पिछली होली भाभी के साथ फिर चुदाई – देवर भाभी सेक्स

कानपुर की उस पुरानी हवेली में, जहाँ गंगा की ठंडी हवा रात को खिड़कियों से आकर पर्दों को हल्का-हल्का हिलाती है और होली के रंग की महक पूरे घर में फैली रहती है, इस बार होली कुछ अलग ही थी। मैं, रमेश, २९ का, दिल्ली से छुट्टी लेकर आया था। घर में माँ-बाप, छोटा भाई और भाभी नेहा – २८ साल की, गोरी-चिट्टी, भरी हुई देह, लंबे काले बाल जो कमर तक लहराते हैं, होंठ गुलाबी और आँखें ऐसी कि एक नजर में आदमी का मन डोल जाए। भाई रोहन दिल्ली में ही नौकरी करता था, साल में दो-चार बार आता-जाता। नेहा घर संभालती, सबकी देखभाल करती, लेकिन अंदर से बहुत अकेली लगती थी।

पिछली होली में जो हुआ था, वो याद आते ही लंड तन जाता था। रंग खेलते-खेलते हम दोनों अकेले कमरे में पहुँच गए थे। नेहा की साड़ी रंग से तर-बतर, शरीर से चिपक गई थी। मैंने रंग लगाया तो हाथ उनकी कमर पर फिसला। वो हँसकर बोलीं, “अरे रमेश… इतना जोर से?” लेकिन हटी नहीं। फिर एक पल में मैंने उनका चेहरा पकड़ा और होंठ चूम लिए। वो पहले चौंकीं, फिर आँखें बंद कर लीं। जीभ अंदर डाली तो उन्होंने भी जवाब दिया। उसी दिन रात भर हमने एक-दूसरे को चखा। उनकी चूत की गर्मी, उनकी सिसकारियाँ, उनके स्तनों की नरमी – सब कुछ आज भी महसूस होता है। सुबह सब सामान्य हो गया, लेकिन वो राज हमारे बीच छिपा रहा।

इस बार होली की सुबह से ही हवा में कुछ अलग था। घर में सब रंग खेल रहे थे। माँ-बाप पड़ोस में चले गए। छोटा भाई दोस्तों के साथ गायब। नेहा और मैं घर में अकेले। वो सफेद साड़ी में थी – पतली, हल्की सी पारदर्शी। सुबह से पानी और रंग खेलते-खेलते पूरी भीग चुकी थी। साड़ी शरीर से चिपक गई थी, ब्लाउज गीला, स्तनों की गोलाई और निप्पल की उभार साफ दिख रहे थे। वो मेरे पास आई, हाथ में रंग का डिब्बा लिए। “रमेश… आज तो रंग लगाना ही पड़ेगा।” उसकी आवाज में शरारत थी।

मैंने रंग लिया। पहले गाल पर लगाया। फिर गर्दन पर। वो हँस पड़ी। “और लगाओ…” मैंने हाथ उनकी कमर पर रखा। वो सिहर उठी। उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए मैंने कहा, “भाभी… आज बहुत गर्म लग रही हो।” वो मेरी आँखों में देखकर बोली, “तू भी कम नहीं है।” मैंने उनका पल्लू खींचा। साड़ी नीचे सरकी। वो मेरे सीने से सट गईं। मैंने उनके होंठ चूम लिए। वो तुरंत जवाब देने लगीं। जीभ अंदर डाली तो उन्होंने मेरी जीभ पकड़ ली। किस इतना गहरा था कि सांस रुक गई।हम कमरे में चले गए। दरवाजा बंद किया। वो मेरे सामने खड़ी थीं। साड़ी गीली, चिपकी हुई। मैंने उनका पल्लू पूरी तरह खींच लिया। साड़ी नीचे गिर गई। ब्लाउज गीला। मैंने हुक खोले। ब्रा नहीं थी। गोरे, भरे हुए स्तन बाहर आए। निप्पल सख्त, गुलाबी। मैंने दोनों हाथों से दबाए। वो सिसकारी। “आह… रमेश… जोर से दबा… पिछले साल से याद है तेरे हाथ…” मैंने एक निप्पल मुंह में लिया। जोर से चूसा। जीभ से घुमाया। दांतों से हल्का काटा। वो चीख पड़ी। “आह… हाँ… काट… चूस… मेरे चुचे तेरे हैं… और जोर से चूस… दूध निकाल ले जैसे…” मैंने दूसरे को भी वैसा ही किया। वो मेरे बाल पकड़कर दबा रही थी। “रमेश… ओह… साल भर तरस रही थी… चूस… और चूस… मेरे निप्पल को लाल कर दे…”

मैंने उनकी साड़ी पूरी उतारी। पेटीकोट का नाड़ा खींचा। वो सिर्फ पैंटी में। मैंने घुटनों के बल बैठकर उनकी जांघें चूमीं। अंदर की तरफ। पैंटी गीली, रस से तर। मैंने उसे उतारा। उनकी चूत – गुलाबी, थोड़े बाल, रस बह रहा था। मैंने जीभ लगाई। वो कमर उठाकर चीखी। “रमेश… चाट… मेरी बुर… बहुत जल रही है… जीभ अंदर डाल…” मैंने जीभ अंदर डाली। क्लिट को चूसा। उँगलियाँ डालीं – दो, फिर तीन। वो कमर हिला रही थी। “आह… रमेश… उँगलियाँ… तेज… मेरी बुर फाड़… जीभ से चोद… ओह… और तेज… मैं झड़ने वाली हूं…” मैंने स्पीड बढ़ाई। वो काँपकर झड़ गई। उनका रस मेरे मुँह में बहा। मैंने सब चाट लिया। स्वाद मीठा-नमकीन। वो बोली, “रमेश… अब तेरा लंड चाहिए मुझे।”

वो उठी। मेरी शर्ट उतारी। छाती चूमी। नीचे आई। पैंट उतारी। लंड बाहर – सख्त, मोटा, नसें फूली हुईं। उन्होंने हाथ में लिया। “रमेश… कितना गरम और मोटा है तेरा… पिछले साल से और तगड़ा हो गया…” वो सहलाने लगी। फिर मुंह में लिया। जोर-जोर से चूसने लगी। जीभ सुपारे पर घुमाती। गले तक लेती। लार टपक रही थी। मैं सिसकारा। “भाभी… बहुत अच्छा… गहरा ले… आह… तेरी जीभ कमाल कर रही है… चूस… और चूस…” वो बोली, “अब डाल… मेरी बुर में आग लगी है।”

वो बेड पर लेट गई। जांघें फैलाईं। मैंने लंड उनकी चूत पर रखा। धीरे से अंदर। वो कराही। “आह… रमेश… बड़ा है… धीरे… पूरा अंदर ले रही हूँ…” मैं रुक गया। फिर धीरे-धीरे पूरा अंदर। वो चीखी। “हाँ… पूरा… अब चोद… जोर से…” मैंने धक्के शुरू किए। धीरे से तेज। वो कमर हिला रही थी। “रमेश… जोर से… मेरी बुर फाड़ दो… चोद… आह… तेज… और तेज… मेरी बुर तेरी है…” मैंने स्पीड बढ़ाई। उनके चुचे हिल रहे थे। मैंने दबाए। वो मेरी पीठ नाखूनों से खरोंच रही थी। “रमेश… अंदर झड़… मुझे भर दे… गर्म माल डाल… मैं तेरी हूँ…” मैंने और जोर से धक्के मारे। एक साथ झड़ गए। मेरा गरम माल उनकी बुर में भर गया। वो काँपकर थम गई।

लेकिन वो रुकने वाली नहीं थी। वो उठी। “रमेश… आज पूरी होली तेरी।” वो मेरे ऊपर चढ़ गई। उनकी बुर मेरे लंड पर। वो कमर हिला रही थी। ऊपर-नीचे। उनके चुचे मेरे मुँह में। मैं चूस रहा था। वो चीख रही थी। “रमेश… तेरे लंड ने मुझे पागल कर दिया… आह… गहरा… और गहरा… मैं ऊपर से चोद रही हूँ तुझे…” मैंने नीचे से धक्के मारे। वो तेज हो गई। “रमेश… मैं झड़ रही हूँ… आह…” वो झड़ गई। मैंने उन्हें पलटा। डॉगी में। उनकी गांड पकड़ी। लंड डाला। तेज-तेज। वो तकिए में मुँह दबाकर चीख रही थी। “रमेश… चोद… मेरी बुर और गांड दोनों तेरी… फाड़ दो… जोर से… मुझे तेरी रंडी बना दे… बाल पकड़… पीछे से पटक…” मैंने उनके बाल पकड़े। पीछे से जोर से धक्के। वो अपनी बुर सहला रही थी। हम कई बार झड़े।

फिर मैंने कहा, “भाभी… आज गांड में?” वो शरमा गई। “धीरे से… पिछली बार से याद है…” मैंने ऑयल लगाया। पहले उंगली। वो सिहर उठी। “रमेश… आह… दर्द… लेकिन अच्छा…” फिर दो उँगलियाँ। वो कमर हिला रही थी। “रमेश… और अंदर… तैयारी कर रही हूँ…” फिर लंड। धीरे से अंदर। वो चीखी। “आह… रमेश… बड़ा है… धीरे…” मैं रुक गया। फिर धीरे-धीरे पूरा। वो बोली, “अब चोद… मेरी गांड चोद…” मैंने धक्के शुरू किए। वो चीख रही थी। “रमेश… जोर से… फाड़ दो मेरी गांड… आह… बहुत मजा आ रहा है… अपनी बुर में उँगलियाँ डाल रही हूँ…” मैं तेज हो गया। वो अपनी बुर में उँगलियाँ डाल रही थी। हम दोनों झड़ गए।

दिन भर रंग खेलते रहे। लेकिन हर बार अकेले मिलते ही चुदाई। शाम को सब घर लौट आए। लेकिन रात में फिर कमरे में। नेहा मेरे बिस्तर पर। रात भर चुदाई। उनकी सिसकारियाँ दबाकर। “रमेश… चुप… कोई सुन लेगा…” लेकिन मजा कम नहीं हुआ।

हॉली खत्म हुई। मैं दिल्ली लौटा। लेकिन वो यादें रह गईं। नेहा की बुर की गर्मी, उनकी सिसकारियाँ, उनका स्पर्श। कानपुर की उस हवेली में हमारा राज छिपा रहा। हर होली पर मिलने का वादा। जहाँ रंग सिर्फ बाहर नहीं, अंदर भी लगते हैं।

 

घर का माल घर में: मेरी और ममेरी बहन की कहानी

दोस्तो! मेरा नाम देवांशु (बदला हुआ) है।
मैं उत्तर प्रदेश के ललितपुर का रहने वाला हूं।
घर में मां, पापा और भाई हैं और अभी मैं अपनी वाइफ के साथ इंदौर में रहता हूं।

ज्यादा बोर न करते हुए सीधे कजिन सेक्स स्टोरी पर आता हूं।

बात कुछ साल पहले की है, मेरी उम्र 19 साल थी और मैं नया-नया जवान हुआ था।

गर्मियों में मैं मामा के यहाँ गया था।
मेरे मामा की बेटी कुछ खास सुंदर नहीं है लेकिन उसका फिगर बहुत मस्त है।
उसे देख के पूरे मोहल्ले के लंड टाइट हो जाते थे।

तब उसकी चूचियां निकलती आ रही थीं।
हम दोनों एक ही बेड पे, एक ही कमरे में सोते थे।
हमारे बीच बहुत अच्छी दोस्ती और बॉन्डिंग थी।

उस रात मेरी नींद खुली तो देखा कि उसकी शर्ट पेट के ऊपर थी और उसने इनरवियर नहीं पहनी थी।
मेरा लंड खड़ा हो गया.

तो मैंने उसे किस किया, पेट पर हाथ घुमाया और दूध मसलने चालू कर दिए।

उसकी नींद खुल गई और वह बोली, “बहन हूं आपकी, ये गलत है!”
मैंने उसे सॉरी बोला और हमारे बीच सब नॉर्मल किया।

लेकिन मुझे उससे प्यार हो गया था और मैं उसे चोदने के लिए प्लान बनाने लगा क्योंकि वह सेक्स को गलत समझती थी।

कुछ महीने बाद वह मेरे घर रहने आई और अब उसके दूध मस्त 34 के हो गए थे।
जब मैंने उसको देखा तो अपना लंड पकड़ लिया और उसने यह नोटिस कर लिया।

रात के खाने के बाद हम दोनों साथ सो गए।
मैंने जानबूझकर पतला लोअर पहना था और अंडरवियर नहीं पहनी थी।

उसके सोने के बाद मैं उसको किस करने लगा और कमर में हाथ डाल के गले लगा लिया।

उसे मज़ा आने लगा और उसने किसिंग में मेरा साथ दिया।
मैंने उसकी शर्ट का बटन खोल के दूध पर किस किया और चुत पर उंगली फेरी।

यह उसको पसंद नहीं आया।
सुबह जब वह उठी तो रोने लगी- तुम हर बार ऐसा करते हो।
मैंने उससे माफी मांगी और सब नॉर्मल किया।

लेकिन उसके जिस्म को मेरे हाथ का टच अच्छा लगा था और वह रोज़ वॉशरूम में उंगली करने लगी।

तीन महीने बाद मैं मामा के यहाँ गया क्योंकि उसके एग्जाम थे और मामा का सारा परिवार वैष्णो देवी जा रहा था।

मुझे यह अच्छा मौका लगा कि साक्षी अगर नहीं मानी तो जबरदस्ती पेल दूंगा।
लेकिन उसका उल्टा हुआ।

एग्जाम दूसरे शहर में हो रहे थे और मैं उसको लेकर गया।

एग्जाम के बाद वह मुझे एक होटल में ले गई, खाना खिलाने के बहाने और उधर उसने सारा सेटअप कर रखा था।

उसने मुझे प्रपोज किया तो पहले तो मैंने मना कर दिया।
वह रोते हुए बोली, “मैं आपके बिना नहीं रह सकती!”

उसने मेरे पैर पकड़ लिए तो मैंने उसे एक्सेप्ट कर लिया।
शाम को घर आए तो उसकी आँखों में मैंने हवस देखी।

घर आते ही उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और किस करने लगी।
मैं भी उसके दूध दबाने लगा।

उसे दर्द होने लगा।

वह कहने लगी, “उफ़्फ़्… आह्ह्ह्ह्… जान प्लीज! बहुत सारा प्यार दो मुझे!”

उसने मेरा लंड निकाल लिया।
मेरा लंड देख के वह डर गई और बोली, “मैं नहीं ले पाऊंगी! बहुत बड़ा और मोटा है, बाहर से ही कर लो!”

मैंने ‘हाँ’ में जवाब दिया और चुत चाटने लगा।
वह तड़पने लगी।

वह चिल्लाई, “उफ़्फ़्… आह्ह्ह्ह्… आह्ह्ह्ह्… जान बहुत सारा प्यार दो मुझे! अपना बना लो!”

वह अपने दूध दबवाने लगी। फिर मैंने लंड को चुत पर रखकर दाने को 10 मिनट रगड़ा।

उससे रहा नहीं गया, उसने बोला, “जान डाल दो अंदर! मुझे अपना बना लो! चोद अपनी प्यारी फूल जैसी बहन को, बजा डालो! मां-चोद, बहन-चोद अपनी!”

मैंने भी देर ना करते हुए लंड पेल दिया।
2 इंच जाने पर ही उसकी चुत फट गई और वह चिल्ला कर रोने लगी।
मैंने होठों से उसका मुँह बंद कर एक और झटका मारा और पूरा लंबा लंड उसकी चुत को चीरता-फाड़ता हुआ घुस गया।

उसके मुँह से आवाज़ आई, “मम्मी मर गई!”
और वह बेहोश हो गई।

मैं समझ गया और धीरे-धीरे चोदता रहा।
10 मिनट बाद साक्षी को होश आया, तब तक दर्द कम हो चुका था और चुत में लंड रनिंग कर रहा था।

वह बोली, “उफ़्फ़्… आह्ह्ह्ह … जान चोदो! और ज़ोर से फाड़ दो! अपनी रंडी बना, बहन के लंड!”

उसको इतना मज़ा आया कि वह मेरे लंड पर बैठकर खुद चोदने लगी।

मैंने भी कहा, “मादरचोद रंडी! मैं तो तुझे पहले से चोदना चाहता था! ले रंडी, तेरी गांड फटती थी, जैसे तेरी इज़्ज़त तेरी चुत में ही हो!”
लगभग 30 मिनट तक साक्षी की चुत बजाई।

वह बोली, “जान उस वक्त मैं छोटी थी, मुझे सेक्स के बारे में कुछ नहीं मालूम था! लेकिन अब मैं तुम्हारी वाइफ हूं, जितना चोदना है चोद लो, फाड़ दो चुत को, मैं कुछ नहीं बोलूंगी!”

मैंने बोला, “बोलेगी कैसे? मैं मुँह में अपना बड़ा लंड फंसा दूंगा!”

हम एक साथ झड़ गए और एक-दूसरे से लिपट के सो गए।
उसने लंड को मुँह में लिया और चूसने लगी।

वह बोली, “वाह! क्या मस्त आइसक्रीम है जान!”

20 मिनट चूसने के बाद लंड फिर खड़ा हो गया तो उसने अपनी चुत फैला दी।
मैं बोला- तेरी चुत तो भोसड़ा बन गई है, तेरी गांड कसी हुई है।

वह डर गई, बोली, “बहुत दर्द होता है! प्लीज चुत में ही डालो जान!”

मैंने उसको उल्टा किया और गांड पे 4 थप्पड़ मारे तो वह लाल हो गई।
थूक लगाकर जो पेला तो आधा लंड घुस गया।

वह चिल्लाने लगी और हिलने-डुलने लगी।
मैं उसकी गांड पर चढ़ गया और उसके पैर पीछे सिर पर रखकर बजाने लगा।

उसकी गांड से खून आ रहा था, वह बहुत चिल्लाई।
वह बोली, “प्लीज छोड़ दो मुझे!”

लेकिन 15 मिनट बाद वह अपनी गांड उचकाने लगी और पूरा लंड गांड में लेने लगी।
मैं झड़ने वाला था तो चुत में लंड पेल दिया और पूरा रस चुत में भर दिया।

उस दिन मैंने 4 बार उसकी चुत और गांड को पेला।
वह मेरे लंड की दीवानी हो गई।

उस दिन उससे चला भी नहीं जा रहा था, गांड और चुत में सूजन हो गई थी।
वह बोली, “अगर पहले चोदते तो मैं मर ही जाती!”

जब तक मामा जी वापस नहीं आ गए, हम दोनों नंगे ही सोते थे।
फिर मैं घर आ गया।

उसके बाद मेरी गवर्नमेंट जॉब लग गई और मैं इंदौर आ गया।

1 महीने बाद साक्षी ने बताया कि वह प्रेग्नेंट हो गई है।
मैंने उसको दवाई लेने की सलाह दी पर वह नहीं मानी।

फिर हम दोनों ने भाग कर शादी कर ली।

भाई-बहन, एक दूजे के सहारे

सुरिंदर छोटे से गांव का रहने वाला है. उसके माँ बाप मर चुके हैं गाँव में बस उसके माँ बाप और बहन ही थे गांव में घोर गरीबी के चलते उसे 15 साल की ही उम्र अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ कर दिल्ली आना पड़ा. दिल्ली आते ही उसे एक कारखाने में नौकरी मिल गयी. उसने तुरंत ही अपनी लगन एवं इमानदारी का इनाम पाया और उसकी तरक्की सिर्फ एक साल में ही सुपरवाइजर में हो गयी.

अब उसे ज्यादा वेतन मिलने लगा था. अब वो अपने गाँव अपने माँ बाप और बहन से मुलाक़ात करने एवं उन्हें यहाँ लाने की सोच रहा था. तभी एक दिन उसके पास उसकी बहन का फोन आया कि उसके माँ बाप का एक्सिडेंट हो गया है. सुरिंदर जल्दी से अपने गाँव के लिए छुट्टी ले कर निकला. दिल्ली से गाँव जाने में उसे तीन दिन लग गए. मगर दुर्भाग्यवश वो ज्यों ही अपने घर पहुंचा उसके अगले दिन ही उसके माँ बाप की मृत्यु हो गयी. होनी को कौन टाल सकता था. माँ बाप के गुजरने के बाद सुरिंदर अपनी बहन को दिल्ली ले जाने की सोचने लगा क्यों कि यहाँ वो बिलकुल ही अकेली रहती और गाँव में कोई खेती- बाड़ी भी नही थी जिसके लिए उसकी बहन गाँव में रहती. पहले तो उसकी बहन अपने गाँव को छोड़ना नही चाहती थी मगर भाई के समझाने पर वो मान गयी और भाई के साथ दिल्ली चली आयी. उसकी बहन का नाम सुगंधा है. उसकी उम्र 20-21 साल की है. गाँव में मनोज नाम के लड़के से उसका चक्कर चला था। वो लड़का सुगंधा को चोद कर भाग गया था।

सुरिंदर ने दिल्ली में एक छोटा सा कमरा किराया पर ले रखा था. इसमें एक किचन और बाथरूम अटैच था. उसके जिस मकान में यह कमरा ले रखा था उसमे चारों तरफ इसी तरह के छोटे छोटे कमरे थे. वहां पर लगभग सभी बाहरी लोग ही किराए पर रहते थे. इसलिए किसी को किसी से मतलब नही था. सुरिंदर का कमरे में सिर्फ एक खिडकी और एक मुख्य दरवाजा था. सुगंधा पहली बार अपने गाँव से बाहर निकली थी. दिल्ली की भव्यता ने उसकी उसकी आँखे चुंधिया दी. जब सुरिंदर अपनी बहन सुगंधा को अपने कमरे में ले कर गया तो सुगंधा को वह छोटा सा कमरा भी आलिशान लग रहा था. क्यों कि वो आज तक किसी पक्के मकान में नही रही थी. वो गाँव में एक छोटे से झोपड़े में अपना जीवन यापन कर रही थी. उसे उसके भाई ने अपने कमरे के बारे में बताया . किचन और बाथरूम के बारे में बताया. यह भी बताया कि यहाँ गाँव कि तरह कोई नदी नहीं है कि जब मन करे जा कर पानी ले आये और काम करे. यहाँ पानी आने का टाइम रहता है. इसी में अपना काम कर लेना है. पहले दिन उसने अपनी बहन को बाहर ले जा कर खाना खिलाया. सुगंधा के लिए ये सचमुच अनोखा अनुभव था. वो हिंदी भाषा ना तो समझ पाती थी ना ही बोल पाती थी. वो परेशान थी . लेकिन ने उसे समझाया कि वो धीरे धीरे सब समझने लगेगी.

रात में जब सोने का समय आया तो दोनों एक ही बिस्तर पर सो गए. सुरिंदर का बिस्तर डबल था. इसलिए दोनों को सोने में परेशानी तो नही हुई. परन्तु सुरिंदर तो आदतानुसार किसी तरह सो गया लेकिन पहाड़ों पर रहने वाली सुगंधा को दिल्लीकी उमस भरी रात पसंद नही आ रही थी.वो रात भर करवट लेती रही. खैर! सुबह हुई. सुरिंदर अपने कारखाने जाने केलिए निकलने लगा. सुगंधा ने उसके लिए नाश्ता बना दिया. सुरिंदर ने सुगंधा को सभी जरुरी बातें समझा कर अपने कारखाने चला गया. सुगंधा ने दिन भर अपने कमरे की साफ़ सफाई की एवं कमरे को व्यवस्थित किया.शाम को जब सुरिंदर वापस आया तो अपना कमरा सजा हुआ पाया तो बहुत खुश हुआ. उसने सुगंधा को बाजार घुमाने लेगया और रात का खाना भी बाहर ही खाया.

सुगंधा अब धीरे धीरे अपने गाँव को भूलने लगी थी. अगले 3 -4 दिनों में सुगंधा अपने माँ बाप की यादों से बाहर निकलने लगीथी और अपने आप को दिल्ली के वातावरण अनुसार ढालने की कोशिश करने लगी. सुरिंदर सुगंधा पर धीरे धीरे हावी होने लगा था. सुरिंदर जो कहता सुगंधा उसे चुप चाप स्वीकारकरती थी. क्यों कि वो समझती थी कि अब उसका भरण – पोषण करने वाला सिर्फ उसका भाई ही है. सुरिंदर भी अब सुगंधा का अभिभावक के तरह व्यवहार करने लगा था.

सुरिंदर रात में सिर्फ अंडरवियर पहन कर सोता था. एक रात में उसकी नींद खुली तो वो देखता है कि उसकी बहन बैठी हुई.

सुरिंदर – क्या हुआ? सोती क्यों नहीं?

सुगंधा – इतनी गरमी है यहाँ.

सुरिंदर – तो इतने भारी भरकम कपडे क्यों पहन रखे हैं?

सुगंधा – मेरे पास तो यही कपडे हैं.

सुरिंदर – गाउन नहीं है क्या?

सुगंधा – नहीं.

सुरिंदर – तुमने पहले मुझे बताया क्यों नहीं? कल मै लेते आऊँगा.

अगले दिन सुरिंदर अपनी बहन के लिए एक बिलकूल पतली सी नाइटी खरीद कर लेते आया. ताकि रात में बहन को आराम मिल सके. जब उसने अपनी बहन को वो नाइटी दिखाया तोवो बड़े ही असमंजस में पड़ गयी. उसने आज तक कभी नाइटी नही पहनी थी. लेकिन जब सुरिंदर ने बताया कि दिल्ली में सभी औरतें नाइटी पहन कर ही सोती हैं तो उसने पूछा कि इसे पहनूं कैसे? सुरिंदर ने कहा – अन्दर के सभी कपडे खोल दो. और सिर्फ नाइटी पहनलो. बेचारी सुगंधा ने ऐसा ही किया. उसने किचन में जा कर अपनी पहले के सभी कपडे खोले और सिर्फ नाइटी पहनली. नाइटी काफी पतली थी. सुगंधा का जवान जिस्म अभी 20 साल का ही था. उस पर पहाड़ी औरत का जिस्म काफी गदराया हुआ था. गोरी और जवान सुगंधा के मुम्में बड़े बड़े थे. गाउन का गला इतना नीचे था कि सुगंधा के मुम्में का निप्पल सिर्फ बाहर आने से बच रहा था.

सुगंधा ने गाउन को पहन कर कमरे में आयी और सुरिंदर से कहा – देख तो,ठीक है?

सुरिंदर ने अपनी बहन को इतने पतले से नाइटी में देखा तो उसके होश उड़ गए. सुगंधा का सारा जिस्म का अंदाजा इस पतले से नाइटी से साफ़ साफ़ दिख रहा था. सुगंधा के आधे मुम्में तो बाहर दिख रहे थे. सुरिंदर ने तो कभी ये सोचा भी नही था कि उसकी बहन के मुम्में इतनी गोरे और बड़े होंगे. वो बोला – अच्छी है. अब तू यही पहन कर सोना. देखना गरमी नहीं लगेगी

उस रात सुगंधा सचमुच आराम से सोई. लेकिन सुरिंदर का दिमाग बहन के बदन पर टिक गया था. वो आधी रात तक अपनी बहन के बदन के बारे में सोचता रहा. वो अपनी बहन के बदन को और भी अधिक देखना चाहने लगा. उसने उठकर कमरे का लाईट जला दिया. उसकी बहन का गाउन उसकी जांघ तक चढ़ चुका था. जिस से सुगंधा की गोरी चिकनी जांघ सुरिंदर को दिख रही थी. सुरिंदर ने गौर से सुगंधा के मुम्में की तरफ देखा. उसने देखा कि सुगंधा के मुम्में का निप्पल भी साफ़ साफ़ पता चल रहा है. वो और भी अधिक पागल हो गया. उसका लंड अपनी बहन के बदन को देख कर खड़ा हो गया. वो बाथरूम जा कर वहां से अपनी सोई हुई बहन के बदन को देख देख कर मुठ मारने लगा. मुठ मारने पर उसे कुछ शान्ति मिली. और वापस कमरे में आ कर लाईट बंद कर के सो गया. सुबह उठा तो देखा सुगंधा फिर से अपने पुराने कपडे पहन कर घर का काम कर रही है. लेकिन उसके दिमाग में सुगंधा का बदन अभी भी घूम रहा था.

उसने कहा – सुगंधा, रात कैसी नींद आयी?

सुगंधा – कल बहुत ही अच्छी नींद आयी. गाउन पहनने से काफी आराम मिला.

सुरिंदर – लेकिन, मैंने तो सिर्फ एक ही गाउन लाया. आगे रात को तू क्या पहनेगी?

सुगंधा – वही पहन लुंगी.

सुरिंदर – नहीं, एक और लेता आऊँगा. कम से कम दो तो होने ही चाहिए.

सुगंधा – ठीक है, जैसी तेरी मर्जी.

सुरिंदर शाम कारखाने से घर लौटते समय बाज़ार गया और जान बुझ कर झीनी कपड़ों वाली गाउन वो भी बिना बांह वाली खरीद कर लेता आया.

उसने शाम में अपनी बहन को वो गाउन दिया और कहा आज रात में सोते समय यही पहन लेना.

रात में सोते समय जब सुगंधा ने वो गाउन पहना तो उसके अन्दर सिवाय पेंटी के कुछ भी नही पहना. उसका सारा बदन उस पारदर्शी गाउन से दिख रहा था. यहाँ तक कि उसकी पेंटी भी स्पष्ट रूप से दिख रहे थे. उसका गोरा गोरा मुम्मा और निप्पल तो पूरा ही दिख रहा था. उस गाउन को पहन कर वो सुरिंदर के सामने आयी. सुरिंदर अपनी बहन के बदन को एकटक देखता रहा.

सुगंधा- देख तो कैसा है, मुझे लगता है कि कुछ पतला कपडा है.

सुरिंदर – अरे सुगंधा, आजकल यही फैशन है. तू आराम से पहन.

अचानक उसकी नजारा अपनी बहन के कांख के बालों पर चली गयी. कटी हुई बांह वाली गाउन से सुगंधा के बगल वाले बाल बाहर निकल गए थे.

सुरिंदर ने आश्चर्य से कहा – सुगंधा , तू अपने कांख के बाल नही बनाती?

सुगंधा – नहीं आज तक नहीं बनाया.

सुरिंदर – अरे सुगंधा, आजकल ऐसे कोई नहीं रखता.

सुगंधा – मुझे तो बाल बनाना भी नही आता.

सुरिंदर – ला , मै बना देता हूँ.

सुगंधा आजकल सुरिंदर के किसी बात का विरोध नहीं करती थी. सुरिंदर ने अपना शेविग बॉक्स निकाला और रेजर निकाल कर ब्लेड लगा कर तैयार किया. उसने सुगंधा को कहा- अपने हाथ ऊपर कर. उसकी बहन ने अपनी हाथ को ऊपर किया और सुरिंदर ने अपनी बहन के कांख के बाल को साफ़ करने लगा. साफ़ करते समय वो जान बुझ कर काफी समय लगा रहा था. और हाथ से अपनी बहन के कांखको बार बार छूता था. इस बीच इसका लंड पानी पानी हो रहा था. वो तो अच्छा था कि उसने अन्दर अंडरवियर पहन रखा था. किसी तरह से सुरिंदर ने कांपते हाथों से अपनी बहन के कांख के बाल साफ़ किये.

बाल साफ़ करने के बाद सुगंधा तो सो गयी. मगर सुरिंदर को नींद ही नहीं आ रही थी. वो अपनी बहन की बगल में लेटे हुए अँधेरे में अपने अंडरवियर को खोल कर अपने लंड से खेल रहा था.अचानक उसे कब नींद आ गयी. उसे ख़याल भी नहीं रहा और उसका अंडरवियर खुला हुआ ही रह गया. सुबह होने पर रोज़ कि तरह सुगंधा पहले उठी तो वो अपने भाई को नंगा सोया हुआ देख कर चौक गयी. वो सुरिंदर के लंड को देखकर आश्चर्यचकित हो गयी. उसे पता नहीं था कि उसके भाई का लंड अब जवान हो गया है और उस पर बाल भी हो गए है. वो समझ गयी कि उसका भाई अब जवान हो गया है. उसके लंड का साइज़ देख कर भी वो आश्चर्यचकित थी क्यों कि उसने आज तक अपने यार मनोज के लंड के सिवा कोई और जवान लंड नहीं देखा था. मनोज का लंड इस से छोटा ही था. हालांकि उसके मन में कोई बुरा ख़याल नही आया और सोचा कि शायद रात में गरमी के मारे इसने अंडरवियर खोल दिया होगा. वो अभी सोच ही रही थी कि अचानक सुरिंदर की आँख खुल गयी और उसने अपने आप को अपनी बहन के सामने नंगा पाया. वो थोडा शर्मिंदा हुआ लेकिन आराम से तौलिया को लपेटा और कहा – सुगंधा, चाय बना दे न.

सुगंधा थोडा सा मुस्कुरा कर कहा – अभी बना देती हूँ.

सुरिंदर ने सोचा – चलो सुगंधा कम से कम नाराज तो नहीं हुई.

लेकिन उसकी हिम्मत थोड़ी बढ़ गयी. अगली ही रात को सुरिंदर ने सोने के समय जान बुझ कर अपना अंडरवियर पूरी तरह खोल दिया और एक हाथ लंड पर रख सो गया. सुबह सुगंधा उठी तो देखती है कि उसका भाई लंड पर हाथ रख कर सोया हुआ है. उसने सुरिंदर को कुछ नही कहा और वो कमरे को साफ़ सुथरा करने लगी. उसने सुरिंदर के लिए चाय बनाई और सुरिंदर को जगाया. सुरिंदर उठा तो अपने आप को नंगा पाया ,.

सुरिंदर थोडा झिझकते हुए कहा – पता नहीं रात में अंडरवियर कैसे खुल गया था.

सुगंधा – तो क्या हुआ? यहाँ कौन दुसरा है? मै क्या तुझे नंगा नहीं देखी हूँ? बहन के सामने इतनी शर्म कैसी?

सुरिंदर – वो तो मेरे बचपन में ना देखी हो. अब बात दूसरी है.

सुगंधा – पहले और अब में क्या फर्क है? यही ना अब थोडा बड़ा हो गया है और थोडा बाल हो गया है , और क्या? अब मेरा भाई जवान हो गया है. लेकिन बहन के सामने शर्माने की जरुरत नहीं.

सुरिंदर समझ गया कि सुगंधा को उसके नंगे सोने पर कोई आपत्ति नहीं है.

अगले दिन रविवार है. शाम को सुरिंदर ने आधा किलो मांस लाया और सुगंधा ने उसे बनाया . दोनों ने ही बड़े ही प्रेम से मांस और भात खाया. सुगंधा अब पूरी तरह से सुरिंदर के अधीन हो चुकी थी.

सुगंधा अपने झीनी गाउन को पहन कर बिस्तर पर आ गयी. सुरिंदर वहां तौलिया लपेटे लेटा हुआ था. सुरिंदर ने अपनी जेब से सिगरेट निकाला और सुगंधा से माचिस लाने को कहा. सुगंधा ने चुप- चाप माचिस ला कर दे दिया. सुरिंदर ने सुगंधा के सामने ही सिगरेट सुलगाई और पीने लगा. सुगंधा ने कुछ नही कहा क्यों कि उसके विचार से सिगरेट पीने वाले लोग अमीर लोग होते हैं.

सुरिंदर – सुगंधा, तू सिगरेट पीयेगी?

सुगंधा – नहीं रे .

सुरिंदर – अरे पी ले, मांस भात खाने केबाद सिगरेट पीने से खाना जल्दी पचता है. कहते हुए अपनी सिगरेट सुगंधा को दे दिया. और खुद दुसरा सिगरेट जला दिया. सुगंधा ने सिगरेट से ज्यों ही कश लगाया वो खांसने लगी.

सुरिंदर ने कहा – आराम से सुगंधा. धीरे धीर पी. पहले सिर्फ मुह में ले. धुंआ अन्दर मत ले. सुगंधा ने वैसा ही किया. 3 -4 कश के बाद वो सिगरेट पीने जान गयी. आज वो बहुत खुश थी. उसका गोरा बदन उसके काले झीने गाउन से साफ़ झलक रहा था.

सुरिंदर – कैसा लग रहा है सुगंधा?

सुगंधा – कुछ पता नहीं चल रहा है. लेकिन धुआं छोड़ने में अच्छा लगता है.

सुरिंदर हंसने लगा. कुछ दिन यूँ ही और गुजर गए. सुगंधा अपने भाई से धीरे धीरे खुलने लगी थी. सुरिंदर भी अब रोज़ सुबह नंगा ही पाया जाता था. सुरिंदर ने अब शर्माना सचमुच छोड़ दिया था. सुरिंदर ने अपनी बहन को ब्यूटी पार्लर ले जा कर मेकअप और हेयर डाई भी करवा दिया था. वह उसके मेक-अप के लिए लिपस्टिक, पाउडर क्रीम आदि भी लेता आया था. सुगंधा दिन ब दिन और भी खुबसूरत होती जा रही थी.

एक रात सुरिंदर ने सिगरेट पीते हुए अपनी बहन को सिगरेट दिया. सुगंधा भी सिगरेट के काश ले रही थी. सुगंधा काला वाला झीने कपडे वाला पारदर्शी गाउन पहन रखा था. उसका गोरा बदन उसके काले झीने गाउन से साफ़ झलक रहा था.

सुरिंदर – सुगंधा एक बात कहूँ.

सुगंधा – हाँ बोल.

सुरिंदर – तू रोज़ गाउन पहन के क्यों सोती है? क्या तेरे पास ब्रा और पेंटी नहीं हैं?

सुगंधा – हाँ हैं, लेकिन तेरे सामने पहनने में शर्म आती है.

सुरिंदर – जब मै तेरे सामने नही शर्माता तो तू मेरे सामने क्यों शर्माती हो? इसमें शर्माने की क्या बात है? कभी कभी वो पहन कर भी सोना चाहिए. ताकि पुरे शरीर को हवा लग सके. दिल्ली में शरीर में हवा लगाना बहुत जरुरी है नहीं तो यहाँ के वातावरण में इतना अधिक प्रदुषण है कि बदन पर खुजली हो जायेंगे. देखती हो मै तो यूँ ही बिना कपडे के सो जाता हूँ.

सुगंधा – तो अभी पहन लूँ?

सुरिंदर – हाँ बिलकूल.

सुगंधा अन्दर गयी और अपना गाउन उतार कर एक पुरानी ब्रा पहन कर बाहर आ गयी. पुरानी पेंटी तो उसने पहले ही पहन रखी थी. सुगंधा को ब्रा और पेंटी में देख सुरिंदर का माथा खराब हो गया. वो कभी सोच भी नहीं सकता था कि उसकी बहन इतनी जवान है.उसका लंड खड़ा हो गया. उसके तौलिया में उसका लंड खड़ा हो रहा था लेकिन उसने अपने लंड को छुपाने की जरुरतनहीं समझी.

वो बोला – हाँ , अब थोड़ी हवा लगेगी. तेरे पास नयी ब्रा और पेंटी नहीं है?

सुगंधा – नहीं. यही है जो गाँव के हाट में मिलता था.

सुरिंदर – अच्छा कोई बात नहीं, मै कल ला दूंगा.

सुगंधा ने लाईट ऑफ कर दिया, लेकिन सुरिंदर की आँखों में नींद कहाँ? थोड़ी देर में जब उसे यकीं हो गया कि सुगंधा सो गयी है तो उसने अपना तौलिया निकाला और अपने खड़े लंड को मसलने लगा. सुगंधा के चूत और चूची को याद कर कर के उसने बिस्तर पर ही मुठ मार दिया. सारा माल उसके बदन पर एवं बिस्तर पर जा गिरा. एक बार मुठ मारने से भी सुरिंदर का जी शांत नहीं हुआ. 10 मिनट के बाद उसने फिर से मुठ मारा. इस बार मुठ मारनेके बाद उसे गहरी नींद आ गयी. और वो बेसुध हो कर सो गया.

सुबह होने पर सुगंधा ने देखा कि सुरिंदर रोज़ की तरह नंगा सोया है और आज उसके बदन एवं बिस्तर पर माल भी गिरा है. उसे ये पहचानने में देर नहीं हुई कि ये सुरिंदर का वीर्य है. वो समझ गयी कि रात में उसने मुठ मारा होगा. लेकिन वो जरा भी बुरा नहीं मानी. वो समझती है कि उस का भाई जवान है, एवं समझदार है इसलिए वो जो करता है वो सही है. वो कपडे पहन कर सुरिंदर के लिए चाय बनाने चली गयी. तभी सुरिंदर भी उठ गया. वो उठ कर बैठा ही था कि उसकी बहन चाय लेकर आ गयी. सुरिंदर अभी तक नंगा ही था.

सुगंधा ने कहा – देख तो, तुने ये क्या किया? जा कर बाथरूम में अपना बदन साफ़ कर ले. मै बिछावन साफ़ कर लुंगी.

सुरिंदर बिना कपडे पहने ही बाथरूम गया. और अपने बदन पर से अपना वीर्य धो पोछ कर वापस आया तब उसने तौलिया लपेटा. तब तक सुगंधा ने वीर्य लगे बिछवान को हटा कर नए बिछावन को बिछा दिया.

उस दिन रविवार था. सुरिंदर बाज़ार गया और अपनी बहन के लिए बिलकुल छोटी सी ब्रा और पेंटी खरीद कर लाया. ब्रा और पेंटी भी ऐसी कि सिर्फ नाम के कपडे थे उस पर. पूरी तरह जालीदार ब्रा और पेंटी लाया. शाम में उसने अपनी सुगंधा को वो ब्रा और पेंटी दिए और रात में उसे पहनने को बोला. रात को खाना खाने के बाद सुरिंदर ने सिगरेट सुलगाई और उधर उसकी बहन ने नयी ब्रा और पेंटी पहनी. उसे पहनना और ना पहनना दोनों बराबर था. क्यों कि उसके चूत और मुम्मों का पूरा दर्शन हो रहा था. लेकिन सुगंधा ने सोचा जब उसके भाई ने ये पहनने को कहा है तो उसे तो पहनना ही पड़ेगा. उसे भी अब सुरिंदर से कोई शर्म नही रह गयी थी. पेंटी तो इंतनी छोटी थी कि चूत के बाल बिलकुल बाहर थे. सिर्फ चूत एक जालीदार कपडे से किसी तरह ढकी हुई थी. ब्रा का भी वही हाल था. सिर्फ निप्पल को जालीदार कपडे ने कवर कियाहुआ था लेकिन जालीदार कपड़ा से सब कुछ दिख रहा था. उसे पहन कर वो सुरिंदर के सामने आयी. सुरिंदर को तो सिगरेट का धुंआ निगलना मुश्किल हो रहा था. सिर्फ बोला – अच्छी है.

सुगंधा ने कहा – कुछ छोटी है. फिर उसने अपनी चूत के बाल की तरफ इशारा किया और कहा – देख न बाल भी नहीं ढका रहें हैं.

सुरिंदर – ओह, तो क्या हो गया. यहाँ मेरे सिवा और कौन है? इसमें शर्म की क्या बात है. खैर! मेरे शेविंग बॉक्स से रेजर ले कर नीचे वाले बाल बना लो.

सुगंधा – मुझे नही आते हैं शेविंग करना. मुझे डर लगता है.

सुरिंदर – इसमें डरने की क्या बात है?

सुगंधा – कहीं कट जाए तो?

सुरिंदर – देख सुगंधा, इसमें कुछ भी नहीं है. अच्छा , ला मै ही बना देता हूँ.

सुगंधा – हाँ, ठीक है.

सुगंधा ने उसका शेविग बॉक्स में से रेजर निकाला और सुरिंदर को थमा दिया. सुरिंदर ने उसके चूत के बाल पर हाथ घसा और उसे धीरे धीरे रेज़र से साफ़ किया.

उसका लंड तौलिया के अन्दर तम्बू के तरह खड़ा था. किसी तरह उसने अपने हाथ से चूत के बाल साफ़ किया. फिर उसने उसने अपनी बहन को सिगरेट दिया और खुद भी पीने लगा. वो लगातार अपनी बहन के चूची और चूत को ही देख रहा था और अपने तौलिये के ऊपर लंड को सहला रहा था.

सुरिंदर ने कहा – अब ठीक है. चूत के बाल साफ़ करने के बाद तू एकदम सेक्सी लगती है रे.

सुगंधा ने हँसते हुए कहा – चल हट बदमाश, सोने दे मुझे. खुद भी सो जा.कल तुझे कारखाना भी जाना है ना.

सुरिंदर ने अपना तौलिया खोला और खड़े लंड को सहलाते हुए कहा – देख ना सुगंधा, तुझे देख कर मेरा लंड भी खडा हो गया है.

सुगंधा ने कहा – वो तो तेरा रोज ही खड़ा होता है. रोज की तरह आज भी मुठ मार ले.

सुरिंदर ने हँसते हुए कहा – ठीक है. लेकिन आज तेरे सामने मुठ मारने का मन कर रहा है.

सुगंधा ने कहा – ठीक है. आजा बिस्तर पर लेट जा और मेरे सामने मुठ मार ले. मै भी तो जरा देखूं कि मेरा जवान भाई कैसे मुठ मारता है?

सुगंधा और सुरिंदर बिस्तर पर लेट गए. सुरिंदर ने बिस्तर पर अपनी बहन के बगल में लेटे लेटे ही मुठ मारना शुरू कर दिया. सुगंधा अपने भाई को मुठ मारते हुए देख रही थी. पांच मिनट मुठ मारने के बाद सुरिंदर के लंड ने माल निकालने का सिग्नल दे दिया. वो जोर से आवाज़ करने लगा.उसने झट से अपनी बहन को एक हाथ से लपेटा और अपने लंड को उसके पेट पर दाब कर सारा माल सुगंधा के पेट पर निकाल दिया. ये सब इतना जल्दी में हुआ कि सुगंधा को संभलने का मौक़ा भी नही मिला. जब तक वो संभलतीऔर समझती तन तक सुरिंदर का माल उसके पेट पर निकलना शुरू हो गया था. सुगंधा भी अपने भाई को मना नही करना चाहती थी. उसने आराम से अपने शरीर पर अपने भाई को अपना माल निकालने दिया. थोड़ी देर में सुरिंदर का माल की खुशबु रूम में फ़ैल गयी. सुगंधा का पेंटी भी सुरिंदर के माल से गीला हो गया. थोड़ी देर में सुरिंदर शांत हो गया. और अपनी बहन के बदन पर से हट गया. लेकिन थोड़ी ही देर में उसने अपनी बहन के शरीर को अच्छी तरह दबा कर देख चुका था. सुगंधा भी गर्म हो चुकी थी. उसने भीअपने पुरे कपडे उतारे और बिस्तर पर ही मुठ मारने लगी. उसने भी अपना माल निकाल कर शांत होने पर नींद मारी. सुबह होने पर सुगंधा ने आराम से बिछावन को हटाया और नया बिछावन बिछा दिया.

अगली रात को लाईट ऑफ कर दोनों बिस्तर पर लेट गए. सुगंधा ने सुरिंदर के पसंदीदा ब्रा और पेंटी पहन रखी थी. आज सुरिंदर अपनी बहन का इम्तहान लेना चाहता था. उसने अपनी टांग को पीछे से अपनी बहन की जांघ पर रखा. उसकी बहन उसकी तरफ पीठ कर के लेती थी. सुगंधा ने अपने नंगी जांघ पर सुरिंदर के टांग का कोई प्रतिरोध नहीं किया. सुरिंदर की हिम्मत और बढी.वो अपनी टांगो से अपनी बहन के चिकने जाँघों को घसने लगा. उसका लंड खडा हो रहा था. उसने एक हाथ को सुगंधा के पेट पर रखा. सुगंधा ने कुछ नही कहा. सुरिंदर धीरे धीरे सुगंधा में पीछे से सट गया. उसने धीरे धीरे अपना हाथ अपनी बहन के पेंटी में डाला और उसके गांड को घसने लगा. धीरे धीरे उसने अपनी बहन के पेंटी को नीचे की तरफ सरकाने लगा.

पहले तो सुगंधा आसानी से अपनी पेंटी खोलना नही चाहती थी मगर सुरिंदर ने कहा – सुगंधा ये पेंटी खोल ना.आज तू भी पूरी तरह से पूरी तरह से नंगी सोएगी. सुगंधा भी यही चाहती थी. उसने अपनी कमर को थोड़ा ऊपर किया जिस से कि सुरिंदर ने उसके पेंटी को उसके कमर से नीचे सरका दिया और पूरी तरह से खोल दिया. अब सुगंधा सिर्फ ब्रा पहने हुए थी. सुरिंदर ने उसके ब्रा के हुक को पीछे से खोल दिया और सुगंधा ने ब्रा को अपने शरीर से अलग कर दिया. अब वो दोनों बिलकूल ही नंगे थे. सुरिंदर ने अपनी बहन को पीछे से पकड़ कर अपने लंड को अपनी बहन के गांड में सटाने लगा. उसका तना हुआ लंड सुगंधा की गांड में चुभने लगा. सुगंधा को मज़ा आ रहा था. उसकी भी साँसे गरम होने लगी थी. जब सुगंधा ने कोई प्रतिरोध नही किया तो सुरिंदरने अपनी बहन के बदन पर हाथ फेरना चालु कर दिया. उसने अपना एक हाथ सुगंधा के मुम्मों पर रख उसे दबाने लगा.

उसने सुगंधा से कहा – सुगंधा, मेरा मुठ मारने का मन कर रहा है.

सुगंधा – मार ना. मैंने मना किया है क्या?

सुरिंदर – आज तू मेरा मुठ मार दे ना सुगंधा.

सुगंधा – ठीक है . कह कर वो सुरिंदर की तरफ पलटी और उसके लंड को पकड़ ली. खुद सुगंधा को अहसास नही था की सुरिंदर का लंड इतना जबरदस्त है. वो बड़े ही प्यार से सुरिंदर का लंड सहलाने लगी. सुरिंदर तो मानो अपने सुध बुध ही खो बैठा. वो अपने आप को जन्नत में पा रहा था. सुगंधा अँधेरे में ही सुरिंदर का मुठ मारने लगी. सुगंधा भी मस्त हो गयी.

वो बोली – रुक , आज मै तेरा अच्छी तरह से मुठ मारती हूँ. कह कर वो नीचे झूकी और अपने भाई सुरिंदर का लंड को मुह में ले ली. सुरिंदर को जबये अहसास हुआ कि उसकी बहन ने उसके लंड को मुह में ले लिया है तो वो उत्तेजना के मारे पागल होने लगा. उधर सुगंधा सुरिंदर के लंड को अपने कंठ तक भर कर चूस रही थी. थोड़ी ही देर में सुरिंदर का लंड माल निकालने वाला था.

वो बोला – सुगंधा – छोड़ दे लंड को माल निकलने वाला है.

सुगंधा ने उसके लंड को चुसना चालु रखा. अचानक सुरिंदर के लंड ने माल का फव्वारा छोड़ दिया. सुगंधा ने सारा माल अपने मुह में ही भर लिया और सब पी गयी. अपने भाई का वीर्य पीना का आनंद ही कुछ और था. थोड़ी देर में बसन्ती ने सुरिंदर के लंड को मुह से निकाल दिया. और वो बाथरूम जा कर कुल्ला कर के आई.

तब सुरिंदर ने कहा – सुगंधा , तुने तो कमाल कर दिया.

सुगंधा ने बेड पर लेटते हुए कहा – तेरा लंड का माल काफी अच्छा है रे.

कह कर वो सुरिंदर कि तरफ पीठ कर के सोने लगी. मगर सुरिंदर का जवान लंड अभी हार नहीं मानने वाला था. उसने अपनी बहन को फिर से पीछे से पकड़ कर लपेटा और उसके बदन पर हाथ फेरने लगा. उसका लंड फिर खड़ा हो गया. इस बार उसका लंड सुगंधा की चिकनी गांड के दरार में घुसा हुआ था. ये सब उसके लिए पहला अनुभव था. वो अपनी बहन के गांड के दरार में लंड घुसा कर लंड को उसी दरार में घसने लगा. वो इतना गर्म हो गया की दो मिनट में ही उसके लंड ने माल निकालना चालु कर दिया और सारा माल सुगंधा के गांड के दरारों में ही गिरा दिया. उत्तेजना के मारे फिर से उसका बहुत माल निकल गया था.सुगंधा का गांड पीछे से पूरी तरह भींग गया. धीरे धीरे जब सुरिंदर का लंड शांत हुआ तो तो सुगंधा के बदन को छोड़ कर बगल लेट गया और थक के सो गया. इधर सुगंधा उठ कर बाथरूम गयी और अपने गांड को धोया और वो वापस बिना पेंटी के ही सो गयी. वो जानती थी कि सुरिंदर उससे पहले नहीं उठेगा और सुबह होने पर वो नए कपडे पहन लेगी. लेकिन वो भी गर्म हो गयी थी. काफी अरसे बाद उसके शरीर से किसी लंड का मिलन हुआ था. वो सोचने लगी कि उसके भाई का लंड उसके यार मनोज से थोड़ा ज्यादा ही बड़ा और मोटा है. उसे भी मनोज के साथ मस्ती की बातें याद आने लगी. ये सब सोचते हुए वो सो गयी. सुबह वो पहले ही उठी और कपडे पहन लिए. सुरिंदर ज्यों ही उठा उसकी बहन सुगंधा उसके लिए गरमा गरम कॉफी लायी और मुस्कुरा कर उसे दिया.

गर्मी की छुट्टी में भैया शिमला ले जाकर मुझे चोदा

मेरा नाम कशिश है मैं 22 साल की लड़की हूं। आज मैं भी आप सभी को एक सेक्स कहानी सुनाने जा रही हूं यह सेक्स कहानी बहुत हॉट और सेक्सी है क्योंकि यह मेरे और मेरे भैया के बीच है। आज मैं आपको बताऊंगी कि मेरे जिस्म की गर्मी को भी भैया ने शिमला में शांत किया। जैसा कि आपको पता है भैया ने मुझे शिमला में ले जाकर चोदा। ऐसे मैं दिल्ली की रहने वाली हूं मैं यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिं ग के छात्र हूं मैं पढ़ाई करती हूं हॉस्टल में रहती हूं तो आजकल मेरा पेपर खत्म हो गया था इस वजह से मैं दिल्ली आ गई थी। दिल्ली आने के बाद मुझे पता चला कि मेरे भैया और भाभी जो अभी अभी शादी हुई है 6 महीने पहले वह दोनों शिमला जाने वाले हैं। तो घर आकर में भी जिद कर दी कि मैं भी शिमला जाऊंगी। भैया बोले शिमला बच्चे नहीं जाते तो मैं बोली मैं बच्ची नहीं हूं मैं 22 साल की हूं। मेरे से 4 साल आप बड़े हो तो इसका मतलब यह नहीं कि आप बहुत बड़े हो गए हो मैं भी छोटी नहीं हूं मैं भी बड़ी हूं। हम दोनों में ऐसी ही बातचीत होती है तभी हम दोनों आपस में काफी ज्यादा खुले हुए हैं।

भैया ने होटल बहुत पहले ही बुक कर लिया था तो मम्मी बोली थी अब तो तुम्हें होटल का कमरा भी नहीं मिलेगा तो तुम कैसे जाओगे अपने भैया भाभी के साथ वह लोग जाएंगे इंजॉय करेंगे एक कमरा लिए हैं पहले बताती तो मैं भी चल पढ़ती हो तुम भी चल पड़ते पर अब तो मैं जा भी नहीं पाऊंगी क्योंकि मुझे काम है तो एक काम करो मेरे भैया को मेरी मम्मी ने बोली कि होटल वाले से बात करो एक कमरा कर दे दे तो इसको भी ले जाओ कशिश भी हॉलीडे को अच्छे से इंजॉय कर लेगी।

भैया ने होटल में बात किया तो उन्होंने एक कमरा देने को राजी हो गया क्योंकि उनका एक कैंसिल हुआ था इस वजह से वह कमरा मुझे मिल गया मैं बहुत खुश हो गई। शिमला जाने का मेरा कोई प्लान भी नहीं था और एकदम से प्लान बन गया तो खुश हो ना तो बनता ही है। अब हम तीनों ही शिमला के लिए निकल पड़े भैया का कमरा मेरे कमरे के बगल में ही था भैया भाभी तो आपको पता है जब नई-नई शादी हुई है तो चुदाई के अलावा और क्या होगा। वह लोग रात को जल्दी ही खाना पीना खाकर अपने कमरे में चले गए मैं अपने कमरे में नॉनवेज स्टोरी पर ही काम में पढ़ते रहे और मैं क्या करती।

एक बार जाकर भी उनके दरवाजे के पास खड़ी हुई तो अंदर से भाभी की आवाज आ रही थी और जोर से और जोर से आज मुझे खुश कर दो आज मुझे खुश कर दो। मैं समझ गई भाभी की जबरदस्त चुदाई हो रही है। यह सब सुनकर मेरी भी चूत गीली हो गई थी और मैं वापस आकर सो गई। उस दिन तो ऐसे ही बीता सुबह उठे हम लोग घूमे फिरे और शाम को उस दिन होटल वाले ने भैया भाभी के लिए एक और व्हिस्की का भी इंतजाम किया था क्योंकि वह दोनों पहले ही बताए थे कि हनीमून पर आ रहे हैं इस वजह से हनीमून मनाने वाले के लिए उस होटल में पार्टी का इंतजाम किया जाता है।
उन दोनों की शान तो बड़ी रंगीन होने लगी थी। मुझे लग रहा था कि मैं बेकार ही आ गई क्योंकि जब एक कपल कहीं आए घूमने के उसके साथ किसी को नहीं आनी चाहिए और वह भी एक बहन को तो भूल कर भी नहीं आना चाहिए। ऐसा मुझे महसूस हो रहा था। पर बातें कुछ ही देर में बदल गई। हम लोग हॉस्टल रेस्टोरेंट से अपने कमरे में आए तो भैया मुझे भी अपने कमरे में बुला लिए और वह पर दारु पार्टी होने लगा मैं मना भी की की मैं मैं पियूँगी तो भइया बोले सब चलता है। भाभी भी एक नम्बर की पियक्कड़ है तो वो भी मुझे कहने लगा पी लो घर में नहीं बोलेंगे।
और फिर हम तीनों की दारू पार्टी शुरू होगी दारू के साथ-साथ एक-एक करके हम लोग डांस भी करते थे और 2 लोग बैठ कर देखते थे। पहले भैया की बारी उसके बाद मेरी उसके बाद मेरी भाभी की हम तीनों ही काफी नशे में हो गए थे इस वजह से डांस थोड़ा सेक्सी हो गया था। भाभी डांस करते-करते अपना टॉप उतार कर फेंक दूं और धीरे-धीरे वह ब्रा पर आ गयी। भैया पैक बनाए जा रहे थे और हम लोग दारू पी पी कर डांस कर रहे थे भाभी डांस कर रही थी ब्रा पहन कर पहन कर। भैया भाभी का रूप देखकर लैंड पर हाथ फिराने लगे थे वह मैं देख रही थी। धीरे-धीरे भाभी न्यूड हो गई उन्होंने अपना ब्रा उतार कर फेंक दी और फिर भी खोल दी और नाचने लगी।
फिर से हम लोग एक एकता के लिए अब भैया भी साथ नाचने लगे और भाभी की चूचियां दबाने लगे। भैया को होश भी ना रहा कि उनकी बहन सामने बैठी हुई है पर मैं भी कहां कम थी मैं भी दारू पीकर नशे में हो गई थी। भाभी ने मुझे इशारे से बुलाई और मैं भाभी के पास चली गई भाभी मेरे होंठ को चूमने लगी ऐसा लग रहा था कि वह लैसबियन रहे। भैया वहीं पर मेरे सामने ही भाभी की चूचियों को दबाने लगे और उनके होंठ पर किस करने लगे धीरे-धीरे भाभी ने मेरे कपड़े भी उतार दी। और फिर मेरी चूचियां क्योंकि मैं तो अभी तक किसी को हाथ भी नहीं लगाने देती और मेरी टाइट चूचियां देखकर मेरा भाई का दिमाग हिल गया था वह मेरी चूचियों को छूने लगा और धीरे-धीरे भाभी को छोड़कर मेरे साथ हो गया मेरे को चूमने लगा मेरी चूचियों को दबाने लगा मेरी गांड को सहलाने लगा।
धीरे-धीरे मैं भी कामुक होने लगी और मैं भी भैया को साथ देने लगी मैं भी उनके लंड को पकड़ ली थी क्योंकि उनका लंड काफी मोटा हो गया था अब हम तीनों ही एक दूसरे को खुश कर रहे थे। भैया भाभी से ज्यादा मुझे ही चूम रहे थे मेरी चूचियों को दबा रहे थे भाभी बोली भी जवान बहन मिल गई तो बीवी को छोड़ दिए हो। भैया मेरी चूचियों को दबाते हुए अपने मुंह में लेकर निप्पल को दबाने लगे मेरी तो चूत गीली हो गई। मेरे से रहा नहीं जा रहा था पर मैं करूं क्या भाभी नहीं रहती तो मैं अब तक भैया को पटक कर चढ़ गई होती। भाभी बोली भैया से मेरी चूत गीली हो चुकी है मुझे जल्दी से चोद दो क्योंकि मैं काफी नशे में हो गई हूं मैं गिर जाऊंगी। यह सुनकर भैया ने भाभी को बेड पर पटका दोनों टांगों को अलग-अलग करके अपना मोटा लंड चूत के बीच में लगाया और घुसा दिया चुचियों को दबाते हुए जोर जोर से धक्के देने लगा।
10 मिनट की चुदाई में ही भाभी झड़ गई और बोली आज मैं बहुत थक चुकी हूं मैं सो रही हूं और 5 मिनट के अंदर ही सो गई। उसके बाद फिर शुरू हुआ भाई बहन की चुदाई भैया ने मुझे बेड पर लिटा कर दोनों टांगों को अलग-अलग करके मेरी पैंटी उतार दी और फिर मेरी चूत को चाटने लगे मेरी चूत गीली हो चुकी थी। मेरे चूचियों को मसलते हुए अपना लंड मेरी चूत के छेद पर लगाकर जोर से घुसाने की कोशिश की पर नहीं गया क्योंकि मेरी चूत काफी टाइट थी। तीन चार झटके मारने के बाद भैया का लंड में चूत के अंदर प्रवेश कर गया और पूरा लंड अंदर जाते ही मेरी कामवासना और भी ज्यादा भड़क गई। दर्द तो मुझे बहुत हो रहा था पर लंड का मजा कुछ और ही था इस वजह से मैं चाह रही थी कि भैया मुझे जमकर चोदे।

नशे में थी इस वजह से दर्द ही नहीं हो रहा था जबकि मैं पहली बार चुद रही थी। भैया मुझे अलग अलग तरीके से मेरी चूत को फाड़ने लगे। मेरे चुचियों को दबाते हुए जोर-जोर से मुझे चोदने लगे मैं भी गांड हिला हिला कर गांड घुमा घुमा कर भैया के लंड को अपने अंदर ले रही थी , भैया ने मुझे करीब 2 घंटे तक हम दोनों ही नशे में थे और हम दोनों नशे में पागल हो गए थे। कामसूत्र के करीब 10:00 तरीके हम दोनों ने आज भी तो गांड फाड़ कर सो गई थी। पर भैया ने मुझे जमकर चोदा। आखिरकार मैं भी झड़ गई भैया भी झड़ गए हम तीनों एक ही बेड पर सो गए। सुबह उठे तो भाभी बोली चलो आज से तू मेरी सौतन हो गई है अब हम तीनों मिलकर मज़े करेंगे।

उसके बाद हम लोग 4 दिन और भी शिमला में रुके थे क्या बताऊं दोस्तों मजा आ गया था जब भाई का लंड बहन की चूत में जाता है तो मजा कुछ और ही होता है। रोजाना भैया मुझे चोदते थे भाभी के साथ और मैं भी खूब मजे लेती थी। उस दिन के बाद से तो भैया भैया ना रहा सैया हो गया अब तो मेरी चूत भी ढीली हो गई है क्योंकि मोटा लंड रोजाना चूत के अंदर जा रहा है आजकल।

भैया ने सुबह-सुबह चोदा योगा सिखाने के बहाने

मेरा भाई अभी हाल ही में रामदेव बाबा के आश्रम में गया था हरिद्वार और वहां से सीख कर आया योगा। और लगा सिखाने अपनी छोटी बहन को, योगा सिखाने के बहाने उसने सुबह सुबह ही मुझे चोद दिया। अब वह कहता है रोजाना तुम 6:00 से 7:00 सुबह फ्री रहना ताकि मैं तुम्हें योगा सिखा सकूं। पर अब मुझे पता है ना 6:00 से 7:00 योगा नहीं बस उसको मुझे चोदना है। 3 दिन से वह लगातार मुझे चोद रहा है योगा के नाम पर।

मेरा नाम कल्याणी है मैं 22 साल की हूं और मेरा भाई 24 साल का है। भाई बहन दोनों बहुत हिल मिलकर रहते हैं कभी ऐसा नहीं लगा कि हम दोनों भाई बहन हैं हम दोनों ही दोस्त के जैसे रहते हैं। मेरे मम्मी पापा भी खुले विचार के हैं। आज तक हम दोनों भाई बहन एक ही कमरे में सोते हैं मम्मी पापा एक कमरे में सोते हैं। भले ही अलग-अलग बेड है हम दोनों भाई बहन का दरवाजा बंद कर हम लोग सो जाते हैं आज तक कभी मम्मी पापा को ऐसा नहीं लगा के जवान बेटा बेटी एक साथ नहीं सुलाने चाहिए।

और मम्मी पापा लोग यही गलतियां कर जाते हैं। उनको लगता है. भाई बहन है कोई बात नहीं ऐसा कुछ भी नहीं होगा पर आजकल के मां-बाप को यह समझना बहुत जरूरी है कि जमाना बदल गया है कुछ भी हो सकता है। अब सीधे कहानी पर आती हूं मैं। मैं अपनी फिगर को लेकर काफी एक्टिव रहती हूं इसीलिए मैं सुडौल शरीर की हूं। मेरे अंग अंग कसे हुए हैं हॉट और खूबसूरत हूं मेरी चूचियां अभी भी इतनी ज्यादा टाइट है आपको मैं बता नहीं सकती मेरे गांड बाहर की तरफ निकला हुआ है मैं कर्वी शरीर की लड़की हूं। इसलिए मैं हमेशा योगा और व्यायाम करते। हूँ मेरा भाई जब पतंजलि बाबा रामदेव के यहां से योग सीख कर आया है। तब से वह मेरा ध्यान और भी ज्यादा रखने लगा उसने आते ही मुझे कह दिया कि कल 6:00 से 7:00 तुम्हें रोजाना मैं योगा कराऊंगा। मुझे भी लगा कि सही है वह कुछ सीख कर आया है तो अच्छा ही कराएगा। योगा के लिए मेरे पास कपड़े हैं जो काफी टाइट है मेरे बदन को बिल्कुल टाइट करके रखता जिस से एक-एक अंग दिखाई देता है। मैंने वही पहन कर दूसरे दिन 6:00 बजे तैयार हो गई मेरा भाई भी तैयार हो गया योगा कराने के लिए।

वह मुझे अलग अलग तरीके से योगा कराने लगा। पर मेरे शरीर को देखकर वह डोल गया, मेरी कसी हुई शरीर मेरे उभरे हुए गांड और मेरी बड़ी-बड़ी चूचियां मेरे गोरे गाल और लाल लाल होंठ और पीछे बालों का जुड़ा बनाया हुआ कोई भी देख कर फिदा हो सकता है चाहे वह भाई ही क्यों ना हो। जब उसने मुझे सिर के बल और पैरों पर करने वाला योगा बता रहा था उसके बाद उसने मेरे दोनों टांगों को अलग अलग किया तो मेरी चूत की लाइन उसको दिखाई देने लगी। मेरे गांड का जो लाइन होता है वह भी साफ साफ दिख रहा था। मैं सर के बल खड़ी थी। यह देखकर मेरे भाई को रहा नहीं गया और मेरे गांड को सहलाना शुरु कर दिया। मैं तुरंत ही नीचे हो गई और बोली कि क्या कर रहे हो उसने कहा ऐसा बदन देख कर कोई साधु तो नहीं बन सकता मैं योगा सिखा सकता है। और उसने मुझे अपनी बाहों में ले लिया मेरा ऊपर का जो कपड़ा था वह तुरंत खोल दिया घर में मम्मी पापा थे नहीं वह लोग सुबह कहीं चले गए थे , 5:00 बजे कार से वह कहीं उनको जाना था। मैं भी थोड़ा उसके चक्कर में आ गई क्योंकि उसका गठीला बदन देखकर मैं भी थोड़ा पसीज गई। उसने मेरे होंठ पर किस करना शुरू कर दिया। मैं भी कहां कम थी मैं भी उसके होंठ को अपने मुंह में ले ली और चूसने लगी धीरे-धीरे करके उसका में लंड पकड़ ली।

उसने अपना हाथ में घुसा दिया मेरी चूत पहले से ही काफी गीली थी। ब्रा का हुक तुरंत उस ने खोल दिया मेरे दोनों चूचियां आजाद हो गया। वह तुरंत ही मेरे चूचियों को मसलने लगा और अपने मुंह में ले लिया। मैं उसको चूमने लगी किस करने लगे रखने बाहों में भर ले। मैं तुरंत ही नीचे बैठ गई और उसका लंड निकाल कर अपने मुंह में ले ली। और चूसने लगी। मोटा करीब 9 इंच का उसका लैंड था मैं आइसक्रीम की तरह चूस रही थी और वह खड़े-खड़े मेरे बाल को पकड़कर अपने लंड के तरफ रहा था। मैं नंगी पूरी तरीके से थी वह भी नंगा हो गया उसने योगा मैच पर मुझे लिटाया दोनों पैरों को अलग-अलग कि अपना लंड मेरी चूत पर लगाकर जोर से घुसा दिया।  जैसे ही पूरा लंड मेरी चूत में गया मैं तड़पने लगी। दर्द तो जोर से हुआ था क्योंकि उसने जोर से धक्का मारा था। पर जैसे ही उसने तीन चार बार अंदर बाहर किया मुझे अच्छा लगने लगा। मेरी बड़ी बड़ी चूचियों को मसलते हुए वह मेरे होंठ को चूमता था। और लंड को अंदर बाहर अंदर बाहर कर रहा था। मेरे पूरे शरीर मैं ऐसा लग रहा था जैसे कि आग लग गई हो। मैं वासना की आग में जलने लगी थी मैं पागल होने लगी थी उसका लंड जैसे ही मेरे चूत में गया था मेरे रोम रोम खड़े हो गए थे मैं बस चोदना चाह रही थी।

उसने मुझे घोड़ी बनाकर गांड के नीचे से अपना लंड मेरी चूत के सामने रखा और जोर-जोर से गांड की तरफ से मुझे चोदने लगा। ऐसा चोदने से उसका पूरा लंड मेरी चूत के अंदर समा रहा था और जब वह जोर से धक्का देता था मेरी गांड दो फाक में बदल जाता था। मेरे दोनों चूतड़ हिल रही थी बार-बार वह मेरे चूतड़ पर थप्पड़ भी मारता था अब पूरा लंड मेरी चूत में फेल रहा था। अब वह नीचे लेट गया मैं उसके ऊपर चढ़ गई उसके लंड पर बैठ गई अपने चूत के पास रख कर। अब मैं गांड को गोल-गोल घुमा कर उसके लंड पर दे रही थी। उसका अंदर बाहर हो रहा था और मैं ऊपर से धक्के दे रही थी।

फिर मेरी एक टांग को उसने टेबल पर रखा और बीच में लंड चूत में डालने लगा। खड़े-खड़े चुदाई का मजा तो कुछ और ही होता है मैं उसकी बाहों में आ गई और वह नीचे से मेरी चूत में लंड घुसा रहा था। हर एक 10 से 15 सेकंड में वह मेरी चूचियों को मसलते और मेरे निप्पल को चूसने लगता। फिर उसने मुझे उल्टा कर दिया फिर उल्टा होकर मुझे चोदने लगा। और यह सब काम योगा मैथ पर हो रहा था ऐसा लग रहा था योगविद्या चल रही हो। कभी आप भी ऐसे ट्राई करके देखिए योगा का ड्रेस पहन लिए योगा मैट भी चाहिए और सुबह-सुबह आप अपनी गर्लफ्रेंड का या अपनी बीवी का या आप जिसको भी चोदते हैं जिसके साथ आप का सेक्स संबंध है उसके साथ कभी योगा करते हुए योगा मैथ पर और योगा कपड़े पहने हुए चुदाई कीजिए।

बेहतरीन लगेगा आपको जैसा कि मुझे लगा मेरा भाई उस दिन मुझे खूब चोदा बहुत मजा आया। उस दिन के बाद से वही होगा कम करता है उस समय मेरी चुदाई ज्यादा करता है। चाहे योगा कीजिए या चुदाई कीजिए शरीर तो आपका ही बनेगा आजकल मैं और भी ज्यादा सुडौल हो गई हूं। मन शांत रहता है क्योंकि जुदाई का ख्याल नहीं आता है अब मेरे दिल में। घर का माल हूं घर में रह गई हूं तो यह अच्छी बात है बाकी जब शादी होगी तो देखी जाएगी तब तक मैं अपने भाई से ही मजा ले लेती हूं।

 

भाभी की चुदाई होटल में – मुंबई की देवर भाभी सेक्स कहानी

मुंबई की अंधेरी ईस्ट की उस 5-स्टार होटल में, जहां लॉबी की क्रिस्टल चैंडेलियर से निकलती रोशनी फर्श पर हीरे जैसी चमक बिखेरती है और एयर में महंगे परफ्यूम की महक घुली रहती है, मैंने वो रातें गुजारीं जो जिंदगी भर याद रहेंगी। मैं, राहुल, 27 साल का, दिल्ली से कंपनी की मीटिंग के लिए मुंबई आया था। कंपनी ने मुझे और मेरी भाभी प्रिया को एक ही होटल में बुक किया था – रूम 1205 और 1207, पास-पास, 12वीं फ्लोर पर। भाई रोहन दिल्ली में ही था, लेकिन प्रिया को भी एक फैमिली मैरिज फंक्शन अटेंड करने मुंबई आना पड़ा था। प्रिया, 29 की – गोरी, भरी-भराई बॉडी, लंबे सिल्की बाल, गुलाबी होंठ, और आंखें ऐसी कि एक नजर में दिल थम जाए। शादी को पांच साल हो गए थे। बाहर से सब परफेक्ट लगता – खुशहाल जोड़ा, अच्छा घर। लेकिन अंदर, एक ऐसी चाहत सुलग रही थी जो धीरे-धीरे भड़क उठी।

पहली शाम। एयरपोर्ट से होटल तक टैक्सी में हम साथ थे। प्रिया ने सफेद कुर्ता-पजामा पहना था – टाइट, पसीने से थोड़ा गीला। वो मेरे बगल में बैठी थी। उसकी जांघ मेरी जांघ से छू रही थी। हर ब्रेक पर वो हल्का सा सरकती, स्पर्श और गहरा होता। वो बोली, “राहुल, मुंबई में इतने दिनों के लिए पहली बार आए हो?” मैंने कहा, “हां भाभी, मीटिंग्स हैं। तू?” वो मुस्कुराई। “मैं फैमिली फंक्शन के लिए। रोहन नहीं आ सका। अकेली हूं।” उसकी आवाज में एक हल्की सी उदासी थी। मैंने कुछ नहीं कहा। बस उसकी आंखों में देखता रहा। वो नजरें मिलाकर मुस्कुराई।

होटल पहुंचे। चेक-इन किया। लिफ्ट में अकेले थे। वो करीब आई। उसकी सांस मेरी गर्दन पर गर्म लग रही थी। मैंने उसकी कमर पर हाथ रखा। वो सिहर उठी। “राहुल… यहां?” मैंने कहा, “भाभी… बस एक पल।” लिफ्ट रुकी। हम अलग हो गए। लेकिन वो पल काफी था।

शाम को मीटिंग खत्म हुई। मैं लौटा। प्रिया का मैसेज आया – “राहुल, डिनर साथ? रूफटॉप रेस्टोरेंट में मिलते हैं।” मैंने हां कहा। रूफटॉप पर मुंबई की लाइट्स नीचे चमक रही थीं। प्रिया ने ब्लैक ड्रेस पहनी थी – डीप नेकलाइन, बैकलेस, सिल्की फैब्रिक जो उसके शरीर से चिपक रहा था। उसके स्तन की गहराई साफ दिख रही थी। वो बोली, “राहुल, आज बहुत अच्छा लग रहा है तू।” मैंने कहा, “भाभी, तू तो हमेशा स्टनिंग लगती है।” वो हंस पड़ी। वाइन ऑर्डर की। बातें शुरू हुईं – भाई की व्यस्तता, घर की बातें, और धीरे-धीरे पर्सनल। वो बोली, “राहुल… रोहन बहुत अच्छा है, लेकिन कभी-कभी लगता है कि वो मुझे पूरी तरह समझता नहीं। शारीरिक रूप से भी… दूरियां बढ़ गई हैं।” मैं चुप रहा। वो मेरे हाथ पर हाथ रख दिया। “तू समझता है न?” मैंने कहा, “हां भाभी… बहुत।”

वाइन का असर हो रहा था। हम उठे। लिफ्ट में फिर अकेले। इस बार वो खुद मेरे करीब आई। उसने मेरी कमर पकड़ ली। मैंने उसके होंठ चूम लिए। वो जवाब देने लगी। लिफ्ट रुकी। हम 1207 में – प्रिया के रूम में। दरवाजा बंद हुआ। वो मेरे सामने खड़ी थी। मैंने उसे दीवार से सटा दिया। उसके होंठ फिर चूमे। वो किस गहरा होता गया। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। मैंने उसकी ड्रेस की जिप खोली। ड्रेस नीचे। ब्रा और पैंटी में। काले लेस ब्रा में उसके गोरे स्तन। मैंने ब्रा उतारी। निप्पल सख्त, गुलाबी। मैंने उन्हें दबाया। वो सिसकारी। “आह… राहुल… जोर से… दबा… चूस…” मैंने एक निप्पल मुंह में लिया। जोर से चूसा। दांतों से हल्का काटा। वो चीख पड़ी। “आह… हां… काट… मेरे निप्पल को चूस… रस्सी बना दे… और जोर से…” मैंने दूसरे को भी वैसा ही किया। वो मेरे बाल पकड़कर दबा रही थी। “राहुल… ओह… सालों बाद किसी ने ऐसे छुआ है… चूस… और चूस…”

मैंने उसे बेड पर पटका। पैंटी उतारी। उसकी चूत – गुलाबी, पहले से गीली, रस टपक रहा। मैंने जीभ लगाई। वो कमर उठाकर चीखी। “राहुल… चाट… मेरी चूत… बहुत जल रही है… जीभ अंदर डाल…” मैंने जीभ अंदर डाली। क्लिट को चूसा। उंगलियां डालीं – दो, फिर तीन। वो कमर हिला रही थी। “आह… राहुल… उंगलियां… तेज… मेरी चूत को फाड़… जीभ से चोद… ओह… और तेज… मैं झड़ने वाली हूं…” मैंने स्पीड बढ़ाई। वो कांपकर झड़ गई। उसका रस मेरे मुंह में बहा। मैंने सब चाट लिया। वो बोली, “राहुल… अब तेरा नंबर।”

वो उठी। मेरी शर्ट उतारी। छाती चूमी। नीचे आई। पैंट उतारी। लंड बाहर – सख्त, मोटा, सुपारा चमक रहा। वो हाथ में लिया। “राहुल… कितना मोटा और लंबा है तेरा… रोहन से बहुत बड़ा…” वो सहलाने लगी। फिर मुंह में लिया। जोर-जोर से चूसने लगी। जीभ सुपारे पर घुमा रही थी। गले तक ले रही थी। लार टपक रही थी। मैं सिसकारा। “भाभी… बहुत अच्छा… गहरा ले… आह… तेरी जीभ जादू कर रही है… चूस… और चूस…” वो बोली, “अब डाल… मुझे तेरी जरूरत है।”

वो बेड पर लेट गई। जांघें फैलाईं। मैंने लंड उसकी चूत पर रखा। धीरे से अंदर। वो कराही। “आह… राहुल… बड़ा है… धीरे… पूरा अंदर ले रही हूं…” मैं रुक गया। फिर धीरे-धीरे पूरा अंदर। वो चीखी। “हां… पूरा… अब चोद… जोर से…” मैंने धक्के शुरू किए। धीरे से तेज। वो कमर हिला रही थी। “राहुल… जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… चोद… आह… तेज… और तेज… मेरी चूत तेरी है…” मैंने स्पीड बढ़ाई। उसके स्तन हिल रहे थे। मैंने दबाए। वो मेरी पीठ नाखूनों से खरोंच रही थी। “राहुल… अंदर झड़… मुझे भर दे… गर्म वीर्य डाल… मैं तेरी हूं…” मैंने और जोर से धक्के मारे। एक साथ झड़ गए। मेरा गरम वीर्य उसकी चूत में भर गया। वो कांपकर थम गई।

लेकिन रात खत्म नहीं हुई। वो उठी। “राहुल… आज पूरी रात।” वो मेरे ऊपर चढ़ गई। उसकी चूत मेरे लंड पर। वो कमर हिला रही थी। ऊपर-नीचे। उसके स्तन मेरे मुंह में। मैं चूस रहा था। वो चीख रही थी। “राहुल… तेरे लंड ने मुझे पागल कर दिया… आह… गहरा… और गहरा… मैं ऊपर से चोद रही हूं तुझे…” मैंने नीचे से धक्के मारे। वो तेज हो गई। “राहुल… मैं झड़ रही हूं… आह…” वो झड़ गई। मैंने उसे पलटा। डॉगी स्टाइल। उसकी गांड पकड़ी। लंड डाला। तेज-तेज। वो तकिए में मुंह दबाकर चीख रही थी। “राहुल… चोद… मेरी चूत और गांड दोनों तेरी… फाड़ दो… जोर से… मुझे तेरी रंडी बना दे… बाल पकड़… पीछे से पटक…” मैंने उसके बाल पकड़े। पीछे से जोर से धक्के। वो अपनी चूत सहला रही थी। हम कई बार झड़े।

फिर मैंने कहा, “भाभी… आज गांड में?” वो शरमा गई। “धीरे से… पहली बार…” मैंने ऑयल लगाया। पहले उंगली। वो सिहर उठी। “राहुल… आह… दर्द… लेकिन अच्छा…” फिर दो उंगलियां। वो कमर हिला रही थी। “राहुल… और अंदर… तैयारी कर रही हूं…” फिर लंड। धीरे से अंदर। वो चीखी। “आह… राहुल… बड़ा है… धीरे…” मैं रुक गया। फिर धीरे-धीरे पूरा। वो बोली, “अब चोद… मेरी गांड चोद…” मैंने धक्के शुरू किए। वो चीख रही थी। “राहुल… जोर से… फाड़ दो मेरी गांड… आह… बहुत मजा आ रहा है… अपनी चूत में उंगलियां डाल रही हूं…” मैं तेज हो गया। वो अपनी चूत में उंगलियां डाल रही थी। हम दोनों झड़ गए।

सुबह हुई। हम थके हुए लेटे थे। प्रिया बोली, “राहुल… ये हमारा राज रहेगा। लेकिन तू मेरी जान बन गया है।” मैंने कहा, “भाभी… मैं तुझे कभी नहीं छोड़ूंगा।” वो मुस्कुराई। “अब जब भी मुंबई आएं, इसी होटल में मिलेंगे।”

समय बीतता गया। भाई को शक नहीं हुआ। लेकिन हर बार मुंबई आने पर हम इसी होटल में मिलते। रात भर चुदाई। प्रिया की चूत में मेरा लंड, उसके होंठों पर मेरी जीभ, उसके स्तनों में मेरी उंगलियां। मुंबई की इन ऊंची दीवारों के बीच हमारा गुप्त संसार था। जहां बाहर सब सामान्य, अंदर हम जलते रहे – चाहत में, प्यार में, और उस गहरे बंधन में जो शायद कभी टूटे नहीं।

घर की नई बहु की चुदाई तीन तीन लौड़े से हो गयी

मेरा नाम चेतन आनन्द है। मैं मिर्जापुर का रहने वाला हूँ। हम लोग भोटिया जनजाति से है। बहुत कम लोगो को ये बात मालूम है की हमारे घरो में जब कोई नई बहू आती है तो घर के सभी मर्द उनकी चूत मारते है। ठीक ऐसा ही हुआ था। मेरे बड़े शिव भैया की शादी हुई थी। उनकी बीबी या बोलू की मेरी होने वाली भाभी कडक माल थी। शादी हो गयी और विदाई भी हो गयी थी। मेरी नई भाभी घर में आ गयी थी। घर की सब लेडीस बहुत खुश थी। फिर रात होने लगी थी। मेरे पापा भी नई वाली भाभी को चोदने का वेट कर रहे थे। हमारी भोटिया जनजाति में ये प्रथा बहुत सालो से चल रही है। नई बहू की चुदाई सभी मर्द करते है। भाभी को देखकर मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई थी। उनका रंग काफी गोरा था। 5 फिट 5 इंच की लम्बी चौड़ी लड़की थी वो। बड़ी बड़ी कजरारी आँखे थी उनकी। वो अंदर कमरे में बैठी हुई थी। उनका फिगर 36 30 38 का था। भाभी के जिस्म में खूब गोश था। मैं समझ गया की जो भी इनको चोदेगा, उसे भरपूर मजा मिलेगा। उनको भी पता था की आज रात वो 3 3 मर्दों से चुदेंगी। वो अच्छे से समझती थी। फिर रात के 12 बज गये।

“पापा जी!! आप पहले कमरे में जाइए” शिव भैया बोले

दोस्तों हमारी जाती में सबसे बुजुर्ग आदमी ही नई दुल्हन की सील तोड़ता था।

“ठीक है बेटा!! मैं जा रहा हूँ” पापा बोले

फिर वो कमरे में चले गये। मेरी भाभी शादी के जोड़े में बैठी लजा रही थी। धीरे धीरे मेरे पापा ने उनके चेहरे से घुंघट का पर्दा हटा दिया। फिर भाभी के चेहरे को देखने लगे। उनके चेहरे का फेस कट काफी अच्छा था।

“आह बहू!! तुम सच में कयामत हो!! आज मुझे तुम्हारी सेवा करने का मौका दो” पापा बोले और उन्होंने धीरे से भाभी को बिस्तर पर लिटा दिया। फिर उनके होठो पर किस करने लगे। भाभी भी जवान माल थी। वो भी चुदने को बेकरार थी। वो अच्छी तरह से संजी हुई थी। उन्होंने बालो में फूलो का गजरा लगा रखा था। कान में सोने की बड़ी बड़ी झुमकियाँ पहन रखी थी। भाभी के गले में सोने के बड़े से लोकेट वाला मंगल सूत्र था। उन्होंने अच्छे से मेकअप किया हुआ था। फेसियल की वजह से उनका चेहरा किसी हेरोइन की तरह चमक रहा था। मेरे चुदक्कड पापा चालू हो गये। वो भाभी के ओंठ पर ओंठ लगाकर किस करने लगे। भाभी भी चूसने लगी। दोनों का मौसम बन गया। दोनों ने इतनी होठ चुसाई कर डाली की भाभी गरमा गयी।

“बहू रानी!! अपने बड़े बड़े मम्मे का दर्शन तो करवाओ मुझे!!” मेरे पापा बेचैन होकर बोले

भाभी ने अपना ब्लाउस खोल दिया। फिर ब्रा खोल दी और निकाल दी।

“ओह्ह बहू!! तुम तो जबर्दस्त माल हो !!” पापा जी बोले

फिर वो भाभी की 36 इंच की बड़ी बड़ी चूची को हाथ में लेकर दबाने लगे। भाभी जी “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा सी सी सी” करने लगी। दोस्तों उनके मम्मे इतने गजब के थे की मेरे उम्रदराज पापा का लंड चड्डी में ही बहा जा रहा था। भाभी की चूचियां बड़ी बड़ी थी और निपल काली काली थी। उनके निपल के चारो ओर बड़े बड़े काले घेरे थे जो गजब के सेक्सी दिख रहे थे। मेरे पापा दबा दबाकर मजा लेते रहे। फिर किसी भूखे शेर की तरह टूट पड़े और भाभी को अपनी वासना का शिकार बनाने लगे।

“चुसाओ बहु!! अपने बड़े बड़े मम्मे को चूसने दो” पापा बोले

भाभी ने अपने हाथ अपनी 36” की बड़ी बड़ी चूची पर से हटा दिया। मेरे चुदक्कड पापा चूची को हाथ में लेकर पकड़ लिए और दबाने लगे। फिर मुंह में ले लिए और किसी जवान मर्द की तरह चूसने लगे। नई वाली भाभी “……अई…अई….अई…..इसस्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” करने लगी।

“…..सी सी सी सी….हा हा हा…”ससुर जी!! आप तो मेरी जान ही ले लेंगे… इसस्स्स्स्….. भाभी कहने लगी

मेरे ठरकी पापा ने निपल्स को मुंह में लेकर किसी संतरे के जैसे चूस डाला। सब रस निकाल लिया। फिर दांत गड़ाकर निपल्स को काटने लगे। भाभी तडप रही थी। मेरे पापा ने काफी देर तक दोनों दूध को मुंह में लेकर चूस डाला और भाभी को गर्म कर दिया। फिर उनकी साड़ी खोली। पेटीकोट उतार डाला। नई वाली भाभी ने काली रंग की चड्डी पहनी थी। पहले तो मेरे पापा उपर से उनकी काली चड्डी जीभ लगाकर चाटते रहे। फिर जब भाभी का बुरा हाल हो गया तो पापा ने दांत से पकड़कर उनकी चड्डी उतार डाली। भाभी की चूत बहुत ही साफ़ सुथरी और चिकनी थी। झांट का एक बाल भी उस पर नही था।

“अई…..अई….अई… ससुर जी!! मेरी बुर को आप अच्छे से चूसिये, उसके बाद ही आप मुझे चोदना!!” भाभी जी बोली

“ठीक है बहू!! मैं ऐसा ही करूंगा” पापा बोले

उसके बाद नई वाली भाभी ने अपनी दोनों टांगो को खोल दिया। पापा जी लेट गये और चूत पर जीभ लगा लगाकर चूसने लगे। पापा को भी खूब मजा मिल रहा था। नई दुलहन की चूत मारने का पहला मौका उनको ही दिया गया था क्यूंकि हम लोगो के यहाँ यही रिवाज है। पापा जी अच्छे से बुर के ओंठो को चाट रहे थे। चूत के दाने को अंगूर की तरह चूस रहे थे। उन्होंने 10 मिनट चूत चटाई की और अब नई वाली भाभी चुदने को तैयार थी। मेरे पापा ने अपना कुर्ता पजामा खोल दिया और अपना निकर उतार दिया। पापा 64 साल के उम्र दराज आदमी थे, पर आज भी किसी भी जवान औरत को चोद सकते थे। इतना पावर था उनके पास। उनका लंड बहुत काला था। वो हाथ में लेकर अपने 8 इंच लंड को फेटने लगे। फिर लंड कड़क हो गया।

“अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….चोदीये पापा!! अब मुझसे नही रहा जा रहा है” मेरी भाभी किसी रांड की तरह कहने लगी

पापा ने भाभी की टांग खोल दी। अपना लंड लेकर उनकी बुर पर घिसने लगे। भाभी की बुर बड़ी चिकनी थी। पापा अपने गुलाबी सुपाड़े को उनकी बुर के ओंठ पर घिस रहे थे। भाभी कामुक होती जा रही थी। काफी देर तक घिसते रहे। फिर लंड घुसा डाले। और जोर जोर से पेलने लगे। पापा जल्दी जल्दी नई भाभी को चोद रहे थे।

“पापा जी!! ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी….बहुत मजा आ रहा है” भाभी कहने लगी

“ले साली और ले!! आज अच्छे से चुदवा ले” मेरे पापा जी कहने लगे और गमागम भाभी की फूली मांसल चूत में धक्के देने लगे

भाभी को काफी मजा मिल रहा था। वो अपना मुंह खोल खोलकर आहे निकाल रही थी। मेरे पापा उनकी दोनों टांगो को खोलकर उनकी चूत की गपचिक गपचिक ठुकाई कर रहे थे। पापा का मोटा लंड भाभी की चूत की रसीली गली में सटर सटर फिसल रहा था।

“बहु!! तेरी बुर का जवाब नही!! …उ उ उ उ उ……” पापा बोल रहे थे।

वो भाभी की दोनों टांग उठाकर दनादन चोदन कार्यक्रम कर रहे थे। भाभी जोश में आकर तकिया को मुंह में लगाकर चबाने लगी। “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ…उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ….” की तेज आवाजे मेरी नई वाली भाभी निकाल रही थी। मेरे 64 वर्षीय पापा ने उनको 18 मिनट जल्दी जल्दी चोद लिया। फिर हाफ्ने लगे। लंड भाभी की बुर से निकाल लिया। भाभी पूरे बिस्तर पर मचलने लगी। वो लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी। जैसी हाफ रही थी। वो फिर पापा की तरफ देखने लगी। पापा की आँखों में सिर्फ और सिर्फ कामवासना थी।

“बहू!! तेरी बुर अब चाटूंगा। पैर खोल” पापा बोले

भाभी ने फिर से पैर खोल दिए। मेरे पापा जी उनकी रसीली चूत का दीदार करने लगे। फिर किसी कुत्ते की तरह जीभ निकाल निकालकर चाटने लगे। मैंने आपको बताया की भाभी अभी कच्ची कली थी। भरपूर जवान थी। इसलिए उनकी बुर भी कुछ कम हसीन नही थी। पापा जी मजे लेकर बुर चाटने लगे। भाभी सेक्सी होकर “ओहह्ह्ह….अह्हह्हह…अई..अई. .अई… उ उ उ उ उ…” की आवाजे निकालने लगी। उनकी चूत के दोनों लब लाल लाल थे। पापा की गुलाबी जीभ उनकी बुर के गुलाबी लबो को चूस चाट रही थी। इस तरह से उनको पापा ने दूसरी बार गर्म कर दिया।

““आआआअह्हह्हह…..चोद डालो ससुर जी…..देर न करो” नई वाली भाभी कहने लगी

“चल रंडी!! कुतिया बन जल्दी से” मेरे पापा बोले

फिर पीछे आ गये। अपने 8 इंच लंड को फिर से मुठ देने लगे। कुछ सेकंड में उनका लंड पहलवान जैसा हो गया था। लंड की एक एक नस तन गयी थी। कितना खूंखार और डरावना दिख रहा था। फिर कुतिया वाली पोजीशन में पीछे से भाभी की बुर में घुसा दिया और धकाधक पेलने लगे। कुछ देर में तेज तेज इंजन चलाने लगे। इस बार भी जल्दी जल्दी अपने खूंखार लंड को भाभी की नई नवेली बुर में दौड़ाने लगे और भाभी की चींखे निकलवा दी। उनको अच्छे से कुतिया बनाकर चोद डाला। अब पापा जी का माल झड़ने वाला था।

“बहु!! अब झड़ जाउंगा!! …उ उ उ उ उ……बोलो किधर माल निकालू” पापा जी बोले

“मेरे मुंह में माल झाड दीजिये” मेरी चुदक्कड भाभी बोली

मेरे 64 साल के उम्रदराज पापा ने जल्दी से लौड़ा उनकी चुद्दी से खींचा और भाभी के मुंह की तरफ चले गये। भाभी जी अपना मुंह खोल दी। पापा जी लंड को हाथ से पकड़कर फेटने लगे। फिर ……अअअअअ आआआआ…बोलते हुए भाभी के मुंह पर झड़ गये। उनका लंड माल की पिचकारी छोड़ने लगा। भाभी के पूरे मुंह पर पिचकारी चली गयी। मुंह में जो माल गया उसे को किसी रंडी की तरह चाट गयी और निगल गयी। नई वाली भाभी को चोदकर मेरे पापा चले गये। वो कमरे से बाहर आये। मेरे शिव भैया और मैं बाहर वेट कर रहे थे।

“शिव बेटा!! तेरी बीबी मस्त माल है!! मुझे उसकी चूत चोदकर बड़ा मजा आया है। अब तुम कमरे में चले जाओ। देखो चेतन को भी याद से भेज देना” पापा बोले

“जी पापा जी” शिव भैया बोले

वो कमरे में चले गये और दरवाजा बंद कर दिया। अब मैं क्या करता। मैं अपनी बारी का इंतजार करने लगा। जब भैया अंदर गये तो नई वाली भाभी नंग धडंग बिस्तर पर लेती हुई थी। दोनों हाथ पैर खोलकर लेती हुई थी। उनकी चूत चुद चुकी थी और पापा का माल अब भी उनकी बुर में भरा हुआ था।

“आओ पति जी” भाभी बोली

“मेरे पापा ने तुमको चोदा??” भैया बोले

“हाँ!! आपके पापा तो गबरू जवान की तरह ठुकाई करते है। मेरी तो एक एक हड्डी उन्होंने चटका दी” भाभी जी बोली

उसके बाद शिव भैया मेरी भाभी को चूमने चाटने लगे। नंगे हो गये, फिर वो उनको बाहों में लेकर प्यार करने लगे। वो भी जाकर भाभी के बदन पर लेट गये और उनके सेक्सी रसेदार लबो को चूसने लगे। लिप लोक होकर किस करने लगे। कुछ देर में दोनों का मौसम बन गया।

“बीबी!! आओ मेरी लंड चुसाई कर दो” शिव भैया भाभी ने बोले और बेड पर लेट गये। मेरी सेक्सी चुदक्कड भाभी बैठ गयी और भैया का लौड़ा फेटने लगी। शिव भैया का हथियार पापा ने भी लम्बा था। 9 इंची चाक़ू जैसा धारधार लंड था उनका। नई वाली भाभी ने भैया का लंड पकड़ लिया और जल्दी जल्दी मुठ देने लगी। अच्छे से खड़ा करने लगी। फिर झुक गई और मुंह में लेकर आइसक्रीम की तरह चूस रही थी। भैया का हथियार किसी मिसाइल की तरह था। भाभी मुठ दे देकर चूस रही थी। उनको काफी मजा आ रहा था। सिर को हिला हिलाकर चूस रही थी।

“….ओह्ह्ह्….अई…चूसो जानेमन!! और अच्छे से चूसो” शिव भैया कहने लगे

फिर भाभी भी और जोश में आ गयी और कायदे से चूसने लगी। वो हाथ से भैया की गोलियाँ दबा रही थी। फिर उसको भी मुंह में लेकर टॉफी की तरह चूस रही थी। कुछ देर बाद वो चुदने को रेडी थी।

“आओ जानेमन!! मेरे लंड की सवारी करो” शिव भैया बोले

वो बिस्तर पर सीधे लेट गये। भाभी उनकी कमर पर जाकर बैठ गयी। भैया का लंड पकड़कर अपनी कसी नई नवेली चूत में डालने लगी। फिर लंड अंदर तक घुस गया। अब भाभी उचक उचक कर खुद ही चुदाने लगी।

“और धक्के लगाओ जानेमन!! और तेज…” शिव भैया बोले

मेरी भाभी अब और तेज तेज धक्के लगाने लगी। वो शिव भैया के खूटे जैसे लंड पर उठ बैठ रही थी। जल्दी जल्दी चुदवा रही थी। दोनों मजे काट रहे थे। भैया का लंड किसी तेज धार चाक़ू की तरह भाभी की बुर को फाड़ रहा था। फिर शिव भैया भी जोश में आ गये। उन्होंने भाभी के दोनों मस्त मस्त चूतड़ पकड़ लिए और नीचे से चूत के छेद में धक्के देने लगे। मेरी भाभी “आआआअह्हह्हह…..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” करने लगी। पर अब तो मेरे भैया पूरे जोश में आ गये थे। वो 10 मिनट तक भाभी की कसी चूत को फाड़ते ही रहे और इतना चोदा की भाभी की अम्मा चुद गयी। फिर धक्के देते देते शिव भैया झड़ गये। फिर बाहर चले आये।

“जाओ चेतन!! अब तेरी बारी है। जाओ अपनी नई भाभी को अच्छे से खाओ जाकर” शिव भैया बोले

“ठीक है भैया” मैंने कहा

फिर अंदर चला गया। मेरी भाभी आज रंडी बन चुकी थी। कहने को उनकी शादी मेरे भैया से हुई थी। पर अब तक 2 मर्दों से चुदवा चुकी थी। तीसरा लंड अब खाने वाली थी। आज वो रंडी बन गयी थी। मुझे देखकर हंसने लगी।

“कैसे हो देवर जी??” वो कहने लगी

“अच्छा हूँ। आप बताओ” मैं बोला

“आओ मुझे चोद लो!!” नई वाली भाभी बोली

“मुझे तो आपकी गांड मारनी है” मैं बोला

वो जल्दी से घोड़ी बन गयी। उनकी गांड का छेद काफी चिकना दिख रहा था। कुछ देर मैं कामुक होकर उनका छेद देखता रहा। देखने में अनचुदी गांड दिख रही थी। मैं वासना में आकर जीभ लगा लगाकर चाटने लगा। मेरी भाभी जी “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” बोलने लगी। उनको भी पूरा मजा आ रहा था। मैं चाट चाटकर छेद को साफ़ कर दिया। फिर अपने 7 इंची लंड को किसी तरह घुसा डाला। जल्दी अंदर नही जा रहा था। फिर धीरे धीरे अपनी सगी भाभी की गांड मार ली। वो खूब कराही, खूब सिसकी लेती रही। पर मैं उनको घोड़ी बनाये रहा और उनकी कसी कुवारी गांड मारता रहा। फिर उसमे ही माल निकाल दिया। आज भी मेरी भाभी की चुदाई 3 3 मर्द करते है। वो ख़ुशी ख़ुशी पापा से, शिव भैया से और मुझसे अपने दोनों छेद चुदवा लेती है। क्यूंकि हमारे यहाँ यही रिवाज चलता है।

 

 

भाभी ने पैर मालिश के बहाने जबर्दस्ती संबंध बनाया

मेरा नाम राहुल है। उम्र बाईस साल। मैं दिल्ली के एक अच्छे कॉलेज में बी.कॉम फाइनल ईयर का छात्र हूँ। मेरे बड़े भाई अजय की शादी को तीन साल हो चुके हैं। उनकी पत्नी, यानी मेरी भाभी सिमरन, इस घर की सबसे आकर्षक औरत हैं। सिमरन भाभी की उम्र अट्ठाईस साल है, लेकिन उनकी हसीन अदाओं को देखकर कोई भी उन्हें पच्चीस से ज्यादा नहीं कह सकता। लंबे काले घने बाल, गोरी चिकनी त्वचा, गहरी कजरारी आँखें, भरी-भरी चूचियाँ जो हर साड़ी या कुर्ते में उभरकर आती हैं, पतली कमर और पीछे से देखते ही दिल धड़कने लगे वाली गोल-मटोल गांड। जब वो चलती हैं तो उनका बदन लहराता है, और जब वो मुस्कुराती हैं तो उनके गालों पर छोटे-छोटे गड्ढे पड़ जाते हैं।

भैया अजय एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर मैनेजर हैं। उनका काम ऐसा है कि हफ्ते में चार-पाँच दिन वो बाहर रहते हैं — कभी मुंबई, कभी बैंगलोर, कभी हैदराबाद। घर में ज्यादातर समय सिर्फ मैं और भाभी ही रहते हैं। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था। भाभी मुझे बहुत प्यार से “राहुल बेटा” कहकर बुलाती थीं, अच्छा खाना बनाती थीं, मेरी पढ़ाई का ध्यान रखती थीं। लेकिन पिछले छह-सात महीनों से उनका व्यवहार अचानक बदल गया था।

अब वो मेरे पास ज्यादा से ज्यादा बैठने लगी थीं। टीवी देखते समय मेरे कंधे पर सिर रख देतीं, कभी मेरे बालों में हाथ फेरतीं, कभी बात करते समय मेरी जाँघ पर हाथ रख देतीं। मैं समझ गया था कि भाभी में कुछ बदलाव आ रहा है, लेकिन मैं चुप रहता था। वो मेरी भाभी थीं, भाई की बीवी। सोच-सोचकर मैं खुद को रोक लेता था।
उस दिन शनिवार था। भैया सुबह सात बजे ही मुंबई के लिए फ्लाइट पकड़ चुके थे। उन्होंने कहा था कि वो रात दस बजे के बाद लौटेंगे। घर में सिर्फ मैं और भाभी थे। मैं लिविंग रूम के सोफे पर लेटा हुआ मोबाइल पर क्रिकेट मैच देख रहा था। भाभी रसोई से निकलकर आईं। उन्होंने हल्की क्रीम कलर की साड़ी पहनी हुई थी। साड़ी का ब्लाउज काफी टाइट था, जिसकी वजह से उनकी भारी चूचियाँ साफ उभरी हुई थीं। पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, जिससे उनकी नाभि और पेट की गोरी त्वचा झाँक रही थी।

“राहुल, मेरे पैर बहुत दर्द कर रहे हैं बेटा,” भाभी ने नरम और थोड़ी शरमाती हुई आवाज में कहा। “पूरे दिन खड़ी-खड़ी काम किया है। थोड़ा मालिश कर दोगे?”

मैं चौंक गया। “भाभी… मैं… कैसे करूँगा?”

“अरे पागल लड़के, बस पैर ही तो हैं। तू मेरा छोटा देवर है, भाई जैसा। शर्मा क्यों रहा है?” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा और सोफे पर आराम से लेट गईं। अपनी साड़ी को थोड़ा ऊपर सरकाकर दोनों पैर मेरी तरफ फैला दिए। उनकी पतली पिंडलियाँ और गोरी जाँघें आधी नंगी हो गईं।

मैं हिचकिचाते हुए उनके पैरों के पास बैठ गया। उनके पैर मेरे हाथों में थे — नरम, मुलायम, हल्की-हल्की महक वाली। मैंने धीरे-धीरे उनकी पिंडलियों की मालिश शुरू कर दी। भाभी आँखें बंद करके लेटी रहीं और हल्की सिसकारियाँ निकालने लगीं।

“आह… राहुल… बहुत अच्छा लग रहा है… हाथों में जादू है तेरे… और ऊपर करो… जाँघों तक…”

उनकी आवाज में एक अजीब-सी मिठास और कंपन था। मैंने हिम्मत करके उनकी जाँघों तक मालिश शुरू कर दी। साड़ी और ऊपर सरक गई। अब उनकी जाँघों का बड़ा हिस्सा मेरे सामने था। मेरे हाथ काँप रहे थे। भाभी ने अचानक मेरे एक हाथ को पकड़ लिया और उसे अपनी जाँघों के और अंदर ले गईं।

“भाभी… ये क्या कर रही हैं?” मैं घबरा गया।

“चुप कर राहुल। आज बहुत दिनों से मन कर रहा था। भैया तो महीने में एक-दो बार भी घर नहीं आ पाते। जब आते हैं तो थके-हारे सो जाते हैं। मुझे भी तो इंसान हूँ ना… प्यास लगती है…” उन्होंने मेरी आँखों में गहरी नजर डालते हुए कहा।

उनकी साँसें अब तेज हो चुकी थीं। उन्होंने खुद अपना पल्लू सरका दिया। ब्लाउज के ऊपर से उनकी चूचियाँ उभर रही थीं। मैं स्तब्ध बैठा था। भाभी ने मेरे दूसरे हाथ को भी पकड़कर अपने ब्लाउज पर रख दिया।

“दबा इन्हें… जोर से… मुझे बहुत अच्छा लगेगा।”

मेरा दिमाग लड़ रहा था, लेकिन शरीर नहीं मान रहा था। मैंने उनके ब्लाउज के हुक खोल दिए। ब्रा में लिपटी उनकी भारी, गोल चूचियाँ बाहर आ गईं। गुलाबी निप्पल्स पहले से ही खड़े हो चुके थे। मैंने दोनों हाथों से उन्हें दबाया। भाभी की आह निकल गई।

“आह… हाँ राहुल… और जोर से… चूस ले इन्हें… सालों से किसी ने ठीक से नहीं छुआ…”

मैं झुक गया और एक चूची मुंह में ले ली। चूसने लगा। भाभी मेरे बालों में हाथ फेर रही थीं और कराह रही थीं। “राहुल… तू बहुत अच्छा है… मुझे आज पूरी तरह चोद दे… मैं तेरी हूँ आज…”

उन्होंने मेरी शर्ट उतार दी और मेरे पैंट का बटन खोल दिया। मेरा लंड पहले से ही पूरा सख्त हो चुका था। भाभी ने उसे बाहर निकाला और मुट्ठी में कसकर पकड़ लिया।

“वाह… कितना मोटा और लंबा है तेरा लंड… भैया का तो आधा भी नहीं है। आज से ये मेरी चूत का मालिक है।”

भाभी ने मुझे सोफे पर लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गईं। उन्होंने अपनी साड़ी और पेटीकोट पूरी तरह ऊपर कर दिया। उनकी पैंटी गीली हो चुकी थी। उन्होंने पैंटी उतारी। उनकी चूत साफ, गुलाबी और पहले से ही रस से तर थी। उन्होंने मेरा लंड अपनी चूत पर रखा और धीरे-धीरे बैठने लगीं।

“आह… राहुल… कितना मोटा है… मेरी चूत फाड़ रहा है… धीरे… आह…”

धीरे-धीरे पूरा लंड उनकी चूत में समा गया। भाभी की आँखें बंद हो गईं। वो ऊपर-नीचे होने लगीं। उनकी चूचियाँ जोर-जोर से उछल रही थीं। मैंने उन्हें दोनों हाथों से पकड़कर दबाया और चूसा।

“हाँ… और जोर से चोद मुझे… राहुल… भाभी की चूत को फाड़ डाल… आह… बहुत दिनों बाद मिला है असली मर्द…”

मैंने उन्हें पलट दिया। अब भाभी कुत्ते की तरह घुटनों और हाथों के बल थीं। उनकी गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने उनकी गांड पकड़ी और पीछे से जोर से लंड अंदर डाला।

“आआह… फट गई… लेकिन मजा आ रहा है… और तेज… चोदो मुझे… जोर-जोर से…”

हर धक्के पर भाभी की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। फच-फच की आवाज के साथ उनका बदन हिल रहा था। मैं उनकी कमर पकड़कर तेज-तेज धक्के मार रहा था। भाभी कई बार झड़ चुकी थीं। उनकी चूत मेरे लंड को निचोड़ रही थी।

रात भर हमने कई बार सेक्स किया। पहले सोफे पर, फिर फर्श पर, फिर उनके बेडरूम में। भाभी ने मुझे तीन बार पानी छोड़ने दिया — पहली बार उनकी चूत में, दूसरी बार उनके मुंह में और तीसरी बार उनकी चूचियों और पेट पर। हर बार वो मुझे और उकसातीं — “और दो… और पानी दो… मेरी चूत भिगो दो…”

सुबह के चार बज चुके थे। हम दोनों थककर बेड पर लेटे थे। भाभी मेरे सीने पर सिर रखे लेटी थीं। उनकी उँगलियाँ मेरे लंड को हल्के-हल्के सहला रही थीं। उन्होंने धीरे से कहा,

“राहुल, आज जो हुआ वो हमारा राज रहेगा। भैया को कभी मत बताना। लेकिन जब भी वो बाहर जाएगा, तू मुझे इसी तरह चोदना। मैं अब तेरे बिना नहीं रह सकती। पैर मालिश तो बस बहाना था… असल में मुझे तेरे लंड की बहुत जरूरत थी।”

मैंने उनके माथे को चूमा और बोला, “जितनी बार चाहो भाभी… तुम्हारी चूत अब मेरी है। जब मन करे, बस कह देना — पैर दर्द कर रहे हैं।”

उस दिन के बाद भाभी के बहाने बदल गए। कभी “पैर दर्द कर रहा है”, कभी “कमर में दर्द है”, कभी “आज ब्लाउज बहुत टाइट हो गया है, खोल दो”, कभी “रात को नींद नहीं आ रही, पास सो जा”। और हर बहाने के पीछे एक ही मकसद था — मुझे जबर्दस्ती अपने पास बुलाकर चुदवाना।

कभी-कभी वो मुझे रसोई में खड़े-खड़े चोदतीं, कभी बालकनी में, कभी बाथरूम में। उनकी भूख दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी। मैं भी अब उनका दीवाना हो चुका था। भाभी की चूत, उनकी चूचियाँ, उनकी गांड — सब कुछ मुझे पागल कर देता था।

ये कहानी अभी भी जारी है। भैया जब भी बाहर जाते हैं, भाभी मुझे मैसेज करती हैं — “राहुल, जल्दी आ। पैर बहुत दर्द कर रहे हैं।” और मैं जान जाता हूँ कि आज फिर भाभी की चूत मेरे मोटे लंड की राह देख रही है।

रश्मी की ब्रा-पेंटी उतार के जोरदार चुदाई

दोस्तों! मैं राजीव दिल्ली का लड़का हूँ। जिंदगी में कुछ पल ऐसे आ जाते हैं जो सब कुछ बदल देते हैं। वो पल मेरी जिंदगी को पहले से बिल्कुल अलग बना गए। आज मैं आपको अपनी उस अनुभव की पूरी कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जो मुझे दुनिया की सबसे गहरी और मीठी खुशी दे गई। ये सब शुरू हुआ हमारे मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के पहले दिन से।

क्लास शुरू होने से पहले मैं और मेरे हॉस्टल वाले दोस्त कैंपस घूमने निकले। पूरा कैंपस देखने के बाद हम मेन गेट के पास बैठ गए। नजरें उन लड़कियों पर घूम रही थीं जो कॉलेज आ रही थीं। हर कोई अपनी जगह अच्छी थी, लेकिन अचानक एक रिक्शा गेट पर रुका। उसमें से एक लड़की उतरी – नीली स्किन टाइट जींस और टाइट फिट लाल स्लीवलेस टी-शर्ट पहने। उसकी पीठ मेरी तरफ थी। लंबे खुल्ले बाल, कमर पतली, हिप्स गोल-गोल – फिगर करीब 34-32-35। रिक्शा वाले को पैसे देकर वो मुड़ी। जैसे बादलों भरे आसमान में अचानक पूरा चाँद निकल आए। चेहरा इतना प्यारा – भूरी आँखें, तेज नाक, रसीले होंठ। गोरा रंग, गुलाब की कली जैसी नाजुक सुंदरता। मैं उसे घूरता रह गया। उसकी छातियाँ गोल और भरी-भरी, टी-शर्ट और जींस में ब्रा और पैंटी की लाइन साफ दिख रही थी। जब वो चलने लगी तो उसके नितंबों का लहराता हुआ हिलना… वाह! मेरी जाँघों के बीच का सामान तुरंत खड़ा हो गया और सलाम ठोकने लगा। वो भीड़ में गायब हो गई, लेकिन मेरा दिल उसके उन गोल नितंबों के बीच खो गया।

लेक्चर की घंटी बजी। हम क्लास में घुसे। देखा तो वही लड़की हमारी क्लास में बैठी थी। नाम था रश्मि। मुंबई से आई थी। हमारे नाम के पहले अक्षर एक जैसे थे, इसलिए हम एक ही असाइनमेंट ग्रुप में थे। ग्रुप में दो और लड़कियाँ और एक लड़का था। कुछ ही दिनों में हम पाँचों अच्छे दोस्त बन गए। साथ में शहर घूमते, मस्ती करते। रश्मि बहुत एक्स्ट्रोवर्ट थी – हमेशा कॉलेज के किसी न किसी फंक्शन में व्यस्त। पढ़ाई में भी तेज थी, इसलिए ग्रुप की लीडर बन गई। उसके साथ समय बिताना मुझे हमेशा गर्म और एनर्जेटिक महसूस होता। उसका बदन मुझे हमेशा खींचता। मौका मिलते ही मैं उसके ब्लाउज में झाँकता, “अनजाने” में उसकी छातियों या पीठ को छू लेता। वो कभी गुस्सा नहीं करती। बस प्यारी सी डिंपल मुस्कान दे देती।

अन्युअल गेट टूगेदर से एक दिन पहले की बात है। रश्मि दौड़ती हुई मेरे पास आई और बोली, “राजीव, ग्रुप असाइनमेंट घर भूल आई हूँ। आज ही सबमिट करना है।” वो अपने फ्लैट में रहती थी, कॉलेज के पास ही, अपनी फ्रेंड साक्षी के साथ। मैंने कहा, “साक्षी को फोन करके मँगवा लो।” उसने बताया कि साक्षी घर चली गई है फैमिली फंक्शन के लिए, और वो खुद फैशन शो ऑर्गनाइज करने में बिजी है। आखिर मैं मान गया। उसने चाबी दे दी। मैं बाइक लेकर उसके फ्लैट पहुँच गया। पहले भी ग्रुप वर्क के लिए आया था, इसलिए फ्लैट की सेटिंग पता थी – टू बीएचके, हल्के रंग की दीवारें, आरामदायक।

उसके रूम में घुसा। असाइनमेंट टेबल पर रखा था। उठाया और जाने लगा, तभी बेड के नीचे बाल्टी नजर आई। उसमें कुछ कपड़े थे। निकाला तो – काला नाइट सूट, सफेद ब्रा और गुलाबी पैंटी। शायद कल की। मेरा दिल जोर से धड़का। मुझे लड़कियों के अंडरगारमेंट्स का हमेशा से क्रेज रहा है। ब्रा उठाई, चूमने लगा। पसीने की हल्की सी महक। फिर पैंटी उठाई – उसकी गंध इतनी कामुक कि मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया। अचानक डोर बेल बजी। मैंने सब बाल्टी में रख दिया, वैसा ही छोड़ दिया और दरवाजा खोलने गया।

रश्मि खड़ी थी। “क्या हुआ? क्यों वापस आ गई?” पूछा मैंने। बोली, “लेक्चर कैंसल हो गया। और फैशन शो का रिहर्सल भी ट्रांसफॉर्मर खराब होने से रुक गया।” हम लिविंग रूम के सोफे पर बैठ गए। वो थकी हुई लग रही थी। आँखें बंद करके आराम करने लगी। उसकी आर्मपिट्स पसीने से पूरी भीगी हुई थीं। टी-शर्ट से ब्रा का एक स्ट्रैप बाहर झाँक रहा था। मैं उसकी छातियों को घूर रहा था। बीच में छोटे-छोटे उभार साफ दिख रहे थे।

थोड़ी देर बाद उसने आँखें खोलीं और मुस्कुराते हुए बोली, “राजीव, तू बैठ यहाँ। मैं फ्रेश हो जाती हूँ और फ्रिज से कुछ फ्रूट्स ले आती हूँ।” वो बेडरूम में चली गई। मैं टीवी ऑन कर दिया। रिमोट खराब चल रहा था। उसी बीच बाथरूम का दरवाजा बंद हुआ और हल्की सी “प्श्श्श्श्श” की आवाज आने लगी। वो पेशाब कर रही थी। वो आवाज सुनकर मेरा लंड और भी तन गया। थोड़ी देर बाद वो बाहर आई और बाथरूम में नहाने चली गई। कुछ मिनट बाद लिविंग रूम में आई तो देखा – गहरे नीले नाइट सूट में, बाल खुल्ले, कंधों पर पानी की बूँदें चमक रही थीं। हाथ में फ्रूट्स की प्लेट। पास बैठ गई और मुझे ऑफर किया।

मैं फ्रूट्स खाते-खाते चैनल बदलने लगा। अचानक रिमोट पूरी तरह बंद। उसी चैनल पर एक बहुत हॉट रोमांटिक सीन चल रहा था – हीरोइन और हीरो गहरे प्यार में, एक-दूसरे को छू रहे थे, किस कर रहे थे, कपड़े उतर रहे थे। मैं शर्म से चैनल बदलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन रिमोट काम नहीं कर रहा था। मैं उठा कि टीवी के पास जाकर बदलूँ। रश्मि ने मेरा हाथ पकड़ लिया और नरम स्वर में बोली, “अरे राजीव, इतना घबरा क्यों रहा है? हम एक ही उम्र के हैं… हमारी इच्छाएँ भी एक जैसी हैं। इसमें शर्माने वाली क्या बात है?” उसकी आवाज में इतनी हिम्मत थी कि मैं वापस बैठ गया। हम दोनों ने पूरा सीन देखा। मेरा लंड पैंट में तंबू बना चुका था। रश्मि भी उत्तेजित हो गई थी – होंठ थोड़े खुले, पैर की उँगलियाँ बार-बार हिल रही थीं।

मैंने हिम्मत जुटाई और पूछ लिया, “रश्मि… तूने पहले कभी… मतलब… किया है?” वो शरमाते हुए बोली, “क्या? समझी नहीं।” मैंने साफ कहा, “किसी से फक हुआ है पहले?” वो आँखें नीची करके बोली, “नहीं… कभी नहीं।” मैंने आगे पूछा, “इंटरकोर्स के बारे में कितना जानती है?” उसने कहा, “बुक्स पढ़ी हैं… सेक्स और प्रेग्नेंसी वाली।” मैंने कहा, “लेकिन प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस?” वो बोली, “नहीं राजीव। शादी से पहले कैसे? और एड्स का डर भी है।” मैं हैरान था कि कॉलेज में इतनी मॉडर्न लगने वाली लड़की के मन में इतने गलत खयाल हैं।

मैंने धीरे से समझाया, “देख रश्मि, सिर्फ किताबी ज्ञान से काम नहीं चलेगा। प्रैक्टिकल पता न हो तो शादी में पार्टनर को खुश नहीं रख पाएगी। अगर सावधानी बरती जाए – कंडोम वगैरह – तो कोई खतरा भी नहीं।” वो सोचने लगी। फिर बोली, “तू सही कह रहा है… लेकिन कौन देगा मुझे ये प्रैक्टिकल नॉलेज? और अगर किसी को पता चल गया तो?” मैंने उसका हाथ पकड़ा, आँखों में देखा और बोली, “मैं दूँगा… अगर तुझे मुझ पर भरोसा है तो एक मौका दे।” वो मुस्कुराई, थोड़ा लाल हो गई और धीरे से बोली, “ओके…”

मैंने उसे अपनी बाहों में खींच लिया। उसने सिर मेरी छाती पर टिका दिया। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “रश्मि डार्लिंग, सबसे पहली बात – धीरे-धीरे, बिना जल्दबाजी के। तू यहीं बैठ। मैं कंडोम ले आता हूँ, फिर शुरू करते हैं।” वो सहमति में सिर हिला दी। मैं पास की मेडिकल शॉप से कंडोम और एक्स्ट्रा सेफ्टी के लिए टैबलेट्स ले आया।

लौटा तो रश्मि ने दरवाजा खोला। देखकर मैं हैरान रह गया – पीली साड़ी, स्लीवलेस ब्लाउज, माथे पर लाल बिंदी। इंडियन लुक में उसे पहले कभी नहीं देखा था। अंदर घुसा, दरवाजा लॉक किया, उसे जोर से अपनी बाहों में भर लिया और बोला, “आज स्वर्ग में रंभा भी तुझे देखकर जल रही होगी!” उसकी छातियाँ मेरी छाती से सटी हुई थीं। मैंने उसे लंबा, गहरा किस किया। वो साँस लेते हुए बोली, “हनी… मैं तेरी हूँ। जो करना है कर…”

मैंने उसे गोद में उठाया, बेडरूम ले गया। बेड पर लिटाया और उसके ऊपर लेट गया। कपड़ों के ऊपर से ही उसके हर हिस्से को किस करने लगा – पैरों की उँगलियों से शुरू करके घुटनों, जाँघों, कमर, पेट, छातियों, आर्मपिट्स, कंधों, गर्दन, गालों, होंठों और माथे तक। वो हल्के-हल्के कराहने लगी, “आह्ह्ह… राजीव…” उसका बदन गर्म हो रहा था, साँसें तेज। मैंने उसकी साड़ी खोल दी। अब वो पीली पेटीकोट और ब्लाउज में थी। ब्लाउज के हुक खोले, उतारा। अंदर ब्लैक नेटेड ब्रा। दोनों हाथों से ब्रा के ऊपर से ही छातियों को दबाने लगा। उसकी कराह बढ़ गई। फिर पेटीकोट का नादा खोला, नीचे सरका दिया। अब वो सिर्फ ब्लैक पैंटी में थी।

अब वो भी पूरी तरह शामिल हो गई। मेरी शर्ट उतारी, पैंट का हुक खोलकर नीचे सरका दिया। मैं अंडरवियर में, वो ब्रा-पैंटी में। मैंने ब्रा का हुक खोला। उसकी गुलाबी निप्पल्स वाली भरी-भरी छातियाँ बाहर आ गईं। मैंने उन्हें चूसना शुरू किया – जोर-जोर से, जीभ घुमाते हुए। वो मेरे बालों में उँगलियाँ फेर रही थी, दूसरा हाथ मेरे अंडरवियर में डालकर मेरे लंड को सहला रही थी। छातियाँ लाल और गर्म हो गईं।

फिर मैंने उसकी पैंटी नीचे सरका दी। उसकी साफ शेव्ड, प्यारी सी चूत सामने थी। वो शरमा कर दोनों हाथों से चेहरा छुपा लिया। मैंने हाथ हटाए, प्यार से चूम लिया। उँगलियों से धीरे-धीरे उसकी चूत को सहलाने लगा। कुछ ही देर में वो गीली हो गई। मैंने एक उँगली अंदर डाली। वो कराह उठी, “आह्ह्ह… राजीव… और गहरा…” अब वो पूरी तरह तैयार थी।

मैंने अपना अंडरवियर उतारा। मेरा लंड पूरा खड़ा। वो उसे देखकर मुस्कुराई, थोड़ा शरमाई, लेकिन डरी नहीं। मैंने कंडोम चढ़ाया। उसे पीठ के बल लिटाया, दोनों जाँघें उठाईं, घुटनों के बल बैठ गया। उसने खुद अपना हाथ बढ़ाया, मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत के मुहाने पर रख दिया। मैंने धीरे से, लेकिन मजबूती से धक्का दिया। वो आह भरकर बोली, “आह्ह्ह… राजीव… अंदर आ गया…” कोई दर्द नहीं, सिर्फ गर्मी और खुशी की लहर। मैं रुक गया, उसे समय दिया। फिर धीरे-धीरे स्टार्ट किया। वो भी कमर हिलाने लगी।

“हाँ… और तेज… राजीव… बहुत अच्छा लग रहा है…” उसकी छातियाँ लहरा रही थीं। मैंने रफ्तार बढ़ाई। २०-२५ स्टोक्स के बाद मैं झड़ गया। कंडोम में पूरा भर गया। मैं उसके ऊपर ही लेट गया। कुछ देर बाद निकाला, कंडोम फेंका और उसके पास लेट गया। वो मुझे जकड़कर बोली, “राजीव… आज तूने मुझे जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी दे दी। थैंक यू डार्लिंग… तू मेरा सेक्स गुरु है!” मैंने उसके होंठ चूमे और बोला, “स्वीटहार्ट, तेरे लिए कुछ भी!”

उसके बाद हम दोनों थककर सो गए।

इस घटना के बाद रश्मि कॉलेज में मुझे “गुरु” कहकर पुकारने लगी। कोई पूछता तो हम एक-दूसरे को देखकर शरारती मुस्कान देते। उसके बाद हमने उसके फ्लैट में कई पोजीशन्स में बार-बार किया – कभी मिशनरी, कभी डॉगी, कभी वो ऊपर। कभी कॉलेज की लेडीज बाथरूम में, कभी बस में छुप-छुपकर, कभी जंगल में ट्रिप के दौरान। जब रश्मि नहीं होती तो उसकी रूममेट साक्षी के साथ भी मजा लेता। जम्मू जाता तो पड़ोस की आंटी मनीषा और स्कूल फ्रेंड गौरी को भी नहीं छोड़ता।

भाभी की चिकनी चूत चाटी

दोस्तों में राहुल और में दिल्ली का रहने वाला हूँ और मेरी हाईट 5.8 इंच है और मेरे लंड का साईज़ 7 इंच है और अब आप सभी लोगों का ज्यादा समय खराब ना करते हुए सीधा अपनी आज की कहानी पर आता हूँ। सभी भाभीयों से अनुरोध है कि अगर वो चाहे तो अपनी कामुक चूत में उंगली डाल सकती है।

दोस्तों यह बात आज से एक महीने पहले की है.. में वेस्ट दिल्ली में अकेला रहता हूँ और जैसा कि मैंने आप सभी को पहले बताया था कि में एक फार्मसिस्ट हूँ..
लेकिन सितम्बर की शुरुआत में दिल्ली में डेंगू के केस कुछ ज्यादा आने लगे थे.. तो हमारे सामने एक भाभी जो अपने पति के साथ रहती है और भाभी थोड़ी मोटी है.. लेकिन मुझे मोटी औरते बहुत पसंद है। उनके फिगर का साईज़ 36-30-36 है। दोस्तों मेरी भाभी से कभी ज्यादा बात नहीं हुई.. लेकिन हाँ जब में जिम से आकर शर्ट उतारकर अपनी बालकनी में बैठकर थोड़ा आराम करता हूँ.. तो भाभी मुझे अक्सर स्माईल देती और कई बार ऐसे भी बात हो जाती है कि काम कैसा चल रहा है। उनके पति मार्केटिंग में है और उन लोगों की शादी को शायद 4 साल हो गये थे.. लेकिन उनकी कोई औलाद नहीं है। फिर एक दिन रात के कुछ 11 बजे थे.. में एक इंग्लीश फिल्म लगाकर देख रहा था और तभी मेरे घर की बेल बजी। अरे दोस्तों में आप सभी को अपनी मस्त सेक्सी भाभी का नाम तो बताना ही भूल गया.. उनका नाम स्वाती है।

भाभी : हैल्लो राहुल.. क्या मैंने तुम्हे परेशान तो नहीं किया?

में : भाभी नहीं.. ऐसा कुछ नहीं है.. लेकिन आप इतनी रात को कैसे? क्यों सब ठीक तो है ना?

भाभी : नहीं राहुल तुम्हारे भैया को बहुत तेज़ बुखार है और अब मुझे समझ नहीं आ रहा है कि में क्या करूं.. प्लीज तुम आकर देखो ना।

में : ठीक है भाभी.. में अभी आता हूँ।

फिर मैंने जल्दी से शर्ट पहनी और भाभी के साथ चल दिया.. सीड़ी से उतरते हुए भाभी की गांड क्या मस्त लग रही थी.. मेरा तो मन कर रहा था कि अभी इसे अपने कमरे पर ले जाकर चोद दूँ। यह बात सोचकर मेरा लंड पजामे में ही एकदम तनकर खड़ा हो गया और में अपनी शर्ट के बटन बंद करते हुए जा रहा था। फिर भाभी अंधेरे की वजह से एकदम थोड़ा रुकी। मैंने ध्यान नहीं दिया और मेरा लंड एकदम सीधा उनकी गांड के ऊपर जाकर लगा और मैंने डर के मारे भाभी को सॉरी बोला। फिर उन्होंने मेरी तरफ देखकर बोला कि कोई बात नहीं.. वैसे गलती तो मेरी है.. क्योंकि में खुद ही एकदम से रुक गई थी और इतने में उनका घर आ गया। फिर मैंने भैया को देखा.. तो उन्हे बहुत तेज बुखार था और मेरी हॉस्पिटल में बहुत अच्छी जान पहचान थी.. इसलिए मैंने उनको एक बेड दिलवा दिया.. हॉस्पिटल में हमे एक बजे गए और उन्होंने हॉस्पिटल में अपने भाई को बुला लिया। उनके भाई ने बोला कि आप सुबह आ जाना और फिर में चला जाऊंगा.. उसके बाद में और स्वाती भाभी घर के लिए निकल लिए।

भाभी : धन्यवाद राहुल।

में : अरे भाभी इसमें धन्यवाद की क्या ज़रूरत है.. एक अच्छा पड़ोसी ही दूसरे पड़ोसी के काम आता है।

भाभी : ठीक है।

में : शायद भैया को डेंगू हो सकता है।

भाभी : हाँ.. मुझे भी ऐसा ही लग रहा है।

में : भैया का ब्लड ग्रूप क्या है?

भाभी : बी+

में : चलो मेरा भी यही है.. अगर ब्लड चाहिए होगा.. तो में दे दूँगा और इतने में हमारा घर आ गया।

भाभी : यार राहुल क्या तुम मेरा एक काम करोगे?

में : जी हाँ भाभी बोलिए।

भाभी : यार मुझे अकेले में बहुत डर लगेगा.. क्या आप आज की रात मेरे यहाँ पर सो सकते हो?

में : (मेरा लंड तो यह बात सुनकर ही खड़ा हो गया) मैंने बोला कि लेकिन भाभी कोई हमे देख लेगा तो?

भाभी : यार आज हमारी मंजिल पर कोई भी नहीं है।

में : ठीक है भाभी अगर आप कहती है.. तो में एक रात सो जाता हूँ।

भाभी : धन्यवाद राहुल बस आज रात की बात है.. कल से में अपनी छोटी बहन को बुला लूँगी।

में : हाँ ठीक है.. भाभी।

फिर हमने गाड़ी को एक साईड लगाई और हम उनके घर में गये.. भाभी ने अपने घर को बहुत अच्छा सजाया हुआ था। भाभी अपने बेडरूम में जाकर कपड़े चेंज करने लगी और में टी.वी. चालू करके देखने लगा और जब भाभी अपनी एक मस्त मेक्सी पहनकर बाहर आई.. तो वो क्या मस्त माल लग रही थी? उनकी जांघो तक काले कलर की मेक्सी में उनके 36 इंच के बूब्स बहुत हॉट, सेक्सी लग रहे थे और मेरा तो मन कर रहा था कि इन्हे आज चूसकर सारा रस पी जाऊँ। फिर शायद भाभी ने मुझे उनके बूब्स को देखते हुए देख लिया और वो थोड़ा अजीब सा महसूस करने लगी।

भाभी : तुमने अपनी गर्लफ्रेंड को तो नहीं बताया कि आज तुम्हे यहाँ पर सोना है?

में : नहीं भाभी उसे पता चलेगा.. तो वो पता नहीं क्या सोचेगी?

भाभी : वो क्या सोचेगी?

में : यही कि में एक किसी खूबसूरत लड़की के साथ आज पूरी रात रहूँगा।

भाभी : ( हंसने लगी ) क्या में सुंदर.. लेकिन में तुम्हे कहाँ से सुंदर लगती हूँ.. चलो यार अब मज़ाक मत करो?

में : अरे भाभी जो अभी आप पहनकर हो.. इन कपड़ो को पहनकर आप कभी भैया को दिखना। फिर वो आपको बताएँगे कि आप कितनी सुंदर हो?

भाभी : हाँ हाँ ठीक है.. चलो अब तुम ही बता दो कि में कितनी सुंदर लग रही हूँ।

में : एकदम मस्त माल.. मेरा तो मन कर रहा है कि..

भाभी : शैतान तुम बहुत बड़े हो गये हो.. मुझे अब लगता है कि आंटी से बात करके बोलना पड़ेगा कि इस लड़के की शादी करवा दो।

में : हाँ बोल दो और अपना हुलिया भी बता देना और उन्हे कह देना कि उसे ऐसी लड़की पसंद है।

भाभी : अच्छा.. तो तुम्हे मुझमे क्या अच्छा लगता है?

में : नहीं आप बुरा मान जाओगे।

भाभी : अरे नहीं.. बताओ ना।

में : नहीं आप बुरा मान जाओगे।

भाभी : अरे नहीं तुम्हारी कसम.. बताओ ना।

में : जब आप मेरी सीड़ियों से उतर रही थी और मेरा लंड आपसे जा लगा था.. मुझे आपकी वो बहुत मस्त लगती है। भाभी थोड़ा शरमाते हुए अच्छा जी.. अब तो सच में बहुत बड़ा हो गया है और मज़ाक मज़ाक में उन्होंने मेरी जांघ पर हाथ मारा। मेरा लंड तो उन्हे देखकर पहले से ही खड़ा था और फिर ग़लती से उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया। फिर उनके हाथ का स्पर्श पाकर तो मेरा लंड और भी ज्यादा तनकर खड़ा हो गया और मैंने उनकी आखों में देखा.. उन्हे भी मेरा लंड पकड़कर बहुत अच्छा लग रहा था और उनकी आखों से साफ साफ दिख रहा था कि उन्हे अब मुझसे क्या चाहिए?

भाभी : शरमाते हुए.. चलो में अब सोने जा रही हूँ।

में : ठीक है भाभी.. शुभ रात्रि।

दोस्तों मेरा तो बहुत बुरा हाल हो रहा था और में सोच रहा था कि में अब शुरू कहाँ से करूं और इतने में स्वाती भाभी की आवाज़ आई कि राहुल मुझे डर लग रहा है.. तुम भी मेरे ही रूम में सो जाओ। फिर मैंने कहा कि ठीक है और में अंदर बेडरूम में गया.. तो मैंने देखा कि भाभी कंबल ओढ़कर बेड पर लेटी हुई थी। फिर मैंने बोला कि भाभी आप ऊपर लेट जाओ.. में सोफे पर सो जाऊंगा।

भाभी : ठीक है।

फिर मुझे उनके इतने पास होने पर भी नींद नहीं आ रही थी और करीब एक घंटे के बाद भाभी उठकर वॉशरूम चली गयी और अब मुझे नींद आने ही वाली थी कि इतने में एक बहुत ज़ोर की आवाज़ आई और मेरी नींद खुली। फिर मैंने ध्यान से सुना.. वो स्वाती भाभी की आवाज़ थी.. राहुल। में झट से उठा और जैसे ही वॉशरूम में गया.. तो भाभी वहां पर नीचे गिरी हुई थी। फिर मैंने उन्हे सहारा देकर उठाया और उन्हे अपनी गोद में उठा लिया। दोस्तों वैसे तो वो मोटी है.. लेकिन में हर रोज जिम जाता हूँ.. तो मैंने उन्हे बहुत आसानी से उठा लिया। मैंने उन्हे गांड पर हाथ लगाकर उठाया.. तो मुझे उनकी पेंटी का एहसास मेरे हाथों पर हुआ और मेरा शैतान लंड फिर खड़ा हो गया और इनके पेट पर छूने लगा। फिर मैंने उन्हे बेड पर लाकर लेटाया और उनसे पूछा कि क्या आपको कहीं चोट तो नहीं लगी? उन्होंने कहा कि जो चीज़ तुम्हे सबसे ज्यादा पसंद है। फिर में समझ गया कि इनकी गांड पर चोट लगी है और फिर मैंने भाभी से बोला कि लाओ में तेल से मालिश कर दूँ.. तो उन्होंने इशारा किया कि तेल वहाँ पर रखा हुआ है। फिर मैंने उन्हे मुहं के बल सर नीचे रखकर लेटने को कहा। उन्हे इतना दर्द हो रहा था कि उन्हे होश ही नहीं था कि जब वो मुहं के बल लेटी.. तो उनकी मेक्सी ऊपर हो गई और मुझे उनकी गांड के दर्शन हो गये.. उन्होंने लाल कलर की पेंटी पहनी हुई थी।

फिर मेरा लंड अब अपने पूरे आकार में आ गया था। फिर में उनकी गांड की मालिश करने लगा और में अपने होश खोने लगा और मैंने उनकी गांड पर एक किस कर दिया और शायद उन्हे पता चल गया था कि में क्या कर रहा हूँ और अब उनका दर्द भी ख़त्म होने लगा था। फिर मैंने उनसे बोला कि स्वाती भाभी आपकी पेंटी थोड़ा बीच में आ रही है.. तो आप इसे उतार दो। फिर उन्होंने कहा कि तुम ही उतार दो और फिर मैंने उनकी पेंटी उतारी। वाहह क्या मस्त गांड थी यार उनकी.. मेरा तो मन कर रहा था कि इसे अभी कुतिया बनाऊँ और इसकी चूत में अपना लंड घुसा दूँ। फिर मैंने अपने कपड़े फटाफट उतारे और अपने लंड को उनकी गांड पर फेरने लगा.. उन्हे भी बहुत मज़ा आ रहा था और वो पलट गयी.. लेकिन अभी भी उनकी आँखे बंद ही थी। फिर उन्होंने अपनी चूत पर अपना एक हाथ रखा और बोला कि इसमे भी दर्द है.. थोड़ा इस पर भी लगाओ ना। दोस्तों क्या चूत थी उनकी? एकदम 18 साल की लड़की तरह एकदम गुलाबी गुलाबी और छोटे छोटे बाल जैसे कि तीन दिन पहले ही शेव की हो। फिर मैंने उनकी चूत के ऊपर हाथ फेरा और स्वाती भाभी मोन करने लगी.. आआह्ह्ह्ह उह्ह्ह माँ। फिर में अब उन्हे उंगली से चोदने लगा और भाभी अपने हाथ से चादर को कसकर पकड़कर लेटी हुई थी और उनकी आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी.. आईईईईईईईईईइ ओउुुह्ह्ह्हहुउउ और अब में और भाभी 69 पोज़िशन में आ गए और में उनकी चूत चाटने लगा। फिर वो एकदम चकित हो गयी और उछल पड़ी.. शायद भैया ने कभी उनकी चूत नहीं चाटी थी और भाभी के मुहं से एकदम से चीख निकल पड़ी.. राहूल यह क्या कर रहे हो? अह्ह्ह्ह तुम बहुत अच्छे हो.. अह्ह्ह राहुल और ज़ोर से चाटो मेरी चूत को खा जाओ इसे आआह्ह्ह्हह और इतना बोलकर उन्होंने मेरा लंड अपने मुहं में ले लिया और वो बोली कि..

भाभी : कितना बड़ा है तुम्हारा.. राहुल प्लीज इसे मेरी चूत में डाल दो.. अह्ह्ह्ह उह्ह्ह।

में : मेरी जान अभी चूत तो चाटने दो.. मुझे चूत चाटना बहुत पसंद है।

फिर मैंने अपनी जीभ स्वाती की चूत में डाली और उनके चेहरे से ऐसा लग रहा था कि मानो वो जन्नत में है और फिर मैंने भाभी से पूछा कि भाभी कंडोम है क्या? तो उन्होंने बोला कि अलमारी में से ज़ाकर ले आओ। फिर में उठा और कंडोम ले लाया और मैंने भाभी से कहा कि आप मुझे पहना दो। फिर उन्होंने बहुत प्यार से मेरा लंड चूसा और उस पर कंडोम चड़ाया। उस रात मैंने भाभी की दो बार जमकर चुदाई की और उनके कहने पर एक बार गांड भी मारी ।।

धन्यवाद …

ऋतू चाची हॉट रंडी रेश्मा बनकर चुदी- 1

नमस्ते! सभी लंड वालो और चूत वालियों को मेरा लंड क्या प्रणाम। मैं हॉट सेक्स स्टोरी पर नया नहीं हूं मगर ये मेरी पहली कहानी है। बहुत सालों से कहानियाँ पढ़ रहा हूँ और हिला रहा हूँ। ऐसा एक दिन भी नहीं होता जब हॉट सेक्स स्टोरी पे लोग इन नहीं किया हो। बड़ी ही मस्त साइट है और मस्त कहानियाँ हैं। अब बकवास बंद करके माल पे आते हैं। अपनी पहली कहानी में मैं आपको अपने घर ले जाता हूं और अपनी रांड माल रितु चाची से मिलवाता हूं।

ऐसा कोई लंड ना होगा जो इस छिनाल को चोदना ना चाहे। साली रांड गजब की कातिल माल है. रितु चाची की उमर लगभाग 35 साल की होगी धमाका। रितु के दो बच्चे हैं।अब कहानी पर आता हूं। मैं 8वीं कक्षा में था जब मेरे छोटे चाचा की शादी हुई और रिउ हमारे घर पे आयी। मगर चाचा का कहीं बाहर अफेयर था और वो घर पर पड़ी इस रांड को प्यासा ही चोद के रखा था। जल्दी ही मेरी चाचीजी के साथ काफी बनने लगी और हम काफी बात करने लगे।

पर अभी तक मेरे आदमी में उसके लिए कोई ख़राब ख्याल नहीं था। एक बार मेरा एक दोस्त अर्पित आया हुआ था और उसने जब ऋतु चाची को देखा तो साला चुटिया पागल हो गया। मेरा काफी अच्छा दोस्त था तो इसलिए हम काफी फ्रैंक थे। उसने मेरेको बोला कि यार राजेश क्या जबरदस्त माल है, तेरी चाची साली रांड को पटक पटक कर चोदने में बहुत मजा आएगा।उस समय क्लास 10 में था मैं और नई नई चूत का शौक चढ़ा हुआ था।

अर्पित की बात सुनकर मेरा भी मन पलट गया और मैं भी ऋतु को अब अपनी चाची की तरफ नहीं बल्की एक चुदासी रांड की तरह देखने लगा। साली रंडी जब किचन में काम करती थी तो पसीने के कारण उसके ब्लाउज पर लाइन बन जाती थी। साली छिनाल की क्लीवेज और गठीली जवानी देख कर मेरा लंड तन जाता था।

मैंने उसकी पैंटी और ब्रा चुराना शुरू कर दिया था और चाचीजी की तस्वीरें भी खींची थीं। रात को उनकी फोटो देख कर उनकी ब्रा और पैंटी में मुँह मारता था और सुबह उनकी अलमारी में रख देता था। मेरे लंड के पानी से भरी हुई पैंटी और ब्रा पहन के वो रंडी की बच्ची घूमती थी तो मेरा लंड पागल हो जाता था और मन कर गया था कि वहीं पे लेता कर साली की कली मैं अपना लंड पेल के रुला दू हरामन को।ऐसा काफी दिन तक चलता रहा और मैं और अर्पित उसके नाम की मुथ मारते रहे। हम चाची के साथ घूमने भी जाने लगे। हम फिल्में, शॉपिंग और कई बार लंच पर जाते थे।

अब हम ऋतु चाची से काफी फ्रैंक हो गए थे मगर हमें समझ नहीं आ रहा था कि उसकी चूत तक कैसे पहुंचें। अपनी हताशा दूर करने के लिए हम रंडियां थोंक ने लागे। स्कूल के बाद हम दोनों कोठे पे जा के रंडी बजाते थे। बहुत जल्दी हमारी दोस्ती अनवर नाम के एक भदवे से हो गई। अब तक हम कक्षा 12 में पढ़ गए थे और ऋतु चाची को एक बेटा भी हो गया था। बड़े प्रेशर के बाद घर वालों के दवाब में आकर चाचा ने उसको बच्चे के लिए चोद तो दिया मगर साथ ही साथ उसकी चूत में आग भी लगा दी थी। माँ बनने के बाद उसके चूचे और गांड और फैल गई थी। अब साली रांड को देख कर हम लोगों से रहा नहीं जाता था। एक दिन अर्पित बोला: यार राजेश साला तू कब तक अपने घर का माल सदन देगा और रंडियां बजाएगा।

क्या जिंदगी भर तू अपनी रांड चाची की पैंटी में मूठ मारेगा। अब तो कुछ कर ना.मैने बोला: भाई अर्पित उस रांड को बजाना तो मेरेको भी है. अब मेरे से भी नहीं रहा जाता तू ही कोई तरकीब बता ना। फिर अचानक से अर्पित ने बोला: क्यों ना हम अनवर से मदद मांगेगे। वो साला सेक्स टेबलेट का इफ़ेक्ट लड़कियों को पटाने में माहिर है। वो जरूर कोई रास्ता निकाल लेगा। उसकी बात मेरेको समझ में आ गई। बात सच ही थी. फिर हमने सोचा कि 12वीं कक्षा की परीक्षा के बाद ये वाला काम पूरा करेगा।

परीक्षा के बाद मैं अर्पित और अनवर एक गंदे से बार मैं बैठ कर दारू पी रहे थे। तभी अर्पित ने बोला: यार अनवर भाई आपसे थोड़ी सी मदद चाहिए। बहुत ही रहस्य और महत्वपूर्ण बात है। अनवर: हां बोलो क्या होगा तुमको.साला इतना क्या महत्वपूर्ण काम है. हमने अनवर भाई को ऋतु चाची के बारे में बताया और उसकी फोटो भी दिखाई। देखता ही अनवर बोला साला तुम लोगों ने मेरेको इस रांड के बारे में पहले क्यों नहीं बताया ये तो साली मस्त छिनाल माल है। मस्त पटाखा है. अनवर भाई बोला: देखो लौंडो तुम्हारी चाची में दम है साली मस्त है।

मैं तुम लोगों की मदद कर सकता हूं लेकिन एक शर्त है मैं इस पटाखा को पहले में भुजूंगा इस की चूत मैं बजाऊंगा बाद में तुम्हें भी पक्का मौका मिलेगा।और राजेश तुम बुरा मत मानो ना मैं इस रांड से धंधा भी करवाऊंगा। आज कल ऐसी घरेलू राखैलों की डिमांड बहुत है मार्केट में। बोलो डील मंजूर है. अर्पित और मैं एक दूसरे को देखते रह गए और फिर हमने कहा मंजूर है। उसके बाद अनवर ने चाचीजी को पटाने का प्लान बना दिया।

अनवर भाई ने हमको कहा कि हमलोग रितु चाची को एक बार फिल्म के लिए ले कर आये। फिल्म के बाद अनवर भाई हमलोग से मिले। हमने उनको चाचीजी से इंट्रोड्यूस करवाया और कहा कि ये हमारे मैथ्स के टीचर हैं। मूवी के बाद बात होती होती हम दोनों ने कहा कि हमारा आज बहुत ही जरूरी काम है और हम चले गए। चाची जी और अनवर भाई शॉपिंग कर रहे थे। अनवर भाई कोई 6 इंच 5 फीट के होंगे और उनकी टैगडी बॉडी भी थी। देखने में एक बांध पहलावाएन ।

चाची जी जल्दी ही उनसे घुल मिल गई। शॉपिंग के बाद लंच करते हुए अनवर भाई ने चाची के खाने में नींद की गोली डाल दी। जैसे ही गोली असर करने लगी अनवर ने तूरंत चाची को गाड़ी में दाल के अपने कोठे पे ले लिया। हम भी उसके साथ आ गये। कोठे पे जा कर अनवर भाई ने हमको एक कैमरा दिया और वीडियो बनाने को कहा। अनवर भाई बिस्तार पर शेर की तरह कूदे और चाची जी की चुचियाँ मसलने लगे। साली क्या मस्त माल है तेरी रखेल चाची. क्या तो मैं आज माँ चोद दूँगा। बहुत दिन बाद ऐसा तगड़ा माल मिला है।

मैंने बोला चोद दो अनवर भाई चोद दो मेरी चाची को। इसकी चूत में बहुत खुजली है. मीता दो आज इसकी आग. साली के बदन ने हमारी भी जवानी को परेशान कर रखा है। मुठ मार मार के थक गए हैं अब। आज तो इस रांड को अपनी राखाइल बना दो। अब अनवर भाई जल्दी से दारू के दो पैग लगाते हुए चाची जी की चुची को मसलने लगे। उसने चाची की लाल रंग की साड़ी को उतार के साइड पे फेंक दिया और चाची के ऊपर बैठ के उनके डीप क्लीवेज को चाटने लगा। धीरे-धीरे ऋतु चाची को होश आने लगा और वो भी गरम गरम सिसकियाँ भर ने लगी थी।

अनवर भाई ने रितु चाची के ब्लाउज और ब्रा को खोल के फेंक दिया और चाची जी के बब्बो पे अपना मुंह लगा के पागल कुत्तों की तरह चुनने और चांटने लगे। एक हाथ से एक बब्बे को मसलते हुए वो दूसरे बब्बे को चूस रहा था। रितु चाची काम अग्नि में बहकते हुए तड़प ने लगी और आहीन भर ने लगी। मैं और अर्पित तो वीडियो बनाने में लगे हुए थे। मुझे अपने सपनों की रांड रितु चाची को चोदते हुए देख कर बहुत मजा आ रहा था। चाची के बब्बो को लाल करने के बाद अनवर भाई रितु चाची के होठों को अपने दांतों से चबाते हुए उनकी जीभ को छूने लगे।

ऐसा स्मूच मैंने कभी नहीं देखा था मुझे डर लगने लगा कि कहीं चाची की सांस ना रुक जाए और वो मर ना जाए। अनवर भाई को रोकना अब मुमकिन ना था। हम चाहते हैं कि रितु चाची को कोई छू न सके। अनवर भाई अपनी हर रंडी को पहले खुद चख थे बाद में अपने चमचो और कुत्तों को देते थे। आज तो वो चाची को अपने लंड की रानी बना कर ही मान ने वाले थे।

अपने स्मूच करने के बाद अनवर भाई ने चाची के पेटीकोट को ऊपर करके उनकी टांगों से खेलना शुरू कर दिया। इतने में ही चाची को अचानक से पूरा होश आ गया था। मेरी और अर्पित किट तो मोटी ही गई थी। रितु चाची ने अनवर भाई को धक्का दिया और वो पीछे हट गए। गुस्से में आकार अनवर भाई ने रितु चाची को दो कड़क झापड़ लगाये और बोला: अपनी औकात में रहकर साली रंडी तेरेको मालूम नहीं है हरामण तू किसके कोठे पे है। ज्यादा चू चा कि ए तो तेरी बॉडी भी नहीं मिलेगी।

देख तेरा भतीजा तेरेको मेरे पास लाया है। अब ये वीडियो बना रहा है. शांति से यहां का महौल गरम कर नहीं तो पूरा देश तेरी जवानी से अपना बिस्तार गरम करेगा। बेच दूंगा मैं ये वीडियो समझी। ऋतु चाची डर गई और मेरेको बोली कि राजेश तुमने ऐसा क्यों किया मेरे साथ। मैंने बोला चुप साली दो टेक कि छिनाल तेरे करण हम दोनों दोस्त रंडी चोद बन गए अब टब ही रंडी बन चुद सब से। अर्पित बोला: क्यों चाची जी बहुत गर्मी है ना आपकी जवानी में अब बेचो अपनी जवानी को इस कोठे पे।

यहां तो आपको रोजाना नए कानून मिलेंगे अपनी चूत की प्यास मिटाने को। ये सब सुनके रितु चाची रोने लगी। तब अनवर भाई ने उनको अपनी बाहों में भर के बोला। रितु डार्लिंग क्यों रो रही हो देखो हम सब के साथ मस्ती करो और ऐश करो ये रोने धोने से क्या होगा। तेरा रेट भी हाई रखूंगा मैं जैसे मर्द के साथ सोना चाहोगी वैसा ही लाऊंगा। टेंशन मत लो अब यहां से वापस जाने का कोई रास्ता नहीं है। ये बोलते बोलते उनको चाची का पेटीकोट खोल दिया और लाल रंग की उनकी पैंटी के पार से चाची जी की चूत पर उंगली घुमाना शुरू कर दिया।

चाची सारे रास्ते बंद होता देख धीरे-धीरे मस्त होने लगी और अनवर भाई के सीने में लिपटने लगी और उनकी चाटी छूने लगी। अनवर भाई ने बोला अब बनी ना तू अनवर की रांड. आ जाने मन तेरेको अब जन्नत दिखता हूं. ये कह के उनको चाची का हाथ अपने पजामे पे रखा। चाची ने बोला अनवर मियाँ ये क्या है।अनवर भाई ने बोला जाने मन ये मेरा लावड़ा है और तुम्हारा खिलोना। खेलो इसके साथ। ऋतु चाचीजी ने अनवर भाई का पजामा उतारा और उनकी चड्ढी भी उतार दी और एक सस्ती रंडी की तरह अनवर भाई का लौड़ा हिलाने लगी और उसे खेलने लगी।

अनवर भाई: और हिला मेरे लौड़े को रंडी और जोर से हिला ये तेरे नामर्द भड़वे पति का लौड़ा नहीं है। एक मर्द का लंड है. चूस इसको साली हरामन छिनाल। रितु चाची: अरे इतना भी मत जोश दिखाओ अनवर मियां. मेरी तो किस्मत की फोटो गई थी उस दिन जिस दिन मैंने इस हरामी के नपुंसक चाचा से शादी की थी। साला इनका खानदान ही नामर्दों से भरा है। इस को और इसके भड़वे दोस्त को इतनी लिफ्ट दी मैंने सालों में मुझे एक बार चोदने का दम भी ना था।

कहानी सेक्स टेबलेट का इफ़ेक्ट अगले भाग में जरी है।

ऋतू चाची हॉट रंडी रेश्मा बनकर चुदी- 2

चाची भतीजा चुदाई कहानी में पढ़ें कि आज पहली बार एक असली मर्द मिला है.दिखा दो अपनी सारी मर्दंगी. ये कह के रितु चाचीजी अनवर भाई का 7 इंच बड़ा मोटा लंड को कुत्तों की तरह चाटने लगी। अनवर भाई की आखें निकल गयीं. अनवर भाई: साली तेरे से भरी रंडी नहीं देखी है अब तक मैंने। क्या चूज़ ती है अंड ले पूरा इसको चाँद में खा जा इसको। आज टेरमैं चिकनी चूत को मेरा मुसाद लंड फाड़ दूंगा। ऋतु चाची : हाँ मेरे राजा. रितु चाची को पता नहीं क्या हो गया था। अपनी सारी शर्म खो ने के बाद हमें और किसी भी और रंडी में अब कोई फरक नहीं रह गया था।अनवर भाई: आआआह्ह्ह्ह और चूसो और जोर से देखो…।

साली रंडी बड़ी कुत्ती चीज़ है तू. आआआह्ह्ह्ह.ऋतु चाची: आ रहा है ना मजा….अनवर भाई: हां रानी हाआं…अनवर भाई चाचीजी की चड्ढी उतार ने लगे और चाची को बिल्कुल नंगा कर दिया. वो चाची जी की चूत में उंगली करने लगे। ऋतु चाची: आआह धीरे से दर्द होता है।

अनवर भाई: दर्द में ही तो मजा है जाने यार। ऋतु चाची: तेरी उंगली ने मेरा हाल ये कर दिया है तो तेरा लंड तो मुझे पागल हाय करदेगा.अनवर भाई: आज तक तूने लंड का स्वाद चखा ही कहां है. चूस इसको जोर से।अब अनवर भाई ने चाची को बिस्तार पे ले दिया और 69 पोजीशन में जा केर उनकी चूत को चाटने लगे और अपना लंड रितु चाची जी के मूंह में डाल दिया। अपनी एक उंगली उन्हें चाची जी के गांड में डाल कर हिलाना शुरू कर दी। चाची जी की हालत खराब हो गई थी।

ऋतु चाची : आआअहह…. हाऐइइइइ मेरी जवानी… साली बेकार ही हो जाती है… अगर आज आपका ये लंड नहीं मिलता। और जोर से हुसाओ उंगली. फाड़ डालो मेरी गांड को. अनवर भाई: हमारे और इस कोठे के होते हुए तेरी जवानी बेकार कैसे जाती रानी। तेरी इस चूत को तो मैं चूस चूस के बेहाल कर दूंगा और रहूंगी तेरी गांड वो तो मैं मारूंगा ही। साली छिनाल बड़ी ही मस्त आइटम है बे तू।साली कहाँ चिप थी इतने दिनों से। रितु चाची: आआहह मत रुको अब… आआह्ह्ह…. आआआह्ह्ह….अनवर भाई ने अपनी स्पीड और बढ़ा दी औरा बी वो चाची की चूत को काटने लगे और अपनी जीभ को पूरी उनकी चूत में घुसा दिया।

अनवर भाई की उंगलियाँ चाची के गांड के छेद को फाड़े जा रही थी और दूसरे हाथ से अनवर भाई चाची की गांड पर थप्पड़ लगाये जा रहे थे। अनवर भाई: और ले रंडी…आज निकलेगा तेरी मस्ती. साल्लिई एक नंबर की रांड है बे तू. रितु चाची: आआहह धीरे देखो भगवान के लिए… बहुत दर्द हो रहा है। अनवर भाई: इतना ही अगर दर्द हो रहा है तो जाके अपनी पत्नी जैसे किसी नामर्द से चुदवा रंडी।

यहां तेरी कोई नहीं सुनेगा…समझी…तेरा भगवान भी नहीं…ऋतु चाची : आआअहह ….हाआआआइई…थोड़े से तो प्यारर्र से करो ना राजा.. मैं कहीं भाग थोड़ी ना रही हूं…अनवर भाई: हाआ हाआ…साली भागे गी कहाँ हो तुम. तू अनवर भाई की रखाईल है समझी. और तेरी जैसी चिकनी रंडी को कैसे चोदना है ये मुझे बहुत दर्द से आता है।

भूल जा अब सब कुछ. आज से तू वही करेगी जो मैं बोलूंगा। समझ… बोल… समझ या नहीं..ऋतु चाची: समझ गई सब समझ गई… आआअहह… आआहह हाआआईईईईई भगवान मेरी छुट्टट…। आआअहहहहहह और्रर तेजज्ज औरररर…..येह….. हान्नन्न हन्नन्न बस्स्स ऐसे हीई…. हाआइइ आआह्ह्ह्ह….. आआह्ह्हाहा ..चाचीजी जोर से चिल्लाते हुए ठंडी हो गई। अनवर भाई का लंड अपने मुँह से निकल के चोद दिया और अपने पहले ऑर्गेज्म में पसीना पासीन हो गई।

अनवर भाई: क्यों रंडी साली हो। बस हो गई तू ठंडी. मेरे लंड को उक्सा ती है बे तू. ये ले साली छिनारर. अनवर भाई के तमाचे से चाची जी सहम गईं। मेरी और अर्पित की हालत ख़राब हो चुकी थी हम अपना लंड हिलाते हिलाते दो बार अपना माल चोद चुके थे।ऐसा भयानक सीन मैंने कभी नहीं देखा था। अनवर भाई ने रितु चाची को अपना गुलाम बना लिया था।

वो चाची को बिस्तर पे चोद के खड़े हो गए और बोले। अनवर भाई: चल रंडी खादी हो अभी बहुत काम बाकी है। तेरे को ठंडा करने नहीं आया मैं। तू आई है मेरेको ठंडा करने खड़ी हो के चूस मेरे लंड को। ऋतु चाची: थोड़ी देर रुक जाओ ना. प्लीज़ मेरे से और नहीं होगा. अनवर भाई: तेरे लिए रुकूंगा मैं। चल खड़ी हूं नहीं तो वापस मारूंगा तेरेको रंडी। रितु चाचीजी डर गई अनवर भाई का लंड मुँह में ले कर चुनने लगी।

मगर अपने पहले ऑर्गेज्म के कारण उनमें अब दम ना था और जिस तरह से अनवर भाई का लंड चूस रही थी उसे अनवर भाई ने घुसाया हो कर चाची जी को एक और थप्पड़ मारा। और अपना लंड निकाल के चाचीजी के मुँह के सामने रख दिया। अनवर भाई ने चाची जी के मूंह के ऊपर गुस्सा करना शुरू कर दिया और बोला। अनवर भाई: देख ले अपनी असली औकात. मेरा मुत है तू समझी. कल से तू मेरे से ही नहीं यहां के बाकी ग्रहको से भी चुड़ेगी। ज्यादा चू चा कि तो मार दूंगा तेरेको समझी।

साली कुतिया. तेरे जिस्म से बहुत पैसे कमाऊंगा मैं और तेरे वीडियो पर तो सारा इंडिया क्या पूरी दुनिया मूठ मारेगी। चल अब खादी हो। ऋतु चाचीजी रोते हुए अपने आप को संभाल के खड़ी हुई और अनवर भाई से माफ़ी माँग ने लगी। ऋतु चाची: मुझको माफ़ करदो। मैं भूल गई थी कि अब मैं एक रंडी हूं सिर्फ एक रंडी। जो आप बोलोगे वैसा ही होगा। आज से ये जिस्म मैं आपके हवाले करती हूं। माफ़ करदो मेरेको. अनवर भाई जोर जोर से हंसे लागे और अपना लंड हिलाते हुए बोले।

अनवर भाई: बहुत जल्दी समझ गई तेरी चाची राजेश. साली कुतिया पहले समझ जाती है तो इतनी मार ना खाती। मैं: अनवर भाई थोड़ा रहम करो ना चाची जी पर. आप इनको भले जब चाहे चोदो मगर रितु चाची से धंधा तो मत करवाओ ना।ये रंडी हमको दे दो। हम संभाल लेंगे इसको. अनवर भाई: (घुससे में) साले भदवे औकात में राह अपनी तेरा इस गली में आना बंद करवा दूंगा समझा। मेरेको मत सिखा क्या करना है. मैं: सॉरी अनवर भाई माफ़ करना, आप जैसा बोलोगे वैसा ही होगा। अनवर भाई: आजा रितु रानी अब तेरेको आगे की सैर करवाता हूँ। साला पूरा मूड खराब कर दिया तुम सब ने।

रितु चाची: हमारी नादानी को माफ करिएगा।रितु चाचीजी अनवर भाई का लंड पकड़ के उसको अब चूसने लगी। अपने हाथों से अनवर भाई के दांतों और थैलियों को मसलते हुए चाची भतीजा चुदाई कहानी में वो उनका लंड का सुपाड़ा अपने मूंह में डाल के चूसने लगी। अनवर भाई भी ढकेल लगा ने लगे और चाची जी के मूंह को चोदने लगे। उनके चाँद से आन्हह निकल ने लगी।

चाची जी ने अनवर मियां को खुश करने के लिए अपनी एक उंगली उनकी गांड में घुसा दी। अनवर भाई जैसे पागल हो गए और चाची जी के बालों को पकड़कर खींचने लगे और जोर से अपना लंड ढकाल ने लगाए। चाची जी की सांस फूलने लगी थी। मैं और अर्पित शांति से डर के करण वीडियो पर बैन लगाते रहे। अनवर भाई: अब जा के बनी ना तू रंडी. और चूसो साली छिनाल… हांन्न… और जोर से…अनवर भाई पूरी मस्ती में आने के बाद चाची जी को उनके कमर के बाल पटक दिया और उनकी दोनों टैंगो को ऊपर कर के उनकी चूत पे अपना चंद्रमा वापस रख के चाटने लगी।

चाची की चीख निकल ने लगी थी. वो जिस तरह से चाची जी की चूत चाट रहे थे और गांड में अपनी उंगली पेल रहे थे चाचीजी की हालत वापस खराब होने लगी थी। अपने हाथ को रितु चाची के गांड के छेद से निकल के वो रितु चाची के मूंह में डालने लगे। चाची जी उनकी उंगलियों का चैट ने लगी और आहें भरने लगी। अब चाची जी से और नहीं रहा जा रहा. ऋतु चाची: अनवर मियां चोद दो मुझे अपने लंड से. मार दो मेरी चूत को. कर दो मेरी चूत को अपने लंड से पकड़ो। और मत तड़पायो मैं मर जाऊँगी।

अब नहीं रहा जाता. अल्लाह के लिए बुझा दो मेरी आग. आज फाड़ दो मेरी चूत को।अनवर भाई: देख कैसे तड़प रही है तू मेरे लंड के लिए। हाआआ हाआ… ऐसी ही रखील अच्छी लगती है मेरेको जिसे अपनी औकात मालूम हो… चाहिए ना मेरा लंड तेरेको हांन… चाहिए ना… बोल ना… मेरेको बोल ना… साली बोल… रितु चाची: हां नहीं चाहिए मेरेको आप का लंड चाहिए।

मैं आपकी राखाइल हूं. दे दो मेरेको अपना लंड दे दो. भगवान के लिए बुझा दो मेरी आग. अनवर भाई ने चाची जी की चूत को चाटना बंद कर दिया और चाची जी के बाल पकड़ के खींच के उनको कुटिया बना दिया। . चाची जी तड़पने लगी और कराहेन भरने लगी। लंड रगड़ते रगड़ते अनवर भाई ने एक ही झटके में पूरे जोर से अपना लंड रितु चाची जी की चूत के अंदर पेल दिया।

रितु चाची जी जोर से चिल्लाने लगी मगर अनवर भाई ने बिना रुके एक के बाद एक जोरदार धक्के लगाने लगे। इतना मोटा लुंबा लंड चाची जी की छोटी सी नरम चूत को फाड़ते हुए जैसे ही अंदर घुसा चाची जी की जान निकल गई। अनवर भाई रितु चाची के बालों को और जोर से खींचते हुए अपना लंड अंदर बहार करने लगे और दूसरे हाथ से कभी चाची जी की गांड को मारते और कभी उनकी चुचियों को दबाते। चाची जी सिहर रही थी और चुदाई के कारण चिल्ला रही थी।

उनकी चिकनी चूत से कहाँ निकल रहा था। अनवर भाई: ले रंडी ले…मेरा लंड बहुत आग थी ना तेरे जिस्म में। देख मेरा लंड कैसे चोद रहा है तेरी चूत को.ऋतु चाची : आआअह्ह्ह्हह्ह धीरेर्री…. मेरी चूत फट जाएगी…. आआआअह्हह्हह…..अनवर भाई: साली छिनार तेरी चूत फाड़कर हाय ये मेरा लंड शांत होगा आज। देख रंडी आज मैं तेरी चूत को बिना कंडोम के चोद रहा हूँ। यही औकात है तेरी और तेरी चूत की। मेरे लंड का माल जब तेरी चूत में जायेगा तो तू मेरे नजायज़ बहुत की रांड माँ बनेगी। शायद मेरे बच्चे के करण हाय तेरे खानदान में कोई मरद पैदा होगा।

ऋतु चाची: आआअहह बहुत दर्द हो रहा हैईईई…। हाय ऐसा ना करो अनवर भाई….मैं एक शादी शुदा औरत हूं मेरे बारे में कुछ तो सोचो। अनवर भाई जोर जोर के झटके लगते हुए बोले: अनवर भाई: साली तू मेरी रखील है. तू पालगी मेरे बच्चे को अपने पति का बच्चा बना के। समझी अब तेरा घर ये कोठा है और तू मेरी रखील है भूल जा अपने पति को।

अनवर भाई ने रितु चाचीजी की कमर को पकड़ा और उनको गोदी में उठा के खड़े होगे। अन्होने चाची जी को पलट दिया और अपने लंड पर बिठा दिया। अब वो खड़े खड़े उनको चोद रहे हैं. अपने पति ऋतु चाची जी के होंठों पर रख कर वो चाची जी की चूत में खड़े-खड़े अपना लंड पेलने लगे। उन दोनो के बदन की गर्मी से पूरा कर्म गरम हो गया था। उन दोनो का बदन पसीने से भर गया था और वो चाची जी को चूमते और पेलते जा रहे थे। चाची जी की चूत भी अब मस्त हो गई थी।

रितु चाची जी जोर से चिल्लाने लगी मगर अनवर भाई ने बिना रुके एक के बाद एक जोरदार धक्के लगाने लगे। इतना मोटा लुंबा लंड चाची जी की छोटी सी नरम चूत को फाड़ते हुए जैसे ही अंदर घुसा चाची जी की जान निकल गई। अनवर भाई रितु चाची के बालों को और जोर से खींचते हुए अपना लंड अंदर बहार करने लगे और दूसरे हाथ से कभी चाची जी की गांड को मारते और कभी उनकी चुचियों को दबाते। चाची जी सिहर रही थी और चुदाई के कारण चिल्ला रही थी।

उनकी चिकनी चूत से कहाँ निकल रहा था। अनवर भाई: ले रंडी ले…मेरा लंड बहुत आग थी ना तेरे जिस्म में। देख मेरा लंड कैसे चोद रहा है तेरी चूत को.ऋतु चाची : आआअह्ह्ह्हह्ह धीरेर्री…. मेरी चूत फट जाएगी…. आआआअह्हह्हह…..अनवर भाई: साली छिनार तेरी चूत फाड़कर हाय ये मेरा लंड शांत होगा आज। देख रंडी आज मैं तेरी चूत को बिना कंडोम के चोद रहा हूँ। यही औकात है तेरी और तेरी चूत की। मेरे लंड का माल जब तेरी चूत में जायेगा तो तू मेरे नजायज़ बहुत की रांड माँ बनेगी। शायद मेरे बच्चे के करण हाय तेरे खानदान में कोई मरद पैदा होगा।

ऋतु चाची: आआअहह बहुत दर्द हो रहा हैईईई…। हाय ऐसा ना करो अनवर भाई….मैं एक शादी शुदा औरत हूं मेरे बारे में कुछ तो सोचो। अनवर भाई जोर जोर के झटके लगते हुए बोले: अनवर भाई: साली तू मेरी रखील है. तू पालगी मेरे बच्चे को अपने पति का बच्चा बना के। समझी अब तेरा घर ये कोठा है और तू मेरी रखील है भूल जा अपने पति को।

अनवर भाई ने रितु चाचीजी की कमर को पकड़ा और उनको गोदी में उठा के खड़े होगे। अन्होने चाची जी को पलट दिया और अपने लंड पर बिठा दिया। अब वो खड़े खड़े उनको चोद रहे हैं. अपने पति ऋतु चाची जी के होंठों पर रख कर वो चाची जी की चूत में खड़े-खड़े अपना लंड पेलने लगे। उन दोनो के बदन की गर्मी से पूरा कर्म गरम हो गया था। उन दोनो का बदन पसीने से भर गया था और वो चाची जी को चूमते और पेलते जा रहे थे। चाची जी की चूत भी अब मस्त हो गई थी।

चाची भतीजा चुदाई कहानी अगले भाग में जरी है।

साली चंचल की कुंवारी चूत की सील तोड़ी और बच्चा दिया

मैं संजू एक बार फिर आप लोगों के सामने अपनी आपबीती लेकर आ गया हूँ। सबसे पहले सभी चूत वालियों और लंड वालों को मेरा नमस्कार। मेरे बारे में आप जानते ही हैं – मैं 38 साल का शादीशुदा मर्द हूँ और अब तक करीब 50 से ज्यादा चूतें चोद चुका हूँ (रेगुलर वाली गिनती अलग है)। ये वाकया बिल्कुल ताज़ा है और मैं चाहता हूँ कि इसे पढ़कर आप भी अपनी चूत और लंड का पानी रगड़-रगड़ कर निकालें।

पिछले महीने ऑफिस के काम से मैं दिल्ली गया था। वहाँ मेरे रिश्ते के बड़े भैया रहते हैं, मैं उनके घर ही रुका। काम तो दो-तीन दिन का था, लेकिन मेरी रिटर्न फ्लाइट दो दिन बाद की थी। काम एक ही दिन में निपट गया, तो अगले दिन मैं फ्री था। भैया-भाभी दोनों जॉब पर चले गए थे। मैं अपने रूम में कुछ पढ़ रहा था कि अचानक डोरबेल बजी। सोचा कोई कोरियर होगा। दरवाज़ा खोला तो सामने भाभी की सबसे छोटी बहन चंचल खड़ी थी।

मुझे देखकर वो चौंकी, फिर पहचान गई। मैंने बताया कि दीदी और जीजा घर पर नहीं हैं, शाम को आएँगे। उसे अंदर आने को कहा, सोफे पर बिठाया, पानी-चाय दी और खुद उसके सामने बैठ गया। उसका चेहरा उदास था, आँखें नम। चंचल करीब 27 साल की है – भाभी से कहीं ज्यादा सुंदर, बॉडी एकदम मस्त। 34-28-34 का फिगर, 5’3″ हाइट, पेट बिल्कुल फ्लैट, चूतड़ गोल-गोल उभरे हुए, चुचियाँ सुदौल और कसी हुईं, कमर पतली। कुल मिलाकर स्वर्ग की अप्सरा लगती थी। दो साल पहले उसकी शादी हुई थी।

मैंने पूछा, “क्या हुआ चंचल? इतनी उदास क्यों लग रही हो?” पहले तो वो चुप रही, फिर बोली, “दीदी कब आएँगी?” मैंने कहा, “शाम छह बजे।” फिर पूछा, “कोई ज़रूरी काम था?” वो कुछ देर सोचती रही, फिर खुल गई। उसका पति तलाक देना चाहता है। सास ने बच्चा न होने की वजह से झगड़ा करके उसे मायके भेज दिया और तलाक का नोटिस भिजवा दिया। असल में कमी उसके पति में है – वो कर ही नहीं पाता। लेकिन घरवाले मानने को तैयार नहीं। वो हर वक्त तलाक की टेंशन और अंदर की सेक्स की आग से जल रही थी।

मैंने धीरे से पूछा, “तेरी असली प्रॉब्लम क्या है?” वो बोली, “बच्चा नहीं हो रहा, इसलिए तलाक दे रहे हैं।” मैंने कहा, “डॉक्टर को दिखाओ ना।” वो शर्मा कर बोली, “मुझमें कोई कमी नहीं है संजू जी। बच्चा तो उंगली से थोड़े न होगा?” मैं समझ गया। फिर बोली, “वो चाहते हैं तो होता ही नहीं।” मैंने कहा, “तो तलाक लेकर दूसरी शादी कर लो।” वो बोली, “पापा की औकात नहीं दूसरी शादी कराने की, और मुझे उनसे बदला भी लेना है। जानबूझकर एक कुंवारी लड़की की ज़िंदगी बर्बाद की है। लेकिन बिना बच्चे के वो मुझे वापस नहीं लेंगे।”

ये सुनकर वो रोने लगी। बोली, “मेरी तकदीर ही खराब है संजू जी, कोई रास्ता नहीं दिख रहा। आखिर में ज़हर खाकर जान दे दूँगी।” मैं उठा, उसके पास गया। उसके सिर पर हाथ फेरा, गालों से आँसू पोंछे। उफ्फ… कितने मुलायम गाल थे। मैं यूँ ही सहलाते-सहलाते उसे अपनी तरफ खींच लिया। फिर खड़ा किया और बोला, “परेशान मत हो, कोई न कोई रास्ता निकल आएगा।”

उसे दिलासा देने के लिए मैंने उसे बाँहों में ले लिया। वो भी भावुक होकर और ज़ोर से लिपट गई। मेरे हाथ उसकी पीठ पर, फिर चूतड़ों पर फिसलने लगे। नरम-नरम उभरे हुए चूतड़… और उसकी सख्त चुचियाँ मेरे सीने में दबने लगीं। मैंने उसके माथे पर किस किया। वो और कसकर लिपट गई और कान में बोली, “संजू जी, एक बात कहूँ?” मैंने कहा, “बोलो।” वो बोली, “आज मुझे सच में आपकी ज़रूरत है। मेरी मुसीबत का एक ही रास्ता दिख रहा है – आप मुझे बच्चा दे दो।”

मैं चौंका, “ये क्या कह रही हो? तुम मेरे भाई की साली लगती हो।” वो बोली, “हिम्मत करके इतनी बड़ी बात आपसे कह दी। जीजा जी तो दीदी को भी माँ नहीं बना पाए। तुम्हारे दो बच्चे हैं… बस एक मुझे भी दे दो। अगर तुमने मना किया तो मैं किसी बाहर वाले से कर लूँगी, बदनामी होगी। मेरी ज़िंदगी का सवाल है संजू जी।”

वो फिर रोने लगी। मैंने उसे चुप कराने के लिए ज़ोर से लिपटा लिया, पीठ सहलाई, माथा चूमा। और यहीं से सब शुरू हो गया। वो पागलों की तरह मुझे किस करने लगी – मुँह पर, गालों पर। उसके लाल, रसीले होंठ देखकर मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए। पहले नरम-नरम किस, फिर चूसने लगा। वो आँखें बंद कर लीं। लंबा किस चला, दोनों की साँसें तेज़ हो गईं। जब होंठ छोड़े तो उसके होंठ और लाल हो गए थे। वो कसकर लिपटकर मेरे सीने में सिर छुपा लिया।

गरम किस से मेरा लंड खड़ा हो गया। वो मेरी पीठ सहलाते हुए दूसरा हाथ आगे लाई और लंड पर रख दिया। लुंगी के अंदर हाथ डालकर लंड बाहर निकाला। मेरा मोटा, तगड़ा लंड देखकर उसकी आँखों में चमक आ गई। “ओह माँ… इतना लंबा… इतना मोटा… कितना सख्त है!” उसने दोनों हाथों से पकड़ा और अचानक झुककर लंड चूम लिया। लंड फनफना उठा। वो कान में बोली, “संजू जी, अब मत तड़पाओ… जल्दी आ जाओ, बर्दाश्त नहीं हो रहा।”

मैं भी पूरा गरम था। उसे भैया-भाभी के बेडरूम में ले गया। पहले साड़ी उतारी, फिर ब्लाउज़। ब्रा खोलते ही वो शर्मा गई, चुचियों पर हाथ रख लिया। मैंने धीरे से हाथ हटाया, चुचियों को चूमा, हथेली से दबाया। वो सिसकारी, “इश्ह…” मैंने निप्पल जीभ से चाटा, फिर मुँह में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। वाह… क्या मस्त चुचियाँ थीं! लगता था उसके निकम्मे पति ने कभी इनका प्यार नहीं किया। थोड़ी देर चूसते ही उसकी शर्म भाग गई। वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी, “संजू जी जल्दी कीजिए… आज लग रहा है मैं औरत बन जाऊँगी… उफ्फ आपने मेरे अंदर आग लगा दी है… मैं मर जाऊँगी!”

उसकी आँखें मस्ती से लाल हो गई थीं। उसने मेरा हाथ पकड़कर पेटीकोट के ऊपर से चूत पर रख दिया। मैंने नाड़ा खोला, पेटीकोट नीचे खींचा। वो शर्म से पलट गई। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। मैंने उसे आगे झुकाया। उसकी फूली हुई, गदराई गोरी चूत पीछे की तरफ उभर आई। चूत के गुलाबी होंठों से रस की बूँदें टपक रही थीं। एक भी बाल नहीं – एकदम साफ, गोरी-गोरी चूत। मैंने चूत पर किस किया तो वो सीधी हो गई।

मैं घुटनों के बल बैठ गया। टाँगें फैलाईं और चूत का दाना चूसने लगा। दाना धीरे-धीरे सख्त होकर बाहर निकला। मैंने होंठों के बीच लिया, चूसते हुए बाहर खींचा और छोड़ा – कई बार। उसकी चूत से रस का झरना बहने लगा। वो चूतड़ मेरे मुँह पर दबाकर कराह रही थी, “आह्ह… ओह्ह… संजू जी… ये क्या कर दिया… पहली बार मेरी चूत की प्यास महसूस हो रही है… मैं मर जाऊँगी इस आनंद से… और… और…”

मैंने उसके चूतड़ दोनों हाथों से पकड़े और रस भरी चूत को पागलों की तरह चाटने लगा। उसकी चूत की प्यारी-प्यारी खुशबू मेरे दिमाग में चढ़ गई। मैं दीवाना होकर चूत और आसपास के हिस्से को चूमने-चाटने लगा। बीच-बीच में जीभ निकालकर रानों को भी चाटता। वो मस्ती से भरकर बोली, “हाय राजा… जीभ से चाटो ना… अब मत तड़पाओ… मेरी चूत को चाटो… जीभ अंदर डाल दो… जीभ से चोदो!”

उसकी नशीली चूत की खुशबू ने मुझे पूरी तरह पागल बन दिया। मैंने उसे बेड पर बिठाया, खुद ज़मीन पर। उसकी जाँघें फैलाईं, कंधों पर रखीं और जीभ से चूत के होंठ चाटने लगा। वो मस्ती से बड़बड़ाने लगी और चूतड़ आगे खिसकाकर चूत मेरे मुँह से सटा दी। उसके चूतड़ हवा में लटक रहे थे। मैंने जीभ पूरी की पूरी चूत में ठेल दी और अंदर की लाल दीवारों को सहलाने लगा। वो तिलमिला उठी, चूतड़ उचकाकर मेरी जीभ पर चूत दबाने लगी।

“हाय संजू जी… क्या मज़ा आ रहा है… अब जीभ अंदर-बाहर करो… चोदो राजा… जीभ से चोदो मुझे… तुम ही मेरे असली सैयां हो… पहले क्यों नहीं मिले… अब सारी कसर निकालूँगी… दो साल से तड़प रही हूँ… चोदो मेरी चूत को!”

मुझे भी जोश चढ़ आया। मैंने तेज़ी से जीभ अंदर-बाहर करने लगा। वो नीचे से कंबर उचकाकर मुझे चोद रही थी। मैंने जीभ कड़ी करके स्थिर कर ली और सिर आगे-पीछे करके चोदने लगा। उसका मज़ा दोगुना हो गया। वो ज़ोर-ज़ोर से चूतड़ उचकाते हुए बोली, “और जोर से संजू जी… आज मैं तुम्हारी हो गई… ज़िंदगी भर तुमसे चुदवाऊँगी… आज मुझे गर्भवती कर दो!”

वो झड़ने वाली थी। ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाते हुए चूत मेरे चेहरे पर रगड़ने लगी। मैं पूरी तेज़ी से जीभ लपलपाकर चाट रहा था। जब जीभ उसकी बच्चेदानी से टकराई तो उसका बाँध टूट गया। उसने जाँघों में मुझे जकड़ लिया, चूत मेरे मुँह से चिपका दी। चूत का पानी पिचकारी मारकर निकला – दो-तीन बार – मेरे चेहरे पर बहने लगा। मैंने चूत के दोनों होंठ मुँह में दबाकर उसका अमृत पीने लगा। ये उसकी ज़िंदगी का पहला ऑर्गेज़्म था।

चूत चाटने से वो पूरी पागल हो गई। मेरे सिर के बाल पकड़कर मुझे ऊपर खींच लिया। अब मैंने उसे बेड पर लिटाया – चूतड़ बाहर की तरफ, पैर लटकते हुए। उसके पैर अपनी कमर पर उठाए और लंड को चूत के सूराख पर रगड़ा। चूत एकदम कुंवारी लग रही थी – गुलाबी होंठ चिपके हुए, छेद टाइट। सुपारा चूत पर रखा तो उसका बदन काँपने लगा। बोली, “जल्दी घुसाओ संजू जी… अब रहा नहीं जा रहा… अंदर चींटियाँ रेंग रही हैं।”

मैंने कहा, “तेरी चूत बहुत टाइट है, थोड़ा दर्द होगा… सहन करोगी?” वो बोली, “डाल दो… दर्द की परवाह मत करो… आज पहली बार इतनी चुदास महसूस कर रही हूँ।” मैं खुश हो गया। चूत पहले से गीली थी, फिर भी थूक लगाकर लंड पर मला और धक्का मारा। सुपारा अंदर गया। वो चीखी, “आह्ह… धीरे… कितना मोटा है… चीर गई…”

मैं उसके ऊपर लेट गया, होंठ चूसने लगा। एक मिनट बाद तेज़ धक्का मारा – आधा से ज्यादा लंड अंदर। वो ज़ोर से चीखी, “हाय मर गई… बहुत दर्द… निकालो!” लेकिन मैंने पैरों में कैंची डाल रखी थी। फिर किस करके पूछा, “थोड़ा और है बस।” वो बोली, “पहली बार है ना इसलिए धीरे…” मुझे सरप्राइज़ हुआ। वो बोली, “संजू जी, मैं आज तक कुंवारी हूँ। उनका कभी खड़ा होता ही नहीं था। थोड़ा-बहुत हुआ भी तो बाहर ही झड़ जाता था।”

मेरा दिल बल्लियों उछल पड़ा – आज एक शादीशुदा लेकिन कुंवारी चूत की सील टूटने वाली है। लंड अंदर नहीं जा रहा था – सील मोटी हो गई थी। मैंने किस और बातों में उलझाकर मौका देखा और पूरी ताकत से आखिरी धक्का मारा। लंड उसकी कुंवारी चूत को फाड़ता हुआ पूरा अंदर, बच्चेदानी तक पहुँच गया। वो तड़पी, आँखें बाहर, ज़ोर की चीख – “आईईईई… माँ… मर गईईई!” मुझे धकेलने की कोशिश की लेकिन मैंने कसकर पकड़ रखा था।

वो दर्द से रोने लगी। मैंने चेहरा चूमा, चुचियाँ चूसीं, चूतड़ सहलाए। पाँच मिनट बाद दर्द कम हुआ। मैंने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। धीरे-धीरे उसे भी मज़ा आने लगा। बोली, “थोड़ा जोर से…” मैंने रफ्तार बढ़ाई और आखिर में पूरा हमाच-हमाच कर चोदने लगा। वो टाँगें ऊपर करके चुदवाने लगी, पागलों की तरह बोली, “हाय संजू जी… आज पूरा दिन कसकर चोद दो… मैं आपकी हो गई… आज ही मेरे पेट में अपना बच्चा डाल दो… और जोर से…”

वो झटके से लिपट गई और चीखी, “आह्ह संजू जी… मैं मर गई… मेरी चूत से पेशाब निकलेगा… निकाल लो…” मैंने कहा, “निकलने दो” और कसके धक्के मारे। उसका गरम रस लंड पर लगा। वो बुरी तरह झड़ रही थी, मुझे चिपककर चूतड़ झटके दे रही थी। ज़िंदगी में पहली बार लंड से चुदकर झड़ी।

मैंने रफ्तार थोड़ी धीमी की ताकि देर तक टिकूँ। उसे चूमा, चुचियाँ चूसीं और फिर शुरू। धीरे से पूछा, “चंचल, मुझे से चुदवाने में बुरा तो नहीं लगा ना?” वो मुझे और कसकर जकड़कर नीचे से चूतड़ उचकाते हुए बोली, “नहीं संजू जी… मेरी जवानी तुम्हारे नाम हो गई। जब चाहो, जहाँ चाहो डुबकी लगा लो। चुदाई में इतना मज़ा है, मुझे पता ही नहीं था। आज तुमने मुझे औरत बनाया… मोटे लंड से मेरी चूत का दरवाज़ा खोला… और मुझे बच्चा भी दोगे।”

ये सुनकर मैं और जोश में आ गया। कमर हिलाकर चोदने लगा। वो भी हर शॉट का जवाब कंबर उचकाकर दे रही थी। कमरे में फिर फच-फच की मधुर आवाज़ गूँजने लगी। वो टाँगें ऊपर करके मेरी कमर पर कस लीं और ज़ोर-ज़ोर से चूतड़ उचकाकर चुदवाने लगी। मैंने स्पीड बढ़ाई। उसकी चूत ने फिर पानी छोड़ा, फच-फच और तेज़। वो हाँफते हुए बोली, “मैं तो गई… तुम्हारी रानी गई… उई माँ क्या ज़ालिम लौड़ा है… चोद डाला मुझे… मैं गईईई!”

मैं भी नहीं रुका। उसकी चूत इतनी गरम थी कि 4-5 तेज़ धक्कों बाद मैंने आखिरी धक्का मारा – सुपारा बच्चेदानी को धक्का देता हुआ और लंड ने पिचकारी मारते हुए ढेर सारा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया। मैं भी झड़ गया और चूमते हुए लंड अंदर तक डाले उसके ऊपर लेट गया।

वो कसकर लिपट गई और कान में बोली, “अभी बाहर मत निकालना… बच्चा होने के लिए पूरा पानी बच्चेदानी में जाना ज़रूरी है।” मैं लंड अंदर डाले ही लेटा रहा। फिर हाथ नीचे ले जाकर चूत टटोली – हाथ पर खून लगा। वो बोली, “अब विश्वास हो गया ना? मैंने आपको बिना चुदी चूत दी है।” मैंने कहा, “हाँ चंचल, आज से तुम मेरी जान हो, मेरी रानी। तुमने अपना कुंवारा शरीर मुझे सौंपा।”

15-20 मिनट बाद उठा। उसकी चूत ने सारा पानी सोख लिया था। थोड़ा बाहर आया तो खून से लाल। मैंने कहा, “अजीब बात है – तुम्हारी दीदी यानी मेरी भाभी की सील भी इसी बेड पर मैंने तोड़ी थी, शादी के चार दिन बाद। आज तुम्हारी भी। दोनों बहनों को एक ही बेड पर औरत बनाया।” वो हँसकर बोली, “बहुत अच्छा हुआ। इसलिए दीदी शादी के नौ महीने बाद माँ बनीं… अब नौ महीने बाद मैं भी बनूँगी।”

उस दिन मैंने उसे शाम चार बजे तक पाँच बार चोदा। हम दोनों नंगे ही लिपटे रहे। बाद में तीन साल तक लगातार चोदकर दो बच्चे पैदा किए। पहली बार में ही वो प्रेग्नेंट हो गई। किसी बहाने पति को बुलाया, वो कर तो कुछ नहीं पाया लेकिन बच्चे की खबर पर खुश होकर ले गया। उसे अपनी कमज़ोरी का पता था, इसलिए चुप रहा। अब वो ससुराल में खुश है, इलाज भी करा लिया। उसे शक तो है कि दोनों बच्चे मेरे हैं – शक्ल मेरी जैसी है।

अब वो मुझे अपने यहाँ नहीं आने देता, चंचल को भी नहीं भेजता। लेकिन चंचल मौका निकालकर मुझसे मिलती है। महीने में 2-3 दिन मेरे साथ रहती है और मैं उसे 4-5 बार चोद डालता हूँ।

 

आंटी की चूत चुदाई

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मेरा नाम दीपक हैं  मैं कानपुर रहने वाला हूँ। मैं 21 साल का हूँ, बी कॉम कर रहा हूँ! यह मेरी पहली सेक्स की कहानी है। मेरे मोहल्ले में एक आंटी किराये पर रहने आयी थी उनका नाम कविता है उनकी उम्र लगभग 30 साल है, फिगर 38-30-38 है, हालांकि वे सांवली हैं फिर भी … Read more

मेरी पहली चुदाई मेरी कजिन के साथ

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सभी भाई और भाभियों को मेरा नमस्कार। मैं रमन भोपाल का रहने वाला हूं। मेरे औजार की बड़ाई नहीं करूंगा, पर ये 6 इंच लंबा और 2.5 इंच मोटा है, और किसी को भी संतुष्ट कर सकता है। मुझे भरे शरीर वाली भाभियां और लड़कियां अच्छी लगती है। आज आपके सामने अपने सेक्स के एक्सपीरियंस … Read more

एक रात सगी मामी के साथ

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दोस्तो मेरा नाम आयुष है और मेरा उम्र 20 साल है। मेरे मामी का नाम अर्पना है। मामी सरकारी स्कूल की शिझिका है। उम्र 35 के आस पास है। देखने मै जवान सेक्सी हॉट औरत लगती है। मेरे मामी को देखकर कोई भी मुठ मार सकता है इतनी हॉट है। कहानी पे आते है मामी … Read more

मामी की चूत की प्यास बुझाई

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हॉट मामी वांट सेक्स कहानी में मेरे मामा के एक्सिडेंट से वे असमर्थ हो गए थे. मैं उनकी सेवा के लिए उनके पास रहने लगा. चुदाई के बिना मामी की वासना बढ़ रही थी. मैंने उसका हल किया। फ्रेंड्स, मेरा नाम मुकुंद है। मैं जबलपुर का रहने वाला हूँ। मेरे परिवार में मैं मेरी मम्मी … Read more

शादी में मेरे लंड का भाग्य खुला

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देसी विलेज चूत का मजा मुझे मिला जब मैं एक गाँव में शादी में गया था. वहां मैंने दो लड़कियां चोदी. एक तो खाई खेली थी, दूसरी कुंवारी थी, वह हमारी चुदाई देख कर गर्म हो गयी थी. दोस्तो, मैं अपनी दीदी की ननद की शादी में उनके गांव गया हुआ था. वहां उनके बहुत … Read more

मम्मी से ज्यादा मुझे चोदते हैं मेरे पापा

आज मैं आपको अपनी अन्तर्वासना की कहानी यानी बाप बेटी की सेक्स कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर सुनाने जा रही हूँ। ये मेरी पहली सेक्स कहानी है। मैं पहली बार चुदी भी हूँ। और मेरी चुदाई घर में मेरे पापा ने की है। तो पूरी कहानी आपको अब बिना रुके सूना रही रही। आज … Read more

पत्नी को उसके बड़े भाई, चाचा और चचेरे भाई ने चोदा

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मेरी पत्नी के बड़े भाई और उनकी पत्नी क्रमशः 49 और 42 वर्ष के हैं। उनके मामा 62 वर्ष के हैं, और उनके चचेरे भाई 28 वर्ष के हैं। मेरी पत्नी की उम्र अभी 37 वर्ष है और मैं 40 वर्ष का हूं। वह 5 फीट लंबी, लगभग 67 किलोग्राम वजन की, गोरी और गोल-मटोल … Read more

पापा ने दीदी की चूत चोद कर भोसड़ा बनाई

दोस्तो, कैसे हैं आप लोग! यह सेक्स कहानी मेरे पापा और मेरी बहन की चुदाई की कहानी है. ऋचा दीदी की इस देसी फॅमिली फक स्टोरी की शुरुआत में ही आपका लंड खड़ा हो जाएगा. मेरे पापा, मेरी बहन को बहुत समय से चोद रहे हैं तो मेरी बड़ी बहन एकदम रंडी बन गयी हैं. … Read more

आखिर पापा से मजा ले ही लिया मैंने

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम शालिनी है और में दिल्ली की रहने वाली हूँ। मेरे घर में मेरे मम्मी, पापा है। में मेरे बाप की एक ही औलाद हूँ। मुझे मेरे माँ बाप ने बड़े प्यार से बड़ा किया है। आज मेरी उम्र 18 साल की है, लेकिन मुझे देखकर कोई कह नहीं सकता कि मेरी … Read more

जीजा ने मुझे पटा कर चुदाई का मजा लिया

सपना की उम्र 27 साल, और उसका फिगर साइज 32-30-34 है। सपना की शादी को हुए 5 साल हो गए थे। उसका एक बेटा भी है। उसकी छोटी बहन (चाचा की लड़की ) की शादी हुई। लड़के का नाम राजेश था, जो एक ड्राइवर था। शादी के बाद से ही उसको सपना पसंद आने लगी … Read more

Papa mujhe room me chodne aaye

दोस्तो मैं अंकिता, अपने घर में मैं सब चुदवा चुकी हूँ. मैंने जब जवानी की दहलीज पर कदम रखा तब मैंने पहली बार अपने पापा को मम्मी की चुदाई करते देखा तब से मैं हमेशा अपने पापा से चुदवाने के बारे में सोचती रहती थी. मैं मेरे घर में और ससुराल में भी सबसे चुद … Read more

मैंने अपनी सगी भाभी को चोदा

दोस्तों आज मैं आप सब के सामने देवर भाभी की एक रियल कहानी लेके आया हूं। मैं उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूं, और मैं अभी ग्रेजुएशन कर रहा हूं। मेरी उम्र 20 साल है। दोस्तों ये एक रीयल कहानी है, मेरी और मेरी भाभी के बीच हुई चुदाई की। वैसे तो मैं चूत के … Read more