दोस्तों! मैं राजीव दिल्ली का लड़का हूँ। जिंदगी में कुछ पल ऐसे आ जाते हैं जो सब कुछ बदल देते हैं। वो पल मेरी जिंदगी को पहले से बिल्कुल अलग बना गए। आज मैं आपको अपनी उस अनुभव की पूरी कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जो मुझे दुनिया की सबसे गहरी और मीठी खुशी दे गई। ये सब शुरू हुआ हमारे मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के पहले दिन से।
क्लास शुरू होने से पहले मैं और मेरे हॉस्टल वाले दोस्त कैंपस घूमने निकले। पूरा कैंपस देखने के बाद हम मेन गेट के पास बैठ गए। नजरें उन लड़कियों पर घूम रही थीं जो कॉलेज आ रही थीं। हर कोई अपनी जगह अच्छी थी, लेकिन अचानक एक रिक्शा गेट पर रुका। उसमें से एक लड़की उतरी – नीली स्किन टाइट जींस और टाइट फिट लाल स्लीवलेस टी-शर्ट पहने। उसकी पीठ मेरी तरफ थी। लंबे खुल्ले बाल, कमर पतली, हिप्स गोल-गोल – फिगर करीब 34-32-35। रिक्शा वाले को पैसे देकर वो मुड़ी। जैसे बादलों भरे आसमान में अचानक पूरा चाँद निकल आए। चेहरा इतना प्यारा – भूरी आँखें, तेज नाक, रसीले होंठ। गोरा रंग, गुलाब की कली जैसी नाजुक सुंदरता। मैं उसे घूरता रह गया। उसकी छातियाँ गोल और भरी-भरी, टी-शर्ट और जींस में ब्रा और पैंटी की लाइन साफ दिख रही थी। जब वो चलने लगी तो उसके नितंबों का लहराता हुआ हिलना… वाह! मेरी जाँघों के बीच का सामान तुरंत खड़ा हो गया और सलाम ठोकने लगा। वो भीड़ में गायब हो गई, लेकिन मेरा दिल उसके उन गोल नितंबों के बीच खो गया।
लेक्चर की घंटी बजी। हम क्लास में घुसे। देखा तो वही लड़की हमारी क्लास में बैठी थी। नाम था रश्मि। मुंबई से आई थी। हमारे नाम के पहले अक्षर एक जैसे थे, इसलिए हम एक ही असाइनमेंट ग्रुप में थे। ग्रुप में दो और लड़कियाँ और एक लड़का था। कुछ ही दिनों में हम पाँचों अच्छे दोस्त बन गए। साथ में शहर घूमते, मस्ती करते। रश्मि बहुत एक्स्ट्रोवर्ट थी – हमेशा कॉलेज के किसी न किसी फंक्शन में व्यस्त। पढ़ाई में भी तेज थी, इसलिए ग्रुप की लीडर बन गई। उसके साथ समय बिताना मुझे हमेशा गर्म और एनर्जेटिक महसूस होता। उसका बदन मुझे हमेशा खींचता। मौका मिलते ही मैं उसके ब्लाउज में झाँकता, “अनजाने” में उसकी छातियों या पीठ को छू लेता। वो कभी गुस्सा नहीं करती। बस प्यारी सी डिंपल मुस्कान दे देती।
अन्युअल गेट टूगेदर से एक दिन पहले की बात है। रश्मि दौड़ती हुई मेरे पास आई और बोली, “राजीव, ग्रुप असाइनमेंट घर भूल आई हूँ। आज ही सबमिट करना है।” वो अपने फ्लैट में रहती थी, कॉलेज के पास ही, अपनी फ्रेंड साक्षी के साथ। मैंने कहा, “साक्षी को फोन करके मँगवा लो।” उसने बताया कि साक्षी घर चली गई है फैमिली फंक्शन के लिए, और वो खुद फैशन शो ऑर्गनाइज करने में बिजी है। आखिर मैं मान गया। उसने चाबी दे दी। मैं बाइक लेकर उसके फ्लैट पहुँच गया। पहले भी ग्रुप वर्क के लिए आया था, इसलिए फ्लैट की सेटिंग पता थी – टू बीएचके, हल्के रंग की दीवारें, आरामदायक।
उसके रूम में घुसा। असाइनमेंट टेबल पर रखा था। उठाया और जाने लगा, तभी बेड के नीचे बाल्टी नजर आई। उसमें कुछ कपड़े थे। निकाला तो – काला नाइट सूट, सफेद ब्रा और गुलाबी पैंटी। शायद कल की। मेरा दिल जोर से धड़का। मुझे लड़कियों के अंडरगारमेंट्स का हमेशा से क्रेज रहा है। ब्रा उठाई, चूमने लगा। पसीने की हल्की सी महक। फिर पैंटी उठाई – उसकी गंध इतनी कामुक कि मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया। अचानक डोर बेल बजी। मैंने सब बाल्टी में रख दिया, वैसा ही छोड़ दिया और दरवाजा खोलने गया।
रश्मि खड़ी थी। “क्या हुआ? क्यों वापस आ गई?” पूछा मैंने। बोली, “लेक्चर कैंसल हो गया। और फैशन शो का रिहर्सल भी ट्रांसफॉर्मर खराब होने से रुक गया।” हम लिविंग रूम के सोफे पर बैठ गए। वो थकी हुई लग रही थी। आँखें बंद करके आराम करने लगी। उसकी आर्मपिट्स पसीने से पूरी भीगी हुई थीं। टी-शर्ट से ब्रा का एक स्ट्रैप बाहर झाँक रहा था। मैं उसकी छातियों को घूर रहा था। बीच में छोटे-छोटे उभार साफ दिख रहे थे।
थोड़ी देर बाद उसने आँखें खोलीं और मुस्कुराते हुए बोली, “राजीव, तू बैठ यहाँ। मैं फ्रेश हो जाती हूँ और फ्रिज से कुछ फ्रूट्स ले आती हूँ।” वो बेडरूम में चली गई। मैं टीवी ऑन कर दिया। रिमोट खराब चल रहा था। उसी बीच बाथरूम का दरवाजा बंद हुआ और हल्की सी “प्श्श्श्श्श” की आवाज आने लगी। वो पेशाब कर रही थी। वो आवाज सुनकर मेरा लंड और भी तन गया। थोड़ी देर बाद वो बाहर आई और बाथरूम में नहाने चली गई। कुछ मिनट बाद लिविंग रूम में आई तो देखा – गहरे नीले नाइट सूट में, बाल खुल्ले, कंधों पर पानी की बूँदें चमक रही थीं। हाथ में फ्रूट्स की प्लेट। पास बैठ गई और मुझे ऑफर किया।
मैं फ्रूट्स खाते-खाते चैनल बदलने लगा। अचानक रिमोट पूरी तरह बंद। उसी चैनल पर एक बहुत हॉट रोमांटिक सीन चल रहा था – हीरोइन और हीरो गहरे प्यार में, एक-दूसरे को छू रहे थे, किस कर रहे थे, कपड़े उतर रहे थे। मैं शर्म से चैनल बदलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन रिमोट काम नहीं कर रहा था। मैं उठा कि टीवी के पास जाकर बदलूँ। रश्मि ने मेरा हाथ पकड़ लिया और नरम स्वर में बोली, “अरे राजीव, इतना घबरा क्यों रहा है? हम एक ही उम्र के हैं… हमारी इच्छाएँ भी एक जैसी हैं। इसमें शर्माने वाली क्या बात है?” उसकी आवाज में इतनी हिम्मत थी कि मैं वापस बैठ गया। हम दोनों ने पूरा सीन देखा। मेरा लंड पैंट में तंबू बना चुका था। रश्मि भी उत्तेजित हो गई थी – होंठ थोड़े खुले, पैर की उँगलियाँ बार-बार हिल रही थीं।
मैंने धीरे से समझाया, “देख रश्मि, सिर्फ किताबी ज्ञान से काम नहीं चलेगा। प्रैक्टिकल पता न हो तो शादी में पार्टनर को खुश नहीं रख पाएगी। अगर सावधानी बरती जाए – कंडोम वगैरह – तो कोई खतरा भी नहीं।” वो सोचने लगी। फिर बोली, “तू सही कह रहा है… लेकिन कौन देगा मुझे ये प्रैक्टिकल नॉलेज? और अगर किसी को पता चल गया तो?” मैंने उसका हाथ पकड़ा, आँखों में देखा और बोली, “मैं दूँगा… अगर तुझे मुझ पर भरोसा है तो एक मौका दे।” वो मुस्कुराई, थोड़ा लाल हो गई और धीरे से बोली, “ओके…”
मैंने उसे अपनी बाहों में खींच लिया। उसने सिर मेरी छाती पर टिका दिया। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “रश्मि डार्लिंग, सबसे पहली बात – धीरे-धीरे, बिना जल्दबाजी के। तू यहीं बैठ। मैं कंडोम ले आता हूँ, फिर शुरू करते हैं।” वो सहमति में सिर हिला दी। मैं पास की मेडिकल शॉप से कंडोम और एक्स्ट्रा सेफ्टी के लिए टैबलेट्स ले आया।
लौटा तो रश्मि ने दरवाजा खोला। देखकर मैं हैरान रह गया – पीली साड़ी, स्लीवलेस ब्लाउज, माथे पर लाल बिंदी। इंडियन लुक में उसे पहले कभी नहीं देखा था। अंदर घुसा, दरवाजा लॉक किया, उसे जोर से अपनी बाहों में भर लिया और बोला, “आज स्वर्ग में रंभा भी तुझे देखकर जल रही होगी!” उसकी छातियाँ मेरी छाती से सटी हुई थीं। मैंने उसे लंबा, गहरा किस किया। वो साँस लेते हुए बोली, “हनी… मैं तेरी हूँ। जो करना है कर…”
मैंने उसे गोद में उठाया, बेडरूम ले गया। बेड पर लिटाया और उसके ऊपर लेट गया। कपड़ों के ऊपर से ही उसके हर हिस्से को किस करने लगा – पैरों की उँगलियों से शुरू करके घुटनों, जाँघों, कमर, पेट, छातियों, आर्मपिट्स, कंधों, गर्दन, गालों, होंठों और माथे तक। वो हल्के-हल्के कराहने लगी, “आह्ह्ह… राजीव…” उसका बदन गर्म हो रहा था, साँसें तेज। मैंने उसकी साड़ी खोल दी। अब वो पीली पेटीकोट और ब्लाउज में थी। ब्लाउज के हुक खोले, उतारा। अंदर ब्लैक नेटेड ब्रा। दोनों हाथों से ब्रा के ऊपर से ही छातियों को दबाने लगा। उसकी कराह बढ़ गई। फिर पेटीकोट का नादा खोला, नीचे सरका दिया। अब वो सिर्फ ब्लैक पैंटी में थी।
अब वो भी पूरी तरह शामिल हो गई। मेरी शर्ट उतारी, पैंट का हुक खोलकर नीचे सरका दिया। मैं अंडरवियर में, वो ब्रा-पैंटी में। मैंने ब्रा का हुक खोला। उसकी गुलाबी निप्पल्स वाली भरी-भरी छातियाँ बाहर आ गईं। मैंने उन्हें चूसना शुरू किया – जोर-जोर से, जीभ घुमाते हुए। वो मेरे बालों में उँगलियाँ फेर रही थी, दूसरा हाथ मेरे अंडरवियर में डालकर मेरे लंड को सहला रही थी। छातियाँ लाल और गर्म हो गईं।
फिर मैंने उसकी पैंटी नीचे सरका दी। उसकी साफ शेव्ड, प्यारी सी चूत सामने थी। वो शरमा कर दोनों हाथों से चेहरा छुपा लिया। मैंने हाथ हटाए, प्यार से चूम लिया। उँगलियों से धीरे-धीरे उसकी चूत को सहलाने लगा। कुछ ही देर में वो गीली हो गई। मैंने एक उँगली अंदर डाली। वो कराह उठी, “आह्ह्ह… राजीव… और गहरा…” अब वो पूरी तरह तैयार थी।
मैंने अपना अंडरवियर उतारा। मेरा लंड पूरा खड़ा। वो उसे देखकर मुस्कुराई, थोड़ा शरमाई, लेकिन डरी नहीं। मैंने कंडोम चढ़ाया। उसे पीठ के बल लिटाया, दोनों जाँघें उठाईं, घुटनों के बल बैठ गया। उसने खुद अपना हाथ बढ़ाया, मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत के मुहाने पर रख दिया। मैंने धीरे से, लेकिन मजबूती से धक्का दिया। वो आह भरकर बोली, “आह्ह्ह… राजीव… अंदर आ गया…” कोई दर्द नहीं, सिर्फ गर्मी और खुशी की लहर। मैं रुक गया, उसे समय दिया। फिर धीरे-धीरे स्टार्ट किया। वो भी कमर हिलाने लगी।
“हाँ… और तेज… राजीव… बहुत अच्छा लग रहा है…” उसकी छातियाँ लहरा रही थीं। मैंने रफ्तार बढ़ाई। २०-२५ स्टोक्स के बाद मैं झड़ गया। कंडोम में पूरा भर गया। मैं उसके ऊपर ही लेट गया। कुछ देर बाद निकाला, कंडोम फेंका और उसके पास लेट गया। वो मुझे जकड़कर बोली, “राजीव… आज तूने मुझे जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी दे दी। थैंक यू डार्लिंग… तू मेरा सेक्स गुरु है!” मैंने उसके होंठ चूमे और बोला, “स्वीटहार्ट, तेरे लिए कुछ भी!”
उसके बाद हम दोनों थककर सो गए।
इस घटना के बाद रश्मि कॉलेज में मुझे “गुरु” कहकर पुकारने लगी। कोई पूछता तो हम एक-दूसरे को देखकर शरारती मुस्कान देते। उसके बाद हमने उसके फ्लैट में कई पोजीशन्स में बार-बार किया – कभी मिशनरी, कभी डॉगी, कभी वो ऊपर। कभी कॉलेज की लेडीज बाथरूम में, कभी बस में छुप-छुपकर, कभी जंगल में ट्रिप के दौरान। जब रश्मि नहीं होती तो उसकी रूममेट साक्षी के साथ भी मजा लेता। जम्मू जाता तो पड़ोस की आंटी मनीषा और स्कूल फ्रेंड गौरी को भी नहीं छोड़ता।







