहा है तेरी चूत को.ऋतु चाची : आआअह्ह्ह्हह्ह धीरेर्री…. मेरी चूत फट जाएगी…. आआआअह्हह्हह…..अनवर भाई: साली छिनार तेरी चूत फाड़कर हाय ये मेरा लंड शांत होगा आज। देख रंडी आज मैं तेरी चूत को बिना कंडोम के चोद रहा हूँ। यही औकात है तेरी और तेरी चूत की। मेरे लंड का माल जब तेरी चूत में जायेगा तो तू मेरे नजायज़ बहुत की रांड माँ बनेगी। शायद मेरे बच्चे के करण हाय तेरे खानदान में कोई मरद पैदा होगा।

ऋतु चाची: आआअहह बहुत दर्द हो रहा हैईईई…। हाय ऐसा ना करो अनवर भाई….मैं एक शादी शुदा औरत हूं मेरे बारे में कुछ तो सोचो। अनवर भाई जोर जोर के झटके लगते हुए बोले: अनवर भाई: साली तू मेरी रखील है. तू पालगी मेरे बच्चे को अपने पति का बच्चा बना के। समझी अब तेरा घर ये कोठा है और तू मेरी रखील है भूल जा अपने पति को।

अनवर भाई ने रितु चाचीजी की कमर को पकड़ा और उनको गोदी में उठा के खड़े होगे। अन्होने चाची जी को पलट दिया और अपने लंड पर बिठा दिया। अब वो खड़े खड़े उनको चोद रहे हैं. अपने पति ऋतु चाची जी के होंठों पर रख कर वो चाची जी की चूत में खड़े-खड़े अपना लंड पेलने लगे। उन दोनो के बदन की गर्मी से पूरा कर्म गरम हो गया था। उन दोनो का बदन पसीने से भर गया था और वो चाची जी को चूमते और पेलते जा रहे थे। चाची जी की चूत भी अब मस्त हो गई थी।

चाची भतीजा चुदाई कहानी अगले भाग में जरी है।

ऋतू चाची हॉट रंडी रेश्मा बनकर चुदी- 3

3सम कैम सेक्स का मजा पहली बार एक मस्त लंड को अपनी चूत में पकाए वो अब मस्त हो गई थी वो भी अनवर भाई के बालों को पकड़ने के लिए लगी थी। ऋतु चाची : हाऐइइइइइइइइइइ… क्या लंड है आपका अनवर भाई… मत रुको पेलते जाओ अपना लंड मेरी चूत के अंदर बहुत मजा आ रहा है।

मत रुको मेरे राजा… हाऐइइइ… आअह्हह्हह्हह्हह्हह…. आआहहहअनवर भाई: साआअल्लीइ…मजा तो मुझे बीहाय बहुत आ रहा है तेरे नरम बदन से खेलने में और तेरी टाइट चूत मारने में… क्या गजब माल है तू… आआहहहह ये ले साली रंडी.. ये ले… ऋतु चाची: हायइइइइइइ मर जाऊं मैं तेरे लंड पे।

आज तक जिंदगी में ऐसा मजा कभी नहीं आया था। हाईईई… मस्त कर दिया है मेरेको तेरे लंड ने… क्या फौलाद है…. आआअहह हाऐइइइइ…. मैं आज से सिर्फ और सिर्फ तेरी रंडी हूं… तेरे लंड की गुलाम.. आआआह्ह्ह…. और जोर से देखो… आआअहह…. अनवर भाई ने अपने बाद में बहुत प्यार किया और जोर से पेलना शुरू कर दिया।

चाचीजी की बातें सुनके उनका जोश और भड़क गया और वो और बेहमी से रितु चाची को चोदने लगे। चाचीजी को बिस्तार पे लेता कर अब वो उनके ऊपर चढ़ गए और ऋतु चाची के मुँह को चूमते चाटते वो उनके पूरे चेहरे को छूने लगे। एक हाथ से चुचियांन्न मसलते हुए वो अपने लंड को आगे पीछे कर रहे थे। चाची जी का बदन सिकुड़ने लगा और चाची जी ने अपनी चूत को टाइट करते हुए अनवर भाई का लंड जकड़ लिया।

ऋतु चाची जी अनवर भाई के मजबूत हाथों में पिघलने लगी और दूसरी बार अपना पानी चोद के अधमरी हो गई। मगर अनवर भाई तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। अपना आसन बदलते हुए अब उन्हें चहसी जी को ऊपर कर दिया और खुद लेट गए। चाची जी उनक फौलादी लड़े के ऊपर बैठ के ऊपर नीचे होने लगी। अनवर भाई अब सीधे उनकी क्लिटोरिस और बची हुई दानी को चोद रहे हैं। कुछ ही देर में चाची वापस मस्त हो गई और जोर जोर से कूदने लगी और साथ में अनवर भाई भी चाचीजी की चुचियों को कसके निचोड़ते हुए तेजी से अपना लंड पेलने लगे।

दोनों ही अपने जिस्म की आग और प्यास को बुझाने के लिए पागल हो रहे थे। जैसे जैसे अनवर भाई अपना सारा माल चोदने के करीब आने लगे वो उतनी ही तेजी से पेलने लगे। चाची जीब ही मस्त होकर आखें बंद कर के बस मस्त हो कर अपना काम ज्वाला शांत करने में लगी थी। अनवर भाई: हाअन्नन्न रानी… आआह्ह्ह बहुत मजा आ रहा है… आआह्ह्ह साली मस्त कर दिया है आज तूने मुझको… ऋतु चाची: आआह्ह्ह्ह अनवर भाई आआह्ह्ह्ह… अब अनवर भाई अचानक से लंड पेलते चाची जी से लिपट गये। चाची जिब ही पागलों की तरह उनको अपनी बाहों में बहारने लगी।

डोनो जोर जोर से आहेन भरने लगे और अनवर भाई ने एक आखिरी जोर के झटके के साथ अपना सारा माल उनकी चूत में गिरा दिया। चाची जी ने भी अपना पानी चोद दिया और अनवर भाई के ऊपर गिर गई और उनको चूमने लगी। अनवर भाई धीरे-धीरे अपना लंड पेल जा रहे थे और फिर उनकी चोट से अपना लंड निकल लिया। रितु चाची जी की चूत फूल गई थी सुजान के कारण। रितु चाची के झटों पर अनवर भाई का माल गिरा हुआ था।

उनकी पूरी चूत माल से भर गई थी। वो दोनो पूरी तरह संतुष्ट हो कर बिस्तर पर लेते हुए थे। रितु चाची अनवर भाई के लंड को हाथों से पकड़ के सहला रही थी और अनवर भाई उनके बब्बन को हिला रहे थे। अनवर भाई: मजा आया या नहीं तेरेको मेरी रानी। रितु चाची: हाऐइइइ बहुत मजा आया। आज जा कर मैं पूरी औरत बनु हूँ। आपके लंड का पानी मेरी चूत की आग शांत हो गई है। अनवर भाई: साली तेरे जैसी कातिल रंडी पर मेरा लंड 3सम कैम सेक्स भी बहुत दिनों से खराब हुआ है।

 

तेरी कातिल जवानी ने मेरे लंड को पागल कर दिया है। ये कह कर अनवर भाई रितु चाची को चूमे लगे और अपनी बाहों में भरने लगे। थोड़ी देर बाद वो उठे और दारू के पैग बना के चाची को पिलाने लगे। वो दोनों दारू पी के नशे में दूसरे के हिस्सेदार से खेल रहे थे। कभी चाची जी उनके लंड को सहलाती कभी चूमती। अनवरभाई ऋतु चाची की चूत में उंगली करते थे और बुब्बन को डांटते हुए चूम रहे थे।

तभी अनवर भाई बोले: अनवर भाई: सुनो भड़वे राजेश. मैं: बोलिये अनवर भाई. अनवर भाई: बड़ा मस्त माल लाया है आज तूने. अब मेरा काम अपने चाचा को फोन कर के बोल कि तेरी चाची आज अपनी सहेली का यहाँ गई है और वहीं रुकेगी और तुम दोनो कोई काम में व्यस्त हो। साला मेरेको कोई अशांति नहीं मांगता है।

मैं: जैसा आप बोलोगे अनवर भाई. अनवर भाई: आज रात तेरी चाची मेरा बिस्तार गरम करेगी और तू और तेरा चुत्तड़ दोस्त जा कर किसी और रांड को बजायो। समझे.मैं: ठीक है अनवर भाई. जैसा आप बोलो. रितु चाची जी अनवर भाई की बाहों में लेती हुई उनको चूम रही थी और हम दोनो अनवर भाई के कमरे से निकल के बाहर जा रहे थे।

हमने अनवर भाई के कहने पर कैमरे को ऑन ही रख दिया था। मगर अंदर का नजारा हम मिस नहीं करना चाह रहे थे और अनवर भाई की रंडियों में हमें आज पहली बार कोई दिलचस्पी नहीं थी। हम दोनों गेट के बाहर खड़े हो कर अंदर का नजारा देख रहे थे। रितु चाची : क्यूं नहीं जाने दिया मेरेको हां. अब क्या इरादा है आपका आज।अनवर भाई: हा हा हा… आज तो तू रात भर मेरे बिस्तर पर गरम करेगी रानी।

कहीं नहीं जाने दूंगा तेरेको. सुन आज से तू ऋतु हो गी अपने घर पे। इस कोठे पर तेरा नाम होगा रेशमा। अनवर की राखाइल रेशमा रानी. रितु चाची : और तुम होगे मेरे चुद्दकड़ भड़वे अनवर मियाँ। मेरे मालिक. महज़ लंड डेटा. अनवर भाई: साली चिनार बहुत जल्दी हाय रंडियों जैसी बात करना सीख गई है तू। बहुत जल्दी बहुत आगे जायेगी तू. ऐसे ही मस्त बातें करते हैं और एक दूसरे की बॉडी से खेलते हुए अनवर भाई का लंड वापस तैयार हो रहा था।

वो लंड खड़ा हो रहा था और अनवर भाई अपनाप्यारी रांड रेशमा रानी को चूम ते जा रहे थे। चाचीजी भी गरम होने लगेंगी। अनवर भाई ने अचानक चाचीजी की गांड में उंगली डाल दी और चाची जी ने एक सेक्सी सी आह निकली… आआहह. उसके बाद तो जो हुआ वो देख कर मैं पागल ही हो गया था। अनवर भाई ने रितु चाची को दूसरी तरफ मोड़ दिया और उनकी गांड में अपनी नाक को घुसा दिया और सुंघने लगे।

थोड़ी देर बाद उन्हें अपनी जीभ से चाची जी की गांड को चाटना शुरू कर दिया। चाची जी मस्त हो गई थी वो अनवर भाई के लौड़े को अपनी पकड़ में लाने लगी। अनवर भाई उठे और रितु चाची की गांड को फेला दिया और अपना लंड उनकी गांड के छेद पर पोजीशन बनाने लगे।इससे पहले कि रितु चाची कुछ समझती और बोलती अनवर भाई ने एक जोर का झटका लगाया और अपना लंड रितु चाची की गांड मैंने पेल दिया. रितु चाची बहुत जोर से चिल्लायी और शोर मशीन लगी।

अनवर भाई ने अपने हाथ से रितु चाची का मुंह पकड़ के बंद किया और एक और झटके में अपना पूरा लंड चाची जी की गांड के अंदर घुसा दिया। थोड़े देर हल्के हल्के झटके मारने के बाद ऋतु चाची का दर्द थोड़ा बहुत कम हुआ और वो कुछ शांत हुई तो अनवर भाई चाची जी के बब्बन को बहस हुए उनकी गांड में लंड आगे पीछे करते रहे। ऋतु चाची तो बस आंखें बंद कर के सिसकियां भरती हुई मजे ले रही थी. अब दर्द काबू में होता देख कर अनवर भाई ने वही अपना जानवर रूप दिखाया दिया और बेरहामी से जोर जोर से अपना लंड रितु चाची की गांड में आगे पीछे करने लगे।

अन्होन रितु चाची को ऐसा चोदा कि रितु चाची की 7वीं पीढ़ी भी चुदाई को भूला न पायेगी। दर्द से बेहाल चाची जी रो रही थी और मस्ती भी ले रही थी। अनवर भाई ने अपनी पूरी हवस चाची के गामद पे निकल दी। हौसी दरिंदे की तरह उन्हें रितु चाची ने अपनी राखाइल रेशमा बना डाला। गांड मारते-मारते अनवर भाई ने अपनी दो उंगली चाची जी की चूत में घुसा दी। चाची जी को तो अपनी वासना की आग में कुछ समझ नहीं आ रहा था और वो सिर्फ गरम गरम सिसकियाँ भर रही थीं।

अब जब अनवर भाई झड़ने वाले थे तो उन्हें झटके से अपना लंड निकला और रितु चाची को पलटकर उनके मुँह में अपना लंड डाल दिया दीपक। रितु चाची लॉलीपॉप की तरह उनके दानव लंड को चूस रही थी। उसके बाद अनवर भाई ने अपना लंड निकाला और रितु चाची के मुँह के सामने उसको जोर जोर से हिलाने लगे। फिर वो अचानक जोर से चिल्लाए और अपना सारा माल रितु चाची के चेहरे, आंखों और होठों पर गिरा दिया। बच्चा हुआ माल उनकी चुचियों पे भी डाल दिया। रितु चाची समय एक बहुत ही सस्ती सी गलती लग रही थी। उनका वीडियो मार्केट में धूम मशीन वाला था।

अब उनको लंड का चस्का लग चुका था. अब ये आग सिर्फ लंड के पानी से ही जल सकती है। अनवर भाई का काम अब भी पूरा नहीं हुआ था। वो रितु चाची को पूरी रांड बना कर ही हर मन्ने वाले थे। अन्होन रितु चाचीजी के चेहरे और बुब्बन पे पड़े माल को चमचे से उठा कर एक गिलास में भरा और चाची जी को अपना चेहरा चाटने को बोला।

उसके बाद उन्होंने वो माल का गिलास रितु चाची जी को पिला दिया और एक ब्रश से अपने दांत अपने माल से ब्रश करने को बोला। रितु चाची जी के पास कोई और रास्ता ना था। धीरे-धीरे वो भी इस गंदी सी हरकत को एन्जॉय करने लगी और अनवर भाई के माल से ब्रश करते हुए उसे खेलने लगी।

कुछ देर खेलने के बाद उन्हें वो सारा माल एक झटके में पेशाब लग गया। ये सब होने के बाद अनवर भाई खड़े हुए और चाची जी के पूरे बदन पर वापस मुटना शुरू कर दिया और बोला की: “अब तू सिर्फ मेरी ही सिर्फ मेरी है रेशमा रानी। मेरी रखैल तेरी जवानी के हर एक रस को मैं चूस जाउंगा साली छिनाल” रितु चाची अधमरी हालत में पड़ी हुई कर रही थी। तभी अनवर भाई चिल्लाये: अनवर भाई: अबे बहन के लौड़े बहार से झाँक ना बंद करो और अंदर आओ।

मेरेको मालोम था कि तुम दोनों भड़के कहीं नहीं जाओगे। बहुत मस्त माल है तेरी चाची. इस का जिस्म बेच के जो भी कमाई होगी वो आधी-आधी बातें ठीक है। अब बुझा लो अपना हवस इसके साथ। चोदो और 3सम कैम सेक्स चोदो साली छिनार को। हम दोनो एक दूसरे का चाँद देख ने लगे और एक सेकंड में कपड़े उतार के रितु चाचीजी पे चढ़ गये। हम दोनो ने रात भर चाची जी को चोदा। थोड़ी देर बाद तो लगा कि मर गई है रंडी की बच्ची मगर हमें तो अपना हवस शांत करने से मतलब था और हम रात भर चाची जी को चोदते रहे।

कंप्यूटर ठीक करने गया तो पड़ोसन भाभी ने खुद खोल दी चूत

मेरा नाम राहुल है। मैं २५ साल का हूं और रायपुर में ही रहता हूं। हमारे पड़ोस में रहती हैं रेखा भाभी। उम्र करीब ३२ साल, लेकिन देखने में अभी भी कॉलेज की लड़की जैसी लगती हैं। गोरी-चिकनी त्वचा, भरी-भरी देह, गोल-गोल स्तन और कमर का वो नाजुक मोड़… भाभी को देखते ही मन में आग लग जाती थी। उनके पति अक्सर बाहर रहते थे जॉब की वजह से। भाभी घर पर अकेली रहतीं और कभी-कभी हेल्प के लिए मुझे बुला लेती थीं।

एक दिन शाम को उनका फोन आया।

“राहुल बेटा, कंप्यूटर में कुछ प्रॉब्लम हो गया है। स्क्रीन पर कुछ भी नहीं आ रहा। आकर देखोगे?”

“जी भाभी, अभी आता हूं।”

मैं टूल्स का बैग लेकर सीधा उनके घर पहुंच गया। भाभी ने दरवाजा खोला। वो हल्के गुलाबी सलवार कमीज में थीं। कमीज का दुपट्टा थोड़ा ढीला था, जिससे उनकी गहरी गर्दन और ऊपर वाले गोरे गोरे मांसल भाग साफ दिख रहे थे। मेरी नजर वहां रुक गई। भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा, “आओ अंदर।”

कंप्यूटर टेबल पर रखा था। मैं बैठ गया और चेक करने लगा। वायरिंग में कुछ इश्यू था। जैसे-जैसे मैं काम कर रहा था, भाभी मेरे पीछे खड़ी होकर देख रही थीं। उनकी सांसों की हल्की गर्माहट मेरी गर्दन पर पड़ रही थी।

“राहुल, तुम्हें कितना अच्छा आता है ये सब…” उन्होंने धीरे से कहा।

मैंने मुड़कर देखा। उनकी आंखों में एक अलग सी चमक थी। मैं मुस्कुराया, “भाभी, आपकी मदद करना तो मेरा काम है।”

कुछ देर बाद कंप्यूटर ऑन हो गया। भाभी खुश हो गईं। “वाह! तुम तो जादूगर हो।” उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा। वो स्पर्श सामान्य से ज्यादा देर तक रहा। मैंने महसूस किया कि उनकी उंगलियां हल्के से दबा रही हैं।

“भाभी, पानी पिलाइए ना।” मैंने कहा।

वे किचन गईं। जब वापस आईं तो उनके हाथ में दो ग्लास थे। बैठते वक्त उनकी सलवार थोड़ी ऊपर चढ़ गई, मोटी-मोटी जांघें झलक गईं। मैं नजर हटा नहीं पाया। भाभी ने देख लिया। लेकिन शर्माने की बजाय वे हल्के से मुस्कुराईं।

हम दोनों बातें करने लगे। उन्होंने बताया कि पति पिछले १५ दिन से बाहर हैं। घर अकेला लगता है। मैंने धीरे से कहा, “भाभी, अगर कभी कुछ चाहिए तो बता देना। मैं हूं ना।”

उन्होंने मेरी आंखों में देखा। “सच में? सब कुछ?”

उस “सब कुछ” में छुपा इशारा समझते देर नहीं लगी। मैंने हौले से उनका हाथ पकड़ लिया। भाभी ने हाथ नहीं छुड़ाया। बल्कि उंगलियों को और कस लिया।

“राहुल… मैं जानती हूं तुम मुझे कैसे देखते हो,” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा। “मुझे भी अच्छा लगता है।”

मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। मैंने आगे बढ़कर उनके होंठों को अपने होंठों से छू लिया। भाभी ने आंखें बंद कर लीं और धीरे-धीरे जवाब दिया। किस गहरा होता गया। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेलने लगी।

मैंने उन्हें गोद में उठा लिया और बेडरूम की तरफ ले गया। भाभी मेरी गर्दन में चिपक गईं। उनके नरम स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। बेड पर लिटाते ही मैंने उनकी कमीज का पहला बटन खोला। सफेद ब्रा से ढके हुए भारी-भारी स्तन बाहर झांक रहे थे।

“धीरे राहुल… आज पूरा समय है,” भाभी ने शर्माते हुए कहा।

मैंने उनकी कमीज पूरी उतार दी। ब्रा का हुक खोलते ही उनके गुलाबी-गुलाबी निप्पल्स सामने आए। मैंने एक को मुंह में ले लिया। भाभी की सांसें भारी हो गईं। “आह… राहुल… अच्छा लग रहा है…”

मैं चूसता रहा, हल्के से दबाता रहा। भाभी की कमर उठ-उठकर मुझसे सट रही थी। मैंने उनकी सलवार का नाड़ा खोल दिया। अंदर हल्का लेस वाला पैंटी था, जो पहले से ही गीला हो चुका था।

मैंने पैंटी उतारी। भाभी की साफ-सुथरी, गुलाबी चूत पूरी तरह नम थी। मैंने उंगलियों से हल्के से सहलाया। भाभी कांप उठीं।

“राहुल… तुम्हें देखकर कितना दिन से मन करता था…” उन्होंने स्वीकार किया।

मैंने अपना मुंह उनकी जांघों के बीच ले जाकर चूमना शुरू किया। मेरी जीभ उनकी क्लिटोरिस पर घूम रही थी। भाभी दोनों हाथों से मेरे बाल पकड़कर दबा रही थीं। उनकी आहें कमरे में गूंज रही थीं – “उफ्फ… हां… वहां… और गहरा…”

कुछ मिनटों बाद भाभी का शरीर तन गया। वे जोर से कांपीं और पहली बार झड़ गईं। उनके मुंह से मीठी-मीठी चीख निकली।

अब मेरी बारी थी। मैंने पैंट उतारी। मेरा लंड पहले से ही पूरा खड़ा और सख्त हो चुका था। भाभी ने उसे देखा और हाथ में ले लिया। “कितना मोटा है…”

वे उसे धीरे-धीरे सहलाने लगीं। फिर आगे झुककर मुंह में ले लिया। भाभी का गर्म और नम मुंह मेरे लंड को चूस रहा था। मैं आनंद से कराह उठा।

“भाभी… बहुत अच्छा कर रही हो…”

कुछ देर चूसने के बाद भाभी लेट गईं और टांगें फैला दीं। उनकी आंखों में इच्छा थी। मैं उनके ऊपर चढ़ गया। लंड की टिप को उनकी चूत पर रगड़ने लगा। भाभी ने खुद ही उठकर उसे अंदर लेने की कोशिश की।

धीरे-धीरे मैं अंदर घुसा। उनकी चूत बहुत टाइट और गर्म थी। पूरी तरह घुसते ही भाभी ने लंबी सांस ली। “आह… भर गया…”

मैं धीमी गति से स्टार्ट किया। हर थ्रस्ट के साथ उनके स्तन हिल रहे थे। मैं उन्हें चूमता, गर्दन चूसता, निप्पल्स पर काटता। भाभी मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थीं।

“जोर से राहुल… मुझे अपना बना लो…”

मैं रफ्तार बढ़ाने लगा। कमरे में चुटकी बजाने जैसी आवाजें और हम दोनों की आहें भर गईं। भाभी की चूत मेरे लंड को जोर से दबा रही थी। मैंने उन्हें चारों खाने चित्त करके फिर से घुसा। इस बार और गहराई तक।

भाभी का दूसरा ऑर्गेज्म आ गया। वे पूरी तरह कांप उठीं। मैं भी करीब था।

“भाभी, मैं आने वाला हूं…”

“अंदर ही… भर दो मुझे,” उन्होंने कहा।

मैंने आखिरी जोरदार धक्के दिए और पूरा माल उनके अंदर उड़ेल दिया। दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे।

कुछ देर बाद भाभी मेरे सीने पर सिर रखकर लेटीं। “आज के बाद तुम मेरे कंप्यूटर के अलावा मेरी सारी जरूरतें भी देखोगे ना?”

मैं मुस्कुराया और उनके बालों में हाथ फेरते हुए बोला, “हां भाभी… जब चाहो, बुला लेना।”

उस रात हम दो बार और मिले। दूसरी बार उन्होंने ऊपर बैठकर मुझे राइड किया। उनके स्तन मेरे मुंह के सामने उछल रहे थे। तीसरी बार मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में चोदा। उनकी गोल-गोल गांड पकड़कर जोर-जोर से थपथपाता रहा। भाभी हर बार चीखकर झड़ जातीं।

सुबह होने तक भाभी पूरी तरह संतुष्ट थीं। उनके चेहरे पर वो चमक थी जो लंबे समय बाद आई थी।

पड़ोसन भाभी की कंप्यूटर रिपेयरिंग वाली चुदाई सिर्फ एक बार की घटना नहीं रही। उसके बाद हर हफ्ते कम से कम दो-तीन बार मैं उनके कंप्यूटर की “रिपेयरिंग” करने जाता। कभी तो कंप्यूटर खराब भी नहीं होता, फिर भी भाभी बुला लेतीं।

एक बार तो उन्होंने नाइट सूट पहनकर बिठाया और खुद ही मेरी गोद में बैठ गईं। “आज जल्दी करो… मन बहुत कर रहा है।”

हम दोनों अब एक-दूसरे के शरीर को अच्छी तरह जानते थे। भाभी को सबसे ज्यादा पसंद था जब मैं उनकी जांघों के बीच मुंह लगाकर चाटता। और मुझे सबसे ज्यादा उनका वो आह भरा स्वर – “राहुल… और जोर से… फाड़ दो अपनी भाभी की चूत…”

हमारा रिश्ता गुप्त था, लेकिन बेहद मीठा और संतोष भरा। पड़ोसन भाभी अब मेरी थी। उनकी हर इच्छा, हर जरूरत मैं पूरी करता। और वे मुझे वो प्यार देतीं जो कोई और नहीं दे सकता था।