तीन चुतो का आतंक छा गया

हाय दोस्तों, मेरा नाम आकाश सिंह है। मैं एक आम सा लड़का हूँ, लेकिन मेरी जिंदगी में सेक्स का तड़का हमेशा लगा रहता है। रोज की तरह आज भी मैं अपनी गर्लफ्रेंड स्नेहा को चोदने के लिए बेकरार था। स्नेहा मेरी क्लासमेट है, हम दोनों 12वीं क्लास में साथ पढ़ते हैं। वो क्या माल है यार! बला की खूबसूरत, गोरी-चिट्टी स्किन, लंबे काले बाल, और उसकी चूचियाँ तो 36 इंच की हैं – एकदम टाइट और रसीली, जैसे दो बड़े-बड़े आम। उसके कूल्हे ऐसे हिलते हैं कि देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए। मैं रोज उसके बारे में सोचकर मुठ मारता हूँ, लेकिन आज कुछ स्पेशल होने वाला था।

मैं अभी अपने कमरे में लेटा हुआ था, आँखें बंद करके स्नेहा की मादक छवि का रसपान कर रहा था। कल्पना में मैं उसे नंगा करके उसकी चूत में अपना लंड पेल रहा था, उसकी सिसकारियाँ सुन रहा था – “आह आकाश… जोर से… फाड़ दो मेरी चूत को…” तभी मेरा फोन बजा। मैंने सोचा स्नेहा का होगा, रोज की तरह। मैंने जल्दी से उठाया, लेकिन उधर से आवाज आई परी की – स्नेहा की बुआ की लड़की। परी को मैं जानता था, वो एकदम सेक्सी टाइप की बिंदास लड़की है। उसकी बॉडी क्या कमाल की है – लंबी टाँगें, पतली कमर, और चूचियाँ 34 इंच की, लेकिन इतनी उभरी हुई कि ब्रा से बाहर निकलने को बेताब। वो हमेशा टाइट कपड़े पहनती है, और उसकी आँखों में वो शरारत भरी चमक जो कहती है, “आजा, चोद मुझे।”

परी ने हँसते हुए कहा, “क्या यार आकाश… रोज स्नेहा को ही चोदोगे या हमारा भी कभी नंबर आएगा? मैं यहाँ तेरे लिए तड़प रही हूँ, और तू है कि सिर्फ स्नेहा-स्नेहा करता रहता है।” इतना सुनते ही मेरा लंड तनतना गया, जींस के अंदर उछलने लगा। मैंने मजाक में कहा, “जब कहो जानेमन… तब चोद दूँ! तू बोल तो सही, मैं अभी आ जाऊँ?” वो बोली, “तो आ जा आज… हो जाए ‘खाट-कबड्डी’! स्नेहा के घर पर, सब सो गए हैं। हम तीनों इंतजार कर रही हैं।” तीनों? मैंने सोचा, कौन तीनों? लेकिन मैंने ‘हाँ’ बोलकर फोन काट दिया। दिल में सोचा, साली मजाक कर रही होगी, लेकिन क्या पता, मौका मिल जाए।

मैंने जल्दी से बाइक निकाली और स्नेहा के घर पहुँच गया। सर्दी का महीना था, रात के 11 बज चुके थे, घर में सब सो चुके थे। मैंने रोज की तरह स्नेहा को फोन किया, उसने खिड़की खोली और मुझे अंदर आने का इशारा किया। मैं चुपके से दीवार फाँदकर अंदर घुस गया। कमरे में घुसते ही नजारा देखकर मेरी आँखें फटी रह गईं। परी और उसकी बहन प्रतीक्षा बेड पर लेटी हुई ब्लू-फिल्म देख रही थीं। स्क्रीन पर कोई हॉट सीन चल रहा था – एक लड़का दो लड़कियों को चोद रहा था। दोनों बहनें अपनी चूत सहला रही थीं, उनकी पैंटी गीली हो चुकी थी। स्नेहा भी वहाँ थी, तीनों सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं। मुझे देखते ही वे मुस्कुरा उठीं।

प्रतीक्षा को देखकर मैं चौंक गया। वो परी की छोटी बहन है, शायद 18 साल की, एकदम कुंवारी लग रही थी। उसकी बॉडी क्या मस्त थी – गोरी स्किन, 32 इंच की चूचियाँ, पतली कमर और गोल-गोल गांड। मैंने प्रतीक्षा से कहा, “अरे तुम भी आई हुई हो… क्या बात है!” वो शर्मा कर हँसने लगी। तभी परी बोली, “तुम्हें हमारी चूत फाड़ने के बाद ही यहाँ से जाने का मौका मिलेगा, आकाश। आज तेरी किस्मत चमक गई है।” परी एक नंबर की रंडी टाइप है, लेकिन इतनी सेक्सी कि उसका नाम लेकर न जाने कितने लड़के मुठ मारते होंगे। उसकी चूत हमेशा गीली रहती है, और वो चुदाई में एक्सपर्ट है।

मैंने हँसते हुए कहा, “तो ठीक है, एक साथ चुदोगी या एक-एक करके? मैं तैयार हूँ!” इतना कहते ही स्नेहा और परी अपनी टॉप उतारने लगीं। प्रतीक्षा शर्मा रही थी, शायद ये उसकी पहली चुदाई थी। ये सोचकर मेरा लंड और टाइट हो गया – एक कुंवारी चूत मिलने वाली थी! मैं सीधे प्रतीक्षा के पास गया। स्नेहा और परी अब सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं, और वे मुझसे चिपक गईं। स्नेहा ने मेरी शर्ट खींची, परी ने मेरी जींस पर हाथ फेरा। ब्लू-फिल्म न्यूड गर्ल्स ग्रुप वाक देखकर उनकी चूत पहले से ही गीली थी, हवा में सेक्स की महक फैल रही थी।

मैंने प्रतीक्षा को बाहों में लिया और उसके पतले, रस भरे होंठों को चूमने लगा। उसके होंठ इतने नरम थे, जैसे गुलाब की पंखुड़ियाँ। मैंने धीरे-धीरे उसके कपड़े उतारे – पहले टॉप, फिर ब्रा। उसकी चूचियाँ बाहर निकलीं, गुलाबी निप्पल कड़े हो चुके थे। मैंने उन्हें मुँह में लिया और चूसने लगा, “उम्म्म… आह…” वो सिसकारी भरने लगी। दो मिनट में उसे पूरा नंगा कर दिया। मैंने उसे बेड पर सिरहाने टिका कर उसकी टाँगें फैलाईं और अपनी जीभ उसकी चूत पर लगा दी। उसकी कुंवारी बुर का स्वाद नमकीन था, हल्की खुशबू मुझे पागल कर रही थी। चूत के दाने को चाटते हुए मैंने अंगुली अंदर डाली, वो तड़प उठी।

स्नेहा और परी ने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए। तीनों की चूत पर एक भी बाल नहीं था – सबने शेव किया हुआ था, चिकनी और चमकदार। मुझे चूत चाटते देख वे दोनों प्रतीक्षा के अगल-बगल बैठ गईं। मैं बारी-बारी तीनों की चूत चाटने लगा – स्नेहा की रसीली, परी की टाइट, और प्रतीक्षा की कुंवारी। उनकी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं – “आह… चाटो… जोर से…” वे एक-दूसरे की चूचियाँ दबा रही थीं, चूत सहला रही थीं। अब मुझसे रहा न गया। मैंने अपनी जींस खोली और अपना 8 इंच लंबा, मोटा लंड निकाला। वो तनकर खड़ा था, जैसे लोहे की रॉड। मैंने परी के मुँह में पेल दिया। वो ‘सुडुप-सुडुप’ करके चूसने लगी, जैसे आइसक्रीम। मैंने कपड़े उतारते हुए उसके मुँह को चोदा।

फिर प्रतीक्षा की बारी। वो मेरे सुपाड़े को जीभ से चाटने लगी, पहली बार था लेकिन क्या मस्त चूस रही थी। मजा आ रहा था। अब स्नेहा ने लिया, उसके मुँह में देते हुए मैंने परी के बाल पकड़े और तीनों को एक साथ लगाया – लंड के दोनों तरफ स्नेहा और परी के होंठ, और सामने प्रतीक्षा का मुँह। मैं पेलने लगा, सुपारा सीधे प्रतीक्षा के गले तक। कमरा “आह… उह… फच्च… खच्च” की आवाजों से भर गया। मस्ती में मैं प्रतीक्षा के मुँह में ही झड़ गया। उसने वीर्य थूक दिया, लंड चिपचिपा हो गया।

मैं बेड पर लेट गया। परी मेरे लंड पर चढ़ गई, हाथ से पकड़कर चूत में घुसेड़ा और ऊपर-नीचे करने लगी – “आह… क्या मोटा है तेरा… फाड़ देगा…” स्नेहा मेरे मुँह पर चूत रखकर बैठ गई, मैं चाटने लगा। एक हाथ से प्रतीक्षा की चूत में अंगुली डाल दी, वो टाँगें फैलाकर बैठी थी। परी की सिसकारियाँ तेज हो गईं। फिर जगह बदली – स्नेहा लंड पर बैठी, परी मुँह पर। मैं प्रतीक्षा को उंगली से चोदता रहा। अब प्रतीक्षा की बारी। उसका कौमार्य तोड़ने के लिए मैंने उसे फिर गर्म किया। बेड पर लिटाया, स्नेहा और परी उसकी चूचियाँ सहलाने लगीं। मैं ऊपर लेटकर जीभ उसके मुँह में डाली, वो बेतहाशा चूसने लगी।

फिर उसकी चूचियों को चूसा, निप्पल काटे – “उम्म्म… आकाश… और…” वो गर्म हो गई। नाभि चूमते हुए चूत पर जीभ लगाई, दाने को चाटा। चूत से पानी बह रहा था। स्नेहा और परी उसके होंठ चूम रही थीं। अब मैंने लंड का सुपारा रगड़ा, वो तड़पी। हल्का दबाव डाला, वो चिल्लाई। हाथ पकड़े, होंठ दबाए, और जोरदार ठाप लगाई। सुपारा अंदर, फिर पूरा लंड – कौमार्य चीर गया। आँसू आए, खून निकला। मैं रुका, फिर धीरे-धीरे ठापें लगाईं। 10-15 ठापों बाद साफ किया, फिर चुसवाया। अब दोबारा डाला, वो गांड उछालकर साथ देने लगी – “आह… मजा आ रहा है… जोर से…”

20 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद वो झड़ी, बदन अकड़ गया। मैं भी उसकी चूत में झड़ गया। हम शिथिल पड़े रहे। लेकिन स्नेहा और परी कहाँ मानने वाली थीं। उन्होंने रम की बोतल निकाली, मुझे नीट पिलाई, खुद पी। सिगरेट जलाई। परी बोली, “लगा ले सुट्टा और मेरी चूत पर चढ़ जा हरामी!” मदहोशी में मैंने दोनों को खूब चोदा – डॉगी स्टाइल, मिशनरी, सब। परी की गांड मारी, स्नेहा की चूत चाटी। प्रतीक्षा भी अब शामिल हो गई, तीनों ने मिलकर मुझे चोदा। रात भर चुदाई चली, सुबह तक मैं निढाल हो गया। क्या रात थी न्यूड गर्ल्स ग्रुप वाक यार, तीन चूतों का आतंक छा गया!